ये प्रश्न रटने से हल नहीं होते। इनमें गणना करनी, परिस्थिति तौलनी, दूसरे की जगह ख़ुद को रखना और अपने गाँव में देखना पड़ता है।
| आयाम | क्या जाँचा जाता है | भार |
|---|---|---|
| जागरूकता | ब्याज दरों की तुलना, ऋण-शर्तों का विश्लेषण, आलेख पढ़ना | 50% |
| संवेदनशीलता | कर्ज़दार, महिला और भूमिहीन मज़दूर के प्रति समझ | 20% |
| सृजनात्मकता | ऋण-योजना बनाना, विकल्प चुनना, ‘यदि…तो’ सोच | 30% |
भाग क — जागरूकता (50%)
1ब्याज की गणना कीजिए ★ 4 अंक
राजू को ₹10,000 का कर्ज़ एक साल के लिए चाहिए। उसके सामने तीन विकल्प हैं —
| स्रोत | ब्याज दर |
|---|---|
| (क) बैंक | 9 प्रतिशत वार्षिक |
| (ख) व्यापारी | 3 प्रतिशत मासिक |
| (ग) महाजन | 5 प्रतिशत मासिक |
(क) तीनों की वार्षिक ब्याज दर निकालिए। (1 अंक)
(ख) एक साल में तीनों को कितना ब्याज देना पड़ेगा? (1 अंक)
(ग) महाजन और बैंक के ब्याज में कितने रुपये का अंतर है? (1 अंक)
(घ) फिर भी लोग महाजन के पास क्यों जाते हैं? (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) बैंक 9%; व्यापारी 3 × 12 = 36%; महाजन 5 × 12 = 60%
- (ख) बैंक ₹900 · व्यापारी ₹3,600 · महाजन ₹6,000
- (ग) 6,000 − 900 = ₹5,100 — यानी लगभग साढ़े छह गुना ज़्यादा।
- (घ) क्योंकि बैंक समर्थक ऋणाधार और आवश्यक कागज़ात माँगता है, जो सबके पास नहीं होते; जबकि “अनौपचारिक ऋणदाता जैसे साहूकार इन कर्ज़दारों को व्यक्तिगत स्तर पर जानते हैं और… अक्सर बिना ऋणाधार के भी ऋण देने के लिए तैयार हो जाते हैं।”
★इस प्रश्न का मक़सद यही है कि बच्चा “5 प्रतिशत मासिक” को अपने आप 60 प्रतिशत वार्षिक में बदलना सीख जाए।
2केस-आधारित 4 अंक
सुनीता के पास 2 एकड़ ज़मीन है और वह प्याज़ उगाती है। उसने बीज-खाद के लिए गाँव के व्यापारी से 3 प्रतिशत मासिक ब्याज पर ₹40,000 उधार लिए और यह वादा किया कि फसल उसी को बेचेगी। फसल अच्छी हुई, पर कटाई के समय प्याज़ के दाम बहुत गिर गए। व्यापारी ने वही सस्ता दाम दिया, और सुनीता को कर्ज़ चुकाने के लिए फिर से उधार लेना पड़ा।
(क) यह किताब के किस पात्र की स्थिति से मिलती-जुलती है? (1 अंक)
(ख) सुनीता के साथ दो नुक़सान एक साथ हुए — वे क्या थे? (1 अंक)
(ग) यदि उसके पास शीत भंडार गृह की सुविधा होती तो क्या फ़र्क़ पड़ता? (1 अंक)
(घ) उसे कर्ज़-जाल से निकालने के दो उपाय सुझाइए। (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) ★श्यामल और स्वप्ना — दोनों से; ब्याज की दर श्यामल जैसी और नतीजा स्वप्ना जैसा।
- (ख) एक — 36 प्रतिशत वार्षिक ब्याज; दूसरा — फसल उसी व्यापारी को सस्ते दाम पर बेचनी पड़ी। (किताब भी कहती है — “फसल की क़ीमतें फसल काटते समय कम होती हैं इसलिए वह किसानों से कम क़ीमत पर फसल ख़रीदकर और बाद में क़ीमत बढ़ने पर बेचकर भारी मुनाफ़ा कमाता है।”)
- (ग) वह फसल रखकर बाद में अच्छी क़ीमत पर बेच सकती थी — जैसे अरुण करता है, जो “बाक़ी आलू की फसल को शीत भंडार गृह में रखकर बैंक से इसके बदले नया ऋण लेने के लिए दरख़्वास्त देना चाहता है।”
- (घ) बैंक या सहकारी समिति से सस्ता ऋण · स्वयं सहायता समूह से जुड़ना · सहकारी विपणन समिति के ज़रिए फसल बेचना · शीत भंडारण की सुविधा।
3दावा-कारण 4 अंक
| # | दावा (A) | कारण (R) | उत्तर |
|---|---|---|---|
| 1 | मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत ख़त्म कर देती है। | मुद्रा विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का काम करती है। | |
| 2 | बैंक जमा का पूरा हिस्सा अपने पास नकद रखते हैं। | किसी एक दिन में सभी जमाकर्ता पैसा निकालने आ सकते हैं। | |
| 3 | ऋण हमेशा कर्ज़दार की मदद करता है। | ऋण से कार्यशील पूँजी की ज़रूरत पूरी होती है। | |
| 4 | गरीब परिवार अनौपचारिक स्रोतों पर अधिक निर्भर हैं। | उनके पास बैंक द्वारा माँगा जाने वाला समर्थक ऋणाधार नहीं होता। | |
| 5 | स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को बिना ऋणाधार के बैंक ऋण मिल जाता है। | समूह के अन्य सदस्य ऋण न लौटाने के मामले को गंभीरता से लेते हैं। |
उत्तर देखिए
| # | दावा (A) | कारण (R) | उत्तर |
|---|---|---|---|
| 1 | मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत ख़त्म कर देती है। | मुद्रा विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का काम करती है। | (i) |
| 2 | बैंक जमा का पूरा हिस्सा अपने पास नकद रखते हैं। | किसी एक दिन में सभी जमाकर्ता पैसा निकालने आ सकते हैं। | (iii) — A ग़लत है; बैंक केवल लगभग 15 प्रतिशत नकद रखते हैं, क्योंकि “किसी एक विशेष दिन में केवल कुछ जमाकर्ता ही” आते हैं। |
| 3 | ऋण हमेशा कर्ज़दार की मदद करता है। | ऋण से कार्यशील पूँजी की ज़रूरत पूरी होती है। | (iv) — A ग़लत है; स्वप्ना के मामले में ऋण कर्ज़-जाल बन गया। R अपने आप में सही है। |
| 4 | गरीब परिवार अनौपचारिक स्रोतों पर अधिक निर्भर हैं। | उनके पास बैंक द्वारा माँगा जाने वाला समर्थक ऋणाधार नहीं होता। | (i) |
| 5 | स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को बिना ऋणाधार के बैंक ऋण मिल जाता है। | समूह के अन्य सदस्य ऋण न लौटाने के मामले को गंभीरता से लेते हैं। | (i) |
4आलेख पढ़िए ★ 4 अंक
आलेख 2 के आँकड़े —
| परिवार | औपचारिक | अनौपचारिक |
|---|---|---|
| गरीब | 46% | 54% |
| कम संपत्ति वाले | 62% | 38% |
| समृद्ध | 73% | 27% |
| अमीर | 83% | 17% |
(क) गरीब से अमीर की ओर बढ़ने पर औपचारिक ऋण का हिस्सा कैसे बदलता है? (1 अंक)
(ख) गरीब और अमीर के औपचारिक हिस्से में कितने अंक का अंतर है? (1 अंक)
(ग) इसका कारण क्या है? (1 अंक)
(घ) इससे क्या विरोधाभास दिखता है? (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) लगातार बढ़ता जाता है — 46 → 62 → 73 → 83।
- (ख) 83 − 46 = 37 अंक
- (ग) क्योंकि अमीरों के पास समर्थक ऋणाधार और आवश्यक कागज़ात होते हैं, जो बैंक माँगते हैं।
- (घ) ★सबसे बड़ा विरोधाभास — “जिसे पैसे की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, उसे सबसे महँगा कर्ज़ मिलता है; और जिसे सबसे कम ज़रूरत है, उसे सबसे सस्ता।” किताब भी यही कहती है — “अमीर परिवार औपचारिक ऋणदाताओं से सस्ता ऋण ले रहे हैं, जबकि गरीब परिवारों को कर्ज़ के लिए बहुत सारा पैसा देना पड़ता है।”
5वर्गीकरण कीजिए 3 अंक
नीचे छह ऋण-स्रोत दिए हैं। इन्हें औपचारिक और अनौपचारिक में बाँटिए, और हर एक के आगे एक कारण लिखिए —
बैंक · साहूकार · सहकारी समिति · व्यापारी · भूस्वामी-नियोक्ता · रिश्तेदार
उत्तर देखिए
- औपचारिक — बैंक, सहकारी समिति; क्योंकि इन पर भारतीय रिज़र्व बैंक नज़र रखता है और ब्याज दरें कम होती हैं।
- अनौपचारिक — साहूकार, व्यापारी, भूस्वामी-नियोक्ता, रिश्तेदार; क्योंकि “इनकी गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है” और “वे ऐच्छिक दरों पर ऋण दे सकते हैं।”
6तुलना करके निष्कर्ष निकालिए 3 अंक
सोनपुर के तीन लोग —
| कौन | ज़मीन | ब्याज (वार्षिक) |
|---|---|---|
| अरुण | 7 एकड़ | 8.5% |
| श्यामल | 1.5 एकड़ | 36% |
| रमा | कुछ नहीं | 60% |
(क) इसमें कोई नियम दिख रहा है? एक वाक्य में लिखिए। (1 अंक)
(ख) यह नियम न्यायपूर्ण है या नहीं? कारण दीजिए। (1 अंक)
(ग) इसे बदलने का एक उपाय सुझाइए। (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) ★“जिसके पास जितनी ज़्यादा ज़मीन, उसे उतना सस्ता ऋण।”
- (ख) न्यायपूर्ण नहीं — क्योंकि जिसकी आय पहले से कम है, उसी को सबसे ज़्यादा ब्याज देना पड़ता है; इससे “कर्ज़दारों के पास अपने लिए कम आय बचती है” और वे ऋण-जाल में फँसते जाते हैं।
- (ग) कोई भी उपाय — बैंकों और सहकारी समितियों की ग्रामीण पहुँच बढ़ाना · स्वयं सहायता समूह · ऋणाधार की शर्त में छूट · औपचारिक ऋण का समान वितरण।
भाग ख — संवेदनशीलता (20%)
7ख़ुद को उनकी जगह रखिए 4 अंक
रमा एक भूमिहीन कृषि मज़दूर है। साल में कई महीने उसके पास कोई काम नहीं होता। अचानक बीमारी या परिवार में किसी समारोह पर ख़र्च के लिए भी उसे कर्ज़ लेना पड़ता है। वह अपने भूस्वामी-नियोक्ता से 5 प्रतिशत मासिक पर ऋण लेती है और उसे उसके यहाँ काम करके चुकाती है। “यद्यपि भूस्वामी उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता, फिर भी वह उसके लिए लगातार काम करती है ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसे ऋण मिल सके।”
(क) रमा के पास कोई और विकल्प क्यों नहीं है? (1 अंक)
(ख) “अच्छा व्यवहार नहीं करता, फिर भी काम करती है” — इस वाक्य में क्या छिपा है? (2 अंक)
(ग) रमा जैसे लोगों के लिए दो व्यावहारिक उपाय सुझाइए। (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) क्योंकि उसके पास कोई ज़मीन या संपत्ति नहीं है, यानी समर्थक ऋणाधार नहीं; और किताब कहती है — “सोनपुर में भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का एकमात्र स्रोत भूस्वामी-नियोक्ता ही हैं।”
- (ख) ★इसमें मजबूरी और निर्भरता छिपी है — वह ऋण के लिए काम पर और काम के लिए ऋण पर निर्भर है। यह केवल आर्थिक नहीं, सामाजिक बंधन भी है; वह अपमान सहकर भी रिश्ता तोड़ नहीं सकती, क्योंकि तब आपात स्थिति में कोई सहारा नहीं बचेगा।
- (ग) स्वयं सहायता समूह से जोड़ना · मनरेगा जैसे रोज़गार की गारंटी · जन धन खाता और छोटी क्रेडिट लाइन · सहकारी समिति की सदस्यता।
★जिस बच्चे ने केवल “उसे दूसरी जगह काम ढूँढ़ लेना चाहिए” लिखा — उसे धीरे से यह पंक्ति दिखाइए: “भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का एकमात्र स्रोत भूस्वामी-नियोक्ता ही हैं।”
8महिलाओं और भरोसे का सवाल 3 अंक
किताब कहती है कि बैंक निर्धन महिलाओं को ऋण देने के लिए तैयार हो जाते हैं जब वे स्वयं सहायता समूहों में संगठित हो जाती हैं, “यद्यपि उनके पास कोई ऋणाधार नहीं होता।” और प्रो. युनूस का कथन है — “अगर गरीब लोगों को सही और उचित शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है, तो लाखों छोटे लोग… विकास का सबसे बड़ा चमत्कार कर सकते हैं।”
(क) यहाँ ऋणाधार की जगह क्या काम कर रहा है? (1 अंक)
(ख) समूह के आर्थिक लाभ के अलावा सामाजिक लाभ क्या हैं? (1 अंक)
(ग) प्रो. युनूस को नोबेल शांति का मिला, अर्थशास्त्र का नहीं — आपके विचार से क्यों? (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) ★समूह की सामूहिक ज़िम्मेदारी और आपसी भरोसा — “एक भी सदस्य अगर ऋण वापस नहीं लौटाता तो समूह के अन्य सदस्य इस मामले को गंभीरता से लेते हैं।” यानी ज़मीन की जगह भरोसा गिरवी रखा जाता है।
- (ख) “न केवल महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो जाती हैं, बल्कि समूह की नियमित बैठकों के ज़रिए लोगों को एक आम मंच मिलता है, जहाँ वह… स्वास्थ्य, पोषण और घरेलू हिंसा इत्यादि पर आपस में चर्चा कर पाती हैं।”
- (ग) उत्तर व्यक्तिगत, पर तर्क चाहिए — “क्योंकि ग़रीबी और असमानता ही अशांति की जड़ हैं; जो व्यक्ति करोड़ों गरीबों को सम्मानजनक ढंग से आत्मनिर्भर बनाता है, वह असल में शांति की नींव रखता है।”
भाग ग — सृजनात्मकता (30%)
9अपने क्षेत्र का ऋण-सर्वेक्षण कीजिए ★ 5 अंक
पाठ्यपुस्तक ख़ुद कहती है (पृष्ठ 47) — “कुछ लोगों से बातचीत कीजिए, जिनसे आपको अपने क्षेत्र में ऋण प्रबंधों के बारे में कोई जानकारी मिले… विभिन्न लोगों में ऋण की शर्तों में विभिन्नता को लिखिए।”
अपने गाँव या मोहल्ले के तीन लोगों से बात कीजिए और यह तालिका भरिए —
| # | कौन (काम) | किससे ऋण लिया | ब्याज दर | क्या गिरवी रखना पड़ा | कागज़ात लगे? |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | |||||
| 2 | |||||
| 3 |
फिर लिखिए —
(क) इनमें कितने औपचारिक स्रोत से थे और कितने अनौपचारिक? (1 अंक)
(ख) सबसे ऊँची और सबसे नीची ब्याज दर में कितना अंतर था? (1 अंक)
(ग) क्या कोई नियम दिखा — जैसे सोनपुर में दिखा था? (2 अंक)
(घ) आपके क्षेत्र में सस्ता ऋण बढ़ाने के लिए दो सुझाव दीजिए। (1 अंक)
★यह गतिविधि इसलिए सबसे उपयोगी है क्योंकि इसमें 8.5% बनाम 60% किताबी नहीं रहता — बच्चे के अपने गाँव का सच बन जाता है।
10ऋण-योजना बनाइए 5 अंक
कल्पना कीजिए कि आपके गाँव की बीस महिलाएँ एक स्वयं सहायता समूह बनाना चाहती हैं।
(क) समूह की बनावट कैसी होगी — सदस्य, बचत, बैठक? (2 अंक)
(ख) पहले साल में समूह किन तीन कामों के लिए कर्ज़ दे सकता है? (1 अंक)
(ग) समूह कब और किस आधार पर बैंक से ऋण ले सकेगा? (1 अंक)
(घ) समूह के सामने आने वाली एक कठिनाई और उसका हल बताइए। (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) 15-20 पड़ोसी सदस्य, जो नियमित रूप से मिलें और बचत करें; प्रति व्यक्ति ₹25 से ₹100 या अधिक; और बचत व ऋण संबंधी निर्णय सदस्य स्वयं लें।
- (ख) कोई भी तीन — गिरवी ज़मीन छुड़वाना · कार्यशील पूँजी (बीज, खाद, बाँस, कपड़े) · घर बनाना · सिलाई मशीन, हथकरघा या पशु ख़रीदना।
- (ग) एक या दो वर्षों की नियमित बचत के बाद; और ऋण समूह के नाम पर मिलेगा, क्योंकि समूह की सामूहिक ज़िम्मेदारी ही ऋणाधार का काम करती है।
- (घ) कोई भी कठिनाई और हल — कोई सदस्य किस्त न दे → समूह मिलकर बात करे और छोटी अवधि दे; हिसाब रखना कठिन → एक सदस्य को प्रशिक्षण दिलाना; बैठक में महिलाएँ न आ पाएँ → समय ऐसा रखना जो सबको सुविधाजनक हो।
11‘यदि…तो’ सोचिए 4 अंक
मान लीजिए कि किसी दिन देश के सभी लोग एक साथ अपना पैसा बैंक से निकालने पहुँच जाएँ।
(क) क्या बैंक सबको पैसा दे पाएगा? कारण दीजिए। (1 अंक)
(ख) बाक़ी पैसा उस समय कहाँ होता है? (1 अंक)
(ग) फिर भी बैंक-व्यवस्था कैसे चलती है? (1 अंक)
(घ) इसमें भारतीय रिज़र्व बैंक की क्या भूमिका है? (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) नहीं — क्योंकि बैंक जमा का केवल लगभग 15 प्रतिशत ही नकद रखते हैं।
- (ख) बाक़ी बड़ा भाग ऋण के रूप में कर्ज़दारों के पास होता है।
- (ग) क्योंकि व्यवहार में “किसी एक विशेष दिन में, केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने के लिए आते हैं” — यानी पूरी व्यवस्था भरोसे पर टिकी है।
- (घ) आर.बी.आई. “नज़र रखता है कि बैंक वास्तव में नकद शेष बनाए हुए हैं” — यही निगरानी जमाकर्ताओं का धन सुरक्षित रखती है।
12किताब से आगे सोचिए ★ 4 अंक
पाठ्यपुस्तक मुद्रा के आधुनिक रूपों में करेंसी और माँग जमा (चैक) गिनाती है।
(क) आज तुम्हारे घर में सबसे ज़्यादा भुगतान किस तरीक़े से होता है? (1 अंक)
(ख) क्या यह तरीक़ा चैक के सिद्धांत से मिलता-जुलता है? कारण दीजिए। (2 अंक)
(ग) इसका एक लाभ और एक ख़तरा लिखिए। (1 अंक)
उत्तर देखिए
- (क) उत्तर व्यक्तिगत — नकद, UPI/फ़ोन से भुगतान, या दोनों।
- (ख) ★हाँ, बिल्कुल — क्योंकि चैक में भी “धन एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में अंतरित हो जाता है” और “यह लेन-देन बिना नकद की अदायगी के पूरा हो जाता है”। फ़ोन से भुगतान उसी विचार का तेज़ रूप है — सिर्फ़ काग़ज़ की जगह फ़ोन आ गया।
- (ग) लाभ — तेज़, आसान, नकद रखने का झंझट नहीं, और हिसाब अपने आप रहता है; ख़तरा — धोखाधड़ी, ग़लत नंबर पर पैसा चला जाना, या जिनके पास फ़ोन/इंटरनेट नहीं उनका पीछे छूट जाना।
! परीक्षा में मुद्रा के आधुनिक रूप के रूप में करेंसी और माँग जमा ही लिखवाइए।
अंक-विभाजन
| भाग | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| क — जागरूकता | 1 से 6 | 22 |
| ख — संवेदनशीलता | 7 और 8 | 7 |
| ग — सृजनात्मकता | 9 से 12 | 18 |
| कुल | 47 |
शिक्षक के लिए। इन प्रश्नों में ‘सही उत्तर’ मत ढूँढ़िए — तर्क और गणना ढूँढ़िए। जिस बच्चे ने 5 प्रतिशत मासिक को 60 प्रतिशत वार्षिक में बदल दिया, या प्रश्न 7 में यह समझ लिया कि रमा के पास विकल्प ही नहीं है, या प्रश्न 9 में अपने गाँव से असली ब्याज दरें ले आया — उसने इस अध्याय को समझ लिया।