पाठ्यपुस्तक का पूरा पाठ, पृष्ठ-संदर्भ सहित। यह शिक्षक की फाइल है — पढ़ाने से पहले एक बार पूरी पढ़िए।
PDF वर्गीकरण: LEGACY — 31/31 फॉन्ट 8-बिट एन्कोडेड; 16 पृष्ठ-चित्र दृष्टि से पढ़े गए।
पढ़ाने से पहले — दो संरचनात्मक बातेंध्यान
(1) यह अध्याय पहले ‘अध्याय 5’ था। हाशिये का QR कोड 12108CH05 है। पैटर्न अब पूरा हो चुका है —
| पुराना क्रम | अध्याय | अब | QR कोड |
|---|---|---|---|
| 1 | शीतयुद्ध का दौर | ❌ हटाया गया | — |
| 2 | दो ध्रुवीयता का अंत | ✓ अध्याय 1 | 12108CH02 |
| 3 | समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व | ❌ हटाया गया | — |
| 4 | सत्ता के समकालीन केन्द्र | ✓ अध्याय 2 | 12108CH04 |
| 5 | समकालीन दक्षिण एशिया | ✓ अध्याय 3 (यही) | 12108CH05 |
(2) ★★और इस अध्याय में हटाए गए अध्याय का सबसे स्पष्ट अवशेष मौजूद है। पृ. 41 का साइड-बॉक्स शब्दशः पूछता है —
“अगर अमरीका के बारे में लिखे गए अध्याय को ‘अमरीकी वर्चस्व’ का शीर्षक दिया गया, तो इस अध्याय को भारतीय वर्चस्व क्यों नहीं कहा गया?”
यह प्रश्न एक ऐसे अध्याय की ओर इशारा करता है जो अब पाठ्यक्रम में है ही नहीं। विद्यार्थी इसे पढ़कर
पिछले अध्यायों में वह शीर्षक ढूँढ़ेगा और नहीं पाएगा। कक्षा में यह बता दीजिए।
विवरण 10-Verification-Log.md में।
अध्याय की संरचना
| क्रम | खंड | पृष्ठ |
|---|---|---|
| — | परिचय | 29 |
| 1 | क्या है दक्षिण एशिया? | 30–31 |
| 2 | पाकिस्तान में सेना और लोकतंत्र | 32–33 |
| 3 | बांग्लादेश में लोकतंत्र | 33–35 |
| 4 | नेपाल में राजतंत्र और लोकतंत्र | 35–36 |
| 5 | श्रीलंका में जातीय संघर्ष और लोकतंत्र | 36–37 |
| 6 | भारत-पाकिस्तान संघर्ष | 37–39 |
| 7 | भारत और उसके अन्य पड़ोसी देश | 39–41 |
| 8 | शांति और सहयोग | 41–43 |
| — | प्रश्नावली — प्रश्न 1 से 11 | 43–44 |
परिचय (पृ. 29)
- बीसवीं सदी के आख़िरी सालों में जब भारत और पाकिस्तान ने खुद को परमाणु शक्ति-संपन्न राष्ट्रों की बिरादरी में बैठा लिया तो यह क्षेत्र अचानक पूरे विश्व की नज़र में महत्त्वपूर्ण हो उठा।
- विश्व का ध्यान इस इलाके में चल रहे कई तरह के संघर्षों पर गया —
- सीमा और नदी जल के बँटवारे को लेकर विवाद;
- विद्रोह, जातीय संघर्ष और संसाधनों के बँटवारे को लेकर होने वाले झगड़े।
- ★“इन वजहों से दक्षिण एशिया का इलाका बड़ा संवेदनशील है और अनेक विशेषज्ञों का मानना है कि आज विश्व में यह क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से खतरे की आशंका वाला क्षेत्र है।”
- ★“साथ ही एक बात और है। इस इलाके के बहुत से लोग इस तथ्य की निशानदेही करते हैं कि दक्षिण एशिया के देश अगर आपस में सहयोग करें तो यह क्षेत्र विकास करके समृद्ध बन सकता है।”
- अध्याय की योजना: “दक्षिण एशिया के देशों की घरेलू राजनीति से इन झगड़ों या सहयोग का मिजाज तय होता है अथवा वह इनके मूल में हैं। इस वजह से अध्याय में पहले दक्षिण एशिया का परिचय दिया जाएगा और कुछ देशों की घरेलू राजनीति की चर्चा की जाएगी।”
आवरण-चित्र (पृ. 29): येगेनी डेलाक्रो ने सन् 1830 में एक पेंटिंग बनायी थी — ‘लिबर्टी लीडिंग द पीपल’, जिसमें स्वतंत्रता की देवी को जनता की अगुआई करते हुए चित्रित किया गया था। यहाँ दिया गया चित्र उसी पेंटिंग का सुभाष राय कृत रूपांतरण है — जिसमें दक्षिण एशिया के देशों के झंडे हैं। (हिमाल साउथ एशियन, जनवरी 2007, द साउथ एशियन ट्रस्ट, नेपाल से साभार)
कक्षा के लिए: यह चित्र ही अध्याय का सार है — एक ही जनता, सात झंडे।
1. क्या है दक्षिण एशिया? (पृ. 30–31)
1.1 परिभाषा★
- ★सात देश: बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका।
- ★भौगोलिक सीमाएँ: उत्तर की विशाल हिमालय पर्वत-शृंखला, दक्षिण का हिंद महासागर, पश्चिम का अरब सागर और पूरब में मौजूद बंगाल की खाड़ी — इनसे यह इलाका एक विशिष्ट प्राकृतिक क्षेत्र के रूप में नज़र आता है।
- ★“यह भौगोलिक विशिष्टता ही इस उप-महाद्वीपीय क्षेत्र के भाषाई, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अनूठेपन के लिए जिम्मेदार है।”
- इस क्षेत्र की चर्चा में जब-तब अफ़्गानिस्तान और म्यांमार को भी शामिल किया जाता है।
- ★★“चीन इस क्षेत्र का एक प्रमुख देश है लेकिन चीन को दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता।”
- ★“इस तरह परिभाषित दक्षिण एशिया हर अर्थ में विविधताओं से भरा-पूरा इलाका है फिर भी भू-राजनीतिक धरातल पर यह एक क्षेत्र है।”
पाठ का शुरुआती वाक्य (याद रखने योग्य):
★“यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ सद्भाव और शत्रुता, आशा और निराशा तथा पारस्परिक शंका और विश्वास साथ-साथ बसते हैं।”
पाठ के साइड-प्रश्न (पृ. 30):
- “दक्षिण एशिया के देशों की कुछ ऐसी विशेषताओं की पहचान करें जो इस क्षेत्र के देशों में तो समान रूप से लागू होती हैं परंतु दक्षिण पश्चिम एशिया अथवा दक्षिण पूर्व एशिया के देशों पर लागू नहीं होतीं।”
- “क्या इन देशों की कोई सुनिश्चित परिभाषा है? यह परिभाषा बनाता कौन है?”
1.2 राजनीतिक प्रणालियाँ — देश-दर-देश★★
★मूल वाक्य: “दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों में एक-सी राजनीतिक प्रणाली नहीं है।” (यही प्रश्नावली के प्रश्न 2 का उत्तर है।)
| देश | अनुभव |
|---|---|
| भारत और श्रीलंका | ★“अनेक समस्याओं और सीमाओं के बावजूद भारत और श्रीलंका में ब्रिटेन से आज़ाद होने के बाद, लोकतांत्रिक व्यवस्था सफलतापूर्वक कायम है।” ★“एक राष्ट्र के रूप में भारत हमेशा लोकतांत्रिक रहा है। यही बात श्रीलंका पर लागू होती है।” |
| पाकिस्तान और बांग्लादेश | ★“लोकतांत्रिक और सैनिक दोनों तरह के नेताओं का शासन रहा है।” |
| बांग्लादेश | शीतयुद्ध के बाद के सालों में लोकतंत्र कायम रहा। |
| पाकिस्तान | शीतयुद्ध के बाद लगातार दो लोकतांत्रिक सरकारें — पहली बेनज़ीर भुट्टो और दूसरी नवाज़ शरीफ़ के नेतृत्व में। 1999 में सैनिक तख़्तापलट। 2008 से फिर लोकतांत्रिक-शासन। |
| नेपाल | ★2006 तक संवैधानिक राजतंत्र; खतरा बना रहता था कि राजा कार्यपालिका की सारी शक्तियाँ ले लेगा। ★2008 में राजतंत्र खत्म; नेपाल एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में उभरा। |
| भूटान | ★2008 में संवैधानिक राजतंत्र बन गया। राजा के नेतृत्व में, बहुदलीय लोकतंत्र के रूप में उभरा। |
| मालदीव | ★1968 तक सल्तनत हुआ करता था। 1968 में गणतंत्र बना और अध्यक्षात्मक प्रणाली अपनायी गई। ★2005 के जून में मालदीव की संसद ने बहुदलीय प्रणाली को अपनाने के पक्ष में एकमत से मतदान किया। मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) का दबदबा है; एमडीपी ने 2018 में हुए चुनावों में जीत हासिल की। |
★★पाठ का निष्कर्ष-वाक्य: “बांग्लादेश और नेपाल के अनुभवों के आधार पर हम कह सकते हैं कि पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है।”
1.3 लोकतंत्र का जन-समर्थन — सर्वेक्षण (पृ. 31)★★
- “दक्षिण एशिया में लोकतंत्र का रिकार्ड मिला-जुला रहा है। इसके बावजूद दक्षिण एशियाई देशों की जनता लोकतंत्र की आकांक्षाओं में सहभागी है।”
- इस क्षेत्र के पाँच बड़े देशों में हाल ही में एक सर्वेक्षण किया गया था।
- ★“इन पाँचों देशों में लोकतंत्र को व्यापक जन-समर्थन हासिल है। इन देशों में हर वर्ग और धर्म के आम नागरिक लोकतंत्र को अच्छा मानते हैं और प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र की संस्थाओं का समर्थन करते हैं।”
- ★★“ये निष्कर्ष बड़े महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि पहले से माना जाता रहा है कि लोकतंत्र सिर्फ विश्व के धनी देशों में फल-फूल सकता है। इस लिहाज से देखें तो दक्षिण एशिया के लोकतंत्र के अनुभवों से लोकतंत्र की वैश्विक कल्पना का दायरा बढ़ा है।”
आरेख 1 — ‘लोकतंत्र को तानाशाही के ऊपर वरीयता’ (प्रतिशत में)
| कथन | बांग्लादेश | भारत | नेपाल | पाकिस्तान | श्रीलंका |
|---|---|---|---|---|---|
| लोकतंत्र बेहतर | 69 | 70 | 62 | 37 | 71 |
| कभी-कभी तानाशाही बेहतर | 6 | 9 | 10 | 14 | 11 |
| कोई फर्क नहीं पड़ता | 25 | 21 | 28 | 49 | 18 |
(दक्षिण एशिया का कुल: 62 / 10 / 28)
आरेख 2 — ‘अपने देश के लिए लोकतंत्र कितना उपयुक्त है?’ (बहुत उपयुक्त + उपयुक्त)
| क्षेत्र/देश | प्रतिशत |
|---|---|
| दक्षिण एशिया | 88 |
| बांग्लादेश | 93 |
| श्रीलंका | 92 |
| भारत | 92 |
| पाकिस्तान | 84 |
| नेपाल | 79 |
“ये दोनों आरेख दक्षिण एशिया के पाँच बड़े देशों के 19 हजार से अधिक नागरिकों से लिए गए साक्षात्कार पर आधारित हैं।” स्रोत — एस डी एस ए टीम, स्टेट ऑव डेमोक्रेसी इन साउथ एशिया, नयी दिल्ली, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2007.
1.4 मानव विकास के आँकड़े (पृ. 31, UNDP मानव विकास रिपोर्ट 2018)
| देश | आयु प्रत्याशा (2017) | वयस्क साक्षरता % (2006–16) | विद्यालयी नामांकन, माध्यमिक (2012–17) | जीडीपी (PPP $, 2017) | बाल मृत्यु दर (प्रति हज़ार, 2016) | टी.बी. फैलाव (प्रति लाख, 2016) | $1.90/दिन से कम पर जीवन (2006–16) | HDI स्थान |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| विश्व | 72.2 | 82.1 | 79 | 15,439 | 29.9 | 140.0 | – | – |
| विकासशील देश | 70.7 | 81.1 | 75 | 10,199 | 32.7 | 164.5 | – | – |
| दक्षिण एशिया | 69.3 | 68.7 | 71 | 6,485 | 37.8 | 206.3 | – | – |
| बांग्लादेश | 72.8 | 72.8 | 69 | 3,524 | 28.2 | 221.0 | 14.8 | 136 |
| भारत | 68.8 | 69.3 | 75 | 6,427 | 34.6 | 211.0 | 21.2 | 130 |
| नेपाल | 70.6 | 59.6 | 71 | 2,433 | 28.4 | 154.0 | 15.0 | 149 |
| पाकिस्तान | 66.6 | 57.0 | 46 | 5,035 | 64.2 | 268.0 | 6.1 | 150 |
| ★श्रीलंका | 75.5 | 91.2 | 98 | 11,669 | 8.0 | 65.0 | – | ★76 |
★कक्षा में यही एक पंक्ति पढ़वाइए — श्रीलंका हर स्तंभ में सबसे आगे है। यह पाठ के उस दावे का संख्यात्मक प्रमाण है कि “गृहयुद्ध से गुजरने के बावजूद… इस देश का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा है।”
1.5 दक्षिण एशिया का घटनाक्रम (1947 से) — पृ. 32 का बॉक्स★★
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 1947 | ★ब्रिटिश-राज की समाप्ति के बाद भारत और पाकिस्तान का स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उदय। |
| 1948 | ★श्रीलंका (तत्कालीन सिलोन) को आज़ादी मिली; कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई। |
| 1954–55 | पाकिस्तान शीतयुद्धकालीन सैन्य गुट ‘सिएटो’ और ‘सेंटो’ में शामिल हुआ। |
| सितंबर 1960 | ★भारत और पाकिस्तान ने सिंधु नदी जल समझौते पर हस्ताक्षर किए। |
| 1962 | भारत और चीन के बीच सीमा-विवाद। |
| 1965 | भारत-पाक युद्ध; संयुक्त राष्ट्रसंघ का भारत-पाक पर्यवेक्षण मिशन। |
| 1966 | ताशकंद समझौता। शेख मुजीबुर्रहमान ने पूर्वी पाकिस्तान को ज्यादा स्वायत्तता देने के लिए छ: सूत्री प्रस्ताव रखा। |
| मार्च 1971 | बांग्लादेश के नेताओं द्वारा आज़ादी की उद्घोषणा। |
| अगस्त 1971 | ★भारत और सोवियत संघ ने 20 सालों के लिए मैत्री संधि पर दस्तख़त किए। |
| दिसंबर 1971 | ★भारत-पाक युद्ध; बांग्लादेश की मुक्ति। |
| जुलाई 1972 | ★भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला-समझौता। |
| मई 1974 | भारत ने परमाणु-परीक्षण किए। |
| 1976 | पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कूटनयिक संबंध बहाल हुए। |
| दिसंबर 1985 | ★★‘दक्षेस’ के पहले सम्मेलन (ढाका) में दक्षिण एशिया के देशों ने ‘दक्षेस’ के घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। |
| 1987 | ★भारत-श्रीलंका समझौता; भारतीय शांति सेना का श्रीलंका में अभियान (1987–90)। |
| 1988 | ★मालदीव में भाड़े के सैनिकों द्वारा किए गए षड्यंत्र को नाकाम करने के लिए भारत ने वहाँ सेना भेजी। भारत और पाकिस्तान के बीच एक-दूसरे के परमाणु ठिकानों और सुविधाओं पर हमला न करने के समझौते पर हस्ताक्षर हुए। |
| 1988–91 | ★पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में लोकतंत्र की बहाली। |
| 1993 | ★‘दक्षेस’ के सातवें सम्मेलन (ढाका) में आपसी व्यापार में दक्षेस के देशों को वरीयता देने की संधि (SAPTA) पर हस्ताक्षर। |
| दिसंबर 1996 | ★गंगा नदी के पानी में हिस्सेदारी के मसले पर भारत और बांग्लादेश के बीच फरक्का संधि पर हस्ताक्षर हुए। |
| मई 1998 | ★भारत और पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किए। |
| दिसंबर 1998 | ★भारत और श्रीलंका ने मुक्त व्यापार संधि पर हस्ताक्षर किए। |
| फरवरी 1999 | ★भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस-यात्रा कर लाहौर गए तथा शांति के एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। |
| जून–जुलाई 1999 | ★भारत और पाकिस्तान के बीच करगिल-युद्ध। |
| जुलाई 2001 | वाजपेयी-मुशर्रफ के बीच आगरा-बैठक असफल। |
| फरवरी 2004 | ★★12वें दक्षेस सम्मेलन में ‘मुक्त व्यापार संधि (SAFTA)’ पर हस्ताक्षर हुए। |
| 2007 | ★अफ़गानिस्तान दक्षेस का सदस्य बना। |
| नवंबर 2014 | 18वाँ दक्षेस सम्मेलन काठमांडू, नेपाल में हुआ। |
2. पाकिस्तान में सेना और लोकतंत्र (पृ. 32–33)
2.1 शासकों का क्रम★
| काल | शासक / घटना |
|---|---|
| पहले संविधान के बाद | ★जनरल अयूब खान ने शासन की बाग़डोर ले ली और जल्दी ही अपना निर्वाचन भी करा लिया। जनता का गुस्सा भड़का और उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। |
| इसके बाद | ★जनरल याहिया खान ने बागडोर संभाली। उनके सैनिक-शासन के दौरान बांग्लादेश-संकट और 1971 में भारत के साथ युद्ध; परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान टूटकर स्वतंत्र देश बना और बांग्लादेश कहलाया। |
| 1971–1977 | ★जुल्फ़िकार अली भुट्टो के नेतृत्व में निर्वाचित सरकार। |
| 1977 | ★जनरल जियाउल-हक ने इस सरकार को गिरा दिया। |
| 1982 के बाद | जनरल जियाउल-हक को लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन का सामना करना पड़ा। |
| 1988 | ★बेनज़ीर भुट्टो के नेतृत्व में लोकतांत्रिक सरकार बनी। |
| 1988–1999 | राजनीति बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मुस्लिम लीग की आपसी होड़ के इर्द-गिर्द घूमती रही। |
| 1999 | ★★सेना ने दखल दी; जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को हटा दिया। |
| 2001 | ★मुशर्रफ ने अपना निर्वाचन राष्ट्रपति के रूप में कराया। |
| 2008 से | ★“पाकिस्तान में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता शासन कर रहे हैं।” |
पाठ का वाक्य: “पाकिस्तान पर सेना की हुकूमत थी हालाँकि सैनिक शासकों ने अपने शासन को लोकतांत्रिक जताने के लिए चुनाव कराए हैं।”
2.2 लोकतंत्र स्थायी क्यों नहीं बन सका — पाँच कारण★★
(यही प्रश्नावली के प्रश्न 3 का उत्तर है।)
- ★सामाजिक दबदबा: “यहाँ सेना, धर्मगुरु और भूस्वामी अभिजनों का सामाजिक दबदबा है। इसकी वज़ह से कई बार निर्वाचित सरकारों को गिराकर सैनिक शासन कायम हुआ।”
- ★भारत से तनातनी: “पाकिस्तान की भारत के साथ तनातनी रहती है। इस वज़ह से सेना-समर्थक समूह ज्यादा मजबूत हैं।”
- ★सेना-समर्थक तर्क: ये समूह दलील देते हैं कि “पाकिस्तान के राजनीतिक दलों और लोकतंत्र में खोट है। राजनीतिक दलों के स्वार्थ साधन तथा लोकतंत्र की धमाचौकड़ी से पाकिस्तान की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी।” “इस तरह ये ताकतें सैनिक शासन को जायज़ ठहराती हैं।”
- ★अंतर्राष्ट्रीय समर्थन का अभाव: “पाकिस्तान में लोकतांत्रिक शासन चले — इसके लिए कोई खास अंतर्राष्ट्रीय समर्थन नहीं मिलता। इस वज़ह से भी सेना को अपना प्रभुत्व कायम करने के लिए बढ़ावा मिला है।”
- ★पश्चिमी देशों की भूमिका: “अमरीका तथा अन्य पश्चिमी देशों ने अपने-अपने स्वार्थों से गुज़रे वक्त
में पाकिस्तान में सैनिक शासन को बढ़ावा दिया।” कारण —
- इन देशों को उस आतंकवाद से डर लगता है जिसे ये देश ‘विश्वव्यापी इस्लामी आतंकवाद’ कहते हैं;
- डर सताता है कि पाकिस्तान के परमाणविक हथियार कहीं इन आतंकवादी समूहों के हाथ न लग जाएँ;
- इन बातों के मद्देनज़र पाकिस्तान को ये देश ‘पश्चिम’ तथा दक्षिण एशिया में पश्चिमी हितों का रखवाला मानते हैं।
2.3 और फिर भी — दूसरा पक्ष★
★“लोकतंत्र तो खैर पाकिस्तान में पूरी तरह सफल नहीं हो सका है लेकिन इस देश में लोकतंत्र का जज्बा बहुत मज़बूती के साथ कायम रहा है। पाकिस्तान में अपेक्षाकृत स्वतंत्र और साहसी प्रेस मौजूद है और वहाँ मानवाधिकार आंदोलन भी काफी मजबूत है।”
कार्टून (पृ. 33): परवेज़ मुशर्रफ की दोहरी भूमिका — सेना के जेनरल और पाकिस्तान के राष्ट्रपति। ब्लैकबोर्ड पर समीकरण, और मुशर्रफ कहते हैं — “जोड़ घटाव में मैं हमेशा अच्छा रहा हूँ।”
3. बांग्लादेश में लोकतंत्र (पृ. 33–35)
3.1 पृष्ठभूमि — क्यों टूटा पाकिस्तान
- ★“1947 से 1971 तक बांग्लादेश पाकिस्तान का अंग था।”
- “अंग्रेजी राज के समय के बंगाल और असम के विभाजित हिस्सों से पूर्वी पाकिस्तान का यह क्षेत्र बना था।”
- ★शिकायतें —
- “इस क्षेत्र के लोग पश्चिमी पाकिस्तान के दबदबे और अपने ऊपर उर्दू भाषा को लादने के ख़िलाफ़ थे।”
- “पाकिस्तान के निर्माण के तुरंत बाद ही यहाँ के लोगों ने बंगाली संस्कृति और भाषा के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ विरोध जताना शुरू कर दिया।”
- “इस क्षेत्र की जनता ने प्रशासन में अपने न्यायोचित प्रतिनिधित्व तथा राजनीतिक सत्ता में समुचित हिस्सेदारी की माँग भी उठायी।”
3.2 1970–71 — मुक्ति की प्रक्रिया★★
- ★“पश्चिमी पाकिस्तान के प्रभुत्व के खिलाफ जन-संघर्ष का नेतृत्व शेख मुजीबुर्रहमान ने किया। उन्होंने पूर्वी क्षेत्र के लिए स्वायत्तता की माँग की।”
- ★“शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व वाली अवामी लीग को 1970 के चुनावों में पूर्वी पाकिस्तान की सारी सीटों पर विजय मिली। अवामी लीग को संपूर्ण पाकिस्तान के लिए प्रस्तावित संविधान सभा में बहुमत हासिल हो गया।”
- ! “लेकिन सरकार पर पश्चिमी पाकिस्तान के नेताओं का दबदबा था और सरकार ने इस सभा को आहूत करने से इंकार कर दिया। शेख़ मुजीब को गिरफ्तार कर लिया गया।”
- ★“जेनरल याहिया खान के सैनिक शासन में पाकिस्तानी सेना ने बंगाली जनता के आंदोलन को कुचलने की कोशिश की। हजारों लोग पाकिस्तानी सेना के हाथो मारे गए।”
- “इस वज़ह से पूर्वी पाकिस्तान से बड़ी संख्या में लोग भारत पलायन कर गए। भारत के सामने इन शरणार्थियों को संभालने की समस्या आन खड़ी हुई।”
- ★“भारत की सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान के लोगों की आज़ादी की माँग का समर्थन किया और उन्हें वित्तीय और सैन्य सहायता दी।”
- ★“इसके परिणामस्वरूप 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया। युद्ध की समाप्ति पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण तथा एक स्वतंत्र राष्ट्र ‘बांग्लादेश’ के निर्माण के साथ हुई।”
3.3 आज़ादी के बाद का सफ़र★
| काल | घटना |
|---|---|
| 1972 | ★“बांग्लादेश ने अपना संविधान बनाकर उसमें अपने को एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा समाजवादी देश घोषित किया।” |
| 1975 | ! शेख मुजीबुर्रहमान ने संविधान में संशोधन कराया और संसदीय प्रणाली की जगह अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली को मान्यता मिली। उन्होंने अपनी पार्टी अवामी लीग को छोड़कर अन्य सभी पार्टियों को समाप्त कर दिया। “इससे तनाव और संघर्ष की स्थिति पैदा हुई।” |
| अगस्त 1975 | ★“सेना ने उनके ख़िलाफ बग़ावत कर दी और इस नाटकीय तथा त्रासद घटनाक्रम में शेख मुजीब सेना के हाथो मारे गए।” |
| 1975 के बाद | ★नये सैनिक-शासक जियाउर्रहमान ने बांग्लादेश नेशनल पार्टी बनायी और 1979 के चुनाव में विजयी रहे। |
| इसके बाद | जियाउर्रहमान की हत्या हुई, और ★लेफ्टिनेंट जेनरल एच एम इरशाद के नेतृत्व में एक और सैनिक-शासन ने बागडोर संभाली। |
| 1987 | जेनरल इरशाद के खिलाफ लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन; ★नूर हुसैन पुलिस द्वारा मारे गए। |
| आंदोलन | ★“बांग्लादेश की जनता जल्दी ही लोकतंत्र के समर्थन में उठ खड़ी हुई। आंदोलन में छात्र आगे-आगे चल रहे थे।” |
| 1990 | ★“जनता के व्यापक विरोध के आगे झुकते हुए लेफ्टिनेंट जेनरल इरशाद को राष्ट्रपति का पद 1990 में छोड़ना पड़ा।” (इससे पहले वे पाँच सालों के लिए राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे।) |
| 1991 | ★“1991 में चुनाव हुए। इसके बाद से बांग्लादेश में बहुदलीय चुनावों पर आधारित प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र कायम है।” |
चित्र (पृ. 34): जहांगीर नगर विश्वविद्यालय, सावर, ढाका में दीवार पर बनी चित्रमाला — नूर हुसैन की याद में। पीठ पर अंकित है — ‘गणतंत्र मुक्त पाक’। दीवार पर नारे — ★‘जय बांग्ला’, ‘जय बंगबंधु’, ‘विप्लववीर ही सच्चे इंसान हैं’ और ‘क्रांति ही मुक्ति का इकलौता रास्ता है’। (शाहिदुल आलम, ड्रिक से साभार)
पाठ का साइड-प्रश्न (पृ. 35): “बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के बारे में ज्यादा जानकारी जुटायें। क्या भारत में ग़रीबी कम करने के लिए ऐसी ही जुगत लगा सकते हैं?”
★यही प्रश्नावली के प्रश्न 1(छ) का सूत्र है — “ग्रामीण क्षेत्र में छोटी बचत और सहकारी ऋण की व्यवस्था के कारण इस देश को ग़रीबी कम करने में मदद मिली है।” → बांग्लादेश।
4. नेपाल में राजतंत्र और लोकतंत्र (पृ. 35–36)
4.1 पृष्ठभूमि
- ★“नेपाल अतीत में एक हिन्दू-राज्य था फिर आधुनिक काल में कई सालों तक यहाँ संवैधानिक राजतंत्र रहा।”
- संवैधानिक राजतंत्र के दौर में राजनीतिक पार्टियाँ और आम जनता “ज्यादा खुले और उत्तरदायी शासन की आवाज़ उठाते रहे।”
- ! “लेकिन राजा ने सेना की सहायता से शासन पर पूरा नियंत्रण कर लिया और नेपाल में लोकतंत्र की राह अवरुद्ध हो गई।”
4.2 1990 और उसके बाद★
- ★“एक मजबूत लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन की चपेट में आकर राजा ने 1990 में नए लोकतांत्रिक संविधान की माँग मान ली।”
- ! “नेपाल में लोकतांत्रिक सरकारों का कार्यकाल बहुत छोटा और समस्याओं से भरा रहा।”
- ★“1990 के दशक में नेपाल के माओवादी नेपाल के अनेक हिस्सों में अपना प्रभाव जमाने में कामयाब हुए। माओवादी, राजा और सत्ताधारी अभिजन के खिलाफ़ सशस्त्र विद्रोह करना चाहते थे।”
- ★“इस वजह से राजा की सेना और माओवादी गुरिल्लों के बीच हिंसक लड़ाई छिड़ गई।”
- ★★“कुछ समय तक राजा की सेना, लोकतंत्र-समर्थकों और माओवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष हुआ।”
- ! “2002 में राजा ने संसद को भंग कर दिया और सरकार को गिरा दिया। इस तरह नेपाल में जो भी थोड़ा-बहुत लोकतंत्र था उसे राजा ने खत्म कर दिया।”
4.3 अप्रैल 2006 — दूसरा लोकतंत्र-आंदोलन★★
(यही प्रश्नावली के प्रश्न 4 का उत्तर है।)
- ★“अप्रैल 2006 में यहाँ देशव्यापी लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शन हुए।”
- ★“संघर्षरत लोकतंत्र-समर्थक शक्तियों ने अपनी पहली बड़ी जीत हासिल की जब राजा ज्ञानेन्द्र ने बाध्य होकर संसद को बहाल किया। इसे अप्रैल 2002 में भंग कर दिया गया था।”
- ★★“मोटे तौर पर अहिंसक रहे इस प्रतिरोध का नेतृत्व सात दलों के गठबंधन (सेवेन पार्टी अलाएंस), माओवादी तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया।”
4.4 उसके बाद
- “नेपाल में लोकतंत्र की आमद अब लगभग मुकम्मल हुई है। नेपाल अपने इतिहास के एक अद्वितीय दौर से गुज़र रहा था।”
- “नेपाल का संविधान लिखने के लिए वहाँ संविधान-सभा का गठन हुआ।”
- मतभेद के तीन बिंदु —
- “नेपाल में कुछ लोग मानते थे कि अलंकारिक अर्थों में राजा का पद कायम रखना ज़रूरी था ताकि नेपाल अपने अतीत से जुड़ा रहे।”
- ★“माओवादी समूहों ने सशस्त्र संघर्ष की राह छोड़ देने की बात मान ली थी।” पर वे चाहते थे कि “संविधान में मूलगामी सामाजिक आर्थिक पुनर्रचना के कार्यक्रमों को शामिल किया जाय। सात दलों के गठबंधन में शामिल हरेक दल को यह बात स्वीकार नहीं थी।”
- “माओवादी और कुछ अन्य राजनीतिक समूह भारत की सरकार और नेपाल के भविष्य में भारतीय सरकार की भूमिका को लेकर बहुत शंकित थे।”
- ★“2008 में नेपाल राजतंत्र को खत्म करने के बाद लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया। 2015 में नेपाल ने नया संविधान अपनाया।”
चित्र (पृ. 36): दो तस्वीरें — दुर्गा थापा। पहली में वे लोकतंत्र-बहाली की एक रैली (काठमांडू, 1990) में भाग ले रही हैं; दूसरी 2006 की है, जिसमें वे लोकतंत्र बहाली के दूसरे आंदोलन की सफलता का उत्सव मना रही हैं। (चित्र — मिन बजराचार्य से साभार)
कक्षा के लिए: एक ही चेहरा, सोलह साल का अंतर, दो आंदोलन। यह जोड़ी नेपाल के पूरे खंड को एक तस्वीर में कह देती है।
5. श्रीलंका में जातीय संघर्ष और लोकतंत्र (पृ. 36–37)
5.1 अलग तरह की चुनौती★
- ★“हम देख चुके हैं कि आज़ादी (1948) के बाद से लेकर अब तक श्रीलंका में लोकतंत्र कायम है।”
- ★★“लेकिन, श्रीलंका को एक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा। यह चुनौती न तो सेना की थी और न ही राजतंत्र की। श्रीलंका को जातीय संघर्ष का सामना करना पड़ा जिसकी माँग है कि श्रीलंका के एक क्षेत्र को अलग राष्ट्र बनाया जाय।”
5.2 संघर्ष की जड़★
- “आज़ादी के बाद से (श्रीलंका को उन दिनों सिलोन कहा जाता था) श्रीलंका की राजनीति पर बहुसंख्यक सिंहली समुदाय के हितों की नुमाइंदगी करने वालों का दबदबा रहा है।”
- ★“ये लोग भारत छोड़कर श्रीलंका आ बसी एक बड़ी तमिल आबादी के खिलाफ़ हैं। तमिलों का बसना श्रीलंका के आज़ाद होने के बाद भी जारी रहा।”
- ★★“सिंहली राष्ट्रवादियों का मानना था कि श्रीलंका में तमिलों के साथ कोई ‘रियायत’ नहीं बरती जानी चाहिए क्योंकि श्रीलंका सिर्फ सिंहली लोगों का है।”
- ★“तमिलों के प्रति उपेक्षा भरे बरताव से एक उग्र तमिल राष्ट्रवाद की आवाज़ बुलंद हुई।”
5.3 लिट्टे★★
- ★“1983 के बाद से उग्र तमिल संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑव तमिल ईलम’ (लिट्टे) श्रीलंकाई सेना के साथ सशस्त्र संघर्ष कर रहा है।”
- ★“इसने ‘तमिल ईलम’ यानी श्रीलंका के तमिलों के लिए एक अलग देश की मांग की।”
- ★“किसी समय में, श्रीलंका के उत्तर पूर्वी हिस्से पर लिट्टे का नियंत्रण था।”
5.4 भारत की भूमिका — और उसका सबक★★
- “श्रीलंका की समस्या भारतवंशी लोगों से जुड़ी थी। भारत की तमिल जनता का भारत सरकार पर भारी दबाव था कि वह श्रीलंकाई तमिलों के हितों की रक्षा करे।”
- ★“लेकिन 1987 में भारतीय सरकार श्रीलंका के तमिल मसले में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुई। भारत की सरकार ने श्रीलंका से एक समझौता किया तथा श्रीलंका सरकार और तमिलों के बीच रिश्ते सामान्य करने के लिए भारतीय सेना को भेजा।”
- ! “आखिर में भारतीय सेना लिट्टे के साथ संघर्ष में फंस गई।”
- !★“भारतीय सेना की उपस्थिति को श्रीलंका की जनता ने भी कुछ ख़ास पसंद नहीं किया। श्रीलंकाई जनता ने समझा कि भारत श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी कर रहा है।”
- ★“1989 में भारत ने अपनी ‘शांति सेना’ लक्ष्य हासिल किए बिना वापस बुला ली।”
5.5 अंत और उपलब्धियाँ
- “अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ के रूप में नार्वे और आइसलैंड जैसे स्केंडिनेवियाई देश युद्धरत दोनों पक्षों को फिर से आपस में बातचीत के लिए राजी कर रहे थे।”
- ★“अंतत: सशस्त्र संघर्ष समाप्त हो गया क्योंकि 2009 में लिट्टे को खत्म कर दिया गया।”
- ★★उपलब्धियाँ — “संघर्षों की चपेट में होने के बाद भी श्रीलंका ने अच्छी आर्थिक वृद्धि और विकास के
उच्च स्तर को हासिल किया है।”
- ★“जनसंख्या की वृद्धि-दर पर सफलतापूर्वक नियंत्रण करने वाले विकासशील देशों में श्रीलंका प्रथम है।”
- ★“दक्षिण एशिया के देशों में सबसे पहले श्रीलंका ने ही अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया।” (प्रश्न 1-ग का उत्तर)
- ★“गृहयुद्ध से गुजरने के बावजूद कई सालों से इस देश का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा है।”
- ★“अंदरूनी संघर्ष के झंझावातों को झेलकर भी श्रीलंका ने लोकतांत्रिक राजव्यवस्था कायम रखी है।”
कार्टून (पृ. 37): शांति वार्ताओं में श्रीलंका के नेतृत्व के आगे मौजूद दुविधा — एक ओर शेर के रूप में सिंहली कट्टरपंथी और दूसरी ओर बाघ के रूप में तमिल उग्रवादी।
6. भारत-पाकिस्तान संघर्ष (पृ. 37–39)
6.1 ढाँचा★
- “शीतयुद्ध की समाप्ति का यह अर्थ नहीं कि इस इलाके में भी संघर्ष और तनाव समाप्त हो गए।”
- ★★“दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति केंद्रीय है और इस वजह से इनमें से अधिकांश संघर्षों का रिश्ता भारत से है।”
- ★“इन संघर्षों में सबसे प्रमुख और सर्वग्रासी संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच का संघर्ष है।”
6.2 कश्मीर★★
- “विभाजन के तुरंत बाद दोनों देश कश्मीर के मसले पर लड़ पड़े। पाकिस्तान की सरकार का दावा था कि कश्मीर पाकिस्तान का है।”
- ★“भारत और पाकिस्तान के बीच 1947–48 तथा 1965 के युद्ध से इस मसले का समाधान नहीं हुआ।”
- ★★“1948 के युद्ध के फलस्वरूप कश्मीर के दो हिस्से हो गए। एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहलाया जबकि दूसरा हिस्सा भारत का जम्मू-कश्मीर प्रान्त बना। दोनों के बीच एक नियंत्रण-सीमा रेखा है।”
- ★“1971 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध जीता लेकिन कश्मीर मसला अनसुलझा ही रहा।”
6.3 सामरिक और परमाणु आयाम★
- “सामरिक मसलों जैसे सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण तथा हथियारों की होड़ को लेकर भी भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी रहती है।”
- ★“1990 के दशक में दोनों देशों ने परमाणु हथियार और ऐसे हथियारों को एक-दूसरे पर दागने की क्षमता वाले मिसाइल हासिल कर लिए। इससे दोनों देशों के बीच हथियारों की होड़ ने एक नया चरित्र ग्रहण किया है।”
- ★★“1998 में भारत ने पोखरण में और इसके कुछ दिनों के अंदर ही पाकिस्तान ने चगाई पहाड़ी पर परमाणु-परीक्षण किए।”
- ★“इसके बाद से ऐसा लगता है कि भारत और पाकिस्तान एक सैन्य-संबंध में बंध चुके हैं और इनके बीच सीधे और सर्वव्यापी युद्ध छिड़ने की आशंका कम हो गई है।”
6.4 आपसी आरोपध्यान
| किसका आरोप | क्या |
|---|---|
| भारत → पाकिस्तान | ★“पाकिस्तान सरकार ने लुके-छुपे ढंग से हिंसा की रणनीति जारी रखी है” — कश्मीरी उग्रवादियों को हथियार, प्रशिक्षण और धन देता है तथा भारत पर आतंकवादी हमले के लिए उन्हें सुरक्षा प्रदान करता है |
| भारत → पाकिस्तान | ★“पाकिस्तान ने 1985–1995 की अवधि में खालिस्तान-समर्थक उग्रवादियों को हथियार तथा गोले-बारुद दिए थे।” |
| भारत → आईएसआई | ★पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) पर “बांग्लादेश और नेपाल के गुप्त ठिकानों से पूर्वोत्तर भारत में भारत-विरोधी अभियानों में संलग्न होने का आरोप है।” |
| पाकिस्तान → भारत | ★“पाकिस्तान की सरकार भारतीय सरकार और उसकी खुफिया एजेंसियों पर सिंध और बलूचिस्तान में समस्या को भड़काने का आरोप लगाती है।” |
6.5 नदी-जल और सीमा★★
- “भारत और पाकिस्तान के बीच नदी-जल के बँटवारे के सवाल पर भी तनातनी हुई है। 1960 तक दोनों के बीच सिन्धु नदी के इस्तेमाल को लेकर तीखे विवाद हुए।”
- ★★“संयोग से, 1960 में विश्व बैंक की मदद से भारत और पाकिस्तान ने ‘सिंधु-जल संधि’ पर दस्तख़त किए और यह संधि भारत-पाक के बीच कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी कायम है।”
- “हालाँकि सिंधु जल-संधि की व्याख्या और नदी-जल के इस्तेमाल को लेकर अभी भी कुछ छोटे-मोटे विवाद हैं।”
- ★“कच्छ के रन में सरक्रिक की सीमारेखा को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद हैं। यह विवाद छोटा जान पड़ता है लेकिन इसके साथ एक चिन्ता जुड़ी हुई है। इस विवाद का समाधान जिस ढंग से किया जाएगा उसका असर सरक्रिक इलाके से सटे समुद्री-संसाधन के नियंत्रण पर भी पड़ेगा।”
- “भारत और पाकिस्तान के बीच इन सभी मामलों के बारे में वार्ताओं के दौर चल रहे हैं।”
कार्टून (पृ. 38): ‘भारत-पाक रिश्ते — बंकरों की भूल-भुलैया से कुर्सी-मेजों की भूल-भुलैया तक’; 2004–14 के दौरान भारत-पाक वार्ताओं पर एक नज़रिया।
साइड-प्रश्न (पृ. 38): “कश्मीर मसले पर होने वाली बातचीत ऐसी जान पड़ती है मानो भारत और पाकिस्तान के शासक अपनी जायदाद का झगड़ा निपटा रहे हों। कश्मीरियों को इसमें कैसा लगता होगा?”
7. भारत और उसके अन्य पड़ोसी देश (पृ. 39–41)
7.1 बांग्लादेश — असहमति और सहयोग(प्रश्न 7 का उत्तर)★★
असहमति के मुद्दे:
| मुद्दा | विवरण |
|---|---|
| नदी-जल | ★गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी के जल में हिस्सेदारी |
| अवैध आप्रवास | भारत में अवैध आप्रवास पर ढाका का खंडन |
| कट्टरपंथी जमातें | भारत-विरोधी इस्लामी कट्टरपंथी जमातों को समर्थन |
| सेना का रास्ता | भारतीय सेना को पूर्वोत्तर भारत में जाने के लिए अपने इलाके से रास्ता देने से इंकार |
| प्राकृतिक गैस | ढाका का भारत को प्राकृतिक गैस निर्यात न करने का फैसला; तथा म्यांमार को बांग्लादेशी इलाके से होकर भारत को गैस निर्यात न करने देना |
| बांग्लादेश के आरोप | “भारतीय सरकार नदी-जल में हिस्सेदारी के सवाल पर इलाके के दादा की तरह बरताव करती है”; चटगाँव पर्वतीय क्षेत्र में विद्रोह को हवा देने; बांग्लादेश के प्राकृतिक गैस में सेंधमारी करने और व्यापार में बेईमानी बरतने के आरोप |
सहयोग के मुद्दे:
- ★“पिछले बीस वर्षों के दौरान दोनों के बीच आर्थिक संबंध ज्यादा बेहतर हुए हैं।”
- ★“बांग्लादेश भारत के ‘लुक ईस्ट’ और 2014 से ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का हिस्सा है। इस नीति के अन्तर्गत म्यांमार के ज़रिए दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क साधने की बात है।”
- ★“आपदा-प्रबंधन और पर्यावरण के मसले पर भी दोनों देशों ने निरंतर सहयोग किया है।”
- ★“2015 में दोनों ने कुछ परिक्षेत्रों (एन्केलेव) का आदान-प्रदान किया।”
- “इस बात के भी प्रयास किए जा रहे हैं कि साझे खतरों को पहचान कर तथा एक दूसरे की ज़रूरतों के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता बरतकर सहयोग के दायरे को बढ़ाया जाए।”
7.2 नेपाल★
- ★★“भारत और नेपाल के बीच मधुर संबंध हैं और दोनों देशों के बीच एक संधि हुई है। इस संधि के तहत दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के देश में बिना पासपोर्ट (पारपत्र) और वीज़ा के आ-जा सकते हैं और काम कर सकते हैं।”
- मनमुटाव के बिंदु —
- अतीत में व्यापार से संबंधित मनमुटाव;
- ★“नेपाल की चीन के साथ दोस्ती को लेकर भारत सरकार ने अक्सर अपनी अप्रसन्नता जतायी है”;
- “नेपाल सरकार भारत-विरोधी तत्त्वों के खिलाफ कदम नहीं उठाती। इससे भी भारत नाखुश है”;
- ★“भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ नेपाल में चल रहे माओवादी आंदोलन को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानती हैं क्योंकि भारत में बिहार से लेकर आन्ध्र प्रदेश तक विभिन्न प्रांतों में नक्सलवादी समूहों का उभार हुआ है।”
- नेपाल की ओर से — “बहुत से लोग यह सोचते हैं कि भारत की सरकार नेपाल के अंदरूनी मामलों में दखल दे रही है और उसके नदी जल तथा पनबिजली पर आँख गड़ाए हुए है।”
- ★“चारों तरफ से जमीन से घिरे नेपाल को लगता है कि भारत उसको अपने भूक्षेत्र से होकर समुद्र तक पहुँचने से रोकता है।”
- ★“बहरहाल भारत-नेपाल के संबंध एकदम मजबूत और शांतिपूर्ण है।” दोनों देश व्यापार, वैज्ञानिक सहयोग, साझे प्राकृतिक संसाधन, बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन ग्रिड के मसले पर एक साथ हैं।
- “नेपाल में लोकतन्त्र की बहाली से दोनों देशों के बीच संबंधों के और मजबूत होने की उम्मीद बंधी है।”
7.3 श्रीलंका★
- तनाव का कारण — “इस द्वीप में जारी जातीय संघर्ष।” “जब तमिल आबादी राजनीतिक रूप से नाखुश हो और उसे मारा जा रहा हो तो ऐसे में भारतीय नेताओं और जनता का तटस्थ बने रहना असंभव लगता है।”
- ★“1987 के सैन्य हस्तक्षेप के बाद से भारतीय सरकार श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में असलंग्नता की नीति पर अमल कर रही है।”
- ★“भारत सरकार ने श्रीलंका के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर दस्तखत किए हैं। इससे दोनों देशों के संबंध मजबूत हुए हैं।”
- ★“श्रीलंका में ‘सुनामी’ से हुई तबाही के बाद के पुनर्निर्माण कार्यों में भारतीय मदद से भी दोनों देश एक दूसरे के करीब आए हैं।”
7.4 भूटान★
- “भारत के भूटान के साथ भी बहुत अच्छे रिश्ते हैं और भूटानी सरकार के साथ कोई बड़ा झगड़ा नहीं है।”
- ★“भूटान से अपने काम का संचालन कर रहे पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादियों और गुरिल्लों को भूटान ने अपने क्षेत्र से खदेड़ भगाया। भूटान के इस कदम से भारत को बड़ी मदद मिली है।”
- ★“भारत भूटान में पनबिजली की बड़ी परियोजनाओं में हाथ बँटा रहा है। इस हिमालयी देश के विकास कार्यों के लिए सबसे ज्यादा अनुदान भारत से हासिल होता है।”
7.5 मालदीव★
- “मालदीव के साथ भारत के संबंध सौहार्दपूर्ण तथा गर्मजोशी से भरे हैं।”
- ★★“1988 में श्रीलंका से आए कुछ भाड़े के तमिल सैनिकों ने मालदीव पर हमला किया। मालदीव ने जब आक्रमण रोकने के लिए भारत से मदद माँगी तो भारतीय वायुसेना और नौसेना ने तुरंत कार्रवाई की।”
- “भारत ने मालदीव के आर्थिक विकास, पर्यटन और मत्स्य उद्योग में भी मदद की है।”
7.6 भारत की स्थिति — ‘बड़े होने’ की समस्या(प्रश्न 11 का उत्तर)★★
| पक्ष | पाठ्यपुस्तक क्या कहती है |
|---|---|
| छोटे देशों की दृष्टि | ★“भारत का आकार बड़ा है और वह शक्तिशाली है। इसकी वजह से अपेक्षाकृत छोटे देशों का भारत के इरादों को लेकर शक करना लाजिमी है।” ★“छोटे देशों को लगता है कि भारत दक्षिण एशिया में अपना दबदबा कायम करना चाहता है।” |
| भारत की दृष्टि | ★“भारत सरकार को अक्सर महसूस होता है कि उसके पड़ोसी देश उसका बेज़ा फायदा उठा रहे हैं।” ★“भारत नहीं चाहता कि इन देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो। उसे भय लगता है कि ऐसी स्थिति में बाहरी ताकतों को इस क्षेत्र में प्रभाव जमाने में मदद मिलेगी।” |
★पर सारे झगड़े भारत-केंद्रित नहीं हैं —
- नेपाल-भूटान — जातीय मूल के नेपालियों के भूटान आप्रवास पर मतभेद;
- बांग्लादेश-म्यांमार — रोहिंग्या लोगों के म्यांमार से भारत और बांग्लादेश में आप्रवास पर मतभेद;
- बांग्लादेश और नेपाल — हिमालयी नदियों के जल की हिस्सेदारी को लेकर खटपट।
★★और फिर भी पाठ का निष्कर्ष: “यह बात सही है कि इस इलाके के सभी बड़े झगड़े भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच हैं। इसका एक कारण दक्षिण एशिया का भूगोल भी है जहाँ भारत बीच में स्थित है और बाकी देश भारत की सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते हैं।” (यही प्रश्नावली के प्रश्न 1-ङ का भी आधार है।)
साइड-प्रश्न (पृ. 39): “ऐसा क्यों है कि हर पड़ोसी देश को भारत से कुछ-न-कुछ परेशानी है? क्या हमारी विदेश नीति में कुछ गड़बड़ी है? या यह केवल हमारे बड़े होने के कारण है?”
8. शांति और सहयोग (पृ. 41–43)
8.1 दक्षेस (SAARC)★★
- “अनेक संघर्षों के बावजूद दक्षिण एशिया के देश आपस में दोस्ताना रिश्ते तथा सहयोग के महत्व को पहचानते हैं। शांति के प्रयास द्विपक्षीय भी हुए हैं और क्षेत्रीय स्तर पर भी।”
- ★“दक्षेस (साउथ एशियन एसोशियन फॉर रिजनल कोऑपरेशन — SAARC) दक्षिण एशियाई देशों द्वारा बहुस्तरीय साधनों से आपस में सहयोग करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। इसकी शुरुआत 1985 में हुई।”
- !★“दुर्भाग्य से विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज्यादा सफलता नहीं मिली है।”
8.2 साफ्टा (SAFTA)★★
- ★“दक्षेस के सदस्य देशों ने सन् 2002 में ‘दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार-क्षेत्र समझौते’ (SAFTA) पर दस्तख़त किये। इसमें पूरे दक्षिण एशिया के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने का वायदा है।”
- ★★“यदि दक्षिण एशिया के सभी देश अपनी सीमारेखा के आर-पार मुक्त-व्यापार पर सहमत हो जाएँ तो इस क्षेत्र में शांति और सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौते (SAFTA) के पीछे यही भावना काम कर रही है।”
- ★“इस समझौते पर 2004 में हस्ताक्षर हुए और यह समझौता 1 जनवरी 2006 से प्रभावी हो गया। इस समझौते का लक्ष्य है कि इन देशों के बीच आपसी व्यापार में लगने वाले सीमा शुल्क को कम कर दिया जाए।”
! तीन अलग दृष्टिकोण —
| कौन | क्या मानता है |
|---|---|
| कुछ छोटे देश | ★“‘साफ्टा’ की ओट लेकर भारत उनके बाज़ार में सेंध मारना चाहता है और व्यावसायिक उद्यम तथा व्यावसायिक मौजूदगी के जरिये उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है।” |
| भारत | ★“‘साफ्टा’ से इस क्षेत्र के हर देश को फायदा होगा और क्षेत्र में मुक्त व्यापार बढ़ने से राजनीतिक मसलों पर सहयोग ज्यादा बेहतर होगा।” |
| भारत में कुछ लोग | “‘साफ्टा’ के लिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं क्योंकि भारत भूटान, नेपाल और श्रीलंका से पहले ही द्विपक्षीय व्यापार समझौता कर चुका है।” |
8.3 भारत-पाकिस्तान — शांति के प्रयास(प्रश्न 6 का उत्तर)★
“हालाँकि भारत और पाकिस्तान के संबंध कभी खत्म न होने वाले झगड़ों और हिंसा की एक कहानी जान पड़ते हैं फिर भी तनाव को कम करने और शांति बहाल करने के लिए इन देशों के बीच लगातार प्रयास हुए हैं।”
- ★“दोनों देश युद्ध के जोखिम कम करने के लिए विश्वास बहाली के उपाय करने पर सहमत हो गये हैं।”
- ★“सामाजिक कार्यकर्ता और महत्त्वपूर्ण हस्तियाँ दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती का माहौल बनाने के लिए एकजुट हुई हैं।”
- “दोनों देशों के नेता एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने और दोनों देशों के बीच मौजूद बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सम्मेलनों में भेंट करते हैं।”
- ★“भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार बढ़ गया था और वीजा अधिक आसानी से दिए जाने लगे।”
- ! “हालाँकि, हाल के दिनों में स्थिति बदल गई है।”
8.4 बाहरी शक्तियाँ(प्रश्न 8 का उत्तर)★★
★“कोई भी क्षेत्र हवा में नहीं होता। चाहे कोई क्षेत्र अपने को गैर इलाकाई ताकतों से अलग रखने की जितनी भी कोशिश करे उस पर बाहरी ताकतों और घटनाओं का असर पड़ता ही है।”
- ★“चीन और संयुक्त राज्य अमरीका दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं।”
चीन:
- “पिछले दस वर्षों में भारत और चीन के संबंध बेहतर हुए हैं।”
- !★“चीन की रणनीतिक साझेदारी पाकिस्तान के साथ है और यह भारत-चीन संबंधों में एक बड़ी कठिनाई है।”
- “विकास की ज़रूरत और वैश्वीकरण के कारण एशिया महादेश के ये दो बड़े देश ज्यादा नजदीक आये हैं। सन् 1991 के बाद से इनके आर्थिक संबंध ज्यादा मज़बूत हुए हैं।”
अमरीका:
- ★“शीतयुद्ध के बाद दक्षिण एशिया में अमरीकी प्रभाव तेजी से बढ़ा है।”
- “अमरीका ने भारत और पाकिस्तान दोनों से अपने संबंध बेहतर किए हैं। वह भारत-पाक के बीच लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।”
- “दोनों देशों में आर्थिक सुधार हुए हैं और उदार नीतियाँ अपनाई गई हैं। इससे दक्षिण एशिया में अमरीकी भागीदारी ज्यादा गहरी हुई है।”
- ★“अमरीका में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों की संख्या अच्छी-खासी है। फिर, इस क्षेत्र की जनसंख्या और बाजार का आकार भी भारी भरकम है। इस कारण इस क्षेत्र की सुरक्षा और शांति के भविष्य से अमरीका के हित भी बंधे हुए हैं।”
8.5 अध्याय का अंतिम वाक्य★★
★★“बहरहाल, दक्षिण एशिया को संघर्षों की आशंका वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहेगा अथवा यह एक ऐसे क्षेत्रीय गुट के रूप में उभरेगा जिसके सांस्कृतिक गुण-धर्म तथा व्यापारिक हित एक हैं — यह बात किसी बाहरी शक्ति से ज्यादा यहाँ के लोगों और सरकारों पर निर्भर है।”
कार्टून (पृ. 42): दो कार्टून — “भारत और पाकिस्तान से लिए गए दो कार्टून इस क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वाले दो बाहरी खिलाड़ियों की भूमिका की व्याख्या करते हैं। ये बाहरी खिलाड़ी कौन हैं? क्या आपको इन दोनों के दृष्टिकोण में कुछ समानता दिखाई देती है?”
- पहला (चीन) — “जनाब हू। कारोबार, कामर्स, इकोनोमी! आप भारत के साथ केवल बुनियादी मुद्दों की बातें क्यों नहीं करते?”
- दूसरा (अमरीका) — टेनिस-नेट पर अंपायर: “अंपायर को तय करना है कि गेंद भारत के पाले में है या पाकिस्तान के।”
1. देशों की पहचान करें — (क) राजतंत्र, लोकतंत्र-समर्थक समूहों और अतिवादियों के बीच संघर्ष के कारण राजनीतिक अस्थिरता का वातावरण बना। (ख) चारों तरफ भूमि से घिरा देश। (ग) दक्षिण एशिया का वह देश जिसने सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया। (घ) सेना और लोकतंत्र-समर्थक समूहों के बीच संघर्ष में सेना ने लोकतंत्र के ऊपर बाजी मारी। (ङ) दक्षिण एशिया के केंद्र में अवस्थित। इस देश की सीमाएँ दक्षिण एशिया के अधिकांश देशों से मिलती हैं। (च) पहले इस द्वीप में शासन की बागडोर सुल्तान के हाथ में थी। अब यह एक गणतंत्र है। (छ) ग्रामीण क्षेत्र में छोटी बचत और सहकारी ऋण की व्यवस्था के कारण इस देश को ग़रीबी कम करने में मदद मिली है। (ज) एक हिमालयी देश जहाँ संवैधानिक राजतंत्र है। यह देश भी हर तरफ से भूमि से घिरा है।
2. दक्षिण एशिया के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ग़लत है? (क) दक्षिण एशिया में सिर्फ़ एक तरह की राजनीतिक प्रणाली चलती है। (ख) बांग्लादेश और भारत ने नदी-जल की हिस्सेदारी के बारे में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। (ग) ‘साफ्टा’ पर हस्ताक्षर इस्लामाबाद के 12वें सार्क-सम्मेलन में हुए। (घ) दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन और संयुक्त राज्य अमरीका महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3. पाकिस्तान के लोकतंत्रीकरण में कौन-कौन सी कठिनाइयाँ हैं?
4. नेपाल के लोग अपने देश में लोकतंत्र को बहाल करने में कैसे सफल हुए?
5. श्रीलंका के जातीय-संघर्ष में किनकी भूमिका प्रमुख है?
6. भारत और पाकिस्तान के बीच हाल में क्या समझौते हुए?
7. ऐसे दो मसलों के नाम बताएँ जिन पर भारत-बांग्लादेश के बीच आपसी सहयोग है और इसी तरह दो ऐसे मसलों के नाम बताएँ जिन पर असहमति है।
8. दक्षिण एशिया में द्विपक्षीय संबंधों को बाहरी शक्तियाँ कैसे प्रभावित करती हैं?
9. दक्षिण एशिया के देशों के बीच आर्थिक सहयोग की राह तैयार करने में दक्षेस (सार्क) की भूमिका और सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। दक्षिण एशिया की बेहतरी में ‘दक्षेस’ (सार्क) ज्यादा बड़ी भूमिका निभा सके, इसके लिए आप क्या सुझाव देंगे?
10. दक्षिण एशिया के देश एक-दूसरे पर अविश्वास करते हैं। इससे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर यह क्षेत्र एकजुट होकर अपना प्रभाव नहीं जमा पाता। इस कथन की पुष्टि में कोई भी दो उदाहरण दें और दक्षिण एशिया को मजबूत बनाने के लिए उपाय सुझाएँ।
11. दक्षिण एशिया के देश भारत को एक बाहुबली समझते हैं जो इस क्षेत्र के छोटे देशों पर अपना दबदबा जमाना चाहता है और उनके अंदरूनी मामलों में दखल देता है। इन देशों की ऐसी सोच के लिए कौन-कौन सी बातें जिम्मेदार हैं?
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उत्तर-कुंजी: पाठ्यपुस्तक में कोई उत्तर-कुंजी मुद्दित नहीं है और कोई सारांश खंड भी नहीं है। उत्तर
05-Question-Bank.mdमें शिक्षक द्वारा तैयार हैं।
शब्दावली
| पद | अंग्रेज़ी | अध्याय में प्रयुक्त अर्थ |
|---|---|---|
| दक्षिण एशिया | South Asia | ★बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका — सात देश; चीन इसका अंग नहीं माना जाता |
| संवैधानिक राजतंत्र | Constitutional monarchy | नेपाल में 2006 तक; भूटान में 2008 से |
| लोकतांत्रिक गणराज्य | Democratic republic | नेपाल — 2008 से |
| सल्तनत | Sultanate | मालदीव — 1968 तक |
| अध्यक्षात्मक प्रणाली | Presidential system | मालदीव 1968 से; बांग्लादेश में 1975 के संशोधन के बाद |
| सिएटो / सेंटो | SEATO / CENTO | शीतयुद्धकालीन सैन्य गुट, जिनमें पाकिस्तान 1954–55 में शामिल हुआ |
| छ: सूत्री प्रस्ताव | Six-point proposal | ★1966 — शेख मुजीबुर्रहमान का, पूर्वी पाकिस्तान को ज्यादा स्वायत्तता के लिए |
| अवामी लीग | Awami League | ★शेख मुजीबुर्रहमान की पार्टी — 1970 में पूर्वी पाकिस्तान की सारी सीटें जीतीं |
| बांग्लादेश नेशनल पार्टी | BNP | जियाउर्रहमान द्वारा बनायी गई; 1979 के चुनाव में विजयी |
| सिंहली / तमिल | Sinhala / Tamil | श्रीलंका के बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदाय |
| लिट्टे | LTTE | ★‘लिबरेशन टाइगर्स ऑव तमिल ईलम’ — 1983 से सशस्त्र संघर्ष; 2009 में खत्म |
| तमिल ईलम | Tamil Eelam | ★श्रीलंका के तमिलों के लिए एक अलग देश की माँग |
| भारतीय शांति सेना | IPKF | ★1987–90; 1989 में “लक्ष्य हासिल किए बिना” वापस बुलायी गई |
| असलंग्नता की नीति | Policy of disengagement | ★1987 के बाद श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में भारत की नीति |
| सेवेन पार्टी अलाएंस | Seven Party Alliance | ★नेपाल के अप्रैल 2006 के आंदोलन का नेतृत्व — माओवादियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ |
| नियंत्रण-सीमा रेखा | Line of Control | 1948 के युद्ध के बाद कश्मीर के दो हिस्सों के बीच |
| पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर | PoK | 1948 के युद्ध के फलस्वरूप बना हिस्सा |
| सिंधु-जल संधि | Indus Waters Treaty | ★1960, विश्व बैंक की मदद से; “कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी कायम है” |
| सरक्रिक | Sir Creek | ★कच्छ के रन में सीमारेखा का विवाद; इसका असर समुद्री-संसाधन के नियंत्रण पर भी |
| सियाचिन ग्लेशियर | Siachen Glacier | भारत-पाक के बीच सामरिक विवाद |
| आईएसआई | ISI | इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस — पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी |
| दक्षेस | SAARC | ★साउथ एशियन एसोशियन फॉर रिजनल कोऑपरेशन; शुरुआत 1985 |
| सापटा | SAPTA | 1993, सातवें सम्मेलन (ढाका) — आपसी व्यापार में वरीयता की संधि |
| साफ्टा | SAFTA | ★★दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार-क्षेत्र समझौता; 2002 में दस्तख़त, 2004 में हस्ताक्षर, 1 जनवरी 2006 से प्रभावी |
| फरक्का संधि | Farakka Treaty | ★दिसंबर 1996 — गंगा नदी के पानी में हिस्सेदारी पर भारत-बांग्लादेश |
| शिमला-समझौता | Shimla Agreement | जुलाई 1972 |
| ताशकंद समझौता | Tashkent Agreement | 1966 |
| परिक्षेत्र | Enclave | ★2015 में भारत-बांग्लादेश ने कुछ का आदान-प्रदान किया |
| लुक ईस्ट / एक्ट ईस्ट | Look East / Act East | बांग्लादेश इसका हिस्सा; 2014 से ‘एक्ट ईस्ट’ |
| विश्वास बहाली के उपाय | Confidence Building Measures | युद्ध के जोखिम कम करने के लिए |
मुख्य आँकड़े और तिथियाँ
| मान | संदर्भ |
|---|---|
| सात | दक्षिण एशिया के देश |
| 1947 / 1948 | भारत-पाकिस्तान का उदय / श्रीलंका (सिलोन) की आज़ादी |
| 1954–55 | पाकिस्तान सिएटो और सेंटो में शामिल |
| सितंबर 1960 | ★सिंधु-जल संधि (विश्व बैंक की मदद से) |
| 1965 / 1966 | भारत-पाक युद्ध / ताशकंद समझौता और छ: सूत्री प्रस्ताव |
| 1970 | अवामी लीग को पूर्वी पाकिस्तान की सारी सीटें |
| मार्च 1971 / अगस्त 1971 / दिसंबर 1971 | बांग्लादेश की आज़ादी की उद्घोषणा / भारत-सोवियत 20 वर्षीय मैत्री संधि / युद्ध और बांग्लादेश की मुक्ति |
| 1971–1977 | जुल्फ़िकार अली भुट्टो की निर्वाचित सरकार |
| जुलाई 1972 | शिमला-समझौता |
| मई 1974 | भारत का परमाणु-परीक्षण |
| 1975 | बांग्लादेश में संविधान संशोधन; अगस्त में शेख मुजीब की हत्या |
| 1976 | पाकिस्तान-बांग्लादेश कूटनयिक संबंध बहाल |
| 1977 | जनरल जियाउल-हक ने भुट्टो सरकार गिरायी |
| 1979 | जियाउर्रहमान चुनाव में विजयी |
| 1983 | ★लिट्टे का सशस्त्र संघर्ष शुरू |
| दिसंबर 1985 | ★दक्षेस का पहला सम्मेलन (ढाका) |
| 1987 / 1987–90 | भारत-श्रीलंका समझौता / भारतीय शांति सेना का अभियान |
| 1988 | ★मालदीव में भारतीय हस्तक्षेप; बेनज़ीर भुट्टो की सरकार; परमाणु ठिकानों पर हमला न करने का समझौता |
| 1988–91 | पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में लोकतंत्र की बहाली |
| 1989 | ★भारत ने शांति सेना “लक्ष्य हासिल किए बिना” वापस बुलायी |
| 1990 | ★नेपाल में नया लोकतांत्रिक संविधान; इरशाद को पद छोड़ना पड़ा |
| 1991 | बांग्लादेश में चुनाव; भारत-चीन आर्थिक संबंध मज़बूत होने लगे |
| 1993 | दक्षेस का सातवाँ सम्मेलन (ढाका) — SAPTA |
| दिसंबर 1996 | ★फरक्का संधि |
| मई 1998 / दिसंबर 1998 | ★भारत (पोखरण) और पाकिस्तान (चगाई) के परमाणु परीक्षण / भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार संधि |
| फरवरी 1999 / जून–जुलाई 1999 | वाजपेयी की लाहौर बस-यात्रा / ★करगिल-युद्ध |
| 1999 | ★मुशर्रफ ने नवाज़ शरीफ़ को हटाया |
| जुलाई 2001 | आगरा-बैठक असफल; मुशर्रफ का राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन |
| 2002 | SAFTA पर दस्तख़त; नेपाल में राजा ने संसद भंग की |
| फरवरी 2004 | ★12वें दक्षेस सम्मेलन में SAFTA पर हस्ताक्षर |
| जून 2005 | मालदीव की संसद ने बहुदलीय प्रणाली के पक्ष में एकमत से मतदान |
| अप्रैल 2006 | ★★नेपाल में देशव्यापी लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शन; संसद बहाल |
| 1 जनवरी 2006 | ★SAFTA प्रभावी हुआ |
| 2007 | ★अफ़गानिस्तान दक्षेस का सदस्य बना |
| 2008 | ★नेपाल लोकतांत्रिक गणराज्य; भूटान संवैधानिक राजतंत्र; पाकिस्तान में लोकतांत्रिक शासन की वापसी |
| 2009 | ★लिट्टे को खत्म कर दिया गया |
| नवंबर 2014 | 18वाँ दक्षेस सम्मेलन, काठमांडू |
| 2015 | ★नेपाल का नया संविधान; भारत-बांग्लादेश परिक्षेत्रों का आदान-प्रदान |
| 2018 | मालदीव में एमडीपी की जीत |
| 19 हजार से अधिक | सर्वेक्षण में शामिल नागरिक |
| 88 / 93 / 92 / 92 / 84 / 79 | लोकतंत्र की उपयुक्तता — दक्षिण एशिया / बांग्लादेश / श्रीलंका / भारत / पाकिस्तान / नेपाल |
| 76 / 130 / 136 / 149 / 150 | HDI स्थान — श्रीलंका / भारत / बांग्लादेश / नेपाल / पाकिस्तान |
भ्रमित करने वाले युग्मध्यान
| युग्म | भेद |
|---|---|
| सात देश बनाम चीन | ★चीन क्षेत्र का प्रमुख देश है, पर “दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता” |
| नेपाल बनाम भूटान | दोनों भूमि से घिरे हिमालयी देश — पर नेपाल 2008 में गणराज्य बना; भूटान 2008 में संवैधानिक राजतंत्र |
| मालदीव 1968 बनाम 2005 | 1968 — सल्तनत से गणतंत्र; जून 2005 — बहुदलीय प्रणाली के पक्ष में एकमत मतदान |
| SAPTA (1993) बनाम SAFTA (2004) | वरीयता की संधि बनाम मुक्त व्यापार क्षेत्र |
| SAFTA — तीन तिथियाँ | ★2002 दस्तख़त · फरवरी 2004 हस्ताक्षर (12वाँ सम्मेलन) · 1 जनवरी 2006 प्रभावी |
| दक्षेस — 1985 बनाम 2007 | 1985 शुरुआत (ढाका) बनाम 2007 में अफ़गानिस्तान सदस्य बना |
| 1948 बनाम 1965 का युद्ध | 1948 से कश्मीर के दो हिस्से और नियंत्रण-सीमा रेखा बनी; 1965 से कुछ हल नहीं निकला |
| पोखरण बनाम चगाई | भारत बनाम पाकिस्तान के 1998 के परीक्षण-स्थल |
| 1987 बनाम 1989 (श्रीलंका) | 1987 — समझौता और शांति सेना भेजी गई; 1989 — “लक्ष्य हासिल किए बिना” वापस बुलायी गई |
| 1983 बनाम 2009 (लिट्टे) | सशस्त्र संघर्ष का आरंभ बनाम लिट्टे का खात्मा |
| शेख मुजीब — 1971 बनाम 1975 | मुक्ति के नायक बनाम एक-दलीय शासन और अगस्त 1975 में हत्या |
| जियाउर्रहमान बनाम इरशाद | BNP के संस्थापक, 1979 में विजयी बनाम अगला सैनिक शासक, 1990 में पद छोड़ा |
| अयूब खान · याहिया खान · जियाउल-हक · मुशर्रफ | चार सैनिक शासक — क्रम याद रखिए |
| बेनज़ीर भुट्टो बनाम नवाज़ शरीफ़ | शीतयुद्ध के बाद की पहली और दूसरी लोकतांत्रिक सरकारें |
| नेपाल — 1990 बनाम अप्रैल 2006 | पहला आंदोलन (नया संविधान) बनाम दूसरा आंदोलन (संसद की बहाली) |
| फरक्का (1996) बनाम सिंधु-जल (1960) | भारत-बांग्लादेश, गंगा बनाम भारत-पाकिस्तान, सिंधु |