अध्याय 5मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया

पाठ योजना17 मिनट

कक्षा: 10 · विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास) · पुस्तक: भारत और समकालीन विश्व–2 पाठ्यपुस्तक पृष्ठ: 105–128 · कुल कालांश: 11 (+1 पुनरावृत्ति) · माध्यम: हिंदी


अधिगम प्रतिफल (इस अध्याय के बाद विद्यार्थी क्या कर पाएगा)

#प्रतिफल
1बता पाएगा कि छपाई की तकनीक चीन, जापान और कोरिया में जन्मी और यूरोप वहाँ से सीखा।
2गुटेन्बर्ग प्रेस की बनावट और कार्य-विधि पूरे वाक्यों में लिख पाएगा।
3समझा पाएगा कि ‘मुद्रण क्रांति’ का मतलब सिर्फ़ मशीन नहीं, बल्कि सत्ता से लोगों का बदला हुआ रिश्ता है।
4यह तर्क दे पाएगा कि छपाई से कुछ लोग ख़ुश थे और कुछ डरते थे — और दोनों के कारण बता पाएगा।
5भारत में छपाई के आने से महिलाओं, ग़रीब जनता और सुधारकों पर पड़े असर को उदाहरण-सहित लिख पाएगा।
6वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट और गांधी के 1922 के कथन को राष्ट्रवाद से जोड़ पाएगा।
7यह समझ पाएगा कि इतिहास में कोई भी बदलाव सीधे-सीधे एक कारण से नहीं होता।

कालांश 1 — छपाई के बिना दुनिया कैसी होती?

उद्देश्य: विद्यार्थी को अपने चारों तरफ़ की छपी हुई चीज़ें दिखाकर अध्याय में प्रवेश कराना।

प्रवेश गतिविधि (7 मिनट) —

  • बच्चों से कहिए — “अपने बस्ते में जो कुछ है, उसमें से जो-जो छपा हुआ है, उसे मेज़ पर रखो।”
  • किताब, नोटबुक का कवर, पेन पर लिखा नाम, टिफ़िन के डिब्बे का लेबल, बस का टिकट — सब कुछ छपा हुआ है।
  • फिर पूछिए — “अगर छपाई नहीं होती, तो इनमें से क्या-क्या न होता?”

मुख्य शिक्षण (20 मिनट) —

  • पाठ्यपुस्तक का पहला अनुच्छेद (पृष्ठ 105) पढ़वाइए।
  • अध्याय के तीन प्रश्न बोर्ड पर लिखिए — यह इतिहास क्या है? मुद्रित सामग्री कब से चली? आधुनिक दुनिया बनाने में इसकी क्या भूमिका थी?
  • फिर दो वाक्य बोर्ड पर लिखिए और उन्हें पूरे अध्याय की धुरी बताइए —
    • लूथर: “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है।”
    • इरैस्मस: “किताबें भिनभिनाती मक्खियों की तरह हैं।”

समापन (8 मिनट) —

  • पूछिए — “आज भी क्या कोई चीज़ ऐसी है जिससे कुछ लोग ख़ुश हैं और कुछ डरते हैं?” (मोबाइल, सोशल मीडिया — बच्चे ख़ुद जोड़ लेंगे।)

गृहकार्य: घर की कोई पाँच छपी हुई चीज़ें लिखकर लाइए — और यह भी कि उनके बिना क्या मुश्किल होती।

कालांश 2 — छपाई कहाँ जन्मी: चीन, जापान, कोरिया

उद्देश्य: यह भ्रम तोड़ना कि छपाई यूरोप की देन है।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • 594 ई. — चीन में स्याही लगे काठ के ब्लॉक पर काग़ज़ रगड़कर छपाई।
  • काग़ज़ पतला था, दोनों तरफ़ नहीं छप सकता था — इसलिए ‘एकॉर्डियन’ शैली की किताब बनी।
  • चीनी राजतंत्र सबसे बड़ा उत्पादक क्यों था — सिविल सेवा परीक्षा की पूरी कड़ी बोर्ड पर बनाइए।
  • जापान — 768–770 ई. में तकनीक पहुँची; 868 ई. में डायमंड सूत्र।
  • कोरिया — त्रिपीटका कोरियाना (80,000 वुडब्लॉक) और जिक्जी (धातुई चलअक्षर, 14वीं सदी का अंत)।

बोर्ड-कार्य —

देशयोगदान
चीन594 ई. से वुडब्लॉक छपाई; सिविल सेवा परीक्षा की किताबें
जापान868 ई. का डायमंड सूत्र; एदो की शहरी छपाई
कोरियात्रिपीटका कोरियाना; धातुई चलअक्षर वाली जिक्जी

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. चीनी राजतंत्र मुद्रित सामग्री का सबसे बड़ा उत्पादक क्यों था?
  2. चीनी किताबें ‘एकॉर्डियन’ शैली में क्यों बनाई जाती थीं?

गृहकार्य: जिक्जी और गुटेन्बर्ग की बाइबिल — दोनों के बारे में तीन-तीन वाक्य लिखिए।

कालांश 3 — यूरोप में मुद्रण का आना: मार्को पोलो से गुटेन्बर्ग तक

उद्देश्य: पूरी तकनीकी शृंखला क्रम से बैठाना।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • क्रम बोर्ड पर बनाइए — ग्यारहवीं सदी काग़ज़ → 1295 मार्को पोलो → तख़्ती की छपाई → 1448 गुटेन्बर्ग प्रेस।
  • पांडुलिपि से माँग क्यों नहीं पूरी होती थी — पाँच कारण लिखवाइए (ख़र्चीली, समयसाध्य, श्रमसाध्य, नाज़ुक, सीमित सर्कुलेशन)।
  • गुटेन्बर्ग की कहानी सुनाइए — जैतून प्रेस → प्रिंटिंग प्रेस, सुनारी → धातुई अक्षर।
  • 1448 यंत्र तैयार; पहली किताब बाइबिल; 180 प्रतियाँ, तीन साल।

कक्षा-प्रयोग (5 मिनट) —

  • आलू पर कोई अक्षर काटकर स्याही लगाकर छापिए। फिर पूछिए — “अगर मुझे दूसरा शब्द छापना हो तो?”
  • यहीं से ‘मूवेबल टाइप’ का अर्थ अपने आप समझ आ जाएगा।

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. वुडब्लॉक प्रिंट यूरोप में 1295 के बाद क्यों आई? (अभ्यास प्रश्न 1-क)
  2. गुटेन्बर्ग ने अपने पुराने अनुभव का इस्तेमाल आविष्कार में कैसे किया?

गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 2-क — ‘गुटेन्बर्ग प्रेस’ पर छोटी टिप्पणी लिखिए।

कालांश 4 — मुद्रण क्रांति और नया पाठक वर्ग

उद्देश्य: ‘क्रांति’ शब्द का अर्थ तकनीक से हटाकर समाज पर ले जाना।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • मुद्रण क्रांति की परिभाषा शब्दश: लिखवाइए (सूचना-ज्ञान, संस्था-सत्ता, लोकचेतना)।
  • नया पाठक वर्ग कैसे बना — पाँच कड़ी वाली शृंखला।
  • साक्षरता की दीवार और मुद्रकों का चतुर हल — लोकगीत, सचित्र किताबें, शराबघरों में गाया-सुनाया जाना।
  • मुख्य वाक्य लिखवाइए — “अगर पहले की जनता श्रोता थी, तो अब पाठक-जनता अस्तित्व में आ गई थी।”

कक्षा-संवाद —

  • पूछिए — “क्या आज भी ऐसा होता है कि कोई पढ़कर सुनाता है और बाक़ी सुनते हैं?” (गाँव में अख़बार, धार्मिक पाठ — बच्चे उदाहरण देंगे।)

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. मुद्रण क्रांति क्या थी?
  2. मौखिक और मुद्रित संस्कृति के बीच की रेखा धुँधली कैसे पड़ी?

गृहकार्य: 04-रिवीजन नोट्स के भाग 3 और 4 पढ़कर आइए।

कालांश 5 — प्रिंट का डर: लूथर, मेनोकियो और इरैस्मस (सबसे महत्त्वपूर्ण कालांश)

उद्देश्य: यह समझाना कि नयी तकनीक सत्ता को क्यों डराती है।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • पहले लूथर — पिच्चानवे स्थापनाएँ, विटेनबर्ग का दरवाज़ा, प्रोटेस्टेंट धर्मसुधार, 5000 प्रतियाँ।
  • फिर मेनोकियो की कहानी पूरी सुनाइए — एक किसान, किताबें, अपनी व्याख्या, इन्क्वीज़ीशन, मौत की सज़ा।
  • फिर इरैस्मस का स्रोत-क पढ़वाइए।
  • 1558 — प्रतिबंधित किताबों की सूची।

बोर्ड-कार्य — दो ख़ाने बनाइए

छपाई के पक्ष मेंछपाई से डरने वाले
मार्टिन लूथररोमन कैथलिक चर्च
मर्सिएइरैस्मस
ज्ञानोदय के चिंतकधर्मगुरु और सम्राट

कक्षा-संवाद (10 मिनट) —

  • चर्चा करें (पृष्ठ 113): “छपाई से विरोधी विचारों के प्रसार को किस तरह बल मिलता था?”

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. रोमन कैथलिक चर्च ने प्रतिबंधित किताबों की सूची क्यों रखनी शुरू की? (अभ्यास प्रश्न 1-ग)
  2. मार्टिन लूथर मुद्रण के पक्ष में क्यों था? (अभ्यास प्रश्न 1-ख)

गृहकार्य: मेनोकियो की कहानी अपने शब्दों में छह वाक्यों में लिखिए।

कालांश 6 — पढ़ने का जुनून और फ़्रांसीसी क्रांति

उद्देश्य: इतिहास में ‘सीधा कारण’ न होने की समझ देना।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • साक्षरता 60–80% तक कैसे पहुँची।
  • सस्ती किताबों की तालिका — पंचांग, चैपबुक, चैपमेन, बिब्लियोथीक ब्ल्यू।
  • मर्सिए के दोनों कथन बोर्ड पर।
  • फ़्रांसीसी क्रांति के तीन तर्क क्रम से।
  • और फिर सबसे ज़रूरी — पाठ्यपुस्तक की सावधानी: “लोग-बाग़ हर तरह की सामग्री पढ़ते थे।”

कक्षा-प्रयोग —

  • पूछिए — “अगर एक ही किताब दस लोग पढ़ें, तो क्या दसों एक जैसा सोचेंगे?”
  • बच्चों के उत्तर से ही पाठ्यपुस्तक का निष्कर्ष निकल आएगा — “मुद्रण ने उनके मानस को सीधे तौर पर भले नहीं रचा हो, पर इसने अलग ढंग से सोचने की संभावनाएँ ज़रूर खोलीं।”

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. मुद्रण संस्कृति ने फ़्रांसीसी क्रांति के लिए ज़मीन कैसे तैयार की — तीन तर्क दीजिए।
  2. इन तर्कों की एक सीमा भी बताइए।

गृहकार्य: चर्चा करें (पृष्ठ 116) का उत्तर आठ-दस वाक्यों में लिखिए।

कालांश 7 — उन्नीसवीं सदी: बच्चे, महिलाएँ, मज़दूर और नयी मशीनें

उद्देश्य: नए पाठक वर्गों और तकनीकी परिष्कार दोनों को जोड़ना।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • बच्चे — अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा; फ़्रांस 1857 का बाल-प्रेस; ग्रिम बंधु और 1812 का संकलन।
  • यहाँ रुककर वह गहरी बात कहिए — “छपने से लोककथाएँ दर्ज तो हुईं, पर बदल भी गईं।”
  • महिलाएँ — पेनी मैगज़ीन; जेन ऑस्टिन, ब्रॉण्ट बहनें, जॉर्ज इलियट; नयी नारी की तीन पहचान।
  • मज़दूर — किराए के पुस्तकालय; बॉक्स 3 (थॉमस वुड और गोर्की) ज़रूर पढ़वाइए।
  • तकनीक की तालिका — धातु का प्रेस → 8000 शीट → ऑफ़सेट छह रंग → बिजली के प्रेस।
  • बेचने के गुर — धारावाहिक उपन्यास, शिलिंग शृंखला, डस्ट कवर, 1930 की मंदी और पेपरबैक।

अंतर-अध्याय जोड़ —

  • अध्याय 3 से — 1929 की महामंदी। अध्याय 4 से — विज्ञापन और उपभोक्ता। यहाँ दोनों एक साथ दिखते हैं।

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. उन्नीसवीं सदी में बच्चे पाठकों की अहम श्रेणी कैसे बने?
  2. 1930 की मंदी का किताबों के प्रकाशन पर क्या असर हुआ?

गृहकार्य: तकनीकी परिष्कार की तालिका याद करके आइए — अगले दिन मौखिक जाँच होगी।

कालांश 8 — भारत का मुद्रण संसार: पांडुलिपि से प्रेस तक

उद्देश्य: अध्याय के भारतीय हिस्से में प्रवेश।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • पांडुलिपियाँ — ताड़ के पत्ते, हाथ का काग़ज़, चार समस्याएँ।
  • बंगाल की पाठशालाओं का उदाहरण — “कई-सारे लोग बिना कोई किताब पढ़े साक्षर बन जाते थे।” यह वाक्य बच्चों को चौंकाता है, इसे ज़रूर रुककर समझाइए।
  • छपाई भारत आई — गोवा 16वीं सदी, 1579 तमिल, 1674 तक 50 किताबें, 1713 मलयालम, 32 डच तमिल किताबें।
  • हिक्की का बंगाल गजट (1780) और वॉरेन हेस्टिंग्स का मुक़दमा।
  • गंगाधर भट्टाचार्य का बंगाल गजट — भारतीयों का पहला प्रयास।

बोर्ड-कार्य — भारत में छपाई का क्रम तालिका में लिखवाइए।

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. भारत में प्रिंटिंग प्रेस पहले-पहल कैसे और किसके साथ आई?
  2. हिक्की पर मुक़दमा क्यों हुआ?

गृहकार्य: पांडुलिपि और छपी किताब में चार अंतर तालिका बनाकर लिखिए।

कालांश 9 — धार्मिक सुधार और सार्वजनिक बहसें

उद्देश्य: यह दिखाना कि छपाई ने बहस को सार्वजनिक बनाया।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • तीन कड़ी — नए विचारों का प्रसार, बहस की शक्ल तय हुई, जन-समुदाय शामिल हुआ।
  • हिंदू सुधार-बहस — संवाद कौमुदी (1821) बनाम समाचार चंद्रिका।
  • उलमा की चिंता और देवबंद (1867) के फ़तवे।
  • तुलसीदास का रामचरितमानस — पहला मुद्रित संस्करण 1810, कलकत्ता; नवल किशोर प्रेस और श्री वेंकटेश्वर प्रेस।
  • अंतिम दो वाक्य लिखवाइए — छपाई ने बाँटा भी और जोड़ा भी।

स्रोत-कार्य (10 मिनट) —

  • स्रोत-घ के दोनों उद्धरण पढ़वाइए और पूछिए — “1849 में अख़बार का काम क्या बताया गया, और 1870 में क्या?”

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. छपाई ने धार्मिक बहसों को किस तरह बदला?
  2. उलमा ने लिथोग्राफ़ी प्रेस का इस्तेमाल क्यों किया?

गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 3-ग (सुधारक) का उत्तर लिखिए।

कालांश 10 — महिलाएँ, ग़रीब जनता और प्रकाशन के नए रूप

उद्देश्य: अध्याय का सबसे संवेदनशील हिस्सा — इसे भावनात्मक रूप से जोड़कर पढ़ाइए।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • उपन्यास और नयी विधाएँ; राजा रवि वर्मा; कार्टून और कैरिकेचर; चित्र 18 (इंडियन शारिवारी)।
  • महिलाएँ — पहले सकारात्मक पक्ष, फिर विरोध का पक्ष।
  • राससुन्दरी देबी की कहानी पूरी सुनाइए — रसोई में छिपकर पढ़ना, आमार जीबोन (1876)।
  • कैलाशबाशिनी देवी, ताराबाई शिंदे, पंडिता रमाबाई।
  • पर संतुलन ज़रूर दिखाइए — स्त्री धर्म विचार जैसी किताबें आज्ञाकारिता भी सिखाती थीं।
  • ग़रीब जनता — फुले की गुलामगिरी (1871), अंबेडकर, पेरियार, काशीबाबा (1938), सुदर्शन चक्र, बंगलौर के मज़दूरों के पुस्तकालय।

स्रोत-कार्य —

  • स्रोत-ङ (बेगम रोकैया) पढ़वाइए और उनके तर्क का ढाँचा पूछिए।

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. उन्नीसवीं सदी में मुद्रण-संस्कृति का महिलाओं के लिए क्या मतलब था? (अभ्यास प्रश्न 3-क)
  2. ग़रीब जनता पर मुद्रण संस्कृति का क्या असर हुआ? (अभ्यास प्रश्न 3-ख)

गृहकार्य: राससुन्दरी देबी पर आठ वाक्य लिखिए।

कालांश 11 — प्रिंट और प्रतिबंध: सरकार को डर किससे था

उद्देश्य: अध्याय को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़कर समाप्त करना।

मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —

  • पहले वह चौंकाने वाली बात — पहली सेंसरशिप अंग्रेज़ों पर लगी थी, भारतीयों पर नहीं।
  • 1820 का दशक → 1835 बेंटिंक और मेकॉले → 1857 के बाद रवैया बदला → 1878 वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट।
  • क़ानून ने क्या अधिकार दिए — चेतावनी, ज़ब्ती, मशीनें छीनना।
  • तिलक — 1907 कालापानी, केसरी, 1908 क़ैद।
  • बॉक्स 5 की तालिका — 22/18 अख़बार, 1919 रॉलट, अगस्त 1942 में 90 अख़बार।
  • स्रोत-च — गांधी 1922 का कथन।

समापन-संवाद (10 मिनट) —

  • चर्चा करें (पृष्ठ 128, प्रश्न 4): “मुद्रण संस्कृति ने भारत में राष्ट्रवाद के विकास में क्या मदद की?”
  • बोर्ड पर वापस वही दो वाक्य लिखिए जिनसे कालांश 1 में शुरुआत हुई थी — लूथर और इरैस्मस।
  • पूछिए — “अब तुम किसके साथ हो?” बच्चे दोनों तरफ़ के तर्क देंगे — यही इस अध्याय की सफलता है।

मूल्यांकन प्रश्न —

  1. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट क्या था? (अभ्यास प्रश्न 2-ग)
  2. गांधी ने प्रेस की आज़ादी को स्वराज की लड़ाई क्यों कहा? (अभ्यास प्रश्न 1-घ)

गृहकार्य: पूरे अध्याय की तालिका (मास्टर नोट्स भाग 10) याद करके आइए।

कालांश 12 (वैकल्पिक) — पुनरावृत्ति और परीक्षा-अभ्यास

  • फ्लैशकार्ड (फ़ाइल 06) से 15 मिनट की तेज़ मौखिक जाँच।
  • प्रश्न बैंक (फ़ाइल 05) का नमूना पत्र 1 कक्षा में हल करवाइए।
  • तिथियों की तालिका (मास्टर नोट्स भाग 14) की लिखित जाँच।

कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सहायता

समस्याक्या कीजिए
विदेशी नाम याद नहीं रहते (गुटेन्बर्ग, इरैस्मस, मेनोकियो, मर्सिए)हर नाम के साथ एक चित्र या एक क्रिया जोड़िए — गुटेन्बर्ग = प्रेस, इरैस्मस = मक्खी, मेनोकियो = सज़ा, मर्सिए = “काँपने का वक़्त”।
तिथियाँ आपस में गड्डमड्ड हो जाती हैंसिर्फ़ छह तिथियाँ अनिवार्य रखिए — 594, 1295, 1448, 1780, 1878, 1942। बाक़ी बाद में।
चीन-जापान-कोरिया अलग नहीं कर पातेतीन शब्द दीजिए — चीन = परीक्षा, जापान = डायमंड सूत्र, कोरिया = धातु के अक्षर।
“मुद्रण क्रांति” का अर्थ पकड़ में नहीं आतातीन शब्द बोर्ड पर लिखिए — सूचना, सत्ता, सोच। कहिए — “तीनों से रिश्ता बदला, इसी को क्रांति कहते हैं।”
लंबे उत्तर लिखने में डर लगता है05-प्रश्न बैंक के मॉडल उत्तर पहले नक़ल करवाइए, फिर याद, फिर अपने शब्दों में।
भारत वाला हिस्सा बहुत लंबा लगता हैउसे तीन नामों पर टिकाइए — राममोहन राय (बहस), राससुन्दरी देबी (महिलाएँ), काशीबाबा (मज़दूर)।

शिक्षण-सामग्री

सामग्रीउपयोग
पाठ्यपुस्तक के चित्र 5, 6, 7, 8गुटेन्बर्ग और उसकी प्रेस — कालांश 3
चित्र 9 और 10प्रिंट का उत्सव और प्रिंट का डर — कालांश 5
चित्र 11फ़्रांसीसी क्रांति का कार्टून — कालांश 6
चित्र 12 और 13पेनी मैगज़ीन और विज्ञापन — कालांश 7
चित्र 14, 15, 16भारतीय पांडुलिपियाँ — कालांश 8
चित्र 17, 18रवि वर्मा और इंडियन शारिवारी — कालांश 10
चित्र 19, 20, 21तीन काष्ठचित्र, गतिविधि — कालांश 10
आलू और स्याहीमूवेबल टाइप का कक्षा-प्रयोग — कालांश 3
कोई पुराना अख़बारबॉक्स 3 (थॉमस वुड) समझाने के लिए — कालांश 7

मूल्यांकन-संकेतक

स्तरविद्यार्थी क्या कर रहा है
प्रारंभिकतिथियाँ और नाम बता पाता है, पर उन्हें जोड़ नहीं पाता।
विकासशीलकारण बता पाता है, उदाहरण देता है, पर दोनों पक्ष नहीं रख पाता।
दक्षछपाई के पक्ष और विपक्ष दोनों के तर्क देता है, और उदाहरणों से सिद्ध करता है।
उन्नतयह कह पाता है कि छपाई ने बाँटा भी और जोड़ा भी; और आज के मीडिया से तुलना कर पाता है।

शिक्षक के लिए अंतिम सुझाव

  • इस अध्याय को याद करने की सूची मत बनने दीजिए। यह एक बहस है, और बहस पढ़ाई नहीं जाती — करवाई जाती है।
  • हर कालांश में कम से कम एक बार पूछिए — “इसमें कौन डर रहा था, और क्यों?”
  • मेनोकियो और राससुन्दरी देबी — ये दो कहानियाँ अगर बच्चों के मन में बैठ गईं, तो अध्याय पूरा हो गया समझिए।
  • अंत में आज से जोड़िए — “आज छपाई की जगह मोबाइल है। तब चर्च डरता था, आज कौन डरता है?” यह सवाल बच्चों को इतिहास का असली मतलब समझा देता है।