अध्याय 1सत्ता की साझेदारी

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NCERT, लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1

यह पन्ना उनके लिए है जो घर पर दसवीं के बच्चे के साथ बैठते हैं। विषय आपको आता हो, यह ज़रूरी नहीं: हर सवाल के आगे लिखा है कि जवाब में क्या आना चाहिए, और किताब के किस पृष्ठ पर है।

दसवीं का बच्चा पंद्रह-सोलह साल का होता है। इस उम्र में उससे सवाल-जवाब करके परखने से ज़्यादा काम आता है उससे समझवाना। उससे कहिए, “मुझे यह अध्याय समझाओ, मैंने नहीं पढ़ा।” समझाते समय बच्चे को ख़ुद पता चल जाता है कि कौन-सी बात पक्की है और कौन-सी कच्ची।

किताब की अपनी पंक्तियाँ उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ संख्या के साथ दी हैं। पृष्ठ संख्याएँ NCERT लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं; 2024-25 वाली किताब में भी यही पृष्ठ हैं।


1. इस अध्याय में क्या है

अध्याय एक सवाल से शुरू होता है। पृष्ठ 2 पर एक बच्चा कहता है: “मेरे दिमाग में सीधा सा समीकरण यह है कि सत्ता का बँटवारा = सत्ता के टुकड़े करना = देश को कमज़ोर करना।” अध्याय पूरा होने तक बच्चे को इसका जवाब देना आना चाहिए: क्या सत्ता बाँटने से देश सचमुच कमज़ोर होता है?

इसके लिए किताब दो देशों की कहानी सुनाती है। दोनों लोकतांत्रिक हैं (पृष्ठ 5), दोनों में अलग-अलग भाषा और समुदाय के लोग रहते हैं, पर दोनों ने अलग रास्ता चुना।

बेल्जियमश्रीलंका
कहाँ हैयूरोप में; क्षेत्रफल में हरियाणा से भी छोटा (पृष्ठ 2)तमिलनाडु के दक्षिणी तट से कुछ किलोमीटर दूर एक द्वीपीय देश (पृष्ठ 2)
आबादीएक करोड़ से थोड़ी ज़्यादा, हरियाणा की करीब आधी (पृष्ठ 2)करीब दो करोड़, हरियाणा के बराबर (पृष्ठ 2)
लोग59% डच बोलते हैं, 40% फ़्रेंच, 1% जर्मन (पृष्ठ 2)74% सिंहली, 18% तमिल (पृष्ठ 2)
नेताओं ने क्या कियासाझेदारी चुनी: 1970 और 1993 के बीच संविधान में चार संशोधन किए (पृष्ठ 4)सिंहली प्रभुता के कदम उठाए: 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाया (पृष्ठ 3)
नतीजाव्यवस्था बेहद सफल रही; गृहयुद्ध की आशंका पर विराम लगा (पृष्ठ 5)गृहयुद्ध हुआ, जिसका अंत 2009 में हुआ (पृष्ठ 4)

दोनों कहानियों से किताब यह सीख निकालती है (पृष्ठ 5): “अगर बहुसंख्यक समुदाय दूसरों पर प्रभुत्व कायम करने और सत्ता में उनको हिस्सेदार न बनाने का फैसला करता है तो इससे देश की एकता ही संकट में पड़ सकती है।”

इसके बाद अध्याय दो बातें सिखाता है: सत्ता की साझेदारी क्यों ज़रूरी है, इसके दो तर्क (पृष्ठ 6), और लोकतंत्र में सत्ता बँटने के रूप (पृष्ठ 8–9; पृष्ठ 10 पर इन्हें चार श्रेणियाँ कहा गया है)। अगले दो अध्याय इसी बात को आगे बढ़ाते हैं (पृष्ठ 1)।

बेल्जियम वाला हिस्सा बच्चे को उलझा हुआ लगे तो घबराइए नहीं। किताब ख़ुद कहती है (पृष्ठ 5): “आपको बेल्जियम का मॉडल कुछ जटिल लग सकता है। निश्चित रूप से यह जटिल है – खुद बेल्जियम में रहने वालों के लिए भी।”

2. बच्चे से समझिए: दस सवाल

बच्चे से एक-एक सवाल पूछिए और उसे अपने शब्दों में समझाने दीजिए। आप दाईं ओर देखते जाइए कि ज़रूरी बातें आईं या नहीं। शब्द हूबहू न हों तो कोई बात नहीं; बात सही होनी चाहिए। जहाँ बच्चा अटके, किताब का वह पृष्ठ खोलिए, बच्चा उसे पढ़े और फिर से समझाए। अगले दिन वही सवाल एक बार और पूछ लीजिए।

सवालजवाब में यह आना चाहिएपृष्ठ
1. बेल्जियम में कौन-कौन सी भाषाएँ बोली जाती हैं, और किसे कितने लोग बोलते हैं?59% डच (फ्लेमिश इलाके में), 40% फ़्रेंच (वेलोनिया में), 1% जर्मन। राजधानी ब्रूसेल्स में 80% फ़्रेंच, 20% डच।2
2. श्रीलंका के दो बड़े समुदाय कौन-से हैं?सिंहली 74%, तमिल 18%। तमिलों में भी दो समूह हैं: श्रीलंकाई मूल के तमिल (13%) और हिंदुस्तानी तमिल।2–3
3. बहुसंख्यकवाद किसे कहते हैं?यह मान्यता कि बहुमत वाला समुदाय अपने मनचाहे ढंग से देश का शासन कर सकता है, और इसके लिए अल्पसंख्यकों की ज़रूरतों या इच्छाओं की अनदेखी कर सकता है।3
4. श्रीलंका की सरकार ने सिंहली प्रभुता के लिए कौन-से कदम उठाए?1956 के कानून से तमिल को दरकिनार करके सिंहली एकमात्र राजभाषा; विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता; नए संविधान में बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा।3
5. इन कदमों का नतीजा क्या हुआ?तमिलों में नाराज़गी और बेगानापन बढ़ा, दोनों समुदायों के संबंध बिगड़े। स्वायत्तता की माँग लगातार ठुकराई गई। टकराव गृहयुद्ध बना; हज़ारों लोग मारे गए, अनेक परिवार शरणार्थी बने। 2009 में गृहयुद्ध का अंत हुआ।3–4
6. बेल्जियम के नेताओं ने क्या किया?संविधान में चार संशोधन किए (1970 से 1993 के बीच), ताकि किसी को बेगानेपन का अहसास न हो। केंद्र में डच और फ़्रेंच मंत्रियों की संख्या बराबर; राज्य सरकारें केंद्र के अधीन नहीं; ब्रूसेल्स में अलग सरकार, दोनों समुदायों का बराबर प्रतिनिधित्व।4
7. बेल्जियम की सामुदायिक सरकार क्या है?सरकार का तीसरा स्तर। एक भाषा बोलने वाले लोग, चाहे कहीं भी रहें, इसे चुनते हैं। यह संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर फ़ैसले लेती है।5
8. इन दोनों कहानियों से क्या सीख मिलती है?बेल्जियम के नेताओं ने माना कि सब समुदायों और क्षेत्रों की भावनाओं का आदर करने पर ही देश की एकता संभव है, इसलिए साझेदारी की; श्रीलंका ने उलटा रास्ता लिया। बहुमत दूसरों को सत्ता में हिस्सा न दे तो देश की एकता ही संकट में पड़ सकती है।5
9. सत्ता की साझेदारी क्यों ज़रूरी है? दो तर्क बताओ।युक्तिपरक तर्क: इससे सामाजिक समूहों में टकराव का अंदेशा घटता है और राजनीतिक व्यवस्था स्थिर रहती है। नैतिक तर्क: सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है; वैध सरकार वही है जिसमें अपनी भागीदारी से सभी समूह शासन से जुड़ते हैं।6
10. सत्ता की साझेदारी के चार रूप कौन-से हैं?(1) सरकार के अंगों के बीच (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका): क्षैतिज वितरण। (2) अलग-अलग स्तर की सरकारों के बीच (केंद्र, राज्य, नगरपालिका, पंचायत): उर्ध्वाधर वितरण। (3) सामाजिक समूहों के बीच, जैसे बेल्जियम की सामुदायिक सरकार। (4) दलों, दबाव-समूहों और आंदोलनों के बीच, जैसे गठबंधन सरकार।8–9

3. छह बातें जिनमें बच्चे अक्सर उलझते हैं

कॉपी जाँचते समय इन पर नज़र रखिए। बाएँ वाली बात लिखी हो तो वह ग़लत है।

बच्चा लिख देता हैसही बातपृष्ठ
बेल्जियम में डच बहुमत ने फ़्रेंच-भाषियों पर अपनी इच्छा थोपी।किताब कहती है कि डच-भाषी अपनी इच्छाएँ “थोप सकते थे”। ऐसा हो सकता था, हुआ नहीं; बेल्जियम ने साझेदारी चुनी।3, 4
श्रीलंका में तानाशाही थी।सिंहली प्रभुता के कदम “लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार” ने उठाए थे। दोनों देश लोकतांत्रिक हैं।3, 5
13% श्रीलंकाई तमिलों को 18% से अलग गिनना13% उन्हीं 18% तमिलों के भीतर है।2
ब्रूसेल्स का लेन-देन उलट देनाकेंद्र में बराबरी डच-भाषियों ने मानी, इसीलिए फ़्रेंच-भाषियों ने ब्रूसेल्स में बराबरी मानी।4
क्षैतिज और उर्ध्वाधर उलट देनाक्षैतिज: अंगों के बीच, “एक ही स्तर पर”। उर्ध्वाधर: ऊपर और नीचे के स्तर की सरकारों के बीच, जैसे केंद्र, राज्य और पंचायत। याद रखने के लिए (हमारी ओर से): आड़ी रेखा पर अंग, खड़ी रेखा पर स्तर।8, 9
युक्तिपरक और नैतिक तर्क मिला देनाफ़ायदे और नतीजे की बात (टकराव घटना, स्थिरता) युक्तिपरक है; “लोकतंत्र की आत्मा” और वैध सरकार की बात नैतिक है।6

4. किताब के शब्द, आसान भाषा में

ये शब्द जवाबों में आने चाहिए। बच्चा इनका मतलब अपने शब्दों में बता दे, तो समझिए शब्द पक्का है।

किताब का शब्दआसान मतलबपृष्ठ
जातीयऐसा समूह जो अपनी संस्कृति को अलग मानता है और मानता है कि उसके पूर्वज एक थे। ज़रूरी नहीं कि सबका धर्म या राष्ट्रीयता एक हो।2
बहुसंख्यकवादबहुमत वाला समुदाय मनमाने ढंग से शासन करे और अल्पसंख्यकों की ज़रूरतें अनदेखी करे।3
गृहयुद्धदेश के भीतर सरकार-विरोधी समूहों की लड़ाई, जो इतनी हिंसक हो जाए कि युद्ध जैसी लगे।4
सामुदायिक सरकारबेल्जियम में एक भाषा बोलने वालों की अपनी सरकार, जो संस्कृति, शिक्षा और भाषा के फ़ैसले लेती है।5
युक्तिपरकनफ़ा-नुक़सान का सावधानी से हिसाब लगाकर लिया गया फ़ैसला।6
नैतिक तर्कसाझेदारी अपने-आप में ज़रूरी है, क्योंकि यही लोकतंत्र की आत्मा है।6
गठबंधन सरकारदो या ज़्यादा दल मिलकर सरकार बनाएँ।6, 9
क्षैतिज वितरणविधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच, एक ही स्तर पर सत्ता का बँटवारा।8
नियंत्रण और संतुलनहर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है, ताकि कोई एक अंग असीमित सत्ता न चलाए।8
उर्ध्वाधर वितरणऊँचे और निचले स्तर की सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा।9

5. किताब के प्रश्न 6 से 9: सही विकल्प

ये चार प्रश्न विकल्प वाले हैं, इसलिए आप सीधे मिला सकते हैं।

प्रश्नसही विकल्पध्यान दीजिए
6(सा) क, ख, घ, चकिताब में “(घ)” दो बार छपा है। दूसरा “(घ)” असल में “(ङ)” है; विकल्प (रे) में “ङ” लिखा है, उसी से पता चलता है। बच्चा उसे “ङ” लिखे तो ग़लत मत मानिए।
7(मा) ख, ग और घ(क) ग़लत है। बेल्जियम में डच-भाषी अपनी इच्छा थोप सकते थे, पर ऐसा हुआ नहीं; नेताओं ने साझेदारी का रास्ता चुना।
8(गा) ख-घ-क-गअंग = अधिकारों का वितरण; स्तर = संघीय सरकार; सामाजिक समूह = सामुदायिक सरकार; दल = गठबंधन सरकार। सूची I की दूसरी पंक्ति में भी “अधिकारों” शब्द है, इसलिए बच्चा उसे (ख) से मिला देता है; पर (ख) अंगों के बीच का बँटवारा है (पृष्ठ 8, क्षैतिज वितरण)।
9(ख) अ और ब दोनों सही

6. लिखे हुए जवाब कैसे जाँचें

प्रश्न 1 से 5 में बच्चे को लिखकर जवाब देना है। आपको पूरा जवाब नहीं जाँचना; बस देखिए कि ये हिस्से हैं या नहीं।

  • प्रश्न 1 (चार रूप, हर एक का उदाहरण): चारों रूप हैं? हर रूप के साथ एक उदाहरण है? पहले दो के नाम (क्षैतिज, उर्ध्वाधर) सही जगह हैं? ऊपर सवाल 10 का जवाब देखिए।
  • प्रश्न 2 (भारत से एक उदाहरण, एक युक्तिपरक और एक नैतिक कारण): तीनों हिस्से अलग-अलग दिख रहे हैं? उदाहरण भारत का है?
  • प्रश्न 3 और 4 में बच्चे की राय पूछी गई है। किताब करीब 50 शब्द माँगती है, यानी तीन-चार वाक्य। जवाब में एक साफ़ राय हो, और उसका कारण अध्याय से हो।
  • प्रश्न 5 में पंचायती राज वाले उद्धरण से एक युक्तिपरक कारण चुनना है: नतीजे या फ़ायदे वाली बात, जैसे भ्रष्टाचार कम होना या प्रशासनिक कुशलता बढ़ना (पृष्ठ 11)।

किताब इन प्रश्नों के उत्तर नहीं देती। हमारे लिखे उत्तर रिवीजन नोट्स के आख़िर में “अपने को जाँचिए” वाले हिस्से में हैं। बच्चे का जवाब उनसे शब्द-शब्द न मिले, तो भी ठीक है, अगर ज़रूरी बातें आ गई हों।

7. घर पर दस मिनट की बातचीत

दसवीं के बच्चे से पूछताछ कम, बातचीत ज़्यादा कीजिए। खाने के समय या कहीं आते-जाते इनमें से कोई एक बात छेड़िए।

घर का कोई फ़ैसला लीजिए: छुट्टी में कहाँ जाएँ, या शाम को टीवी पर क्या चले। पूछिए: “अगर हर बार वही होगा जो ज़्यादा लोग चाहें, तो जो एक-दो लोग हर बार हारेंगे, उन्हें कैसा लगेगा? क्या घर में शांति रहेगी?” फिर बच्चे को पृष्ठ 6 की यह पंक्ति पढ़ने को कहिए: “बहुसंख्यकों का अत्याचार सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही परेशानी पैदा नहीं करता अकसर यह बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है।” और पूछिए कि यह किस तर्क की बात है। (युक्तिपरक की, क्योंकि यह नतीजे की बात है।)

या पृष्ठ 9 का सवाल पूछिए, जो किताब में एक बच्चा पूछता है: “मेरे स्कूल में हर महीने क्लास मॉनीटर बदल जाता है। क्या आप इसे ही सत्ता की भागीदारी बता रहे हैं?” किताब इसका जवाब नहीं देती। बच्चे की राय सुनिए, फिर उसे पृष्ठ 9 पर वह बात ढूँढने दीजिए जहाँ लिखा है कि लोकतंत्र में सत्ता बारी-बारी से अलग-अलग दलों के हाथ आती-जाती रहती है।

अध्याय पूरा होने पर पृष्ठ 2 वाला समीकरण फिर से रखिए: “सत्ता का बँटवारा = सत्ता के टुकड़े करना = देश को कमज़ोर करना।” अब बच्चा बेल्जियम और श्रीलंका का नाम लेकर बता पाए कि यह सही क्यों नहीं है, तो अध्याय समझ में आ गया।

8. खलील की उलझन: एक सवाल जिसका एक जवाब नहीं

पृष्ठ 7 पर विक्रम और बेताल की एक कहानी है। लेबनान में गृहयुद्ध के बाद नेताओं ने तय किया कि देश के बड़े पद, जैसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए तय रहेंगे। खलील लोकप्रिय है और राजनीति में आगे जाना चाहता है, पर इस व्यवस्था में वह सबसे बड़े पद तक नहीं पहुँच सकता। वह कहता है: “सिर्फ़ चुनाव कराइए, हर किसी को चुनाव लड़ने की आज़ादी दीजिए और जिसे सबसे ज़्यादा वोट मिलें वह राष्ट्रपति बन जाए; भले ही वह किसी समुदाय का हो?” पर जिन बड़े-बुज़ुर्गों ने गृहयुद्ध देखा है, उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था ही शांति की सबसे अच्छी गारंटी है।

बेताल पूछता है: “अगर आपको लेबनान का कानून फिर से लिखने का अधिकार होता तो आप क्या करते? क्या आप पुरानी व्यवस्था ही चलने देते या आप कुछ नया करते?”

किताब इसका कोई एक सही जवाब नहीं देती, और आपको भी नहीं देना है। बच्चा जो भी चुने, दो बातें पूछिए: “क्यों?” और “दूसरी तरफ़ वाले क्या कहेंगे?” दोनों तरफ़ की बात सोच पाना किताब के प्रश्न 3 और 4 जैसे राय वाले प्रश्नों में भी काम आता है।

बात लेबनान की इसी कहानी पर रखिए। किसी धर्म या समुदाय पर टिप्पणी, या आज की राजनीति की बहस, इस सवाल का हिस्सा नहीं है।

अगर सिर्फ़ पाँच मिनट हों

ये चार सवाल पूछ लीजिए। चारों ठीक हों, तो अध्याय की मुख्य बातें आ गई हैं।

सवालजवाब
श्रीलंका और बेल्जियम में बहुमत ने क्या अलग किया?श्रीलंका: बहुसंख्यकवाद, नतीजा गृहयुद्ध। बेल्जियम: सत्ता की साझेदारी, देश एक रहा।
सत्ता की साझेदारी के दो तर्क?युक्तिपरक: टकराव घटता है, व्यवस्था स्थिर रहती है। नैतिक: यह लोकतंत्र की आत्मा है।
साझेदारी के चार रूप?अंगों के बीच, सरकार के स्तरों के बीच, सामाजिक समूहों के बीच, दलों और दबाव-समूहों के बीच।
क्षैतिज और उर्ध्वाधर में फ़र्क़?क्षैतिज: एक ही स्तर के अंगों में। उर्ध्वाधर: ऊपर-नीचे के स्तर की सरकारों में।

बच्चे के लिए इसी अध्याय के और पन्ने

  • रिवीजन नोट्स: पूरा अध्याय छोटे में, किताब के सभी प्रश्नों के उत्तर के साथ।
  • प्रश्न बैंक: परीक्षा जैसे 60 प्रश्न, उत्तर के साथ। बच्चा पहले ख़ुद लिखे, फिर मिलाए।
  • फ़्लैशकार्ड: बाईं ओर सवाल, दाईं ओर जवाब। जवाब ढककर बोलिए, फिर मिलाइए; रोज़ पाँच मिनट दोहराने के लिए।
  • इंटरैक्टिव अध्याय: पूरा अध्याय स्क्रीन पर, छह हिस्सों में, नक्शों के साथ; आख़िर में अभ्यास।