RBSE/CBSE बोर्ड पैटर्न पर आधारित | उत्तर-संकेत सहित
खंड क — बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) [1 अंक]
1सोलहवीं-सत्रहवीं सदी में हिंदुस्तान की लगभग कितनी आबादी गाँवों में रहती थी?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) 85%
2आइन-ए-अकबरी के लेखक कौन थे?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) अबुल फ़ज़्ल
3आइन-ए-अकबरी कब पूरी हुई?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) 1598 ई.
4दूसरे गाँवों से ठेके पर खेती करने आने वाले किसान कहलाते थे
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) पाहि-काश्त
5गुजरात में कितनी ज़मीन वाला किसान समृद्ध माना जाता था?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) 6 एकड़
6शाह नहर कहाँ थी और किसके शासनकाल में उसकी मरम्मत हुई?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) पंजाब — शाहजहाँ
7आइन के अनुसार बंगाल में चावल की कितनी किस्में पैदा होती थीं?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) 50
8‘जिन्स-ए-कामिल’ का अर्थ है
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) सर्वोत्तम फ़सलें
9अकबर और उसके अभिजातों ने पहली बार तम्बाकू कब देखा?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) 1604 ई.
10गाँव के मुखिया को कहा जाता था
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) मुक़द्दम या मंडल
11मुखिया अपने चुनाव के बाद किसकी मंज़ूरी लेता था?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) ज़मींदार की
12महाराष्ट्र में दस्तकारों को दी गई पुश्तैनी अधिकार वाली ज़मीन कहलाती थी
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) मीरास या वतन
13“भारत में वे गाँव बहुत ही छोटे कहे जाएँगे जिनमें सराफ़ न हों” — यह कथन किसका है?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) ज्यां बैप्टिस्ट तैवर्नियर
14भीलों के ऋतु-चक्र में गर्मियों के महीनों का काम था
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) मछली पकड़ना
15असम के अहोम राजाओं के वे सेवक जो ज़मीन के बदले सैनिक सेवा देते थे
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) पायक
16‘चंडीमंगल’ के रचयिता हैं
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) मुकुंदराम चक्रवर्ती
17वह ज़मीन जो तीन या चार वर्षों तक खाली रहती थी
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (स) चचर
18औरंगज़ेब ने हर गाँव में खेतिहरों की संख्या का सालाना हिसाब रखने का निर्देश कब दिया?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) 1665 ई.
19निम्न में से कौन-सा साम्राज्य सोलहवीं-सत्रहवीं सदी के बड़े एशियाई साम्राज्यों में नहीं था?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (द) रोमन
20आइन-ए-अकबरी के पहले खंड का मानक अंग्रेज़ी अनुवाद किसने किया?
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) हेनरी ब्लॉकमेन
खंड ख — रिक्त स्थान [1 अंक]
1मुग़ल काल के भारतीय-फ़ारसी स्रोत किसान के लिए ________ (बहुवचन: रिआया) शब्द का इस्तेमाल करते थे।
उत्तर देखिए
[रैयत]
2बंगाल में ________ एकड़ ज़मीन वाला किसान अमीर आसामी समझा जाता था।
उत्तर देखिए
[10]
3आइन के अनुसार आगरा प्रांत में ________ किस्म की फ़सलें उगाई जाती थीं।
उत्तर देखिए
[39]
4मुसलमान समुदायों में ________ जैसे ‘नीच’ कामों से जुड़े समूह गाँव की हदों के बाहर ही रह सकते थे।
उत्तर देखिए
[हलालख़ोरान]
5पंचायत का ख़र्चा गाँव के उस आम ________ से चलता था जिसमें हर व्यक्ति योगदान देता था।
उत्तर देखिए
[ख़ज़ाने]
6अठारहवीं सदी के बंगाल में सेवाओं के बदले “रोज़ का भत्ता और खाने के लिए नकदी” देने की व्यवस्था को ________ कहते थे।
उत्तर देखिए
[जजमानी]
7उन्नीसवीं सदी के कुछ अंग्रेज़ अफ़सरों ने भारतीय गाँवों को एक ”________” के रूप में देखा।
उत्तर देखिए
[छोटा गणराज्य]
8राज्य की नज़र में जंगल बदमाशों को शरण देने वाला अड्डा यानी ________ था।
उत्तर देखिए
[मवास]
9जंगलों के उत्पादों में ________ सत्रहवीं सदी में भारत से समुद्र पार होने वाले निर्यात की मुख्य वस्तुओं में थी।
उत्तर देखिए
[लाक]
10नयी ज़मीनों को बसाकर ज़मींदारी पुख़्ता करने की प्रक्रिया ________ कहलाती थी।
उत्तर देखिए
[जंगल-बारी]
खंड ग — एक पंक्ति में उत्तर [1 अंक]
1कृषि-इतिहास के हमारे मुख्य स्रोत कहाँ लिखे गए थे?
उत्तर देखिए
मुग़ल दरबार की निगरानी में
2आइन से मिलने वाली किसानों की जानकारी किसका नज़रिया है?
उत्तर देखिए
सत्ता के ऊँचे गलियारों का
3खुद-काश्त कौन थे?
उत्तर देखिए
वे किसान जो उन्हीं गाँवों में रहते थे जिनमें उनकी ज़मीन थी
4उत्तर भारत के औसत किसान के पास अधिकतम क्या होता था?
उत्तर देखिए
एक जोड़ी बैल और दो हल
5मुग़लकालीन हल की बनावट की विशेषता?
उत्तर देखिए
लकड़ी का हलका हल, लोहे की नुकीली धार/फाल; गहरा नहीं खोदता — नमी बचती थी
6खरीफ़ और रबी किन ऋतुओं में होती थीं?
उत्तर देखिए
खरीफ़ — पतझड़ में; रबी — वसंत में
7मक्का भारत किस रास्ते आया?
उत्तर देखिए
अफ्रीका और स्पेन के रास्ते
8ग्रामीण समुदाय के तीन घटक?
उत्तर देखिए
खेतिहर किसान, पंचायत, गाँव का मुखिया (मुक़द्दम/मंडल)
9मारवाड़ में लिखी 17वीं सदी की किताब राजपूतों की चर्चा किस रूप में करती है?
उत्तर देखिए
किसानों के रूप में
10पंचायत से निष्कासन का क्या परिणाम होता था?
उत्तर देखिए
दंडित व्यक्ति को दिए गए समय के लिए गाँव छोड़ना पड़ता था; वह अपनी जाति और पेशे से हाथ धो बैठता था
11महिलाओं की पंचायत-दरख़्वास्तों में उनका उल्लेख कैसे होता था?
उत्तर देखिए
गृहस्थी के मर्द/मुखिया की माँ, बहन या पत्नी के रूप में (नाम दर्ज नहीं)
12बाबर के अनुसार जंगल किनके लिए रक्षाकवच था?
उत्तर देखिए
परगना के उन लोगों के लिए जो कड़े विद्रोही हो जाते थे और कर देने से मुकर जाते थे
13ज़मींदारों की ऊँची हैसियत के दो कारण?
उत्तर देखिए
जाति और राज्य को दी जाने वाली ख़ास सेवाएँ (ख़िदमत)
14जमा और हासिल में अंतर?
उत्तर देखिए
जमा = निर्धारित रक़म; हासिल = सचमुच वसूली गई रक़म
15सुयूरग़ल क्या था?
उत्तर देखिए
दान में दिया गया राजस्व अनुदान
खंड घ — अति लघूत्तरात्मक [2 अंक]
1किसान अपने बारे में खुद नहीं लिखते थे — इसका इतिहास-लेखन पर क्या असर पड़ा?
उत्तर देखिए
ग्रामीण समाज की जानकारी खेतों में काम करने वालों से नहीं मिलती; मुख्य स्रोत मुग़ल दरबार की निगरानी में लिखे ग्रंथ बने — अत: किसानों की छवि ऊपर से देखी हुई है, उनकी अपनी आवाज़ नहीं।
2लोग अपनी मर्ज़ी से या मजबूरन पाहि-काश्त कब बनते थे?
उत्तर देखिए
मर्ज़ी से — जब करों की शर्तें किसी दूसरे गाँव में बेहतर मिलें; मजबूरन — अकाल या भुखमरी के बाद आर्थिक परेशानी से।
3मुग़लकालीन हल मिट्टी को गहरा क्यों नहीं खोदता था? यह लाभदायक क्यों था?
उत्तर देखिए
हल लकड़ी का हलका होता था जिसमें लोहे की नुकीली धार लगी थी; गहरा न खोदने से तेज़ गर्मी के महीनों में मिट्टी की नमी बची रहती थी।
4मुग़ल राज्य किसानों को जिन्स-ए-कामिल की खेती के लिए बढ़ावा क्यों देता था? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
क्योंकि इनसे राज्य को ज़्यादा कर मिलता था; उदाहरण — कपास (मध्य भारत-दक्कनी पठार) और गन्ना (बंगाल की चीनी)।
5जहाँगीर की तम्बाकू-पाबंदी का क्या हुआ?
उत्तर देखिए
धूम्रपान की लत के फैलने से चिंतित होकर जहाँगीर ने पाबंदी लगाई, पर वह पूरी तरह बेअसर साबित हुई — सत्रहवीं सदी के अंत तक तम्बाकू पूरे भारत में खेती, व्यापार और उपयोग की मुख्य वस्तुओं में था।
6पंचायत के आम ख़ज़ाने का उपयोग किन कार्यों में होता था?
उत्तर देखिए
(1) कर अधिकारियों की ख़ातिरदारी, (2) बाढ़ जैसी प्राकृतिक विपदाओं से निपटना, (3) ऐसे सामुदायिक कार्य जो किसान खुद नहीं कर सकते थे — जैसे मिट्टी के छोटे-मोटे बाँध बनाना या नहर खोदना।
7राजस्थान की जाति पंचायतें कौन-कौन से काम करती थीं?
उत्तर देखिए
अलग-अलग जातियों के बीच दीवानी झगड़ों का निपटारा; ज़मीन से जुड़े दावेदारियों के झगड़े; यह तय करना कि शादियाँ जातिगत मानदंडों से हों; गाँव के आयोजनों में तरजीह-क्रम (कर्मकांडीय वर्चस्व) तय करना।
8“गाँव छोड़कर भाग जाना खेतिहरों के हाथ में एक बड़ा प्रभावी हथियार था” — क्यों?
उत्तर देखिए
जोतने लायक खाली ज़मीन अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध थी जबकि श्रम को लेकर प्रतियोगिता थी — किसान कहीं और बस सकता था, पर राज्य/ज़मींदार को खेत जोतने वाला आसानी से नहीं मिलता था।
9“दुल्हन की क़ीमत” का रिवाज किन कारणों से पैदा हुआ?
उत्तर देखिए
समाज श्रम पर निर्भर था और शादी-शुदा महिलाओं की कमी थी (कुपोषण, बार-बार माँ बनने व प्रसव के वक्त मौत से ऊँची मृत्युदर) — इसलिए कई ग्रामीण संप्रदायों में दहेज की जगह “दुल्हन की क़ीमत” अदा करनी पड़ती थी; तलाकशुदा व विधवाओं का पुनर्विवाह भी कानूनी था।
10अहोम राजाओं के ‘पायक’ कौन थे?
उत्तर देखिए
असम में अहोम राजाओं के वे सेवक जिन्हें ज़मीन के बदले सैनिक सेवा देनी पड़ती थी; अहोम राजाओं ने जंगली हाथी पकड़ने पर एकाधिकार भी घोषित कर रखा था।
11ज़मींदार की मिल्कियत क्या थी? उस पर काम कौन करता था?
उत्तर देखिए
ज़मींदार की विस्तृत व्यक्तिगत ज़मीन (संपत्ति) — निजी इस्तेमाल की खेती हेतु; उस पर अक्सर दिहाड़ी के या पराधीन मज़दूर काम करते थे; ज़मींदार उसे बेच, नाम कर या गिरवी रख सकते थे।
12पोलज और परौती ज़मीन में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
पोलज — जिसमें एक के बाद एक हर फ़सल की सालाना खेती होती है, कभी खाली नहीं छोड़ी जाती; परौती — जिस पर कुछ दिनों के लिए खेती रोक दी जाती है ताकि वह खोयी ताकत वापस पा सके।
खंड ङ — लघूत्तरात्मक [3–4 अंक]
1कृषि-इतिहास के स्रोत के रूप में आइन की तीन-चार सीमाएँ लिखिए।
उत्तर देखिए
(जोड़ की ग़लतियाँ — मामूली; आँकड़ों की विषमता — बंगाल-उड़ीसा की ज़मींदार-जाति सूचनाएँ नहीं; कीमतें-मज़दूरी कम दर्ज; सूचियाँ आगरा-केंद्रित — शेष देश के लिए सीमित प्रासंगिकता)
2बाबरनामा के आधार पर उत्तर भारत के सिंचाई-साधनों (रहट व बालटी-विधि) का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
(रहट — रस्सी के दो फंदे, लकड़ी के गुटके, घड़े, दाँतेदार पहिये, बैल; लाहौर-दीपालपुर; बालटी — लकड़ी के कन्ने, बेलन, रस्सी-बालटी, एक बैल-हाँकने वाला + एक निकालने वाला; आगरा-चाँदवार-बयाना)
31600–1700 के बीच आबादी की बढ़ोतरी के आँकड़े देते हुए इसके कृषि-आधार की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखिए
(~5 करोड़, ~33%; कारण — कृषि उत्पादन के विविध व लचीले तरीक़े; भूखमरी-महामारी के बावजूद)
4ग्राम पंचायत की संरचना और मुखिया की नियुक्ति-प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
(बुज़ुर्गों का जमावड़ा — पुश्तैनी संपत्ति-अधिकार; बहुजातीय अल्पतंत्र; “नीच” मज़दूर बाहर; फ़ैसले बाध्यकारी; मुखिया — आम सहमति + ज़मींदार-मंज़ूरी; भरोसा टूटने पर बर्खास्तगी; पटवारी की मदद से हिसाब)
5ग्रामीण दस्तकारों को अदायगी की विभिन्न व्यवस्थाएँ बताइए।
उत्तर देखिए
(फ़सल का हिस्सा/ज़मीन का टुकड़ा — शायद पंचायत तय करती; महाराष्ट्र में मीरास/वतन — पुश्तैनी; परस्पर बातचीत से वस्तु-सेवा विनिमय; 18वीं सदी बंगाल — ज़मींदारों द्वारा “रोज़ का भत्ता और खाने के लिए नकदी” = जजमानी; शब्द 16-17वीं सदी में अप्रचलित; नकद बिलकुल नदारद नहीं)
6“भारतीय गाँव छोटा गणराज्य नहीं था” — तीन तर्क दीजिए।
उत्तर देखिए
(व्यक्तिगत मिल्कियत; जाति-जेंडर की गहरी विषमताएँ; ताकतवरों के फ़ैसले व शोषण, न्याय-अधिकार उन्हीं का; + नकद के रिश्ते — कर नकद, सराफ़, निर्यात-मज़दूरी)
7कृषि उत्पादन व दस्तकारी में महिलाओं के योगदान का विवरण दीजिए।
उत्तर देखिए
(बुआई-निराई-कटाई-दाना; सूत कातना, मिट्टी साफ़-गूँधना, कढ़ाई; वाणिज्यीकरण = अधिक माँग; खेत + नियोक्ता-घर + बाज़ार; निर्माण-स्थलों पर — चित्र 8.8)
8जंगलवासियों के जीवन में आए तीन-चार बदलाव लिखिए।
उत्तर देखिए
(राज्य की माँग — पेशकश में हाथी; वाणिज्य — शहद-मधुमोम-लाक की माँग, लाक निर्यात; कबीलाई सरदार → ज़मींदार/राजा — सेना, अहोम-पायक; कोच-विजय; सूफ़ी पीर व इस्लाम; व्यापार में शिरकत — लोहानी)
9ज़मींदारी पुख़्ता करने की धीमी प्रक्रिया के तरीक़े बताइए। इसका सामाजिक परिणाम क्या था?
उत्तर देखिए
(जंगल-बारी; अधिकारों का हस्तांतरण; राज्यादेश; ख़रीद — ज़मींदारी धड़ल्ले से बिकती; परिणाम — “निचली” जातियों का ज़मींदार-दर्जे में प्रवेश; राजपूत-जाट व सदगोप वंश-रणनीतियाँ)
10मुग़ल भू-राजस्व के इंतज़ामात के दो चरण और अमील-गुज़ार को अकबर के निर्देश समझाइए।
उत्तर देखिए
(जमा = निर्धारण, हासिल = वसूली; नक़द की कोशिश पर फ़सल-विकल्प खुला; राज्य-हिस्सा अधिकतम की कोशिश, पर स्थानीय हालात से पूरी वसूली कभी-कभी असंभव)
11स्रोत 6 के आधार पर फ़सल में राजस्व-वसूली के चार तरीक़ों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
(कणकुत — अंदाज़ा, तीन पुलिंदे; बटाई/भाओली — कटाई बाद सर्व-सम्मति बँटवारा, निरीक्षक; खेत बटाई — बुवाई बाद खेत विभाजन; लाँग बटाई — ढेर बनाकर बँटवारा)
12सोलहवीं-अठारहवीं सदी में भारत में चाँदी की स्थिर उपलब्धि के कारण व परिणाम लिखिए।
उत्तर देखिए
(चार साम्राज्यों की स्थिरता → व्यापार-जाल; नयी दुनिया; निर्यात-भुगतान में चाँदी भारत खिंची; भारत में चाँदी के प्राकृतिक स्रोत नहीं; परिणाम — मुद्रा-संचार व ढलाई का विस्तार, नकदी-कर में आसानी; कारेरी का साक्ष्य)
खंड च — निबंधात्मक/विश्लेषणात्मक [6–8 अंक]
1“किसानों के बारे में जो कुछ हमें आइन से पता चलता है वह सत्ता के ऊँचे गलियारों का नज़रिया है।” — कृषि इतिहास लिखने में आइन की समस्याओं और इतिहासकारों के समाधान का परीक्षण कीजिए। (NCERT अभ्यास 1)
उत्तर देखिए
(संकेत: उद्देश्य — सत्ताधारी वर्ग का खाका, बगावत असफल-तय; केंद्र का नज़रिया; चार सीमाएँ; समाधान — गुजरात-महाराष्ट्र-राजस्थान के दस्तावेज़, कंपनी-दस्तावेज़ों से मिलान; आइन की खूबियाँ भी — पाँच संशोधन, अंक+शब्द)
2सोलहवीं-सत्रहवीं सदी में कृषि उत्पादन को किस हद तक महज़ गुज़ारे के लिए खेती कहा जा सकता है? (NCERT अभ्यास 2)
उत्तर देखिए
(संकेत: पक्ष — प्राथमिक उद्देश्य पेट भरना, चावल-गेहूँ-ज्वार प्रमुख; विपक्ष — जिन्स-ए-कामिल, कपास-गन्ना-तिलहन-दलहन नकदी, राज्य-प्रोत्साहन, 39-43-50 किस्में, बाज़ार-हाट, नकद कर; निष्कर्ष — NCERT: “पेट भरने के लिए और व्यापार के लिए उत्पादन एक दूसरे से जुड़े हुए थे”)
3कृषि समाज में सामाजिक व आर्थिक संबंधों को प्रभावित करने में जाति किस हद तक कारक थी? (NCERT अभ्यास 6)
उत्तर देखिए
(संकेत: नीच काम = ग़रीबी की मजबूरी; हलालख़ोरान-मल्लाहज़ादे; निचले तबकों में जाति-गरीबी-हैसियत सीधा रिश्ता, बीच में नहीं; राजपूत-किसान, जाट, गौरव-दावा, अहीर-गुज्जर-माली, सदगोप-कैवर्त की गतिशीलता; पंचायत में “नीच” बाहर; जाति की हदों का प्रवर्तन; ज़मींदारों में “ऊँची जाति” गठबंधन पर “निचली” जातियों का प्रवेश भी; निष्कर्ष — बड़ा कारक, पर पूर्ण-निर्धारक नहीं — आर्थिक अवसर से गतिशीलता संभव)
4सोलहवीं और सत्रहवीं सदी में जंगलवासियों की ज़िंदगी किस तरह बदल गई? (NCERT अभ्यास 7)
उत्तर देखिए
(संकेत: पहले — जंगली की सही परिभाषा, ऋतु-चक्र, गतिशीलता; बदलाव — राज्य: हाथी-पेशकश, शिकार-अभियान, मवास-दृष्टि; वाणिज्य: लाक-निर्यात, अदला-बदली, लोहानी; सामाजिक: सरदार → ज़मींदार/राजा, सेनाएँ, अहोम-पायक, कोच; सांस्कृतिक: सूफ़ी पीर, इस्लाम; चंडीमंगल — सफ़ाया)
5मुग़ल भारत में ज़मींदारों की भूमिका की जाँच कीजिए। (NCERT अभ्यास 8)
उत्तर देखिए
(संकेत: परिभाषा-हैसियत; तीन आधार; पिरामिड-शीर्ष; उत्पत्ति व चार तरीक़े; विकास-भूमिका — बसावट, उधार, हाट, मौद्रीकरण; शोषक बनाम संरक्षक — भक्ति-संत व विद्रोह के दो प्रमाण; समांतर सैनिक बल के आँकड़े)
6पंचायत और गाँव का मुखिया किस तरह ग्रामीण समाज का नियमन करते थे? (NCERT अभ्यास 9)
उत्तर देखिए
(संकेत: संरचना-अल्पतंत्र; मुखिया की नियुक्ति-बर्खास्तगी; ख़ज़ाना व सामुदायिक कार्य; जाति-हदों का प्रवर्तन, विवाह-निगरानी, जुर्माना-निष्कासन; जाति पंचायतें व राज्य की मान्यता; दरख़्वास्तें — न्यूनतम साधन का रिवाजी हक़, समझौते; सीमा — “नीच” वर्ग बाहर, भ्रष्ट मंडल)
7कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका का विवरण देते हुए बताइए कि समाज उन्हें ‘संसाधन’ के रूप में क्यों और कैसे नियंत्रित करता था। (NCERT अभ्यास 3 + विस्तार)
उत्तर देखिए
(संकेत: श्रम-भूमिका; वाणिज्यीकरण-माँग; प्रजनन-क्षमता = संसाधन; कमी के कारण; दुल्हन की क़ीमत, पुनर्विवाह; नियंत्रण — मर्द मुखिया, बेवफ़ाई-दंड, नाम दर्ज नहीं; दूसरा पक्ष — संपत्ति-अधिकार: भद्रजन, पंजाब-विक्रेता, ज़मींदारी-उत्तराधिकार, राजशाही)
8विचाराधीन काल में मौद्रिक कारोबार की अहमियत की विवेचना उदाहरण देकर कीजिए। (NCERT अभ्यास 4)
उत्तर देखिए
(संकेत: ज़मीन की खरीद-बिक्री; नकद कर — केंद्रीय इलाके; निर्यात-दस्तकार नकद मज़दूरी; कपास-रेशम-नील नकद; सराफ़-तैवर्नियर; ज़मींदारी की खरीद-फ़रोख़्त → मौद्रीकरण; हाट; चाँदी का बहाव — स्थिर रुपया, ढलाई-विस्तार, कारेरी; जजमानी में भी नकदी-तत्व)
9उन सबूतों की जाँच कीजिए जो सुझाते हैं कि मुग़ल राजकोषीय व्यवस्था के लिए भू-राजस्व बहुत महत्त्वपूर्ण था। (NCERT अभ्यास 5)
उत्तर देखिए
(संकेत: “आर्थिक बुनियाद”; प्रशासनिक तंत्र — दीवान, अमील-गुज़ार, अमीन; सूचना-संग्रह — नपाई, आइन-संकलन, 1665 का हुक्म; जमा-हासिल; भूमि-वर्गीकरण व दरें; वसूली-विधियाँ; जिन्स-ए-कामिल प्रोत्साहन = अधिक कर; मनसबदारों को जागीर = राजस्व-आबंटन; राज्य-हिस्सा अधिकतम रखने की कोशिश)
10आइन-ए-अकबरी की रचना-प्रक्रिया, संरचना और ऐतिहासिक महत्त्व का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर देखिए
(संकेत: अकबरनामा-परियोजना, 1598, पाँच संशोधन; पाँच दफ़्तर; मुल्क-आबादी के आठ खाने; स्रोत 9 की छह विधियाँ; विश्वसनीयता-उपाय; चार सीमाएँ; “असामान्य व अनोखा” — राजनीतिक वारदातों से आगे, संदर्भ बिंदु; ब्लॉकमेन-जैरेट अनुवाद)
खंड छ — स्रोत-आधारित प्रश्न [4–5 अंक]
स्रोत 1 पर आधारित — “किसान बस्तियों का बसना-उजड़ना” (पृ. 198)
“हिंदुस्तान में बस्तियाँ और गाँव, दरअसल शहर के शहर, एक लमहे में ही वीरान भी हो जाते हैं और बस भी जाते हैं… वे एक सरोवर या कुआँ बना लेते हैं; उन्हें घर बनाने या दीवार खड़ी करने की भी ज़रूरत नहीं होती… ख़स की घास बहुतायत में पाई जाती है, जंगल अपार हैं, झोंपड़ियाँ बनाई जाती हैं, और यकायक एक गाँव या शहर खड़ा हो जाता है!”
1यह अंश किस ग्रंथ से है? लेखक कौन है? (2)
उत्तर देखिए
बाबरनामा; मुग़ल शासक बाबर (संस्मरण)।
2बस्तियों के तेज़ी से बसने के दो कारण अंश से लिखिए। (1)
उत्तर देखिए
फ़सलें बारिश के पानी से उगती थीं (पानी के रास्ते खोदने की ज़रूरत नहीं); ख़स घास-जंगल से झोंपड़ियाँ तुरंत बन जाती थीं (+बेशुमार आबादी)।
3यह गतिशीलता किसानों के लिए किस प्रकार ‘हथियार’ बनती थी? (2)
उत्तर देखिए
अत्यधिक कर-माँग पर समझौता न होने की स्थिति में किसान गाँव छोड़कर भाग सकते थे; ज़मीन सुलभ थी और श्रम की प्रतियोगिता थी — अत: भागना राज्य/ज़मींदार पर दबाव का प्रभावी साधन था।
स्रोत 5 पर आधारित — “अकबर के शासन में भूमि का वर्गीकरण” (पृ. 214)
“पोलज वह ज़मीन है जिसमें एक के बाद एक हर फ़सल की सालाना खेती होती है और जिसे कभी खाली नहीं छोड़ा जाता। परौती वह ज़मीन है जिस पर कुछ दिनों के लिए खेती रोक दी जाती है… चचर वह ज़मीन है जो तीन या चार वर्षों तक खाली रहती है। बंजर वह ज़मीन है जिस पर पाँच या उससे ज़्यादा वर्षों से खेती नहीं की गई। पहले दो प्रकार की ज़मीन की तीन किस्में हैं: अच्छी, मध्यम और खराब… इसका तीसरा हिस्सा मध्यम उत्पाद माना जाता है, जिसका एक-तिहाई हिस्सा शाही शुल्क माना जाता है।”
1यह वर्गीकरण किस ग्रंथ से है? वर्गीकरण का आधार क्या है? (2)
उत्तर देखिए
आइन-ए-अकबरी; आधार — खेती की निरंतरता (कितने समय खाली) तथा उर्वरता (अच्छी-मध्यम-खराब)।
2परौती ज़मीन पर खेती क्यों रोकी जाती थी? (1)
उत्तर देखिए
ताकि वह अपनी खोयी ताकत वापस पा सके (उर्वरता-पुनर्भरण)।
3राजस्व-निर्धारण की विधि समझाइए। इस व्यवस्था को ‘दूरदर्शी’ क्यों कहा गया? (2)
उत्तर देखिए
पहले दो वर्गों की तीनों किस्मों का उत्पाद जोड़कर उसका तीसरा हिस्सा ‘मध्यम उत्पाद’ माना जाता; उसका एक-तिहाई शाही शुल्क; दूरदर्शी — हर वर्ग के लिए अलग-अलग राजस्व, औसत-आधारित, अत: वास्तविकता के निकट।
स्रोत 6 पर आधारित — “नक़द या जीन्स?” (पृ. 215)
“पहला, कणकुत: हिंदी ज़ुबान में कण का मतलब है, अनाज, और कुत, अंदाज़ा… दूसरा, बटाई जिसे भाओली भी कहते हैं, फ़सल काट कर जमा कर लेते हैं और फिर सभी पक्षों की मौजूदगी में व रज़ामंदी में बँटवारा करते हैं। लेकिन इसमें कई समझदार निरीक्षकों की ज़रूरत पड़ती है; वर्ना दुष्ट-बुद्धि और मक्कार धोखेबाज़ी की नीयत रखते हैं। तीसरे, खेत बटाई, जब वे बीज बोने के बाद खेत बाँट लेते हैं। चौथे, लाँग बटाई, फ़सल काटने के बाद, वे उसका ढेर बना लेते हैं और फिर उसे आपने में बाँट लेते हैं…”
1अमील-गुज़ार को नक़द के अलावा किसमें वसूली के लिए तैयार रहना था? कणकुत का अर्थ बताइए। (2)
उत्तर देखिए
फ़सल (जीन्स) में; कण = अनाज, कुत = अंदाज़ा — खड़ी फ़सल का आकलन।
2बटाई में “समझदार निरीक्षकों” की ज़रूरत क्यों बताई गई? (1)
उत्तर देखिए
बँटवारे में दुष्ट-बुद्धि और मक्कार लोग धोखेबाज़ी कर सकते थे।
3खेत बटाई और लाँग बटाई का अंतर स्पष्ट कीजिए। किसानों पर इन प्रणालियों का क्या फ़र्क पड़ता होगा? (2)
उत्तर देखिए
खेत बटाई — बुवाई के बाद ही खेत बँट जाते (जोखिम दोनों पक्षों पर); लाँग बटाई — कटाई के बाद ढेर बाँटा जाता; फ़र्क — कणकुत में अंदाज़े की ग़लती का जोखिम, बटाई-विधियों में वास्तविक उपज साझा — फ़सल खराब होने पर बोझ अलग-अलग पड़ता।
स्रोत 9 पर आधारित — “खुशकिस्मती के गुलाब बाग की सिंचाई” (पृ. 219)
”…मैंने काफ़ी खोजबीन और मेहनत करके महामहिम की गतिविधियों के सबूत और दस्तावेज़ इकट्ठे किए… मैंने सच बोलने वाले समझदार बुज़ुर्गों और फुर्तीले दिमाग वाले, सत्यकर्मी जवानों दोनों (की बातों) को परखा, और उनके बयानों को लिखित रूप से दर्ज किया। सूबों को शाही हुक्म जारी किया गया कि… वे अपने संस्मरणों को लिखें और उसे दरबार भेज दें…”
1यह अंश किसका है और किस कृति की रचना-विधि बताता है? (2)
उत्तर देखिए
अबुल फ़ज़्ल; अकबरनामा (जिसका भाग आइन-ए-अकबरी है)।
2लेखक ने मौखिक बयानों के साथ क्या सावधानी बरती? (1)
उत्तर देखिए
बुज़ुर्गों-जवानों की बातों को ‘परखा’ और लिखित दर्ज किया; (आगे — अन्य स्रोतों से पुष्टि)।
3“किस हद तक अबुल फ़ज़्ल की किताब अकबर से उसके रिश्ते से प्रभावित हुई होगी?” — दो तर्क दीजिए। (2)
उत्तर देखिए
आदेश स्वयं बादशाह का था (“शानदार फ़तहों की दास्तान… लिखो”) — प्रशस्ति की दिशा तय; दरबारी होने से राज्य-विरोधी तथ्यों के प्रति दृष्टि सीमित — इसीलिए आइन “सत्ता के ऊँचे गलियारों का नज़रिया” है; फिर भी विधि (परखना, पुष्टि, संशोधन) में व्यावसायिक सतर्कता थी।
बॉक्स-आधारित — “एक समांतर सैनिक बल!” (पृ. 212)
1आइन के अनुसार ज़मींदारों की मिली-जुली सैनिक शक्ति के आँकड़े लिखिए। (2)
उत्तर देखिए
384,558 घुड़सवार; 4,277,057 पैदल; 1863 हाथी; 4260 तोप; 4500 नाव।
2इन आँकड़ों से ज़मींदार वर्ग की किस स्थिति का पता चलता है? (1)
उत्तर देखिए
वे राज्य के समांतर एक विशाल सैनिक शक्ति रखते थे — ग्रामीण समाज में दबदबे और राज्य से सौदेबाज़ी की क्षमता का आधार।
3यही सैनिक शक्ति 17वीं सदी के कृषि विद्रोहों के संदर्भ में क्या महत्त्व रखती है? (2)
उत्तर देखिए
विद्रोहों में ज़मींदारों को किसानों का समर्थन मिलता था — ज़मींदारों की सेना + किसानों की संख्या मिलकर राज्य के लिए गंभीर चुनौती बनती; यह ज़मींदार-किसान संबंधों में पारस्परिकता का प्रमाण भी है।