अध्याय 3नियोजित विकास की राजनीति

श्रुतलेख15 मिनटस्रोत जाँचे गए

NCERT — स्वतंत्र भारत में राजनीति (पुस्तक 2), पृ. 44–53.

श्रुतलेख नोट्स — कक्षा 12, राजनीति विज्ञान

कक्षा में बोलकर लिखवाने हेतु। शब्दशः पाठ, गति और शब्द-बजट सहित।


शिक्षक के लिए — पहले यह पढ़ें

यह दस्तावेज़ पढ़ने के लिए नहीं, बोलने के लिए है।

चिह्नअर्थ
COREहमेशा लिखवाइए
EXTRAसमय बचे तभी लिखवाइए
कहिएकेवल बोलिए — यह कॉपी में नहीं जाता
लिखवाइएजैसा लिखा है वैसा ही बोलिए; विद्यार्थी यही लिखेगा
✓ बोर्ड परब्लॉक शुरू करने से पहले बोर्ड पर लिख दीजिए
उतारिएबोर्ड से उतरवाइए — तालिका कभी बोलकर मत लिखवाइए
⏸रुकिए, कक्षा को पकड़ने दीजिए
🔁यह पंक्ति दो बार बोलिए
⟨ ⟩विद्यार्थी की कॉपी में जो दिखना चाहिए

गति: विद्यार्थी लगभग 15–20 शब्द प्रति मिनट लिखता है। हर ब्लॉक पर समय और शब्द-बजट छपा है।

कुल बजट: CORE = लगभग 1,180 शब्द ≈ 66 मिनट (चारों कालांशों में बँटा)। EXTRA जोड़ने पर लगभग 1,520 शब्द। चार कालांश की योजना के हिसाब से बना है — देखिए 01-Lesson-Plan.md।

! इस अध्याय की एक विशेष सूचना: प्रश्नावली का प्रश्न 4 चरण सिंह, बिहार का अकाल और वर्गीज़ कूरियन पूछता है, जो पाठ में हैं ही नहीं (पाठ्यक्रम-युक्तिकरण में हटाए गए)। इन्हें लिखवाइए मत — केवल प्रश्न 4 का उत्तर बता दीजिए। विवरण 10-Verification-Log.md में।

कालांश 1 · ब्लॉक 1 — विकास एक राजनीतिक सवाल हैCORE

⏱ 7 मिनट · 118 शब्द

✓ बोर्ड पर पहले लिखें: उड़ीसा · पोस्को ⟨POSCO⟩ · लौह-अयस्क

कहिए (लिखवाइए नहीं):

“पिछले दो अध्यायों में हमने एकता और लोकतंत्र की चुनौती पढ़ी। आज तीसरी चुनौती — आर्थिक विकास। पर शुरुआत सिद्धांत से नहीं, एक असली झगड़े से करेंगे। उड़ीसा का उदाहरण सुनिए, फिर लिखेंगे।”

लिखवाइए:

1. इस्पात की विश्वव्यापी माँग बढ़ने पर उड़ीसा निवेश के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण जगह के रूप में उभरा, क्योंकि वहाँ लौह-अयस्क का विशाल भंडार था। ⏸

2. लौह-अयस्क के ज्यादातर भंडार उड़ीसा के सर्वाधिक अविकसित और आदिवासी-बहुल जिलों में हैं। 🔁

3. इस मामले में चार पक्षों के हित आपस में टकराते हैं — राज्य सरकार, आदिवासी, पर्यावरणविद और केंद्र सरकार। ⏸

कहिए:

“अब मैं चारों के हित बोलूँगा। इन्हें तालिका के रूप में बोर्ड से उतारिएगा — नीचे दे रहा हूँ।”

उतारिए — बोर्ड से (dictate मत कीजिए)CORE

⏱ 5 मिनट

पक्षउसका हित या भय
राज्य सरकारपूँजी-निवेश और रोज़गार
आदिवासीविस्थापन का डर; आजीविका छिनना
पर्यावरणविदखनन और उद्योग से प्रदूषण
केंद्र सरकारअनुमति न देने से बुरी मिसाल; निवेश को बाधा

कालांश 1 · ब्लॉक 2 — अध्याय का मूल वाक्यCORE

⏱ 6 मिनट · 96 शब्द

कहिए:

“अब वह वाक्य जिस पर पूरा अध्याय टिका है। यह परीक्षा में बार-बार काम आएगा — ध्यान से लिखिए।”

लिखवाइए:

1. इन सवालों के जवाब कोई विशेषज्ञ नहीं दे सकता, क्योंकि ऐसे फ़ैसलों में एक सामाजिक-समूह के हितों को दूसरे सामाजिक-समूह के हितों की तुलना में तौला जाता है। ⏸

2. साथ ही मौजूदा पीढ़ी के हितों और आने वाली पीढ़ी के हितों को भी लाभ-हानि की तुला पर मापना पड़ता है। ⏸

3. ★खनन, पर्यावरण और अर्थशास्त्र के विशेषज्ञों की राय जानना महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतिम निर्णय निश्चित तौर पर राजनीतिक निर्णय होना चाहिए। 🔁

4. जन-प्रतिनिधि जनता की भावनाओं को समझते हैं और जन-प्रतिनिधियों को ही ऐसे फ़ैसले लेने चाहिए।

कालांश 1 · ब्लॉक 3 — वामपंथ और दक्षिणपंथCORE

⏱ 5 मिनट · 82 शब्द

✓ बोर्ड पर पहले लिखें: वामपंथ ⟨Left⟩ · दक्षिणपंथ ⟨Right⟩

लिखवाइए:

1. वामपंथ से उन लोगों की तरफ़ संकेत किया जाता है जो अर्थव्यवस्था के राज्य नियंत्रण के पक्ष में हैं और मुक्त प्रतिस्पर्धा पर राज्य विनियमन को प्राथमिकता देते हैं। 🔁 ⏸

2. दक्षिणपंथ से उन लोगों को इंगित किया जाता है जो मानते हैं कि खुली प्रतिस्पर्धा और बाज़ारमूलक अर्थव्यवस्था के ज़रिए ही प्रगति हो सकती है — यानी सरकार को अर्थव्यवस्था में गैरज़रूरी हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। 🔁

कालांश 1 · ब्लॉक 4 — विकास की धारणाEXTRA

⏱ 4 मिनट · 68 शब्द

लिखवाइए:

1. जनता के विभिन्न तबकों के लिए ‘विकास’ के अर्थ अलग-अलग होते हैं, इसी कारण ‘विकास’ से जुड़ी कोई भी चर्चा विवादों से परे नहीं होती। ⏸

2. आज़ादी के बाद के पहले दशक में ‘विकास’ का अर्थ था ज्यादा-से-ज्यादा आधुनिक होना, और आधुनिक होने का अर्थ था पश्चिमी औद्योगिक देशों की तरह होना। ⏸

3. आधुनिकीकरण को संवृद्धि, भौतिक प्रगति और वैज्ञानिक तर्कबुद्धि का पर्यायवाची माना जाता था।

कालांश 2 · ब्लॉक 1 — विकास के दो मॉडलCORE

⏱ 7 मिनट · 112 शब्द

✓ बोर्ड पर पहले लिखें: उदारवादी-पूंजीवादी · समाजवादी · सोवियत संघ

कहिए:

“आज़ादी के वक्त दुनिया में विकास के दो रास्ते थे। भारत ने इनमें से किसी की नकल नहीं की — पर झुकाव किधर था, यह लिखिए।”

लिखवाइए:

1. आज़ादी के वक्त हिंदुस्तान के सामने विकास के दो मॉडल थे — पहला उदारवादी-पूंजीवादी मॉडल, जो यूरोप के अधिकतर हिस्सों और संयुक्त राज्य अमरीका में अपनाया गया था। ⏸

2. दूसरा समाजवादी मॉडल था, जिसे सोवियत संघ ने अपनाया था। ⏸

3. ★उस वक्त हिंदुस्तान में बहुत-से लोग विकास के सोवियत मॉडल से गहरे तौर पर प्रभावित थे — इनमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के ही नहीं, बल्कि सोशलिस्ट पार्टी और खुद कांग्रेस के नेहरू तक शामिल थे। 🔁 ⏸

4. अमरीकी तर्ज़ के पूँजीवादी विकास के पैरोकार बहुत कम थे।

कालांश 2 · ब्लॉक 2 — योजना आयोगCORE

⏱ 7 मिनट · 116 शब्द

✓ बोर्ड पर पहले लिखें: योजना आयोग ⟨Planning Commission⟩ · नीति आयोग ⟨NITI Aayog⟩

कहिए:

“यह बिंदु परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछा जाता है — योजना आयोग संवैधानिक निकाय नहीं था। ध्यान से।”

लिखवाइए:

1. ★योजना आयोग संविधान द्वारा स्थापित बाकी आयोगों अथवा दूसरे निकायों की तरह नहीं है। 🔁 ⏸

2. योजना आयोग की स्थापना मार्च उन्नीस सौ पचास ⟨मार्च 1950⟩ में भारत सरकार ने एक सीधे-सादे प्रस्ताव के जरिए की। ⏸

3. यह आयोग एक सलाहकार की भूमिका निभाता है और इसकी सिफ़ारिशें तभी प्रभावकारी हो पाती हैं जब मंत्रिमंडल उन्हें मंज़ूर करे। 🔁 ⏸

4. प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष बने। ⏸

5. भारत सरकार ने योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग की स्थापना की, जो एक जनवरी दो हज़ार पंद्रह ⟨1 जनवरी 2015⟩ को अस्तित्व में आया।

कालांश 2 · ब्लॉक 3 — नियोजन और बॉम्बे प्लानCORE

⏱ 7 मिनट · 114 शब्द

✓ बोर्ड पर पहले लिखें: बॉम्बे प्लान ⟨Bombay Plan⟩ · महामंदी

कहिए:

“अब वह बात जो सबको चौंकाती है — नियोजन की माँग उद्योगपतियों ने की थी, वामपंथियों ने नहीं।”

लिखवाइए:

1. मतभेदों के बावजूद एक बिंदु पर सभी सहमत थे कि विकास का काम निजी हाथों में नहीं सौंपा जा सकता और सरकार के लिए ज़रूरी है कि वह विकास का एक खाका अथवा योजना तैयार करे। ⏸

2. ★सन् उन्नीस सौ चवालीस ⟨1944⟩ में उद्योगपतियों के एक तबके ने एकजुट होकर देश में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया, जिसे बॉम्बे प्लान कहा जाता है। 🔁 ⏸

3. इस तरह चाहे दक्षिणपंथी हों अथवा वामपंथी, उस वक्त सभी चाहते थे कि देश नियोजित अर्थव्यवस्था की राह पर चले। 🔁

कालांश 2 · ब्लॉक 4 — पंचवर्षीय योजना का ढाँचाEXTRA

⏱ 5 मिनट · 84 शब्द

लिखवाइए:

1. सोवियत संघ की तरह भारत के योजना आयोग ने भी पंचवर्षीय योजनाओं का विकल्प चुना, जिसमें अगले पाँच सालों के लिए सरकार की आमदनी और खर्च की योजना होती थी। ⏸

2. बजट को दो हिस्सों में बाँटा गया — गैरयोजना-व्यय, जो सालाना आधार पर दैनंदिन मदों पर खर्च होता था, और योजना-व्यय, जो योजना की प्राथमिकताओं के अनुसार पाँच साल की अवधि में खर्च होता था। 🔁

कालांश 3 · ब्लॉक 1 — प्रथम पंचवर्षीय योजनाCORE

⏱ 8 मिनट · 128 शब्द

✓ बोर्ड पर पहले लिखें: के.एन. राज · भाखड़ा-नांगल · भूमि-सुधार

कहिए:

“पहली और दूसरी योजना का फ़र्क इस अध्याय का सबसे ज़रूरी सवाल है। पहले पहली योजना — तीन बातें।”

लिखवाइए:

1. प्रथम पंचवर्षीय योजना — सन् उन्नीस सौ इक्यावन से उन्नीस सौ छप्पन तक ⟨1951–1956⟩ — की कोशिश देश को गरीबी के मकड़जाल से निकालने की थी। ⏸

2. योजना को तैयार करने में जुटे विशेषज्ञों में एक के.एन. राज थे, जिनकी दलील थी कि अगले दो दशक तक भारत को अपनी चाल ‘धीमी’ रखनी चाहिए, क्योंकि तेज़ रफ़्तार विकास से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचेगा। 🔁 ⏸

3. ★पहली पंचवर्षीय योजना में ज्यादा ज़ोर कृषि-क्षेत्र पर था; इसी योजना के अंतर्गत बाँध और सिंचाई के क्षेत्र में निवेश किया गया। 🔁 ⏸

4. इस योजना में भूमि-सुधार पर ज़ोर दिया गया और उसे देश के विकास की बुनियादी चीज़ माना गया।

कालांश 3 · ब्लॉक 2 — दूसरी पंचवर्षीय योजनाCORE

⏱ 8 मिनट · 126 शब्द

✓ बोर्ड पर पहले लिखें: पी.सी. महालनोबिस ⟨P.C. Mahalanobis⟩ · भारतीय सांख्यिकी संस्थान

लिखवाइए:

1. दूसरी पंचवर्षीय योजना में भारी उद्योगों के विकास पर ज़ोर दिया गया। 🔁 ⏸

2. पी.सी. महालनोबिस के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों और योजनाकारों की एक टोली ने यह योजना तैयार की थी। ⏸

3. ★पहली योजना का मूलमंत्र था धीरज, लेकिन दूसरी योजना की कोशिश तेज़ गति से संरचनात्मक बदलाव करने की थी। 🔁 ⏸

4. सरकार ने देसी उद्योगों को संरक्षण देने के लिए आयात पर भारी शुल्क लगाया, जिससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र, दोनों के उद्योगों को आगे बढ़ने में मदद मिली। ⏸

5. बिजली, रेलवे, इस्पात, मशीनरी और संचार जैसे उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्र में विकसित किया गया।

उतारिए — बोर्ड से (dictate मत कीजिए)CORE

⏱ 6 मिनट

कहिए:

“यह तालिका पूरे अध्याय का सबसे अच्छा सबूत है। बोलकर नहीं लिखवाऊँगा — बोर्ड से उतारिए। देखिए कृषि नीचे गई और उद्योग ढाई गुना ऊपर।”

पहली और दूसरी पंचवर्षीय योजना में आबंटन (प्रतिशत में)

विकास का मदपहली योजनादूसरी योजना
कृषि और सामुदायिक विकास15.111.8
सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण1710.1
उद्योग और खनन7.618.5
परिवहन और संचार23.628.9
ऊर्जा11.18.9
सामाजिक सेवाएँ22.619.7
अन्य32.1

कालांश 3 · ब्लॉक 3 — दूसरी योजना की समस्याएँEXTRA

⏱ 5 मिनट · 88 शब्द

लिखवाइए:

1. भारत प्रौद्योगिकी के लिहाज से पिछड़ा हुआ था और विश्व बाज़ार से प्रौद्योगिकी खरीदने में उसे अपनी बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ी। ⏸

2. उद्योगों ने कृषि की अपेक्षा निवेश को ज्यादा आकर्षित किया, जिससे खाद्यान्न-संकट की आशंका सताने लगी। ⏸

3. आलोचकों ने ध्यान दिलाया कि इस समय से योजना की रणनीतियों में सीधे-सीधे शहरों की तरफ़दारी होती नज़र आती है।

कालांश 4 · ब्लॉक 1 — योजनाओं का कालक्रमCORE

⏱ 6 मिनट · 96 शब्द

लिखवाइए:

1. सन् उन्नीस सौ इक्यावन ⟨1951⟩ में प्रथम पंचवर्षीय योजना का प्रारूप जारी हुआ और इसी साल नवंबर में इस योजना का वास्तविक दस्तावेज़ भी जारी किया गया। ⏸

2. नियोजन को लेकर देश में जो गहमागहमी पैदा हुई थी, वह उन्नीस सौ छप्पन ⟨1956⟩ से चालू दूसरी पंचवर्षीय योजना के साथ अपने चरम पर पहुँच गई। ⏸

3. उन्नीस सौ इकसठ ⟨1961⟩ की तीसरी पंचवर्षीय योजना के समय तक यह माहौल जारी रहा। ⏸

4. ★चौथी पंचवर्षीय योजना उन्नीस सौ छियासठ ⟨1966⟩ से चालू होनी थी, लेकिन भारत गहन आर्थिक संकट की चपेट में आ चुका था, इसलिए सरकार ने पंचवर्षीय योजना को थोड़ी देर का विराम देने का फ़ैसला किया। 🔁

कालांश 4 · ब्लॉक 2 — विकेंद्रित नियोजन : केरल मॉडलCORE

⏱ 7 मिनट · 110 शब्द

✓ बोर्ड पर पहले लिखें: केरल मॉडल · नव लोकतांत्रिक पहल

कहिए:

“अब तक हमने केंद्रीकृत नियोजन पढ़ा। एक दूसरा रास्ता भी था — केरल का। इसका विरोधाभास ध्यान से सुनिए।”

लिखवाइए:

1. ज़रूरी नहीं कि हर नियोजन केंद्रीकृत ही हो; केरल में विकास और नियोजन के लिए जो रास्ता चुना गया उसे ‘केरल मॉडल’ कहा जाता है। ⏸

2. इस मॉडल में शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि-सुधार, कारगर खाद्य-वितरण और गरीबी-उन्मूलन पर ज़ोर दिया गया। 🔁 ⏸

3. ★केरल में प्रति व्यक्ति आय अपेक्षाकृत कम है और औद्योगिक-आधार भी कमज़ोर रहा है, इसके बावजूद वहाँ साक्षरता शत-प्रतिशत है, आयु प्रत्याशा बढ़ी है, तथा शिशु मृत्यु-दर, मातृ मृत्यु-दर और जन्म-दर कम हैं। 🔁 ⏸

4. सन् उन्नीस सौ सत्तासी से उन्नीस सौ इक्यानबे ⟨1987–1991⟩ के बीच सरकार ने ‘नव लोकतांत्रिक पहल’ नाम से अभियान चलाया।

कालांश 4 · ब्लॉक 3 — दो जीवनियाँEXTRA

⏱ 5 मिनट · 92 शब्द

✓ बोर्ड पर पहले लिखें: महालनोबिस · कुमारप्पा · कॉर्नेलियस · इकॉनोमी ऑफ़ परमानेंस

लिखवाइए:

1. पी.सी. महालनोबिस ⟨1893–1972⟩ — अंतरराष्ट्रीय स्तर के विख्यात वैज्ञानिक एवं सांख्यिकीविद; भारतीय सांख्यिकी संस्थान ⟨1931⟩ के संस्थापक; दूसरी पंचवर्षीय योजना के योजनाकार। ⏸

2. जे.सी. कुमारप्पा ⟨1892–1960⟩ — असली नाम जे.सी. कॉर्नेलियस; अर्थशास्त्री एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट; महात्मा गाँधी के अनुयायी; ‘इकॉनोमी ऑफ़ परमानेंस’ के लेखक; योजना आयोग के सदस्य। 🔁

कालांश 4 · ब्लॉक 4 — अध्याय का निचोड़CORE

⏱ 4 मिनट · 62 शब्द

कहिए:

“अंत में तीन पंक्तियाँ। यही पूरा अध्याय है — इन्हें अलग से रेखांकित कर लीजिए।”

लिखवाइए:

1. विकास कोई तकनीकी सवाल नहीं, राजनीतिक सवाल है, इसलिए अंतिम निर्णय जन-प्रतिनिधियों का होना चाहिए। ⏸

2. भारत ने न पूरा पूँजीवादी रास्ता चुना, न पूरा समाजवादी — उसने नियोजन का रास्ता चुना, जिसकी संस्था योजना आयोग थी और औज़ार पंचवर्षीय योजनाएँ। ⏸

3. पहली योजना कृषि पर केंद्रित थी और दूसरी उद्योग पर — यही मोड़ आगे की सारी बहस की जड़ है। 🔁

शिक्षक की जाँच-सूची

  • हर ब्लॉक के बोर्ड-शब्द कालांश शुरू होने से पहले लिख दिए
  • दोनों उतारिए वाली तालिकाएँ बोर्ड पर बनाईं — बोलकर नहीं लिखवाईं
  • CORE के सभी ब्लॉक हो गए; जो EXTRA छूटे वे 04-Revision-Notes.md में हैं — कक्षा को बता दीजिए
  • संख्याएँ शब्दों में बोलीं और अंक बोर्ड पर दिखाए (1951–1956, 15.1, 18.5, 1 जनवरी 2015)
  • ! चरण सिंह, बिहार का अकाल, वर्गीज़ कूरियन — लिखवाए नहीं; केवल प्रश्न 4 का उत्तर बताया
  • अंत में एक बार पूरा दोहराया, ताकि छूटी पंक्तियाँ भर ली जाएँ