अध्याय 8किसान, ज़मींदार और राज्य

रिवीजन नोट्स14 मिनट

★= अति-संभावित परीक्षा-बिंदु | पुस्तक: भाग-2, पृ. 196–223 | काल: 16वीं–17वीं सदी

1. एक नज़र में

तथ्यउत्तर
गाँवों में आबादी★~85 फ़ीसदी
मुग़ल आमदनी का मुख्य स्रोतकृषि उत्पादन से उगाही
मुख्य स्रोत-ग्रंथ★आइन-ए-अकबरी — अबुल फ़ज़्ल; 1598 (42वाँ शासन-वर्ष), 5 संशोधन
आइन का नज़रिया★★“सत्ता के ऊँचे गलियारों का नज़रिया”
पूरक स्रोत17वीं-18वीं सदी के गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान दस्तावेज़ + ईस्ट इंडिया कंपनी
1600–1700 आबादी-वृद्धि★~5 करोड़ (~33%)

2. किसान और ज़मीन★

  • शब्द: रैयत (बहु. रिआया), मुज़रियान, किसान, आसामी
  • ★★खुद-काश्त = अपने गाँव में ज़मीन वाले | पाहि-काश्त = दूसरे गाँव से ठेके पर; कारण — मर्ज़ी (बेहतर कर-शर्तें) या मजबूरी (अकाल)
  • औसत — जोड़ी बैल + दो हल; गुजरात 6 एकड़ = समृद्ध; बंगाल 5 एकड़ ऊपरी सीमा, 10 एकड़ = अमीर आसामी
  • ★व्यक्तिगत मिल्कियत — ज़मीन खरीदी-बेची जाती; हदों पर मिट्टी-ईंट-काँटों के निशान
  • स्रोत 1 (बाबरनामा): गाँव “एक लमहे में” उजड़ते-बसते — कारण: वर्षा-खेती, झोंपड़ी, ख़स घास, अपार जंगल, बेशुमार आबादी → ★किसान-गतिशीलता

3. सिंचाई, तकनीक, फ़सलें

  • कृषि-विस्तार के 3 कारण — ज़मीन की बहुतायत, मज़दूर, गतिशीलता; प्राथमिक उद्देश्य — पेट भरना
  • 40 इंच+ वर्षा → चावल; कम → गेहूँ; कमतर → ज्वार-बाजरा; ★“मानसून = भारतीय कृषि की रीढ़”
  • राज्य-सहायता: नहरें-नाले, मरम्मत; ★शाह नहर (पंजाब, शाहजहाँ)
  • स्रोत 2 (बाबरनामा): रहट — लाहौर, दीपालपुर; बालटी — आगरा, चाँदवार, बयाना
  • तकनीक — लकड़ी का हलका हल + लोहे का फाल (गहरा नहीं खोदता → नमी बचती); बरमा से बुवाई पर ★हाथ से छिड़काव ज़्यादा प्रचलित
  • खरीफ़ (पतझड़) + रबी (वसंत); 2–3 फ़सलें; ★★आगरा 39, दिल्ली 43 फ़सलें; बंगाल — चावल की 50 किस्में
  • ★★जिन्स-ए-कामिल (सर्वोत्तम फ़सलें) — कपास (मध्य भारत-दक्कन), गन्ना (बंगाल की चीनी); तिलहन-दलहन भी नकदी; राज्य बढ़ावा देता — ज़्यादा कर
  • ★तम्बाकू: दक्कन → 17वीं सदी के आरंभ में उत्तर भारत; आइन की सूची में नहीं; अकबर ने 1604 में पहली बार देखा; जहाँगीर की पाबंदी बेअसर; सदी के अंत तक प्रमुख वस्तु
  • नयी दुनिया से: मक्का (अफ्रीका-स्पेन मार्ग; पश्चिम भारत की मुख्य फ़सल), टमाटर-आलू-मिर्च, अनानास-पपीता

4. ग्रामीण समुदाय★

तीन घटक: खेतिहर किसान • पंचायत • मुखिया (मुक़द्दम/मंडल)

4.1 जाति

  • ★“ज़मीन की कमी नहीं, फिर भी कुछ जातियों को सिर्फ़ नीच काम → ग़रीब रहने को मजबूर”; हालत दलितों जैसी
  • हलालख़ोरान (मुसलमान ‘नीच’ समूह) — गाँव की हदों के बाहर; मल्लाहज़ादे (बिहार, नाविकों के पुत्र) — दासों-सी तुलना
  • जाति-गरीबी-हैसियत का सीधा रिश्ता निचले तबकों में — बीच में नहीं
  • ★मारवाड़ की 17वीं सदी की किताब — राजपूत किसान; जाट नीचे; वृंदावन के गौरव — राजपूत-दावा; अहीर-गुज्जर-माली ऊपर उठे (पशुपालन-बागवानी का मुनाफ़ा); पूर्व में सदगोप-कैवर्त

4.2 पंचायत★★

  • बुज़ुर्गों का जमावड़ा — पुश्तैनी संपत्ति-अधिकार वाले; अल्पतंत्र; “नीच” मज़दूरों की जगह नहीं; फ़ैसला सब पर बाध्य
  • मुखिया — बुज़ुर्गों की आम सहमति से चुनाव → ★ज़मींदार की मंज़ूरी; भरोसा टूटे तो बर्खास्त; काम — आमदनी-ख़र्च की निगरानी (पटवारी मदद करता)
  • ख़ज़ाना (सबका योगदान): कर-अधिकारियों की ख़ातिरदारी • बाढ़ से निपटना • बाँध-नहर जैसे सामुदायिक कार्य
  • सामाजिक नियमन — जाति की हदें; पूर्वी भारत में शादियाँ मंडल की मौजूदगी में; ★दंड — जुर्माना + निष्कासित (सीमित समय; जाति-पेशा दोनों से हाथ धोना)
  • जाति पंचायतें — ताकतवर; ★राजस्थान — दीवानी झगड़े, ज़मीन-दावे, शादी-मानदंड, तरजीह-क्रम; ★★“फ़ौजदारी छोड़ ज़्यादातर मामलों में राज्य जाति पंचायत के फ़ैसले मानता था”
  • ★★दरख़्वास्तें (राजस्थान-महाराष्ट्र): ज़बरन कर/बेगार के ख़िलाफ़ — निचला तबका, सामूहिक भी; “न्यूनतम बुनियादी साधन = परंपरागत रिवाजी हक़”; समझौता न हो → ★गाँव छोड़कर भागना = “बड़ा प्रभावी हथियार”
  • भ्रष्ट मंडल — पटवारी संग हेरा-फेरी; अपना कर कम, बोझ छोटे किसानों पर

4.3 दस्तकार

  • कहीं-कहीं 25% घर दस्तकारों के; किसान-दस्तकार भेद मुश्किल; फ़ुरसत के महीनों में दस्तकारी
  • अदायगी: फ़सल का हिस्सा / ज़मीन का टुकड़ा; महाराष्ट्र — ★मीरास/वतन (पुश्तैनी); जजमानी — 18वीं सदी बंगाल (लोहार-बढ़ई-सुनार को “रोज़ का भत्ता और खाने के लिए नकदी”); ! शब्द 16-17वीं सदी में प्रचलित नहीं

4.4 “छोटा गणराज्य”?★★

  • 19वीं सदी के अंग्रेज़ अफ़सरों की धारणा; NCERT का खंडन — तीन कारण: व्यक्तिगत मिल्कियत • जाति-जेंडर की गहरी विषमताएँ • ताकतवरों का शोषण व न्याय-अधिकार
  • नकद के रिश्ते: केंद्रीय इलाकों में कर नकद; निर्यात-दस्तकारों को नकद मज़दूरी/पूर्व-भुगतान; कपास-रेशम-नील नकद; ★सराफ़ = गाँव का मुद्रा-परिवर्तक/बैंकर (तैवर्नियर, फ्रांसीसी यात्री)

5. महिलाएँ★★

  • श्रम-विभाजन: मर्द — जुताई-हल; महिलाएँ — बुआई, निराई, कटाई, दाना निकालना; “कंधे से कंधा”
  • पूर्वाग्रह: राजस्वला — हल/कुम्हार-चाक वर्जित (पश्चिम); पान-बगान वर्जित (बंगाल)
  • ★“जितना वाणिज्यीकरण, उतनी महिला-श्रम की माँग” — सूत, मिट्टी, कढ़ाई; नियोक्ता-घर व बाज़ार भी
  • ★★महत्त्वपूर्ण संसाधन (प्रजनन-क्षमता); शादीशुदा महिलाओं की कमी (कुपोषण, बार-बार माँ बनना, प्रसव-मृत्यु) → “दुल्हन की क़ीमत” (दहेज नहीं); तलाकशुदा-विधवा विवाह वैध
  • ★★नियंत्रण: मुखिया मर्द; बेवफ़ाई के शक पर भयानक दंड; पंचायत-दरख़्वास्तों में महिला का नाम दर्ज नहीं (“मर्द की माँ/बहन/पत्नी”)
  • मर्दों की बेवफ़ाई हमेशा दंडित नहीं; पर राज्य + “ऊँची” जाति — भरण-पोषण सुनिश्चित कराते
  • ★★संपत्ति: भूमिहर भद्रजनों में पुश्तैनी हक़; पंजाब — विधवाएँ भी ज़मीन-बाज़ार में विक्रेता; हिंदू-मुसलमान महिलाओं को ज़मींदारी (बेचने-गिरवी को स्वतंत्र); ★बंगाल — राजशाही ज़मींदारी (18वीं सदी की सबसे बड़ी में) — कर्ता-धर्ता एक स्त्री

6. जंगल और कबीले★

  • जंगल/झाड़ी = खरबंदी; फैलाव — झारखंड-पूर्वी भारत, मध्य भारत, तराई, पश्चिमी घाट, दक्कन; औसत ★~40%
  • ★★‘जंगली’ = जंगल-उत्पाद, शिकार, स्थानांतरीय खेती से गुज़ारा — “सभ्यता का न होना बिलकुल नहीं”
  • ★भील ऋतु-चक्र: बसंत — जंगल-उत्पाद; गर्मी — मछली; मानसून — खेती; शरद-जाड़ा — शिकार
  • राज्य की नज़र: जंगल = मवास (बदमाशों का अड्डा); बाबर — जंगल रक्षाकवच, पीछे परगना के लोग “कड़े विद्रोही”
  • घुसपैठ: हाथी (पेशकश में); ★★शिकार अभियान = सद्भावनापूर्ण शासन (कोने-कोने का दौरा; चित्रों में संकेत); वाणिज्य — शहद, मधुमोम, लाक (★लाक = 17वीं सदी का प्रमुख समुद्री निर्यात); लोहानी कबीला (पंजाब) — भारत-अफ़ग़ानिस्तान + पंजाब व्यापार
  • बदलाव: सरदार → ज़मींदार/राजा; खानदानी सेना; सिंध — 6000 घुड़सवार, 7000 पैदल; ★अहोम पायक — ज़मीन बदले सैनिक सेवा; जंगली हाथी पर एकाधिकार; संक्रमण 16वीं सदी में पूर्ण विकसित (आइन); कोच राजा — पड़ोसी कबीलों पर कब्ज़ा
  • सांस्कृतिक: सूफ़ी पीर → खेतिहर समुदायों का धीरे-धीरे इस्लाम अपनाना
  • स्रोत 3 — चंडीमंगल (16वीं सदी, बंगाली; मुकुंदराम चक्रवर्ती): नायक कालकेतु; ज़फ़र मियाँ + 22,000; “कुल्हाड़ियों की आवाज़ सुनकर शेर डर गए”
  • स्रोत 4 — पहाड़-मैदान व्यापार (आइन, ~1595, अवध): ऊपर से — सोना, ताँबा, कस्तूरी, याक-पूँछ, शहद, चुक, मजीठ, बाज़ पक्षी…; नीचे से — कपड़े, कहरुबा, नमक, हींग, गहने, शीशे-मिट्टी के बरतन
  • परिभाषाएँ: परगना = प्रशासनिक प्रमंडल; पेशकश = मुग़ल राज्य द्वारा ली जाने वाली भेंट

7. ज़मींदार★★

  • कमाई खेती से, पर उत्पादन में सीधी हिस्सेदारी नहीं; हैसियत के कारण — जाति + ख़िदमत (सेवाएँ)
  • ताक़त के तीन आधार: (1) मिल्कियत — निजी खेती, दिहाड़ी/पराधीन मज़दूर; बेच-नाम-गिरवी सकते; (2) राज्य की ओर से कर-वसूली (बदले वित्तीय मुआवज़ा); (3) किले + सैनिक टुकड़ियाँ
  • ★★पिरामिड का संकरा शीर्ष; अबुल फ़ज़्ल — “ऊँची जाति” ब्राह्मण-राजपूत गठबंधन; + मध्यम जातियाँ, मुसलमान ज़मींदार
  • उत्पत्ति: जंग में जीत संभावित; बेदखली बिना सनद (राज्यादेश) कम संभावना; ★धीमी प्रक्रिया के 4 तरीक़े: जंगल-बारी (नयी ज़मीनें बसाना), हस्तांतरण, राज्यादेश, ख़रीद → “निचली” जातियाँ भी दाख़िल; ज़मींदारी धड़ल्ले से खरीदी-बेची जाती
  • वंश-रणनीति: राजपूत-जाट (उत्तर); सदगोप (मध्य व द.-प. बंगाल)
  • ★विकास-भूमिका: बसावट की अगुआई; साजो-सामान व उधार; मौद्रीकरण में तेज़ी; फ़सल-बिक्री; हाट स्थापित करते
  • ★★★शोषक पर “पारस्परिकता, पैतृकवाद और संरक्षण का पुट” — दो प्रमाण: (1) भक्ति संतों ने ज़मींदारों (या साहूकारों) को शोषक नहीं दिखाया — निशाना राजस्व अधिकारी; (2) 17वीं सदी के कृषि विद्रोहों में ज़मींदारों को किसानों का समर्थन
  • ★समांतर सैनिक बल (आइन): 384,558 घुड़सवार; 4,277,057 पैदल; 1863 हाथी; 4260 तोप; 4500 नाव

8. भू-राजस्व प्रणाली★★

  • भू-राजस्व = मुग़ल साम्राज्य की आर्थिक बुनियाद; दीवान — पूरे राज्य की वित्तीय देख-रेख
  • ★★दो चरण: जमा = निर्धारण | हासिल = वास्तविक वसूली
  • अमील-गुज़ार = राजस्व वसूली करने वाला; अकबर का हुक्म — नक़द की कोशिश + फ़सल का विकल्प
  • राज्य हिस्सा ज़्यादा रखने की कोशिश; पर स्थानीय हालात से वसूली हमेशा संभव नहीं
  • नपाई — जुती + जोतने लायक दोनों; ★1665 — औरंगज़ेब: हर गाँव, हर किसान (आसामीवार) का सालाना हिसाब; ! जंगली इलाकों की नपाई नहीं हो पाई
  • ★★भूमि-वर्गीकरण (स्रोत 5):
वर्गपरिभाषा
पोलजहर फ़सल की सालाना खेती; कभी खाली नहीं
परौतीकुछ दिनों खेती रोकी जाती (ताकत वापसी हेतु)
चचर3–4 वर्ष खाली
बंजर5+ वर्ष से खेती नहीं
  • पहले दो की तीन किस्में (अच्छी-मध्यम-खराब) → तीनों का औसत = मध्यम उत्पाद → ★उसका एक-तिहाई = शाही शुल्क
  • ★★फ़सल-वसूली (स्रोत 6): कणकुत (कण=अनाज, कुत=अंदाज़ा; तीन पुलिंदे) • बटाई/भाओली (कटाई बाद सबकी मौजूदगी में बँटवारा; समझदार निरीक्षक चाहिए) • खेत बटाई (बुवाई बाद खेत बँटे) • लाँग बटाई (ढेर बनाकर बाँटना)
  • परिभाषाएँ: अमीन — प्रांतों में राजकीय नियम-पालन सुनिश्चित करने वाला; मनसबदारी — शीर्ष सैनिक-नौकरशाही तंत्र; भुगतान नक़दी या जागीर (राजस्व-आबंटन), तबादले होते
  • मानचित्र: बाबर 1530 → अकबर 1605 → औरंगज़ेब 1707

9. चाँदी का बहाव★

  • चार बड़े साम्राज्य: मुग़ल, मिंग (चीन), सफ़ावी (ईरान), ऑटोमन (तुर्की) → राजनीतिक स्थिरता → चीन-भूमध्यसागर व्यापार-जाल
  • निर्यात-भुगतान में एशिया में चाँदी आई → बड़ा हिस्सा भारत खिंचा; ★“भारत में चाँदी के प्राकृतिक संसाधन नहीं थे”
  • परिणाम: 16–18वीं सदी धातु-मुद्रा (चाँदी के रुपये) की स्थिर उपलब्धि; मुद्रा-संचार व सिक्का-ढलाई का अभूतपूर्व विस्तार; राज्य को नकदी कर में आसानी
  • ★जोवान्नी कारेरी — इटली का मुसाफ़िर, ~1690; (लेख बर्नियर पर आधारित) — विश्व का सोना-चाँदी “आख़िरकार यहीं पहुँच जाता है”; मार्ग — अमेरिका → यूरोप → तुर्की-फ़ारस-अरब → मोचा (लाल सागर), बसरा (फ़ारस की खाड़ी) → हिंदुस्तान; जापान की खानों से डच-मार्ग; यूरोप जाने वाली वस्तुएँ “सभी नकद में — जो वहीं रह जाता है”

10. आइन-ए-अकबरी★★

  • अकबरनामा — तीन जिल्दें: पहली दो ऐतिहासिक दास्तान; तीसरी = आइन (शाही नियम-कानून का सारांश + राजपत्र/Gazetteer)
  • 1598 ई. (42वाँ शासन-वर्ष), पाँच संशोधनों के बाद पूर्ण
  • ★★पाँच भाग (दफ़्तर): मंज़िल-आबादी (शाही घर-परिवार) • सिपह-आबादी (सैनिक-नागरिक प्रशासन; मनसबदार-विद्वान-कवि-कलाकारों की जीवनियाँ) • मुल्क-आबादी (वित्त-राजस्व; ★“बारह प्रांतों का बयान”) • चौथी-पाँचवीं (मज़हबी-साहित्यिक-सांस्कृतिक रिवाज + अकबर के “शुभ वचन”)
  • मुल्क-आबादी की सरकार-तालिकाएँ — आठ खाने: परगनात/महल, क़िला, अराज़ी व ज़मीन-ए-पाईमूद, नकदी, सुयूरग़ल (दान में दिया राजस्व-अनुदान), ज़मींदार; ★खाने 7-8 — ज़मींदारों की जातियाँ + फ़ौज (घुड़सवार, प्यादा, फ़ील=हाथी)
  • स्रोत 9 — अबुल फ़ज़्ल की विधि: दस्तावेज़-संग्रह; मुलाज़िमों-शाही परिवार से जवाब-तलबी; बुज़ुर्गों-जवानों के परखे बयान; सूबों से संस्मरण; दस्तावेज़ दफ़्तर (इलाही संवत 19वें साल से) की मूल प्रतियाँ/नकलें; मसौदे-ज्ञापनपत्र → “खुशकिस्मती के गुलाब बाग (अकबरनामा) को सींचने के लिए हौज़”
  • विश्वसनीयता: पाँच संशोधन; मौखिक की पुष्टि; ★आँकड़े अंकों + शब्दों दोनों में (नकल-ग़लती से बचाव)
  • ★★चार सीमाएँ: (1) जोड़ की ग़लतियाँ (मामूली); (2) विषमताएँ — ★बंगाल-उड़ीसा की ज़मींदार-जाति सूचनाएँ नहीं; (3) कीमतें-मज़दूरी अच्छे से दर्ज नहीं; (4) ★★सूची आगरा-केंद्रित — “देश के बाकी हिस्सों के लिए प्रासंगिकता सीमित”
  • फिर भी ★“असामान्य व अनोखा दस्तावेज़” — पहले के इतिहासकार केवल राजनीतिक वारदातें लिखते; आइन = संदर्भ बिंदु
  • अनुवाद: संपादन — हेनरी ब्लॉकमेन; एशियाटिक सोसाइटी (कलकत्ता), बिब्लियोथिका शृंखला; अंग्रेज़ी — खंड 1 ब्लॉकमेन (1873), खंड 2-3 एच.एस. जैरेट (1891, 1894)

11. काल-रेखा★

1526 बाबर (पानीपत-1, इब्राहिम लोदी) → 1530-40 हुमायूँ → 1540-55 शेरशाह से हार, सफ़ावी शरण → 1555-56 वापसी → 1556-1605 अकबर → 1605-27 जहाँगीर → 1628-58 शाहजहाँ → 1658-1707 औरंगज़ेब → 1739 नादिरशाह (दिल्ली-लूट) → 1761 पानीपत-3 (अब्दाली/मराठे) → 1765 बंगाल दीवानी कंपनी को → 1857 बहादुर शाह ज़फ़र → रंगून

12. स्मरण-सूत्र

  1. खुद = खुद के गाँव में; पाहि = पराए गाँव से
  2. भूमि-वर्ग: “पोल-पर-च-बं” (पोलज → परौती → चचर → बंजर = 0 → कुछ दिन → 3-4 वर्ष → 5+ वर्ष)
  3. वसूली: “कण-बट-खेत-लाँग” (अंदाज़ा → कटाई-बाद → बुवाई-बाद → ढेर)
  4. आइन: “मंज़िल-सिपह-मुल्क” + 2 (रिवाज-वचन) = 5 दफ़्तर
  5. फ़सल-संख्या: आगरा 39 < दिल्ली 43 < बंगाल-चावल 50
  6. चार साम्राज्य: “मु-मिं-स-ऑ” (मुग़ल, मिंग, सफ़ावी, ऑटोमन)
  7. अनुवादक: “ब्लॉक-1, जैरेट-2-3”

13. अंतिम 10 मिनट (परीक्षा-द्वार पर)

  1. 85% गाँव • आइन 1598, 5 संशोधन • “सत्ता के ऊँचे गलियारों का नज़रिया”
  2. रैयत-रिआया • खुद/पाहि-काश्त • गुजरात 6, बंगाल 5/10 एकड़
  3. शाह नहर-पंजाब-शाहजहाँ • रहट-बालटी (बाबरनामा) • 39-43-50
  4. जिन्स-ए-कामिल = कपास-गन्ना • तम्बाकू 1604-जहाँगीर-पाबंदी • आबादी +33%
  5. मुक़द्दम/मंडल — बुज़ुर्ग + ज़मींदार-मंज़ूरी • पटवारी • फ़ौजदारी छोड़ जाति-पंचायत मान्य • भागना = हथियार
  6. मीरास/वतन • जजमानी (18वीं सदी शब्द) • सराफ़-तैवर्नियर • “छोटा गणराज्य” खंडित
  7. महिलाएँ — दुल्हन की क़ीमत • नाम दर्ज नहीं • पंजाब-विधवा विक्रेता • राजशाही-स्त्री
  8. जंगल 40% • भील-चक्र • मवास • लाक-निर्यात • अहोम पायक • चंडीमंगल-कालकेतु
  9. ज़मींदार — जाति+ख़िदमत • मिल्कियत-वसूली-किले • जंगल-बारी • भक्ति-संत बनाम राजस्व अधिकारी • 3.84 लाख घुड़सवार
  10. जमा-हासिल • अमील-गुज़ार • पोलज-परौती-चचर-बंजर • मध्यम का ⅓ • कणकुत-बटाई • 1665 औरंगज़ेब • कारेरी ~1690 • ब्लॉकमेन-जैरेट