Chapter 8भारतीय राजनीति : नए बदलाव

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पढ़ाने से पहले — चार बातेंध्यान

1. यह पुराना अध्याय 9 है

QR कोड 12122CH09 है। युक्तिकरण में पुराना अध्याय 7 — ‘जन आंदोलनों का उदय’ पूरी तरह हटा दिया गया, इसलिए पुराना 9 अब अध्याय 8 है।

2. अयोध्या वाला खंड पूरी तरह पुनर्लिखित है★★

यह 9 नवम्बर 2019 के उच्चतम न्यायालय के निर्णय तक जाता है, निर्णय के दो आदेश बताता है, और निर्णय से दो अवतरण भी देता है — साथ में मूल निर्णय की कड़ी और पृष्ठ-क्रमांक (920 और 1045)। ! पुरानी गाइड और पुराने नोट्स यहाँ सक्रिय रूप से भ्रामक होंगे। कक्षा को पहले दिन ही बता दीजिए।

3. अध्याय2019 के लोकसभा चुनाव और 17वीं लोकसभा तक अद्यतन है

पृष्ठ 141, 152 और 154 पर 2014 और 2019 के परिणाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। ★पर पाठ्यपुस्तक स्वयं स्वीकार करती है (पृष्ठ 156) कि “इस अध्याय में 2004 के चुनाव (14वीं लोकसभा) तक भारतीय राजनीति की प्रमुख घटनाओं को शामिल किया गया है” — यानी विस्तृत वर्णन 2004 तक है और उसके बाद के परिणाम संक्षेप में जोड़े गए हैं। यह भेद विद्यार्थियों को बताइए।

4. पाठ्यपुस्तक खुद कहती है कि वह उत्तर नहीं देती★

“यह अध्याय इन सवालों के जवाब नहीं देता।… ये सवाल राजनीतिक लिहाज़ से संवेदनशील हैं, लेकिन मात्र इसी कारण से हम इन सवालों को पूछने से बच नहीं सकते।”

★★यह वाक्य कक्षा में पहले दिन पढ़िए। यह शिक्षक को चर्चा कराने की अनुमति देता है और निष्कर्ष थोपने से बचने का आधार भी।

🎯 अध्याय का एक-वाक्य सार

एक-दल के प्रभुत्व का युग समाप्त हुआ और गठबंधन का युग शुरू हुआ — प्रतिस्पर्धा तेज़ हुई, पर बुनियादी नीतियों पर सहमति भी बनी।

📚 पढ़ाने का सुझाया क्रम

कालांशविषयक्यों
11990 का दशक — पाँच बदलावपूरे अध्याय का ढाँचा
2गठबंधन का युग★यहीं ‘केंद्रीय सरकार 1989 के बाद’ की सारणी उतरवाइए
3मंडल और दलित राजनीतिसामाजिक आधार
4सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता, अयोध्या! सबसे संवेदनशील — पूरी तैयारी के साथ
5आँकड़े, बढ़ती सहमति और पूरी पुस्तक का समापनसकारात्मक अंत

★पाठ्यपुस्तक का अपना क्रम ही सही है — इस अध्याय में उसे बदलने की ज़रूरत नहीं।

🔑 सात वाक्य जो शब्दशः बोर्ड पर लिखवाइए

  1. ★★“1989 में ही उस परिघटना की समाप्ति हो गई थी, जिसे राजनीति विज्ञानी ‘कांग्रेस प्रणाली’ कहते हैं।”
  2. ★★“बहरहाल इस अवधि में जितनी सरकारें बनीं, सबने नयी आर्थिक नीति पर अमल जारी रखा।”
  3. ★★“1989 के बाद से लोकसभा के चुनावों में कभी भी किसी एक पार्टी को 2014 तक पूर्ण बहुमत नहीं मिला।”
  4. ★“इससे पता चलता है कि राजनीतिक समीकरण किस कदर छुईमुई थे।”
  5. ★★“आज़ाद भारत में यह पहला मौका था, जब कोई राजनीतिक दल मुख्यतया दलित मतदाताओं के समर्थन के बूते ऐसी राजनीतिक सफलता हासिल कर पाया था।”
  6. ★★“एक बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक लोकतांत्रिक समाज में इन विवादों का हल सामान्यतः विधि की उचित प्रक्रिया से होता है।”
  7. ★★“हम विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि भारत में लोकतांत्रिक राजनीति जारी रहेगी।”

💡 सात शिक्षण-युक्तियाँ

युक्ति 1 — कार्टून पढ़ना सिखाइए

★★इस अध्याय में सात कार्टून/चित्र हैं और हर एक पूरा अनुच्छेद कहता है। आवरण की चरखी, दोनों अमूल कार्टून, आर.के. लक्ष्मण, सुधीर तैलंग, अजित नैनन। हर कार्टून पर तीन सवाल पूछिए: “इसमें कौन है? क्या लिखा है? कार्टूनिस्ट क्या कह रहा है?”

युक्ति 2 — सारणी को गृहकार्य मत बनाइए, कक्षा में उतरवाइए

★‘केंद्रीय सरकार 1989 के बाद’ की सारणी कालांश 2 में, कक्षा में ही लिखवाइए। दस पंक्तियाँ, तीन स्तंभ। इसमें आठ मिनट लगेंगे और वे आठ मिनट सबसे मूल्यवान होंगे।

युक्ति 3 — ‘बाहर से समर्थन’ को अभिनय से समझाइए

तीन विद्यार्थियों को खड़ा कीजिए — एक ‘सरकार’, दो ‘समर्थक’। दोनों समर्थक कहें: “हम अंदर नहीं आएँगे, पर बाहर से सहारा देंगे।” फिर एक हट जाए। ★1990 में ठीक यही हुआ।

युक्ति 4 — आँकड़ों को कहानी बनाइए

★★आरेख 1 से सिर्फ़ दो पंक्तियाँ घेरवाइए — 1984 (2 बनाम 415) और 2019 (303 बनाम 52)। फिर पूछिए: “पैंतीस साल में क्या हुआ?” पूरा अध्याय इसी सवाल का उत्तर है।

युक्ति 5 — वोट और सीट का फ़र्क़ ज़रूर बताइए

★2014 में भाजपा का वोट-हिस्सा 31.3% था और सीटें 282। पूछिए: “एक-तिहाई से भी कम वोट पर आधे से ज़्यादा सीटें कैसे?” → ‘सर्वाधिक मत पाने वाला विजयी’ प्रणाली। यह आरेख-आधारित प्रश्नों का पूरा उत्तर है।

युक्ति 6 — ‘करके देखें’ को सचमुच कराइए

पृष्ठ 141 का बॉक्स — माता-पिता से 1990 के बाद की घटनाओं के बारे में पूछिए — ★★इस पूरी पुस्तक का सबसे अच्छा गृहकार्य है। विद्यार्थी घर से जो लाएँगे, वह पाठ्यपुस्तक की सूची से मेल भी खाएगा और अलग भी होगा — और वही चर्चा का असली मुद्दा है।

युक्ति 7 — तथ्य और मूल्यांकन अलग करवाइए

★★अयोध्या वाले खंड में हर वाक्य के आगे ‘त’ या ‘मू’ लिखवाइए — तथ्य या मूल्यांकन। “9 नवम्बर 2019 को 5–0 का निर्णय आया” = त। “यह लोकतान्त्रिक प्रकृति की परिपक्वता को प्रदर्शित करता है” = मू। यह अभ्यास शिक्षक को तटस्थ रहने का सबसे साफ़ रास्ता देता है।

छह संवेदनशील बिंदु — और उनका प्रबंधनध्यान

बिंदुकैसे संभालें
अयोध्या★पाठ के शब्द ही बोलिए। तथ्य/मूल्यांकन का अभ्यास कराइए। न्यायालय का पहला अवतरण — “संविधान एक धर्म और दूसरे धर्म की आस्था के बीच अंतर नहीं करता” — यही सबसे अच्छा संतुलन-बिंदु है।
हिन्दुत्व! यह एक विचारधारा की परिभाषा है, समर्थन नहीं। तटस्थ स्वर में, शब्दशः पढ़ाइए।
शाहबानो★दोनों पक्ष पाठ्यपुस्तक स्वयं रखती है — महिला संगठनों/मुस्लिम समूहों/बुद्धिजीवियों का विरोध, और भाजपा की ‘तुष्टिकरण’ वाली आलोचना। दोनों पढ़िए, किसी एक को मत चुनिए।
आरक्षण! कक्षा में यह विषय व्यक्तिगत हो सकता है। पाठ के दायरे में रहिए और उस अंतिम वाक्य पर टिकिए — “सभी बड़े राजनीतिक दलों में सहमति थी।”
1992 का ध्वंसपाठ का वाक्य ही बोलिए — “कुछ आलोचकों ने माना कि इस घटना ने भारतीय लोकतन्त्र के सिद्धान्तों को बड़ी चुनौती दी है।” आगे विस्तार न कीजिए।
जीवित नेता! किसी वर्तमान नेता का मूल्यांकन कक्षा में न कीजिए। पाठ्यपुस्तक तथ्य देती है — आप भी तथ्य ही दीजिए।

★सामान्य नियम: जहाँ पाठ्यपुस्तक संयत है, वहाँ आप भी संयत रहिए।

❓ विद्यार्थी जो प्रश्न ज़रूर पूछेंगे

प्र. ‘कांग्रेस प्रणाली’ क्या थी और वह कैसे खत्म हुई? → अध्याय 2 में पढ़ी हुई परिघटना — कांग्रेस स्वयं में एक गठबंधननुमा पार्टी थी जिसमें विभिन्न हित, सामाजिक समूह और वर्ग साथ रहते थे। ★1989 में उसकी समाप्ति हुई — कांग्रेस बनी रही, पर वह प्रमुखता न रही।

प्र. 1989 में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, फिर सरकार क्यों नहीं बनाई? → क्योंकि बहुमत नहीं था, और उसने विपक्ष में बैठने का फ़ैसला किया। ★यह भारतीय राजनीति में एक मोड़ है — पहली बार सबसे बड़ी पार्टी ने सत्ता का दावा नहीं किया।

प्र. भाजपा और वाम मोर्चा एक साथ कैसे आ सकते हैं? → ★वे साथ नहीं आए — दोनों ने अलग-अलग, बाहर से एक ही सरकार को समर्थन दिया, और दोनों में से कोई सरकार में शामिल नहीं हुआ। साझा उद्देश्य था — कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखना। 1996 में यही समीकरण उलट गया।

प्र. मंडल आयोग ने 27% ही क्यों कहा, 50% क्यों नहीं? → पाठ्यपुस्तक कारण नहीं देती। ★इतना बताइए कि यह सिफ़ारिश 1992 में न्यायालय ने सही ठहराई, और न्यायालय ने साथ ही कुल आरक्षण की एक अधिकतम सीमा भी तय की। (विस्तार 07-Enrichment में है।)

प्र. OBC और SC/ST में क्या अंतर है? → ★★OBC एक अलग प्रशासनिक कोटि है — अनुसूचित जाति या जनजाति की उपश्रेणी नहीं। इसमें शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदाय आते हैं। यह भेद परीक्षा में सीधे पूछा जाता है।

प्र. 2014 में बहुमत था, फिर गठबंधन सरकार क्यों? → पाठ्यपुस्तक तथ्य देती है — “अपने स्वयं के एकल दल के बहुमत के बावजूद, भाजपा ने अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ राजग सरकार बनाने का विकल्प चुना।” ★और निष्कर्ष: “जब भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल रहा है तब भी गठबंधन की राजनीति की मान्यता अभी भी प्रासंगिक है।”

प्र. आरेख में 1998 पर सिर्फ़ एक अंक क्यों छपा है? → ★क्योंकि उस वर्ष दोनों दलों का वोट-हिस्सा लगभग बराबर था और दोनों रेखाएँ मिल जाती हैं। छपा हुआ अंक 25.6 भाजपा की रेखा का शिखर है। यह अध्याय का सबसे रोचक आँकड़ा है।

प्र. यह पुस्तक का अंतिम अध्याय है — आगे क्या? → ★पाठ्यपुस्तक स्वयं उत्तर देती है: “हम विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि भारत में लोकतांत्रिक राजनीति जारी रहेगी।” और समापन-बॉक्स का प्रश्न — “किन कारकों ने भारत में लोकतंत्र को पनपने में सक्षम बनाया?”

🧪 त्वरित मूल्यांकन — कालांश-वार 3 प्रश्न

कालांशप्रश्न
1पाँच बदलाव कौन-से? · 1984 और 1989 की सीटें? · आर्थिक नीति पर सबका रुख़ क्या रहा?
2राष्ट्रीय मोर्चा को किसने समर्थन दिया? · 1989 और 1996 का उद्देश्य? · 1989 के बाद कितनी सरकारें?
3OBC किससे अलग है? · 27% या 50%? · बामसेफ कब और बसपा कब?
4हिन्दुत्व की दो शर्तें? · 1986 का अधिनियम क्या था? · निर्णय कब और कितने-कितने से?
51984 और 2019 की सीटें? · बढ़ती सहमति की चार बातें? · अंतिम वाक्य?

📊 परीक्षा-संभावना

प्रकारसंभावनातैयारी
6 अंक — गठबंधन की राजनीति★★★बहुत अधिक1989 का अंकगणित + पूरी सारणी
6 अंक — बढ़ती सहमति की चार बातें★★★बहुत अधिकचारों, उदाहरण सहित
6 अंक — OBC का राजनीतिक उदय★★★बहुत अधिकमंडल का पूरा क्रम + दलित राजनीति
4 अंक — भाजपा का विकास-क्रम★★अधिक1980 → 1984 → 1986 → 1996 → 2014 → 2019
4 अंक — शाहबानो★★अधिकनिर्णय + अधिनियम + दोनों प्रतिक्रियाएँ
4 अंक — अयोध्या का समाधान★★अधिकसमय-रेखा + 5–0 + दोनों आदेश
आरेख-आधारित★★★बहुत अधिक! तीनों आरेख के आँकड़े याद हों
कालक्रम / मिलान★★★बहुत अधिकप्रश्न 1 और 2

🎓 पूरी पुस्तक का समापन — अंतिम पाँच मिनट

★★यह अध्याय पुस्तक का अंतिम अध्याय है। अंतिम कालांश की आख़िरी पाँच मिनट में यह कहिए:

“हमने यह पुस्तक शुरू की थी विभाजन और रियासतों के विलय से — जब यह तय भी नहीं था कि भारत नाम का देश टिकेगा या नहीं। फिर हमने पढ़ा एक दल का प्रभुत्व, फिर उसका टूटना, फिर आपातकाल, फिर क्षेत्रीय आकांक्षाएँ, और अंत में गठबंधन का युग।

अगर इन आठ अध्यायों से एक बात याद रखनी हो, तो वह यह है — भारत ने हर बार अपनी समस्याओं का हल संविधान के भीतर ढूँढ़ा। आपातकाल का हल चुनाव से निकला। क्षेत्रीय आकांक्षाओं का हल समझौतों से। अयोध्या का हल न्यायालय से।

और इसीलिए पाठ्यपुस्तक का अंतिम वाक्य भविष्यवाणी नहीं, एक ज़िम्मेदारी है — ‘हम विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि भारत में लोकतांत्रिक राजनीति जारी रहेगी।’ वह ज़िम्मेदारी अब आपकी है।”

✓ शिक्षक की अंतिम जाँच-सूची

  • बता दिया कि यह पुराना अध्याय 9 है और पुराना अध्याय 7 हटा दिया गया है
  • चेता दिया कि अयोध्या वाला खंड नया है और पुरानी गाइड भ्रामक होंगी
  • “यह अध्याय इन सवालों के जवाब नहीं देता” वाला वाक्य कक्षा में पढ़ा
  • सातों कार्टून का उपयोग किया
  • ★‘केंद्रीय सरकार 1989 के बाद’ की पूरी सारणी कक्षा में उतरवाई
  • 1989 बनाम 1996 की तुलना बोर्ड पर बनवाई
  • OBC बनाम SC/ST का भेद स्पष्ट किया
  • मंडल का ‘भूमि-सुधार’ वाला सुझाव भी बताया
  • तथ्य/मूल्यांकन का अभ्यास अयोध्या वाले खंड पर कराया
  • तीनों आरेख के आँकड़े उतरवाए
  • वोट और सीट का फ़र्क़ समझाया
  • ★★‘बढ़ती सहमति’ की चारों बातें लिखवाईं
  • ‘करके देखें’ वाला गृहकार्य सचमुच कराया
  • ★पूरी पुस्तक का समापन-भाषण दिया