! यह फ़ाइल केवल शिक्षक के लिए है
यह क्या पढ़ाना है नहीं बताती — वह
01-Lesson-Plan.mdका काम है। यह बताती है कि पुस्तक ऐसा क्यों कहती है, ताकि आप कक्षा में उस प्रश्न का सामना कर सकें जो पाठ्यपुस्तक में नहीं है।
0. सबसे पहले — इस अध्याय का असली जोखिम क्या है
यह अध्याय पिछले दो से भारी है, पर उसका जोखिम ‘बहुत सामग्री’ नहीं है।
!! जोखिम यह है कि अध्याय में दो बार ‘तीन’ आती है, और बच्चे उन्हें मिला देते हैं
सरकार के तीन अंग — विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका। सरकार के तीन स्तर — स्थानीय, राज्य, केंद्र।
दोनों तीन हैं। दोनों ‘सरकार के’ हैं। और दोनों एक ही अध्याय में, एक-दूसरे के तुरंत बाद आते हैं।
परिणाम यह होता है कि परीक्षा में बच्चा लिखता है — “सरकार के तीन अंग हैं: केंद्र, राज्य और स्थानीय।” यह इस अध्याय की सबसे आम भूल है, और वह पूरी तरह रोकी जा सकती है।
रोकने का तरीक़ा — दो चित्र, दो आकार★
पुस्तक ने स्वयं यह काम कर दिया है, और उसे पहचानना ही पूरा समाधान है:
| चित्र 10.3 | चित्र 10.4 | |
|---|---|---|
| आकार | पहिया (गोल) | पिरामिड (त्रिकोण) |
| क्या दिखाता है | तीन अंग | तीन स्तर |
| प्रश्न का उत्तर | कौन क्या करता है | कौन कहाँ तक |
| आपस में | कोई ऊपर नहीं (दोनों दिशाओं वाले तीर) | एक ऊपर, एक नीचे |
★★दोनों चित्र बोर्ड के एक कोने में बना दीजिए — पहले दिन — और पाँचों कालांश मत मिटाइए।
और यह वाक्य कक्षा में कम से कम तीन बार बोलिए: “अंग = कौन क्या करता है। स्तर = कौन कहाँ तक। और तीनों अंग तीनों स्तरों पर होते हैं।”
1. अध्याय की तीन परिभाषाएँ — और उनका क्रम★★
पुस्तक पृष्ठ 150 पर एक ही अनुच्छेद में तीन परिभाषाएँ दे देती है, और वह क्रम सोचा-समझा है:
| क्रम | पद | परिभाषा |
|---|---|---|
| 1 | शासन | निर्णय लेने की प्रक्रिया |
| 2 | सरकार | वह तंत्र जो यह प्रक्रिया चलाता है |
| 3 | कानून | कुछ अधिक महत्वपूर्ण नियम |
★एक वाक्य में: शासन एक प्रक्रिया है। सरकार एक तंत्र है। कानून एक अधिक महत्वपूर्ण नियम है।
कक्षा में यह प्रश्न पूछिए: “क्या शासन और सरकार एक ही चीज़ हैं?” उत्तर: नहीं — सरकार शासन करती है; शासन वह काम है जो वह करती है।
! यह भेद न बनाने पर बच्चे अध्याय भर ‘सरकार’ और ‘शासन’ को अदल-बदल कर लिखते रहते हैं।
2. वह एक वाक्य जो पूरे अध्याय का बीज है — और जो प्राय: छूट जाता है★
पृष्ठ 150, नियमों की सूची के अंत में, यह वाक्य आता है:
“सभी प्रकार की नौकरियों में कार्यरत लोगों को भी नियोक्ता द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना पड़ता है, जबकि नियोक्ता को भी उन सभी नियमों का पालन करना पड़ता है जो उन्होंने अपने अधीन काम करने वाले लोगों के लिए बनाए हैं।”
पढ़ने में यह एक साधारण-सी बात लगती है। पर यही पूरे अध्याय का बीज है।
नियम बनाने वाला भी नियम से बँधा होता है।
और यही आगे चलकर बनता है —
- ‘शक्तियों का पृथक्करण’ (पृ. 154) — जहाँ कोई अंग दूसरों से ऊपर नहीं है;
- न्यायपालिका की दूसरी भूमिका — जहाँ वह विधायिका के बनाए कानून तक को परख सकती है।
★कक्षा में यह वाक्य पढ़कर एक ही प्रश्न पूछिए: “तो क्या नियम बनाने वाला भी नियम मानता है?” — और उत्तर आने दीजिए।
3. साइबर अपराध वाला उदाहरण — कहानी पहले, परिभाषा बाद में★★
पुस्तक तीनों अंगों को परिभाषाओं से नहीं, एक कहानी से खोलती है। यह जान-बूझकर है, और शिक्षक को वही क्रम रखना चाहिए।
कहानी दो चरणों में है —
चरण 1 — तकनीक ने जीवन बदला। तीस साल पहले मनी ऑर्डर और डिमांड ड्राफ्ट; अब डिजिटल संसाधन। (पुस्तक स्वयं कहती है कि बच्चों ने ये शब्द शायद सुने भी न हों — यह कक्षा में पूछकर देखिए, प्राय: सच निकलता है।)
चरण 2 — उसी तकनीक ने नई समस्या बनाई। साइबर अपराध।
और अब तीनों अंग एक ही कहानी में दिखते हैं:
| क्या हुआ | कौन-सा अंग |
|---|---|
| “अनेक सरकारों ने नए कानून बनाए हैं” | विधायिका |
| साइबर पुलिस ने गिरफ़्तार किया | कार्यपालिका |
| “न्यायालय द्वारा उन्हें दोषी ठहराया गया” | न्यायपालिका |
★पढ़ाने का सही क्रम
1. कहानी सुनाइए — तीनों चरण, रुक-रुककर। 2. फिर पूछिए: “इन तीन कामों को किसने किया? क्या तीनों एक ही ने किए?” 3. अब परिभाषाएँ लिखवाइए।
उल्टा करने पर — यानी पहले तीन परिभाषाएँ देकर बाद में उदाहरण — तीनों नाम आपस में उलझ जाते हैं। यह अंतर कक्षा में साफ़ दिखता है।
4. विधायिका की परिभाषा में तीन क्रियाएँ हैं, एक नहींध्यान
बच्चे लगभग हमेशा लिखते हैं — “विधायिका कानून बनाती है।” यह अधूरा है।
”…वह अंग है जो नए कानून बनाती है और कभी-कभी पुराने कानूनों में संशोधन तथा वर्तमान कानून को निरस्त भी करती है।”
★तीनों क्रियाएँ बोर्ड पर अलग-अलग लिखवाइए — बनाना · संशोधन करना · निरस्त करना।
और उन्हें पृष्ठ 150 की उस बात से जोड़िए — “जो नियम और कानून एक बार बन गए, वे सदा के लिए बन गए — ऐसा तात्पर्य कदापि नहीं है।” यही ‘संशोधन’ और ‘निरस्त’ का कारण है।
5. न्यायपालिका का दूसरा काम — अध्याय का सबसे कम पढ़ाया जाने वाला वाक्य★★
पहला हिस्सा सब पढ़ाते हैं — कि न्यायपालिका तय करती है कि कानून टूटा या नहीं।
दूसरा हिस्सा लगभग हमेशा जल्दी में पढ़ लिया जाता है:
“कभी-कभी यह इस बात की भी जाँच करती है कि क्या कार्यपालिका द्वारा लिया गया कोई निर्णय ठीक है या नहीं; अथवा विधायिका द्वारा पारित किया गया कोई कानून भली-भाँति परखा गया है और सभी के हित में है या नहीं।” (पृ. 154)
★★यह वाक्य इस अध्याय का सबसे बड़ा वैचारिक बिंदु है
न्यायपालिका केवल नागरिकों को नहीं परखती। वह बाक़ी दो अंगों को भी परखती है।
और यही ‘नियंत्रण और संतुलन’ का असली अर्थ है — वरना ‘शक्तियों का पृथक्करण’ केवल एक नाम बनकर रह जाता है।
इस वाक्य के नीचे लकीर खिंचवाइए। यह परीक्षा में आता है, और उत्तरों में लगभग कभी नहीं आता।
6. ‘पृथक’ का अर्थ — यहाँ एक विरोधाभास दिखता है, पर है नहींध्यान
पुस्तक एक ही वाक्य में दो विपरीत दिखने वाली बातें कह देती है:
| पहली बात | दूसरी बात |
|---|---|
| तीनों अंग “निश्चित रूप से पृथक रखे जाते हैं” | “ये तीनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और कार्य भी एक साथ करते हैं” |
★ये विरोधी नहीं हैं, और यही पूरी बात है। ‘पृथक’ का अर्थ है — अलग-अलग काम। ‘पृथक’ का अर्थ यह नहीं है — एक-दूसरे से कटे हुए।
कक्षा में यह उपमा काम आती है (पुस्तक की नहीं, पर सुरक्षित है):
| कौन | क्या करता है | सरकार में |
|---|---|---|
| नियम बनाने वाला | खेल के नियम तय करता है | विधायिका |
| खिलाड़ी | उन नियमों के भीतर खेलता है | कार्यपालिका |
| अंपायर | तय करता है कि नियम टूटा या नहीं | न्यायपालिका |
और फिर पूछिए: “अगर तीनों एक ही आदमी हो जाए, तो खेल कैसा होगा?”
! पर उपमा को खींचिए मत। क्रिकेट का अंपायर नियम नहीं बदल सकता, जबकि न्यायपालिका कानून की जाँच कर सकती है। उपमा प्रवेश-द्वार है, पूरा उत्तर नहीं।
7. बाढ़ वाली तालिका — इस अध्याय का सबसे परीक्षा-योग्य हिस्सा★
पुस्तक तीन स्तरों के लिए दो उपमाएँ देती है, और दूसरी बहुत बेहतर है।
| बाढ़ कितनी बड़ी | कौन-सा स्तर | क्या करता है |
|---|---|---|
| “ज्यादा भीषण नहीं” | स्थानीय प्राधिकारी | स्वयं सँभाल लेते हैं |
| अनेक नगर और बहुत से गाँव | राज्य सरकार | बचाव दल भेजती है |
| “भयानक रूप” और “विशाल क्षेत्र” | केंद्र सरकार | राहत सामग्री और सेना |
★यह तालिका बोर्ड पर बनवाइए, और फिर एक नई स्थिति देकर दोबारा भरवाइए।
अच्छे विकल्प: “मोहल्ले की नाली जाम है” · “पूरे राज्य में सूखा है” · “पड़ोसी देश से समझौता करना है” · “स्कूल की छत टपक रही है”।
यही PARAKH-शैली का प्रश्न है, और उसे कक्षा में करना बहुत आसान है।
और पूरा सिद्धांत एक पंक्ति में —
ऊपर का स्तर तभी आता है जब नीचे का स्तर सँभाल न सके।
यही बात बल्ब वाली उपमा में भी है — बल्ब/स्विच/फ्यूज़ → मिस्त्री → बिजली विभाग।
8. चित्र 10.5 — इसे पूरा मत उतरवाइएध्यान
यह अध्याय का सबसे सघन पृष्ठ है, और उसे एक ही बार में उतरवाने की कोशिश एक पूरा कालांश खा जाती है।
★तालिका को तीन हिस्सों में तोड़िए, और इसी क्रम में
1. न्यायपालिका (सबसे सरल — केवल दो नाम) सर्वोच्च न्यायालय (अखिल भारत) · उच्च न्यायालय (राज्य)
2. विधायिका (थोड़ी अधिक) लोकसभा और राज्य सभा (राष्ट्रीय) · विधान सभा, और कुछ राज्यों में विधान परिषद (राज्य) साथ में ‘सदन’ की परिभाषा।
3. कार्यपालिका (सबसे कठिन, और सबसे अधिक ग़लत होने वाली) राष्ट्रपति ↔ प्रधानमंत्री · राज्यपाल ↔ मुख्यमंत्री साथ में ‘औपचारिक’ की परिभाषा।
4. और अंत में — कार्यों की दोनों सूचियाँ, केवल बोर्ड से उतरवाकर। ! ये सूचियाँ बुलवाइए मत। श्रुतलेख में इनके लिए समय नहीं है, और पुस्तक स्वयं कहती है कि “यह विस्तृत सूची नहीं है।”
और एक प्रश्न जो इस पृष्ठ को जीवित कर देता है★
“तालिका में कोई एक शब्द दोनों तरफ़ है — कौन-सा?”
उत्तर: शिक्षा।
जो बच्चा इसे स्वयं खोज ले, उसे अतिरिक्त मान्यता दीजिए। फिर कहिए — “कुछ विषयों पर केंद्र और राज्य, दोनों काम करते हैं।”
!! और यहीं रुक जाइए। ‘समवर्ती सूची’ शब्द पुस्तक में नहीं है, और कक्षा 6 में उसकी आवश्यकता भी नहीं है। यदि कोई विद्यार्थी और पूछे, तो इतना उत्तर पूरा है — “हाँ, संविधान में इसकी एक व्यवस्था है, और उसे तुम आगे की कक्षा में पढ़ोगे।”
और वह सूचना जो पुस्तक स्वयं देती है — इसे पढ़ना मत भूलिएध्यान
पृष्ठ 156 पर, तालिका से ठीक पहले:
“(स्थानीय सरकारों का यहाँ उल्लेख नहीं किया गया है क्योंकि हम आगे के दो अध्यायों में इसे विस्तार से समझेंगे।)”
★यह पंक्ति कक्षा में पढ़कर सुनाइए। वरना अगले कालांश में यह प्रश्न ज़रूर उठेगा — “स्थानीय स्तर का कॉलम कहाँ है?”
और तब उत्तर यह है: वह अधूरी नहीं है; वह हिस्सा अभी आया नहीं है।
9. डॉ. कलाम का बॉक्स — वह जोड़ जो पुस्तक चुपचाप बनाती है★★
पृष्ठ 157 पर पुस्तक ‘औपचारिक’ की परिभाषा देती है —
“हमारे यहाँ राष्ट्रपति और राज्यपाल वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख नहीं होते हैं…”
और ठीक अगले पृष्ठ पर — पूरे पृष्ठ का डॉ. कलाम वाला बॉक्स है, जो कहता है —
“डॉ. कलाम ने यह दिखाया कि भले ही राष्ट्रपति के रूप में उनकी स्थिति सांकेतिक है, फिर भी वे असंख्य लोगों के जीवन को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”
★यह जोड़ पुस्तक कहीं समझाती नहीं — और वह जान-बूझकर बनाया गया है
‘औपचारिक’ का अर्थ ‘प्रभावहीन’ नहीं होता।
कक्षा में यह प्रश्न पूछिए: “अभी हमने पढ़ा कि राष्ट्रपति असली कार्यपालिका प्रमुख नहीं होते। और अगले ही पन्ने पर किताब कलाम साहब का पूरा पन्ना दे देती है। क्यों?”
यह प्रश्न कक्षा में लगभग हमेशा अच्छा उत्तर लाता है।
और परिभाषा के दोनों हेज मत गिराइए — “विशेष परिस्थितियों में उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं” और “वे सामान्यत:… हस्तक्षेप नहीं करते हैं।” पुस्तक यह नहीं कह रही कि राष्ट्रपति के पास कोई शक्ति नहीं है।
और FAIL · END · NO के लिए एक व्यावहारिक सुझाव★
तीनों अंग्रेज़ी शब्दों पर आधारित शब्द-क्रीड़ा हैं।
इसलिए बोर्ड पर अंग्रेज़ी वर्तनी भी लिखिए — F-A-I-L, E-N-D, N-O। केवल हिंदी में बोलने पर ‘फर्स्ट एटेम्प्ट इन लर्निंग’ का जोड़ बच्चों को दिखता ही नहीं।
यह छोटी-सी बात कक्षा में बड़ा अंतर डालती है।
10. लोकतंत्र वाला खंड — पिकनिक का उदाहरणकरके दिखाइए★
पुस्तक पृष्ठ 160 पर पिकनिक के दो स्थानों का उदाहरण देती है, और मतदान कराती है।
★★इसे पढ़कर मत सुनाइए — कक्षा में सचमुच कीजिए
1. दो काल्पनिक स्थान चुनिए (या दो सचमुच के, यदि कक्षा-भ्रमण की योजना हो)। 2. दो मिनट लाभ-हानि पर बात कराइए — दूरी, समय, खर्च, सुविधाएँ। 3. फिर हाथ उठवाकर मतदान कराइए। 4. और तब कहिए: “यह जो अभी हुआ, उसे प्रत्यक्ष लोकतंत्र कहते हैं।”
यह पाँच मिनट का काम है और यह परिभाषा जीवन भर टिकाता है।
और उसी के साथ दूसरा प्रकार भी बैठ जाता है —
| प्रत्यक्ष | प्रतिनिधि | |
|---|---|---|
| कौन तय करता है | हर व्यक्ति स्वयं | चुने हुए प्रतिनिधि |
| पुस्तक का उदाहरण | पिकनिक का मतदान | कक्षा-मॉनीटर · विधायक · सांसद |
| कब चलता है | समूह छोटा हो | समूह बड़ा हो |
★और पुस्तक का अपना तर्क यही है: “क्या पूरी कक्षा प्रधानाचार्य के पास जाएगी? स्पष्ट है कि यह व्यावहारिक नहीं होगा।”
11. अध्याय का सबसे सुंदर हिस्सा — एक वादा, और उसका पूरा होना★★
पृष्ठ 151 पर, अध्याय के लगभग आरंभ में, पुस्तक एक वादा करती है:
“कानूनों और नियमों में नागरिक भी अपनी बात रख सकते हैं। हम जानेंगे कि ऐसा किस प्रकार होता है।”
और पृष्ठ 160 पर, अध्याय के लगभग अंत में, वह वादा पूरा होता है:
“आधारभूत/धरातलीय लोकतंत्र उस तंत्र की ओर इशारा करता है, जिसमें सामान्य नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित और सुनिश्चित किया जाता है… इस प्रकार के तंत्र में नागरिक स्वयं को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर अपनी बात रख सकते हैं।”
★कक्षा में यह इस तरह कीजिए
कालांश 1 में वह वादा बोर्ड पर लिखकर घेर दीजिए और वहीं छोड़ दीजिए।
कालांश 5 में, जब यह परिभाषा आए, तो उसी घेरे की ओर लौटिए और कहिए — “अब हम जान गए।”
यह एक इशारा पूरे अध्याय को एक कहानी बना देता है, और उसकी लागत शून्य है।
और यह परिभाषा चित्र 10.4 से भी बँधी है — पुस्तक स्वयं कहती है “जैसे कि… पिरामिड का आधार है”, यानी स्थानीय स्तर। और अगले दो अध्याय ठीक उसी आधार पर हैं।
12. दस प्रश्न जो कक्षा में पूछे जाएँगे — और उनके उत्तर
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | “क्या शासन और सरकार एक ही चीज़ हैं?” | नहीं। शासन = प्रक्रिया · सरकार = तंत्र। सरकार शासन करती है। |
| 2 | “तीन अंग और तीन स्तर — क्या ये एक ही हैं?” | नहीं। अंग = कौन क्या करता है · स्तर = कौन कहाँ तक। और तीनों अंग तीनों स्तरों पर होते हैं। |
| 3 | “अगर राष्ट्रपति असली प्रमुख नहीं हैं, तो वे हैं क्यों?” | यह अच्छा प्रश्न है। पुस्तक कहती है कि विशेष परिस्थितियों में उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं; और डॉ. कलाम का बॉक्स दिखाता है कि सांकेतिक स्थिति भी बहुत कुछ कर सकती है। |
| 4 | “चित्र 10.5 में स्थानीय सरकार क्यों नहीं है?” | क्योंकि पुस्तक उसे आगे के दो अध्यायों में लेगी — यह उसने स्वयं कोष्ठक में लिखा है। |
| 5 | “शिक्षा दोनों तरफ़ क्यों है?” | क्योंकि कुछ विषयों पर केंद्र और राज्य, दोनों काम करते हैं। (इससे आगे मत जाइए।) |
| 6 | “न्यायपालिका सरकार को भी सज़ा दे सकती है?” | पुस्तक इतना कहती है कि वह कार्यपालिका के निर्णय और विधायिका के कानून की जाँच कर सकती है। ‘सज़ा’ शब्द मत जोड़िए। |
| 7 | “विधायक और सांसद में क्या फ़र्क़ है?” | विधायक = राज्य स्तर (विधान सभा) · सांसद = राष्ट्रीय स्तर (लोक सभा)। |
| 8 | “क्या भारत में प्रत्यक्ष लोकतंत्र है?” | पुस्तक कहती है कि भारत में ‘जन प्रतिनिधि’ आधारित लोकतंत्र है। प्रत्यक्ष लोकतंत्र का उदाहरण उसने कक्षा की पिकनिक से दिया है, देश से नहीं। |
| 9 | “18 साल ही क्यों?” | पुस्तक कारण नहीं देती — वह केवल कहती है कि कानून के अनुसार यही आयु है। “किताब ने नहीं बताया” एक पूरा उत्तर है। |
| 10 | “तीनों अंग झगड़ें तो?” | पुस्तक का उत्तर यही है — हर अंग दूसरे की निगरानी कर सकता है, और भूमिका से परे जाने पर उसे नियंत्रित कर पुन: संतुलन स्थापित किया जा सकता है। |
13. अभ्यास-प्रश्न 4 में एक तिथि की बातध्यान
पुस्तक का चौथा अभ्यास-प्रश्न कहता है: “2019 की कोविड महामारी के दौरान लगा लॉकडाउन आपको याद होगा।”
तथ्य: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 मार्च 2020 को इसे महामारी घोषित किया, और भारत में देशव्यापी लॉकडाउन 25 मार्च 2020 से शुरू हुआ।
★‘2019’ कहाँ से आया, यह समझा जा सकता है — रोग का नाम ही ‘कोविड-19’ है, क्योंकि वह 2019 के अंत में पहचाना गया था।
! कक्षा में इसे ‘किताब की ग़लती’ कहकर मत उछालिए। प्रश्न का उद्देश्य वर्ष नहीं, बल्कि स्तर और अंग की पहचान है — और वह उद्देश्य पूरी तरह ठीक है।
★सुरक्षित रूप: “कोविड महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में…” — वर्ष कहे बिना पूछिए। और मूल्यांकन में वर्ष पर अंक मत दीजिए।
(पूरा विवरण
10-Verification-Log.mdमें है।)
14. पिछले अध्यायों से चार कड़ियाँ — इन्हें जोड़िए
| कड़ी | कहाँ |
|---|---|
| ‘अलिखित नियम’ → लिखे हुए कानून | अध्याय 9, पृ. 143 → अध्याय 10, पृ. 150 |
| “नियमों के निर्माण में भागीदार होते हैं” | अध्याय 9, पृ. 146 → ‘आधारभूत लोकतंत्र’, अध्याय 10, पृ. 160 |
| ‘धर्म’ = कर्तव्य | अध्याय 9, पृ. 140 ↔ अध्याय 10 का महाभारत उद्धरण और सर्वोच्च न्यायालय का आदर्श वाक्य |
| ★‘सभा’ शब्द | अध्याय 7 (वैदिक सभा और समिति) ↔ अध्याय 10 (“जनता के प्रतिनिधियों की सभा”, “सदन = ऐसी सभा…”, और आवरण का शब्द-मेघ) |
! आख़िरी कड़ी में सावधानी: यह भाषिक निरंतरता है, संस्थागत नहीं। यह मत कहिए कि आज की विधान सभा वैदिक सभा से ‘निकली’ है। इतना कहिए कि वही शब्द आज तक चला आया है।
15. यदि आपके पास केवल दस मिनट हैं
इस अध्याय को पढ़ाने से पहले केवल ये पाँच चीज़ें अपने मन में बिठा लीजिए —
- ★★दो चित्र बोर्ड पर, पहले दिन — पहिया और पिरामिड। और वह एक वाक्य: “अंग = कौन क्या करता है। स्तर = कौन कहाँ तक। और तीनों अंग तीनों स्तरों पर होते हैं।”
- साइबर अपराध की कहानी पहले, तीनों परिभाषाएँ बाद में।
- न्यायपालिका के दूसरे काम पर लकीर खिंचवाइए — वह बाक़ी दो अंगों को भी परखती है।
- चित्र 10.5 को तीन हिस्सों में तोड़िए, और कार्यों की सूचियाँ केवल उतरवाइए।
- कालांश 1 में पृष्ठ 151 का वादा बोर्ड पर लिखिए, और कालांश 5 में उस पर लौटिए।
! और एक अंतिम बात, जो सबसे ज़रूरी है:
इस अध्याय में जोड़ने को बहुत कुछ है — संविधान की सूचियाँ, न्यायिक समीक्षा, राष्ट्रपति की वास्तविक शक्तियाँ, मोंतेस्क्यू।
और लगभग वह सब जोड़ना एक भूल होगी।
यदि कक्षा वर्ष के अंत तक यह याद रखे कि अंग बताते हैं कि कौन क्या करता है और स्तर बताते हैं कि कौन कहाँ तक, तो यह अध्याय पूरी तरह सफल है।
बाक़ी सब कक्षा 7 में आएगा — और पुस्तक ने स्वयं दो बार यह कह दिया है।