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इस अध्याय के लिए विशेष सलाह। इसमें तिथियाँ, नाम और किताबों के नाम — तीनों बहुत हैं। समूह 12 में केवल तिथियाँ, समूह 13 में केवल नाम, और समूह 14 में केवल किताबें व अख़बार अलग से दिए गए हैं। पहले बाक़ी सब कर लीजिए, फिर आख़िरी दिन ये तीन समूह दोहराइए।
समूह 1 — छपाई का जन्म: चीन (कार्ड 1–12)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | मुद्रण की सबसे पहली तकनीक कहाँ विकसित हुई? | चीन, जापान और कोरिया में |
| 2 | चीन में किताबें कब से छपने लगीं? | तक़रीबन 594 ई. से |
| 3 | चीन में छपाई कैसे होती थी? | स्याही लगे काठ के ब्लॉक या तख़्ती पर काग़ज़ को रगड़कर, यानी हाथ से |
| 4 | चीनी किताब ‘एकॉर्डियन’ शैली में क्यों बनती थी? | क्योंकि काग़ज़ पतला और छिद्रित था, दोनों तरफ़ छपाई संभव नहीं थी; इसलिए किनारों को मोड़कर सिल दिया जाता था |
| 5 | ख़ुशनवीसी का क्या अर्थ है? | सुलेखन (Calligraphy) |
| 6 | ख़ुशनवीसी करने वाले क्या कहलाते थे? | दक्ष सुलेखक या ख़ुशख़त |
| 7 | लंबे अरसे तक मुद्रित सामग्री का सबसे बड़ा उत्पादक कौन था? | चीनी राजतंत्र |
| 8 | चीनी नौकरशाही कैसे नियुक्त होती थी? | सिविल सेवा परीक्षा से |
| 9 | सोलहवीं सदी में छपी किताबें क्यों बढ़ीं? | क्योंकि परीक्षा देने वालों की तादाद बढ़ गई थी |
| 10 | सत्रहवीं सदी में नए उपभोक्ता कौन बने? | व्यापारी, जो रोज़मर्रा के कारोबार की जानकारी के लिए मुद्रित सामग्री पढ़ते थे |
| 11 | नए पाठक वर्ग को क्या पसंद था? | काल्पनिक क़िस्से, कविताएँ, आत्मकथाएँ, शास्त्रीय साहित्यिक कृतियों के संकलन और रूमानी नाटक |
| 12 | उन्नीसवीं सदी के अंत में चीन में प्रिंट का नया केंद्र कौन बना? | शंघाई |
समूह 2 — जापान और कोरिया (कार्ड 13–24)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 13 | जापान में छपाई कब और कौन लाया? | चीनी बौद्ध प्रचारक, 768–770 ई. के आसपास |
| 14 | जापान की सबसे पुरानी छपी पुस्तक कौन-सी है? | 868 ई. में छपी डायमंड सूत्र |
| 15 | डायमंड सूत्र में क्या ख़ास है? | इसमें पाठ के साथ-साथ काठ पर खुदे चित्र भी हैं |
| 16 | जापान में तसवीरें कहाँ बनाई जाती थीं? | कपड़ों, ताश के पत्तों और काग़ज़ के नोटों पर |
| 17 | एदो को बाद में किस नाम से जाना गया? | तोक्यो |
| 18 | एदो की चित्रकारी में क्या दिखता है? | चायघर के मजमे, कलाकार और तवायफ़ें — यानी शालीन शहरी संस्कृति |
| 19 | जापान में किन विषयों की किताबें मिलती थीं? | महिलाओं, संगीत के साज़ों, हिसाब-किताब, चाय अनुष्ठान, फूलसाज़ी, शिष्टाचार और रसोई पर |
| 20 | त्रिपीटका कोरियाना क्या है? | तेरहवीं सदी के मध्य का बौद्ध ग्रंथों का कोरियाई वुडब्लॉक संग्रह |
| 21 | त्रिपीटका कोरियाना कितने ब्लॉक्स पर उकेरा गया? | लगभग 80,000 वुडब्लॉक्स पर |
| 22 | जिक्जी क्यों प्रसिद्ध है? | क्योंकि यह मूवेबल मेटल टाइप से मुद्रित दुनिया की सबसे पुरानी मौजूदा पुस्तकों में से एक है |
| 23 | जिक्जी में किसका उल्लेख है? | ज़ेन बौद्ध धर्म की विशेषताएँ, और भारत-चीन-कोरिया के लगभग 150 बौद्ध भिक्षुओं का उल्लेख |
| 24 | जिक्जी का दूसरा खंड कहाँ है? | फ़्रांस की नेशनल लाइब्रेरी में |
समूह 3 — कितागावा उतामारो और जापानी चित्रकला (कार्ड 25–31)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 25 | कितागावा उतामारो का जन्म कब और कहाँ हुआ? | 1753 ई. में एदो में |
| 26 | उन्होंने कौन-सी शैली विकसित की? | उकियो — यानी ‘तैरती दुनिया के चित्र’ |
| 27 | उकियो चित्रों में क्या चित्रित होता था? | आम शहरी जीवन |
| 28 | उतामारो ने किन यूरोपीय चित्रकारों को प्रभावित किया? | माने, मोने और वान गॉग को |
| 29 | प्रसिद्ध जापानी प्रकाशक कौन थे? | त्सुताया जुज़ाबूरो |
| 30 | प्रकाशक की भूमिका क्या थी? | विषय चुनकर कलाकारों से चित्र बनाने का क़रार करना |
| 31 | वुडब्लॉक शिल्पी क्या करता था? | चित्रकार की बनाई रूपरेखा को तख़्ती पर चिपकाकर उसकी आकृति उकेरता था |
समूह 4 — यूरोप में छपाई का आना (कार्ड 32–45)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 32 | चीनी काग़ज़ यूरोप कब पहुँचा? | ग्यारहवीं सदी में, रेशम मार्ग से |
| 33 | काग़ज़ से क्या मुमकिन हुआ? | कातिबों या मुंशियों द्वारा लिखी गई पांडुलिपियों का उत्पादन |
| 34 | मार्को पोलो कब लौटा? | 1295 ई. में, चीन से इटली |
| 35 | मार्को पोलो अपने साथ क्या लाया? | वुडब्लॉक यानी काठ की तख़्ती वाली छपाई की तकनीक का ज्ञान |
| 36 | वेलम क्या है? | चर्म-पत्र, यानी जानवरों के चमड़े से बनी लेखन की सतह |
| 37 | विलासी संस्करण किस पर छपते थे और किसके लिए? | वेलम पर, उन कुलीन वर्गों और भिक्षु-संघों के लिए जो छपी किताबों को सस्ती और अश्लील मानते थे |
| 38 | सस्ती मुद्रित किताबें कौन ख़रीदता था? | व्यापारी और विश्वविद्यालय के विद्यार्थी |
| 39 | एक पुस्तक-विक्रेता के यहाँ कितने कातिब होते थे? | आम तौर पर 50 |
| 40 | पांडुलिपियों से माँग क्यों पूरी नहीं होती थी? | क्योंकि नक़ल उतारना ख़र्चीला, समयसाध्य और श्रमसाध्य था |
| 41 | पांडुलिपियों की दूसरी दिक़्क़त क्या थी? | वे नाज़ुक थीं, लाने-ले जाने और रख-रखाव में मुश्किल थीं, इसलिए उनका सर्कुलेशन सीमित रहा |
| 42 | ‘सर्कुलेशन’ का अर्थ क्या है? | चलन, गश्त |
| 43 | पंद्रहवीं सदी की शुरुआत तक यूरोप में तख़्ती से क्या छपता था? | कपड़े, ताश के पत्ते, और टिप्पणियों के साथ धार्मिक चित्र |
| 44 | यूरोप में किताबें छापने के लिए किस चीज़ की ज़रूरत थी? | किताबें छापने के लिए और भी तेज़ तथा सस्ती मुद्रण तकनीक की |
| 45 | तेज़ और सस्ती मुद्रण तकनीक किसने बनाई? | 1430 के दशक में स्ट्रैसबर्ग के योहान गुटेन्बर्ग ने |
समूह 5 — गुटेन्बर्ग और उसकी प्रेस (कार्ड 46–60)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 46 | गुटेन्बर्ग के पिता क्या थे? | व्यापारी |
| 47 | गुटेन्बर्ग बचपन से कौन-सी मशीनें देखता आया था? | तेल और जैतून पेरने की मशीनें (press) |
| 48 | गुटेन्बर्ग ने कौन-कौन सी कलाएँ सीखीं? | पत्थर पर पॉलिश करने की कला, फिर सुनारी, और अंत में शीशे को गढ़ने की कला |
| 49 | प्रिंटिंग प्रेस का मॉडल क्या बना? | जैतून प्रेस |
| 50 | साँचे का उपयोग किसलिए हुआ? | अक्षरों की धातुई आकृतियों को गढ़ने के लिए |
| 51 | गुटेन्बर्ग ने अपना यंत्र कब मुकम्मल किया? | 1448 तक |
| 52 | उसने पहली कौन-सी किताब छापी? | बाइबिल |
| 53 | गुटेन्बर्ग की बाइबिल की कितनी प्रतियाँ, कितने समय में छपीं? | तक़रीबन 180 प्रतियाँ, तीन साल में |
| 54 | क्या नयी तकनीक ने हाथ की छपाई की जगह पूरी तरह ले ली? | नहीं — “यह नयी तकनीक हाथ से किताबें छापने की तकनीक की जगह पूरी तरह से नहीं ले पाई” |
| 55 | प्लाटेन क्या है? | लेटरप्रेस का वह बोर्ड जिसे काग़ज़ के पीछे दबाकर टाइप की छाप ली जाती है |
| 56 | प्लाटेन पहले किसका बनता था? | पहले काठ का, बाद में इस्पात का |
| 57 | गुटेन्बर्ग ने कितने अक्षरों के टाइप बनाए? | रोमन वर्णमाला के 26 अक्षरों के |
| 58 | गुटेन्बर्ग की मशीन का नाम क्यों ‘मूवेबल टाइप’ पड़ा? | क्योंकि अक्षरों को इधर-उधर घुमाकर कोई भी शब्द बनाया जा सकता था |
| 59 | गुटेन्बर्ग की प्रेस की तकनीक कितने साल तक चली? | अगले 300 सालों तक |
| 60 | गुटेन्बर्ग प्रेस की गति क्या थी? | एक घंटे में 250 पन्ने (एक साइड) |
समूह 6 — छपाई का फैलाव और शुरुआती किताबें (कार्ड 61–74)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 61 | यूरोप में छापेख़ाने किस काल में फैले? | 1450 से 1550 के बीच, क़रीब सौ सालों में |
| 62 | छापेख़ाने कैसे फैले? | जर्मनी के प्रिंटर या मुद्रक दूसरे देश जाकर नए छापेख़ाने खुलवाते थे |
| 63 | पंद्रहवीं सदी के दूसरे हिस्से में कितनी किताबें आईं? | 2 करोड़ |
| 64 | सोलहवीं सदी में किताबों की संख्या कितनी हुई? | 20 करोड़ |
| 65 | मुद्रण क्रांति कब संभव हुई? | जब हाथ की छपाई की जगह यांत्रिक मुद्रण आया |
| 66 | शुरुआती छपी किताबें कैसी दिखती थीं? | हस्तलिखित पांडुलिपियों जैसी — रंग-रूप और साज-सज्जा में |
| 67 | धातुई अक्षर किसका अनुकरण करते थे? | हाथ की सजावटी शैली का |
| 68 | अमीरों की किताबों में हाशिये पर क्या होता था? | बेल-बूटों के लिए जगह ख़ाली छोड़ दी जाती थी |
| 69 | अमीर ख़रीदार छपी किताब में क्या तय कर सकता था? | अपनी रुचि के हिसाब से डिज़ाइन और पेंटर |
| 70 | गुटेन्बर्ग की 180 में से कितनी प्रतियाँ बची हैं? | केवल 50 |
| 71 | गुटेन्बर्ग बाइबिल की कोई दो प्रतियाँ एक जैसी क्यों नहीं थीं? | क्योंकि हाशिए पर कलाकारों ने हाथ से टीकाकारी और चित्रकारी की थी |
| 72 | कुलीन तबक़ों को हर प्रति का अनोखा होना क्यों पसंद आया? | क्योंकि जो उनके पास था वह अनोखा था, किसी और के पास उसकी हू-ब-हू नक़ल नहीं थी |
| 73 | रंग भरने के दो फ़ायदे क्या थे? | पन्ना रंगीन हो जाता था, और सारे पवित्र शब्द ज़्यादा दर्शनीय तथा महत्त्वपूर्ण बन जाते थे |
| 74 | कम्पोज़ीटर और गैली क्या हैं? | कम्पोज़ीटर इबारत कम्पोज़ करने वाला व्यक्ति; गैली वह धातुई फ़्रेम जिसमें टाइप बिछाकर इबारत बनाई जाती थी |
समूह 7 — मुद्रण क्रांति और नया पाठक वर्ग (कार्ड 75–88)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 75 | मुद्रण क्रांति सिर्फ़ क्या नहीं थी? | महज़ तकनीकी दृष्टि से नाटकीय बदलाव की शुरुआत |
| 76 | मुद्रण क्रांति से किन तीन चीज़ों से रिश्ता बदला? | सूचना और ज्ञान से, तथा संस्था और सत्ता से |
| 77 | मुद्रण क्रांति से और क्या बदला? | लोकचेतना बदली और चीज़ों को देखने का नज़रिया बदला |
| 78 | नया पाठक वर्ग कैसे बना? | किताबों की क़ीमत गिरी, वक़्त और श्रम कम लगा, प्रतियाँ छापना आसान हुआ, बाज़ार पट गया और पाठक वर्ग बृहत्तर हुआ |
| 79 | पहले आमलोग किस संसार में जीते थे? | मौखिक संसार में |
| 80 | गाथा-गीत (Ballad) क्या है? | लोकगीत का ऐतिहासिक आख्यान, जिसे गाया और सुनाया जाता है |
| 81 | संक्रमण सरल क्यों नहीं था? | क्योंकि किताबें सिर्फ़ साक्षर पढ़ सकते थे और बीसवीं सदी तक यूरोप में साक्षरता सीमित थी |
| 82 | मुद्रकों ने क्या हल निकाला? | उन्होंने लोकगीत और लोककथाएँ छापनी शुरू कीं |
| 83 | लोकगीतों और लोककथाओं की ये छपी किताबें कैसी होती थीं? | तसवीरों से ख़ूब सजी-धजी यानी सचित्र |
| 84 | लोकगीतों और लोककथाओं की छपी किताबें कहाँ सुनाई जाती थीं? | सामूहिक ग्रामीण सभाओं में या शहरी शराबघरों में |
| 85 | शराबघर (Tavern) क्या था? | वह जगह जहाँ लोग शराब पीने, खाने, दोस्तों से मिलने और बात-विचार के लिए आते थे |
| 86 | छपे लोकगीत सभाओं और शराबघरों में सुनाने का नतीजा क्या हुआ? | मौखिक और मुद्रित संस्कृतियों के बीच की विभाजक रेखा धुँधली पड़ गई |
| 87 | श्रोता-जनता और पाठक-जनता के बारे में प्रसिद्ध वाक्य क्या है? | “अगर पहले की जनता श्रोता थी, तो कह सकते हैं कि अब पाठक-जनता अस्तित्व में आ गई थी” |
| 88 | श्रोता और पाठक का क्या हुआ? | वे एक-दूसरे में घुल-मिल गए |
समूह 8 — प्रिंट का डर, लूथर और मेनोकियो (कार्ड 89–104)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 89 | छापेख़ाने से किसके द्वार खुले? | विचारों के व्यापक प्रचार-प्रसार और बहस-मुबाहिसे के |
| 90 | असहमत लोग अब क्या कर सकते थे? | अपने विचार छापकर फैला सकते थे और लोगों को अलग ढंग से सोचने या कार्रवाई करने के लिए प्रेरित कर सकते थे |
| 91 | छपाई के बारे में लोगों को क्या डर था? | कि नियंत्रण न होने पर लोगों में बाग़ी और अधार्मिक विचार पनपने लगेंगे |
| 92 | छपाई से और किस बात का डर था? | कि ‘मूल्यवान’ साहित्य की सत्ता ही नष्ट हो जाएगी |
| 93 | छपी किताबों से बग़ावत और अधार्मिक विचार फैलने की चिंता किसने व्यक्त की? | धर्मगुरुओं, सम्राटों तथा कई लेखकों एवं कलाकारों ने |
| 94 | मार्टिन लूथर ने क्या लिखा? | रोमन कैथलिक चर्च की कुरीतियों की आलोचना करते हुए अपनी पिच्चानवे स्थापनाएँ |
| 95 | लूथर की पिच्चानवे स्थापनाओं की छपी प्रति कहाँ टाँगी गई? | विटेनबर्ग के गिरजाघर के दरवाज़े पर |
| 96 | लूथर की पिच्चानवे स्थापनाओं में क्या चुनौती थी? | चर्च को शास्त्रार्थ के लिए चुनौती |
| 97 | लूथर की चर्च को चुनौती का नतीजा क्या हुआ? | चर्च में विभाजन हो गया और प्रोटेस्टेंट धर्मसुधार की शुरुआत हुई |
| 98 | लूथर के अनुवाद की कितनी प्रतियाँ बिकीं? | न्यू टेस्टामेंट के अनुवाद की 5000 प्रतियाँ, कुछ ही हफ़्तों में |
| 99 | लूथर के न्यू टेस्टामेंट अनुवाद का दूसरा संस्करण कब निकला? | तीन महीने के अंदर |
| 100 | लूथर का प्रसिद्ध कथन क्या है? | “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है, सबसे बड़ा तोहफ़ा” |
| 101 | मेनोकियो कौन था? | सोलहवीं सदी की इटली का एक किसान |
| 102 | मेनोकियो ने क्या किया? | उपलब्ध किताबें पढ़कर बाइबिल के नए अर्थ लगाने शुरू कर दिए |
| 103 | इन्क्वीज़ीशन क्या था? | विधर्मियों की शिनाख़्त करने और सज़ा देने वाली रोमन कैथलिक संस्था (धर्म-अदालत) |
| 104 | मेनोकियो का क्या हुआ? | दो बार पकड़ा गया और आख़िरकार उसे मौत की सज़ा दे दी गई |
समूह 9 — इरैस्मस, प्रतिबंध और पढ़ने का जुनून (कार्ड 105–120)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 105 | चर्च ने कब से प्रतिबंधित किताबों की सूची रखी? | 1558 ई. से |
| 106 | इरैस्मस कौन थे? | लातिन के विद्वान और कैथलिक धर्मसुधारक |
| 107 | इरैस्मस का लूथर से क्या रिश्ता था? | उन्होंने कैथलिक धर्म की ज़्यादतियों की आलोचना की, पर लूथर से भी एक दूरी बनाकर रखी |
| 108 | इरैस्मस ने अपने विचार कहाँ लिखे? | एडेजेज़ (1508) में |
| 109 | इरैस्मस ने किताबों की तुलना किससे की? | भिनभिनाती मक्खियों से |
| 110 | इरैस्मस की सबसे बड़ी शिकायत क्या थी? | कि इतनी बकवास और सनसनीख़ेज़ किताबें छपती हैं कि मूल्यवान साहित्य का मूल्य ही नहीं रह जाता |
| 111 | ‘द मैकॉबर डान्स’ का हिंदी अर्थ क्या है? | वीभत्स नाच |
| 112 | ‘द मैकॉबर डान्स’ की तसवीर में क्या दिखाया गया है? | मुद्रक का वर्कशॉप मौत के नाच का मंच है; मुद्रक और मज़दूर कंकालों के नियंत्रण में हैं |
| 113 | अठारहवीं सदी के अंत तक साक्षरता कितनी थी? | यूरोप के कुछ हिस्सों में 60 से 80 प्रतिशत |
| 114 | साक्षरता कैसे बढ़ी? | अलग-अलग संप्रदाय के चर्चों ने गाँवों में स्कूल खोले और किसानों-कारीगरों को शिक्षित किया |
| 115 | पंचांग क्या है? | चाँद-सूरज की गति, ज्वार-भाटा और दैनिक जीवन की जानकारी देता वार्षिक प्रकाशन |
| 116 | चैपबुक क्या था? | पॉकेट बुक के आकार की सस्ती किताब, जिसे फेरीवाले बेचते थे |
| 117 | इंग्लैंड में चैपबुक बेचने वाले क्या कहलाते थे? | चैपमेन |
| 118 | बिब्लियोथीक ब्ल्यू क्या थीं? | फ़्रांस में सस्ते काग़ज़ पर छपी, नीली जिल्द में बँधी छोटी किताबें |
| 119 | फ़्रांस की चार-पाँच पन्ने की किताबों में क्या था? | प्रेम-कहानियाँ और अतीत की गाथाएँ, जिन्हें ‘इतिहास’ कहते थे |
| 120 | पत्रिकाएँ कब से छपने लगीं? | अठारहवीं सदी के आरंभ से |
समूह 10 — फ़्रांसीसी क्रांति और उन्नीसवीं सदी (कार्ड 121–138)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 121 | मर्सिए कौन थे? | अठारहवीं सदी के फ़्रांस के एक उपन्यासकार |
| 122 | मर्सिए ने छापेख़ाने को क्या कहा? | “प्रगति का सबसे ताक़तवर औज़ार” |
| 123 | मर्सिए का ललकार-वाक्य क्या था? | “हे निरंकुशवादी शासकों, अब तुम्हारे काँपने का वक़्त आ गया है!” |
| 124 | निरंकुशवाद क्या है? | वह व्यवस्था जिसमें एक व्यक्ति को संपूर्ण शक्ति प्राप्त हो और उस पर न क़ानूनी पाबंदी हो, न संवैधानिक |
| 125 | फ़्रांसीसी क्रांति वाला पहला तर्क क्या है? | छपाई से ज्ञानोदय के चिंतकों के विचार फैले, जिन्होंने परंपरा, अंधविश्वास और निरंकुशवाद की आलोचना की |
| 126 | फ़्रांसीसी क्रांति में छपाई की भूमिका का दूसरा तर्क क्या है? | छपाई ने वाद-विवाद-संवाद की नयी संस्कृति को जन्म दिया और ‘सार्वजनिक दुनिया’ बनी |
| 127 | फ़्रांसीसी क्रांति में छपाई की भूमिका का तीसरा तर्क क्या है? | 1780 के दशक तक राजशाही का मज़ाक उड़ाने वाले साहित्य और कार्टूनों का ढेर लग गया था |
| 128 | फ़्रांसीसी क्रांति में छपाई की भूमिका पर क्या सावधानी ज़रूरी है? | कि लोग-बाग़ हर तरह की सामग्री पढ़ते थे — रूसो भी और चर्च तथा राज्य का प्रचार भी |
| 129 | छपाई और फ़्रांसीसी क्रांति पर अंतिम निष्कर्ष क्या है? | “मुद्रण ने उनके मानस को सीधे तौर पर भले नहीं रचा हो, पर इसने अलग ढंग से सोचने की संभावनाएँ ज़रूर खोलीं” |
| 130 | बच्चे नए पाठक कैसे बने? | उन्नीसवीं सदी के आख़िर से प्राथमिक शिक्षा के अनिवार्य होने से |
| 131 | फ़्रांस में बाल-पुस्तकों का प्रेस कब बना? | 1857 में |
| 132 | ग्रिम बंधुओं ने क्या किया? | बरसों लगाकर किसानों के बीच से लोक-कथाएँ जमा कीं, जो 1812 के संकलन में छपीं |
| 133 | ग्रिम बंधुओं के संपादन में क्या हटाया जाता था? | बच्चों के लिए अनुपयुक्त सामग्री, या जो चीज़ें कुलीन वर्गों को अश्लील लगती थीं |
| 134 | ग्रिम बंधुओं के संपादन से लोककथाओं का क्या हुआ? | वे छपने से दर्ज तो हुईं, पर इस प्रक्रिया में बदल भी गईं |
| 135 | पेनी मैगज़ीन कब और किसने निकाली? | इंग्लैंड में 1832–1850 के बीच, ‘सोसायटी फ़ॉर द डिफ़्यूज़न ऑफ़ यूजफुल नॉलेज’ ने |
| 136 | पेनी मैगज़ीन मूलत: किसके लिए थी? | मज़दूर वर्ग के लिए |
| 137 | तीन प्रसिद्ध लेखिकाएँ कौन थीं? | जेन ऑस्टिन, ब्रॉण्ट बहनें और जॉर्ज इलियट |
| 138 | ‘नयी नारी’ की तीन पहचान क्या थीं? | सुदृढ़ व्यक्तित्व, गहरी सूझ-बूझ, और अपना दिमाग़ तथा अपनी इच्छाशक्ति |
समूह 11 — तकनीक, भारत का प्रवेश और प्रतिबंध (कार्ड 139–158)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 139 | थॉमस वुड कौन थे? | यॉर्कशायर के मेकैनिक, जो पुराने अख़बार ख़रीदकर आग की रोशनी में पढ़ते थे |
| 140 | थॉमस वुड मोमबत्ती क्यों नहीं जलाते थे? | क्योंकि उनके पास मोमबत्ती के लिए पैसे नहीं होते थे |
| 141 | मैक्सिम गोर्की की दो कृतियाँ कौन-सी हैं? | मेरा बचपन और मेरे विश्वविद्यालय |
| 142 | प्रेस धातु के कब से बनने लगे? | अठारहवीं सदी के अंत तक |
| 143 | शक्ति चालित बेलनाकार प्रेस किसने बनाया? | न्यूयॉर्क के रिचर्ड एम. हो. ने |
| 144 | रिचर्ड एम. हो. के प्रेस की क्षमता कितनी थी? | प्रति घंटे 8000 शीट या ताव |
| 145 | ऑफ़सेट प्रेस से कितने रंग छपते थे? | एक साथ छह रंग |
| 146 | शिलिंग शृंखला क्या थी? | इंग्लैंड में 1920 के दशक की एक सस्ती किताब-शृंखला |
| 147 | डस्ट कवर किस सदी की देन है? | बीसवीं सदी की |
| 148 | 1930 की मंदी का क्या असर हुआ? | प्रकाशकों ने सस्ते पेपरबैक या अजिल्द संस्करण छापे |
| 149 | भारत में पांडुलिपियाँ किस पर बनती थीं? | ताड़ के पत्तों या हाथ से बने काग़ज़ पर |
| 150 | भारत की पांडुलिपियों की चार दिक़्क़तें क्या थीं? | नाज़ुक थीं, महँगी थीं, सावधानी से पकड़नी पड़ती थीं, और अलग-अलग लिपियों के कारण पढ़ना कठिन था |
| 151 | बंगाल में लोग बिना किताब पढ़े साक्षर कैसे बनते थे? | गुरु याददाश्त से किताबें सुनाते थे और विद्यार्थी उन्हें लिख लेते थे |
| 152 | भारत में प्रेस कब और कहाँ आई? | सोलहवीं सदी के मध्य में गोवा में, पुर्तगाली धर्म-प्रचारकों के साथ |
| 153 | जेसुइट पुजारियों ने कौन-सी भाषा सीखी? | कोंकणी |
| 154 | पहली तमिल किताब कब-कहाँ छपी? | 1579 में कोचीन में |
| 155 | पहली मलयालम किताब कब छपी? | 1713 में |
| 156 | डच प्रोटेस्टेंट ने कितनी तमिल किताबें छापीं? | 32 |
| 157 | वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट किसके तर्ज पर बना? | आइरिश प्रेस क़ानून के तर्ज पर |
| 158 | वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट ने सरकार को क्या हक़ दिया? | भाषाई प्रेस की रपट और संपादकीय को सेंसर करने का व्यापक हक़; बाग़ी रपट पर चेतावनी, फिर ज़ब्ती और मशीनें छीनना |
समूह 12 — केवल तिथियाँ (कार्ड 159–168) — आख़िरी दिन के लिए
| # | तिथि | घटना |
|---|---|---|
| 159 | 1780 | हिक्की का बंगाल गजट |
| 160 | 1810 | रामचरितमानस का पहला मुद्रित संस्करण, कलकत्ता |
| 161 | 1821 | राममोहन राय का संवाद कौमुदी |
| 162 | 1857 | फ़्रांस में बाल-पुस्तकों का प्रेस; भारत में विद्रोह के बाद प्रेस पर रवैया बदला |
| 163 | 1867 | देवबंद सेमिनरी की स्थापना |
| 164 | 1871 | ज्योतिबा फुले की गुलामगिरी |
| 165 | 1876 | राससुन्दरी देबी की आमार जीबोन |
| 166 | 1878 | वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट |
| 167 | 1908 | बालगंगाधर तिलक की क़ैद |
| 168 | अगस्त 1942 | तक़रीबन 90 अख़बारों का दमन |
समूह 13 — केवल नाम (कार्ड 169–175) — आख़िरी दिन के लिए
| # | नाम | पहचान |
|---|---|---|
| 169 | जेम्स ऑगस्टस हिक्की | 1780 से बंगाल गजट; हेस्टिंग्स ने मुक़दमा किया |
| 170 | गंगाधर भट्टाचार्य | भारतीयों का पहला अख़बार — बंगाल गजट |
| 171 | राजा रवि वर्मा | आम खपत के लिए तसवीरें; रवि वर्मा प्रेस |
| 172 | राससुन्दरी देबी | रसोई में छिपकर पढ़ना सीखा; आमार जीबोन (1876) |
| 173 | बेगम रोकैया शेखावत हुसैन | 1926 में नारी-शिक्षा के विरोधियों की निंदा की |
| 174 | काशीबाबा | कानपुर का मिल-मज़दूर; छोटे और बड़े सवाल (1938) |
| 175 | बालगंगाधर तिलक | केसरी; 1908 में क़ैद |
समूह 14 — केवल किताबें और अख़बार (कार्ड 176–187) — आख़िरी दिन के लिए
| # | नाम | पहचान |
|---|---|---|
| 176 | त्रिपीटका कोरियाना | कोरिया, 80,000 वुडब्लॉक, यूनेस्को 2007 |
| 177 | जिक्जी | कोरिया, धातुई चलअक्षर, यूनेस्को 2001 |
| 178 | बंगाल गजट (हिक्की) | 1780, पहला अंग्रेज़ी साप्ताहिक |
| 179 | बंगाल गजट (गंगाधर भट्टाचार्य) | भारतीयों का पहला प्रयास |
| 180 | संवाद कौमुदी | राममोहन राय, 1821, सुधारवादी |
| 181 | समाचार चंद्रिका | रूढ़िवादियों का जवाबी पत्र |
| 182 | जाम-ए-जहाँ नामा, शम्सुल अख़बार | दो फ़ारसी अख़बार |
| 183 | रामचरितमानस | तुलसीदास; पहला मुद्रित संस्करण 1810, कलकत्ता |
| 184 | आमार जीबोन | राससुन्दरी देबी, 1876, बंगाली की पहली संपूर्ण आत्मकथा |
| 185 | स्त्री धर्म विचार | राम चड्ढा, पंजाब; औरतों को आज्ञाकारिता की सीख |
| 186 | गुलामगिरी | ज्योतिबा फुले, 1871 |
| 187 | छोटे और बड़े सवाल / सच्ची कविताएँ | काशीबाबा (1938) / सुदर्शन चक्र (1935–1955) |
और अगर सब भूल जाएँ, तो सिर्फ़ यह याद रखिए — छपाई ने एक साथ दो उलटे काम किए: उसने लोगों को बाँटा भी और जोड़ा भी। जिसके पास सत्ता थी वह डरा, और जिसके पास आवाज़ नहीं थी उसे आवाज़ मिली।