यह पन्ना उनके लिए है जो घर पर दसवीं के बच्चे के साथ बैठते हैं। विषय आपको आता हो, यह ज़रूरी नहीं: हर सवाल के आगे लिखा है कि जवाब में क्या आना चाहिए, और किताब के किस पृष्ठ पर है।
दसवीं का बच्चा पंद्रह-सोलह साल का होता है। इस उम्र में उससे सवाल-जवाब करके परखने से ज़्यादा काम आता है उससे समझवाना। उससे कहिए, “मुझे यह अध्याय समझाओ, मैंने नहीं पढ़ा।” समझाते समय बच्चे को ख़ुद पता चल जाता है कि कौन-सी बात पक्की है और कौन-सी कच्ची।
किताब की अपनी पंक्तियाँ उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ संख्या के साथ दी हैं। पृष्ठ संख्याएँ NCERT आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।
1. इस अध्याय में क्या है
हमारे चारों ओर लोग तरह-तरह के काम करते हैं: कुछ वस्तुएँ बनाते हैं, कुछ सेवाएँ देते हैं। यह अध्याय इन कामों को तीन अलग कसौटियों से बाँटता है, और हर बँटवारे से देश की अर्थव्यवस्था के बारे में एक अलग सवाल का जवाब मिलता है। अध्याय पूरा होने तक बच्चे को यह बताना आना चाहिए कि भारत में उत्पादन और रोज़गार अलग-अलग ढंग से क्यों बदले, और ज़्यादातर लोगों का काम कच्चा क्यों है।
किताब यह बात छह क़दमों में समझाती है:
| किताब का सवाल | किताब क्या बताती है | पृष्ठ |
|---|---|---|
| काम किस तरह का है? | तीन क्षेत्रक: प्राथमिक (प्रकृति से सीधे, जैसे खेती, डेयरी, मछली पकड़ना), द्वितीयक (कुछ बनाना, जैसे कपास से कपड़ा, गन्ने से चीनी) और तृतीयक (सेवा, जैसे परिवहन, बैंक, व्यापार)। | 19–21 |
| देश का कुल उत्पादन कैसे गिनें? | एक साल में बनी सिर्फ़ अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य जोड़कर। इसे सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं। | 22–23 |
| चालीस साल में क्या बदला? | 1977–78 से 2017–18 के बीच उत्पादन में सेवा वाला तृतीयक क्षेत्रक सबसे आगे हो गया, पर सबसे ज़्यादा लोग अब भी खेती वाले प्राथमिक क्षेत्रक में काम करते हैं। | 23–26 |
| खेती में इतने लोग क्यों, और नया काम कैसे बने? | खेती में ज़रूरत से ज़्यादा लोग लगे हैं; इसे छिपी हुई बेरोज़गारी कहते हैं। उपाय: सिंचाई, सड़कें, सस्ता कर्ज़, गाँवों के पास छोटे उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, और काम का अधिकार देने वाला कानून। | 26–29 |
| काम पक्का है या कच्चा? | संगठित क्षेत्रक में नियमित वेतन, छुट्टी और नियम; असंगठित में कम और अनियमित मज़दूरी, कोई सुरक्षा नहीं। ज़्यादातर लोग असंगठित क्षेत्रक में हैं, इसलिए उन्हें संरक्षण चाहिए। | 30–32 |
| मालिक कौन है? | सार्वजनिक क्षेत्रक का मालिक सरकार है, जैसे रेलवे और डाकघर; निजी का कोई व्यक्ति या कंपनी। कुछ काम सरकार को ही करने पड़ते हैं। | 33–34 |
2. बच्चे से समझिए: दस सवाल
बच्चे से एक-एक सवाल पूछिए और उसे अपने शब्दों में समझाने दीजिए। आप दाईं ओर देखते जाइए कि ज़रूरी बातें आईं या नहीं। शब्द हूबहू न हों तो कोई बात नहीं; बात सही होनी चाहिए। जहाँ बच्चा अटके, किताब का वह पृष्ठ खोलिए, बच्चा उसे पढ़े और फिर से समझाए। अगले दिन वही सवाल एक बार और पूछ लीजिए।
| सवाल | जवाब में यह आना चाहिए | पृष्ठ |
|---|---|---|
| 1. तीनों क्षेत्रक कौन-से हैं? हर एक का एक उदाहरण दो। | प्राथमिक: प्रकृति से सीधे वस्तुएँ, जैसे कपास की खेती, डेयरी, मछली पकड़ना, खनिज। द्वितीयक: उनसे नई वस्तु बनाना, जैसे कपास से कपड़ा, गन्ने से चीनी, मिट्टी से ईंट। तृतीयक: सेवाएँ, जैसे परिवहन, भण्डारण, बैंक, व्यापार, शिक्षक, डॉक्टर। | 20 |
| 2. तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर कैसे टिके हैं? | किसान चीनी मिल को गन्ना बेचना बंद कर दें, तो मिल बंद हो जाएगी। ट्रक वाले हड़ताल कर दें, तो शहरों में भोजन की कमी होगी और किसान अपनी उपज नहीं बेच पाएँगे। | 21 |
| 3. देश का उत्पादन गिनते समय हर चीज़ क्यों नहीं जोड़ते? | सिर्फ़ अंतिम वस्तुएँ गिनी जाती हैं। बिस्कुट के 80 रुपये में आटे के 25 रुपये पहले से शामिल हैं; आटा अलग से गिनें, तो एक ही मूल्य दो बार गिना जाएगा। | 22–23 |
| 4. 1977–78 से 2017–18 के बीच उत्पादन में क्या बदला? | तीनों क्षेत्रकों का उत्पादन बढ़ा, पर सबसे ज़्यादा तृतीयक का। 2017–18 में तृतीयक क्षेत्रक ने प्राथमिक की जगह ले ली और सबसे बड़ा उत्पादक बन गया। | 24 |
| 5. सेवा क्षेत्रक इतना क्यों बढ़ा? | किताब के चार कारण: अस्पताल, स्कूल, डाक, थाना, बैंक जैसी बुनियादी सेवाएँ हर देश को चाहिए; खेती और उद्योग बढ़ें, तो परिवहन, व्यापार और भण्डारण की माँग बढ़ती है; आय बढ़ने पर लोग रेस्तरां, पर्यटन, निजी स्कूल जैसी सेवाएँ माँगते हैं; और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की नई सेवाएँ। | 24–25 |
| 6. सबसे ज़्यादा लोग किस क्षेत्रक में काम करते हैं? | प्राथमिक क्षेत्रक में। 2017–18 में रोज़गार में प्राथमिक का हिस्सा 44 प्रतिशत, द्वितीयक का 25 और तृतीयक का 31 प्रतिशत था। पर उत्पादन में प्राथमिक का हिस्सा लगभग एक-छठा ही है। पृष्ठ 26 के पाठ में यहाँ “आधे से अधिक श्रमिक” छपा है, पर आलेख 3 में 2017–18 का आँकड़ा 44 प्रतिशत है। | 25–26 |
| 7. छिपी हुई बेरोज़गारी क्या होती है? | सब काम करते दिखते हैं, पर अपनी क्षमता से कम। लक्ष्मी के छोटे खेत पर परिवार के पाँचों लोग काम करते हैं; दो लोग कहीं और काम पर चले जाएँ, तो भी खेत का उत्पादन नहीं घटता। | 26 |
| 8. गाँवों में नया काम कैसे बन सकता है? | सिंचाई, अच्छी सड़कें और भण्डारण, बैंक से उचित ब्याज पर कर्ज़, दाल मिल और शीत भण्डारण जैसे छोटे उद्योग, और शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन में काम। म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 ने ग्रामीण क्षेत्रों में साल में 100 दिन के काम की गारंटी दी; किताब के अनुसार 2025 में इसका स्थान विकसित भारत - जी राम जी 2025 ने लिया। | 27–29 |
| 9. संगठित और असंगठित क्षेत्रक में क्या फ़र्क़ है? | संगठित: सरकार से पंजीकृत, नियमित वेतन, छुट्टी, भविष्य निधि, नियम माने जाते हैं; जैसे किताब की कान्ता। असंगठित: छोटी, बिखरी इकाइयाँ, दैनिक मज़दूरी, कोई छुट्टी नहीं, कभी भी काम से हटाया जा सकता है; जैसे किताब का कमल। | 30–31 |
| 10. सरकार कुछ काम ख़ुद क्यों करती है? | सड़कें, पुल, रेलवे और बाँध बहुत महँगे हैं; उद्योगों और किसानों को सहारा चाहिए; और सबके लिए स्वास्थ्य और शिक्षा सरकार की ज़िम्मेदारी है। | 33–34 |
3. छह बातें जिनमें बच्चे अक्सर उलझते हैं
कॉपी जाँचते समय इन पर नज़र रखिए। बाएँ वाली बात लिखी हो तो वह ग़लत है।
| बच्चा लिख देता है | सही बात | पृष्ठ |
|---|---|---|
| देश के उत्पादन में बनी और बिकी हर वस्तु गिनी जाती है। | सिर्फ़ अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ गिनी जाती हैं। गेहूँ और आटे का मूल्य बिस्कुट के मूल्य में पहले से है। | 22 |
| तृतीयक क्षेत्रक भी वस्तुएँ बनाता है। | वह वस्तुएँ नहीं बनाता; सेवाएँ देता है और बाकी दोनों क्षेत्रकों के उत्पादन में मदद करता है। | 20 |
| भारत में अब सबसे ज़्यादा लोग सेवा क्षेत्रक में काम करते हैं। | उत्पादन में तृतीयक सबसे आगे है, पर सबसे ज़्यादा लोग प्राथमिक क्षेत्रक में काम करते हैं: 2017–18 में 44 प्रतिशत। | 24–25 |
| छिपी हुई बेरोज़गारी में लोगों के पास काम नहीं होता। | काम होता है, पर सब अपनी क्षमता से कम काम करते हैं। जिसके पास कोई काम ही नहीं, वह खुली बेरोज़गारी है। | 26 |
| असंगठित क्षेत्रक के लिए कोई नियम ही नहीं हैं। | नियम हैं, पर उनका पालन नहीं होता। | 31 |
| संगठित-असंगठित और सार्वजनिक-निजी एक ही बँटवारा है। | संगठित-असंगठित काम की शर्तों से बँटते हैं; सार्वजनिक-निजी इससे कि मालिक कौन है, सरकार या कोई व्यक्ति या कंपनी। | 30, 33 |
4. किताब के शब्द, आसान भाषा में
ये शब्द जवाबों में आने चाहिए। बच्चा इनका मतलब अपने शब्दों में बता दे, तो समझिए शब्द पक्का है।
| किताब का शब्द | आसान मतलब | पृष्ठ |
|---|---|---|
| क्षेत्रक | किसी एक कसौटी से बनाया गया कामों का एक समूह। | 19 |
| प्राथमिक क्षेत्रक | प्रकृति से सीधे वस्तुएँ पाना: खेती, डेयरी, मछली पकड़ना, खनिज निकालना। इसे कृषि एवं सहायक क्षेत्रक भी कहते हैं। | 20 |
| द्वितीयक क्षेत्रक | प्राकृतिक चीज़ों से नई वस्तु बनाना, जैसे गन्ने से चीनी या मिट्टी से ईंट। इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहते हैं। | 20 |
| तृतीयक क्षेत्रक | सेवाएँ देना: परिवहन, भण्डारण, बैंक, व्यापार, शिक्षक, डॉक्टर। इसे सेवा क्षेत्रक भी कहते हैं। | 20 |
| मध्यवर्ती और अंतिम वस्तुएँ | अंतिम वस्तु उपभोक्ता तक पहुँचती है, जैसे बिस्कुट; मध्यवर्ती वस्तु उसे बनाने में लगती है, जैसे गेहूँ और आटा। | 22 |
| सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) | देश के भीतर एक साल में बनी सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य। | 23 |
| सकल मूल्य वर्धित (जी.वी.ए.) | करों और सब्सिडी का हिसाब बैठाकर तीनों क्षेत्रकों का योगदान। सरकार अब क्षेत्रकों के लिए यही इस्तेमाल करती है। | 23 |
| छिपी हुई (प्रच्छन्न) बेरोज़गारी | सब काम पर दिखते हैं, पर किसी को पूरा काम नहीं मिलता; कुछ लोग हट जाएँ, तो भी उत्पादन नहीं घटता। किताब इसे अल्प बेरोज़गारी भी कहती है। | 26 |
| खुली बेरोज़गारी | जिसके पास कोई काम नहीं और जो बेकार बैठा है। | 26 |
| काम का अधिकार | काम माँगने वाले को काम देने की कानूनी गारंटी। | 29 |
| संगठित क्षेत्रक | सरकार से पंजीकृत काम की जगहें, जहाँ काम नियमित है और नियम माने जाते हैं। | 30 |
| असंगठित क्षेत्रक | छोटी, बिखरी इकाइयाँ, ज़्यादातर सरकारी नियंत्रण से बाहर; नियम हैं, पर पालन नहीं होता। | 31 |
| सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक | सार्वजनिक में ज़्यादातर चीज़ों की मालिक सरकार है, जैसे रेलवे और डाकघर; निजी में कोई व्यक्ति या कंपनी, जैसे टिस्को। | 33 |
5. लिखे हुए जवाब कैसे जाँचें
किताब के 24 प्रश्न पृष्ठ 35–37 पर हैं। प्रश्न 1 में खाली जगह भरनी है, प्रश्न 2 में सही विकल्प चुनना है और प्रश्न 3 में मेल करना है; बाकी में बच्चे को लिखकर जवाब देना है। आपको पूरा जवाब नहीं जाँचना; बस देखिए कि ये हिस्से हैं या नहीं।
प्रश्न 1: खाली जगह भरिए
| हिस्सा | सही शब्द |
|---|---|
| (क) सेवा क्षेत्रक में रोज़गार की वृद्धि | नहीं हुई है |
| (ख) वस्तुएँ न बनाने वाले श्रमिक | तृतीयक |
| (ग) रोज़गार-सुरक्षा | संगठित |
| (घ) असंगठित क्षेत्रक में श्रमिक | बड़े |
| (ङ) कपास और कपड़ा | प्राकृतिक, विनिर्मित |
| (च) तीनों क्षेत्रकों की गतिविधियाँ | परस्पर निर्भर |
(क) का कारण भी पूछ लीजिए: सेवा क्षेत्रक में उत्पादन 14 गुना बढ़ा, पर रोज़गार 5 गुना से भी कम (पृष्ठ 26)।
प्रश्न 2: सही विकल्प चुनिए
| हिस्सा | सही विकल्प |
|---|---|
| (अ) सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक किस आधार पर बँटते हैं | (ग) उद्यमों के स्वामित्व |
| (ब) प्राकृतिक प्रक्रिया से उत्पादन | (क) प्राथमिक |
| (स) स.घ.उ. में किसका मूल्य | (ख) सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं |
| (द) 2017–18 में जी.वी.ए. में तृतीयक की हिस्सेदारी | (ग) 50 से 60 |
(द) के आलेख पर संख्याएँ नहीं छपी हैं। आलेख पढ़कर बच्चे को इतना पता हो कि 2017–18 में आधे से ज़्यादा उत्पादन तृतीयक क्षेत्रक का है, तो जवाब ठीक है।
प्रश्न 3: समस्याओं और उपायों का मेल
| समस्या | उपाय |
|---|---|
| 1. असिंचित भूमि | (द) सरकार द्वारा नहरों का निर्माण |
| 2. फसलों का कम मूल्य | (स) सरकार द्वारा खाद्यान्नों की वसूली |
| 3. कर्ज भार | (य) कम ब्याज पर बैंकों द्वारा साख |
| 4. मंदी काल में रोज़गार का अभाव | (अ) कृषि-आधारित मिलों की स्थापना |
| 5. कटाई के तुरंत बाद अनाज बेचने की विवशता | (ब) सहकारी विपणन समितियाँ |
प्रश्न 4: विषम की पहचान
- (क) कृषक। बाकी सेवा देते हैं या वस्तु बनाते हैं; अकेला कृषक प्रकृति से सीधे उत्पादन करता है।
- (ख) सब्जी विक्रेता। शिक्षक, डॉक्टर और वकील पढ़-लिखकर और प्रशिक्षण लेकर सेवा देते हैं; सब्जी विक्रेता सड़क पर बेचने वाला, अपना काम करने वाला व्यक्ति है।
- (ग) मोची। डाकिया, सैनिक और पुलिस कांस्टेबल सरकार के कर्मचारी हैं; मोची अपना काम करता है।
- (घ) एयर इण्डिया। एम.टी.एन.एल., भारतीय रेल और ऑल इण्डिया रेडियो सरकार के हैं। एयर इण्डिया को सरकार ने जनवरी 2022 में टाटा समूह की एक कंपनी को सौंप दिया (भारत सरकार की प्रेस विज्ञप्ति), इसलिए अब वह निजी क्षेत्रक में है।
हर जवाब के साथ कारण होना चाहिए; सिर्फ़ नाम लिखना अधूरा है।
प्रश्न 5: सूरत की तालिका
- तालिका के खाली खाने: दूसरी पंक्ति (अधिकार-पत्र वाली दुकानें, कार्यालय, क्लिनिक) संगठित; तीसरी और चौथी पंक्ति असंगठित।
- चौथी पंक्ति का प्रतिशत हिसाब से: 100 − (15 + 15 + 20) = 50।
- अंतिम जवाब: असंगठित क्षेत्रक में 20 + 50 = 70 प्रतिशत श्रमिक।
प्रश्न 6: क्षेत्रकों में बाँटना उपयोगी है या नहीं
- जवाब साफ़ हो: हाँ, उपयोगी है।
- कम से कम दो कारण हों: इससे पता चलता है कि उत्पादन और रोज़गार किस क्षेत्रक में कितना है, और समय के साथ क्या बदला।
- किताब का उदाहरण हो तो और अच्छा: रोज़गार में प्राथमिक का हिस्सा 44 प्रतिशत, पर उत्पादन में लगभग एक-छठा; इसी से खेती की छिपी हुई बेरोज़गारी पकड़ में आई।
प्रश्न 7: सिर्फ़ रोज़गार और जी.वी.ए. ही क्यों
- जी.वी.ए. से पता चलता है कि क्षेत्रक कितना उत्पादन करता है, और रोज़गार से कि कितने लोगों की रोज़ी उस पर टिकी है।
- दोनों साथ देखने पर ही दिखता है कि खेती में लोग बहुत हैं, पर उत्पादन कम।
- दूसरी कसौटियाँ भी हैं, और अध्याय ख़ुद दो लेता है: काम की शर्तें (संगठित-असंगठित) और मालिक (सार्वजनिक-निजी)।
प्रश्न 8: आसपास के लोगों के कामों की सूची
यह सूची बच्चे के अपने आसपास से बननी चाहिए, कम से कम दस कामों की। हर काम के आगे लिखा हो कि वह प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक है; और अच्छा हो कि साथ में संगठित या असंगठित, और सरकारी या निजी भी लिखा हो। अंत में एक-दो पंक्ति हों कि बच्चे ने यही तरीका क्यों चुना।
प्रश्न 9: तृतीयक क्षेत्रक बाकी दोनों से कैसे अलग है
- मुख्य बात: तृतीयक क्षेत्रक कोई वस्तु नहीं बनाता, सेवाएँ देता है।
- उत्पादन में मदद के उदाहरण: ट्रक और रेल से माल पहुँचाना, गोदाम में भण्डारण, बैंक से कर्ज़।
- ऐसी सेवाएँ भी, जो उत्पादन में सीधे मदद नहीं करतीं: शिक्षक, डॉक्टर, धोबी, नाई, वकील।
प्रश्न 10: प्रच्छन्न बेरोज़गारी, गाँव और शहर के उदाहरण
- मतलब सही हो: लोग काम करते दिखते हैं, पर क्षमता से कम; कुछ लोग हट जाएँ, तो भी उत्पादन नहीं घटता।
- गाँव का उदाहरण: लक्ष्मी का परिवार, दो हेक्टेयर असिंचित ज़मीन पर पाँचों लोग।
- शहर का उदाहरण: प्लम्बर, पेन्टर जैसे अनियत श्रमिक, जिन्हें रोज़ काम नहीं मिलता, या ठेला खींचने वाले, जो दिन भर लगकर भी बहुत कम कमाते हैं।
प्रश्न 11: खुली और प्रच्छन्न बेरोज़गारी में अंतर
- खुली: व्यक्ति के पास कोई काम नहीं, वह बेकार बैठा है; यह साफ़ दिखती है।
- प्रच्छन्न: व्यक्ति काम करता दिखता है, पर क्षमता से कम; यह छिपी रहती है।
- अच्छा जवाब तालिका में होगा, और हर तरह के साथ एक उदाहरण।
प्रश्न 12: क्या तृतीयक क्षेत्रक की भूमिका महत्त्वपूर्ण नहीं
- जवाब साफ़ हो: नहीं, सहमत नहीं।
- मुख्य कारण: 2017–18 में तृतीयक क्षेत्रक सबसे बड़ा उत्पादक बन गया।
- दो-तीन और कारण: बुनियादी सेवाएँ, खेती और उद्योग की उपज को बाज़ार तक पहुँचाना, आय बढ़ने पर नई सेवाओं की माँग, सूचना प्रौद्योगिकी।
- अच्छा जवाब यह भी मानेगा कि सेवा क्षेत्रक की सभी सेवाएँ बराबर नहीं बढ़ रहीं।
प्रश्न 13: सेवा क्षेत्रक के दो तरह के लोग
- पहले: बहुत कुशल और शिक्षित श्रमिक, जिनके लिए ऐसी सेवाएँ सीमित संख्या में हैं।
- दूसरे: बहुत बड़ी संख्या में वे लोग, जो छोटी दुकानों, मरम्मत और परिवहन जैसे कामों में मुश्किल से गुज़ारा करते हैं, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा अवसर नहीं।
प्रश्न 14: असंगठित क्षेत्रक में शोषण
- जवाब साफ़ हो: हाँ, सहमत।
- कम से कम तीन कारण: कम और अनियमित मज़दूरी; बिना कारण काम से हटाया जा सकता है; छुट्टी या दूसरे लाभ नहीं; नियम हैं, पर पालन नहीं होता।
- किताब का उदाहरण हो तो और अच्छा, जैसे कमल: सुबह 7.30 से शाम 8 बजे तक काम, और जिस दिन काम नहीं, उस दिन पैसा नहीं।
प्रश्न 15: रोज़गार की परिस्थितियों से बँटवारा
- दो क्षेत्रकों के नाम: संगठित और असंगठित।
- हर एक का मतलब: संगठित सरकार से पंजीकृत है और नियम मानता है; असंगठित में छोटी, बिखरी इकाइयाँ हैं, जहाँ नियमों का पालन नहीं होता।
- हर एक का एक उदाहरण, जैसे कान्ता और कमल।
प्रश्न 16: संगठित और असंगठित की तुलना
- तुलना कई आधारों पर हो: काम पक्का है या नहीं, वेतन, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सा जैसे लाभ, काम से हटाए जाने का डर।
- हर आधार पर दोनों तरफ़ की बात लिखी हो। तालिका बनाकर लिखा हो, तो जाँचना आसान है।
प्रश्न 17: मनरेगा 2005 या विकसित भारत - जी राम जी 2025 के उद्देश्य
- किताब म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 के उद्देश्य बताती है, इसलिए जवाब उसी पर हो।
- तीन उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में काम चाहने वाले हर व्यक्ति को साल में 100 दिन के काम की गारंटी; काम न मिले, तो बेरोज़गारी भत्ता; और ऐसे कामों को वरीयता, जिनसे ज़मीन से उत्पादन बढ़े।
- एक पंक्ति कि लगभग 625 जिलों में काम का अधिकार लागू करने के लिए यह कानून बना, और 2025 में इसका स्थान विकसित भारत - जी राम जी 2025 ने लिया। नए कानून के बारे में किताब इससे ज़्यादा नहीं बताती, इसलिए बच्चे से और कुछ अपेक्षित नहीं।
प्रश्न 18: अपने क्षेत्र से सार्वजनिक और निजी की तुलना
- उदाहरण बच्चे के अपने इलाके के हों, जैसे सरकारी और निजी स्कूल, या सरकारी और निजी अस्पताल।
- तुलना के आधार: मालिक कौन है, ध्येय क्या है (सिर्फ़ लाभ या सबको सेवा), ख़र्च कौन उठाता है, और सेवा किन लोगों तक पहुँचती है।
प्रश्न 19: अच्छे और बुरे प्रबंध वाली तालिका
यहाँ चारों खानों में बच्चे के अपने देखे उदाहरण होने चाहिए: सार्वजनिक और निजी, दोनों में एक अच्छे प्रबंध वाला और एक बुरे प्रबंध वाला संगठन। अंत में चर्चा की एक पंक्ति हो कि अच्छा या बुरा प्रबंध सिर्फ़ इससे तय नहीं होता कि मालिक सरकार है या कोई व्यक्ति।
प्रश्न 20: सरकार ये काम क्यों करती है
- कुछ उदाहरण: सड़कें, पुल, रेलवे, बाँध से सिंचाई; उद्योगों को ऐसी दर पर बिजली, जिस पर वे ख़रीद सकें; किसानों से अनाज की ख़रीद और राशन की दुकानें; स्कूल और अस्पताल।
- तीन कारण: कुछ काम बहुत महँगे हैं; कुछ लोगों को सरकार का सहारा चाहिए; और स्वास्थ्य और शिक्षा सरकार की ज़िम्मेदारी है।
- किताब का एक तथ्य हो तो और अच्छा: ओडिशा (36) और मध्य प्रदेश (43) की शिशु मृत्यु दर, या लगभग आधे बच्चों का कुपोषित होना।
प्रश्न 21: देश के विकास में सार्वजनिक क्षेत्रक का योगदान
- कम से कम चार बातें हों, जैसे: सड़क, बिजली और सिंचाई जैसा ढाँचा; उद्योगों और किसानों को सहारा; अस्पताल, स्कूल, डाक जैसी बुनियादी सेवाएँ; सबके लिए स्वास्थ्य और शिक्षा; ग़रीब लोगों और पिछड़े इलाकों की देखभाल।
- हर बात के साथ एक छोटा उदाहरण।
प्रश्न 22: मज़दूरी, सुरक्षा और स्वास्थ्य पर संरक्षण
- मज़दूरी: कम और अनियमित; उचित मज़दूरी अक्सर नहीं मिलती।
- सुरक्षा: बिना कारण काम से हटाया जा सकता है; निर्माण श्रमिक और सिर पर बोझा ढोने वाले बिना सुरक्षा के काम करते हैं।
- स्वास्थ्य: बीमारी की छुट्टी या इलाज की सुविधा नहीं, जबकि संगठित क्षेत्रक में चिकित्सीय लाभ मिलता है।
- तीनों के साथ एक-एक उदाहरण होना चाहिए, यही प्रश्न माँगता है।
प्रश्न 23: अहमदाबाद की तालिका
बच्चे की तालिका में ये संख्याएँ होनी चाहिए:
| क्षेत्रक | श्रमिक | नगर की आय, 1997–98 (करोड़ रुपए) |
|---|---|---|
| संगठित | 4,00,000 | 320 |
| असंगठित | 11,00,000 | 280 |
| कुल | 15,00,000 | 600 |
- दो संख्याएँ बच्चे को घटाकर निकालनी हैं: 15,00,000 − 11,00,000 = 4,00,000, और 600 − 320 = 280।
- एक निष्कर्ष हो: लगभग तीन-चौथाई श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं, पर नगर की आधे से कम आय उनसे आती है।
- रोज़गार बढ़ाने के कम से कम दो तरीके हों, जैसे लघु उद्योगों को मदद, पर्यटन और सूचना प्रौद्योगिकी जैसी नई सेवाएँ, शिक्षा और स्वास्थ्य का विस्तार।
प्रश्न 24: जी.वी.ए. की तालिका से हिस्सेदारी
प्रश्न में “वर्ष 2000 एवं 2013” छपा है, पर तालिका 2001–02 और 2021–22 की है; हिसाब तालिका के सालों का होना चाहिए। हिस्सेदारी = क्षेत्रक का जी.वी.ए. ÷ उस साल का कुल × 100।
| वर्ष | कुल जी.वी.ए. (करोड़ रुपए) | प्राथमिक | द्वितीयक | तृतीयक |
|---|---|---|---|---|
| 2001–02 | 42,94,000 | 30.8% | 24.2% | 45.0% |
| 2021–22 | 1,38,77,400 | 17.9% | 29.3% | 52.8% |
- हर पंक्ति के तीनों प्रतिशत का जोड़ 100 आना चाहिए; इससे आप भी हिसाब जाँच सकते हैं।
- (ख) में दो दंड हों, एक हर साल का, हर दंड तीन हिस्सों में बँटा हुआ।
- (ग) का निष्कर्ष: प्राथमिक का हिस्सा घटा, द्वितीयक का थोड़ा बढ़ा, और तृतीयक दोनों सालों में सबसे बड़ा है, जो बढ़कर आधे से ज़्यादा हो गया।
सभी 24 प्रश्नों के पूरे उत्तर रिवीजन नोट्स के “अपने को जाँचिए” वाले हिस्से में हैं। बच्चे का जवाब उनसे शब्द-शब्द न मिले, तो भी ठीक है, अगर ज़रूरी बातें आ गई हों।
6. घर पर दस मिनट की बातचीत
दसवीं के बच्चे से पूछताछ कम, बातचीत ज़्यादा कीजिए। खाने के समय या कहीं आते-जाते इनमें से कोई एक बात छेड़िए।
बिस्कुट का एक पैकेट उठाइए। पृष्ठ 22 पर किताब इसी का उदाहरण देती है: किसान का गेहूँ, मिल का आटा, कंपनी का बिस्कुट। बच्चे से पूछिए कि खेत से आपकी थाली तक इस पैकेट में किन-किन लोगों का काम लगा, और हर एक किस क्षेत्रक में आता है। ट्रक वाले और दुकानदार को भी गिनवाइए। फिर पूछिए कि देश का उत्पादन गिनते समय सिर्फ़ बिस्कुट का दाम क्यों जोड़ा जाता है, गेहूँ और आटे का अलग से क्यों नहीं।
या घर-पड़ोस के कामों की बात कीजिए। पृष्ठ 30 पर कान्ता और कमल हैं: कान्ता को नियमित वेतन, छुट्टी और नियुक्ति-पत्र मिलता है; कमल को सिर्फ़ दैनिक मज़दूरी, और उसे कभी भी हटाया जा सकता है। बच्चे से पूछिए कि हमारे आसपास कौन-से काम कान्ता जैसे पक्के हैं और कौन-से कमल जैसे कच्चे। किसी का नाम लेने की ज़रूरत नहीं; बात काम की शर्तों की है।
घर में खेती हो, तो लक्ष्मी वाली बात (पृष्ठ 26) अपने खेत पर रखिए। पूछिए: खेत पर कितने लोग काम करते हैं? अगर दो लोग कहीं और काम पर चले जाएँ, तो क्या खेत का काम रुक जाएगा? बच्चा ख़ुद बता दे कि छिपी हुई बेरोज़गारी कैसी दिखती है, तो बात समझ में आ गई।
7. अगर आप ग्राम प्रधान हों: एक सवाल जिसका एक जवाब नहीं
पृष्ठ 29 पर किताब बच्चे से कहती है कि ख़ुद को ग्राम प्रधान मानकर सोचे: ऐसे कौन-से काम हों, जिनसे लोगों की आय बढ़े, और जिन्हें काम का अधिकार देने वाले कानून में शामिल किया जाए। किताब इतना बताती है कि इस कानून में उन कामों को वरीयता थी, जिनसे ज़मीन से उत्पादन बढ़े।
इस सवाल का कोई एक सही जवाब नहीं है, और आपको भी नहीं देना है। बच्चा जो भी काम सुझाए, जैसे तालाब, कुआँ, गाँव की सड़क या अनाज रखने की जगह, उससे दो बातें पूछिए: “इससे अभी किसे मज़दूरी मिलेगी?” और “काम पूरा होने के बाद गाँव को क्या फ़ायदा होगा?” दोनों का जवाब हो, तो सुझाव अच्छा है।
इस बातचीत से अध्याय की एक बड़ी बात अपने-आप निकलती है: किताब कहती है कि चर्चा किए गए कुछ सुझावों के अमल में लंबा समय लगेगा, इसलिए छोटी अवधि के लिए काम की गारंटी का कानून बना (पृष्ठ 29)।
अगर सिर्फ़ पाँच मिनट हों
ये चार सवाल पूछ लीजिए। चारों ठीक हों, तो अध्याय की मुख्य बातें आ गई हैं।
| सवाल | जवाब |
|---|---|
| तीनों क्षेत्रक कौन-से हैं, और किस आधार पर बँटे हैं? | प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक; काम किस तरह का है, इस आधार पर। |
| स.घ.उ. में क्या गिना जाता है? | एक साल में बनी सिर्फ़ अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य। |
| उत्पादन में सबसे आगे कौन-सा क्षेत्रक है, और रोज़गार में? | उत्पादन में तृतीयक; रोज़गार में प्राथमिक, 2017–18 में 44 प्रतिशत लोग। |
| संगठित और असंगठित क्षेत्रक में मुख्य फ़र्क़ क्या है? | संगठित में काम पक्का है, वेतन नियमित है और नियम माने जाते हैं; असंगठित में मज़दूरी कम है और कोई सुरक्षा नहीं। |
बच्चे के लिए इसी अध्याय के और पन्ने
- रिवीजन नोट्स: पूरा अध्याय छोटे में, किताब के सभी प्रश्नों के उत्तर के साथ।
- प्रश्न बैंक: परीक्षा जैसे प्रश्न, उत्तर के साथ। बच्चा पहले ख़ुद लिखे, फिर मिलाए।
- फ़्लैशकार्ड: बाईं ओर सवाल, दाईं ओर जवाब। जवाब ढककर बोलिए, फिर मिलाइए; रोज़ पाँच मिनट दोहराने के लिए।
- परख प्रश्न: सोचकर जवाब देने वाले प्रश्न, किताब के आँकड़ों पर, हर प्रश्न का उत्तर साथ में।
- इंटरैक्टिव अध्याय: पूरा अध्याय स्क्रीन पर, दस हिस्सों में; आख़िर में अभ्यास और परियोजना।