अध्याय 7एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर

रिवीजन नोट्स14 मिनट

★= अति-संभावित परीक्षा-बिंदु | पुस्तक: भाग-2, पृ. 170–195 | काल: चौदहवीं–सोलहवीं सदी

1. एक नज़र में अध्याय

तथ्यउत्तर
नाम का अर्थ“विजय का शहर” — शहर + साम्राज्य दोनों के लिए
समकालीन नाम★कर्नाटक साम्राज्यमु
स्थापना★1336 (?), हरिहर और बुक्का (दो भाई)
चरम विस्तारउत्तर में कृष्णा नदी से प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक
विनाश★1565 — लूट; सत्रहवीं-अठारहवीं सदी तक पूर्ण विनष्ट
स्थानीय स्मृति में नाम★हम्पी ← मातृदेवी पम्पादेवी से
नदीतुंगभद्रा (उत्तर-पूर्व दिशा में बहती है; प्राकृतिक कुण्ड)
यूनेस्को★1986 (राष्ट्रीय महत्त्व: 1976)

2. हम्पी की खोज — तीर-शृंखला★

1800 मैकेन्जी (पहला सर्वेक्षण मानचित्र) → 1836 अभिलेख-संग्रह → 1856 ग्रिनलो (पहले विस्तृत चित्र) → 1876 फ्लीट (अभिलेख-प्रलेखन) → 1902 जॉन मार्शल (संरक्षण) → 1976 राष्ट्रीय महत्त्व → 1980 का दशक (प्रलेखन-परियोजना, ~20 वर्ष) → 1986 यूनेस्को

मैकेन्जी: जन्म 1754 • अभियंता-सर्वेक्षक-मानचित्रकार • ईस्ट इण्डिया कंपनी • ★1815 में भारत का पहला सर्वेयर जनरल (मृत्यु 1821 तक) • शुरुआती जानकारी = ★विरुपाक्ष मंदिर व पम्पादेवी पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियाँ • उद्देश्य = उपनिवेश का प्रशासन आसान बनाना

पुनर्निर्माण के स्रोत (4): पुरातत्त्व + अभिलेख + विदेशी यात्री + तेलुगु, कन्नड़, तमिल, संस्कृत साहित्य

3. राजनीतिक इतिहास

3.1 चार वंश —सं-सु-तु-अ★

वंशअवधि/विशेष
संगमपहला; 1485 तक
सुलुवसैनिक कमांडर; 1503 तक
तुलुव★कृष्णदेव राय इसी वंश से
अरावीडु1542 से; सत्रहवीं सदी के अंत तक; 1565 के बाद पेनुकोण्डा → चन्द्रगिरी (तिरुपति के समीप)

3.2 कृष्णदेव राय (शासनकाल1509–29)★★

  • विशेषता: विस्तार और दृढ़ीकरण
  • ★1512 रायचूर दोआब (तुंगभद्रा-कृष्णा के बीच) → 1514 उड़ीसा का दमन → 1520 बीजापुर की पराजय
  • अमुक्तमाल्यद — शासनकला पर तेलुगु कृति
  • नगलपुरम् — अपनी माँ के नाम पर उपनगर
  • मंदिर-निर्माण + भव्य गोपुरम; विरुपाक्ष में राज्यारोहण-मण्डप + पूर्वी गोपुरम्
  • पेस का वर्णन: “मझला कद, गोरा रंग, कुछ मोटा, चेहरे पर चेचक के दाग़” — बनाम चिदम्बरम की आदर्श प्रतिमा ★
  • ★सबसे विस्तृत विवरण कृष्णदेव राय के या तुरंत बाद के कालों से (= स्रोत-पक्षपात)

3.3 पतन★

  • 1529 मृत्यु → विद्रोही नायक → 1542 अरावीडु
  • ★★1565 — राक्षसी-तांगड़ी (= तालीकोटा) का युद्ध: नेतृत्व प्रधानमंत्री रामराय; विजेता = बीजापुर + अहमदनगर + गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाएँ → शहर लूटा, कुछ वर्षों में उजड़ा
  • रामराय की नीति: एक सुल्तान को दूसरे के विरुद्ध करना → सुल्तान एक हो गए

3.4 सुल्तान-राय संबंध — “हमेशा शत्रुतापूर्ण नहीं” (4 प्रमाण)★★

  1. कृष्णदेव राय ने सल्तनतों के दावेदारों का समर्थन किया
  2. विरुद: “यवन राज्य की स्थापना करने वाला” (यवन = यूनानी/उत्तर-पश्चिम से आए लोग — संस्कृत शब्द)
  3. बीजापुर के सुल्तान ने विजयनगर का उत्तराधिकार-विवाद सुलझाया
  4. दोनों एक-दूसरे के स्थायित्व के इच्छुक

★संघर्ष का असली कारण: उर्वर नदी घाटियाँ + विदेशी व्यापार की संपदा (धार्मिक नहीं)

3.5 पदवियों का त्रिकोण★

पदवीअर्थधारक
गजपतिहाथियों का स्वामीउड़ीसा के शासक
अश्वपतिघोड़ों का स्वामीदक्कन के सुल्तान
नरपतिलोगों का स्वामीविजयनगर के राय

4. व्यापार★

  • युद्धकला अश्वसेना पर आधारित → अरब-मध्य एशिया से घोड़ों का आयात; आरंभ में अरब व्यापारी नियंत्रित; स्थानीय व्यापारी = ★कुदिरई चेट्टी
  • ★1498 — पुर्तगाली (पश्चिमी तट; बंदूकें = सामरिक बढ़त)
  • बाज़ार: मसाले, वस्त्र, रत्न; व्यापार = प्रतिष्ठा का मानक; लाभ = विलासिता (जनता) + राजस्व (राज्य)
  • स्रोत 2 (अमुक्तमाल्यद): बंदरगाह सुधारो • मुक्त आयात • विदेशी नाविकों की देखभाल • व्यापारियों को तोहफ़े-मुनाफ़ा → ★“वस्तुएँ दुश्मनों तक नहीं पहुँचेंगी” (= रणनीति, परोपकार नहीं)

5. अमर-नायक प्रणाली★★

  • = प्रमुख राजनीतिक खोज; तत्त्व ★दिल्ली सल्तनत की इक़्ता से (“ऐसा प्रतीत होता है”)
  • अमर ← संस्कृत समर (युद्ध) / फ़ारसी अमीर (कुलीन)
  • चक्र: राय से क्षेत्र → किसान-शिल्पकर्मी-व्यापारी से कर → भाग स्वयं + अश्व-गज दल → दल = साम्राज्य की सेना → भाग मन्दिर + सिंचाई → वार्षिक भेंट + दरबार में स्वयं उपस्थिति
  • नियंत्रण: स्थानांतरण | नायक भाषा: तेलुगु/कन्नड़
  • ★★सत्रहवीं सदी: कई नायक स्वतंत्र → केंद्रीय ढाँचे का विघटन | नायक-केंद्र: चन्द्रगिरी, मदुरई, इक्केरी, तंजावुर, मैसूर
  • विरोधाभास: जिस प्रणाली ने प्रायद्वीप जिताया, उसी ने साम्राज्य तोड़ा

6. छह विदेशी यात्री (मानचित्र कार्य 10 भी इसी से)★★

सदीयात्रीपहचान
15वींनिकोलो दे कॉन्तीइतालवी व्यापारी
15वींअब्दुर रज़्ज़ाक★फ़ारस के राजा का दूत (कालीकट भेजा गया)
15वींअफ़ानासी निकितिनरूस का व्यापारी
16वींदुआर्ते बरबोसापुर्तगाली
16वींडोमिंगो पेसपुर्तगाली
16वींफर्नाओ नूनिज़पुर्तगाली

स्मरण: 15वीं = तीन देश (इटली-फ़ारस-रूस); 16वीं = तीनों पुर्तगाली (1498 के बाद)

किसने क्या कहा: रोम जितना विशाल = पेस • दुर्गों की 7 पंक्तियाँ = रज़्ज़ाक • “विश्व का सबसे अच्छे संभरण वाला शहर” = पेस • फल-मांस सूची (चूहे-बिल्ली-छिपकली तक) = नूनिज़ • छप्पर के आवास, व्यवसाय-आधारित गलियाँ = बरबोसा • जलाशय पर 15-20 हज़ार श्रमिक “चींटियों की तरह” = पेस

7. शहर की संरचना

7.1 तीन अंचल★★★

अंचलस्थितिप्रमुख अवशेष
धार्मिक केंद्रनदी-तट का चट्टानी उत्तरी भागविरुपाक्ष, विट्ठल मन्दिर
शहरी केंद्रबीच मेंचीनी मिट्टी, मस्जिद-मक़बरे, छप्पर-आवास
राजकीय केंद्रदक्षिण-पश्चिममहानवमी डिब्बा, कमल महल

बीच में कृषि क्षेत्र — हिरिया नहर से सिंचित ★

7.2 जल-संपदा★

  • तुंगभद्रा का प्राकृतिक कुण्ड; ग्रेनाइट पहाड़ियों की “करधनी”; पर प्रायद्वीप का सबसे शुष्क क्षेत्र → धाराओं पर बाँध + हौज़
  • कमलपुरम् जलाशय (15वीं सदी आरंभ): सिंचाई + नहर से “राजकीय केंद्र” तक
  • हिरिया नहर: तुंगभद्रा के बाँध से; धार्मिक-शहरी केंद्र के बीच की घाटी सींचती; संभवत: संगम वंश द्वारा; आज भी दृश्य
  • स्रोत 4 (पेस): 15 किमी दूर से पाइप; पूरी पहाड़ी तुड़वाई; 15-20 हज़ार श्रमिक

7.3 किलेबंदी★★

  • अब्दुर रज़्ज़ाक: सात पंक्तियाँ; खेत-जंगल-शहर सब घेरे
  • बाहरी दीवार: पहाड़ियों को जोड़ती; ★बिना गारे की फानाकार (Wedge-shaped) चिनाई; भीतर मिट्टी-मलवा; वर्गाकार/आयताकार बुर्ज
  • ★★सबसे महत्त्वपूर्ण: खेतों को भी घेरा — प्रमाण: रज़्ज़ाक (“पहली-दूसरी-तीसरी दीवारों के बीच जुते खेत”) + पेस (धान के खेत) + पुरातत्त्व की पुष्टि
  • कारण: घेराबंदी में खाद्य-आपूर्ति से वंचित करना शत्रु का लक्ष्य; अन्य शासक = अनाजगार; विजयनगर = ★“अधिक महँगी तथा व्यापक नीति”
  • तीन घेरे: शहर+खेत → नगरीय केंद्र → राजकीय केंद्र (भीतर हर भवन-समूह की अपनी दीवार)
  • प्रवेशद्वार: मेहराब + गुंबद = तुर्की सुल्तानों की शैली → ★इंडो-इस्लामी (विकास स्थानीय परंपराओं के संपर्क से)
  • सड़कें: घाटियों से घूमती; मंदिर-द्वारों से आगे; दोनों ओर बाज़ार

7.4 शहरी केंद्र के साक्ष्य

  • सामान्य आवासों के कम पुरातात्त्विक साक्ष्य (छप्पर के थे)
  • परिष्कृत चीनी मिट्टी (उत्तर-पूर्वी कोना) → “हो सकता है” अमीर व्यापारी ★
  • मुस्लिम मुहल्ला — मक़बरे-मस्जिदें, स्थापत्य मंदिर-मण्डपों जैसा ★
  • कुएँ + वर्षा-जलाशय + मन्दिर-जलाशय = सामान्य जन के जल-स्रोत

8. राजकीय केंद्र

  • दक्षिण-पश्चिम; ★नाम के बावजूद 60+ मन्दिर; ~30 महल-संरचनाएँ (आनुष्ठानिक नहीं)
  • ★★मन्दिर = पूर्ण राजगिरी; धर्मेतर भवन = विकारी वस्तुएँ → इसीलिए मंदिर बचे, महल नहीं
  • “राजा का भवन”: सबसे विशाल, पर राजकीय आवास का साक्ष्य नहीं

8.1 महानवमी डिब्बा★★

  • शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर विशाल मंच: ★~11,000 वर्ग फीट आधार × 40 फीट ऊँचाई; ऊपर लकड़ी की संरचना; आधार पर उभारदार उत्कीर्णन
  • त्यौहार: शरद (सितं.-अक्टू.) का दस-दिवसीय पर्व — दशहरा (उत्तर) / दुर्गा पूजा (बंगाल) / नवरात्री-महानवमी (प्रायद्वीप); महानवमी = “महान नवाँ दिवस”
  • अनुष्ठान: मूर्ति-पूजा + राज्य के अश्व की पूजा + भैंसों-पशुओं की बलि • नृत्य-कुश्ती • सज्जित घोड़े-हाथी-रथ-सैनिकों की शोभायात्रा • ★नायकों-अधीनस्थ राजाओं की औपचारिक भेंट
  • अंतिम दिन: राजा + नायकों की सेनाओं का निरीक्षण + नायकों की भेंट व नियत कर
  • अर्थ: रुतबे, ताक़त, अधिराज्य का प्रदर्शन (धार्मिक+राजनीतिक+आर्थिक+सैनिक)
  • ★पहेली: चारों ओर का स्थान शोभायात्रा हेतु पर्याप्त नहीं — केंद्र था या नहीं, अनिश्चित
  • “विजय का भवन” = पेस का नाम (सभा मंडप + महानवमी डिब्बा संयुक्त)

8.2 अन्य भवन★

भवनमुख्य तथ्य
कमल महलनाम 19वीं सदी के अंग्रेज़ यात्रियों का; कार्य अनिश्चित — मैकेन्जी के नक्शे के अनुसार संभवत: परिषदीय सदन; ★नौ मीनारें (1 केंद्रीय + 8); इंडो-इस्लामी मेहराबें
हज़ार राम मन्दिरसंभवत: केवल राजा-राजपरिवार हेतु; केंद्रीय मूर्तियाँ लुप्त; दीवारों पर ★रामायण के उत्कीर्णित दृश्यांश
“हाथियों का अस्तबल”नाम आधुनिक; वास्तविक प्रयोजन पर NCERT स्वयं प्रश्न उठाती है
सभा मंडपऊँचा मंच; लकड़ी के स्तंभों के छेद; प्रयोजन अस्पष्ट
  • खड़ा रेखाचित्र (Elevation) = ऊर्ध्व दृश्य | नक्शा (Plan) = समस्तरी दृश्य ★
  • नायकों ने महल-निर्माण परंपरा जारी रखी (मदुरई का सभा मण्डप)

9. धार्मिक केंद्र

9.1 स्थान-चयन की मान्यताएँ★

  1. पहाड़ियाँ = रामायण के बाली-सुग्रीव के वानर राज्य की रक्षक
  2. पम्पादेवी ने विरुपाक्ष (राज्य के संरक्षक देवता; शिव का रूप) से विवाह हेतु तप किया — ★विवाह आज भी प्रतिवर्ष विरुपाक्ष मन्दिर में
  3. पूर्वकालिक जैन मन्दिर भी → क्षेत्र बहु-धार्मिक
  • मन्दिर-परंपरा: पल्लव, चालुक्य, होयसाल, चोल
  • मन्दिर = धार्मिक + सामाजिक + सांस्कृतिक + आर्थिक केंद्र; शिक्षा के केंद्र भी; निर्माण-मरम्मत-रखरखाव = सत्ता, संपत्ति, निष्ठा के माध्यम

9.2 वैधता के तीन प्रतीक★★

  1. शासक भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन का दावा
  2. राजकीय आदेशों पर कन्नड़ लिपि में ★“श्री विरुपाक्ष”
  3. विरुद ★★“हिन्दू सूरतराणा” = अरबी सुल्तान का संस्कृत अनुवाद = “हिंदू सुल्तान”
  • नवाचार: राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ मन्दिरों में; राजा की मन्दिर-यात्राएँ = राजकीय अवसर (नायक साथ)

9.3 गोपुरम्-मण्डप★

  • राय गोपुरम् (राजकीय प्रवेशद्वार): केंद्रीय देवालय की मीनारों को बौना करते • दूर से मन्दिर का संकेत • ★शासक की ताक़त (साधन-तकनीक-कौशल) की याद
  • अन्य तत्त्व: मण्डप + लंबे स्तंभ-गलियारे
  • विरुपाक्ष मन्दिर: निर्माण कई सदियों में; प्राचीनतम अंश 9वीं-10वीं सदी; कृष्णदेव राय — राज्यारोहण-मण्डप + पूर्वी गोपुरम्; ★परिवर्धनों से केंद्रीय देवालय छोटे भाग तक सीमित
  • सभागार-प्रयोग: मूर्तियों के समक्ष संगीत-नृत्य-नाटक • देव-विवाह उत्सव • झूला • विशिष्ट मूर्तियाँ
  • विट्ठल मन्दिर: विट्ठल = महाराष्ट्र में पूजित विष्णु-रूप → कर्नाटक में पूजा = ★साम्राज्यिक संस्कृति हेतु परंपराओं का आत्मसात; रथ के आकार का अनूठा मन्दिर
  • रथ गलियाँ: गोपुरम् से सीधी रेखा में; पत्थर-फर्श; दोनों ओर मण्डपों में व्यापारियों की दुकानें
  • कुछ सबसे दर्शनीय गोपुरम स्थानीय नायकों द्वारा निर्मित (मदुरई)

10. अंकन-प्रलेखन (§6)★

  • बीसवीं सदी: ASI + कर्नाटक पुरातात्त्विक एवं संग्रहालय विभाग
  • 1976 राष्ट्रीय महत्त्व → 1980 के दशक से प्रलेखन-परियोजना (~20 वर्ष, विश्व-भर के दर्जनों विद्वान)
  • मानचित्र-विधि: क्षेत्र → 25 वर्ग (वर्णमाला-अक्षर) → छोटे वर्ग → और छोटी इकाइयाँ
  • बाज़ारों की पहचान: स्तंभ आधारों तथा मंचों से — “जीवंत बाज़ारों का बस अब यही कुछ बचा है”
  • ★फ़्रिट्ज़-मिशेल-नागराज राव: नष्ट लकड़ी की वस्तुओं (स्तंभ, टेक, धरन, छत, छज्जे, मीनारें) की कल्पना करनी पड़ती है — प्लास्टर-सज्जित, संभवत: चटकीले रंग

11. साक्ष्य की सीमाएँ (§7)★★

भवन बताते हैं: स्थान-व्यवस्था व प्रयोग • सामग्री-तकनीक • प्रतिरक्षा-तैयारी • विचारों का फैलाव/सांस्कृतिक प्रभाव • प्रश्रयदाता के विचार • सांस्कृतिक चिह्न (अन्य स्रोतों से संयोजन पर)

भवन नहीं बताते: सामान्य पुरुष-महिलाएँ-बच्चे क्या सोचते थे • उनकी पहुँच थी या नहीं • ★नक्शे कौन बनाता था • राजगीर-मूर्तिकार कहाँ से आते थे • युद्ध-बंदी? • वेतन? • अधीक्षण कौन? • कच्चा माल कहाँ से?

★सूत्र: “जो सबसे भव्य दिखता है, उसे बनाने वाले सबसे अधिक अदृश्य होते हैं।”

12. काल-रेखा 1 की मुख्य तिथियाँ (संदर्भ हेतु)★

वर्षघटना
1206दिल्ली सल्तनत की स्थापना
1336?विजयनगर की स्थापना
1347बहमनी राज्य की स्थापना
1435गजपति राज्य (उड़ीसा)
1490अहमदाबाद, बीजापुर, बेरार सल्तनतों का उदय
1510पुर्तगालियों की गोवा-विजय
1518गोलकुंडा सल्तनत का उदय; बहमनी का विनाश
1526बाबर — मुगल साम्राज्य

NCERT के अनुसार; प्रश्नचिह्न (1336?) = अनिश्चित तिथि।

13. स्मरण-सूत्र (एक साथ)

  1. सं-सु-तु-अ — चार वंश
  2. 12-14-20 — रायचूर (1512), उड़ीसा (1514), बीजापुर (1520)
  3. तीन B हराने वाले नहीं — B-A-G: Bijapur + Ahmadnagar + Golconda (1565)
  4. 15वीं सदी के यात्री = 3 देश; 16वीं = 3 पुर्तगाली
  5. गज-अश्व-नर — उड़ीसा-सुल्तान-राय
  6. मन्दिर = धा-सा-सां-आ (धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक)
  7. खोज-शृंखला: 1800-1856-1876-1902-1976-1986

14. अंतिम 10 मिनट का रिवीजन (परीक्षा-द्वार पर)

  1. 1336? हरिहर-बुक्का • कर्नाटक साम्राज्यमु • हम्पी ← पम्पादेवी
  2. मैकेन्जी 1800, पहला सर्वेयर जनरल 1815, स्रोत = पुरोहितों की स्मृतियाँ
  3. कृष्णदेव राय 1509-29 (तुलुव) — 1512-14-20; अमुक्तमाल्यद (तेलुगु); नगलपुरम्
  4. 1565 राक्षसी-तांगड़ी/तालीकोटा — रामराय बनाम बीजापुर+अहमदनगर+गोलकुण्डा → पेनुकोण्डा → चन्द्रगिरी
  5. अमर-नायक ← इक़्ता; कर-वसूली; मन्दिर-सिंचाई; वार्षिक भेंट; 17वीं सदी में स्वतंत्र
  6. तीन अंचल + बीच में कृषि-क्षेत्र (हिरिया नहर)
  7. सात किलेबंदियाँ (रज़्ज़ाक); बिना गारे की फानाकार चिनाई; खेत भी भीतर
  8. महानवमी डिब्बा — 11,000 वर्ग फीट × 40 फीट; दशहरा/दुर्गा पूजा/नवरात्री; भेंट+कर+सेना-निरीक्षण
  9. श्री विरुपाक्ष (कन्नड़ लिपि) • हिन्दू सूरतराणा • राय गोपुरम् • विट्ठल = महाराष्ट्र के विष्णु
  10. 1976 राष्ट्रीय महत्त्व, 1986 यूनेस्को; 25 वर्ग; लकड़ी की खोई दुनिया; अदृश्य श्रमिक