अध्याय 3जाति, धर्म और लैंगिक मसले

पाठ योजना42 मिनट

कक्षा — 10 · विषय — राजनीति विज्ञान (लोकतांत्रिक राजनीति) · पृष्ठ — 29 से 45 · कालांश — 10

!! इस पाठ योजना का खंड “ज” (चेतावनियाँ) पहले पढ़िए, फिर बाक़ी सब। यह पूरे कक्षा-10 पाठ्यक्रम की सबसे संवेदनशील सामग्री है, और इसे पढ़ाने का तरीक़ा उतना ही मायने रखता है जितना उसकी विषय-वस्तु।

इस अध्याय का बड़ा विचार — किताब का पहला ही वाक्य — “सामाजिक विविधता लोकतंत्र के लिए कोई खतरा नहीं होती… कई बार तो यह अभिव्यक्ति लोकतंत्र के लिए लाभकर भी होती है।”

★★और बोर्ड पर पूरे अध्याय भर रहने वाली पंक्ति — “पहचान एक नहीं होती। और जो किसी को सिर्फ़ एक पहचान में क़ैद कर दे — वही सांप्रदायिकता है, वही जातिवाद है।”


क.1 सबसे पहले यह तय कर लीजिएध्यान

इस अध्याय में तीन विषय आते हैं जिन पर आपकी कक्षा के बच्चे अलग-अलग पक्षों से आते हैं। इसलिए पहले दिन ही, पहले पाँच मिनट में, यह बात साफ़ शब्दों में कह दीजिए —

“इस अध्याय में हम किसी धर्म, किसी जाति या किसी व्यक्ति के बारे में बात नहीं करेंगे। हम तीन आदतों के बारे में बात करेंगे — भेदभाव, सांप्रदायिकता और जातिवाद। और किताब की आलोचना किसी समुदाय की नहीं, इन्हीं आदतों की है।”

★यह वाक्य बोर्ड पर लिख भी दीजिए और अध्याय भर रहने दीजिए। इसके बिना यह अध्याय पढ़ाना जोखिम भरा है; इसके साथ यह सबसे कीमती अध्याय है।

क.2 अध्याय की बनावट — और दो अलग-अलग नतीजे

भागपृष्ठविषयकिताब का फ़ैसला
130–35लैंगिक मसले★सकारात्मक — इसे राजनीतिक बनाना ज़रूरी था
236–38धर्म और सांप्रदायिकता! नकारात्मक — यह देश की बुनियाद के लिए ख़तरा है
338–43जाति★! दोनों — आवाज़ भी दी, और नुकसान भी किया

★यह ढाँचा पहले दिन ही बोर्ड पर बना दीजिए। तब बच्चों को दिखेगा कि किताब हर सामाजिक विभाजन को एक जैसा नहीं मान रही — और वही इस अध्याय की समझदारी है।

क.3 सामग्री

#क्याकिस कालांश में
1किताब का “आदर्श स्त्री की कुछ बानगी” वाला पोस्टर (पृष्ठ 31)2
2★समय का उपयोग वाली तालिका (पृष्ठ 32) — बोर्ड पर बनाने के लिए2
3बाल स्त्री-पुरुष अनुपात का नक्शा (पृष्ठ 33) और “50 million women missing” वाला पोस्टर (पृष्ठ 34)3
4संसदों में महिलाओं का ग्राफ़ (पृष्ठ 34)4
5छह पर्चियाँ — किसी बच्चे की “पहचानें” लिखने के लिए (कालांश 6 की मुख्य गतिविधि)6
6वोट बैंक वाला कार्टून (पृष्ठ 41)9
7धार्मिक समुदायों का पाई चार्ट (पृष्ठ 40) और गरीबी की तालिका (पृष्ठ 42)7, 8

क.4 कक्षा-व्यवस्था

  • 4–5 के स्थायी समूह — और ! समूह बनाते समय स्वयं मिश्रित बनाइए, बच्चों को अपनी मर्ज़ी से मत बनाने दीजिए।
  • बोर्ड तीन भागों में —
    • बायाँ किनारा (स्थायी): “हम समुदायों की नहीं, तीन आदतों की बात कर रहे हैं” + “पहचान एक नहीं होती”
    • बीच: आज का काम
    • दायाँ किनारा: तीन विभाजनों की तालिका, जो अध्याय भर भरती जाएगी

खंड ख — अधिगम प्रतिफल

#प्रतिफलकालांशजाँच
1श्रम का लैंगिक विभाजन समझा पाएगा और उदाहरण दे पाएगा1–2निकास-पर्ची 2
★2बता पाएगा कि लैंगिक असमानता का आधार जैविक नहीं, सामाजिक है2अभ्यास प्रश्न 7
3भेदभाव के पाँच रूप आँकड़ों सहित गिना पाएगा3निकास-पर्ची 3
4महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की स्थिति बता पाएगा4अभ्यास प्रश्न 5
5बता पाएगा कि धर्म और राजनीति का हर रिश्ता ग़लत नहीं है5मौखिक
★6सांप्रदायिकता की परिभाषा और चार रूप बता पाएगा6निकास-पर्ची 6
7धर्मनिरपेक्ष शासन के चार प्रावधान बता पाएगा7अभ्यास प्रश्न 6
8जाति व्यवस्था और उसमें आए बदलाव समझा पाएगा8दो-कॉलम अभ्यास
★9बता पाएगा कि “चुनाव जातियों का खेल है” क्यों सच नहीं है9अभ्यास प्रश्न 4
★★10और सबसे ज़रूरी — पहचान पाएगा कि सांप्रदायिकता और जातिवाद एक ही ग़लती के दो नाम हैं10समापन चर्चा

खंड ग — पूरी योजना एक नज़र में

कालांशविषयपृष्ठमुख्य गतिविधि
1परिचय · निजी और सार्वजनिक का विभाजन29–30★“घर में कौन क्या करता है?” — गिनती
2श्रम का लैंगिक विभाजन · समय का उपयोग30–32तालिका पढ़ना
3भेदभाव के पाँच रूप33–34नक्शा और पोस्टर
4नारीवादी आंदोलन · राजनीतिक प्रतिनिधित्व31–35ग्राफ़ पढ़ना
5धर्म और राजनीति — जो ग़लत नहीं है36तीन बातें
6★★सांप्रदायिकता — परिभाषा और चार रूप36–37“तुम कौन हो?” — पहचान वाली गतिविधि
7धर्मनिरपेक्ष शासन · धार्मिक विविधता के आँकड़े37–38, 40चार प्रावधान + अफ़वाह बनाम तथ्य
8जातिगत असमानताएँ और उनमें बदलाव38–39, 42“क्या बदला, क्या नहीं”
9★राजनीति में जाति · “चुनाव जाति का खेल नहीं”39, 41कार्टून + चार कारण
10प्रश्नावली और समापन44–45समापन चर्चा

खंड घ — कालांश-दर-कालांश

हर कालांश का ढाँचा: 🎯 उद्देश्य → 🎒 आज क्या ले जाना है → ⏱ मिनट-वार प्रवाह → 📋 बोर्ड-कार्य → ! यहाँ बच्चे अटकेंगे → 📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

कालांश 1 — परिचय और निजी-सार्वजनिक का विभाजन

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी समझे कि घर का काम भी एक राजनीतिक सवाल है।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
! 0–5 मिनट · नियमसबसे पहले खंड क.1 वाला वाक्य कहिए और बोर्ड पर लिखिए — “हम किसी समुदाय की नहीं, तीन आदतों की बात करेंगे।” यह पाँच मिनट पूरे अध्याय की नींव हैं।
5–12 मिनट · परिचयकिताब का पहला वाक्य पढ़वाइए — “सामाजिक विविधता लोकतंत्र के लिए कोई खतरा नहीं होती… कई बार तो यह अभिव्यक्ति लोकतंत्र के लिए लाभकर भी होती है।” और तीन विभाजन — लिंग · धर्म · जाति — बोर्ड के दाएँ किनारे लिख दीजिए।
★12–24 मिनट · गिनती वाली गतिविधि★★कॉपी में दो कॉलम बनवाइए — “मेरे घर में यह काम कौन करता है” — और दस काम बोलिए: खाना बनाना · बर्तन धोना · कपड़े धोना · सफ़ाई · बच्चों की देखरेख · बाज़ार से सामान · बिजली-पानी का बिल · बीमार की देखभाल · मेहमान की ख़ातिर · कमाई। फिर हाथ गिनवाइए — कितने घरों में पहले पाँच काम औरतें करती हैं? ! किसी बच्चे का घर उदाहरण मत बनाइए — सिर्फ़ गिनती।
24–33 मिनट · परिभाषाश्रम का लैंगिक विभाजन शब्दश: लिखवाइए। फिर किताब की पंक्ति — “औरतों की मुख्य ज़िम्मेवारी गृहस्थी चलाने और बच्चों का पालन-पोषण करने की है” — और “मर्द घर के बाहर का काम करते हैं।”
★33–40 मिनट · मुख्य सवाल★★किताब की यह पंक्ति पढ़वाइए — “ऐसा नहीं है कि मर्द ये सारे काम नहीं कर सकते… पर जब सिलाई-कटाई से लेकर इन्हीं सारे कामों के लिए पैसे मिलते हैं तो मर्द ख़ुशी-ख़ुशी यही काम घर के बाहर करते हैं। अधिकांश दर्जी या होटल के रसोइए पुरुष होते हैं।” फिर सवाल — “घर में खाना बनाना औरत का काम है, पर होटल का शेफ़ पुरुष होता है। ★तो सवाल काम का है या पैसे का?”

📋 बोर्ड-कार्य

! (स्थायी) “हम किसी समुदाय की नहीं — तीन आदतों की बात कर रहे हैं: भेदभाव · सांप्रदायिकता · जातिवाद।” “सामाजिक विविधता लोकतंत्र के लिए कोई खतरा नहीं होती।” तीन विभाजन — लिंग · धर्म · जाति श्रम का लैंगिक विभाजन = घर के अंदर के सारे काम औरतें करती हैं ★“घर में रसोइया औरत — होटल में रसोइया पुरुष। फ़र्क़ काम का नहीं, पैसे का है।”

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

बच्चे इसे “राजनीति का विषय ही नहीं” मानते। किताब की अपनी छात्रा भी यही पूछती है (पृष्ठ 30)। ★जवाब भी किताब से ही दीजिए — “अगर राजनीति का मतलब सत्ता है तो परिवार में पुरुष की प्रधानता को भी राजनीतिक मानना चाहिए।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “श्रम का लैंगिक विभाजन एक वाक्य में लिखो।”
  • ★गृहकार्य (किताब की अपनी गतिविधि, पृष्ठ 32): “अपने परिवार के सभी वयस्क पुरुषों और महिलाओं के काम पर एक हफ़्ते नज़र रखो और लिखो कि हर आदमी किस काम में कितना समय देता है।” ! (कोई नाम नहीं — सिर्फ़ “एक पुरुष”, “एक महिला”।)

कालांश 2 — समय का उपयोग और असमानता का असली आधार

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी तालिका पढ़कर निष्कर्ष निकाल पाए, और बता पाए कि असमानता का आधार जैविक नहीं, सामाजिक है।

🎒 आज ले जाइए — पृष्ठ 31 का “आदर्श स्त्री” वाला पोस्टर।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–8 मिनट · गृहकार्यदो-तीन बच्चों के हिसाब सुनिए। फिर पूछिए — “तुम्हारे घर में भी क्या महिलाएँ पुरुषों से ज़्यादा काम करती हैं?” (यह किताब का ही सवाल है।)
★8–20 मिनट · तालिकाबोर्ड पर समय का उपयोग वाली तालिका बनवाइए — पर ★“घर के काम” वाली पंक्ति ख़ाली छोड़िए और बच्चों से अनुमान लगवाइए। फिर असली आँकड़े भरिए — पुरुष 0:30 · महिला 5:00 — और कक्षा को चौंकने दीजिए। फिर मुख्य आँकड़ा — औरत साढ़े सात घंटे, मर्द साढ़े छह घंटे।
★★20–27 मिनट · असली सवालकिताब का निष्कर्ष पढ़वाइए — “फिर भी पुरुषों द्वारा किया गया काम ही ज़्यादा दीख पड़ता है क्योंकि उससे आमदनी होती है… इसके लिए उन्हें पैसे नहीं मिलते इसलिए औरतों का काम दिखाई नहीं देता।” और फिर किताब की बच्ची का संवाद (पृष्ठ 33) — “अगर वह जो करती है उसे काम नहीं कहते तो फिर काम किसे कहते हैं?”
27–34 मिनट · पोस्टरपृष्ठ 31 का पोस्टर दिखाइए — आदर्श दर्शक · आदर्श सुंदरी · आदर्श गृहिणी · आदर्श दुल्हन · आदर्श कर्मचारी — और किताब का सवाल पूछिए: “क्या आप इन सबसे सहमत हैं? अगर नहीं तो आदर्श स्त्री के बारे में आपकी धारणा क्या है?”
★34–40 मिनट · परिभाषा★★अब वह वाक्य लिखवाइए जो अभ्यास प्रश्न 7 का सीधा उत्तर है — “लैंगिक असमानता का आधार स्त्री और पुरुष की जैविक बनावट नहीं बल्कि इन दोनों के बारे में प्रचलित रूढ़ छवियाँ और तयशुदा सामाजिक भूमिकाएँ हैं।” एक वाक्य में — “फ़र्क़ शरीर का नहीं, समाज के बनाए नियमों का है।”

📋 बोर्ड-कार्य

समय का उपयोग: औरत 7:30 · मर्द 6:30; ★घर के काम — 5:00 बनाम 0:30 “पुरुषों द्वारा किया गया काम ही ज़्यादा दीख पड़ता है क्योंकि उससे आमदनी होती है।” ★★“लैंगिक असमानता का आधार जैविक बनावट नहीं बल्कि रूढ़ छवियाँ और तयशुदा सामाजिक भूमिकाएँ हैं।”

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

“यह तो प्रकृति ने ही तय किया है” — यह सबसे आम और सबसे ज़रूरी सुधार है। ★तोड़ने का तरीक़ा: “अगर यह प्रकृति की बात है, तो होटल का शेफ़ पुरुष क्यों है? और स्कैंडिनेवियाई देशों में औरतें राजनीति में इतनी आगे क्यों हैं? प्रकृति तो वहाँ भी वही है।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “लैंगिक असमानता का आधार क्या है — जैविक या सामाजिक? एक वाक्य में कारण सहित।”
  • गृहकार्य: “‘आदर्श स्त्री’ के बारे में तुम्हारी अपनी धारणा क्या है? — पाँच पंक्तियाँ।”

कालांश 3 — भेदभाव के पाँच रूप

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी पाँचों रूप आँकड़ों सहित गिना पाए।

🎒 आज ले जाइए — पृष्ठ 33 का नक्शा, पृष्ठ 34 का पोस्टर।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–5 मिनटकिताब का वाक्य — “हमारे देश में आज़ादी के बाद से महिलाओं की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है पर वे अभी भी पुरुषों से काफ़ी पीछे हैं। हमारा समाज अभी भी पितृ-प्रधान है।” और परिभाषा लिखवाइए।
5–14 मिनट · रूप 1 और 2*साक्षरता 54% बनाम 76%; और ★शिक्षा वाली बात — *“कई जगह लड़कियों ने बाजी मार ली है… लेकिन आगे की पढ़ाई के दरवाज़े उनके लिए बंद हो जाते हैं क्योंकि माँ बाप… लड़कों पर ज़्यादा खर्च करना पसंद करते हैं।” यहाँ रुककर कक्षा से पूछिए — “क्या यह तुमने आसपास देखा है?” (जवाब सुनिए, नाम मत पूछिए।)
14–22 मिनट · रूप 3काम और मज़दूरी — “एक स्त्री… रोजाना एक घंटा ज़्यादा काम करती है”; समान मज़दूरी अधिनियम के बावजूद “खेल-कूद की दुनिया से लेकर सिनेमा के संसार तक और कल-कारखानों से लेकर खेत-खलिहान तक महिलाओं को… कम मज़दूरी मिलती है, भले ही दोनों ने समान काम किया हो।”
! 22–33 मिनट · रूप 4लिंग अनुपात 919। पहले परिभाषा — प्रति हज़ार लड़कों पर लड़कियों की संख्या। फिर नक्शा दिखाइए और किताब के सवाल पूछिए — “क्या आप इस मानचित्र में अपने राज्य को पहचान सकते हैं? उन राज्यों की पहचान करें जिसमें बाल लिंग-अनुपात 900 से कम है।” फिर पोस्टर दिखाइए — “50 million women missing in South Asia”। ! यहाँ आवाज़ शांत रखिए। तथ्य बोलिए, दृश्य मत खींचिए।
! 33–40 मिनट · रूप 5हिंसा — किताब की पंक्ति पढ़िए और वहीं रुक जाइए: “शहरी इलाके तो महिलाओं के लिए खास तौर से असुरक्षित हैं। वे अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं।” ! इस पर चर्चा मत खोलिए — तथ्य दर्ज कीजिए और आगे बढ़िए।

📋 बोर्ड-कार्य

पाँच रूप: साक्षरता 54/76 · उच्च शिक्षा के बंद दरवाज़े · मज़दूरी में भेद · लिंग अनुपात 919 (कहीं 850, कहीं 800 से नीचे) · हिंसा पितृ-प्रधान = महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज़्यादा महत्व और शक्ति देने वाली व्यवस्था

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

कुछ बच्चे कहेंगे “अब तो सब बराबर है।” ★उन्हें आँकड़ों से जवाब दीजिए, बहस से नहीं — 54% बनाम 76%, और 919। “यह मेरी राय नहीं, जनगणना है।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “लिंग अनुपात क्या है और भारत में कितना है?”
  • गृहकार्य: “नक्शे से तीन ऐसे राज्य छाँटो जिनमें बाल लिंग-अनुपात 900 से कम है, और तीन जिनमें 951 से अधिक है।”

कालांश 4 — नारीवादी आंदोलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी बता पाए कि आंदोलन से क्या बदला और आज प्रतिनिधित्व कितना है।

🎒 आज ले जाइए — पृष्ठ 34 का ग्राफ़।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–10 मिनट · आंदोलननारीवादी* की परिभाषा लिखवाइए — और ★“या पुरुष”* शब्द पर घेरा लगाइए: “नारीवादी सिर्फ़ औरतें नहीं होतीं।” *फिर आंदोलन का सफ़र — पहले सिर्फ़ पुरुषों को वोट और चुनाव का अधिकार; फिर वोट के अधिकार के आंदोलन; फिर शिक्षा और रोज़गार; और मूलगामी माँग — *“व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन में भी बराबरी।”
10–16 मिनट · क्या बदला★किताब की पंक्ति — “आज हम वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रबंधक, कॉलेज और विश्वविद्यालयी शिक्षक जैसे पेशों में बहुत-सी औरतों को पाते हैं जबकि पहले इन कामों को महिलाओं के लायक नहीं माना जाता था।” और स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड का ज़िक्र।
★16–28 मिनट · ग्राफ़★★ग्राफ़ दिखाइए और सिर्फ़ तीन आँकड़े बोर्ड पर लिखवाइए — नॉर्डिक 42.3 · विश्व औसत 24 · भारत 11.8। फिर पूछिए — “भारत विश्व औसत से कितना पीछे है?” और किताब का सवाल — “क्या आप मानते हैं कि अमरीका और यूरोप में महिलाओं का प्रतिनिधित्व इस स्तर तक पहुँच गया है कि उसे संतोषजनक कहा जा सके?”
28–35 मिनट · भारत के आँकड़ेलोकसभा 14.36% (पहली बार 2019 में)* · विधान सभाएँ 5% से कम · मंत्रिमंडलों में पुरुषों का वर्चस्व। ★और फिर उल्टी तस्वीर — पंचायतों में एक तिहाई आरक्षण और 10 लाख से ज़्यादा निर्वाचित महिलाएँ। पूछिए: “ऊपर 5% और नीचे एक तिहाई — ऐसा क्यों?” → *क्योंकि नीचे आरक्षण है।
★35–40 मिनट · निष्कर्षनारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 — 33% आरक्षण (लोकसभा, विधानसभा और दिल्ली विधानसभा); और किताब का निष्कर्ष: ★★“जब सामाजिक विभाजन एक राजनीतिक मुद्दा बन जाता है तो वंचित समूहों को किस तरह लाभ होता है।”

📋 बोर्ड-कार्य

नारीवादी = “औरत और मर्द के समान अधिकारों और अवसरों में विश्वास करने वाली महिला या पुरुष” नॉर्डिक 42.3 · विश्व औसत 24 · भारत 11.8 लोकसभा 14.36% (2019) · विधान सभा 5% से कम · ★पंचायत एक तिहाई, 10 लाख महिलाएँ 2023 — नारी शक्ति वंदन अधिनियम — 33% ★“जब सामाजिक विभाजन एक राजनीतिक मुद्दा बन जाता है तो वंचित समूहों को लाभ होता है।”

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

अभ्यास प्रश्न 8 का जाल — “भारत में औरतों के लिए आरक्षण कहाँ है?” का उत्तर (घ) पंचायती राज की संस्थाएँ है। बच्चे 2023 वाला अधिनियम पढ़कर “लोकसभा” लिख देते हैं। ★फ़र्क़ साफ़ कीजिए: “पंचायत में आरक्षण चल रहा है; लोकसभा-विधानसभा में क़ानून बना है और आगे लागू होगा।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “लोकसभा और पंचायत — दोनों में महिलाओं की स्थिति एक वाक्य में।”
  • गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 5।

कालांश 5 — धर्म और राजनीति: जो ग़लत नहीं है

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी समझे कि धर्म और राजनीति का हर रिश्ता सांप्रदायिकता नहीं है।

★★इस कालांश का क्रम बहुत सोच-समझकर बनाया गया है — पहले वह पढ़ाइए जो ग़लत नहीं है, फिर वह जो ग़लत है। अगर आप सीधे सांप्रदायिकता से शुरू करेंगे तो बच्चे यह समझ बैठेंगे कि “धर्म की बात करना ही ग़लत है” — जो किताब बिल्कुल नहीं कहती।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–8 मिनट · शुरुआत“यह विभाजन लैंगिक विभाजन जैसा सार्वभौम तो नहीं है”, पर “विश्व में धार्मिक विभिन्नता आज बड़ी व्यापक हो चली है”; और ★“लैंगिक विभाजन के विपरीत धार्मिक विभाजन अक्सर राजनीति के मैदान में अभिव्यक्त होता है।”
★8–28 मिनट · तीन बातेंएक-एक करके — (1) गांधी जी — “धर्म को कभी भी राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता।” ! और तुरंत यह भी — “धर्म से उनका मतलब हिंदू या इस्लाम जैसे धर्म से न होकर नैतिक मूल्यों से था जो सभी धर्मों से जुड़े हैं।” ★यह दूसरा वाक्य पहले जितना ही ज़रूरी है। (2) मानवाधिकार समूह — “सांप्रदायिक दंगों को रोकने और धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए विशेष कदम।” (3) महिला-आंदोलन — “सभी धर्मों में वर्णित पारिवारिक कानून महिलाओं से भेदभाव करते हैं”; और पारिवारिक कानून की परिभाषा लिखवाइए। ★यहाँ पिछले भाग से कड़ी बनती है — यह लैंगिक मसला भी है और धार्मिक भी।
★★28–36 मिनट · कसौटीकिताब का वाक्य लिखवाइए — “लोगों को अपने धार्मिक समुदाय के तौर पर अपनी ज़रूरतों, हितों और माँगों को राजनीति में उठाने का अधिकार होना चाहिए… ★अगर शासन सभी धर्मों के साथ समान बरताव करता है तो उसके ऐसे कामों में कोई बुराई नहीं है।” फिर बोर्ड पर — “कसौटी यह नहीं कि धर्म की बात हुई या नहीं — कसौटी यह है कि सबके साथ बराबर बरताव हुआ या नहीं।”
36–40 मिनटकल का संकेत — “कल हम देखेंगे कि यह कब और कैसे ग़लत हो जाता है।”

📋 बोर्ड-कार्य

धर्म और राजनीति — जो ग़लत नहीं है:

  1. गांधी जी — धर्म = नैतिक मूल्य, “जो सभी धर्मों से जुड़े हैं”
  2. मानवाधिकार समूह — अल्पसंख्यकों की रक्षा
  3. महिला-आंदोलन — पारिवारिक कानूनों को समतामूलक बनाना ★कसौटी: “अगर शासन सभी धर्मों के साथ समान बरताव करता है तो… कोई बुराई नहीं है।”

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

गांधी जी वाले वाक्य को बच्चे आधा याद रखते हैं। ! दोनों वाक्य साथ ही लिखवाइए — वरना उल्टा अर्थ निकल जाता है।

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “गांधी जी ‘धर्म’ से क्या समझते थे?”
  • गृहकार्य: पारिवारिक कानून की परिभाषा और तीनों बातें कॉपी में।

कालांश 6 — सांप्रदायिकता★★

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी सांप्रदायिकता की परिभाषा और चार रूप बता पाए — और समझे कि इसका खंडन क्या है।

🎒 आज ले जाइए — पर्चियाँ (पहचान वाली गतिविधि के लिए)।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–8 मिनट · परिभाषातीन वाक्य क्रम से — “समस्या तब शुरू होती है जब धर्म को राष्ट्र का आधार मान लिया जाता है” → ”…एक धर्म के विचारों को दूसरे से श्रेष्ठ माना जाने लगता है” → “जब राज्य अपनी सत्ता का इस्तेमाल किसी एक धर्म के पक्ष में करने लगता है” → ★“राजनीति में धर्म को इस तरह जोड़ना ही सांप्रदायिकता है।”
8–16 मिनट · मान्यतासांप्रदायिक सोच की मान्यताएँ बोर्ड पर — एक धर्म = एक समुदाय · हित एक जैसे · आपसी मतभेद बेमानी · दूसरे धर्म वाले अलग समुदाय · हितों में टकराव ज़रूरी।
★★16–30 मिनट · “तुम कौन हो?” गतिविधि★★यह इस पूरे अध्याय की सबसे महत्त्वपूर्ण गतिविधि है। किसी एक स्वयंसेवी बच्चे को बुलाइए और पूछिए “तुम कौन हो?” — जितने जवाब आएँ, बोर्ड पर लिखते जाइए: बेटा/बेटी · भाई/बहन · विद्यार्थी · क्रिकेट खेलने वाला · दोस्त · राजस्थानी · भारतीय · अपने मोहल्ले का… फिर एक को छोड़कर बाक़ी सब मिटा दीजिए और पूछिए — “क्या अब भी यह पूरा इंसान है?” ★फिर किताब का वाक्य पढ़वाइए — “हर व्यक्ति कई तरह की भूमिका निभाता है। उसकी हैसियत और पहचान अलग-अलग होती है।” और कहिए: “जो किसी को सिर्फ़ एक पहचान में क़ैद कर दे — वही सांप्रदायिकता है।” ★और यह भी जोड़िए — “कल यही बात हम जाति के लिए भी पढ़ेंगे।”
30–40 मिनट · चार रूपरोज़ · प्रभुत्व · गोलबंदी · हिंसा। ! पहले रूप पर सबसे ज़्यादा समय दीजिए — “ये चीज़ें इतनी आम हैं कि अक्सर हम उन पर ध्यान तक नहीं देते जबकि ये हमारे अंदर ही बैठी होती हैं।” ★और किताब का सवाल कक्षा में खुला छोड़ दीजिए, जवाब मत दीजिए — “मैं अक्सर दूसरे धर्म के लोगों के बारे में चुटकुले सुनाता हूँ। क्या इससे मैं भी सांप्रदायिक बन जाता हूँ?”

📋 बोर्ड-कार्य

★सांप्रदायिकता = “राजनीति में धर्म को इस तरह जोड़ना” कि एक धर्म को श्रेष्ठ माना जाए और राज्य किसी एक धर्म के पक्ष में सत्ता का इस्तेमाल करे चार रूप: रोज़ · प्रभुत्व · गोलबंदी · हिंसा ★★खंडन: “हर व्यक्ति कई तरह की भूमिका निभाता है। उसकी हैसियत और पहचान अलग-अलग होती है।”

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

  1. ! “धर्म की बात करना ही सांप्रदायिकता है” — ग़लत। इसीलिए कालांश 5 पहले पढ़ाया गया। दोहराइए: “कसौटी समान बरताव है, चुप्पी नहीं।”
  2. बच्चे सांप्रदायिकता को सिर्फ़ दंगा समझते हैं। ★किताब का पहला रूप याद दिलाइए — “सबसे आम अभिव्यक्ति दैनंदिन जीवन में ही दिखती है।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “सांप्रदायिकता की परिभाषा एक वाक्य में।”
  • गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 2 (चार रूप, एक-एक उदाहरण सहित)।

कालांश 7 — धर्मनिरपेक्ष शासन और विविधता के आँकड़े

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी चार संवैधानिक प्रावधान बता पाए और आँकड़े से अफ़वाह तोड़ना सीखे।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–5 मिनट“हमारे संविधान निर्माता इस चुनौती के प्रति सचेत थे। इसी कारण उन्होंने धर्मनिरपेक्ष शासन का मॉडल चुना।”
★5–20 मिनट · चार प्रावधानएक-एक करके लिखवाइए — 1. “किसी भी धर्म को राजकीय धर्म के रूप में अंगीकार नहीं किया” — और तुलना: श्रीलंका (बौद्ध) · पाकिस्तान (इस्लाम) · इंग्लैंड (ईसाई) 2. धर्म के पालन और प्रचार की आज़ादी 3. धर्म के आधार पर भेदभाव अवैधानिक 4. ★“शासन को धार्मिक मामलों में दखल देने का अधिकार… जैसे, यह छुआछूत की इजाज़त नहीं देता।” ★चौथे पर रुककर समझाइए — “धर्मनिरपेक्षता का मतलब आँख मूँद लेना नहीं है।”
★★20–28 मिनट · दो बड़ी पंक्तियाँ“धर्मनिरपेक्षता कुछ पार्टियों या व्यक्तियों की एक विचारधारा भर नहीं है। यह विचार हमारे संविधान की बुनियाद है।” और “सांप्रदायिकता… भारत की बुनियादी अवधारणा के लिए एक चुनौती है, एक खतरा है।” ★और अंतिम — “अकेले इसी के बूते सांप्रदायिकता का मुकाबला नहीं किया जा सकता। हमें अपने दैनंदिन जीवन में सांप्रदायिक पूर्वाग्रहों और दुष्प्रचारों का मुकाबला करना होगा।” — यह अध्याय 2 की बात दोहराता है: “संविधान ज़रूरी है, पर काफ़ी नहीं।”
★28–40 मिनट · आँकड़े और अफ़वाहपाई चार्ट दिखाइए — हिंदू 79.8 · मुसलमान 14.2 · ईसाई 2.3 · सिख 1.7 · अन्य 2। ★★फिर किताब का सबसे ज़रूरी हिस्सा — “एक आम लेकिन भ्रांत धारणा यह है कि देश की आबादी में मुसलमानों का प्रतिशत इतना बढ़ जाएगा…” और सच्चर समिति का आकलन: “अगले पचास सालों में भी यह बढ़कर 3–4 प्रतिशत तक ही रहेगी।” फिर बोर्ड पर — “अफ़वाह का जवाब बहस नहीं, आँकड़ा है।”

📋 बोर्ड-कार्य

चार प्रावधान: कोई राजकीय धर्म नहीं · आज़ादी · भेदभाव अवैध · दख़ल का अधिकार ★“धर्मनिरपेक्षता… यह विचार हमारे संविधान की बुनियाद है।” 2011: हिंदू 79.8 · मुसलमान 14.2 · ईसाई 2.3 · सिख 1.7 ★सच्चर समिति — “अगले पचास सालों में भी यह बढ़कर 3–4 प्रतिशत तक ही रहेगी।” “अफ़वाह का जवाब बहस नहीं, आँकड़ा है।”

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

अभ्यास प्रश्न 10 — “कौन-सा कथन ग़लत है?” का उत्तर (ख) यह एक धर्म को राजकीय धर्म बताता है। बच्चे विकल्प जल्दी में पढ़ते हैं। ★नियम बना दीजिए: “‘ग़लत कथन’ पूछा हो तो हर विकल्प पर सही/ग़लत लिखकर चलिए।”

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “धर्मनिरपेक्ष शासन के दो प्रावधान लिखो।”
  • गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 6।

कालांश 8 — जातिगत असमानताएँ

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी बता पाए कि जाति व्यवस्था में क्या बदला और क्या नहीं।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–6 मिनट · अनोखापन★किताब का वाक्य — “लिंग और धर्म पर आधारित विभाजन तो दुनिया भर में हैं पर जाति पर आधारित विभाजन सिर्फ़ भारतीय समाज में ही देखने को मिलता है।” — यही अभ्यास प्रश्न 11 है।
6–16 मिनट · व्यवस्था“अधिकतर समाजों में पेशा परिवार की एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाता है। लेकिन जाति व्यवस्था इसका एक अतिवादी और स्थायी रूप है।” और वर्ण-व्यवस्था की परिभाषा लिखवाइए। ! यह हिस्सा तथ्य की तरह पढ़ाइए, किसी उदाहरण के बिना।
★16–24 मिनट · चार सुधारकज्योतिबा फुले · महात्मा गांधी · डॉ. आंबेडकर · पेरियार रामास्वामी नायकर* — “जिन्होंने जातिगत भेदभाव से मुक्त समाज व्यवस्था बनाने की बात की और उसके लिए काम किया।” ★सूत्र — *“फुले · गांधी · आंबेडकर · पेरियार।”
★★24–34 मिनट · दो कॉलमबोर्ड पर “क्या बदला” बनाम “क्या नहीं बदला” — बदला: आर्थिक विकास · शहरीकरण · साक्षरता और शिक्षा · पेशा चुनने की आज़ादी · ज़मींदारी का कमज़ोर पड़ना; और “शहरी इलाकों में तो अब ज़्यादातर इस बात का कोई हिसाब नहीं रखा जाता कि ट्रेन या बस में आपके साथ कौन बैठा है।” ! नहीं बदला: “ज़्यादातर लोग अपनी जाति या कबीले में ही शादी करते हैं” · “छुआछूत की प्रथा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है” · और ★“जिन जातियों को पहले शिक्षा से वंचित रखा जाता था उनके सदस्य अभी भी स्वाभाविक तौर पर पिछड़े हुए हैं।”
34–40 मिनट · आँकड़ेपृष्ठ 42 की तालिका के तीन निष्कर्ष ही लिखवाइए (पूरी तालिका नहीं) — औसत हैसियत वर्णव्यवस्था से गहरा संबंध; हर जाति में गरीब हैं; हर जाति में अमीर हैं पर अनुपात असमान। ★सार एक वाक्य में — “जाति अब भी आर्थिक हैसियत तय करती है, पर अब वह अकेली नहीं करती।”

📋 बोर्ड-कार्य

★“जाति पर आधारित विभाजन सिर्फ़ भारतीय समाज में ही देखने को मिलता है।” चार सुधारक — फुले · गांधी · आंबेडकर · पेरियार | ★क्या बदला | ! क्या नहीं बदला | |---|---| | शहरीकरण, शिक्षा, पेशे की आज़ादी | शादी अपनी जाति में | | शहरों में जाति का हिसाब नहीं | छुआछूत पूरी तरह समाप्त नहीं | | संविधान ने भेदभाव निषिद्ध किया | शिक्षा और आर्थिक हैसियत में पुराना असर बाक़ी |

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

दो उल्टी ग़लतियाँ होती हैं — कुछ कहेंगे “अब जाति है ही नहीं”, कुछ कहेंगे “कुछ नहीं बदला।” ★किताब दोनों को ग़लत बताती है — इसीलिए दो कॉलम वाली तालिका ही सही उत्तर का ढाँचा है।

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “जाति व्यवस्था में बदली हुई एक बात और न बदली हुई एक बात लिखो।”
  • गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 3।

कालांश 9 — राजनीति में जाति★

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी बता पाए कि “चुनाव जातियों का खेल है” क्यों सच नहीं है, और जाति-राजनीति के दोनों पक्ष बता पाए।

🎒 आज ले जाइए — पृष्ठ 41 का वोट बैंक वाला कार्टून।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–8 मिनट · जातिवाद★परिभाषा — “सांप्रदायिकता की तरह जातिवाद भी इस मान्यता पर आधारित है कि जाति ही सामाजिक समुदाय के गठन का एकमात्र आधार है।” और वही खंडन जो कल था: “जाति हमारे जीवन का एक पहलू ज़रूर है लेकिन यही एकमात्र या सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण पहलू नहीं है।” ★कल की “पहचान” वाली गतिविधि याद दिलाइए — “वही ग़लती, नया नाम।”
8–16 मिनट · तीन रूपराजनीति में जाति — उम्मीदवार चुनते समय हिसाब · जातिगत भावनाओं को उकसाना · और ★सार्वभौम वयस्क मताधिकार से “उन जातियों के लोगों में नयी चेतना पैदा हुई जिन्हें अभी तक छोटा और नीच माना जाता था।”
★★16–30 मिनट · चार कारण★★यह कालांश का दिल है। कार्टून दिखाकर पूछिए — “क्या राजनेता किसी जाति के लोगों को अपने वोट-बैंक के रूप में देखें — यह ठीक लगता है?” फिर किताब के चार कारण एक-एक करके: (1) किसी क्षेत्र में किसी एक जाति का बहुमत नहीं; (2) कोई पार्टी किसी जाति के सभी वोट नहीं पा सकती; (3) एक ही जाति के कई उम्मीदवार हो सकते हैं; (4) ★★“सत्तारूढ़ दल, वर्तमान सांसदों और विधायकों को अक्सर हार का सामना करना पड़ता है।” चौथे पर रुककर पूछिए — “अगर वोट सिर्फ़ जाति से पड़ते तो कोई विधायक कभी हारता ही नहीं। पर वे हारते हैं। तो?”
30–36 मिनट · जाति के अंदर राजनीति★“सिर्फ़ राजनीति ही जातिग्रस्त नहीं होती जाति भी राजनीतिग्रस्त हो जाती है।” — तीन बातें: हर जाति ख़ुद को बड़ा बनाना चाहती है · दूसरी जातियों से मोल-तोल · ‘अगड़ा-पिछड़ा’ जैसी नई गोलबंदी।
★★36–40 मिनट · दोनों पक्षबोर्ड पर दो कॉलम — लाभ: “जातिगत राजनीति ने दलित और पिछड़ी जातियों के लोगों के लिए सत्ता तक पहुँचने तथा निर्णय प्रक्रिया को बेहतर ढंग से प्रभावित करने की स्थिति भी पैदा की है।” ! हानि: “सिर्फ़ जातिगत पहचान पर आधारित राजनीति लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं होती। इससे अक्सर गरीबी, विकास, भ्रष्टाचार जैसे ज़्यादा बड़े मुद्दों से लोगों का ध्यान भी भटकता है।”

📋 बोर्ड-कार्य

जातिवाद = यह मान्यता कि जाति ही समुदाय के गठन का एकमात्र आधार है “चुनाव जाति का खेल नहीं” — चार कारण: किसी क्षेत्र में एक जाति का बहुमत नहीं · सभी वोट नहीं मिलते · एक ही जाति के कई उम्मीदवार · ★मौजूदा सांसद-विधायक हारते हैं | ★लाभ | ! हानि | |---|---| | वंचितों को सत्ता तक पहुँच और आवाज़ | बड़े मुद्दों से ध्यान भटकता है | | भेदभाव के ख़िलाफ़ आंदोलन | तनाव, टकराव और हिंसा को बढ़ावा |

यहाँ बच्चे अटकेंगेध्यान

“चुनाव तो जाति से ही होते हैं” — यह बात बच्चे घर और आसपास से सुनकर आते हैं। ! इसे बहस से मत तोड़िए — किताब के चार कारणों से तोड़िए, ख़ासकर चौथे से, जो तथ्य है, राय नहीं।

📝 निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची: “‘चुनाव जातियों का खेल है’ — यह सच क्यों नहीं? एक कारण।”
  • गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 4।

कालांश 10 — प्रश्नावली और समापन

🎯 उद्देश्य — विद्यार्थी वस्तुनिष्ठ प्रश्न हल कर पाए और अध्याय का मूल सूत्र दोहरा पाए।

⏱ मिनट-वार प्रवाह

समयक्या
0–15 मिनट · वस्तुनिष्ठप्रश्न 7, 8, 9, 10, 11, 12 कक्षा में। ★हर उत्तर के बाद “क्यों?” पूछिए। प्रश्न 7 पर रुकिए — उत्तर (ख), क्योंकि “आधार जैविक बनावट नहीं बल्कि रूढ़ छवियाँ और तयशुदा सामाजिक भूमिकाएँ” हैं।
15–25 मिनट · लंबे प्रश्नप्रश्न 1, 2, 3 का ढाँचा बनवाइए (पूरे उत्तर नहीं) — हर एक में कितने बिंदु और कौन-से आँकड़े आने चाहिए, यह तय करवाइए।
★★25–36 मिनट · समापन चर्चा★★बोर्ड पर तीन कॉलम बनाइए — लिंग · धर्म · जाति — और तीन सवाल पूछिए: (1) “इनमें से किसे राजनीतिक बनाना ज़रूरी था?” → लिंग (2) “किसे राजनीतिक बनाना ख़तरनाक है?” → धर्म को राष्ट्र का आधार बनाना (3) “और जाति?” → ★दोनों — “इसने आवाज़ भी दी और नुकसान भी किया।” फिर आख़िरी सवाल — “सांप्रदायिकता और जातिवाद — इन दोनों में क्या साझा है?” → ★★दोनों किसी को सिर्फ़ एक पहचान में क़ैद कर देते हैं।
36–40 मिनट · अंतिम वाक्यपूरी कक्षा से एक साथ बुलवाइए — “हर व्यक्ति कई तरह की भूमिका निभाता है। उसकी हैसियत और पहचान अलग-अलग होती है।”

📋 बोर्ड-कार्य (अध्याय का अंतिम बोर्ड)

उत्तर देखिए

उत्तर: 7 → (ख) · 8 → (घ) · 9 → (ग) · 10 → (ख) · 11 → जाति · 12 → (सा) | लिंग | धर्म | जाति | |---|---|---| | ★राजनीतिक बनाना ज़रूरी था | ! राष्ट्र का आधार बनाना ख़तरनाक | ★! दोनों — आवाज़ भी, नुकसान भी | ★★“पहचान एक नहीं होती। और जो किसी को सिर्फ़ एक पहचान में क़ैद कर दे — वही सांप्रदायिकता है, वही जातिवाद है।”

खंड ङ — विभेदित शिक्षण

किसके लिएक्या कीजिए
जो बहुत पीछे हैंइनसे चार चीज़ें पक्की करवाइए — (1) तीन विभाजनों के नाम; (2) साक्षरता 54/76 और लिंग अनुपात 919; (3) सांप्रदायिकता की परिभाषा एक वाक्य में; (4) जाति सिर्फ़ भारत में। ! तालिकाओं के सारे प्रतिशत इनसे मत रटवाइए।
औसत बच्चेतीन तालिकाएँ पक्की करवाइए — भेदभाव के पाँच रूप · सांप्रदायिकता के चार रूप · धर्मनिरपेक्षता के चार प्रावधान; और “चुनाव जाति का खेल नहीं” के चार कारण।
तेज़ बच्चे(1) “अपने आसपास महिलाओं के काम की एक सूची बनाओ जिसका कोई पैसा नहीं मिलता”; (2) “संसद में महिलाओं के ग्राफ़ से बार चार्ट बनाओ”; (3) ★“अगर तुम्हें एक क़ानून बनाने का अधिकार हो जिससे लड़कियों की स्थिति सुधरे — तो कौन-सा और क्यों? 150 शब्द।”
जो बोलने में झिझकते हैंकालांश 6 की “पहचान” गतिविधि इनके लिए बहुत अच्छी है — इसमें बोलना नहीं, अपने बारे में बताना होता है, जो आसान लगता है।

खंड च — मूल्यांकन योजना

च.1 सतत मूल्यांकन

साधनकबक्या देखेंगे
निकास-पर्चीहर कालांश, 2 मिनटदिन की एक मुख्य बात
तालिका पढ़नाकालांश 2, 4आँकड़े से निष्कर्ष निकाल पाता है या नहीं
★“तुम कौन हो” गतिविधिकालांश 6यही इस अध्याय का सबसे गहरा मूल्यांकन है
दो-कॉलम तालिकाकालांश 8, 9दोनों पक्ष रख पाता है या नहीं
चार कारणकालांश 9तथ्य से राय अलग कर पाता है या नहीं

च.2 लिखित मूल्यांकन

प्रकारअंकक्या पूछें
वस्तुनिष्ठ1आँकड़े, परिभाषाएँ, सुधारकों के नाम
अति लघूत्तरीय2नारीवादी · पितृ-प्रधान · सांप्रदायिकता · जातिवाद · वर्ण-व्यवस्था · पारिवारिक कानून
लघूत्तरीय3भेदभाव के रूप · सांप्रदायिकता के चार रूप · धर्मनिरपेक्षता के प्रावधान
दीर्घ उत्तरीय5महिलाओं से भेदभाव · सांप्रदायिक राजनीति के रूप · जातिगत असमानताएँ · जाति-राजनीति के दोनों पक्ष
केस-आधारित4एक स्थिति देकर पूछें — यह कौन-सा रूप है और क्यों

च.3 अंक काटने के तीन नियम — पहले ही बता दीजिएध्यान

  1. “जाति और राजनीति” वाले प्रश्न में केवल एक पक्ष = आधा उत्तर। किताब ने दोनों पक्ष दिए हैं।
  2. हर बड़े उत्तर में कम से कम एक आँकड़ा होना चाहिए — 54/76 · 919 · 14.36% · 11.8 · 16.6/8.6।
  3. “ग़लत कथन” वाले प्रश्न में हर विकल्प पर सही/ग़लत लिखकर चलिए — तभी ग़लती नहीं होगी।

खंड छ — परियोजना और गतिविधि

#परियोजनाकैसे
1★★“समय का उपयोग” सर्वेक्षण (किताब की अपनी, पृष्ठ 32 — अनिवार्य)अपने परिवार के सभी वयस्कों के काम पर एक हफ़्ते नज़र रखो और श्रेणियों में बाँटो — आमदनी वाले काम · घरेलू काम · पढ़ना-मनोरंजन-गपशप · शरीर की देखभाल और सोना। हफ़्ते भर का हिसाब सात से भाग देकर रोज़ का औसत निकालो। ! कोई नाम नहीं — सिर्फ़ “एक पुरुष / एक महिला”।
2नक्शा-कार्यपृष्ठ 33 के नक्शे से — अपने राज्य और ज़िले का बाल लिंग-अनुपात पता करो; तीन राज्य 900 से कम और तीन 951 से अधिक छाँटो; और लिखो कि क्या कोई भौगोलिक पैटर्न दिखता है।
3★“आदर्श स्त्री” पोस्टर का जवाबपृष्ठ 31 के पोस्टर को देखकर अपना पोस्टर बनाओ — “मेरी नज़र में आदर्श स्त्री।” ★लड़कों से भी बनवाइए।
4ग्राफ़ बनानापृष्ठ 34 के आँकड़ों से बार चार्ट; और नीचे एक पंक्ति में निष्कर्ष।
5★“मेरी पहचानें”हर बच्चा अपनी दस पहचानें लिखे और फिर एक पंक्ति लिखे — “अगर इनमें से सिर्फ़ एक ही रह जाए तो क्या मैं पूरा रहूँगा?” ★यह अध्याय की सबसे गहरी परियोजना है और इसमें कोई विवाद नहीं होता।
6स्थानीय महिला प्रतिनिधि से बातचीतअगर आपके गाँव/वार्ड में कोई महिला सरपंच, पंच या पार्षद हैं तो उनसे पूछिए — “आपको यह पद कैसे मिला? क्या फ़ैसले आप ख़ुद लेती हैं? सबसे बड़ी अड़चन क्या है?” ★यह अध्याय 2 के आरक्षण वाले हिस्से से भी जुड़ जाता है।

खंड ज — शिक्षक के लिए सात चेतावनियाँध्यान

यह खंड इस पाठ योजना का सबसे ज़रूरी हिस्सा है।

  1. !! किसी जाति, धर्म या समुदाय का नाम लेकर उदाहरण मत दीजिए। न अच्छे उदाहरण में, न बुरे में। किताब ने एक भी नहीं दिया। आपकी कक्षा में हर पक्ष से बच्चे हैं, और एक नाम भी किसी बच्चे को कक्षा में अकेला कर सकता है।

  2. !! किसी राजनीतिक दल या नेता का नाम मत लाइए — ख़ासकर “जाति और राजनीति” तथा “सांप्रदायिक गोलबंदी” वाले हिस्सों में। यह अध्याय प्रवृत्तियों की बात करता है, पक्षों की नहीं।

  3. ! पहले दिन ही नियम बता दीजिए (खंड क.1) — “हम तीन आदतों की बात करेंगे: भेदभाव, सांप्रदायिकता, जातिवाद — किसी समुदाय की नहीं।” और इसे बोर्ड पर लिखा रहने दीजिए।

  4. ! हिंसा वाले हिस्से शांत आवाज़ में पढ़ाइए — लिंग अनुपात, घरेलू हिंसा, दंगे। तथ्य बोलिए, दृश्य मत खींचिए, और वहाँ रुकिए मत। कक्षा में ऐसे बच्चे हो सकते हैं जिन्होंने यह देखा हो।

  5. ! किसी बच्चे से उसकी अपनी जाति, धर्म या घर की स्थिति मत पूछिए — न सीधे, न गतिविधि में। समय-सर्वेक्षण और काम की गिनती वाली गतिविधियाँ हमेशा “एक पुरुष / एक महिला” की भाषा में कराइए, नाम या रिश्ते के बिना।

  6. ★क्रम मत बदलिए — धर्म वाले भाग में पहले वह पढ़ाइए जो ग़लत नहीं है (कालांश 5), फिर सांप्रदायिकता (कालांश 6)। उल्टा करने पर बच्चे यह समझ बैठेंगे कि “धर्म की बात करना ही ग़लत है” — जो किताब बिल्कुल नहीं कहती।

  7. ★★और सबसे ज़रूरी — इस अध्याय का लक्ष्य कोई राय बनवाना नहीं है।

लक्ष्य यह है कि विद्यार्थी एक आदत सीखे — “जब भी कोई किसी इंसान को उसकी एक ही पहचान से पूरा बता दे, तब रुककर पूछना: ‘और बाक़ी?’” अगर कक्षा के अंत में आपके बच्चे यह सवाल पूछना सीख गए, तो यह अध्याय सफल हुआ — चाहे उन्हें सारे आँकड़े याद न रहें।