अध्याय 13कार्य का महत्व

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कक्षा 6 • सामाजिक विज्ञान • समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे • अध्याय 13 — कार्य का महत्व

कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे) · पृष्ठ — 183 से 194

आज से एक नया विषय

पिछले तीन अध्यायों पर लिखा था — शासन और लोकतंत्र। इस अध्याय पर लिखा है — हमारे आस-पास का आर्थिक जीवन। यह पुस्तक का पहला अर्थशास्त्र-अध्याय है।

और अध्याय का उद्धरण

जब आप कोई काम कर रहे हों, उससे बाहर कुछ न सोचें। उसे पूजा की तरह करें, सबसे बड़ी पूजा की तरह और उस समय अपना पूरा जीवन उसे समर्पित कर दें।

पृ. 183 — स्वामी विवेकानंद

इस उद्धरण में एक शब्द नहीं है★

‘पैसा’

अध्याय के दो महत्वपूर्ण प्रश्न

पृ. 183

  • लोग विभिन्न प्रकार की किन-किन गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं?
  • हमारे दैनिक जीवन में इनका क्या योगदान है?

★ध्यान दीजिए — दूसरा प्रश्न ‘योगदान’ पूछता है, ‘कमाई’ नहीं।

1 | अनु और कबीर | एक कहानी, छह लोग

कहानी कैसे शुरू होती है

पृ. 183

  • अनु और कबीर पार्क में खेल रहे थे, तभी उन्होंने पड़ोस में रहने वाली गीता मौसी को टैक्सी से उतरते देखा।
  • वह अपनी नौकरी से घर वापस आ रही थीं और अपनी यूनिफ़ॉर्म में थीं।
  • ★“वह भारतीय वायु सेना में पायलट (विमान चालक) का कार्य करती हैं और पूरा कस्बा उन पर गर्व करता है।”

कबीर के दादा जी

पृ. 183–184

  • वह सीमा सुरक्षा बल से सेवानिवृत्त हुए हैं, और अब अपना समय बिताते हैं —
  • ”…आस-पास के बच्चों को नि:शुल्क भूगोल पढ़ाने में…”
  • ”…हमारे सब्ज़ी उद्यान में काम करने में और…”
  • ”…घर के अन्य काम करने में व्यतीत करते हैं।”

अनु का परिवार

पृ. 184

  • “मेरे माता-पिता दुकान चलाते हैं जिसमें कई तरह की वेशभूषा और सिले हुए वस्त्रों की बिक्री की जाती है।”
  • “अप्पा सुबह चले जाते हैं और माँ हमारे विद्यालय जाने के बाद दुकान में उनका सहयोग करती हैं।”
  • ★“वह एक स्वैच्छिक समूह के साथ भी कार्य करती हैं जहाँ महिलाओं को सिलाई सिखाई जाती है।”

और अनु का भाई रोहन

पृ. 184

  • “वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और कंप्यूटर एप्लीकेशन बनाने वाली कंपनी में काम करते हैं।”
  • ★“वह सप्ताह के अंत में पास के एक महाविद्यालय में युवा विकास कार्यक्रम में सम्मिलित लोगों को स्वेच्छा से कंप्यूटर से संबंधित कौशल भी सिखाते हैं।”

और कबीर का वाक्य, जो पूरा अध्याय खोल देता है

“क्या बात है अनु, हमारे आस-पास के लोग कितने प्रकार के कार्य करते हैं!”

पृ. 184

2 | दो श्रेणियाँ | अध्याय की रीढ़

किताब का विभाजन

पृ. 185

  • “उपरोक्त विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को दो समूहों या श्रेणियों में विभाजित किया गया है —
  • आर्थिक गतिविधियाँ और गैर-आर्थिक गतिविधियाँ।”

दोनों का अंतर★★

आर्थिकगैर-आर्थिक
इनमें क्या हैअर्थ (द्रव्य, मुद्रा) सम्मिलितआय या संपत्ति अर्जित नहीं होती
क्यों की जाती हैंअर्थोपार्जन के लिएकृतज्ञता, स्नेह, सेवा, आदर के साथ
किससे जुड़ीवस्तु के नकद मूल्य सेअनुभूति और संबंध से

पृ. 185–186

आर्थिक गतिविधि — तीन कसौटियाँ

पृ. 185

  • एक — जिनमें अर्थ (द्रव्य, मुद्रा) सम्मिलित होता है
  • दो — जिन्हें अर्थोपार्जन के लिए किया जाता है
  • तीन — जो वस्तु के नकद मूल्य से संबंधित होती हैं

★किताब ‘अथवा’ लिखती है, ‘और’ नहीं — तीनों का होना ज़रूरी नहीं; कोई एक काफ़ी है।

किताब के पाँच उदाहरण

पृ. 185

  • व्यापारी बाजार में स्कूल बैग बेचते हैं • किसान अपनी उपज बाजार में बेचते हैं
  • वकील अभियोजन का शुल्क लेते हैं • ट्रक चालक वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं
  • श्रमिक कार बनाने वाले कारखाने में काम करते हैं

गैर-आर्थिक गतिविधि — परिभाषा

पृ. 186

  • “वे हैं जिनमें आय अथवा संपत्ति अर्जित नहीं होती है,
  • बल्कि इन्हें कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर जैसी अनुभूतियों के साथ किया जाता है।”

ये चार शब्द याद रखिए★★

कृतज्ञता · स्नेह · सेवा · आदर

पृ. 186

किताब के चार उदाहरण

पृ. 186

  • अभिभावकों द्वारा परिवार के लिए भोजन बनाना
  • बच्चों की उनके विद्यालय के कार्य में सहायता करना
  • युवाओं द्वारा दादा-दादी, नाना-नानी आदि की सेवा करना
  • परिवार के सदस्यों द्वारा घर के नवीनीकरण में सहायता करना

और अब सबसे बड़ा जालध्यान

“गैर-आर्थिक = कम महत्वपूर्ण”

यह गलत है★

‘गैर-आर्थिक’ का अर्थ ‘बेकार’ नहीं है। इसका अर्थ केवल इतना है कि उसमें पैसा नहीं आता।

3 | तीन परिभाषाएँ | हाशिये से

पृष्ठ 185 के तीन पद

पदकिताब की परिभाषा
वस्तु का नकद मूल्यकिसी वस्तु का व्यक्ति द्वारा तय किया गया मौद्रिक मूल्य, जो उस वस्तु से मिलने वाले लाभ पर आधारित होता है
बाजारवह स्थान जहाँ व्यक्ति वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन करते हैं
शुल्ककिसी व्यावसायिक परामर्श या सेवाओं के लिए किया गया भुगतान — जैसे चिकित्सक या वकील को

पृ. 185

और ‘बाजार’ की परिभाषा में एक छिपी बात है★

पृ. 185

  • “व्यक्ति वस्तुओं और सेवाओं के बदले अन्य वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन कर सकते हैं,
  • किंतु अधिकांशत: बाजारों में इनका लेन-देन धनराशि के लिए किया जाता है।”

यानी पूछने लायक सवाल★

क्या बिना पैसे के भी बाजार हो सकता है?

4 | तीसरा स्तंभ | और अध्याय का सबसे अच्छा प्रश्न

किताब का अपना सवाल

पृ. 187

  • “पृष्ठ 185 पर दी गई तालिका में क्या आपने तीसरा रिक्त स्तंभ देखा?
  • इस स्तंभ में ‘आर्थिक या गैर-आर्थिक गतिविधि’ को अंकित कीजिए।”

भरी हुई तालिका★★

पात्रकार्यकौन-सी?
गीता मौसीवायु सेना में पायलटआर्थिक
दादा जीनि:शुल्क भूगोल पढ़ानागैर-आर्थिक
अप्पादुकान चलानाआर्थिक
माँदुकान में सहयोगआर्थिक
माँस्वैच्छिक समूह में सिलाई सिखानागैर-आर्थिक
रोहनसॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यआर्थिक
रोहनस्वेच्छा से कंप्यूटर सिखानागैर-आर्थिक

ध्यान दीजिए — पंक्तियाँ पात्रों से ज़्यादा हैं★★

क्योंकि एक ही व्यक्ति दोनों तरह के काम करता है।

इसलिए यह वाक्य याद रखिए★

हम लोगों को नहीं बाँट रहे — कामों को बाँट रहे हैं।

किताब स्वयं दो पात्र हल कर देती है

पृ. 187

  • “गीता मौसी, जो वायु सेना में विमान चालक हैं, उनको वेतन मिलता है। वह देश की सेवा करती हैं और यह एक आर्थिक गतिविधि में सम्मिलित है।”
  • “रोहन को सॉफ्टवेयर कंपनी के कार्य के लिए वेतन मिलता है। सप्ताह के अंत में वह स्वेच्छा से काम करता है… जो एक गैर-आर्थिक गतिविधि है।”

गीता मौसी वाला वाक्य दो बार पढ़िए★★

देश की सेवा करने से वह गतिविधि ‘गैर-आर्थिक’ नहीं हो जाती — क्योंकि उसमें वेतन है।

यानी★

कसौटी भाव नहीं, भुगतान है।

और अब अध्याय का सबसे अच्छा प्रश्न★★★

  • कबीर के दादाजी
  • बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाते हैं
  • = गैर-आर्थिक
  • आपके अध्यापक
  • विद्यालय में पढ़ाते हैं
  • = आर्थिक

पृ. 187

और इसका उत्तर एक वाक्य में★★

काम एक ही है। अंतर काम में नहीं, भुगतान में है।

आइए विचार करें — दूसरा प्रश्न

पृ. 187

  • “आप और आपके परिवार के लिए कौन-सी गैर-आर्थिक गतिविधियाँ महत्वपूर्ण हैं?
  • ये क्यों बहुमूल्य हैं?”

★ध्यान दीजिए — किताब बिना पैसे वाली चीज़ को ‘बहुमूल्य’ कह रही है।

5 | काव्या की कहानी | भुगतान के प्रकार

राजमार्ग का निर्माण

पृ. 188

  • काव्या अपनी चाची के घर कमलापुर गाँव जा रही थी। रास्ते में उसने देखा कि गाँव के पास एक राजमार्ग बनाया जा रहा था।
  • वहाँ तकनीशियन खोदने वाली और बुलडोजर जैसी बड़ी मशीनें चला रहे थे।
  • ★“इस राजमार्ग के बनने से अब निकट के नगर तक जाने का समय पाँच घंटे से घटकर केवल दो घंटे हो जाएगा।”

यानी आर्थिक गतिविधि केवल पैसे की बात नहीं है★

वह समय भी बचाती है — और उससे लोगों का जीवन बदलता है।

काव्या के परिवार के तीन काम

कौनक्याभुगतान
चाचानिर्माण कंपनी में तकनीशियन, बुलडोजर चलाते हैंप्रतिमाह वेतन
चाचीगाँव के डाकघर में कार्यरतप्रतिमाह वेतन
चाचीशाम को ऑनलाइन कक्षाएँसाप्ताहिक शुल्क

पृ. 188

और एक वाक्य जो छूट जाता है★

पृ. 188

  • “काव्या की चाची सुबह उठीं और अपना घरेलू काम निपटाने के बाद काम पर चली गईं।”

यानी उनके दिन में एक गैर-आर्थिक काम भी है।

और फिर साहिल★★

पृ. 189

  • “वहाँ उसे खेत में काम करने वाला एक श्रमिक, साहिल मिला जो ट्रैक्टर से खेत को जोत रहा था।
  • इस कार्य के लिए उसे दैनिक मजदूरी के बदले कुछ धनराशि मिलती है और शेष भुगतान आमों के रूप में मिलता है।
  • इस कार्य के लिए आम के रूप में जो भुगतान हुआ, उसे ‘वस्तु के रूप में भुगतान’ कहा जाता है।”

वेतन और मजदूरी — यह अंतर पूछा जाता है★★

वेतनमजदूरी
किसेकर्मचारी कोश्रमिक को
कबप्रतिमाह, नियमितएक विशिष्ट समय अवधि के लिए
कैसानियत भुगतानअवधि के अनुसार

पृ. 187, 189

एक वाक्य में★

वेतन महीने का होता है; मजदूरी अवधि की होती है।

और यह मत सोचिएध्यान

“साहिल को पैसा नहीं मिला, तो यह गैर-आर्थिक है।”

क्योंकि★

साहिल को आम काम के बदले मिले हैं — यह भुगतान है, उपहार नहीं।

भुगतान के चारों प्रकार★★

प्रकारकिताब का उदाहरण
वेतनगीता मौसी • रोहन • काव्या के चाचा और चाची
मजदूरीसाहिल — दैनिक मजदूरी
शुल्कवकील • चिकित्सक • चाची की ऑनलाइन कक्षाएँ
वस्तु के रूप में भुगतानसाहिल को मिले आम

6 | मूल्य संवर्धन | ₹600, ₹1000 और ₹400

किताब की परिभाषा

पृ. 189

  • “आर्थिक गतिविधियों से किसी वस्तु के अन्य रूपों में रूपांतरण की प्रक्रिया के
  • प्रत्येक चरण पर उसके मूल्य में भी वृद्धि होती है।
  • इसे मूल्य संवर्धन कहते हैं।”

राजेश — काव्या के पिता

पृ. 190

  • “राजेश एक बढ़ई हैं जो विभिन्न प्रकार की लकड़ी के फर्नीचर को बनाने के लिए समीप के बाजार से ₹600 की लकड़ी खरीदते हैं।”
  • “वे लकड़ी का फर्नीचर बनाने के लिए विशेष प्रकार के उपकरणों का उपयोग करते हैं।”
  • “राजेश बाजार में प्रत्येक कुर्सी को ₹1000 में बेचते हैं।”

और अब गणित★★

लकड़ी की लागत₹600
कुर्सी का विक्रय मूल्य₹1000
★अंतर₹400

पृ. 190

और असली सवाल यह है★

यह ₹400 किसका है?

किताब का अपना उत्तर

पृ. 190

  • “यह राजेश के कौशल, समय और प्रयास का मौद्रिक मूल्य है जो उन्हें उस कुर्सी को बनाने में लगा था।
  • राजेश ने लकड़ी से फर्नीचर बनाकर लकड़ी का मूल्य संवर्धन किया।”

ये तीन शब्द याद रखिए★★★

कौशल · समय · प्रयास

क्योंकि यही पूरे अध्याय का सबसे सुंदर विचार है★

मूल्य केवल सामान से नहीं आता — उसे बनाने वाले इंसान से आता है।

और किताब का समापन-वाक्य

पृ. 190

  • “लकड़ी खरीदने से लेकर कुर्सी के बेचने तक की गतिविधियों में भुगतान सम्मिलित है।
  • इसलिए यह सब आर्थिक गतिविधियों के भाग हैं।”

7 | दूसरी तालिका | और उसमें छिपा प्रश्न

पृष्ठ 191 की तालिका

#गतिविधि / व्यवसायकौन-सी?
1बेकरआर्थिक
2दर्जीआर्थिक
3किसान द्वारा अपने ट्रैक्टर की मरम्मतगैर-आर्थिक
4चिकित्सकआर्थिक
5परिवार के लिए भोजन बनाने वाले अभिभावकगैर-आर्थिक
6वैज्ञानिकआर्थिक
7बीमार दादा-दादी की देखभाल करने वाला व्यक्तिगैर-आर्थिक

और पंक्ति 3 पर रुकिएध्यान

किसान अपना ही ट्रैक्टर ठीक कर रहा है — यह गैर-आर्थिक क्यों है?

क्योंकि★

वह यह काम अपने लिए कर रहा है, और उसे कोई भुगतान नहीं मिल रहा।

पर अगर वही किसान किसी और का ट्रैक्टर ठीक करके पैसे ले★★

तो वह आर्थिक हो जाएगा।

यानी वही पुराना वाक्य★

काम एक ही है। अंतर भुगतान में है।

8 | गैर-आर्थिक का महत्व | अध्याय का उत्तर

किताब का घोषणा-वाक्य★★

“गैर-आर्थिक गतिविधियों में धनराशि सम्मिलित नहीं होती है, फिर भी इनसे उत्पन्न मूल्य हमारे जीवन में महत्व रखते हैं।”

पृ. 191

सेवा

पृ. 191–192

  • “हमें मंदिरों, गुरुद्वारों, मस्जिदों और गिरजाघरों आदि अनेक स्थानों पर सेवा कार्य देखने का अवसर मिलता है।”
  • “गुरुद्वारे में दर्शन हेतु आने वाले सभी श्रद्धालुओं को ‘लंगर’ या सामुदायिक रसोई में नि:शुल्क भोजन कराया जाता है।”
  • ★“इन सेवा कार्यों से हमें संतुष्टि और कृतज्ञता की अनुभूति होती है और ये सेवा कार्य नि:स्वार्थ भाव से समाज में योगदान देते हैं।”

ध्यान दीजिए — दो शब्द लौट आए हैं★

‘कृतज्ञता’ और ‘सेवा’ — वही, जो परिभाषा में थे।

सामुदायिक सहभागिता — स्वच्छ भारत अभियान

पृ. 192

  • “स्वच्छ भारत अभियान अपने आस-पास सफाई रखने के लिए सभी भारतीय नागरिकों द्वारा सामूहिक प्रयासों पर आधारित है।”
  • “लोग मिल-जुलकर गलियों, सड़कों, पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों या सामुदायिक क्षेत्रों को भी साफ रखते हैं।”
  • ★“इन सामूहिक प्रयासों से घर, आस-पास के क्षेत्र, समाज और राष्ट्र स्वच्छ रहता है।”

चार स्तर की सीढ़ी★

घर → आस-पास का क्षेत्र → समाज → राष्ट्र

और वन महोत्सव

पृ. 192

  • “सामूहिक सामुदायिक सहभागिता का एक और उदाहरण भारत में वृक्षों के महत्व और वन संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए वन महोत्सव का आयोजन है।”
  • “इस प्रयास से वृक्षारोपण अभियानों के लिए समुदाय के सदस्यों को एक साथ लाया जाता है।”

और ध्यान दीजिए★★

इस पूरे खंड में एक भी रुपया नहीं है — और फिर भी उसका शीर्षक ‘महत्व’ है।

9 | समापन | और पहले पृष्ठ पर वापसी

आगे बढ़ने से पहले… — तीनों बिंदु

पृ. 193

  • “इस अध्याय में हमने आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियों के बारे में सीखा।”
  • “हमने आर्थिक गतिविधियों से उत्पन्न मूल्य संवर्धन के बारे में भी सीखा।”
  • “हमने समझा कि गैर-आर्थिक गतिविधियाँ किस प्रकार सामाजिक कल्याण एवं निजी कल्याण में योगदान देती हैं और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाती हैं।”

तीसरे बिंदु के तीन नए पद★

सामाजिक कल्याण · निजी कल्याण · जीवन की समग्र गुणवत्ता

पूरे अध्याय के जाल — एक बार देख लीजिएध्यान

जालसही बात
“गैर-आर्थिक = कम महत्वपूर्ण”पृष्ठ 191 का पूरा उपशीर्षक ही इसके विरुद्ध है
“रोहन आर्थिक गतिविधि करता है”व्यक्ति नहीं, गतिविधि बँटती है
“पैसा नहीं मिला तो गैर-आर्थिक”साहिल को आम मिले — वह भी भुगतान है
“वेतन और मजदूरी एक ही हैं”वेतन प्रतिमाह नियत; मजदूरी विशिष्ट अवधि की
“₹400 राजेश का मुनाफ़ा है”किताब इसे कौशल, समय और प्रयास का मौद्रिक मूल्य कहती है

और अब पहले पृष्ठ पर लौटिए

उसे पूजा की तरह करें, सबसे बड़ी पूजा की तरह और उस समय अपना पूरा जीवन उसे समर्पित कर दें।

पृ. 183 — स्वामी विवेकानंद

पूरा अध्याय एक पंक्ति में★★

हर काम का एक मूल्य होता है। कुछ का मूल्य रुपयों में गिना जाता है, और कुछ का नहीं — पर मूल्य दोनों का होता है।