डीप डाइव · नागरिक शास्त्र
सरकार के प्रकार और भारत में शासन के तीन स्तर
देश कौन चलाता है, और उसे यह ताक़त मिलती कहाँ से है? पहले दुनिया की सरकारों के तरीक़े देखिए, फिर भारत की अपनी व्यवस्था — संसद, सरकार और अदालत — और आख़िर में केंद्र, राज्य और गाँव-शहर के तीन स्तर। हर पड़ाव के अंत में कुछ छोटे सवाल हैं।

इसके बाद आप बता पाएँगे
- लोकतंत्र, राजतंत्र और तानाशाही में असली फ़र्क़ क्या है
- संसदीय, अध्यक्षात्मक और अर्ध-अध्यक्षात्मक व्यवस्था एक-दूसरे से कैसे अलग हैं
- भारत में क़ानून कौन बनाता है, कौन लागू करता है और कौन उसकी व्याख्या करता है
- कोई काम केंद्र का है, राज्य का, या आपकी पंचायत-नगरपालिका का
आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।
1सरकार के प्रकार
सरकार करती क्या है?
- क़ानून बनाती है और उन्हें लागू करवाती है
- देश में व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा बनाए रखती है
- सड़क, स्कूल, अस्पताल, पानी और बिजली जैसी सुविधाएँ देती है
- सीमाओं की रक्षा करती है और दूसरे देशों से रिश्ते रखती है
हर देश में कोई न कोई सरकार होती है। पहला फ़र्क़ इस बात का है कि सबसे ऊँची ताक़त किसके हाथ में है, उसे वह कैसे मिली, और क्या लोग उसे बदल सकते हैं। तीनों मुख्य रूप बारी-बारी से खोलिए।
लोकतंत्र
जनता वोट देकर अपने शासक चुनती है। चुने हुए लोग एक तय समय के बाद फिर जनता के पास वोट माँगने जाते हैं।
- प्रत्यक्ष लोकतंत्र
- लोग ख़ुद वोट देकर क़ानून और बड़े फ़ैसले तय करते हैं। स्विट्ज़रलैंड में लोग जनमत-संग्रह से क़ानूनों पर सीधे वोट देते हैं। हमारे गाँवों की ग्राम सभा भी ऐसी ही बैठक है।
- प्रतिनिधि लोकतंत्र
- लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, जैसे सांसद और विधायक, और वे जनता की ओर से क़ानून बनाते हैं। भारत और अमेरिका ऐसे ही चलते हैं।
राजतंत्र
राजा या रानी का पद जन्म से मिलता है, एक पीढ़ी से अगली को। राजतंत्र दो तरह का होता है।
- पूर्ण राजतंत्र
- राजा ही क़ानून बनाता है और आख़िरी फ़ैसला भी वही करता है। लोग उससे हिसाब नहीं माँग सकते। जैसे सऊदी अरब और ब्रुनेई।
- संवैधानिक राजतंत्र
- राजा या रानी नाम के मुखिया हैं; देश चुनी हुई संसद और प्रधानमंत्री चलाते हैं। जैसे ब्रिटेन, जापान और भूटान (2008 के संविधान से)।
तानाशाही
एक व्यक्ति या एक गुट ताक़त के बल पर सत्ता ले लेता है, या निष्पक्ष चुनाव के बिना उस पर टिका रहता है। विरोध करने वालों को दबाया जाता है और अख़बार आज़ाद नहीं रहते।
- सैन्य शासन
- सेना चुनी हुई सरकार को हटाकर ख़ुद राज करने लगती है। म्यांमार में 2021 में यही हुआ।
- एकदलीय शासन
- एक ही दल का पूरा क़ब्ज़ा रहता है और कोई असली विपक्ष चुनाव नहीं लड़ सकता। उत्तर कोरिया इसका उदाहरण है; इतिहास में हिटलर का जर्मनी (1933–1945) भी ऐसा ही था।
तीनों एक नज़र में
| लोकतंत्र | राजतंत्र | तानाशाही | |
|---|---|---|---|
| ताक़त कैसे मिलती है | चुनाव से | जन्म से, वंश में | ताक़त के बल पर, अक्सर सेना के सहारे |
| किसके प्रति जवाबदेह | जनता के प्रति; संसद और अदालतें भी सरकार पर नज़र रखती हैं | पूर्ण राजतंत्र में किसी के प्रति नहीं; संवैधानिक में सरकार संसद के प्रति | किसी के प्रति नहीं |
| क्या लोग शासक बदल सकते हैं? | हाँ, अगले चुनाव में | राजा को नहीं; संवैधानिक राजतंत्र में सरकार को चुनाव से बदल सकते हैं | नहीं, निष्पक्ष चुनाव होते ही नहीं |
| लोगों के अधिकार | बोलने, लिखने, संगठन बनाने और विरोध करने की आज़ादी | पूर्ण राजतंत्र में कम; संवैधानिक में उतने, जितने संविधान दे | बहुत कम |
| उदाहरण | भारत (लोकसभा का चुनाव हर 5 साल में), अमेरिका (राष्ट्रपति का चुनाव हर 4 साल में) | पूर्ण: सऊदी अरब, ब्रुनेई · संवैधानिक: ब्रिटेन, जापान, भूटान | उत्तर कोरिया; म्यांमार, जहाँ 2021 में सेना ने चुनी हुई सरकार को हटा दिया; हिटलर का जर्मनी (1933–1945) |
तालिका को बग़ल में खिसकाकर पूरा देखिए।
ये नाम भी सुनने को मिलते हैं
- धर्मतंत्र
- धर्म के नाम पर, धर्मगुरुओं के हाथ में शासन। जैसे वेटिकन सिटी, जहाँ पूरी ताक़त पोप के पास है, और ईरान, जहाँ सबसे ऊपर एक धार्मिक नेता है।
- अल्पतंत्र
- कुछ गिने-चुने अमीर या ताक़तवर लोग राज करते हैं, और अक्सर अपने फ़ायदे के लिए।
- गणतंत्र
- जहाँ देश का मुखिया चुना जाता है, जन्म से नहीं आता। भारत और अमेरिका गणतंत्र हैं। ब्रिटेन लोकतंत्र है पर गणतंत्र नहीं, क्योंकि वहाँ देश का मुखिया राजा है।
सरकार और संसद का रिश्ता: तीन व्यवस्थाएँ
लोकतंत्र में भी सरकार चलाने के अलग-अलग ढाँचे हैं। फ़र्क़ इस बात का है कि सरकार का मुखिया कौन है, और वह संसद के प्रति जवाबदेह है या नहीं।
संसदीय
सरकार (प्रधानमंत्री और मंत्री) संसद में से बनती है और लोकसभा के प्रति जवाबदेह रहती है। लोकसभा का भरोसा खोते ही सरकार को जाना पड़ता है।
कितने मुखिया: दो — नाम के राष्ट्रपति या राजा, असली ताक़त प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास
उदाहरण: भारत, ब्रिटेन
अध्यक्षात्मक
राष्ट्रपति का चुनाव संसद से अलग होता है और वह तय कार्यकाल तक पद पर रहता है। संसद उसे भरोसा खोने भर से नहीं हटा सकती, सिर्फ़ महाभियोग से।
कितने मुखिया: एक — राष्ट्रपति ही देश का भी मुखिया है और सरकार का भी
उदाहरण: अमेरिका (कार्यकाल 4 साल, ज़्यादा से ज़्यादा दो बार), ब्राज़ील
अर्ध-अध्यक्षात्मक
जनता राष्ट्रपति को सीधे चुनती है और उसके पास असली ताक़त होती है। साथ में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद भी होते हैं, जो संसद के प्रति जवाबदेह हैं।
कितने मुखिया: दो — राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, और दोनों के पास असली ताक़त
उदाहरण: फ़्रांस (राष्ट्रपति 5 साल के लिए), श्रीलंका
ताक़त बँटी है या एक जगह?
संघीय
संविधान ही ताक़त को केंद्र और राज्यों में बाँट देता है। कोई भी दूसरे का हिस्सा अपनी मर्ज़ी से नहीं छीन सकता।
उदाहरण: भारत, अमेरिका, कनाडा
एकात्मक
असली ताक़त एक केंद्रीय सरकार के पास रहती है। स्थानीय इकाइयों को उतना ही मिलता है, जितना केंद्र दे।
उदाहरण: ब्रिटेन, फ़्रांस, जापान
भारत का संविधान देश को “राज्यों का संघ” कहता है (अनुच्छेद 1)। ताक़त बँटी हुई है, पर केंद्र ज़्यादा मज़बूत है, इसीलिए भारत को “मज़बूत केंद्र वाला संघ” कहा जाता है।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1भूटान में राजा का पद कैसे मिलता है?
भूटान संवैधानिक राजतंत्र है: राजा का पद वंश में चलता है, और 2008 के संविधान के बाद देश चलाने वाली सरकार चुनाव से बनती है।
2भारत में सरकार का असली मुखिया कौन है?
भारत में संसदीय व्यवस्था है। राष्ट्रपति नाम के मुखिया हैं और प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं (अनुच्छेद 74)।
3किस व्यवस्था में संविधान ताक़त को केंद्र और राज्यों में बाँटता है?
यही संघीय व्यवस्था की पहचान है। भारत और अमेरिका दोनों संघीय हैं।
4फ़्रांस में सरकार किस व्यवस्था से चलती है?
फ़्रांस में जनता राष्ट्रपति को सीधे चुनती है और उसके पास असली ताक़त है; साथ में प्रधानमंत्री और मंत्री संसद के प्रति जवाबदेह हैं। यही अर्ध-अध्यक्षात्मक व्यवस्था है।
5ब्रिटेन लोकतंत्र है, फिर भी गणतंत्र क्यों नहीं कहलाता?
गणतंत्र में देश का मुखिया चुना जाता है। ब्रिटेन में सरकार चुनाव से बनती है, पर देश का मुखिया राजा है, इसलिए वह संवैधानिक राजतंत्र है।
2भारत की व्यवस्था
हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। उसकी प्रस्तावना एक वाक्य में बता देती है कि भारत कैसा देश होगा।
“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए …”
पाँचों शब्दों पर टैप करके उनका मतलब देखिए।
भारत: संविधान से चलने वाला संघीय लोकतंत्र
- अंगों में बँटवारा (क्षैतिज)
- ताक़त विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में बँटी है, ताकि कोई एक अंग सब कुछ अपने हाथ में न ले सके।
- स्तरों में बँटवारा (ऊर्ध्वाधर)
- ताक़त केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकार में भी बँटी है। इसे संघवाद कहते हैं।
- क़ानून का राज
- संविधान देश का सबसे ऊँचा क़ानून है। सरकार भी उसी के हिसाब से चलती है, और क़ानून के सामने सब बराबर हैं (अनुच्छेद 14)।
तीन अंग, तीन काम
सरकार का काम तीन हिस्सों में बँटा है, ताकि कोई एक हिस्सा मनमानी न कर सके। हर अंग खोलिए।
विधायिका: क़ानून बनाती है
- देश के स्तर पर
- संसद: राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा (अनुच्छेद 79)
- काम
- क़ानून बनाना, बजट पास करना, सवाल पूछकर सरकार से हिसाब लेना
- बजट
- 2017 से रेल का बजट अलग नहीं आता; पूरे देश का एक ही केंद्रीय बजट पेश होता है
कार्यपालिका: क़ानून लागू करती है
- कौन
- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद, और उनके नीचे काम करने वाले अफ़सर-कर्मचारी
- राष्ट्रपति
- 5 साल के लिए चुने जाते हैं। उन्हें संसद के दोनों सदनों और राज्यों की विधानसभाओं (दिल्ली और पुदुच्चेरी समेत) के चुने हुए सदस्य मिलकर चुनते हैं (अनुच्छेद 54, 55)। तीनों सेनाओं के सर्वोच्च सेनापति भी वही हैं
- प्रधानमंत्री
- राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं (अनुच्छेद 75); लोकसभा में बहुमत वाले दल या गठबंधन का नेता ही प्रधानमंत्री बनता है
- ताक़त किसकी
- संविधान कार्यपालिका की ताक़त राष्ट्रपति को देता है (अनुच्छेद 53), पर राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर चलते हैं (अनुच्छेद 74)
- कौन बदलता है
- मंत्री (राजनीतिक कार्यपालिका) चुनाव के साथ बदल सकते हैं; आईएएस, आईपीएस जैसे अफ़सर (स्थायी कार्यपालिका) बने रहते हैं
न्यायपालिका: क़ानून की व्याख्या करती है और झगड़े सुलझाती है
- सीढ़ी
- सबसे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय, फिर राज्यों के उच्च न्यायालय (देश में 25), फिर ज़िला अदालतें
- मौलिक अधिकार
- भाग III (अनुच्छेद 12–35) का कोई अधिकार छिने, तो कोई भी सीधे सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) या उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) जा सकता है
- आख़िरी बात
- सर्वोच्च न्यायालय जो क़ानून तय करे, वह देश की हर अदालत पर लागू होता है (अनुच्छेद 141)। अदालतें सरकार से आज़ाद हैं
- केंद्र-राज्य के झगड़े
- केंद्र और किसी राज्य के बीच, या दो राज्यों के बीच किसी क़ानूनी हक़ को लेकर झगड़ा हो, तो उसे सीधे सर्वोच्च न्यायालय सुनता है (अनुच्छेद 131)
संसद के दो सदन
| लोकसभा | राज्यसभा | |
|---|---|---|
| किसका सदन | देश की जनता का; इसे निचला सदन कहते हैं | राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का; इसे ऊपरी सदन कहते हैं |
| सदस्य | 543, सब चुने हुए | 245: 233 चुने हुए, 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत |
| कैसे चुने जाते हैं | मतदाता सीधे वोट देते हैं | राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्य (विधायक) चुनते हैं |
| कार्यकाल | 5 साल (पहले भी भंग हो सकती है) | कभी भंग नहीं होती; सदस्य 6 साल के लिए, हर 2 साल में एक-तिहाई सदस्य बदलते हैं |
| सदस्य बनने की कम से कम उम्र (अनुच्छेद 84) | 25 साल | 30 साल |
| अध्यक्षता | अध्यक्ष (स्पीकर) | उपराष्ट्रपति, सभापति के रूप में |
| धन विधेयक | सिर्फ़ यहीं पेश हो सकता है | ज़्यादा से ज़्यादा 14 दिन रोक सकती है |
| राजस्थान से | 25 सदस्य | 10 सदस्य |
तालिका को बग़ल में खिसकाकर पूरा देखिए।
पहले लोकसभा में दो एंग्लो-इंडियन सदस्य मनोनीत होते थे; 104वें संशोधन (2019) से यह व्यवस्था ख़त्म हो गई। राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य साहित्य, विज्ञान, कला और समाज-सेवा के क्षेत्रों से आते हैं।
एक-दूसरे पर लगाम
- संसद सवाल पूछकर और बहस करके सरकार से हिसाब लेती है। लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पास कर दे, तो सरकार को जाना पड़ता है।
- अदालत संसद या विधानसभा के ऐसे किसी भी क़ानून को रद्द कर सकती है जो संविधान के ख़िलाफ़ हो। इसे न्यायिक पुनरावलोकन कहते हैं।
- संसद महाभियोग से राष्ट्रपति को हटा सकती है, और दोनों सदनों के विशेष बहुमत से सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को भी।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1राज्यसभा में कितने सदस्य राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं?
राज्यसभा के 245 सदस्यों में 12 मनोनीत होते हैं; बाक़ी 233 चुनकर आते हैं।
2मौलिक अधिकार छिन जाए, तो कोई किस अनुच्छेद के तहत सीधे सर्वोच्च न्यायालय जा सकता है?
अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। यह ख़ुद भी एक मौलिक अधिकार है।
3कौन-सा अंग क़ानून लागू करता है?
विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका उसे लागू करती है और न्यायपालिका उसकी व्याख्या करती है।
4भारत के राष्ट्रपति को कौन चुनता है?
राष्ट्रपति को एक निर्वाचक मंडल चुनता है: संसद के दोनों सदनों और राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्य। कार्यकाल 5 साल का है।
3शासन के तीन स्तर
भारत इतना बड़ा है कि सारे काम दिल्ली से नहीं हो सकते। इसलिए शासन तीन स्तरों पर चलता है: पूरे देश के लिए केंद्र, हर राज्य की अपनी सरकार, और गाँव-शहर की स्थानीय सरकार। हर स्तर खोलिए।
केंद्र
पूरे देश की सरकार: 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश
- क़ानून कौन बनाता है
- संसद (लोकसभा और राज्यसभा)
- मुखिया
- नाम के: राष्ट्रपति · असल में: प्रधानमंत्री
- अदालत
- सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली
- मुख्य काम
- रक्षा, दूसरे देशों से संबंध, रेल, मुद्रा, परमाणु ऊर्जा
- केंद्रशासित प्रदेश
- इन्हें केंद्र चलाता है: राष्ट्रपति, अपने नियुक्त उपराज्यपाल या प्रशासक के ज़रिए (अनुच्छेद 239)। दिल्ली, पुदुच्चेरी और जम्मू-कश्मीर की अपनी चुनी हुई विधानसभा भी है
राज्य
हर राज्य की अपनी सरकार
- क़ानून कौन बनाता है
- विधानसभा। छह राज्यों में दूसरा सदन, विधान परिषद, भी है: उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
- मुखिया
- नाम के: राज्यपाल, जिन्हें राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं (अनुच्छेद 155) · असल में: मुख्यमंत्री, विधानसभा में बहुमत वाले दल का नेता, जिसे राज्यपाल नियुक्त करते हैं (अनुच्छेद 164)
- अदालत
- उच्च न्यायालय
- मुख्य काम
- पुलिस, जेल, खेती, ज़मीन, जन स्वास्थ्य
स्थानीय
आपके गाँव, क़स्बे या शहर की सरकार
- कौन चलाता है
- गाँव में पंचायत; क़स्बे और शहर में नगरपालिका या नगर निगम
- मुखिया
- गाँव में सरपंच; शहर में अध्यक्ष, सभापति या महापौर
- संविधान में कब से
- 73वाँ और 74वाँ संशोधन (1992), जो 1993 में लागू हुए
- कार्यकाल और चुनाव
- 5 साल (अनुच्छेद 243ङ, 243प); चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है (अनुच्छेद 243ट, 243यक)
- मुख्य काम
- पीने का पानी, सफ़ाई, गलियाँ और नालियाँ, सड़क की बत्तियाँ, जन्म-मृत्यु का पंजीकरण। पूरी सूची संविधान में है: ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के 29 विषय, बारहवीं में नगरपालिकाओं के 18
गाँव की सरकार: पंचायती राज
- ग्राम पंचायतगाँव, या कुछ गाँव मिलाकरमुखिया: सरपंच, और हर वार्ड से एक पंचअफ़सर: ग्राम विकास अधिकारी
- पंचायत समितिब्लॉकमुखिया: प्रधानअफ़सर: विकास अधिकारी (बीडीओ)
- ज़िला परिषदज़िलामुखिया: ज़िला प्रमुखअफ़सर: मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)
तीन स्तर की पंचायतें अनुच्छेद 243ख से बनती हैं; जिस राज्य की आबादी 20 लाख से ज़्यादा नहीं, वहाँ बीच का स्तर ज़रूरी नहीं। ये पद-नाम राजस्थान के हैं; दूसरे राज्यों में नाम अलग हो सकते हैं।
ग्राम सभा: पंचायत के इलाक़े में जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में है, वे सब ग्राम सभा के सदस्य हैं (अनुच्छेद 243(ख))। ग्राम सभा के अधिकार राज्य का क़ानून तय करता है।
शहर की सरकार
- नगर पंचायतऐसा इलाक़ा, जो गाँव से शहर बन रहा है
- नगर परिषद / नगरपालिकाछोटा शहरी इलाक़ा
- नगर निगमबड़ा शहरी इलाक़ा; मुखिया महापौर
कौन-सा शहर किस श्रेणी में आएगा, इसके लिए संविधान आबादी की कोई गिनती तय नहीं करता; यह राज्य अपनी अधिसूचना से तय करता है (अनुच्छेद 243थ)। शहर के हर वार्ड से एक पार्षद चुना जाता है।
राजस्थान में नगर पालिका के मुखिया अध्यक्ष, नगर परिषद के सभापति और नगर निगम के महापौर कहलाते हैं। रोज़ का काम एक अफ़सर चलाता है: नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी, नगर परिषद और नगर निगम में आयुक्त। नगर निगम का आयुक्त आमतौर पर आईएएस या आरएएस (राज्य प्रशासनिक सेवा) का अफ़सर होता है।
पैसा कहाँ से आता है
- मकान और संपत्ति पर कर
- पानी जैसी सेवाओं का शुल्क, बाज़ार और मेले की फ़ीस
- राज्य और केंद्र सरकार से मिलने वाला अनुदान
- राज्य वित्त आयोग हर पाँच साल में बताता है कि राज्य के पैसे में से कितना हिस्सा पंचायतों और नगरपालिकाओं को मिले (अनुच्छेद 243झ, 243म)
तीनों स्तरों पर
महिलाओं के लिए सीटें
- पंचायतों और नगरपालिकाओं में कम से कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। यह संविधान की शर्त है (अनुच्छेद 243घ, 243न)।
- राजस्थान ने पंचायतों में यह हिस्सा बढ़ाकर आधा (50%) कर दिया है।
- लोकसभा और विधानसभाओं में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं को देने का क़ानून, नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वाँ संशोधन), 2023 में बना। पर ये सीटें अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (सीटों के नए बँटवारे) के बाद ही मिलेंगी, इसलिए 2024 के लोकसभा चुनाव में यह लागू नहीं था।
राजस्थान में
- विधानसभा में 200 सीटें, और एक ही सदन (विधान परिषद नहीं)
- लोकसभा में 25 और राज्यसभा में 10 सदस्य
- उच्च न्यायालय जोधपुर में, और उसकी एक पीठ जयपुर में
- देश में पंचायती राज की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को नागौर से हुई; उद्घाटन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1ग्राम सभा के सदस्य कौन होते हैं?
पंचायत इलाक़े की मतदाता सूची में जिसका भी नाम है, वह ग्राम सभा का सदस्य है।
2नगर पंचायत किस इलाक़े के लिए बनती है?
संविधान के मुताबिक़ नगर पंचायत ऐसे इलाक़े के लिए है जो गाँव से शहर बनने की राह पर है।
3राजस्थान की पंचायतों में महिलाओं के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
संविधान कम से कम एक-तिहाई कहता है; राजस्थान ने पंचायतों में इसे आधा कर दिया है।
4किसका काम? तीन सूचियाँ
केंद्र और राज्य में कौन-सा विषय किसका है, यह संविधान की सातवीं अनुसूची में तीन सूचियों में लिखा है (अनुच्छेद 246)।
संघ सूची
इन पर क़ानून सिर्फ़ संसद बनाती है
राज्य सूची
इन पर क़ानून राज्य की विधानसभा बनाती है
समवर्ती सूची
दोनों बना सकते हैं; टकराव हो तो आमतौर पर संसद का क़ानून चलता है (अनुच्छेद 254)
बाक़ी विषय: जो विषय तीनों में से किसी सूची में नहीं है, जैसे कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर, उस पर क़ानून सिर्फ़ संसद बना सकती है (अनुच्छेद 248)।
शिक्षा और वन पहले राज्य सूची में थे; 1976 में 42वें संशोधन ने इन्हें समवर्ती सूची में डाल दिया।
5आख़िरी जाँच: आठ सवाल
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1तानाशाही की पहचान क्या है?
तानाशाह ताक़त के बल पर टिका रहता है; निष्पक्ष चुनाव नहीं होते और विरोध करने वालों को दबाया जाता है।
2संसदीय व्यवस्था में सरकार किसके प्रति जवाबदेह होती है?
मंत्रिपरिषद मिलकर लोकसभा के प्रति ज़िम्मेदार है (अनुच्छेद 75)। लोकसभा का भरोसा खोने पर सरकार को जाना पड़ता है।
3लोकसभा के कितने सदस्य जनता चुनती है?
लोकसभा के सभी 543 सदस्य सीधे चुने जाते हैं। पहले 2 एंग्लो-इंडियन सदस्य मनोनीत होकर कुल 545 होते थे; अब यह व्यवस्था नहीं है।
4शिक्षा किस सूची में है?
शिक्षा समवर्ती सूची में है, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों इस पर क़ानून बना सकते हैं। 1976 तक यह राज्य सूची में थी।
5जो विषय किसी सूची में नहीं है, उस पर क़ानून कौन बनाता है?
बाक़ी बचे विषयों पर क़ानून बनाने का अधिकार संसद के पास है (अनुच्छेद 248)।
6पंचायती राज की तीन सीढ़ियाँ, नीचे से ऊपर, किस क्रम में हैं?
गाँव में ग्राम पंचायत, ब्लॉक में पंचायत समिति और ज़िले में ज़िला परिषद।
7भारत में करेंसी नोट कौन जारी करता है?
बैंक नोट जारी करने का अधिकार सिर्फ़ रिज़र्व बैंक के पास है। सिक्के और ₹1 का नोट केंद्र सरकार जारी करती है।
8लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें कब से मिलेंगी?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में बना, पर इसकी सीटें अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही मिलेंगी।
पाँचों पड़ाव पूरे! अब ख़बर में “केंद्र”, “राज्य” या “पंचायत” पढ़िए, तो आप जानते हैं कि किसकी बात हो रही है।
संविधान के ज़रूरी अनुच्छेद
इस पन्ने की बातें संविधान के किन अनुच्छेदों से आती हैं, एक नज़र में।
| अनुच्छेद | क्या कहता है |
|---|---|
| 1 | भारत राज्यों का संघ है |
| 14 | क़ानून के सामने सब बराबर हैं |
| 40 | राज्य ग्राम पंचायतें बनाएगा (नीति निदेशक तत्व) |
| 52, 54, 56 | भारत का एक राष्ट्रपति होगा; उसे निर्वाचक मंडल चुनता है; कार्यकाल 5 साल |
| 61 | राष्ट्रपति पर महाभियोग |
| 74, 75 | मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को सलाह देती है; प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं |
| 79, 80, 81 | संसद में राष्ट्रपति और दो सदन हैं; राज्यसभा और लोकसभा की बनावट |
| 84 | सांसद बनने की कम से कम उम्र: लोकसभा के लिए 25, राज्यसभा के लिए 30 साल |
| 109, 110 | धन विधेयक किसे कहते हैं; राज्यसभा उसे 14 दिन से ज़्यादा नहीं रोक सकती |
| 124 | सर्वोच्च न्यायालय; जज को हटाने का तरीक़ा 124(4) में |
| 131 | केंद्र और राज्यों के बीच क़ानूनी हक़ के झगड़े सीधे सर्वोच्च न्यायालय में |
| 141 | सर्वोच्च न्यायालय का बताया क़ानून देश की हर अदालत पर लागू होता है |
| 155, 164 | राज्यपाल को राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं, मुख्यमंत्री को राज्यपाल |
| 169 | विधानसभा के प्रस्ताव पर संसद किसी राज्य में विधान परिषद बना या ख़त्म कर सकती है |
| 214 | हर राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय |
| 239, 239क, 239कक | केंद्रशासित प्रदेश राष्ट्रपति अपने प्रशासक के ज़रिए चलाते हैं, जब तक संसद क़ानून से कुछ और तय न करे; पुदुच्चेरी और दिल्ली की विधानसभा |
| 243ख | गाँव, बीच के और ज़िले के स्तर पर पंचायतें; 20 लाख तक की आबादी वाले राज्य में बीच का स्तर ज़रूरी नहीं |
| 243घ, 243न | पंचायतों और नगरपालिकाओं में कम से कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए |
| 243ट, 243यक | पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है |
| 243थ | नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम |
| 246, 248 | संघ, राज्य और समवर्ती सूची (सातवीं अनुसूची); जो विषय किसी सूची में नहीं, उस पर संसद क़ानून बनाती है |
| 280 | हर 5 साल में वित्त आयोग बनता है |
| 326 | 18 साल का हर नागरिक वोट दे सकता है |
| 368 | संसद संविधान में संशोधन कर सकती है |