Chapter 4अंतर्राष्ट्रीय संगठन

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NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), पृ. 45–62.

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स्रोत-चिह्न: ◆ प्राथमिक (UN, सरकारें, संधि-पाठ) · ◇ सशक्त द्वितीयक। पूरी सूची §11 में। जिस तथ्य पर स्रोत-चिह्न नहीं, वह सर्वविदित और अविवादित है।

विषय-सूची §1 केंद्रीय प्रश्न · §2 पहला प्रयोग और उसकी विफलता · §3 दूसरा प्रयोग — डिज़ाइन का तर्क · §4 ढाँचा · §5 वीटो का पूरा नियम · §6 वह आधा जो रोज़ काम करता है · §7 मानवाधिकार · §8 सुधार की बहस · §9 भारत · §10 निष्कर्ष · §11 स्रोत

1. केंद्रीय प्रश्न

संप्रभु राज्यों की दुनिया में कोई ऊपरवाला नहीं होता। कोई विश्व-पुलिस नहीं, कोई ऐसी अदालत नहीं जिसके फ़ैसले सब पर अपने-आप लागू हों, कोई विश्व-सरकार नहीं। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इसे ‘अराजकता’ (anarchy) कहा जाता है — अव्यवस्था के अर्थ में नहीं, ‘कोई शासक नहीं’ के अर्थ में।

इससे केंद्रीय प्रश्न निकलता है: यदि किसी के पास किसी को मजबूर करने की शक्ति नहीं, तो सहयोग होता कैसे है — और जब नहीं होता, तो क्यों नहीं होता?

तीन उप-प्रश्न, और यह अध्याय तीनों का उत्तर है:

  1. अंतर्राष्ट्रीय संगठन करते क्या हैं — यदि वे किसी पर धौंस नहीं जमा सकते?
  2. संयुक्त राष्ट्रसंघ का ढाँचा ऐसा क्यों है — और वह 1965 के बाद क्यों नहीं बदला?
  3. सुधार की बहस आज कहाँ खड़ी है — और भारत उसमें कहाँ?

2. पहला प्रयोग — ‘लीग ऑव नेशंस’ और उसकी विफलता

2.1 तथ्य

मदतथ्य
स्थापना★10 जनवरी 1920 — पेरिस शांति सम्मेलन द्वारा, जिसने पहला विश्वयुद्ध समाप्त किया ◇
पहला अधिवेशन★15 नवंबर 1920, जिनेवा — 41 सदस्य-राज्य ◆
कुल सदस्य (पूरे इतिहास में)63 देश — पर कभी एक साथ नहीं; ★सर्वाधिक 58 देश, 28 सितंबर 1934 से फरवरी 1935 के बीच ◇
! अमरीका★कभी सदस्य नहीं बना — 1920 में अमरीकी सीनेट ने वर्साय की संधि का अनुसमर्थन करने से इनकार कर दिया ◇
मुख्यालयजिनेवा
न्यायिक अंगस्थायी अंतर्राष्ट्रीय न्याय न्यायालय (PCIJ) — आज के ICJ का पूर्ववर्ती
समाप्ति★18 अप्रैल 1946 — इसके अनेक अंग नए संयुक्त राष्ट्रसंघ में स्थानांतरित ◇

2.2 विफलता के चार कारण★★

  1. ★सबसे बड़ी शक्ति बाहर रही — अमरीका कभी शामिल ही नहीं हुआ।
  2. बाकी बड़ी शक्तियाँ बाहर चली गईं — जापान और जर्मनी 1933 में; इटली 1937 में; सोवियत संघ 1939 में निष्कासित।
  3. सर्वसम्मति का नियम — परिषद् के लगभग हर निर्णय के लिए सर्वसम्मति चाहिए थी, जिससे एक देश सब कुछ रोक सकता था।
  4. ! कोई अपनी सेना नहीं, और आर्थिक प्रतिबंध भी अप्रभावी — मंचूरिया (1931) और अबीसीनिया (1935) में लीग कुछ नहीं कर सकी।

★★1945 का पूरा डिज़ाइन इसी विफलता की प्रतिक्रिया है।

3. दूसरा प्रयोग — डिज़ाइन का तर्क

3.1 लीग बनाम UN — डिज़ाइन की तुलना★

कसौटीलीग ऑव नेशंससंयुक्त राष्ट्रसंघ
स्थापना10 जनवरी 1920★24 अक्टूबर 1945
मुख्यालयजिनेवान्यूयॉर्क
बड़ी शक्तियाँ! अमरीका बाहर; बाकी निकल गईं★विजेता पाँच को स्थायी सदस्यता और वीटो देकर भीतर रखा गया
निर्णय-नियमसर्वसम्मतिबहुमत + वीटो
निर्णय की प्रकृतिसंस्तुति★सुरक्षा परिषद् के निर्णय बाध्यकारी (अध्याय VII)
परिणाम! दूसरा विश्वयुद्ध न रोक सकी★तीसरा विश्वयुद्ध नहीं हुआ

★★यही 1945 का केंद्रीय डिज़ाइन-निर्णय है: आदर्श व्यवस्था के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाओ जिसमें ताकतवर देश टिके रहें। वीटो इसी सौदे की कीमत है — और उसकी आलोचना करते समय यह याद रखना ज़रूरी है कि उसके बिना लीग वाली विफलता दोहराई जा सकती थी।

3.2 स्थापना का क्रम

तिथिघटना
अगस्त 1941अटलांटिक चार्टर — रूजवेल्ट और चर्चिल
1 जनवरी 1942★26 मित्र-राष्ट्रों की ‘संयुक्त राष्ट्र की घोषणा’ — ‘United Nations’ नाम पहली बार प्रयुक्त; नाम रूजवेल्ट का सुझाया हुआ
1943मास्को और तेहरान सम्मेलन — एक विश्व-संगठन पर सहमति
1944डम्बर्टन ओक्स सम्मेलन — ढाँचे का प्रारूप
★फरवरी 1945याल्टा — रूजवेल्ट, चर्चिल, स्टालिन; ★वीटो के फ़ॉर्मूले पर सहमति
25 अप्रैल – 26 जून 1945सेन फ्रांसिस्को सम्मेलन
★26 जून 1945चार्टर पर 50 देशों के हस्ताक्षर
★15 अक्टूबर 1945पोलैंड के हस्ताक्षर → कुल 51 मूल संस्थापक सदस्य
★24 अक्टूबर 1945चार्टर प्रभावी — ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ दिवस’
30 अक्टूबर 1945भारत की सदस्यता (भारत सेन फ्रांसिस्को में हस्ताक्षरकर्ता था — आज़ादी से पहले)

3.3 चार्टर की बनावट

  • 19 अध्याय, 111 अनुच्छेद।
  • प्रसिद्ध शुरुआत — “We the peoples of the United Nations…” (संविधानों जैसी भाषा, संधियों जैसी नहीं)।
  • ★अध्याय VI — विवादों का शांतिपूर्ण समाधान (संस्तुतियाँ); ★अध्याय VII — शांति के लिए खतरा, शांति-भंग और आक्रमण की स्थिति में कार्रवाई (बाध्यकारी; प्रतिबंध और बल-प्रयोग सहित)।
  • ★★अनुच्छेद 108 — संशोधन: महासभा के दो-तिहाई का समर्थन, और सभी पाँच स्थायी सदस्यों सहित दो-तिहाई सदस्यों का अनुसमर्थन।

★★इसी अनुच्छेद के कारण सुधार अटका है: वीटो, वीटो हटाने के रास्ते में भी खड़ा है।

4. ढाँचा — छह अंग

अंगसंरचनाशक्ति
महासभा193 सदस्य; एक देश, एक वोट; प्रमुख प्रश्नों पर दो-तिहाई! संस्तुतियाँ — बाध्यकारी नहीं
★सुरक्षा परिषद्15 = 5 स्थायी + 10 अस्थायी (अस्थायी 2 वर्ष; तत्काल पुनर्निर्वाचन नहीं)★निर्णय बाध्यकारी
आर्थिक और सामाजिक परिषद् (ECOSOC)54 सदस्य, 3 वर्षसमन्वय और संस्तुति
सचिवालयमहासचिव — 5 वर्ष; सुरक्षा परिषद् की संस्तुति पर महासभा द्वारा नियुक्तप्रशासन; ‘सद्भावना मिशन’
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ)15 न्यायाधीश, 9 वर्ष; हेग; महासभा और सुरक्षा परिषद् दोनों में पूर्ण बहुमत से चुनाव! केवल राज्य पक्षकार हो सकते हैं
न्यासिता परिषद्—★1 नवम्बर 1994 से स्थगित — अंतिम ‘ट्रस्ट टेरीटरी’ पलाउ के स्वतंत्र होने पर

★छह आधिकारिक भाषाएँ: अंग्रेज़ी · फ़्रांसीसी · रूसी · चीनी (मंदारिन) · स्पेनी · अरबी। बड़े कार्यालय: न्यूयॉर्क (मुख्यालय) · जिनेवा · वियना · नैरोबी।

4.1 ICJ और ICC — सबसे आम भ्रमध्यान

ICJICC
क्या है★संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग! UN का अंग नहीं — रोम संविधि (Rome Statute) से बना स्वतंत्र न्यायालय, 2002 से क्रियाशील
कौन पक्षकार★केवल राज्य★व्यक्ति — जनसंहार, युद्ध-अपराध, मानवता के विरुद्ध अपराध
कहाँहेगहेग

5. वीटो का पूरा नियम — अनुच्छेद 27

यह वह जगह है जहाँ अधिकांश विद्यार्थी अधूरा जानते हैं। पूरा नियम तीन हिस्सों का है।

5.1 मतदान का नियम★★

  • हर सदस्य को एक वोट।
  • ★किसी भी निर्णय के लिए 15 में से 9 सकारात्मक मत चाहिए। ◆
  • ★★‘प्रक्रियात्मक’ और ‘अन्य सभी’ मामलों में भेद है —
    • प्रक्रियात्मक मामलों में — 9 मत पर्याप्त; स्थायी सदस्य का नकारात्मक मत निर्णय को अमान्य नहीं करता। ◆
    • ★‘अन्य सभी’ (यानी सारभूत) मामलों में — 9 मत, और उसमें स्थायी सदस्यों के ‘सहमत मत’ (concurring votes) शामिल होने चाहिए। यही वीटो है। ◆

5.2 ‘अनुपस्थिति वीटो नहीं है’ — और इसका प्रमाण★★

चार्टर का शब्द ‘concurring votes’ है — यानी शाब्दिक रूप से ‘सहमत मत’। तब अनुपस्थिति को वीटो माना जाना चाहिए था। पर व्यवहार ने अलग नियम बना दिया —

  • ★1966 में दक्षिणी रोडेशिया के प्रश्न पर सुरक्षा परिषद् का संकल्प 221 दो स्थायी सदस्यों की अनुपस्थिति के बावजूद पारित हुआ। ◇
  • ★★इससे यह स्थापित हुआ कि स्थायी सदस्य की अनुपस्थिति वीटो नहीं है, और 9 सकारात्मक मत होने पर प्रस्ताव पारित हो जाता है। ◇

★इसीलिए कूटनीति में ‘रचनात्मक अनुपस्थिति’ (constructive abstention) एक औज़ार है — देश असहमति दर्ज करा देता है, पर प्रस्ताव को रोकता नहीं।

5.3 अनिवार्य अनुपस्थिति का नियम★

अनुच्छेद 27(3) में एक शर्त है जिसे प्रायः भुला दिया जाता है —

★“अध्याय VI के अंतर्गत और अनुच्छेद 52(3) के अंतर्गत निर्णयों में, विवाद का पक्षकार देश मतदान से अनुपस्थित रहेगा।” ◆

यानी शांतिपूर्ण समाधान वाले मामलों में स्वयं विवाद में शामिल देश वोट नहीं दे सकता।

5.4 वीटो का प्रयोग — पैटर्न

कुल प्रयोग (1 जून 2018 तक): सोवियत संघ/रूस 135 · अमरीका 84 · यूके 32 · फ़्रांस 18 · चीन 11।

दौरपैटर्न
1946–1970★सोवियत संघ का वीटो सबसे ज्यादा — वह परिषद् में अल्पमत में था
1970 के बाद★अमरीका का वीटो बढ़ा — विशेषकर पश्चिम एशिया के प्रस्तावों पर
1990 का दशकसबसे कम प्रयोग — शीतयुद्ध के बाद का सहयोग-काल
2011 के बाद! फिर तेज़ी से बढ़ा — सीरिया और अन्य संकटों पर

★★सबक: वीटो शक्ति का नहीं, अलगाव का संकेत है। जो देश परिषद् में अकेला पड़ता है, वही उस पर सबसे ज्यादा निर्भर होता है।

5.5 2022 का ‘वीटो इनिशिएटिव’ — वीटो हटाए बिना उसकी कीमत बढ़ाना★★

मदतथ्य
प्रस्ताव★महासभा का A/RES/76/262
कब★26 अप्रैल 2022 — सर्वसम्मति से ◇
★व्यवस्थावीटो लगने पर महासभा को 10 कार्य-दिवसों के भीतर बहस बुलानी होगी
उद्देश्यवीटो रद्द करना नहीं — बल्कि वीटो लगाने वाले से पूरी सदस्यता के सामने सफाई माँगना
पहला प्रयोग★8 जून 2022 — चीन और रूस के वीटो पर पहली ऐसी बहस

★यह सुधार का एक अलग मॉडल है — चार्टर बदले बिना, केवल जवाबदेही जोड़कर।

6. वह आधा जो रोज़ काम करता है

सुरक्षा परिषद् सुर्खियों में रहती है, पर संयुक्त राष्ट्र का अधिकांश काम कहीं और होता है — और वहीं उसकी सबसे बड़ी उपलब्धियाँ हैं।

संस्थाकामउल्लेखनीय
WHOवैश्विक स्वास्थ्य★★चेचक का उन्मूलन — 8 मई 1980 को 33वीं विश्व स्वास्थ्य सभा ने विश्व को चेचक-मुक्त घोषित किया; यह मानव इतिहास का एकमात्र संक्रामक रोग है जिसे पूरी तरह मिटाया गया ◆
UNICEFबाल-कल्याण★1965 का नोबेल शांति पुरस्कार ◆
UNHCRशरणार्थी★★दो बार नोबेल — 1954 और 1981; एकमात्र UN एजेंसी जिसे दो बार मिला ◆
WFPखाद्य सहायता★2020 का नोबेल ◆
ILOश्रम★1919 से — लीग के दौर की एकमात्र जीवित संस्था; 1969 का नोबेल ◆
UNESCOशिक्षा, विज्ञान, संस्कृतिपेरिस; विश्व धरोहर सूची
UNDPविकास★मानव विकास रिपोर्ट और HDI
IAEAपरमाणु1957; वियना; 2005 का नोबेल
UNEPपर्यावरण★नैरोबी — UN का एकमात्र बड़ा कार्यक्रम जिसका मुख्यालय अफ्रीका में
ITUदूरसंचार★1865 से — आज UN की विशेष एजेंसी बनी सबसे पुरानी अंतर्राष्ट्रीय संस्था

★★कुल मिलाकर संयुक्त राष्ट्र, उसकी विशेष एजेंसियों, कोषों, कार्यक्रमों और संबद्ध संगठनों को 75 वर्षों में बारह बार नोबेल शांति पुरस्कार मिला है। ◆

6.1 शांति सेना★

मदतथ्य
पहला अभियान★UNTSO, 1948, पश्चिम एशिया
दूसरा★UNMOGIP, 1949 — भारत और पाकिस्तान के लिए
नोबेल★1988 — UN शांति सेना को ◆
आजदर्जनों अभियान; MONUSCO (डी.आर. कांगो), UNMISS (दक्षिण सूडान), UNIFIL (लेबनान) सबसे बड़े

7. मानवाधिकार — संस्था की सबसे स्थायी विरासत

पड़ावतथ्य
★10 दिसंबर 1948मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) — इसीलिए ‘मानवाधिकार दिवस’
1966दो प्रसंविदाएँ — नागरिक-राजनीतिक और आर्थिक-सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकार
2002अंतर्राष्ट्रीय दंड न्यायालय (ICC) — ! UN का अंग नहीं
★2005‘रक्षा का उत्तरदायित्व’ (R2P) — यदि कोई राज्य अपने नागरिकों की रक्षा में विफल हो, तो विश्व-समुदाय का उत्तरदायित्व
★19 जून 2006मानवाधिकार परिषद् सक्रिय — 47 सदस्य; जिनेवा
UPR‘सार्वभौम आवधिक समीक्षा’ — हर सदस्य-देश के रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा

दो गैर-सरकारी संगठन जो इस तंत्र के बाहर रहकर उसे धार देते हैं —

  • ★एमनेस्टी इंटरनेशनल — 1961, लंदन; 1977 का नोबेल शांति पुरस्कार।
  • ★ह्यूमन राइट्स वॉच — 1978 में ‘हेलसिंकी वॉच’ के रूप में, न्यूयॉर्क; बारूदी सुरंगों पर रोक, बाल सैनिकों का प्रयोग रोकने और ICC की स्थापना के अभियानों में भूमिका।

8. सुधार की बहस

8.1 पड़ाव

वर्षक्या हुआ
★1963 / 1965चार्टर संशोधन — सुरक्षा परिषद् 11 से 15 सदस्यों की; अस्थायी 6 → 10; कारण — विऔपनिवेशीकरण। ★यह एकमात्र बार है जब परिषद् का आकार बदला
1992महासभा का प्रस्ताव — तीन शिकायतें
1 जनवरी 1997कोफी अन्नान की जाँच
200560वीं सालगिरह — शांति संस्थापक आयोग, मानवाधिकार परिषद्, R2P
★2009 से‘अंतर-सरकारी वार्ता’ (IGN) — औपचारिक मंच ◆
★2022वीटो इनिशिएटिव
! आज तक‘पाठ-आधारित वार्ता’ तक नहीं पहुँचा जा सका

8.2 पाँच प्रतिद्वंद्वी पद★★

गुटकौनप्रस्ताव
★G-4भारत · जर्मनी · जापान · ब्राज़ील15 → 25–26 सदस्य = 11 स्थायी + 14–15 अस्थायी; छह नई स्थायी सीटें — दो अफ्रीका, दो एशिया-प्रशांत, एक लातिन अमरीका-कैरेबियाई, एक पश्चिमी यूरोप और अन्य; वीटो 10–15 वर्ष की समीक्षा के बाद ◆
! UfCइटली के नेतृत्व में 12–14 देश; स्पेन, मैक्सिको, कोलंबिया, अर्जेंटीना, ★पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, तुर्की, इंडोनेशिया! कोई नई स्थायी सीट नहीं — “विशेषकर यदि उसमें वीटो शामिल हो” ◆
अफ्रीकी संघ‘इज़ुलविनी सर्वसम्मति’दो स्थायी सीटें — पूर्ण वीटो सहित — और पाँच अस्थायी
L.69विकासशील देशों का बड़ा समूह (भारत भी)दोनों श्रेणियों में विस्तार
ACTछोटे-मध्यम देशवीटो-प्रयोग सीमित करने की स्वैच्छिक आचार-संहिता — जनसंहार आदि के मामलों में

8.3 2024–25 की स्थितिध्यान

  • महासभा के 79वें सत्र में G-4 मंत्रियों ने “IGN प्रारूप में ठोस प्रगति के लगातार अभाव पर गहरी चिंता” जतायी। ◆
  • ★G-4 का तर्क — 2025 में UN की 80वीं वर्षगाँठ सुधार के लिए “एक निर्णायक क्षण” है।
  • भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने 15 अप्रैल 2025 को IGN में G-4 मॉडल की पुनः पुष्टि की।

8.4 और 2025 में संस्था स्वयं संकट में आ गईध्यान★

मदतथ्य
★UN80 पहलमार्च 2025 में गुटेरेस द्वारा — तीन कार्य-धाराएँ: दक्षता; अधिदेश-समीक्षा; संरचनात्मक बदलाव ◇
! कुल बकायालगभग 1.586 अरब डॉलर (दिसंबर 2025) ◆
! बजट-कटौती2026 का बजट 3.7 से घटाकर लगभग 3.2 अरब डॉलर — लगभग 15%
! तंत्र पर असर2025 में संसाधन 2023 की तुलना में 30% तक घट सकते हैं — 3 से 6 करोड़ लोगों पर सीधा असर
! अमरीका की वापसी2025 में WHO, UNESCO, UNHRC और पेरिस समझौते से; जनवरी 2026 तक कुल 66 संगठनों से समर्थन वापस ◆/◇

★★यह अध्याय के केंद्रीय प्रश्न की सबसे कड़ी परीक्षा है: जो संस्था अपने बजट के लिए मुट्ठी भर देशों पर निर्भर हो, वह उन देशों पर अंकुश कैसे लगाएगी?

9. भारत और संयुक्त राष्ट्रसंघ

9.1 भागीदारी का रिकॉर्ड

मदतथ्य
सदस्यता30 अक्टूबर 1945 — आज़ादी से पहले; सेन फ्रांसिस्को में हस्ताक्षरकर्ता
★सुरक्षा परिषद्आठ बार अस्थायी सदस्य; अंतिम 2021–22; जून 2020 के चुनाव में 193 में से 184 मत ◇
★शांति सेना — अभियान49 से अधिक ◇
★कुल सैनिक2,00,000 से अधिक, और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी
वर्तमान तैनाती6,000 से अधिक कर्मी; 2024 में 12 अभियानों में
★स्थान2024 में सर्वाधिक योगदान करने वाला देश; 2025 में नेपाल और बांग्लादेश के साथ शीर्ष तीन में
!★बलिदान179 भारतीय शांति-सैनिक शहीद — किसी भी UN सदस्य-देश से अधिक ◇
★ऐतिहासिक पहल2007 — लाइबेरिया में पहली संपूर्ण महिला पुलिस टुकड़ी; UN के इतिहास में पहली बार
★बजट, 20253 करोड़ 76 लाख 40 हज़ार डॉलर — ‘ऑनर रोल’ के 35 देशों में ◆
★बजट, 20263 करोड़ 51 लाख 80 हज़ार डॉलर — फिर ‘ऑनर रोल’ में ◆

9.2 दावेदारी के आधार

जनसंख्या (विश्व का लगभग पाँचवाँ हिस्सा) · विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र · शांति-अभियानों में सर्वाधिक बलिदान और लंबा रिकॉर्ड · तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था · बजट में नियमित और समयबद्ध भुगतान · और वह प्रतीकात्मक हैसियत जो विदेश नीति को वज़न देती है।

9.3 विरोध के आधारध्यान

परमाणु हथियार (NPT से बाहर) · पाकिस्तान के साथ लंबित विवाद · G-4 के अन्य दावेदारों का आपसी विरोध · और यह माँग कि अफ्रीका तथा लातिन अमरीका को पहले प्रतिनिधित्व मिले।

9.4 और एक असहज प्रश्न, जो पाठ्यपुस्तक स्वयं पूछती है★★

“क्या हम पाँच बड़े दादाओं की दादागिरी खत्म करना चाहते हैं या उनमें शामिल होकर एक और दादा बनना चाहते हैं?”

यह भारत की पूरी रणनीति पर सवाल है — क्योंकि G-4 वीटो हटाना नहीं, उसमें हिस्सा माँगता है (भले ही समीक्षा-अवधि की शर्त के साथ)। इसके दो उत्तर संभव हैं —

  • ★यथार्थवादी: वीटो हटना असंभव है (अनुच्छेद 108); इसलिए उसमें शामिल होना ही प्रभाव पाने का एकमात्र रास्ता है।
  • ★आदर्शवादी: जो व्यवस्था अन्यायपूर्ण है, उसमें हिस्सा माँगकर हम उसे वैधता दे देते हैं।

10. निष्कर्ष — तीन प्रश्नों के उत्तर

1. अंतर्राष्ट्रीय संगठन करते क्या हैं? वे बाध्य नहीं करते, संभव बनाते हैं — सूचना की कमी घटाकर, लेन-देन की लागत घटाकर, वचनबद्धता को विश्वसनीय बनाकर, और मुद्दों को एजेंडे पर लाकर। ★और इसीलिए उनकी विफलताएँ दिखती हैं और सफलताएँ नहीं — जो युद्ध नहीं हुआ, वह ख़बर नहीं बनता; जो रोग मिट गया, उसकी याद नहीं रहती।

2. ढाँचा ऐसा क्यों है, और क्यों नहीं बदला? क्योंकि 1945 का डिज़ाइन-निर्णय यही था कि ताकतवर देशों को भीतर रखना है — लीग ऑव नेशंस ठीक इसी में विफल हुई थी, जब अमरीका कभी शामिल ही नहीं हुआ और बाकी बड़ी शक्तियाँ निकल गईं। वीटो उस सौदे की कीमत है। और नहीं बदला इसलिए कि ★★अनुच्छेद 108 के अनुसार चार्टर संशोधन के लिए भी पाँचों स्थायी सदस्यों का अनुसमर्थन चाहिए। 1965 का विस्तार अपवाद है, नियम नहीं — और वह भी साठ साल पहले, जब सदस्य 117 थे। आज 193 हैं, परिषद् वही 15 की।

3. सुधार की बहस कहाँ है, और भारत कहाँ? IGN में — 2009 से, बिना किसी मसौदे के। G-4 विस्तार चाहता है, UfC नहीं — और उसमें पाकिस्तान भी है; अफ्रीकी संघ पूर्ण वीटो चाहता है। एकमात्र वास्तविक सफलता 2022 का ‘वीटो इनिशिएटिव’ है, जिसने वीटो हटाए बिना उस पर जवाबदेही जोड़ दी। भारत का रिकॉर्ड मजबूत है — आठ अस्थायी कार्यकाल, 49+ शांति-अभियान, 179 शहीद, और बजट में लगातार ‘ऑनर रोल’ — पर संरचनात्मक गतिरोध व्यक्तिगत योग्यता से बड़ा है।

★★और इसीलिए सबसे संयत निष्कर्ष वही है जो पाठ्यपुस्तक देती है: “संयुक्त राष्ट्रसंघ में थोड़ी कमियाँ हैं लेकिन इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी।”

कसौटी ‘पूर्ण शांति’ नहीं है। कसौटी वही है जो हैमरसोल्ड ने दी — “नरक से बचाना।” इस पैमाने पर, अस्सी साल बाद भी — जब चेचक मिट चुका है, बारह नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं, और तीसरा विश्वयुद्ध नहीं हुआ — यह संस्था असफल नहीं है। पर 2025 के वित्तीय संकट और 66 संगठनों से एक बड़ी शक्ति की वापसी ने यह भी दिखा दिया कि इसकी सफलता कभी स्थायी नहीं मानी जा सकती।

11. स्रोत

लीग ऑव नेशंस ◆/◇

चार्टर, अनुच्छेद 27 और मतदान ◆

वीटो इनिशिएटिव ◇

नोबेल पुरस्कार ◆

चेचक का उन्मूलन ◆

सुधार, G-4 और UfC ◆

UN80, वित्तीय संकट और अमरीका की वापसी ◆/◇

भारत ◆/◇


अंतिम अनुस्मारक: ! यह अध्याय पाठ्यपुस्तक से स्वतंत्र है। जहाँ यह NCERT से आगे जाता है — लीग के आँकड़े, अनुच्छेद 27 और 108, अनुपस्थिति का नियम, वीटो इनिशिएटिव, UN80, अमरीका की वापसी, नोबेल की सूची, भारत की आठ सदस्यताएँ और 179 शहीद — वहाँ बोर्ड परीक्षा में NCERT का ही उत्तर लिखिए। ★एकमात्र अपवाद: पृ. 57 की ‘11 से 15’ वाली त्रुटि — वहाँ ‘सुरक्षा परिषद्’ ही सही है।