कक्षा — 10 · विषय — राजनीति विज्ञान (लोकतांत्रिक राजनीति) · पृष्ठ — 1 से 12 · कालांश — 8, हर एक 40 मिनट
इस्तेमाल कैसे करें — हर कालांश की पूरी तैयारी उसके अपने कार्ड में है: किताब के पृष्ठ, स्लाइड, इंटरैक्टिव अध्याय, प्रश्न बैंक और फ़्लैशकार्ड। पहले “एक नज़र में” वाला चित्र और तालिका देखिए, फिर आज के कालांश का कार्ड खोलिए। कार्ड के हिस्से और शब्द, जैसे निकास-पर्ची, “तैयारी” वाली तालिका में समझाए गए हैं।
अध्याय का बड़ा विचार — पृष्ठ 2 के एक बुलबुले में यह समीकरण है: “सत्ता का बँटवारा = सत्ता के टुकड़े करना = देश को कमज़ोर करना।” अध्याय बेल्जियम और श्रीलंका की कहानियों से दिखाता है कि बहुसंख्यक समुदाय दूसरों को सत्ता में हिस्सेदार न बनाए, तो “देश की एकता ही संकट में पड़ सकती है” (पृष्ठ 5)। फिर किताब कहती है: “सत्ता की साझेदारी दरअसल लोकतंत्र की आत्मा है” (पृष्ठ 6)।
कालांश 8 में यही समीकरण उलटकर लिखिए, पृष्ठ 6 के शब्दों से: सत्ता का बँटवारा = टकराव का अंदेशा कम = राजनीतिक व्यवस्था में स्थायित्व।
एक नज़र में — आठ कालांश और उनकी सामग्री
पूरा अध्याय एक कहानी की तरह चलता है। हर तीर पर लिखा है कि अगला कालांश पिछले से क्यों निकलता है।
आठ कालांश, एक कहानी
सामग्री के पन्ने: स्लाइड का पाठ · स्लाइड शो · प्रश्न बैंक · फ़्लैशकार्ड · इंटरैक्टिव अध्याय
| कालांश और टॉपिक | पृष्ठ | स्लाइड | इंटरैक्टिव | प्रश्न बैंक | फ़्लैशकार्ड |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 · ग़लत समीकरण और दो देश | 1–3 | शुरू की तीन स्लाइड, फिर “दो देश, दो समस्याएँ” | शुरुआत, दो देश, दो समाज | क1–8 · ख1–4 · घ3 · ङ1 | 3–4, 13–21, 31–37 |
| 2 · श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद | 3–4 | “श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद” | श्रीलंका | क9–11 · ख5 · घ1, 2, 9 · ङ2–3 · च4 | 1–2, 38–42 |
| 3 · बेल्जियम की समझदारी | 4–5 | “बेल्जियम की समझदारी” | बेल्जियम | क12–14, 18 · ख6–7 · ग1, 3 · घ5 · ङ4 | 10, 22–30 |
| 4 · दोनों की तुलना और सबक़ | 5–6 | “दोनों से क्या सीखा” | — | ग2 · च2 | 58 |
| 5 · साझेदारी क्यों ज़रूरी है | 6 | “साझेदारी क्यों ज़रूरी है” | साझेदारी क्यों | क15, 20 · ग5 · घ4 · ङ5–6 · च3, 7 | 5–6, 43–48 |
| 6 · खलील की उलझन | 7 | “खलील की उलझन” | खलील | क19 · ङ7 | 54–57 |
| 7 · साझेदारी के रूप | 8–10 | “साझेदारी के चार रूप” | साझेदारी के रूप | क16–17 · ख8–10 · ग4 · घ6–8, 10 · ङ8 · च1, 6 | 7–9, 11–12, 49–53 |
| 8 · प्रश्नावली और समापन | 10–12 | “दोहराइए” | सार और अभ्यास | च5, फिर पूरा प्रश्न बैंक | पूरा डेक |
प्रश्न बैंक के कोड ऐसे पढ़िए: क1 मतलब खण्ड क (वस्तुनिष्ठ प्रश्न) का प्रश्न 1। ख रिक्त स्थान है, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय और च दीर्घ उत्तरीय प्रश्न। फ़्लैशकार्ड वाले खाने में कार्डों के नंबर हैं।
पढ़ाने से पहले
तैयारी — कार्ड में क्या-क्या है और उसे कैसे तैयार करें
हर कालांश का कार्ड इसी क्रम में चलता है। पहली बार पढ़ा रहे हैं तो यह तालिका एक बार पढ़ लीजिए।
| हिस्सा या औज़ार | यह क्या है | कैसे तैयार करें |
|---|---|---|
| किताब | NCERT की लोकतांत्रिक राजनीति, कक्षा 10, अध्याय 1 (2026-27 में छपी किताब)। कार्ड में आज के पृष्ठ लिखे हैं। | एक दिन पहले वे पृष्ठ खुद पढ़िए। कार्ड में तिरछे अक्षरों वाली पंक्तियाँ किताब के शब्द हैं; कक्षा में यही पढ़वानी हैं। |
| स्लाइड | इस अध्याय की प्रस्तुति का पाठ: हर स्लाइड पर क्या दिखाना और बोलना है। हर कालांश की स्लाइडें कौन-सी हैं, यह “एक नज़र में” वाली तालिका के “स्लाइड” खाने में लिखा है। | प्रोजेक्टर या स्मार्ट बोर्ड हो तो स्लाइड बनाने की ज़रूरत नहीं: स्लाइड शो खोलिए और पूरे पर्दे पर चलाइए। इंटरनेट का भरोसा न हो तो उसी पन्ने से PDF पहले ही डाउनलोड कर लीजिए। प्रोजेक्टर न हो तो भी कालांश चलेगा; कार्ड के चरण बोर्ड और किताब से हैं। |
| इंटरैक्टिव अध्याय | वेबसाइट पर इस अध्याय का पन्ना: नक्शे, छँटाई वाले खेल और छोटे सवाल। लॉगिन नहीं चाहिए। कार्ड का लिंक सीधे आज वाले हिस्से पर खुलता है। | कक्षा से पहले लिंक खोलकर देख लीजिए; कहाँ रुकना है, यह कार्ड में लिखा है। पर्दा न हो तो बच्चे इसे घर पर दोहराने के लिए खोल सकते हैं। |
| लक्ष्य | कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी क्या बता पाए। | पढ़ाने से पहले एक बार पढ़िए। निकास-पर्ची का सवाल इसी लक्ष्य को जाँचता है। |
| साथ ले जाइए | कक्षा में ले जाने वाली चीज़ें, जैसे नक्शा, चार्ट पेपर, पर्चियाँ। | एक दिन पहले जुटा लीजिए। |
| 40 मिनट | मिनट-दर-मिनट चरण। | समय अंदाज़े से है। कोई चरण लंबा खिंचे तो भी आख़िरी चरण मत छोड़िए; उसी में निकास-पर्ची है। |
| चित्र | डिब्बों और तीरों वाला चित्र, जो किसी उलझी बात को एक नज़र में दिखाता है। | पहले कागज़ पर एक बार बनाकर देखिए। बोर्ड पर ऊपर से नीचे बनाइए: एक डिब्बा, फिर तीर पर लिखा शब्द बोलिए, फिर अगला डिब्बा। हर चित्र के साथ PNG बटन है; उससे चित्र डाउनलोड करके छाप सकते हैं या पर्दे पर दिखा सकते हैं। |
| बोर्ड-कार्य | कालांश के अंत तक बोर्ड पर क्या बना हो। बच्चे इसे कॉपी में उतारते हैं। | कार्ड का चित्र देखकर बोर्ड पर जगह का अंदाज़ा पहले से कर लीजिए। बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जो बात अगले दिनों में काम आनी है, वह कॉपी में या चार्ट पर रहे। |
| यहाँ बच्चे अटकेंगे | आम ग़लतफ़हमियाँ, और कमज़ोर व तेज़ विद्यार्थियों के लिए सुझाव। | पढ़ाने से पहले पढ़ लीजिए, ताकि ग़लतफ़हमी आते ही पहचान सकें। |
| निकास-पर्ची | कालांश के आख़िरी चार-पाँच मिनट में एक-दो छोटे सवाल। हर विद्यार्थी जवाब कागज़ की छोटी पर्ची पर लिखता है और कक्षा से जाते समय आपको दे देता है। इससे उसी दिन पता चल जाता है कि आज की बात कितने बच्चों तक पहुँची। | कॉपी का आधा पन्ना काफ़ी है; सवाल बोर्ड पर लिख दीजिए। पर्चियाँ उसी दिन देखिए। जो बात ज़्यादा बच्चों ने ग़लत लिखी हो, उसे अगले कालांश की शुरुआत में दो मिनट दोहराइए। पर्ची पर अंक मत दीजिए; यह जाँच आपके अपने लिए है। |
| प्रश्न बैंक | वेबसाइट पर इस अध्याय के प्रश्न, उत्तर के साथ, छह खंडों में: क वस्तुनिष्ठ, ख रिक्त स्थान, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय, च दीर्घ उत्तरीय। “क1–8” का मतलब है खंड क के प्रश्न 1 से 8। | गृहकार्य के प्रश्न-संख्याएँ बोर्ड पर लिखिए। जिनके पास फ़ोन नहीं है, उनके लिए वे प्रश्न बोर्ड पर लिख दीजिए या छपवा लीजिए। |
| फ़्लैशकार्ड | दोहराने के लिए छोटे सवाल-जवाब। पन्ने पर हर कार्ड की संख्या (# वाला खाना) लिखी है। | बच्चों को कार्ड-संख्याएँ बता दीजिए। पन्ने पर “आता है / नहीं आता” वाला अभ्यास भी है, जो उसी फ़ोन या कंप्यूटर पर याद रखता है कि कौन-सा कार्ड कब दोहराना है। |
हर कालांश से पहले:
- आज के कार्ड में लिखे किताब के पृष्ठ पढ़िए।
- मिनट-दर-मिनट चरण और चित्र पढ़िए; चित्र एक बार कागज़ पर बनाइए।
- “साथ ले जाइए” वाली चीज़ें जुटाइए, और स्लाइड या इंटरैक्टिव अध्याय इस्तेमाल करना है तो लिंक खोलकर जाँच लीजिए।
- पिछले कालांश की निकास-पर्चियाँ देखिए; जो बात कमज़ोर रही, उसे आज की शुरुआत में दो मिनट दोहराइए।
पढ़ाने का क्रम: पहले सवाल, फिर नतीजा
यह अध्याय दो कहानियों पर टिका है, बेल्जियम और श्रीलंका की। किताब पहले दोनों देशों की समस्या बताती है, फिर पूछती है “ऐसी स्थिति में क्या हो सकता था?”, और उसके बाद बताती है कि असल में क्या हुआ।
इस क्रम को मत तोड़िए। अगर पहले दिन ही बता दिया कि श्रीलंका में गृहयुद्ध हुआ और बेल्जियम बचा रहा, तो बच्चों के पास अनुमान लगाने को कुछ नहीं बचेगा। कालांश 1 को पृष्ठ 3 के सवाल “ऐसी स्थिति में क्या हो सकता था?” पर रोकिए। किताब अगले ही वाक्यों में इसका जवाब देने लगती है, इसलिए वह पैरा पढ़वाने से पहले बच्चों से अनुमान लिखवाइए।
सामग्री — यह जुटा लीजिए
| # | क्या | किस कालांश में |
|---|---|---|
| 1 | विश्व का नक्शा या ग्लोब, बेल्जियम और श्रीलंका दिखाने के लिए | 1 |
| 2 | बोर्ड पर बनाने के लिए भारत का नक्शा (हरियाणा दिखाने के लिए; किताब दोनों देशों की तुलना हरियाणा से करती है) | 1 |
| 3 | चार पर्चियाँ, बेल्जियम मॉडल की चार बातें | 3 |
| 4 | चार पर्चियाँ, साझेदारी के चार रूप, कक्षा में टाँगने के लिए | 7 |
| 5 | अख़बार की कतरनें, किताब की गतिविधि (पृष्ठ 5) के लिए: एक हफ़्ते की लड़ाई-झगड़े की ख़बरें | प्रोजेक्ट 1 (नीचे “प्रोजेक्ट और गतिविधि”) |
| 6 | एक चार्ट पेपर और मोटा स्केच पेन, पहले दिन का समीकरण लिखकर कक्षा की दीवार पर टाँगने के लिए | 1 (कालांश 8 तक टँगा रहे) |
कक्षा-व्यवस्था
- बच्चों को 4–5 के समूहों में बैठाइए, पूरे अध्याय भर वही समूह।
- समीकरण चार्ट पर। पहले दिन का समीकरण चार्ट पेपर पर बड़े अक्षरों में लिखकर कक्षा की दीवार पर टाँगिए। बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जो बात आठों दिन दिखनी है, वह बोर्ड पर नहीं, चार्ट पर रहे। चार्ट टाँगना संभव न हो तो हर कालांश की शुरुआत में इसे बोर्ड के कोने में फिर लिख दीजिए।
- कॉपी का पहला पन्ना। हर विद्यार्थी अध्याय की कॉपी के पहले पन्ने पर यही समीकरण लिखे, और उसके नीचे दो कॉलम बनाए: बेल्जियम | श्रीलंका। कालांश 1 से 4 तक इन कॉलमों में बातें जुड़ती जाएँगी।
- बोर्ड हर कालांश में नया। हर कार्ड का “बोर्ड-कार्य” उसी कालांश में बनता है और कॉपी में उतरता है।
अधिगम प्रतिफल
| # | प्रतिफल | कालांश | जाँच |
|---|---|---|---|
| 1 | बेल्जियम और श्रीलंका की जातीय बनावट आँकड़ों के साथ बता पाएगा | 1 | निकास-पर्ची 1, कॉपी के दो कॉलम |
| 2 | बहुसंख्यकवाद की परिभाषा दे पाएगा और श्रीलंका की घटनाएँ सही क्रम में रख पाएगा | 2 | निकास-पर्ची 2 |
| 3 | बेल्जियम मॉडल की चार बातें बता पाएगा | 3 | चार पर्चियों वाली गतिविधि, निकास-पर्ची 3 |
| 4 | दोनों देशों की तुलना करके सबक़ निकाल पाएगा | 4 | तुलना-तालिका |
| 5 | युक्तिपरक और नैतिक तर्क में अंतर कर पाएगा और दोनों का उदाहरण दे पाएगा | 5 | निकास-पर्ची 5 |
| 6 | लेबनान की व्यवस्था पर दोनों पक्षों में तर्क दे पाएगा | 6 | मौखिक बहस |
| 7 | चारों रूप नाम और उदाहरण के साथ बता पाएगा | 7 | प्रश्न 1 का गृहकार्य (कालांश 8 में जाँच) |
| 8 | कोई भी दिया गया उदाहरण सही रूप के खाने में रख पाएगा | 7, 8 | पृष्ठ 10 की गतिविधि (कालांश 7), प्रश्न 8 (कालांश 8) |
| 9 | बता पाएगा कि सत्ता बाँटने से देश टूटता नहीं, जुड़ता है | 8 | पहले दिन का समीकरण उलटकर लिखवाकर |
कालांश-दर-कालांश
कालांश 1 — ग़लत समीकरण और दो देश
किताब — पृष्ठ 1–3 · स्लाइड — शुरू की तीन स्लाइड और “दो देश, दो समस्याएँ” वाला भाग · इंटरैक्टिव — शुरुआत, दो देश, दो समाज
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बेल्जियम और श्रीलंका की बनावट आँकड़ों के साथ बता पाए, और समझ ले कि किताब ब्रूसेल्स की समस्या को “एक विशेष तरह की समस्या” क्यों कहती है।
साथ ले जाइए — विश्व का नक्शा या ग्लोब, एक चार्ट पेपर और मोटा स्केच पेन। बोर्ड पर भारत का कच्चा नक्शा बनाकर हरियाणा दिखाइए, क्योंकि किताब दोनों देशों की तुलना हरियाणा से करती है।
40 मिनट
- 0–6 मिनट · समीकरण। चार्ट पेपर पर बड़े अक्षरों में लिखिए: “सत्ता का बँटवारा = सत्ता के टुकड़े करना = देश को कमज़ोर करना।” बताइए कि यह समीकरण पृष्ठ 2 के एक बुलबुले में है। पूछिए, “कौन-कौन इससे सहमत है?” हाथ गिनकर संख्या चार्ट के कोने में लिख दीजिए; कालांश 8 में फिर गिनेंगे। चार्ट दीवार पर टाँग दीजिए, और बच्चे यही समीकरण अध्याय की कॉपी के पहले पन्ने पर लिखें।
- 6–12 मिनट · अध्याय का परिचय। पृष्ठ 1 पढ़वाइए। किताब कहती है: “पहले तीन अध्यायों में हम सत्ता के बँटवारे पर सोच-विचार को आगे बढ़ाएँगे”, और सत्ता के बँटवारे के रूपों की चर्चा “अगले दो अध्यायों में” है। फिर बताइए कि शुरुआत दो देशों की कहानी से होगी।
- 12–22 मिनट · बेल्जियम। नक्शे पर दिखाइए और हरियाणा से मिलाइए: क्षेत्रफल में हरियाणा से भी छोटा, आबादी एक करोड़ से थोड़ी अधिक, यानी हरियाणा की करीब आधी। फिर भाषा वाले आँकड़े बोर्ड पर लिखिए (नीचे “बोर्ड-कार्य” का चित्र)।
- 22–30 मिनट · ब्रूसेल्स की उलझन। इस हिस्से में जल्दी मत कीजिए; नीचे का चित्र “ब्रूसेल्स की उलझन” बोर्ड पर बनाइए। पृष्ठ 2 की दो बातें पढ़वाइए: फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यक “तुलनात्मक रूप से ज़्यादा समृद्ध और ताकतवर रहे”, और डच-भाषियों को आर्थिक विकास और शिक्षा का लाभ “बहुत बाद में” मिला। फिर किताब की यह पंक्ति: “डच बोलने वाले लोग संख्या के हिसाब से अपेक्षाकृत ज़्यादा थे लेकिन धन और समृद्धि के मामले में कमज़ोर और अल्पमत में थे।” पूछिए: “गिनती में कौन ज़्यादा है, और पैसे में कौन आगे?”
- 30–36 मिनट · श्रीलंका। नक्शे पर दिखाइए: तमिलनाडु के दक्षिणी तट से कुछ किलोमीटर दूर का द्वीप, आबादी करीब दो करोड़, यानी हरियाणा के बराबर। भाषा के आँकड़े: सिंहली 74 फीसदी, तमिल 18 फीसदी। तमिलों के दो समूह हैं: श्रीलंकाई मूल के तमिल (13 फीसदी) और हिंदुस्तानी तमिल, “जो औपनिवेशिक शासनकाल में बागानों में काम करने के लिए भारत से लाए गए लोगों की संतान हैं” (पृष्ठ 3)। धर्म अलग से बताइए: अधिकतर सिंहली-भाषी बौद्ध हैं, तमिल-भाषियों में कुछ हिंदू और कुछ मुसलमान; ईसाई 7 फीसदी हैं और दोनों भाषाएँ बोलते हैं।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची, और यहीं रुकिए। पृष्ठ 3 का सवाल पढ़वाइए: “अब ज़रा सोचिए कि ऐसी स्थिति में क्या हो सकता था?” किताब अगले ही वाक्यों में इसका जवाब देने लगती है, इसलिए वह पैरा आज मत पढ़वाइए। हर विद्यार्थी पर्ची पर दो बातें लिखकर जाते समय आपको दे: (1) बेल्जियम में डच-भाषी पूरे देश में कितने फीसदी हैं, और ब्रूसेल्स में कितने? (2) ऊपर वाले सवाल पर दो पंक्ति में अपना अनुमान।
ब्रूसेल्स की उलझन (चरण 4)
गिनती किसकी, समृद्धि किसकी?
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह बने, और बच्चे इसे कॉपी के पहले पन्ने वाले दो कॉलमों में उतारें। बोर्ड मिट जाए तो भी बात कॉपी में रहेगी; कालांश 2 से 4 तक इन्हीं कॉलमों में जोड़ते जाइए।
दो देश, दो बनावटें
- डच-भाषी 59 फीसदी
- फ़्रेंच-भाषी 40 फीसदी
- जर्मन-भाषी 1 फीसदी
- सिंहली 74 फीसदी
- तमिल 18 फीसदी: श्रीलंकाई मूल के तमिल 13 फीसदी, बाक़ी हिंदुस्तानी तमिल
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “बहुसंख्यक हमेशा ताक़तवर होता है।” बेल्जियम इसी सोच को तोड़ता है: डच-भाषी गिनती में ज़्यादा थे, पर समृद्धि में पीछे, और राजधानी में गिनती में भी कम। यह उलझन जितनी अच्छी तरह बैठेगी, पूरा अध्याय उतना आसान होगा।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “दो देश, दो समाज” में देश वाली छँटाई (“हर बात को उसके देश के डिब्बे में डालिए”) तक ही जाइए। उसके ठीक नीचे वाला “अब ज़रा सोचिए” कार्ड किताब का जवाब बता देता है; उसे कालांश 2 में खोलिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो बातें काफ़ी हैं: “सिंहली 74, तमिल 18” और “डच ज़्यादा, फ़्रेंच अमीर”।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: पूरे देश में 59 फीसदी वाले डच-भाषी ब्रूसेल्स में सिर्फ़ 20 फीसदी क्यों हैं, और इससे राजधानी की समस्या “विशेष तरह की” कैसे बनती है?
- किसी धर्म या समुदाय पर अपनी ओर से टिप्पणी मत कीजिए; आँकड़े किताब के शब्दों में ही रखिए।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): पहले सवाल का उत्तर 59 और 20 है। पर्चियाँ उसी दिन देख लीजिए। जितने बच्चों ने यह ग़लत लिखा हो, उनके लिए कालांश 2 की शुरुआत में “ब्रूसेल्स की उलझन” वाला चित्र एक मिनट में फिर बनाइए। अनुमानों में से दो-तीन अलग रख लीजिए; कालांश 2 इन्हीं से शुरू होगा।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क1–8, ख1–4 और घ3; तेज़ विद्यार्थी ङ1 भी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 3–4, 13–21 और 31–37, और इंटरैक्टिव अध्याय की देश वाली छँटाई (उसकी आठों बातें पृष्ठ 2–3 से हैं)।
कालांश 2 — श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद
किताब — पृष्ठ 3–4 · स्लाइड — “श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद” वाला भाग · इंटरैक्टिव — दो देश, दो समाज का “अब ज़रा सोचिए” कार्ड, फिर श्रीलंका
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बहुसंख्यकवाद की किताब वाली परिभाषा अपने शब्दों में समझा पाए, और श्रीलंका की घटनाएँ सही क्रम में रख सके: 1948 में आज़ादी, 1956 का क़ानून, तमिलों की माँगें, गृहयुद्ध और 2009 में उसका अंत।
साथ ले जाइए — कालांश 1 की निकास-पर्चियों से अलग रखे दो-तीन अनुमान और विश्व का नक्शा। समीकरण वाला चार्ट दीवार पर ही टँगा रहने दीजिए।
40 मिनट
- 0–6 मिनट · अनुमान से शुरुआत। जिन बच्चों ने कल की पर्ची में 59 और 20 ग़लत लिखा था, उनके लिए पहले “ब्रूसेल्स की उलझन” वाला चित्र एक मिनट में फिर बनाइए। फिर पर्चियों से दो-तीन अनुमान बिना नाम लिए पढ़कर सुनाइए। फिर पृष्ठ 3 का वह पैरा पढ़वाइए जो कल रोका था। उसमें किताब ख़ुद अनुमान लगाती है कि बेल्जियम में डच-भाषी “अपनी इच्छाएँ थोप सकते थे”, और “संभव था इससे देश बँट जाता और ब्रूसेल्स पर दोनों पक्ष अपना-अपना दावा ठोकते”। बच्चों के अनुमान इससे मिलाइए। पैरा के आख़िर में किताब कहती है कि अब देखें असल में क्या हुआ; आज श्रीलंका की बारी है।
- 6–12 मिनट · 1948 और एक नया शब्द। किताब बताती है: “सन् 1948 में श्रीलंका स्वतंत्र राष्ट्र बना”, और “सिंहली समुदाय के नेताओं ने अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा।” यहीं पृष्ठ 3 के हाशिये वाली परिभाषा पढ़वाइए। बहुसंख्यकवाद: “यह मान्यता कि अगर कोई समुदाय बहुसंख्यक है तो वह अपने मनचाहे ढंग से देश का शासन कर सकता है और इसके लिए वह अल्पसंख्यक समुदाय की ज़रूरत या इच्छाओं की अवहेलना कर सकता है।” बच्चे इसे कॉपी के श्रीलंका वाले कॉलम में ज्यों-की-त्यों उतारें। फिर पूछिए: इस परिभाषा के दो हिस्से कौन-से हैं?
- 12–20 मिनट · एक के बाद एक फ़ैसले। नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाते चलिए। पृष्ठ 3 के तीन फ़ैसले पढ़वाइए: “1956 में एक कानून बनाया गया जिसके तहत तमिल को दरकिनार करके सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया”; “विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता देने की नीति भी चली”; और “नए संविधान में यह प्रावधान भी किया गया कि सरकार बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा देगी”। बच्चों को बताइए कि साल सिर्फ़ पहले फ़ैसले का दिया गया है। फिर तमिलों की भावना: उन्हें लगा कि “बौद्ध धर्मावलंबी सिंहलियों के नेतृत्व वाली सारी राजनीतिक पार्टियाँ उनकी भाषा और संस्कृति को लेकर असंवेदनशील हैं”, और “नौकरियों और फ़ायदे के अन्य कामों में उनके साथ भेदभाव हो रहा है”। किताब का निचोड़: “एक-एक करके आए इन सरकारी फैसलों ने श्रीलंकाई तमिलों की नाराज़गी और शासन को लेकर उनमें बेगानापन बढ़ाया।”
- 20–27 मिनट · सरकार तो चुनी हुई थी। किताब कहती है कि ये क़दम एक “लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार” ने उठाए। पूछिए: “सरकार चुनाव जीतकर आई थी। फिर भी क्या यह ठीक था?” फिर पृष्ठ 4 का बुलबुला पढ़वाइए: “बहुसंख्यक समुदाय के शासन में क्या हर्ज है? अगर श्रीलंका में सिंहलियों का राज नहीं होगा तो किसका राज होगा?” दोनों तरह की राय सुनिए, पर अपना फ़ैसला मत सुनाइए। बच्चे यह सवाल कॉपी में लिख लें; कालांश 5 में पृष्ठ 6 के पहले तर्क से इस पर लौटेंगे।
- 27–35 मिनट · माँगों से गृहयुद्ध तक। यह हिस्सा शांत आवाज़ में पढ़ाइए। पृष्ठ 4: तमिलों ने “तमिल को राजभाषा बनाने, क्षेत्रीय स्वायत्तता हासिल करने तथा शिक्षा और रोज़गार में समान अवसरों की माँग” की। “तमिलों की आबादी वाले इलाके की स्वायत्तता की उनकी माँगों को लगातार नकारा गया। 1980 के दशक तक उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल ईलम (सरकार) बनाने की माँग को लेकर अनेक राजनीतिक संगठन बने।” दोनों समुदायों का आपसी अविश्वास बड़े टकराव में बदला और यह टकराव गृहयुद्ध बन गया। हाशिये की परिभाषा, गृहयुद्ध: “किसी मुल्क में सरकार विरोधी समूहों की हिंसक लड़ाई ऐसा रूप ले ले कि वह युद्ध सा लगे तो उसे गृहयुद्ध कहते हैं।” नतीजे: “दोनों पक्ष के हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं”, अनेक परिवार शरणार्थी बने, और “कई गुना ज़्यादा लोगों की रोज़ी-रोटी चौपट हो गई है”। आख़िर में: “2009 में इस गृहयुद्ध का अंत हुआ।”
- 35–40 मिनट · निकास-पर्ची। बोर्ड पर चार घटनाएँ उलटे-पुलटे क्रम में लिखिए: “तमिल ईलम के लिए संगठन बने”, “गृहयुद्ध का अंत”, “श्रीलंका आज़ाद हुआ”, “सिंहली एकमात्र राजभाषा बनी”। हर विद्यार्थी पर्ची पर (1) इन्हें सही क्रम में लिखे, और (2) बहुसंख्यकवाद का मतलब एक पंक्ति में अपने शब्दों में।
श्रीलंका: आज़ादी से गृहयुद्ध के अंत तक (चरण 3 और 5)
एक के बाद एक फ़ैसले, फिर टकराव
बोर्ड-कार्य
ऊपर वाला चित्र ही आज का बोर्ड-कार्य है। बच्चे कॉपी के श्रीलंका वाले कॉलम में उसका छोटा रूप उतारें:
श्रीलंका वाला कॉलम, कालांश 2
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “जिसे बहुमत मिला, वह जो चाहे करे; यही तो लोकतंत्र है।” यही किताब के बुलबुले वाला सवाल है (पृष्ठ 4)। आज इसे खुला छोड़िए। कालांश 5 में पृष्ठ 6 के युक्तिपरक तर्क से इस पर लौटेंगे।
- “श्रीलंका टूट गया।” नहीं। किताब गृहयुद्ध की बात करती है, और बताती है कि 2009 में उसका अंत हुआ (पृष्ठ 4)।
- “तमिलों की सारी माँगें लगातार ठुकराई गईं।” किताब “लगातार नकारा गया” सिर्फ़ स्वायत्तता की माँगों के लिए कहती है (पृष्ठ 4)।
- तीनों फ़ैसलों के साल। किताब सिर्फ़ 1956 देती है। बाक़ी दो का साल अपनी ओर से मत जोड़िए।
- दो तरह के तमिल। इस हिस्से में किताब “श्रीलंकाई तमिलों” की बात करती है (पृष्ठ 3)। कालांश 1 के दोनों समूह एक बार फिर याद दिलाइए।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो चरण 1 में “दो देश, दो समाज” का “अब ज़रा सोचिए” कार्ड खोलिए, और चरण 3 से “श्रीलंका” वाला हिस्सा।
- किसी धर्म या समुदाय को दोषी मत ठहराइए; किताब फ़ैसलों और नेताओं की बात करती है।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए इतना काफ़ी है: “1948, 1956, 2009” और परिभाषा के दो हिस्से।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: सरकार चुनी हुई थी, फिर भी तमिलों में बेगानापन क्यों बढ़ा? जवाब किताब के शब्दों से दें।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): सही क्रम है: श्रीलंका आज़ाद हुआ (1948) → सिंहली एकमात्र राजभाषा बनी (1956) → तमिल ईलम के लिए संगठन बने (1980 का दशक) → गृहयुद्ध का अंत (2009)। जिनका क्रम गड़बड़ हो, उनके लिए कालांश 3 की शुरुआत में इसी कालांश का “श्रीलंका वाला कॉलम” चित्र एक मिनट में दोहराइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क9–11, ख5, और घ1, घ2, घ9; तेज़ विद्यार्थी ङ2–3 और च4 भी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 1–2 और 38–42।
कालांश 3 — बेल्जियम की समझदारी
किताब — पृष्ठ 4–5 · स्लाइड — “बेल्जियम की समझदारी” वाला भाग · इंटरैक्टिव — बेल्जियम
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बेल्जियम मॉडल की चार बातें बता पाए, और समझा पाए कि ब्रूसेल्स में किसने क्या माना और क्यों।
साथ ले जाइए — चार पर्चियाँ, हर एक पर मॉडल की एक बात (नीचे चरण 3 में लिखी हैं)। कालांश 1 वाले “ब्रूसेल्स की उलझन” के आँकड़े याद रखिए: पूरे देश में डच-भाषी 59 फीसदी, ब्रूसेल्स में फ़्रेंच-भाषी 80 फीसदी।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · अलग रास्ता। जिनकी कल की पर्ची में क्रम गड़बड़ था, उनके लिए पहले कालांश 2 वाला “श्रीलंका वाला कॉलम” चित्र एक मिनट में दोहराइए। फिर: कल पृष्ठ 3 पर पढ़ा था कि बेल्जियम में डच-भाषी अपनी इच्छाएँ थोप सकते थे। आज पृष्ठ 4: “बेल्जियम के नेताओं ने श्रीलंका से अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया। उन्होंने क्षेत्रीय अंतरों और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार किया।”
- 5–10 मिनट · चार संशोधन। पृष्ठ 4: “1970 और 1993 के बीच उन्होंने अपने संविधान में चार संशोधन सिर्फ़ इस बात के लिए किए कि देश में रहने वाले किसी भी आदमी को बेगानेपन का अहसास न हो और सभी मिल-जुलकर रह सकें।” बच्चों का ध्यान “बेगानापन” शब्द पर दिलाइए: कल श्रीलंका में तमिलों का बेगानापन बढ़ा था; बेल्जियम ने उसी को रोकने के लिए संविधान बदला। किताब आगे कहती है: “उन्होंने इसके लिए जो व्यवस्था की वह बहुत ही कल्पनाशील है तथा कोई और देश ऐसा नहीं कर पाया।”
- 10–22 मिनट · चार पर्चियाँ। कक्षा को चार टोलियों में बाँटिए; हर टोली को एक पर्ची दीजिए। टोली पृष्ठ 4–5 में अपनी बात ढूँढ़कर पढ़े और दो मिनट में बाक़ी कक्षा को समझाए। पर्चियाँ:
- केंद्र सरकार: डच और फ़्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या बराबर; और “कुछ विशेष कानून तभी बन सकते हैं जब दोनों भाषायी समूह के सांसदों का बहुमत उसके पक्ष में हो”।
- राज्य सरकारें: “केंद्र सरकार की अनेक शक्तियाँ देश के दो इलाकों की क्षेत्रीय सरकारों को सुपुर्द कर दी गई हैं यानी राज्य सरकारें केंद्रीय सरकार के अधीन नहीं हैं”।
- ब्रूसेल्स: “ब्रूसेल्स में अलग सरकार है और इसमें दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व है।”
- सामुदायिक सरकार (पृष्ठ 5): “केंद्रीय और राज्य सरकारों के अलावा यहाँ एक तीसरे स्तर की सरकार भी काम करती है यानी सामुदायिक सरकार। इस सरकार का चुनाव एक ही भाषा बोलने वाले लोग करते हैं।” यह सरकार संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर फ़ैसले करती है।
- 22–30 मिनट · ब्रूसेल्स का लेन-देन। नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए। पृष्ठ 4 का वाक्य पढ़वाइए: “फ़्रेंच-भाषी लोगों ने ब्रूसेल्स में समान प्रतिनिधित्व के इस प्रस्ताव को स्वीकार किया क्योंकि डच-भाषी लोगों ने केंद्रीय सरकार में बराबरी का प्रतिनिधित्व स्वीकार किया था”। फिर पूछिए: “पूरे देश में बहुमत किसका है? ब्रूसेल्स में किसका? दोनों ने बदले में क्या माना?”
- 30–35 मिनट · नतीजा। पृष्ठ 5: “पर यह व्यवस्था बेहद सफल रही है। इससे मुल्क में गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लग गया है वरना गृहयुद्ध की स्थिति में बेल्जियम भाषा के आधार पर दो टुकड़ों में बँट गया होता।” एक तथ्य और: “जब अनेक यूरोपीय देशों ने साथ मिलकर यूरोपीय संघ बनाने का फैसला किया तो ब्रूसेल्स को उसका मुख्यालय चुना गया।” किताब यह भी मानती है: “आपको बेल्जियम का मॉडल कुछ जटिल लग सकता है। निश्चित रूप से यह जटिल है”। फिर पृष्ठ 4 का बुलबुला पढ़वाइए: “भला यह भी कोई समाधान हुआ? मुझे इस बात की खुशी है कि हमारा संविधान ऐसी बातें नहीं कहता कि किस समुदाय से कितने मंत्री होंगे।” दो-तीन बच्चों से पूछिए कि वे बुलबुले वाले से सहमत हैं या नहीं, और क्यों। फ़ैसला कल की तुलना पर छोड़िए।
- 35–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखे: (1) मॉडल की चार बातें, एक-एक पंक्ति में; (2) ब्रूसेल्स में फ़्रेंच-भाषियों ने क्या माना, और क्यों?
ब्रूसेल्स का लेन-देन (चरण 4)
किसने क्या माना?
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह बने, और बच्चे इसे कॉपी के बेल्जियम वाले कॉलम में उतारें।
बेल्जियम वाला कॉलम, कालांश 3
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- सामुदायिक सरकार। यह किसी इलाक़े की नहीं, एक भाषा बोलने वालों की सरकार है: इसे एक ही भाषा बोलने वाले लोग चुनते हैं, और यह संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर फ़ैसले करती है (पृष्ठ 5)। हमारी ओर से एक कल्पना, सिर्फ़ समझाने के लिए: सोचिए कि एक भाषा बोलने वाले लोग अपनी भाषा के स्कूलों और किताबों के लिए अलग से एक सरकार चुनें।
- “बेल्जियम ने चार संविधान बनाए।” नहीं; एक ही संविधान में चार संशोधन हुए (पृष्ठ 4)।
- ब्रूसेल्स में किसने क्या माना, यह अक्सर उलट जाता है। फ़्रेंच-भाषियों ने ब्रूसेल्स में बराबरी मानी, क्योंकि डच-भाषियों ने केंद्र में बराबरी मानी थी (पृष्ठ 4)।
- “ब्रूसेल्स को इनाम में यूरोपीय संघ का मुख्यालय मिला।” किताब बस इतना कहती है कि मुख्यालय “चुना गया”; इसका कारण वह नहीं बताती (पृष्ठ 5)।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो चरण 3 और 4 में “बेल्जियम” वाला हिस्सा खोलिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए चार शब्द काफ़ी हैं: केंद्र, राज्य, ब्रूसेल्स, सामुदायिक सरकार।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: चरण 5 वाले बुलबुले (पृष्ठ 4) की बात का आप क्या जवाब देंगे? जवाब पृष्ठ 5 की बात से दें।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) केंद्र में डच और फ़्रेंच मंत्री बराबर; राज्य सरकारें केंद्र के अधीन नहीं; ब्रूसेल्स में अलग सरकार और समान प्रतिनिधित्व; सामुदायिक सरकार। (2) फ़्रेंच-भाषियों ने ब्रूसेल्स में समान प्रतिनिधित्व माना, क्योंकि डच-भाषियों ने केंद्र में बराबरी मानी थी। जिन्होंने दूसरा उत्तर उलट दिया हो, उनके लिए कालांश 4 की शुरुआत में “ब्रूसेल्स का लेन-देन” दो मिनट फिर बनाइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क12–14, क18, ख6–7, ग1, ग3 और घ5; तेज़ विद्यार्थी ङ4 भी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 10 और 22–30।
कालांश 4 — तुलना और सबक़
किताब — पृष्ठ 5–6 · स्लाइड — “दोनों से क्या सीखा” वाला भाग · इंटरैक्टिव — इस कालांश में नहीं; आज का काम कॉपी की तालिका है
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी दोनों देशों की चार बातों में तुलना कर पाए, और किताब का सबक़ किताब के शब्दों में बता पाए।
साथ ले जाइए — बच्चों की कॉपियाँ, जिनमें कालांश 2 और 3 के श्रीलंका और बेल्जियम वाले कॉलम हैं। समीकरण वाला चार्ट दीवार पर ही रहने दीजिए; आज उस पर लौटना है।
40 मिनट
- 0–4 मिनट · कल की पर्चियाँ। जिन बच्चों ने ब्रूसेल्स वाला उत्तर उलट दिया था, उनके लिए “ब्रूसेल्स का लेन-देन” दो मिनट फिर बनाइए। फिर पूछिए: “दोनों देशों में बहुमत किसका था, और बहुमत वालों के नेताओं ने क्या चुना?”
- 4–18 मिनट · तुलना-तालिका। कक्षा को चार टोलियों में बाँटिए। हर टोली कॉपी में नीचे वाली तालिका बनाए और अपने कॉलम-नोट्स से भरे। पहली दो टोलियाँ “बनावट” और “समस्या” वाली पंक्तियाँ बोलकर सुनाएँ, बाक़ी दो “सरकार ने क्या किया” और “नतीजा”। आप बोर्ड पर तालिका भरते चलिए; बच्चे अपनी कॉपी सुधारें।
- 18–25 मिनट · किताब का सबक़। पृष्ठ 5 पढ़वाइए: “दोनों ही देश लोकतांत्रिक हैं। फिर भी सत्ता में साझेदारी के सवाल को उन्होंने अलग-अलग ढंग से निपटाने की कोशिश की। बेल्जियम के नेताओं को लगा कि विभिन्न समुदाय और क्षेत्रों की भावनाओं का आदर करने पर ही देश की एकता संभव है।” फिर: “श्रीलंका में ठीक उलटा रास्ता अपनाया गया।” और सबक़: “अगर बहुसंख्यक समुदाय दूसरों पर प्रभुत्व कायम करने और सत्ता में उनको हिस्सेदार न बनाने का फैसला करता है तो इससे देश की एकता ही संकट में पड़ सकती है।” बच्चे “भावनाओं का आदर” और “प्रभुत्व कायम करने” के नीचे लकीर खींचें, और आख़िरी वाक्य तालिका के नीचे कॉपी में उतारें।
- 25–30 मिनट · चार्ट वाले समीकरण पर लौटिए। चार्ट की ओर इशारा कीजिए: “सत्ता का बँटवारा = सत्ता के टुकड़े करना = देश को कमज़ोर करना”। पूछिए: “बेल्जियम ने सत्ता बाँटी। क्या देश कमज़ोर हुआ?” तालिका की “नतीजा” वाली पंक्ति से जवाब निकलवाइए: वहाँ गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लगा (पृष्ठ 5)। “श्रीलंका ने नहीं बाँटी। वहाँ क्या हुआ?” गृहयुद्ध (पृष्ठ 4)। समीकरण आज काटिए मत; बच्चे बस कॉपी में लिखें: “दो देशों का अनुभव इस समीकरण से मेल नहीं खाता।” नया समीकरण कालांश 5 के तर्कों के बाद, कालांश 8 में लिखा जाएगा।
- 30–36 मिनट · एनिते और सेलवी। पृष्ठ 6 का बॉक्स पढ़वाइए: “एनिते बेल्जियम के उत्तरी इलाके के एक डच माध्यम के स्कूल में पढ़ती है। फ़्रेंच बोलने वाले उसके अनेक स्कूली साथी चाहते हैं कि पढ़ाई फ़्रेंच में ही हो। सेलवी श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के एक स्कूल में पढ़ती है। वह और उसके स्कूल के बहुत से दोस्त तमिल-भाषी हैं और इनके माता-पिता पढ़ाई का माध्यम तमिल ही रखना चाहते हैं।” फिर किताब का सवाल: “कौन-सी सरकार एनिते और सेलवी के माता-पिता की इच्छा पूरी कर सकती है? किसे सफलता मिलने की संभावना अधिक है और क्यों?” जोड़ियों में दो-दो पंक्तियों का जवाब, और उसके साथ किताब का कोई एक सबूत।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखे: (1) दोनों देशों के नतीजे में एक फ़र्क़; (2) किताब का सबक़ एक पंक्ति में।
दो रास्ते, एक सबक़ (चरण 3)
दो रास्ते, एक सबक़
बोर्ड-कार्य
बोर्ड पर यह तालिका भरती चले; बच्चों की कॉपी में यही पूरी तालिका रहे, क्योंकि बोर्ड अगले कालांश में मिट जाएगा। नीचे आपके मिलान के लिए भरी हुई तालिका है।
| बेल्जियम | श्रीलंका | |
|---|---|---|
| बनावट (पृष्ठ 2) | डच-भाषी 59 फीसदी, फ़्रेंच-भाषी 40, जर्मन-भाषी 1; ब्रूसेल्स में फ़्रेंच-भाषी 80 फीसदी | सिंहली 74 फीसदी, तमिल 18 फीसदी (इनमें श्रीलंकाई मूल के तमिल 13 फीसदी) |
| समस्या (पृष्ठ 2–3) | फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यक ज़्यादा समृद्ध और ताक़तवर रहे; डच-भाषियों को आर्थिक विकास और शिक्षा का लाभ बहुत बाद में मिला; 1950 और 1960 के दशक में तनाव | सिंहली नेताओं ने बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा |
| सरकार ने क्या किया (पृष्ठ 3–5) | 1970 से 1993 के बीच संविधान में चार संशोधन; केंद्र, राज्य, ब्रूसेल्स और सामुदायिक सरकार में साझेदारी | 1956 में सिंहली एकमात्र राजभाषा; विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता; बौद्ध मत को संरक्षण; स्वायत्तता की माँगें नकारी गईं |
| नतीजा (पृष्ठ 4–5) | व्यवस्था बेहद सफल; गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम | गृहयुद्ध; हज़ारों लोग मारे गए; 2009 में उसका अंत |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “बेल्जियम अच्छा देश है, श्रीलंका बुरा।” किताब देशों या लोगों को अच्छा-बुरा नहीं कहती। वह दो फ़ैसलों की तुलना करती है, और शुरुआत ही इससे करती है कि दोनों देश लोकतांत्रिक हैं (पृष्ठ 5)।
- “श्रीलंका दो टुकड़ों में बँट गया।” नहीं। वहाँ गृहयुद्ध हुआ और 2009 में उसका अंत हुआ (पृष्ठ 4)। “दो टुकड़ों में बँट गया होता” किताब बेल्जियम के लिए कहती है, और “वरना” के साथ: यानी ऐसा हुआ नहीं (पृष्ठ 5)।
- “साझेदारी के इनाम में ब्रूसेल्स को यूरोपीय संघ का मुख्यालय मिला।” किताब इन दोनों बातों को कारण और नतीजे की तरह नहीं जोड़ती (पृष्ठ 5)।
- “बेल्जियम में डच-भाषियों ने फ़्रेंच-भाषियों को दबाया।” किताब उलटा बताती है: समृद्ध और ताक़तवर फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यक थे (पृष्ठ 2–3)। डच-भाषी “अपनी इच्छाएँ थोप सकते थे”, यह किताब की कल्पना है (पृष्ठ 3)। आज के गृहकार्य, प्रश्नावली के प्रश्न 7 का बयान (क) इसी भूल पर बना है।
- एनिते और सेलवी वाले सवाल का जवाब किताब नहीं देती। हमारी ओर से एक जवाब, बच्चों के जवाब परखने के लिए: बेल्जियम में संस्कृति, शिक्षा और भाषा के मसले सामुदायिक सरकार देखती है, जिसे एक भाषा बोलने वाले चुनते हैं (पृष्ठ 5); श्रीलंका में सिंहली एकमात्र राजभाषा बनी और स्वायत्तता की माँगें नकारी गईं (पृष्ठ 3–4)। जो बच्चा किताब से ऐसा कोई सबूत दे, उसका जवाब ठीक मानिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो शब्द काफ़ी हैं: बेल्जियम में “आदर”, श्रीलंका में “प्रभुत्व”।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: तालिका की कौन-सी पंक्ति चार्ट वाले समीकरण को सबसे ज़्यादा ग़लत साबित करती है, और क्यों?
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) बेल्जियम में गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लगा; श्रीलंका में गृहयुद्ध हुआ। (2) बहुसंख्यक समुदाय दूसरों पर प्रभुत्व कायम करे और उन्हें सत्ता में हिस्सेदार न बनाए, तो देश की एकता ही संकट में पड़ सकती है। जो “अच्छा देश, बुरा देश” लिखें, उनके साथ कालांश 5 की शुरुआत में यह वाक्य फिर पढ़िए।
- गृहकार्य: प्रश्नावली का प्रश्न 7 (पृष्ठ 11), चारों बयानों पर “क्यों” के साथ; इसकी जाँच कालांश 8 में होगी। साथ में प्रश्न बैंक के ग2 और च2।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 58।
कालांश 5 — साझेदारी क्यों ज़रूरी है
किताब — पृष्ठ 6 · स्लाइड — “साझेदारी क्यों ज़रूरी है” वाला भाग · इंटरैक्टिव — साझेदारी क्यों, और उसी हिस्से में तर्कों को दो डिब्बों में छाँटने वाली गतिविधि
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी किताब के दोनों तर्कों के नाम ले पाए, हर तर्क की एक बात किताब के शब्दों में बता पाए, और कोई नई बात सुनकर बता पाए कि वह किस तर्क की है।
साथ ले जाइए — बच्चों की कॉपियाँ: कालांश 2 में उन्होंने किताब के बुलबुले वाला सवाल लिखा था, आज पृष्ठ 6 के पहले तर्क से उस पर लौटेंगे। चरण 5 के छह वाक्य एक काग़ज़ पर लिखकर ले जाइए।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · एक सवाल, दो कॉलम। जिन्होंने कल की पर्ची में “अच्छा देश, बुरा देश” लिखा था, उनके साथ पहले पृष्ठ 5 का सबक़ वाला वाक्य एक बार पढ़िए (एक मिनट)। फिर बोर्ड पर लिखिए: “सत्ता बाँटें क्यों? झगड़ा न हो इसलिए, या इसलिए कि उसका भी हक़ है?” नीचे दो कॉलम बनाइए, अभी बिना नाम के: “झगड़ा न हो, इसलिए” और “उसका भी हक़ है, इसलिए”। बच्चों से कारण माँगिए और जो जिस कॉलम का हो, वहाँ लिखते जाइए।
- 5–15 मिनट · पहला तर्क। पृष्ठ 6 पढ़वाइए: “पहला, सत्ता का बँटवारा ठीक है क्योंकि इससे विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा कम हो जाता है। चूँकि सामाजिक टकराव आगे बढ़कर अकसर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का रूप ले लेता है इसलिए सत्ता में हिस्सा दे देना राजनीतिक व्यवस्था के स्थायित्व के लिए अच्छा है।” और आगे: “बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा को बाकी सभी पर थोपना तात्कालिक तौर पर लाभकारी लग सकता है पर आगे चलकर यह देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है। बहुसंख्यकों का अत्याचार सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही परेशानी पैदा नहीं करता अकसर यह बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है।” अब बच्चे कॉपी में कालांश 2 वाला बुलबुला खोलें: “बहुसंख्यक समुदाय के शासन में क्या हर्ज है?” हमारी ओर से: इस सवाल का एक जवाब यही आख़िरी वाक्य बनता है। सबूत श्रीलंका से, पृष्ठ 4: “दोनों पक्ष के हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं”; यानी नुक़सान बहुसंख्यकों का भी हुआ। बच्चे यह जवाब बुलबुले वाले सवाल के नीचे लिखें।
- 15–22 मिनट · दूसरा तर्क। पृष्ठ 6: “बात कहीं ज़्यादा गहरी है। सत्ता की साझेदारी दरअसल लोकतंत्र की आत्मा है।” फिर: “लोकतंत्र का मतलब ही होता है कि जो लोग इस शासन-व्यवस्था के अंतर्गत हैं उनके बीच सत्ता को बाँटा जाए और ये लोग इसी ढर्रे से रहें। इसलिए, वैध सरकार वही है जिसमें अपनी भागीदारी के माध्यम से सभी समूह शासन व्यवस्था से जुड़ते हैं।” बच्चों को दिखाइए कि यहाँ किसी फ़ायदे या नुक़सान की बात नहीं है; बात इस पर है कि लोकतंत्र है क्या।
- 22–28 मिनट · अब नाम। पृष्ठ 6: “इन दो तर्कों में से एक को हम युक्तिपरक और दूसरे को नैतिक तर्क कह सकते हैं। युक्तिपरक या समझदारी का तर्क लाभकर परिणामों पर जोर देता है जबकि नैतिक तर्क सत्ता के बँटवारे के अंतर्भूत महत्व को बताता है।” अब बोर्ड के दोनों कॉलमों पर नाम लिखिए: पहले पर “युक्तिपरक (समझदारी का) तर्क”, दूसरे पर “नैतिक तर्क”। हाशिये की परिभाषा भी पढ़वाइए और कॉपी में ज्यों-की-त्यों उतरवाइए। युक्तिपरक: “हानि-लाभ का सावधानीपूर्वक हिसाब लगाकर लिया गया फ़ैसला। पूरी तरह से नैतिकता पर आधारित फ़ैसला अकसर इसके उलट होता है।”
- 28–35 मिनट · छँटाई। काग़ज़ से एक-एक वाक्य पढ़िए। बच्चे एक उँगली उठाएँ तो युक्तिपरक, दो उठाएँ तो नैतिक। हर बार एक बच्चे से “क्यों” पूछिए। कसौटी एक ही है: वाक्य किसी नतीजे की, यानी फ़ायदे या नुक़सान की बात करता है, तो युक्तिपरक। छह वाक्य, उत्तर कोष्ठक में:
- सामाजिक समूहों में टकराव का अंदेशा कम होता है। (युक्तिपरक)
- सत्ता बाँटना राजनीतिक व्यवस्था के स्थायित्व के लिए अच्छा है। (युक्तिपरक)
- बहुसंख्यकों का अत्याचार बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है। (युक्तिपरक)
- सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है। (नैतिक)
- वैध सरकार वही है, जिसमें भागीदारी से सभी समूह शासन से जुड़ें। (नैतिक)
- लोकतंत्र का मतलब ही है कि सत्ता लोगों के बीच बँटे। (नैतिक)
- 35–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखे: (1) एक युक्तिपरक और एक नैतिक तर्क; (2) यह वाक्य किस तर्क का है, और क्यों: “सत्ता बाँटने से देश में हिंसा का ख़तरा घटता है।”
दो तर्क (चरण 2 से 4)
सत्ता बाँटें क्यों? किताब के दो तर्क
बोर्ड-कार्य
बोर्ड पर चरण 1 वाले दोनों कॉलम रहें, चरण 4 में उन पर नाम लिखे जाएँ। कॉपी में तीन चीज़ें उतरें: ऊपर वाला चित्र, युक्तिपरक की परिभाषा ज्यों-की-त्यों, और कालांश 2 के बुलबुले वाले सवाल के नीचे उसका जवाब (“बहुसंख्यकों का अत्याचार… बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है”, सबूत: श्रीलंका, पृष्ठ 4)।
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “युक्तिपरक” शब्द। बच्चे इसे “युक्ति”, यानी तरकीब, से जोड़ लेते हैं। किताब ख़ुद आसान नाम देती है: “समझदारी का तर्क” (पृष्ठ 6)। दोनों नाम साथ बोलिए।
- “युक्तिपरक तर्क मतलब स्वार्थ।” नहीं। फ़ायदा पूरे देश का है, बहुसंख्यकों का भी: बहुसंख्यकों का अत्याचार बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है (पृष्ठ 6)।
- “अंतर्भूत महत्व” को हमारी ओर से इस तरह खोलिए: किसी चीज़ का अपने आप में होने वाला महत्व, उससे मिलने वाले फ़ायदे से अलग।
- प्रश्नावली का प्रश्न 2 (पृष्ठ 10) भारत से एक मिसाल और दोनों तरह का एक-एक कारण माँगता है। बच्चे अक्सर दोनों कारण युक्तिपरक लिख देते हैं; ऊपर वाली कसौटी से जाँच करवाइए। भारत की मिसालें किताब पृष्ठ 8–9 पर देती है; वे कालांश 7 में आएँगी।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो चरण 2 से “साझेदारी क्यों” वाला हिस्सा खोलिए। छाँटने वाली गतिविधि में पंचायती राज की दो बातें प्रश्न 5 के उद्धरण से हैं, जो आज का गृहकार्य है। इसलिए वह गतिविधि गृहकार्य जाँचने के बाद, कालांश 6 की शुरुआत में कराइए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए इतना काफ़ी है: समझदारी का तर्क = नतीजे अच्छे होते हैं; नैतिक तर्क = साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: अगर किसी देश में साझेदारी से कोई फ़ायदा न भी दिखे, तो नैतिक तर्क के हिसाब से क्या वह फिर भी ज़रूरी है? किताब के किस शब्द से?
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) युक्तिपरक: टकराव का अंदेशा कम होता है, या स्थायित्व, या बहुसंख्यकों का अत्याचार बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक; नैतिक: सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है, या वैध सरकार वाली बात। (2) युक्तिपरक, क्योंकि यह एक नतीजे की बात करता है। जिन्होंने (2) ग़लत किया हो, उनके साथ कालांश 6 की शुरुआत में चरण 5 के छह वाक्यों में से दो फिर छँटवाइए।
- गृहकार्य: प्रश्नावली का प्रश्न 5 (पृष्ठ 11): पंचायती राज वाले उद्धरण से एक युक्तिपरक कारण। जाँचने के लिए: भ्रष्टाचार कम करना और प्रशासनिक कुशलता बढ़ाना, या भ्रष्ट बिचौलियों को ख़त्म करना। “पंचायती राज ही वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना करता है” नैतिक बात है, इसलिए उत्तर नहीं। साथ में प्रश्न बैंक के क15, क20, ग5 और घ4; तेज़ विद्यार्थी ङ5–6, च3 और च7 भी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 5–6 और 43–48।
कालांश 6 — खलील की उलझन
किताब — पृष्ठ 7 · स्लाइड — “खलील की उलझन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — खलील
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी लेबनान का समझौता बता पाए (कौन-सा पद किसके लिए, और दोनों तरफ़ की शर्तें), और बेताल के सवाल के दोनों पक्षों का कम-से-कम एक-एक कारण किताब से दे पाए।
साथ ले जाइए — प्रश्न 5 वाली गृहकार्य-कॉपियाँ। इंटरैक्टिव अध्याय चला रहे हैं तो कल वाली छँटाई गतिविधि आज की शुरुआत में है।
40 मिनट
- 0–4 मिनट · गृहकार्य। प्रश्न 5 के दो-तीन जवाब सुनिए। हर जवाब पर पूछिए: “इसमें फ़ायदा क्या है?” जो “पंचायती राज ही वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना करता है” लिखें, उन्हें दिखाइए कि यह नैतिक बात है। जिन्होंने कल की पर्ची का (2) ग़लत किया था, उनसे कालांश 5 के चरण 5 वाले छह वाक्यों में से दो फिर छँटवाइए; पर्दा हो तो यह इंटरैक्टिव अध्याय की छँटाई वाली गतिविधि से कराइए।
- 4–14 मिनट · कहानी बारी-बारी से। बच्चे बारी-बारी से पृष्ठ 7 का एक-एक पैरा पढ़ें। बीच-बीच में रुककर ये पंक्तियाँ दोहराइए। खलील का परिवार: “उसके पिता आर्थोडॉक्स ईसाई थे तो माँ सुन्नी मुसलमान”। गृहयुद्ध: “वे साथ रहते थे, मेल-जोल होता था पर गृहयुद्ध में वे एक-दूसरे से लड़ते भी थे”, और “खलील का एक चाचा ऐसी ही लड़ाई में मारा गया था”। फिर: “गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद लेबनान के सारे नेता साथ मिलकर बैठे और विभिन्न समुदायों के बीच सत्ता के बँटवारे के कुछ बुनियादी नियमों पर सहमत हुए”।
- 14–20 मिनट · समझौता। नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए। पद: “राष्ट्रपति मैरोनाइट पंथ का कोई कैथोलिक ही”; “सिर्फ़ सुन्नी मुसलमान ही प्रधानमंत्री”; “उपप्रधानमंत्री का पद आर्थोडॉक्स ईसाई और संसद के अध्यक्ष का पद शिया मुसलमान के लिए”। शर्तें: “ईसाई फ्रांस से संरक्षण की माँग नहीं करेंगे और मुसलमान भी पड़ोसी सीरिया के साथ एकीकरण की माँग छोड़ने पर सहमत हुए”। फिर आबादी: “जब ईसाइयों और मुसलमानों के बीच यह समझौता हुआ था तब दोनों की आबादी लगभग बराबर थी।” और “बाद में मुसलमान स्पष्ट रूप से बहुमत में आ गए पर दोनों पक्ष अभी भी उस समझौते का आदर करते हुए उसे मान रहे हैं।” पूछिए: “दोनों ने क्या छोड़ा, और बदले में क्या पाया?”
- 20–24 मिनट · खलील की उलझन। “वह राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा वाला लोकप्रिय व्यक्ति है लेकिन मौजूदा व्यवस्था के रहते वह सबसे बड़े पद पर पहुँच ही नहीं सकता।” और “वह न तो माँ के धर्म को मानता है और न ही पिता के। असल में वह चाहता ही नहीं कि उसे किसी भी धर्म से जोड़कर पहचाना जाए।” खलील का सुझाव: “सिर्फ़ चुनाव कराइए, हर किसी को चुनाव लड़ने की आज़ादी दीजिए और जिसे सबसे ज़्यादा वोट मिलें वह राष्ट्रपति बन जाए; भले ही वह किसी समुदाय का हो?” दूसरी तरफ़: “लेकिन उसके जिन बड़े-बुज़ुर्गों ने गृहयुद्ध देखा है उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था ही शांति की सबसे अच्छी गारंटी है।” आख़िर में बेताल का सवाल बोर्ड पर लिखिए: “अगर आपको लेबनान का कानून फिर से लिखने का अधिकार होता तो आप क्या करते? क्या आप पुरानी व्यवस्था ही चलने देते या आप कुछ नया करते?”
- 24–35 मिनट · बहस। कक्षा को दो टोलियों में बाँटिए: एक “पुरानी व्यवस्था चले” की तरफ़ से बोले, दूसरी “कुछ नया हो” की तरफ़ से। नियम एक ही: हर कारण किताब से हो, पृष्ठ बताकर। आप बोर्ड पर दो कॉलम में कारण लिखते चलिए, पर अपनी राय मत दीजिए। अंक कारणों को मिलें, पक्ष को नहीं।
- 35–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखे: बेताल को आप क्या जवाब देंगे? कोई भी पक्ष चुनिए और किताब से दो कारण दीजिए।
लेबनान का समझौता (चरण 3 और 4)
लेबनान का समझौता और खलील की उलझन
बोर्ड-कार्य
बोर्ड पर ऊपर वाला चित्र और बहस के दो कॉलम रहें। बोर्ड अगले कालांश में मिट जाएगा, इसलिए बच्चे कॉपी में दो चीज़ें उतारें: समझौते वाला चित्र, और बहस के दोनों कॉलमों से दो-दो कारण, पृष्ठ के साथ।
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- बहस का जवाब किताब नहीं देती। बेताल का सवाल खुला है, और किताब भी बस इतना पूछती है: “क्या आप बेचारे विक्रम को बेताल के सवाल का जवाब देने में मदद कर सकते हैं?” आप किसी पक्ष को सही मत ठहराइए।
- किताब से कौन-से कारण निकलते हैं, यह हमारी ओर से एक सूची है, बच्चों के कारण परखने के लिए। पुरानी व्यवस्था के लिए: जिन बड़े-बुज़ुर्गों ने गृहयुद्ध देखा, वे इसे शांति की सबसे अच्छी गारंटी मानते हैं (पृष्ठ 7); मुसलमान बहुमत में आ गए, फिर भी दोनों पक्ष समझौता मान रहे हैं (पृष्ठ 7); साझेदारी से टकराव का अंदेशा कम होता है (पृष्ठ 6)। कुछ नया करने के लिए: खलील किसी धर्म से पहचाना जाना नहीं चाहता, फिर भी यह व्यवस्था उसे सबसे बड़े पद तक नहीं पहुँचने देती (पृष्ठ 7); समझौता तब हुआ था जब दोनों की आबादी लगभग बराबर थी (पृष्ठ 7)।
- “खलील मुसलमान है” या “खलील ईसाई है”। दोनों ग़लत। पिता आर्थोडॉक्स ईसाई, माँ सुन्नी मुसलमान, और वह ख़ुद दोनों में से किसी धर्म को नहीं मानता (पृष्ठ 7)।
- “खलील ने गृहयुद्ध नहीं देखा।” किताब यह नहीं कहती। वह बस इतना बताती है कि उसका एक चाचा ऐसी लड़ाई में मारा गया था, और गृहयुद्ध देखने वाले बड़े-बुज़ुर्ग मौजूदा व्यवस्था के पक्ष में हैं (पृष्ठ 7)। अपनी ओर से कुछ मत जोड़िए।
- धर्म पर सावधानी। बहस लेबनान के नियम पर है, किसी धर्म पर नहीं। किसी बच्चे से उसका अपना धर्म मत पूछिए, और न उसे किसी पक्ष से जोड़िए।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो चरण 2 से 4 में “खलील” वाला हिस्सा खोलिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी को कहानी का एक पैरा पढ़ने दीजिए, और बहस में चित्र से एक कारण बोलने दीजिए।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: बड़े-बुज़ुर्गों की बात कालांश 5 के किस तर्क से मेल खाती है? (शांति एक नतीजा है, इसलिए युक्तिपरक।) और खलील की बात किस तर्क के पास है? इस दूसरे सवाल का एक तय जवाब नहीं है; कारण देखिए।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): दोनों पक्ष ठीक हैं। अंक इस पर दीजिए कि दोनों कारण किताब से हैं या नहीं। जिन्होंने किताब से बाहर के कारण लिखे हों (जैसे किसी धर्म के बारे में राय), उनसे कालांश 7 की शुरुआत में “यहाँ बच्चे अटकेंगे” वाली सूची (किताब से निकलने वाले कारण) से एक कारण दोबारा लिखवाइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक का क19; तेज़ विद्यार्थी ङ7 भी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 54–57।
कालांश 7 — सत्ता की साझेदारी के चार रूप
किताब — पृष्ठ 8–10 · स्लाइड — “साझेदारी के चार रूप” वाला भाग · इंटरैक्टिव — साझेदारी के रूप
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी साझेदारी के चारों रूप बता पाए, हर रूप की किताब वाली एक मिसाल दे पाए, और क्षैतिज और उर्ध्वाधर वितरण में फ़र्क़ कर पाए।
साथ ले जाइए — पृष्ठ 10 की गतिविधि की चार मिसालें, चार अलग पर्चियों पर, हर टोली के लिए एक। समीकरण वाला चार्ट दीवार पर ही रहे।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पुरानी धारणा। जिनकी कल की पर्ची में किताब से बाहर के कारण थे, वे पहले कालांश 6 की सूची से एक कारण कॉपी में लिखें (एक मिनट)। फिर पृष्ठ 8 पढ़वाइए। पैरा इस पंक्ति से शुरू होता है: “राजनीतिक सत्ता का बँटवारा नहीं किया जा सकता – इसी धारणा के विरूद्ध सत्ता की साझेदारी का विचार सामने आया था।” फिर पुरानी धारणा: “लंबे समय से यही मान्यता चली आ रही थी कि सरकार की सारी शक्तियाँ एक व्यक्ति या किसी खास स्थान पर रहने वाले व्यक्ति-समूह के हाथ में रहनी चाहिए। अगर फैसले लेने की शक्ति बिखर गई तो तुरंत फैसले लेना और उन्हें लागू करना संभव नहीं होगा। लेकिन, लोकतंत्र का एक बुनियादी सिद्धांत है कि जनता ही सारी राजनीतिक शक्ति का स्रोत है।” चार्ट की ओर इशारा कीजिए: यही पुरानी धारणा उस समीकरण में भी है।
- 5–12 मिनट · पहला रूप: अंग। पृष्ठ 8: “सरकार के विभिन्न अंग एक ही स्तर पर रहकर अपनी-अपनी शक्ति का उपयोग करते हैं।” और “कोई भी एक अंग सत्ता का असीमित उपयोग नहीं कर सकता। हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है।” इसे क्षैतिज वितरण कहते हैं। भारत की मिसाल: “कार्यपालिका सत्ता का उपयोग करती ज़रूर है पर यह संसद के अधीन कार्य करती है; न्यायपालिका की नियुक्ति कार्यपालिका करती है पर न्यायपालिका ही कार्यपालिका पर और विधायिका द्वारा बनाए कानूनों पर अंकुश रखती है”। इसका नाम: “नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था”। बोर्ड पर तीन डिब्बे एक ही लकीर पर बनाइए।
- 12–19 मिनट · दूसरा रूप: स्तर। पृष्ठ 8: “पूरे देश के लिए एक सामान्य सरकार हो और फिर प्रांत या क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग सरकार रहे”; “भारत में हम इन्हें राज्य सरकार कहते हैं”। पृष्ठ 9: “नगरपालिका और पंचायतें ऐसी ही इकाइयाँ हैं। उच्चतर और निम्नतर स्तर की सरकारों के बीच सत्ता के ऐसे बँटवारे को उर्ध्वाधर वितरण कहा जाता है।” अब बोर्ड पर डिब्बे ऊपर-नीचे बनाइए: केंद्र, राज्य, नगरपालिका और पंचायतें। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बँटवारा संविधान में साफ़ लिखा हो, इस पर किताब कहती है: “बेल्जियम में तो यह काम हुआ है पर श्रीलंका में नहीं हुआ है”। और: “हम अगले अध्याय में इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।”
- 19–24 मिनट · तीसरा रूप: सामाजिक समूह। भाषायी और धार्मिक समूहों के बीच बँटवारा। पृष्ठ 9: “बेल्जियम में ‘सामुदायिक सरकार’ इस व्यवस्था का एक अच्छा उदाहरण है”। भारत की मिसाल: “पिछले साल हमने अपने देश में प्रचलित आरक्षित चुनाव क्षेत्र वाली ऐसी ही व्यवस्था के बारे में पढ़ा था”। और: “अल्पसंख्यक समुदायों को भी इसी तरीके से सत्ता में उचित हिस्सेदारी दी जाती है।”
- 24–29 मिनट · चौथा रूप: दल। पृष्ठ 9: “सत्ता बारी-बारी से अलग-अलग विचारधारा और सामाजिक समूहों वाली पार्टियों के हाथ आती-जाती रहती है”; “पार्टियों की यह आपसी प्रतिद्वंद्विता ही इस बात को सुनिश्चित कर देती है कि सत्ता एक व्यक्ति या समूह के हाथ में न रहे।” गठबंधन: “दो या अधिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं या सरकार का गठन करती हैं”। हित-समूह: “व्यापारी, उद्योगपति, किसान और औद्योगिक मज़दूर जैसे कई संगठित हित-समूहों” को भी किताब सक्रिय बताती है; ये सरकार की समितियों में सीधी भागीदारी करके या नीतियों पर दबाव बनाकर सत्ता में भागीदारी करते हैं। फिर पृष्ठ 9 का बुलबुला पढ़वाइए: “मेरे स्कूल में हर महीने क्लास मॉनीटर बदल जाता है। क्या आप इसे ही सत्ता की भागीदारी बता रहे हैं?” दो-तीन जवाब सुनिए। अब चार शब्द बोर्ड पर लिखिए: अंग, स्तर, सामाजिक समूह, दल।
- 29–36 मिनट · पृष्ठ 10 की गतिविधि। हर टोली को एक पर्ची दीजिए। टोली दो बातें बताए: यह किस रूप की मिसाल है, और यहाँ सत्ता का साझा कौन किसके साथ कर रहा है। किताब का अपना सवाल यही है: “यहाँ सत्ता का साझा कौन किसके साथ कर रहा है?”
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखे: (1) चारों रूप, चार शब्दों में; (2) “नगरपालिका और पंचायतें” किस रूप की मिसाल हैं, क्षैतिज या उर्ध्वाधर?
एक ही स्तर पर, या ऊपर-नीचे? (चरण 2 और 3)
क्षैतिज और उर्ध्वाधर वितरण
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह बने। बच्चे इसे कॉपी में उतारें; प्रश्नावली के प्रश्न 8 (पृष्ठ 12) की पहली सूची में यही चार रूप हैं, वहाँ लंबे शब्दों में।
साझेदारी के चार रूप: अंग, स्तर, सामाजिक समूह, दल
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- क्षैतिज और उर्ध्वाधर उलट जाते हैं। हमारी ओर से एक सहारा: क्षैतिज “क्षितिज” से है, यानी लेटी हुई लकीर, सब एक ही स्तर पर; उर्ध्व मतलब ऊपर, यानी स्तर ऊपर-नीचे। बोर्ड पर दोनों चित्र साथ-साथ रहें।
- “पिछले साल”: किताब कक्षा 10 की है, इसलिए हमारी ओर से इसका मतलब कक्षा 9 की पढ़ाई है। किस अध्याय में, यह किताब नहीं बताती।
- पृष्ठ 10 की गतिविधि का उत्तर किताब नहीं देती। हमारी ओर से एक जवाब: बंबई उच्च न्यायालय का महाराष्ट्र सरकार को आदेश = अंग (न्यायपालिका और कार्यपालिका); रूस की दो पार्टियों का गठबंधन = दल; नाइजीरिया के प्रांतों के वित्तमंत्रियों की संघीय सरकार से माँग = स्तर। ओंटेरियो वाली मिसाल पर बच्चे बँटेंगे: सरकार प्रांत की है, पर दूसरा पक्ष मूलवासी समुदाय है, इसलिए सामाजिक समूह वाला रूप ज़्यादा ठीक बैठता है। जो बच्चा “स्तर” कहे, उससे पूछिए: “दूसरा पक्ष कौन है?” कारण ठीक हो तो अंक दीजिए।
- मॉनीटर वाला बुलबुला किताब ने सोचने के लिए रखा है; उसका जवाब नहीं दिया। हमारी ओर से एक सवाल, बहस आगे बढ़ाने के लिए: किताब में सत्ता अलग-अलग विचारधारा और सामाजिक समूहों वाली पार्टियों के बीच आती-जाती है, और उनकी आपसी प्रतिद्वंद्विता सत्ता को एक हाथ में रहने से रोकती है। क्या हर महीने मॉनीटर बदलने में ये बातें हैं?
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो चरण 2 से “साझेदारी के रूप” वाला हिस्सा खोलिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए चार शब्द और हर शब्द की एक मिसाल काफ़ी है: अंग (नियंत्रण और संतुलन), स्तर (पंचायत), सामाजिक समूह (सामुदायिक सरकार), दल (गठबंधन)।
- तेज़ विद्यार्थी से प्रश्न 8 (पृष्ठ 12) की दोनों सूचियाँ मिलवाइए, हर जोड़ी का कारण पूछते हुए।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 7): (1) अंग, स्तर, सामाजिक समूह, दल। (2) स्तर, यानी उर्ध्वाधर वितरण। जिन्होंने (2) में “क्षैतिज” लिखा हो, उनके लिए कालांश 8 की शुरुआत में दोनों चित्र एक मिनट फिर दिखाइए।
- गृहकार्य: प्रश्नावली का प्रश्न 1 (पृष्ठ 10): चारों रूप, हर एक की मिसाल के साथ। साथ में प्रश्न बैंक के क16–17, ख8–10, ग4, और घ6–8, घ10; तेज़ विद्यार्थी ङ8, च1 और च6 भी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 7–9, 11–12 और 49–53।
कालांश 8 — प्रश्नावली और समापन
किताब — पृष्ठ 10–12 · स्लाइड — “दोहराइए” वाला भाग · इंटरैक्टिव — सार और अभ्यास
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी प्रश्नावली के प्रश्न 6 से 9 के सही विकल्प कारण के साथ चुन पाए, प्रश्न 3 और 4 पर किताब के आधार पर अपनी राय दे पाए, और पहले दिन वाला समीकरण बदलकर लिख पाए।
साथ ले जाइए — प्रश्न 7 (कालांश 4) और प्रश्न 1 (कालांश 7) वाली गृहकार्य-कॉपियाँ, समीकरण वाला चार्ट और मोटा स्केच पेन।
40 मिनट
- 0–4 मिनट · प्रश्न 1 की जाँच। दो-तीन बच्चे चारों रूप उनकी मिसालों के साथ सुनाएँ। जिन्होंने कल की निकास-पर्ची में “क्षैतिज” लिखा था, उनके लिए दोनों चित्र एक मिनट फिर बनाइए: अंग एक ही लकीर पर, स्तर ऊपर-नीचे।
- 4–16 मिनट · प्रश्न 6 से 9 (पृष्ठ 11–12)। जोड़ियों में हर प्रश्न का विकल्प चुनवाइए, फिर एक जोड़ी विकल्प बोले और दूसरी किताब से उसका कारण, पृष्ठ के साथ। प्रश्न 7 बच्चे घर से करके आए हैं; उसके बयान (क) पर रुकिए, क्योंकि यही कालांश 4 वाली भूल है। सही विकल्प और कारण नीचे बोर्ड-कार्य की तालिका में हैं।
- 16–26 मिनट · प्रश्न 3 (पृष्ठ 10)। तीनों राय पढ़वाइए: थम्मन, “जिन समाजों में क्षेत्रीय, भाषायी और जातीय आधार पर विभाजन हो सिर्फ़ वहीं”; मथाई, “सत्ता की साझेदारी सिर्फ़ ऐसे बड़े देशों के लिए उपयुक्त है जहाँ क्षेत्रीय विभाजन” हों; औसेफ, “हर समाज में सत्ता की साझेदारी की ज़रूरत होती है भले ही वह छोटा हो”। हर राय पर हाथ उठवाइए, फिर हर पक्ष से एक कारण किताब से माँगिए। आख़िर में दो सवाल: “बेल्जियम बड़ा देश है?” (क्षेत्रफल में हरियाणा से भी छोटा, पृष्ठ 2) और “नैतिक तर्क किसी एक तरह के समाज की बात करता है?” (पृष्ठ 6)।
- 26–32 मिनट · प्रश्न 4 (पृष्ठ 10)। मर्चटेम वाला प्रश्न पढ़वाइए: ब्रूसेल्स के पास के इस शहर के मेयर ने स्कूलों में फ़्रेंच बोलने पर रोक को सही ठहराया। पूछिए: “मेयर का कारण सुनने में अच्छा लगता है। पर क्या यह बेल्जियम वाले रास्ते से मेल खाता है?” कसौटी पृष्ठ 5 से: “बेल्जियम के नेताओं को लगा कि विभिन्न समुदाय और क्षेत्रों की भावनाओं का आदर करने पर ही देश की एकता संभव है।”
- 32–36 मिनट · समीकरण बदलिए। चार्ट के पास जाइए। पहले वही सवाल: “कौन-कौन इससे सहमत है?” हाथ गिनकर नई संख्या पहले दिन वाली संख्या के पास लिखिए। फिर एक विद्यार्थी पुराने समीकरण पर लकीर खींचे और नीचे नया लिखे: “सत्ता का बँटवारा = टकराव का अंदेशा कम = राजनीतिक व्यवस्था में स्थायित्व”। बताइए कि यह नया समीकरण हमारी ओर से है, पर इसकी बात पृष्ठ 6 की है: बँटवारे से टकराव का अंदेशा कम होता है, और यह राजनीतिक व्यवस्था के स्थायित्व के लिए अच्छा है। उसके नीचे पूरी कक्षा पृष्ठ 6 की पंक्ति साथ बोले: “सत्ता की साझेदारी दरअसल लोकतंत्र की आत्मा है।” बच्चे कॉपी के पहले पन्ने पर, पुराने समीकरण के नीचे, यही दोनों लिखें।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखे: (1) नया समीकरण अपने शब्दों में, और उसके लिए किताब का एक सबूत, पृष्ठ के साथ; (2) इस अध्याय की एक बात जो अब भी पूरी तरह समझ नहीं आई।
पहले दिन का समीकरण, और आज का (चरण 5)
पहले दिन का समीकरण, और आज का
बोर्ड-कार्य
बोर्ड पर यह तालिका भरती चले, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें; परीक्षा से पहले दोहराने के लिए यही काम आएगी।
| प्रश्न | सही विकल्प | किताब से कारण |
|---|---|---|
| 6 (पृष्ठ 11) | (सा) क, ख, घ, च | (क) टकराव का अंदेशा कम होता है (पृष्ठ 6); (च) वैध सरकार में सभी समूह अपनी भागीदारी से शासन व्यवस्था से जुड़ते हैं (पृष्ठ 6); (घ) बेल्जियम के नेताओं ने क्षेत्रीय अंतरों और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार किया (पृष्ठ 4)। (ख) का “पक्षपात” किताब सीधे नहीं कहती; हमारी ओर से: सत्ता एक जगह न रहे तो मनमानी का मौक़ा घटता है, जैसे पृष्ठ 8 पर हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है। ग, ङ और छ नुक़सान गिनाते हैं। |
| 7 (पृष्ठ 11) | (मा) ख, ग और घ | (क) ग़लत है: ज़्यादा समृद्ध और ताक़तवर फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यक थे (पृष्ठ 2); पृष्ठ 3 पर किताब बस सोचने को कहती है कि डच-भाषी अपनी इच्छाएँ थोप सकते थे, पर बेल्जियम के नेताओं ने दूसरा रास्ता चुना (पृष्ठ 4)। (ख) सिंहली को राजभाषा बनाने जैसे सरकारी फ़ैसले (पृष्ठ 3); (ग) तमिलों की माँगें, जिनमें क्षेत्रीय स्वायत्तता की माँग थी (पृष्ठ 4); हमारी ओर से: प्रश्न का “संघीय ढाँचा” इसी माँग को कहता है, किताब के पाठ में यह शब्द नहीं; (घ) राज्य सरकारें केंद्रीय सरकार के अधीन नहीं (पृष्ठ 4), और यह पूरी व्यवस्था न होती तो देश भाषा के आधार पर दो टुकड़ों में बँट गया होता (पृष्ठ 5); “एकात्मक” और “संघीय” प्रश्न के अपने शब्द हैं। |
| 8 (पृष्ठ 12) | (गा) 1-ख, 2-घ, 3-क, 4-ग | अंग = अधिकारों का वितरण; स्तर = संघीय सरकार; सामाजिक समूह = सामुदायिक सरकार; दल = गठबंधन सरकार (पृष्ठ 8–9)। |
| 9 (पृष्ठ 12) | (ख) | (अ) और (ब) दोनों सही। (ब) पृष्ठ 6 पर लगभग इन्हीं शब्दों में है; (अ) पृष्ठ 6 के दोनों तर्कों से निकलता है। |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- प्रश्न 6 में “(घ)” दो बार छपा है। दूसरा “(घ)”, यानी अस्थिरता वाला बयान, असल में (ङ) है। कुंजी “(सा) क, ख, घ, च” में घ पहले वाला है, यानी विविधताओं को समेटने वाला।
- प्रश्न 7 का बयान (क)। बच्चे इसे सही मान लेते हैं, क्योंकि “बहुसंख्यक ने प्रभुत्व जमाया” श्रीलंका में हुआ था। बेल्जियम के बारे में किताब ऐसा नहीं कहती: वहाँ अल्पसंख्यक फ़्रेंच-भाषी ज़्यादा समृद्ध और ताक़तवर थे, और नेताओं ने समझौते का रास्ता चुना (पृष्ठ 2–5)।
- प्रश्न 8 का “अधिकारों का वितरण”। इसका मतलब यहाँ सरकार के अंगों के बीच शक्तियों का बँटवारा है; पृष्ठ 8 पर इसे क्षैतिज वितरण कहा गया है, और अंग्रेज़ी किताब यहाँ “सेपरेशन ऑफ़ पावर्स”, यानी शक्तियों का अलगाव, लिखती है।
- प्रश्न 3 और 4 का उत्तर किताब नहीं देती। हमारी ओर से, किताब के आधार पर: प्रश्न 3 में औसेफ की राय नैतिक तर्क से मेल खाती है; मथाई की राय के ख़िलाफ़ बेल्जियम ख़ुद एक छोटा देश है। प्रश्न 4 में मेयर का फ़ैसला मूल भावना से मेल नहीं खाता, क्योंकि वह एक भाषा बोलने वालों की भावनाओं का आदर नहीं करता। नमूना उत्तर शिक्षक संदर्शिका में हैं। जो बच्चा दूसरी राय किताब के ठीक कारण के साथ दे, उसे भी अंक दीजिए।
- चार्ट पर पुराना समीकरण मिटाइए मत, बस उस पर लकीर खींचिए। दोनों साथ दिखें, तभी बदलाव दिखेगा।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो चरण 2 से “सार और अभ्यास” वाला हिस्सा खोलिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए प्रश्न 8 और 9 सबसे आसान शुरुआत हैं; चरण 2 में पहला जवाब उन्हीं से लीजिए।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: पहले दिन वाला समीकरण किस कालांश की किस बात से सबसे पहले ग़लत साबित हुआ?
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) सबूत किताब से होना चाहिए, जैसे बेल्जियम में गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लगा (पृष्ठ 5), या श्रीलंका में दोनों पक्ष के हज़ारों लोग मारे गए (पृष्ठ 4)। (2) वाला हिस्सा पढ़कर अगले अध्याय से पहले उन बातों को पाँच मिनट दोहराइए।
- गृहकार्य: प्रश्नावली का प्रश्न 3 (करीब 50 शब्दों में, जैसा किताब कहती है) और प्रश्न 4। साथ में प्रश्न बैंक का च5; अध्याय की परीक्षा से पहले पूरा प्रश्न बैंक।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड का पूरा डेक।
पूरे अध्याय के लिए
अलग-अलग बच्चों के लिए
| किसके लिए | क्या कीजिए |
|---|---|
| जो बहुत पीछे हैं | इनसे तीन ही चीज़ें पक्की करवाइए: (1) दो देशों के दो रास्ते: बेल्जियम ने सत्ता बाँटी; श्रीलंका ने नहीं बाँटी, और वहाँ गृहयुद्ध हुआ; (2) साझेदारी के चार रूपों के नाम: अंग, स्तर, समूह, दल; (3) किताब की पंक्ति “सत्ता की साझेदारी दरअसल लोकतंत्र की आत्मा है।” (पृष्ठ 6)। इनसे प्रतिशत के सारे आँकड़े मत रटवाइए; सिंहली 74 फीसदी और तमिल 18 फीसदी काफ़ी हैं। |
| औसत बच्चे | इनसे दो तालिकाएँ पक्की करवाइए: बेल्जियम मॉडल की चार बातें, और चार रूप उनके उदाहरणों के साथ। साथ में युक्तिपरक और नैतिक तर्क का फ़र्क़, क्योंकि प्रश्नावली का प्रश्न 2 इसी पर है। |
| तेज़ बच्चे | (1) पृष्ठ 5 वाली अख़बार गतिविधि (नीचे “प्रोजेक्ट और गतिविधि” में पहली); (2) भारत में साझेदारी के चारों रूपों का एक-एक उदाहरण ढूँढ़ना; (3) खलील वाले सवाल पर 150 शब्दों में लिखना। |
| जो बोलने में झिझकते हैं | कालांश 6 की बहस में इन्हें अपना तर्क पर्ची पर लिखकर देने दीजिए, और आप उसे पढ़कर सुनाइए: “यह एक साथी का तर्क है।” नाम मत लीजिए। |
सतत मूल्यांकन
| साधन | कब | क्या देखिए |
|---|---|---|
| निकास-पर्ची | हर कालांश के आख़िरी चार-पाँच मिनट | दिन की एक मुख्य बात पकड़ में आई या नहीं |
| तुलना-तालिका | कालांश 4 | तुलना करना आता है या नहीं |
| चार पर्चियों वाली गतिविधि | कालांश 3 | बच्चा अपने शब्दों में समझा पाता है या नहीं |
| बहस | कालांश 6 | दोनों पक्षों में तर्क दे पाता है या नहीं |
| पृष्ठ 10 की गतिविधि | कालांश 7 | किसी नई मिसाल में साझेदारी का रूप पहचान पाता है या नहीं |
| हाथ की गिनती | कालांश 1 और 8 | कितने बच्चों की राय सचमुच बदली |
लिखित मूल्यांकन
अपनी इकाई-परीक्षा के लिए एक सुझाया हुआ ढाँचा; अंक अपनी ज़रूरत के हिसाब से बदल लीजिए।
| प्रकार | अंक | क्या पूछें |
|---|---|---|
| वस्तुनिष्ठ | 1 | आँकड़े, तारीख़ें, परिभाषाएँ, चारों रूपों के नाम |
| अति लघूत्तरीय | 2 | बहुसंख्यकवाद, गृहयुद्ध, युक्तिपरक, सामुदायिक सरकार |
| लघूत्तरीय | 3 | बेल्जियम मॉडल, श्रीलंका के क़दम, कोई एक रूप विस्तार से |
| दीर्घ उत्तरीय | 5 | चारों रूप उदाहरण के साथ, दोनों देशों की तुलना, साझेदारी क्यों ज़रूरी है |
| केस-आधारित | 4 | एक स्थिति देकर पूछिए: कौन-सा रूप है, और क्यों |
अंक कैसे कटेंगे, यह पहले ही बता दीजिए
- “चारों रूप बताइए” में उदाहरण नहीं दिए, तो आधा उत्तर।
- “तुलना कीजिए” में सिर्फ़ एक देश के बारे में लिखा, तो आधा उत्तर।
- वस्तुनिष्ठ प्रश्न में विकल्प सही चुना पर कारण नहीं आता, तो यह मौखिक जाँच में पकड़ में आ जाएगा। इसलिए हर उत्तर के साथ “क्यों?” पूछने की आदत डालिए।
प्रोजेक्ट और गतिविधि
| # | प्रोजेक्ट | कैसे |
|---|---|---|
| 1 | अख़बार गतिविधि (किताब की अपनी, पृष्ठ 5) | पाँच-पाँच विद्यार्थियों के दो समूह पूरे हफ़्ते कोई एक अख़बार पढ़ें और युद्धों और लड़ाइयों की ख़बरों की कतरनें जमा करें। फिर (क) झगड़ों को जगह के हिसाब से बाँटें: अपने प्रदेश के, देश के, देश से बाहर के; (ख) उनके कारण पता करें और गिनें कि इनमें से कितने विवाद सत्ता के बँटवारे को लेकर हैं; (ग) बताएँ कि किन-किन विवादों को सत्ता में साझेदारी तय करके सुलझाया जा सकता है। |
| 2 | दो देशों का पोस्टर | आधा चार्ट बेल्जियम, आधा श्रीलंका: नक्शा, आँकड़े, चुना गया रास्ता, नतीजा। |
| 3 | “मेरे आसपास सत्ता की साझेदारी” | चारों रूपों का एक-एक स्थानीय उदाहरण ढूँढ़ना, जैसे ग्राम पंचायत (उर्ध्वाधर वितरण), आरक्षित सीट (सामाजिक समूह), न्यायालय का कोई फ़ैसला (क्षैतिज वितरण), गठबंधन सरकार (राजनीतिक दल)। |
| 4 | कक्षा का प्रयोग | किताब का अपना सवाल (पृष्ठ 9): “मेरे स्कूल में हर महीने क्लास मॉनीटर बदल जाता है। क्या आप इसे ही सत्ता की भागीदारी बता रहे हैं?” कक्षा में इसी पर चर्चा कराइए, फिर कक्षा के काम बाँटने की एक व्यवस्था बच्चों से ही बनवाइए। |
| 5 | साक्षात्कार | गाँव या वार्ड के पंच या पार्षद से पूछिए: किन फ़ैसलों का अधिकार उनके पास है, और कौन-से फ़ैसले ऊपर से आते हैं? इससे उर्ध्वाधर वितरण समझ में आता है, और अध्याय 2 की तैयारी भी हो जाती है। |
शिक्षक के लिए पाँच सावधानियाँ
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किसी धर्म या समुदाय पर टिप्पणी मत कीजिए। इस अध्याय में सिंहली और तमिल, ईसाई और मुसलमान, बौद्ध, सब आते हैं। किताब की बात किसी धर्म के ख़िलाफ़ नहीं है; वह बहुसंख्यकवाद, यानी बहुमत की मनमानी, के ख़िलाफ़ है। यह फ़र्क़ कक्षा में साफ़ शब्दों में कहिए, वरना बच्चे ग़लत नतीजा ले जाएँगे।
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इसे भारत की किसी मौजूदा राजनीतिक बहस से मत जोड़िए। उदाहरण संविधान और संस्थाओं के लीजिए: पंचायत, न्यायालय, आरक्षित सीट, केंद्र और राज्य। किसी दल या नेता का नाम कक्षा में मत लाइए।
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“बेल्जियम अच्छा, श्रीलंका बुरा” वाली सोच मत बनने दीजिए। बार-बार दोहराइए: “दोनों लोकतांत्रिक देश हैं। फ़र्क़ देश का नहीं, चुने गए रास्ते का है।”
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आँकड़ों में मत उलझिए। इस अध्याय में समझ ज़्यादा ज़रूरी है। कमज़ोर बच्चों के लिए 74 और 18 फीसदी काफ़ी हैं; बाक़ी आँकड़े समझने के लिए हैं, रटने के लिए नहीं।
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पहले दिन वाला समीकरण आठों दिन सामने रहे। यही इस अध्याय का सवाल है: क्या सत्ता बाँटने से देश कमज़ोर होता है? वह दीवार के चार्ट पर और बच्चों की कॉपी के पहले पन्ने पर लिखा रहेगा, तो हर कालांश में उसी की ओर लौट सकते हैं। कालांश 8 में बच्चे उसे काटकर पृष्ठ 6 के शब्दों से उलटा समीकरण लिखें।