अध्याय 4राजनीतिक दल

पाठ योजना23 मिनट

कक्षा — 10 · विषय — राजनीति विज्ञान (लोकतांत्रिक राजनीति) · पृष्ठ — 46 से 62 · कालांश — 9

इस अध्याय का बड़ा विचार — “राजनीतिक दल लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त हैं” — और फिर भी उनमें चार बड़ी ख़ामियाँ हैं। दोनों बातें एक साथ सच हैं, और यही अध्याय है।

★★बोर्ड पर पूरे अध्याय भर रहने वाली पंक्ति — “खराब राजनीति का समाधान है ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति।”


क.1 इस अध्याय का विशेष नियम — और वह पिछले अध्यायों से उल्टा हैध्यान

अध्याय 1–3 में नियम था — “किसी दल का नाम नहीं।” इस अध्याय में किताब स्वयं छह राष्ट्रीय दलों के नाम, इतिहास और विचार बताती है। इसलिए नया नियम —

★“किताब जितना कहे, उतना ही — शब्दश:, बराबरी से, बिना राय के।”

  1. हर दल को उतना ही समय — किताब के क्रम में, कोई आगे-पीछे नहीं।
  2. विवरण केवल किताब के शब्दों में — अपनी ओर से एक विशेषण भी नहीं।
  3. वर्तमान राजनीति, चुनावी चर्चा, कोई तुलना या मूल्यांकन — बिल्कुल नहीं।
  4. अगर कोई बच्चा किसी दल के पक्ष-विपक्ष में बोले — “यह चर्चा हमारी किताब के बाहर की है; हम किताब तक रहेंगे” कहकर विनम्रता से लौटा दीजिए।
  5. ★और “चुनौतियाँ” वाला भाग हमेशा सामान्य रूप में पढ़ाइए — किताब भी वहाँ किसी दल का नाम नहीं लेती।

क.2 अध्याय की बनावट

हिस्सापृष्ठमिज़ाज
1 — ज़रूरत, अर्थ, कार्य47–50सैद्धांतिक — “दल क्यों अनिवार्य हैं”
2 — कितने दल · भागीदारी50–52तुलनात्मक
3 — छह राष्ट्रीय + क्षेत्रीय दल53–57! तथ्यात्मक — यहीं सबसे ज़्यादा सावधानी
★4 — चुनौतियाँ और सुधार57–61आलोचनात्मक — पर सामान्य रूप में

क.3 सामग्री

#क्याकालांश
1किताब के कार्टून — पृष्ठ 48 (नेता कहाँ गए), 57 (कठपुतलियाँ), 58 (एकदलीय देश), 59 (धनकुबेर), 60 (चुनावी अनुशासन)6, 7
2पृष्ठ 50 की तीन तस्वीरें (दलों की गतिविधियाँ — वर्गीकरण गतिविधि)3
3पृष्ठ 56 का क्षेत्रीय दलों का नक्शा (13 अप्रैल 2018 की स्थिति)5
4छह पर्चियाँ — छह राष्ट्रीय दलों के नाम-तथ्य (समूह-प्रस्तुति के लिए)5
5पृष्ठ 52 के ग्राफ़4
6काग़ज़ की पर्चियाँ — “हमारी कक्षा-पार्टी” गतिविधि के लिए2

क.4 कक्षा-व्यवस्था

  • 4–5 के स्थायी समूह।
  • बोर्ड — बायाँ किनारा (स्थायी): दोनों मुख्य वाक्य; दायाँ किनारा: सात कार्य, जो कालांश 2 में बनकर अध्याय भर रहेंगे।

खंड ख — अधिगम प्रतिफल

#प्रतिफलकालांशजाँच
1राजनीतिक दल की परिभाषा और तीन हिस्से बता पाएगा1निकास-पर्ची 1
★2सात कार्य उदाहरण सहित गिना पाएगा2निकास-पर्ची 2
3बता पाएगा कि दलों के बिना लोकतंत्र क्यों नहीं चल सकता3मौखिक
4तीन दलीय व्यवस्थाओं में अंतर और उदाहरण बता पाएगा3वर्गीकरण
5मान्यता की शर्तें (6%+2 / 6%+4) बता पाएगा4निकास-पर्ची 4
6छह राष्ट्रीय दलों के नाम और किताब में दिए मूल तथ्य बता पाएगा5समूह-प्रस्तुति
7बता पाएगा कि क्षेत्रीय दलों से संघवाद कैसे मज़बूत हुआ5मौखिक
★8चार चुनौतियाँ समझा पाएगा6कार्टून-मिलान
9तीन हुए सुधार (सीमाओं सहित) और तीन सुझाव बता पाएगा7निकास-पर्ची 7
★★10और सबसे ज़रूरी — समझ पाएगा कि सुधार का अंतिम रास्ता भागीदारी है8समापन चर्चा

खंड ग — पूरी योजना एक नज़र में

कालांशविषयपृष्ठमुख्य गतिविधि
1ज़रूरत क्यों · अर्थ · तीन हिस्से47–48“बिना दलों वाला चुनाव” — कल्पना
2★सात कार्य48–49“हमारी कक्षा-पार्टी”
3दलों की ज़रूरत · कितने दल49–51देशों की छँटाई + तस्वीर-वर्गीकरण
4जन-भागीदारी · मान्यता के नियम52–54ग्राफ़ पढ़ना + “6%+2 / 6%+4”
5! छह राष्ट्रीय दल · क्षेत्रीय दल54–57समूह-प्रस्तुति (केवल किताब से)
6★★चार चुनौतियाँ57–59कार्टून-मिलान
7तीन हुए सुधार · तीन सुझाव59–61“सुधार-सीमा” जोड़ी
8★दो और तरीके · यूनुस का केस61–62समापन चर्चा
9प्रश्नावली61–62अभ्यास + दोहराव

खंड घ — कालांश-दर-कालांश

ढाँचा: 🎯 उद्देश्य → ⏱ प्रवाह → 📋 बोर्ड → ! अटकाव → 📝 निकास-पर्ची/गृहकार्य

कालांश 1 — ज़रूरत क्यों और अर्थ

🎯 विद्यार्थी परिभाषा और तीन हिस्से बता पाए।

समयक्या
0–8 · हुक★पूछिए — “सोचो, कल चुनाव हो और कोई पार्टी ही न हो — हर उम्मीदवार अकेला। क्या फ़र्क़ पड़ेगा?” जवाब बोर्ड पर टाँकिए — कालांश 3 में किताब से मिलाएँगे।
8–15 · विरोधाभासकिताब की दो पंक्तियाँ — “अधिकतर आम नागरिकों के लिए लोकतंत्र का मतलब राजनीतिक दल ही है” और “अधिकतर लोग आम तौर पर दलों के बारे में ख़राब राय रखते हैं।” फिर 100 साल वाला आँकड़ा। पूछिए — “नापसंद हैं, फिर भी हर देश में फैल गए — क्यों?”
15–28 · परिभाषाशब्दश: लिखवाइए + तीन बारीक बातें — “सामूहिक हित एक विवादास्पद विचार है”; दल “समाज के बुनियादी राजनीतिक विभाजन को भी दर्शाते हैं”; पहचान “नीतियों और सामाजिक आधार से”।
28–35 · तीन हिस्सेनेता · सक्रिय सदस्य · अनुयायी/समर्थक — कक्षा से हर एक का काम पूछिए।
35–40कल की तैयारी — “कल हम देखेंगे कि दल सात काम करते हैं — और उनमें से एक काम हारने के बाद का भी है।”

📋 परिभाषा · तीन हिस्से · “100 साल पहले गिनती के — आज हर जगह” ! बच्चे “दल = झंडा-जुलूस-नेता” समझते हैं। परिभाषा के तीन शब्द घेरिए — संगठित · चुनाव · सत्ता — “ये तीनों हों तभी दल है।” 📝 निकास-पर्ची: “राजनीतिक दल के तीन हिस्से लिखो।” · गृहकार्य: परिभाषा याद।

कालांश 2 — सात कार्य★

🎯 विद्यार्थी सातों कार्य उदाहरण सहित गिना पाए।

समयक्या
0–25 · ★“हमारी कक्षा-पार्टी”★★कक्षा को दो “पार्टियों” में बाँटिए। स्थिति दीजिए — “विद्यालय में खेल-कालांश बढ़े या पुस्तकालय-कालांश?” हर पार्टी को करना है — (1) नीति तय करना; (2) उम्मीदवार चुनना; (3) दो मिनट का प्रचार; (4) वोट; (5) हारने वाली पार्टी विपक्ष बनकर दो सवाल पूछे। ★फिर बोर्ड पर दिखाइए — “तुमने अभी-अभी दलों के पाँच कार्य ख़ुद कर लिए।”
25–36 · सातों कार्यकिताब से सातों क्रम से — सूत्र *“चुनाव · नीति · कानून · सरकार · विपक्ष · जनमत · पहुँच”। ★सातवें पर रुकिए — “राजनीतिक कार्यकर्ता से जान-पहचान बनाना… आसान होता है” — और वह पंक्ति — “वरना अगले चुनाव में लोग उन्हें धूल चटा सकते हैं।”*
36–40भारत-अमरीका फ़र्क़ — वहाँ उम्मीदवार सदस्य-समर्थक चुनते हैं, यहाँ नेता।

📋 सात कार्य (स्थायी सूची — अध्याय भर रहे) ! बच्चे विपक्ष को “काम” नहीं मानते। ज़ोर दीजिए — “हारने के बाद भी दल का काम चालू रहता है — आलोचना और गोलबंदी भी लोकतंत्र की सेवा है।” 📝 निकास-पर्ची: “हारे हुए दल का क्या काम है?” · गृहकार्य: सातों कार्य कॉपी में, हर एक के साथ एक उदाहरण।

कालांश 3 — दलों की ज़रूरत और कितने दल

🎯 विद्यार्थी बता पाए कि दलों के बिना लोकतंत्र क्यों नहीं चलता, और तीन व्यवस्थाएँ पहचान पाए।

समयक्या
0–12कालांश 1 के जवाब किताब से मिलाइए — निर्दलीय उम्मीदवार, “बड़े नीतिगत बदलाव के वायदे” नहीं, और ★“देश कैसे चले इसके लिए कोई उत्तरदायी नहीं होगा।” फिर गैर-दलीय पंचायत चुनाव वाला प्रमाण — “पूरा गाँव कई खेमों में बँट जाता है… राजनीतिक दल भी ठीक यही काम करते हैं।”
12–24 · तीन व्यवस्थाएँएकदलीय (चीन)* — ! “यह लोकतांत्रिक विकल्प नहीं है”; दो दलीय (अमरीका, ब्रिटेन); बहुदलीय (भारत) — 2004 के तीन गठबंधन। बहुदलीय के दोनों पक्ष — घालमेल/अस्थिरता बनाम *“विभिन्न हितों और विचारों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व।”
24–34 · ★सबसे अच्छा जवाबकिताब का जवाब पढ़वाइए — “यह कोई बहुत अच्छा सवाल नहीं है। दलीय व्यवस्था का चुनाव करना किसी मुल्क के हाथ में नहीं है।” और भारत का कारण — “दो-तीन पार्टियाँ इतने बड़े मुल्क की सारी सामाजिक और भौगोलिक विविधताओं को समेट पाने में अक्षम हैं।” ★अध्याय 1–2 की कड़ी — विविधता वाला वही तर्क।
34–40पृष्ठ 50 की तीन तस्वीरों का वर्गीकरण — कौन-सी गतिविधि दलों का कौन-सा कार्य है?

📋 “दलों के बिना: वायदे नहीं · उत्तरदायित्व नहीं” · तीन व्यवस्थाएँ + उदाहरण · “हर मुल्क के लिए एक ही आदर्श प्रणाली संभव नहीं” ! बच्चे पूछेंगे “कौन-सी सबसे अच्छी?” — किताब का ही जवाब दोहराइए, अपनी राय नहीं। 📝 निकास-पर्ची: “एकदलीय व्यवस्था लोकतांत्रिक विकल्प क्यों नहीं?” · गृहकार्य: तीनों व्यवस्थाओं के दो-दो देश।

कालांश 4 — जन-भागीदारी और मान्यता के नियम

🎯 विद्यार्थी 6%+2 / 6%+4 की शर्तें बता पाए।

समयक्या
0–12 · ग्राफ़पृष्ठ 52 — दो बातें: ! “पूरी दुनिया में राजनीतिक दल ही एक ऐसी संस्था है जिस पर लोग सबसे कम भरोसा करते हैं” और ★भारत की सदस्यता विकसित देशों से ज़्यादा और बढ़ती हुई। पूछिए — “भरोसा कम, भागीदारी ज़्यादा — यह कैसे?”
12–26 · मान्यतापंजीकरण सबका, मान्यता कुछ की — चुनाव चिह्न वाली सुविधा। फिर शर्तें बोर्ड पर बड़े अक्षरों में — “राज्यीय: 6% + 2 (विधानसभा) · राष्ट्रीय: 6% + 4 (लोकसभा)”* — और “अथवा चार राज्यों में 6%” वाली बारीकी। *2023 की अधिसूचना — छह राष्ट्रीय दल।
26–36 · अभ्यासकाल्पनिक आँकड़े देकर पूछिए — “पार्टी X को विधानसभा में 7% वोट, 1 सीट — मान्यता मिलेगी?” → नहीं (दो सीटें चाहिए)। तीन-चार ऐसे सवाल।
36–40कल की तैयारी — छह पर्चियाँ छह समूहों को: “कल हर समूह अपना दल किताब के पन्ने से प्रस्तुत करेगा — सिर्फ़ किताब से।”

📋 “सबसे कम भरोसा — पर बढ़ती भागीदारी” · 6%+2 / 6%+4 · 2023 → छह राष्ट्रीय दल ! बच्चे 6% को दोनों में एक जैसा समझ लेते हैं — फ़र्क़ सीटों (2 बनाम 4) और सदन (विधानसभा बनाम लोकसभा) का है। 📝 निकास-पर्ची: “राष्ट्रीय दल की मान्यता की शर्त लिखो।” · गृहकार्य: अपने समूह के दल का किताब-अंश पढ़कर आना।

कालांश 5 — छह राष्ट्रीय दल और क्षेत्रीय दलध्यान

🎯 विद्यार्थी छहों के नाम और किताब में दिए मूल तथ्य बता पाए।

!! इस कालांश के लिए विशेष नियम पहले पढ़िए (खंड क.1) — केवल किताब, बराबर समय, कोई राय नहीं, कोई वर्तमान चर्चा नहीं।

समयक्या
0–24 · समूह-प्रस्तुतिहर समूह तीन मिनट में अपना दल प्रस्तुत करे — केवल चार बातें: गठन-वर्ष/संस्थापक · मुख्य विचार (किताब के शब्द) · कहाँ मजबूत · 2019 का आँकड़ा। ! बाकी सब काटिए — विनम्रता से। क्रम — किताब का क्रम।
24–30 · सूत्रबोर्ड पर छहों नाम — “आ-ब-भा-सी-कां-ए” — और हर एक के साथ एक-एक पहचान-तथ्य (जैसे: 1885 = सबसे पुराना; 1964; 1984-कांशीराम; 1980-जनसंघ से; 2012-आंदोलन से; 2013-पूर्वोत्तर की पहली)।
30–40 · क्षेत्रीय दलनक्शा दिखाइए (13 अप्रैल 2018 की स्थिति)। मुख्य बातें — ‘राज्यीय दल’ नाम; “ज़रूरी नहीं कि विचारधारा में क्षेत्रीय ही हों”; और ★★“1996 के बाद से लगभग प्रत्येक क्षेत्रीय दल को… गठबंधन सरकार का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। इससे हमारे देश में संघवाद और लोकतंत्र मज़बूत हुए हैं।” — अध्याय 2 की कड़ी।

📋 छह दल — नाम + गठन-वर्ष (केवल किताब के तथ्य) · “1996 के बाद… संघवाद और लोकतंत्र मज़बूत” ! कोई बच्चा वर्तमान राजनीति छेड़े — “यह किताब के बाहर की चर्चा है।” एक ही वाक्य, हर बार वही। 📝 निकास-पर्ची: “छह राष्ट्रीय दलों के नाम।” · गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 7, 8, 9।

कालांश 6 — चार चुनौतियाँ★★

🎯 विद्यार्थी चारों चुनौतियाँ समझाकर बता पाए।

समयक्या
0–6शुरुआत — “दल अनिवार्य हैं — यह हमने सिद्ध किया। अब किताब पूछती है: तो लोग उनसे नाराज़ क्यों हैं?”
6–30 · चारों चुनौतियाँएक-एक करके, हर एक के साथ किताब का कार्टून — (1) आंतरिक लोकतंत्र (न सूची, न बैठक, न चुनाव; “नेता से निष्ठा ही ज़्यादा महत्वपूर्ण”); (2) वंशवाद (“अनुभवहीन और बिना जनाधार वाले लोग ताकत वाले पदों पर”; ★“पूरी दुनिया में”); (3) पैसा-अपराध (“कोई भी जायज़-नाजायज़ तरीका”); (4) विकल्पहीनता (★ब्रिटेन की लेबर-कंजरवेटिव का किताबी उदाहरण; “वही थोड़े से नेता हर दल में आते-जाते”)।
30–38 · ★कार्टून-मिलानचारों कार्टून (पृष्ठ 57–59) दिखाकर पूछिए — “यह किस चुनौती का चित्र है?” — कठपुतलियाँ → आंतरिक लोकतंत्र/पैसा; धनकुबेर → पैसा; एकदलीय देश → पैसा-कॉरपोरेट; बर्लुस्कोनी → पैसा-मीडिया। किताब की अपनी गतिविधि यही है।
38–40! याद दिलाइए — “ये चारों बीमारियाँ किसी एक दल की नहीं, पूरी व्यवस्था की हैं — किताब ने भी यहाँ किसी दल का नाम नहीं लिया।”

📋 चार चुनौतियाँ — “अंदर का लोकतंत्र · वंशवाद · पैसा-अपराध · विकल्पहीनता” ! बच्चे चुनौतियों को दलों पर तंज की तरह लेते हैं — रुख़ यह रहे: “जहाँ बीमारी होती है, वहीं इलाज भी होता है — कल इलाज पढ़ेंगे।” 📝 निकास-पर्ची: “चारों चुनौतियों के नाम।” · गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 2।

कालांश 7 — सुधार: हुए और सुझाए

🎯 विद्यार्थी तीन हुए सुधार (सीमाओं सहित) और तीन सुझाव बता पाए।

समयक्या
0–18 · हुए सुधार★हर सुधार को “सुधार + सीमा” की जोड़ी में पढ़ाइए — दल-बदल कानून (सीट गँवानी होगी → दल-बदल घटा ! पर “विरोध का स्वर उठाना और भी मुश्किल”) · शपथपत्र (संपत्ति-अपराध का ब्यौरा ! पर “जाँच करने की कोई व्यवस्था नहीं”) · आयोग का आदेश (सांगठनिक चुनाव, आयकर रिटर्न ! पर “सिर्फ़ खानापूरी”)।
18–30 · तीन सुझावआंतरिक कामकाज का कानून (सूची · संविधान · स्वतंत्र पंच · खुले चुनाव) · ★महिलाओं को एक तिहाई टिकट (अध्याय 3 की कड़ी — “जब मुद्दा राजनीतिक बनता है…”) · चुनाव का खर्च सरकार उठाए (पेट्रोल-कागज-फोन या वोट-अनुपात में नकद)।
30–38 · ! चेतावनीकिताब की सावधानी — “दलों को ज़रूरत से ज़्यादा नियमों से जकड़ना नुकसानदेह भी हो सकता है… सभी दल कानून को दरकिनार करने का तरीका ढूँढ़ने लगेंगे।” पूछिए — “तो क़ानून ही काफ़ी क्यों नहीं?” — यह पूरी किताब का दोहराया हुआ पाठ है (संविधान ज़रूरी, पर काफ़ी नहीं)।
38–40संकेत — “तो फिर बचा क्या? कल — आख़िरी और सबसे बड़ा जवाब।”

📋 तीन सुधार (हर एक के नीचे उसकी सीमा) · तीन सुझाव — “कानून · महिला · पैसा” ! बच्चे सुधार और सुझाव मिला देते हैं — बोर्ड पर दो अलग खाने: “हो चुके ✓” / “सुझाए गए →” 📝 निकास-पर्ची: “दल-बदल कानून का एक लाभ और एक सीमा।” · गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 3।

कालांश 8 — दो और तरीके · यूनुस का केस · समापन★★

🎯 विद्यार्थी समझ पाए कि अंतिम रास्ता भागीदारी है।

समयक्या
0–12 · दो तरीकेजनता का दबाव (चिट्ठियाँ · प्रचार · आंदोलन · दबाव समूह · मीडिया) — “अगर दलों को लगे कि… जनाधार गिरने लगेगा… तो इसे लेकर वे गंभीर होने लगेंगे।” और ★★खुद शामिल होना — “लोकतंत्र की गुणवत्ता लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी से तय होती है। अगर आम नागरिक… बाहर से ही बातें करते रहें तो सुधार मुश्किल है।”
12–26 · यूनुस का केसअभ्यास प्रश्न 11 कक्षा में — मोहम्मद यूनुस (ग्रामीण बैंक, 2006 नोबेल शांति) का ‘नागरिक शक्ति’ दल। तीन सवालों पर समूह-चर्चा — (1) नयी पार्टी बनाकर ठीक किया? (2) अलग रहने के लिए संगठन कैसा हो? (3) तुम संस्थापक होते तो क्या दलील देते? ★जोड़ दिखाइए — यह “खुद शामिल होना” वाले रास्ते का जीवित उदाहरण है।
26–36 · ★★समापन चर्चातीन सवाल — (1) “दल अनिवार्य क्यों हैं?” (2) “फिर भी नाराज़गी क्यों?” (3) “और आख़िरी इलाज क्या?” → और पूरी कक्षा से एक साथ बुलवाइए — “खराब राजनीति का समाधान है ज़्यादा से ज़्यादा राजनीति और बेहतर राजनीति।”
36–40किताब का आख़िरी संकेत — “हम इस बात की चर्चा फिर से आखिरी अध्याय में करेंगे।” — अगले अध्याय की कड़ी।

📋 दो तरीके — “दबाव” और “भागीदारी” · अंतिम वाक्य बड़े अक्षरों में ! बच्चे “राजनीति” शब्द को गंदा मानकर आए हैं — यही तोड़ना इस कालांश का असली काम है: “किताब कह रही है — दूर मत भागो, भीतर जाकर बेहतर बनाओ।” 📝 निकास-पर्ची: “ख़राब राजनीति का समाधान क्या है?” · गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 1।

कालांश 9 — प्रश्नावली और दोहराव

समयक्या
0–15वस्तुनिष्ठ — प्रश्न 6, 7, 8, 9, 10 कक्षा में; हर उत्तर पर “क्यों?”। ★प्रश्न 10 पर रुकिए — (स) ग़लत क्यों → “दल लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त हैं।”
15–30लंबे प्रश्न 1, 2, 3 के ढाँचे — सात कार्य / चार चुनौतियाँ / तीन+तीन सुधार। तालिका-रूप में उत्तर की आदत।
30–40 · अंतिम दोहरावपाँच सूत्र एक साथ — “चुनाव-नीति-कानून-सरकार-विपक्ष-जनमत-पहुँच” · “6%+2 / 6%+4” · “आ-ब-भा-सी-कां-ए” · “अंदर का लोकतंत्र-वंशवाद-पैसा-विकल्पहीनता” · “कानून-महिला-पैसा” — और दोनों मुख्य वाक्य।

खंड ङ — विभेदित शिक्षण

किसके लिएक्या
बहुत पीछेकेवल चार चीज़ें — परिभाषा · सात कार्यों के सात शब्द · छह दलों के नाम · चार चुनौतियों के नाम। ! दलों के वर्ष-आँकड़े इनसे मत रटवाइए।
औसतचार तालिकाएँ — सात कार्य (उदाहरण सहित) · मान्यता की शर्तें · छह दल (गठन-वर्ष + एक पहचान-तथ्य) · चुनौतियाँ-सुधार।
तेज़(1) यूनुस केस पर 150 शब्द; (2) ★“अगर तुम एक नयी पार्टी बनाओ तो उसका संविधान कैसा हो कि चारों चुनौतियाँ उसमें न आएँ?”; (3) पृष्ठ 56 के नक्शे से अपने पड़ोसी राज्यों के क्षेत्रीय दल छाँटना।
झिझकने वाले“कक्षा-पार्टी” गतिविधि में इन्हें मतदाता/गिनती की भूमिका से शुरू कराइए — अगली बार प्रचारक।

खंड च — मूल्यांकन योजना

च.1 सतत

साधनकबक्या
निकास-पर्चीहर कालांशदिन की एक बात
★“कक्षा-पार्टी”कालांश 2कार्यों की समझ — करके
कार्टून-मिलानकालांश 6चुनौती पहचानना
समूह-प्रस्तुतिकालांश 5किताब तक सीमित रहकर तथ्य कहना

च.2 लिखित

प्रकारअंकक्या
वस्तुनिष्ठ1वर्ष, संस्थापक, शर्तें, गठबंधन
अति लघु2परिभाषाएँ — दल · दल-बदल · शपथपत्र · शासक दल
लघु3तीन व्यवस्थाएँ · मान्यता · कोई एक चुनौती
दीर्घ5सात कार्य · चार चुनौतियाँ · सुधार

च.3 अंक-नियम पहले बता दीजिएध्यान

  1. “कार्य/चुनौतियाँ बताइए” में सिर्फ़ नाम = आधे अंक — हर एक के साथ एक पंक्ति व्याख्या चाहिए।
  2. सुधार वाले उत्तर में “हो चुके” और “सुझाए गए” अलग-अलग — मिलाने पर अंक कटेंगे।
  3. छह दलों वाले उत्तर में किताब के तथ्य ही — अपनी ओर से जोड़ा गया वाक्य अंक नहीं दिलाएगा।

खंड छ — परियोजना और गतिविधि

#परियोजनाकैसे
1★★“हमारी कक्षा-पार्टी” का विस्तारकक्षा-पुस्तकालय/सफ़ाई जैसे असली मुद्दे पर दो दल, नीति-पत्र, चुनाव, और विपक्ष की साप्ताहिक समीक्षा — महीने भर चलाइए। सातों कार्य जी कर सीखे जाते हैं।
2कतरन-संग्रह (किताब की अपनी, पृष्ठ 50)अख़बार से दलों की गतिविधियों की तीन कतरनें — हर एक पर लिखो कि वह कौन-सा कार्य है। ! कतरनें गतिविधि की हों, विवाद की नहीं।
3नक्शा-कार्यपृष्ठ 56 के नक्शे से — पाँच राज्य और उनके क्षेत्रीय दल; और यह प्रश्न: “किन राज्यों में कोई क्षेत्रीय दल अंकित नहीं है?”
4★“मेरी पार्टी का संविधान”समूह में एक काल्पनिक दल का संविधान लिखो जिसमें चारों चुनौतियों के चार तोड़ दर्ज हों (खुले चुनाव · योग्यता से पद · पारदर्शी चंदा · स्पष्ट नीति-अंतर)।
5शपथपत्र पढ़नाECI/CEO वेबसाइट से किसी पुराने चुनाव का एक नमूना शपथपत्र देखकर बताइए — उसमें क्या-क्या घोषित होता है। (शिक्षक चुनकर लाएँ — किसी वर्तमान उम्मीदवार का नहीं।)

खंड ज — शिक्षक के लिए पाँच चेतावनियाँ

  1. !! इस अध्याय का नियम पिछले अध्यायों से उल्टा है — और इसीलिए ज़्यादा नाज़ुक है। किताब दलों के नाम लेती है, तो आप भी लेंगे — पर किताब जितना, किताब के शब्दों में, बराबरी से। एक भी अतिरिक्त विशेषण, तुलना या ताज़ा चुनावी संदर्भ नहीं।

  2. ! “चुनौतियाँ” पढ़ाते समय किसी दल या नेता की ओर इशारा नहीं — किताब ने भी वहाँ कोई नाम नहीं लिया। बीमारी व्यवस्था की बताइए, किसी पक्ष की नहीं।

  3. ! कक्षा में चुनावी बहस शुरू हो जाए तो एक ही वाक्य — “यह हमारी किताब के बाहर की चर्चा है; हम किताब तक रहेंगे।” — हर बार वही वाक्य, शांति से।

  4. ! 2019 के आँकड़े ही पढ़ाइए — किताब यही देती है और परीक्षा इसी से आएगी। बाद के चुनावों के आँकड़े कक्षा में मत लाइए (फ़ाइल 07 केवल शिक्षक की जानकारी के लिए है)।

  5. ★★और सबसे ज़रूरी — इस अध्याय का असली प्रतिफल “राजनीति” शब्द के प्रति नज़रिया बदलना है। बच्चे इसे गाली की तरह बरतते आए हैं; किताब इसे लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त और नागरिक का कर्तव्य बताती है। अगर अध्याय के अंत में बच्चे “राजनीति गंदी चीज़ है” की जगह “राजनीति को बेहतर बनाना हमारा काम है” कहने लगें — तो अध्याय सफल हुआ।