अध्याय 4वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

परख प्रश्न15 मिनट

यह प्रश्न रटने से हल नहीं होते — इनमें बच्चे को सोचना, तुलना करना, आँकड़ा पढ़ना और पक्ष लेना पड़ता है। NCF-2023 और PARAKH के प्रारूप पर आधारित।


भाग क — केस-आधारित प्रश्न

केस 1 — “एक जोड़ी जूते की यात्रा”

एक कंपनी का मुख्यालय जर्मनी में है। जूते का डिज़ाइन इटली में बनता है। चमड़ा भारत (कानपुर) से जाता है। तलवे वियतनाम में बनते हैं। सिलाई और जोड़ाई बांग्लादेश में होती है। तैयार जूता यूरोप और अमेरिका में बिकता है और उस पर लिखा होता है — “मेड इन बांग्लादेश”। ग्राहक कोई शिकायत करे तो फ़ोन भारत के एक कॉल सेंटर में उठता है।

1यह कंपनी किस श्रेणी में आती है? कारण सहित। 1 अंक

उत्तर देखिए

बहुराष्ट्रीय कंपनी — क्योंकि यह एक से अधिक देशों (इटली, वियतनाम, बांग्लादेश, भारत) में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।

2कंपनी ने बांग्लादेश में सिलाई और भारत में कॉल सेंटर ही क्यों रखा? 2 अंक

उत्तर देखिए

बांग्लादेश — क्योंकि सिलाई में बहुत श्रम लगता है और वहाँ सस्ता श्रम मिलता है, जिससे उत्पादन लागत घटती है।

भारत — क्योंकि यहाँ किताब के शब्दों में “अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक” उपलब्ध हैं जो ग्राहक देखभाल सेवाएँ दे सकते हैं, और वह भी कम लागत पर।

3लेबल पर “मेड इन बांग्लादेश” लिखा है — क्या यह पूरी सच्चाई है? समझाइए। 2 अंक

उत्तर देखिए

नहीं, यह अधूरी सच्चाई है। जूते में इटली का डिज़ाइन, भारत का चमड़ा और वियतनाम के तलवे भी हैं; बांग्लादेश में तो केवल अंतिम सिलाई और जोड़ाई हुई है। यह इसी बात का प्रमाण है कि “उत्पादन प्रक्रिया क्रमश: जटिल ढंग से संगठित हुई है” और अब वस्तुओं का उत्पादन विश्व स्तर पर होता है।

4इस पूरी व्यवस्था में सबसे अधिक लाभ किसे और सबसे कम किसे होगा? तर्क दीजिए। 3 अंक

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सबसे अधिक लाभ — जर्मनी की मूल कंपनी को, क्योंकि उसी के पास ब्राण्ड नाम है, वही मूल्य तय करती है और वही सबसे बड़ा हिस्सा रखती है। किताब कहती है कि बड़ी कंपनियों में “दूरस्थ उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तों का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता” होती है।

सबसे कम लाभ — बांग्लादेश के सिलाई करने वाले श्रमिकों को, क्योंकि उनका काम सबसे अधिक मेहनत का है पर मज़दूरी सबसे कम मिलती है, और लागत घटाने का सारा दबाव अंतत: श्रम-लागत पर ही आता है।

यही किताब की बात है — “वैश्वीकरण के कारण मिले लाभ में श्रमिकों को न्यायसंगत हिस्सा नहीं दिया गया है।”


केस 2 — रवि बनाम शहरी उपभोक्ता

क एक शहर में रहता है। पहले उसके पास एक ही ब्रांड का टीवी ख़रीदने का विकल्प था; अब दस ब्रांड हैं, दाम कम हैं और गुणवत्ता बेहतर है। ख होसुर में संधारित्र बनाता था। 2001 में आयात प्रतिबंध हटने के बाद आयातित संधारित्र उसकी क़ीमत से आधे दाम पर मिलने लगे। आज वह आधे से भी कम उत्पादन करता है और उसके पास केवल सात श्रमिक बचे हैं।

1दोनों के साथ जो हुआ, उसका एक ही कारण है — वह क्या है? 2 अंक

उत्तर देखिए

दोनों का एक ही कारण है — वैश्वीकरण और उदारीकरण के बाद बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा। जिस प्रतिस्पर्धा ने क को सस्ता और बेहतर टीवी दिया, उसी ने ख का धंधा चौपट कर दिया।

2क्या क का लाभ ख की क़ीमत पर मिला है? अपने विचार तर्क सहित दीजिए। 3 अंक

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हाँ, काफ़ी हद तक। क को सस्ती वस्तु इसीलिए मिली क्योंकि आयातित वस्तु सस्ती थी, और वही आयात ख जैसे छोटे उत्पादक की बिक्री खा गया।

पर पूरी तरह नहीं — क्योंकि सस्ती क़ीमत का एक कारण बेहतर प्रौद्योगिकी और बड़े पैमाने का उत्पादन भी है, न कि केवल किसी की हानि।

★सही निष्कर्ष यही है — “वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है”; एक ही प्रक्रिया कुछ को अवसर और कुछ को चुनौती देती है।

3सरकार क का लाभ छीने बिना ख की मदद कैसे कर सकती है? तीन उपाय बताइए। 3 अंक

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1

छोटे उत्पादकों को तब तक सहायता दे “जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हो जायें” — जैसे सस्ता ऋण, प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण।

2

ज़रूरत हो तो व्यापार अवरोधकों का सीमित उपयोग करे — जैसे गुणवत्ता के अनिवार्य मानक, ताकि सस्ता पर घटिया माल न आए।

3

विश्व व्यापार संगठन में ‘न्यायसंगत नियमों’ के लिए समझौते करे, ताकि विकसित देश भी अपने अवरोधक और सब्सिडी हटाएँ।


केस 3 — दो श्रमिकों की तनख़्वाह पर्ची

रमेश (स्थायी श्रमिक, 1995) — मासिक वेतन ₹6,000 · भविष्य निधि ✓ · स्वास्थ्य बीमा ✓ · ओवरटाइम पर दुगुनी मज़दूरी ✓ · साप्ताहिक अवकाश ✓ सुरेश (अस्थायी श्रमिक, आज) — काम के दिन के हिसाब से भुगतान · भविष्य निधि ✘ · स्वास्थ्य बीमा ✘ · ओवरटाइम पर सामान्य दर · कोई साप्ताहिक अवकाश नहीं · काम न मिले तो उस दिन की मज़दूरी नहीं

1सुरेश किस क्षेत्रक की परिस्थितियों में काम कर रहा है? 1 अंक

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असंगठित क्षेत्रक जैसी परिस्थितियों में — भले ही वह किसी बड़े कारख़ाने में काम कर रहा हो।

2किताब का कौन-सा वाक्य इस तालिका को सबसे अच्छे ढंग से समझाता है? 2 अंक

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“संगठित क्षेत्र में क्रमश: कार्य-परिस्थितियाँ असंगठित क्षेत्र के समान होती जा रही हैं।” (पृष्ठ 70)

3नियोक्ता ऐसा क्यों करता है, और उसे इसका क्या लाभ है? 3 अंक

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क्योंकि बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ लाभ बढ़ाने के लिए सबसे सस्ती वस्तुएँ खोजती हैं और निर्यातकों पर लागत घटाने का दबाव डालती हैं। निर्यातक कच्चे माल की लागत नहीं घटा सकता, इसलिए श्रम-लागत घटाता है।

लाभ — उसे वर्ष भर वेतन नहीं देना पड़ता, भविष्य निधि और बीमा का ख़र्च बचता है, और माँग बढ़ने-घटने के अनुसार श्रमिक रखे-हटाए जा सकते हैं। किताब के शब्दों में — “कंपनी की श्रम लागत में कटौती करने के लिए ऐसा किया जाता है।”

4सुरेश की स्थिति सुधारने के लिए सरकार क्या कर सकती है? 2 अंक

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किताब के अनुसार सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है कि “श्रमिक क़ानूनों का उचित कार्यान्वयन हो और श्रमिकों को अपने अधिकार मिलें।” साथ ही उसकी नीतियाँ “केवल धनी और प्रभावशाली लोगों को ही नहीं बल्कि देश के सभी लोगों के हितों का संरक्षण” करें।

भाग ख — तर्क और मूल्यांकन

1“बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से भारत को केवल फ़ायदा हुआ है।” — क्या आप सहमत हैं? 3 अंक

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आंशिक रूप से सहमत।

फ़ायदे नये रोज़गार बने; कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुईं; उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प, बेहतर गुणवत्ता और कम क़ीमत मिली; शीर्ष भारतीय कंपनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाई।

पर हानियाँ भी हुईं छोटे उत्पादकों की कई इकाइयाँ बंद हुईं (बैटरी, संधारित्र, खिलौने, टायर, खाद्य तेल); श्रमिकों का रोज़गार अनिश्चित हो गया; और कंपनियों ने श्रम-क़ानूनों में और अधिक लचीलेपन की माँग जारी रखी।

इसलिए सही कथन यही है — “वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है।”

2“विकसित देश स्वयं सब्सिडी देते हैं और दूसरों से मुक्त व्यापार माँगते हैं।” — इस कथन की जाँच कीजिए। 3 अंक

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यह कथन सही है और किताब स्वयं यह बात उठाती है — “विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है”, जबकि WTO के नियमों ने “विकासशील देशों के व्यापार अवरोधों को हटाने के लिए विवश किया है।”

प्रमाण अमेरिका में कृषि का जी.डी.पी. में हिस्सा मात्र 1 प्रतिशत और रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत है, फिर भी वहाँ के किसान सरकार से भारी धन राशि पाते हैं, जिससे वे असाधारण रूप से कम क़ीमत पर बेच पाते हैं और अधिशेष उत्पाद दूसरे देशों में सस्ते दाम पर डाल देते हैं — “जो इन देशों के कृषकों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।”

★इसीलिए विकासशील देश पूछते हैं — “क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?”

3“वैश्वीकरण को रोक देना चाहिए।” — पक्ष और विपक्ष दोनों में दो-दो तर्क दीजिए और अपना निष्कर्ष लिखिए। 4 अंक

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पक्ष में (रोकने के पक्ष में)

1

छोटे उत्पादकों की कई इकाइयाँ बंद हो गईं और अनेक श्रमिक बेरोज़गार हुए।

2

श्रमिकों का रोज़गार अनिश्चित हो गया — लम्बे घंटे, कम मज़दूरी और कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं।

विपक्ष में (न रोकने के पक्ष में)

1

उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प, बेहतर गुणवत्ता और कम क़ीमत मिली तथा उच्चतर जीवन स्तर आया।

2

नये रोज़गार बने, और कुछ भारतीय कंपनियाँ (टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी) स्वयं बहुराष्ट्रीय बन गईं।

निष्कर्ष ★ किताब का उत्तर स्पष्ट है — “वैश्वीकरण अब एक सच्चाई है”, इसलिए इसे रोकना न संभव है न उपयोगी। सही रास्ता इसे न्यायसंगत बनाना है, जो “सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।”

4“अगर सूचना प्रौद्योगिकी न होती तो वैश्वीकरण न होता।” — सिद्ध कीजिए। 3 अंक

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किताब का पत्रिका वाला उदाहरण ही इसका प्रमाण है — लंदन की पत्रिका का पाठ्य-विषय इंटरनेट से दिल्ली पहुँचता है, निर्देश दूरसंचार सुविधाओं से मिलते हैं, डिज़ाइन कंप्यूटर पर बनता है, और भुगतान ई-बैंकिंग से तत्काल हो जाता है।

यदि यह प्रौद्योगिकी न होती तो — उत्पादन के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग देशों में एक साथ चलाना असंभव होता; डिज़ाइन और निर्देश भेजने में हफ़्तों लगते; और भुगतान में महीनों। इसीलिए किताब कहती है कि “प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति वह मुख्य कारक है जिसने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया।”

भाग ग — आँकड़ा और तालिका पढ़ना

1नीचे दी गई काल्पनिक तालिका देखिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए 3 अंक

उत्तर देखिए
वर्षआयातित खिलौनों की बिक्री (करोड़ ₹)भारतीय खिलौनों की बिक्री (करोड़ ₹)
200020180
200590110
201015050

(अ) 2000 से 2010 के बीच आयातित खिलौनों की बिक्री कितने गुना बढ़ी?

150 ÷ 20 = साढ़े सात गुना (7.5 गुना)।

(ब) 2000 में कुल बाज़ार में भारतीय खिलौनों का हिस्सा कितने प्रतिशत था और 2010 में कितना?

2000 कुल बाज़ार = 20 + 180 = 200 करोड़; भारतीय हिस्सा = (180 ÷ 200) × 100 = 90 प्रतिशत।

2010 कुल बाज़ार = 150 + 50 = 200 करोड़; भारतीय हिस्सा = (50 ÷ 200) × 100 = 25 प्रतिशत।

(स) इस तालिका से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?

कुल बाज़ार का आकार वही रहा (200 करोड़), पर भारतीय खिलौनों का हिस्सा 90 प्रतिशत से गिरकर 25 प्रतिशत रह गया। यानी बाज़ार बढ़ा नहीं, केवल हाथ बदल गया — भारतीय उत्पादकों की जगह आयातित खिलौनों ने ले ली। यह ठीक वही बात है जो किताब कहती है — “एक वर्ष में ही खिलौने की 70-80 प्रतिशत दुकानों में भारतीय खिलौनों का स्थान चीनी खिलौनों ने ले लिया।”

2एक बहुराष्ट्रीय कंपनी उत्पादन विश्व भर में बाँटकर अपनी लागत का 50-60 प्रतिशत बचाती है। यदि उसकी पुरानी लागत ₹1,000 प्रति इकाई थी, तो नई लागत लगभग कितनी होगी? 2 अंक

उत्तर देखिए

50 प्रतिशत बचत पर 1000 − 500 = ₹500 प्रति इकाई

60 प्रतिशत बचत पर 1000 − 600 = ₹400 प्रति इकाई

यानी नई लागत लगभग ₹400 से ₹500 के बीच होगी।

3सुशीला पहले जितना कमाती थी, अब आधे से भी कम कमाती है, जबकि पहले सप्ताह में एक दिन छुट्टी थी और अब सातों दिन काम है। इसका अर्थ प्रति घंटा कमाई पर क्या पड़ा? 2 अंक

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उसकी कुल कमाई आधी से भी कम हो गई और काम के दिन और घंटे बढ़ गए। इसका सीधा अर्थ है कि उसकी प्रति घंटा कमाई आधे से भी कहीं ज़्यादा गिर गई है — यानी अब उसे उतने ही पैसे के लिए कहीं ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

भाग घ — परियोजना और गतिविधि

1★“घर का सामान, दुनिया का नक्शा” (समूह कार्य)

घर में इस्तेमाल होने वाले 10 उत्पाद चुनिए — साबुन, टूथपेस्ट, मोबाइल, टीवी, कपड़े, जूते, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, पंखा, बल्ब।

हर एक पर देखिए — कंपनी का नाम, “मेड इन” कहाँ लिखा है, और कंपनी भारतीय है या विदेशी।

तालिका बनाइए और बताइए कि कितने प्रतिशत उत्पाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हैं। (यह NCERT की अतिरिक्त परियोजना 1 का ही विस्तार है।)

2“1995 और आज” — बड़ों से बातचीत

घर के किसी बुज़ुर्ग से पूछिए — “जब आप हमारी उम्र के थे, तब दुकान में कितने ब्रांड मिलते थे? टीवी, साबुन और कपड़े कौन-से आते थे?”

फिर आज की दुकान से मिलाइए और आधा पन्ना लिखिए — “क्या बदला और किसकी वजह से?”

3एक दुकानदार का साक्षात्कार

किसी छोटे दुकानदार से पाँच प्रश्न पूछिए — (1) आपकी दुकान में आयातित सामान कितना है? (2) दस साल पहले कितना था? (3) ग्राहक सस्ता चाहता है या टिकाऊ? (4) भारतीय सामान की माँग बढ़ी या घटी? (5) आपके धंधे पर क्या असर पड़ा?

4वाद-विवाद

विषय “विदेशी कंपनियों को भारत में आने की खुली छूट होनी चाहिए।”

कक्षा को दो दलों में बाँटिए। हर दल को तीन तर्क + एक उदाहरण देना अनिवार्य हो। अंत में शिक्षक निष्कर्ष दे — “वैश्वीकरण अब एक सच्चाई है; सवाल उसे रोकने का नहीं, न्यायसंगत बनाने का है।”

5★राजस्थान से जोड़िए

पता कीजिए कि आपके ज़िले या आसपास कोई औद्योगिक क्षेत्र (RIICO) है या नहीं। वहाँ कौन-सी कंपनियाँ हैं और उनमें कोई विदेशी कंपनी है? (संकेत — अलवर ज़िले के नीमराना में भारत का पहला जापानी ज़ोन है, जहाँ 50 से अधिक जापानी कंपनियाँ हैं।)

मूल्यांकन रूब्रिक (शिक्षक के लिए)

स्तरपहचान
उत्कृष्टदोनों पक्ष देता है, किताब के उद्धरण से समर्थन करता है, अपना निष्कर्ष लिखता है और नया उदाहरण जोड़ता है
अच्छादोनों पक्ष देता है और उदाहरण देता है, पर निष्कर्ष कमज़ोर है
सुधार चाहिएकेवल एक पक्ष लिखता है (केवल लाभ या केवल हानि) — ! यही इस अध्याय की सबसे आम ग़लती है
बहुत कमज़ोरपरिभाषाएँ रट कर लिख देता है, पर उदाहरण से जोड़ नहीं पाता