अध्याय 1सत्ता की साझेदारी

इंटरैक्टिव अध्याय40 मिनट

NCERT — लोकतांत्रिक राजनीति (कक्षा 10), अध्याय 1 (पृ. 1–12)।

लोकतांत्रिक राजनीति · अध्याय 1

शुरुआत

दो छोटे देश, दोनों लोकतंत्र, दोनों में भाषा के झगड़े। एक ने सत्ता सबके साथ बाँटी, दूसरे में बहुमत ने अपनी चलाई। दोनों के नतीजे देखिए, फिर खुद तय कीजिए कि सत्ता बाँटने से देश कमज़ोर होता है या मज़बूत।

“मेरे दिमाग में सीधा सा समीकरण यह है कि सत्ता का बँटवारा = सत्ता के टुकड़े करना = देश को कमज़ोर करना। हम इस बात से शुरुआत क्यों कर रहे हैं?”

— पाठ्यपुस्तक के हाशिये में लिखा सवाल, पृ. 2

पहले आपकी राय

सत्ता कई हाथों में बाँट दी जाए, तो देश…

इस अध्याय के चार बड़े सवाल

  1. बेल्जियम और श्रीलंका ने भाषा के झगड़े अलग-अलग ढंग से कैसे निपटाए?
  2. बहुसंख्यकवाद क्या है, और श्रीलंका में उसका क्या नतीजा निकला?
  3. सत्ता की साझेदारी क्यों ज़रूरी है? किताब कौन-से दो तर्क देती है?
  4. आधुनिक लोकतंत्र में सत्ता किन-किन के बीच बँटती है?

सीधे शब्दों में

सत्ता की साझेदारी का मतलब है कि शासन की ताक़त किसी एक व्यक्ति, एक अंग या एक समुदाय के हाथ में न रहे, बल्कि कई के बीच बँटी रहे।

यह पन्ना पाठ्यपुस्तक से बना है। किताब की बात के साथ उसका पृष्ठ लिखा है; हमारे अपने जवाब पर "हमारा जवाब" लिखा है। आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।

1दो देश, दो समाज

किताब दो कहानियों से शुरू करती है (पृ. 2–3): यूरोप का छोटा-सा देश बेल्जियम और द्वीपीय देश श्रीलंका। दोनों में कई भाषाएँ बोली जाती हैं।

सौ लोगों में कौन कितने?

हर आकृति आबादी का 1% है। ऊपर से जगह चुनिए।

  • 59% डच-भाषी (फ़्लेमिश इलाका)
  • 40% फ़्रेंच-भाषी (वेलोनिया क्षेत्र)
  • 1% जर्मन-भाषी

पृ. 2: पूरे देश में डच बोलने वाले बहुमत में हैं।

किताब के नक्शे पर ढूँढिए

पृ. 2 और 3 के दोनों नक्शे यहाँ बने हैं। सवाल पढ़िए और नक्शे पर वह इलाका छूइए।

ढूँढिए: डच बोलने वाले ज़्यादातर किस इलाके में रहते हैं?

बेल्जियम के समुदाय और क्षेत्र (पृ. 2 का नक्शा)
फ़्लेमिश (डच)वेलोनिया (फ़्रेंच)जर्मन-भाषीब्रूसेल्स
  • फ़्लेमिश (डच-भाषी)
  • वेलोन (फ़्रेंच-भाषी)
  • जर्मन-भाषी
  • ब्रूसेल्स-राजधानी क्षेत्र

नक्शों की रेखाएँ खुले आँकड़ों से बनी हैं। बेल्जियम के चारों इलाके असली सीमाओं से बने हैं। श्रीलंका में समुदायों के इलाके किताब के नक्शे से उतारे गए हैं, इसलिए वे किताब की बात दिखाते हैं, जनगणना की नहीं।

Boundaries: Statbel and Eurostat (CC BY 4.0); © OpenStreetMap contributors (ODbL); via geoBoundaries.

अतिरिक्त — किताब से बाहर

नक्शा पढ़ना सीखिए: राजनीतिक और भौतिक नक्शे

यह हिस्सा किताब में नहीं है। ऊपर किताब के नक्शे दिखाते हैं कि कौन-सा समुदाय कहाँ बसा है। यहाँ उन्हीं दो देशों के दो और तरह के नक्शे हैं, ताकि नक्शा पढ़ने का अभ्यास हो।

राजनीतिक नक्शा: देश की सीमा, पड़ोसी देश, राजधानी और बड़े शहर दिखाता है।

भौतिक नक्शा: ज़मीन कैसी है, यह दिखाता है: मैदान, पहाड़, नदियाँ और समुद्र। इन दोनों नक्शों में ज़मीन का रंग ऊँचाई बताता है: हरा नीची ज़मीन, पीला-भूरा ऊँची ज़मीन। समुद्र का नीला रंग तट से दूर जाते हुए गहरा होता जाता है।

नाम छिपाकर खुद को परखिए: पहले मन में नाम सोचिए, फिर बिंदु छूकर मिलाइए।

बेल्जियम: राजनीतिक नक्शा
ब्रूसेल्स (राजधानी)एंटवर्पलिएजनीदरलैंडजर्मनीलक्ज़मबर्गफ़्रांसउत्तरी सागर
  • राजधानी ब्रूसेल्स देश के बीच से थोड़ा उत्तर में है। किताब के नक्शे का ब्रूसेल्स-राजधानी क्षेत्र यही है।
  • पड़ोसी देश: उत्तर में नीदरलैंड, पूर्व में जर्मनी, दक्षिण-पूर्व में लक्ज़मबर्ग, दक्षिण और पश्चिम में फ़्रांस। उत्तर-पश्चिम में उत्तरी सागर है।
  • एंटवर्प उत्तर के फ़्लेमिश (डच-भाषी) इलाके में है और लिएज दक्षिण के वेलोनिया (फ़्रेंच-भाषी) इलाके में। ऊपर किताब का नक्शा खोलकर मिलाइए।

Map: “Belgium location map” by NordNordWest, CC BY-SA 3.0, via Wikimedia Commons. Converted to WebP; Hindi labels added by MaruShala.

दोनों नक्शे मिलाइए भौतिक नक्शे का ऊँचा पठार किताब के नक्शे के किस इलाके में पड़ता है?

हमारा जवाब: ज़्यादातर वेलोनिया (फ़्रेंच-भाषी इलाके) में; पूर्व का छोटा जर्मन-भाषी इलाका भी इसी ऊँची ज़मीन पर है। वेलोनिया के उत्तरी हिस्से में ज़मीन नीची है, और उत्तर का फ़्लेमिश (डच-भाषी) इलाका ज़्यादातर नीचा मैदान है।

ये बातें कहाँ से लीं

हरियाणा से तुलना (पृ. 2)

बेल्जियम: यूरोप का छोटा-सा देश, क्षेत्रफल में हरियाणा से भी छोटा। आबादी एक करोड़ से थोड़ी अधिक, यानी हरियाणा से करीब आधी। सीमाएँ फ़्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और लक्ज़मबर्ग से लगती हैं।

श्रीलंका: तमिलनाडु के दक्षिणी तट से कुछ किलोमीटर दूर एक द्वीपीय देश। आबादी करीब दो करोड़, यानी हरियाणा के बराबर। (यहाँ किताब क्षेत्रफल की तुलना नहीं करती।)

बेल्जियम में तनाव किस बात का था? (पृ. 2)

अल्पसंख्यक फ़्रेंच-भाषी लोग तुलनात्मक रूप से ज़्यादा समृद्ध और ताकतवर रहे। डच-भाषियों को आर्थिक विकास और शिक्षा का लाभ बहुत बाद में मिला, और उन्हें इस स्थिति से नाराज़गी थी। 1950 और 1960 के दशक में दोनों समूहों के बीच तनाव बढ़ा। टकराव का सबसे तीखा रूप ब्रूसेल्स में दिखा।

शब्द: एथनीक या जातीय (पृ. 2)

ऐसा सामाजिक विभाजन जिसमें हर समूह अपनी-अपनी संस्कृति को अलग मानता है, यानी साझी संस्कृति पर आधारित सामाजिक विभाजन। ज़रूरी नहीं कि ऐसे समूह के सदस्य किसी एक धर्म के मानने वाले हों या उनकी राष्ट्रीयता एक हो।

किस देश की बात?

हर बात को उसके देश के डिब्बे में डालिए।

अब ज़रा सोचिए (पृ. 3)

बेल्जियम में डच-भाषी अपनी बड़ी संख्या के बल पर फ़्रेंच और जर्मन बोलने वालों पर अपनी इच्छाएँ थोप सकते थे। तब लड़ाई और बढ़ती, देश बँट सकता था और ब्रूसेल्स पर दोनों पक्ष अपना-अपना दावा ठोकते। श्रीलंका में सिंहलियों का बहुमत और भी बड़ा था। आगे देखिए, असल में क्या हुआ।

जाँच पड़ाव

  1. 1बेल्जियम की कुल आबादी का कितना हिस्सा डच बोलता है?

  2. 2राजधानी ब्रूसेल्स में बहुमत किनका है?

  3. 3श्रीलंका में तमिल मुख्य रूप से कहाँ बसे हैं?

2श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद

सन् 1948 में श्रीलंका स्वतंत्र राष्ट्र बना। सिंहली नेताओं ने अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा, और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार ने इसके लिए कई कदम उठाए (पृ. 3)।

शब्द: बहुसंख्यकवाद (पृ. 3)

यह मान्यता कि अगर कोई समुदाय बहुसंख्यक है तो वह अपने मनचाहे ढंग से देश का शासन कर सकता है, और इसके लिए अल्पसंख्यक समुदाय की ज़रूरत या इच्छाओं की अवहेलना कर सकता है।

सरकार के तीन कदम (पृ. 3)

कार्ड छूकर पलटिए।

तमिलों को क्या लगा? (पृ. 3)

  1. बौद्ध सिंहलियों के नेतृत्व वाली सारी राजनीतिक पार्टियाँ उनकी भाषा और संस्कृति को लेकर असंवेदनशील हैं।
  2. संविधान और सरकार की नीतियाँ उन्हें समान राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर रही हैं।
  3. नौकरियों और फ़ायदे के दूसरे कामों में उनके साथ भेदभाव हो रहा है, उनके हितों की अनदेखी हो रही है।

नतीजा: तमिल और सिंहली समुदायों के संबंध बिगड़ते चले गए।

आगे क्या हुआ? सही क्रम लगाइए

जो पहले हुआ वह सबसे ऊपर। पंक्ति खींचिए या ↑ ↓ दबाइए।

▲ पहले

  1. 1तमिल पार्टियों ने स्वायत्तता माँगी; माँग लगातार नकारी गई
  2. 21948: श्रीलंका स्वतंत्र हुआ
  3. 3अविश्वास गृहयुद्ध में बदला; हज़ारों लोग मारे गए
  4. 41956: सिंहली एकमात्र राजभाषा बनी
  5. 52009: गृहयुद्ध का अंत
  6. 6तमिलों में नाराज़गी और बेगानापन बढ़ा
  7. 71980 के दशक तक: स्वतंत्र तमिल ईलम की माँग

▼ बाद में

तमिलों की तीन माँगें (पृ. 4)

  1. तमिल को भी राजभाषा बनाया जाए
  2. क्षेत्रीय स्वायत्तता मिले
  3. शिक्षा और रोज़गार में समान अवसर मिलें

तमिल आबादी वाले इलाके की स्वायत्तता की माँग लगातार नकारी गई। 1980 के दशक तक उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल ईलम (सरकार) बनाने की माँग को लेकर कई राजनीतिक संगठन बन गए।

शब्द: गृहयुद्ध (पृ. 4)

किसी मुल्क में सरकार विरोधी समूहों की हिंसक लड़ाई ऐसा रूप ले ले कि वह युद्ध सा लगे, तो उसे गृहयुद्ध कहते हैं।

पृ. 4: दोनों पक्षों के हज़ारों लोग मारे गए। अनेक परिवार अपने मुल्क से भागकर शरणार्थी बने। इससे कई गुना ज़्यादा लोगों की रोज़ी-रोटी चौपट हो गई। 2009 में इस गृहयुद्ध का अंत हुआ।

हाशिये का सवाल (पृ. 4)

“बहुसंख्यक समुदाय के शासन में क्या हर्ज है? अगर श्रीलंका में सिंहलियों का राज नहीं होगा तो किसका राज होगा?”

किताब का जवाब देखिए

पृ. 5: “अगर बहुसंख्यक समुदाय दूसरों पर प्रभुत्व कायम करने और सत्ता में उनको हिस्सेदार न बनाने का फैसला करता है तो इससे देश की एकता ही संकट में पड़ सकती है।” श्रीलंका में ठीक यही हुआ।

जाँच पड़ाव

  1. 11956 के कानून से क्या हुआ?

  2. 2श्रीलंका कब स्वतंत्र राष्ट्र बना?

  3. 3किताब के अनुसार स्वतंत्र तमिल ईलम की माँग किस दशक तक ज़ोर पकड़ चुकी थी?

3बेल्जियम की समझदारी

बेल्जियम के नेताओं ने श्रीलंका से अलग रास्ता चुना। उन्होंने क्षेत्रीय अंतरों और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार किया। 1970 और 1993 के बीच संविधान में चार संशोधन सिर्फ़ इसलिए किए कि किसी को बेगानेपन का अहसास न हो और सभी मिल-जुलकर रह सकें। किताब कहती है कि यह व्यवस्था “बहुत ही कल्पनाशील है तथा कोई और देश ऐसा नहीं कर पाया” (पृ. 4)।

लेन-देन: कौन किस बात पर माना?

दो मेज़ें, हर मेज़ पर 10 कुर्सियाँ। पहले देखिए कि आबादी के हिसाब से बाँटें तो लगभग क्या होता। फिर दोनों समुदायों से बराबरी मनवाइए।

केंद्रीय सरकार के मंत्रीब्रूसेल्स की सरकार

डच-भाषीफ़्रेंच-भाषी

  • केंद्रीय सरकार के मंत्री: आबादी के हिसाब से (लगभग), डच-भाषी 6 · फ़्रेंच-भाषी 4
  • ब्रूसेल्स की सरकार: आबादी के हिसाब से (लगभग), डच-भाषी 2 · फ़्रेंच-भाषी 8

यह समझाने का चित्र है; किताब कुर्सियों की गिनती नहीं देती। “लगभग” वाली गिनती पृ. 2 के प्रतिशत से निकाली है: 59 : 40 ≈ 6 : 4 और 80 : 20 = 8 : 2।

बेल्जियम मॉडल के चार हिस्से

बाईं ओर की सरकार को दाईं ओर की बात से मिलाइए।

एक और ताला (पृ. 4)

कुछ विशेष कानून तभी बन सकते हैं जब दोनों भाषायी समूहों के सांसदों का बहुमत उनके पक्ष में हो। इस तरह कोई एक समुदाय एकतरफ़ा फ़ैसला नहीं कर सकता।

तीसरे स्तर की सरकार (पृ. 5)

केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा बेल्जियम में सामुदायिक सरकार भी है। इसे एक ही भाषा बोलने वाले लोग चुनते हैं: डच, फ़्रेंच और जर्मन बोलने वाले समुदायों के लोग, “चाहे वे जहाँ भी रहते हों”। इस सरकार को संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर फ़ैसले लेने का अधिकार है।

ब्रूसेल्स की एक गली

एक ही गली में दो परिवार रहते हैं। एक घर चुनिए, फिर बताइए कि उस परिवार के बच्चों की पढ़ाई की भाषा कौन-सी सरकार तय करेगी।

ब्रूसेल्सडच परिवारफ़्रेंच परिवार

पहले ऊपर चित्र में एक घर चुनिए।

नतीजा (पृ. 5)

बेल्जियम का मॉडल जटिल है, खुद बेल्जियम में रहने वालों के लिए भी। पर यह बेहद सफल रहा: गृहयुद्ध की आशंकाओं पर विराम लगा, वरना देश भाषा के आधार पर दो टुकड़ों में बँट गया होता। जब कई यूरोपीय देशों ने मिलकर यूरोपीय संघ बनाया, तो ब्रूसेल्स को उसका मुख्यालय चुना गया।

एनिते और सेलवी (पृ. 6)

एनिते बेल्जियम के उत्तरी इलाके के एक डच माध्यम के स्कूल में पढ़ती है; फ़्रेंच बोलने वाले उसके अनेक साथी चाहते हैं कि पढ़ाई फ़्रेंच में हो। सेलवी श्रीलंका के एक स्कूल में पढ़ती है; वह और उसके बहुत से दोस्त तमिल-भाषी हैं, और उनके माता-पिता पढ़ाई का माध्यम तमिल ही रखना चाहते हैं।

किताब पूछती है: “कौन-सी सरकार एनिते और सेलवी के माता-पिता की इच्छा पूरी कर सकती है? किसे सफलता मिलने की संभावना अधिक है और क्यों?”

हमारा जवाब देखिए

बेल्जियम में संभावना ज़्यादा है। वहाँ शिक्षा और भाषा के फ़ैसले भाषा-समुदाय की अपनी सामुदायिक सरकार करती है (पृ. 5)। श्रीलंका में सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाया गया और तमिल इलाके की स्वायत्तता की माँग लगातार नकारी गई (पृ. 3–4)। किताब इसका उत्तर नहीं छापती; यह हमारा जवाब है।

प्रश्न 4: मर्चटेम के मेयर (पृ. 10)

ब्रूसेल्स के पास के शहर मर्चटेम के मेयर ने स्कूलों में फ़्रेंच बोलने पर लगी रोक को सही बताया। उनका कहना था कि इससे डच न बोलने वाले लोग इस फ़्लेमिश शहर के लोगों से जुड़ सकेंगे। क्या यह फ़ैसला बेल्जियम की सत्ता की साझेदारी की मूल भावना से मेल खाता है?

हमारा जवाब देखिए

नहीं। बेल्जियम की व्यवस्था की मूल भावना यह है कि किसी को बेगानेपन का अहसास न हो और कोई एक समुदाय एकतरफ़ा फ़ैसला न कर सके (पृ. 4)। स्कूलों में फ़्रेंच बोलने पर रोक फ़्रेंच-भाषियों पर एक भाषा थोपना है, जो इस भावना के उलट है। (किताब उत्तर नहीं छापती; यह हमारा जवाब है।)

जाँच पड़ाव

  1. 11970 से 1993 के बीच बेल्जियम ने अपने संविधान में कितने संशोधन किए?

  2. 2सामुदायिक सरकार किन मसलों पर फ़ैसले लेती है?

  3. 3फ़्रेंच-भाषियों ने ब्रूसेल्स में समान प्रतिनिधित्व क्यों माना?

4साझेदारी क्यों ज़रूरी है?

दोनों देश लोकतांत्रिक हैं, फिर भी सत्ता की साझेदारी के सवाल को उन्होंने अलग-अलग ढंग से निपटाया (पृ. 5)।

दो रास्ते, दो नतीजे

चौराहे पर एक रास्ता चुनिए, फिर दूसरा भी देखिए।

बेगानापनअविश्वासगृहयुद्धसबकी हिस्सेदारीआशंका पर विरामदेश एकबहुमत की मनमानीसत्ता की साझेदारी

पृ. 6 पर किताब सत्ता के बँटवारे के पक्ष में दो तरह के तर्क देती है।

युक्तिपरक तर्क (समझदारी का तर्क)

सत्ता बाँटने से सामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा कम होता है। सामाजिक टकराव अक्सर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता बन जाता है, इसलिए सत्ता में हिस्सा देना व्यवस्था के स्थायित्व के लिए अच्छा है। बहुसंख्यक की इच्छा सब पर थोपना तात्कालिक तौर पर लाभकारी लग सकता है, पर आगे चलकर देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है। बहुसंख्यकों का अत्याचार अक्सर बहुसंख्यकों के लिए भी हानिकारक होता है।

ज़ोर: लाभकर परिणाम

नैतिक तर्क

“सत्ता की साझेदारी दरअसल लोकतंत्र की आत्मा है।” लोकतंत्र का मतलब ही है कि जो लोग शासन-व्यवस्था के अंतर्गत हैं, उनके बीच सत्ता बाँटी जाए। वैध सरकार वही है जिसमें अपनी भागीदारी के माध्यम से सभी समूह शासन-व्यवस्था से जुड़ते हैं।

ज़ोर: अंतर्भूत महत्व

शब्द: युक्तिपरक (पृ. 6)

हानि-लाभ का सावधानीपूर्वक हिसाब लगाकर लिया गया फ़ैसला। पूरी तरह से नैतिकता पर आधारित फ़ैसला अक्सर इसके उलट होता है।

कौन-सा तर्क?

हर बात को उसके तर्क के डिब्बे में डालिए। पंचायती राज वाली दो बातें प्रश्न 5 (पृ. 11) के उद्धरण से हैं।

जर्मनी, 2005 (पृ. 6)

क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी रही हैं। 2005 के चुनावों में किसी को अपने बूते सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं मिला, इसलिए दोनों को गठबंधन सरकार बनानी पड़ी। नीतियों पर अलग-अलग पक्ष लेने के बावजूद दोनों ने साथ मिलकर सरकार चलाई।

विक्रम-बेताल: खलील की उलझन (पृ. 7)

बेरूत (लेबनान) में खलील रहता था। उसके पिता आर्थोडॉक्स ईसाई थे, माँ सुन्नी मुसलमान। लेबनान में अलग-अलग समुदाय साथ रहते थे, पर गृहयुद्ध में आपस में लड़े भी; खलील का एक चाचा ऐसी ही लड़ाई में मारा गया था। गृहयुद्ध खत्म होने के बाद सारे नेता साथ बैठे और सत्ता के बँटवारे के कुछ बुनियादी नियमों पर सहमत हुए।

किस पद पर किस समुदाय का व्यक्ति?

बाईं ओर के पद को दाईं ओर के समुदाय से मिलाइए।

समझौते में यह भी तय हुआ कि ईसाई फ़्रांस से संरक्षण की माँग नहीं करेंगे, और मुसलमान पड़ोसी सीरिया के साथ एकीकरण की माँग छोड़ देंगे। तब दोनों की आबादी लगभग बराबर थी। बाद में मुसलमान स्पष्ट रूप से बहुमत में आ गए, पर दोनों पक्ष अब भी समझौते का आदर करते हुए उसे मान रहे हैं।

खलील लोकप्रिय है और राजनीति में आगे बढ़ना चाहता है, पर मौजूदा व्यवस्था में वह सबसे बड़े पद तक नहीं पहुँच सकता। वह न माँ का धर्म मानता है, न पिता का, और नहीं चाहता कि उसे किसी धर्म से जोड़कर पहचाना जाए।

  1. खलीलसिर्फ़ चुनाव कराइए, हर किसी को चुनाव लड़ने की आज़ादी दीजिए, और जिसे सबसे ज़्यादा वोट मिलें वह राष्ट्रपति बन जाए, भले ही वह किसी समुदाय का हो।
  2. गृहयुद्ध देख चुके बड़े-बुज़ुर्गमौजूदा व्यवस्था ही शांति की सबसे अच्छी गारंटी है।

बेताल का सवाल: “अगर आपको लेबनान का कानून फिर से लिखने का अधिकार होता तो आप क्या करते? क्या आप पुरानी व्यवस्था ही चलने देते या आप कुछ नया करते?”

किताब इसका कोई “सही” उत्तर नहीं देती। दोनों तरफ़ के तर्क तौलकर अपना जवाब लिखिए; इस सवाल का मकसद यही है।

जाँच पड़ाव

  1. 1युक्तिपरक तर्क किस पर ज़ोर देता है?

  2. 2जर्मनी में 2005 में गठबंधन सरकार क्यों बनी?

  3. 3लेबनान के समझौते के अनुसार प्रधानमंत्री कौन हो सकता है?

5साझेदारी के रूप

पुरानी धारणा (पृ. 8)

लंबे समय तक माना जाता रहा कि सरकार की सारी शक्तियाँ एक व्यक्ति या किसी खास जगह के व्यक्ति-समूह के हाथ में रहनी चाहिए, क्योंकि शक्ति बिखरी तो तुरंत फ़ैसले लेना और उन्हें लागू करना संभव नहीं होगा। सत्ता की साझेदारी का विचार इसी धारणा के विरुद्ध आया। लोकतंत्र का बुनियादी सिद्धांत है कि जनता ही सारी राजनीतिक शक्ति का स्रोत है।

क्षैतिज और उर्ध्वाधर

विधायिकाकार्यपालिकान्यायपालिकाएक ही स्तर

सरकार के अंग, यानी विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, एक ही स्तर पर रहकर अपनी-अपनी शक्ति का उपयोग करते हैं, और हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है। भारत में कार्यपालिका संसद के अधीन काम करती है; न्यायाधीशों की नियुक्ति कार्यपालिका करती है, पर न्यायपालिका ही कार्यपालिका पर और विधायिका के बनाए कानूनों पर अंकुश रखती है। इसे ‘नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था’ कहते हैं (पृ. 8)।

पूरी व्यवस्था एक जगह: सरकार के प्रकार और भारत में शासन के तीन स्तर

किताब यहाँ सत्ता के दो बँटवारे दिखाती है: अंगों के बीच और स्तरों के बीच। भारत में ये असल में कैसे चलते हैं, यह हमारे डीप डाइव में खोलकर देखिए: संसद, सरकार और अदालत में कौन क्या करता है, वे एक-दूसरे पर अंकुश कैसे रखते हैं, और केंद्र, राज्य, पंचायत व नगरपालिका में कौन-सा काम किसका है। हर पड़ाव के अंत में छोटे सवाल भी हैं।

डीप डाइव खोलिए →

चार रूप: कौन-सा उदाहरण किसमें?

किताब सत्ता की साझेदारी के चार रूप बताती है (पृ. 8–9)। हर उदाहरण को उसके रूप में डालिए।

पृ. 10 की गतिविधि के चार उदाहरणों (बंबई, ओंटेरियो, रूस, नाइजीरिया) का उत्तर किताब नहीं छापती; उनके डिब्बे हमारा जवाब हैं।

प्रश्न 8 (पृ. 12): सूची I को सूची II से मिलाइए

बाईं ओर सत्ता के बँटवारे का स्वरूप, दाईं ओर शासन का स्वरूप।

जाँच पड़ाव

  1. 1नगरपालिका और पंचायतें सत्ता के किस बँटवारे की इकाइयाँ हैं?

  2. 2‘नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था’ किस बँटवारे से जुड़ी है?

  3. 3आरक्षित चुनाव क्षेत्र किस रूप का उदाहरण हैं?

6सार और अभ्यास

एक नज़र में

बेल्जियमश्रीलंका
बहुसंख्यकडच-भाषी, 59%सिंहली, 74%
रास्तासत्ता की साझेदारीबहुसंख्यकवाद
बड़ा कदम1970–1993: संविधान में चार संशोधन1956: सिंहली एकमात्र राजभाषा
नतीजादेश एक रहा; गृहयुद्ध की आशंका पर विरामगृहयुद्ध; 2009 में अंत

नौ शब्द: कार्ड पलटिए

सही या गलत? (ये गलतियाँ अक्सर होती हैं)

  1. श्रीलंका में तानाशाही थी, इसलिए वहाँ बहुसंख्यकवाद आया।

  2. श्रीलंका में तमिल 18% हैं और श्रीलंकाई तमिल अलग से 13%, यानी कुल 31%।

  3. बेल्जियम ने 1970 से 1993 के बीच चार नए संविधान बनाए।

  4. बेल्जियम में राज्य सरकारें केंद्रीय सरकार के अधीन नहीं हैं।

  5. ब्रूसेल्स में बराबरी डच-भाषियों ने मानी, और बदले में केंद्र में बराबरी फ़्रेंच-भाषियों ने।

  6. श्रीलंका की आबादी और क्षेत्रफल, दोनों हरियाणा के बराबर हैं।

  7. क्षैतिज वितरण में सरकार के अंग एक ही स्तर पर रहकर अपनी शक्ति का उपयोग करते हैं।

  8. “सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है”: यह युक्तिपरक तर्क है।

  9. श्रीलंका का गृहयुद्ध 2009 में खत्म हुआ।

अब वही सवाल फिर से

शुरुआत में आपने कोई जवाब नहीं चुना था। अब क्या कहेंगे?

सत्ता कई हाथों में बाँट दी जाए, तो देश…

किताब का जवाब देखिए

पृ. 5 के हाशिये में यही उलझन लिखी है: “…तो आपके कहने का मतलब है कि सत्ता में हिस्सेदारी से हम ज़्यादा ताकतवर होते हैं। यह बात तो कुछ अजीब लगती है। खैर, जरा सोचने दीजिए!” किताब का जवाब बेल्जियम और श्रीलंका की कहानी है: बहुसंख्यक समुदाय दूसरों को सत्ता में हिस्सेदार न बनाए, तो देश की एकता ही संकट में पड़ सकती है।

आख़िरी जाँच: किताब के प्रश्न

  1. 1प्रश्न 6 (पृ. 11). सत्ता की साझेदारी: (क) समुदायों के बीच टकराव कम करती है; (ख) पक्षपात का अंदेशा कम करती है; (ग) निर्णय की प्रक्रिया अटका देती है; (घ) विविधताओं को अपने में समेट लेती है; (ङ) अस्थिरता और आपसी फूट बढ़ाती है; (च) सत्ता में लोगों की भागीदारी बढ़ाती है; (छ) देश की एकता कमज़ोर करती है। इनमें से पक्ष वाले तर्क कौन-से हैं?

  2. 2प्रश्न 3 (पृ. 10). थम्मन: साझेदारी सिर्फ़ वहीं ज़रूरी है जहाँ क्षेत्रीय, भाषायी या जातीय विभाजन हो। मथाई: यह सिर्फ़ क्षेत्रीय विभाजन वाले बड़े देशों के लिए है। औसेफ: हर समाज में ज़रूरी है, भले वह छोटा हो या उसमें विभाजन न हों। आप किससे सहमत होंगे?

  3. 3प्रश्न 7 (पृ. 11). (क) बेल्जियम में डच-भाषी बहुसंख्यकों ने फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यकों पर प्रभुत्व जमाने का प्रयास किया। (ख) श्रीलंका में सरकार की नीतियों ने सिंहली-भाषी बहुसंख्यकों का प्रभुत्व बनाए रखने का प्रयास किया। (ग) तमिलों ने सत्ता को संघीय ढाँचे पर बाँटने की माँग की। (घ) बेल्जियम में एकात्मक सरकार की जगह संघीय व्यवस्था लाकर देश को भाषा के आधार पर टूटने से बचाया गया। कौन-से सही हैं?

  4. 4प्रश्न 9 (पृ. 12). (अ) सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए लाभकर है। (ब) इससे सामाजिक समूहों में टकराव का अंदेशा घटता है। कौन सही है?