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1अर्थशास्त्र में "क्षेत्रक" किसे कहते हैं?
व्याख्या: हमारे चारों ओर हर समय तरह-तरह की आर्थिक गतिविधियाँ होती हैं। इन्हें समझने के लिए किसी महत्त्वपूर्ण मानदंड के आधार पर समूहों में बाँटा जाता है, और इन समूहों को क्षेत्रक कहते हैं। बाकी तीनों विकल्प गतिविधियों के समूह नहीं हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 19
2कपास को प्राकृतिक उत्पाद क्यों माना जाता है?
व्याख्या: कपास का पौधा उगाने में हम मुख्यतः, न कि पूरी तरह, वर्षा, सूर्य के प्रकाश और जलवायु जैसे प्राकृतिक कारकों पर निर्भर हैं। इसलिए कपास प्राकृतिक उत्पाद है और प्राथमिक क्षेत्रक की देन है। उससे बना कपड़ा विनिर्मित उत्पाद है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 20
3कार्य के स्वभाव के आधार पर गन्ने से चीनी या गुड़ बनाना किस क्षेत्रक की गतिविधि है?
व्याख्या: गन्ना उगाना प्राथमिक क्षेत्रक है। गन्ने को विनिर्माण से चीनी या गुड़ में बदलना द्वितीयक क्षेत्रक है, जिसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहते हैं। तृतीयक क्षेत्रक वस्तुएँ नहीं बनाता, सेवाएँ देता है, और सूचना प्रौद्योगिकी किसी क्षेत्रक का नाम नहीं, तृतीयक क्षेत्रक की एक सेवा है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 20
4इनमें से कौन-सी गतिविधि तृतीयक क्षेत्रक की है?
व्याख्या: भण्डारण एक सेवा है, जो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक के उत्पादन में मदद करती है; परिवहन, संचार, बैंक सेवाएँ और व्यापार भी ऐसी ही सेवाएँ हैं। कपास की खेती और खनिज निकालना प्राथमिक हैं, और मिट्टी से ईंट बनाना द्वितीयक।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 20
5किसान चीनी मिल को गन्ना बेचने से मना कर दें, तो मिल बंद हो जाएगी। यह उदाहरण क्या दिखाता है?
व्याख्या: मिल (द्वितीयक) का कच्चा माल गन्ना खेत (प्राथमिक) से आता है, इसलिए गन्ना न मिले तो मिल नहीं चल सकती। यह पृष्ठ 21 की तालिका 2.1 की पहली पंक्ति है, जिसका उत्तर किताब में छपा है। चीनी मिल द्वितीयक क्षेत्रक की इकाई है और गन्ने की खेती प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि; और तीनों क्षेत्रक स्वतंत्र नहीं, एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 21
6किसान ने गेहूँ ₹20 प्रति कि.ग्रा. पर आटा-मिल को बेचा, मिल ने आटा ₹25 प्रति कि.ग्रा. पर बिस्कुट कंपनी को बेचा, और कंपनी ने बिस्कुट के 4 पैकेट ₹80 में बेचे। स.घ.उ. में कितना मूल्य गिना जाएगा?
व्याख्या: सिर्फ़ अंतिम वस्तु, यानी बिस्कुट का मूल्य ₹80 गिना जाता है। ₹80 में आटे के ₹25 पहले से शामिल हैं, इसलिए ₹20 + ₹25 + ₹80 = ₹125 जोड़ना एक ही मूल्य को कई बार गिनना होगा। गेहूँ और आटा यहाँ मध्यवर्ती वस्तुएँ हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 22
7सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) किसका मूल्य है?
व्याख्या: किताब के शब्दों में: "यह किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य है।" गिनती एक विशेष वर्ष की होती है, पाँच वर्षों की नहीं; मूल्य जोड़ा जाता है, संख्या नहीं; और मध्यवर्ती वस्तुएँ अलग से नहीं गिनी जातीं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 22, 23
8भारत में स.घ.उ. मापने का काम कौन करता है?
व्याख्या: भारत में स.घ.उ. मापने का कठिन काम केन्द्र सरकार का मंत्रालय करता है। वह राज्यों और केन्द्र शासित क्षेत्रों के सरकारी विभागों की मदद से वस्तुओं और सेवाओं की संख्या और मूल्य की सूचना जुटाता है, और फिर स.घ.उ. का अनुमान लगाता है। नीति आयोग का नाम इस अध्याय में रोज़गार के एक अध्ययन के साथ आता है, स.घ.उ. मापने के साथ नहीं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 23
9तीनों क्षेत्रकों का योगदान दिखाने के लिए सरकार ने हाल में, वैश्विक प्रथाओं की तरह, स.घ.उ. की जगह किसका प्रयोग शुरू किया है?
व्याख्या: "जी.वी.ए. करों तथा सब्सिडी के लिए समायोजन के बाद अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रकों के योगदान को मापता है।" आलेख 1 और 2 भी तीनों क्षेत्रकों का जी.वी.ए. ही दिखाते हैं। रोज़गार में हिस्सेदारी आलेख 3 में है, पर वह उत्पादन का माप नहीं है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 23
10ज़्यादातर विकसित देशों में पिछले 100 वर्षों में किस ओर बदलाव हुआ है?
व्याख्या: इन देशों में पहले प्राथमिक क्षेत्रक सबसे महत्त्वपूर्ण था, फिर कारखाने फैलने पर द्वितीयक, और पिछले 100 वर्षों में बदलाव द्वितीयक से तृतीयक की ओर हुआ। आज वहाँ ज़्यादातर श्रमजीवी लोग सेवा क्षेत्रक में काम करते हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 23
112017–18 में भारत का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक कौन-सा था?
व्याख्या: 1977–78 से 2017–18 के चालीस वर्षों में तीनों क्षेत्रकों का उत्पादन बढ़ा, पर सबसे ज़्यादा वृद्धि तृतीयक क्षेत्रक में हुई। 2017–18 में उसने प्राथमिक क्षेत्रक की जगह ले ली और सबसे बड़ा उत्पादक बन गया।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 24
12आलेख 3 के अनुसार 2017–18 में रोज़गार में प्राथमिक क्षेत्रक की हिस्सेदारी कितनी थी?
व्याख्या: आलेख 3 में 2017–18 के आँकड़े हैं: प्राथमिक 44, द्वितीयक 25 और तृतीयक 31 प्रतिशत। 71 प्रतिशत 1977–78 में प्राथमिक क्षेत्रक का हिस्सा था। 44 प्रतिशत के साथ प्राथमिक क्षेत्रक अब भी सबसे बड़ा नियोक्ता है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 25
13किताब के अनुसार सेवा क्षेत्रक में उत्पादन 14 गुना बढ़ा। उसमें रोज़गार कितना बढ़ा?
व्याख्या: किताब के शब्दों में: "सेवा क्षेत्रक में उत्पादन में 14 गुना वृद्धि हुई, परन्तु रोज़गार में 5 गुना से भी कम वृद्धि हुई।" यानी उत्पादन जितनी तेज़ी से बढ़ा, उतने रोज़गार नहीं बने। रोज़गार बढ़ा ज़रूर: आलेख 3 में तृतीयक क्षेत्रक का हिस्सा 18 से 31 प्रतिशत हुआ।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 25, 26
14भूस्वामी सुखराम लक्ष्मी के परिवार के एक या दो सदस्यों को अपनी ज़मीन पर काम के लिए ले जाए, तो क्या होगा?
व्याख्या: लक्ष्मी के दो हेक्टेयर के छोटे खेत पर ज़रूरत से ज़्यादा लोग लगे हैं, और किसी को पूरा काम नहीं मिलता। एक-दो लोग हट जाएँ, तो भी खेत का उत्पादन नहीं घटता, और बाहर की कमाई से परिवार की आय बढ़ती है। यही छिपी हुई बेरोज़गारी की पहचान है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 26
15शहरों में अल्प बेरोज़गारी का उदाहरण कौन-सा है?
व्याख्या: शहरों के सेवा क्षेत्रक में हज़ारों अनियत श्रमिक रोज़ काम खोजते हैं। सड़कों पर ठेला खींचने या चीज़ें बेचने वाले भी इसी हालत में हैं, "जहाँ वे पूरा दिन बिता देते हैं, परन्तु बहुत कम कमा पाते हैं।" बाकी तीनों विकल्प संगठित क्षेत्रक के नियमित काम हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 26, 30
16म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष में कितने दिन के रोज़गार की गारंटी देता था?
व्याख्या: काम करने में सक्षम और काम चाहने वाले सभी लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष में 100 दिन के रोज़गार की गारंटी दी गई थी; सरकार काम न दे पाए, तो वह बेरोज़गारी भत्ता देती। किताब के अनुसार 2025 में इसका स्थान विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (विकसित भारत - जी राम जी 2025) ने ले लिया। 50 दिन वाला आँकड़ा एक हेक्टेयर गेहूँ की फसल से मिलने वाले काम का है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 27, 29
17कोई व्यक्ति अपना काम करता है, सरकार के पास पंजीकृत है और नियमों का पालन करता है। रोज़गार की परिस्थितियों के आधार पर वह किस क्षेत्रक में है?
व्याख्या: संगठित क्षेत्रक की पहचान सरकार के पास पंजीकरण और नियमों का पालन है, किसी और की नौकरी करना नहीं। इसलिए अपना काम करने वाले लोग भी, पंजीकृत हों और नियम मानें, तो संगठित क्षेत्रक में आते हैं।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 30
18पृष्ठ 31 की तालिका "विभिन्न क्षेत्रकों में श्रमिकों की संख्या (दस लाख में)" के अनुसार 1990 के अंत में लगभग कितने प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में थे?
व्याख्या: तालिका में संगठित श्रमिकों का कुल 82 छपा है। खाली खाने भरने पर असंगठित श्रमिक 231 + 74 + 88 = 393 और कुल श्रमिक 475 (दस लाख) आते हैं: 393 ÷ 475 × 100 = 82.7, यानी लगभग 83 प्रतिशत। संगठित क्षेत्रक में 82, यानी लगभग 17 प्रतिशत। 44 प्रतिशत आलेख 3 में 2017–18 के रोज़गार में प्राथमिक क्षेत्रक का हिस्सा है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 31
19सार्वजनिक क्षेत्रक के बारे में कौन-सा कथन सही है?
व्याख्या: सार्वजनिक क्षेत्रक में ज़्यादातर परिसंपत्तियों पर सरकार का स्वामित्व होता है, और वही सेवाएँ उपलब्ध कराती है; रेलवे और डाकघर इसके उदाहरण हैं। उसका ध्येय केवल लाभ कमाना नहीं होता। लाभ कमाना ध्येय होना और व्यक्ति या कंपनी का स्वामित्व निजी क्षेत्रक की पहचान है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 33
20सरकार उद्योगों को उस दर पर बिजली क्यों उपलब्ध कराती है, जिस पर वे उसे ख़रीद सकें?
व्याख्या: उत्पादन-मूल्य पर बिजली बेचने से बहुत-से उद्योगों में उत्पादन-लागत बढ़ सकती है, और अनेक इकाइयाँ, ख़ासकर छोटी इकाइयाँ, बंद हो सकती हैं। इसलिए सरकार उस दर पर बिजली देने के कदम उठाती है जिस पर ये उद्योग उसे ख़रीद सकें, और लागत का कुछ अंश ख़ुद उठाती है। यह ऐसी गतिविधि है जिसे सरकारी समर्थन की ज़रूरत पड़ती है।
संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 34

