Chapter 4कृषि

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पुस्तक: समकालीन भारत–2 (कक्षा 10, NCERT — भूगोल) पाठ्यपुस्तक पृष्ठ: 30 से 41 तक


इस फ़ाइल को कैसे पढ़ें

यह फ़ाइल पूरे अध्याय की पूरी और आसान व्याख्या है। इसमें हर बात पूरे वाक्यों में लिखी गई है, ताकि आप इसे पढ़कर समझ भी सकें और वैसे ही उत्तर-पुस्तिका में लिख भी सकें।

सभी फसलों की एक ही तालिका भाग 8 में, कठिन शब्द भाग 10 में, और मानचित्र-कार्य फ़ाइल 05 (प्रश्न बैंक) के भाग च में दिया गया है।

! यह अध्याय बाक़ी अध्यायों से अलग है — इसे उसी तरह पढ़िए। इसमें कोई बहस नहीं है, कोई कहानी नहीं है। यह सूचना का अध्याय है — हर फसल के साथ उसका तापमान, वर्षा, मिट्टी, ऋतु और राज्य जुड़े हैं। इसलिए इसे पढ़ने का तरीक़ा भी अलग है — इसे पैराग्राफ़ में मत पढ़िए, तालिका में पढ़िए। भाग 8 की एक तालिका ही आधा अध्याय है।

★और एक अच्छी ख़बर — राजस्थान इस अध्याय में सात बार आता है, जिनमें एक बहुत ही कम जानी हुई बात भी है (दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की ‘वालरे’ कृषि)। RBSE के लिए यह अध्याय बहुत महत्त्वपूर्ण है।

0. सबसे पहले यह समझ लीजिए — यह अध्याय है किस बारे में?

अध्याय की शुरुआत चार वाक्यों से होती है, और चारों याद रखने लायक़ हैं —

#वाक्य
1“कृषि की दृष्टि से भारत एक महत्त्वपूर्ण देश है।”
2“इसकी दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है।”
3“कृषि एक प्राथमिक क्रिया है जो हमारे लिए अधिकांश खाद्यान्न उत्पन्न करती है।”
4“खाद्यान्नों के अतिरिक्त यह विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल भी पैदा करती है।”
  • “इसके अतिरिक्त, कुछ उत्पादों जैसे — चाय, कॉफी, मसाले इत्यादि का भी निर्यात किया जाता है।”

और पाठ्यपुस्तक का पहला सवाल —

“क्या आप कृषिगत कच्चे माल पर आधारित कुछ उद्योगों के नाम बता सकते हैं?” (उत्तर की दिशा — सूती कपड़ा उद्योग (कपास से), चीनी उद्योग (गन्ने से), जूट उद्योग, चाय उद्योग, खाद्य तेल उद्योग।)

0.1 इस अध्याय की सूत्र-बात

★हर फसल की तीन चीज़ें तय करती हैं कि वह कहाँ उगेगी — तापमान, वर्षा और मिट्टी। और इन्हीं तीन के कारण चावल असम में होता है और गेहूँ पंजाब में; बाजरा राजस्थान में होता है और रबड़ केरल में।

यही इस अध्याय को पढ़ने की कुंजी है। राज्यों के नाम रटिए मत — यह समझिए कि वहाँ की जलवायु और मिट्टी उस फसल के लायक़ क्यों है।

0.2 अध्याय को चार भागों में देखिए

भागविषयमुख्य बात
भाग 1कृषि के प्रकारजीविका निर्वाह से वाणिज्यिक तक — चार प्रकार
भाग 2शस्य प्रारूप (फसल-ऋतुएँ)तीन ऋतुएँ — रबी, खरीफ और ज़ायद
भाग 3मुख्य फसलेंखाद्यान्न, अन्य खाद्य फसलें और अखाद्य फसलें
भाग 4प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधारहरित क्रांति से किसान क्रेडिट कार्ड तक; और भूदान-ग्रामदान

1. कृषि के प्रकार (पृष्ठ 30–31)

“कृषि हमारे देश की प्राचीन आर्थिक क्रिया है। पिछले हज़ारों वर्षों के दौरान भौतिक पर्यावरण, प्रौद्योगिकी और सामाजिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाज़ों के अनुसार खेती करने की विधियों में सार्थक परिवर्तन हुआ है।”

  • “जीवन निर्वाह खेती से लेकर वाणिज्य खेती तक कृषि के अनेक प्रकार हैं।”

1.1 प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि★★

बिंदुविवरण
कहाँ होती है“भारत के कुछ भागों में अभी भी की जाती है”
कहाँ की जाती हैभूमि के छोटे टुकड़ों पर
किन औज़ारों सेआदिम कृषि औज़ार जैसे लकड़ी के हल, डाओ (dao) और खुदाई करने वाली छड़ी
किसके श्रम सेपरिवार अथवा समुदाय के श्रम की मदद से
किस पर निर्भरमानसून, मृदा की प्राकृतिक उर्वरता और फसल उगाने के लिए अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयुक्तता पर

★यह ‘कर्तन दहन प्रणाली’ (slash and burn) कृषि है — पूरी प्रक्रिया क्रम से समझिए —

क्रमक्या होता है
1“किसान ज़मीन के टुकड़े साफ़ करके उन पर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अनाज व अन्य खाद्य फसलें उगाते हैं।”
2“जब मृदा की उर्वरता कम हो जाती है तो किसान उस भूमि के टुकड़े से स्थानांतरित हो जाते हैं।”
3“और कृषि के लिए भूमि का दूसरा टुकड़ा साफ़ करते हैं।”
4“कृषि के इस प्रकार के स्थानांतरण से प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ जाती है।”
5“चूँकि किसान उर्वरक अथवा अन्य आधुनिक तकनीकों का प्रयोग नहीं करते, इसलिए इस प्रकार की कृषि में उत्पादकता कम होती है।”

चरण 4 पर रुकिए — यह बहुत समझदारी की बात है। खेत छोड़ देना आलस नहीं था; वह मिट्टी को आराम देने का तरीक़ा था। प्रकृति ख़ुद उसकी उर्वरता लौटा देती थी।

1.2 भारत में इसके अलग-अलग नाम — यह तालिका परीक्षा में आती है★

नामकहाँ
झूमअसम, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड
पामलू (pamlou)मणिपुर
दीपाछत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले और अंडमान निकोबार द्वीप समूह

और बॉक्स (पृष्ठ 30) में और भी नाम दिए हैं —

भारत मेंकहाँ
बेबर या दहियामध्य प्रदेश
पोडु या पेंडाआंध्र प्रदेश
पामाडाबी या कोमान या बरीगाँओडिशा
कुमारीपश्चिम घाट
★वालरे या वाल्टरेदक्षिण-पूर्वी राजस्थान
खिलहिमालयन क्षेत्र
कुरुवाझारखंड
झूमउत्तर पूर्वी प्रदेश

★‘वालरे या वाल्टरे — दक्षिण-पूर्वी राजस्थान’ — यह बहुत कम लोगों को पता होता है। RBSE की परीक्षा में यह पूछा जा सकता है, और यह बच्चों को यह भी बताता है कि यह कृषि कभी हमारे अपने राज्य में भी होती थी।

★और दुनिया-भर में इसके नाम (बॉक्स, पृष्ठ 30) —

नामकहाँ
मिल्पामैक्सिको और मध्य अमेरिका
कोनुकोवेनेजुएला
रोकाब्राज़ील
मसोलेमध्य अफ़्रीका
लदांगइंडोनेशिया
रेवियतनाम

याद रखने का तरीक़ा — “मिल्पा-कोनुको-रोका-मसोले-लदांग-रे” — छह नाम, छह देश। और भारत में सबसे प्रसिद्ध झूम है।

1.3 रिंझा की कहानी (केस-स्टडी, पृष्ठ 31)

“रिंझा असम में डिफु के बाहरी क्षेत्र में अपने परिवार के साथ एक गाँव में रहती है। वह अपने परिवार के सदस्यों द्वारा एक भूमि के टुकड़े पर उगी वनस्पति को काटकर व जलाकर साफ़ करते देख कर आनन्द का अनुभव करती है।”

“वह प्राय: परिवार के सदस्यों के साथ बाँस के नाले द्वारा झरने से पानी लाकर अपने खेत को सिंचित करने में सहायता करती है। वह अपने परिस्थान से लगाव रखती है और जब तक संभव हो यहाँ रहना चाहती है।”

“परंतु इस छोटी बच्ची को अपने खेत में मिट्टी की घटती उर्वरता के बारे में कुछ भी पता नहीं है, जिसके कारण उसके परिवार को अगले वर्ष नए भूमि के टुकड़े की तलाश करनी होगी।”

पाठ्यपुस्तक के दो प्रश्न —

  1. “क्या आप बता सकते हैं कि रिंझा का परिवार किस प्रकार की कृषि कर रहा है?” (उत्तर: प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि — झूम)
  2. “क्या आप उन फसलों के नाम बता सकते हैं जो इस प्रकार की कृषि में उगाई जाती हैं?” (उत्तर: अनाज और अन्य खाद्य फसलें, जो परिवार के भरण-पोषण के लिए हों)

इस कहानी में बाँस के नाले से सिंचाई का ज़िक्र ध्यान से पढ़िए — यह ठीक वही बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली है जो आपने पिछले अध्याय (जल संसाधन) में पढ़ी थी। दोनों अध्याय यहाँ मिलते हैं।

1.4 गहन जीविका कृषि★

बिंदुविवरण
कहाँ“उन क्षेत्रों में जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है”
कैसी है“यह श्रम-गहन खेती है”
क्या प्रयोग होता है“जहाँ अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में जैव-रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है”

और इसकी सबसे बड़ी समस्या — यह कारण-शृंखला याद कीजिए —

क्रमकड़ी
1“भूस्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा रहा है”
2“और किसान वैकल्पिक रोज़गार न होने के कारण सीमित भूमि से अधिकतम पैदावार लेने की कोशिश करते हैं”
3“अत: कृषि भूमि पर बहुत अधिक दबाव है”

पाठ्यपुस्तक का प्रश्न — “क्या आप भारत के कुछ राज्यों के नाम बता सकते हैं जहाँ इस प्रकार की कृषि की जाती है?” (उत्तर की दिशा — जहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक है: पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, केरल।)

1.5 वाणिज्यिक कृषि★★

बिंदुविवरण
मुख्य लक्षण“आधुनिक निवेशों जैसे अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से उच्च पैदावार प्राप्त करना”
स्तर“कृषि के वाणिज्यीकरण का स्तर विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग है”

★और वह उदाहरण जो सबसे ज़्यादा पूछा जाता है —

“उदाहरण के लिए हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्य की एक फसल है परंतु ओडिशा में यह एक जीविका फसल है।”

★यह उदाहरण बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि कोई फसल अपने आप ‘वाणिज्यिक’ या ‘जीविका’ नहीं होती — वह इस बात से तय होता है कि किसान उसे बेचने के लिए उगा रहा है या खाने के लिए। यही ‘कृषि के प्रकार’ की असली परिभाषा है।

पाठ्यपुस्तक का प्रश्न —

“क्या आप उन फसलों के कुछ और उदाहरण दे सकते हैं जो एक प्रदेश में वाणिज्यिक फसल के रूप में और दूसरे प्रदेश में जीविका फसल के रूप में उगाई जाती हैं?”

1.6 रोपण कृषि — यह वाणिज्यिक कृषि का ही एक प्रकार है★★

बिंदुविवरण
मुख्य विशेषता“इस प्रकार की खेती में लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है”
यह क्या है“रोपण कृषि, उद्योग और कृषि के बीच एक अंतरापृष्ठ (interface) है”
कैसे की जाती है“व्यापक क्षेत्र में की जाती है जो अत्यधिक पूँजी और श्रमिकों की सहायता से की जाती है”
उत्पादन का क्या होता है“इससे प्राप्त सारा उत्पादन उद्योग में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है”

भारत की महत्त्वपूर्ण रोपण फसलें —

“भारत में चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला इत्यादि महत्त्वपूर्ण रोपण फसलें हैं।”

कहाँ-कहाँ —

फसलकहाँ
चायअसम और उत्तरी बंगाल
कॉफीकर्नाटक

और एक ज़रूरी बात —

“चूँकि रोपण कृषि में उत्पादन बिक्री के लिए होता है, इसलिए इसके विकास में परिवहन और संचार साधन से संबंधित उद्योग और बाज़ार महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।”

चित्र 4.2 — भारत के दक्षिणी भाग में केले की रोपण कृषि। चित्र 4.3 — उत्तर-पूर्व में बाँस की कृषि।

2. शस्य प्रारूप — तीन फसल-ऋतुएँ (पृष्ठ 32)

“आपने भारत की भौतिक विविधताओं और संस्कृतियों की बहुलताओं के संबंध में अध्ययन किया है। ये देश में कृषि पद्धतियों और शस्य प्रारूपों में प्रतिबिंबित होता है।”

  • “भारत में तीन शस्य ऋतुएँ हैं, जो इस प्रकार हैं — रबी, खरीफ और ज़ायद।”

2.1 तीनों ऋतुओं की तालिका — यह सबसे पक्का प्रश्न है★★

ऋतुकब बोई जाती हैकब काटी जाती हैमुख्य फसलें
रबीशीत ऋतु में अक्टूबर से दिसंबर के मध्यग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्यगेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों
खरीफमानसून के आगमन के साथसितंबर-अक्तूबर मेंचावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुर (अरहर), मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली और सोयाबीन
ज़ायदरबी और खरीफ के बीच, ग्रीष्म ऋतु में—तरबूज, खरबूज़े, खीरे, सब्जियों और चारे की फसलें

★याद रखने का आसान तरीक़ा — रबी = सर्दी की फसल (गेहूँ) · खरीफ = बरसात की फसल (चावल) · ज़ायद = गर्मी की फसल (तरबूज)

2.2 रबी के बारे में तीन ज़रूरी बातें

  • “यद्यपि ये फसलें देश के विस्तृत भाग में बोई जाती हैं, उत्तर और उत्तरी पश्चिमी राज्य जैसे — पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश — गेहूँ और अन्य रबी फसलों के उत्पादन के लिए महत्त्वपूर्ण राज्य हैं।”
  • “शीत ऋतु में शीतोष्ण पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा इन फसलों के अधिक उत्पादन में सहायक होती है।”
  • ★“पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ भागों में हरित क्रांति की सफलता भी उपर्युक्त रबी फसलों की वृद्धि में एक महत्त्वपूर्ण कारक है।”

★यहाँ राजस्थान का नाम है — इसे रेखांकित कीजिए।

2.3 खरीफ के बारे में तीन ज़रूरी बातें

  • “चावल की खेती मुख्य रूप से असम, पश्चिमी बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र विशेषकर कोंकण तटीय क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश और बिहार में की जाती है।”
  • “पिछले कुछ वर्षों में चावल पंजाब और हरियाणा में बोई जाने वाली महत्त्वपूर्ण फसल बन गई है।”
  • ★“असम, पश्चिमी बंगाल और ओडिशा में धान की तीन फसलें — आँस, अमन और बोरो — बोई जाती हैं।”

‘आँस, अमन और बोरो’ — ये तीन नाम ज़रूर याद रखिए, यह एक अंक का पक्का प्रश्न है।

2.4 ज़ायद के बारे में

  • “ज़ायद ऋतु में मुख्यत: तरबूज, खरबूज़े, खीरे, सब्जियों और चारे की फसलों की खेती की जाती है।”
  • “गन्ने की फसल को तैयार होने में लगभग एक वर्ष लगता है।”

3. मुख्य फसलें — खाद्यान्न (पृष्ठ 32–36)

“मिट्टी, जलवायु और कृषि पद्धति में अंतर के कारण देश के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की खाद्य और अखाद्य फसलें उगाई जाती हैं।”

भारत में उगाई जाने वाली मुख्य फसलें —

“चावल, गेहूँ, मोटे अनाज, दालें, चाय, कॉफी, गन्ना, तिलहन, कपास और जूट इत्यादि हैं।”

3.1 चावल — यह अभ्यास प्रश्न 3(ii) है★★

बिंदुविवरण
महत्त्व“भारत में अधिकांश लोगों का खाद्यान्न चावल है”
विश्व में स्थान“हमारा देश चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है”
ऋतुखरीफ की फसल
तापमानउच्च तापमान (25° सेल्सियस से ऊपर)
आर्द्रताअधिक आर्द्रता (100 सेमी. से अधिक वर्षा)
कम वर्षा में“कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है”
कहाँ उगाया जाता हैउत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टाई प्रदेशों में

★और वह बहुत महत्त्वपूर्ण वाक्य —

“नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल की फसल उगाना संभव हो पाया है।”

★यहाँ फिर राजस्थान है। और यह वाक्य पिछले अध्याय से सीधे जुड़ता है — वही नहरें और नलकूप, जिनकी बात जल संसाधन अध्याय में हुई थी।

3.2 गेहूँ★★

बिंदुविवरण
महत्त्व“गेहूँ भारत की दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है”
कहाँ“जो देश के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में पैदा की जाती है”
ऋतुरबी
तापमानशीत ऋतु for growing और पकने के समय खिली धूप
वर्षासमान रूप से वितरित 50 से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा

★देश में गेहूँ के दो मुख्य क्षेत्र — यह ज़रूर याद कीजिए —

#क्षेत्र
1उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान
2दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश

मुख्य राज्य —

“पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, और राजस्थान के कुछ भाग गेहूँ पैदा करने वाले मुख्य राज्य हैं।”

★यहाँ भी राजस्थान है।

3.3 मोटे अनाज (Millets) — यह तालिका बहुत पूछी जाती है★★

“ज्वार, बाजरा और रागी भारत में उगाए जाने वाले मुख्य मोटे अनाज हैं।”

★और एक बहुत ज़रूरी वाक्य —

“यद्यपि इन्हें मोटा अनाज कहा जाता है परंतु इनमें पोषक तत्त्वों की मात्रा अत्यधिक होती है।” “उदाहरणतया, रागी में प्रचुर मात्रा में लोहा, कैल्शियम, सूक्ष्म पोषक और भूसी मिलती है।”

मोटा अनाजविशेषतामिट्टीमुख्य उत्पादक राज्य
ज्वार“क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से देश की तीसरी महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल”; वर्षा पर निर्भर; “अधिकतर आर्द्र क्षेत्रों में उगाए जाने के कारण इसके लिए सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती”—महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश
बाजरा—बलुआ और उथली काली मिट्टी★राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा
रागीशुष्क प्रदेशों की फसललाल, काली, बलुआ, दोमट और उथली काली मिट्टीकर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश

★बाजरे की सूची में राजस्थान सबसे पहले है — यह RBSE में लगभग हर साल आता है।

3.4 मक्का★

बिंदुविवरण
किस रूप में“यह एक ऐसी फसल है जो खाद्यान्न व चारा दोनों रूप में प्रयोग होती है”
ऋतुखरीफ
तापमान21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस
मिट्टीपुरानी जलोढ़ मिट्टी
अपवाद“बिहार जैसे कुछ राज्यों में मक्का रबी की ऋतु में भी उगाई जाती है”
उत्पादन कैसे बढ़ा“आधुनिक प्रौद्योगिक निवेशों जैसे उच्च पैदावार देने वाले बीजों, उर्वरकों और सिंचाई के उपयोग से”
मुख्य राज्यकर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना

3.5 दालें★★

बिंदुविवरण
विश्व में स्थान“भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता देश है”
महत्त्व“शाकाहारी खाने में दालें सबसे अधिक प्रोटीन दायक होती हैं”
मुख्य दलहनी फसलेंतुर (अरहर), उड़द, मूँग, मसूर, मटर और चना
नमी“दालों को कम नमी की आवश्यकता होती है और इन्हें शुष्क परिस्थितियों में भी उगाया जा सकता है”
★सबसे ख़ास बात“फलीदार फसलें होने के नाते अरहर को छोड़कर अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता को बनाए रखती हैं”
इसलिए“अत: इन फसलों को आमतौर पर अन्य फसलों के आवर्तन (rotating) में बोया जाता है”
मुख्य राज्य★मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, और कर्नाटक

★‘अरहर को छोड़कर’ वाली बात बहुत महत्त्वपूर्ण है और अकसर छूट जाती है। यह अभ्यास प्रश्न 1(iii) से भी जुड़ती है — “इनमें से कौन-सी एक फलीदार फसल है?” उत्तर: दालें। और यहाँ फिर राजस्थान है।

पाठ्यपुस्तक का प्रश्न —

“क्या आप बता सकते हैं कि इनमें से कौन-सी दालें खरीफ में और कौन-सी दालें रबी में उगाई जाती हैं?” (संकेत — तुर, उड़द और मूँग खरीफ में; मसूर, मटर और चना रबी में।)

4. खाद्यान्नों के अलावा अन्य खाद्य फसलें (पृष्ठ 36–38)

4.1 गन्ना★★

बिंदुविवरण
प्रकारउष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल
तापमान21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस
वर्षा75 सेमी. से 100 सेमी.
जलवायुउष्ण और आर्द्र
कम वर्षा में“कम वर्षा वाले प्रदेशों में सिंचाई की आवश्यकता होती है”
मिट्टी“इसे अनेक मिट्टियों में उगाया जा सकता है”
श्रम“इसके लिए बुआई से लेकर कटाई तक काफ़ी शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है”
विश्व में स्थान“ब्राज़ील के बाद भारत गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है”
किन कामों में आता है“यह चीनी, गुड़, खांडसारी और शीरा बनाने के काम आता है”
मुख्य राज्यउत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, पंजाब और हरियाणा

‘चीनी, गुड़, खांडसारी और शीरा’ — ये चार उत्पाद ज़रूर याद रखिए।

4.2 तिलहन★

बिंदुविवरण
विश्व में स्थान“2018 में भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा तिलहन उत्पादक देश था”
तोरिया में“सन् 2018 में तोरिया के उत्पादन में भारत का विश्व में कनाडा और चीन के बाद तीसरा स्थान था”
कितना क्षेत्र“देश में कुल बोए गए क्षेत्र के 12 प्रतिशत भाग पर कई तिलहन की फसलें उगाई जाती हैं”
मुख्य तिलहन फसलेंमूँगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरंडी, बिनौला, अलसी और सूरजमुखी
उपयोग“इनमें से अधिकतर खाद्य हैं और खाना बनाने में प्रयोग किए जाते हैं; परंतु कुछ तेल के बीजों को साबुन, प्रसाधन (शृंगार का सामान) और उबटन उद्योग में कच्चे माल के रूप में भी प्रयोग किया जाता है”

★तिलहन फसलों की ऋतु — यह तालिका ज़रूर याद कीजिए —

फसलऋतुअन्य बात
मूँगफलीखरीफ“देश में मुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग इसी फसल से प्राप्त होता है”
अलसी और सरसोंरबी—
तिलउत्तरी भारत में खरीफ, दक्षिणी भारत में रबी—
अरंडीखरीफ और रबी दोनों—

मूँगफली के मुख्य राज्य —

★“गुजरात मूँगफली का प्रमुख उत्पादक राज्य है। इसके अतिरिक्त राजस्थान और तमिलनाडु मूँगफली के अन्य मुख्य उत्पादक राज्य हैं (2019–20)।”

★यहाँ फिर राजस्थान है — और आँकड़े का वर्ष (2019–20) भी दिया है।

4.3 चाय — यह अभ्यास प्रश्न 2(i) है★★

बिंदुविवरण
किसका उदाहरण“चाय की खेती रोपण कृषि का एक उदाहरण है”
यह क्या है“यह एक महत्त्वपूर्ण पेय पदार्थ की फसल है”
कौन लाया“जिसे शुरुआत में अंग्रेज़ भारत में लाए थे”
आज“आज अधिकतर चाय बागानों के मालिक भारतीय हैं”
जलवायुउष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु
मिट्टीह्यूमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी
भूमिसुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्र
तापमान की ज़रूरत“चाय की झाड़ियों को उगाने के लिए वर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहित जलवायु की आवश्यकता होती है”
वर्षा“वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें इसकी कोमल पत्तियों के विकास में सहायक होती हैं”
श्रम“चाय एक श्रम-सघन उद्योग है; इसके लिए प्रचुर मात्रा में सस्ता और कुशल श्रम चाहिए”
प्रसंस्करण“इसकी ताज़गी बनाए रखने के लिए चाय की पत्तियाँ बागान में ही संसाधित की जाती हैं”

★मुख्य उत्पादक क्षेत्र —

“चाय के मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में असम, पश्चिमी बंगाल में दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी ज़िलों की पहाड़ियाँ, तमिलनाडु और केरल हैं। इनके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, मेघालय, आंध्र प्रदेश और त्रिपुरा आदि राज्यों में भी चाय उगाई जाती है।”

विश्व में स्थान —

“सन् 2018 में भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा चाय उत्पादक देश था।”

4.4 कॉफी★

बिंदुविवरण
प्रसिद्धि“भारतीय कॉफी अपनी गुणवत्ता के लिए विश्वविख्यात है”
किस्म“हमारे देश में अरेबिका किस्म की कॉफी पैदा की जाती है”
कहाँ से आई“जो आरम्भ में यमन से लाई गई थी”
माँग“इस किस्म की कॉफी की विश्व भर में अधिक माँग है”
शुरुआत कहाँ से“इसकी कृषि की शुरुआत बाबा बूदन पहाड़ियों से हुई”
आज कहाँ“और आज भी इसकी खेती नीलगिरि की पहाड़ियों के आस पास कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में की जाती है”

‘अरेबिका · यमन · बाबा बूदन पहाड़ियाँ · नीलगिरि’ — ये चार नाम ज़रूर याद रखिए।

4.5 बागवानी फसलें★

बिंदुविवरण
विश्व में स्थान“सन् 2018 में भारत का विश्व में फलों और सब्ज़ियों के उत्पादन में चीन के बाद दूसरा स्थान था”
किस प्रकार के फल“भारत उष्ण और शीतोष्ण कटिबंधीय दोनों ही प्रकार के फलों का उत्पादक है”

★फल और उनके राज्य — यह तालिका सीधे परीक्षा में आती है —

फलराज्य
आममहाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल
संतरेनागपुर और चेरापूँजी (मेघालय)
केलेकेरल, मिजोरम, महाराष्ट्र और तमिलनाडु
लीचीउत्तर प्रदेश और बिहार
अनन्नासमेघालय
अंगूरआंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र
सेब, नाशपाती, खूबानी और अखरोटहिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर

और सब्ज़ियों में —

“भारत का मटर, फूलगोभी, प्याज, बंदगोभी, टमाटर, बैंगन और आलू उत्पादन में प्रमुख स्थान है।”

स्रोत — पॉकेट बुक ऑफ़ एग्रीकल्चरल स्टेटिस्टिक्स 2020, गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया, डायरेक्टरेट ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड स्टेटिस्टिक्स।

5. अखाद्य फसलें (पृष्ठ 38–39)

5.1 रबड़

बिंदुविवरण
क्षेत्र“रबड़ भूमध्यरेखीय क्षेत्र की फसल है परंतु विशेष परिस्थितियों में उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में भी उगाई जाती है”
वर्षा200 सेमी. से अधिक
तापमान25° सेल्सियस से अधिक
जलवायुनम और आर्द्र
महत्त्व“रबड़ एक महत्त्वपूर्ण कच्चा माल है जो उद्योगों में प्रयुक्त होता है”
कहाँकेरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और मेघालय में गारो पहाड़ियों में

क्रियाकलाप (पृष्ठ 38): “उन वस्तुओं की सूची बनाइये जो रबड़ से बनती हैं और हम इनका प्रयोग करते हैं।”

5.2 रेशेदार फसलें★

“कपास, जूट, सन और प्राकृतिक रेशम भारत में उगाई जाने वाली चार मुख्य रेशेदार फसलें हैं।”

★इनमें एक बहुत महत्त्वपूर्ण अंतर है —

“इनमें से पहली तीन मिट्टी में फसल उगाने से प्राप्त होती हैं और चौथा रेशम के कीड़े के कोकून से प्राप्त होता है जो मलबरी पेड़ की हरी पत्तियों पर पलता है।” “रेशम उत्पादन के लिए रेशम के कीड़ों का पालन ‘रेशम उत्पादन’ (Sericulture) कहलाता है।”

यानी तीन फसलें खेत से आती हैं और एक कीड़े से — यह फ़र्क़ परीक्षा में पूछा जाता है।

5.3 कपास★★

बिंदुविवरण
मूल स्थान“भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है”
महत्त्व“सूती कपड़ा उद्योग में कपास एक मुख्य कच्चा माल है”
विश्व में स्थान“कपास उत्पादन में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है (2017)”
मिट्टी“दक्कन पठार के शुष्कतर भागों में काली मिट्टी कपास उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है”
तापमानउच्च तापमान
वर्षाहल्की वर्षा या सिंचाई
★ख़ास ज़रूरत210 पाला रहित दिन और खिली धूप
ऋतुखरीफ
तैयार होने में6 से 8 महीने
मुख्य राज्यमहाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश

★‘210 पाला रहित दिन’ — यह बहुत ख़ास आँकड़ा है और सीधे पूछा जाता है।

5.4 जूट★★

बिंदुविवरण
दूसरा नाम“जूट को ‘सुनहरा रेशा’ कहा जाता है”
मिट्टी“जूट की फसल बाढ़ के मैदानों में जलनिकास वाली उर्वरक मिट्टी में उगाई जाती है”
क्यों“जहाँ हर वर्ष बाढ़ से आई नई मिट्टी जमा होती रहती है”
तापमान“इसके बढ़ने के समय उच्च तापमान की आवश्यकता होती है”
मुख्य राज्यपश्चिम बंगाल, बिहार, असम और ओडिशा तथा मेघालय
उपयोग“इसका प्रयोग बोरियाँ, चटाई, रस्सी, तंतु व धागे, गलीचे और दूसरी दस्तकारी की वस्तुएँ बनाने में किया जाता है”

‘सुनहरा रेशा’ — यह एक अंक का पक्का प्रश्न है।

6. प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधार (पृष्ठ 39–40)

6.1 समस्या क्या है

क्रमबात
1“भारत में कृषि हज़ारों वर्षों से की जा रही है”
2“परंतु प्रौद्योगिकी और संस्थागत परिवर्तन के अभाव में लगातार भूमि संसाधन के प्रयोग से कृषि का विकास अवरुद्ध हो जाता है तथा इसकी गति मंद हो जाती है”
3“सिंचाई के साधनों का विकास होने के बावजूद भी देश के एक बहुत बड़े भाग में अभी भी किसान खेती-बाड़ी के लिए मानसून और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर हैं”
4“बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण चुनौती है”
5★“60 प्रतिशत से भी अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करने वाली कृषि में कुछ गंभीर तकनीकी एवं संस्थागत सुधार लाने की आवश्यकता है”

6.2 स्वतंत्रता के बाद के सुधार — क्रम से★

समयक्या हुआ
स्वतंत्रता के पश्चात्“देश में संस्थागत सुधार करने के लिए जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा ज़मींदारी आदि समाप्त करने को प्राथमिकता दी गई”
प्रथम पंचवर्षीय योजना“भूमि सुधार मुख्य लक्ष्य था”
क्यों ज़रूरी था“भूमि पर पुश्तैनी अधिकार के कारण यह टुकड़ों में बँटती जा रही थी जिसकी चकबंदी करना अनिवार्य था”
पर समस्या★“भूमि सुधार के क़ानून तो बने परंतु इनके लागू करने में ढील की गई”
1960 और 1970 के दशक“भारत सरकार ने कई प्रकार के कृषि सुधारों की शुरुआत की — पैकेज टेक्नोलॉजी पर आधारित हरित क्रांति तथा श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) जैसी कृषि सुधार के लिए कुछ रणनीतियाँ आरंभ की गई थीं”
पर“परंतु इसके कारण विकास कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह गया”
1980 तथा 1990 के दशक“व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम शुरू किया गया जो संस्थागत और तकनीकी सुधारों पर आधारित था”

★दो क्रांतियाँ याद रखिए — हरित क्रांति (अनाज) और श्वेत क्रांति यानी ऑपरेशन फ्लड (दूध)।

6.3 सरकार द्वारा किए गए उपाय — यह अभ्यास प्रश्न 2(iii) और 3(i) है★★

“इस दिशा में उठाए गए कुछ महत्त्वपूर्ण क़दमों में शामिल थे —”

#उपाय
1फसल बीमा — सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए प्रावधान
2किसानों को कम दर पर ऋण सुविधाएँ प्रदान करने के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना
3‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC)
4‘व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना’ (पीएआईएस)
5“आकाशवाणी और दूरदर्शन पर किसानों के लिए मौसम की जानकारी के बुलेटिन और कृषि कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं”
6“किसानों को बिचौलियों और दलालों के शोषण से बचाने के लिए न्यूनतम सहायता मूल्य और कुछ महत्त्वपूर्ण फसलों के लाभदायक ख़रीद मूल्यों की सरकार घोषणा करती है”

★इन छह को दो हिस्सों में याद कीजिए — पैसे की मदद (फसल बीमा, ग्रामीण बैंक, KCC, दुर्घटना बीमा) और जानकारी व क़ीमत की मदद (आकाशवाणी-दूरदर्शन, न्यूनतम सहायता मूल्य)।

क्रियाकलाप (पृष्ठ 40): “किसान पोर्टल वेबसाइट https://farmer.gov.in/FarmerHome.aspx से कृषि, बागवानी, कृषियोजनाओं आदि के बारे में जानकारी एकत्र करें।”

6.4 भूदान-ग्रामदान (बॉक्स, पृष्ठ 40) — यह पूरा बॉक्स याद कीजिए★★

यह अध्याय की एकमात्र कहानी है और सबसे यादगार भी।

क्रमघटना
1“महात्मा गांधी ने विनोबा भावे, जिन्होंने उनके सत्याग्रह में सबसे निष्ठावान सत्याग्रही की तरह भाग लिया था, को अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी घोषित किया था”
2“उनकी गांधी जी के ग्राम स्वराज अवधारणा में भी गहरी आस्था थी”
3“गांधी जी की शहादत के बाद उनके संदेश को लोगों तक पहुँचाने के लिए विनोबा भावे ने लगभग पूरे देश की पदयात्रा की”
4“एक बार जब वे आंध्र प्रदेश के एक गाँव पोचमपल्ली में बोल रहे थे तो कुछ भूमिहीन ग़रीब ग्रामीणों ने उनसे अपने आर्थिक भरण-पोषण के लिए कुछ भूमि माँगी”
5“विनोबा भावे ने उनसे तुरंत कोई वायदा तो नहीं किया परंतु उनको आश्वासन दिया कि यदि वे सहकारी खेती करें तो वे भारत सरकार से बात करके उनके लिए ज़मीन मुहैया करवाएँगे”
6★“अचानक श्री राम चन्द्र रेड्डी उठ खड़े हुए और उन्होंने 80 भूमिहीन ग्रामीणों को 80 एकड़ भूमि बाँटने की पेशकश की”
7★“इसे ‘भूदान’ के नाम से जाना गया”
8“बाद में विनोबा भावे ने यात्राएँ कीं और अपना यह विचार पूरे भारत में फैलाया”
9★“कुछ ज़मींदारों ने, जो अनेक गाँवों के मालिक थे, भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की पेशकश भी की। इसे ‘ग्रामदान’ कहा गया”
10! “परंतु कुछ ज़मींदारों ने तो भूमि सीमा क़ानून से बचने के लिए अपनी भूमि का एक हिस्सा दान किया था”
11★“विनोबा भावे द्वारा शुरू किए गए इस भूदान-ग्रामदान आंदोलन को ‘रक्तहीन क्रांति’ का भी नाम दिया गया”

★तीन शब्द ज़रूर याद रखिए — भूदान · ग्रामदान · रक्तहीन क्रांति। और बिंदु 10 पर ध्यान दीजिए — पाठ्यपुस्तक ईमानदारी से यह भी बताती है कि कुछ ज़मींदारों ने दान क़ानून से बचने के लिए किया था। यह पूरी सच्चाई है, और इसे भी लिखिए। साथ ही ‘80 भूमिहीन ग्रामीणों को 80 एकड़’ और ‘पोचमपल्ली, आंध्र प्रदेश’ — ये दोनों तथ्य सीधे पूछे जाते हैं।

7. NCERT अभ्यास प्रश्न (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 40–41)

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न

प्रश्नविकल्पउत्तर
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा उस कृषि प्रणाली को दर्शाता है जिसमें एक ही फसल लंबे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है?(क) स्थानांतरी कृषि (ख) रोपण कृषि (ग) बागवानी (घ) गहन कृषि(ख) रोपण कृषि
(ii) इनमें से कौन-सी रबी फसल है?(क) चावल (ख) मोटे अनाज (ग) चना (घ) कपास(ग) चना
(iii) इनमें से कौन-सी एक फलीदार फसल है?(क) दालें (ख) मोटे अनाज (ग) ज्वार तिल (घ) तिल(क) दालें

(iii) का कारण — क्योंकि दालें फलीदार (leguminous) फसलें हैं और अरहर को छोड़कर अन्य सभी वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता बनाए रखती हैं।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

(i) एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें। उत्तर: चाय एक महत्त्वपूर्ण पेय फसल है और यह रोपण कृषि का उदाहरण है। चाय का पौधा उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु, ह्यूमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्रों में भली-भाँति उगाया जाता है; इसे वर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहित जलवायु तथा वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें चाहिए।

(ii) भारत की एक खाद्य फसल का नाम बताएँ और जहाँ यह पैदा की जाती है उन क्षेत्रों का विवरण दें। उत्तर: चावल भारत की मुख्य खाद्य फसल है और भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। यह उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों तथा डेल्टाई प्रदेशों में उगाया जाता है; नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी चावल उगाना संभव हो पाया है।

(iii) सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रमों की सूची बनाएँ। उत्तर: स्वतंत्रता के बाद जोतों की चकबंदी, सहकारिता और ज़मींदारी की समाप्ति को प्राथमिकता दी गई तथा प्रथम पंचवर्षीय योजना में भूमि सुधार मुख्य लक्ष्य था। इसके बाद सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए फसल बीमा, कम दर पर ऋण हेतु ग्रामीण बैंकों व सहकारी समितियों की स्थापना, किसान क्रेडिट कार्ड, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना, आकाशवाणी-दूरदर्शन पर कृषि कार्यक्रम, तथा न्यूनतम सहायता मूल्य और लाभदायक ख़रीद मूल्य की घोषणा जैसे क़दम उठाए गए।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए

(i) कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय सुझाइए।

उत्तर के मुख्य बिंदु —

  • समस्या यह है कि प्रौद्योगिकी और संस्थागत परिवर्तन के अभाव में कृषि का विकास अवरुद्ध हो जाता है, और सिंचाई के विकास के बावजूद देश का बड़ा भाग अब भी मानसून तथा भूमि की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर है; 60 प्रतिशत से भी अधिक लोगों को आजीविका देने वाली कृषि में गंभीर सुधार आवश्यक हैं।
  • संस्थागत सुधार — स्वतंत्रता के बाद जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा ज़मींदारी समाप्त करने को प्राथमिकता दी गई, और प्रथम पंचवर्षीय योजना में भूमि सुधार मुख्य लक्ष्य था; हालाँकि क़ानून तो बने पर उन्हें लागू करने में ढील की गई।
  • तकनीकी सुधार — 1960 और 1970 के दशकों में पैकेज टेक्नोलॉजी पर आधारित हरित क्रांति तथा श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) शुरू हुईं, परंतु इनका विकास कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रहा; इसलिए 1980 और 1990 के दशकों में व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम चलाया गया।
  • जोखिम से बचाव — सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए फसल बीमा का प्रावधान किया गया।
  • ऋण की सुविधा — कम दर पर ऋण देने के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना की गई, तथा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना (पीएआईएस) शुरू की गईं।
  • जानकारी और क़ीमत — आकाशवाणी और दूरदर्शन पर मौसम बुलेटिन तथा कृषि कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं, और किसानों को बिचौलियों तथा दलालों के शोषण से बचाने के लिए सरकार न्यूनतम सहायता मूल्य और लाभदायक ख़रीद मूल्य की घोषणा करती है।

इनके अलावा भूदान-ग्रामदान आंदोलन ने भी भूमिहीनों को भूमि दिलाने में योगदान दिया, जिसे ‘रक्तहीन क्रांति’ कहा गया।

(ii) चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।

उत्तर के मुख्य बिंदु —

  • भारत में अधिकांश लोगों का खाद्यान्न चावल है और हमारा देश चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है।
  • यह एक खरीफ की फसल है, जो मानसून के आगमन के साथ बोई जाती है और सितंबर-अक्तूबर में काट ली जाती है।
  • इसे उगाने के लिए उच्च तापमान (25° सेल्सियस से ऊपर) की आवश्यकता होती है।
  • तथा अधिक आर्द्रता (100 सेमी. से अधिक वर्षा) चाहिए।
  • कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है।
  • चावल उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टाई प्रदेशों में उगाया जाता है; मुख्य राज्य हैं असम, पश्चिमी बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र (विशेषकर कोंकण तटीय क्षेत्र), उत्तर प्रदेश और बिहार।
  • नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी चावल उगाना संभव हो पाया है।

असम, पश्चिमी बंगाल और ओडिशा में तो धान की तीन फसलें — आँस, अमन और बोरो — बोई जाती हैं।

4. परियोजना कार्य (पृष्ठ 41)

  1. “किसानों की साक्षरता विषय पर एक सामूहिक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करें।”
  2. “भारत के मानचित्र में गेहूँ उत्पादन क्षेत्र दर्शाइए।”

5. वर्ग पहेली (पृष्ठ 41) — उत्तर अंग्रेज़ी के शब्दों में हैं

संकेतउत्तर
(i) भारत की दो खाद्य फसलेंRICE और WHEAT
(ii) यह भारत की ग्रीष्म फसल ऋतु हैZAID
(iii) अरहर, मूँग, चना, उड़द जैसी दालों से… मिलता हैPROTEIN
(iv) यह एक मोटा अनाज हैJOWAR (अथवा RAGI / BAJRA)
(v) भारत की दो महत्त्वपूर्ण पेय फसलें हैंTEA और COFFEE
(vi) काली मिट्टी पर उगाई जाने वाली चार रेशेदार फसलों में से एकCOTTON

8. सभी फसलों की एक तालिका — यही आधा अध्याय है★★

इस तालिका को याद कर लीजिए, और इस अध्याय का सबसे बड़ा हिस्सा तैयार हो जाएगा।

फसलऋतुतापमानवर्षामिट्टीमुख्य राज्य
चावलखरीफ25° सेल्सियस से ऊपर100 सेमी. से अधिक—असम, प. बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र (कोंकण), उ.प्र., बिहार; और नहरों से पंजाब, हरियाणा, प. उ.प्र., राजस्थान
गेहूँरबीशीत ऋतु; पकते समय खिली धूप50–75 सेमी. समान वितरित—पंजाब, हरियाणा, उ.प्र., म.प्र., बिहार, राजस्थान के कुछ भाग
ज्वारखरीफ—वर्षा पर निर्भर; सिंचाई की ज़रूरत नहीं—महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, म.प्र.
बाजराखरीफ——बलुआ और उथली कालीराजस्थान, उ.प्र., महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा
रागीखरीफशुष्क प्रदेशों की फसल—लाल, काली, बलुआ, दोमट, उथली कालीकर्नाटक, हि.प्र., उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश
मक्काखरीफ (बिहार में रबी भी)21°–27° सेल्सियस—पुरानी जलोढ़कर्नाटक, म.प्र., उ.प्र., बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
दालेंखरीफ और रबी दोनों—कम नमी; शुष्क परिस्थितियों में भी—म.प्र., राजस्थान, महाराष्ट्र, उ.प्र., कर्नाटक
गन्नालगभग एक वर्ष लगता है21°–27° सेल्सियस75–100 सेमी.अनेक मिट्टियों मेंउ.प्र., महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, पंजाब, हरियाणा
मूँगफलीखरीफ———गुजरात (प्रमुख), राजस्थान, तमिलनाडु
चायरोपण कृषिवर्ष भर कोष्ण, नम, पालारहितवर्ष भर समान बौछारेंह्यूमस-जीवांश युक्त गहरी, ढलवाँ, सुगम जल निकासअसम, प. बंगाल (दार्जिलिंग-जलपाईगुड़ी), तमिलनाडु, केरल; तथा हि.प्र., उत्तराखण्ड, मेघालय, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा
कॉफीरोपण कृषि———कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु (नीलगिरि की पहाड़ियों के आसपास)
रबड़—25° सेल्सियस से अधिक200 सेमी. से अधिक—केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान निकोबार, मेघालय (गारो पहाड़ियाँ)
कपासखरीफ (6–8 महीने)उच्च तापमान; 210 पाला रहित दिन; खिली धूपहल्की वर्षा या सिंचाईकाली मिट्टी (दक्कन पठार के शुष्कतर भाग)महाराष्ट्र, गुजरात, म.प्र., कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, उ.प्र.
जूट—उच्च तापमान—बाढ़ के मैदानों की जलनिकास वाली उर्वरक मिट्टीप. बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा, मेघालय

9. विश्व में भारत का स्थान — एक नज़र में★

फसल / वर्गभारत का स्थानकिसके बादवर्ष
चावलदूसराचीन—
दालेंसबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता——
गन्नादूसराब्राज़ील—
तिलहनदूसराचीन2018
तोरियातीसराकनाडा और चीन2018
चायदूसराचीन2018
फल और सब्ज़ियाँदूसराचीन2018
कपासदूसराचीन2017

★ध्यान दीजिए — दालों में भारत पहले स्थान पर है, बाक़ी लगभग सबमें दूसरे। और गन्ने में ब्राज़ील के बाद, बाक़ी सबमें चीन के बाद। यही दो अपवाद याद रखिए।

10. कठिन शब्द और उनके अर्थ (शब्दावली)

शब्दअर्थ
प्राथमिक क्रियावह आर्थिक क्रिया जो सीधे प्रकृति से उपज लेती है — जैसे कृषि, पशुपालन, मछली पकड़ना, खनन।
कर्तन दहन प्रणाली (Slash and burn)वह कृषि जिसमें ज़मीन के टुकड़े की वनस्पति काटकर और जलाकर साफ़ की जाती है, फसल उगाई जाती है, और उर्वरता घटने पर दूसरी जगह चले जाते हैं।
स्थानांतरी कृषिकर्तन दहन प्रणाली का दूसरा नाम; भारत में इसे झूम, पामलू, दीपा, वालरे आदि नामों से जाना जाता है।
डाओ (dao)आदिम कृषि में प्रयोग होने वाला एक औज़ार।
गहन जीविका कृषिवह श्रम-गहन खेती जो अधिक जनसंख्या दबाव वाले क्षेत्रों में की जाती है, जिसमें अधिक जैव-रासायनिक निवेश और सिंचाई प्रयोग होती है।
वाणिज्यिक कृषिवह कृषि जिसमें आधुनिक निवेशों (HYV बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक) से उच्च पैदावार ली जाती है और उपज बेचने के लिए होती है।
रोपण कृषिवाणिज्यिक कृषि का वह प्रकार जिसमें लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है और सारा उत्पादन उद्योग में कच्चे माल के रूप में जाता है।
अंतरापृष्ठ (Interface)दो चीज़ों के मिलने की जगह; रोपण कृषि को ‘उद्योग और कृषि के बीच का अंतरापृष्ठ’ कहा गया है।
शस्य प्रारूपकिसी क्षेत्र में उगाई जाने वाली फसलों का ढाँचा और उनकी ऋतुएँ।
रबीशीत ऋतु की फसल — अक्टूबर से दिसंबर में बोई और अप्रैल से जून में काटी जाती है।
खरीफवर्षा ऋतु की फसल — मानसून के आगमन के साथ बोई और सितंबर-अक्तूबर में काटी जाती है।
ज़ायदरबी और खरीफ के बीच ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली फसल — तरबूज, खरबूज़े, खीरे आदि।
आँस, अमन और बोरोअसम, पश्चिमी बंगाल और ओडिशा में बोई जाने वाली धान की तीन फसलें।
मोटे अनाज (Millets)ज्वार, बाजरा और रागी; इन्हें मोटा कहा जाता है पर इनमें पोषक तत्त्वों की मात्रा अत्यधिक होती है।
फलीदार (Leguminous) फसलवह फसल जो वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता बनाए रखती है — जैसे दालें (अरहर को छोड़कर)।
फसलों का आवर्तन (Rotating)एक ही खेत में बारी-बारी से अलग-अलग फसलें बोना, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे।
तिलहनवे फसलें जिनसे तेल निकाला जाता है — मूँगफली, सरसों, तिल, सोयाबीन आदि।
तोरियाएक तिलहन फसल (rapeseed), जिसके उत्पादन में भारत का 2018 में विश्व में तीसरा स्थान था।
खांडसारीगन्ने से बनने वाला एक प्रकार का कच्चा चीनी उत्पाद।
शीरागन्ने से चीनी बनाने के बाद बचने वाला गाढ़ा तरल (molasses)।
उबटनशरीर पर लगाने वाला लेप, जिसमें कुछ तेल कच्चे माल के रूप में प्रयोग होते हैं।
रेशम उत्पादन (Sericulture)रेशम के कीड़ों का पालन, जो मलबरी पेड़ की हरी पत्तियों पर पलते हैं।
पाला रहित दिनवे दिन जब पाला (frost) न पड़े; कपास को ऐसे 210 दिन चाहिए।
सुनहरा रेशाजूट का दूसरा नाम।
चकबंदीबिखरे हुए छोटे-छोटे खेतों को मिलाकर एक बड़ा खेत बनाना।
हरित क्रांति1960-70 के दशकों में पैकेज टेक्नोलॉजी पर आधारित वह कृषि सुधार जिससे अनाज उत्पादन बढ़ा।
श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड)दूध उत्पादन बढ़ाने वाला वह अभियान जो हरित क्रांति के साथ चलाया गया।
न्यूनतम सहायता मूल्यवह न्यूनतम क़ीमत जिस पर सरकार किसान की फसल ख़रीदने का वादा करती है, ताकि उसे बिचौलियों से बचाया जा सके।
भूदानविनोबा भावे का वह आंदोलन जिसमें ज़मींदारों ने भूमिहीनों को स्वेच्छा से भूमि दान की।
ग्रामदानजब कुछ ज़मींदारों ने भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की पेशकश की।
रक्तहीन क्रांतिभूदान-ग्रामदान आंदोलन को दिया गया नाम, क्योंकि इसमें बिना हिंसा के भूमि का बँटवारा हुआ।

11. महत्त्वपूर्ण आँकड़े — एक नज़र में

आँकड़ाकिससे जुड़ा
दो-तिहाईभारत की वह जनसंख्या जो कृषि कार्यों में संलग्न है
60 प्रतिशत से भी अधिकवे लोग जिन्हें कृषि आजीविका देती है
25° सेल्सियस से ऊपर / 100 सेमी. से अधिकचावल की ज़रूरत
50 से 75 सेमी.गेहूँ के लिए वार्षिक वर्षा
21°–27° सेल्सियसमक्का और गन्ने के लिए तापमान
75–100 सेमी.गन्ने के लिए वर्षा
12 प्रतिशतकुल बोए गए क्षेत्र का वह भाग जिस पर तिलहन उगाया जाता है
आधा भागमुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन में मूँगफली का हिस्सा
200 सेमी. से अधिक / 25° सेल्सियस से अधिकरबड़ की ज़रूरत
210 पाला रहित दिनकपास की ज़रूरत
6 से 8 महीनेकपास के पककर तैयार होने का समय
लगभग एक वर्षगन्ने के तैयार होने का समय
80 एकड़ / 80 भूमिहीन ग्रामीणश्री राम चन्द्र रेड्डी की पेशकश — पहला भूदान

12. राजस्थान इस अध्याय में सात बार आता है★

#कहाँक्या
1स्थानांतरी कृषि के नाम‘वालरे या वाल्टरे’ — दक्षिण-पूर्वी राजस्थान
2रबी फसलेंहरित क्रांति की सफलता राजस्थान के कुछ भागों में भी
3चावलनहरों और नलकूपों से राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल संभव हुआ
4गेहूँराजस्थान के कुछ भाग गेहूँ के मुख्य उत्पादक राज्यों में
5बाजराराजस्थान सबसे पहले नाम — मुख्य उत्पादक राज्य
6दालेंराजस्थान मुख्य उत्पादक राज्यों में (म.प्र. के बाद)
7मूँगफलीराजस्थान मूँगफली के अन्य मुख्य उत्पादक राज्यों में (2019–20)

★RBSE की परीक्षा में ये सब पूछे जाते हैं। विशेषकर बाजरा (जहाँ राजस्थान पहले नंबर पर है) और वालरे/वाल्टरे (जो बहुत कम लोगों को पता होता है)।


अंतिम बात। इस अध्याय को कहानी की तरह मत पढ़िए — तालिका की तरह पढ़िए। भाग 8 की एक तालिका ही आधा अध्याय है।

और हर फसल के लिए बस पाँच खाने भरिए — ऋतु · तापमान · वर्षा · मिट्टी · राज्य। जो विद्यार्थी ये पाँच याद कर लेता है, वह किसी भी फसल पर कोई भी प्रश्न लिख सकता है।

और अंत में भूदान-ग्रामदान की कहानी ज़रूर पढ़िए — यह इस पूरे अध्याय की एकमात्र कहानी है, और शायद सबसे यादगार भी। 80 एकड़, 80 लोग, और एक रक्तहीन क्रांति।