राज्य से साम्राज्य तक
शुरुआत
भविषा और ध्रुव ने "इतिहास" नाम की समय-यंत्र मशीन चालू की और पहुँच गए पाटलिपुत्र — आज के पटना के आस-पास। चलिए, आप भी साथ चलिए।

“जनविहीन देश नहीं हो सकता और देशविहीन राज्य नहीं होता।”
अध्याय इन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 83)
- साम्राज्य क्या है?
- साम्राज्यों का उदय कैसे हुआ और उन्होंने भारतीय सभ्यता को कैसे आकार दिया?
- राज्यों से साम्राज्य बनने में किन बातों ने मदद की?
- छठी से दूसरी शताब्दी सा.सं.पू. तक जीवन कैसा था?
कक्षा 7 के रिवीजन नोट्स अभी तैयार हो रहे हैं; तब तक यह पन्ना सीधे पाठ्यपुस्तक से बना है। आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।
1पाटलिपुत्र की यात्रा
नगर के बाहर उतरते ही भविषा और ध्रुव की मुलाक़ात इरा से होती है — कान्हादास लोहार की बेटी (पृ. 85–87)।
पाटलिपुत्र का बाज़ार (पृ. 87)
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1इरा के अनुसार घोड़े पर साम्राज्य की सीमा तक पहुँचने में कितना समय लगता है?
पृ. 87।
2चलसेतु के नीचे क्या था?
पृ. 86।
2साम्राज्य क्या होता है?
"एंपायर" (साम्राज्य) शब्द लैटिन के "इंपेरियम" से आया है — अर्थ: सर्वोच्च सत्ता। साम्राज्य कई छोटे राज्यों या क्षेत्रों का समूह होता था, जिन पर — प्रायः उन्हें युद्ध में जीतकर — एक शक्तिशाली शासक या शासक-समूह राज करता था। छोटे क्षेत्रों के अपने राजा बने रहते, पर सब सम्राट के अधीन होते। सम्राट अपनी राजधानी से, जो आम तौर पर आर्थिक और प्रशासनिक रूप से बड़ा केंद्र होती, पूरे साम्राज्य पर शासन करता (पृ. 87)।
सम्राट के लिए संस्कृत शब्द (पृ. 87)
साम्राज्य की विशेषताएँ (पृ. 88)
सम्राट अधीन राज्यों और राजाओं पर केंद्रीय प्रभुता रखता है। छह काम — हर कार्ड पलटिए।
राजा साम्राज्य क्यों चाहता था? (पृ. 88–89)
पता लगाइए (पृ. 88–91): और कौन-से कारण सोच सकते हैं? युद्ध के अलावा शासक साम्राज्य बढ़ाने के लिए और क्या उपाय अपनाते होंगे? इतने अलग-अलग लोगों में सम्राट मेल-जोल कैसे बनाए रखते होंगे?
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1"इंपेरियम" का अर्थ क्या है?
पृ. 87।
2"राजाधिराज" का अर्थ?
पृ. 87।
3व्यापार, मार्ग और श्रेणियाँ
दूर के इलाक़ों में सैन्य अभियान चलाना आसान नहीं — सेना बहुत ख़र्चीली होती है (पृ. 91)।
व्यापार की प्रमुख वस्तुएँ (पृ. 91)
साहित्य और खुदाई — दोनों से इसके प्रमाण मिलते हैं; कई भारतीय वस्तुएँ थल और जल मार्ग से दूर देशों तक जाती थीं।
पता लगाइए (पृ. 93): पुस्तक के चित्र 5.5 में व्यापार मार्ग देखिए। किन भौगोलिक विशेषताओं ने व्यापारियों की यात्रा आसान की? उन सड़कों पर यातायात के कौन-से साधन रहे होंगे?
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1श्रेणी का प्रमुख आम तौर पर कैसे बनता था?
पृ. 91।
2श्रेणियों के आंतरिक नियमों के बारे में राजा से क्या अपेक्षा थी?
पृ. 93।
4मगध का उदय
छठी से चौथी शताब्दी सा.सं.पू. उत्तर भारत में बड़े बदलाव का समय था। सोलह महाजनपदों में से एक — मगध (आज का दक्षिण बिहार और आस-पास) — उभरा और कई राज्यों के विलय से भारत के पहले साम्राज्य की नींव बना। अजातशत्रु जैसे शक्तिशाली राजाओं ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई (पृ. 93)।
इसे अनदेखा न करें (पृ. 94)
सिद्धार्थ गौतम (बुद्ध) और वर्धमान (महावीर) — दोनों अजातशत्रु के समय में थे।
नंद वंश (पृ. 95)
सूत्र (पृ. 95)
छोटे, सोच-समझकर बनाए वाक्यांश, जिनमें ज्ञान और विचार इस तरह बँधे हों कि आसानी से याद रहें और अगली पीढ़ियों तक पहुँचें।
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1मगध के व्यापार को किन नदियों से भौगोलिक लाभ मिला?
पृ. 95।
2पाणिनि की अष्टाध्यायी में कितने सूत्र हैं?
पृ. 95।
5यवन (ग्रीक) का आगमन
जब मगध में यह सब हो रहा था, उत्तर-पश्चिम में भूमध्यसागर तक जाने वाले एक प्राचीन मार्ग के पास कई छोटे राज्य थे। ग्रीक विवरणों के अनुसार उनमें पौरव भी थे, जिनके राजा पुरु (पोरस) थे (पृ. 96)।
"एक राजा की तरह" (पृ. 97)
युद्ध के बाद एलेक्जेंडर ने पुरु से पूछा कि उनके साथ कैसा व्यवहार हो। पुरु ने कहा — "एक राजा की तरह।" एलेक्जेंडर ने उन्हें उन्हीं के राज्य का क्षत्रप बना दिया। क्षत्रप: फ़ारसी और ग्रीक साम्राज्यों में प्रांतों के शासक, जिनके पास अधिकारी होते हुए भी काफ़ी शक्ति और स्वतंत्रता थी।
सोचिए (पृ. 97): एलेक्जेंडर पूरे विश्व पर राज क्यों करना चाहता था? उसे इससे क्या मिलता?
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1एलेक्जेंडर ने पंजाब में किस राजा को हराया?
पृ. 97।
2एलेक्जेंडर की मृत्यु कहाँ हुई?
पृ. 97: 32 वर्ष की उम्र में।
6शक्तिशाली मौर्य
एलेक्जेंडर के लौटने के कुछ वर्ष बाद, लगभग 321 सा.सं.पू. में, नया वंश और नया साम्राज्य उभरा — चंद्रगुप्त मौर्य का मौर्य साम्राज्य। इसने जल्दी ही नंद साम्राज्य के क्षेत्र अपने अधीन किए और आगे बढ़ता गया (पृ. 98)।
कौटिल्य की कहानी (पृ. 99–100)
कौटिल्य के दो कथन (पृ. 103)
"प्रजा की प्रसन्नता में राजा की प्रसन्नता है, प्रजा की भलाई में उसकी भलाई।" और: राजा को ग्रामीण क्षेत्र का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि शक्ति वहीं से आती है — जो तटबंध या सड़क-पुल बनाएँ, गाँवों को सुंदर बनाएँ या उनकी रक्षा करें, उन पर राजा विशेष अनुग्रह करे।
पता लगाइए (पृ. 103): कक्षा में चर्चा कीजिए — कौटिल्य के साम्राज्य के विचारों की तुलना आज के राष्ट्र से कीजिए।
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1मौर्य साम्राज्य की स्थापना लगभग कब हुई?
पृ. 98।
2सप्तांग में "कोष" का अर्थ?
पृ. 102।
7शांति का चयन करने वाला राजा
मौर्य वंश के एक और राजा — अशोक (268–232 सा.सं.पू.), चंद्रगुप्त के पौत्र। शुरुआत में अशोक बहुत महत्वाकांक्षी थे; विरासत में मिले साम्राज्य को उन्होंने उपमहाद्वीप के सबसे दक्षिणी भाग को छोड़कर लगभग पूरे भूभाग तक फैलाया (पृ. 104)।
सोचिए (पृ. 104): अशोक चाहते तो कलिंग युद्ध का ज़िक्र न करते और शांत राजा की छवि बनाए रखते। उन्होंने शिलालेखों में इसे क्यों माना?
देवानंपिय पियदसि (पृ. 106)
अधिकारियों के लिए आदेश (पृ. 107)
"सब मनुष्य मेरी संतान के समान हैं… तुम्हें निष्पक्षता से न्याय करना चाहिए… नगर के न्याय-शासक सावधान रहें कि किसी को अकारण क़ैद या यातना न दी जाए।" इसके लिए अशोक हर पाँच वर्ष में एक नम्र और दयालु अधिकारी दौरे पर भेजने वाले थे।
पता लगाइए (पृ. 107): क्या ये उपाय साम्राज्य चलाने में मददगार रहे होंगे? कैसे?
धर्म (प्राकृत में "धम्म") (पृ. 107)
सरल शब्दों में: नैतिक नियम, या परिवार, समुदाय या राष्ट्र के प्रति किसी का नैतिक या धार्मिक कर्तव्य। गहरे अर्थ में: ब्रह्मांड की व्यवस्था — "ऋतम्" — के अनुसार जीना। यानी धर्म में कर्तव्य, नियम, सत्य, व्यवस्था और नैतिकता — सब शामिल।
सारनाथ स्तंभ का शीर्ष (चित्र 5.20, पृ. 109)
अशोक के बाद (पृ. 108)
अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य लगभग आधी शताब्दी चला; उत्तराधिकारी उसे एकजुट न रख सके और कई छोटे राज्य स्वतंत्र हो गए। लगभग 185 सा.सं.पू. से भारत की यात्रा का अगला चरण शुरू हुआ।
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1अशोक के ज़्यादातर शिलालेख किस लिपि में हैं?
पृ. 105।
2"देवानंपिय" का अर्थ?
पृ. 106।
8मौर्य काल में जीवन
पाटलिपुत्र जैसे नगर शासन और व्यापार के बड़े केंद्र थे — महल, सार्वजनिक भवन, सुनियोजित सड़कें। अच्छी कर-व्यवस्था और व्यापार से राजकोष मज़बूत रहा (पृ. 108)।
इसे अनदेखा न करें: सोहगौरा ताम्रपत्र (पृ. 108)
चौथी-तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. का यह अभिलेख भारत के सबसे पुराने प्रशासनिक अभिलेखों में है। उत्तर प्रदेश के सोहगौरा में मिला, प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में; माना जाता है कि चंद्रगुप्त मौर्य के समय जारी हुआ। इसमें अकाल से बचाव के लिए अन्नागार बनाने का उल्लेख है — खाद्य सुरक्षा का प्रयास।
पहनावा (बाद के विवरण, पृ. 109)
सूती कपड़े — निचला वस्त्र घुटनों से नीचे, टखनों की ओर आधे रास्ते तक; ऊपरी वस्त्र कंधों पर डाला जाता। कुछ लोग अलंकृत चमड़े के जूते पहनते, जिनके मोटे तलवे उन्हें लंबा दिखाते।
नगरों में रहने वाले कारीगर (पृ. 109)
कला और वास्तुकला (पृ. 110–112)
पता लगाइए (पृ. 109): इतिहासकार बनकर पुस्तक के पृ. 110–111 की कलाकृतियाँ देखिए — मौर्य युग के लोगों के बारे में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
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1सोहगौरा ताम्रपत्र में किसकी स्थापना का उल्लेख है?
पृ. 108।
2मौर्य काल के नगरों में घर किससे बने होते थे?
पृ. 109।
9साम्राज्यों की दुर्बलताएँ और सार
रोमन, फ़ारसी, ऑटोमन, स्पैनिश, रूसी, ब्रिटिश — सब बड़े साम्राज्य ख़त्म हो चुके हैं, और इतिहासकार उनके पतन के कारणों पर बहस करते रहते हैं (पृ. 112)।
सोचिए (प्र. 9, पृ. 115): तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. में कौशांबी से कावेरीपट्टनम जाना हो तो कैसे जाएँगे, कहाँ रुकेंगे, कितना समय लगेगा?
पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 114)
पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।
आख़िरी जाँच✓ पड़ाव पूरा
1अशोक का शासनकाल?
पृ. 104।
2पुस्तक के अनुसार साम्राज्य "विरोधाभास" क्यों हैं?
पृ. 113–114।
नौ पड़ाव पूरे! अगली बार राष्ट्रीय प्रतीक या ध्वज का धर्मचक्र देखिए, तो सारनाथ और अशोक को याद कीजिए।