अध्याय 9परिवार और समुदाय

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कक्षा 6 • सामाजिक विज्ञान • समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे • अध्याय 9 — परिवार और समुदाय

कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे) · पृष्ठ — 137 से 148

आपके चाचा के बेटे को आप क्या कहते हैं?

‘भाई।’ अंग्रेज़ी में उसे cousin कहते हैं — पर हिंदी में ‘कजिन’ का कोई एक शब्द ही नहीं है। यह कमी नहीं है। यही इस अध्याय की पहली बड़ी बात है।

इस अध्याय से पुस्तक का विषय-सूत्र बदल जाता है★

अब तक — हमारी सांस्कृतिक विरासत एवं ज्ञान परंपराएँ यहाँ से — शासन और लोकतंत्र

और शासन वाला खंड सबसे छोटी इकाई से शुरू होता है

  • संसद से नहीं। न्यायालय से नहीं। क़ानून से नहीं।
  • परिवार से।
  • क्योंकि पुस्तक पहले यह दिखाना चाहती है कि लोग मिलकर कैसे रहते हैं —
  • और उस साथ रहने के नियम कहाँ से आते हैं।

इस प्रश्न को याद रखिए। इसका उत्तर अध्याय के अंत में मिलेगा।

अध्याय का उद्धरण — तिरुवल्लुवर

प्रेम और धर्म पारिवारिक जीवन के पुष्प और फल हैं।

पृ. 137

इस उद्धरण को खोलिए

पृ. 137

  • पुष्प — जो सुंदर है, जो दिखता है → प्रेम
  • फल — जो काम आता है, जो टिकता है → धर्म, अर्थात कर्तव्य
  • और अध्याय ठीक यही दो चीज़ें पढ़ाता है — प्रेम, और कर्तव्य।

पृष्ठ 140 पर पुस्तक कहती है — “अपने धर्म या कर्तव्यों का पालन करना भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत रहा है।”

अध्याय के दो महत्वपूर्ण प्रश्न

पृ. 137

  • परिवार की इकाई क्यों महत्वपूर्ण है?
  • समुदाय क्या है और इसकी क्या भूमिका है?

ये दोनों प्रश्न ही अध्याय के दो हिस्सों के शीर्षक हैं।

1 | परिवार | मूलभूत और सबसे प्राचीन इकाई

पुस्तक की पहली परिभाषा

पृ. 137

  • “हम सभी अधिकांशत: एक परिवार में रहते हैं।”
  • “परिवार किसी भी समाज की मूलभूत और सबसे प्राचीन इकाई है।”

दो दावे हैं इस वाक्य में — मूलभूत (सबसे बुनियादी) और सबसे प्राचीन (सबसे पुरानी)।

दो प्रकार के परिवार

संयुक्त परिवारएकल परिवार
पुस्तक की परिभाषाअनेक पीढ़ियाँ एक साथ रहती हैंएक दंपत्ति और उनकी संतान
कौन-कौनदादा-दादी · माता-पिता · चाचा-चाची · भाई-बहन · चचेरे भाई-बहनमाता-पिता और बच्चे
पृष्ठ137138

और पुस्तक का अगला वाक्य — इसे मत छोड़िएध्यान

पृ. 138

  • “कई बार यह अकेली माता या पिता और उनके बच्चों तक सीमित होता है।”
  • यानी एकल-अभिभावक परिवार भी एकल परिवार है।

पुस्तक यह नहीं कहती कि कौन-सा परिवार बेहतर है। वह कहती है — “संयुक्त परिवार से लेकर एकल परिवार तक” — यानी बीच में और भी रूप हैं।

2 | संबंध-शब्द | अध्याय का सबसे सुंदर तर्क

अंग्रेज़ी और भारतीय भाषाएँ

पृ. 138

  • “अंग्रेजी भाषा में पारिवारिक संबंधों का वर्णन करने के लिए बहुत अधिक शब्द नहीं हैं।”
  • “भारतीय भाषाओं में इनके अनेक नाम हैं।”
  • हिंदी में — बुआ · ताऊ · ताई · चाचा · मौसी · नाना · नानी और बहुत सारे संबोधन
  • और तमिल में तो बड़े भाई-बहन तथा छोटे भाई-बहन के लिए भी अलग-अलग शब्द हैं

अब पुस्तक का असली प्रश्न★

“क्या आप बता सकते हैं कि भारतीय भाषा में ‘कजिन’ के लिए कौन-सा शब्द है?”

पृ. 138

और पुस्तक का अपना उत्तर

पृ. 138

  • “अधिकांश भारतीय भाषाओं में आपको ऐसा कोई एक शब्द नहीं मिलेगा!”
  • “ऐसा इसलिए क्योंकि कजिन का अर्थ केवल ‘भाई’ और ‘बहन’ होता है।”
  • “इससे परिवार में सभी बच्चों के बीच गहरे संबंध का पता चलता है।”

ध्यान दीजिए — तर्क दोनों तरफ़ चलता है★

  • अंग्रेज़ी में शब्द कम हैं
  • क्योंकि वहाँ रिश्तों में बारीक भेद नहीं किया जाता
  • (uncle = चाचा, ताऊ, मामा, फूफा, मौसा — सब)
  • भारतीय भाषाओं में ‘कजिन’ का शब्द नहीं है
  • क्योंकि वह रिश्ता अलग माना ही नहीं जाता
  • (वह भाई है, बहन है — कोई तीसरी श्रेणी नहीं)

पुस्तक की अपनी तालिका

नामहिंदी में शब्दअंग्रेजी में विवरण
रानीबहनमाँ के भाई की बेटी (कजिन)
समीरचाचापिता के छोटे भाई (अंकल)

पृ. 139

खंड का निष्कर्ष

पृ. 139

  • “आप देखेंगे कि किस प्रकार अधिकांशत: आपकी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में एक शब्द को अंग्रेजी भाषा में स्पष्टतापूर्वक समझने के लिए कई शब्दों की आवश्यकता होती है।”

एक शब्द → कई शब्द। यही पूरे खंड की बात है।

3 | भूमिकाएँ एवं दायित्व | परिवार किस पर टिका है

चार आधार-शिलाएँ

पृ. 139

  • “परिवार के सदस्यों के बीच संबंध आपसी प्रेम, देखभाल, सहयोग और अंतर्निर्भरता पर आधारित होते हैं।”
  • प्रेम — आपसी लगाव
  • देखभाल — एक-दूसरे का ध्यान रखना
  • सहयोग — एक साथ काम करना
  • अंतर्निर्भरता — एक-दूसरे पर निर्भर होना

‘सहयोग’ का अर्थ पुस्तक ने स्वयं दिया है★

“एक साथ काम करना”

पृ. 139

यह छोटी-सी परिभाषा पूरे अध्याय की कुंजी है

  • अध्याय की तीनों बड़ी कहानियाँ इसी के उदाहरण हैं —
  • हलमा — सैकड़ों लोग एक साथ पेड़ लगाते और तालाब खोदते हैं
  • चेन्नई की बाढ़ — अनेक समूह एक साथ भोजन बनाते और बाँटते हैं
  • कमल परमार — एक व्यक्ति से शुरू होकर अध्यापक और विद्यार्थी जुड़ते जाते हैं

परिभाषा पहले, कहानियाँ बाद में।

भूमिकाएँ स्थिर नहीं होतीं — वे बदलती हैं★

पृ. 139

  • माता-पिता उत्तरदायी हैं कि बच्चे “खुशहाल व्यक्ति और समाज के जिम्मेदार सदस्य” बनें।
  • “किंतु जब बच्चे बड़े होते हैं तो वह परिवार के अन्य सदस्यों … की सहायता के लिए और अधिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं।”
  • दैनिक अभ्यास से बच्चे पारिवारिक जीवन में भागीदारी करना सीखते हैं।
  • और अनेक घरों में वे कई पीढ़ियों से अपनाई गई परंपराएँ तथा प्रथाएँ भी सीखते हैं।

परिवार एक ‘विद्यालय’ भी है

पृ. 140

  • “अपने धर्म या कर्तव्यों का पालन करना भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत रहा है।”
  • “परिवार एक ‘विद्यालय’ भी है, जहाँ बच्चे अहिंसा, दान, सेवा और त्याग जैसे महत्वपूर्ण मूल्य सीखते हैं।”
  • “परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसके सदस्य प्राय: अपनी जरूरतों को त्याग देते हैं।”

! यहाँ ‘धर्म’ का अर्थ कर्तव्य है, religion नहीं — पुस्तक ने स्वयं “धर्म या कर्तव्यों” लिखा है।

चार मूल्य — और अध्याय में वे कहाँ दिखते हैं

मूल्यकहाँ दिखता है
अहिंसाअध्याय 7 से जुड़ा — जैन और बौद्ध मत
दानकमल परमार का मुफ़्त भोजन
सेवाहलमा — “धरती माँ की सेवा”
त्यागशालिनी के सादे सूती कपड़े

4 | पहली कहानी | शालिनी, केरल

शालिनी का परिवार

पृ. 140

  • शालिनी केरल के एक नगर में अपने परिवार के साथ रहती है।
  • पिता — एक छोटा-सा व्यापार करते हैं।
  • माँ — पास के विद्यालय में अध्यापिका।
  • शालिनी का एक छोटा भाई है।

और साथ रहने वाले — मलयालम संबोधन

संबोधनपुस्तक ने कोष्ठक में क्या दिया
अच्चम्मापिता की माँ (दादी)
चित्तप्पापिता के भाई या चाचा
चित्तीचाची या चाचा की पत्नी
चिन्नीउनकी बेटी — शालिनी की चचेरी बहन

पृ. 141

घटना — ओणम से पहले

पृ. 141

  • चाचा की नौकरी कुछ दिन पहले छूट गई है, और चाची गृहिणी हैं।
  • पूरा परिवार ओणम के त्योहार की तैयारी में जुटा था।
  • अच्चम्मा ने शालिनी के पिता से कहा — तुम्हारा भाई आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है,
  • इसलिए वह त्योहार पर नए कपड़े नहीं खरीद पाएगा।

और फिर क्या हुआ

पृ. 141

  • माता-पिता ख़रीददारी में न केवल अपने लिए, बल्कि चित्तप्पा, चित्ती और चिन्नी के लिए भी कपड़े लाए।
  • “इसका परिणाम यह हुआ कि शालिनी को अपनी उम्मीद के अनुसार रेशमी कपड़े नहीं, बल्कि सादे सूती कपड़े मिले।”

अच्चम्मा ने शालिनी को क्या समझाया

परिवार में सभी एक-दूसरे की सहायता करते हैं और उनके पास जो कुछ भी है, उसे आपस में साझा करते हैं।

पृ. 141

कहानी का अंत

पृ. 141

  • “यह जानकर शालिनी को अब अपने मनपसंद कपड़े न मिलने के लिए बुरा नहीं लगा।”
  • “उसे इस बात की खुशी थी कि सभी सदस्यों को नए कपड़े मिले।”

★कहानी का मोड़ वहाँ नहीं है जहाँ उसे सूती कपड़े मिले — वह वहाँ है जहाँ अच्चम्मा ने उसे समझाया। त्याग तब मूल्य बनता है जब वह समझ में आ जाए।

पुस्तक के तीन प्रश्न

पृ. 141

  • इस परिवार की वंशावली का एक सरल चित्र बनाइए।
  • आपके विचार से शालिनी के माता-पिता सभी के लिए कपड़े क्यों लाए?
  • यदि आप शालिनी की जगह होते, तो क्या करते?

तीसरे प्रश्न का कोई एक ‘सही’ उत्तर नहीं है। जो कहे “मुझे बुरा लगता” — वह भी ईमानदार उत्तर है।

5 | दूसरी कहानी | तेनजिंग, मेघालय

पुस्तक स्वयं सेतु बनाती है

पृ. 141

  • “यह कहानी तो केरल की है। आइए, अब सुदूर पूर्वोत्तर में मेघालय के एक गाँव की ओर चलें।”

★दो कहानियाँ, दो छोर — केरल (सुदूर दक्षिण) और मेघालय (सुदूर पूर्वोत्तर)। यह चुनाव जान-बूझकर है, और अध्याय 8 की ‘विविधता में एकता’ से सीधा जुड़ता है।

तेनजिंग अपने बारे में

पृ. 141

  • “मेरा नाम तेनजिंग है। मुझे उन पहाड़ों से प्यार है जहाँ मैं रहता हूँ,
  • यद्यपि कभी-कभी वहाँ जीवन कठिन हो जाता है।”

तेनजिंग के घर में कौन क्या करता है

सदस्यक्या करते हैं
माँएक स्थानीय हस्तशिल्प सहकारी संगठन में कार्यरत
पिताकिराने की छोटी दुकान — और घर की सफाई, बगीचे की देखभाल, भोजन में सहायता
दादीकहानियाँ सुनाती हैं — हँसी-मजाक और समझदारी की बातें
दादापढ़ाई में सहायता, बस स्टॉप तक ले जाना, कॉलोनी के सामाजिक कार्य

पृ. 141–142

ध्यान दीजिए — पिता ने घर के काम क्यों सँभाले★

क्योंकि माँ काम पर जाती हैं।

पृ. 142

पुस्तक के अपने शब्द

पृ. 142

  • “मेरी माँ एक स्थानीय हस्तशिल्प सहकारी संगठन में कार्यरत हैं,
  • जिसके कारण मेरे पिताजी ने घर की सफाई, सब्जियों के बगीचे की देखभाल और घर के अन्य कामों में हाथ बँटाना शुरू किया।
  • कभी-कभी वह हम सबके लिए भोजन पकाने में भी मेरी दादी की सहायता करते हैं।”

यही ‘भूमिकाएँ बदलती हैं’ का सबसे ठोस उदाहरण है।

दादी के बारे में

पृ. 142

  • “दादी के पास हमेशा मुझे सुनाने के लिए रोचक कहानियाँ होती हैं, जिनमें हँसी-मजाक और समझदारी की बातें होती हैं।”
  • “लोगों को उनसे बेहतर तरीके से समझने वाला शायद कोई और नहीं हो सकता।”

और अब दादा — यहीं अध्याय मुड़ता है★

पृ. 142

  • “मेरे दादा पढ़ाई में मेरी सहायता करते हैं और मुझे स्कूल बस स्टॉप पर ले जाते हैं।” — यह परिवार का काम है
  • “वे हमारी कॉलोनी के सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से सम्मिलित होते हैं” — यह समुदाय का काम है

दादा के दो ठोस काम

पृ. 142

  • बिजली चली गई → वे पास के कार्यालय गए और शिकायत दर्ज कराई।
  • तूफान से पड़ोस के घर को नुकसान हुआ → उन्होंने आस-पास के सब परिवारों से धनराशि एकत्रित की और मरम्मत के लिए दी।

★‘परिवार’ से ‘समुदाय’ की छलाँग किसी नए अनुच्छेद में नहीं, इसी कहानी के भीतर लगती है।

पैसे वाला अनुच्छेद

पृ. 142

  • माता-पिता भोजन और कपड़े जैसी मूलभूत आवश्यकताओं का प्रबंध करते हैं।
  • “जब किसी विशेष खर्च की बात आती है, तो … वे आपस में चर्चा करते हैं।”
  • माँ कहती हैं — “हमें भविष्य में अचानक आने वाले खर्चों के लिए कुछ पैसों की बचत अवश्य करनी चाहिए।”

★“वे आपस में चर्चा करते हैं” — पुस्तक यहाँ बिना कहे साझा निर्णय का उदाहरण दे रही है।

6 | समुदाय | अपेक्षाकृत बड़ी इकाई

पुस्तक की परिभाषा

पृ. 143

  • “परिवार न केवल अपने अंदर बल्कि अन्य परिवारों से और आस-पास के लोगों से भी जुड़े होते हैं।”
  • “आपस में जुड़े लोगों के इस समूह को ‘समुदाय’ कहते हैं
  • (विभिन्न संदर्भों में ‘समुदाय’ के अन्य अर्थ भी होते हैं)।”

! कोष्ठक वाला हेज मत छोड़िए — पुस्तक पहली ही पंक्ति में मान लेती है कि इस शब्द के कई अर्थ हैं।

समुदाय के सदस्य कब एक साथ आते हैं

पृ. 143

  • त्योहार मनाने और मेले के अवसर पर
  • विवाह तथा अन्य आयोजनों पर
  • कृषि कार्यों में — फसल कटाई और बुआई के लिए भूमि तैयार करना

साझा संसाधन★

पृ. 143

  • “समय बीतने के साथ समुदाय प्राकृतिक संपदा और पानी, चरागाहों तथा वन-उत्पाद जैसे संसाधनों के साझा उपयोग पर सहमत हुए।”
  • यह अनेक जनजातीय समुदायों तथा कुछ ग्राम समुदायों में देखा गया है।
  • “आज के ग्रामीण भारत के ग्राम समुदायों में भी कुछ सीमा तक इसे देखा जा सकता है।”

तीन साझा संसाधन — पानी · चरागाह · वन-उत्पाद।

और अब अध्याय का सबसे बड़ा विचार★★

अलिखित ‘नियम’

पृ. 143

पुस्तक के अपने शब्द

पृ. 143

  • “इस तरह के अभ्यास — जिन्हें अलिखित ‘नियम’ कह सकते हैं — से समुदायों को संसाधनों तक सुरक्षित पहुँच प्रदान होती है।
  • परंतु इसका यह अर्थ भी है कि समुदाय के अंदर सभी परिवारों तथा व्यक्तियों के विशिष्ट कर्तव्य हैं,
  • अन्यथा समुदाय सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पाएँगे।”

नियम दो तरफ़ काम करते हैं

  • नियम देते हैं
  • संसाधनों तक सुरक्षित पहुँच
  • (यह अधिकार है)
  • नियम माँगते हैं
  • विशिष्ट कर्तव्य
  • (यह दायित्व है)

और ये नियम लिखे हुए नहीं हैं★

  • फिर भी सब उन्हें मानते हैं।
  • यही वह जगह है जहाँ यह अध्याय अपने विषय-सूत्र — ‘शासन और लोकतंत्र’ — को छूता है।
  • नियम क़ानून बनने से बहुत पहले भी मौजूद थे।

अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

7 | हलमा | जब पूरा समुदाय एक साथ खड़ा होता है

पहले चित्र देखिए, फिर पाठ पढ़िए

पृ. 145

  • पुस्तक का पूरा पृष्ठ 145 केवल छायाचित्रों का है — एक भी वाक्य नहीं, केवल एक शब्द: halma
  • ऊपर का चित्र — सूखी पहाड़ी, पंक्तियों में खोदे गए सैकड़ों गड्ढे, और उनमें काम करते लोग
  • नीचे दाएँ का चित्र — भरा हुआ तालाब, और उसके किनारे हरे खेत

इन दोनों चित्रों के बीच जो हुआ, वही ‘हलमा’ है।

पुस्तक की परिभाषा

पृ. 144

  • “संकट के समय किसी व्यक्ति या परिवार को समर्थन देने के लिए साथ मिलकर काम करने की प्रथा — ‘हलमा’।”

हलमा — तथ्य एक जगह

क्याविवरण
समुदायभील
स्थानझाबुआ कस्बे के आस-पास, मध्य प्रदेश
संकटविकट जल संकट
कामसैकड़ों गाँवों में हजारों पेड़ · तालाब · वर्षा जल संचय की संरचनाएँ
उद्देश्य“धरती माँ की सेवा”

पृ. 144

और सबसे ज़रूरी वाक्य★

“उन्हें इस काम के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं मिला।”

पृ. 144

पुस्तक क्यों यह बात जोड़ती है

पृ. 144

  • ”…बल्कि समुदाय और पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्य के रूप में उन्होंने यह कार्य किया।”
  • पूछिए — अगर पैसे मिलते, तो क्या यह ‘हलमा’ होता?

नहीं। क्योंकि यह मज़दूरी नहीं थी, कर्तव्य था।

और एक सम्मान

पृ. 144

  • 2019 में शिवगंगा आंदोलन के महेश शर्मा को
  • भील समुदाय के लिए किए गए परिवर्तनकारी कार्यों हेतु
  • पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।

★भील समुदाय अध्याय 8 में भी आया था — वहाँ उनके महाभारत के अपने लोक संस्करण की बात थी।

दूसरा उदाहरण — चेन्नई की बाढ़

पृ. 144

  • 2015 के दौरान आई बाढ़ में “सड़कें मानों नदियाँ बन गईं” और लोग आने-जाने में असमर्थ हो गए।
  • लगभग सभी दुकानें बंद हो गईं और सेवाएँ बाधित हुईं।
  • अनेक निजी समूहों, विशेष रूप से आध्यात्मिक और धार्मिक संगठनों ने
  • बड़ी मात्रा में भोजन तैयार किया तथा अभावग्रस्त लोगों के बीच बाँटा।

दोनों कहानियों की एक ही कसौटी★

“जब लोग बिना किसी लाभ की उम्मीद के समुदाय के हित के लिए एक साथ मिलकर आगे आए।”

पृ. 144

8 | शहरी समुदाय | कमल परमार की कहानी

पुस्तक स्वयं भेद करती है

पृ. 144

  • “वास्तविक जीवन की उपरोक्त कहानियों में से एक ग्रामीण संदर्भ का दृष्टांत दिया गया है।
  • शहरी क्षेत्रों में भी समुदाय होते हैं, यद्यपि यह कुछ अलग तरीके से कार्य करते हैं।”

! ‘कुछ अलग तरीके से’ — पुस्तक यह नहीं कह रही कि शहरी समुदाय कमज़ोर हैं।

कमल परमार — तथ्य एक जगह

क्याविवरण
कबबीस साल से अधिक समय पहले
कहाँअहमदाबाद (गुजरात)
कौनएक छोटी-सी ऑटो फेब्रिकेशन वर्कशॉप के मालिक
क्या देखासड़क पर वंचित बच्चों का एक समूह
कब पढ़ायाअपने नियमित काम के बाद, शाम 5.30 से रात 9.30 तक
और क्या दियारात में मुफ़्त भोजन
कितने बच्चे150

पृ. 144

उन बच्चों के बारे में

पृ. 144

  • “इनमें से कुछ बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी थी, जबकि अन्य तो कभी विद्यालय गए ही नहीं थे।”
  • और फिर — “जल्दी ही उनकी कक्षा में 150 बच्चे नियमित रूप से आने लगे और पढ़ाई में उनकी बहुत रूचि भी थी।”

फिर और लोग जुड़े

पृ. 144, 146

  • एक स्थानीय विद्यालय के कुछ अध्यापकों ने इन कक्षाओं के बारे में सुना और वहाँ पढ़ाना शुरू किया।
  • और फिर नियमित रूप से विद्यालय जाने वाले कुछ बड़े बच्चों ने भी स्वेच्छा से पढ़ाना शुरू कर दिया।

यही ‘समुदाय बनने’ की प्रक्रिया है★

  • घेरा 1
  • कमल परमार अकेले
  • घेरा 2 — + विद्यालय के अध्यापक
  • घेरा 3 — + बड़े विद्यार्थी
  • एक व्यक्ति से शुरू
  • और फिर फैलता चला गया

एक अध्यापक ने क्या कहा

इन बच्चों के पास बैठने के लिए समुचित बेंच नहीं हैं, कक्षाओं में पूरी तरह शांति नहीं है और गुजरते हुए वाहन काफी शोर करते हैं। फिर भी वे अध्यापकों की बातों पर अपना पूरा ध्यान लगाते हैं। इसने मेरा मन छू लिया।

पृ. 146

और एक विद्यार्थी ने, जो पढ़ाने गया था

हम वहाँ पढ़ाने गए थे, किंतु हमने उनसे बहुत कुछ सीखा।

पृ. 146

यह वाक्य ‘सहयोग’ की परिभाषा को उलट देता है

  • पुस्तक ने कहा था — सहयोग = एक साथ काम करना।
  • यह वाक्य दिखाता है कि उस काम में देने वाला और लेने वाला अलग नहीं रहते।

इस वाक्य पर कुछ कहने की ज़रूरत नहीं। यह अपने आप काम करता है।

पुस्तक के चार प्रश्न

पृ. 146

  • यह कहानी समुदाय के प्रति किस तरह की मनोवृत्ति को दर्शाती है?
  • कमल परमार के प्रयास में कौन-कौन से मूल्य प्रदर्शित होते हैं?
  • क्या आप ऐसा मानते हैं कि समाज ने उन वंचित बच्चों के प्रति अन्यायपूर्ण व्यवहार किया है?
  • समाज को सभी बच्चों की शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए क्या करना चाहिए?

9 | नए समुदाय | और अध्याय का समापन

पिछले 30 या 40 वर्षों में

पृ. 146

  • “नए प्रकार के समुदाय उभरे हैं।”
  • अनेक नगरीय क्षेत्रों में आवासीय कल्याण समितियाँ ऐसे समुदायों के उदाहरण हैं
  • “जो अपने नियम और व्यवस्था बनाते हैं।”
  • ये नियम किस बारे में — अपशिष्ट प्रबंधन · सामान्य क्षेत्रों की सफाई · पालतू पशुओं की देखभाल

और अब वह वाक्य जिस पर पूरा शासन-खंड टिका है★★

“इन समुदायों में रहने वाले लोग इन नियमों और कानूनों के निर्माण में भागीदार होते हैं।”

पृ. 146

याद है, अध्याय के आरंभ में क्या पूछा था?

  • “शासन वाला खंड परिवार से क्यों शुरू होता है?”
  • यही उत्तर है —
  • जो लोग नियम से बँधे हैं, वही लोग नियम बनाते हैं।
  • और यह पहले परिवार में होता है, फिर मोहल्ले में, फिर देश में।

अंतर्निर्भरता — अब बड़े पैमाने पर

पृ. 146

  • “अंतत: समुदाय आपस में एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।”
  • आवासीय कल्याण समितियाँ → किराने की आपूर्ति के लिए व्यापारी समुदाय पर
  • आवासीय कल्याण समितियाँ → कूड़े के निपटान के लिए नगर निगम के कामगारों पर
  • “हमारे जटिल समाजों में प्रत्येक व्यक्ति कई अन्य व्यक्तियों और समुदायों पर निर्भर होता है।”

‘समुदाय’ एक लचीली संकल्पना है

पृ. 147

  • एक जाति या इसका उपविभाजन भी बहुधा एक समुदाय कहलाता है।
  • एक विशेष धर्म, क्षेत्र, सामान्य कार्य या रुचि के लोगों का समूह भी समुदाय कहलाता है।
  • “यह सूची अंतहीन है।”

‘समुदाय’ के चार आधार

आधारपुस्तक के उदाहरण
धर्म‘मुंबई का पारसी समुदाय’ · ‘चेन्नई का सिख समुदाय’
क्षेत्र / मूल‘अमेरिका का भारतीय समुदाय’
कार्य‘केरल का वैज्ञानिक समुदाय’ · ‘गाँव का किसान समुदाय’
रुचिखेल समुदाय · विज्ञान या नाट्य समूह

पृ. 147

और एक ही व्यक्ति कई समुदायों का सदस्य होता है★

पृ. 147

  • “अपने विद्यालय में आप विभिन्न समुदायों का हिस्सा हो सकते हैं —
  • निस्संदेह आप कक्षा के साथ-साथ खेल समुदाय, राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर, विज्ञान या नाट्य समूह आदि का भी हिस्सा हो सकते हैं।”

आप स्वयं कितने समुदायों के सदस्य हैं? तीन लिखिए।

आगे बढ़ने से पहले… — तीनों बिंदु

पृ. 148

  • “परिवार मानव समाज का आधार है। आदर्श रूप में परिवार के सदस्य अपने अनेक कर्तव्यों और कार्यों में एक-दूसरे को सहयोग प्रदान करते हैं।”
  • “समुदाय अपेक्षाकृत बड़ी इकाई है। … ‘समुदाय’ को अनेक प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है और समुदाय अनेक प्रकार के होते हैं।”
  • “अंतत: समुदाय एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं।”

पहले बिंदु में तीन शब्द जो बच्चे छोड़ देते हैंध्यान

  • “आदर्श रूप में”
  • पुस्तक यह नहीं कह रही कि हर परिवार में ऐसा होता ही है।
  • वह कह रही है कि आदर्श रूप में ऐसा होना चाहिए।

और दूसरे बिंदु में भी वही सावधानी है — “अपना सर्वोत्तम प्रयास करते हैं”, “हो ही जाता है” नहीं।

पूरा अध्याय एक तालिका में

  • परिवार — छोटी इकाई
  • संयुक्त और एकल
  • प्रेम · देखभाल · सहयोग
  • शालिनी और तेनजिंग
  • समुदाय — बड़ी इकाई
  • ग्रामीण और शहरी
  • अलिखित नियम · साझा संसाधन
  • हलमा और कमल परमार

और दोनों के नीचे एक ही शब्द

अंतर्निर्भरता

अध्याय की अंतिम पंक्ति

पृ. 148

  • “अंतत: समुदाय एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं।”

छोटी इकाई में जो सच है, बड़ी इकाई में भी वही सच है।