अध्याय 7गुप्त काल — अथक सृजनशीलता का युग

इंटरैक्टिव अध्याय45 मिनट

NCERT — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, कक्षा 7 भाग 1, अध्याय 7 (पृ. 145–166)।

शांति के लंबे दौर में विज्ञान, कला और साहित्य

शुरुआत

भविषा और ध्रुव पांड्य राज्य से लौटे ही थे — बाज़ार देखे, नाव की सैर की, मोती ख़रीदते रोमन व्यापारी मिले। अब "इतिहास" उन्हें कुछ शताब्दियाँ आगे ले चला। क्या नगर वैसे ही होंगे? लोग, समाज, शासन, साहित्य, कला?

“न बल के द्वारा, न केवल कूटनीति से अधर्म का नाश किया जा सकता है; न ही चाटुकारिता से धर्म की स्थापना की जा सकती है। राज्य की वास्तविक शक्ति विद्या और बुद्धि में निहित होती है, न कि भोगवृत्ति में।”

— कालिदास (रघुवंशम्) (पृ. 145)

अध्याय इन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 145)

  1. गुप्त कौन थे? गुप्त काल को कभी-कभी भारतीय इतिहास में "उत्कृष्ट युग" (क्लासिकल एज) क्यों कहा जाता है?
  2. इस समय भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य भागों में क्या हो रहा था?
  3. इस काल के कुछ महान व्यक्ति कौन थे? आज भी उनके बारे में प्रचलित कथाएँ क्यों महत्वपूर्ण हैं?

कक्षा 7 के रिवीजन नोट्स अभी तैयार हो रहे हैं; तब तक यह पन्ना सीधे पाठ्यपुस्तक से बना है। आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।

1लौह-स्तंभ

"इतिहास" भविषा और ध्रुव को दिल्ली के महरौली ले गया, जहाँ प्रसिद्ध लौह-स्तंभ खड़ा है (पृ. 147)।

टूर गाइड चाचा की बात सुनिए

  1. टूर गाइडयह लौह-स्तंभ 1600 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है और आज भी बिना जंग लगे खड़ा है — प्राचीन भारत के उन्नत धातु विज्ञान का प्रमाण।
  2. भविषा1600 वर्ष प्राचीन और अब तक इसमें जंग नहीं लगा!
  3. ध्रुवइस पर कुछ लिखा है, पर मैं पढ़ नहीं पा रहा।
  4. टूर गाइडयह छह टन का स्तंभ गुप्त शासक चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में स्थापित हुआ। संभवतः पहले मध्य प्रदेश की उदयगिरि गुफाओं के सामने लगा और कुछ शताब्दियों बाद दिल्ली लाया गया।
  5. टूर गाइडयह भगवान विष्णु को समर्पित था, और इसके अभिलेख सम्राट की विजयगाथाओं का वर्णन करते हैं।

साइकिल या स्तंभ?

साइकिल को एक वर्ष बारिश में बाहर छोड़ दीजिए — उसमें जंग लगने लगेगा। पर यह स्तंभ शताब्दियों से खुले आसमान के नीचे वैसा ही खड़ा है (पृ. 148)। समय आगे बढ़ाइए।

वैज्ञानिकों का मानना है: ख़ास तरह के लोहे और हवा की ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से सतह पर एक विशिष्ट पतली रासायनिक परत बनती है, जो लोहे को क्षरण से बचाती है (पृ. 148)।

चित्र हमारा है; जंग की कोई दर नहीं दिखाई गई।

जाँच पड़ाव

  1. 1लौह-स्तंभ किसके शासनकाल में स्थापित हुआ?

  2. 2वैज्ञानिकों के अनुसार स्तंभ में जंग क्यों नहीं लगता?

2एक नई शक्ति का उदय

तीसरी शताब्दी सा.सं. तक उत्तर और उत्तर-पश्चिम में फैला कुषाण साम्राज्य कमज़ोर होने लगा और नए राज्य उभरे। गुप्तों की उत्पत्ति पर अलग-अलग मत हैं, पर व्यापक रूप से माना जाता है कि वे आज के उत्तर प्रदेश के आस-पास के क्षेत्र में शासक के रूप में उभरे और धीरे-धीरे एक शक्तिशाली साम्राज्य बनाया (पृ. 148)।

गुप्त परिवार — तीन पीढ़ियाँ

हर नाम पर टैप कीजिए (पृ. 149–155)।

जाँच पड़ाव

  1. 1चंद्रगुप्त द्वितीय के पिता कौन थे?

  2. 2किस गुप्त शासक को "विक्रमादित्य" भी कहा जाता है? (प्र. 2)

3योद्धा शासक और स्रोत

प्रयागराज के एक स्तंभ पर उत्कीर्ण "प्रयाग प्रशस्ति" समुद्रगुप्त की उपलब्धियों की प्रशंसा करती है। इसके लेखक राजकवि हरिषेण के अनुसार राजा की महत्वाकांक्षा थी "धरणि-बंध" — पूरी पृथ्वी को एक करना। इसके लिए उन्होंने कई युद्ध लड़े, राजाओं को हराकर राज्य मिलाए (पृ. 149–150)।

हारे हुए राजाओं का क्या हुआ? (पृ. 150, 164–165)

हर स्थिति खोलिए।

हरिषेण ने यह भी लिखा कि राजा ने कला, ज्ञान और व्यापार को बढ़ावा दिया, जिससे राज्य समृद्ध हुआ (पृ. 150)।

सोचिए (पृ. 150): राजा अपनी उपलब्धियाँ अभिलेखों के ज़रिए क्यों बताते होंगे?

अब तक के स्रोत छाँटिए (पृ. 151)

कक्षा 6 में आपने स्रोतों की सूची बनाई थी। इस अध्याय के स्रोतों को उनके प्रकार में रखिए।

विष्णु पुराण के अनुसार (पृ. 151)

"गुप्त वंश अनुगंगा (मध्य-गंगा घाटी), प्रयाग (आज का प्रयागराज), साकेत (अयोध्या) एवं मगध (आज का बिहार) और आस-पास के समस्त क्षेत्रों पर शासन करेगा।" पर अपने उत्कर्ष पर साम्राज्य आज के उत्तर और पश्चिम भारत के साथ मध्य और पूर्वी भारत के कुछ भागों तक फैला।

कल्पना कीजिए: सैनिक, हाथी, घोड़े, रसोइये, सहायक और उनका भोजन — पूरी सेना को एक जगह से दूसरी ले जाना कितना बड़ा काम रहा होगा! स्पष्ट है कि अधीन राजाओं से यह व्यवस्था करने को कहा जाता होगा (पृ. 151)।

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  1. 1प्रयाग प्रशस्ति के लेखक कौन थे?

  2. 2"धरणि-बंध" का अर्थ?

4एक यात्री की नज़र से

चीनी यात्री फा-शिएन 5वीं शताब्दी सा.सं. के आरंभ में भारत आए — पवित्र बौद्ध स्थल देखने, विद्वानों से सीखने और बौद्ध ग्रंथों की पांडुलिपियाँ चीन ले जाने के लिए। उनका यात्रा-वृत्तांत आज भी उपलब्ध है (पृ. 153)।

वृत्तांत पढ़िए और विशेषताएँ चिह्नित कीजिए

जो वाक्यांश आपको समाज की कोई ख़ास बात बताए, उस पर टैप कीजिए। फिर नीचे अपने चुने वाक्यांश गिनिए और साथियों से तुलना कीजिए — एक ही अंश को लोग कितनी अलग तरह पढ़ते हैं!

… … … … … … … … …
— बौद्ध राज्यों का एक प्रलेख (399–414 सा.सं.), जे. लेग द्वारा अनुवादित (पृ. 153)

ध्यान रहे (पृ. 154)

ऐसे विवरण मूल्यवान स्रोत हैं, पर ये लेखक का दृष्टिकोण दिखाते हैं — एक समय और समाज के एक सीमित हिस्से का। अपने वृत्तांत में फा-शिएन ने चांडालों के साथ कठोर व्यवहार का भी वर्णन किया है, जिन्हें बहिष्कृत माना जाता था और जो नगर की सीमा से बाहर रहते थे। इसीलिए इतिहासकार निष्कर्ष से पहले कई स्रोत, दृष्टिकोण और व्याख्याएँ देखते हैं।

बहिष्कृत (पृ. 154)

वह व्यक्ति जिसे किसी सामाजिक या सांस्कृतिक समूह ने अस्वीकार कर दिया हो; यहाँ — लोगों की एक श्रेणी, जो वर्ण व्यवस्था से बाहर थी और सामाजिक रूप से बहुत निम्न मानी जाती थी।

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  1. 1फा-शिएन कहाँ से आए थे?

  2. 2पुस्तक फा-शिएन के वृत्तांत के बारे में क्या सावधानी देती है?

5शासन, उपाधियाँ और व्यापार

एक ही समय में कई राज्य थे, और कुछ आपस में युद्ध भी करते रहे होंगे। याद कीजिए, कौटिल्य ने सप्तांग में "मित्र" — गठबंधन — को एक अंग माना था (पृ. 154)।

नए राजा, नई उपाधियाँ (पृ. 154)

अभिलेखों और सिक्कों से मिली उपाधियों को छाँटिए।

प्रभावती गुप्त — प्रतिशासिका (पृ. 154–155)

ताम्रपत्रों पर भूमि-अनुदान (पृ. 156)

सब कुछ केंद्र से चलाने के बजाय गुप्तों ने साम्राज्य को प्रांतों में बाँटा और स्थानीय शासकों, पुरोहितों और मुखियाओं को भूमि दान दी। इन अनुदानों को सटीक रिकॉर्ड के लिए ताम्रपत्रों पर लिखा गया; कई हाल में पुरातत्वविदों ने खोजे हैं। इससे कर-संग्रह ठीक हुआ और स्थानीय मुखियाओं को अपने क्षेत्र पर कुछ नियंत्रण भी मिला।

राजकोष भरिए (पृ. 156)

गुप्तों के राजस्व के स्रोत जोड़िए।

हिंद महासागर का व्यापार (पृ. 156)

भारत ने भूमध्यसागरीय क्षेत्र, दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन से व्यापार किया — कपड़ा, मसाले, हाथीदाँत के आभूषण और रत्न निर्यात हुए। भूमध्यसागरीय बाज़ारों के रास्ते पर अरब सागर का सोकोट्रा द्वीप एक अहम पड़ाव था: मिट्टी के बर्तन, ब्राह्मी लिपि के अभिलेख और बौद्ध स्तूप जैसे सबूत वहाँ कई शताब्दियों तक भारतीय व्यापारियों की उपस्थिति बताते हैं — मिस्र, अरब, रोम और ग्रीस के व्यापारियों के साथ।

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  1. 1गुप्तों के राजस्व का प्रमुख स्रोत?

  2. 2भूमि-अनुदान किस पर लिखे जाते थे?

6नवीन विचारों का युग

गुप्त शासक विष्णु के परम भक्त थे, फिर भी उन्होंने दूसरी परंपराओं को संरक्षण दिया — नालंदा विश्वविद्यालय और कई बौद्ध विहारों समेत। लंबी शांति और स्थिरता के कारण कुछ इतिहासकार इस काल को भारत का "उत्कृष्ट युग" कहते हैं। पहले के ज्ञान को कई ग्रंथों में संकलित किया गया; कालिदास की रचनाएँ और कई प्रमुख पुराण रचे गए (पृ. 156–157)।

आर्यभट का वर्ष (पृ. 158)

लगभग 500 सा.सं. में कुसुमपुर (आज के पटना के पास) में रहने वाले आर्यभट ने "आर्यभटीय" में वर्ष की अवधि बताई। दोनों मान देखिए, फिर अंतर निकालिए।

5 घंटे5.5 घंटे6 घंटे6.5 घंटेआर्यभट: 365 दिन 6 घंटे 12 मिनट 30 सेकंडआर्यभटआधुनिक मान: 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 45 सेकंडआधुनिक मान

अंतर कितने मिनट और सेकंड का है?

पट्टियाँ केवल 365 दिन के ऊपर के घंटे दिखाती हैं। दोनों मान पुस्तक से; अंतर की गणना आपकी।

पृथ्वी घूमती है

आर्यभट ने प्रस्ताव किया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, जिससे दिन और रात होते हैं (पृ. 158)। पृथ्वी घुमाइए और देखिए आपका गाँव कब दिन में है।

चित्र पैमाने पर नहीं।

इस काल के कुछ व्यक्ति (पृ. 158–160)

पता लगाइए (पृ. 159): कक्षा को दो समूहों में बाँटिए — आर्यभट और वराहमिहिर से साक्षात्कार के लिए प्रश्न बनाइए।

जाँच पड़ाव

  1. 1आर्यभट के अनुसार दिन और रात क्यों होते हैं?

  2. 2"मेघदूतम्" किसकी रचना है?

7सौंदर्य की खोज

गुप्त शासकों ने ऐसा वातावरण दिया जिसमें रचनात्मकता और शिल्प-कौशल ख़ूब फला। कला के प्रमुख केंद्र: बुद्ध मूर्तियों के लिए सारनाथ (वाराणसी के पास) और अजंता की गुफाएँ (महाराष्ट्र); उदयगिरि (मध्य प्रदेश) की चट्टान काटकर बनी गुफाएँ और देवताओं की प्रतिमाएँ। "गुप्तकालीन कला" ने सौंदर्य के ऊँचे मानक बनाए (पृ. 160)।

गंगा या यमुना? (चित्र 7.15.3, पृ. 162)

अहिच्छत्र (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) की पकी मिट्टी की गुप्तकालीन मूर्तियाँ — वाहन देखकर पहचानिए।

मकर (मगरमच्छ जैसा पौराणिक प्राणी) पर खड़ी देवी

कछुए पर खड़ी देवी

अजंता (चित्र 7.1, 7.17)

अजंता की गुफाएँ दूसरी शताब्दी सा.सं.पू. से लगभग 480 सा.सं. तक बनीं; इस काल में गुप्तों और वाकाटकों के सहयोग से। एक गुफा मंदिर जैसी है — बीच के स्तूप से उभरते बैठे बुद्ध, और लकड़ी की शहतीरों की नकल वाली धनुषाकार छत। एक चित्र बोधिसत्व पद्मपाणि का है।

स्थान और पहचान मिलाइए (प्र. 5, पृ. 166)

हर स्थान को उसकी पहचान वाले खाने में रखिए।

पता लगाइए (पृ. 160): पुस्तक के चित्र 7.15.1 और 7.15.2 की मूर्तियों के प्रतीक देखकर बताइए — कौन-से देवता दिखाए गए हैं?

जाँच पड़ाव

  1. 1यमुना की मूर्ति किस वाहन पर खड़ी है?

  2. 2"एक हज़ार मंदिरों का शहर" किसे कहा जाता है?

8दक्षिण, पूर्वोत्तर और सार

गुप्तों का पतन (पृ. 160–161)

छठी शताब्दी सा.सं. तक पतन के संकेत दिखे: मध्य एशिया की हूण जनजाति के बार-बार हमलों से उत्तर भारत पर नियंत्रण कमज़ोर हुआ, और शक्तिशाली क्षेत्रीय शासकों के उदय से भीतरी संघर्ष भी हुए। क्या यह सचमुच अंत था, या एक नए मोड़ की शुरुआत? पुस्तक के अगले भाग में।

उसी समय उपमहाद्वीप में (चित्र 7.2)

पल्लवों का शासन: अंग्रेज़ी पुस्तक के अनुसार 9वीं शताब्दी सा.सं. के उत्तरार्ध तक; हिंदी पुस्तक के चित्र 7.2 में "9 वीं शताब्दी सा.सं.पू." छपा है — पल्लव सातवाहनों के बाद उभरे, इसलिए यहाँ "सा.सं." लिया गया है।

लिखिए (प्र. 1, पृ. 165): "पाटलिपुत्र से अभिवादन। यहाँ का जीवन सुखमय और उत्साह से भरा है। कल ही मैंने देखा…" — गुप्त साम्राज्य के जीवन पर 250–300 शब्दों में पत्र पूरा कीजिए।

पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 165)

पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।

आख़िरी जाँच

  1. 1गुप्त साम्राज्य पर बार-बार हमला करने वाली मध्य एशिया की जनजाति?

  2. 2वाकाटकों की राजधानी?