अध्याय 4औद्योगीकरण का युग

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कैसे इस्तेमाल करें: एक साथी से प्रश्न पढ़वाइए और मुँह-ज़बानी उत्तर दीजिए। जो कार्ड ग़लत हों, उन पर निशान लगाकर अगले दिन फिर दोहराइए।

इस अध्याय के लिए विशेष सलाह। इसमें आँकड़े और नाम दोनों बहुत हैं। समूह 12 में केवल नाम अलग से दिए गए हैं। पहले बाक़ी सब कर लीजिए, फिर आख़िरी दिन यह समूह दोहराइए।


समूह 1 — आदि-औद्योगीकरण (कार्ड 1–14)

#प्रश्नउत्तर
1औद्योगीकरण के बारे में सबसे आम ग़लतफ़हमी क्या है?कि औद्योगिक उत्पादन का मतलब केवल फ़ैक्ट्रियों में होने वाला उत्पादन है
2‘आदि’ शब्द का क्या अर्थ है?किसी चीज़ की पहली या प्रारंभिक अवस्था का संकेत
3आदि-औद्योगीकरण किसे कहते हैं?फ़ैक्ट्रियों की स्थापना से पहले अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार के लिए बड़े पैमाने पर होने वाले उस औद्योगिक उत्पादन को, जो फ़ैक्ट्रियों में नहीं बल्कि घरों में होता था
4सौदागर गाँवों की तरफ़ कब रुख़ करने लगे?सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दी में
5चीज़ों की माँग क्यों बढ़ी थी?विश्व व्यापार के विस्तार और दुनिया के विभिन्न भागों में उपनिवेशों की स्थापना के कारण
6शहरों में उत्पादन क्यों नहीं बढ़ाया जा सकता था?क्योंकि शहरों में शहरी दस्तकारी और व्यापारिक गिल्ड्स काफ़ी ताक़तवर थे
7गिल्ड्स क्या करते थे?कारीगरों को प्रशिक्षण देते थे, उत्पादकों पर नियंत्रण रखते थे, प्रतिस्पर्धा और मूल्य तय करते थे तथा व्यवसाय में नए लोगों को आने से रोकते थे
8शासकों ने गिल्ड्स को क्या दिया था?ख़ास उत्पादों के उत्पादन और व्यापार का एकाधिकार
9‘कॉटेजर’ किसे कहते थे?वे छोटे किसान, जो साझा ज़मीनों से जलावन की लकड़ी, बेरियाँ, सब्ज़ियाँ, भूसा और चारा बीनकर काम चलाते थे
10गाँव वाले सौदागरों के लिए काम करने को क्यों तैयार हुए?क्योंकि खुले खेत ख़त्म हो रहे थे, कॉमन्स की बाड़ाबंदी हो रही थी और उनके छोटे खेतों से घर के सारे लोगों का पेट नहीं भर सकता था
11गाँव में रहकर सौदागरों के लिए काम करने का क्या फ़ायदा था?वे गाँव में रहते हुए अपने छोटे-छोटे खेतों को भी सँभाल सकते थे और उन्हें पूरे परिवार के श्रम संसाधनों के इस्तेमाल का मौक़ा भी मिल गया
12आदि-औद्योगिक उत्पादन से क्या फ़ायदा हुआ?इससे होने वाली आमदनी ने खेती के कारण सिमटती आय में बड़ा सहारा दिया
13एक सौदागर हर चरण में कितने मज़दूरों से काम करवाता था?20 से 25 मज़दूरों से; इसलिए हर सौदागर के पास सैकड़ों मज़दूर काम करते थे
14आदि-औद्योगिक व्यवस्था में उत्पादन कहाँ होता था?कारख़ानों की बजाय घरों में; इस पर सौदागरों का नियंत्रण था

समूह 2 — कपड़ा बनने की शृंखला और कारख़ानों का उदय (कार्ड 15–28)

#प्रश्नउत्तर
15स्टेप्लर कौन होता था?ऐसा व्यक्ति जो रेशों के हिसाब से ऊन को ‘स्टेपल’ करता है या छाँटता है
16फ़ुलर कौन होता था?ऐसा व्यक्ति जो ‘फुल’ करता है यानी चुनटों के सहारे कपड़े को समेटता है
17कार्डिंग क्या है?वह प्रक्रिया जिसमें कपास या ऊन आदि रेशों को कताई के लिए तैयार किया जाता है
18कपड़ा बनने की पूरी शृंखला क्या थी?स्टेप्लर → कातने वाले → बुनकर → फ़ुलर्स → रंगसाज़ → लंदन (फ़िनिशिंग) → अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार
19लंदन को किस नाम से जाना जाता था?फ़िनिशिंग सेंटर के रूप में, क्योंकि वहीं कपड़ों की फ़िनिशिंग होती थी
20इंग्लैंड में सबसे पहले कारख़ाने कब खुले?1730 के दशक में; तेज़ी से इज़ाफ़ा अठारहवीं सदी के आख़िर में हुआ
21नए युग का पहला प्रतीक कौन-सी वस्तु थी?कपास (कॉटन)
221760 और 1787 में ब्रिटेन का कच्चे कपास का आयात कितना था?1760 में 25 लाख पौंड और 1787 में 220 लाख पौंड
23अठारहवीं सदी के आविष्कारों ने किन चरणों की कुशलता बढ़ाई?कार्डिंग, ऐंठना व कताई, और लपेटने के हर चरण की
24सूती कपड़ा मिल की रूपरेखा किसने रखी?रिचर्ड आर्कराइट ने
25सूती कपड़ा मिल की ज़रूरत क्यों पड़ी?क्योंकि महँगी नयी मशीनें ख़रीदकर उन्हें कारख़ानों में लगाया जा सकता था
26कारख़ाने से क्या फ़ायदा हुआ?सारी प्रक्रियाएँ एक छत के नीचे और एक मालिक के हाथों में आ गईं
27एक छत के नीचे कारख़ाने से क्या संभव हो गया?उत्पादन प्रक्रिया पर निगरानी, गुणवत्ता का ध्यान रखना और मज़दूरों पर नज़र रखना
28कारख़ानों की चमक ने लोगों को क्या भुला दिया?कि उनकी आँखों से ओझल गलियों और वर्कशॉप्स में अभी भी उत्पादन चालू है

समूह 3 — औद्योगिक परिवर्तन की रफ़्तार (कार्ड 29–42)

#प्रश्नउत्तर
291840 के दशक तक ब्रिटेन का सबसे बड़ा उद्योग कौन-सा था?कपास उद्योग
30कपास उद्योग के बाद कौन-सा उद्योग आगे निकल गया?लोहा और स्टील उद्योग
31लोहा और स्टील उद्योग आगे क्यों निकल गया?क्योंकि 1840 के दशक से इंग्लैंड में और 1860 के दशक से उपनिवेशों में रेलवे का विस्तार होने लगा था
321873 तक ब्रिटेन का लोहा-स्टील निर्यात कितने का था?लगभग 7.7 करोड़ पौंड, जो कपास निर्यात से दोगुना था
33उन्नत औद्योगिक क्षेत्र में कितने मज़दूर काम करते थे?उन्नीसवीं सदी के आख़िर में भी कुल मज़दूरों में 20 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं
34कपड़ा उद्योग का बड़ा हिस्सा कहाँ बनता था?कारख़ानों में नहीं बल्कि घरेलू इकाइयों में
35परंपरागत उद्योगों में तरक़्क़ी किससे हुई?मुख्य रूप से साधारण और छोटे-छोटे आविष्कारों से
36कौन-से ग़ैर-मशीनी क्षेत्रों में तरक़्क़ी हो रही थी?खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण, पॉटरी, काँच के काम, चर्मशोधन, फ़र्नीचर और औज़ारों के उत्पादन में
37तकनीक अपनाने की गति धीमी क्यों थी?नयी तकनीक महँगी थी, मशीनें अकसर ख़राब हो जाती थीं, मरम्मत पर ख़र्चा आता था और वे उतनी अच्छी नहीं थीं जितना दावा किया जाता था
38भाप के पहले इंजन का निर्माता कौन था?न्यूकोमेन
39न्यूकोमेन के इंजन में सुधार किसने किए?जेम्स वॉट ने, और नए इंजन को पेटेंट करा लिया
40वॉट के नए इंजन का उत्पादन किसने किया?उनके दोस्त उद्योगपति मैथ्यू बूल्टन ने; पर सालों तक कोई ख़रीदार नहीं मिला
41उन्नीसवीं सदी की शुरुआत तक इंग्लैंड में भाप के कितने इंजन थे?सिर्फ़ 321 — 80 सूती उद्योगों में, 9 ऊन उद्योगों में और बाक़ी खनन, नहर निर्माण व लौह कार्यों में
42उन्नीसवीं सदी के मध्य का औसत मज़दूर कैसा था?मशीनों पर काम करने वाला नहीं बल्कि परंपरागत कारीगर और मज़दूर

समूह 4 — हाथ का श्रम बनाम मशीन (कार्ड 43–54)

#प्रश्नउत्तर
43ब्रिटेन में मज़दूरों की कमी क्यों नहीं थी?क्योंकि ग़रीब किसान और बेकार लोग कामकाज की तलाश में बड़ी संख्या में शहरों को जाते थे
44मज़दूर ज़्यादा होने का वेतन पर क्या असर पड़ता है?जब श्रमिकों की बहुतायत होती है तो वेतन गिर जाते हैं
45उद्योगपतियों को मशीनों में दिलचस्पी क्यों नहीं थी?क्योंकि उन्हें श्रमिकों की कमी या वेतन के मद में भारी लागत जैसी कोई परेशानी नहीं थी
46जाड़ों में किन उद्योगों में ज़्यादा काम रहता था?गैसघरों और शराबख़ानों में; बंदरगाहों पर जहाज़ों की मरम्मत भी जाड़ों में होती थी
47क्रिसमस से पहले किन्हें अतिरिक्त मज़दूर चाहिए होते थे?बुक बाइंडरों और प्रिंटरों को
48मौसमी उद्योगों में मशीन क्यों नहीं लगाई जाती थी?क्योंकि वहाँ उत्पादन मौसम के साथ घटता-बढ़ता रहता था, इसलिए मज़दूरों को ही काम पर रखना पसंद किया जाता था
49मशीन से क्या नहीं बन सकता था?बारीक डिज़ाइन और ख़ास आकारों वाली चीज़ें, क्योंकि मशीन एक जैसे तय क़िस्म के उत्पाद ही बड़ी संख्या में बना सकती थी
50उन्नीसवीं सदी के मध्य में ब्रिटेन में कितने प्रकार के हथौड़े और कुल्हाड़ियाँ बनते थे?500 तरह के हथौड़े और 45 तरह की कुल्हाड़ियाँ
51हथौड़े और कुल्हाड़ियों की इतनी क़िस्में बनाने के लिए किसकी ज़रूरत थी?यांत्रिक प्रौद्योगिकी की नहीं बल्कि इनसानी निपुणता की
52उच्च वर्ग हाथ से बनी चीज़ें क्यों पसंद करता था?क्योंकि उन्हें परिष्कार और सुरुचि का प्रतीक माना जाता था; उनकी फ़िनिश अच्छी होती थी और डिज़ाइन अच्छा होता था
53मशीनों से बने उत्पादों का क्या होता था?उन्हें उपनिवेशों में निर्यात कर दिया जाता था
54अमेरिका में स्थिति अलग क्यों थी?क्योंकि वहाँ मज़दूरों की कमी थी, इसलिए उद्योगपति मशीनों का इस्तेमाल ज़्यादा पसंद करते थे

समूह 5 — मज़दूरों की ज़िंदगी (कार्ड 55–66)

#प्रश्नउत्तर
55नौकरी मिलने की संभावना किस पर निर्भर करती थी?यारी-दोस्ती, कुनबे-कुटुंब के ज़रिए जान-पहचान पर
56जिनके पास संपर्क नहीं थे, उनका क्या होता था?उन्हें हफ़्तों इंतज़ार करना पड़ता था; वे पुलों के नीचे या रैन-बसेरों में रातें काटते थे
57बहुत सारे लोग कहाँ रुकते थे?निर्धन क़ानून विभाग द्वारा चलाए जाने वाले अस्थायी बसेरों में
58मौसमी काम का मज़दूरों पर क्या असर पड़ता था?उन्हें बीच-बीच में बहुत समय तक ख़ाली बैठना पड़ता था और सीज़न गुज़र जाने के बाद वे दोबारा सड़क पर आ जाते थे
59नेपोलियनी युद्ध के दौरान क्या हुआ?क़ीमतें तेज़ी से बढ़ीं तो मज़दूरों की आय के वास्तविक मूल्य में भारी कमी आ गई — वेतन तो पहले जितना मिलता था पर उससे वे पहले जितनी चीज़ें नहीं ख़रीद सकते थे
60मज़दूरों की आमदनी किन दो बातों पर निर्भर होती थी?वेतन दर पर और रोज़गार की अवधि पर
61उन्नीसवीं सदी के मध्य में कितनी शहरी आबादी ग़रीब थी?सबसे अच्छे हालात में भी लगभग 10 प्रतिशत निहायत ग़रीब थी
621830 के दशक की मंदी में बेरोज़गारी कितनी थी?विभिन्न क्षेत्रों में 35 से 75 प्रतिशत तक
63स्पिनिंग जेनी किसने और कब बनाई?जेम्स हरग्रीव्ज़ ने 1764 में
64स्पिनिंग जेनी ने क्या किया?कताई की प्रक्रिया तेज़ कर दी और मज़दूरों की माँग घटा दी; एक ही पहिया घुमाने वाला एक मज़दूर बहुत सारी तकलियों को घुमा देता था
65औरतों ने स्पिनिंग जेनी पर हमला क्यों किया?बेरोज़गारी की आशंका के कारण; हाथ से ऊन कातने वाली औरतों का काम इस मशीन से छिन गया था
661840 के दशक के बाद कौन-से नए रोज़गार बने?सड़कें चौड़ी हुईं, नए रेलवे स्टेशन बने, सुरंगें बनीं, निकासी और सीवर व्यवस्था बिछाई गई और नदियों के तटबंध बने; परिवहन उद्योग के मज़दूर 1840 के दशक में दोगुना और अगले 30 सालों में फिर दोगुना हो गए

समूह 6 — भारत का कपड़ा और सूरत का पतन (कार्ड 67–78)

#प्रश्नउत्तर
67मशीन युग से पहले अंतर्राष्ट्रीय कपड़ा बाज़ार पर किसका दबदबा था?भारत के रेशमी और सूती उत्पादों का
68भारत का कपास दूसरे देशों से कैसे अलग था?बहुत सारे देशों में मोटा कपास पैदा होता था लेकिन भारत का कपास महीन क़िस्म का था
69ज़मीन के रास्ते व्यापार कौन करता था?आर्मीनियन और फ़ारसी सौदागर, जो पंजाब से अफ़ग़ानिस्तान, पूर्वी फ़ारस और मध्य एशिया के रास्ते चीज़ें ले जाते थे
70कपड़े के थान कैसे भेजे जाते थे?ऊँटों की पीठ पर लाद कर पश्चिमोत्तर सीमा से पहाड़ी दर्रों और रेगिस्तानों के पार
71सूरत बंदरगाह किन बंदरगाहों से जुड़ा था?खाड़ी और लाल सागर के बंदरगाहों से
72दक्षिण-पूर्वी एशिया से व्यापार किन बंदरगाहों से होता था?कोरोमंडल तट पर मछलीपटनम और बंगाल में हुगली से
73आपूर्ति सौदागर क्या करते थे?बुनकरों को पेशगी देते थे, तैयार कपड़ा ख़रीदते थे और उसे बंदरगाहों तक पहुँचाते थे
74भारतीय सौदागरों का नेटवर्क कब टूटने लगा?1750 के दशक तक
75यूरोपीय कंपनियों ने क्या किया?पहले स्थानीय दरबारों से रियायतें हासिल कीं, फिर व्यापार पर इज़ारेदारी अधिकार प्राप्त कर लिए
76सूरत के व्यापार का मूल्य कैसे गिरा?सत्रहवीं सदी के आख़िर में 1.6 करोड़ रुपये से गिरकर 1740 के दशक तक केवल 30 लाख रुपये
77कौन-से नए बंदरगाह उभरे?बंबई और कलकत्ता
78नए बंदरगाहों का उदय किस बात का संकेत था?औपनिवेशिक सत्ता की बढ़ती ताक़त का

समूह 7 — गुमाश्ता और बुनकरों की तबाही (कार्ड 79–94)

#प्रश्नउत्तर
79सत्ता स्थापित होने से पहले बुनकर की स्थिति कैसी थी?फ़्रांसीसी, डच, पुर्तगाली और स्थानीय व्यापारी होड़ में रहते थे, इसलिए बुनकर ख़ूब मोल-भाव करते थे और सबसे ऊँची बोली लगाने वाले को माल बेचते थे
80सत्ता मिलने के बाद कंपनी ने क्या दावा किया?व्यापार पर अपने एकाधिकार का
81कंपनी की नयी व्यवस्था का उद्देश्य क्या था?प्रतिस्पर्धा ख़त्म करना, लागतों पर अंकुश रखना और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना
82कंपनी की नयी व्यवस्था का पहला चरण क्या था?कपड़ा व्यापार में सक्रिय व्यापारियों और दलालों को ख़त्म करना तथा बुनकरों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित करना
83गुमाश्ता कौन था?कंपनी का वेतनभोगी कर्मचारी, जो बुनकरों पर निगरानी रखता था, माल इकट्ठा करता था और कपड़ों की गुणवत्ता जाँचता था
84कंपनी की नयी व्यवस्था का दूसरा चरण क्या था?कंपनी को माल बेचने वाले बुनकरों को अन्य ख़रीदारों के साथ कारोबार करने पर पाबंदी लगा दी गई
85पेशगी और क़र्ज़ का क्या मतलब था?काम का ऑर्डर मिलने पर कच्चा माल ख़रीदने के लिए क़र्ज़ा दिया जाता था, और क़र्ज़ लेने वाले को अपना कपड़ा गुमाश्ता को ही देना पड़ता था
86बुनकरों ने अपनी ज़मीन का क्या किया?वे उसे भाड़े पर देकर पूरा समय बुनकरी में लगाने लगे; अब पूरा परिवार यही काम करने लगा
87पुराने आपूर्ति सौदागर कैसे थे?वे बुनकर गाँवों में ही रहते थे, बुनकरों से नज़दीकी ताल्लुक़ात रखते थे और संकट के समय उनकी मदद करते थे
88नए गुमाश्ता कैसे थे?वे बाहर के लोग थे, गाँवों से उनका पुराना सामाजिक संबंध नहीं था, वे दंभपूर्ण व्यवहार करते थे और सिपाहियों व चपरासियों को लेकर आते थे
89माल समय पर तैयार न होने पर क्या होता था?बुनकरों को सज़ा दी जाती थी; उन्हें अकसर पीटा जाता था और कोड़े बरसाए जाते थे
90बुनकर कंपनी से क्यों बँधे हुए थे?उन्हें कंपनी से जो क़ीमत मिलती थी वह बहुत कम थी, पर वे क़र्ज़ों की वजह से कंपनी से बँधे हुए थे
91बुनकरों ने विरोध कैसे किया — पहला तरीक़ा?कर्नाटक और बंगाल में बहुत सारे बुनकर गाँव छोड़ कर चले गए और रिश्तेदारों के यहाँ किसी और गाँव में करघा लगा लेते थे
92बुनकरों के विरोध का दूसरा तरीक़ा?कई स्थानों पर गाँव के व्यापारियों के साथ मिलकर बुनकरों ने बग़ावत कर दी
93बुनकरों के विरोध का तीसरा तरीक़ा?बहुत सारे बुनकर क़र्ज़ा लौटाने से इनकार करने लगे, उन्होंने करघे बंद कर दिए और खेतों में मज़दूरी करने लगे
941772 में हेनरी पतुलो ने क्या कहा था?कि भारतीय कपड़े की माँग कभी कम नहीं हो सकती क्योंकि दुनिया के किसी और देश में इतना अच्छा माल नहीं बनता

समूह 8 — मैनचेस्टर का आना (कार्ड 95–106)

#प्रश्नउत्तर
951811-12 में भारत के निर्यात में सूती माल का हिस्सा कितना था?33 प्रतिशत
961850-51 में भारत के निर्यात में सूती माल का हिस्सा कितना रह गया?मात्र 3 प्रतिशत
97इंग्लैंड के उद्योगपतियों का पहला दबाव क्या था?इंग्लैंड के उद्योगपतियों ने सरकार पर दबाव डाला कि वह आयातित कपड़ों पर आयात शुल्क वसूल करे
98आयात शुल्क लगने से क्या फ़ायदा हुआ?मैनचेस्टर में बने कपड़े बाहरी प्रतिस्पर्धा के बिना इंग्लैंड में आराम से बिकने लगे
99इंग्लैंड के उद्योगपतियों का दूसरा दबाव क्या था?उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी पर दबाव डाला कि वह ब्रिटिश कपड़ों को भारतीय बाज़ारों में भी बेचे
1001850 और 1870 में भारतीय आयात में सूती कपड़े का हिस्सा कितना था?1850 में 31 प्रतिशत और 1870 तक 50 प्रतिशत से ऊपर
101बुनकरों के सामने कौन-सी दो समस्याएँ एक साथ थीं?उनका निर्यात बाज़ार ढह रहा था और स्थानीय बाज़ार सिकुड़ने लगा था
102आयातित कपड़ा इतना सस्ता क्यों था?क्योंकि वह कम लागत पर मशीनों से बनता था
1031850 के दशक तक बुनकर इलाक़ों की क्या हालत थी?वहाँ गिरावट और बेकारी के ही क़िस्सों की भरमार थी
1041860 के दशक में नयी समस्या क्या आई?बुनकरों को अच्छी कपास नहीं मिल पा रही थी
1051860 के दशक में बुनकरों को अच्छी कपास क्यों नहीं मिल पा रही थी?अमेरिकी गृहयुद्ध शुरू होने पर अमेरिका से कपास की आमद बंद हो गई तो ब्रिटेन भारत से कच्चा माल मँगाने लगा और कपास की क़ीमत आसमान छूने लगी
106उन्नीसवीं सदी के आख़िर में बुनकरों के सामने चौथी समस्या क्या आई?भारतीय कारख़ानों में उत्पादन होने लगा और बाज़ार मशीनों की बनी चीज़ों से पट गया

समूह 9 — भारत में फ़ैक्ट्रियों का आना (कार्ड 107–122)

#प्रश्नउत्तर
107बंबई में पहली कपड़ा मिल कब लगी?1854 में; दो साल बाद उत्पादन शुरू हुआ
1081862 में बंबई में कितनी मिलें थीं?चार मिलें, जिनमें 94,000 तकलियाँ और 2,150 करघे थे
109बंगाल में पहली जूट मिल कब चालू हुई?1855 में; दूसरी 7 साल बाद 1862 में
110एल्गिन मिल कहाँ और कब खुली?कानपुर में, 1860 के दशक में
111अहमदाबाद की पहली कपड़ा मिल कब चालू हुई?एल्गिन मिल के साल भर बाद
112मद्रास में पहली कताई और बुनाई मिल कब खुली?1874 में
113उद्यमियों की पूँजी का सबसे बड़ा स्रोत क्या था?चीन के साथ अफ़ीम-चाय का व्यापार
114अफ़ीम-चाय का व्यापार कैसे चलता था?अंग्रेज़ भारतीय अफ़ीम का चीन को निर्यात करते थे और उसके बदले चीन से चाय ख़रीदते थे जो इंग्लैंड जाती थी
115द्वारकानाथ टैगोर ने क्या किया?चीन के व्यापार से कमाकर 1830–1840 के दशकों में 6 संयुक्त उद्यम कंपनियाँ लगाईं
116द्वारकानाथ टैगोर के उद्यमों का क्या हुआ?1840 के दशक में आए व्यापक व्यावसायिक संकटों में उनके उद्यम बैठ गए
117बंबई के दो प्रमुख पारसी उद्यमी कौन थे?डिनशॉ पेटिट और जमशेदजी नुसरवानजी टाटा
118डिनशॉ पेटिट और जमशेदजी टाटा ने पैसा कैसे कमाया?आंशिक रूप से चीन को निर्यात करके और आंशिक रूप से इंग्लैंड को कच्ची कपास निर्यात करके
119कलकत्ता में पहली जूट मिल किसने और कब लगाई?मारवाड़ी व्यवसायी सेठ हुकुमचंद ने 1917 में
120जी.डी. बिड़ला के पूर्वजों ने क्या किया था?उनके पिता और दादा ने भी चीन के साथ व्यापार किया था
121भारतीय व्यवसायी अब केवल क्या निर्यात कर सकते थे?कच्चा माल और अनाज — कच्ची कपास, अफ़ीम, गेहूँ और नील
122सबसे बड़ी यूरोपीय प्रबंधकीय एजेंसियाँ कौन-सी थीं?बर्ड हीगलर्स एंड कंपनी, एंड्रयू यूल, और जार्डीन स्किनर एंड कंपनी

समूह 10 — मज़दूर, जॉबर और युद्ध (कार्ड 123–138)

#प्रश्नउत्तर
123प्रबंधकीय एजेंसियाँ क्या करती थीं?पूँजी जुटाती थीं, संयुक्त उद्यम कंपनियाँ लगाती थीं और उनका प्रबंधन सँभालती थीं
124पूँजी कौन देता था और फ़ैसले कौन लेता था?भारतीय वित्तपोषक पूँजी उपलब्ध कराते थे जबकि निवेश और व्यवसाय से संबंधित फ़ैसले यूरोपीय एजेंसियाँ लेती थीं
1251901 और 1946 में भारतीय फ़ैक्ट्रियों में कितने मज़दूर थे?1901 में 5,84,000 और 1946 में 24,36,000
126मज़दूर कहाँ से आते थे?ज़्यादातर औद्योगिक इलाक़ों में आसपास के ज़िलों से
1271911 में बंबई के सूती मज़दूर किस ज़िले से आते थे?50 प्रतिशत से ज़्यादा पास के रत्नागिरी ज़िले से
128मिल मज़दूर गाँव कब लौटते थे?फ़सलों की कटाई और त्योहारों के समय
129संयुक्त प्रांत के लोग कहाँ जाते थे?बंबई के कपड़ा मिलों और कलकत्ता के जूट मिलों में
130नौकरी पाना मुश्किल क्यों था?क्योंकि रोज़गार चाहने वालों की संख्या रोज़गारों के मुक़ाबले हमेशा ज़्यादा रहती थी और मिलों में प्रवेश भी निषिद्ध था
131जॉबर कौन होता था?कोई पुराना और विश्वस्त कर्मचारी, जिसे उद्योगपति नए मज़दूरों की भर्ती के लिए रखते थे
132जॉबर के चार काम क्या थे?गाँव से लोगों को लाना, काम का भरोसा देना, शहर में जमने में मदद करना और मुसीबत में पैसे से मदद करना
133जॉबर बाद में क्या करने लगे?मदद के बदले पैसे व तोहफ़ों की माँग करने लगे और मज़दूरों की ज़िंदगी को नियंत्रित करने लगे
134जॉबर के दूसरे नाम क्या थे?‘सरदार’ या ‘मिस्त्री’
135पहले विश्व युद्ध में मैनचेस्टर का आयात क्यों कम हो गया?क्योंकि ब्रिटिश कारख़ाने सेना की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए युद्ध संबंधी उत्पादन में व्यस्त थे
136पहले विश्व युद्ध में भारतीय बाज़ारों को क्या मिला?रातोंरात एक विशाल देशी बाज़ार
137भारतीय कारख़ानों में युद्ध के लिए क्या बनने लगा?फ़ौज के लिए जूट की बोरियाँ, वर्दी के कपड़े, टेंट और चमड़े के जूते, घोड़े व खच्चर की जीन तथा बहुत सारे अन्य सामान
138युद्ध के दौरान भारतीय कारख़ानों में क्या बदलाव आया?नए कारख़ाने लगाए गए, पुराने कई पालियों में चलने लगे, नए मज़दूर रखे गए और हरेक को पहले से ज़्यादा समय तक काम करना पड़ता था

समूह 11 — अनूठापन और विज्ञापन (कार्ड 139–152)

#प्रश्नउत्तर
139युद्ध के बाद मैनचेस्टर की क्या हालत हुई?भारतीय बाज़ार में उसे पहले वाली हैसियत कभी हासिल नहीं हो पाई
140ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था क्यों चरमराई?आधुनिकीकरण न कर पाने और अमेरिका, जर्मनी व जापान के मुक़ाबले कमज़ोर पड़ जाने के कारण
1411911 में कितने प्रतिशत बड़े उद्योग बंगाल और बंबई में थे?67 प्रतिशत
1421911 और 1931 में पंजीकृत फ़ैक्ट्रियों में कितनी श्रम शक्ति काम करती थी?1911 में 5 प्रतिशत और 1931 में 10 प्रतिशत
143पंजीकृत फ़ैक्ट्रियों के बाहर बाक़ी मज़दूर कहाँ काम करते थे?गली-मोहल्लों में स्थित छोटी-छोटी वर्कशॉप और घरेलू इकाइयों में
1441900 से 1940 के बीच हथकरघा उत्पादन का क्या हुआ?वह तीन गुना हो चुका था
145फ़्लाई शटल क्या है?रस्सियों और पुलियों के ज़रिए चलने वाला एक यांत्रिक औज़ार, जो क्षैतिज धागे (ताना) को लम्बवत् धागे (बाना) में पिरो देता है
146फ़्लाई शटल से क्या फ़ायदा हुआ?कामगारों की उत्पादन क्षमता बढ़ी, उत्पादन तेज़ हुआ और श्रम की माँग में कमी आई
1471941 में कितने भारतीय हथकरघों में फ़्लाई शटल थी?35 प्रतिशत से ज़्यादा; त्रावणकोर, मद्रास, मैसूर, कोचीन और बंगाल में 70 से 80 प्रतिशत तक
148कौन-से बुनकर मिलों से बेहतर मुक़ाबला कर पाते थे?महीन कपड़ा बनाने वाले, क्योंकि खाते-पीते तबक़े की माँग में उतार-चढ़ाव कम आते थे
149मिलें क्या नहीं बना सकती थीं?विशेष प्रकार की बुनाई — जैसे बुने हुए बॉर्डर वाली साड़ियाँ या मद्रास की प्रसिद्ध लुंगियाँ
150विज्ञापन क्या करते हैं?उत्पादों को ज़रूरी और वांछनीय बना देते हैं, लोगों की सोच बदल देते हैं और नयी ज़रूरतें पैदा कर देते हैं
151लेबल के तीन फ़ायदे क्या थे?कंपनी का नाम व उत्पादन की जगह पता चलती थी, लेबल गुणवत्ता का प्रतीक था, और ‘मेड इन मैनचेस्टर’ देखकर ख़रीदार को कोई डर नहीं रहता था
152भारतीय विज्ञापनों में क्या ख़ास था?उनमें राष्ट्रवादी संदेश साफ़ दिखाई देता था और वे स्वदेशी के वाहक बन गए थे

समूह 12 — केवल नाम (कार्ड 153–154) — आख़िरी दिन के लिए

#नामपहचान
153जमशेदजी जीजीभोयपारसी बुनकर के बेटे; चीन के व्यापार और जहाज़रानी का काम किया
154जे.एन. टाटा1912 में जमशेदपुर में भारत का पहला लौह एवं इस्पात संयंत्र स्थापित किया