कक्षा 10 · अर्थशास्त्र · अध्याय 1
विकास
हम सब चाहते हैं कि जीवन बेहतर हो। पर "बेहतर" का मतलब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं होता। सात पड़ावों में देखिए: अलग-अलग लोग विकास से क्या चाहते हैं, देशों और राज्यों की तुलना कैसे होती है, आय से क्या पता चलता है और क्या छूट जाता है, और विकास आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसे बना रहे।

किताब शुरू में ही कुछ सवाल रखती है: कोई देश कैसा होना चाहिए? क्या सबका जीवन बेहतर हो सकता है? लोग मिल-जुलकर कैसे रह सकते हैं? क्या और ज़्यादा समानता हो सकती है? विकास इन सवालों पर सोचने और इन लक्ष्यों तक पहुँचने के उपायों से जुड़ा है। और इन आशाओं को हम लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया से ही असल जीवन में पा सकते हैं।
इस्तेमाल कैसे करें
- हर पड़ाव एक सवाल से शुरू होता है। पहले उस पर खुद सोचिए, फिर आगे पढ़िए।
- किताब के हर प्रश्न और कार्यकलाप के नीचे "जवाब देखिए" दबाइए। जहाँ आपकी अपनी राय माँगी गई है, वहाँ एक संभावित जवाब है; आपका जवाब अलग भी हो सकता है।
- तालिकाओं वाले खानों में बटन दबाकर आँकड़ों को अलग-अलग ढंग से देखिए।
- हर पड़ाव के अंत में छोटी जाँच है। सब पूरी होने पर ऊपर की पट्टी भर जाती है।
सात पड़ाव, सात सवाल
- विकास क्या वादा करता है · क्या विकास का मतलब सबके लिए एक ही है?
- राष्ट्रीय विकास · जब लोगों के लक्ष्य अलग हों, तो देश का विकास कैसे तय हो?
- तुलना कैसे करें: औसत आय · अगर विकास के मतलब अलग-अलग हैं, तो किसी देश को "विकसित" कैसे कहें?
- आय और दूसरे मापदण्ड · क्या ज़्यादा आय वाला राज्य हर बात में आगे होता है?
- सार्वजनिक सुविधाएँ · जेब में पैसा हो, तो क्या सब कुछ खरीदा जा सकता है?
- मानव विकास रिपोर्ट · आय के साथ और क्या गिनें, ताकि विकास की तस्वीर पूरी हो?
- विकास की धारणीयता · आज का विकास क्या आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बचा रहेगा?
1विकास क्या वादा करता है
इस पड़ाव का सवालपृ. 4–6
क्या विकास का मतलब सबके लिए एक ही है?
पिछली बात से कड़ी अध्याय की शुरुआत में सवाल था कि क्या सबका जीवन बेहतर हो सकता है। अब देखिए, अलग-अलग लोग "बेहतर" किसे कहते हैं।
क्या इन सभी लोगों की विकास या प्रगति के बारे में एक जैसा विचार है?
जवाब देखिए
- संभवतः नहीं। हर व्यक्ति अलग चीज़ें पाना चाहता है: वे चीज़ें जो उसके लिए सबसे ज़रूरी हैं और उसकी आकांक्षाएँ पूरी करें।
- कई बार दो लोग या दो गुट ऐसी चीज़ें चाहते हैं जिनमें आपस में टकराव हो।
जब लक्ष्य टकराते हैं
बहन और भाई
एक लड़की चाहती है कि उसे भाई जितनी आज़ादी और अवसर मिलें, और भाई भी घर के कामकाज में हाथ बँटाए। हो सकता है भाई को यह पसंद न हो।
बड़ा बाँध
ज़्यादा बिजली के लिए उद्योगपति ज़्यादा बाँध चाहते हैं। पर बाँध से ज़मीन डूब सकती है और जो लोग बेघर होंगे, जैसे आदिवासी, उनका जीवन उजड़ सकता है। वे इसका विरोध कर सकते हैं और खेतों की सिंचाई के लिए छोटे चैक बाँध या तालाब पसंद कर सकते हैं।
किताब में यहीं नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बाँध की ऊँचाई बढ़ाने के विरुद्ध हुए प्रदर्शन की तस्वीर है।
किताब की दो साफ़ बातें
- अलग-अलग लोगों के विकास के लक्ष्य भिन्न हो सकते हैं।
- एक के लिए जो विकास है, वह दूसरे के लिए विकास न हो। वह दूसरे के लिए विनाशकारी भी हो सकता है।
आय और दूसरे लक्ष्य
तालिका 1.1 में एक बात सबमें मिलती है: लोग नियमित काम, बेहतर मज़दूरी और अपनी उपज या सामान की अच्छी कीमत चाहते हैं। यानी ज़्यादा आय।
पर आय के साथ लोग बराबरी का व्यवहार, आज़ादी, सुरक्षा और दूसरों से आदर भी चाहते हैं। भेदभाव से वे अप्रसन्न होते हैं। कई बार ये चीज़ें ज़्यादा आय और ज़्यादा उपभोग से भी ज़रूरी हो जाती हैं, क्योंकि जीने के लिए केवल भौतिक चीज़ें काफ़ी नहीं होतीं।
अपने दोस्तों के बारे में सोचिए। दोस्ती को आसानी से मापा नहीं जा सकता, फिर भी जीवन में उसका बड़ा महत्त्व है। किताब कहती है कि यह मान लेना गलत होगा कि जिसे मापा नहीं जा सकता, वह महत्त्व नहीं रखता।
दो नौकरियाँ: आप कौन-सी चुनेंगे?
पहली नौकरी
वेतन कम, पर काम नियमित। इससे सुरक्षा की भावना बढ़ती है।
दूसरी नौकरी
वेतन ज़्यादा, पर काम की सुरक्षा नहीं, और शायद परिवार के लिए समय भी न मिले। इससे सुरक्षा और आज़ादी की भावना घटती है।
दूर कहीं नौकरी मिले, तो हम आय के अलावा और बातें भी तौलते हैं: परिवार के लिए क्या सुविधाएँ होंगी, काम का माहौल कैसा है, सीखने के अवसर हैं या नहीं। विकास के लिए भी लोग ऐसे ही मिले-जुले लक्ष्य देखते हैं।
महिलाएँ वेतन वाला काम करती हैं, तो घर और समाज में उनका आदर बढ़ता है। और जहाँ महिलाओं का आदर है, वहाँ घर के काम में ज़्यादा हाथ बँटाया जाता है और बाहर काम करने वाली महिलाओं को ज़्यादा अपनाया जाता है। माहौल सुरक्षित हो, तो ज़्यादा महिलाएँ तरह-तरह की नौकरियाँ या व्यापार कर सकती हैं।
आओ–इन पर विचार करें
1अलग-अलग लोगों की विकास की धारणाएँ अलग क्यों हैं? नीचे दी गई व्याख्याओं में कौन सी अधिक महत्त्वपूर्ण है और क्यों?
- (क) क्योंकि लोग भिन्न होते हैं।
- (ख) क्योंकि लोगों के जीवन की परिस्थितियाँ भिन्न हैं।
एक संभावित जवाब देखिए
- दोनों बातें सही हैं, पर (ख) ज़्यादा वज़न रखती है।
- तालिका 1.1 देखिए: भूमिहीन मज़दूर काम के ज़्यादा दिन और बेहतर मज़दूरी चाहता है, जबकि पंजाब का समृद्ध किसान उपज के ऊँचे समर्थन मूल्य और सस्ते मज़दूर। दोनों की इच्छाएँ उनकी परिस्थिति से बनी हैं।
- किताब के शब्दों में, हर व्यक्ति वही चीज़ें चाहता है जो उसके लिए सबसे ज़रूरी हैं, यानी जो उसकी आकांक्षाएँ और इच्छाएँ पूरी करें।
2क्या निम्न दो कथनों का एक अर्थ है, कारण सहित उत्तर दीजिए।
- (क) लोगों के विकास के लक्ष्य भिन्न होते हैं।
- (ख) लोगों के विकास के लक्ष्यों में परस्पर विरोध होता है।
जवाब देखिए
- नहीं, दोनों का अर्थ एक नहीं है।
- "भिन्न" का मतलब है कि लोग अलग-अलग चीज़ें चाहते हैं, जो साथ-साथ पूरी भी हो सकती हैं।
- "परस्पर विरोध" का मतलब है कि एक का लक्ष्य पूरा हो, तो दूसरे का बिगड़े। तालिका 1.1 में ही देखिए: समृद्ध किसान सस्ते मज़दूर चाहता है, भूमिहीन मज़दूर बेहतर मज़दूरी। और बाँध उद्योगपतियों के लिए बिजली है, पर आदिवासियों के लिए डूबी ज़मीन।
3कुछ ऐसे उदाहरण दीजिए, जहाँ आय के अतिरिक्त अन्य कारक हमारे जीवन के महत्त्वपूर्ण पहलू हैं।
जवाब देखिए
- बराबरी का व्यवहार और भेदभाव से छुटकारा।
- आज़ादी: अपने फ़ैसले खुद करना, जैसा तालिका 1.1 की लड़की चाहती है।
- नौकरी में सुरक्षा, और परिवार के लिए समय।
- दूसरों से आदर, और दोस्ती।
- प्रदूषण-मुक्त वातावरण, बिना मिलावट की दवाएँ और संक्रामक बीमारियों से बचाव, जो अकेले पैसे से नहीं खरीदे जा सकते।
4ऊपर दिये गए खण्ड के कुछ महत्त्वपूर्ण विचारों को अपनी भाषा में समझाइए।
एक संभावित जवाब देखिए
- हर व्यक्ति विकास से वही चाहता है जो उसकी अपनी ज़िंदगी में सबसे ज़रूरी है।
- दो लोगों के लक्ष्य टकरा सकते हैं; एक का विकास दूसरे के लिए विनाश भी बन सकता है।
- ज़्यादा आय सबका साझा लक्ष्य है, पर आदर, आज़ादी, सुरक्षा और बराबरी भी उतने ही ज़रूरी हैं।
- जो मापा नहीं जा सकता, वह भी महत्त्व रखता है।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1तालिका 1.1 में भूमिहीन ग्रामीण मज़दूर विकास से क्या चाहता है?
मज़दूर काम के अधिक दिन, बेहतर मज़दूरी, बच्चों के लिए अच्छा स्कूल और भेदभाव से छुटकारा चाहता है। ऊँचे समर्थन मूल्य पंजाब के समृद्ध किसान चाहते हैं।
2उद्योगपति बिजली के लिए ज़्यादा बाँध चाहते हैं। जिनकी ज़मीन डूब सकती है, वे आदिवासी क्या पसंद कर सकते हैं?
वे बड़े बाँध का विरोध कर सकते हैं और छोटे चैक बाँध या तालाब पसंद कर सकते हैं। एक का विकास दूसरे के लिए विनाश बन सकता है।
3किताब किस निष्कर्ष को गलत बताती है?
दोस्ती जैसी बहुत सी चीज़ें आसानी से मापी नहीं जातीं, फिर भी जीवन में उनका बड़ा महत्त्व है।
2राष्ट्रीय विकास
इस पड़ाव का सवालपृ. 6–7
जब लोगों के लक्ष्य अलग हों, तो देश का विकास कैसे तय हो?
पिछली बात से कड़ी पड़ाव 1 में देखा कि लोगों के लक्ष्य अलग होते हैं और टकरा भी सकते हैं। अब यही बात पूरे देश पर।
जिनके लक्ष्य अलग हैं, उनकी नज़र में देश का विकास भी अलग होगा। किताब कहती है कि देश के विकास के बारे में अलग-अलग लोगों की धारणाएँ भिन्न या परस्पर विरोधी हो सकती हैं।
तो फ़ैसला कैसे हो? किताब कुछ सवाल सामने रखती है: क्या सब विचारों को बराबर महत्त्व दिया जा सकता है? सबके लिए न्यायपूर्ण और सही राह क्या होगी? क्या काम करने का कोई बेहतर तरीका है? इससे बहुत लोगों को लाभ होगा या कुछ को ही? राष्ट्रीय विकास का मतलब इन सब सवालों पर सोचना है।
आपस में चर्चा कीजिए
भारत को विकास के लिए क्या करना चाहिए?
एक संभावित जवाब देखिए
- इसका कोई एक सही जवाब नहीं है। कक्षा में अलग-अलग जवाब आएँगे, और यही इस सवाल का मकसद है।
- जवाब परखने के लिए किताब के सवाल अपनाइए: इससे किसे लाभ होगा, बहुतों को या कुछ को? क्या यह सबके लिए न्यायपूर्ण है?
- एक जवाब ऐसा हो सकता है: सबके लिए नियमित काम और बेहतर आय; हर बच्चे के लिए स्कूल, खासकर लड़कियों के लिए; अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ; ठीक से चलने वाली राशन व्यवस्था; और पानी व तेल जैसे संसाधनों का सोच-समझकर इस्तेमाल।
आओ–इन पर विचार करें: इन स्थितियों पर चर्चा कीजिए
किताब के चित्र में झुग्गियों के ढेर के बीच से एक ऊँची सफ़ेद इमारत उठी है।
1इस प्रकार के क्षेत्र के विकासात्मक लक्ष्य क्या होने चाहिए?
एक संभावित जवाब देखिए
- ऐसे इलाके में ऊँची इमारत और झुग्गियाँ साथ-साथ हैं, यानी कुछ लोगों का विकास हुआ है, बहुतों का नहीं।
- लक्ष्य ऐसे हों जिनसे झुग्गियों में रहने वालों को भी लाभ हो: नियमित काम और बेहतर मज़दूरी, बच्चों के लिए स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएँ और बीमारियों से बचाव, सुरक्षा और बराबरी का व्यवहार।
- किताब का सवाल याद रखिए: इस विकास से बहुत लोगों को लाभ होगा या कुछ को ही?
अख़बार की एक रिपोर्ट
एक जहाज़ ने 500 टन तरल ज़हरीले अवशेष एक शहर के खुले कूड़ाघर और आसपास के समुद्र में डाल दिए। यह अफ़्रीका के आइवरी कोस्ट के अबिदजान शहर में हुआ।
इनके धुएँ से लोगों ने जी मितलाने, चमड़ी पर ददोरे पड़ने, बेहोशी और दस्त की शिकायतें कीं। एक महीने बाद 7 लोग मारे जा चुके थे, 20 अस्पताल में भरती थे और विषाक्तता के कारण 26,000 लोगों का इलाज किया गया।
पेट्रोल और धातुओं से जुड़ी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने आइवरी कोस्ट की एक स्थानीय कंपनी को अपने जहाज़ से ये ज़हरीले पदार्थ फेंकने का ठेका दिया था।
2 (क)किन लोगों को लाभ हुआ और किन को नहीं?
जवाब देखिए
- लाभ: बहुराष्ट्रीय कंपनी को, जिसके जहाज़ से ज़हरीला कचरा हट गया; और उस स्थानीय कंपनी को, जिसे फेंकने का ठेका मिला।
- नुकसान: अबिदजान के लोगों को। 7 लोगों की जान गई, 20 अस्पताल पहुँचे और 26,000 लोगों का इलाज करना पड़ा। शहर का कूड़ाघर और आसपास का समुद्र भी ज़हरीला हुआ।
2 (ख)इस देश के विकास के लक्ष्य क्या होने चाहिए?
एक संभावित जवाब देखिए
- लोगों की सेहत और जान की हिफ़ाज़त सबसे पहले।
- साफ़ और प्रदूषण-मुक्त वातावरण: ज़हरीला कचरा न शहर में फेंका जाए, न समुद्र में।
- ऐसा विकास जिसकी कीमत कोई और न चुकाए। अध्याय के आख़िर में किताब यह भी कहती है कि पर्यावरण की गिरावट देशों की सीमाएँ नहीं देखती।
3आपके गाँव या शहर या स्थानीय इलाके के विकास के लक्ष्य क्या होने चाहिए?
एक संभावित जवाब देखिए
- यह आपके इलाके पर निर्भर है। पहले देखिए कि वहाँ किन लोगों को किस चीज़ की कमी है।
- तालिका 1.1 की तरह सोचिए: मज़दूर, किसान, महिलाएँ, बेरोज़गार युवा, सब क्या चाहते हैं?
- फिर उन चीज़ों को देखिए जो मिलकर ही मिलती हैं: स्कूल, स्वास्थ्य सुविधा, सुरक्षा, साफ़ वातावरण।
- और पूछिए: किस लक्ष्य से बहुत लोगों को लाभ होगा?
कार्यकलाप 1
जब विकास की धारणा में ही फ़र्क और टकराव हो सकता है, तो विकास के तरीकों में भी फ़र्क होगा। अगर आप ऐसे किसी विवाद से परिचित हैं, तो अलग-अलग लोगों के तर्क जानिए: लोगों से बात करके, या अख़बार और टेलीविज़न से।
यह कार्यकलाप कैसे करें?
जवाब देखिए
- अपने आसपास का कोई ऐसा विवाद चुनिए जिसमें लोग अलग-अलग बातें कह रहे हों।
- हर पक्ष के कम से कम एक व्यक्ति से पूछिए: आप क्या चाहते हैं, और क्यों?
- चार खानों की एक तालिका बनाइए: कौन, क्या चाहता है, उसका तर्क, उसे लाभ या नुकसान।
- किताब का बाँध वाला उदाहरण इसी तरह भरता है: उद्योगपति बिजली के लिए बड़ा बाँध चाहते हैं; आदिवासी अपनी ज़मीन बचाना चाहते हैं और सिंचाई के लिए छोटे चैक बाँध या तालाब पसंद कर सकते हैं।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1अबिदजान में ज़हरीले अवशेष किसके ठेके पर फेंके गए?
पेट्रोल और धातुओं से जुड़ी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने आइवरी कोस्ट की एक स्थानीय कंपनी को अपने जहाज़ से ज़हरीले पदार्थ फेंकने का ठेका दिया था। कीमत वहाँ के लोगों ने चुकाई।
2राष्ट्रीय विकास पर सोचते समय किताब कौन-सा सवाल पूछने को कहती है?
राष्ट्रीय विकास का मतलब है सोचना कि सबके लिए न्यायपूर्ण और सही राह क्या है, और किसी विचार से बहुत लोगों को लाभ होगा या कुछ को ही।
3लोगों के विकास के लक्ष्य अलग हैं, तो देश के विकास के बारे में उनकी धारणाएँ कैसी होंगी?
किताब साफ़ कहती है कि देश के विकास के बारे में अलग-अलग लोगों की धारणाएँ भिन्न या परस्पर विरोधी हो सकती हैं।
3तुलना कैसे करें: औसत आय
इस पड़ाव का सवालपृ. 8–9
अगर विकास के मतलब अलग-अलग हैं, तो किसी देश को "विकसित" कैसे कहें?
पिछली बात से कड़ी देशों को परखने के लिए कोई एक पैमाना चुनना पड़ता है। किताब सबसे पहले आय को देखती है।
कक्षा के विद्यार्थियों की तुलना कैसे करेंगे? कोई सबसे लंबा है, कोई सबसे स्वस्थ, कोई सबसे पढ़ाकू। खेल की टीम, वाद-विवाद की टीम, संगीत की टीम या पिकनिक की टीम, हर एक के चयन का मापदण्ड अलग होगा। मापदण्ड इस पर निर्भर है कि तुलना किस काम के लिए हो रही है।
आम तौर पर हम एक या दो महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ चुनकर तुलना करते हैं। देशों की तुलना में सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता आय मानी जाती है: जिस देश की आय ज़्यादा, वह ज़्यादा विकसित समझा जाता है, क्योंकि ज़्यादा आय से लोग ज़रूरत और पसंद की ज़्यादा चीज़ें पा सकते हैं।
पर कुल आय से तुलना ठीक नहीं होती, क्योंकि देशों की जनसंख्या अलग-अलग है। कुल आय यह नहीं बताती कि एक औसत व्यक्ति कितना कमा सकता है। इसलिए देश की कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देते हैं। इसे औसत आय, या प्रतिव्यक्ति आय, कहते हैं।
प्रतिव्यक्ति आय = देश की कुल आय ÷ देश की कुल जनसंख्या
विश्व बैंक के वर्ग · 2024, प्रतिव्यक्ति आय प्रति वर्ष
- उच्च आय (समृद्ध) देश66,500 अमेरिकी डॉलर या उससे ज़्यादा
- मध्य आय वर्गइन दोनों के बीच। भारत यहाँ है: लगभग 11,000 अमेरिकी डॉलर
- निम्न आय वाले देशलगभग 2,300 अमेरिकी डॉलर या उससे कम
समृद्ध देशों को, मध्य पूर्व के देशों और कुछ दूसरे छोटे देशों को छोड़कर, आम तौर पर विकसित देश कहा जाता है।
औसत आय
औसत आय तुलना के लिए उपयोगी है, पर इससे असमानता का पता नहीं चलता।
तालिका 1.2 में दिए आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों की औसत आय निकालिए।
जवाब देखिए
- देश क: (9,500 + 10,500 + 9,800 + 10,000 + 10,200) ÷ 5 = 50,000 ÷ 5 = 10,000 रुपये
- देश ख: (500 + 500 + 500 + 500 + 48,000) ÷ 5 = 50,000 ÷ 5 = 10,000 रुपये
- दोनों देशों की औसत आय बराबर है: 10,000 रुपये महीना।
क्या आप दोनों देशों में बराबर सुखी होंगे? अगर पक्का हो कि आप देश ख के पाँचवें नागरिक होंगे, तो शायद ख चुनें। पर नंबर लॉटरी से तय हो, तो ज़्यादातर लोग देश क चुनेंगे।
वजह: औसत बराबर होने पर भी देश क में न कोई बहुत अमीर है, न बहुत गरीब, जबकि देश ख में ज़्यादातर लोग गरीब हैं और एक व्यक्ति बहुत अमीर। औसत आय यह नहीं बताती कि आय लोगों में कैसे बँटी है।
किताब का कार्टून यही बात कुर्सियों से कहता है। "गरीब विहीन तथा अमीर विहीन व्यक्तियों का देश" में पाँचों लोग कुर्सियों पर मिल-बाँटकर बैठे हैं: "हमने कुर्सियों को बनाया तथा उनका उपयोग करते हैं"। "गरीब तथा अमीर व्यक्तियों का देश" में एक आदमी कई कुर्सियों पर पसरा है और बाकी चार बची हुई कुर्सियों पर सिमटे हैं: "हमने कुर्सियों को बनाया तथा उसने ले लिया"।
कुर्सियाँ बाँटने के दो ढंग
"हमने कुर्सियों को बनाया तथा उनका उपयोग करते हैं"
"हमने कुर्सियों को बनाया तथा उसने ले लिया"
तालिका 1.2 के दोनों देशों में पाँचों नागरिकों की कुल आय बराबर है, 50,000 रुपये। फ़र्क बँटवारे का है, और ये दोनों चित्र यही बँटवारा दिखाते हैं।
आओ–इन पर विचार करें
1तीन उदाहरण दीजिए, जहाँ स्थितियों की तुलना के लिए औसत का प्रयोग किया जाता है।
एक संभावित जवाब देखिए
- किसी देश या राज्य की प्रतिव्यक्ति आय, जैसे आगे तालिका 1.3 में हरियाणा, केरल और बिहार की।
- कक्षा के विद्यार्थियों के औसत अंक, जिनसे दो कक्षाओं या दो स्कूलों की तुलना होती है।
- किसी जगह की साल भर की औसत वर्षा, जिससे दो इलाकों की तुलना होती है।
2आप क्यों सोचते हैं कि औसत आय विकास को समझने का एक महत्त्वपूर्ण मापदण्ड है? व्याख्या कीजिए।
जवाब देखिए
- ज़्यादा आय का मतलब माना जाता है कि लोग अपनी ज़रूरत और पसंद की ज़्यादा चीज़ें पा सकते हैं।
- देशों की जनसंख्या अलग-अलग है, इसलिए कुल आय से तुलना ठीक नहीं होती। औसत आय बताती है कि एक औसत व्यक्ति कितना कमाता है।
- इसीलिए विश्व बैंक भी देशों को प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर उच्च, मध्य और निम्न आय वर्गों में बाँटता है।
3प्रतिव्यक्ति आय के माप के अतिरिक्त, आय के कौन से अन्य लक्षण हैं जो दो या दो से अधिक देशों की तुलना के लिए महत्त्व रखते हैं?
जवाब देखिए
- आय का बँटवारा: आय लोगों में लगभग बराबर बँटी है, या कुछ के पास बहुत ज़्यादा और बहुतों के पास बहुत कम। तालिका 1.2 के देश क और ख का औसत एक है, बँटवारा बिल्कुल अलग।
- कितने लोगों के पास नियमित काम और भरोसे की आय है।
4मान लीजिए कि रिकॉर्ड ये दिखाते हैं कि किसी देश की आय समय के साथ बढ़ती जा रही है। क्या इससे हम इस निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं कि अर्थव्यवस्था के सभी भाग बेहतर हो गए हैं? अपना उत्तर उदाहरण सहित दीजिए।
जवाब देखिए
- नहीं। आय का बढ़ना यह नहीं बताता कि बढ़ोतरी किसके हिस्से आई।
- उदाहरण: तालिका 1.2 के देश ख में अगर सिर्फ़ पाँचवें नागरिक की आय 48,000 से बढ़कर 53,000 रुपये हो जाए, तो देश की कुल आय 55,000 और औसत 11,000 रुपये हो जाएगा। पर बाकी चार नागरिक अब भी 500 रुपये पर ही रहेंगे।
5विश्व विकास रिपोर्ट 2012 के अनुसार निम्न-आय वाले लगभग 10-15 देशों की प्रतिव्यक्ति आय ज्ञात कीजिए।
जवाब देखिए
- यह खोजकर लिखने का काम है: इस अध्याय में निम्न आय वाले देशों की कोई सूची नहीं दी गई है।
- किताब एक पैमाना देती है: 2024 में जिन देशों की प्रतिव्यक्ति आय लगभग 2,300 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष या उससे कम थी, वे निम्न आय वाले कहलाए।
- विश्व बैंक की विश्व विकास रिपोर्ट में निम्न आय वर्ग के देश देखिए, 10 से 15 देश चुनिए, और हर देश के आगे उसकी प्रतिव्यक्ति आय और रिपोर्ट का वर्ष लिखिए।
- ध्यान दीजिए: सवाल 2012 की रिपोर्ट का नाम लेता है, जबकि अध्याय की सीमा 2024 की है। जिस वर्ष की रिपोर्ट से अंक लें, उसी वर्ष की सीमा से मिलाइए।
6एक अनुच्छेद लिखिए कि भारत को एक विकसित देश बनने के लिए क्या करना या प्राप्त करना चाहिए?
एक संभावित जवाब देखिए
- भारत 2024 में मध्य आय वर्ग में था। विकसित बनने के लिए लोगों की आय बढ़नी चाहिए, पर यह बढ़ोतरी कुछ लोगों तक सीमित न रहे, क्योंकि औसत आय असमानता छिपा लेती है। हर बच्चे, खासकर हर लड़की, के लिए स्कूल हों, और स्वास्थ्य की मौलिक सुविधाएँ इतनी हों कि केरल की तरह शिशु मृत्यु दर कम हो। राशन की व्यवस्था ठीक से चले, ताकि पोषण सुधरे। और विकास धारणीय हो: भूमिगत जल का अति-उपयोग रुके और कच्चे तेल जैसे संसाधन सोच-समझकर खर्च हों, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कुछ बचे।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1देशों की तुलना के लिए कुल आय ठीक माप क्यों नहीं है?
जनसंख्या अलग होने से कुल आय यह नहीं बताती कि औसत व्यक्ति कितना कमाता है। इसलिए कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर प्रतिव्यक्ति आय निकाली जाती है।
2तालिका 1.2 में देश क और देश ख की औसत मासिक आय कितनी है?
दोनों देशों में पाँच नागरिकों की कुल आय 50,000 रुपये है; 50,000 ÷ 5 = 10,000। औसत एक है, पर देश ख में चार लोग 500 रुपये पर हैं।
3विश्व बैंक के अनुसार 2024 में भारत किस वर्ग में आता है?
भारत की प्रतिव्यक्ति आय 2024 में लगभग 11,000 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष थी: निम्न आय की सीमा (लगभग 2,300) से ऊपर और उच्च आय की सीमा (66,500) से नीचे।
4आय और दूसरे मापदण्ड
इस पड़ाव का सवालपृ. 10–12
क्या ज़्यादा आय वाला राज्य हर बात में आगे होता है?
पिछली बात से कड़ी पड़ाव 3 में देखा कि औसत आय तुलना में काम आती है, पर सब कुछ नहीं बताती। अब तीन राज्यों के आँकड़े साथ रखिए।
लोग सिर्फ़ बेहतर आय नहीं, सुरक्षा, आदर, बराबरी और आज़ादी भी चाहते हैं। ठीक वैसे ही, किसी राज्य या देश को देखते समय औसत आय के साथ दूसरी विशेषताएँ भी देखनी पड़ती हैं।
तालिका 1.3 के अंकों को मोटे तौर पर राज्य की प्रतिव्यक्ति आय मान सकते हैं (असल में ये 2023–24 की वर्तमान कीमतों पर प्रति-व्यक्ति निवल राज्य घरेलू उत्पाद हैं)। औसतन हरियाणा में एक व्यक्ति साल में 3,25,759 रुपये कमाता है और बिहार में केवल 60,337 रुपये। केवल आय से नापें, तो तीनों में हरियाणा सबसे विकसित और बिहार सबसे कम विकसित माना जाएगा।
शिशु मृत्यु दर: केरल में 1,000 जीवित पैदा हुए बच्चों में से 6 बच्चे एक साल की उम्र तक पहुँचने से पहले मर जाते हैं; हरियाणा में 28, यानी केरल के तीन गुने से भी कहीं ज़्यादा (28 ÷ 6, लगभग 4.7 गुना)। फिर भी हरियाणा की प्रतिव्यक्ति आय केरल से ज़्यादा है।
सोचिए, अपने माता-पिता के लिए आप कितने प्यारे हैं, और उन माता-पिता पर क्या बीतती होगी जिनका बच्चा पहले जन्मदिन से पहले चला जाए। और यह पुरानी बात नहीं: आज़ादी के 70 साल बाद की है, जब बड़े शहर ऊँची इमारतों और शॉपिंग मॉल से भरे हैं।
स्कूल: बिहार में 15–17 वर्ष के हर 100 बच्चों में से 55 ही माध्यमिक कक्षाओं में जा रहे हैं। अगर आप बिहार के किसी स्कूल में पढ़ते, तो आपकी कक्षा के लगभग 45 प्रतिशत बच्चे गायब होते: जिन्हें स्कूल में होना चाहिए था, वे वहाँ नहीं होते।
किताब में यहाँ "लगभग एक-तिहाई" छपा है, पर तालिका 1.4 का अंक 55 है, यानी लगभग 45 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जा रहे।
तालिका 1.4 के शब्द
- शिशु मृत्यु दर
- किसी वर्ष में पैदा हुए 1,000 जीवित बच्चों में से कितने बच्चे एक वर्ष की उम्र से पहले मर जाते हैं।
- हर 1,000 जीवित जन्म पर · जितनी कम, उतना अच्छा
तालिका 1.4 में
- हरियाणा28
- केरलसबसे अच्छा6
- बिहार27
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी ज़िले में एक साल में 2,000 बच्चे जीवित पैदा हुए, और उनमें से 40 बच्चे अपना पहला जन्मदिन नहीं देख पाए। तब शिशु मृत्यु दर = 40 ÷ 2,000 × 1,000 = 20, यानी हर 1,000 में से 20।
- साक्षरता दर
- 7 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों में साक्षर लोगों का अनुपात।
- प्रतिशत, यानी हर 100 पर · जितनी ज़्यादा, उतना अच्छा
तालिका 1.4 में
- हरियाणा80%
- केरलसबसे अच्छा96%
- बिहार71%
उदाहरण से समझिए
किसी गाँव में 7 साल या उससे बड़े 500 लोग हैं, और उनमें से 400 साक्षर हैं। तब साक्षरता दर = 400 ÷ 500 × 100 = 80%, यानी हरियाणा जितनी। 7 साल से छोटे बच्चे इस गिनती में नहीं आते।
- निवल उपस्थिति अनुपात
- 15–17 वर्ष की उम्र के स्कूल जाने वाले कुल बच्चों का उस आयु-वर्ग के कुल बच्चों में प्रतिशत।
- हर 100 बच्चों पर · जितना ज़्यादा, उतना अच्छा
तालिका 1.4 में
- हरियाणा67
- केरलसबसे अच्छा77
- बिहार55
उदाहरण से समझिए
किसी इलाक़े में 15–17 साल के 200 बच्चे हैं, और उनमें से 110 स्कूल जाते हैं। तब निवल उपस्थिति अनुपात = 110 ÷ 200 × 100 = 55, यानी बिहार जितना। बाकी 90 बच्चे, यानी हर 100 में से 45, स्कूल से बाहर हैं।
- किताब की परिभाषा में यहाँ "14 तथा 15 वर्ष" छपा है, पर तालिका 1.4 के शीर्षक में और अगले पन्ने के पाठ में आयु 15–17 वर्ष है।
आओ–इन पर विचार करें
1तालिका 1.3 और 1.4 के आँकड़ों को देखिए। क्या हरियाणा केरल से साक्षरता दर आदि में उतना ही आगे है जितना कि प्रतिव्यक्ति आय के विषय में?
जवाब देखिए
- नहीं, बल्कि उलटा है। प्रतिव्यक्ति आय में हरियाणा (3,25,759 रुपये) केरल (2,81,001 रुपये) से आगे है।
- पर तालिका 1.4 के तीनों मापदण्डों में केरल आगे है: साक्षरता 96% बनाम 80%, निवल उपस्थिति अनुपात 77 बनाम 67, और शिशु मृत्यु दर 6 बनाम 28 (यहाँ कम होना अच्छा है)।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1तालिका 1.3 के अनुसार 2023-24 में तीनों राज्यों में सबसे ज़्यादा प्रतिव्यक्ति आय किसकी है?
हरियाणा 3,25,759 रुपये, केरल 2,81,001 रुपये, बिहार 60,337 रुपये।
2शिशु मृत्यु दर में कौन-सा राज्य सबसे अच्छी स्थिति में है?
शिशु मृत्यु दर जितनी कम, उतना अच्छा। केरल में 1,000 जीवित पैदा हुए बच्चों में से 6 एक साल की उम्र से पहले मरते हैं, हरियाणा में 28।
3तालिका 1.3 और 1.4 को साथ देखकर कौन-सी बात सही है?
साक्षरता: केरल 96%, हरियाणा 80%; उपस्थिति अनुपात: केरल 77, हरियाणा 67; शिशु मृत्यु दर: केरल 6, हरियाणा 28।
5सार्वजनिक सुविधाएँ
इस पड़ाव का सवालपृ. 11–13
जेब में पैसा हो, तो क्या सब कुछ खरीदा जा सकता है?
पिछली बात से कड़ी पड़ाव 4 में केरल कम आय के बावजूद आगे निकला। इसकी वजह यहाँ है।
हरियाणा में औसत आय ज़्यादा है, फिर भी इन ज़रूरी बातों में वह केरल से पीछे क्यों? किताब का जवाब: ज़रूरी नहीं कि जेब का पैसा वे सब चीज़ें और सेवाएँ खरीद सके, जो बेहतर जीवन के लिए चाहिए।
पैसा अकेले क्या नहीं खरीद सकता
- प्रदूषण-मुक्त वातावरण
- बिना मिलावट की दवाएँ
- संक्रामक बीमारियों से बचाव, जब तक पूरा समुदाय बचाव के कदम न उठाए
पहली दो चीज़ें आम तौर पर तभी मिलती हैं, जब आप ऐसे समुदाय में जाकर रहें जहाँ ये सुविधाएँ पहले से हों।
मिलकर सस्ता
- पूरे इलाके के लिए सुरक्षा का एक इंतज़ाम सस्ता पड़ेगा, या हर घर के लिए अलग सुरक्षा गार्ड?
- आप पढ़ पा रहे हैं, क्योंकि बहुत से और बच्चे भी पढ़ना चाहते हैं और बहुत लोग मानते हैं कि सरकार को स्कूल खोलने चाहिए। अकेले आप ही पढ़ना चाहते, तो शायद तभी पढ़ पाते जब माता-पिता आपको कहीं और निजी स्कूल भेज पाते।
- आज भी बहुत से इलाकों में बच्चे, खासकर लड़कियाँ, उच्च विद्यालय की शिक्षा नहीं ले पातीं, क्योंकि सरकार या समाज ने इसके लिए पर्याप्त सुविधाएँ नहीं दीं।
केरल में शिशु मृत्यु दर कम है, क्योंकि वहाँ स्वास्थ्य और शिक्षा की मौलिक सुविधाएँ पर्याप्त हैं। इसी तरह, जिन राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (सा.वि.प्र.), यानी राशन की व्यवस्था, ठीक से काम करती है, वहाँ लोगों का स्वास्थ्य और पोषण बेहतर होने की संभावना है।
आओ–इन पर विचार करें
2ऐसे दूसरे उदाहरण सोचिए, जहाँ वस्तुएँ और सेवाएँ व्यक्तिगत स्तर की अपेक्षा सामूहिक स्तर पर उपलब्ध कराना अधिक सस्ता है।
एक संभावित जवाब देखिए
- किताब के उदाहरण: पूरे इलाके की सुरक्षा, स्कूल, और संक्रामक बीमारियों से बचाव।
- ऐसे और उदाहरण: गली की बत्तियाँ, गाँव की सड़क, सरकारी अस्पताल, बस जैसी सार्वजनिक सवारी, और राशन की दुकानें। हर घर अपना अलग इंतज़ाम करे, तो खर्च कई गुना हो जाएगा।
3अच्छे स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं की उपलब्धता क्या केवल सरकार द्वारा इन सुविधाओं के लिए किए गए व्यय पर ही निर्भर करती है? अन्य कौन से कारक प्रासांगिक हो सकते हैं?
जवाब देखिए
- नहीं, केवल खर्च पर नहीं।
- सुविधा ठीक से काम करे: किताब कहती है कि जहाँ राशन व्यवस्था ठीक प्रकार चलती है, वहीं स्वास्थ्य और पोषण बेहतर होने की संभावना है।
- लोग उसे चाहें और माँगें: स्कूल इसलिए चलता है कि बहुत से बच्चे पढ़ना चाहते हैं और बहुत लोग मानते हैं कि सरकार स्कूल खोले।
- पूरा समुदाय साथ दे: बीमारियों से बचाव तभी होता है जब पूरा समुदाय कदम उठाए।
- और सबको बराबर पहुँच मिले, खासकर लड़कियों को।
4एक अध्ययन में यह पाया गया कि तमिलनाडु में ग्रामीण क्षेत्रों के 90 प्रतिशत लोग राशन की दुकानों का प्रयोग करते हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में केवल 35 प्रतिशत ग्रामीण निवासी इसका प्रयोग करते हैं। कहाँ के लोगों का जीवन बेहतर होगा और क्यों?
जवाब देखिए
- तमिलनाडु के लोगों का जीवन बेहतर होने की संभावना ज़्यादा है।
- वहाँ ग्रामीण इलाकों के 90 प्रतिशत लोग राशन की दुकानों का इस्तेमाल करते हैं, पश्चिम बंगाल में केवल 35 प्रतिशत। यानी तमिलनाडु में सार्वजनिक वितरण प्रणाली कहीं ज़्यादा लोगों तक पहुँच रही है।
- किताब के अनुसार जहाँ यह व्यवस्था ठीक से काम करती है, वहाँ लोगों का स्वास्थ्य और पोषण बेहतर होने की संभावना है।
कार्यकलाप 2 · तालिका 1.5: उत्तर प्रदेश की ग्रामीण जनसंख्या की शैक्षिक उपलब्धि
तालिका ध्यान से पढ़िए और नीचे के खाली स्थान भरिए। कुछ खानों के लिए छोटा-सा हिसाब लगाना पड़ेगा।
| श्रेणी | पुरुष | महिला |
|---|---|---|
| ग्रामीण जनसंख्या की साक्षरता दर | 76% | 54% |
| 10–14 वर्ष के ग्रामीण बच्चों में साक्षरता दर | 90% | 87% |
| 10–14 वर्ष की आयु के स्कूल जाने वाले ग्रामीण बच्चों का प्रतिशत | 85% | 82% |
(क)सभी आयु वर्गों की साक्षरता दर, जिसमें युवक और वृद्ध दोनों सम्मिलित हैं, ग्रामीण पुरुषों के लिए ........ थी और ग्रामीण महिलाओं के लिए ........ थी। यही नहीं कि बहुत से वयस्क स्कूल ही नहीं जा पाए बल्कि ........ इस समय स्कूल में नहीं है।
जवाब देखिए
- ग्रामीण पुरुषों के लिए 76% और ग्रामीण महिलाओं के लिए 54%।
- तीसरा खाना: 10–14 वर्ष के बहुत से बच्चे भी इस समय स्कूल में नहीं हैं: 15% लड़के (100 − 85) और 18% लड़कियाँ (100 − 82)।
(ख)इस तालिका से स्पष्ट है कि ........ प्रतिशत ग्रामीण लड़कियाँ और ........ प्रतिशत ग्रामीण लड़के स्कूल नहीं जा रहे हैं। इसलिए, 10 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों में से ........ प्रतिशत ग्रामीण लड़कियाँ और ........ प्रतिशत ग्रामीण लड़के निरक्षर हैं।
जवाब देखिए
- 18 प्रतिशत ग्रामीण लड़कियाँ (100 − 82) और 15 प्रतिशत ग्रामीण लड़के (100 − 85) स्कूल नहीं जा रहे।
- 10 से 14 वर्ष के बच्चों में 13 प्रतिशत ग्रामीण लड़कियाँ (100 − 87) और 10 प्रतिशत ग्रामीण लड़के (100 − 90) निरक्षर हैं।
(ग)हमारी स्वतंत्रता के 75 वर्षों के बाद भी, ........ आयु के वर्ग में इस उच्च स्तर की निरक्षरता चिंताजनक है।
जवाब देखिए
- 10–14 वर्ष की आयु के वर्ग में।
- किताब आगे कहती है कि बहुत से राज्य 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के संवैधानिक लक्ष्य के पास भी नहीं पहुँचे, जबकि यह लक्ष्य 1960 तक पूरा होना था।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1किताब के अनुसार केरल में शिशु मृत्यु दर कम क्यों है?
केरल की प्रतिव्यक्ति आय हरियाणा से कम है, फिर भी स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं के कारण शिशु मृत्यु दर बहुत कम है।
2तालिका 1.5: उत्तर प्रदेश में 10–14 वर्ष की कितने प्रतिशत ग्रामीण लड़कियाँ स्कूल नहीं जा रहीं?
82% लड़कियाँ स्कूल जा रही हैं, तो 100 − 82 = 18% नहीं जा रहीं। 13 उस उम्र की निरक्षर लड़कियों का प्रतिशत है (100 − 87)।
3बी.एम.आई. कैसे निकालते हैं?
किलोग्राम में भार को ऊँचाई के वर्ग से भाग दीजिए। ऊँचाई सेंटीमीटर में नापी हो, तो पहले 100 से भाग देकर मीटर बना लीजिए।
7विकास की धारणीयता
इस पड़ाव का सवालपृ. 14–16
आज का विकास क्या आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बचा रहेगा?
पिछली बात से कड़ी अब तक देखा कि विकास कैसे नापें। अब सवाल यह है कि वह टिकेगा कितना।
मान लीजिए कोई देश काफ़ी विकसित है। हम चाहेंगे कि विकास का यह स्तर और ऊँचा हो, या कम से कम आने वाली पीढ़ी के लिए बना रहे। पर बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध से बहुत से वैज्ञानिक चेतावनी देते आ रहे हैं कि विकास का आज का प्रकार और स्तर धारणीय नहीं है, यानी इसी तरह लंबे समय तक नहीं चल सकता।
हमने विश्व को अपने पूर्वजों से उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं किया है– हमने इसे अपने बच्चों से उधार लिया है।
उदाहरण 1 · भारत में भूमिगत जल
- 300ज़िलों में पिछले 20 सालों में पानी का स्तर 4 मीटर से ज़्यादा गिरा है।
- 1/3देश का लगभग एक-तिहाई भाग भूमिगत जल भण्डारों का अति-उपयोग कर रहा है।
- 60%यही तरीका चलता रहा, तो अगले 25 वर्षों में देश का 60 प्रतिशत भाग अति-उपयोग कर रहा होगा।
अति-उपयोग खास तौर पर यहाँ है: पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खेती में समृद्ध इलाके, मध्य और दक्षिण भारत के चट्टानी पठार, कुछ तटवर्ती इलाके, और तेज़ी से बढ़ती शहरी बस्तियाँ।
आओ–इन पर विचार करें
1आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि भूमिगत जल का अति-उपयोग हो रहा है?
जवाब देखिए
- क्योंकि पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है: 300 ज़िलों में 20 साल में 4 मीटर से ज़्यादा।
- इसका मतलब है कि हम बरसात से हो रही पूर्ति से ज़्यादा पानी निकाल रहे हैं।
- अति-उपयोग वहाँ ज़्यादा है जहाँ खेती ज़्यादा है (पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश) और जहाँ शहर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यानी खेती और बढ़ते शहरों की ज़रूरत के लिए ज़्यादा पानी निकाला जा रहा है।
2क्या बिना अति-उपयोग के विकास हो सकता है?
एक संभावित जवाब देखिए
- हो सकता है, अगर हम संसाधन उतना ही लें जितना प्रकृति हर साल वापस भर देती है।
- भूमिगत जल के लिए इसका मतलब: बरसात से जितना पानी भरता है, उससे ज़्यादा न निकालें।
- यही धारणीय विकास है: आज की ज़रूरत पूरी हो, और आने वाली पीढ़ी के लिए भी संसाधन बचे रहें। धरती हमने अपने बच्चों से उधार ली है।
नवीकरणीय और गैर नवीकरणीय
भूमिगत जल नवीकरणीय संसाधन है: फसलों और पौधों की तरह प्रकृति इसकी पूर्ति करती रहती है। फिर भी इसका अति-उपयोग हो सकता है: बरसात से जितना भरता है, उससे ज़्यादा निकालें, तो वह अति-उपयोग है।
गैर नवीकरणीय संसाधन कुछ वर्षों के इस्तेमाल के बाद खत्म हो जाते हैं। धरती पर इनका एक निश्चित भण्डार है और इनकी पूर्ति नहीं हो सकती। कभी नए स्रोत मिल जाते हैं जो भण्डार बढ़ाते हैं, पर समय के साथ वे भी खत्म हो जाएँगे। ज़मीन से निकलने वाला कच्चा तेल ऐसा ही संसाधन है, और उसके नए स्रोतों की खोज हर समय चलती रहती है।
पूरी दुनिया के भण्डार केवल 47 वर्षों में खत्म हो जाएँगे, अगर तेल इसी दर से इस्तेमाल होता रहा। अलग-अलग देशों की स्थिति अलग-अलग है।
भारत जैसे देश, जिनके पास तेल के पर्याप्त भण्डार नहीं हैं, आयात पर निर्भर हैं। तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो हर किसी पर भार पड़ता है।
संयुक्त राज्य अमरीका जैसे कुछ देशों के पास भण्डार कम हैं, पर वे सैन्य और आर्थिक ताकत से तेल पाना चाहते हैं।
आओ–इन पर विचार करें
1क्या किसी देश की विकास प्रक्रिया के लिए कच्चा तेल अनिवार्य है? चर्चा कीजिए।
एक संभावित जवाब देखिए
- आज बहुत हद तक, हाँ। भारत जैसे देश तेल आयात करते हैं, और कुछ देश इसे सैन्य और आर्थिक ताकत से पाना चाहते हैं। इससे पता चलता है कि विकास इस पर कितना टिका है।
- पर हमेशा के लिए नहीं टिक सकता: कच्चा तेल गैर नवीकरणीय है, और अभी की दर से दुनिया के भण्डार 47 वर्ष में खत्म हो जाएँगे।
- इसलिए धारणीय विकास के लिए ऐसे रास्ते सोचने होंगे जो तेल पर कम निर्भर हों।
2भारत को कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है। उपरोक्त स्थिति को देखते हुए आप भारत के लिए आने वाले समय में किन समस्याओं का पूर्वानुमान करते हैं?
जवाब देखिए
- तेल की कीमतें बढ़ेंगी, तो हर किसी पर भार पड़ेगा, क्योंकि हमें तेल बाहर से खरीदना पड़ता है।
- दुनिया के भण्डार अभी की दर से 47 वर्ष के ही हैं; जैसे-जैसे भण्डार घटेंगे, तेल पाना कठिन होता जाएगा।
- जिन देशों के पास तेल है, या जो ताकत से उसे पाना चाहते हैं, उन पर हमारी निर्भरता बनी रहेगी।
पर्यावरण की गिरावट के नतीजे राष्ट्रीय और राज्य सीमाएँ नहीं देखते; यह किसी एक इलाके या देश का मामला नहीं रह गया। हम सबका भविष्य आपस में जुड़ा है।
विकास की धारणीयता ज्ञान का नया क्षेत्र है, जिसमें वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, दार्शनिक और दूसरे सामाजिक वैज्ञानिक मिलकर काम कर रहे हैं।
विकास का सवाल हमेशा चलने वाला सवाल है: हम कहाँ जाना चाहते हैं, क्या बनना चाहते हैं, हमारे लक्ष्य क्या हैं? इसीलिए विकास पर बहस जारी है।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1भूमिगत जल का अति-उपयोग कब कहलाता है?
भूमिगत जल नवीकरणीय है; प्रकृति बरसात से इसे भरती है। उससे ज़्यादा निकालना अति-उपयोग है।
2तालिका 1.7 के अनुसार अभी की दर से विश्व के कच्चे तेल के भण्डार कितने वर्ष चलेंगे?
विश्व: 47 वर्ष। मध्य-पूर्व के भण्डार 70 वर्ष और संयुक्त राज्य अमरीका के 10.5 वर्ष चलेंगे।
3कच्चा तेल किस तरह का संसाधन है?
धरती पर इसका एक निश्चित भण्डार है और इसकी पूर्ति नहीं होती। नए स्रोत भण्डार बढ़ाते हैं, पर समय के साथ वे भी खत्म हो जाएँगे।
8सार
पूरे अध्याय की बड़ी बातें एक जगह। हर कार्ड पर दबाइए: पहले खुद याद कीजिए, फिर पीछे पढ़िए।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1तालिका 1.6 में भारत और बंगलादेश का मानव विकास क्रमांक क्या है?
दोनों का क्रमांक 130 है। बंगलादेश की प्रतिव्यक्ति आय भारत से कम है, पर जन्म के समय संभावित आयु ज़्यादा।
2इनमें से कौन-सा समूह नवीकरणीय संसाधनों का है?
भूमिगत जल, फसलों और पौधों की पूर्ति प्रकृति करती है। कच्चा तेल गैर नवीकरणीय है।
3आम तौर पर केवल जेब का पैसा इनमें से क्या नहीं दिला सकता?
जब तक आप ऐसे समुदाय में न रहें जहाँ यह सुविधा पहले से है, पैसा प्रदूषण-मुक्त वातावरण नहीं खरीद सकता।
अअभ्यास
पृ. 16–17 · हर प्रश्न के नीचे जवाब के मुख्य बिंदु हैं। पहले खुद लिखिए, फिर मिलाइए।
किताब के 13 प्रश्न
1सामान्यतः किसी देश का विकास किस आधार पर निर्धारित किया जा सकता है –
- (क) प्रतिव्यक्ति आय
- (ख) औसत साक्षरता स्तर
- (ग) लोगों की स्वास्थ्य स्थिति
- (घ) उपरोक्त सभी
जवाब देखिए
- (घ) उपरोक्त सभी।
- विश्व बैंक प्रतिव्यक्ति आय देखता है; केरल और हरियाणा की तुलना में साक्षरता और स्वास्थ्य भी ज़रूरी निकले; और मानव विकास रिपोर्ट तीनों को साथ जोड़ती है।
2निम्नलिखित पड़ोसी देशों में से मानव विकास के लिहाज़ से किस देश की स्थिति भारत से बेहतर है?
- (क) बांग्लादेश
- (ख) श्रीलंका
- (ग) नेपाल
- (घ) पाकिस्तान
जवाब देखिए
- (ख) श्रीलंका।
- तालिका 1.6 में श्रीलंका का क्रमांक 89 है और भारत का 130। बंगलादेश भी 130 पर है, यानी भारत के बराबर, बेहतर नहीं। नेपाल 145 और पाकिस्तान 168 पर हैं।
3मान लीजिए कि एक देश में चार परिवार हैं। इन परिवारों की प्रतिव्यक्ति आय 5,000 रुपये हैं। अगर तीन परिवारों की आय क्रमशः 4,000, 7,000 और 3,000 रुपये हैं, तो चौथे परिवार की आय क्या है?
- (क) 7,500 रुपये
- (ख) 3,000 रुपये
- (ग) 2,000 रुपये
- (घ) 6,000 रुपये
जवाब देखिए
- (घ) 6,000 रुपये।
- चार परिवारों की कुल आय = 4 × 5,000 = 20,000 रुपये।
- तीन परिवारों की आय = 4,000 + 7,000 + 3,000 = 14,000 रुपये।
- चौथे परिवार की आय = 20,000 − 14,000 = 6,000 रुपये।
4विश्व बैंक विभिन्न वर्गों का वर्गीकरण करने के लिये किस प्रमुख मापदण्ड का प्रयोग करता है? इस मापदण्ड की, अगर कोई हैं, तो सीमाएँ क्या हैं?
जवाब देखिए
- मापदण्ड: प्रतिव्यक्ति आय, यानी देश की कुल आय ÷ कुल जनसंख्या। 2024 में 66,500 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष या उससे ज़्यादा वाले देश उच्च आय वाले, लगभग 2,300 या उससे कम वाले निम्न आय वाले; भारत लगभग 11,000 के साथ मध्य आय वर्ग में।
- पहली सीमा: औसत यह नहीं बताता कि आय लोगों में कैसे बँटी है। तालिका 1.2 के देश क और ख का औसत बराबर है, पर ख में चार लोग बहुत गरीब हैं।
- दूसरी सीमा: आय से स्वास्थ्य और शिक्षा का पता नहीं चलता। हरियाणा की आय केरल से ज़्यादा है, फिर भी शिशु मृत्यु दर, साक्षरता और स्कूल उपस्थिति में केरल आगे है।
- तीसरी सीमा: बहुत सी ज़रूरी चीज़ें अकेले पैसे से नहीं खरीदी जा सकतीं, जैसे प्रदूषण-मुक्त वातावरण या बीमारियों से बचाव; और आदर, आज़ादी, सुरक्षा जैसे लक्ष्य आय में दिखते ही नहीं।
5विकास मापने का यू.एन.डी.पी. का मापदण्ड किन पहलुओं में विश्व बैंक के मापदण्ड से अलग है?
जवाब देखिए
- विश्व बैंक देशों को केवल प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर बाँटता है।
- यू.एन.डी.पी. की मानव विकास रिपोर्ट आय के साथ लोगों का शैक्षिक स्तर और स्वास्थ्य स्थिति भी देखती है: जैसे तालिका 1.6 में जन्म के समय संभावित आयु और स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष।
- इसलिए आय में आगे कोई देश मानव विकास में पीछे भी हो सकता है: पाकिस्तान की प्रतिव्यक्ति आय नेपाल से ज़्यादा है (5,501 बनाम 4,726 डॉलर), पर क्रमांक में नेपाल (145) पाकिस्तान (168) से ऊपर है।
6हम औसत का प्रयोग क्यों करते हैं? इनके प्रयोग करने की क्या कोई सीमाएँ हैं? विकास से जुड़े अपने उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
जवाब देखिए
- औसत इसलिए, क्योंकि अलग-अलग आकार के समूहों की तुलना कुल से नहीं हो सकती। देशों की जनसंख्या अलग है, इसलिए कुल आय की जगह प्रतिव्यक्ति आय देखते हैं।
- सीमा: औसत असमानता छिपा लेता है। तालिका 1.2 में देश क (9,500 से 10,500 तक) और देश ख (चार लोग 500 पर, एक 48,000 पर) दोनों का औसत 10,000 है।
- और एक औसत सब कुछ नहीं बताता: हरियाणा की औसत आय केरल से ज़्यादा है, पर वहाँ शिशु मृत्यु दर 28 है, केरल में 6।
7प्रतिव्यक्ति आय कम होने पर भी केरल का मानव विकास क्रमांक हरियाणा से ऊँचा है। इसलिए प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदण्ड बिल्कुल नहीं है और राज्यों की तुलना के लिए इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। क्या आप सहमत हैं? चर्चा कीजिए।
एक संभावित जवाब देखिए
- पूरी तरह सहमत होना ठीक नहीं। प्रतिव्यक्ति आय उपयोगी है, पर अधूरी।
- उपयोगी, क्योंकि ज़्यादा आय से लोग ज़रूरत की ज़्यादा चीज़ें पा सकते हैं, और जनसंख्या अलग होने पर भी तुलना हो पाती है। बिहार की आय (60,337 रुपये) बाकी दोनों से बहुत कम है, और बिहार साक्षरता (71%) और स्कूल उपस्थिति (55) में भी सबसे पीछे है।
- अधूरी, क्योंकि केरल की आय हरियाणा से कम है, फिर भी शिशु मृत्यु दर, साक्षरता और उपस्थिति में केरल आगे है। वजह है स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएँ, जो आय में नहीं दिखतीं।
- इसलिए राज्यों की तुलना में आय को छोड़ना नहीं, उसके साथ स्वास्थ्य और शिक्षा के मापदण्ड भी देखने चाहिए।
8भारत के लोगों द्वारा ऊर्जा के किन स्त्रोतों का प्रयोग किया जाता है? ज्ञात कीजिए। अब से 50 वर्ष पश्चात् क्या संभावनाएँ हो सकती हैं?
एक संभावित जवाब देखिए
- यह खोजकर लिखने का काम है। अपने घर और आसपास देखिए: खाना किससे पकता है, रोशनी कहाँ से आती है, खेत के पंप और सड़क की गाड़ियाँ किससे चलती हैं। हर स्रोत के आगे लिखिए कि वह नवीकरणीय है या गैर नवीकरणीय।
- अध्याय एक स्रोत को विस्तार से देखता है: कच्चा तेल। भारत इसके लिए आयात पर निर्भर है, और अभी की दर से दुनिया के भण्डार 47 वर्ष में खत्म हो जाएँगे।
- 50 वर्ष बाद: जो गैर नवीकरणीय स्रोत इसी तरह खर्च होते रहे, वे बहुत घट चुके होंगे या खत्म हो चुके होंगे। तब ऐसे स्रोतों पर ज़्यादा निर्भर होना पड़ेगा जिनकी पूर्ति प्रकृति करती रहे, और ऊर्जा सोच-समझकर खर्च करनी होगी।
9धारणीयता का विषय विकास के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
जवाब देखिए
- हम चाहते हैं कि विकास का स्तर आने वाली पीढ़ी के लिए भी बना रहे, पर वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि आज का प्रकार और स्तर धारणीय नहीं है।
- भूमिगत जल: 300 ज़िलों में 20 साल में पानी 4 मीटर से ज़्यादा नीचे गया; यही चलता रहा तो 25 वर्षों में देश का 60 प्रतिशत भाग अति-उपयोग कर रहा होगा।
- कच्चा तेल: दुनिया के भण्डार अभी की दर से 47 वर्ष के हैं।
- और पर्यावरण की गिरावट सीमाएँ नहीं देखती; हम सबका भविष्य आपस में जुड़ा है।
10धरती के पास सब लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन एक भी व्यक्ति के लालच को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यह कथन विकास की चर्चा में कैसे प्रासंगिक है? चर्चा कीजिए।
एक संभावित जवाब देखिए
- यह कथन ज़रूरत और लालच का फ़र्क बताता है। ज़रूरत भर संसाधन लें, तो धरती सबके लिए काफ़ी है; लालच की कोई सीमा नहीं।
- अध्याय के उदाहरण: भूमिगत जल बरसात की पूर्ति से ज़्यादा निकाला जा रहा है, और कच्चे तेल के भण्डार अभी की दर से 47 वर्ष में खत्म हो सकते हैं। अबिदजान में एक कंपनी का ज़हरीला कचरा दूसरों के शहर और समुद्र में फेंका गया, और कीमत वहाँ के लोगों ने चुकाई।
- इसलिए विकास ऐसा हो जो सबकी ज़रूरतें पूरी करे, कुछ लोगों का लालच नहीं; और जो आने वाली पीढ़ियों का हिस्सा भी बचाए रखे।
11पर्यावरण में गिरावट के कुछ ऐसे उदाहरणों की सूची बनाइए जो आपने अपने आसपास देखे हों।
एक संभावित जवाब देखिए
- यह सूची आपके अपने इलाके से बनेगी। अध्याय से कुछ उदाहरण, जिनसे शुरुआत कर सकते हैं:
- कुओं और नलकूपों में पानी का स्तर नीचे जाना (भूमिगत जल का अति-उपयोग)।
- ज़हरीला कचरा खुले कूड़ाघर और समुद्र में फेंकना (अबिदजान की घटना)।
- प्रदूषित हवा और पानी, जिनसे अकेले पैसे के बल पर कोई नहीं बच सकता।
- बड़े बाँधों से ज़मीन का डूबना।
12तालिका 1.6 में दी गई प्रत्येक मद के लिए ज्ञात कीजिए कि कौन–सा देश सबसे ऊपर है और कौन–सा सबसे नीचे।
जवाब देखिए
- प्रतिव्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय: सबसे ऊपर श्रीलंका (12,616 डॉलर), सबसे नीचे नेपाल (4,726 डॉलर)।
- जन्म के समय संभावित आयु: सबसे ऊपर श्रीलंका (77.5 वर्ष), सबसे नीचे म्यांमार (66.9 वर्ष)।
- स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष: सबसे ऊपर श्रीलंका (10.8), सबसे नीचे पाकिस्तान (4.3)।
- मानव विकास सूचकांक का क्रमांक: सबसे ऊपर श्रीलंका (89), सबसे नीचे पाकिस्तान (168)। भारत और बंगलादेश दोनों 130 पर हैं।
13नीचे दी गई तालिका में भारत में वयस्कों (15–49 वर्ष आयु वाले) जिनका बी.एम.आई. सामान्य से कम है (बी.एम.आई. 18.5 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर से कम) का अनुपात दिखाया गया है। यह वर्ष 2019–21 में देश के विभिन्न राज्यों के एक सर्वेक्षण पर आधारित है। तालिका का अध्ययन करके निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिए।
| राज्य | पुरुष (%) | महिला (%) |
|---|---|---|
| केरल | 8.5 | 10 |
| कर्नाटक | 17 | 21 |
| मध्य प्रदेश | 28 | 28 |
| सभी राज्य | 20 | 23 |
13 (क)केरल और मध्य प्रदेश के लोगों के पोषण स्तरों की तुलना कीजिए।
जवाब देखिए
- केरल में सामान्य से कम बी.एम.आई. वाले पुरुष 8.5% और महिलाएँ 10% हैं; मध्य प्रदेश में दोनों 28%।
- यानी मध्य प्रदेश में अल्पपोषित वयस्कों का अनुपात केरल से लगभग तीन गुना है। केरल के लोगों का पोषण स्तर कहीं बेहतर है।
- यह पड़ाव 5 की बात से मेल खाता है: केरल में स्वास्थ्य और शिक्षा की मौलिक सुविधाएँ पर्याप्त हैं।
13 (ख)क्या आप अन्दाज़ लगा सकते हैं कि देश में लगभग हर पाँच में से एक व्यक्ति अल्पपोषित क्यों है, यद्यपि यह तर्क दिया जाता है कि देश में पर्याप्त खाद्य है? अपने शब्दों में विवरण दीजिए।
एक संभावित जवाब देखिए
- सभी राज्यों में 20% पुरुष और 23% महिलाएँ सामान्य से कम बी.एम.आई. वाले हैं, यानी लगभग हर पाँच में से एक।
- देश में खाद्य होना और हर व्यक्ति तक पहुँचना अलग बातें हैं। जिनकी आय कम है, वे पर्याप्त भोजन नहीं खरीद पाते; औसत आय यह असमानता छिपा लेती है।
- जहाँ राशन की व्यवस्था ठीक से नहीं चलती, वहाँ बहुत लोग उससे वंचित रहते हैं; तमिलनाडु (90%) और पश्चिम बंगाल (35%) का फ़र्क याद कीजिए।
- पोषण केवल भोजन से नहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं से भी जुड़ा है, जैसा केरल दिखाता है।
आख़िरी जाँच: पूरा अध्याय✓ पड़ाव पूरा
1एक के लिए जो विकास है, वह दूसरे के लिए…
बाँध का उदाहरण: उद्योगपतियों को बिजली मिलती है, पर आदिवासियों की ज़मीन डूब सकती है।
2औसत आय की सबसे बड़ी कमी क्या है?
तालिका 1.2 में दोनों देशों का औसत 10,000 है, पर देश ख में चार लोग 500 पर हैं और एक 48,000 पर।
3धारणीय विकास का मतलब क्या है?
हम चाहेंगे कि विकास का स्तर कम से कम भावी पीढ़ी के लिए बना रहे; वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि आज का प्रकार और स्तर धारणीय नहीं है।
परियोजना
अतिरिक्त परियोजना/कार्यकलापपृ. 17
अपने क्षेत्र के विकास के विषय में चर्चा के लिए तीन भिन्न वक्ताओं को आमंत्रित कीजिए। अपने मस्तिष्क में आने वाले सभी प्रश्नों को उनसे पूछिए। इन विचारों की समूहों में चर्चा कीजिए। प्रत्येक समूह एक दीवार–चार्ट बनाए जिसमें कारण सहित उन विचारों का उल्लेख करे, जिनसे आप सहमत अथवा असहमत हैं।
ऐसे कीजिए
- वक्ता चुनिए: ऐसे तीन लोग जिनकी ज़िंदगी अलग-अलग हो, जैसे कोई किसान, कोई दुकानदार या कारीगर, और कोई शिक्षक या पंचायत का सदस्य। तालिका 1.1 की तरह, अलग परिस्थिति से अलग लक्ष्य निकलेंगे।
- सवाल पहले से लिख लीजिए: आपके हिसाब से हमारे इलाके का विकास किसमें है? आय के अलावा क्या चाहिए? किस बदलाव से किसे लाभ होगा, किसे नुकसान? पानी और दूसरे संसाधनों का क्या होगा?
- बातचीत के दौरान दो-तीन विद्यार्थी ध्यान से लिखते रहें, ताकि हर वक्ता की बात उसी के शब्दों में रहे।
- समूह में हर विचार पर बात कीजिए: क्या यह बहुत लोगों के लिए अच्छा है या कुछ के लिए ही? क्या यह आने वाले वर्षों तक चल सकता है?
- दीवार-चार्ट पर दो खाने बनाइए: "हम सहमत हैं" और "हम सहमत नहीं हैं"। हर विचार के आगे अपना कारण भी लिखिए।
आपने सातों पड़ाव, सार और आख़िरी जाँच पूरी कर ली। अब नीचे की परियोजना आपकी है।