Chapter 5लोकतंत्र के परिणाम

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परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़िए।


“लोकतंत्र शासन का एक स्वरूप भर है। यह कुछ चीज़ों को हासिल करने की स्थितियाँ तो बना सकता है पर नागरिकों को ही उन स्थितियों का लाभ लेकर अपने लक्ष्यों को हासिल करना होता है।” “लोकतंत्र हमारी सभी सामाजिक बुराइयों को मिटा देने वाली जादू की छड़ी भी नहीं है।” ★★“शिकायतों का बने रहना भी लोकतंत्र की सफलता की गवाही देता है… यह लोगों के प्रजा से नागरिक बनने की गवाही भी देता है।”

2. पाँच उम्मीदें(मैडम लिंगदोह की कक्षा — कक्षा 9)★

सूत्र — “समानता · गरिमा · फ़ैसले · टकराव · गलती-सुधार”

  1. नागरिकों में समानता को बढ़ावा · 2. व्यक्ति की गरिमा · 3. फ़ैसलों में बेहतरी · 4. टकरावों को टालने-सँभालने का तरीका · 5. गलतियों को सुधारने की गुंजाइश

दुविधा — “सैद्धांतिक रूप में तो लोकतंत्र को अच्छा माना जाता है पर व्यवहार में इसे इतना अच्छा नहीं माना जाता।” — इसी से गहरी जाँच ज़रूरी। आज “दुनिया के सौ देश” लोकतांत्रिक व्यवस्था का दावा करते हैं — औपचारिक संविधान, चुनाव, दल, अधिकारों की गारंटी — पर स्थितियाँ अलग → नतीजे अलग।

3. पूरा अध्याय = एक तुलन-पत्र (पाँच खाते)★★

खाताकिताब का फ़ैसला
1. शासन का स्वरूपमिला-जुला — पर वैधता में निर्विवाद विजेता
2. आर्थिक संवृद्धि! थोड़ा पीछे (3.95 बनाम 4.42) — पर गरीब देशों में अंतर लगभग समाप्त
3. असमानता-गरीबी! “ज़्यादा सफल नहीं हो पाई हैं”
4. सामाजिक सामंजस्य★“इस काम के लिए लोकतंत्र सबसे अच्छा है” — दो शर्तों के साथ
5. गरिमा-आज़ादी★★“किसी भी अन्य शासन प्रणाली से काफ़ी आगे”

4. खाता 1 — उत्तरदायी, ज़िम्मेवार और वैध शासन★★

“धीमे फ़ैसले” वाले आरोप का जवाब

गैर-लोकतांत्रिक सरकारें तेज़ हैं (न विधायिका, न बहुमत-अल्पमत का ख़याल, न मोल-तोल) — पर तेज़ फ़ैसला “ऐसा फ़ैसला भी हो सकता है जिसे लोग स्वीकार न करें।” ★“लोकतांत्रिक सरकार ने पूरी प्रक्रिया को माना है इसलिए… लोग उसके फ़ैसलों को मानेंगे और वे ज़्यादा प्रभावी होंगे। लोकतंत्र में फ़ैसला लेने में जो वक्त लगता है वह बेकार नहीं जाता।”

पारदर्शिता★

नागरिक जाँच सकता है — “फ़ैसले लेने में नियमों का पालन हुआ है या नहीं”; उसे “न सिर्फ़ जानने का अधिकार… बल्कि इसके साधन भी उपलब्ध” हैं। “यह चीज़ अक्सर गैर-लोकतांत्रिक सरकारों में नहीं होती।”

तीन पैमाने और record

पैमानाrecord
नियमित-निष्पक्ष चुनाव✓ — पर “सबको अवसर मिले” ऐसे चुनाव में नहीं
खुली सार्वजनिक चर्चा“ज़्यादा अच्छा नहीं”
सूचना का अधिकार! “खराब”

! भ्रष्टाचार — record “प्रभावशाली नहीं”; पर ★संतुलन — “गैर-लोकतांत्रिक सरकारें कम भ्रष्ट… हैं — यह कहने का कोई आधार नहीं।”

वैधता — निर्णायक तर्क★★

“एक मामले में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था निश्चित रूप से अन्य शासनों से बेहतर है: यह वैध शासन व्यवस्था है। यह सुस्त हो सकती है… लेकिन लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था लोगों की अपनी शासन व्यवस्था है।” प्रमाण (दक्षिण एशिया, SDSA-2007) — “लोकतंत्र बेहतर”: श्रीलंका 71 · भारत 70 · बांग्लादेश 69 · नेपाल 62 · ! पाकिस्तान 37 (“पाकिस्तान को छोड़कर हर जगह लोकतंत्र को तानाशाही के ऊपर वरीयता”) ★“अपने लिए समर्थन पैदा करने की लोकतंत्र की क्षमता भी लोकतंत्र का एक परिणाम ही है।”

5. खाता 2 — आर्थिक संवृद्धि(चार्ट 1, 1950–2000)★

शासनविकास दर
सभी लोकतांत्रिक शासन3.95
सभी तानाशाहियाँ4.42
तानाशाही वाले गरीब देश4.34
लोकतंत्र वाले गरीब देश4.28

★★जाल से बचिए — ऊपर की दो पंक्तियों से “तानाशाही बेहतर” मत लिखिए! किताब का वाक्य — “जब हम सिर्फ़ गरीब मुल्कों के रिकॉर्ड की तुलना करते हैं तो अंतर लगभग समाप्त हो जाता है।” आर्थिक विकास “कई कारकों” पर निर्भर — जनसंख्या का आकार · वैश्विक स्थिति · अन्य देशों से सहयोग · आर्थिक प्राथमिकताएँ। ★निष्कर्ष — “अकेले इसी कारण से लोकतंत्र को खारिज नहीं किया जा सकता… लोकतांत्रिक व्यवस्था का चुनाव ही बेहतर है क्योंकि इसके अन्य अनेक सकारात्मक फ़ायदे हैं।”

6. खाता 3 — असमानता और गरीबी(चार्ट 2)ध्यान

लोकतंत्र = राजनीतिक समानता — “हर व्यक्ति का वज़न बराबर” — पर “हम आर्थिक असमानताओं को भी बढ़ता हुआ पाते हैं।”

देशऊपर के 20%नीचे के 20%
दक्षिण अफ्रीका64.82.9
ब्राज़ील63.02.6
अमरीका50.04.0
★डेनमार्क / हंगरी34.5 / 34.49.6 / 10.0

★फ़ैसला — “वास्तविक जीवन में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ आर्थिक असमानताओं को कम करने में ज़्यादा सफल नहीं हो पाई हैं।” विरोधाभास — मतदाताओं में गरीबों की संख्या बड़ी, “कोई भी पार्टी उनके मतों से हाथ धोना नहीं चाहेगी” — फिर भी सरकारें गरीबी पर उतनी तत्पर नहीं। बांग्लादेश — आधी से ज़्यादा आबादी गरीबी में।

7. खाता 4 — सामाजिक विविधताओं में सामंजस्य★★

“कोई भी समाज टकरावों को पूरी तरह और स्थायी रूप से नहीं खत्म कर सकता, पर हम इन अंतरों का आदर करना सीख सकते हैं… इस काम के लिए लोकतंत्र सबसे अच्छा है।” — गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ “आँखें फेर लेती हैं या दबाने की कोशिश करती हैं।” (उदाहरण — बेल्जियम, अध्याय 1)

दो शर्तें(श्रीलंका की सीख)★★

  1. “बहुमत को सदा ही अल्पमत का ध्यान रखना होता है… तभी सरकार जन-सामान्य की इच्छा का प्रतिनिधित्व कर पाती है।” — बहुमत-अल्पमत की राय “कोई स्थायी चीज़ नहीं।”
  2. ★★“बहुमत के शासन का अर्थ धर्म, नस्ल अथवा भाषायी आधार के बहुसंख्यक समूह का शासन नहीं होता… लोकतंत्र तभी तक लोकतंत्र रहता है जब तक प्रत्येक नागरिक को किसी न किसी अवसर पर बहुमत का हिस्सा बनने का मौका मिलता है।” — ! जन्म के आधार पर रोकने से शासन “समावेशी नहीं रह जाता।”

8. खाता 5 — नागरिकों की गरिमा और आज़ादी★★

“व्यक्ति की गरिमा और आज़ादी के मामले में लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी भी अन्य शासन प्रणाली से काफ़ी आगे है… गरिमा और आज़ादी की चाह ही लोकतंत्र का आधार है।”

  • स्त्रियों की गरिमा — “महिलाओं के लंबे संघर्ष के बाद अब जाकर यह माना जाने लगा है कि महिलाओं के साथ गरिमा और समानता का व्यवहार लोकतंत्र की ज़रूरी शर्त है”; सिद्धांत में स्वीकार होने से संघर्ष “वैधानिक और नैतिक रूप से… आसान”; अलोकतांत्रिक व्यवस्था में यह संभव न था।
  • जातिगत समानता — भेदभाव के उदाहरण अब भी मिलते हैं “पर इनके पक्ष में कानूनी या नैतिक बल नहीं होता।”

9. निष्कर्ष — जाँच जो कभी ख़त्म नहीं होती★★

“लोकतंत्र की एक खासियत है कि इसकी जाँच-परख और परीक्षा कभी खत्म नहीं होती… लोग और लाभों की माँग करने लगते हैं… शिकायतों का बने रहना भी लोकतंत्र की सफलता की गवाही देता है। इससे पता चलता है कि लोग सचेत हो गए हैं और सत्ता में बैठे लोगों के कामकाज का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने लगे हैं… साथ ही यह लोगों के प्रजा से नागरिक बनने की गवाही भी देता है।” “वोट का असर पड़ता है” — नेपाल 75 · भारत 67 · बांग्लादेश 66 · श्रीलंका 65 · पाकिस्तान 50 · द.एशिया 65 ★★एक वाक्य में — “प्रजा चुप रहती है — नागरिक सवाल पूछता है।”

10. नन्नू की कहानी(अभ्यास 8 — यह ज़रूर तैयार रखिए)★

कौन — पूर्वी दिल्ली की झुग्गी बस्ती (वेलकम मजदूर कॉलोनी) का दिहाड़ी मजदूर। क्या हुआ — राशन कार्ड गुम; जनवरी 2006 में डुप्लीकेट की अर्ज़ी; तीन महीने दफ़्तर के चक्कर — कोई सुनवाई नहीं। ★फिर — सूचना के अधिकार से माँगा: अर्ज़ी की दैनिक प्रगति, काम करने वाले अधिकारियों के नाम, और काम न करने पर उनके खिलाफ़ कार्रवाई का ब्यौरा। नतीजा — हफ़्ते भर के अंदर इंस्पेक्टर घर आया — “राशन कार्ड तैयार है”; अगले दिन सबसे बड़े अधिकारी ने गर्मजोशी से स्वागत किया, चाय पिलाई और आग्रह किया — “अब आवेदन वापस ले लें।” ★★सबक़ — पारदर्शिता के साधन काम करते हैं; जवाबदेही का डर व्यवस्था हिला देता है; और एक दिहाड़ी मजदूर भी अधिकार से व्यवस्था झुका सकता है — यही “प्रजा से नागरिक बनना” है।

11. अनिवार्य आँकड़े — एक जगह

आँकड़ाकिसका
3.95 / 4.42लोकतंत्र / तानाशाही की विकास दर (1950–2000)
★4.28 / 4.34गरीब देशों में — “अंतर लगभग समाप्त”
64.8 / 2.9द.अफ्रीका — ऊपर/नीचे के 20% का हिस्सा
50.0 / 4.0अमरीका
34.5 / 9.6डेनमार्क (सबसे बेहतर)
71 · 70 · 69 · 62 · 37“लोकतंत्र बेहतर” — श्रीलंका · भारत · बांग्लादेश · नेपाल · पाकिस्तान
75 · 67 · 65“वोट का असर” — नेपाल · भारत · द.एशिया
सौ देशलोकतांत्रिक होने का दावा
जनवरी 2006नन्नू की अर्ज़ी

12. परीक्षा में जहाँ बच्चे मार खाते हैंध्यान

ग़लतीसही
चार्ट 1 से “तानाशाही बेहतर” लिख देना★गरीब देशों में “अंतर लगभग समाप्त” — और लोकतंत्र के “अन्य अनेक सकारात्मक फ़ायदे”
“लोकतंत्र ने असमानता समाप्त कर दी”ग़लत — “ज़्यादा सफल नहीं हो पाई हैं” (प्रश्न 5 और 7 का जाल)
“बहुसंख्यकों का शासन लोकतंत्र का गुण”ग़लत — यही प्रश्न 6 का उत्तर है: वह लोकतंत्र के अनुरूप नहीं
“वैध” = “क़ानूनी”यहाँ अर्थ — “लोगों की अपनी शासन व्यवस्था” (जनता की नज़र में जायज़)
कमी लिखकर संतुलन-वाक्य छोड़ देनाहर कमी के साथ किताब का “पर…” अनिवार्य
“शिकायतें = लोकतंत्र विफल”उल्टा — “शिकायतों का बने रहना भी लोकतंत्र की सफलता की गवाही”
धीमे फ़ैसले = कमज़ोरी“फ़ैसला लेने में जो वक्त लगता है वह बेकार नहीं जाता”

अंतिम पंक्ति — यही मत भूलिए

★★“लोकतंत्र शासन का एक स्वरूप भर है — स्थितियाँ वह बनाता है, लक्ष्य नागरिकों को हासिल करने होते हैं।” और पूरी किताब की विदाई का वाक्य — “शिकायत करना ही सबूत है कि हम प्रजा नहीं, नागरिक हैं।”