Chapter 7वैश्वीकरण

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व्यवस्था: पहले मूल अवधारणाएँ, फिर कारण, फिर तीन प्रभाव, फिर भारत, फिर प्रतिरोध, और अंत में भ्रम-युग्मों की सूची। ★= अवश्य याद रखने योग्य · ! = यहीं भूल होती है पाठ्यपुस्तक के शब्द उद्धरण-चिह्नों में दिए गए हैं।


भाग 1 — मूल अवधारणाएँ

पदEnglishअर्थ
★★वैश्वीकरणGlobalization“एक अवधारणा के रूप में वैश्वीकरण की बुनियादी बात है — प्रवाह।”
★★प्रवाहFlowsचार: “विश्व के एक हिस्से के विचारों का दूसरे हिस्सों में पहुँचना; पूँजी का एक से ज्यादा जगहों पर जाना; वस्तुओं का कई-कई देशों में पहुँचना और उनका व्यापार तथा बेहतर आजीविका की तलाश में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोगों की आवाजाही।”
★★विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ावWorldwide interconnectedness“यहाँ सबसे ज़रूरी बात है ‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’ जो ऐसे प्रवाहों की निरंतरता से पैदा हुआ है और कायम भी है।”
★★बहुआयामी अवधारणाMultidimensional concept“इसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अवतार हैं और इनके बीच ठीक-ठीक भेद किया जाना चाहिए।” ! “यह मान लेना ग़लत है कि वैश्वीकरण केवल आर्थिक परिघटना है”
★विषम प्रभावUneven impact“यह कुछ समाजों को बाकियों की अपेक्षा और समाज के एक हिस्से को बाकी हिस्सों की अपेक्षा ज्यादा प्रभावित कर रहा है।” → इसलिए “सर्व-सामान्य निष्कर्ष निकालने से परहेज करें।”

भाग 2 — कारण

पदअर्थ
★प्रवाहों की गति और प्रसार का धरातलसमकालीन वैश्वीकरण की ‘नयी बात’ — “ये दोनों बातें मौजूदा वैश्वीकरण को अनूठा बनाती हैं।”
★★प्रौद्योगिकी — ‘अपरिहार्य कारण’“हालाँकि वैश्वीकरण के लिए कोई एक कारक जिम्मेवार नहीं, फिर भी प्रौद्योगिकी अपने आप में एक अपरिहार्य कारण साबित हुई है।”
★तीन आविष्कारटेलीग्राफ, टेलीफोन और माइक्रोचिप — “इन्होंने विश्व के विभिन्न भागों के बीच संचार की क्रांति कर दिखायी है।”
★★छपाई और राष्ट्रवाद“शुरू-शुरू में जब छपाई (मुद्रण) की तकनीक आयी थी तो उसने राष्ट्रवाद की आधारशिला रखी।” — और आज “प्रौद्योगिकी का प्रभाव हमारे सोचने के तरीके पर पड़ेगा।”
! तकनीक की सीमा“संचार-साधनों की तरक्की और उनकी उपलब्धता मात्र से वैश्वीकरण अस्तित्व में आया हो — ऐसी बात नहीं।”
★★जुड़ाव की चेतना“यहाँ ज़रूरी बात यह है कि विश्व के विभिन्न भागों के लोग अब समझ रहे हैं कि वे आपस में जुड़े हुए हैं।” — उदाहरण: बर्ड फ्लू और सुनामी

भाग 3 — राजनीतिक प्रभाव

पदअर्थ
★★तीन पहलू“इस सवाल का जवाब देते समय हमें कम से कम तीन पहलुओं का ध्यान रखना होगा।” — क्षमता में कमी · प्रधानता बरकरार · ताकत में इजाफा
★राज्य की क्षमता में कमी“वैश्वीकरण के कारण राज्य की क्षमता यानी सरकारों को जो करना है उसे करने की ताकत में कमी आती है।”
★★कल्याणकारी राज्यWelfare state — “पूरी दुनिया में कल्याणकारी राज्य की धारणा अब पुरानी पड़ गई है।”
★★न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्यMinimalist state — “राज्य अब कुछेक मुख्य कामों तक ही अपने को सीमित रखता है, जैसे कानून और व्यवस्था को बनाये रखना तथा अपने नागरिकों की सुरक्षा करना।”
★★बाज़ार — प्रमुख निर्धारक“लोक कल्याणकारी राज्य की जगह अब बाज़ार आर्थिक और सामाजिक प्राथमिकताओं का प्रमुख निर्धारक है।”
★बहुराष्ट्रीय निगमMultinational corporations — “पूरे विश्व में… अपने पैर पसार चुके हैं और उनकी भूमिका बढ़ी है।” → “सरकारों के अपने दम पर फ़ैसला करने की क्षमता में कमी”
★★प्रधानता बरकरार“राजनीतिक समुदाय के आधार के रूप में राज्य की प्रधानता को कोई चुनौती नहीं मिली है और राज्य इस अर्थ में आज भी प्रमुख है।” और — “राज्य अभी भी महत्त्वपूर्ण बने हुए हैं।”
★★ताकत में इजाफा“वस्तुत: कुछ मायनों में वैश्वीकरण के फलस्वरूप राज्य की ताकत में इजाफा हुआ है।” — कारण: अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से नागरिकों के बारे में सूचनाएँ। निष्कर्ष: “नई प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप राज्य अब पहले से ज्यादा ताकतवर हैं।”

भाग 4 — आर्थिक प्रभाव

पदअर्थ
★IMF और WTOअंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व व्यापार संगठन — ! पर “वैश्वीकरण को इतने संकीर्ण नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए”
★★सही कसौटी“किसे वैश्वीकरण से सबसे ज्यादा फायदा हुआ और किसे सबसे कम। यह भी देखने की ज़रूरत है कि वैश्वीकरण के कारण किसने नुकसान उठाया।”
! स्वैच्छिक बनाम जबरन प्रवाह“कुछ आर्थिक प्रवाह स्वेच्छा से होते हैं जबकि कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और ताकतवर देशों द्वारा जबरन लादे जाते हैं।”
★★वीजा-नीति“विकसित देश अपनी वीजा-नीति के जरिए अपनी राष्ट्रीय सीमाओं को बड़ी सतर्कता से अभेद्य बनाए रखते हैं ताकि दूसरे देशों के नागरिक… उनके नागरिकों के नौकरी-धंधे न हथिया लें।”
★एकसार नीति, अलग परिणाम“हर जगह एक समान नीति अपना लेने का मतलब यह नहीं होता कि हर जगह परिणाम भी समान होंगे।”
★★सामाजिक सुरक्षा कवचSocial safety net — “कुछ सांस्थानिक उपाय… ताकि जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं उन पर वैश्वीकरण के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।” ! आलोचना — “यह बात अव्यावहारिक है और इतना भर उपाय पर्याप्त नहीं होगा”
★★पुन:उपनिवेशीकरणRe-colonisation — “कुछ अर्थशास्त्रियों ने आर्थिक वैश्वीकरण को विश्व का ‘पुन:उपनिवेशीकरण’ कहा है।”
★समर्थकों का तर्क“इससे समृद्धि बढ़ती है और ‘खुलेपन’ के कारण ज्यादा से ज्यादा आबादी की खुशहाली बढ़ती है”; “आर्थिक वैश्वीकरण अपरिहार्य है और इतिहास की धारा को अवरुद्ध करना कोई बुद्धिमानी नहीं।”
★★मध्यमार्गी समर्थक“वैश्वीकरण ने चुनौतियाँ पेश की हैं और सजग-सचेत होकर पूरी बुद्धिमत्ता से इसका सामना किया जाना चाहिए।”
★पारस्परिक निर्भरताInterdependence — “‘पारस्परिक निर्भरता’ की रफ्तार अब तेज हो चली है।”

भाग 5 — सांस्कृतिक प्रभाव

पदअर्थ
★वैश्वीकरण घर में भी“हम घर में बैठे हों तब भी इसकी चपेट में होते हैं। हम जो कुछ खाते-पीते-पहनते हैं अथवा सोचते हैं — सब पर इसका असर नज़र आता है।”
★★सांस्कृतिक समरूपताCultural homogenisation — ! “इसका यह अर्थ नहीं कि किसी विश्व-संस्कृति का उदय हो रहा है। विश्व-संस्कृति के नाम पर दरअसल शेष विश्व पर पश्चिमी संस्कृति लादी जा रही है।”
★प्रभुत्वशाली संस्कृति“राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभुत्वशाली संस्कृति कम ताकतवर समाजों पर अपनी छाप छोड़ती है और संसार वैसा ही दीखता है जैसा ताकतवर संस्कृति इसे बनाना चाहती है।”
★★मैक्डोनॉल्डीकरणMcDonaldisation — “विभिन्न संस्कृतियाँ अब अपने को प्रभुत्वशाली अमरीकी ढर्रे पर ढालने लगी हैं।”
! खतरा किसके लिए“चूँकि इससे पूरे विश्व की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर धीरे-धीरे खत्म होती है इसलिए यह केवल गरीब देशों के लिए ही नहीं बल्कि समूची मानवता के लिए खतरनाक है।”
★★“संस्कृति जड़ नहीं होती”“यह मान लेना एक भूल है कि वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव सिर्फ नकारात्मक हैं। संस्कृति कोई जड़ वस्तु नहीं होती। हर संस्कृति हर समय बाहरी प्रभावों को स्वीकार करते रहती है।”
★बर्गर का उदाहरण“बर्गर मसाला-डोसा का विकल्प नहीं है इसलिए बर्गर से वस्तुत: कोई खतरा नहीं है। इससे हुआ मात्र इतना है कि हमारे भोजन की पसंद में एक चीज़ और शामिल हो गई है।”
★★जीन्स और कुर्ते का उदाहरण“नीली जीन्स भी हथकरघा पर बुने खादी के कुर्ते के साथ खूब चलती है… मज़ेदार बात तो यह है कि इस अनूठे पहरावे को अब उसी देश को निर्यात किया जा रहा है जिसने हमें नीली जीन्स दी है। जीन्स के ऊपर कुर्ता पहने अमरीकियों को देखना अब संभव है।”
★★सांस्कृतिक वैभिन्नीकरणCultural heterogenisation — “वैश्वीकरण से हर संस्कृति कहीं ज्यादा अलग और विशिष्ट होते जा रही है। इस प्रक्रिया को सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण कहते हैं।” ! “इसका मतलब यह नहीं कि संस्कृतियों के मेलजोल में उनकी ताकत का सवाल गौण है”
!! वर्चस्व का सांस्कृतिक अर्थ! पाठ इसे ‘पढ़ चुके हैं’ मानकर आगे बढ़ता है, पर वह अध्याय हटा दिया गया है। भरपाई: जब किसी शक्ति के विचार, मूल्य और जीवन-शैली इतने सामान्य लगने लगें कि उनका विकल्प ही सोचा न जा सके — यहाँ सहमति बल से नहीं, आकर्षण से पैदा होती है

भाग 6 — भारत

पदअर्थ
! औपनिवेशिक भूमिका“ब्रिटेन के साम्राज्यवादी मंसूबों के परिणामस्वरूप भारत आधारभूत वस्तुओं और कच्चे माल का निर्यातक तथा बने-बनाये सामानों का आयातक देश था।”
★संरक्षणवादProtectionism — “दूसरे पर निर्भर रहने के बजाय खुद सामान बनाया जाए”; “दूसरों देशों को निर्यात की अनुमति नहीं होगी ताकि हमारे अपने उत्पादक चीजों को बनाना सीख सकें।”
! संरक्षणवाद की कीमत“कुछ ज़रूरी क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, आवास और प्राथमिक शिक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया गया”; “आर्थिक-वृद्धि की दर धीमी रही।”
★★1991 के सुधार“वित्तीय संकट से उबरने और आर्थिक वृद्धि की ऊँची दर हासिल करने की इच्छा से भारत में आर्थिक-सुधारों की योजना शुरू हुई।” — व्यापार और विदेशी निवेश पर बाधाएँ हटीं
★★अंतिम कसौटी“अंतिम कसौटी ऊँची वृद्धि-दर नहीं बल्कि इस बात को सुनिश्चित करना है कि आर्थिक बढ़वार के फायदों में सबका साझा हो ताकि हर कोई खुशहाल बने।”

भाग 7 — प्रतिरोध

पदअर्थ
★★वामपंथी आलोचना“मौजूदा वैश्वीकरण विश्वव्यापी पूंजीवाद की एक ख़ास अवस्था है जो धनिकों को और ज्यादा धनी (तथा इनकी संख्या में कमी) और गरीब को और ज्यादा ग़रीब बनाती है।” और “राज्य के कमजोर होने से गरीबों के हित की रक्षा करने की उसकी क्षमता में कमी आती है।”
★★दक्षिणपंथी आलोचनाराजनीतिक — राज्य के कमजोर होने की चिंता; “कम से कम कुछ क्षेत्रों में आर्थिक आत्मनिर्भरता और ‘संरक्षणवाद’ का दौर फिर कायम हो” · सांस्कृतिक — “परंपरागत संस्कृति की हानि होगी और लोग अपने सदियों पुराने जीवन-मूल्य तथा तौर-तरीकों से हाथ धो देंगे।”
★★विरोध किसका है“वैश्वीकरण-विरोधी बहुत से आंदोलन वैश्वीकरण की धारणा के विरोधी नहीं बल्कि वैश्वीकरण के किसी खास कार्यक्रम के विरोधी हैं जिसे वे साम्राज्यवाद का एक रूप मानते हैं।”
★विरोधियों का भी नेटवर्क“वैश्वीकरण-विरोधी आंदोलन भी विश्वव्यापी नेटवर्क में भागीदारी करते हैं और… दूसरे देशों के लोगों से गठजोड़ करते हैं।”
★सिएट्ल, 1999“विश्व व्यापार संगठन की मंत्री-स्तरीय बैठक… बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।” तर्क — “उदीयमान वैश्विक आर्थिक-व्यवस्था में विकासशील देशों के हितों को समुचित महत्त्व नहीं दिया गया है।”
★★वर्ल्ड सोशल फोरम (WSF)“नव-उदारवादी वैश्वीकरण के विरोध का एक विश्व-व्यापी मंच” — मानवाधिकार-कार्यकर्त्ता, पर्यावरणवादी, मजदूर, युवा और महिला कार्यकर्त्ता। पहली बैठक 2001, पोर्तो अलेग्रे (ब्राजील); चौथी 2004 मुंबई; हाल की फरवरी 2024 नेपाल
★नव-उदारवादी वैश्वीकरणNeo-liberal globalization — जिसका WSF विरोध करता है
★इंडियन सोशल फोरमभारत में वैश्वीकरण-विरोध का मंच
★★‘नीम’ का पेटेंट-विवाद“कुछ वनस्पतियाँ मसलन ‘नीम’ को अमरीकी और यूरोपीय फर्मों ने पेटेन्ट कराने के प्रयास किए। इसका भी कड़ा विरोध हुआ।”
! मुंबई प्रतिरोध 2004★यह WSF का ही विरोध करने वाला समूह था — आरोप: “अलोकतांत्रिक तौर-तरीके”, “साम्राज्यवादी देशों और बड़े व्यापार के धन पर निर्भरता”, और “एन.जी.ओ. साम्राज्यवाद के दलाल हैं।”
★“एक और दुनिया मुमकिन है”WSF का नारा (पोस्टर, पृ. 99)

भाग 8 — भ्रम-युग्म : यहीं गलती होती हैध्यान

युग्मकैसे अलग पहचानें
★★वैश्वीकरण बनाम पश्चिमीकरणसमान नहीं — पश्चिमी प्रभाव वैश्वीकरण का एक पहलू है, पूरी परिघटना नहीं (प्रश्न 1 का विकल्प ग)
!! “वैश्वीकरण की शुरुआत 1991 में”गलत — 1991 भारत के आर्थिक सुधारों का वर्ष है; वैश्वीकरण “मानव-इतिहास के अधिकांश समय जारी रहा है”
★★समरूपता — किसका तर्क?!! आलोचकों का, पैरोकारों का नहीं। सूत्र: “समरूपता का डर आलोचक दिखाते हैं, पैरोकार नहीं।” (प्रश्न 5 का जाल)
★★सांस्कृतिक समरूपता बनाम वैभिन्नीकरणसमरूपता = सब एक जैसे हो रहे हैं (मैक्डोनॉल्डीकरण); वैभिन्नीकरण = हर संस्कृति और अलग तथा विशिष्ट हो रही है (जीन्स पर कुर्ता)
★★राज्य कमज़ोर हुआ या मज़बूत?तीनों सच हैं — क्षमता में कमी · प्रधानता बरकरार · ताकत में इजाफा। ! केवल पहला लिखना अधूरा उत्तर है
★कल्याणकारी बनाम न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्यलोक-कल्याण बनाम केवल कानून-व्यवस्था और सुरक्षा
★★पूँजी/वस्तु का प्रवाह बनाम लोगों का प्रवाहपहले तीन बढ़े; चौथा नहीं — कारण वीजा-नीति
★★‘वैश्वीकरण’ का विरोध बनाम ‘नव-उदारवादी वैश्वीकरण’ का विरोध“बहुत से आंदोलन वैश्वीकरण की धारणा के विरोधी नहीं” — वे एक खास कार्यक्रम के विरोधी हैं
★वामपंथी बनाम दक्षिणपंथी आलोचकवामपंथी — पूंजीवाद और गरीबों का हित; दक्षिणपंथी — आत्मनिर्भरता, संरक्षणवाद और परंपरागत संस्कृति। ★दोनों ‘राज्य के कमजोर होने’ से चिंतित हैं — पर कारण अलग
! WSF बनाम मुंबई प्रतिरोध 2004WSF = नव-उदारवादी वैश्वीकरण के विरोध का मंच; मुंबई प्रतिरोध 2004 = WSF का ही विरोध करने वाला समूह
! WSF की पहली बैठक कहाँ?2001, पोर्तो अलेग्रे (ब्राजील) — ! मुंबई में चौथी बैठक (2004) हुई थी, पहली नहीं
★1991 बनाम 1999 बनाम 2001भारत के आर्थिक सुधार · सिएट्ल का विरोध · WSF की पहली बैठक
! ‘प्रौद्योगिकी अपरिहार्य’ बनाम ‘पर्याप्त’अपरिहार्य = बिना इसके नहीं हो सकता; पर्याप्त = अकेले इसी से हो जाएगा। ★पाठ कहता है यह अपरिहार्य है, पर्याप्त नहीं
! लाल पैनल किसका कथन है?★यह ‘मुंबई प्रतिरोध 2004’ का आरोप है, WSF या पाठ्यपुस्तक का कथन नहीं

भाग 9 — याद रखने के सूत्र

सूत्रक्या याद रहेगा
“प्रवाह — विचार, पूँजी, वस्तु, लोग”वैश्वीकरण की परिभाषा
“जुड़ाव ही सबसे ज़रूरी है”“विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव”
“तीन अवतार — राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक”बहुआयामी
“प्रभाव सब पर बराबर नहीं”विषम प्रभाव
“छपाई ने राष्ट्रवाद दिया, तो आज की तकनीक क्या देगी?”प्रौद्योगिकी की भूमिका
“तीन तीर — नीचे, सीधा, ऊपर”राज्य के तीन पहलू
“सीमाएँ पूँजी के लिए खुलीं, लोगों के लिए नहीं”वीजा-नीति वाली विषमता
“बर्गर से खतरा नहीं, कुर्ता वापस भी जाता है”सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण
“समरूपता का डर आलोचक दिखाते हैं”प्रश्न 5 का जाल
“निर्यातक → संरक्षणवाद → 1991”भारत के तीन चरण
“कसौटी वृद्धि-दर नहीं, साझा है”अध्याय का नैतिक निष्कर्ष
“विरोध भी वैश्वीकृत है”प्रतिरोध की विडंबना