कुल 60 प्रश्न
तारों का मतलब: ★ज़रूरी · ★★बहुत ज़रूरी; समय कम हो तो पहले ये प्रश्न और ये बातें दोहराइए।
खण्ड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न
पृष्ठ संख्याएँ NCERT की किताब “लोकतांत्रिक राजनीति” (कक्षा 10) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं; 2024-25 वाली किताब में भी यही पृष्ठ हैं।
1बेल्जियम किस महाद्वीप में है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) यूरोप
व्याख्या: किताब बेल्जियम को “यूरोप का एक छोटा-सा देश” कहती है। इसकी सीमाएँ फ्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और लक्ज़मबर्ग से लगती हैं।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2
2क्षेत्रफल में बेल्जियम की तुलना किस भारतीय राज्य से की गई है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) हरियाणा
व्याख्या: बेल्जियम क्षेत्रफल में हरियाणा से भी छोटा है, और इसकी आबादी (एक करोड़ से थोड़ी ज़्यादा) हरियाणा की आबादी की करीब आधी है। ध्यान रखिए: श्रीलंका की आबादी (करीब दो करोड़) को भी हरियाणा के बराबर बताया गया है — वहाँ तुलना आबादी की है, क्षेत्रफल की नहीं।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2
3बेल्जियम में डच बोलने वाले लोग हैं
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) 59 फ़ीसदी
व्याख्या: बेल्जियम की 59 फ़ीसदी आबादी फ्लेमिश इलाके में रहती है और डच बोलती है। बाक़ी विकल्पों में मत उलझिए: 40 फ़ीसदी फ़्रेंच-भाषी हैं, 74 फ़ीसदी श्रीलंका के सिंहली हैं और 80 फ़ीसदी ब्रूसेल्स के फ़्रेंच-भाषी।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2
4बेल्जियम में फ़्रेंच बोलने वाले लोग हैं
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) 40 फ़ीसदी
व्याख्या: बेल्जियम के 40 फ़ीसदी लोग वेलोनिया क्षेत्र में रहते हैं और फ़्रेंच बोलते हैं; बचे हुए एक फ़ीसदी लोग जर्मन बोलते हैं। 59 + 40 + 1 = 100 — यह जोड़ तीनों आँकड़े याद रखने में मदद करता है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2
5ब्रूसेल्स में फ़्रेंच बोलने वाले लोग हैं
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) 80 फ़ीसदी
व्याख्या: राजधानी ब्रूसेल्स में तस्वीर उलटी है: वहाँ 80 फ़ीसदी लोग फ़्रेंच और 20 फ़ीसदी लोग डच बोलते हैं। यानी पूरे देश में डच-भाषी ज़्यादा हैं, पर राजधानी में फ़्रेंच-भाषी।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2
6श्रीलंका में सिंहली लोगों की आबादी है
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) 74 फ़ीसदी
व्याख्या: श्रीलंका का सबसे प्रमुख सामाजिक समूह सिंहलियों का है — कुल आबादी का 74 फ़ीसदी।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2
7श्रीलंका में तमिलों की कुल आबादी है
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) 18 फ़ीसदी
व्याख्या: तमिल कुल आबादी के 18 फ़ीसदी हैं। इनमें दो समूह हैं: श्रीलंकाई मूल के तमिल (13 फ़ीसदी) और हिंदुस्तानी तमिल। विकल्प में दिया 7 फ़ीसदी ईसाइयों का हिस्सा है, तमिलों का नहीं।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2–3
8श्रीलंकाई मूल के तमिल हैं
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) 13 फ़ीसदी
व्याख्या: तमिलों के 18 फ़ीसदी में से 13 फ़ीसदी श्रीलंकाई मूल के तमिल हैं। बाक़ी हिंदुस्तानी तमिल हैं — उन लोगों की संतान, जिन्हें औपनिवेशिक शासन के दौरान बागानों में काम करने के लिए भारत से लाया गया था।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2–3
9श्रीलंका स्वतंत्र राष्ट्र बना
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) 1948
व्याख्या: “सन् 1948 में श्रीलंका स्वतंत्र राष्ट्र बना।” इसके बाद सिंहली नेताओं ने अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा। 1956 को इससे मत मिलाइए — वह सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाने वाले क़ानून का साल है (प्रश्न 10)।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 3
10सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) 1956
व्याख्या: 1956 में एक क़ानून बनाकर तमिल को दरकिनार किया गया और सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया। विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता देने की नीति भी चली। ऐसे क़दमों से तमिलों में बेगानापन बढ़ा।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 3
11श्रीलंका के गृहयुद्ध का अंत हुआ
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) 2009
व्याख्या: दोनों समुदायों के बीच का अविश्वास गृहयुद्ध में बदल गया, जिसमें दोनों पक्षों के हज़ारों लोग मारे गए और अनेक परिवार शरणार्थी बन गए। किताब के अनुसार 2009 में इस गृहयुद्ध का अंत हुआ।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 4
12बेल्जियम में संविधान संशोधन किए गए
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) 1970 और 1993 के बीच
व्याख्या: बेल्जियम के नेताओं ने क्षेत्रीय अंतरों और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार किया और 1970 से 1993 के बीच संविधान में संशोधन किए। “1950 और 1960” का दशक वह समय है जब फ़्रेंच और डच बोलने वालों के बीच तनाव बढ़ने लगा था (पृष्ठ 2)।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 4
13बेल्जियम में कितने संविधान संशोधन किए गए?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) चार
व्याख्या: 1970 और 1993 के बीच बेल्जियम ने अपने संविधान में चार संशोधन किए — सिर्फ़ इसलिए कि देश में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को बेगानेपन का अहसास न हो और सब मिल-जुलकर रह सकें।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 4
14यूरोपीय संघ का मुख्यालय है
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) ब्रूसेल्स
व्याख्या: जब अनेक यूरोपीय देशों ने मिलकर यूरोपीय संघ बनाने का फ़ैसला किया, तो ब्रूसेल्स को उसका मुख्यालय चुना गया। यह बात किताब उसी अनुच्छेद में बताती है, जहाँ वह कहती है कि बेल्जियम की व्यवस्था बेहद सफल रही और इससे गृहयुद्ध की आशंका पर विराम लग गया।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 5
15“सत्ता की साझेदारी दरअसल लोकतंत्र की ______ है।”
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) आत्मा
व्याख्या: किताब सत्ता की साझेदारी के पक्ष में दो तर्क देती है: युक्तिपरक और नैतिक। यह वाक्य सत्ता के बँटवारे के अंतर्भूत (अपने भीतर के) महत्त्व को बताता है, यानी यह नैतिक तर्क है। लोकतंत्र का मतलब ही है कि शासन-व्यवस्था के अंतर्गत रहने वाले लोगों के बीच सत्ता बाँटी जाए, इसलिए साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है — कमज़ोरी या मजबूरी नहीं।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 6
16शासन के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता के बँटवारे को कहते हैं
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) क्षैतिज वितरण
व्याख्या: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका एक ही स्तर पर रहकर अपनी-अपनी शक्ति का उपयोग करती हैं, इसलिए यह बँटवारा क्षैतिज कहलाता है। हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है; इसे ‘नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था’ भी कहते हैं।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 8
17केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सत्ता के बँटवारे को कहते हैं
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) उर्ध्वाधर वितरण
व्याख्या: यहाँ बँटवारा ऊँचे और निचले स्तर की सरकारों के बीच है — केंद्र, राज्य, और उनसे नीचे नगरपालिका और पंचायतें। ऐसे बँटवारे को उर्ध्वाधर वितरण कहते हैं। याद रखिए: क्षैतिज = एक ही स्तर पर, उर्ध्वाधर = अलग-अलग स्तरों के बीच।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 8–9
18बेल्जियम की सामुदायिक सरकार को किन विषयों पर फ़ैसले का अधिकार है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) संस्कृति, शिक्षा और भाषा
व्याख्या: बेल्जियम में केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा तीसरे स्तर की सामुदायिक सरकार है। इसे एक ही भाषा बोलने वाले लोग चुनते हैं — डच, फ़्रेंच और जर्मन बोलने वाले, चाहे वे कहीं भी रहते हों। इसे संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर फ़ैसले लेने का अधिकार है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 5
19लेबनान में राष्ट्रपति का पद किसके लिए तय है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) मैरोनाइट कैथोलिक
व्याख्या: गृहयुद्ध के बाद लेबनान के नेताओं ने सत्ता बाँटने के नियम तय किए: राष्ट्रपति मैरोनाइट पंथ का कैथोलिक, प्रधानमंत्री सुन्नी मुसलमान, उपप्रधानमंत्री आर्थोडॉक्स ईसाई और संसद का अध्यक्ष शिया मुसलमान। बाक़ी तीनों विकल्प दूसरे पदों के समुदाय हैं। (कहानी “खलील की उलझन”)
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 7
20“हानि-लाभ का सावधानीपूर्वक हिसाब लगाकर लिया गया फ़ैसला” कहलाता है
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) युक्तिपरक
व्याख्या: यह ‘युक्तिपरक’ की परिभाषा है, जो किताब के हाशिये में दी गई है। युक्तिपरक तर्क फ़ायदेमंद नतीजों पर ज़ोर देता है — साझेदारी से सामाजिक टकराव का अंदेशा घटता है और राजनीतिक व्यवस्था स्थिर रहती है। नैतिक तर्क सत्ता के बँटवारे के अपने भीतर के (अंतर्भूत) महत्त्व को बताता है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 6
खण्ड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न
1बेल्जियम की सीमाएँ ______ से लगती हैं। (पृष्ठ 2)
उत्तर देखिए
बेल्जियम की सीमाएँ फ़्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और लक्ज़मबर्ग से लगती हैं। (पृष्ठ 2)
2श्रीलंका ______ के दक्षिणी तट से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है। (पृष्ठ 2)
उत्तर देखिए
श्रीलंका तमिलनाडु के दक्षिणी तट से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है। (पृष्ठ 2)
3हिंदुस्तानी तमिल ______ में ______ में काम करने के लिए भारत से लाए गए लोगों की संतान हैं। (पृष्ठ 3)
उत्तर देखिए
हिंदुस्तानी तमिल औपनिवेशिक शासनकाल में बागानों में काम करने के लिए भारत से लाए गए लोगों की संतान हैं। (पृष्ठ 3)
4श्रीलंका में तमिल मुख्य रूप से ______ प्रांतों में आबाद हैं। (पृष्ठ 3)
उत्तर देखिए
श्रीलंका में तमिल मुख्य रूप से उत्तर और पूर्वी प्रांतों में आबाद हैं। (पृष्ठ 3)
5______ वह मान्यता है कि बहुसंख्यक समुदाय अपने मनचाहे ढंग से देश का शासन कर सकता है। (पृष्ठ 3)
उत्तर देखिए
बहुसंख्यकवाद वह मान्यता है कि बहुसंख्यक समुदाय अपने मनचाहे ढंग से देश का शासन कर सकता है। (पृष्ठ 3)
6बेल्जियम में केंद्रीय सरकार में ______-भाषी मंत्रियों की संख्या समान रहती है। (पृष्ठ 4)
उत्तर देखिए
बेल्जियम में केंद्रीय सरकार में डच और फ़्रेंच-भाषी मंत्रियों की संख्या समान रहती है। (पृष्ठ 4)
7बेल्जियम में तीसरे स्तर की सरकार को ______ कहते हैं। (पृष्ठ 5)
उत्तर देखिए
बेल्जियम में तीसरे स्तर की सरकार को सामुदायिक सरकार कहते हैं। (पृष्ठ 5)
8शासन के अंगों के बीच के इस बँटवारे को ______ की व्यवस्था भी कहते हैं। (पृष्ठ 8)
उत्तर देखिए
शासन के अंगों के बीच के इस बँटवारे को नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था भी कहते हैं। (पृष्ठ 8)
9भारत में क्षेत्रीय स्तर की सरकारों को ______ कहते हैं। (पृष्ठ 8)
उत्तर देखिए
भारत में क्षेत्रीय स्तर की सरकारों को राज्य सरकार कहते हैं। (पृष्ठ 8)
10जब दो या अधिक पार्टियाँ मिलकर सरकार बनाती हैं तो उसे ______ कहते हैं। (पृष्ठ 6, 9, 12)
उत्तर देखिए
जब दो या अधिक पार्टियाँ मिलकर सरकार बनाती हैं तो उसे गठबंधन सरकार कहते हैं। (पृष्ठ 6, 9, 12)
खण्ड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 5 प्रश्न
1बेल्जियम में डच-भाषी बहुसंख्यकों ने फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यकों पर प्रभुत्व जमा लिया।
उत्तर देखिए
ग़लत (पृष्ठ 3–4)
2श्रीलंका और बेल्जियम दोनों लोकतांत्रिक देश हैं।
उत्तर देखिए
सही (पृष्ठ 5)
3बेल्जियम में केंद्र और राज्य के बीच सत्ता के बँटवारे का काम हुआ, श्रीलंका में नहीं।
उत्तर देखिए
सही (पृष्ठ 9)
4लंबे समय तक यही मान्यता रही कि सरकार की सारी शक्तियाँ एक व्यक्ति या किसी खास स्थान पर रहने वाले व्यक्ति-समूह के हाथ में रहनी चाहिए।
उत्तर देखिए
सही (सत्ता की साझेदारी का विचार इसी धारणा के विरुद्ध सामने आया — पृष्ठ 8)
5बहुसंख्यकों का अत्याचार बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
उत्तर देखिए
सही (पृष्ठ 6)
खण्ड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 10 प्रश्न
1बहुसंख्यकवाद क्या है?
उत्तर देखिए
“यह मान्यता कि अगर कोई समुदाय बहुसंख्यक है तो वह अपने मनचाहे ढंग से देश का शासन कर सकता है और इसके लिए वह अल्पसंख्यक समुदाय की ज़रूरत या इच्छाओं की अवहेलना कर सकता है।” — किताब में इसका उदाहरण श्रीलंका है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 3
2गृहयुद्ध किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
“किसी मुल्क में सरकार विरोधी समूहों की हिंसक लड़ाई ऐसा रूप ले ले कि वह युद्ध सा लगे तो उसे गृहयुद्ध कहते हैं।” श्रीलंका में यह 2009 में समाप्त हुआ।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 4
3एथनीक या जातीय समूह से क्या आशय है?
उत्तर देखिए
“ऐसा सामाजिक विभाजन जिसमें हर समूह अपनी-अपनी संस्कृति को अलग मानता है यानी यह साझी संस्कृति पर आधारित सामाजिक विभाजन है।” सभी सदस्य मानते हैं कि उनकी उत्पत्ति समान पूर्वजों से हुई है। ! ज़रूरी नहीं कि वे एक ही धर्म के हों या उनकी राष्ट्रीयता एक हो।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2
4युक्तिपरक तर्क का क्या अर्थ है?
उत्तर देखिए
“हानि-लाभ का सावधानीपूर्वक हिसाब लगाकर लिया गया फ़ैसला।” यह “लाभकर परिणामों पर ज़ोर” देता है — यानी बाँटने से फ़ायदा होता है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 6
5सामुदायिक सरकार क्या है?
उत्तर देखिए
बेल्जियम की तीसरे स्तर की सरकार, जिसका चुनाव “एक ही भाषा बोलने वाले लोग” करते हैं — “चाहे वे जहाँ भी रहते हों।” इसे संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर फ़ैसले लेने का अधिकार है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 5
6सत्ता का क्षैतिज वितरण क्या है?
उत्तर देखिए
विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा। इसे क्षैतिज इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें सरकार के विभिन्न अंग “एक ही स्तर पर रहकर” अपनी शक्ति का उपयोग करते हैं।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 8
7सत्ता का उर्ध्वाधर वितरण क्या है?
उत्तर देखिए
उच्चतर और निम्नतर स्तर की सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा — जैसे केंद्र सरकार, राज्य सरकार, और उनसे नीचे नगरपालिका तथा पंचायतें।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 9
8‘नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था’ से क्या आशय है?
उत्तर देखिए
वह व्यवस्था जिसमें “हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है”, ताकि “कोई भी एक अंग सत्ता का असीमित उपयोग नहीं कर सकता।” जैसे — कार्यपालिका संसद के अधीन काम करती है, और न्यायपालिका कार्यपालिका तथा विधायिका के क़ानूनों पर अंकुश रखती है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 8
9श्रीलंका में तमिलों की मुख्य माँगें क्या थीं?
उत्तर देखिए
तमिल को राजभाषा बनाना; (2) क्षेत्रीय स्वायत्तता; (3) शिक्षा में समान अवसर; (4) रोज़गार में समान अवसर। इनमें स्वायत्तता की माँगों को लगातार नकारा गया, और 1980 के दशक तक उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल ईलम बनाने की माँग को लेकर अनेक राजनीतिक संगठन बने।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 4
10आरक्षित चुनाव क्षेत्र किस रूप का उदाहरण है और क्यों?
उत्तर देखिए
सामाजिक समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी का। यह व्यवस्था “सामाजिक रूप से कमज़ोर समुदाय और महिलाओं को विधायिका और प्रशासन में हिस्सेदारी” देने के लिए है — “ताकि लोग ख़ुद को शासन से अलग न समझने लगें।”
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 9
खण्ड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 8 प्रश्न
1बेल्जियम की जातीय बनावट का वर्णन कीजिए और बताइए कि समस्या क्या थी।
उत्तर देखिए
बेल्जियम यूरोप का एक छोटा-सा देश है — “क्षेत्रफल में हमारे हरियाणा राज्य से भी छोटा” — और उसकी सीमाएँ फ़्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और लक्ज़मबर्ग से लगती हैं। आबादी एक करोड़ से थोड़ी अधिक, यानी हरियाणा की क़रीब आधी।
बनावट59% लोग फ्लेमिश इलाक़े में रहते हैं और डच बोलते हैं; 40% वेलोनिया क्षेत्र में हैं और फ़्रेंच बोलते हैं; 1% जर्मन बोलते हैं। ★राजधानी ब्रूसेल्स के 80% लोग फ़्रेंच और 20% डच बोलते हैं।
समस्या ★“अल्पसंख्यक फ़्रेंच-भाषी लोग तुलनात्मक रूप से ज़्यादा समृद्ध और ताक़तवर रहे हैं”, और डच-भाषी लोगों को आर्थिक विकास तथा शिक्षा का लाभ बहुत बाद में मिला — इससे 1950 और 1960 के दशक में तनाव बढ़ा। टकराव का सबसे तीखा रूप ब्रूसेल्स में दिखा; किताब इसे “एक विशेष तरह की समस्या” कहती है: वहाँ “डच बोलने वाले लोग संख्या के हिसाब से अपेक्षाकृत ज़्यादा थे लेकिन धन और समृद्धि के मामले में कमज़ोर और अल्पमत में थे।”
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2
2श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद के उदय का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
श्रीलंका 1948 में स्वतंत्र राष्ट्र बना। “सिंहली समुदाय के नेताओं ने अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा”, और “लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार” ने सिंहली प्रभुता क़ायम करने के लिए कई क़दम उठाए —
★1956 में क़ानून बनाकर “तमिल को दरकिनार करके सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित” किया गया;
“विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता” देने की नीति चली;
नए संविधान में प्रावधान हुआ कि “सरकार बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा देगी।”
नतीजा तमिलों में नाराज़गी और बेगानापन बढ़ा; उन्हें लगा कि उन्हें “समान राजनीतिक अधिकारों से वंचित” किया जा रहा है और “नौकरियों और फ़ायदे के अन्य कामों में उनके साथ भेदभाव हो रहा है”। “परिणाम यह हुआ कि तमिल और सिंहली समुदायों के संबंध बिगड़ते चले गए।”
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 3
3श्रीलंका के गृहयुद्ध के परिणामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
तमिलों की आबादी वाले इलाके की स्वायत्तता की माँगों को लगातार नकारा गया, और 1980 के दशक तक उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल ईलम बनाने की माँग को लेकर अनेक राजनीतिक संगठन बने।
“दो समुदायों के बीच पारस्परिक अविश्वास ने बड़े टकराव का रूप ले लिया… यह टकराव गृहयुद्ध में परिणत हुआ।”
परिणाम (1) “दोनों पक्ष के हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं”; (2) “अनेक परिवार अपने मुल्क से भागकर शरणार्थी बन गए”; (3) “इससे भी कई गुना ज़्यादा लोगों की रोज़ी-रोटी चौपट हो गई”; (4) “मुल्क के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन में काफ़ी परेशानियाँ पैदा हुई हैं।” 2009 में इस गृहयुद्ध का अंत हुआ।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 4
4★बेल्जियम मॉडल की चार मुख्य बातें लिखिए।
उत्तर देखिए
बेल्जियम के नेताओं ने “क्षेत्रीय अंतरों और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार” किया और 1970 से 1993 के बीच संविधान में चार संशोधन किए, ताकि “देश में रहने वाले किसी भी आदमी को बेगानेपन का अहसास न हो।”
“केंद्रीय सरकार में डच और फ़्रेंच-भाषी मंत्रियों की संख्या समान रहेगी”; और कुछ विशेष क़ानून तभी बनेंगे जब दोनों भाषायी समूह के सांसदों का बहुमत हो — इसलिए “किसी एक समुदाय के लोग एकतरफ़ा फ़ैसला नहीं कर सकते।”
केंद्र की अनेक शक्तियाँ क्षेत्रीय सरकारों को दे दी गईं; “राज्य सरकारें केंद्रीय सरकार के अधीन नहीं हैं।”
★ब्रूसेल्स में अलग सरकार है, जिसमें दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व है — और यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि “डच-भाषी लोगों ने केंद्रीय सरकार में बराबरी का प्रतिनिधित्व स्वीकार किया था।”
★★सामुदायिक सरकार — तीसरे स्तर की सरकार, जिसे एक ही भाषा बोलने वाले लोग चुनते हैं, चाहे वे जहाँ भी रहते हों, और जिसे संस्कृति, शिक्षा और भाषा पर फ़ैसले का अधिकार है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 4–5
5सत्ता की साझेदारी के युक्तिपरक तर्क बताइए।
उत्तर देखिए
“इससे विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा कम हो जाता है।”
चूँकि सामाजिक टकराव आगे बढ़कर “हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता” बन जाता है, इसलिए सत्ता में हिस्सा देना “राजनीतिक व्यवस्था के स्थायित्व के लिए अच्छा” है।
“बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा को बाकी सभी पर थोपना तात्कालिक तौर पर लाभकारी लग सकता है पर आगे चलकर यह देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है।”
★★“बहुसंख्यकों का अत्याचार सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही परेशानी पैदा नहीं करता अकसर यह बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है।” — यह श्रीलंका के उदाहरण में दिखता है, जहाँ गृहयुद्ध में दोनों पक्ष के हज़ारों लोग मारे गए।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 4, 6
6सत्ता की साझेदारी का नैतिक तर्क क्या है? यह युक्तिपरक तर्क से कैसे भिन्न है?
उत्तर देखिए
नैतिक तर्क“सत्ता की साझेदारी दरअसल लोकतंत्र की आत्मा है। लोकतंत्र का मतलब ही होता है कि जो लोग इस शासन-व्यवस्था के अंतर्गत हैं उनके बीच सत्ता को बाँटा जाए और ये लोग इसी ढर्रे से रहें। इसलिए, वैध सरकार वही है जिसमें अपनी भागीदारी के माध्यम से सभी समूह शासन व्यवस्था से जुड़ते हैं।”
अंतर“युक्तिपरक या समझदारी का तर्क लाभकर परिणामों पर ज़ोर देता है जबकि नैतिक तर्क सत्ता के बँटवारे के अंतर्भूत महत्त्व को बताता है।”
यानी युक्तिपरक तर्क कहता है: बाँटिए, क्योंकि इससे फ़ायदा है; नैतिक तर्क कहता है: बाँटिए, क्योंकि यही सही है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 6
7खलील की उलझन क्या थी?
उत्तर देखिए
लेबनान में गृहयुद्ध के बाद हुए समझौते के तहत राष्ट्रपति मैरोनाइट कैथोलिक, प्रधानमंत्री सुन्नी मुसलमान, उपप्रधानमंत्री आर्थोडॉक्स ईसाई और संसद अध्यक्ष शिया मुसलमान ही हो सकता है।
खलील के पिता आर्थोडॉक्स ईसाई और माँ सुन्नी मुसलमान थीं, और “वह न तो माँ के धर्म को मानता है और न ही पिता के”; वह चाहता ही नहीं कि “उसे किसी भी धर्म से जोड़कर पहचाना जाए।” वह “राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा वाला लोकप्रिय व्यक्ति” है, पर “मौजूदा व्यवस्था के रहते वह सबसे बड़े पद पर पहुँच ही नहीं सकता।”
उसका कहना है — “सिर्फ़ चुनाव कराइए, हर किसी को चुनाव लड़ने की आज़ादी दीजिए और जिसे सबसे ज़्यादा वोट मिलें वह राष्ट्रपति बन जाए; भले ही वह किसी समुदाय का हो?”
पर उसके बुज़ुर्ग, जिन्होंने गृहयुद्ध देखा है, कहते हैं कि “मौजूदा व्यवस्था ही शांति की सबसे अच्छी गारंटी है।”
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 7
8राजनीतिक दलों और दबाव-समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी कैसे होती है?
उत्तर देखिए
“लोकतंत्र में लोगों के सामने सत्ता के दावेदारों के बीच चुनाव का विकल्प ज़रूर रहना चाहिए”, और यह विकल्प विभिन्न पार्टियों के रूप में मिलता है।
★“पार्टियों की यह आपसी प्रतिद्वंद्विता ही इस बात को सुनिश्चित कर देती है कि सत्ता एक व्यक्ति या समूह के हाथ में न रहे।” और लंबी अवधि में “सत्ता बारी-बारी से अलग-अलग विचारधारा और सामाजिक समूहों वाली पार्टियों के हाथ आती-जाती रहती है।”
कई बार यह भागीदारी प्रत्यक्ष दिखती है, जब “दो या अधिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं या सरकार का गठन करती हैं” — यानी गठबंधन सरकार।
इसके अलावा व्यापारी, उद्योगपति, किसान और औद्योगिक मज़दूर जैसे संगठित हित-समूह भी “सरकार की विभिन्न समितियों में सीधी भागीदारी करके या नीतियों पर… दबाव बनाकर” सत्ता में भागीदारी करते हैं।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 9
खण्ड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 7 प्रश्न
1★★आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के चार रूपों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
शासन के विभिन्न अंगों के बीच — क्षैतिज वितरण।
“शासन के विभिन्न अंग, जैसे विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा रहता है।” इसे क्षैतिज इसलिए कहते हैं क्योंकि सभी अंग “एक ही स्तर पर रहकर” काम करते हैं। “ऐसे बँटवारे से यह सुनिश्चित हो जाता है कि कोई भी एक अंग सत्ता का असीमित उपयोग नहीं कर सकता। हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है।”
उदाहरण कार्यपालिका सत्ता का उपयोग करती है पर संसद के अधीन काम करती है; न्यायपालिका की नियुक्ति कार्यपालिका करती है, पर न्यायपालिका ही कार्यपालिका पर और विधायिका द्वारा बनाए क़ानूनों पर अंकुश रखती है। इसे ‘नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था’ कहते हैं।
विभिन्न स्तर की सरकारों के बीच — उर्ध्वाधर वितरण।
पूरे देश के लिए संघ या केंद्र सरकार और क्षेत्रीय स्तर पर राज्य सरकारें; इनसे नीचे नगरपालिका और पंचायतें। जिन देशों में यह व्यवस्था है, वहाँ “संविधान में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा किस तरह होगा।”
उदाहरण भारत में केंद्र और राज्य सरकारें। ★किताब का अपना उदाहरण — “बेल्जियम में तो यह काम हुआ है पर श्रीलंका में नहीं हुआ है।”
विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच।
सत्ता का बँटवारा “भाषायी और धार्मिक समूहों” के बीच भी हो सकता है, ताकि “लोग ख़ुद को शासन से अलग न समझने लगें” और “अल्पसंख्यक समुदायों को भी इसी तरीक़े से सत्ता में उचित हिस्सेदारी” मिले।
उदाहरण बेल्जियम की सामुदायिक सरकार, और भारत की आरक्षित चुनाव क्षेत्र वाली व्यवस्था।
राजनीतिक दलों, दबाव-समूहों और आंदोलनों के बीच।
“पार्टियों की यह आपसी प्रतिद्वंद्विता ही इस बात को सुनिश्चित कर देती है कि सत्ता एक व्यक्ति या समूह के हाथ में न रहे।”
उदाहरणगठबंधन सरकार, जब “दो या अधिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं या सरकार का गठन करती हैं”; और व्यापारी, उद्योगपति, किसान तथा औद्योगिक मज़दूर जैसे हित-समूह, जो सरकारी समितियों में सीधी भागीदारी करके या दबाव बनाकर सत्ता में हिस्सा लेते हैं।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 8–9
2★★बेल्जियम और श्रीलंका की तुलना कीजिए और बताइए कि दोनों से क्या शिक्षा मिलती है।
उत्तर देखिए
समानताएँ दोनों लोकतांत्रिक देश हैं; दोनों में जातीय-भाषायी विविधता है; दोनों में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदाय हैं।
बेल्जियम59% डच, 40% फ़्रेंच, 1% जर्मन; ब्रूसेल्स में 80% फ़्रेंच, 20% डच। यहाँ डच वाले गिनती में ज़्यादा पर धन-शिक्षा में कमज़ोर थे। नेताओं ने “क्षेत्रीय अंतरों और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार” किया और 1970 से 1993 के बीच चार संविधान संशोधन किए — केंद्र में मंत्रियों की बराबरी, राज्यों को शक्तियाँ, ब्रूसेल्स में समान प्रतिनिधित्व, और सामुदायिक सरकार। नतीजा — “गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लग गया”, वरना “बेल्जियम भाषा के आधार पर दो टुकड़ों में बँट गया होता”।
श्रीलंकासिंहली 74%, तमिल 18%। यहाँ 1948 में आज़ादी के बाद सिंहली नेताओं ने बहुसंख्यकवाद का रास्ता चुना — 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाया, नौकरियों और विश्वविद्यालयों में प्राथमिकता दी, और संविधान में बौद्ध मत को संरक्षण दिया। तमिलों की स्वायत्तता की माँगें लगातार नकारी गईं, 1980 के दशक तक स्वतंत्र तमिल ईलम की माँग को लेकर संगठन बने, और अंततः गृहयुद्ध हुआ जिसमें दोनों पक्षों के हज़ारों लोग मारे गए; 2009 में उसका अंत हुआ।
शिक्षा ★★“बेल्जियम के नेताओं को लगा कि विभिन्न समुदाय और क्षेत्रों की भावनाओं का आदर करने पर ही देश की एकता संभव है।” और किताब का निष्कर्ष — “अगर बहुसंख्यक समुदाय दूसरों पर प्रभुत्व कायम करने और सत्ता में उनको हिस्सेदार न बनाने का फ़ैसला करता है तो इससे देश की एकता ही संकट में पड़ सकती है।” ★यानी सत्ता बाँटने से देश कमज़ोर नहीं होता; न बाँटने से उसकी एकता संकट में पड़ सकती है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2–5
3सत्ता की साझेदारी क्यों ज़रूरी है? युक्तिपरक और नैतिक दोनों तर्क दीजिए।
उत्तर देखिए
“सत्ता के बँटवारे के पक्ष में दो तरह के तर्क दिए जा सकते हैं।”
युक्तिपरक तर्क (हानि-लाभ का हिसाब)
“इससे विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा कम हो जाता है।”
सामाजिक टकराव “आगे बढ़कर अकसर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का रूप ले लेता है”, इसलिए साझेदारी “राजनीतिक व्यवस्था के स्थायित्व के लिए अच्छा” है।
“बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा को बाकी सभी पर थोपना तात्कालिक तौर पर लाभकारी लग सकता है पर आगे चलकर यह देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है।”
★“बहुसंख्यकों का अत्याचार सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही परेशानी पैदा नहीं करता अकसर यह बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है।” — यह श्रीलंका के उदाहरण में दिखता है, जहाँ “दोनों पक्ष के हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं।”
नैतिक तर्क (यह कहीं ज़्यादा गहरा है)
★★“सत्ता की साझेदारी दरअसल लोकतंत्र की आत्मा है। लोकतंत्र का मतलब ही होता है कि जो लोग इस शासन-व्यवस्था के अंतर्गत हैं उनके बीच सत्ता को बाँटा जाए और ये लोग इसी ढर्रे से रहें।”
“इसलिए, वैध सरकार वही है जिसमें अपनी भागीदारी के माध्यम से सभी समूह शासन व्यवस्था से जुड़ते हैं।”
अंतर“युक्तिपरक या समझदारी का तर्क लाभकर परिणामों पर ज़ोर देता है जबकि नैतिक तर्क सत्ता के बँटवारे के अंतर्भूत महत्त्व को बताता है।”
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 6
4श्रीलंका में तमिलों के प्रति भेदभाव और उसके परिणामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
श्रीलंका 1948 में स्वतंत्र हुआ और सिंहली नेताओं ने “अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा।”
भेदभाव के तीन क़दम (1) 1956 में “तमिल को दरकिनार करके सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित” करना; (2) “विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता”; (3) संविधान में “सरकार बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा देगी” का प्रावधान।
तमिलों की प्रतिक्रिया उनमें नाराज़गी और बेगानापन बढ़ा; उन्हें लगा कि “बौद्ध धर्मावलंबी सिंहलियों के नेतृत्व वाली सारी राजनीतिक पार्टियाँ उनकी भाषा और संस्कृति को लेकर असंवेदनशील हैं”, कि उन्हें “समान राजनीतिक अधिकारों से वंचित” किया जा रहा है, और कि “नौकरियों और फ़ायदे के अन्य कामों में उनके साथ भेदभाव” हो रहा है। उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टियाँ बनाईं और तमिल को राजभाषा बनाने, क्षेत्रीय स्वायत्तता, तथा शिक्षा और रोज़गार में समान अवसरों की माँग को लेकर संघर्ष किया।
परिणाम स्वायत्तता की माँगों को “लगातार नकारा गया”; 1980 के दशक तक स्वतंत्र तमिल ईलम की माँग को लेकर संगठन बने; “दो समुदायों के बीच पारस्परिक अविश्वास ने बड़े टकराव का रूप ले लिया” और वह गृहयुद्ध बन गया — जिसमें हज़ारों लोग मारे गए, परिवार शरणार्थी बने, रोज़ी-रोटी चौपट हुई और सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन में “काफ़ी परेशानियाँ” पैदा हुईं। 2009 में गृहयुद्ध समाप्त हुआ।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 3–4
5“सत्ता का बँटवारा देश को कमज़ोर करता है” — इस कथन की समीक्षा कीजिए।
उत्तर देखिए
यह कथन ग़लत है।
इस कथन के पीछे का पुराना तर्क लंबे समय तक यही मान्यता थी कि “सरकार की सारी शक्तियाँ एक व्यक्ति या किसी ख़ास स्थान पर रहने वाले व्यक्ति-समूह के हाथ में रहनी चाहिए। अगर फ़ैसले लेने की शक्ति बिखर गई तो तुरंत फ़ैसले लेना और उन्हें लागू करना संभव नहीं होगा।”
पर यह ग़लत है, क्योंकि
लोकतंत्र का बुनियादी सिद्धांत ही यह है कि “जनता ही सारी राजनीतिक शक्ति का स्रोत है”, और लोग “स्व-शासन की संस्थाओं के माध्यम से अपना शासन चलाते हैं”;
साझेदारी से “विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा कम” होता है और राजनीतिक व्यवस्था को स्थायित्व मिलता है;
★किताब के दो देश यही दिखाते हैं — बेल्जियम ने बाँटा और टूटने से बच गया; श्रीलंका ने नहीं बाँटा और वहाँ गृहयुद्ध हुआ।
और नैतिक दृष्टि से — “सत्ता की साझेदारी दरअसल लोकतंत्र की आत्मा है।”
निष्कर्ष ★“अगर बहुसंख्यक समुदाय दूसरों पर प्रभुत्व कायम करने और सत्ता में उनको हिस्सेदार न बनाने का फ़ैसला करता है तो इससे देश की एकता ही संकट में पड़ सकती है।” यानी देश की एकता को ख़तरा बाँटने से नहीं, न बाँटने से हो सकता है।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 2, 5, 6, 8
6क्षैतिज और उर्ध्वाधर वितरण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
| आधार | क्षैतिज वितरण | उर्ध्वाधर वितरण |
|---|---|---|
| किनके बीच | शासन के विभिन्न अंगों — विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका | विभिन्न स्तर की सरकारों — केंद्र, राज्य, नगरपालिका-पंचायत |
| स्तर | सभी एक ही स्तर पर | उच्चतर और निम्नतर स्तर |
| व्यवस्था का नाम | नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था, ताकि “कोई भी एक अंग सत्ता का असीमित उपयोग नहीं कर सकता” | संघीय सरकार |
| उदाहरण | कार्यपालिका संसद के अधीन; न्यायपालिका का अंकुश | भारत में केंद्र और राज्य सरकारें; ★बेल्जियम में हुआ, श्रीलंका में नहीं |
दोनों सत्ता की साझेदारी के रूप हैं, और यह विचार उस पुरानी धारणा के विरुद्ध आया कि “सरकार की सारी शक्तियाँ एक व्यक्ति या किसी खास स्थान पर रहने वाले व्यक्ति-समूह के हाथ में रहनी चाहिए” (पृष्ठ 8)।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 8–9, 12
7“बहुसंख्यकों का अत्याचार … अकसर यह बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है” — उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर देखिए
यह वाक्य किताब के युक्तिपरक तर्क का हिस्सा है (पृष्ठ 6)। पूरा वाक्य है: “बहुसंख्यकों का अत्याचार सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही परेशानी पैदा नहीं करता अकसर यह बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है।”
क्यों क्योंकि बहुमत की मनमानी से “सामाजिक टकराव” पैदा होता है, जो “आगे बढ़कर अकसर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का रूप ले लेता है।” इसीलिए “बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा को बाकी सभी पर थोपना तात्कालिक तौर पर लाभकारी लग सकता है पर आगे चलकर यह देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है।”
उदाहरण ★श्रीलंका। वहाँ सिंहली बहुसंख्यक समुदाय ने 1956 में भाषा थोपी, विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता ली और संविधान में बौद्ध मत को संरक्षण दिया पर इसका नतीजा गृहयुद्ध निकला, जिसमें किताब के अपने शब्दों में “दोनों पक्ष के हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं”, अनेक परिवार शरणार्थी बने, और “मुल्क के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन में काफ़ी परेशानियाँ पैदा हुई हैं।” यह तबाही सिर्फ़ तमिलों की नहीं, सिंहलियों की भी थी।
इसके उलट बेल्जियम में डच-भाषी बहुसंख्यकों ने केंद्रीय सरकार में बराबरी का प्रतिनिधित्व स्वीकार किया — यानी बहुमत में होते हुए भी कुछ छोड़ा — और इसी वजह से फ़्रेंच-भाषी लोगों ने ब्रूसेल्स में समान प्रतिनिधित्व माना (पृष्ठ 4)। किताब के शब्दों में इससे “गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लग गया है”, वरना बेल्जियम “भाषा के आधार पर दो टुकड़ों में बँट गया होता” (पृष्ठ 5)।
निष्कर्ष ★ श्रीलंका में बहुमत की मनमानी का नुक़सान दोनों पक्षों ने उठाया; बेल्जियम में बहुमत ने केंद्र में बराबरी मानी और गृहयुद्ध की आशंका टल गई।
संदर्भ: NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1, पृष्ठ 4–6