लोकतांत्रिक राजनीति · अध्याय 1
शुरुआत
दो छोटे देश, दोनों लोकतंत्र, दोनों में भाषा के झगड़े। एक ने सत्ता सबके साथ बाँटी, दूसरे में बहुमत ने अपनी चलाई। दोनों के नतीजे देखिए, फिर खुद तय कीजिए कि सत्ता बाँटने से देश कमज़ोर होता है या मज़बूत।

“मेरे दिमाग में सीधा सा समीकरण यह है कि सत्ता का बँटवारा = सत्ता के टुकड़े करना = देश को कमज़ोर करना। हम इस बात से शुरुआत क्यों कर रहे हैं?”
इस अध्याय के चार बड़े सवाल
- बेल्जियम और श्रीलंका ने भाषा के झगड़े अलग-अलग ढंग से कैसे निपटाए?
- बहुसंख्यकवाद क्या है, और श्रीलंका में उसका क्या नतीजा निकला?
- सत्ता की साझेदारी क्यों ज़रूरी है? किताब कौन-से दो तर्क देती है?
- आधुनिक लोकतंत्र में सत्ता किन-किन के बीच बँटती है?
सीधे शब्दों में
सत्ता की साझेदारी का मतलब है कि शासन की ताक़त किसी एक व्यक्ति, एक अंग या एक समुदाय के हाथ में न रहे, बल्कि कई के बीच बँटी रहे।
यह पन्ना पाठ्यपुस्तक से बना है। किताब की बात के साथ उसका पृष्ठ लिखा है; हमारे अपने जवाब पर "हमारा जवाब" लिखा है। Progress is kept only in this browser. Nothing is sent anywhere.
1दो देश, दो समाज
किताब दो कहानियों से शुरू करती है (पृ. 2–3): यूरोप का छोटा-सा देश बेल्जियम और द्वीपीय देश श्रीलंका। दोनों में कई भाषाएँ बोली जाती हैं।
हरियाणा से तुलना (पृ. 2)
बेल्जियम: यूरोप का छोटा-सा देश, क्षेत्रफल में हरियाणा से भी छोटा। आबादी एक करोड़ से थोड़ी अधिक, यानी हरियाणा से करीब आधी। सीमाएँ फ़्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और लक्ज़मबर्ग से लगती हैं।
श्रीलंका: तमिलनाडु के दक्षिणी तट से कुछ किलोमीटर दूर एक द्वीपीय देश। आबादी करीब दो करोड़, यानी हरियाणा के बराबर। (यहाँ किताब क्षेत्रफल की तुलना नहीं करती।)
बेल्जियम में तनाव किस बात का था? (पृ. 2)
अल्पसंख्यक फ़्रेंच-भाषी लोग तुलनात्मक रूप से ज़्यादा समृद्ध और ताकतवर रहे। डच-भाषियों को आर्थिक विकास और शिक्षा का लाभ बहुत बाद में मिला, और उन्हें इस स्थिति से नाराज़गी थी। 1950 और 1960 के दशक में दोनों समूहों के बीच तनाव बढ़ा। टकराव का सबसे तीखा रूप ब्रूसेल्स में दिखा।
शब्द: एथनीक या जातीय (पृ. 2)
ऐसा सामाजिक विभाजन जिसमें हर समूह अपनी-अपनी संस्कृति को अलग मानता है, यानी साझी संस्कृति पर आधारित सामाजिक विभाजन। ज़रूरी नहीं कि ऐसे समूह के सदस्य किसी एक धर्म के मानने वाले हों या उनकी राष्ट्रीयता एक हो।
अब ज़रा सोचिए (पृ. 3)
बेल्जियम में डच-भाषी अपनी बड़ी संख्या के बल पर फ़्रेंच और जर्मन बोलने वालों पर अपनी इच्छाएँ थोप सकते थे। तब लड़ाई और बढ़ती, देश बँट सकता था और ब्रूसेल्स पर दोनों पक्ष अपना-अपना दावा ठोकते। श्रीलंका में सिंहलियों का बहुमत और भी बड़ा था। आगे देखिए, असल में क्या हुआ।
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1बेल्जियम की कुल आबादी का कितना हिस्सा डच बोलता है?
पृ. 2: 59% फ़्लेमिश इलाके में रहते हैं और डच बोलते हैं। 40% फ़्रेंच बोलते हैं।
2राजधानी ब्रूसेल्स में बहुमत किनका है?
पृ. 2: ब्रूसेल्स के 80% लोग फ़्रेंच बोलते हैं, 20% डच।
3श्रीलंका में तमिल मुख्य रूप से कहाँ बसे हैं?
पृ. 3: तमिल मुख्य रूप से उत्तर और पूर्वी प्रांतों में आबाद हैं।
2श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद
सन् 1948 में श्रीलंका स्वतंत्र राष्ट्र बना। सिंहली नेताओं ने अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा, और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार ने इसके लिए कई कदम उठाए (पृ. 3)।
शब्द: बहुसंख्यकवाद (पृ. 3)
यह मान्यता कि अगर कोई समुदाय बहुसंख्यक है तो वह अपने मनचाहे ढंग से देश का शासन कर सकता है, और इसके लिए अल्पसंख्यक समुदाय की ज़रूरत या इच्छाओं की अवहेलना कर सकता है।
तमिलों को क्या लगा? (पृ. 3)
- बौद्ध सिंहलियों के नेतृत्व वाली सारी राजनीतिक पार्टियाँ उनकी भाषा और संस्कृति को लेकर असंवेदनशील हैं।
- संविधान और सरकार की नीतियाँ उन्हें समान राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर रही हैं।
- नौकरियों और फ़ायदे के दूसरे कामों में उनके साथ भेदभाव हो रहा है, उनके हितों की अनदेखी हो रही है।
नतीजा: तमिल और सिंहली समुदायों के संबंध बिगड़ते चले गए।
तमिलों की तीन माँगें (पृ. 4)
- तमिल को भी राजभाषा बनाया जाए
- क्षेत्रीय स्वायत्तता मिले
- शिक्षा और रोज़गार में समान अवसर मिलें
तमिल आबादी वाले इलाके की स्वायत्तता की माँग लगातार नकारी गई। 1980 के दशक तक उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल ईलम (सरकार) बनाने की माँग को लेकर कई राजनीतिक संगठन बन गए।
शब्द: गृहयुद्ध (पृ. 4)
किसी मुल्क में सरकार विरोधी समूहों की हिंसक लड़ाई ऐसा रूप ले ले कि वह युद्ध सा लगे, तो उसे गृहयुद्ध कहते हैं।
पृ. 4: दोनों पक्षों के हज़ारों लोग मारे गए। अनेक परिवार अपने मुल्क से भागकर शरणार्थी बने। इससे कई गुना ज़्यादा लोगों की रोज़ी-रोटी चौपट हो गई। 2009 में इस गृहयुद्ध का अंत हुआ।
हाशिये का सवाल (पृ. 4)
“बहुसंख्यक समुदाय के शासन में क्या हर्ज है? अगर श्रीलंका में सिंहलियों का राज नहीं होगा तो किसका राज होगा?”
किताब का जवाब देखिए
पृ. 5: “अगर बहुसंख्यक समुदाय दूसरों पर प्रभुत्व कायम करने और सत्ता में उनको हिस्सेदार न बनाने का फैसला करता है तो इससे देश की एकता ही संकट में पड़ सकती है।” श्रीलंका में ठीक यही हुआ।
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11956 के कानून से क्या हुआ?
पृ. 3: तमिल को दरकिनार करके सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया।
2श्रीलंका कब स्वतंत्र राष्ट्र बना?
पृ. 3: सन् 1948 में।
3किताब के अनुसार स्वतंत्र तमिल ईलम की माँग किस दशक तक ज़ोर पकड़ चुकी थी?
पृ. 4: 1980 के दशक तक उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में तमिल ईलम की माँग पर कई संगठन बन गए।
3बेल्जियम की समझदारी
बेल्जियम के नेताओं ने श्रीलंका से अलग रास्ता चुना। उन्होंने क्षेत्रीय अंतरों और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार किया। 1970 और 1993 के बीच संविधान में चार संशोधन सिर्फ़ इसलिए किए कि किसी को बेगानेपन का अहसास न हो और सभी मिल-जुलकर रह सकें। किताब कहती है कि यह व्यवस्था “बहुत ही कल्पनाशील है तथा कोई और देश ऐसा नहीं कर पाया” (पृ. 4)।
एक और ताला (पृ. 4)
कुछ विशेष कानून तभी बन सकते हैं जब दोनों भाषायी समूहों के सांसदों का बहुमत उनके पक्ष में हो। इस तरह कोई एक समुदाय एकतरफ़ा फ़ैसला नहीं कर सकता।
तीसरे स्तर की सरकार (पृ. 5)
केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा बेल्जियम में सामुदायिक सरकार भी है। इसे एक ही भाषा बोलने वाले लोग चुनते हैं: डच, फ़्रेंच और जर्मन बोलने वाले समुदायों के लोग, “चाहे वे जहाँ भी रहते हों”। इस सरकार को संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर फ़ैसले लेने का अधिकार है।
नतीजा (पृ. 5)
बेल्जियम का मॉडल जटिल है, खुद बेल्जियम में रहने वालों के लिए भी। पर यह बेहद सफल रहा: गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लगा, वरना देश भाषा के आधार पर दो टुकड़ों में बँट गया होता। जब कई यूरोपीय देशों ने मिलकर यूरोपीय संघ बनाया, तो ब्रूसेल्स को उसका मुख्यालय चुना गया।
एनिते और सेलवी (पृ. 6)
एनिते बेल्जियम के उत्तरी इलाके के एक डच माध्यम के स्कूल में पढ़ती है; फ़्रेंच बोलने वाले उसके अनेक साथी चाहते हैं कि पढ़ाई फ़्रेंच में हो। सेलवी श्रीलंका के एक स्कूल में पढ़ती है; वह और उसके बहुत से दोस्त तमिल-भाषी हैं, और उनके माता-पिता पढ़ाई का माध्यम तमिल ही रखना चाहते हैं।
किताब पूछती है: “कौन-सी सरकार एनिते और सेलवी के माता-पिता की इच्छा पूरी कर सकती है? किसे सफलता मिलने की संभावना अधिक है और क्यों?”
हमारा जवाब देखिए
बेल्जियम में संभावना ज़्यादा है। वहाँ शिक्षा और भाषा के फ़ैसले भाषा-समुदाय की अपनी सामुदायिक सरकार करती है (पृ. 5)। श्रीलंका में सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाया गया और तमिल इलाके की स्वायत्तता की माँग लगातार नकारी गई (पृ. 3–4)। किताब इसका उत्तर नहीं छापती; यह हमारा जवाब है।
प्रश्न 4: मर्चटेम के मेयर (पृ. 10)
ब्रूसेल्स के पास के शहर मर्चटेम के मेयर ने स्कूलों में फ़्रेंच बोलने पर लगी रोक को सही बताया। उनका कहना था कि इससे डच न बोलने वाले लोग इस फ़्लेमिश शहर के लोगों से जुड़ सकेंगे। क्या यह फ़ैसला बेल्जियम की सत्ता की साझेदारी की मूल भावना से मेल खाता है?
हमारा जवाब देखिए
नहीं। बेल्जियम की व्यवस्था की मूल भावना यह है कि किसी को बेगानेपन का अहसास न हो और कोई एक समुदाय एकतरफ़ा फ़ैसला न कर सके (पृ. 4)। स्कूलों में फ़्रेंच बोलने पर रोक फ़्रेंच-भाषियों पर एक भाषा थोपना है, जो इस भावना के उलट है। (किताब उत्तर नहीं छापती; यह हमारा जवाब है।)
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11970 से 1993 के बीच बेल्जियम ने अपने संविधान में कितने संशोधन किए?
पृ. 4: चार संशोधन, ताकि किसी को बेगानेपन का अहसास न हो।
2सामुदायिक सरकार किन मसलों पर फ़ैसले लेती है?
पृ. 5: संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर।
3फ़्रेंच-भाषियों ने ब्रूसेल्स में समान प्रतिनिधित्व क्यों माना?
पृ. 4: यह लेन-देन था। ब्रूसेल्स में तो फ़्रेंच-भाषी बहुमत (80%) में हैं।
4साझेदारी क्यों ज़रूरी है?
दोनों देश लोकतांत्रिक हैं, फिर भी सत्ता की साझेदारी के सवाल को उन्होंने अलग-अलग ढंग से निपटाया (पृ. 5)।
पृ. 6 पर किताब सत्ता के बँटवारे के पक्ष में दो तरह के तर्क देती है।
युक्तिपरक तर्क (समझदारी का तर्क)
सत्ता बाँटने से सामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा कम होता है। सामाजिक टकराव अक्सर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता बन जाता है, इसलिए सत्ता में हिस्सा देना व्यवस्था के स्थायित्व के लिए अच्छा है। बहुसंख्यक की इच्छा सब पर थोपना तात्कालिक तौर पर लाभकारी लग सकता है, पर आगे चलकर देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है। बहुसंख्यकों का अत्याचार अक्सर बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है।
ज़ोर: लाभकर परिणाम
नैतिक तर्क
“सत्ता की साझेदारी दरअसल लोकतंत्र की आत्मा है।” लोकतंत्र का मतलब ही है कि जो लोग शासन-व्यवस्था के अंतर्गत हैं, उनके बीच सत्ता बाँटी जाए। वैध सरकार वही है जिसमें अपनी भागीदारी के माध्यम से सभी समूह शासन-व्यवस्था से जुड़ते हैं।
ज़ोर: अंतर्भूत महत्व
शब्द: युक्तिपरक (पृ. 6)
हानि-लाभ का सावधानीपूर्वक हिसाब लगाकर लिया गया फ़ैसला। पूरी तरह से नैतिकता पर आधारित फ़ैसला अक्सर इसके उलट होता है।
जर्मनी, 2005 (पृ. 6)
क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी रही हैं। 2005 के चुनावों में किसी को अपने बूते सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं मिला, इसलिए दोनों को गठबंधन सरकार बनानी पड़ी। नीतियों पर अलग-अलग पक्ष लेने के बावजूद दोनों ने साथ मिलकर सरकार चलाई।
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1युक्तिपरक तर्क किस पर ज़ोर देता है?
पृ. 6: युक्तिपरक तर्क लाभकर परिणामों पर ज़ोर देता है; नैतिक तर्क अंतर्भूत महत्व पर।
2जर्मनी में 2005 में गठबंधन सरकार क्यों बनी?
पृ. 6: किसी को अपने बूते बहुमत नहीं मिला। नीतियों पर दोनों अलग-अलग पक्ष लेती हैं।
3लेबनान के समझौते के अनुसार प्रधानमंत्री कौन हो सकता है?
पृ. 7: सिर्फ़ सुन्नी मुसलमान प्रधानमंत्री हो सकता है।
5साझेदारी के रूप
पुरानी धारणा (पृ. 8)
लंबे समय तक माना जाता रहा कि सरकार की सारी शक्तियाँ एक व्यक्ति या किसी खास जगह के व्यक्ति-समूह के हाथ में रहनी चाहिए, क्योंकि शक्ति बिखरी तो तुरंत फ़ैसले लेना और उन्हें लागू करना संभव नहीं होगा। सत्ता की साझेदारी का विचार इसी धारणा के विरुद्ध आया। लोकतंत्र का बुनियादी सिद्धांत है कि जनता ही सारी राजनीतिक शक्ति का स्रोत है।
पूरी व्यवस्था एक जगह: सरकार के प्रकार और भारत में शासन के तीन स्तर
किताब यहाँ सत्ता के दो बँटवारे दिखाती है: अंगों के बीच और स्तरों के बीच। भारत में ये असल में कैसे चलते हैं, यह हमारे डीप डाइव में खोलकर देखिए: संसद, सरकार और अदालत में कौन क्या करता है, वे एक-दूसरे पर अंकुश कैसे रखते हैं, और केंद्र, राज्य, पंचायत व नगरपालिका में कौन-सा काम किसका है। हर पड़ाव के अंत में छोटे सवाल भी हैं।
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1नगरपालिका और पंचायतें सत्ता के किस बँटवारे की इकाइयाँ हैं?
पृ. 9: ऊँचे और निचले स्तर की सरकारों के बीच बँटवारा उर्ध्वाधर वितरण है।
2‘नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था’ किस बँटवारे से जुड़ी है?
पृ. 8: क्षैतिज वितरण में हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है।
3आरक्षित चुनाव क्षेत्र किस रूप का उदाहरण हैं?
पृ. 9: कमज़ोर समुदायों और महिलाओं को विधायिका और प्रशासन में हिस्सेदारी।
6सार और अभ्यास
एक नज़र में
| बेल्जियम | श्रीलंका | |
|---|---|---|
| बहुसंख्यक | डच-भाषी, 59% | सिंहली, 74% |
| रास्ता | सत्ता की साझेदारी | बहुसंख्यकवाद |
| बड़ा कदम | 1970–1993: संविधान में चार संशोधन | 1956: सिंहली एकमात्र राजभाषा |
| नतीजा | देश एक रहा; गृहयुद्ध की आशंका पर विराम | गृहयुद्ध; 2009 में अंत |
नौ शब्द: कार्ड पलटिए
आख़िरी जाँच: किताब के प्रश्न✓ Stop complete
1प्रश्न 6 (पृ. 11). सत्ता की साझेदारी: (क) समुदायों के बीच टकराव कम करती है; (ख) पक्षपात का अंदेशा कम करती है; (ग) निर्णय की प्रक्रिया अटका देती है; (घ) विविधताओं को अपने में समेट लेती है; (ङ) अस्थिरता और आपसी फूट बढ़ाती है; (च) सत्ता में लोगों की भागीदारी बढ़ाती है; (छ) देश की एकता कमज़ोर करती है। इनमें से पक्ष वाले तर्क कौन-से हैं?
क, ख, घ, च पक्ष में हैं; ग, ङ, छ विरोध में। (किताब में पाँचवाँ कथन भूल से “(घ)” छपा है; कोड में उसे ङ लिखा है।)
2प्रश्न 3 (पृ. 10). थम्मन: साझेदारी सिर्फ़ वहीं ज़रूरी है जहाँ क्षेत्रीय, भाषायी या जातीय विभाजन हो। मथाई: यह सिर्फ़ क्षेत्रीय विभाजन वाले बड़े देशों के लिए है। औसेफ: हर समाज में ज़रूरी है, भले वह छोटा हो या उसमें विभाजन न हों। आप किससे सहमत होंगे?
नैतिक तर्क (पृ. 6): सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है, इसलिए हर लोकतांत्रिक समाज में ज़रूरी है, चाहे वह छोटा हो या बिना विभाजन का।
3प्रश्न 7 (पृ. 11). (क) बेल्जियम में डच-भाषी बहुसंख्यकों ने फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यकों पर प्रभुत्व जमाने का प्रयास किया। (ख) श्रीलंका में सरकार की नीतियों ने सिंहली-भाषी बहुसंख्यकों का प्रभुत्व बनाए रखने का प्रयास किया। (ग) तमिलों ने सत्ता को संघीय ढाँचे पर बाँटने की माँग की। (घ) बेल्जियम में एकात्मक सरकार की जगह संघीय व्यवस्था लाकर देश को भाषा के आधार पर टूटने से बचाया गया। कौन-से सही हैं?
(क) गलत है: बेल्जियम ने प्रभुत्व नहीं, साझेदारी का रास्ता चुना, और पृ. 2 के अनुसार अल्पसंख्यक फ़्रेंच-भाषी ही ज़्यादा समृद्ध और ताकतवर थे। (ख) पृ. 3। (ग) और (घ) सही हैं, क्योंकि अध्याय यही बात दूसरे शब्दों में कहता है। (ग) पृ. 4: तमिलों ने अपने इलाके के लिए क्षेत्रीय स्वायत्तता माँगी। (घ) पृ. 4: बेल्जियम में केंद्र सरकार की कई शक्तियाँ क्षेत्रीय सरकारों को सौंप दी गईं, जो केंद्र के अधीन नहीं हैं; पृ. 5: इस व्यवस्था से देश भाषा के आधार पर दो टुकड़ों में बँटने से बचा। केंद्र (संघ) और क्षेत्रों की सरकारों के बीच ऐसा बँटवारा पृ. 8–9 पर समझाया गया है।
4प्रश्न 9 (पृ. 12). (अ) सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए लाभकर है। (ब) इससे सामाजिक समूहों में टकराव का अंदेशा घटता है। कौन सही है?
दोनों सही (पृ. 6)।
सारे पड़ाव पूरे! अब किताब के प्रश्न 1–5 अपने शब्दों में लिखकर देखिए।



