Chapter 2एक दल के प्रभुत्व का दौर

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NCERT — स्वतंत्र भारत में राजनीति (पुस्तक 2), पृ. 26–43.

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विद्यालय परीक्षा प्रारूप • सभी प्रश्न-प्रकार, उत्तर और अंकन-संकेत सहित।

शिक्षक हेतु सूचना: पाठ्यपुस्तक में कोई उत्तर-कुंजी मुद्दित नहीं है। नीचे दिए सभी उत्तर मास्टर नोट्स से तैयार किए गए हैं और पूर्णतः पाठ्यपुस्तक के दायरे में हैं।


खंड क — बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)

1भारत के चुनाव आयोग का गठन कब हुआ?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) जनवरी 1950

2भारत के पहले चुनाव आयुक्त कौन थे?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) सुकुमार सेन

3पहले आम चुनाव के समय भारत में कुल कितने मतदाता थे?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) 17 करोड़

4मतदाता-सूची के पहले प्रारूप में कितनी महिलाओं के नाम छूट गए थे?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (iii) 40 लाख

5पहले आम चुनाव में मतदाताओं में कितने प्रतिशत साक्षर थे?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (i) 15 प्रतिशत

6पहला आम चुनाव वास्तव में कब हुआ?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) अक्तूबर 1951 से फरवरी 1952 तक

7पहले आम चुनाव में लोकसभा की कुल कितनी सीटें थीं?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (i) 489

81952 के चुनाव में कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) 364

91952 के चुनाव में सीटों के लिहाज़ से दूसरे स्थान पर कौन-सी पार्टी रही?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (iii) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

101952 में कांग्रेस को कितने प्रतिशत वोट और कितने प्रतिशत सीटें मिलीं?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) 45% वोट, 74% सीट

11भारत की चुनाव-प्रणाली कौन-सी है?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत

121957 में केरल विधानसभा में कम्युनिस्ट पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (i) कुल 126 में से 60

13केरल की कम्युनिस्ट सरकार किस अनुच्छेद के अंतर्गत बर्खास्त की गई?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) अनुच्छेद 356

14सोशलिस्ट पार्टी का गठन 1948 में क्यों करना पड़ा?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) कांग्रेस ने दोहरी सदस्यता समाप्त कर दी

15भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस से कब अलग हुई?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) 1941 के दिसंबर में

16भारतीय जनसंघ का गठन किस वर्ष हुआ?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (iii) 1951

17भारतीय जनसंघ के संस्थापक-अध्यक्ष कौन थे?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (iii) श्यामा प्रसाद मुखर्जी

18‘समग्र मानवतावाद’ सिद्धांत के प्रणेता कौन थे?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) दीनदयाल उपाध्याय

19भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में 1964 की टूट का कारण क्या था?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (ii) चीन और सोवियत संघ के बीच वैचारिक अंतर

20संविधान सभा में ‘नायक-पूजा’ के विरुद्ध किसने चेतावनी दी थी?

उत्तर देखिए

सही उत्तर: (iii) डॉ. अंबेडकर

उत्तर — खंड क

प्र.उत्तरप्र.उत्तरप्र.उत्तरप्र.उत्तर
1(ii)6(ii)11(ii)16(iii)
2(ii)7(i)12(i)17(iii)
3(ii)8(ii)13(ii)18(ii)
4(iii)9(iii)14(ii)19(ii)
5(i)10(ii)15(ii)20(iii)

खंड ख — रिक्त स्थान भरिए (1 अंक)

1भारत का संविधान ______ को अंगीकृत हुआ और ______ से अमल में आया।

2पहले आम चुनाव में ______ मतदाताओं को ______ विधायक और ______ लोकसभा सांसद चुनने थे।

3एक हिंदुस्तानी संपादक ने पहले आम चुनाव को ______ करार दिया।

4मतपत्रों के लिए तकरीबन ______ स्टील के बक्सों का इस्तेमाल हुआ।

5भारतीय राजनीति के इस कालखंड को ______ कहा जाता है।

6पार्टी के अंदर मौजूद विभिन्न समूह ______ कहे जाते हैं।

71955 में कांग्रेस ने घोषणा की कि उसका लक्ष्य ______ की रचना है।

8केरल की निर्वाचित सरकार के विरुद्ध कांग्रेस ने ______ छेड़ दिया।

9भारतीय जनसंघ ने ______ के विचार पर ज़ोर दिया।

10______ की जड़ें भारतीय जनसंघ में हैं।

उत्तर — खंड ख

प्र.उत्तरप्र.उत्तर
126 नवम्बर 1949 / 26 जनवरी 19506गुट
217 करोड़ / 3,200 / 4897समाजवादी बनावट वाले समाज
3“इतिहास का सबसे बड़ा जुआ”8‘मुक्ति संघर्ष’
420 लाख9‘एक देश, एक संस्कृति और एक राष्ट्र’
5‘कांग्रेस-प्रणाली’10भारतीय जनता पार्टी

खंड ग — एक पंक्ति में उत्तर (1 अंक)

1उपनिवेश से आज़ाद हुए कई देशों ने लोकतंत्र क्यों नहीं अपनाया?

उत्तर देखिए

उनका तर्क था कि राष्ट्रीय एकता पहली प्राथमिकता है और लोकतंत्र को अपनाने से मतभेद और संघर्ष को बढ़ावा

मिलेगा।

2‘कांग्रेस-प्रणाली’ से क्या आशय है?

उत्तर देखिए

वह व्यवस्था जिसमें कांग्रेस ने शासक-दल की भूमिका भी निभायी और विपक्ष की भी।

3‘गुट’ किसे कहते हैं?

उत्तर देखिए

पार्टी के अंदर मौजूद विभिन्न समूहों को।

41952 का आम चुनाव विश्व के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण था?

उत्तर देखिए

इसने यह सिद्ध कर दिया कि लोकतांत्रिक चुनाव गरीबी अथवा अशिक्षा के माहौल में भी कराए जा सकते हैं।

5केरल की 1957 की सरकार का विश्व-महत्व क्या था?

उत्तर देखिए

दुनिया में यह पहला अवसर था जब एक कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए बनी।

6सोशलिस्ट पार्टी 1948 में क्यों बनी?

उत्तर देखिए

क्योंकि कांग्रेस ने अपने संविधान में बदलाव करके दोहरी सदस्यता समाप्त कर दी थी।

7भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने हिंसक क्रांति का रास्ता कब छोड़ा?

उत्तर देखिए

1951 में, और उसने आने वाले आम चुनावों में भाग लेने का फ़ैसला किया।

8जनसंघ का केंद्रीय विचार क्या था?

उत्तर देखिए

‘एक देश, एक संस्कृति और एक राष्ट्र’।

9‘अखंड भारत’ से जनसंघ का क्या आशय था?

उत्तर देखिए

भारत और पाकिस्तान को एक करना।

10भारत का एक-दलीय प्रभुत्व चीन या क्यूबा से किस बात में अलग था?

उत्तर देखिए

भारत में यह लोकतांत्रिक स्थितियों में, मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के माहौल में कायम हुआ; वहाँ संविधान में ही

केवल एक पार्टी को अनुमति थी।

खंड घ — अति लघु उत्तरीय (2 अंक)

1मतदाता-सूची से जुड़ी वह समस्या बताइए जिसका सामना चुनाव आयोग को करना पड़ा, और आयोग ने क्या किया?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु पहले प्रारूप में 40 लाख महिलाओं के नाम छूट गए थे क्योंकि उन्हें ‘अलां की बेटी’, ‘फलां की बीवी’ के रूप में दर्ज किया गया था • चुनाव आयोग ने ऐसी प्रविष्टियों को मानने से इनकार कर दिया और तय किया कि इनका पुनरावलोकन करके ऐसी प्रविष्टियाँ हटाई जाएँ।

2पहले आम चुनाव की दो प्रमुख आलोचनाएँ लिखिए।

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु एक संपादक ने इसे “इतिहास का सबसे बड़ा जुआ” कहा • ‘आर्गनाइजर’ पत्रिका ने लिखा

कि नेहरू “अपने जीवित रहते ही यह देख लेंगे और पछताएँगे कि भारत में सार्वभौम मताधिकार असफल रहा”।

(ICS के अँग्रेज़ नुमाइंदे वाला कथन भी स्वीकार्य।)

3‘सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत’ प्रणाली ने कांग्रेस को कैसे लाभ पहुँचाया?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु 1952 में कांग्रेस को मात्र 45 प्रतिशत वोट मिले पर 74 फीसदी सीटें •

गैर-कांग्रेसी वोट कुल मिलाकर अधिक थे, पर वे विभिन्न प्रतिस्पर्धी पार्टियों और उम्मीदवारों में बँट गए।

4केरल में 1959 में क्या हुआ और उसे किस रूप में याद किया जाता है?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु केंद्र की कांग्रेस सरकार ने अनुच्छेद 356 के अंतर्गत केरल की निर्वाचित कम्युनिस्ट सरकार बर्खास्त कर दी • यह संविधान-प्रदत्त आपात्कालीन शक्तियों के दुरुपयोग के प्रमुख उदाहरण के रूप

में बार-बार उद्धृत हुआ।

5सोशलिस्ट पार्टी के सामने 1955 में कौन-सी दुविधा आई?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु कांग्रेस ने घोषणा कर दी कि उसका लक्ष्य समाजवादी बनावट वाले समाज की रचना है •

इससे समाजवादियों के लिए खुद को कांग्रेस का कारगर विकल्प बनाकर पेश करना मुश्किल हो गया।

6भारतीय जनसंघ के कोई दो नीतिगत रुख बताइए।

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु(कोई दो) ‘अखंड भारत’ — भारत और पाकिस्तान को एक करना • हिंदी को राजभाषा

बनाने के आंदोलन में सबसे आगे • धार्मिक और सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों को रियायत देने का विरोध •

1964 के बाद भारत के आण्विक हथियार की पैरोकारी।

7कांग्रेस को ‘अव्वल और एकलौता’ होने का क्या फायदा मिला?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु आज़ादी के समय यही एकमात्र पार्टी थी जिसका संगठन पूरे देश में था और नेटवर्क

स्थानीय स्तर तक पहुँच चुका था • अनेक पार्टियों का गठन स्वतंत्रता के आस-पास या बाद में हुआ, इसलिए

वे तैयारी में पिछड़ गईं।

8विपक्षी दलों ने ‘व्यवस्थाजन्य रोष’ के बारे में क्या भूमिका निभायी?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु उन्होंने लोकतांत्रिक राजनीतिक विकल्प की संभावना को जीवित रखा • ऐसा करके

व्यवस्थाजन्य रोष को लोकतंत्र-विरोधी बनने से रोका।

खंड ङ — लघु उत्तरीय (3 अंक)

1आज़ादी के बाद कई देशों में लोकतंत्र क्यों नहीं टिक पाया, और भारत ने क्या किया?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु नेताओं का तर्क — राष्ट्रीय एकता पहली प्राथमिकता, लोकतंत्र से मतभेद बढ़ेंगे •

तीन रूप — नियंत्रण एक नेता के हाथ, एक दल का शासन, या सेना का शासन; शुरुआत इस वायदे से हुई कि जल्दी

लोकतंत्र आएगा, पर एक बार पाँव जम गए तो बदलना मुश्किल हो गया • भारत ने कहीं ज्यादा कठिन रास्ता चुना, क्योंकि स्वतंत्रता-संग्राम की प्रतिबद्धता लोकतंत्र से थी और नेता राजनीति को समस्या के समाधान का उपाय मानते थे।

2पहले आम चुनाव को कराने में चुनाव आयोग के सामने कौन-सी कठिनाइयाँ थीं?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदुचुनाव क्षेत्रों का सीमांकन और मतदाता-सूची बनाना — दोनों में बहुत समय लगा;

40 लाख महिलाओं के नाम छूटने की समस्या • पैमाना — 17 करोड़ मतदाता, 3,200 विधायक और 489 सांसद;

3 लाख से ज्यादा कर्मियों का प्रशिक्षण; 20 लाख मतपेटियाँ • साक्षरता मात्र 15 फीसदी होने के कारण

मतदान की विशेष पद्धति के बारे में सोचना पड़ा; चुनाव दो बार स्थगित करने पड़े।

31952 के आम चुनाव को ‘लोकतंत्र के इतिहास का मील का पत्थर’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु इतने बड़े पैमाने पर, इतनी कम साक्षरता के बावजूद चुनाव सफलतापूर्वक हुए; हारने वालों ने भी परिणामों को निष्पक्ष बताया • देश-विदेश के पर्यवेक्षक हैरान थे; हिंदुस्तान टाइम्स — “भारतीय जनता ने विश्व के इतिहास में लोकतंत्र के सबसे बड़े प्रयोग को बखूबी अंजाम दिया” • अब यह दलील देना संभव नहीं रहा कि लोकतांत्रिक चुनाव गरीबी अथवा अशिक्षा के माहौल में नहीं कराए जा सकते।

4कांग्रेस को एक ‘सामाजिक गठबंधन’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु जन्म 1885 में एक सीमित हित-समूह के रूप में; 20वीं सदी में जनआंदोलन बनी और

सविनय अवज्ञा जैसे आंदोलनों से सामाजिक आधार बढ़ा • इसमें किसान और उद्योगपति, शहर और गाँव, मज़दूर और मालिक, तथा सभी वर्ग और जातियों को जगह मिली; नेतृवर्ग भी विस्तृत हुआ • आज़ादी के समय तक यह एक सतरंगे सामाजिक गठबंधन की शक्ल अख़्तियार कर चुकी थी और इससे भारत की विविधता की नुमाइंदगी होती थी।

5भारत में एक-दलीय प्रभुत्व दूसरे देशों से किस तरह भिन्न था?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदुचीन, क्यूबा और सीरिया के संविधान में ही सिर्फ एक पार्टी को शासन की अनुमति;

म्यांमार, बेलारूस और इरीट्रिया में कानूनी और सैन्य उपायों से • वहाँ प्रभुत्व लोकतंत्र की कीमत पर

कायम हुआ • भारत में यह लोकतांत्रिक स्थितियों में कायम हुआ — अनेक पार्टियों ने मुक्त और निष्पक्ष चुनाव

में होड़ की और तब भी कांग्रेस जीतती गई। सबसे मिलता-जुलता उदाहरण दक्षिण अफ्रीका का है।

6गुटबाजी कांग्रेस के लिए ताकत कैसे साबित हुई?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों की आपसी होड़ के लिए गुंजाइश थी, इसलिए विभिन्न हित और

विचारधाराओं के नेता कांग्रेस के भीतर ही बने रहे; नई पार्टी बनाना उन्होंने बेहतर नहीं समझा • नाखुश

समूह भी पार्टी छोड़ने की जगह भीतर के किसी दूसरे गुट से लड़ना बेहतर समझता था • गुटों की प्रणाली शासक-दल के भीतर संतुलन साधने के एक औजार की तरह काम करती थी।

71950 के दशक में विपक्षी दलों की भूमिका बताइए।

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु उन्हें कहने भर को प्रतिनिधित्व मिला, फिर भी उनकी मौजूदगी ने शासन-व्यवस्था का

लोकतांत्रिक चरित्र बनाए रखा • उन्होंने सुचिन्तित आलोचना की जिसमें सिद्धांतों का बल था, और

शासक-दल पर अंकुश रखा; बहुधा उनके कारण कांग्रेस के भीतर शक्ति-संतुलन बदला • उन्होंने

लोकतांत्रिक विकल्प की संभावना जीवित रखी और ऐसे नेता तैयार किए जिन्होंने आगे देश की तस्वीर संवारी।

खंड च — दीर्घ उत्तरीय (5 अंक)

1पहले आम चुनाव की चुनौतियों और सफलता का विस्तार से वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु

• तैयारी — चुनाव क्षेत्रों का सीमांकन और मतदाता-सूची; 40 लाख महिलाओं के नाम छूटे, जिन्हें आयोग ने

मानने से इनकार कर दिया।

• पैमाना — 17 करोड़ मतदाता; 3,200 विधायक और 489 सांसद; मात्र 15 फीसदी साक्षर; 3 लाख से ज्यादा कर्मियों का प्रशिक्षण; 20 लाख मतपेटियाँ।

• मतदान की विशेष पद्धति — हर उम्मीदवार के लिए अलग मतपेटी और उस पर चुनाव-चिह्न, क्योंकि साक्षरता कम थी।

• आलोचना — “इतिहास का सबसे बड़ा जुआ”; ‘आर्गनाइजर’ की भविष्यवाणी; ICS के अँग्रेज़ नुमाइंदे का दावा।

• वास्तविक चुनाव — दो बार स्थगन के बाद अक्तूबर 1951 से फरवरी 1952; कुल छह महीने; औसतन प्रति

सीट चार उम्मीदवार; आधे से अधिक मतदाताओं ने वोट डाला।

• परिणाम और मान्यता — हारने वालों ने भी परिणामों को निष्पक्ष बताया; टाइम्स ऑफ इंडिया और

हिंदुस्तान टाइम्स की टिप्पणियाँ; “लोकतंत्र के इतिहास के लिए मील का पत्थर” — अब यह दलील संभव नहीं

रही कि गरीबी या अशिक्षा में लोकतांत्रिक चुनाव नहीं हो सकते।

2कांग्रेस के प्रभुत्व के कारणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु

• स्वाधीनता संग्राम की विरासत — कांग्रेस राष्ट्रीय आंदोलन की वारिस के रूप में देखी गई; आंदोलन के

अनेक अग्रणी नेता अब उसके उम्मीदवार थे।

• संगठन — यही एकमात्र पार्टी थी जिसका संगठन पूरे देश में था, और नेटवर्क स्थानीय स्तर तक।

• नेतृत्व — नेहरू सबसे करिश्माई और लोकप्रिय नेता; उन्होंने पूरे देश का दौरा किया।

• ‘अव्वल और एकलौता’ — अनेक पार्टियाँ स्वतंत्रता के आस-पास या बाद में बनीं; “बाकी दल अभी अपनी रणनीति सोच ही रहे होते थे कि कांग्रेस अपना अभियान शुरू कर देती थी।”

• चुनाव-प्रणाली — FPTP ने जीत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया: 45% वोट → 74% सीट; गैर-कांग्रेसी वोट

कई पार्टियों में बँट गए।

• गठबंधनी स्वभाव — कांग्रेस स्वयं सामाजिक और विचारधारात्मक गठबंधन थी, इसलिए हर तबका उसमें समा गया।

3‘कांग्रेस-प्रणाली’ क्या थी? विस्तार से समझाइए।

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु

• कांग्रेस दो गठबंधनों का मेल थी — सामाजिक (सब वर्ग, जाति, धर्म, भाषा) और विचारधारात्मक

(क्रांतिकारी और शांतिवादी, कंजरवेटिव और रेडिकल, वामपंथी, दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी)।

• गठबंधनी स्वभाव के दो परिणाम — (i) जो भी आए, गठबंधन उसे शामिल कर लेता है, इसलिए अतिवाद से बचाव और

सुलह-समझौता; इससे विपक्ष कठिनाई में पड़ा क्योंकि उसकी बात को कांग्रेस के कार्यक्रम में तुरंत जगह

मिल जाती थी; (ii) अंदरूनी मतभेदों के प्रति सहनशीलता।

• गुट — नाखुश समूह पार्टी छोड़ने की जगह भीतर के किसी दूसरे गुट से लड़ना बेहतर समझता था;

गुटबाजी कमज़ोरी नहीं, ताकत साबित हुई।

• विपक्ष की स्थिति — दूसरी पार्टियाँ हाशिए पर रहकर, कांग्रेस के किसी गुट को प्रभावित करके ही

अप्रत्यक्ष रूप से नीतियों पर असर डाल पाती थीं; शासक दल का कोई विकल्प नहीं था।

• निष्कर्ष — “कांग्रेस ने शासक-दल की भूमिका निभायी और विपक्ष की भी। इसी कारण इस कालखंड को ‘कांग्रेस-प्रणाली’ कहा जाता है।”

41950 के दशक के तीन प्रमुख विपक्षी दलों की तुलना कीजिए।

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु

• सोशलिस्ट पार्टी — जड़ें कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (1934) में; 1948 में दोहरी सदस्यता समाप्त होने पर अलग हुई; विचारधारा लोकतांत्रिक समाजवाद; आरोप कि कांग्रेस पूँजीपतियों-जमींदारों का पक्ष

लेती है; 1955 की दुविधा; नेता — जयप्रकाश नारायण, लोहिया, अशोक मेहता, आचार्य नरेन्द्र देव; आगे

चलकर समाजवादी पार्टी, RJD, JD(U), JD(S)।

• भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी — 1920 के दशक के समूह, बोल्शेविक क्रांति से प्रेरित; 1941 दिसंबर

में कांग्रेस से अलग; आज़ादी को “सच्ची आज़ादी नहीं” माना और तेलंगाना में विद्रोह को बढ़ावा;

1951 में हिंसक रास्ता छोड़ा; 1952 में 16 सीट — सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी; समर्थन आंध्र प्रदेश,

पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल में; 1964 में चीन–सोवियत मतभेद पर टूट → CPI(M)।

• भारतीय जनसंघ — 1951, संस्थापक-अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी; जड़ें RSS और हिंदू महासभा

में; ‘एक देश, एक संस्कृति और एक राष्ट्र’; अखंड भारत; हिंदी को राजभाषा; अल्पसंख्यकों को रियायत

का विरोध; 1952 में 3 और 1957 में 4 सीटें; समर्थन हिंदी-भाषी राज्यों के शहरी इलाकों में;

BJP की जड़।

5केरल की 1957 की घटना और उसके परिणामों का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु

• मार्च 1957 के विधानसभा चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी को कुल 126 में से 60 सीटें और पाँच स्वतंत्र उम्मीदवारों का समर्थन मिला।

• राज्यपाल ने ई.एम.एस. नम्बूदरीपाद को सरकार बनाने का न्यौता दिया।

• “दुनिया में यह पहला अवसर था जब एक कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए बनी।”

• कांग्रेस ने ‘मुक्ति संघर्ष’ छेड़ा; कम्युनिस्टों का आरोप था कि इसकी अगुआई निहित स्वार्थ और धार्मिक संगठन कर रहे हैं।

• 1959 में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने अनुच्छेद 356 के अंतर्गत सरकार बर्खास्त कर दी।

• यह फ़ैसला बड़ा विवादास्पद रहा और संविधान-प्रदत्त आपात्कालीन शक्तियों के दुरुपयोग के प्रमुख उदाहरण

के रूप में बार-बार उद्धृत हुआ।

खंड छ — स्रोत आधारित (4 अंक)

1निम्नलिखित अवतरण पढ़िए और उत्तर दीजिए:
“हिंदुस्तान की राजनीति में नायक-पूजा जितनी बड़ी भूमिका अदा करती है, उसकी तुलना दुनिया के किसी भी देश की राजनीति में मौजूद नायक-पूजा के भाव से नहीं की जा सकती… लेकिन राजनीति में नायक-पूजा का भाव सीधे पतन की ओर ले जाता है और यह रास्ता तानाशाही की तरफ़ जाता है…”
(क) यह कथन किसका है और कब दिया गया?
(ख) ‘नायक-पूजा’ से वक्ता का क्या आशय है?
(ग) वक्ता इसे लोकतंत्र के लिए खतरा क्यों मानता है?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु (क) डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान सभा में भाषण, 25 नवंबर 1949 •

(ख) किसी नेता को व्यक्तिगत रूप से इतना बड़ा मान लेना कि उसकी आलोचना ही असंभव हो जाए • (ग) क्योंकि यह

सीधे पतन की ओर ले जाता है और तानाशाही की तरफ़ जाता है — लोकतंत्र संस्थाओं पर टिकता है, व्यक्तियों पर

नहीं।

2पृ. 18 (पुस्तक पृ. 40) के कार्टून ‘रस्साकसी’ (29 अगस्त 1954) को देखकर उत्तर दीजिए:
(क) कार्टून में पेड़ पर कौन बैठे हैं?
(ख) पेड़ के नीचे कौन हैं और वे क्या कर रहे हैं?
(ग) कार्टून उस दौर की राजनीति के बारे में क्या कहता है?

उत्तर देखिए

अपेक्षित बिंदु (क) नेहरू और उनके कैबिनेट सहयोगी • (ख) विपक्षी नेता — ए.के. गोपालन, आचार्य कृपलानी, एन.सी. चटर्जी, श्रीकांत नायर और सरदार हुकुम सिंह — पेड़ को गिराने की कोशिश कर रहे हैं •

(ग) यह सरकार और विपक्षी दलों की ताकत की तुलना करता है — विपक्ष कोशिश तो कर रहा है पर सत्ता-पक्ष कहीं

ऊपर और सुरक्षित है; यानी विपक्ष जीवन्त था पर सत्ता के वास्तविक इस्तेमाल से कोसों दूर।

3नीचे दी तालिका पढ़कर उत्तर दीजिए:

उत्तर देखिए
दलवोट प्रतिशत (1952)सीट प्रतिशत (1952)
कांग्रेस4574
सोशलिस्ट पार्टी103 से कम

(क) यह अंतर किस चुनाव-प्रणाली के कारण है? (ख) इस प्रणाली में क्या होता है? (ग) गैर-कांग्रेसी दलों को इससे क्या नुकसान हुआ?

अपेक्षित बिंदु (क) ‘सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत’ (First Past The Post) • (ख) जो पार्टी बाकियों

से थोड़े ज्यादा वोट हासिल करती है उसे वोटों के अनुपात की तुलना में कहीं ज्यादा सीटें मिलती हैं •

(ग) सभी गैर-कांग्रेसी वोट जोड़ दें तो वे कांग्रेस से ज्यादा थे, पर वे विभिन्न प्रतिस्पर्धी पार्टियों और उम्मीदवारों में बँट गए, इसलिए कांग्रेस आगे रही।

खंड ज — उच्च चिंतन कौशल (योग्यता आधारित)

1“एकल पार्टी-प्रभुत्व से देश में लोकतांत्रिक आदर्शों के अभाव की झलक मिलती है।” क्या आप इस कथन से
सहमत हैं? कारण दीजिए। (प्रश्नावली प्रश्न 3घ से)

उत्तर देखिए

किस बात की तलाश करेंअसहमति अपेक्षित है, पर तर्क के साथ — भारत का प्रभुत्व

लोकतांत्रिक स्थितियों में कायम हुआ: अनेक पार्टियों ने मुक्त और निष्पक्ष चुनाव में होड़ की, हारने

वालों ने परिणाम स्वीकार किए, विपक्ष जीवन्त था, और केरल जैसे राज्य में विपक्ष जीता भी। इसके विपरीत

चीन, क्यूबा और सीरिया में संविधान ही एक दल को अनुमति देता था। अच्छा उत्तर यह भी जोड़ेगा कि प्रभुत्व

कांग्रेस के गठबंधनी स्वभाव का परिणाम था, आदर्शों के अभाव का नहीं।

2विस्मय: “कांग्रेस के भीतर गुटबाजी लोकतंत्र के लिए अच्छी थी।” इंद्रप्रीत: “गुटबाजी किसी भी पार्टी
के लिए रोग है।” आपकी क्या राय है?

उत्तर देखिए

किस बात की तलाश करें विद्यार्थी दोनों पक्ष रखे। विस्मय के पक्ष में: गुटों के कारण विभिन्न हित

और विचारधाराओं के नेता कांग्रेस के भीतर बने रहे; गुटों की प्रणाली संतुलन का औजार थी; इससे व्यवस्था में

विविधता की नुमाइंदगी बनी रही। इंद्रप्रीत के पक्ष में: गुट अकसर विचारधारा से नहीं, व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षा से बनते थे; इससे नीति की जगह पद की राजनीति बढ़ी; और चूँकि विपक्ष हाशिए पर था,

असली प्रतिस्पर्धा जनता के सामने नहीं, पार्टी के भीतर बंद कमरे में होती थी। पूर्ण अंक: वह उत्तर जो

कहे कि यह उस दौर की परिस्थिति में कारगर थी पर लोकतांत्रिक जवाबदेही का विकल्प नहीं।

3रजनी कोठारी के अवतरण के आधार पर बताइए कि लेखक कांग्रेस को ‘सर्वांगसम तथा अनुशासित पार्टी’ क्यों नहीं
बनाना चाहता था। (प्रश्नावली प्रश्न 5)

उत्तर देखिए

किस बात की तलाश करें लेखक का तर्क यह है कि कांग्रेस की असली ताकत उसकी समन्वयवादी भूमिका में थी —

सबको समेटकर चलने वाला स्वभाव। यदि वह किसी एक विचारधारा पर चलने वाली अनुशासित पार्टी बन जाती तो

वह भारत की विविधता की नुमाइंदगी करने की क्षमता खो देती और अनेक समूह उसके बाहर चले जाते। उदाहरण के

लिए: कांग्रेस के भीतर वामपंथी, दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी सब समाए हुए थे; अंतरिम सरकार में

अंबेडकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे विपक्षी नेता शामिल थे; नेहरू ने जयप्रकाश नारायण को न्यौता

दिया — ये सब समन्वय के उदाहरण हैं।

4मान लीजिए 1952 में भारत में ‘सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत’ के बजाय समानुपातिक प्रणाली होती। तीनों
चुनावों का परिणाम कैसे बदलता, और भारतीय राजनीति पर क्या असर पड़ता?

उत्तर देखिए

किस बात की तलाश करें विद्यार्थी अध्याय के वास्तविक आँकड़ों का उपयोग करे — कांग्रेस को

45% वोट पर 74% सीट मिली थी; समानुपातिक प्रणाली में उसे लगभग 45% सीटें ही मिलतीं, यानी बहुमत नहीं। सोशलिस्ट पार्टी को 10% वोट पर 10% सीटें मिलतीं, 3% से कम नहीं। निष्कर्ष: संभवतः

गठबंधन सरकारें 1952 से ही शुरू हो जातीं — जो कि पाठ्यपुस्तक के पात्र ने भी पूछा है (पृ. 36)।

मूल्यांकन तर्क की संगति और आँकड़ों का सही उपयोग देखें; कल्पना की उड़ान नहीं।

5आज के दौर में कोई दल यदि लगातार तीन चुनाव भारी बहुमत से जीते, तो क्या उसे ‘कांग्रेस-प्रणाली’ जैसा
कहा जा सकता है? अपने उत्तर में अध्याय की कसौटियों का उपयोग कीजिए।

उत्तर देखिए

किस बात की तलाश करें विद्यार्थी अध्याय की तीन कसौटियाँ लगाए — (i) क्या चुनाव मुक्त और निष्पक्ष

हैं और विपक्ष खुलकर होड़ कर पा रहा है? (ii) क्या वह दल स्वयं सामाजिक और विचारधारात्मक गठबंधन है,

यानी उसमें भिन्न धाराएँ समाई हुई हैं? (iii) क्या वह विपक्ष की भूमिका भी निभा रहा है, यानी असली बहस

उसके भीतर हो रही है? तीनों पूरी होने पर ही तुलना उचित है। अच्छा उत्तर यह भी कहेगा कि केवल बड़ी जीत

तुलना का आधार नहीं — पाठ्यपुस्तक का पूरा ज़ोर इसी पर है कि प्रभुत्व कैसे कायम हुआ, यह मायने रखता है।