ये प्रश्न रटकर हल नहीं होते। इनमें आपको आँकड़े पढ़ना, तुलना करना, पक्ष लेना और कारण देना है। पहले अपना उत्तर ख़ुद लिखिए, फिर नीचे दिया उत्तर खोलकर मिलाइए। अंक सिर्फ़ यह अंदाज़ा देते हैं कि उत्तर कितना लंबा हो।
तारों का मतलब: ★वाली पंक्ति उत्तर की मुख्य बात है; दोहराते समय पहले वही पढ़िए।
भाग क — केस-आधारित प्रश्न
केस 1 — गेहूँ से बिस्कुट तक (पृष्ठ 22–23)
किताब का उदाहरण: एक किसान गेहूँ 20 रुपये प्रति कि.ग्रा. के भाव से आटा-मिल को बेचता है। मिल गेहूँ पीसकर आटा 25 रुपये प्रति कि.ग्रा. के भाव से बिस्कुट कंपनी को बेचती है। कंपनी आटे में चीनी और तेल मिलाकर बिस्कुट के 4 पैकेट बनाती है और उन्हें उपभोक्ताओं को 80 रुपये में (20 रुपये प्रति पैकेट) बेचती है।
गेहूँ और आटा मध्यवर्ती वस्तुएँ हैं; बिस्कुट अंतिम वस्तु है, क्योंकि वह उपभोक्ता तक पहुँचता है।
1मान लीजिए एक विद्यार्थी लिखता है कि इस पूरी शृंखला से स.घ.उ. में 20 + 25 + 80 = 125 रुपये जुड़े। (यह विद्यार्थी काल्पनिक है; भाव किताब के हैं।) उसकी चूक कहाँ है? 2 अंक
उत्तर देखिए
स.घ.उ. में सिर्फ़ अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ गिनी जाती हैं। किताब की परिभाषा है: “यह किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य है।” (पृष्ठ 23)
★बिस्कुट के 80 रुपये में आटे के 25 रुपये पहले से शामिल हैं, और आटे के 25 रुपये में गेहूँ के 20 रुपये। तीनों जोड़ने पर एक ही मूल्य कई बार गिना जाता है। सही योगदान 80 रुपये है।
2किताब पूछती है (पृष्ठ 23) कि मूल्य की विधि से हर चरण में जोड़े गए मूल्य की गणना कैसे करेंगे। मान लीजिए चारों पैकेट 1 कि.ग्रा. आटे से बने, और चीनी-तेल का मूल्य अभी छोड़ दीजिए। हर चरण में जोड़ा गया मूल्य निकालिए और उनका जोड़ देखिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
हर चरण में जोड़ा गया मूल्य = उस चरण का बिक्री मूल्य − उसमें लगी मध्यवर्ती वस्तु का मूल्य।
किसान: 20 रुपये (गेहूँ)।
आटा-मिल: 25 − 20 = 5 रुपये।
बिस्कुट कंपनी: 80 − 25 = 55 रुपये।
★जोड़: 20 + 5 + 55 = 80 रुपये, यानी ठीक अंतिम वस्तु का मूल्य। इसीलिए सिर्फ़ अंतिम वस्तु गिनना काफ़ी है; हर चरण का जोड़ा गया मूल्य उसमें आ चुका है।
3किताब (पृष्ठ 23) यह गड़बड़ वाक्यांश सही करने को कहती है: “उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की गणना करने के लिए हम उनकी संख्याओं को जोड़ देते हैं। हम विगत पाँच वर्षों में उत्पादित सभी वस्तुओं की गणना करते हैं। चूँकि हमें किसी चीज़ को छोड़ना नहीं चाहिए इसलिए हम इन वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य का योगफल प्राप्त करते हैं।” इसमें तीन ग़लतियाँ ढूँढ़िए। 3 अंक
उत्तर देखिए
संख्या नहीं, मूल्य: कारें, कीलें और फ़र्नीचर गिनती में आपस में नहीं जुड़ते, इसलिए उनका मूल्य जोड़ा जाता है (पृष्ठ 22)।
पाँच वर्ष नहीं, एक वर्ष: स.घ.उ. किसी एक विशेष वर्ष का होता है।
सभी वस्तुएँ नहीं, सिर्फ़ अंतिम: सब कुछ जोड़ने से मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य दो बार गिना जाएगा।
★सही वाक्य: हम किसी एक विशेष वर्ष में उत्पादित सिर्फ़ अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य जोड़ते हैं, ताकि किसी मूल्य की गणना दो बार न हो।
केस 2 — चालीस वर्षों में रोज़गार (पृष्ठ 24–26)
किताब का आलेख 3, रोज़गार में तीनों क्षेत्रकों की हिस्सेदारी (प्रतिशत):
1977–78: प्राथमिक 71 · द्वितीयक 11 · तृतीयक 18
2017–18: प्राथमिक 44 · द्वितीयक 25 · तृतीयक 31
साथ में किताब की दो बातें: 2017–18 में तृतीयक क्षेत्रक सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक बन गया (पृष्ठ 24), और उसी साल जी.वी.ए. में प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान लगभग एक-छठा रह गया (पृष्ठ 26)।
1आलेख 3 से बताइए: चालीस वर्षों में रोज़गार में किस क्षेत्रक का हिस्सा घटा, और 2017–18 में भी सबसे बड़ा नियोक्ता कौन है? 2 अंक
उत्तर देखिए
प्राथमिक क्षेत्रक का हिस्सा घटा: 71 से 44 प्रतिशत। द्वितीयक का हिस्सा 11 से 25 और तृतीयक का 18 से 31 प्रतिशत हुआ।
★फिर भी 2017–18 में सबसे ज़्यादा लोग, 44 प्रतिशत, प्राथमिक क्षेत्रक में हैं। वही आज भी सबसे बड़ा नियोक्ता है। पृष्ठ 26 के पाठ में यहाँ “आधे से अधिक श्रमिक” छपा है, पर आलेख 3 में 2017–18 का आँकड़ा 44 प्रतिशत है।
2एक विद्यार्थी कहता है: “2017–18 में तृतीयक क्षेत्रक सबसे बड़ा उत्पादक बन गया, इसलिए भारत में अब ज़्यादातर लोग सेवाओं में काम करते हैं।” (यह कथन काल्पनिक है।) इस तर्क को जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
तर्क ग़लत है; उत्पादन और रोज़गार दो अलग बातें हैं।
उत्पादन में तृतीयक सबसे आगे है, पर रोज़गार में उसका हिस्सा 31 प्रतिशत है, जबकि प्राथमिक का 44 प्रतिशत (आलेख 3)।
कारण: द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक में रोज़गार के पर्याप्त अवसर नहीं बने। सेवा क्षेत्रक में उत्पादन 14 गुना बढ़ा, पर रोज़गार 5 गुना से भी कम (पृष्ठ 26)।
★नतीजा उलटा है: सबसे ज़्यादा श्रमिक प्राथमिक क्षेत्रक में हैं, पर जी.वी.ए. में उसका योगदान लगभग एक-छठा ही है। यानी वहाँ ज़रूरत से ज़्यादा लोग लगे हैं।
3किताब पूछती है (पृष्ठ 27): विकसित देशों में जो बदलाव दिखा, उसकी भारत से तुलना कीजिए। भारत में क्षेत्रकों के बीच कौन-सा बदलाव होना चाहिए था, जो नहीं हुआ? 3 अंक
उत्तर देखिए
विकसित देशों में उत्पादन और रोज़गार, दोनों साथ बदले: पहले प्राथमिक, फिर द्वितीयक, और पिछले 100 वर्षों में तृतीयक की ओर; आज वहाँ ज़्यादातर श्रमजीवी लोग सेवा क्षेत्रक में हैं (पृष्ठ 23)।
भारत में उत्पादन तो तृतीयक की ओर गया, पर रोज़गार नहीं: 2017–18 में भी 44 प्रतिशत लोग प्राथमिक क्षेत्रक में थे।
★होना यह चाहिए था कि द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक में इतने रोज़गार बनते कि खेती से लोग वहाँ जा सकते। ऐसा नहीं हुआ, इसलिए खेती में अल्प बेरोज़गारी है।
केस 3 — लक्ष्मी का खेत (पृष्ठ 26–28)
लक्ष्मी एक छोटी किसान है। उसके पास दो हेक्टेयर असिंचित भूमि है, जो सिर्फ़ वर्षा पर निर्भर है; वह ज्वार और अरहर उगाती है। परिवार के पाँचों सदस्य साल भर उसी खेत पर काम करते हैं, क्योंकि उनके पास कोई और काम नहीं। भूस्वामी सुखराम परिवार के एक या दो सदस्यों को अपनी ज़मीन पर काम के लिए ले जाता है, तो भी लक्ष्मी के खेत का उत्पादन नहीं घटता, और परिवार की आय बढ़ जाती है।
किताब आगे बताती है: एक हेक्टेयर में गेहूँ की फसल दो लोगों को 50 दिन का काम देती है (पृष्ठ 27); और बीज, उर्वरक, उपकरण और पम्पसेट के लिए लक्ष्मी को साहूकार से ऊँचे ब्याज पर उधार लेना पड़ता है (पृष्ठ 28)।
1लक्ष्मी के परिवार में हर कोई काम पर है। फिर भी किताब इसे बेरोज़गारी क्यों कहती है? 2 अंक
उत्तर देखिए
परिवार का हर सदस्य कुछ काम कर रहा है, पर सब अपनी क्षमता से कम काम कर रहे हैं; किसी को पूरा रोज़गार नहीं मिला। यह अल्प बेरोज़गारी है।
★पहचान यह है कि दो सदस्य खेत से चले जाएँ, तो भी उत्पादन नहीं घटता; यानी वे खेत पर ज़रूरी नहीं थे। बेरोज़गारी दिखती नहीं, क्योंकि सब काम पर लगे दिखते हैं। किताब कहती है: “इस प्रकार की अल्प बेरोज़गारी को छिपी हुई बेरोज़गारी कहते हैं” (पृष्ठ 26)।
2मान लीजिए (काल्पनिक) गाँव में एक कुआँ खुद जाता है, और लक्ष्मी रबी में अपनी ज़मीन के एक हेक्टेयर में गेहूँ बोती है। किताब के आँकड़े से बताइए कि परिवार को कितना नया काम मिलेगा। क्या लक्ष्मी के लिए सिर्फ़ पानी काफ़ी है? 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब के अनुसार एक हेक्टेयर गेहूँ दो लोगों को 50 दिन का काम देता है (पृष्ठ 27)। यानी परिवार के दो सदस्यों को अपने ही खेत पर 50-50 दिन का नया काम मिलेगा, और दूसरी फसल से आय भी बढ़ेगी।
★सिर्फ़ पानी काफ़ी नहीं। बीज, उर्वरक, उपकरण और पम्पसेट के लिए लक्ष्मी साहूकार से ऊँचे ब्याज पर उधार लेती है (पृष्ठ 28)। इसलिए उसे स्थानीय बैंक से उचित ब्याज पर कृषि साख भी चाहिए।
फसल बेचने के लिए अच्छी ग्रामीण सड़कें, परिवहन और भण्डारण भी चाहिए, ताकि उपज ठीक कीमत पर बिके।
3अल्प बेरोज़गारी सिर्फ़ गाँवों में नहीं है। किताब से शहर के दो उदाहरण दीजिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
सेवा क्षेत्रक में हज़ारों अनियत श्रमिक, जैसे प्लम्बर, पेन्टर और मरम्मत करने वाले, रोज़ काम खोजते हैं, और कई को रोज़ काम नहीं मिलता (पृष्ठ 26)।
★सड़कों पर ठेला खींचने या चीज़ें बेचने वाले लोग, “जहाँ वे पूरा दिन बिता देते हैं, परन्तु बहुत कम कमा पाते हैं।” (पृष्ठ 26)
केस 4 — कान्ता और कमल (पृष्ठ 30–31)
कान्ता एक कार्यालय में काम करती है: सुबह 9.30 से शाम 5.30 तक, हर माह के अंत में नियमित वेतन, भविष्य निधि, चिकित्सीय और अन्य भत्ते, रविवार को सवेतन अवकाश, और नियुक्ति-पत्र जिसमें काम की शर्तें लिखी हैं।
कमल एक किराना दुकान पर काम करता है: सुबह 7.30 से शाम 8 बजे तक, दैनिक मज़दूरी, जिस दिन काम नहीं उस दिन पैसा नहीं, मज़दूरी के सिवा कोई भत्ता नहीं, कोई छुट्टी नहीं, कोई औपचारिक पत्र नहीं, और उसे कभी भी काम से हटाया जा सकता है।
1कान्ता और कमल किस-किस क्षेत्रक में हैं? यह बँटवारा किस कसौटी पर हुआ? 2 अंक
उत्तर देखिए
★कान्ता संगठित क्षेत्रक में है, कमल असंगठित में। कसौटी रोज़गार की परिस्थितियाँ हैं: काम की शर्तें क्या हैं, और नियम माने जाते हैं या नहीं। संगठित क्षेत्रक में रोज़गार नियमित है और सरकारी नियमों का पालन होता है; असंगठित में नियम हैं, पर उनका पालन नहीं होता (पृष्ठ 30–31)।
2मान लीजिए (काल्पनिक) कान्ता और कमल, दोनों एक महीने बीमार रहते हैं। दोनों पर क्या असर पड़ेगा? किताब के आधार पर लिखिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कान्ता: उसका रोज़गार सुरक्षित है और नियुक्ति-पत्र में शर्तें लिखी हैं। संगठित क्षेत्रक के कर्मचारियों को सवेतन छुट्टी और चिकित्सीय लाभ मिलते हैं, और कान्ता को चिकित्सीय भत्ते भी (पृष्ठ 30–31)।
कमल: दैनिक मज़दूरी है, इसलिए जिस दिन काम नहीं, उस दिन पैसा नहीं; महीने भर कोई आय नहीं। बीमारी की छुट्टी या भत्ता नहीं, और नियोक्ता उसे हटा भी सकता है।
★बीमारी एक जैसी, असर बिलकुल अलग। इसीलिए किताब कहती है कि असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को संरक्षण और सहायता चाहिए (पृष्ठ 32)। किताब की प्रश्नावली का प्रश्न 22 भी मज़दूरी, सुरक्षा और स्वास्थ्य पर संरक्षण की बात पूछता है।
3किताब की पृष्ठ 31 वाली तालिका 1990 के अंत के अनुमान देती है, श्रमिकों की संख्या दस लाख में। संगठित क्षेत्रक में प्राथमिक 1, द्वितीयक 41, तृतीयक 40 (कुल 82); असंगठित में द्वितीयक 74, तृतीयक 88; और तीनों क्षेत्रकों के कुल श्रमिक 232, 115, 128 हैं। (क) असंगठित प्राथमिक, कुल असंगठित और कुल श्रमिक निकालिए। (ख) असंगठित क्षेत्रक में कितने प्रतिशत श्रमिक हैं? 3 अंक
उत्तर देखिए
(क) असंगठित प्राथमिक: 232 − 1 = 231; कुल असंगठित: 231 + 74 + 88 = 393; कुल श्रमिक: 82 + 393 = 475 (दस लाख)।
(ख) 393 ÷ 475 × 100 = 82.7, यानी लगभग 83 प्रतिशत; संगठित में 82 ÷ 475 × 100 = 17.3, यानी लगभग 17 प्रतिशत।
★हर छह में से लगभग पाँच श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में थे, और प्राथमिक क्षेत्रक के 232 में से 231 असंगठित। प्राथमिक क्षेत्रक का काम लगभग पूरा असंगठित क्षेत्रक में है।
भाग ख — तर्क और मूल्यांकन
1“जो व्यक्ति अपना काम ख़ुद करता है, वह हमेशा असंगठित क्षेत्रक में होता है।” (यह कथन काल्पनिक है।) क्या आप सहमत हैं? 3 अंक
उत्तर देखिए
नहीं।
किताब की परिभाषा से, अपना काम करने वाले लोग भी संगठित क्षेत्रक में हो सकते हैं, अगर वे सरकार के पास पंजीकृत हैं और नियमों का पालन करते हैं (पृष्ठ 30)।
इसी नियम से किताब के प्रश्न 5 की सूरत वाली तालिका में औपचारिक अधिकार-पत्र वाली दुकानें, कार्यालय और क्लिनिक संगठित क्षेत्रक में रखे जाएँगे।
हाँ, बहुत से अपना काम करने वाले, जैसे सड़क पर बेचने या मरम्मत करने वाले, असंगठित क्षेत्रक में हैं (पृष्ठ 31)।
★कसौटी यह नहीं कि काम कौन करता है; कसौटी पंजीकरण और नियमों का पालन है।
2“सेवा क्षेत्रक तेज़ी से बढ़ रहा है, इसलिए सेवा क्षेत्रक में काम करने वाले सभी लोगों की हालत अच्छी है।” (यह कथन काल्पनिक है।) इस कथन को जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
यह कथन सही नहीं है। सेवा क्षेत्रक दो तरह के लोगों को काम देता है (पृष्ठ 25):
सीमित संख्या में ऐसी सेवाएँ, जिनमें बहुत कुशल और शिक्षित श्रमिकों को रोज़गार मिलता है।
बहुत बड़ी संख्या में ऐसे लोग, जो छोटी दुकानों, मरम्मत और परिवहन जैसे कामों में लगे हैं और मुश्किल से गुज़ारा कर पाते हैं, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा अवसर नहीं।
★किताब के अनुसार सेवा क्षेत्रक के कुछ ही भागों का महत्त्व बढ़ रहा है। उत्पादन बढ़ने का मतलब यह नहीं कि उसमें काम करने वाले हर व्यक्ति की आय बढ़ी।
3“सरकार को भी हर काम लाभ के लिए करना चाहिए, जैसे निजी कंपनी करती है।” (यह कथन काल्पनिक है।) किताब के आधार पर अपनी राय दीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
सहमत नहीं। सार्वजनिक क्षेत्रक का ध्येय सिर्फ़ लाभ कमाना नहीं है; उसका ख़र्च करों या दूसरे तरीकों से पूरा होता है (पृष्ठ 33)। किताब तीन कारण देती है (पृष्ठ 33–34):
बहुत महँगी सुविधाएँ: सड़कें, पुल, रेलवे, पत्तन, बिजली और बाँध से सिंचाई निजी क्षेत्रक की क्षमता से बाहर हैं, और निजी क्षेत्रक दे भी, तो ऊँची कीमत लेगा।
समर्थन: उत्पादन-मूल्य पर बिजली बिके, तो बहुत से उद्योगों की उत्पादन-लागत बढ़ सकती है और अनेक इकाइयाँ, ख़ासकर छोटी इकाइयाँ, बंद हो सकती हैं; किसानों से उचित मूल्य पर गेहूँ और चावल ख़रीदकर राशन की दुकानों पर कम मूल्य पर बेचने से किसान और उपभोक्ता, दोनों को सहायता मिलती है।
★स्वास्थ्य और शिक्षा: किताब कहती है: “इन पर व्यय करना सरकार की अनिवार्यता है।” (पृष्ठ 34) ओडिशा (36) और मध्य प्रदेश (43) की शिशु मृत्यु दर विश्व के कुछ सबसे निर्धन भागों से भी ज़्यादा है, और भारत के लगभग आधे बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।
4मान लीजिए (काल्पनिक) आपके ज़िले में खेती पर निर्भर बहुत से परिवार अल्प बेरोज़गारी में हैं। किताब के सुझावों में से आप कौन-से दो पहले लागू करेंगे, और क्यों? एक सुझाव जल्दी असर वाला हो, एक लंबे समय वाला। 4 अंक
उत्तर देखिए
इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है; अंक इस बात के हैं कि चुनाव का कारण किताब से दिया गया हो। एक उत्तर ऐसा हो सकता है:
जल्दी असर वाला: काम का अधिकार। किताब कहती है कि चर्चा किए गए कुछ सुझावों के अमल में लंबा समय लगेगा, इसलिए छोटी अवधि के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 625 जिलों में काम का अधिकार लागू करने का कानून बनाया: ग्रामीण क्षेत्रों में साल में 100 दिन के रोज़गार की गारंटी, और काम न मिले तो बेरोज़गारी भत्ता (पृष्ठ 29)। 2025 में इस अधिनियम का स्थान विकसित भारत - जी राम जी 2025 ने ले लिया।
लंबे समय वाला: सिंचाई और अर्द्ध-ग्रामीण उद्योग। कुआँ, बाँध या नहर से रबी में दूसरी फसल होगी; दाल मिल, शीत भण्डारण और शहद संग्रह केन्द्र जैसे उद्योग खेती के बाहर काम देंगे (पृष्ठ 27–28)।
★चाहें तो शिक्षा भी चुन सकते हैं: किताब के अनुसार अकेले शिक्षा क्षेत्र में लगभग 20 लाख रोज़गार बन सकते हैं, और पर्यटन सुधरे तो हर साल 35 लाख से ज़्यादा लोगों को अतिरिक्त काम मिल सकता है (पृष्ठ 29)।
भाग ग — तुलना और वर्गीकरण
1अध्याय आर्थिक गतिविधियों को तीन अलग कसौटियों से बाँटता है। नीचे के हर व्यक्ति को तीनों पर रखिए। 3 अंक
| व्यक्ति | कार्य का स्वभाव | रोज़गार की परिस्थिति | स्वामित्व |
|---|---|---|---|
| लक्ष्मी, अपने खेत पर (पृष्ठ 26) | |||
| कमल, किराना दुकान पर दैनिक मज़दूरी (पृष्ठ 30) | |||
| किसी निजी कंपनी के बड़े कारखाने का नियमित श्रमिक | |||
| सरकारी स्कूल का शिक्षक | |||
| रेलवे का नियमित कर्मचारी |
उत्तर देखिए
| व्यक्ति | कार्य का स्वभाव | रोज़गार की परिस्थिति | स्वामित्व |
|---|---|---|---|
| लक्ष्मी, अपने खेत पर (पृष्ठ 26) | प्राथमिक | असंगठित | निजी |
| कमल, किराना दुकान पर दैनिक मज़दूरी (पृष्ठ 30) | तृतीयक (व्यापार) | असंगठित | निजी |
| किसी निजी कंपनी के बड़े कारखाने का नियमित श्रमिक | द्वितीयक | संगठित | निजी |
| सरकारी स्कूल का शिक्षक | तृतीयक | संगठित | सार्वजनिक |
| रेलवे का नियमित कर्मचारी | तृतीयक (परिवहन) | संगठित | सार्वजनिक |
★ये तीन अलग बँटवारे हैं, एक ही सूची के तीन नाम नहीं। एक ही व्यक्ति तीनों में अलग-अलग जगह आता है: कमल तृतीयक भी है, असंगठित भी और निजी भी।
संगठित-असंगठित रोज़गार की परिस्थितियों से बँटते हैं, और सार्वजनिक-निजी स्वामित्व से (पृष्ठ 30, 33)। दोनों को मिलाइए मत।
2इन लोगों को बाँटिए: खुली बेरोज़गारी, या छिपी हुई (प्रच्छन्न) बेरोज़गारी? कारण भी लिखिए। 3 अंक
| व्यक्ति | किस तरह की बेरोज़गारी | कारण |
|---|---|---|
| लक्ष्मी के परिवार के पाँचों सदस्य, एक छोटे खेत पर (पृष्ठ 26) | ||
| एक युवक, जिसके पास कोई काम नहीं और जो बेकार बैठा है (काल्पनिक) | ||
| शहर का एक पेन्टर, जो रोज़ काम खोजता है और कई दिन उसे काम नहीं मिलता (काल्पनिक, किताब के पृष्ठ 26 जैसा) |
उत्तर देखिए
| व्यक्ति | किस तरह की बेरोज़गारी | कारण |
|---|---|---|
| लक्ष्मी के परिवार के पाँचों सदस्य, एक छोटे खेत पर (पृष्ठ 26) | छिपी हुई (प्रच्छन्न) | सब काम पर दिखते हैं, पर दो चले जाएँ तो भी उत्पादन नहीं घटता |
| एक युवक, जिसके पास कोई काम नहीं और जो बेकार बैठा है (काल्पनिक) | खुली | उसके पास कोई काम ही नहीं |
| शहर का एक पेन्टर, जो रोज़ काम खोजता है और कई दिन उसे काम नहीं मिलता (काल्पनिक, किताब के पृष्ठ 26 जैसा) | छिपी हुई, यानी अल्प बेरोज़गारी, शहर में | काम करता है, पर क्षमता से कम |
★खुली बेरोज़गारी साफ़ दिखती है; छिपी हुई नहीं दिखती, क्योंकि सब काम पर लगे दिखते हैं। उसकी पहचान यह है कि कुछ लोगों को हटा दें, तो भी उत्पादन नहीं घटता (पृष्ठ 26)।
3सरकार इन कामों पर ख़र्च करती है। हर काम के आगे किताब का कारण लिखिए (पृष्ठ 33–34)। 3 अंक
उत्तर देखिए
| काम | किताब का कारण |
|---|---|
| सड़कें, पुल, बाँध से सिंचाई | बहुत महँगे; निजी क्षेत्रक की क्षमता से बाहर, और हज़ारों उपयोगकर्ताओं से पैसा इकट्ठा करना आसान नहीं |
| उद्योगों को ऐसी दर पर बिजली, जिस पर वे ख़रीद सकें | सरकारी समर्थन; उत्पादन-मूल्य पर बिजली बिके, तो अनेक इकाइयाँ, ख़ासकर छोटी इकाइयाँ, बंद हो सकती हैं |
| किसानों से उचित मूल्य पर गेहूँ-चावल की ख़रीद, और राशन की दुकानें | सरकारी समर्थन; किसान और उपभोक्ता, दोनों को सहायता |
| विद्यालय, ख़ासकर प्राथमिक शिक्षा | सरकार का कर्त्तव्य |
| सबके लिए स्वास्थ्य | इन पर व्यय करना सरकार की अनिवार्यता है |
★तीन तरह के कारण: कुछ काम बहुत महँगे हैं, कुछ लोगों को सरकार का सहारा चाहिए, और कुछ काम सरकार की ही ज़िम्मेदारी हैं।
भाग घ — प्रोजेक्ट और गतिविधि
1. मोहल्ले के काम (किताब की प्रश्नावली के प्रश्न 8 पर आधारित)
अपने आसपास जीविका के लिए काम करने वाले कम से कम दस वयस्कों के काम लिखिए (किसी का नाम लिखे बिना)। चार्ट पेपर पर चार खाने बनाइए: काम, कार्य का स्वभाव, रोज़गार की परिस्थिति, स्वामित्व। हर काम को तीनों कसौटियों पर रखिए। अंत में गिनिए कि आपकी सूची में कितने काम असंगठित क्षेत्रक के निकले, और इसकी तुलना पृष्ठ 31 की तालिका से कीजिए।
2. दो लोगों से बातचीत (किताब की गतिविधि पर आधारित, पृष्ठ 31)
संगठित क्षेत्रक के एक नियमित कर्मचारी और असंगठित क्षेत्रक के एक व्यक्ति से बात कीजिए। दोनों से एक जैसे सवाल पूछिए: काम के घंटे, वेतन कब और कैसे मिलता है, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सा, नियुक्ति-पत्र, और काम छूटने का डर। उत्तर कान्ता और कमल वाली तुलना (पृष्ठ 30) की तरह दो कॉलम में लिखिए। किसी का नाम मत लिखिए।
3. ग्राम प्रधान की योजना (किताब की गतिविधि पर आधारित, पृष्ठ 29)
किताब की यह गतिविधि आपसे ग्राम प्रधान बनकर सोचने को कहती है। अपने गाँव या पास के गाँव के लिए पाँच ऐसे काम सोचिए, जिनसे लोगों को अभी मज़दूरी मिले और बाद में खेती का उत्पादन या आय बढ़े। हर काम के आगे लिखिए: कितने लोगों को काम मिलेगा (अंदाज़ा), और गाँव को बाद में क्या फ़ायदा होगा।
4. सरकारी और निजी, आमने-सामने (किताब की प्रश्नावली के प्रश्न 18 और 19 पर आधारित)
अपने क्षेत्र का एक सरकारी और एक निजी विद्यालय, या एक सरकारी और एक निजी अस्पताल चुनिए। बड़ों से पूछकर लिखिए: मालिक कौन है, ख़र्च कौन उठाता है, सेवा किन लोगों तक पहुँचती है, और प्रबंध कैसा है। फिर कक्षा में चर्चा कीजिए कि अच्छा प्रबंध स्वामित्व से तय होता है या नहीं।
5. आलेख 3 चार्ट पेपर पर
आलेख 3 (पृष्ठ 25) के आँकड़ों से चार्ट पेपर पर दो दंड बनाइए, एक 1977–78 का और एक 2017–18 का, दोनों 100 तक ऊँचे, और हर दंड को तीन हिस्सों में बाँटिए। नीचे एक पंक्ति लिखिए कि चालीस वर्षों में रोज़गार में क्या बदला और क्या नहीं बदला। चार्ट कक्षा की दीवार पर लगाइए, ताकि पूरे अध्याय में काम आए।
अपना उत्तर ख़ुद जाँचिए
| आपके उत्तर में | तो |
|---|---|
| आँकड़ा किताब से सही उठाया, उससे निष्कर्ष निकाला, किताब की एक बात जोड़ी और अपना कारण लिखा | उत्तर पूरा है। |
| आँकड़े सही हैं, पर यह नहीं लिखा कि उनसे क्या पता चलता है | हर आँकड़े के बाद “इससे पता चलता है कि…” वाली एक पंक्ति जोड़िए। |
| स.घ.उ. में गेहूँ, आटा और बिस्कुट, तीनों का मूल्य जोड़ दिया | सिर्फ़ अंतिम वस्तु गिनी जाती है। केस 1 फिर से देखिए। |
| संगठित-असंगठित और सार्वजनिक-निजी को एक ही बँटवारा मान लिया | पहला रोज़गार की परिस्थितियों से है, दूसरा स्वामित्व से। भाग ग का प्रश्न 1 फिर से कीजिए। |
| ! यह मान लिया कि तृतीयक क्षेत्रक सबसे बड़ा उत्पादक है, तो सबसे बड़ा नियोक्ता भी वही है | उत्पादन और रोज़गार अलग हैं: 2017–18 में भी 44 प्रतिशत लोग प्राथमिक क्षेत्रक में हैं (आलेख 3)। केस 2 फिर से पढ़िए। |