ये प्रश्न रटकर हल नहीं होते। इनमें आपको पहचानना, तुलना करना, पक्ष लेना और कारण देना है। पहले अपना उत्तर ख़ुद लिखिए, फिर नीचे दिया उत्तर खोलकर मिलाइए। उत्तरों में उद्धरण-चिह्नों के भीतर किताब के अपने शब्द हैं, पृष्ठ के साथ। अंक सिर्फ़ यह अंदाज़ा देते हैं कि उत्तर कितना लंबा हो।
तारों का मतलब: ★वाली पंक्ति उत्तर की मुख्य बात है; दोहराते समय पहले वही पढ़िए।
भाग क — केस-आधारित प्रश्न
केस 1 — दो देश
दो काल्पनिक देश हैं, और दोनों में दो भाषायी समुदाय रहते हैं।
देश अ: भाषा ‘क’ बोलने वाले 70 फीसदी हैं, भाषा ‘ख’ बोलने वाले 30 फीसदी। सरकार ने तय किया कि सरकारी काम, स्कूल और अदालतें सिर्फ़ भाषा ‘क’ में चलेंगी, और सरकारी नौकरियों में ‘क’ बोलने वालों को प्राथमिकता मिलेगी।
देश ब: लोग उसी अनुपात में हैं। पर वहाँ तय हुआ कि मंत्रिमंडल में दोनों समुदायों के मंत्री बराबर होंगे, राजधानी की सरकार में दोनों का बराबर प्रतिनिधित्व होगा, और भाषा और शिक्षा के फ़ैसले हर समुदाय ख़ुद करेगा।
1देश अ की नीति को किताब के किस शब्द से बताएँगे? 1 अंक
उत्तर देखिए
★बहुसंख्यकवाद। किताब के अनुसार यह वह मान्यता है कि बहुसंख्यक समुदाय “अपने मनचाहे ढंग से देश का शासन कर सकता है और इसके लिए वह अल्पसंख्यक समुदाय की ज़रूरत या इच्छाओं की अवहेलना कर सकता है” (पृष्ठ 3)। देश अ में यही हो रहा है।
2देश अ की नीति किस देश की नीति से मिलती है, और कैसे? 2 अंक
उत्तर देखिए
श्रीलंका की। वहाँ 1956 में एक क़ानून बना, जिसके तहत “तमिल को दरकिनार करके सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया।” साथ ही “विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता देने की नीति भी चली” (पृष्ठ 3)।
3देश ब की तीनों व्यवस्थाएँ बेल्जियम मॉडल की किन बातों से मिलती हैं? 3 अंक
उत्तर देखिए
मंत्रिमंडल में बराबरी: “केंद्रीय सरकार में डच और फ़्रेंच-भाषी मंत्रियों की संख्या समान रहेगी” (पृष्ठ 4)।
राजधानी में बराबर प्रतिनिधित्व: “ब्रूसेल्स में अलग सरकार है और इसमें दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व है” (पृष्ठ 4)।
★भाषा और शिक्षा के फ़ैसले: यह सामुदायिक सरकार है। “इस सरकार को संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर फैसले लेने का अधिकार है” (पृष्ठ 5)।
4बीस साल बाद दोनों देशों का क्या हाल होने की संभावना है? कारण के साथ बताइए। 3 अंक
उत्तर देखिए
देश अ में भाषा ‘ख’ बोलने वालों की नाराज़गी और बेगानापन बढ़ेगा, जैसा श्रीलंका में हुआ। वहाँ तमिलों को लगा कि संविधान और सरकार की नीतियाँ “उन्हें समान राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर रही हैं” और “नौकरियों और फ़ायदे के अन्य कामों में उनके साथ भेदभाव हो रहा है” (पृष्ठ 3)। किताब बताती है कि सामाजिक टकराव “आगे बढ़कर अकसर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का रूप ले लेता है” (पृष्ठ 6)।
देश ब में दोनों समुदाय शासन में हिस्सेदार रहेंगे, इसलिए टकराव का अंदेशा कम रहेगा। बेल्जियम में ऐसी ही व्यवस्था से “गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लग गया है” (पृष्ठ 5)।
★देश अ के बहुसंख्यक समुदाय को भी आगे चलकर नुक़सान हो सकता है, क्योंकि “बहुसंख्यकों का अत्याचार सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही परेशानी पैदा नहीं करता अकसर यह बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है” (पृष्ठ 6)।
केस 2 — चार ख़बरें
(अ) उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार का एक आदेश रद्द कर दिया।
(ब) ज़िला परिषद ने राज्य सरकार से माँग की कि उसे पैसा ख़र्च करने के और अधिकार दिए जाएँ।
(स) दो दलों ने मिलकर सरकार बनाने का फ़ैसला किया।
(द) विधानसभा की कुछ सीटें अनुसूचित जनजातियों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।
1हर ख़बर में सत्ता की साझेदारी का कौन-सा रूप है? कारण भी दीजिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
| ख़बर | रूप | कारण |
|---|---|---|
| (अ) | क्षैतिज वितरण | न्यायपालिका और कार्यपालिका सरकार के दो अंग हैं, और दोनों एक ही स्तर (राज्य) के हैं। किताब इसे “नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था” कहती है (पृष्ठ 8)। |
| (ब) | उर्ध्वाधर वितरण | बात दो अलग-अलग स्तर की सरकारों के बीच है (पृष्ठ 9)। |
| (स) | राजनीतिक दलों के बीच | किताब के शब्दों में, कई बार “दो या अधिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं या सरकार का गठन करती हैं” (पृष्ठ 9)। |
| (द) | सामाजिक समूहों के बीच | आरक्षित सीटें विधायिका में एक सामाजिक समूह को हिस्सा देती हैं। किताब आरक्षित चुनाव क्षेत्र को इसी रूप का उदाहरण बताती है (पृष्ठ 9)। |
2(ब) और (द) में अकसर गड़बड़ हो जाती है। दोनों का फ़र्क़ बताइए। 2 अंक
उत्तर देखिए
(ब) में दोनों पक्ष सरकारें हैं, बस अलग-अलग स्तर की; इसलिए यह स्तरों वाला रूप, यानी उर्ध्वाधर वितरण है।
★(द) में सरकारों के बीच बँटवारा नहीं हो रहा; एक सामाजिक समूह को विधायिका में हिस्सा मिल रहा है, इसलिए यह सामाजिक समूहों वाला रूप है।
केस 3 — केंद्र में लंबे समय तक सरकार नहीं
मान लीजिए बेल्जियम जैसी व्यवस्था वाले किसी देश में चुनाव के बाद दलों में सहमति नहीं बनती, और डेढ़-दो साल तक केंद्र में पूरी सरकार नहीं बन पाती। फिर भी वहाँ स्कूल चलते रहते हैं और राज्यों की सरकारें अपना काम करती रहती हैं।
1ऐसा कैसे हो सकता है? 2 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि वहाँ सारी सत्ता केंद्र के हाथ में नहीं है। बेल्जियम में “केंद्र सरकार की अनेक शक्तियाँ देश के दो इलाकों की क्षेत्रीय सरकारों को सुपुर्द कर दी गई हैं यानी राज्य सरकारें केंद्रीय सरकार के अधीन नहीं हैं” (पृष्ठ 4), और संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर फ़ैसले सामुदायिक सरकार लेती है (पृष्ठ 5)। इसलिए केंद्र में सरकार न होने पर भी इन सरकारों का काम चलता रहता है।
2इससे अध्याय की शुरुआत वाला समीकरण, “सत्ता का बँटवारा = सत्ता के टुकड़े करना = देश को कमज़ोर करना” (पृष्ठ 2), सही साबित होता है या ग़लत? 3 अंक
उत्तर देखिए
ग़लत साबित होता है।
अगर सारी सत्ता एक ही केंद्र में होती, तो वहाँ सरकार न बनने पर सारा काम रुक जाता। सत्ता बँटी हुई है, इसलिए देश चलता रहता है।
★इसलिए उलटी बात ज़्यादा सही है: सत्ता बाँटने से देश कमज़ोर नहीं होता, टिकाऊ बनता है। किताब भी कहती है कि सत्ता में हिस्सा दे देना “राजनीतिक व्यवस्था के स्थायित्व के लिए अच्छा है” (पृष्ठ 6)।
3पर ऐसी व्यवस्था का एक दूसरा पहलू भी है। वह क्या है? 2 अंक
उत्तर देखिए
इतनी बँटी हुई व्यवस्था जटिल होती है, और उसमें फ़ैसले लेने में देर लग सकती है। सत्ता के बँटवारे के ख़िलाफ़ पुरानी मान्यता यही थी: “अगर फैसले लेने की शक्ति बिखर गई तो तुरंत फैसले लेना और उन्हें लागू करना संभव नहीं होगा” (पृष्ठ 8)। किताब ख़ुद मानती है कि बेल्जियम का मॉडल “जटिल है – खुद बेल्जियम में रहने वालों के लिए भी” (पृष्ठ 5)।
★पर उसी जगह किताब यह भी कहती है: “पर यह व्यवस्था बेहद सफल रही है” (पृष्ठ 5)।
केस 4 — खलील की उलझन (पृष्ठ 7)
लेबनान में गृहयुद्ध के बाद नेताओं ने तय किया कि राष्ट्रपति मैरोनाइट पंथ का कोई कैथोलिक होगा, प्रधानमंत्री सुन्नी मुसलमान, उपप्रधानमंत्री आर्थोडॉक्स ईसाई और संसद का अध्यक्ष शिया मुसलमान। खलील न माँ के धर्म को मानता है, न पिता के। वह कहता है कि सिर्फ़ चुनाव कराइए, और जिसे सबसे ज़्यादा वोट मिलें, वही राष्ट्रपति बने। उसके बड़े-बुज़ुर्ग, जिन्होंने गृहयुद्ध देखा है, कहते हैं कि मौजूदा व्यवस्था ही शांति की सबसे अच्छी गारंटी है।
1खलील के पक्ष में दो तर्क दीजिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
पद पहले से किसी समुदाय के लिए तय हो, तो योग्य व्यक्ति भी अपने समुदाय की वजह से रुक जाता है। खलील “राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा वाला लोकप्रिय व्यक्ति है”, पर मौजूदा व्यवस्था में वह सबसे बड़े पद तक पहुँच ही नहीं सकता (पृष्ठ 7)।
खलील “चाहता ही नहीं कि उसे किसी भी धर्म से जोड़कर पहचाना जाए” (पृष्ठ 7)। पर इस व्यवस्था में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपप्रधानमंत्री और संसद के अध्यक्ष के पद अलग-अलग समुदायों के लिए तय हैं; जो अपनी पहचान किसी धर्म से नहीं जोड़ता, उसके लिए ये पद बंद हैं।
2बुज़ुर्गों के पक्ष में दो तर्क दीजिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
वहाँ गृहयुद्ध हो चुका है; खलील का एक चाचा ऐसी ही लड़ाई में मारा गया था (पृष्ठ 7)। यह व्यवस्था उसी के बाद हुए समझौते से बनी है; इसे एकदम हटाने से पुराना अविश्वास लौट सकता है।
★समझौते के समय ईसाइयों और मुसलमानों की आबादी लगभग बराबर थी। बाद में मुसलमान साफ़ बहुमत में आ गए, फिर भी दोनों पक्ष उस समझौते का आदर कर रहे हैं (पृष्ठ 7)। यानी व्यवस्था व्यवहार में चल रही है।
3आपकी अपनी राय क्या है? कारण के साथ लिखिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
इस प्रश्न का कोई एक सही उत्तर नहीं है; किताब ने भी बेताल का सवाल खुला छोड़ा है (पृष्ठ 7)। एक संतुलित उत्तर ऐसा हो सकता है: लक्ष्य यह हो कि पद धर्म से नहीं, योग्यता और जनादेश से तय हों; पर वहाँ तक धीरे-धीरे पहुँचा जाए, क्योंकि मुश्किल से आई शांति को एक झटके में जोखिम में डालना समझदारी नहीं। पहले आपसी भरोसा बने, फिर व्यवस्था बदले।
★अंक इस बात के हैं कि आप दोनों पक्ष जानते हैं और अपनी राय के लिए कारण देते हैं।
भाग ख — तर्क और मूल्यांकन
1“बहुमत की सरकार जो फ़ैसला करे, वही लोकतंत्र है।” क्या आप सहमत हैं? 3 अंक
उत्तर देखिए
नहीं।
श्रीलंका में “लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार” ने ही सिंहली समुदाय की प्रभुता क़ायम करने के लिए क़दम उठाए, जैसे 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाना (पृष्ठ 3)। आगे चलकर वहाँ गृहयुद्ध हुआ (पृष्ठ 4)।
किताब की कसौटी अलग है: “वैध सरकार वही है जिसमें अपनी भागीदारी के माध्यम से सभी समूह शासन व्यवस्था से जुड़ते हैं” (पृष्ठ 6)।
★यानी चुनाव जीतने से शासन करने का हक़ मिलता है, बाक़ी सबकी अनदेखी करने का नहीं।
2“सत्ता बाँटने से फ़ैसले लेने में देर होती है, इसलिए यह नुक़सानदेह है।” इस तर्क को जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
यह तर्क आंशिक रूप से सही है। पहले यही मान्यता थी: “अगर फैसले लेने की शक्ति बिखर गई तो तुरंत फैसले लेना और उन्हें लागू करना संभव नहीं होगा” (पृष्ठ 8)। और बेल्जियम का मॉडल सचमुच जटिल है (पृष्ठ 5)।
पर यह तर्क अधूरा है:
बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा सब पर थोपना “तात्कालिक तौर पर लाभकारी लग सकता है पर आगे चलकर यह देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है” (पृष्ठ 6)। श्रीलंका में 1956 के क़ानून जैसे फ़ैसलों से शुरू हुआ टकराव आख़िर में गृहयुद्ध बना, जिसका अंत 2009 में हुआ (पृष्ठ 3–4)।
बेल्जियम की व्यवस्था “बेहद सफल रही है”; उससे “गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लग गया है” (पृष्ठ 5)।
★निष्कर्ष: थोड़ी देर से लिया गया साझा फ़ैसला, जल्दी लिए गए एकतरफ़ा फ़ैसले से बेहतर है।
3“श्रीलंका के सिंहली समुदाय को बहुसंख्यकवाद से फ़ायदा हुआ।” पक्ष और विपक्ष में दो-दो तर्क दीजिए, और निष्कर्ष लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
पक्ष में (जो फ़ायदा दिखता है)
1956 के क़ानून से सिंहली एकमात्र राजभाषा बनी (पृष्ठ 3); यानी सरकारी कामकाज सिंहली बोलने वालों की अपनी भाषा में होने लगा।
विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता देने की नीति चली, और नए संविधान में बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा देने का प्रावधान हुआ (पृष्ठ 3)।
विपक्ष में (असली नुक़सान)
नतीजा गृहयुद्ध निकला, जिसमें “दोनों पक्ष के हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं” (पृष्ठ 4); यानी सिंहली भी मारे गए।
“अनेक परिवार अपने मुल्क से भागकर शरणार्थी बन गए हैं”, और गृहयुद्ध से “मुल्क के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन में काफी परेशानियाँ पैदा हुई हैं” (पृष्ठ 4)। यह नुक़सान पूरे देश का था।
निष्कर्ष ★ फ़ायदा थोड़े समय का था, नुक़सान बहुत बड़ा। किताब यही कहती है: “बहुसंख्यकों का अत्याचार सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही परेशानी पैदा नहीं करता अकसर यह बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है” (पृष्ठ 6)।
4“बेल्जियम अच्छा देश है और श्रीलंका बुरा।” क्या यह निष्कर्ष सही है? 3 अंक
उत्तर देखिए
नहीं।
किताब कहती है: “दोनों ही देश लोकतांत्रिक हैं। फिर भी सत्ता में साझेदारी के सवाल को उन्होंने अलग-अलग ढंग से निपटाने की कोशिश की” (पृष्ठ 5)।
★फ़र्क़ देश का नहीं, चुने गए रास्ते का है। बेल्जियम के नेताओं ने “क्षेत्रीय अंतरों और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार किया” (पृष्ठ 4); श्रीलंका में “सिंहली समुदाय के नेताओं ने अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा” (पृष्ठ 3)।
भाग ग — तुलना और वर्गीकरण
1नीचे दी तालिका पूरी कीजिए। 4 अंक
| आधार | बेल्जियम | श्रीलंका |
|---|---|---|
| बहुसंख्यक समुदाय | ||
| अल्पसंख्यक समुदाय | ||
| चुना गया रास्ता | ||
| नतीजा |
उत्तर देखिए
| आधार | बेल्जियम | श्रीलंका |
|---|---|---|
| बहुसंख्यक समुदाय | डच-भाषी, 59 फीसदी (पृष्ठ 2) | सिंहली, 74 फीसदी (पृष्ठ 2) |
| अल्पसंख्यक समुदाय | फ़्रेंच-भाषी, 40 फीसदी; संख्या में कम, पर ज़्यादा समृद्ध और ताक़तवर (पृष्ठ 2) | तमिल, 18 फीसदी (पृष्ठ 2) |
| चुना गया रास्ता | सत्ता की साझेदारी: 1970 और 1993 के बीच संविधान में चार संशोधन (पृष्ठ 4) | बहुसंख्यकवाद: 1956 का भाषा-क़ानून, विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता (पृष्ठ 3) |
| नतीजा | व्यवस्था बेहद सफल रही; गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लगा (पृष्ठ 5) | गृहयुद्ध; दोनों पक्षों के हज़ारों लोग मारे गए; 2009 में अंत (पृष्ठ 4) |
2नीचे के तर्कों को युक्तिपरक या नैतिक में बाँटिए। 3 अंक
| तर्क | किस तरह का |
|---|---|
| इससे सामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा कम होता है। | |
| सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है। | |
| इससे राजनीतिक व्यवस्था को स्थायित्व मिलता है। | |
| वैध सरकार वही है, जिसमें सभी समूह शासन व्यवस्था से जुड़ते हैं। | |
| बहुसंख्यक की इच्छा सब पर थोपना आगे चलकर देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है। |
उत्तर देखिए
| तर्क | किस तरह का |
|---|---|
| इससे सामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा कम होता है। | युक्तिपरक |
| सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है। | नैतिक |
| इससे राजनीतिक व्यवस्था को स्थायित्व मिलता है। | युक्तिपरक |
| वैध सरकार वही है, जिसमें सभी समूह शासन व्यवस्था से जुड़ते हैं। | नैतिक |
| बहुसंख्यक की इच्छा सब पर थोपना आगे चलकर देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है। | युक्तिपरक |
★पहचानने का तरीक़ा किताब से: “युक्तिपरक या समझदारी का तर्क लाभकर परिणामों पर जोर देता है जबकि नैतिक तर्क सत्ता के बँटवारे के अंतर्भूत महत्व को बताता है” (पृष्ठ 6)।
3इन दो व्यवस्थाओं में से कौन-सी क्षैतिज है और कौन-सी उर्ध्वाधर? क्यों? 2 अंक
उत्तर देखिए
(अ) संसद क़ानून बनाती है, और सर्वोच्च न्यायालय उन क़ानूनों की जाँच कर सकता है → क्षैतिज वितरण, क्योंकि ये सरकार के अलग-अलग अंग हैं, जो एक ही स्तर पर हैं (पृष्ठ 8)।
(ब) केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच विषयों का बँटवारा → उर्ध्वाधर वितरण, क्योंकि ये अलग-अलग स्तर की सरकारें हैं (पृष्ठ 9)।
★याद रखने का हमारा तरीक़ा: आड़ी रेखा पर अंग, खड़ी रेखा पर स्तर।
भाग घ — प्रोजेक्ट और गतिविधि
1. अख़बार गतिविधि (किताब की अपनी, पृष्ठ 5)
पाँच-पाँच विद्यार्थियों के दो समूह बनाइए। कोई एक अख़बार पूरे हफ़्ते पढ़िए और युद्धों और लड़ाइयों की ख़बरों की कतरनें जमा कीजिए। फिर दोनों समूह मिलकर:
- सारे झगड़ों को जगह के हिसाब से बाँटिए: अपने प्रदेश के, देश के, देश से बाहर के;
- उनके कारण पता कीजिए, और गिनिए कि इनमें से कितने विवाद सत्ता के बँटवारे को लेकर हैं;
- बताइए कि किन-किन विवादों को सत्ता में साझेदारी तय करके सुलझाया जा सकता है।
2. मेरे आसपास सत्ता की साझेदारी
चारों रूपों का एक-एक उदाहरण अपने आसपास ढूँढ़िए: क्षैतिज (किसी अदालत का फ़ैसला, जो सरकार के किसी आदेश पर लागू हुआ), उर्ध्वाधर (ग्राम पंचायत या नगरपालिका), सामाजिक समूह (आरक्षित सीट), राजनीतिक दल (कोई गठबंधन सरकार)।
3. पंच या पार्षद से बातचीत
अपने गाँव या वार्ड के पंच या पार्षद से पाँच सवाल पूछिए: किन फ़ैसलों का अधिकार आपके पास है? कौन-से फ़ैसले ऊपर से आते हैं? काम के लिए पैसा कहाँ से आता है? काम में सबसे बड़ी अड़चन क्या है? एक और अधिकार मिले, तो कौन-सा चाहेंगे? इससे उर्ध्वाधर वितरण समझ में आता है, और अगले अध्याय की तैयारी भी हो जाती है।
4. कक्षा का अपना प्रयोग (किताब का सवाल, पृष्ठ 9)
किताब पूछती है: “मेरे स्कूल में हर महीने क्लास मॉनीटर बदल जाता है। क्या आप इसे ही सत्ता की भागीदारी बता रहे हैं?” कक्षा में इस पर बात कीजिए। फिर मिलकर कक्षा के कामों के बँटवारे की एक व्यवस्था बनाइए: कौन-से काम, कौन तय करेगा, कितने समय के लिए, और किसका किस पर अंकुश होगा। आख़िर में देखिए कि आपकी व्यवस्था में साझेदारी के कौन-कौन से रूप आ गए।
5. दो देशों का पोस्टर
आधे चार्ट पर बेल्जियम, आधे पर श्रीलंका: नक्शा, आँकड़े, चुना गया रास्ता, नतीजा। नीचे एक पंक्ति में सबक़ लिखिए।
अपना उत्तर ख़ुद जाँचिए
| आपके उत्तर में | तो |
|---|---|
| सही रूप या तर्क पहचाना, किताब से एक पंक्ति दी, दोनों देशों से उदाहरण जोड़ा और अपना निष्कर्ष लिखा | उत्तर पूरा है। |
| पहचान सही है और उदाहरण भी, पर कारण कमज़ोर है | “क्यों?” वाला हिस्सा फिर से लिखिए। |
| परिभाषा याद है, पर केस से जोड़ नहीं पाए, या क्षैतिज और उर्ध्वाधर उलट गए | भाग ग का प्रश्न 3 और उसका “याद रखने का तरीक़ा” फिर से देखिए। |
| ! यह मान लिया कि “बहुमत जो करे, वही लोकतंत्र है” | भाग ख का प्रश्न 1 फिर से पढ़िए; इस अध्याय में यह आम ग़लती है। |