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प्रयोग: दाईं ओर हाथ रखकर पढ़िए, उत्तर बोलिए, फिर हाथ हटाइए। कुल 93 कार्ड। हर उत्तर के साथ किताब का पृष्ठ लिखा है; शक हो तो किताब का वही पृष्ठ खोलकर देख लीजिए। पृष्ठ संख्याएँ NCERT आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।
तारों का मतलब: ★वाले कार्ड ज़्यादा ज़रूरी हैं · ★★सबसे ज़रूरी; समय कम हो तो पहले इन्हें दोहराइए।
सेट 1 — आर्थिक कार्यों के क्षेत्रक (कार्ड 1–15)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | आर्थिक गतिविधियों के संदर्भ में क्षेत्रक किसे कहते हैं? | कुछ महत्त्वपूर्ण मानदंडों के आधार पर आर्थिक गतिविधियों को जिन समूहों में बाँटा जाता है; “इन समूहों को क्षेत्रक भी कहते हैं।” (पृष्ठ 19) |
| ★★2 | प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि किसे कहते हैं? | “जब हम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन करते हैं, तो इसे प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि कहा जाता है।” (पृष्ठ 20) |
| 3 | प्राथमिक क्षेत्रक को “प्राथमिक” क्यों कहा जाता है? | “क्योंकि यह उन सभी उत्पादों का आधार है, जिन्हें हम क्रमश: निर्मित करते हैं।” (पृष्ठ 20) |
| 4 | प्राथमिक क्षेत्रक का दूसरा नाम क्या है, और क्यों? | कृषि एवं सहायक क्षेत्रक; क्योंकि ज़्यादातर प्राकृतिक उत्पाद कृषि, डेयरी, मत्स्य और वनों से मिलते हैं (पृष्ठ 20) |
| ★5 | द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों में क्या होता है? | प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली से दूसरे रूपों में बदला जाता है; यह काम कारखाने, कार्यशाला या घर में हो सकता है (पृष्ठ 20) |
| 6 | किताब में द्वितीयक क्षेत्रक के कौन-से उदाहरण दिए गए हैं? | कपास के रेशे से सूत कातना और कपड़ा बुनना; गन्ने से चीनी और गुड़; मिट्टी से ईंट, और ईंटों से घर और भवन (पृष्ठ 20) |
| 7 | द्वितीयक क्षेत्रक को और किस नाम से जानते हैं? | औद्योगिक क्षेत्रक, क्योंकि यह कई तरह के उद्योगों से जुड़ा है (पृष्ठ 20) |
| ★8 | तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ क्या करती हैं? | प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक के विकास में मदद करती हैं; “ये गतिविधियाँ स्वत: वस्तुओं का उत्पादन नहीं करती हैं, बल्कि उत्पादन–प्रक्रिया में सहयोग या मदद करती हैं।” (पृष्ठ 20) |
| 9 | किताब तृतीयक गतिविधियों के कौन-से पाँच उदाहरण देती है? | परिवहन, भण्डारण, संचार, बैंक सेवाएँ और व्यापार (पृष्ठ 20) |
| ★10 | तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक क्यों कहते हैं? | क्योंकि ये गतिविधियाँ वस्तुओं के बजाय सेवाओं का सृजन करती हैं (पृष्ठ 20) |
| 11 | क्या सेवा क्षेत्रक की हर सेवा वस्तुओं के उत्पादन में मदद करती है? | नहीं। शिक्षक, डॉक्टर, धोबी, नाई, मोची, वकील जैसी व्यक्तिगत सेवाएँ और प्रशासनिक एवं लेखाकरण कार्य सीधे उत्पादन में मदद नहीं करते, फिर भी ये ज़रूरी सेवाएँ हैं (पृष्ठ 20) |
| 12 | सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित किन नवीन सेवाओं के नाम किताब में हैं? | इंटरनेट कैफे, ए.टी.एम. बूथ, कॉल सेंटर, सॉफ्टवेयर कंपनी (पृष्ठ 20) |
| ★13 | तीनों क्षेत्रकों के आपसी संबंध के बारे में किताब क्या कहती है? | “यद्यपि आर्थिक गतिविधियाँ तीन विभिन्न वर्गों में विभाजित हैं, फिर भी ये बहुत अधिक परस्पर-निर्भर हैं।” (पृष्ठ 21) |
| 14 | तालिका 2.1 के अनुसार किसान चीनी मिल को गन्ना बेचने से मना कर दें, तो क्या होगा, और यह क्या दिखाता है? | मिल बंद हो जाएगी; यानी द्वितीयक (औद्योगिक) क्षेत्रक प्राथमिक क्षेत्रक पर निर्भर है (पृष्ठ 21) |
| 15 | तालिका 2.1 के अनुसार ट्रांसपोर्टर गाँवों से सब्ज़ी, दूध ले जाने से मना कर दें, तो क्या होगा? | शहरों में भोजन की कमी होगी और किसान अपनी उपज नहीं बेच पाएँगे; यानी प्राथमिक क्षेत्रक परिवहन (तृतीयक) पर निर्भर है (पृष्ठ 21) |
सेट 2 — तीन क्षेत्रकों की तुलना: अंतिम वस्तुएँ, स.घ.उ. और जी.वी.ए. (कार्ड 16–25)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 16 | क्षेत्रक का कुल उत्पादन जानने के लिए वस्तुओं की संख्या क्यों नहीं जोड़ते? | कारों, कम्प्यूटरों, कीलों और फर्नीचरों की संख्या जोड़ना “अत्यंत बेतुकी बात” है; इसलिए संख्या की जगह वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य जोड़ा जाता है (पृष्ठ 22) |
| ★17 | कुल उत्पादन गिनते समय कौन-सी वस्तुएँ और सेवाएँ गिनी जाती हैं? | केवल अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ (पृष्ठ 22) |
| 18 | किताब के गेहूँ, आटा और बिस्कुट वाले उदाहरण में अंतिम वस्तु कौन-सी है, और क्यों? | बिस्कुट, क्योंकि वही उपभोक्ताओं तक पहुँचता है (पृष्ठ 22) |
| 19 | मध्यवर्ती वस्तुएँ किन्हें कहते हैं? बिस्कुट वाले उदाहरण में ये कौन-सी हैं? | जो अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होती हैं; उदाहरण में गेहूँ और आटा (पृष्ठ 22) |
| ★★20 | ! स.घ.उ. में मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य अलग से क्यों नहीं जोड़ा जाता? | “अंतिम वस्तुओं के मूल्य में मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य पहले से ही शामिल होता है।” बिस्कुट के ₹80 में आटे के ₹25 पहले से शामिल हैं; अलग जोड़ें तो एक ही मूल्य कई बार गिना जाएगा (पृष्ठ 22, 23) |
| ★★21 | सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) किसे कहते हैं? | तीनों क्षेत्रकों के उत्पादनों का योगफल; यानी “किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य” (पृष्ठ 23) |
| 22 | स.घ.उ. से किसी अर्थव्यवस्था के बारे में क्या पता चलता है? | अर्थव्यवस्था की विशालता, यानी वह कितनी बड़ी है (पृष्ठ 23) |
| 23 | भारत में स.घ.उ. कौन मापता है? | केन्द्र सरकार का एक मंत्रालय, राज्यों और केन्द्र शासित क्षेत्रों के सरकारी विभागों की सहायता से (पृष्ठ 23) |
| 24 | हाल में सरकार तीनों क्षेत्रकों के लिए स.घ.उ. की जगह किसका प्रयोग करने लगी है? | सकल मूल्य वर्धित (जी.वी.ए.) के योगदान का, वैश्विक प्रथाओं के समान (पृष्ठ 23) |
| ★25 | जी.वी.ए. क्या मापता है? | “जी.वी.ए. करों तथा सब्सिडी के लिए समायोजन के बाद अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रकों के योगदान को मापता है।” (पृष्ठ 23) |
सेट 3 — ऐतिहासिक परिवर्तन और उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक (कार्ड 26–37)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 26 | विकसित देशों में विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं में कौन-सा क्षेत्रक सबसे महत्त्वपूर्ण रहा? | प्राथमिक क्षेत्रक (पृष्ठ 23) |
| 27 | विकसित देशों में द्वितीयक क्षेत्रक सबसे महत्त्वपूर्ण कैसे बना? | लम्बे समय (सौ वर्षों से अधिक) के बाद विनिर्माण की नवीन प्रणाली से कारखाने बने और फैले; खेतों में काम करने वाले बहुत से लोग कारखानों में काम करने लगे, और कुल उत्पादन व रोज़गार दोनों में द्वितीयक क्षेत्रक आगे हो गया (पृष्ठ 23) |
| ★28 | विगत 100 वर्षों में विकसित देशों में क्षेत्रकों में क्या बदलाव हुआ? | द्वितीयक से तृतीयक क्षेत्रक की ओर; कुल उत्पादन में सेवा क्षेत्रक का महत्त्व बढ़ा और अधिकांश श्रमजीवी लोग सेवा क्षेत्रक में ही नियोजित हैं (पृष्ठ 23) |
| 29 | आलेख 1, 2 और 3 किन दो वर्षों की तुलना करते हैं? | 1977–78 और 2017–18, यानी चालीस वर्ष; 2017–18 वह नवीनतम वर्ष है जिसके तुलनीय आँकड़े उपलब्ध हैं (पृष्ठ 24, 25) |
| 30 | आलेख 1 और आलेख 2 में क्या दिखाया गया है? | आलेख 1: तीनों क्षेत्रकों का जी.वी.ए. (रुपये करोड़ में); आलेख 2: जी.वी.ए. में तीनों क्षेत्रकों की प्रतिशत हिस्सेदारी (पृष्ठ 24, 25) |
| ★★31 | 2017–18 में भारत का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक कौन-सा बना? | तृतीयक क्षेत्रक, प्राथमिक क्षेत्रक की जगह लेकर; चालीस वर्षों में सबसे अधिक वृद्धि भी इसी के उत्पादन में हुई (पृष्ठ 24) |
| ★32 | भारत में तृतीयक क्षेत्रक के महत्त्व का पहला कारण क्या है? | अस्पताल, शैक्षिक संस्थाएँ, डाक एवं तार सेवा, थाना, कचहरी, नगर निगम, रक्षा, परिवहन, बैंक, बीमा कंपनी जैसी बुनियादी सेवाओं की ज़रूरत; विकासशील देश में इनकी ज़िम्मेदारी सरकार उठाती है (पृष्ठ 24) |
| ★33 | तृतीयक क्षेत्रक के महत्त्व का दूसरा कारण क्या है? | कृषि एवं उद्योग का विकास: इनसे परिवहन, व्यापार, भण्डारण जैसी सेवाओं की माँग बढ़ती है (पृष्ठ 25) |
| ★34 | तृतीयक क्षेत्रक के महत्त्व का तीसरा कारण क्या है? | आय बढ़ना: लोग रेस्तरां, पर्यटन, शॉपिंग, निजी अस्पताल, निजी विद्यालय, व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सेवाएँ माँगने लगते हैं (पृष्ठ 25) |
| ★35 | तृतीयक क्षेत्रक के महत्त्व का चौथा कारण क्या है? | सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित नवीन सेवाएँ, जिनके उत्पादन में तेज़ी से वृद्धि हो रही है (पृष्ठ 25) |
| 36 | क्या सेवा क्षेत्रक की सभी सेवाएँ एक जैसी बढ़ रही हैं? | नहीं: “सेवा क्षेत्रक की सभी सेवाओं में समान रूप से संवृद्धि नहीं हो रही है।” इसलिए सेवा क्षेत्रक के केवल कुछ भागों का ही महत्त्व बढ़ रहा है (पृष्ठ 25) |
| 37 | भारत में सेवा क्षेत्रक किन दो तरह के लोगों को रोज़गार देता है? | एक ओर, अत्यन्त कुशल और शिक्षित श्रमिकों वाली सेवाएँ, जो सीमित हैं; दूसरी ओर, छोटी दुकानों, मरम्मत कार्यों, परिवहन में लगे बहुत से लोग, जो बड़ी मुश्किल से गुज़ारा करते हैं क्योंकि उनके पास कोई दूसरा अवसर नहीं (पृष्ठ 25) |
सेट 4 — अधिकांश लोग कहाँ नियोजित हैं: अल्प बेरोज़गारी (कार्ड 38–50)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★38 | आलेख 3 के अनुसार 1977–78 में रोज़गार में तीनों क्षेत्रकों की हिस्सेदारी कितनी थी? | प्राथमिक 71, द्वितीयक 11, तृतीयक 18 प्रतिशत (पृष्ठ 25) |
| ★★39 | आलेख 3 के अनुसार 2017–18 में रोज़गार में तीनों क्षेत्रकों की हिस्सेदारी कितनी थी? | प्राथमिक 44, द्वितीयक 25, तृतीयक 31 प्रतिशत (पृष्ठ 25) |
| ★★40 | ! उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक सबसे आगे है; तो भारत में सबसे बड़ा नियोक्ता कौन है? | आज भी प्राथमिक क्षेत्रक; स.घ.उ. में क्षेत्रकों की हिस्सेदारी बदली, पर रोज़गार में वैसा बदलाव नहीं हुआ (पृष्ठ 25) |
| ★41 | रोज़गार प्राथमिक क्षेत्रक से दूसरे क्षेत्रकों में उतना क्यों नहीं गया? | क्योंकि “द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक में रोज़गार के पर्याप्त अवसरों का सृजन नहीं हुआ।” (पृष्ठ 25) |
| ★42 | इन चालीस वर्षों में सेवा क्षेत्रक में उत्पादन और रोज़गार कितने गुना बढ़े? | उत्पादन 14 गुना, पर रोज़गार 5 गुना से भी कम (पृष्ठ 26) |
| 43 | इसी अवधि में औद्योगिक रोज़गार कितना बढ़ा? | लगभग 3 गुना ही, जबकि औद्योगिक उत्पादन इससे ज़्यादा बढ़ा (पृष्ठ 26) |
| 44 | जी.वी.ए. में प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान लगभग कितना है? | लगभग एक-छठा भाग; बाकी हिस्सा द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक का है (पृष्ठ 26) |
| ★★45 | अल्प बेरोज़गारी किसे कहते हैं? | जहाँ “लोग प्रत्यक्ष रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन सभी अपनी क्षमता से कम काम करते हैं।” कृषि से कुछ लोगों को हटा दें, तब भी उत्पादन पर असर नहीं पड़ता (पृष्ठ 26) |
| 46 | किताब के उदाहरण में लक्ष्मी की खेती कैसी है? | दो हेक्टेयर असिंचित भूमि, सिंचाई के लिए केवल वर्षा, फसलें ज्वार एवं अरहर; परिवार के सभी पाँच सदस्य वर्ष भर उसी पर काम करते हैं, क्योंकि कहीं और रोज़गार नहीं (पृष्ठ 26) |
| 47 | लक्ष्मी के परिवार के दो सदस्य सुखराम के खेत पर या किसी कारख़ाने में काम करने चले जाएँ, तो क्या होगा? | परिवार को अतिरिक्त आय होगी, और “दो लोगों के चले जाने से कृषि–उत्पादन प्रभावित नहीं होता है” (पृष्ठ 26) |
| ★48 | अल्प बेरोज़गारी को छिपी हुई या प्रच्छन्न बेरोज़गारी क्यों कहते हैं? | क्योंकि यह खुली बेरोज़गारी से अलग है, जिसमें लोगों के पास कोई रोज़गार नहीं होता और वे बेकार बैठे रहते हैं; यहाँ सब काम करते दिखते हैं (पृष्ठ 26) |
| 49 | क्या अल्प बेरोज़गारी सिर्फ़ खेती में होती है? | नहीं, दूसरे क्षेत्रकों में भी: शहरों के सेवा क्षेत्रक में हज़ारों अनियत श्रमिक (प्लम्बर, पेन्टर, मरम्मत का काम) रोज़ काम ढूँढते हैं, और उनमें से कई को रोज़ काम नहीं मिलता (पृष्ठ 26) |
| 50 | सड़कों पर ठेला खींचने या सामान बेचने वालों के बारे में किताब क्या कहती है? | “जहाँ वे पूरा दिन बिता देते हैं, परन्तु बहुत कम कमा पाते हैं।” वे यह काम इसलिए करते हैं क्योंकि उनके पास कोई बेहतर अवसर नहीं (पृष्ठ 26) |
सेट 5 — अतिरिक्त रोज़गार का सृजन (कार्ड 51–62)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★51 | लक्ष्मी की भूमि पर सिंचाई के लिए कुआँ बने, तो रोज़गार कैसे बढ़ेगा? | सरकार कुछ पैसा ख़र्च करे या बैंक ऋण दे; सिंचाई से वह रबी में दूसरी फसल गेहूँ उगाएगी; किताब मानकर चलती है कि एक हेक्टेयर गेहूँ दो लोगों को 50 दिन का रोज़गार दे सकता है (पृष्ठ 27) |
| 52 | परिवहन, फसलों के भण्डारण और ग्रामीण सड़कों पर सरकार पैसा लगाए, तो किसे रोज़गार मिलेगा? | किसानों को उत्पादक रोज़गार, और परिवहन और व्यापार जैसी सेवाओं में लगे लोगों को भी (पृष्ठ 28) |
| ★53 | पानी के अलावा खेती बेहतर करने के लिए किसानों को और क्या देने की ज़रूरत है? | “सस्ते कृषि साख”: साहूकार के ऊँचे ब्याज की जगह स्थानीय बैंक से उचित ब्याज दर पर कर्ज़, ताकि वे बीज, उर्वरक, उपकरण और पम्पसेट समय पर ख़रीद सकें (पृष्ठ 28) |
| 54 | अर्द्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में कौन-से उद्योग और सेवाएँ रोज़गार दे सकते हैं? | अरहर, मटर जैसी दलहन के लिए दाल मिल; आलू, प्याज के लिए शीत भण्डारण गृह; वनों के पास के गाँवों में शहद संग्रह केन्द्र; सब्ज़ियों और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण उद्योग (पृष्ठ 28) |
| 55 | भारत की कितने प्रतिशत जनसंख्या 5–29 वर्ष आयु की है, और इनमें से कितने विद्यालय जाते हैं? | 60 प्रतिशत; इनमें से लगभग 51 प्रतिशत ही विद्यालय जाते हैं (पृष्ठ 28) |
| 56 | योजना आयोग (पूर्व) वर्तमान में नीति आयोग के एक अध्ययन के अनुसार अकेले शिक्षा क्षेत्र में कितने रोज़गार बन सकते हैं? | लगभग 20 लाख (पृष्ठ 29) |
| 57 | योजना आयोग के अध्ययन के अनुसार पर्यटन क्षेत्र सुधरे, तो कितना अतिरिक्त रोज़गार मिल सकता है? | हर साल 35 लाख से अधिक लोगों को (पृष्ठ 29) |
| ★58 | छोटी अवधि के द्रुत उपाय के रूप में केंद्र सरकार ने कौन-सा कानून बनाया? | भारत के लगभग 625 जिलों में काम का अधिकार लागू करने का कानून, जिसे महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम–2005 (म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005) कहा जाता था (पृष्ठ 29) |
| ★★59 | म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 में किसे, कितने दिन के रोज़गार की गारंटी दी गई थी? | काम करने में सक्षम और काम की ज़रूरत वाले सभी लोगों को, ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष में 100 दिन (पृष्ठ 29) |
| 60 | म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ. में सरकार रोज़गार न दे पाए, तो क्या होगा? | सरकार लोगों को बेरोज़गारी भत्ता देगी (पृष्ठ 29) |
| 61 | म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ. में किस तरह के कामों को वरीयता दी गई थी? | जिनसे भूमि से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली (पृष्ठ 29) |
| ★62 | 2025 में म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ. का स्थान किसने लिया? | विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (विकसित भारत - जी राम जी 2025) ने (पृष्ठ 29) |
सेट 6 — संगठित और असंगठित क्षेत्रक (कार्ड 63–77)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★63 | संगठित और असंगठित क्षेत्रक का बँटवारा किस आधार पर होता है? | लोग कैसे नियोजित हैं: उनके काम करने की शर्तें क्या हैं, और रोज़गार में नियमों और विनियमों का पालन होता है या नहीं (पृष्ठ 30) |
| 64 | किताब के उदाहरण में कान्ता को अपने रोज़गार में क्या-क्या मिलता है? | तय समय (सुबह 9.30 से शाम 5.30), हर माह के अन्त में नियमित वेतन, भविष्य निधि, चिकित्सीय और अन्य भत्ते, रविवार को सवेतन अवकाश, और नियुक्ति-पत्र (पृष्ठ 30) |
| 65 | किताब के उदाहरण में कमल के रोज़गार की परिस्थितियाँ कैसी हैं? | किराना दुकान पर दैनिक मज़दूरी, सुबह 7.30 से शाम 8 बजे तक; मज़दूरी के अलावा कोई भत्ता नहीं; जिस दिन काम नहीं, उस दिन की मज़दूरी नहीं; कोई छुट्टी नहीं, कोई नियुक्ति-पत्र नहीं; नियोक्ता कभी भी हटा सकता है (पृष्ठ 30) |
| ★★66 | संगठित क्षेत्रक में कौन-से उद्यम या कार्य-स्थान आते हैं? | जहाँ रोज़गार की अवधि नियमित होती है और लोगों के पास सुनिश्चित काम होता है; जो सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं और सरकारी नियमों एवं विनियमों का पालन करते हैं (पृष्ठ 30) |
| 67 | संगठित क्षेत्रक के नियम किन अधिनियमों में लिखे हैं? किताब के उदाहरण बताइए। | कारखाना अधिनियम, न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, सेवानुदान अधिनियम, दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम (पृष्ठ 30) |
| ★68 | संगठित क्षेत्रक को “संगठित” क्यों कहते हैं? | “इसे संगठित क्षेत्रक कहते हैं क्योंकि इसकी कुछ औपचारिक प्रक्रिया एवं कार्यविधि है।” (पृष्ठ 30) |
| 69 | क्या अपना काम ख़ुद करने वाला व्यक्ति संगठित क्षेत्रक में हो सकता है? | हाँ, अगर वह अपने को सरकार के समक्ष पंजीकृत कराए और नियमों एवं विनियमों का पालन करे (पृष्ठ 30) |
| 70 | संगठित क्षेत्रक के कर्मचारियों को कौन-से लाभ मिलते हैं? | रोज़गार-सुरक्षा; निश्चित समय तक काम, और ज़्यादा काम पर अतिरिक्त वेतन; सवेतन छुट्टी, अवकाश काल में भुगतान, भविष्य निधि, सेवानुदान, चिकित्सीय लाभ, पेयजल और सुरक्षित कार्य-पर्यावरण; सेवानिवृत्ति पर पेंशन (पृष्ठ 30, 31) |
| ★★71 | असंगठित क्षेत्रक किससे बनता है? | “छोटी–छोटी और बिखरी इकाइयों, जो अधिकांशत: सरकारी नियंत्रण से बाहर होती हैं” से (पृष्ठ 31) |
| ★72 | ! क्या असंगठित क्षेत्रक के लिए कोई नियम नहीं होते? | होते हैं: “इस क्षेत्रक के नियम और विनियम तो होते हैं परंतु उनका अनुपालन नहीं होता है।” (पृष्ठ 31) |
| 73 | असंगठित क्षेत्रक के रोज़गार की पहचान क्या है? | कम वेतन, प्राय: अनियमित; अतिरिक्त समय, सवेतन छुट्टी या बीमारी की छुट्टी का कोई प्रावधान नहीं; रोज़गार सुरक्षित नहीं: “श्रमिकों को बिना किसी कारण काम से हटाया जा सकता है।” (पृष्ठ 31) |
| 74 | पृष्ठ 31 की तालिका, विभिन्न क्षेत्रकों में श्रमिकों की संख्या (दस लाख में), में प्राथमिक क्षेत्रक के कितने श्रमिक असंगठित हैं? | 232 में से 231; संगठित सिर्फ़ 1 (पृष्ठ 31) |
| ★75 | पृष्ठ 31 की श्रमिकों वाली तालिका पूरी भरने पर कुल संगठित, असंगठित और कुल श्रमिक कितने आते हैं? | संगठित 82, असंगठित 393, कुल 475 (दस लाख में) (पृष्ठ 31) |
| ★76 | पृष्ठ 31 की श्रमिकों वाली तालिका के अनुसार कितने प्रतिशत श्रमिक संगठित और कितने असंगठित क्षेत्रक में हैं? | संगठित लगभग 17%, असंगठित लगभग 83% (पृष्ठ 31) |
| 77 | पृष्ठ 31 की श्रमिकों वाली तालिका के अनुसार असंगठित क्षेत्रक के कितने प्रतिशत श्रमिक कृषि (प्राथमिक क्षेत्रक) में हैं? | 393 में से 231, यानी लगभग 59% (पृष्ठ 31) |
सेट 7 — असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का संरक्षण (कार्ड 78–84)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 78 | संगठित क्षेत्रक के उद्यम कई बार असंगठित क्षेत्रक की तरह काम क्यों करते हैं? | कर वंचन के लिए, और श्रमिकों को संरक्षण देने वाली विधियों के पालन से बचने के लिए (पृष्ठ 32) |
| 79 | सन् 1990 से संगठित क्षेत्रक के श्रमिकों के साथ क्या हो रहा है? | बहुत से श्रमिक अपना रोज़गार खो रहे हैं और असंगठित क्षेत्रक में कम वेतन पर काम करने को विवश हैं (पृष्ठ 32) |
| ★80 | ग्रामीण क्षेत्रों में असंगठित क्षेत्रक मुख्य रूप से किन लोगों से बना है? | भूमिहीन कृषि श्रमिक, छोटे और सीमांत किसान, फसल बँटाईदार और कारीगर (बुनकर, लुहार, बढ़ई, सुनार) (पृष्ठ 32) |
| 81 | भारत में कितने ग्रामीण परिवार छोटे और सीमांत किसान हैं, और उन्हें क्या चाहिए? | लगभग 80 प्रतिशत; उन्हें समय से बीज, कृषि-उपकरण, साख, भण्डारण सुविधा और विपणन केन्द्र की पर्याप्त सुविधा चाहिए (पृष्ठ 32) |
| ★82 | शहरी क्षेत्रों में असंगठित क्षेत्रक मुख्य रूप से किन लोगों से बना है? | लघु उद्योगों के श्रमिक; निर्माण, व्यापार और परिवहन के आकस्मिक श्रमिक; सड़कों पर विक्रेता, सिर पर बोझा ढोने वाले, वस्त्र-निर्माण करने वाले और कबाड़ उठाने वाले (पृष्ठ 32) |
| 83 | असंगठित क्षेत्रक के बहुसंख्यक श्रमिक किन समुदायों से हैं, और कम मज़दूरी के अलावा वे किसके शिकार हैं? | अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों से; अनियमित और कम मज़दूरी के अलावा वे सामाजिक भेदभाव के भी शिकार हैं (पृष्ठ 32) |
| ★84 | असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों के बारे में किताब का निष्कर्ष क्या है? | “आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को संरक्षण और सहायता अनिवार्य है।” (पृष्ठ 32) |
सेट 8 — स्वामित्व आधारित क्षेत्रक: सार्वजनिक और निजी (कार्ड 85–93)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★85 | ! सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक किस आधार पर बँटते हैं? | स्वामित्व के आधार पर: परिसंपत्तियों का स्वामी कौन है और सेवाएँ उपलब्ध कराने की ज़िम्मेदारी किसकी है (पृष्ठ 33) |
| ★86 | सार्वजनिक क्षेत्रक में स्वामित्व किसका होता है? किताब के उदाहरण बताइए। | “अधिकांश परिसंपत्तियों पर सरकार का स्वामित्व होता है और सरकार ही सभी सेवाएँ उपलब्ध कराती है।” उदाहरण: रेलवे, डाकघर (पृष्ठ 33) |
| 87 | निजी क्षेत्रक में स्वामित्व किसका होता है? किताब के उदाहरण बताइए। | एकल व्यक्ति या कंपनी का; उदाहरण: टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड (टिस्को), रिलायंस इण्डस्ट्रीज लिमिटेड (पृष्ठ 33) |
| ★★88 | निजी और सार्वजनिक क्षेत्रक के ध्येय में क्या अंतर है? | निजी क्षेत्रक का ध्येय लाभ अर्जित करना; पर “सार्वजनिक क्षेत्रक का ध्येय केवल लाभ कमाना नहीं होता है।” सरकार ख़र्च की भरपाई करों या अन्य तरीकों से करती है (पृष्ठ 33) |
| ★89 | सड़क, पुल, रेलवे, पत्तन, बिजली और बाँध से सिंचाई जैसी सुविधाएँ सरकार ख़ुद क्यों देती है? | इनमें बहुत पैसा लगता है जो निजी क्षेत्रक की क्षमता से बाहर है; हज़ारों उपयोग करने वालों से पैसा जुटाना आसान नहीं; और निजी क्षेत्रक दे भी, तो ऊँची कीमत वसूलेगा (पृष्ठ 33, 34) |
| 90 | सरकार उद्योगों को सस्ती दर पर बिजली क्यों देती है? | उत्पादन-मूल्य पर बिजली बिकने से उद्योगों की उत्पादन-लागत बढ़ सकती है और अनेक इकाइयाँ, ख़ासकर लघु इकाइयाँ, बंद हो सकती हैं; इसलिए सरकार ऐसी दर पर बिजली देती है जिस पर ये ख़रीद सकें, और लागत का कुछ अंश ख़ुद वहन करती है (पृष्ठ 34) |
| 91 | सरकार किसानों से गेहूँ और चावल ख़रीदकर राशन-दुकानों से बेचती है; इससे किसे सहायता मिलती है? | सरकार किसानों से उचित मूल्य पर ख़रीदती है, गोदामों में भण्डारित करती है और उपभोक्ताओं को कम मूल्य पर बेचती है; इस तरह किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को सहायता मिलती है (पृष्ठ 34) |
| ★92 | जिन गतिविधियों की प्राथमिक ज़िम्मेदारी सरकार पर है, उनके बारे में किताब क्या कहती है? उदाहरण भी दीजिए। | “इन पर व्यय करना सरकार की अनिवार्यता है।” उदाहरण: सबके लिए स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएँ उपलब्ध कराना; समुचित ढंग से विद्यालय चलाना और गुणात्मक शिक्षा, विशेषकर प्राथमिक शिक्षा, उपलब्ध कराना सरकार का कर्त्तव्य है (पृष्ठ 34) |
| 93 | किताब किन दो राज्यों की शिशु मृत्यु दर को विश्व के कुछ निर्धनतम भागों से अधिक बताती है? | ओडिशा (36) और मध्य प्रदेश (43) (पृष्ठ 34) |
अंतिम पाँच मिनट — यही दोहराइए
तीन क्षेत्रक: प्राथमिक (कृषि एवं सहायक) · द्वितीयक (औद्योगिक) · तृतीयक (सेवा) स.घ.उ.: एक विशेष वर्ष में देश के भीतर बनी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य; मध्यवर्ती वस्तुएँ अलग से नहीं गिनतीं आलेख 3, रोज़गार %: 1977–78 में 71 · 11 · 18, 2017–18 में 44 · 25 · 31 (प्राथमिक · द्वितीयक · तृतीयक) 2017–18: सबसे बड़ा उत्पादक तृतीयक, सबसे बड़ा नियोक्ता अब भी प्राथमिक अल्प बेरोज़गारी: सब काम करते दिखते हैं, पर क्षमता से कम; कुछ लोग हटें, तब भी उत्पादन नहीं घटता म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005: लगभग 625 जिले · ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष में 100 दिन · 2025 में इसका स्थान विकसित भारत - जी राम जी 2025 ने लिया पृष्ठ 31 की तालिका (दस लाख में): संगठित 82 · असंगठित 393 · कुल 475; लगभग 17% संगठित, 83% असंगठित दो और बँटवारे: संगठित-असंगठित रोज़गार की परिस्थितियों से · सार्वजनिक-निजी स्वामित्व से