एक साम्राज्य टूटा, कई राज्य उभरे
शुरुआत
भविषा और ध्रुव ने "इतिहास" फिर चालू किया और कलाकृतियों के एक संग्रह के बीच जा पहुँचे — हर एक दूसरी से बिलकुल अलग। क्या ये एक ही साम्राज्य की हैं, या कई की? उनका अनुमान सही था: कई की।

“सतत जीवंत परंपरा और नवजीवन की एक अद्भुत शक्ति के कारण इस भूमि ने असंख्य परिवर्तनों के माध्यम से स्वयं को समायोजित किया है।”
अध्याय इन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 117)
- मौर्योत्तर काल को कभी-कभी "पुनर्गठन का काल" क्यों कहा जाता है?
- वे कौन-से मूल्य और सिद्धांत थे जिन्होंने इस काल के सम्राटों का मार्गदर्शन किया?
- विदेशी आक्रमणकारियों ने भारतीय समाज में समाहित होकर सांस्कृतिक संगम में कैसे योगदान दिया?
कक्षा 7 के रिवीजन नोट्स अभी तैयार हो रहे हैं; तब तक यह पन्ना सीधे पाठ्यपुस्तक से बना है। आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।
1मौर्यों के बाद
अशोक के उत्तराधिकारियों के बारे में बहुत कम जानकारी मिलती है। आम तौर पर माना जाता है कि अंतिम मौर्य शासक की हत्या लगभग 185 सा.सं.पू. में उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने की। इसके बाद उपमहाद्वीप में कई नए राज्य उभरे — अक्सर वही, जो पहले मौर्यों के अधीन थे। उत्तर-पश्चिम कमज़ोर हुआ और बाहरी आक्रमणों के लिए खुल गया (पृ. 118)।
"पुनर्गठन का काल" क्यों? (पृ. 118)
कुछ विद्वानों के अनुसार, क्योंकि पुराने क्षेत्र नए राज्यों में पुनर्गठित हो रहे थे, जो लगातार ताक़तवर बनने की होड़ में थे। भारत का मानचित्र बहुत बदला — और लोगों का जीवन भी।
नियंत्रण पाने के दो तरीक़े (पृ. 120)
पता लगाइए (पृ. 118–119): एक पन्ने पर दूसरी शताब्दी सा.सं.पू. के पहले वर्ष से तीसरी शताब्दी सा.सं. के अंतिम वर्ष तक की समय-रेखा बनाइए। यह अवधि कितने वर्षों की है? सा.सं.पू. से सा.सं. में बदलते समय कक्षा 6 का अध्याय "इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत" याद कीजिए। अध्याय पढ़ते हुए प्रमुख व्यक्ति, राज्य और घटनाएँ उस पर लगाते जाइए।
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1अंतिम मौर्य शासक की हत्या लगभग कब और किसने की?
पृ. 118।
2इनमें कौन-सा राजवंश उपमहाद्वीप के बाहर से आया?
पृ. 120।
2शुंगों का उत्कर्ष
पुष्यमित्र शुंग ने शुंग राजवंश की स्थापना की, जिसने उत्तर और मध्य भारत के कुछ भागों पर शासन किया। उनका साम्राज्य मौर्य साम्राज्य से छोटा था, फिर भी उन्होंने उसे बाहरी आक्रमणकारियों से सुरक्षित रखा और शुरुआती सैन्य अभियानों के बाद ग्रीकों से मैत्री रखी। पर उनके लगभग एक शताब्दी बाद शुंग साम्राज्य समाप्त हो गया (पृ. 121)।
वैदिक अनुष्ठान और दूसरे मत (पृ. 121–122)
इस काल में वैदिक अनुष्ठानों का पुनरुत्थान हुआ, पर दूसरे दर्शन और मत भी फलते-फूलते रहे। दर्शन और साहित्य के लिए संस्कृत एक प्रमुख भाषा बनी। कक्षा 6 में आपने जिन योग सूत्रों के अंश पढ़े थे, वे इसी काल में पतंजलि ने संकलित किए।
भरहुत स्तूप (मध्य प्रदेश) (पृ. 122)
पता लगाइए (पृ. 124): पुस्तक के चित्र 6.7 में दाहिनी ओर की दो आकृतियाँ क्या कर रही हैं? उनका व्यवसाय और पहनावा क्या बताता है? चित्र 6.6 के कोलाज में कपड़ों, आभूषणों और रोज़ की चीज़ों पर टिप्पणी लिखिए।
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1अश्वमेध यज्ञ में घोड़ा रोकने का क्या मतलब था?
पृ. 121।
2योग सूत्र किसने संकलित किए?
पृ. 122।
3सातवाहन
शुंगों के दक्षिण में सातवाहन — कभी-कभी "आंध्र" भी कहलाते — दूसरी शताब्दी सा.सं.पू. से दक्कन के बड़े भूभाग पर राज करते थे; साम्राज्य मुख्यतः आज के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में था। अलग-अलग समय पर राजधानियाँ बदलीं — सबसे प्रसिद्ध अमरावती और प्रतिष्ठान (पैठन) (पृ. 124)।
सिक्के पर जहाज़ (चित्र 6.8, पृ. 125)
सातवाहन सिक्के गुजरात से आंध्र प्रदेश तक — पश्चिमी और पूर्वी दोनों तटों पर — मिले हैं। कई पर जहाज़ बने हैं, जैसे दो मस्तूलों वाला समुद्री जहाज़: एक-दूसरे को काटती रेखाएँ शायद पाल हैं, नीचे की लहरदार रेखाएँ समुद्र। इससे पता चलता है कि समुद्री व्यापार आर्थिक जीवन का अहम हिस्सा था और जहाज़ बनाने व नौवहन की तकनीक उन्नत थी।
सोचिए (पृ. 126): राजा के नाम के आरंभ में माँ का नाम लिखने की परंपरा का क्या अर्थ हो सकता है?
सातवाहनों का अंत (पृ. 127–128)
तीसरी शताब्दी सा.सं. में सातवाहन साम्राज्य छोटे स्वतंत्र राज्यों में बँट गया। सबसे बड़े कारण: कमज़ोर केंद्रीय शासन और धीरे-धीरे आर्थिक गिरावट।
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1सातवाहनों की सबसे प्रसिद्ध राजधानियाँ?
पृ. 124।
2कई सातवाहन सिक्कों पर जहाज़ होना क्या बताता है?
पृ. 125।
4चेदियों का आगमन
कलिंग युद्ध याद है? मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद कलिंग चेदि वंश के अधीन एक प्रमुख शक्ति बना। इसके प्रमुख राजा खारवेल जैन दर्शन के अनुयायी थे — कभी-कभी "भिक्षु-राजा" कहलाते — फिर भी सभी मतों का सम्मान करते थे (पृ. 128)।
हाथीगुंफा अभिलेख (पृ. 128–129)
उदयगिरि की एक प्रमुख गुफा में ब्राह्मी लिपि में यह अभिलेख खारवेल की हर वर्ष की उपलब्धियाँ बताता है — विजयी सैन्य अभियानों से जनकल्याण के कामों तक। खारवेल अपने बारे में क्या कहते हैं? हर दावा खोलिए।
भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि (पृ. 129)
एक बार फिर एक राजा सभी दर्शनों और मतों को संरक्षण देने में गौरव महसूस करता है — पुस्तक इसे "भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि" का एक आधारभूत तत्व कहती है।
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1खारवेल किस दर्शन के अनुयायी थे?
पृ. 128।
2हाथीगुंफा अभिलेख कहाँ है?
पृ. 128।
5दक्षिण में राज्य और जन-जीवन
दक्षिण में दूसरी या तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. से तीसरी शताब्दी सा.सं. तक तीन शक्तिशाली राजवंश उभरे — चेर, चोल और पांड्य। ये आपस में होड़ करते रहे और साथ ही व्यापार और संस्कृति को आगे बढ़ाते रहे। अशोक का साम्राज्य इन तक नहीं पहुँचा था (उन्होंने अपने शिलालेखों में इनका उल्लेख किया है) — यानी मौर्य शक्ति के शिखर पर भी ये स्वतंत्र रहे। खारवेल ने दक्षिण भारतीय राजाओं के एक महासंघ को हराने का दावा किया, पर उस युद्ध का स्थान ज्ञात नहीं (पृ. 129)।
संगम साहित्य (पृ. 129–130)
"संगम" शब्द संस्कृत के "संघ" से — अर्थ: समिति, एकत्र होना; यहाँ कवियों की सभाएँ। संगम साहित्य दक्षिण भारत का सबसे प्राचीन साहित्य है — कई काव्य-संग्रह, जिनमें प्रेम जैसी निजी भावनाएँ और वीरता, उदारता जैसे सामाजिक मूल्य बड़ी कुशलता से व्यक्त हैं। इतिहासकार उस समय के समाज और संस्कृति को समझने के लिए इसे ख़ूब पढ़ते हैं। उस पूरे युग को "संगम युग" कहते हैं।
सोचिए (पृ. 133–134): इतिहासकार कई सौ साल पहले के दो दूर-दराज़ राज्यों के व्यापार का पता कैसे लगाते होंगे? उस समय मोती व्यापार के लिए इतने अहम क्यों थे?
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1"संगम" शब्द किस शब्द से बना है?
पृ. 129–130।
2कल्लनई (ग्रैंड एनीकट) किस नदी का पानी मोड़ती है?
पृ. 132।
6इंडो-ग्रीक और शक
इसी काल में कुछ आक्रमणकारी उत्तर-पश्चिमी सीमा से आए और उत्तर-पश्चिम, उत्तर और मध्य भारत के भागों पर अधिकार किया। एलेक्जेंडर पीछे हटते समय क्षत्रप छोड़ गया था; समय के साथ उन्होंने अपने स्वतंत्र राज्य बनाए — "इंडो-ग्रीक"। वे विजेता बनकर आए, पर स्थानीय समृद्ध संस्कृति से बहुत प्रभावित हुए; शासन, कला, भाषा और रोज़ के जीवन में ग्रीक और भारतीय तत्व घुल-मिल गए (पृ. 134)।
हेलियोडोरस स्तंभ, विदिशा के पास (मध्य प्रदेश) (पृ. 134–135)
यह स्तंभ एक इंडो-ग्रीक राजदूत हेलियोडोरस के नाम पर है, जिसने अपने अभिलेख में वासुदेव की "देवताओं के देवता" के रूप में स्तुति की। अभिलेख के "तीन अमर उपदेश (पदचिह्न)", जिनका आचरण स्वर्ग तक ले जाता है — हर एक खोलिए।
पता लगाइए (पृ. 135): कुछ इंडो-ग्रीक सिक्कों पर वासुदेव-कृष्ण या लक्ष्मी का होना क्या बताता होगा?
शक (इंडो-सीथियन) (पृ. 135)
इंडो-ग्रीक शासन शकों के आक्रमणों से समाप्त हुआ। शकों ने उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम पर आक्रमण कर दूसरी शताब्दी सा.सं.पू. (अंग्रेज़ी पुस्तक: उसके उत्तरार्ध) से पाँचवीं शताब्दी सा.सं. तक शासन किया, और कुषाणों के आने तक सत्ता में रहे। इसी अवधि में शक संवत पंचांग विकसित हुआ।
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1हेलियोडोरस स्तंभ कहाँ है?
पृ. 134।
2शक संवत को भारतीय राष्ट्रीय पंचांग कब अपनाया गया?
पृ. 135।
7कुषाणों का उदय
कुषाण मूलतः मध्य एशिया के थे और संभवतः दूसरी शताब्दी सा.सं. में भारत आए। शिखर पर उनका साम्राज्य मध्य एशिया से उत्तर भारत के बड़े भूभाग तक फैला था। उनके शासन में ख़ूब सांस्कृतिक मेल-जोल हुआ (पृ. 136)।
कनिष्क की "सिरविहीन" मूर्ति (पृ. 136)
लगभग 1.85 मीटर ऊँची यह प्रसिद्ध मूर्ति कनिष्क की है — संभवतः कुषाणों के सबसे शक्तिशाली शासक। उस पर ब्राह्मी में लिखा है: "महाराजा राजाधिराज देवपुत्र कनिष्क" — "महाराजा, राजाओं के राजा, देवपुत्र कनिष्क"। सैन्य अभियानों से फ़ुर्सत में कनिष्क कला और संस्कृति को बढ़ावा देते, जिससे नई कला-शैलियाँ बनीं।
कनिष्क के सिक्के: सम्राट के अलावा कौन? (चित्र 6.23, पृ. 137)
सोचिए (पृ. 137): एक शक्तिशाली शासक ने सिक्कों पर बुद्ध और शिव क्यों बनवाए होंगे? यह उसके मूल्यों के बारे में क्या बताता है? क्या आज भी मुद्राओं पर ऐसे प्रतीक दिखते हैं?
रेशम मार्ग (सिल्क रूट) (पृ. 137–138)
कुषाणों का रेशम मार्ग के अहम हिस्सों पर नियंत्रण था — यह मार्ग चीन को मध्य एशिया और फ़ारस होते हुए भूमध्यसागरीय क्षेत्र से जोड़ता था। उनके समय में व्यापार बढ़ा और भारत एशिया के दूसरे भागों और पश्चिमी देशों से जुड़ा (मानचित्र: चित्र 6.25)।
मिली-जुली विरासत (पृ. 137, 140)
मूर्तियों में तरह-तरह के देवता — अलग-अलग विचारधाराओं का शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व। सूर्य जैसे देवताओं का मनुष्य-जैसा चित्रण शुरू हुआ, जिसने बाद के मंदिर स्थापत्य की नींव रखी। शैलियाँ एक-दूसरे से प्रभावित हुईं, पर भारतीय विषय — ख़ासकर हिंदू और बौद्ध — प्रमुख रहे। इसी समय संस्कृत साहित्य फला-फूला और महाभारत तथा रामायण जैसे महाकाव्यों का संकलन हुआ।
सोचिए (पृ. 137): गांधार कहाँ है? क्या यह नाम आपको महाभारत के किसी पात्र की याद दिलाता है?
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1कनिष्क के एक सिक्के पर ग्रीक लिपि में किसका नाम है?
पृ. 137।
2मथुरा शैली की मूर्तियाँ मुख्यतः किस पत्थर से बनीं?
पृ. 140।
8सार और अभ्यास
अपना राज्य (प्र. 5, पृ. 143): आप एक स्वतंत्र राज्य बनाएँ तो कौन-सा राजचिह्न और कौन-सी उपाधि चुनेंगे, और क्यों? अपने राज्य के मूल्य, नियम और विशेषताएँ लिखिए।
पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 142–143)
पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।
आख़िरी जाँच✓ पड़ाव पूरा
1किस शासक ने अपनी उपाधि में माता का नाम जोड़ा?
पृ. 126; प्र. 3, पृ. 143।
2पुस्तक के अनुसार इस काल की कला में किनकी प्रधानता रही?
पृ. 140, 143।
आठ पड़ाव पूरे! अगली बार किसी सरकारी प्रकाशन पर शक संवत की तारीख़ दिखे, तो इस काल को याद कीजिए।