बोर्ड: RBSE, कक्षा XII | सभी प्रश्न-प्रकार सम्मिलित अंक-योजना: वस्तुनिष्ठ (1) • अति लघु (2) • लघु (3) • दीर्घ/निबंध (6-8) • स्रोत-आधारित (5)
भाग अ — बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) — 40
1अल-बिरूनी का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) ख़्वारिज़्म — आधुनिक उज़्बेकिस्तान में
2अल-बिरूनी का जीवनकाल था
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) 973–1048
3अल-बिरूनी किस भाषा का ज्ञाता नहीं था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) यूनानी — पर अरबी अनुवादों से प्लेटो आदि से परिचित था
4अल-बिरूनी भारत किस रूप में आया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) बंधक — 1017 में सुल्तान महमूद उसे ग़ज़नी ले गया
5किताब-उल-हिन्द कितने अध्यायों में विभाजित है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) अस्सी
6अल-बिरूनी की लेखन-शैली में प्रत्येक अध्याय का आरंभ होता था
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) एक प्रश्न से — फिर संस्कृतवादी वर्णन, अंत में तुलना
7NCERT के अनुसार अल-बिरूनी की ‘ज्यामितीय संरचना’ का मुख्य कारण था
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) गणित की ओर झुकाव
8अल-बिरूनी ने किस यूनानी गणितज्ञ की कृति का संस्कृत में अनुवाद किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) यूक्लिड — “अपने ब्राह्मण मित्रों के लिए”
9अल-बिरूनी ने किस भारतीय ग्रंथकार के व्याकरण-ग्रंथ का अरबी में अनुवाद किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) पतंजलि
10‘हिंदू’ शब्द मूलत: किस भाषा से निकला?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) फ़ारसी — सिंधु नदी के पूर्व के क्षेत्र के लिए
11अरबी लोगों ने इस क्षेत्र को क्या कहा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) अल-हिंद — निवासियों को ‘हिंदी’
12‘हिंदुस्तान’ तथा ‘हिंदवी’ नाम किसने दिए?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) तुर्कों ने
13अल-बिरूनी के अनुसार समझ में बाधक तीसरा अवरोध था
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) अभिमान
14अल-बिरूनी ने जाति व्यवस्था को समझने के लिए किस समाज से तुलना की?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) प्राचीन फ़ारस — चार सामाजिक वर्ग
15अल-बिरूनी ने किस मान्यता को अस्वीकार किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) अपवित्रता — “प्रकृति के नियमों के विरुद्ध”
16‘अंत्यज’ का शाब्दिक अर्थ है
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) व्यवस्था से परे
17इब्न बतूता का जन्म कहाँ हुआ?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) तैंजियर, मोरक्को
18इब्न बतूता के परिवार की विशेषज्ञता किसमें थी?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) शरिया
19इब्न बतूता ने घर किस आयु में छोड़ा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) बाईस वर्ष
20इब्न बतूता भारत (सिंध) कब पहुँचा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) 1333 — स्थलमार्ग से, मध्य एशिया होकर
21मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने इब्न बतूता को किस पद पर नियुक्त किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) क़ाज़ी
22इब्न बतूता को किस वर्ष चीन जाने का आदेश मिला?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) 1342 — मंगोल शासक के पास दूत के रूप में
23इब्न बतूता मालद्वीप में कितने समय तक क़ाज़ी रहा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) अठारह महीने
24रिह़ला के श्रुतलेखों को किसने लिखा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) इब्न जुज़ई — राजा के आदेश पर
25इब्न बतूता के अनुसार सिंध से दिल्ली की यात्रा में कितने दिन लगते थे?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) लगभग पचास दिन
26डाक-व्यवस्था से सूचना सिंध से सुल्तान तक कितने दिनों में पहुँचती थी?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) पाँच दिन
27अश्व डाक व्यवस्था को क्या कहा जाता था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) उलुक — हर चार मील पर राजकीय घोड़े
28पैदल डाक-व्यवस्था का ‘दावा’ कितनी दूरी का होता था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) एक मील का एक-तिहाई — प्रति मील तीन अवस्थान
29इब्न बतूता के अनुसार दिल्ली की प्राचीर की चौड़ाई थी
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) ग्यारह हाथ — “एक हाथ लगभग 20 इंच के बराबर”
30दिल्ली शहर में कितने द्वार थे?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) अट्ठाईस — सबसे विशाल: बदायूँ दरवाज़ा
31दौलताबाद के गायकों-गायिकाओं के बाज़ार का नाम था
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) तारावबाद
32इब्न बतूता ने नारियल की तुलना किससे की?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) — वृक्ष खजूर जैसा, फल मानव सिर जैसा
33फ्रांस्वा बर्नियर भारत में कितने वर्ष रहा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) बारह वर्ष (1656–1668)
34बर्नियर पहले किसका चिकित्सक था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) दारा शिकोह — शाहजहाँ के ज्येष्ठ पुत्र
35बर्नियर ने अपनी प्रमुख कृति किसे समर्पित की?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) लुई XIV — फ्रांस के शासक
36अकबर के काल का सरकारी इतिहासकार अबुल फ़ज़्ल ने भूमि राजस्व को क्या कहा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) राजत्व का पारिश्रमिक
37‘प्राच्य निरंकुशवाद’ का सिद्धांत किसने विकसित किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) मॉन्टेस्क्यू — बर्नियर के वृत्तांत के आधार पर
38‘एशियाई उत्पादन शैली’ का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ग) कार्ल मार्क्स — उन्नीसवीं शताब्दी में
39सत्रहवीं शताब्दी में भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या नगरों में रहती थी?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) लगभग पंद्रह प्रतिशत — यह पश्चिमी यूरोप के अनुपात से अधिक था
40अहमदाबाद में सभी महाजनों का सामूहिक प्रतिनिधित्व किसके द्वारा होता था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (ख) नगर सेठ
भाग ब — रिक्त स्थान की पूर्ति — 15
1अल-बिरूनी की कृति किताब-उल-हिन्द ______ भाषा में लिखी गई थी।
उत्तर देखिए
अरबी
2अल-बिरूनी ने ______ में सुल्तान महमूद द्वारा ग़ज़नी लाया गया।
उत्तर देखिए
1017 ई.
3अल-बिरूनी के अनुसार समझ में तीन अवरोध थे — भाषा, धार्मिक अवस्था-प्रथा में भिन्नता तथा ______।
उत्तर देखिए
अभिमान
4अल-बिरूनी के अनुसार सूर्य ______ को स्वच्छ करता है।
उत्तर देखिए
हवा
5इब्न बतूता का यात्रा-वृत्तांत ______ कहलाता है।
उत्तर देखिए
रिह़ला
6इब्न बतूता अपनी यात्रा आरंभ करने के लगभग ______ वर्ष बाद घर लौटा।
उत्तर देखिए
तीस
7इब्न बतूता के अनुसार पैदल डाक-व्यवस्था ______ डाक व्यवस्था से अधिक तीव्र थी।
उत्तर देखिए
अश्व
8दिल्ली का सबसे विशाल द्वार ______ था।
उत्तर देखिए
बदायूँ दरवाज़ा
9इब्न बतूता के अनुसार ______ आकार में दिल्ली को चुनौती देता था।
उत्तर देखिए
दौलताबाद
10महीन ______ की कई क़िस्में इतनी महँगी थीं कि केवल अमीर वर्ग ही पहन सकता था।
उत्तर देखिए
मलमल
11बर्नियर की प्रमुख कृति ______ है।
उत्तर देखिए
ट्रैवल्स इन द मुग़ल एम्पायर
12बर्नियर के कार्य फ्रांस में ______ में प्रकाशित हुए।
उत्तर देखिए
1670-71
13बर्नियर के अनुसार भारत में ______ की स्थिति के लोग नहीं थे।
उत्तर देखिए
मध्य
14डच यात्री ______ ने भी उपमहाद्वीप में व्यापक ग़रीबी का उल्लेख किया।
उत्तर देखिए
पेलसर्ट
15______ ‘अस्पृश्य’ भूमिविहीन श्रमिकों के लिए प्रयुक्त शब्द था।
उत्तर देखिए
बलाहार
भाग स — एक पंक्ति के उत्तर (One-liners) — 40
1अल-बिरूनी का जन्म-स्थान?
उत्तर देखिए
ख़्वारिज़्म (आधुनिक उज़्बेकिस्तान)
2अल-बिरूनी का जीवनकाल?
उत्तर देखिए
973–1048
3वह भारत किस रूप में आया?
उत्तर देखिए
बंधक के रूप में
4किताब-उल-हिन्द की भाषा व आकार?
उत्तर देखिए
अरबी; अस्सी अध्याय
5अल-बिरूनी की तीन-चरणीय शैली?
उत्तर देखिए
प्रश्न → संस्कृतवादी वर्णन → तुलना
6उसने किन ग्रंथों से अंश उद्धृत किए?
उत्तर देखिए
वेद, पुराण, भगवद्गीता, पतंजलि की कृतियाँ, मनुस्मृति
7मापतंत्र विज्ञान क्या है?
उत्तर देखिए
मापने का विज्ञान
8‘हिंदू’ शब्द का मूल अर्थ?
उत्तर देखिए
सिंधु नदी के पूर्व का क्षेत्र (भौगोलिक)
9अल-बिरूनी के तीन अवरोध?
उत्तर देखिए
भाषा, धार्मिक अवस्था व प्रथा में भिन्नता, अभिमान
10प्राचीन फ़ारस के चार वर्ग?
उत्तर देखिए
घुड़सवार-शासक वर्ग; भिक्षु-पुरोहित-चिकित्सक; खगोल शास्त्री-वैज्ञानिक; कृषक-शिल्पकार
11अल-बिरूनी ने अपवित्रता क्यों अस्वीकार की?
उत्तर देखिए
क्योंकि यह प्रकृति के नियमों के विरुद्ध थी
12अपवित्रता के विरुद्ध उसके दो उदाहरण?
उत्तर देखिए
सूर्य हवा को स्वच्छ करता है; समुद्र में नमक पानी को गंदा होने से बचाता है
13इब्न बतूता का देश व जन्मस्थान?
उत्तर देखिए
मोरक्को, तैंजियर
14उसका जीवनकाल?
उत्तर देखिए
1304–77
15उसने घर किस आयु में छोड़ा?
उत्तर देखिए
बाईस वर्ष
16इब्न बतूता किसे ज्ञान का श्रेष्ठ स्रोत मानता था?
उत्तर देखिए
यात्राओं से अर्जित अनुभव (पुस्तकों के स्थान पर)
17वह भारत कब पहुँचा?
उत्तर देखिए
1333 (सिंध)
18दिल्ली में उसका पद?
उत्तर देखिए
क़ाज़ी (न्यायाधीश)
19किस सुल्तान ने नियुक्त किया?
उत्तर देखिए
मुहम्मद बिन तुग़लक़
20चीन जाने का आदेश कब मिला?
उत्तर देखिए
1342
21वह घर कब लौटा?
उत्तर देखिए
1354
22रिह़ला किसने लिखा?
उत्तर देखिए
इब्न जुज़ई ने (श्रुतलेखन से, राजा के आदेश पर)
23रिह़ला का दोहरा उद्देश्य?
उत्तर देखिए
मनोरंजन तथा लाभप्रद उपदेश (शिक्षा)
24चीनी बंदरगाह ज़ायतुन का आधुनिक नाम?
उत्तर देखिए
क्वानझू
25मार्को पोलो कहाँ से थे?
उत्तर देखिए
वेनिस, इटली (1254–1323)
26इब्न बतूता ने नारियल के रेशे का क्या उपयोग बताया?
उत्तर देखिए
रस्सी बनाना; लोहे की कीलों के बजाय जहाज़ की सिलाई
27पान के विषय में उसका असामान्य प्रेक्षण?
उत्तर देखिए
पान का कोई फल नहीं होता; केवल पत्तियों के लिए उगाया जाता है
28अश्व व पैदल डाक-व्यवस्था के नाम?
उत्तर देखिए
उलुक; अवस्थान = दावा
29कौन-सी डाक-व्यवस्था अधिक तीव्र थी?
उत्तर देखिए
पैदल डाक-व्यवस्था
30दिल्ली की प्राचीर की चौड़ाई?
उत्तर देखिए
ग्यारह हाथ (एक हाथ ≈ 20 इंच)
31दिल्ली में कितने द्वार थे?
उत्तर देखिए
अट्ठाईस
32बाज़ार के तीन कार्य?
उत्तर देखिए
आर्थिक विनिमय; धार्मिक (मस्जिद व मंदिर); सांस्कृतिक (नर्तक, संगीतकार, गायक)
33तारावबाद क्या था?
उत्तर देखिए
दौलताबाद में गायकों-गायिकाओं का बाज़ार
34अब्दुर रज़्ज़ाक ने किस शहर को ‘विचित्र देश’ कहा?
उत्तर देखिए
कालीकट (आधुनिक कोज़ीकोड)
35बर्नियर की तिहरी पहचान?
उत्तर देखिए
चिकित्सक, राजनीतिक दार्शनिक तथा इतिहासकार
36वह भारत में कब से कब तक रहा?
उत्तर देखिए
1656–1668
37उसकी कृति किसे समर्पित थी?
उत्तर देखिए
फ्रांस के शासक लुई XIV को
38‘शिविर नगर’ से उसका आशय?
उत्तर देखिए
वे नगर जो अस्तित्व व बने रहने के लिए राजकीय शिविर पर निर्भर थे
39बर्नियर से प्रभावित दो सिद्धांत?
उत्तर देखिए
मॉन्टेस्क्यू का प्राच्य निरंकुशवाद; मार्क्स की एशियाई उत्पादन शैली
40पश्चिमी भारत में व्यापारी समुदाय व उसका मुखिया?
उत्तर देखिए
महाजन; सेठ (अहमदाबाद में सामूहिक प्रतिनिधि — नगर सेठ)
भाग द — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 18
1अल-बिरूनी भारत कैसे आया? संक्षेप में बताइए।
उत्तर देखिए
1017 ई. में सुल्तान महमूद ने ख़्वारिज़्म पर आक्रमण कर वहाँ के कई विद्वानों व कवियों को अपनी राजधानी ग़ज़नी ले गया। अल-बिरूनी भी उनमें से एक था और बंधक के रूप में ग़ज़नी आया। धीरे-धीरे उसे यह शहर पसंद आने लगा और उसने सत्तर वर्ष की आयु में मृत्यु तक शेष जीवन वहीं बिताया।
2किताब-उल-हिन्द की तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर देखिए
(i) अरबी भाषा में, भाषा “सरल और स्पष्ट” (ii) अस्सी अध्यायों में विभाजित; विषय — धर्म-दर्शन, त्योहार, खगोल-विज्ञान, कीमिया, रीति-रिवाज, सामाजिक जीवन, भार-तौल, मापन, मूर्तिकला, कानून, मापतंत्र विज्ञान (iii) विशिष्ट त्रि-चरणीय शैली — प्रश्न से आरंभ, संस्कृतवादी परंपरा पर वर्णन, अंत में अन्य संस्कृतियों से तुलना।
3अल-बिरूनी की लेखन-शैली की ‘ज्यामितीय संरचना’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर देखिए
उसके प्रत्येक अध्याय की संरचना एक निश्चित, पूर्वानुमेय क्रम में चलती थी — प्रश्न → वर्णन → तुलना। यह “स्पष्टता तथा पूर्वानुमेयता के लिए उल्लेखनीय” थी। कुछ विद्वानों के अनुसार इसका मुख्य कारण अल-बिरूनी का गणित की ओर झुकाव था।
4‘हिंदू’ शब्द के विकास को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
यह छठी-पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के एक फ़ारसी शब्द से निकला, जिसका प्रयोग सिंधु नदी के पूर्व के क्षेत्र के लिए होता था। अरबों ने इसे ‘अल-हिंद’ (क्षेत्र) व ‘हिंदी’ (निवासी) कहा; तुर्कों ने ‘हिंदू’, ‘हिंदुस्तान’ व ‘हिंदवी’ नाम दिए। इनमें से कोई भी शब्द धार्मिक पहचान का द्योतक नहीं था — धार्मिक अर्थ में इसका प्रयोग बहुत बाद की बात है।
5अल-बिरूनी के तीन अवरोध कौन-से थे?
उत्तर देखिए
(i) भाषा — संस्कृत, अरबी व फ़ारसी से इतनी भिन्न कि विचारों व सिद्धांतों का अनुवाद आसान नहीं था (ii) धार्मिक अवस्था और प्रथा में भिन्नता (iii) अभिमान।
6अल-बिरूनी ने अपवित्रता की मान्यता को क्यों अस्वीकार किया?
उत्तर देखिए
उसका तर्क था कि हर वह वस्तु जो अपवित्र हो जाती है, अपनी पवित्रता की मूल स्थिति पुन: प्राप्त करने का प्रयास करती है और सफल होती है — सूर्य हवा को स्वच्छ करता है और समुद्र में नमक पानी को गंदा होने से बचाता है। “यदि ऐसा नहीं होता तो पृथ्वी पर जीवन असंभव होता।” अत: अपवित्रता की अवधारणा प्रकृति के नियमों के विरुद्ध थी।
7‘अंत्यज’ कौन थे? उनकी स्थिति का विरोधाभास बताइए।
उत्तर देखिए
अंत्यज का शाब्दिक अर्थ है ‘व्यवस्था से परे’। इनसे किसानों और ज़मींदारों के लिए सस्ता श्रम उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जाती थी। विरोधाभास: “हालाँकि ये अकसर सामाजिक प्रताड़ना का शिकार होते थे, फिर भी इन्हें आर्थिक तंत्र में शामिल किया जाता था।” अर्थात् वे सामाजिक रूप से बहिष्कृत, पर आर्थिक रूप से अनिवार्य थे।
8इब्न बतूता की ज्ञान-मीमांसा अल-बिरूनी से किस प्रकार भिन्न थी?
उत्तर देखिए
“अपनी श्रेणी के अन्य सदस्यों के विपरीत, इब्न बतूता पुस्तकों के स्थान पर यात्राओं से अर्जित अनुभव को ज्ञान का अधिक महत्त्वपूर्ण स्रोत मानता था।” इसके विपरीत अल-बिरूनी का ज्ञान मुख्यत: ग्रंथों (संस्कृत ग्रंथ व ब्राह्मण विद्वानों) पर आधारित था।
9रिह़ला कैसे लिखा गया?
उत्तर देखिए
इब्न बतूता ने इसे स्वयं नहीं लिखा। जब वह लौटा तो स्थानीय शासक ने निर्देश दिए कि उसकी कहानियों को दर्ज किया जाए। इब्न जुज़ई को उसके श्रुतलेखों को लिखने के लिए नियुक्त किया गया। विषय पहले से तय थे — देखे गए शहर, रोचक घटनाएँ, शासक, साहित्यकार तथा धर्मनिष्ठ संत।
10स्रोत 3 के अनुसार रिह़ला का उद्देश्य क्या था?
उत्तर देखिए
दोहरा — (i) मनोरंजन: “मस्तिष्क को मनोरंजन तथा कान और आँख को प्रसन्नता” (ii) शिक्षा: “असाधारण विवरण जिनके प्रतिपादन से लाभप्रद उपदेश मिलते हैं”। साथ ही ‘असाधारण’ चीज़ों पर सचेत बल दिया गया।
11इब्न बतूता के अनुसार यात्रा में कौन-सी कठिनाइयाँ थीं?
उत्तर देखिए
(i) समय — सिंध से दिल्ली लगभग पचास दिन, मुल्तान से चालीस दिन (ii) डाकुओं का ख़तरा — मुल्तान से दिल्ली की यात्रा में उसके कारवाँ पर आक्रमण हुआ, कई साथी मारे गए, बचे हुए बुरी तरह घायल (iii) बीमारी व एकाकीपन — ज्वर के कारण उसे पगड़ी से स्वयं को ज़ीन से बाँधना पड़ा।
12इब्न बतूता ने भारतीय शहरों का कैसा चित्र दिया?
उत्तर देखिए
उसने शहरों को “व्यापक अवसरों से भरपूर” पाया — उनके लिए जिनके पास आवश्यक इच्छा, साधन तथा कौशल था। शहर घनी आबादी वाले तथा समृद्ध थे; भीड़-भाड़ वाली सड़कें तथा चमक-दमक वाले, रंगीन बाज़ार थे। दिल्ली भारत में सबसे बड़ा था और दौलताबाद आकार में उसे चुनौती देता था।
13मध्यकालीन बाज़ार केवल आर्थिक स्थान क्यों नहीं थे?
उत्तर देखिए
क्योंकि “ये सामाजिक तथा आर्थिक गतिविधियों के केंद्र भी थे।” अधिकांश बाज़ारों में एक मस्जिद तथा एक मंदिर होता था, और कम से कम कुछ में नर्तकों, संगीतकारों तथा गायकों के सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए स्थान भी चिह्नित थे। स्रोत 9 (तारावबाद) इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।
14डाक-व्यवस्था के दो प्रकार बताइए।
उत्तर देखिए
(i) अश्व डाक व्यवस्था (उलुक) — “हर चार मील की दूरी पर स्थापित राजकीय घोड़ों द्वारा संचालित” (ii) पैदल डाक व्यवस्था — “प्रति मील तीन अवस्थान; इसे दावा कहा जाता है, और यह एक मील का एक-तिहाई होता है”।
15पैदल डाक-व्यवस्था अश्व-व्यवस्था से अधिक तीव्र क्यों थी?
उत्तर देखिए
क्योंकि इसमें रिले सिद्धांत काम करता था — हर एक-तिहाई मील पर धावक बदल जाता था, इसलिए कोई थकता नहीं था। साथ ही छड़ पर लगी ताँबे की घंटियों की आवाज़ सुनकर अगला धावक पहले से तैयार हो जाता था, जिससे प्रतीक्षा-समय शून्य रहता था। घोड़ों को इसके विपरीत विश्राम व चारा चाहिए था।
16बर्नियर को ‘विशिष्ट चिकित्सक’ क्यों कहा गया है?
उत्तर देखिए
क्योंकि वह केवल चिकित्सक नहीं था — वह राजनीतिक दार्शनिक तथा इतिहासकार भी था। इसी कारण उसका वृत्तांत केवल वर्णन नहीं, तर्क है — “गहन प्रेक्षण, आलोचनात्मक अंतर्दृष्टि तथा गहन चिंतन के लिए उल्लेखनीय”।
17‘शिविर नगर’ से बर्नियर का क्या आशय था? NCERT इसे क्यों अस्वीकार करती है?
उत्तर देखिए
आशय वे नगर जो “अपने अस्तित्व और बने रहने के लिए राजकीय शिविर पर निर्भर” थे — दरबार के आने से बनते और उसके चले जाने पर तेज़ी से पतनोन्मुख हो जाते।
अस्वीकृति NCERT इसे “अतिसरलीकृत चित्रण” कहती है, क्योंकि वास्तव में सभी प्रकार के नगर थे — उत्पादन केंद्र, व्यापारिक नगर, बंदरगाह नगर, धार्मिक केंद्र तथा तीर्थ स्थान।
18महिलाओं की तीन आर्थिक भूमिकाएँ बताइए।
उत्तर देखिए
(i) “उनका श्रम कृषि तथा कृषि के अलावा होने वाले उत्पादन, दोनों में महत्त्वपूर्ण था” (ii) “व्यापारिक परिवारों से आने वाली महिलाएँ व्यापारिक गतिविधियों में हिस्सा लेती थीं” (iii) “कभी-कभी वाणिज्यिक विवादों को अदालत के सामने भी ले जाती थीं”। इसीलिए NCERT कहती है — “यह असंभाव्य लगता है कि महिलाओं को उनके घरों के ख़ास स्थानों तक परिसीमित कर रखा जाता था।”
भाग य — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 17
1NCERT के अनुसार यात्रा-वृत्तांत अधिक रोचक क्यों होते हैं?
उत्तर देखिए
“पूरी तरह से भिन्न सामाजिक तथा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने के कारण ये लेखक दैनिक गतिविधियों तथा प्रथाओं के प्रति अधिक सावधान रहते थे। देशज लेखकों के लिए ये सभी विषय सामान्य थे जो वृत्तांतों में दर्ज करने योग्य नहीं थे। नज़रिये में यही भिन्नता ही यात्रा-वृत्तांतों को अधिक रोचक बनाती है।”
अर्थात् जो स्थानीय व्यक्ति के लिए साधारण है, वही बाहरी के लिए उल्लेखनीय होता है।
2लोगों ने यात्राएँ क्यों कीं? कोई पाँच कारण बताइए।
उत्तर देखिए
कार्य की तलाश में; प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए; व्यापारियों, सैनिकों, पुरोहितों और तीर्थयात्रियों के रूप में; तथा साहस की भावना से प्रेरित होकर। अध्याय में तीन विशिष्ट उदाहरण मिलते हैं — अल-बिरूनी (बंधक/विवशता), इब्न बतूता (जिज्ञासा व साहस), बर्नियर (अवसर की तलाश)।
3अध्याय में महिला यात्रियों के वृत्तांतों के विषय में क्या कहा गया है?
उत्तर देखिए
“दुर्भाग्य से हमारे पास महिलाओं द्वारा छोड़े गए वृत्तांत लगभग न के बराबर हैं, हालाँकि हम यह जानते हैं कि वे भी यात्राएँ करती थीं।”
अंतिम पृष्ठ पर भी यह दोहराया गया है कि उपमहाद्वीप के पुरुषों “(और संभवत: महिलाओं)” के अनुभव अपेक्षाकृत अज्ञात हैं। यह इतिहास के ‘मौन’ का उदाहरण है — काल-रेखा में भी एक भी महिला यात्री नहीं है।
4अल-बिरूनी की भारत के प्रति रुचि विकसित होने के तीन कारण बताइए।
उत्तर देखिए
(i) पूर्ववर्ती अनुवाद-परंपरा — “आठवीं शताब्दी से ही संस्कृत में रचित खगोल-विज्ञान, गणित और चिकित्सा संबंधी कार्यों का अरबी भाषा में अनुवाद होने लगा था” (ii) राजनीतिक संपर्क — “पंजाब के ग़ज़नवी साम्राज्य का हिस्सा बन जाने के बाद स्थानीय लोगों से हुए संपर्कों ने आपसी विश्वास और समझ का वातावरण बनाने में मदद की” (iii) व्यक्तिगत अध्ययन — “अल-बिरूनी ने ब्राह्मण पुरोहितों तथा विद्वानों के साथ कई वर्ष बिताए और संस्कृत, धर्म तथा दर्शन का ज्ञान प्राप्त किया।”
5अल-बिरूनी के अनुवाद-कार्य से क्या पता चलता है?
उत्तर देखिए
उसने पतंजलि के व्याकरण-ग्रंथ सहित कई संस्कृत कृतियों का अरबी में अनुवाद किया; और “अपने ब्राह्मण मित्रों के लिए उसने यूक्लिड (एक यूनानी गणितज्ञ) के कार्यों का संस्कृत में अनुवाद किया।”
इससे तीन बातें पता चलती हैं — (i) ज्ञान का आदान-प्रदान दोतरफ़ा था (ii) उसका संबंध भारतीय विद्वानों से मित्रता का था (iii) वह कई भाषाओं में दक्ष था।
6अल-बिरूनी अपने घोषित उद्देश्य से क्यों पूरी तरह सफल नहीं हो सका?
उत्तर देखिए
क्योंकि “इन समस्याओं की जानकारी होने पर भी, अल-बिरूनी लगभग पूरी तरह से ब्राह्मणों द्वारा रचित कृतियों पर आश्रित रहा।” उसने वेदों, पुराणों, भगवद्गीता, पतंजलि की कृतियों तथा मनुस्मृति से अंश उद्धृत किए। ये ग्रंथ एक ही सामाजिक वर्ग के दृष्टिकोण से लिखे गए थे और नियामक (आदर्श) नियम बताते थे, वास्तविक जीवन नहीं। “लेकिन वास्तविक जीवन में यह व्यवस्था इतनी भी कड़ी नहीं थी।”
7क्या अल-बिरूनी केवल संस्कृत ग्रंथों पर आश्रित था? स्रोत 5 से उत्तर दीजिए।
उत्तर देखिए
पूर्णत: नहीं। स्रोत 5 का अंतिम वाक्य प्रत्यक्ष प्रेक्षण है, ग्रंथ नहीं — “लेकिन इन वर्गों के बीच भिन्नता होने पर भी ये एक साथ एक ही शहरों और गाँवों में रहते हैं, समान घरों और आवासों में मिल-जुल कर।”
इसी प्रकार ‘अपवित्रता’ की अस्वीकृति भी उसका स्वतंत्र प्राकृतिक तर्क है, किसी ग्रंथ से नहीं आया। अत: उसका विवरण ग्रंथ-आधारित होते हुए भी पूर्णत: ग्रंथ-सीमित नहीं था।
8इब्न बतूता की यात्रा का संक्षिप्त क्रम बताइए।
उत्तर देखिए
1332-33 से पहले — मक्का की तीर्थयात्राएँ; सीरिया, इराक, फ़ारस, यमन, ओमान व पूर्वी अफ़्रीका के तटीय बंदरगाह। 1333 — मध्य एशिया के रास्ते स्थलमार्ग से सिंध; फिर मुल्तान व उच्छ होकर दिल्ली, जहाँ वह क़ाज़ी बना (बीच में कारागार भी गया)। 1342 — चीन के लिए दूत नियुक्त; मालाबार → मालद्वीप (18 माह क़ाज़ी) → श्रीलंका → बंगाल व असम → सुमात्रा → ज़ायतुन (क्वानझू) व बीजिंग। 1347 में लौटने का निश्चय; 1354 में घर वापसी — यात्रा आरंभ के लगभग तीस वर्ष बाद।
9इब्न बतूता अपने पाठकों को अपरिचित वस्तुएँ कैसे समझाता था?
उत्तर देखिए
पाँच विधियों से — (i) परिचित से तुलना (नारियल = खजूर; पान = अंगूर-लता; सुपारी = जायफल) (ii) मानव-शरीर से सादृश्य (नारियल = मानव सिर, दो आँखें, मुख, मस्तिष्क, बाल) (iii) इकाई का अनुवाद — “ग्यारह हाथ (एक हाथ लगभग 20 इंच के बराबर)” (iv) संख्यात्मक सटीकता (28 द्वार; 4 मील पर घोड़े) (v) प्रक्रिया का चरण-दर-चरण वर्णन (पान चबाने की विधि; डाक-रिले)।
10स्रोत 8 के आधार पर दिल्ली के स्थापत्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
प्राचीर “अतुलनीय” थी, चौड़ाई ग्यारह हाथ; भीतर पहरेदारों व द्वारपालों के कक्ष तथा खाद्यसामग्री, हथियार, बारूद, प्रक्षेपास्त्र व घेरेबंदी की मशीनों के भंडारगृह थे। निचला भाग पत्थर का, ऊपरी भाग ईंटों का। प्राचीर में खिड़कियाँ शहर की ओर खुलती थीं जिनसे प्रकाश आता था; कई मीनारें पास-पास बनी थीं। शहर के अट्ठाईस द्वार थे — सबसे विशाल बदायूँ दरवाज़ा; मांडवी दरवाज़े के भीतर अनाज मंडी और गुल दरवाज़े की बगल में फलों का बगीचा था। एक क़ब्रगाह थी जिसमें क़ब्रों पर गुंबद या मेहराब थे और कंदाकार चमेली व जंगली गुलाब सभी मौसमों में खिले रहते थे।
11इब्न बतूता के आर्थिक प्रेक्षण बताइए।
उत्तर देखिए
(i) “भारतीय कृषि के इतना अधिक उत्पादकारी होने का कारण मिट्टी का उपजाऊपन था, जो किसानों के लिए वर्ष में दो फ़सलें उगाना संभव करता था” (ii) “उपमहाद्वीप व्यापार तथा वाणिज्य के अंतर एशियाई तंत्रों से भली-भाँति जुड़ा हुआ था” (iii) “भारतीय माल की मध्य तथा दक्षिण-पूर्व एशिया, दोनों में बहुत माँग थी जिससे शिल्पकारों तथा व्यापारियों को भारी मुनाफ़ा होता था” (iv) सूती कपड़ा, महीन मलमल, रेशम, ज़री तथा साटन की अत्यधिक माँग; महीन मलमल इतनी महँगी कि केवल अमीर व धनाढ्य पहन सकते थे।
12बर्नियर की कृतियाँ अल-बिरूनी व इब्न बतूता की तुलना में अधिक प्रभावशाली क्यों सिद्ध हुईं?
उत्तर देखिए
प्रसार की तकनीक के कारण। बर्नियर के कार्य 1670-71 में फ्रांस में प्रकाशित हुए और “अगले पाँच वर्षों के भीतर ही अंग्रेज़ी, डच, जर्मन तथा इतालवी भाषाओं में इनका अनुवाद हो गया”; 1670-1725 के बीच फ्रांसीसी में आठ बार तथा 1684 तक अंग्रेज़ी में तीन बार पुनर्मुद्रण हुआ।
इसके विपरीत “अरबी और फ़ारसी वृत्तांत जिनका प्रसार हस्तलिपियों के रूप में होता था और जो 1800 से पहले सामान्यत: प्रकाशित नहीं होते थे” — इसलिए उनकी पहुँच सीमित रही।
13‘द्वि-विपरीतता’ से क्या आशय है? बर्नियर के संदर्भ में समझाइए।
उत्तर देखिए
“उसका भारत का चित्रण द्वि-विपरीतता के नमूने पर आधारित है, जहाँ भारत को यूरोप के प्रतिलोम के रूप में दिखाया गया है, या फिर यूरोप का ‘विपरीत’… उसने जो भिन्नताएँ महसूस कीं उन्हें भी पदानुक्रम के अनुसार क्रमबद्ध किया, जिससे भारत, पश्चिमी दुनिया को निम्न कोटि का प्रतीत हो।”
इसकी तीन सीढ़ियाँ हैं — भिन्नता देखना → उसे विपरीत बना देना → उसे ऊँच-नीच में बदल देना।
14बर्नियर के भूस्वामित्व संबंधी दावे का NCERT कैसे खंडन करती है?
उत्तर देखिए
तीन आधारों पर — (i) “आश्चर्य की बात यह है कि एक भी सरकारी मुग़ल दस्तावेज़ यह इंगित नहीं करता कि राज्य ही भूमि का एकमात्र स्वामी था।” (ii) अबुल फ़ज़्ल (अकबर के काल का सरकारी इतिहासकार) भूमि राजस्व को “राजत्व का पारिश्रमिक” बताता है — “जो राजा द्वारा अपनी प्रजा को सुरक्षा प्रदान करने के बदले की गई माँग प्रतीत होती है, न कि अपने स्वामित्व वाली भूमि पर लगान” (iii) “असल में यह न तो लगान था, न ही भूमिकर, बल्कि उपज पर लगने वाला कर था।”
भूल का कारण“क्योंकि भूमि राजस्व की माँग अकसर बहुत अधिक होती थी” — यूरोपीय यात्रियों ने राशि देखकर उसकी प्रकृति ग़लत समझ ली।
15बर्नियर के विचार का दीर्घकालिक प्रभाव बताइए।
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“बर्नियर के विवरणों ने अठारहवीं शताब्दी से पश्चिमी विचारकों को प्रभावित किया।”
(i) फ्रांसीसी दार्शनिक मॉन्टेस्क्यू ने इसके आधार पर प्राच्य निरंकुशवाद (Oriental Despotism) का सिद्धांत विकसित किया — “एशिया में शासक अपनी प्रजा के ऊपर निर्बाध प्रभुत्व का उपभोग करते थे, जिसे दासता और ग़रीबी की स्थितियों में रखा जाता था”
(ii) कार्ल मार्क्स ने उन्नीसवीं शताब्दी में इसे एशियाई उत्पादन शैली (Asiatic Mode of Production) के रूप में आगे बढ़ाया — अधिशेष का अधिग्रहण राज्य द्वारा; स्वायत्त, आंतरिक रूप से समतावादी ग्रामीण समुदाय; “यह एक निष्क्रिय प्रणाली मानी जाती थी।”
16स्रोत 11 और स्रोत 13 में क्या विरोधाभास है?
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| पहलू | स्रोत 11 | स्रोत 13 |
|---|---|---|
| भूमि | “रेतीली भूमियाँ या बंजर पर्वत” | “अधिकांश भाग अत्यधिक उपजाऊ” |
| जनसंख्या | “आबादी भी कम है” | “जनसंख्या पर्याप्त है” |
| कृषि | “खेती अच्छी नहीं है” | “भूमि पर खेती अच्छी होती है” |
| उत्पादन/धन | ग़रीबी, पलायन | रेशम, कपास, नील; निर्यात; सोना-चाँदी भारत आता है |
कारण: स्रोत 11 में वह राजकीय भूस्वामित्व की बुराई सिद्ध कर रहा है; स्रोत 13 में वह तथ्यों के दबाव में सच स्वीकार कर लेता है। यह उसका आत्म-खंडन है।
17दास प्रथा में विभेद के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
(i) कुशल दासियाँ — “सुल्तान की सेवा में कार्यरत कुछ दासियाँ संगीत और गायन में निपुण थीं” (ii) गुप्तचर दासियाँ — “सुल्तान अपने अमीरों पर नज़र रखने के लिए दासियों को भी नियुक्त करता था”; स्रोत 15 के अनुसार “महिला सफाई कर्मचारी… बिना बताए घर में दाख़िल हो जाती हैं” (iii) घरेलू व वाहक दास — “दासों को सामान्यत: घरेलू श्रम के लिए इस्तेमाल किया जाता था”; तथा “पालकी या डोले में पुरुषों और महिलाओं को ले जाने में विशेष रूप से अपरिहार्य”।
भाग र — दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (6-8 अंक) — 10
★उत्तर-लेखन का सूत्र: भूमिका → स्रोत का नाम व उद्धरण → विश्लेषण → स्रोत की सीमा → संतुलित निष्कर्ष।
1किताब-उल-हिन्द पर एक लेख लिखिए। (NCERT प्र. 1)
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ढाँचा (i) लेखक व पृष्ठभूमि — अल-बिरूनी (973–1048), ख़्वारिज़्म; 1017 में बंधक के रूप में ग़ज़नी (ii) भाषाएँ — सीरियाई, फ़ारसी, हिब्रू, संस्कृत; यूनानी नहीं (iii) अरबी भाषा, “सरल और स्पष्ट”, अस्सी अध्याय, बारह विषय (iv) ★त्रि-चरणीय शैली व “ज्यामितीय संरचना” — कारण गणित की ओर झुकाव (v) उद्देश्य व पाठक (स्रोत 1) (vi) प्रयुक्त ग्रंथ — वेद, पुराण, भगवद्गीता, पतंजलि, मनुस्मृति (vii) ★सीमा — मुख्यत: ब्राह्मणीय ग्रंथों पर आश्रित (viii) महत्त्व — “1500 ई. से पहले भारत में कुछ ही लोगों ने पढ़ा होगा, भारत से बाहर कई अन्य लोगों ने”
2इब्न बतूता और बर्नियर के दृष्टिकोणों की तुलना कीजिए तथा अंतर बताइए। (NCERT प्र. 2)
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★तालिका के रूप में लिखिए (विस्तृत तालिका 00-Master-Teaching-Notes.md भाग 12 में)
मुख्य अंतर इब्न बतूता ने “हर उस चीज़ का वर्णन करने का निश्चय किया जिसने उसे अपने अनूठेपन के कारण प्रभावित और उत्सुक किया”; बर्नियर “जो भी देखा, उसकी सामान्य रूप से यूरोप और विशेष रूप से फ्रांस में व्याप्त स्थितियों से तुलना तथा भिन्नता को उजागर करने के प्रति अधिक चिंतित था।”
निष्कर्ष“इब्न बतूता ने भारत को देखा और चकित हुआ; बर्नियर ने भारत को आँका और असंतुष्ट हुआ।”
3बर्नियर के वृत्तांत से उभरने वाले शहरी केंद्रों के चित्र पर चर्चा कीजिए। (NCERT प्र. 3)
उत्तर देखिए
ढाँचा (i) ★आँकड़ा — 15% नगरीय जनसंख्या, “पश्चिमी यूरोप की नगरीय जनसंख्या के अनुपात से अधिक” (ii) ‘शिविर नगर’ की अवधारणा व उसका तर्क (iii) ! NCERT का खंडन — “अतिसरलीकृत चित्रण” (iv) पाँच नगर-प्रकार (v) व्यापारिक संगठन — महाजन, सेठ, नगर सेठ (vi) ★आठ व्यावसायिक वर्ग — हकीम/वैद्य, पंडित/मुल्ला, वकील, चित्रकार, वास्तुविद, संगीतकार, सुलेखक (vii) “कई अन्य… आम लोगों की सेवा द्वारा जीवनयापन करते थे” — यह ‘सब राज्य पर आश्रित’ का खंडन है (viii) स्रोत 14 व चित्र 5.12 — शिल्प-दक्षता का प्रमाण
4इब्न बतूता द्वारा दास प्रथा के संबंध में दिए गए साक्ष्यों का विवेचन कीजिए। (NCERT प्र. 4)
उत्तर देखिए
ढाँचा (i) खुली बिक्री — “किसी भी अन्य वस्तु की तरह” (ii) भेंट के तीन दृष्टांत — सिंध, मुल्तान, दिल्ली दरबार (एक लाख टके व दो सौ दास) (iii) ★दासों में विभेद — संगीत-गायन में निपुण, गुप्तचर, घरेलू, वाहक (iv) ★कम क़ीमत → व्यापक प्रसार (v) स्रोत 15 — दासियाँ अमीरों की मुख़बिरी करती थीं (vi) ! दासता का स्रोत — “हमलों और अभियानों के दौरान बलपूर्वक प्राप्त” (vii) निष्कर्ष — दास-प्रथा दरबार से घर तक फैली एक संस्थागत व्यवस्था थी, जिसमें श्रम, कौशल व निगरानी — तीनों भूमिकाएँ थीं
5सती प्रथा के कौन-से तत्वों ने बर्नियर का ध्यान अपनी ओर खींचा? (NCERT प्र. 5)
उत्तर देखिए
ढाँचा (i) ★चयन का कारण — “महिलाओं से किया जाने वाला बर्ताव अकसर पश्चिमी तथा पूर्वी समाजों के बीच भिन्नता का महत्त्वपूर्ण संकेतक” माना जाता था (ii) उसका अपना भेद — “कुछ प्रसन्नता से… अन्य को बाध्य किया जाता था” (iii) आयु — बारह वर्ष से अधिक नहीं (iv) ★बाध्यता — “अनिच्छुक पीड़िता… जबरन… हाथ और पैर बाँध दिए ताकि वह भाग न जाए” (v) पीड़िता की मानसिक स्थिति (vi) ★लेखक की अपनी असहायता — “मैं अपनी भावनाओं को दबाने में… असमर्थ था” (vii) ★संतुलित निष्कर्ष — “लेकिन महिलाओं का जीवन सती प्रथा के अलावा कई और चीज़ों के चारों ओर घूमता था” — कृषि, उत्पादन, व्यापार, अदालत
6जाति व्यवस्था के संबंध में अल-बिरूनी की व्याख्या पर चर्चा कीजिए। (NCERT प्र. 6)
उत्तर देखिए
ढाँचा (i) विधि — “अन्य समुदायों में प्रतिरूपों की खोज” (ii) प्राचीन फ़ारस के चार वर्ग; उद्देश्य — “ये वर्ग केवल भारत तक ही सीमित नहीं थे” (iii) इस्लाम की समानता का उल्लेख (iv) ★★अपवित्रता की अस्वीकृति — सूर्य व समुद्र का प्राकृतिक तर्क; “प्रकृति के नियमों के विरुद्ध” (v) स्रोत 5 का प्रयोग — चार वर्णों की उत्पत्ति; पर अंतिम वाक्य “एक ही शहरों और गाँवों में… मिल-जुल कर” (vi) ! सीमा — “नियामक संस्कृत ग्रंथों… ब्राह्मणों के दृष्टिकोण से” (vii) ★निष्कर्ष — आदर्श बनाम व्यवहार — “वास्तविक जीवन में यह व्यवस्था इतनी भी कड़ी नहीं थी”; अंत्यज का उदाहरण
7क्या इब्न बतूता का वृत्तांत समकालीन शहरी जीवन-शैली की सही जानकारी में सहायक है? कारण दीजिए। (NCERT प्र. 7)
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★दोनों पक्ष लिखिए।
हाँ (पाँच कारण) प्रत्यक्ष अनुभव व वर्षों का निवास • स्रोत 8 का सूक्ष्म स्थापत्य-विवरण • ★बाज़ार का त्रि-आयामी चित्र (आर्थिक + धार्मिक + सांस्कृतिक) व स्रोत 9 • आर्थिक जानकारी (दो फ़सलें, अंतर-एशियाई व्यापार, वस्त्र) • ★प्रशासनिक तंत्र — डाक-व्यवस्था (स्रोत 10), सराय व विश्राम गृह
सीमाएँ (चार)‘असाधारण’ का पक्षपात (स्रोत 3) • श्रुतलेखन व राजकीय आदेश से रचित • सामाजिक दायरा — क़ाज़ी, सुल्तान व अमीर वर्ग तक सीमित • “इब्न बतूता की शहरों की समृद्धि का वर्णन करने में अधिक रुचि नहीं थी”
निष्कर्ष“यह एक अनिवार्य स्रोत है, पर अकेला पर्याप्त नहीं।”
8चर्चा कीजिए कि बर्नियर का वृत्तांत किस सीमा तक इतिहासकारों को समकालीन ग्रामीण समाज को पुनर्निर्मित करने में सक्षम करता है? (NCERT प्र. 8)
उत्तर देखिए
ढाँचा (i) मूल थीसिस — निजी भूस्वामित्व का अभाव (ii) ★छह कड़ियों की तर्क-शृंखला (iii) साक्ष्य — स्रोत 11; पेलसर्ट का समर्थन (iv) ! चार आपत्तियाँ — कोई मुग़ल दस्तावेज़ नहीं; अबुल फ़ज़्ल का “राजत्व का पारिश्रमिक”; लगान नहीं, उपज पर कर; ★उद्देश्य की सीमा (यूरोप के विवादों में भागीदारी) (v) ★आत्म-खंडन — स्रोत 13 (vi) ★वास्तविक चार स्तर — बड़े ज़मींदार, बड़े किसान, छोटे किसान, बलाहार (vii) ★निष्कर्ष — “वह लक्षण सही देखता है, कारण ग़लत बताता है” (viii) दीर्घकालिक प्रभाव — मॉन्टेस्क्यू व मार्क्स
9बर्नियर के उद्धरण (प्र. 9) में उल्लिखित शिल्प-कार्यों को सूचीबद्ध कीजिए तथा अध्याय में वर्णित शिल्प-गतिविधियों से तुलना कीजिए। (NCERT प्र. 9)
उत्तर देखिए
(क) उद्धरण में: यूरोपीय वस्तुओं की सूक्ष्म नकल • बंदूकें बनाना • स्वर्णाभूषण-निर्माण • चित्रकारी
(ख) अध्याय में (स्रोत 14): कसीदाकार • सुनार • चित्रकार • प्रलाक्षा रस का रोगन लगाने वाले • बढ़ई, ख़रादी, दर्जी व जूते बनाने वाले • रेशम, ज़री तथा महीन मलमल का काम करने वाले; तथा (स्रोत 13) गलीचे, ज़री, कसीदाकारी, सोने-चाँदी के वस्त्र, रेशम व सूती वस्त्र
(ग) ★★तुलना का निष्कर्ष: उद्धरण में बंदूकें व यूरोपीय वस्तुओं की नकल नए हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण यह कि उद्धरण में बर्नियर कारीगरी की प्रशंसा करता है (“औज़ारों का अभाव” होते हुए भी “कोई यूरोपीय स्वर्णकार… बेहतर बना सकता है” — संदेह), जबकि स्रोत 14 में वह उन्हीं शिल्पकारों को “निश्चेष्ट” कहता है। यह उसका आत्म-खंडन है — और चित्र 5.12 (पन्ने-माणिक जड़ा सोने का चम्मच) इसका दृश्य प्रमाण है।
10“हर स्रोत का एक दृष्टिकोण होता है।” — इस अध्याय के आधार पर इस कथन की विवेचना कीजिए। (विश्लेषणात्मक)
उत्तर देखिए
ढाँचा (i) भूमिका — NCERT का कथन: “इन वृत्तांतों से हम बहुत सी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, पर इनमें सामाजिक जीवन के कई आयाम अनछुए रह जाते हैं, या फिर एक दृष्टिकोण विशेष से देखे जाते हैं”
(ii) अल-बिरूनी का दृष्टिकोण — ग्रंथ-केंद्रित; उद्देश्य “धार्मिक विषयों पर चर्चा” में सहायता; परिणाम — ब्राह्मणीय आदर्श का चित्र, व्यवहार का नहीं
(iii) इब्न बतूता का दृष्टिकोण — ‘असाधारण’ केंद्रित (स्रोत 3); परिणाम — नारियल व पान पर पूरे बॉक्स, पर साधारण दैनिक जीवन पर कम
(iv) बर्नियर का दृष्टिकोण — यूरोप-केंद्रित व राजनीतिक; उद्देश्य “नीति-निर्माताओं… को प्रभावित करने का”; परिणाम — द्वि-विपरीतता व अतिसरलीकरण
(v) ★पर दृष्टिकोण का होना स्रोत को बेकार नहीं करता — अल-बिरूनी ने अपवित्रता का खंडन किया; इब्न बतूता ने डाक-व्यवस्था का अमूल्य विवरण दिया; बर्नियर ने कारख़ानों का एकमात्र विस्तृत विवरण दिया
(vi) ★निष्कर्ष — “इतिहासकार का काम स्रोत को त्यागना नहीं, उसका दृष्टिकोण पहचानकर पढ़ना है।”
भाग ल — स्रोत-आधारित प्रश्न (5 अंक प्रत्येक) — 5 सेट
सेट 1 — स्रोत 3 : “शिक्षा तथा मनोरंजन”★
“इब्न जुज़ई जिसे इब्न बतूता के श्रुतलेखों को लिखने के लिए नियुक्त किया गया था, अपनी प्रस्तावना में लिखता है: (राजा के द्वारा) एक शालीन निर्देश दिया गया कि वे (इब्न बतूता) अपनी यात्रा में देखे गए शहरों का, तथा अपनी स्मृति में बैठ गई रोचक घटनाओं का एक वृत्तांत लिखवाएँ, और साथ ही विभिन्न देशों के शासकों में से जिनसे वे मिले, उनके महान साहित्यकारों के तथा उनके धर्मनिष्ठ संतों के विषय में बताएँ। तदनुसार उन्होंने इन सभी विषयों पर एक कथानक लिखवाया जिसने मस्तिष्क को मनोरंजन तथा कान और आँख को प्रसन्नता दी। साथ ही उन्होंने कई प्रकार के असाधारण विवरण जिनके प्रतिपादन से लाभप्रद उपदेश मिलते हैं, दिए तथा असाधारण चीज़ों के बारे में बताया जिनके संदर्भ से अभिरुचि जगी।”
(क) रिह़ला किसने और किन परिस्थितियों में लिखा? (1)
इब्न जुज़ई ने, जिसे इब्न बतूता के श्रुतलेखों को लिखने के लिए नियुक्त किया गया था — और यह राजा के निर्देश पर हुआ।
(ख) राजा ने किन विषयों पर वृत्तांत लिखवाने का निर्देश दिया? (2)
(i) यात्रा में देखे गए शहर (ii) स्मृति में बैठी रोचक घटनाएँ (iii) विभिन्न देशों के शासक जिनसे वे मिले (iv) उन देशों के महान साहित्यकार (v) उनके धर्मनिष्ठ संत।
(ग) ★इस स्रोत से रिह़ला की विषय-वस्तु पर क्या निष्कर्ष निकलता है? (2)
स्रोत के अनुसार वृत्तांत का उद्देश्य दोहरा था — मनोरंजन (“मस्तिष्क को मनोरंजन तथा कान और आँख को प्रसन्नता”) और शिक्षा (“लाभप्रद उपदेश”)। साथ ही ‘असाधारण’ पर सचेत बल दिया गया — “असाधारण विवरण… असाधारण चीज़ों के बारे में बताया”। ★निष्कर्ष: चूँकि वृत्तांत का उद्देश्य ही असाधारण को दर्ज करना था, इसलिए उसमें साधारण दैनिक जीवन का अपेक्षाकृत अभाव स्वाभाविक है। यही कारण है कि इब्न बतूता नारियल-पान का विस्तृत वर्णन करता है, पर सामान्य श्रमिक का दैनिक जीवन कम आता है।
सेट 2 — स्रोत 5 : “वर्ण व्यवस्था”★
“सबसे ऊँची जाति ब्राह्मणों की है जिनके विषय में हिंदुओं के ग्रंथ हमें बताते हैं कि वे ब्रह्मन् के सिर से उत्पन्न हुए थे और क्योंकि ब्रह्मा, प्रकृति नामक शक्ति का ही दूसरा नाम है, और सिर… शरीर का सबसे ऊपरी भाग है, इसलिए ब्राह्मण पूरी प्रजाति के सबसे चुनिंदा भाग हैं… अगली जाति क्षत्रियों की है जिनका सृजन, ऐसा कहा जाता है, ब्रह्मन् के कंधों और हाथों से हुआ था। उनका दर्जा ब्राह्मणों से अधिक नीचे नहीं है। उनके पश्चात वैश्य आते हैं जिनका उद्भव ब्रह्मन् की जंघाओं से हुआ था। शूद्र, जिनका सृजन उनके चरणों से हुआ था। अंतिम दो वर्गों के बीच अधिक अंतर नहीं है। लेकिन इन वर्गों के बीच भिन्नता होने पर भी ये एक साथ एक ही शहरों और गाँवों में रहते हैं, समान घरों और आवासों में मिल-जुल कर।”
(क) अल-बिरूनी के अनुसार चारों वर्णों की उत्पत्ति किन अंगों से बताई गई है? (1)
ब्राह्मण — सिर; क्षत्रिय — कंधों और हाथों; वैश्य — जंघाओं; शूद्र — चरणों से।
(ख) इस विवरण में अल-बिरूनी की अपनी व्याख्या कहाँ दिखाई देती है? (2)
दो स्थानों पर — (i) “क्योंकि ब्रह्मा, प्रकृति नामक शक्ति का ही दूसरा नाम है” — यह उसका तर्कसंगत स्पष्टीकरण है, ग्रंथ का पाठ नहीं (ii) “और सिर… शरीर का सबसे ऊपरी भाग है, इसलिए ब्राह्मण… सबसे चुनिंदा भाग हैं” — यह रूपक को तार्किक रूप से खोलना है। साथ ही “हिंदुओं के ग्रंथ हमें बताते हैं” कहकर वह स्वयं संकेत देता है कि यह उसका मत नहीं, ग्रंथों का कथन है।
(ग) ★अंतिम वाक्य का महत्त्व बताइए। (2)
अंतिम वाक्य — “ये एक साथ एक ही शहरों और गाँवों में रहते हैं, समान घरों और आवासों में मिल-जुल कर” — प्रत्यक्ष प्रेक्षण है, किसी ग्रंथ से नहीं आया। इसका दोहरा महत्त्व है: (i) यह सिद्ध करता है कि अल-बिरूनी केवल संस्कृत ग्रंथों पर आश्रित नहीं था — उसने वास्तविक जीवन भी देखा (ii) यह कठोर सामाजिक पृथक्करण की धारणा का खंडन करता है। यह NCERT के इस निष्कर्ष से मेल खाता है कि “वास्तविक जीवन में यह व्यवस्था इतनी भी कड़ी नहीं थी।”
सेट 3 — स्रोत 10 : “घोड़े पर और पैदल”★★
“भारत में दो प्रकार की डाक व्यवस्था है। अश्व डाक व्यवस्था जिसे उलुक कहा जाता है, हर चार मील की दूरी पर स्थापित राजकीय घोड़ों द्वारा संचालित होती है। पैदल डाक व्यवस्था के प्रति मील तीन अवस्थान होते हैं; इसे दावा कहा जाता है, और यह एक मील का एक-तिहाई होता है… अब, हर तीन मील पर घनी आबादी वाला एक गाँव होता है जिसके बाहर तीन मंडप होते हैं जिनमें लोग कार्य आरंभ के लिए तैयार बैठे रहते हैं। उनमें से प्रत्येक के पास दो हाथ लंबी एक छड़ होती है जिसके ऊपर ताँबे की घंटियाँ लगी होती हैं। जब संदेशवाहक शहर से यात्रा आरंभ करता है तो एक हाथ में पत्र तथा दूसरे में घंटियों सहित छड़ लिए वह क्षमतानुसार तेज़ भागता है। जब मंडप में बैठे लोग घंटियों की आवाज़ सुनते हैं तो वे तैयार हो जाते हैं। जैसे ही संदेशवाहक उनके पास पहुँचता है, उनमें से एक उससे पत्र लेता है और वह छड़ हिलाते हुए पूरी ताकत से दौड़ता है, जब तक वह अगले दावा तक नहीं पहुँच जाता। पत्र के अपने गंतव्य स्थान तक पहुँचने तक यही प्रक्रिया चलती रहती है। यह पैदल डाक व्यवस्था अश्व डाक व्यवस्था से अधिक-तीव्र होती है; और इसका प्रयोग अकसर ख़ुरासान के फलों के परिवहन के लिए होता है, जिन्हें भारत में बहुत पसंद किया जाता है।”
(क) दोनों प्रकार की डाक-व्यवस्थाओं के नाम व दूरी बताइए। (1)
अश्व डाक — ‘उलुक’, हर चार मील पर राजकीय घोड़े। पैदल डाक का अवस्थान — ‘दावा’, प्रति मील तीन अवस्थान (= एक मील का एक-तिहाई)।
(ख) पैदल डाक-व्यवस्था की कार्य-विधि का वर्णन कीजिए। (2)
हर तीन मील पर घनी आबादी वाला गाँव होता था जिसके बाहर तीन मंडप थे जहाँ लोग तैयार बैठे रहते थे। प्रत्येक के पास दो हाथ लंबी छड़ होती थी जिस पर ताँबे की घंटियाँ लगी थीं। संदेशवाहक एक हाथ में पत्र और दूसरे में घंटी वाली छड़ लेकर तेज़ दौड़ता था। घंटियों की आवाज़ सुनकर मंडप के लोग तैयार हो जाते; पहुँचने पर उनमें से एक पत्र लेकर अगले दावा तक दौड़ता था। गंतव्य तक यही प्रक्रिया चलती रहती थी।
(ग) ★पैदल डाक-व्यवस्था अश्व-व्यवस्था से अधिक तीव्र क्यों थी? इसका महत्त्व बताइए। (2)
कारण: यह रिले सिद्धांत पर चलती थी — हर एक-तिहाई मील पर धावक बदल जाता था, इसलिए कोई थकता नहीं था; जबकि घोड़ों को विश्राम व चारा चाहिए होता था। साथ ही घंटी के पूर्व-संकेत से अगला धावक पहले से तैयार रहता था — प्रतीक्षा-समय शून्य। महत्त्व: “इब्न बतूता डाक प्रणाली की कार्यकुशलता देखकर चकित हुआ।” इससे व्यापारियों को लंबी दूरी तक सूचना भेजना, उधार प्रेषित करना तथा अल्प सूचना पर माल भेजना संभव हुआ। सबसे उल्लेखनीय — “जहाँ सिंध से दिल्ली की यात्रा में पचास दिन लगते थे वहीं गुप्तचरों की ख़बरें… मात्र पाँच दिनों में पहुँच जाती थीं” — अर्थात् सूचना यात्री से दस गुना तेज़ चलती थी।
सेट 4 — स्रोत 11 व 13 : बर्नियर के दो चित्र★★
स्रोत 11: “हिंदुस्तान के साम्राज्य के विशाल ग्रामीण अंचलों में से कई केवल रेतीली भूमियाँ या बंजर पर्वत ही हैं। यहाँ की खेती अच्छी नहीं है और इन इलाकों की आबादी भी कम है… ग़रीब लोग जब अपने लोभी स्वामियों की माँगों को पूरा करने में असमर्थ हो जाते हैं तो उन्हें न केवल जीवन-निर्वहन के साधनों से वंचित कर दिया जाता है, बल्कि उन्हें अपने बच्चों से भी हाथ धोना पड़ता है, जिन्हें दास बना कर ले जाया जाता है। इस प्रकार ऐसा होता है कि इस अत्यंत निरंकुशता से हताश हो किसान गाँव छोड़कर चले जाते हैं।”
स्रोत 13: “यह ध्यान देना आवश्यक है कि इस देश के विस्तृत भू-भाग का अधिकांश भाग अत्यधिक उपजाऊ है; उदाहरण के लिए, बंगाल का विशाल राज्य जो मिस्र से न केवल चावल, मकई तथा जीवन की अन्य आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन में, बल्कि उन अनगिनत वाणिज्यिक वस्तुओं के संदर्भ में, जो मिस्र में भी नहीं उगाई जातीं, जैसे रेशम, कपास तथा नील कहीं आगे है… यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पूरे विश्व के सभी भागों में संचलन के पश्चात सोना और चाँदी भारत में आकर कुछ हद तक खो जाता है।”
(क) स्रोत 11 के अनुसार किसानों को किन समस्याओं से जूझना पड़ता था? कोई तीन बताइए। (1)
(i) बंजर व रेतीली भूमि तथा कम आबादी (ii) लोभी स्वामियों की अत्यधिक माँगें व जीवन-निर्वहन के साधनों से वंचन (iii) बच्चों का दास बनाया जाना — और अंतत: गाँव छोड़कर पलायन।
(ख) दोनों स्रोतों के विवरणों की तुलना कीजिए। (2)
| पहलू | स्रोत 11 | स्रोत 13 |
|---|---|---|
| भूमि | रेतीली/बंजर | अत्यधिक उपजाऊ |
| जनसंख्या | कम | पर्याप्त |
| कृषि | अच्छी नहीं | अच्छी |
| उत्पादन | पतनोन्मुख | चावल, मकई, रेशम, कपास, नील |
| धन | ग़रीबी | सोना-चाँदी भारत आता है |
(ग) ★एक ही लेखक दो विपरीत चित्र क्यों देता है? (2)
क्योंकि दोनों स्थानों पर वह अलग-अलग तर्क सिद्ध कर रहा है। स्रोत 11 में उसे राजकीय भूस्वामित्व की बुराई सिद्ध करनी है — NCERT स्वयं कहती है कि वह “राज्य और समाज से संबंधित यूरोप में प्रचलित तत्कालीन विवादों में भाग ले रहा था” और उसका विवरण “यूरोप में उन लोगों के लिए एक चेतावनी का कार्य करेगा जो निजी स्वामित्व की ‘अच्छाइयों’ को स्वीकार नहीं करते थे।” स्रोत 13 में वह तथ्यों के दबाव में भारत की समृद्धि स्वीकार कर लेता है। NCERT इसे यों रखती है — “हालाँकि मुग़ल राज्य को निरंकुश रूप देने की तन्मयता स्पष्ट है, लेकिन उसके विवरण कभी-कभी एक अधिक जटिल सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा करते हैं।” ★निष्कर्ष: यह बर्नियर का आत्म-खंडन है — और यह दिखाता है कि स्रोत का उद्देश्य ही उसकी विश्वसनीयता की सीमा तय करता है।
सेट 5 — स्रोत 9 : “बाज़ार में संगीत”★
“दौलताबाद में पुरुष और महिला गायकों के लिए एक बाज़ार है जिसे तारावबाद कहते हैं। यह सबसे विशाल और सुंदर बाज़ारों में से एक है। यहाँ बहुत सी दुकानें हैं और प्रत्येक दुकान में एक ऐसा दरवाज़ा है जो मालिक के आवास में खुलता है… दुकानों को कालीनों से सजाया गया है और दुकान के मध्य में झूला है जिस पर गायिका बैठती है… बाज़ार के मध्य में एक विशाल गुंबद खड़ा है जिसमें कालीन बिछाए गए हैं और सजाया गया है जिसमें प्रत्येक गुरुवार सुबह को संगीतकारों के बाद संगीतकारों के प्रमुख, अपने सेवकों और दासों के साथ स्थान ग्रहण करते हैं। गायिकाएँ एक के बाद एक झुंडों में उनके समक्ष आकर सूर्यास्त का गीत गाती और नाचती हैं जिसके पश्चात वे चले जाते हैं। इस बाज़ार में इबादत के लिए मस्जिदें बनी हुई हैं… हिंदू शासकों में से एक… जब भी बाज़ार से गुज़रता था, गुंबद में उतर कर आता था और गायिकाएँ उसके समक्ष गान प्रस्तुत करती थीं। यहाँ तक कि कई मुस्लिम शासक भी ऐसा ही करते थे।”
(क) तारावबाद क्या था और कहाँ था? (1)
दौलताबाद में स्थित पुरुष और महिला गायकों का बाज़ार, जिसे इब्न बतूता “सबसे विशाल और सुंदर बाज़ारों में से एक” बताता है।
(ख) इस बाज़ार की व्यवस्था का वर्णन कीजिए। (2)
यहाँ बहुत सी दुकानें थीं और प्रत्येक दुकान का एक दरवाज़ा मालिक के आवास में खुलता था। दुकानें कालीनों से सजी थीं और मध्य में झूला था जिस पर गायिका बैठती थी, जिसे सेविकाएँ झुलाती थीं। बाज़ार के मध्य में एक विशाल गुंबद था जहाँ प्रत्येक गुरुवार सुबह संगीतकार और उनके प्रमुख अपने सेवकों-दासों के साथ स्थान ग्रहण करते; गायिकाएँ झुंडों में आकर सूर्यास्त का गीत गाती और नाचती थीं। बाज़ार में इबादत के लिए मस्जिदें भी बनी थीं।
(ग) ★इब्न बतूता ने इन गतिविधियों को उजागर क्यों किया? (2)
चार कारण: (i) यह उसके पाठकों के लिए पूर्णत: अपरिचित था — एक पूरा बाज़ार केवल संगीत के लिए (ii) उसके वृत्तांत का घोषित उद्देश्य ही असाधारण को दर्ज करना था (स्रोत 3) (iii) यह भारतीय शहरी संस्कृति की समृद्धि दिखाता है (iv) ★सबसे महत्त्वपूर्ण — “हिंदू शासकों में से एक… गुंबद में उतर कर आता था… यहाँ तक कि कई मुस्लिम शासक भी ऐसा ही करते थे” — यह साझा सांस्कृतिक संरक्षण का साक्ष्य है, जो उसके लिए विशेष उल्लेखनीय था। यह स्रोत NCERT के इस कथन को भी प्रमाणित करता है कि “बाज़ार मात्र आर्थिक विनिमय के स्थान ही नहीं थे बल्कि ये सामाजिक तथा आर्थिक गतिविधियों के केंद्र भी थे।”
भाग व — मानचित्र-आधारित प्रश्न
1विश्व के रेखा-मानचित्र पर इब्न बतूता द्वारा यात्रा किए गए देशों को चिह्नित कीजिए। (NCERT प्र. 10)
उत्तर देखिए
अंकित कीजिए मोरक्को (तैंजियर), ट्यूनिस, मिस्र/अरब (मक्का), सीरिया, इराक, ईरान (फ़ारस), यमन, ओमान, पूर्वी अफ़्रीका, मध्य एशिया, भारत (सिंध, मुल्तान, दिल्ली, दौलताबाद, मालाबार, बंगाल, असम), मालद्वीप, श्रीलंका, सुमात्रा, चीन (ज़ायतुन/क्वानझू, बीजिंग)
2उसने कौन-कौन से समुद्र पार किए होंगे?
उत्तर देखिए
भूमध्य सागर • लाल सागर • अरब सागर • हिंद महासागर • बंगाल की खाड़ी • दक्षिण चीन सागर
3मानचित्र 1 (पुस्तक) में अंकित कोई पाँच स्थान बताइए।
उत्तर देखिए
काबुल, ग़ज़ना, कंधार, मुल्तान, ऊजा, अजुदाहन, अबुहर, सरसती, हंसी, देहली, लाहरी (कोई पाँच)
भाग श — कथन-कारण तथा अभिकथन प्रश्न (1 अंक)
1अभिकथन (A): अल-बिरूनी ने जाति-व्यवस्था में निहित अपवित्रता की अवधारणा को अस्वीकार किया।
कारण (R): उसका मानना था कि यह अवधारणा प्रकृति के नियमों के विरुद्ध थी।
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (क)
2अभिकथन (A): बर्नियर ने मुग़लकालीन शहरों को ‘शिविर नगर’ कहा।
कारण (R): उसका विश्वास था कि ये नगर राजकीय दरबार के आगमन के साथ अस्तित्व में आते थे और उसके जाने पर पतनोन्मुख हो जाते थे।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क) — दोनों सही, R, A की सही व्याख्या करता है
3अभिकथन (A): इब्न बतूता का वृत्तांत साधारण दैनिक जीवन का विस्तृत विवरण नहीं देता।
कारण (R): रिह़ला का घोषित उद्देश्य ही असाधारण चीज़ों को दर्ज करना था।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क) — दोनों सही, R, A की सही व्याख्या करता है
4अभिकथन (A): बर्नियर का वृत्तांत यूरोप में अल-बिरूनी व इब्न बतूता के वृत्तांतों से कहीं अधिक प्रभावशाली सिद्ध हुआ।
कारण (R): बर्नियर की कृति 1670-71 में मुद्रित हुई और पाँच वर्षों में चार भाषाओं में अनूदित हो गई, जबकि अरबी-फ़ारसी वृत्तांतों का प्रसार हस्तलिपियों से होता था।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क) — दोनों सही, R, A की सही व्याख्या करता है