★यह दस्तावेज़ शब्दशः बोलने के लिए है। जो लिखा है, वही बोलिए। (कोष्ठक में तिरछा) = आपके लिए निर्देश, बोलना नहीं है।
गति: एक वाक्य → तीन सेकंड रुकिए → अगला वाक्य। हर बिंदु के बाद पाँच सेकंड। ! इस अध्याय में आँकड़े बहुत हैं। संख्याएँ दो बार बोलिए।
🎙 कालांश 1 · 1990 का दशक — पाँच बड़े बदलावध्यान
(शुरू करने से पहले बोलिए — बिना नोट कराए:)
“आज हम इस पुस्तक का आख़िरी अध्याय शुरू कर रहे हैं। और एक बात पहले ही बता देता हूँ — यह अध्याय नौ नवम्बर दो हज़ार उन्नीस तक की बात करता है, और दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव तक। आपके पास अगर कोई पुरानी गाइड है, तो वह इस अध्याय के लिए ग़लत होगी। सावधान रहिए।”
बोलिए:
“कॉपी खोलिए। शीर्षक लिखिए — अध्याय आठ। भारतीय राजनीति : नए बदलाव।
नीचे उपशीर्षक — एक। उन्नीस सौ नब्बे का दशक।
बिंदु एक।
उन्नीस सौ चौरासी के चुनाव में राजीव गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस को भारी विजय मिली।
(रुकिए)
अब एक वाक्य लिखिए और उसे रेखांकित कीजिए।
उन्नीस सौ अस्सी के दशक के आख़िर के सालों में देश में ऐसे पाँच बड़े बदलाव आए, जिनका हमारी आगे की राजनीति पर गहरा असर पड़ा।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब पाँचों बदलाव क्रम से लिखिए।
पहला बदलाव। उन्नीस सौ नवासी के चुनावों में कांग्रेस की हार।
(रुकिए)
इसके नीचे लिखिए — उन्नीस सौ चौरासी में चार सौ पंद्रह सीटें। उन्नीस सौ नवासी में महज एक सौ सत्तानबे सीटें।
(दोहराइए: चार सौ पंद्रह से एक सौ सत्तानबे। फिर रुकिए।)
अब उद्धरण-चिह्न में लिखिए, और हाशिये पर दो तारे बनाइए।
उन्नीस सौ नवासी में ही उस परिघटना की समाप्ति हो गई थी, जिसे राजनीति विज्ञानी अपनी खास शब्दावली में ‘कांग्रेस प्रणाली’ कहते हैं।
(रुकिए)
और इसके नीचे एक ज़रूरी संतुलन लिखिए —
लेकिन कांग्रेस एक महत्त्वपूर्ण पार्टी के रूप में कायम रही। दलीय प्रणाली के भीतर जैसी प्रमुखता इसे पहले हासिल थी, वैसी अब न रही।
(पाँच सेकंड रुकिए)
दूसरा बदलाव। राष्ट्रीय राजनीति में ‘मंडल मुद्दे’ का उदय।
उन्नीस सौ नब्बे में राष्ट्रीय मोर्चा की नयी सरकार ने मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू किया। इनके अंतर्गत केंद्र सरकार की नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया गया। देश के विभिन्न भागों में मंडल-विरोधी हिंसक प्रदर्शन हुए।
(रुकिए)
तीसरा बदलाव। आर्थिक नीतियों में बुनियादी परिवर्तन।
इसे ढाँचागत समायोजन कार्यक्रम अथवा नए आर्थिक सुधार के नाम से जाना गया। इनकी शुरुआत राजीव गाँधी की सरकार के समय हुई और उन्नीस सौ इक्यानबे तक ये बदलाव बड़े पैमाने पर प्रकट हुए।
(रुकिए)
अब एक बहुत ज़रूरी वाक्य। इसे उद्धरण-चिह्न में लिखिए और रेखांकित कीजिए। यह आगे पूरे अध्याय को बाँधता है।
बहरहाल इस अवधि में जितनी सरकारें बनीं, सबने नयी आर्थिक नीति पर अमल जारी रखा।
(दस सेकंड रुकिए। फिर कहिए:)
हाशिये पर एक छोटा नोट लिख लीजिए — अलग-अलग विचारधारा की सरकारें, पर नीति एक। यही आगे ‘बढ़ती सहमति’ की पहली बात बनेगी।
(रुकिए)
चौथा बदलाव। अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर का विधिक एवं राजनीतिक विवाद।
राम जन्मभूमि आंदोलन के केन्द्रीय विषय बनने से धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के विमर्श की दिशा बदल गई।
(रुकिए)
और अब इस अध्याय का सबसे नया वाक्य। ध्यान से लिखिए।
इन परिवर्तनों की परिणति सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ के निर्णय — जिसकी घोषणा नौ नवम्बर, दो हज़ार उन्नीस — के उपरांत अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण के रूप में हुई।
(पाँच सेकंड रुकिए)
पाँचवाँ बदलाव। मई उन्नीस सौ इक्यानबे में राजीव गाँधी की हत्या।
वे चुनाव अभियान के सिलसिले में तमिलनाडु के दौरे पर थे। लिट्टे से जुड़े श्रीलंकाई तमिलों ने उनकी हत्या कर दी। उन्नीस सौ इक्यानबे के चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी विजयी पार्टी के रूप में सामने आयी और पार्टी ने नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री चुना।”
🎙 कालांश 2 · गठबंधन का युगध्यान
बोलिए:
“उपशीर्षक लिखिए — दो। गठबंधन का युग।
पहले एक सवाल सोचिए, फिर लिखिए। उन्नीस सौ नवासी में कांग्रेस हारी। पर क्या किसी और को बहुमत मिला?
(रुकिए। उत्तर सुनिए। फिर बोलिए:)
लिखिए —
उन्नीस सौ नवासी के चुनावों में कांग्रेस पार्टी की हार हुई थी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी दूसरी पार्टी को बहुमत मिल गया था।
(रुकिए)
कांग्रेस अब भी लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन बहुमत में न होने के कारण उसने विपक्ष में बैठने का फ़ैसला किया।
(रुकिए)
राष्ट्रीय मोर्चा जनता दल और कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों को मिलाकर बना था।
(रुकिए)
अब सबसे रोचक बात। लिखिए और रेखांकित कीजिए।
इसे परस्पर विरुद्ध दो राजनीतिक समूहों — भाजपा और वाम मोर्चे — ने समर्थन दिया। लेकिन गठबंधन सरकार में भाजपा और वाम मोर्चे ने शिरकत नहीं की।
(रुकिए)
हाशिये पर लिखिए — यह ‘बाहर से समर्थन’ का पहला बड़ा उदाहरण है।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब एक तुलना-सारणी बनाइए। तीन पंक्तियाँ, तीन स्तंभ। स्तंभों के शीर्षक — कसौटी, उन्नीस सौ नवासी, उन्नीस सौ छियानबे।
पहली पंक्ति। कसौटी — सरकार। नवासी — राष्ट्रीय मोर्चा। छियानबे — संयुक्त मोर्चा।
(रुकिए)
दूसरी पंक्ति। कसौटी — समर्थन। नवासी — भाजपा और वाम मोर्चा। छियानबे — कांग्रेस और वाम मोर्चा।
(रुकिए)
तीसरी पंक्ति। कसौटी — उद्देश्य। नवासी — कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखना। छियानबे — भाजपा को सत्ता से बाहर रखना।
(रुकिए)
और नीचे पाठ्यपुस्तक का वाक्य लिखिए —
इससे पता चलता है कि राजनीतिक समीकरण किस कदर छुईमुई थे।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब भाजपा का उभार। लिखिए —
भाजपा ने उन्नीस सौ इक्यानबे तथा उन्नीस सौ छियानबे के चुनावों में अपनी स्थिति लगातार मज़बूत की। छियानबे में यह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे सरकार बनाने का न्यौता मिला। लेकिन अधिकांश दल भाजपा की नीतियों के खिलाफ़ थे और इस वजह से उसकी सरकार लोकसभा में बहुमत हासिल नहीं कर सकी।
(रुकिए)
आखिरकार भाजपा ने एक गठबंधन — राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, यानी राजग — के अगुआ के रूप में सत्ता हासिल की। मई उन्नीस सौ अट्ठानबे से जून निन्यानबे तक, और फिर अक्तूबर निन्यानबे से। दोनों में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। उन्नीस सौ निन्यानबे की राजग सरकार ने अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा किया।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब यह अनुच्छेद लिखिए, और इसके आगे दो तारे बनाइए।
उन्नीस सौ नवासी के चुनावों से भारत में गठबंधन की राजनीति के एक लंबे दौर की शुरुआत हुई। इसके बाद से केंद्र में ग्यारह सरकारें बनीं। ये सभी या तो गठबंधन की सरकारें थीं अथवा दूसरे दलों के समर्थन पर टिकी अल्पमत की सरकारें थीं।
(रुकिए)
इस नए दौर में कोई सरकार क्षेत्रीय पार्टियों की साझेदारी अथवा उनके समर्थन से ही बनायी जा सकती थी।
(रुकिए)
और अब अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण वाक्य। इसे धीरे लिखिए।
उन्नीस सौ नवासी के बाद से लोकसभा के चुनावों में कभी भी किसी एक पार्टी को दो हज़ार चौदह तक पूर्ण बहुमत नहीं मिला।
(रुकिए)
यद्यपि, पुनः दो हज़ार चौदह तथा दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को अकेले बहुमत प्राप्त हुआ है।
(दस सेकंड रुकिए)
(अब कहिए:) अब एक बड़ी सारणी बनानी है। पूरा पन्ना लीजिए। तीन स्तंभ — अवधि, गठबंधन, प्रधानमंत्री। दस पंक्तियाँ। धीरे-धीरे लिखिए, मैं दोहराता रहूँगा।
एक। दिसंबर उन्नीस सौ नवासी से नवंबर नब्बे। राष्ट्रीय मोर्चा, वाम मोर्चा और भाजपा का समर्थन। वी.पी. सिंह।
(रुकिए)
दो। नवंबर नब्बे से जून इक्यानबे। समाजवादी जनता पार्टी के नेतृत्व में, कांग्रेस का समर्थन। चंद्रशेखर।
(रुकिए)
तीन। जून इक्यानबे से मई छियानबे। कांग्रेस, एआईएडीएमके तथा अन्य दलों का समर्थन। पी.वी. नरसिम्हा राव।
(रुकिए)
चार। मई छियानबे से जून छियानबे। भाजपा, अल्पमत सरकार। अटल बिहारी वाजपेयी।
(रुकिए)
पाँच। जून छियानबे से अप्रैल सत्तानबे। संयुक्त मोर्चा, कांग्रेस का समर्थन। एच.डी. देवगौड़ा।
(रुकिए)
छह। अप्रैल सत्तानबे से मार्च अट्ठानबे। संयुक्त मोर्चा, कांग्रेस का समर्थन। इंद्रकुमार गुजराल।
(रुकिए)
सात। मार्च अट्ठानबे से अक्तूबर निन्यानबे। भाजपा-नीत राजग। अटल बिहारी वाजपेयी।
आठ। अक्तूबर निन्यानबे से मई दो हज़ार चार। भाजपा-नीत राजग। अटल बिहारी वाजपेयी।
(रुकिए)
नौ। मई दो हज़ार चार से मई दो हज़ार चौदह। कांग्रेस-नीत संप्रग। मनमोहन सिंह।
दस। मई दो हज़ार चौदह के बाद। भाजपा-नीत राजग। नरेंद्र मोदी।
(पाँच सेकंड रुकिए। फिर कहिए:)
इस सारणी पर एक नज़र डालिए। उन्नीस सौ नवासी से अट्ठानबे तक — नौ साल में छह प्रधानमंत्री। यह हाशिये पर लिख लीजिए। इसीलिए निन्यानबे की सरकार का पूरा कार्यकाल करना बड़ी बात थी।”
🎙 कालांश 3 · मंडल और दलित राजनीतिध्यान
बोलिए:
“उपशीर्षक लिखिए — तीन। अन्य पिछड़ा वर्ग का राजनीतिक उदय।
सबसे पहले परिभाषा। लिखिए और रेखांकित कीजिए।
अन्य पिछड़ा वर्ग, यानी ‘अदर बैकवर्ड क्लासेज़’, विचार-विवेचन की एक प्रशासनिक कोटि है।
(रुकिए)
यह अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति से अलग एक कोटि है, जिसमें शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों की गणना की जाती है।
(रुकिए)
हाशिये पर एक चेतावनी लिख लीजिए — ओबीसी और अनुसूचित जाति को कभी मत मिलाइए। यह परीक्षा में पूछा जाता है।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब लिखिए — मंडल आयोग।
दक्षिण के राज्यों में कम-से-कम उन्नीस सौ साठ के दशक से अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान चला आ रहा था। बहरहाल, यह नीति उत्तर भारत के राज्यों में लागू नहीं थी।
(रुकिए)
उन्नीस सौ सतहत्तर से उनासी की जनता पार्टी की सरकार के समय उत्तर भारत में पिछड़े वर्ग के आरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मज़बूती से आवाज़ उठाई गई। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर इस दिशा में अग्रणी थे।
(रुकिए)
इसके बाद केंद्र सरकार ने उन्नीस सौ अठहत्तर में एक आयोग बैठाया। आज़ादी के बाद यह दूसरा अवसर था, इसलिए आधिकारिक रूप से इसे ‘दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग’ कहा गया। आमतौर पर इसे इसके अध्यक्ष बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल के नाम पर ‘मंडल कमीशन’ कहा जाता है।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब सिफ़ारिशें। लिखिए —
आयोग ने उन्नीस सौ अस्सी में अपनी सिफ़ारिशें पेश कीं। इस वक्त तक जनता पार्टी की सरकार गिर चुकी थी।
(रुकिए)
आयोग ने एक सर्वेक्षण किया और पाया कि इन पिछड़ी जातियों की शिक्षा संस्थाओं तथा सरकारी नौकरियों में बड़ी कम मौजूदगी है।
(रुकिए)
अब मुख्य सिफ़ारिश। इसे बड़े अक्षरों में लिखिए।
इस वजह से आयोग ने इन समूहों के लिए शिक्षा संस्थाओं तथा सरकारी नौकरियों में सत्ताईस प्रतिशत सीट आरक्षित करने की सिफ़ारिश की।
(दोहराइए: सत्ताईस प्रतिशत। रुकिए।)
और अब वह बात जो सब भूल जाते हैं। इसके आगे तारा बनाइए।
मंडल आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग की स्थिति सुधारने के लिए कई और समाधान सुझाए, जिनमें भूमि-सुधार भी एक था।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब लागू होना। लिखिए —
उन्नीस सौ नब्बे के अगस्त में राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार ने मंडल आयोग की सिफ़ारिशों में से एक को लागू करने का फ़ैसला किया। यह सिफ़ारिश केंद्रीय सरकार और उसके उपक्रमों की नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के संबंध में थी।
(रुकिए)
सरकार के इस फ़ैसले से उत्तर भारत के कई शहरों में हिंसक विरोध का स्वर उमड़ा। इस फ़ैसले को सर्वोच्च न्यायालय में भी चुनौती दी गई और यह प्रकरण ‘इंदिरा साहनी केस’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
(रुकिए)
उन्नीस सौ बानबे के नवंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार के निर्णय को सही ठहराते हुए अपना फ़ैसला सुनाया।
(रुकिए)
और अंत में यह वाक्य, उद्धरण-चिह्न में —
बहरहाल अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के मसले पर देश के सभी बड़े राजनीतिक दलों में सहमति थी।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब नया उपशीर्षक — चार। दलित राजनीति।
उन्नीस सौ अठहत्तर में ‘बामसेफ’ — यानी बैकवर्ड एंड माइनॉरिटीज़ कम्युनिटीज़ एम्पलाइज़ फेडरेशन — का गठन हुआ। यह सरकारी कर्मचारियों का कोई साधारण-सा ट्रेड यूनियन नहीं था।
(रुकिए)
इस संगठन ने ‘बहुजन’ — यानी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों — की राजनीतिक सत्ता की ज़बरदस्त तरफ़दारी की।
(रुकिए। ‘बहुजन’ शब्द बोर्ड पर लिखिए और चारों घटक फिर बोलिए।)
इसी का परवर्ती विकास ‘दलित-शोषित समाज संघर्ष समिति’ है, जिससे बाद के समय में बहुजन समाज पार्टी का उदय हुआ। इस पार्टी की अगुआई कांशीराम ने की।
(रुकिए)
बसपा को शुरू में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दलित मतदाताओं का समर्थन हासिल था, लेकिन उन्नीस सौ नवासी और इक्यानबे के चुनावों में इस पार्टी को उत्तर प्रदेश में सफलता मिली।
(रुकिए)
अब एक ऐतिहासिक वाक्य। उद्धरण-चिह्न में, और दो तारे।
आज़ाद भारत में यह पहला मौका था, जब कोई राजनीतिक दल मुख्यतया दलित मतदाताओं के समर्थन के बूते ऐसी राजनीतिक सफलता हासिल कर पाया था।
(दस सेकंड रुकिए)
अंत में कांशीराम के बारे में लिखिए —
कांशीराम, उन्नीस सौ चौंतीस से दो हज़ार छह। बहुजन समाज के सशक्तीकरण के प्रतिपादक और बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक कार्य के लिए केंद्र सरकार की नौकरी से इस्तीफ़ा दिया। बामसेफ, डीएस-चार, और अंततः उन्नीस सौ चौरासी में बसपा की स्थापना। वे राजनीतिक सत्ता को सामाजिक समानता का आधार मानते थे।”
🎙 कालांश 4 · धर्मनिरपेक्षता और अयोध्याध्यान
(शुरू करने से पहले बोलिए:)
“आज का विषय संवेदनशील है। मैं जो बोलूँगा, वही लिखिए — न कम, न ज़्यादा। यह अध्याय हमें तथ्य देता है, और तथ्य ही हमारा काम है।”
बोलिए:
“उपशीर्षक लिखिए — पाँच। सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र।
आपातकाल के बाद भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी के साथ विलय हो गया था। जनता पार्टी के पतन और बिखराव के बाद पूर्ववर्ती जनसंघ के समर्थकों ने उन्नीस सौ अस्सी में भारतीय जनता पार्टी बनाई।
(रुकिए)
भाजपा ने गांधीवादी समाजवाद के साथ-साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को अपनी विचारधारा के रूप में अपनाया। किंतु उन्नीस सौ चौरासी के चुनावों में भाजपा को बहुत सफलता नहीं मिली।
(रुकिए)
उन्नीस सौ छियासी के बाद इस दल ने राष्ट्रवाद पर अपनी विचारधारा के केन्द्र के रूप में बल देना प्रारम्भ किया। भाजपा ने राजनीतिक लामबन्दी के लिए हिन्दुत्व की राजनीति को भी अपनाया।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब हिन्दुत्व की परिभाषा। यह पाठ्यपुस्तक की परिभाषा है — इसे शब्दशः लिखिए।
हिन्दुत्व को विनायक दामोदर सावरकर ने भारतीय राष्ट्रीयता के आधार के रूप में लोकप्रिय किया था।
(रुकिए)
इसका मूल आशय यह था कि एक भारतीय होने के लिए आवश्यक है कि वह भारतभूमि को अपनी ‘पितृभूमि’ और साथ ही ‘पुण्यभूमि’ भी स्वीकार करे।
(रुकिए। दोनों शब्द बोर्ड पर लिखिए।)
हिंदुत्व के विश्वासियों का तर्क है कि एक सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण एक संगठित राष्ट्रीय संस्कृति के आधार पर संभव है।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब लिखिए — उन्नीस सौ छियासी की दो घटनाएँ।
पहली, उन्नीस सौ पचासी का शाहबानो वाद।
इस प्रकरण में एक बासठ वर्षीय तलाकशुदा मुस्लिम महिला ने अपने भूतपूर्व पति से गुजारा भत्ता के लिए वाद किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने शाहबानो के पक्ष में निर्णय दिया।
(रुकिए)
पुरातन पंथी मुसलमानों ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ में हस्तक्षेप माना।
(रुकिए)
कुछ मुस्लिम नेताओं की मांग पर सरकार ने मुस्लिम महिला — तलाक से जुड़े अधिकारों का संरक्षण — अधिनियम, उन्नीस सौ छियासी पारित किया, जिसने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को निरस्त कर दिया।
(रुकिए)
अब दो प्रतिक्रियाएँ — दोनों लिखिए, एक भी छोड़िए मत।
सरकार के इस कार्य का अनेक महिला संगठनों, अनेक मुस्लिम समूहों तथा अधिकांश बुद्धिजीवियों ने विरोध किया।
(रुकिए)
भाजपा ने कांग्रेस सरकार के इस कार्य को अल्पसंख्यक समुदाय को दी गयी अनावश्यक छूट और उसका तुष्टिकरण बताकर आलोचना की।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब नया उपशीर्षक — अयोध्या विषय।
यह विषय श्री राम के जन्मस्थान, जोकि पवित्रतम धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है, के स्वामित्व से संबंधित विवाद था।
(रुकिए)
पंद्रह सौ अट्ठाईस से प्रारम्भ होकर पाँच सौ वर्ष के सुदीर्घ इतिहास में अनेक संघर्ष लखनऊ, बाराबंकी और फैजाबाद के गजेटियर में अंकित हैं।
(रुकिए)
अब एक समय-रेखा बनाइए। साल और घटना, आमने-सामने।
पंद्रह सौ अट्ठाईस — श्री राम के जन्मस्थान पर तीन-गुम्बद ढाँचा निर्मित किया गया।
अट्ठारह सौ अट्ठावन, अट्ठाईस नवंबर — निहंग सिखों ने जन्मभूमि स्थल पर नियंत्रण कर लिया तथा पूजन और हवन किया।
(रुकिए)
उन्नीस सौ उनचास — न्यायिक प्रक्रिया प्रारम्भ होने के कारण ढाँचे को सील कर दिया गया।
उन्नीस सौ छियासी — फैजाबाद, अब अयोध्या, जिला न्यायालय के एक निर्णय से ढाँचे का ताला खोल दिया गया और लोगों को वहाँ पूजा की अनुमति दे दी गई।
(रुकिए)
मन्दिर का शिलान्यास हुआ किन्तु आगे का निर्माण प्रतिबन्धित रहा।
उन्नीस सौ बानबे — ढांचे का ध्वंस। कुछ आलोचकों ने माना कि इस घटना ने भारतीय लोकतन्त्र के सिद्धान्तों को बड़ी चुनौती दी है।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब नया उपशीर्षक — विधिक कार्यवाही से मैत्रीपूर्ण स्वीकृति।
यह वाक्य लिखिए और रेखांकित कीजिए।
एक बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक लोकतांत्रिक समाज में इन विवादों का हल सामान्यतः विधि की उचित प्रक्रिया से होता है।
(रुकिए)
अनेक लोकतान्त्रिक और विधिक प्रक्रियाओं के ज़रिये — जिसमें न्यायालय में सुनवाईयां, मध्यस्थता के प्रयास तथा जन आन्दोलन सम्मिलित हैं — अन्ततः नौ नवम्बर दो हज़ार उन्नीस को उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक पीठ के पाँच-शून्य के निर्णय के फलस्वरूप अयोध्या विवाद का समाधान हो गया।
(दोहराइए: पाँच-शून्य। रुकिए।)
अब दोनों आदेश लिखिए।
एक। इस निर्णय ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को विवादित स्थल राम मन्दिर निर्माण के लिए आवंटित कर दिया।
दो। और संबंधित सरकार को सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को एक मस्जिद निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि आवंटित करने का आदेश दिया।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब सर्वोच्च न्यायालय का अवतरण। उद्धरण-चिह्न में लिखिए और हाशिये पर दो तारे बनाइए।
संविधान एक धर्म और दूसरे धर्म की आस्था और विश्वास के बीच अंतर नहीं करता है। सभी प्रकार के विश्वास, पूजा और प्रार्थना समान हैं।
(दस सेकंड मौन रहिए। फिर धीमे स्वर में कहिए:)
“यह वाक्य याद रखिए। धर्मनिरपेक्षता की इससे अच्छी परिभाषा पूरे पाठ्यक्रम में नहीं है।""
🎙 कालांश 5 · आँकड़े, सहमति और समापनध्यान
बोलिए:
“उपशीर्षक लिखिए — छह। एक नयी सहमति का उदय।
पहले एक सारणी बनाइए। तीन स्तंभ — वर्ष, भाजपा, कांग्रेस। दस पंक्तियाँ। सीटों की संख्या।
उन्नीस सौ चौरासी — दो और चार सौ पंद्रह।
(रुकिए। दोहराइए: भाजपा दो, कांग्रेस चार सौ पंद्रह।)
नवासी — पचासी और एक सौ सत्तानबे। इक्यानबे — एक सौ बीस और दो सौ बत्तीस। छियानबे — एक सौ साठ और एक सौ चालीस। अट्ठानबे — एक सौ बयासी और एक सौ इकतालीस।
(रुकिए)
निन्यानबे — एक सौ बयासी और एक सौ चौदह। दो हज़ार चार — एक सौ अड़तीस और एक सौ पैंतालीस। दो हज़ार नौ — एक सौ सोलह और दो सौ छह। दो हज़ार चौदह — दो सौ बयासी और चौवालीस। दो हज़ार उन्नीस — तीन सौ तीन और बावन।
(पाँच सेकंड रुकिए। फिर कहिए:)
अब सिर्फ़ दो पंक्तियाँ घेर दीजिए — पहली और आख़िरी। चौरासी में दो बनाम चार सौ पंद्रह। उन्नीस में तीन सौ तीन बनाम बावन। पैंतीस साल में पूरा पलटाव।
(रुकिए)
अब दूसरी सारणी — वोट में हिस्सा, प्रतिशत में। तीन स्तंभ — वर्ष, कांग्रेस, भाजपा।
चौरासी — अड़तालीस दशमलव एक, और सात दशमलव चार। नवासी — उनतालीस दशमलव पाँच, और ग्यारह दशमलव चार। इक्यानबे — छत्तीस दशमलव चार, और बीस दशमलव एक। छियानबे — अट्ठाईस दशमलव आठ, और बीस दशमलव तीन।
(रुकिए)
निन्यानबे — अट्ठाईस दशमलव तीन, और तेईस दशमलव आठ। दो हज़ार चार — छब्बीस दशमलव पाँच, और बाईस दशमलव दो। दो हज़ार नौ — अट्ठाईस दशमलव छह, और अठारह दशमलव आठ। दो हज़ार चौदह — उन्नीस दशमलव पाँच, और इकतीस दशमलव तीन। दो हज़ार उन्नीस — उन्नीस दशमलव पाँच, और सैंतीस दशमलव चार।
(रुकिए)
हाशिये पर एक नोट लिखिए — अट्ठानबे में दोनों रेखाएँ आरेख में मिल जाती हैं। वहाँ केवल एक अंक छपा है — पच्चीस दशमलव छह।
(रुकिए)
और अब पाठ्यपुस्तक का निष्कर्ष लिखिए —
उन्नीस सौ नवासी के चुनाव के बाद से, छियानबे, दो हज़ार चार और दो हज़ार नौ को छोड़कर, ज्यादातर समय दोनों पार्टियों — कांग्रेस और भाजपा — को मिले वोटों का योग पचास फीसदी से ज्यादा रहा है।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब दो हज़ार चार से उन्नीस तक। लिखिए —
दो हज़ार चार के चुनावों में कांग्रेस भी पूरे ज़ोर के साथ गठबंधन में शामिल हुई। राजग की हार हुई और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन — संप्रग — की सरकार बनी। संप्रग को वाम मोर्चा ने समर्थन दिया।
(रुकिए)
जुलाई दो हज़ार आठ में भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के मुद्दे पर वाम दलों ने समर्थन वापस ले लिया। इसके बावजूद संप्रग सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया।
(रुकिए)
दो हज़ार नौ में कांग्रेस की सीटों की संख्या में वृद्धि देखी गई — दो हज़ार चार में एक सौ पैंतालीस से दो हज़ार नौ में दो सौ छह। डॉ. मनमोहन सिंह ने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली।
(रुकिए)
सितंबर दो हज़ार तेरह में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया।
(रुकिए)
दो हज़ार चौदह में हुए सोलहवें लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने दम पर दो सौ बयासी सीटें जीतीं। तीस साल बाद एकल पार्टी बहुमत हासिल करने वाली पहली पार्टी बन गई।
(रुकिए)
अपने स्वयं के एकल दल के बहुमत के बावजूद, भाजपा ने अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ राजग सरकार बनाने का विकल्प चुना।
(रुकिए)
दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में भाजपा फिर से तीन सौ तीन सीटों के साथ विजयी हुई।
(रुकिए)
और अब वह वाक्य जिस पर यह पूरा खंड टिका है —
जब भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल रहा है तब भी गठबंधन की राजनीति की मान्यता अभी भी प्रासंगिक है।
(दस सेकंड रुकिए)
अब आख़िरी उपशीर्षक — सात। बढ़ती सहमति। चार बातें लिखिए, एक से चार।
एक। नयी आर्थिक नीति पर सहमति। कई समूह इसके खिलाफ़ हैं, लेकिन ज्यादातर राजनीतिक दल इन नीतियों के पक्ष में हैं।
(रुकिए)
दो। पिछड़ी जातियों के राजनीतिक और सामाजिक दावे की स्वीकृति। आज सभी राजनीतिक दल शिक्षा और रोज़गार में पिछड़ी जातियों के लिए सीटों के आरक्षण के पक्ष में हैं।
(रुकिए)
तीन। देश के शासन में प्रांतीय दलों की भूमिका की स्वीकृति। प्रांतीय दल और राष्ट्रीय दल का भेद अब लगातार कम होता जा रहा है।
(रुकिए)
चार। विचारधारा की जगह कार्यसिद्धि पर ज़ोर और विचारधारागत सहमति के बगैर राजनीतिक गठजोड़। अधिकतर दल भाजपा की ‘हिंदुत्व’ की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन ये दल भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल हुए और सरकार बनाई, जो पाँच साल तक चली।
(पाँच सेकंड रुकिए)
अब समापन। लिखिए —
जन आंदोलन और संगठन विकास के नए रूप, स्वप्न और तरीकों की पहचान कर रहे हैं। गरीबी, विस्थापन, न्यूनतम मज़दूरी, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा के मसले जन आंदोलनों के ज़रिए राजनीतिक एजेंडे के रूप में सामने आ रहे हैं। ये आंदोलन राज्य को उसकी ज़िम्मेदारियों के प्रति सचेत कर रहे हैं।
(रुकिए)
इसी तरह लोग जाति, लिंग, वर्ग और क्षेत्र के संदर्भ में न्याय तथा लोकतंत्र के मुद्दे उठा रहे हैं।
(रुकिए)
और अब इस पूरी पुस्तक का अंतिम वाक्य। इसे उद्धरण-चिह्न में लिखिए, रेखांकित कीजिए, और हाशिये पर दो तारे बनाइए।
(अब धीरे बोलिए)
हम विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि भारत में लोकतांत्रिक राजनीति जारी रहेगी…
(रुकिए)
…और यह राजनीति इस अध्याय में वर्णित कुछ चीज़ों के मंथन के बीच आकार ग्रहण करेगी।
(पंद्रह सेकंड मौन रहिए। फिर कॉपी बंद करवाइए और कहिए:)
“अब लिखना बंद कीजिए। सिर्फ़ सुनिए।
हमने यह पुस्तक शुरू की थी विभाजन और रियासतों के विलय से — जब यह तय भी नहीं था कि यह देश टिकेगा या नहीं। फिर हमने पढ़ा एक दल का प्रभुत्व, फिर उसका टूटना, फिर आपातकाल, फिर क्षेत्रीय आकांक्षाएँ, और अंत में गठबंधन का युग।
अगर इन आठ अध्यायों से एक बात याद रखनी हो, तो वह यह है — भारत ने हर बार अपनी समस्याओं का हल संविधान के भीतर ढूँढ़ा। आपातकाल का हल चुनाव से निकला। क्षेत्रीय आकांक्षाओं का हल समझौतों से। अयोध्या का हल न्यायालय से।
इसीलिए पाठ्यपुस्तक का यह अंतिम वाक्य भविष्यवाणी नहीं है। यह एक ज़िम्मेदारी है — और अब वह ज़िम्मेदारी आपकी है।""
📋 शिक्षक के लिए — श्रुतलेख की जाँच-सूची
- कालांश 1 की शुरुआत में पुरानी गाइड वाली चेतावनी दी
- हर संख्या दो बार बोली (इस अध्याय में यह अनिवार्य है)
- “जितनी सरकारें बनीं, सबने नयी आर्थिक नीति पर अमल जारी रखा” के बाद दस सेकंड रुके
- ★‘केंद्रीय सरकार 1989 के बाद’ की दसों पंक्तियाँ पूरे पन्ने पर लिखवाईं
- 1989 बनाम 1996 की तुलना-सारणी बनवाई
- OBC वाली चेतावनी हाशिये पर लिखवाई
- मंडल का ‘भूमि-सुधार’ वाला सुझाव भी बोला
- ‘बहुजन’ के चारों घटक दोहराए
- शाहबानो पर दोनों प्रतिक्रियाएँ बोलीं — एक भी नहीं छोड़ी
- अयोध्या की छह-पंक्ति समय-रेखा लिखवाई
- न्यायालय के अवतरण के बाद दस सेकंड मौन रखा
- दोनों आरेख पूरे उतरवाए
- बढ़ती सहमति की चारों बातें लिखवाईं
- ★अंतिम वाक्य के बाद पंद्रह सेकंड मौन, फिर समापन-भाषण दिया