कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 3 से 17
यह पन्ना किसलिए — पढ़ाने से पहले अध्याय पर अपनी पकड़ पक्की करने के लिए: अध्याय का तर्क, अध्याय के आँकड़े, किताब की परिभाषाएँ, प्रश्नावली के उत्तर, और वे जगहें जहाँ बच्चे अकसर भटकते हैं। कक्षा में किस कालांश में क्या करना है, वह पाठ योजना में है।
सारे पृष्ठ 2026-27 में छपी किताब के हैं। किताब की पंक्तियाँ उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ-संख्या के साथ दी गई हैं। जो बात किताब की नहीं, हमारी अपनी है, उसके साथ “हमारी ओर से” लिखा है।
अध्याय की पकड़
अध्याय का तर्क — किताब किस क्रम में सोचती है
अध्याय एक सीधे सवाल से चलता है: विकास किसे कहें, और उसे नापें कैसे? किताब पहले लोगों के अलग-अलग लक्ष्य दिखाती है (पृष्ठ 4–5), फिर बताती है कि आय के साथ लोग बराबरी, आज़ादी, सुरक्षा और आदर भी चाहते हैं (पृष्ठ 5–6), और फिर देश के स्तर पर वही सवाल रखती है (पृष्ठ 6)। इसके बाद नापने की बात: देशों की तुलना औसत आय से (पृष्ठ 8), औसत की कमज़ोरी (पृष्ठ 9), तीन राज्यों के दूसरे आँकड़े (पृष्ठ 10–11), सार्वजनिक सुविधाएँ (पृष्ठ 11–12) और मानव विकास रिपोर्ट (पृष्ठ 13–14)। आख़िर में एक नया सवाल: जो विकास आज है, क्या वह आगे की पीढ़ी के लिए टिकेगा (पृष्ठ 14–16)?
अध्याय के तीन सवाल
किताब के दो वाक्य इस अध्याय की धुरी हैं:
- “देशों की तुलना करने के लिए उनकी आय सबसे महत्त्वपूर्ण विशिष्टता समझी जाती है।” (पृष्ठ 8)
- “यह आवश्यक नहीं कि जेब में रखा रुपया वे सब वस्तुएँ और सेवाएँ खरीद सके, जिनकी आपको एक बेहतर जीवन के लिए आवश्यकता हो सकती है।” (पृष्ठ 11)
हमारी ओर से — पहला वाक्य आधा सच है: किताब आय को ठुकराती नहीं। वह कहती है कि आय तुलना के लिए उपयोगी है, पर अकेली काफ़ी नहीं। बच्चे अकसर एक छोर से दूसरे छोर पर चले जाते हैं: पहले मान लेते हैं कि विकास का मतलब बस पैसा है, फिर यह कि आय बेकार मापदंड है। प्रश्न 7 ठीक इसी दूसरी भूल को परखता है।
हमारी ओर से — दूसरा वाक्य हल की ओर ले जाता है: जेब का रुपया जो नहीं ख़रीद सकता, वह मिलकर पाया जा सकता है: स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएँ, राशन की दुकान, सुरक्षा। केरल और हरियाणा की तुलना इसी बात का सबूत है, और मानव विकास रिपोर्ट इसी सोच से आय के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा भी गिनती है।
अध्याय के आँकड़े — तथ्य एक नज़र में
विश्व बैंक का बँटवारा, प्रतिव्यक्ति आय प्रति वर्ष (2024)
| वर्ग | प्रतिव्यक्ति आय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| समृद्ध या उच्च आय देश | US $66,500 या उससे ज़्यादा | 8 |
| भारत: मध्य आय वर्ग | लगभग US $11,000 | 8 |
| निम्न आय वाले देश | लगभग US $2,300 या उससे कम | 8 |
तालिका 1.2: दो देश, हर देश में 5 नागरिक, मासिक आय (रुपये)
| देश | नागरिकों की आय | कुल | औसत | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| देश क | 9,500 · 10,500 · 9,800 · 10,000 · 10,200 | 50,000 | 10,000 | 9 |
| देश ख | 500 · 500 · 500 · 500 · 48,000 | 50,000 | 10,000 | 9 |
तालिकाएँ 1.3 और 1.4: तीन राज्य
| राज्य | प्रतिव्यक्ति आय, 2023-24 (रुपये) | शिशु मृत्यु दर (2020) | साक्षरता दर %, 2017-18 | निवल उपस्थिति अनुपात, 15–17 वर्ष, 2019-21 | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|---|
| हरियाणा | 3,25,759 | 28 | 80 | 67 | 10 |
| केरल | 2,81,001 | 6 | 96 | 77 | 10 |
| बिहार | 60,337 | 27 | 71 | 55 | 10 |
तालिका 1.6: भारत और पड़ोसी देश, वर्ष 2023 (मानव विकास रिपोर्ट 2025)
| देश | प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (डॉलर, 2021 की क्रय शक्ति पर) | जन्म के समय संभावित आयु | स्कूली पढ़ाई के औसत वर्ष (25 वर्ष या ज़्यादा उम्र) | मानव विकास सूचकांक क्रमांक | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|---|
| श्रीलंका | 12,616 | 77.5 | 10.8 | 89 | 13 |
| भारत | 9,047 | 72 | 6.9 | 130 | 13 |
| म्यांमार | 4,919 | 66.9 | 6.4 | 150 | 13 |
| पाकिस्तान | 5,501 | 67.6 | 4.3 | 168 | 13 |
| नेपाल | 4,726 | 70.4 | 4.5 | 145 | 13 |
| बंगलादेश | 8,498 | 74.7 | 6.8 | 130 | 13 |
क्रमांक कुल 193 देशों में से है (पृष्ठ 13)।
तालिका 1.7: कच्चे तेल के भण्डार
| क्षेत्र या देश | भण्डार, 2020 (हज़ार मिलियन बैरल) | भण्डार कितने वर्ष चलेंगे | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| मध्य पूर्व | 836 | 70 | 15 |
| संयुक्त राज्य अमरीका | 69 | 10.5 | 15 |
| विश्व | 1732 | 47 | 15 |
बाक़ी आँकड़े
| बात | आँकड़ा | पृष्ठ |
|---|---|---|
| राशन की दुकान का प्रयोग करने वाले ग्रामीण लोग | तमिलनाडु 90 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल 35 प्रतिशत | 12 |
| उत्तर प्रदेश, ग्रामीण साक्षरता (पुरुष / महिला) | सभी आयु 76% / 54%; 10–14 वर्ष 90% / 87%; 10–14 वर्ष, स्कूल जाने वाले 85% / 82% | 12 |
| 14 वर्ष तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक लक्ष्य | 1960 तक पूरा होना था | 12 |
| भूमिगत जल | 300 ज़िलों में 20 साल में स्तर 4 मीटर से ज़्यादा गिरा; लगभग एक तिहाई भाग अति-उपयोग में; अगले 25 वर्षों में 60 प्रतिशत भाग | 14 |
| आइवरी कोस्ट (अबिदजान) | 500 टन ज़हरीला तरल; एक महीने बाद 7 मौतें, 20 अस्पताल में, 26,000 का इलाज | 7 |
| सामान्य से कम बी.एम.आई. वाले वयस्क (15–49 वर्ष), 2019–21 (पुरुष / महिला %) | केरल 8.5 / 10; कर्नाटक 17 / 21; मध्य प्रदेश 28 / 28; सभी राज्य 20 / 23 | 17 |
आँकड़े तस्वीर बनाने के लिए हैं, रटवाने के लिए नहीं। बच्चे से यह पूछिए कि कौन आगे है और क्यों, यह नहीं कि केरल का आँकड़ा ठीक-ठीक कितना है।
ध्यान दीजिए: किताब में चार जगह बात आपस में मेल नहीं खाती; बच्चे इन पर अटकें, तो एक पंक्ति में बात साफ़ कर दीजिए।
- निवल उपस्थिति अनुपात की परिभाषा में “14 तथा 15 वर्ष” छपा है, पर तालिका 1.4 के ऊपर आयु 15–17 वर्ष है (पृष्ठ 10)।
- पृष्ठ 11 के पाठ में बिहार के “लगभग एक-तिहाई” बच्चों के स्कूल न जाने की बात है, पर तालिका का 55 लगभग 45 प्रतिशत बताता है।
- पृष्ठ 14 का वाक्य नेपाल को भी आयु संभाविता में भारत से पीछे नहीं बताता, पर तालिका में नेपाल 70.4 है और भारत 72; यह बात बंगलादेश (74.7) पर ठीक बैठती है।
- बी.एम.आई. वाले कार्यकलाप में 15 वर्ष 6 माह और बी.एम.आई. 28 वाले विद्यार्थी को “न्यूनभारित” लिखा है (पृष्ठ 13); 28 सामान्य से कम नहीं, ज़्यादा है।
तालिका 1.6 के दो कॉलम-शीर्षक भी अटपटे छपे हैं: आय वाले में “क्रय शक्ति क्षमता” (मतलब क्रय शक्ति समता), और पढ़ाई वाले में “विद्यालयी औसत आयु 25 वर्ष या उसके अधिक” (मतलब 25 वर्ष या उससे बड़े लोगों की पढ़ाई के औसत वर्ष)।
मुख्य शब्द — किताब की परिभाषाएँ
| शब्द | किताब क्या कहती है | पृष्ठ |
|---|---|---|
| विकास | किताब परिभाषा नहीं देती; कहती है कि विकास इन प्रश्नों पर विचार करने और इन लक्ष्यों को पाने के उपायों से जुड़ा है कि हम कैसे जीना चाहते हैं और देश कैसा हो | 3 |
| राष्ट्रीय विकास | “राष्ट्रीय विकास का अभिप्राय इन सब प्रश्नों पर विचार करना है।” (सब विचारों को बराबर महत्त्व, विरोध में निर्णय, न्यायपूर्ण राह, बेहतर तरीका, कितनों को लाभ) | 6 |
| औसत आय या प्रतिव्यक्ति आय | देश की कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर निकाली गई आय | 8 |
| शिशु मृत्यु दर | “किसी वर्ष में पैदा हुए 1,000 जीवित बच्चों में से एक वर्ष की आयु से पहले मर जाने वाले बच्चों का अनुपात दिखाती है।” | 10 |
| साक्षरता दर | “7 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में साक्षर जनसंख्या का अनुपात।” | 10 |
| निवल उपस्थिति अनुपात | उस आयु-वर्ग के कुल बच्चों में स्कूल जाने वाले बच्चों का प्रतिशत (तालिका 1.4 में 15–17 वर्ष) | 10 |
| सार्वजनिक सुविधाएँ | किताब परिभाषा नहीं देती; हमारी ओर से: वे वस्तुएँ और सेवाएँ जो सबको सामूहिक रूप से दी जाती हैं, जैसे स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएँ, सार्वजनिक वितरण प्रणाली | 11–12 |
| बी.एम.आई. (शरीर द्रव्यमान सूचकांक) | किलोग्राम में भार को ऊँचाई के वर्ग से भाग देने पर मिलने वाला अंक; इससे पता चलता है कि हम ठीक से पोषित हैं या नहीं | 13 |
| मानव विकास रिपोर्ट | “यूएनडीपी द्वारा प्रकाशित मानव विकास रिपोर्ट देशों की तुलना लोगों के शैक्षिक स्तर, उनकी स्वास्थ्य स्थिति और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर करती है।” | 13 |
| जन्म के समय संभावित आयु | जन्म के समय किसी व्यक्ति की औसत आयु की संभावना | 13 |
| धारणीयता | किताब परिभाषा नहीं देती; कहती है कि हम चाहेंगे कि विकास का स्तर भावी पीढ़ी के लिए बना रहे, और वैज्ञानिक चेतावनी देते आ रहे हैं कि विकास का मौजूदा प्रकार और स्तर धारणीय नहीं है | 14 |
| नवीकरणीय साधन | जिनकी पुनः पूर्ति प्रकृति करती है, जैसे भूमिगत जल; इनका भी अति-उपयोग हो सकता है | 15 |
| गैर नवीकरणीय साधन | जिनका धरती पर निश्चित भण्डार है और जिनकी पुनः पूर्ति नहीं हो सकती, जैसे कच्चा तेल | 15 |
आगे की कक्षाओं और दूसरे विषयों से जोड़
- आगे की कक्षाएँ। किताब ख़ुद कहती है कि इस अध्याय में विकास को समझने की शुरुआत भर है, और उच्च कक्षाओं में ये मुद्दे और गहराई से आएँगे (पृष्ठ 3)।
- इतिहास। किताब के अनुसार विकास के बहुत से प्रश्नों के उत्तर इतिहास में भी मिलेंगे, क्योंकि आज का जीवन अतीत से प्रभावित है (पृष्ठ 3)।
- राजनीति विज्ञान। किताब कहती है कि इन आशाओं को केवल लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया से ही असल जीवन में पाया जा सकता है (पृष्ठ 3)। राष्ट्रीय विकास वाले पाँच सवाल (पृष्ठ 6) इसी प्रक्रिया के सवाल हैं: किसकी बात सुनी जाए और निर्णय कैसे हो।
किताब की प्रश्नावली के उत्तर
पृष्ठ 12 का कार्यकलाप — उत्तर प्रदेश की ग्रामीण साक्षरता
तालिका 1.5 (पृष्ठ 12):
| श्रेणी | पुरुष | महिला |
|---|---|---|
| ग्रामीण जनसंख्या की साक्षरता दर | 76% | 54% |
| 10–14 वर्ष के ग्रामीण बच्चों में साक्षरता दर | 90% | 87% |
| 10–14 वर्ष के स्कूल जाने वाले ग्रामीण बच्चे | 85% | 82% |
| ख़ाली जगह | उत्तर | कैसे निकला |
|---|---|---|
| (क) ग्रामीण पुरुषों की साक्षरता दर | 76% | तालिका की पहली पंक्ति |
| (क) ग्रामीण महिलाओं की साक्षरता दर | 54% | तालिका की पहली पंक्ति |
| (क) इस समय स्कूल में नहीं | 10–14 वर्ष के कई बच्चे (लड़कों में 15%, लड़कियों में 18%) | तीसरी पंक्ति से |
| (ख) स्कूल न जाने वाली लड़कियाँ और लड़के | 18 और 15 प्रतिशत | 100 − 82 और 100 − 85 |
| (ख) निरक्षर लड़कियाँ और लड़के (10–14 वर्ष) | 13 और 10 प्रतिशत | 100 − 87 और 100 − 90 |
| (ग) किस आयु-वर्ग की निरक्षरता चिंताजनक | 10–14 वर्ष | पूरा अनुच्छेद इसी आयु-वर्ग का है |
हमारी ओर से — पहचानने का तरीक़ा: तालिका बताती है कि कितने बच्चे साक्षर हैं या स्कूल जाते हैं; ख़ाली जगहें पूछती हैं कि कितने नहीं। बच्चे यह पलटना भूल जाते हैं और 82 या 87 ही लिख देते हैं। बोर्ड पर एक बार 100 − 82 = 18 करके दिखा दीजिए। (ग) के बाद किताब की बात भी पढ़वाइए: 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक लक्ष्य 1960 तक पूरा होना था, पर बहुत से राज्य अब भी उसके पास नहीं पहुँचे (पृष्ठ 12)।
1 से 3 तक के प्रश्न — कुंजी और कारण
| प्रश्न | सही विकल्प | कारण |
|---|---|---|
| 1. किसी देश का विकास किस आधार पर | (घ) उपरोक्त सभी | किताब आय से तुलना शुरू करती है (पृष्ठ 8), फिर साक्षरता और स्वास्थ्य भी देखती है (पृष्ठ 10), और मानव विकास रिपोर्ट तीनों को साथ लेती है (पृष्ठ 13) |
| 2. मानव विकास में भारत से बेहतर पड़ोसी | (ख) श्रीलंका | क्रमांक श्रीलंका 89, भारत 130 (पृष्ठ 13); बंगलादेश भी 130 है, यानी बराबर; नेपाल 145 और पाकिस्तान 168 पीछे |
| 3. चौथे परिवार की आय | (घ) 6,000 रुपये | 4 × 5,000 = 20,000; तीन परिवारों का जोड़ 4,000 + 7,000 + 3,000 = 14,000; 20,000 − 14,000 = 6,000 |
प्रश्न 2 पर सबसे ज़्यादा भूल होती है। बच्चे बंगलादेश चुनते हैं, क्योंकि उसकी संभावित आयु (74.7) भारत (72) से ज़्यादा है। प्रश्न मानव विकास की “स्थिति” पूछ रहा है, यानी क्रमांक; और क्रमांक में बंगलादेश भारत के बराबर है, आगे नहीं।
प्रश्न 3 में “प्रतिव्यक्ति आय” का मतलब यहाँ प्रति परिवार औसत है। बच्चों से पहले कुल निकलवाइए, फिर घटाना; सीधे अंदाज़ा लगाने पर 7,500 जैसे विकल्प आकर्षक लगते हैं।
4 से 7 तक के प्रश्न — उत्तर के मुख्य बिंदु
प्रश्न 4 — विश्व बैंक का मापदण्ड और उसकी सीमाएँ (पृष्ठ 8, 9, 11)
- विश्व बैंक देशों को प्रतिव्यक्ति आय (औसत आय) से बाँटता है: 2024 में US $66,500 या ज़्यादा उच्च आय, लगभग US $2,300 या कम निम्न आय; भारत लगभग US $11,000 के साथ मध्य आय वर्ग में।
- सीमा एक: औसत से यह पता नहीं चलता कि आय लोगों में कैसे बँटी है (तालिका 1.2)।
- सीमा दो: आय से वे सब चीज़ें नहीं मिलतीं जो बेहतर जीवन के लिए चाहिए, जैसे प्रदूषण मुक्त वातावरण, बिना मिलावट की दवाएँ, संक्रामक बीमारियों से बचाव।
- सीमा तीन: लोग आय के साथ बराबरी, आज़ादी, सुरक्षा और आदर भी चाहते हैं; ये आय में नहीं गिने जाते।
जाँचते समय: मापदण्ड का नाम और कम से कम दो सीमाएँ, एक उदाहरण सहित।
नमूना उत्तर — विश्व बैंक देशों का वर्गीकरण प्रतिव्यक्ति आय से करता है, यानी देश की कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर। इसकी सीमाएँ हैं: औसत से आय के बँटवारे का पता नहीं चलता, जैसे तालिका 1.2 में दोनों देशों का औसत 10,000 रुपये है, पर देश ख में चार लोग गरीब हैं और एक बहुत अमीर। दूसरे, पैसे से स्वास्थ्य, शिक्षा और साफ़ वातावरण अपने-आप नहीं मिलते, इसलिए ज़्यादा आय वाला हरियाणा शिशु मृत्यु दर में केरल से पीछे है। (आधार: पृष्ठ 8, 9, 10, 11)
प्रश्न 5 — यू.एन.डी.पी. और विश्व बैंक के मापदण्ड में अंतर (पृष्ठ 8, 13)
- विश्व बैंक: केवल प्रतिव्यक्ति आय।
- यू.एन.डी.पी. की मानव विकास रिपोर्ट: लोगों का शैक्षिक स्तर, स्वास्थ्य स्थिति और प्रति व्यक्ति आय, तीनों।
- तालिका 1.6 में यही तीन बातें दिखती हैं: प्रति व्यक्ति आय, जन्म के समय संभावित आयु, स्कूली पढ़ाई के औसत वर्ष; और उनसे बना क्रमांक।
जाँचते समय: दोनों संस्थाओं के नाम, और यह कि यू.एन.डी.पी. आय को छोड़ता नहीं, उसके साथ स्वास्थ्य और शिक्षा जोड़ता है।
नमूना उत्तर — विश्व बैंक विकास को केवल प्रतिव्यक्ति आय से नापता है। यू.एन.डी.पी. की मानव विकास रिपोर्ट देशों की तुलना लोगों के शैक्षिक स्तर, स्वास्थ्य स्थिति और प्रति व्यक्ति आय, तीनों के आधार पर करती है। इसलिए श्रीलंका, जिसकी आय, संभावित आयु और पढ़ाई तीनों भारत से ज़्यादा हैं, क्रमांक में भी आगे है। (आधार: पृष्ठ 8, 13)
प्रश्न 6 — औसत का प्रयोग और उसकी सीमाएँ (पृष्ठ 8, 9)
- देशों की जनसंख्या अलग-अलग है, इसलिए कुल आय से तुलना ठीक नहीं; औसत से पता चलता है कि औसत व्यक्ति कितना कमाता है।
- सीमा: औसत से बँटवारा नहीं दिखता। तालिका 1.2 में दोनों देशों का औसत 10,000 रुपये है, पर देश क में सब लगभग बराबर हैं और देश ख में एक व्यक्ति के पास 48,000 रुपये हैं।
- विकास से जुड़ा उदाहरण: हरियाणा की औसत आय तीनों राज्यों में सबसे ज़्यादा है, फिर भी शिशु मृत्यु दर 28 है, केरल में 6।
जाँचते समय: “क्यों” और “सीमा” दोनों, और कम से कम एक उदाहरण अपने आँकड़ों के साथ।
नमूना उत्तर — हम औसत का प्रयोग इसलिए करते हैं कि अलग-अलग जनसंख्या वाले देशों या राज्यों की तुलना हो सके; कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देने पर औसत आय मिलती है। पर औसत से यह पता नहीं चलता कि आय कैसे बँटी है। तालिका 1.2 में देश क और देश ख, दोनों का औसत 10,000 रुपये है, फिर भी देश ख के चार नागरिक केवल 500 रुपये कमाते हैं। इसी तरह हरियाणा की औसत आय केरल से ज़्यादा है, पर शिशु मृत्यु दर में केरल बहुत आगे है। (आधार: पृष्ठ 8, 9, 10)
प्रश्न 7 — केरल और हरियाणा: क्या प्रतिव्यक्ति आय बेकार मापदंड है? (पृष्ठ 9, 10, 13)
- सहमत नहीं: किताब ख़ुद कहती है कि औसत आय तुलना के लिए उपयोगी है।
- पर वह अधूरी है: हरियाणा की आय ज़्यादा है, फिर भी शिशु मृत्यु दर, साक्षरता और स्कूल-उपस्थिति, तीनों में केरल आगे है।
- इसलिए आय को दूसरे मापदंडों के साथ देखना चाहिए; मानव विकास रिपोर्ट भी आय को छोड़ती नहीं, उसके साथ स्वास्थ्य और शिक्षा जोड़ती है।
जाँचते समय: पूरी तरह सहमत होने वाला उत्तर अधूरा है; अच्छा उत्तर आय को उपयोगी पर अधूरा बताता है, और आँकड़े देता है।
नमूना उत्तर — मैं सहमत नहीं हूँ। प्रतिव्यक्ति आय तुलना के लिए उपयोगी है, क्योंकि उससे पता चलता है कि औसत व्यक्ति कितना कमाता है। पर वह अकेली काफ़ी नहीं: हरियाणा की प्रतिव्यक्ति आय केरल से ज़्यादा है, फिर भी केरल में शिशु मृत्यु दर 6 है और हरियाणा में 28, और साक्षरता तथा स्कूल-उपस्थिति में भी केरल आगे है। इसलिए राज्यों की तुलना में आय के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा के मापदंड भी लेने चाहिए, जैसा मानव विकास रिपोर्ट करती है। (आधार: पृष्ठ 9, 10, 13)
8 से 13 तक के प्रश्न — उत्तर के मुख्य बिंदु
प्रश्न 8 — भारत में ऊर्जा के स्रोत, और 50 वर्ष बाद (पृष्ठ 15)
यह प्रश्न बच्चों से ख़ुद पता लगाने को कहता है; किताब भारत के ऊर्जा स्रोतों की सूची नहीं देती। बच्चे घर और आसपास देखकर सूची बनाएँ (रसोई, खेत, गाड़ियाँ, बिजली)। किताब से जो जोड़ना है, वह यह: कच्चा तेल गैर नवीकरणीय है, मौजूदा दर पर विश्व के भण्डार 47 वर्ष चलेंगे, और भारत तेल के आयात पर निर्भर है।
जाँचते समय: बच्चे की अपनी सूची, और 50 वर्ष बाद की बात तेल के 47 वर्ष वाले आँकड़े से जुड़ी हो।
नमूना उत्तर — हमारे घर और आसपास बिजली, रसोई गैस, पेट्रोल-डीज़ल और लकड़ी जैसे स्रोत काम में आते हैं (बच्चा जो देखे, वही लिखे)। इनमें कच्चे तेल से बने ईंधन गैर नवीकरणीय हैं। किताब के अनुसार मौजूदा दर पर विश्व के तेल भण्डार केवल 47 वर्ष चलेंगे, और भारत तेल का आयात करता है। इसलिए 50 वर्ष बाद तेल बहुत कम या बहुत महँगा हो सकता है; हमें ऊर्जा सोच-समझकर इस्तेमाल करनी होगी। (आधार: पृष्ठ 15)
प्रश्न 9 — धारणीयता विकास के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण (पृष्ठ 14, 15)
- हम चाहते हैं कि विकास का स्तर बढ़े, या कम से कम भावी पीढ़ी के लिए बना रहे।
- वैज्ञानिकों की चेतावनी: विकास का मौजूदा प्रकार और स्तर धारणीय नहीं है।
- उदाहरण: भूमिगत जल (नवीकरणीय, फिर भी अति-उपयोग) और कच्चा तेल (गैर नवीकरणीय, 47 वर्ष)।
जाँचते समय: भावी पीढ़ी की बात और कम से कम एक किताब का उदाहरण।
नमूना उत्तर — विकास तभी सार्थक है जब वह टिके। आज साधनों का जिस तरह इस्तेमाल हो रहा है, वैसा चलता रहा तो आने वाली पीढ़ी के लिए वे नहीं बचेंगे। 300 ज़िलों में 20 साल में भूमिगत जल का स्तर 4 मीटर से ज़्यादा गिरा है, और विश्व के कच्चे तेल के भण्डार मौजूदा दर पर 47 वर्ष में ख़त्म हो जाएँगे। इसलिए विकास ऐसा हो जो आज की ज़रूरत पूरी करे और भावी पीढ़ी के लिए भी साधन छोड़े। (आधार: पृष्ठ 14, 15)
प्रश्न 10 — ज़रूरत और लालच वाला कथन (पृष्ठ 14, 15)
- ज़रूरत पूरी हो सकती है, लालच नहीं: साधन सीमित हैं।
- लालच से अति-उपयोग होता है, जैसे भूमिगत जल का।
- गैर नवीकरणीय साधन, जैसे कच्चा तेल, एक बार ख़त्म होकर लौटते नहीं।
- इसलिए विकास की चर्चा में धारणीयता का सवाल उठता है।
जाँचते समय: कथन को धारणीयता से जोड़ा गया हो। किताब इस कथन को किसी के नाम से नहीं छापती; बच्चे भी नाम न जोड़ें।
नमूना उत्तर — यह कथन बताता है कि धरती के साधन सबकी ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं, पर किसी एक का लालच भी असीम है। जब कुछ लोग ज़रूरत से कहीं ज़्यादा साधन निकालते हैं, तो अति-उपयोग होता है: भूमिगत जल का स्तर गिरता है और कच्चे तेल जैसे गैर नवीकरणीय साधन ख़त्म होने लगते हैं। इसलिए विकास की चर्चा में यह देखना ज़रूरी है कि साधन सबके और भावी पीढ़ी के लिए भी बचें। (आधार: पृष्ठ 14, 15)
प्रश्न 11 — अपने आसपास पर्यावरण में गिरावट के उदाहरण (पृष्ठ 7, 14)
किताब के अपने उदाहरण: भूमिगत जल का गिरता स्तर (पृष्ठ 14) और आइवरी कोस्ट में समुद्र और खुले कूड़े घर में डाला गया ज़हरीला कचरा (पृष्ठ 7)। बाक़ी सूची बच्चे अपने आसपास से बनाएँ।
जाँचते समय: उदाहरण बच्चे के अपने इलाक़े के हों, किताब से नक़ल नहीं।
नमूना उत्तर (हमारी ओर से) — हमारे इलाक़े में कुओं और हैंडपंपों का पानी पहले से गहरा चला गया है; गाँव के तालाब में कचरा और प्लास्टिक भरा रहता है; खेतों में फ़सल के बाद पराली जलाने से धुआँ फैलता है; पेड़ कटने से छाया कम हुई है। (बच्चा अपने इलाक़े की बातें लिखे।)
प्रश्न 12 — तालिका 1.6: हर मद में सबसे ऊपर और सबसे नीचे (पृष्ठ 13)
| मद | सबसे ऊपर | सबसे नीचे |
|---|---|---|
| प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय | श्रीलंका (12,616) | नेपाल (4,726) |
| जन्म के समय संभावित आयु | श्रीलंका (77.5) | म्यांमार (66.9) |
| स्कूली पढ़ाई के औसत वर्ष | श्रीलंका (10.8) | पाकिस्तान (4.3) |
| मानव विकास सूचकांक क्रमांक | श्रीलंका (89) | पाकिस्तान (168) |
जाँचते समय: क्रमांक वाले कॉलम में सबसे छोटा अंक सबसे ऊपर है; जो बच्चा पाकिस्तान (168) को “सबसे ऊपर” लिखे, उसने उलटा पढ़ा है।
प्रश्न 13 — वयस्कों में कम बी.एम.आई., 2019–21 (पृष्ठ 17)
(क) केरल में सामान्य से कम बी.एम.आई. वाले पुरुष 8.5 प्रतिशत और महिलाएँ 10 प्रतिशत हैं; मध्य प्रदेश में दोनों 28 प्रतिशत। यानी केरल के लोगों का पोषण स्तर मध्य प्रदेश से कहीं बेहतर है, और सभी राज्यों के औसत (20 और 23) से भी।
(ख) सभी राज्यों में लगभग 20 प्रतिशत पुरुष और 23 प्रतिशत महिलाएँ, यानी लगभग हर पाँच में से एक व्यक्ति, अल्पपोषित है। खाद्य पर्याप्त होने पर भी ऐसा क्यों, इसके लिए किताब से जुड़े कारण:
- अनाज देश में है, पर हर परिवार की जेब में उसे ख़रीदने लायक़ आय नहीं (पृष्ठ 11 का तर्क)।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली हर राज्य में ठीक नहीं चलती; जहाँ चलती है, वहाँ पोषण बेहतर होने की संभावना है (पृष्ठ 12)।
- स्वास्थ्य और शिक्षा की मौलिक सुविधाएँ हर जगह पर्याप्त नहीं; केरल में हैं, इसीलिए वहाँ आँकड़े बेहतर हैं (पृष्ठ 12)।
जाँचते समय: (क) में दोनों राज्यों के आँकड़े; (ख) में “हर पाँच में से एक” को 20 और 23 प्रतिशत से जोड़ना, और कम से कम दो कारण।
नमूना उत्तर — (ख) देश में खाद्य पर्याप्त होने पर भी लगभग हर पाँच में से एक व्यक्ति अल्पपोषित है, क्योंकि अनाज होना और हर परिवार तक पहुँचना अलग बातें हैं। गरीब परिवारों के पास पर्याप्त भोजन ख़रीदने लायक़ आय नहीं होती; सार्वजनिक वितरण प्रणाली हर राज्य में ठीक से काम नहीं करती; और कई जगह स्वास्थ्य और शिक्षा की मौलिक सुविधाएँ कम हैं। केरल, जहाँ ये सुविधाएँ अच्छी हैं, में कम बी.एम.आई. वाले लोग तीनों राज्यों में सबसे कम हैं। (आधार: पृष्ठ 11, 12, 17)
कक्षा में
बच्चे कहाँ भटकते हैं — आठ आम भूलें
1. “विकास का मतलब सिर्फ़ ज़्यादा आय।” लोग आय के साथ बराबरी का व्यवहार, स्वतंत्रता, सुरक्षा और आदर भी चाहते हैं; विकास के लक्ष्य मिले-जुले हैं (पृष्ठ 5–6)।
2. “सबके लिए विकास एक ही चीज़ है।” लक्ष्य भिन्न हो सकते हैं, और एक का विकास दूसरे के लिए विनाशकारी भी हो सकता है (पृष्ठ 4–5)।
3. “भारत निम्न आय वाला देश है।” किताब के अनुसार भारत मध्य आय वर्ग में है; 2024 में प्रतिव्यक्ति आय लगभग US $11,000 (पृष्ठ 8)।
4. “औसत आय बराबर, तो दोनों देश बराबर विकसित।” औसत से बँटवारे का पता नहीं चलता; तालिका 1.2 में औसत बराबर है, पर देश ख में चार गरीब और एक बहुत अमीर (पृष्ठ 9)।
5. “हरियाणा की आय ज़्यादा, इसलिए हर बात में वही आगे।” शिशु मृत्यु दर, साक्षरता और स्कूल-उपस्थिति, तीनों में केरल आगे है (पृष्ठ 10–11)।
6. “प्रतिव्यक्ति आय बेकार मापदंड है।” उपयोगी है, पर अधूरा; इसे दूसरे मापदंडों के साथ देखिए (पृष्ठ 9, 13)।
7. “क्रमांक जितना बड़ा, उतना अच्छा”, और “बंगलादेश भारत से बेहतर।” क्रमांक जितना छोटा, स्थिति उतनी अच्छी: श्रीलंका 89, भारत 130। बंगलादेश भी 130 है, यानी बराबर (पृष्ठ 13)।
8. “भूमिगत जल गैर नवीकरणीय है।” यह नवीकरणीय है; फिर भी बरसात की भरपाई से ज़्यादा निकालें, तो अति-उपयोग होता है (पृष्ठ 15)।
किताब की पंक्तियाँ जो उत्तर में काम आती हैं
ये पंक्तियाँ रटवाने के लिए नहीं हैं। पहले बात समझाइए, फिर उत्तर में यह पंक्ति लिखवाइए; किताब के अपने शब्द उत्तर को सधा हुआ बनाते हैं।
| पंक्ति | पृष्ठ | कहाँ काम आती है |
|---|---|---|
| “एक के लिए जो विकास है वह दूसरे के लिए विकास न हो। यहाँ तक कि वह दूसरे के लिए विनाशकारी भी हो सकता है।” | 5 | विकास के परस्पर विरोधी लक्ष्य; बाँध और आइवरी कोस्ट |
| “क्योंकि जीने के लिए केवल भौतिक वस्तुएँ ही पर्याप्त नहीं होती।” | 5 | आय से आगे के लक्ष्य |
| “जिसे मापा नहीं जा सकता, वह महत्त्व नहीं रखता।” (किताब कहती है कि यह निष्कर्ष ग़लत होगा) | 5 | दोस्ती, आदर जैसी चीज़ें |
| “राष्ट्रीय विकास का अभिप्राय इन सब प्रश्नों पर विचार करना है।” | 6 | राष्ट्रीय विकास क्या है |
| “इसलिए यद्यपि औसत आय तुलना के लिए उपयोगी है, लेकिन इससे यह पता नहीं चलता कि यह आय लोगों में किस प्रकार वितरित है।” | 9 | प्रश्न 4, 6, 7 |
| “वास्तव में जीवन में बहुत सी महत्त्वपूर्ण चीज़ों के लिए सबसे अच्छा और सस्ता तरीका इन वस्तुओं और सेवाओं को सामूहिक रूप से उपलब्ध कराना है।” | 11 | सार्वजनिक सुविधाएँ; प्रश्न 13 (ख) |
| “केरल में शिशु मृत्यु दर कम है क्योंकि यहाँ स्वास्थ्य और शिक्षा की मौलिक सुविधाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।” | 12 | प्रश्न 7, 13 |
| “लोगों का स्वास्थ्य, उनका कल्याण सबसे अधिक ज़रूरी है।” | 14 | मानव विकास रिपोर्ट; प्रश्न 5 |
| “हमने विश्व को अपने पूर्वजों से उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं किया है– हमने इसे अपने बच्चों से उधार लिया है।” | 14 | प्रश्न 9, 10 |
| “हम सब का भविष्य परस्पर जुड़ा हुआ है।” | 16 | पर्यावरण की गिरावट सीमाएँ नहीं मानती; प्रश्न 11 |
बच्चे ये सवाल पूछेंगे — किताब के अपने सवाल
ये सवाल किताब में ही पूछे गए हैं, और कक्षा में भी यही उठते हैं। उत्तर किताब से ही निकालिए।
पृष्ठ 6 — अलग-अलग लोगों की विकास की धारणाएँ अलग क्यों हैं: क्योंकि लोग भिन्न होते हैं, या क्योंकि उनके जीवन की परिस्थितियाँ भिन्न हैं? नमूना उत्तर — दूसरी व्याख्या ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है। भूमिहीन मज़दूर बेहतर मज़दूरी इसलिए चाहता है कि उसकी आय उसी पर टिकी है, और समृद्ध किसान सस्ते मज़दूर इसलिए कि उसकी आय उपज पर टिकी है; लक्ष्य जीवन की परिस्थिति से निकलते हैं (पृष्ठ 4)।
पृष्ठ 6 — क्या लक्ष्यों का भिन्न होना और लक्ष्यों में परस्पर विरोध होना एक ही बात है? नमूना उत्तर — नहीं। भिन्न लक्ष्य साथ-साथ पूरे हो सकते हैं; विरोध तब है जब एक का लक्ष्य पूरा होने से दूसरे का लक्ष्य टूटे, जैसे ज़्यादा बाँध से उद्योगपति को बिजली मिले और आदिवासी बेघर हों (पृष्ठ 5)।
पृष्ठ 6 — आपस में चर्चा कीजिए कि भारत को विकास के लिए क्या करना चाहिए। नमूना उत्तर — उत्तर अलग-अलग आएँगे, और किताब यही चाहती है: देश के विकास पर लोगों की धारणाएँ भिन्न या परस्पर विरोधी हो सकती हैं। चर्चा के बाद पूछिए कि किसकी बात से ज़्यादा लोगों को लाभ होगा; यहीं से राष्ट्रीय विकास के पाँच सवाल शुरू होते हैं (पृष्ठ 6)।
पृष्ठ 7 — चित्र में ऊँची इमारत के नीचे झुग्गियाँ हैं; ऐसे क्षेत्र के विकास के लक्ष्य क्या हों? नमूना उत्तर (हमारी ओर से) — झुग्गियों में रहने वालों के लिए पक्का घर, साफ़ पानी, शौचालय, बच्चों के लिए स्कूल और पास में काम; इमारत वालों के लिए भी साफ़ और सुरक्षित मोहल्ला। दोनों के लक्ष्य अलग हैं, पर कई सुविधाएँ, जैसे सफ़ाई और सुरक्षा, दोनों के काम की हैं।
पृष्ठ 9 — तीन उदाहरण दीजिए जहाँ स्थितियों की तुलना के लिए औसत का प्रयोग होता है। नमूना उत्तर (हमारी ओर से) — कक्षा के औसत अंक; किसी इलाक़े की औसत वर्षा; किसी खेत में प्रति बीघा औसत उपज। किताब का अपना उदाहरण देशों की औसत आय है (पृष्ठ 8)।
पृष्ठ 9 — किसी देश की आय समय के साथ बढ़ रही हो, तो क्या अर्थव्यवस्था के सभी भाग बेहतर हो गए? नमूना उत्तर — ज़रूरी नहीं। औसत आय से बँटवारे का पता नहीं चलता; तालिका 1.2 के देश ख जैसा हो सकता है कि बढ़ी हुई आय कुछ ही लोगों के पास जाए (पृष्ठ 9)।
पृष्ठ 9 — विश्व विकास रिपोर्ट 2012 के अनुसार 10–15 निम्न आय वाले देशों की प्रतिव्यक्ति आय ज्ञात कीजिए। नमूना उत्तर — यह खोज का काम है; अध्याय में ऐसे देशों की सूची नहीं दी गई। बच्चों को इतना याद रहे कि किताब के अनुसार 2024 में लगभग US $2,300 या उससे कम प्रतिव्यक्ति आय वाले देश निम्न आय वाले कहलाते हैं (पृष्ठ 8)।
पृष्ठ 12 — क्या हरियाणा साक्षरता दर आदि में केरल से उतना ही आगे है जितना प्रतिव्यक्ति आय में? नमूना उत्तर — नहीं, उलटा। आय में हरियाणा आगे है (3,25,759 बनाम 2,81,001 रुपये), पर साक्षरता (80 बनाम 96), स्कूल-उपस्थिति (67 बनाम 77) और शिशु मृत्यु दर (28 बनाम 6) में केरल आगे है (पृष्ठ 10)।
पृष्ठ 12 — ऐसे उदाहरण सोचिए जहाँ वस्तुएँ और सेवाएँ सामूहिक स्तर पर देना ज़्यादा सस्ता है। नमूना उत्तर — किताब का उदाहरण पूरे इलाक़े की सामूहिक सुरक्षा है (पृष्ठ 11)। दूसरे उदाहरण (हमारी ओर से): गाँव का स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, गली की बत्ती, पीने के पानी की पाइपलाइन, पक्की सड़क।
पृष्ठ 12 — क्या अच्छी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएँ केवल सरकार के व्यय पर निर्भर हैं? नमूना उत्तर — केवल व्यय पर नहीं। किताब बताती है कि बच्चे इसलिए पढ़ पाते हैं कि बहुत से बच्चे पढ़ना चाहते हैं और बहुत से लोग मानते हैं कि सरकार को स्कूल खोलने चाहिए (पृष्ठ 11)। यानी लोगों की माँग और भागीदारी भी मायने रखती है; हमारी ओर से, सुविधाएँ ठीक चलें, शिक्षक और डॉक्टर मौजूद हों, यह भी ज़रूरी है।
पृष्ठ 12 — तमिलनाडु में 90 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 35 प्रतिशत ग्रामीण लोग राशन की दुकान का प्रयोग करते हैं; कहाँ के लोगों का जीवन बेहतर होगा? नमूना उत्तर — तमिलनाडु के। किताब कहती है कि जिन राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली ठीक काम करती है, वहाँ लोगों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर बेहतर होने की संभावना है (पृष्ठ 12); 90 प्रतिशत लोगों तक पहुँच बताती है कि वहाँ यह प्रणाली ज़्यादा लोगों के काम आ रही है।
पृष्ठ 14 — क्या मानव विकास को मापने के कुछ और पहलुओं पर विचार होना चाहिए? नमूना उत्तर (हमारी ओर से) — हाँ, जैसे स्त्री-पुरुष बराबरी, साफ़ पानी और शौचालय, साफ़ हवा, और रोज़गार की सुरक्षा। किताब ख़ुद बताती है कि मानव विकास रिपोर्ट में बहुत से नए घटक जोड़े गए हैं (पृष्ठ 14)।
पृष्ठ 14 — आप क्यों सोचते हैं कि भूमिगत जल का अति-उपयोग हो रहा है? और क्या बिना अति-उपयोग के विकास हो सकता है? नमूना उत्तर — क्योंकि हम बरसात की भरपाई से ज़्यादा पानी निकाल रहे हैं; 300 ज़िलों में 20 साल में स्तर 4 मीटर से ज़्यादा गिरा है (पृष्ठ 14–15)। दूसरे सवाल पर (हमारी ओर से): हो सकता है, अगर पानी उतना ही निकाला जाए जितना बरसात लौटाती है, जैसे वर्षा-जल को रोककर, कम पानी वाली फ़सलें और टपक सिंचाई अपनाकर।
पृष्ठ 15 — क्या किसी देश की विकास प्रक्रिया के लिए कच्चा तेल अनिवार्य है? और आयात पर निर्भर भारत के लिए आगे कौन-सी समस्याएँ होंगी? नमूना उत्तर — आज गाड़ियाँ, कारख़ाने और खेती की मशीनें बड़े पैमाने पर तेल से चलती हैं, इसलिए वह ज़रूरी बना हुआ है; पर वह गैर नवीकरणीय है और विश्व के भण्डार मौजूदा दर पर 47 वर्ष चलेंगे (पृष्ठ 15)। भारत के पास पर्याप्त भण्डार नहीं, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ें तो हर किसी पर भार पड़ेगा (पृष्ठ 15)। हमारी ओर से: इसीलिए दूसरे ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना पड़ेगा।
सावधानी
- बी.एम.आई. वाला कार्यकलाप (पृष्ठ 13)। किताब कहती है कि भोजन और व्यायाम की आदतों पर चर्चा किसी को लज्जित किए बिना हो। हर बच्चा अपना बी.एम.आई. अपनी कॉपी में निकाले; न कोई पढ़कर सुनाए, न बोर्ड पर लिखा जाए, न किसी के शरीर पर टिप्पणी हो। किताब के 15 वर्ष 6 माह और बी.एम.आई. 28 वाले उदाहरण को “न्यूनभारित” न पढ़ाइए; 28 सामान्य से ज़्यादा है।
- गरीबी और घर की हालत। तालिका 1.1 भरते समय या देश ख के पाँचवें नागरिक वाली बात पर किसी बच्चे के घर की आय या हालत का उदाहरण न लीजिए; कोई काल्पनिक परिवार लेकर बात कीजिए।
- राज्यों की तुलना। केरल, हरियाणा और बिहार के आँकड़े राज्यों की सुविधाओं की बात हैं, वहाँ के लोगों की नहीं। बिहार से आए किसी बच्चे को निशाना न बनने दीजिए।
- विवाद वाले कार्यकलाप (पृष्ठ 7) और परियोजना (पृष्ठ 17)। तर्क लिखवाइए, लोग नहीं; किसी नेता, दल या समुदाय पर टिप्पणी न हो।
समय कम हो तो — छह बातें जो हर बच्चे तक पहुँचें
- अलग-अलग लोगों के विकास के लक्ष्य भिन्न हो सकते हैं, और एक का विकास दूसरे के लिए विनाशकारी भी हो सकता है (पृष्ठ 5)।
- लोग आय के साथ बराबरी, आज़ादी, सुरक्षा और आदर भी चाहते हैं (पृष्ठ 5–6)।
- देशों की तुलना औसत (प्रतिव्यक्ति) आय से होती है, पर औसत से आय का बँटवारा नहीं दिखता (पृष्ठ 8–9)।
- हरियाणा की आय ज़्यादा है, पर शिशु मृत्यु दर, साक्षरता और स्कूल-उपस्थिति में केरल आगे है, क्योंकि वहाँ स्वास्थ्य और शिक्षा की मौलिक सुविधाएँ हैं (पृष्ठ 10–12)।
- मानव विकास रिपोर्ट आय, स्वास्थ्य और शिक्षा, तीनों से तुलना करती है; श्रीलंका 89, भारत 130 (पृष्ठ 13)।
- विकास धारणीय होना चाहिए: भूमिगत जल और कच्चा तेल जैसे साधन भावी पीढ़ी के लिए भी बचें (पृष्ठ 14–15)।
अभ्यास के लिए: प्रश्न बैंक और फ़्लैशकार्ड।