Chapter 1सत्ता की साझेदारी

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NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1

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यह पन्ना परीक्षा से पहले दोहराने के लिए है। हर बात के साथ किताब का पृष्ठ लिखा है, ताकि शक हो तो वहीं खोलकर देख लीजिए। पृष्ठ संख्याएँ 2026-27 में छपी किताब की हैं; 2024-25 वाली किताब में भी यही पृष्ठ हैं। आँकड़े किताब के हैं; परीक्षा में यही लिखिए।

तारों का मतलब: ★★किताब की प्रश्नावली (प्रश्न 1–9) में सीधे पूछा गया · ★उन उत्तरों में काम आता है · बिना तारे के: पृष्ठभूमि या किताब की गतिविधि।


1. अध्याय एक नज़र में

पूरा अध्याय एक चित्र में

सवालसत्ता बाँटी तो देश कमज़ोर होगा?पृष्ठ 2 पर एक विद्यार्थी के मन में यही समीकरण है
बेल्जियमसत्ता में साझेदारीसमुदायों और क्षेत्रों की भावनाओं का आदर
श्रीलंकाबहुसंख्यकवादसिंहली प्रभुता के सरकारी कदम
व्यवस्था बेहद सफलगृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम
गृहयुद्ध2009 में अंत
भावनाओं का आदर करने पर ही देश की एकता संभवबहुमत दूसरों को सत्ता में हिस्सा न दे, तो एकता ही संकट में पड़ सकती है
युक्तिपरकटकराव घटता है, व्यवस्था स्थिर रहती है
नैतिकसाझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है
आगे, पृष्ठ 8–9साझेदारी के चार रूपअंगों में · स्तरों में · सामाजिक समूहों में · दलों और दबाव-समूहों में
NCERT, पृष्ठ 1–9 के आधार पर

2. ज़रूरी शब्द★

किताब की प्रश्नावली में: प्रश्न 2, 5, 8 (इन्हीं शब्दों से उत्तर बनते हैं)

शब्दमतलब (हमारे शब्दों में)पृष्ठ
सत्ता की साझेदारीशासन की ताकत किसी एक व्यक्ति, अंग, स्तर या समुदाय के हाथ में न रहकर कई के बीच बँटी रहे। किताब इसकी अलग से परिभाषा नहीं देती; यह वाक्य पृष्ठ 8 के आधार पर हमारा है।8
एथनीक (जातीय)साझी संस्कृति पर टिका सामाजिक बँटवारा। समूह के लोग मानते हैं कि उनके पूर्वज एक थे। धर्म या राष्ट्रीयता एक होना ज़रूरी नहीं।2
बहुसंख्यकवादयह सोच कि बहुमत वाला समुदाय मनचाहे ढंग से देश चला सकता है और अल्पसंख्यकों की ज़रूरतें और इच्छाएँ अनदेखी कर सकता है।3
गृहयुद्धदेश के भीतर सरकार-विरोधी समूहों की हिंसक लड़ाई, जो युद्ध जैसी लगने लगे।4
युक्तिपरकहानि-लाभ का सावधानी से हिसाब लगाकर लिया गया फ़ैसला। पूरी तरह नैतिकता पर टिका फ़ैसला अकसर इसका उलटा होता है।6
क्षैतिज वितरणसरकार के अंग (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) एक ही स्तर पर रहकर सत्ता बाँटते हैं।8
नियंत्रण और संतुलनक्षैतिज बँटवारे में हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है, इसलिए कोई अंग असीमित ताकत नहीं पाता।8
उर्ध्वाधर वितरणऊँचे और नीचे स्तर की सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा: केंद्र, राज्य, नगरपालिका और पंचायत।9
सामुदायिक सरकारबेल्जियम में सरकार का तीसरा स्तर। एक भाषा बोलने वाले लोग इसे चुनते हैं, चाहे कहीं भी रहें।5, 9
गठबंधन सरकारदो या ज़्यादा दल मिलकर सरकार बनाएँ।6, 9

3. बेल्जियम और श्रीलंका: आमने-सामने★★

किताब की प्रश्नावली में: प्रश्न 7

बेल्जियमश्रीलंका
कहाँयूरोप; सीमाएँ फ़्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और लक्ज़मबर्ग सेद्वीप, तमिलनाडु के दक्षिणी तट से कुछ किलोमीटर दूर
हरियाणा से तुलनाक्षेत्रफल में हरियाणा से भी छोटा; आबादी एक करोड़ से थोड़ी ज़्यादा, यानी हरियाणा की करीब आधीआबादी करीब दो करोड़, यानी हरियाणा के बराबर
भाषा-समूहडच 59% (फ्लेमिश इलाका) · फ़्रेंच 40% (वेलोनिया) · जर्मन 1%; राजधानी ब्रूसेल्स में फ़्रेंच 80%, डच 20%सिंहली 74% · तमिल 18%; इन 18% में श्रीलंकाई मूल के तमिल 13% और बाकी हिंदुस्तानी तमिल
धर्मकिताब नहीं बतातीज़्यादातर सिंहली बौद्ध; तमिलों में कुछ हिंदू, कुछ मुसलमान; ईसाई 7%, जो सिंहली और तमिल दोनों बोलते हैं
उलझनदेश में बहुमत डच का, पर धन और ताकत फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यकों के पास; ब्रूसेल्स में डच सिर्फ़ 20%सिंहली बहुमत और भी बड़ा; तमिल मुख्य रूप से उत्तर और पूर्व में
क्या हो सकता था (पृष्ठ 3)डच अपनी संख्या के बल पर इच्छा थोप सकते थे; देश बँट सकता था और ब्रूसेल्स पर दोनों दावा करतेसिंहली देश में अपनी मनमानी चला सकते थे
असल में चुना गया रास्तासाझेदारी: 1970 से 1993 के बीच संविधान में चार संशोधनबहुसंख्यकवाद: 1956 का भाषा क़ानून, विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता, बौद्ध मत को संरक्षण
नतीजाव्यवस्था बेहद सफल; गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विरामगृहयुद्ध, जो 2009 में ख़त्म हुआ

सबसे ज़रूरी बात: दोनों देश लोकतांत्रिक हैं (पृष्ठ 5)। फ़र्क़ शासन-प्रणाली का नहीं, सत्ता की साझेदारी पर चुने गए रास्ते का है।

4. श्रीलंका: बहुसंख्यकवाद की राह★★

किताब की प्रश्नावली में: प्रश्न 7 (ख, ग)

श्रीलंका: बहुसंख्यकवाद से गृहयुद्ध तक

1948श्रीलंका आज़ाद हुआसिंहली नेता बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व चाहते थे
1956क़ानून: सिंहली एकमात्र राजभाषातमिल को दरकिनार करके
नीतिविश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता
नया संविधानसरकार बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा देगी
श्रीलंकाई तमिलों में नाराज़गी और बेगानापन
  • सिंहली नेतृत्व वाली पार्टियाँ उनकी भाषा और संस्कृति के प्रति असंवेदनशील लगीं
  • लगा कि वे समान राजनीतिक अधिकारों से वंचित हैं
  • लगा कि नौकरियों में भेदभाव हो रहा है और हितों की अनदेखी
श्रीलंकाई तमिलअपने दल बनाए, इन माँगों के लिए संघर्ष किया
  • तमिल को राजभाषा बनाना
  • क्षेत्रीय स्वायत्तता
  • शिक्षा और रोज़गार में समान अवसर
1980 के दशक तकस्वतंत्र तमिल ईलम की माँगउत्तर-पूर्वी श्रीलंका में; इसके लिए अनेक राजनीतिक संगठन बने
गृहयुद्ध
  • दोनों पक्षों के हज़ारों लोग मारे गए
  • अनेक परिवार देश छोड़कर शरणार्थी बने
  • उससे कई गुना ज़्यादा लोगों की रोज़ी-रोटी चौपट हुई
  • सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन में परेशानियाँ
2009गृहयुद्ध का अंत
NCERT, पृष्ठ 3–4
  • याद रखिए: ये कदम लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार ने उठाए थे (पृष्ठ 3)। इसलिए यह तानाशाही की नहीं, बहुसंख्यकवाद की कहानी है।
  • तीन सरकारी कदम, एक साथ याद कीजिए: भाषा (1956) · विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता · बौद्ध मत को संरक्षण।
  • श्रीलंकाई तमिलों की तीन माँगें: तमिल को राजभाषा · क्षेत्रीय स्वायत्तता · शिक्षा और रोज़गार में समान अवसर (पृष्ठ 4)। प्रश्न 7 (ग) में “सत्ता को संघीय ढाँचे पर बाँटने की माँग” लिखा है; पाठ में इसके सबसे क़रीब की बात “क्षेत्रीय स्वायत्तता” है (यह मिलान हमारा है; पाठ “संघीय” शब्द नहीं लिखता)।

5. बेल्जियम मॉडल★★

किताब की प्रश्नावली में: प्रश्न 4, प्रश्न 7 (क, घ)

बेल्जियम: टकराव से साझेदारी तक

जड़फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यक ज़्यादा समृद्ध और ताकतवर रहेडच-भाषियों को आर्थिक विकास और शिक्षा का लाभ बहुत बाद में मिला
1950 और 1960 के दशकफ़्रेंच और डच-भाषियों में तनावसबसे तीखा ब्रूसेल्स में
1970–1993संविधान में चार संशोधनताकि देश में किसी को बेगानेपन का अहसास न हो
केंद्रडच और फ़्रेंच मंत्री बराबरकुछ विशेष क़ानूनों के लिए दोनों भाषा-समूहों के सांसदों का बहुमत ज़रूरी
क्षेत्रकेंद्र की कई शक्तियाँ दो इलाकों की क्षेत्रीय सरकारों कोये सरकारें केंद्र के अधीन नहीं
ब्रूसेल्सअलग सरकारदोनों समुदायों का बराबर प्रतिनिधित्व
समुदायतीसरे स्तर की सामुदायिक सरकारएक भाषा के लोग चुनते हैं, चाहे कहीं रहें; संस्कृति, शिक्षा और भाषा पर फ़ैसले
व्यवस्था जटिल, पर बेहद सफल
  • गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लगा
  • वरना गृहयुद्ध की हालत में देश भाषा के आधार पर दो टुकड़ों में बँट गया होता
NCERT, पृष्ठ 2, 4–5
  • चारों बातें एक साथ: केंद्र · क्षेत्र · ब्रूसेल्स · समुदाय (याद रखने का हमारा सूत्र)।
  • पहली बात का मकसद: किसी एक समुदाय के लोग एकतरफ़ा फ़ैसला नहीं कर सकते।
  • ब्रूसेल्स का लेन-देन: फ़्रेंच-भाषी ब्रूसेल्स में बराबर प्रतिनिधित्व पर इसलिए माने, क्योंकि डच-भाषियों ने केंद्रीय सरकार में बराबरी मानी थी। यानी दोनों ने अपने बहुमत वाली जगह पर बराबरी दी: डच देश में (59%), फ़्रेंच ब्रूसेल्स में (80%)।
  • किताब इस व्यवस्था को बहुत कल्पनाशील कहती है और लिखती है कि कोई और देश ऐसा नहीं कर पाया (पृष्ठ 4)। यह जटिल है, ख़ुद बेल्जियम में रहने वालों के लिए भी (पृष्ठ 5)।
  • एक तथ्य: जब यूरोपीय देशों ने मिलकर यूरोपीय संघ बनाया, तो ब्रूसेल्स को उसका मुख्यालय चुना गया (पृष्ठ 5)।

6. सत्ता की साझेदारी क्यों: दो तर्क★★

किताब की प्रश्नावली में: प्रश्न 2, 3, 5, 6, 9

युक्तिपरक तर्कनैतिक तर्क
किस पर ज़ोरसत्ता बाँटने के फ़ायदेमंद नतीजों परसत्ता बाँटने के अपने भीतर के (अंतर्भूत) महत्व पर
मूल बातसामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा घटता है, इसलिए राजनीतिक व्यवस्था स्थिर रहती हैसत्ता की साझेदारी “लोकतंत्र की आत्मा” है
आगे की बातबहुमत की इच्छा थोपना आगे चलकर देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है; बहुसंख्यकों का अत्याचार अकसर बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता हैलोकतंत्र का मतलब ही है कि शासन के अधीन रहने वालों में सत्ता बँटे; वैध सरकार वही है, जिससे सभी समूह अपनी भागीदारी के ज़रिए जुड़ें
पहचानने का सवाल (याद रखने का हमारा तरीका)इससे क्या फ़ायदा होगा?क्या यही सही और लोकतांत्रिक है?

युक्तिपरक तर्क: दो रास्ते, दो नतीजे

रास्ता 1सत्ता बाँटी गई
रास्ता 2बहुमत की इच्छा सब पर थोपी गई
सामाजिक समूहों में टकराव का अंदेशा घटता है
तात्कालिक तौर पर फ़ायदेमंद लग सकता है
राजनीतिक व्यवस्था स्थिर रहती हैटकराव अकसर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता बनता है; वह ख़तरा घटता है
देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता हैबहुसंख्यकों का अत्याचार अकसर बहुसंख्यकों को भी नुकसान पहुँचाता है
NCERT, पृष्ठ 6
  • प्रश्न 2 जैसा उत्तर तीन हिस्सों में लिखिए: भारत का एक उदाहरण → एक युक्तिपरक कारण → एक नैतिक कारण।
  • किताब के प्रश्न 3 और 4 करीब 50 शब्दों में उत्तर माँगते हैं।

7. सत्ता की साझेदारी के चार रूप★★

किताब की प्रश्नावली में: प्रश्न 1, 2, 8

सत्ता की साझेदारी के चार रूप

आधुनिक लोकतंत्र में सत्ता किनके बीच बँटती है?
1 · अंगसरकार के अंगों मेंक्षैतिज वितरण: विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका
  • कार्यपालिका संसद के अधीन काम करती है
  • न्यायपालिका कार्यपालिका और क़ानूनों पर अंकुश रखती है
2 · स्तरसरकार के स्तरों मेंउर्ध्वाधर वितरण: केंद्र, राज्य, नगरपालिका और पंचायत
  • भारत में केंद्र-राज्य बँटवारा संविधान में साफ़ लिखा है
  • बेल्जियम में ऐसा हुआ, श्रीलंका में नहीं
3 · समूहसामाजिक समूहों मेंभाषायी और धार्मिक समूह
  • बेल्जियम की सामुदायिक सरकार
  • भारत के आरक्षित चुनाव क्षेत्र
4 · दलदलों, दबाव-समूहों और आंदोलनों मेंपार्टियों की होड़ और गठबंधन
  • गठबंधन सरकार
  • व्यापारी, उद्योगपति, किसान, मज़दूर जैसे हित-समूह
NCERT, पृष्ठ 8–9

सूत्र: अंग · स्तर · समूह · दल (याद रखने का हमारा सूत्र)। प्रश्न 1 में हर रूप के साथ तीन बातें लिखिए: नाम → किनके बीच → एक उदाहरण।

रूपएक पंक्ति मेंप्रश्न 8 की सूची II में जोड़ी
1. अंगों के बीचकोई अंग असीमित ताकत नहीं पाता; हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है (नियंत्रण और संतुलन)अधिकारों का वितरण
2. स्तरों के बीचऊँचे और नीचे स्तर की सरकारें; जिन देशों में ऐसी व्यवस्था है, वहाँ यह बँटवारा संविधान में लिखा रहता हैसंघीय सरकार
3. सामाजिक समूहों के बीचकुछ देशों के संविधान और क़ानून सामाजिक रूप से कमज़ोर समुदायों और महिलाओं को विधायिका और प्रशासन में हिस्सेदारी देते हैं (अल्पसंख्यकों को भी), ताकि लोग ख़ुद को शासन से अलग न समझेंसामुदायिक सरकार
4. दलों और दबाव-समूहों के बीचदलों की होड़ से सत्ता एक व्यक्ति या समूह के हाथ में नहीं रहती; लंबे समय में सत्ता बारी-बारी से अलग-अलग दलों के पास आती हैगठबंधन सरकार

क्षैतिज और उर्ध्वाधर: फ़र्क़

क्षैतिज वितरणउर्ध्वाधर वितरण
किनके बीचसरकार के अंगसरकार के स्तर
स्तरतीनों अंग एक ही स्तर परऊँचे और नीचे स्तर की सरकारें
उदाहरणविधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिकाकेंद्र, राज्य, नगरपालिका और पंचायत
शब्द से यादक्षैतिज = आड़ा, एक पंक्ति में बराबरउर्ध्वाधर = खड़ा, ऊपर से नीचे

पूरी व्यवस्था एक जगह: भारत में ये दोनों बँटवारे असल में कैसे चलते हैं, यानी संसद, सरकार और अदालत में कौन क्या करता है और केंद्र, राज्य, पंचायत व नगरपालिका में कौन-सा काम किसका है, यह हमारे डीप डाइव सरकार के प्रकार और भारत में शासन के तीन स्तर में खोलकर देखिए।

यह विचार किसके ख़िलाफ़ आया (पृष्ठ 8)

पुरानी धारणालोकतंत्र का सिद्धांत
सरकार की सारी शक्ति एक व्यक्ति या एक जगह रहने वाले समूह के हाथ में रहेजनता ही सारी राजनीतिक शक्ति का स्रोत है
तर्क: शक्ति बिखर गई तो तुरंत फ़ैसले लेना और उन्हें लागू करना संभव नहीं होगालोग स्व-शासन की संस्थाओं के ज़रिए अपना शासन चलाते हैं
अच्छा लोकतंत्र वही, जिसमें ज़्यादा से ज़्यादा नागरिक सत्ता में हिस्सेदार हों

किताब का एक और उदाहरण (पृष्ठ 6): 2005 के चुनाव में जर्मनी के दो बड़े दलों में से किसी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला, इसलिए इन दो पुराने प्रतिद्वंद्वियों ने मिलकर गठबंधन सरकार बनाई। यह चौथे रूप का उदाहरण है।

8. खलील की उलझन (लेबनान)

किताब की गतिविधि, पृष्ठ 7। प्रश्नावली में नहीं।

गृहयुद्ध के बाद लेबनान के नेताओं ने समुदायों के बीच सत्ता बाँटने के नियम तय किए:

पदकिस समुदाय के लिए तय
राष्ट्रपतिमैरोनाइट पंथ का कैथोलिक
प्रधानमंत्रीसुन्नी मुसलमान
उपप्रधानमंत्रीआर्थोडॉक्स ईसाई
संसद के अध्यक्षशिया मुसलमान
  • समझौते की दो शर्तें: ईसाई फ़्रांस से संरक्षण नहीं माँगेंगे; मुसलमान सीरिया के साथ एकीकरण की माँग छोड़ेंगे।
  • समझौते के समय ईसाई और मुसलमान आबादी लगभग बराबर थी। बाद में मुसलमान साफ़ बहुमत में आ गए, फिर भी दोनों पक्ष समझौता मान रहे हैं।
  • खलील की शिकायत: वह लोकप्रिय है और राजनीति में आगे जाना चाहता है, पर इस व्यवस्था में सबसे बड़े पद तक नहीं पहुँच सकता। वह किसी धर्म से पहचाना नहीं जाना चाहता। वह चाहता है कि खुले चुनाव हों और सबसे ज़्यादा वोट पाने वाला राष्ट्रपति बने।
  • बुज़ुर्गों का जवाब: जिन्होंने गृहयुद्ध देखा है, वे मौजूदा व्यवस्था को शांति की सबसे अच्छी गारंटी मानते हैं।
  • किताब का सवाल: आप लेबनान का क़ानून दोबारा लिखते, तो क्या करते? इसका एक तय उत्तर नहीं है। दोनों पक्ष तौलकर अपनी राय लिखिए: एक तरफ़ शांति और हर समुदाय का भरोसा, दूसरी तरफ़ खलील जैसे नागरिक का बराबरी का हक़।

9. आँकड़े और साल एक जगह★

आँकड़ा या सालकिसकापृष्ठ
59% · 40% · 1%बेल्जियम: डच (फ्लेमिश इलाका) · फ़्रेंच (वेलोनिया) · जर्मन2
80% · 20%ब्रूसेल्स: फ़्रेंच · डच2
1950 और 1960 के दशकबेल्जियम में फ़्रेंच और डच-भाषियों में तनाव2
1970–1993बेल्जियम के संविधान में चार संशोधन4
74% · 18%श्रीलंका: सिंहली · तमिल2
13%श्रीलंकाई मूल के तमिल; ये 18% तमिलों का ही हिस्सा हैं2
7%श्रीलंका में ईसाई; सिंहली और तमिल दोनों बोलते हैं3
1948श्रीलंका स्वतंत्र3
1956सिंहली एकमात्र राजभाषा बनी3
1980 के दशक तकतमिल ईलम की माँग के लिए अनेक संगठन बने4
2009श्रीलंका के गृहयुद्ध का अंत4
हरियाणाबेल्जियम: क्षेत्रफल में छोटा, आबादी करीब आधी · श्रीलंका: आबादी बराबर2

10. ये ग़लतियाँ मत कीजिएध्यान

ग़लतीसही बातपृष्ठ
“बेल्जियम में डच बहुमत ने फ़्रेंच-भाषियों पर प्रभुत्व जमाया”ऐसा हो सकता था, हुआ नहीं; बेल्जियम ने साझेदारी चुनी। इसीलिए प्रश्न 7 का (क) ग़लत है3, 4
“श्रीलंका में तानाशाही थी”सिंहली प्रभुता के कदम लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार ने उठाए; दोनों देश लोकतांत्रिक हैं3, 5
13% श्रीलंकाई तमिलों को 18% से अलग गिनना13% उन्हीं 18% तमिलों के भीतर है2
“चार संशोधन” को चार अलग संविधान समझनासंविधान एक ही है; उसमें 1970 से 1993 के बीच चार बार संशोधन हुआ4
हरियाणा से दोनों देशों की एक जैसी तुलनाबेल्जियम: क्षेत्रफल में छोटा और आबादी करीब आधी; श्रीलंका: सिर्फ़ आबादी की तुलना, बराबर2
“बेल्जियम की क्षेत्रीय सरकारें केंद्र के अधीन हैं”क्षेत्रीय सरकारें केंद्र के अधीन नहीं हैं4
ब्रूसेल्स का लेन-देन उलट देनाकेंद्र में बराबरी डच-भाषियों ने मानी; ब्रूसेल्स में बराबरी फ़्रेंच-भाषियों ने4
क्षैतिज और उर्ध्वाधर उलट देनाक्षैतिज = अंग, एक ही स्तर पर; उर्ध्वाधर = ऊपर-नीचे के स्तर8, 9
युक्तिपरक और नैतिक तर्क मिला देनाफ़ायदे और नतीजे की बात युक्तिपरक; लोकतंत्र की आत्मा और वैध सरकार की बात नैतिक। प्रश्न 5 में “वास्तविक लोकतंत्र” युक्तिपरक कारण नहीं है6, 11
मर्चटेम (प्रश्न 4) में “हाँ” लिखनाफ़्रेंच पर रोक एक भाषा थोपना है; यह बेल्जियम की व्यवस्था की भावना के उलट है4, 10

11. अपने को जाँचिए: किताब के प्रश्न और उत्तर★★

हर उत्तर पहले ख़ुद सोचिए, फिर खोलकर मिलाइए।

प्रश्न 1. आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या हैं? हर एक का एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: पहला, क्षैतिज वितरण: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका एक ही स्तर पर रहकर सत्ता बाँटते हैं; जैसे भारत में कार्यपालिका संसद के अधीन है और न्यायपालिका कार्यपालिका व क़ानूनों पर अंकुश रखती है। दूसरा, उर्ध्वाधर वितरण: अलग-अलग स्तर की सरकारों में; जैसे भारत में केंद्र, राज्य, नगरपालिका और पंचायत। तीसरा, सामाजिक समूहों में; जैसे बेल्जियम की सामुदायिक सरकार या भारत के आरक्षित चुनाव क्षेत्र। चौथा, दलों, दबाव-समूहों और आंदोलनों में; जैसे गठबंधन सरकार, या व्यापारियों और किसानों जैसे हित-समूहों का सरकारी समितियों में भाग लेना।

प्रश्न 2. भारत से सत्ता की साझेदारी का एक उदाहरण देते हुए इसका एक युक्तिपरक और एक नैतिक कारण बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: उदाहरण: भारत में आरक्षित चुनाव क्षेत्र, जिनसे सामाजिक रूप से कमज़ोर समुदायों को विधायिका में हिस्सा मिलता है, ताकि वे ख़ुद को शासन से अलग न समझें। युक्तिपरक कारण: इससे सामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा घटता है और राजनीतिक व्यवस्था स्थिर रहती है। नैतिक कारण: सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है; शासन के अधीन रहने वाले सभी समूहों को सत्ता में हिस्सा मिलना ही सरकार को वैध बनाता है।

प्रश्न 3. थम्मन: साझेदारी सिर्फ़ उन समाजों में ज़रूरी है जहाँ क्षेत्रीय, भाषायी और जातीय बँटवारा हो। मथाई: यह सिर्फ़ क्षेत्रीय बँटवारे वाले बड़े देशों के लिए है। औसेफ: हर समाज को इसकी ज़रूरत है, छोटा हो या उसमें बँटवारा न हो। आप किससे सहमत हैं और क्यों? (करीब 50 शब्द)

उत्तर देखिए

उत्तर: मैं औसेफ से सहमत हूँ। सत्ता की साझेदारी सिर्फ़ टकराव रोकने का उपाय नहीं है; नैतिक तर्क के अनुसार यह लोकतंत्र की आत्मा है। जो भी लोग किसी शासन के अधीन रहते हैं, उन्हें सत्ता में हिस्सा मिलना चाहिए, समाज छोटा हो या बड़ा, उसमें बँटवारा हो या न हो। थम्मन और मथाई इसे केवल बँटे हुए या बड़े देशों तक सीमित कर देते हैं।

प्रश्न 4. ब्रूसेल्स के पास के शहर मर्चटेम के मेयर ने स्कूलों में फ़्रेंच बोलने पर रोक को सही बताया। क्या यह फ़ैसला बेल्जियम की सत्ता की साझेदारी की मूल भावना से मेल खाता है? (करीब 50 शब्द)

उत्तर देखिए

उत्तर: नहीं। बेल्जियम की व्यवस्था की मूल भावना यह है कि किसी भी भाषा-समूह को बेगानेपन का अहसास न हो और कोई समुदाय एकतरफ़ा फ़ैसला न थोपे। शिक्षा और भाषा के फ़ैसले भी हर भाषा-समुदाय की अपनी सामुदायिक सरकार को दिए गए हैं। स्कूलों में फ़्रेंच पर रोक फ़्रेंच-भाषियों पर एक भाषा थोपना है, जो इस भावना के उलट है।

प्रश्न 5. किताब के पृष्ठ 11 पर दिया यह उद्धरण पढ़िए और इसमें से सत्ता की साझेदारी का एक युक्तिपरक कारण चुनिए: “महात्मा गांधी के सपनों को साकार करने और अपने संविधान निर्माताओं की उम्मीदों को पूरा करने के लिए हमें पंचायतों को अधिकार देने की ज़रूरत है। पंचायती राज ही वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना करता है। यह सत्ता उन लोगों के हाथों में सौंपता है जिनके हाथों में इसे होना चाहिए। भ्रष्टाचार कम करने और प्रशासनिक कुशलता को बढ़ाने का एक उपाय पंचायतों को अधिकार देना भी है। जब विकास की योजनाओं को बनाने और लागू करने में लोगों की भागीदारी होगी तो इन योजनाओं पर उनका नियंत्रण बढ़ेगा। इससे भ्रष्ट बिचौलियों को खतम किया जा सकेगा। इस प्रकार पंचायती राज लोकतंत्र की नींव को मज़बूत करेगा।”

उत्तर देखिए

उत्तर: युक्तिपरक कारण: पंचायतों को अधिकार देने से भ्रष्टाचार कम होगा और प्रशासनिक कुशलता बढ़ेगी। दूसरा युक्तिपरक कारण भी चलेगा: योजनाएँ बनाने और लागू करने में लोगों की भागीदारी से उन पर लोगों का नियंत्रण बढ़ेगा और भ्रष्ट बिचौलिये ख़त्म होंगे। ये नतीजों और फ़ायदों की बातें हैं, इसलिए युक्तिपरक हैं। “वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना” और “महात्मा गांधी के सपनों को साकार करने” वाली बातें नैतिक हैं।

प्रश्न 6. सत्ता की साझेदारी के बारे में नीचे के तर्कों में से पक्ष वाले तर्क चुनिए। सत्ता की साझेदारी:

  • (क) विभिन्न समुदायों के बीच टकराव कम करती है।
  • (ख) पक्षपात का अंदेशा कम करती है।
  • (ग) निर्णय लेने की प्रक्रिया अटका देती है।
  • (घ) विविधताओं को अपने में समेट लेती है।
  • (ङ) अस्थिरता और आपसी फूट बढ़ाती है। (किताब में यह भी “घ” छपा है)
  • (च) सत्ता में लोगों की भागीदारी बढ़ाती है।
  • (छ) देश की एकता को कमज़ोर करती है।

विकल्प: (सा) क, ख, घ, च · (रे) क, ग, ङ, च · (गा) क, ख, घ, छ · (मा) ख, ग, घ, छ

उत्तर देखिए

उत्तर: (सा) क, ख, घ, च। टकराव घटाना, पक्षपात का अंदेशा घटाना, विविधताओं को समेटना और भागीदारी बढ़ाना पक्ष के तर्क हैं; ग, ङ और छ विपक्ष के। किताब में “घ” दो बार छपा है; दूसरा “घ” असल में “ङ” है, जैसा विकल्प (रे) से पता चलता है।

प्रश्न 7. इनमें से कौन-से बयान सही हैं?

  • (क) बेल्जियम में डच-भाषी बहुसंख्यकों ने फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यकों पर प्रभुत्व जमाने की कोशिश की।
  • (ख) श्रीलंका में सरकार की नीतियों ने सिंहली-भाषी बहुसंख्यकों का प्रभुत्व बनाए रखने की कोशिश की।
  • (ग) अपनी संस्कृति और भाषा बचाने और शिक्षा व रोज़गार में समान अवसर के लिए श्रीलंका के तमिलों ने सत्ता को संघीय ढाँचे पर बाँटने की माँग की।
  • (घ) बेल्जियम में एकात्मक सरकार की जगह संघीय व्यवस्था लाकर देश को भाषा के आधार पर टूटने से बचा लिया गया।

विकल्प: (सा) क, ख, ग और घ · (रे) क, ख और घ · (गा) ग और घ · (मा) ख, ग और घ

उत्तर देखिए

उत्तर: (मा) ख, ग और घ। (क) ग़लत है: बेल्जियम में डच-भाषी बहुमत अपनी इच्छा थोप सकता था, पर ऐसा हुआ नहीं; नेताओं ने साझेदारी का रास्ता चुना।

प्रश्न 8. सूची I और सूची II का मेल कराइए।

सूची I: सत्ता के बँटवारे का रूपसूची II: शासन का रूप
1. सरकार के अलग-अलग अंगों के बीच(क) सामुदायिक सरकार
2. अलग-अलग स्तर की सरकारों के बीच(ख) अधिकारों का वितरण
3. अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच(ग) गठबंधन सरकार
4. दो या ज़्यादा दलों के बीच(घ) संघीय सरकार

विकल्प, 1-2-3-4 के क्रम में: (सा) घ-क-ख-ग · (रे) ख-ग-घ-क · (गा) ख-घ-क-ग · (मा) ग-घ-क-ख

उत्तर देखिए

उत्तर: (गा) ख-घ-क-ग। अंगों के बीच = अधिकारों का वितरण; स्तरों के बीच = संघीय सरकार; सामाजिक समूहों के बीच = सामुदायिक सरकार; दलों के बीच = गठबंधन सरकार।

प्रश्न 9. इन दो बयानों में कौन सही है?

  • (अ) सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए लाभकर है।
  • (ब) इससे सामाजिक समूहों में टकराव का अंदेशा घटता है।

विकल्प: (क) अ सही, ब ग़लत · (ख) दोनों सही · (ग) दोनों ग़लत · (घ) अ ग़लत, ब सही

उत्तर देखिए

उत्तर: (ख) दोनों सही। अध्याय दोनों बातें कहता है: सत्ता का बँटवारा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए ठीक है, और युक्तिपरक तर्क के अनुसार इससे टकराव का अंदेशा घटता है।

किताब की गतिविधियाँ

गतिविधि (पृष्ठ 10). हर घटना सत्ता की साझेदारी के किस रूप में आती है, और कौन किसके साथ सत्ता बाँट रहा है?

  • बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को मुंबई के सात अनाथालयों के बच्चों की देखभाल तुरंत सुधारने का आदेश दिया।
  • कनाडा के ओंटेरियो प्रांत की सरकार ने मूलवासी समुदाय के साथ ज़मीन के दावे निपटाने पर सहमति दी।
  • रूस के दो प्रभावशाली दलों ने एक मज़बूत गठबंधन बनाने के लिए अपने संगठनों के विलय का फ़ैसला किया।
  • नाइजीरिया के प्रांतों के वित्तमंत्रियों ने माँग की कि संघीय सरकार अपनी आमदनी के स्रोत बताए।
उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा, किताब उत्तर नहीं देती): पहली घटना क्षैतिज है: न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच। दूसरी सामाजिक समूहों वाली है: प्रांतीय सरकार और मूलवासी समुदाय के बीच। तीसरी दलों वाली है: दो दलों के बीच। चौथी उर्ध्वाधर है: प्रांतीय सरकारों और संघीय सरकार के बीच।

गतिविधि (पृष्ठ 6). एनिते बेल्जियम के उत्तरी इलाके के एक डच-माध्यम स्कूल में पढ़ती है; उसके कई फ़्रेंच-भाषी साथी पढ़ाई फ़्रेंच में चाहते हैं। सेलवी कोलंबो के एक स्कूल में पढ़ती है; उसके तमिल-भाषी दोस्तों के माता-पिता पढ़ाई का माध्यम तमिल चाहते हैं। किस देश में यह इच्छा पूरी होने की संभावना ज़्यादा है, और क्यों?

उत्तर देखिए

उत्तर (हमारा, किताब उत्तर नहीं देती): बेल्जियम में। वहाँ फ़्रेंच-भाषी लोग, चाहे कहीं भी रहें, अपनी सामुदायिक सरकार चुनते हैं, और शिक्षा व भाषा के फ़ैसले उसी के पास हैं। श्रीलंका में सरकार ने सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाया था और तमिलों की स्वायत्तता की माँगें लगातार ठुकराई गईं, इसलिए वहाँ संभावना कम है।

झटपट दोहराइए

1. श्रीलंका में 1956 के क़ानून ने क्या किया?

उत्तर देखिए

उत्तर: तमिल को दरकिनार करके सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया (पृष्ठ 3)।

2. ब्रूसेल्स की सरकार में बराबर प्रतिनिधित्व पर फ़्रेंच-भाषी क्यों माने?

उत्तर देखिए

उत्तर: क्योंकि डच-भाषियों ने केंद्रीय सरकार में बराबरी का प्रतिनिधित्व माना था (पृष्ठ 4)।

3. बेल्जियम की सामुदायिक सरकार को कौन चुनता है, और यह किन मामलों में फ़ैसले लेती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: डच, फ़्रेंच और जर्मन बोलने वाले लोग, चाहे कहीं भी रहें, अपनी-अपनी भाषा की सामुदायिक सरकार चुनते हैं; यह संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मामलों में फ़ैसले लेती है (पृष्ठ 5)।

4. “बहुसंख्यकों का अत्याचार सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही परेशानी पैदा नहीं करता अकसर यह बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है।” यह किस तर्क का हिस्सा है?

उत्तर देखिए

उत्तर: युक्तिपरक तर्क का (पृष्ठ 6), क्योंकि यह नतीजे की बात है। किताब यह बात आम तौर पर कहती है, किसी देश का नाम लेकर नहीं। उत्तर में उदाहरण देना हो, तो श्रीलंका का गृहयुद्ध लिख सकते हैं, जिसमें दोनों पक्षों के हज़ारों लोग मारे गए (पृष्ठ 4); यह जोड़ हमारा है।

5. तमिलों की आबादी श्रीलंका के किन इलाकों में ज़्यादा है, और तमिल ईलम की माँग कहाँ के लिए थी?

उत्तर देखिए

उत्तर: तमिल मुख्य रूप से उत्तर और पूर्वी प्रांतों में रहते हैं (पृष्ठ 3); 1980 के दशक तक उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल ईलम की माँग उठी (पृष्ठ 4)।