Chapter 4कृषि

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अध्याय 4 — कृषि · समकालीन भारत-2 (भूगोल) · कक्षा 10

कक्षा — 10 · विषय — भूगोल (समकालीन भारत–2) · पृष्ठ — 30 से 41

भारत की दो-तिहाई जनसंख्या कृषि में लगी है। यानी यह अध्याय शायद तुम्हारे अपने घर के बारे में है।

कृषि — चार बुनियादी बातें

पृष्ठ 30

  • “कृषि की दृष्टि से भारत एक महत्त्वपूर्ण देश है”
  • “इसकी दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है”
  • “कृषि एक प्राथमिक क्रिया है जो हमारे लिए अधिकांश खाद्यान्न उत्पन्न करती है”
  • “खाद्यान्नों के अतिरिक्त यह विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल भी पैदा करती है”
  • और चाय, कॉफी, मसाले इत्यादि का निर्यात भी किया जाता है

सोचिए — कृषिगत कच्चे माल पर आधारित कौन-से उद्योग हैं? (सूती कपड़ा, चीनी, जूट, चाय, खाद्य तेल)

और इस पूरे अध्याय की एक ही आत्मा

फसल इनसान नहीं चुनता — जलवायु और मिट्टी चुनती है।

यही कारण है कि चावल असम में है और गेहूँ पंजाब में; बाजरा राजस्थान में है और रबड़ केरल में

इसलिए राज्यों के नाम रटिए मत — यह समझिए कि वहाँ की जलवायु और मिट्टी उस फसल के लायक़ क्यों है

1 | कृषि के प्रकार | जीविका से वाणिज्य तक

प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि

पृष्ठ 30

  • भूमि के छोटे टुकड़ों पर की जाती है
  • औज़ार — लकड़ी के हल, डाओ (dao) और खुदाई करने वाली छड़ी
  • श्रम — परिवार अथवा समुदाय का
  • निर्भर — मानसून, मृदा की प्राकृतिक उर्वरता और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों पर

यह ‘कर्तन दहन प्रणाली’ (slash and burn) कृषि है

कर्तन दहन प्रणाली — पाँच कड़ियाँ

पृष्ठ 30

क्रमक्या होता है
1किसान ज़मीन के टुकड़े साफ़ करके अनाज व खाद्य फसलें उगाते हैं
2मृदा की उर्वरता कम होने पर वे स्थानांतरित हो जाते हैं
3और भूमि का दूसरा टुकड़ा साफ़ करते हैं
4इस स्थानांतरण से प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ जाती है
5उर्वरक या आधुनिक तकनीक का प्रयोग न होने से उत्पादकता कम होती है

चरण 4 पर रुकिए — खेत छोड़ देना आलस नहीं था; वह मिट्टी को आराम देने का तरीक़ा था

स्थानांतरी कृषि — भारत में इसके नाम

पृष्ठ 30 का बॉक्स

नामकहाँ
झूमअसम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड
पामलूमणिपुर
दीपाछत्तीसगढ़ का बस्तर ज़िला और अंडमान निकोबार
बेबर या दहियामध्य प्रदेश
पोडु या पेंडाआंध्र प्रदेश
कुमारीपश्चिम घाट
★वालरे या वाल्टरेदक्षिण-पूर्वी राजस्थान
कुरुवाझारखंड

★आख़िरी से पहली पंक्ति ध्यान से देखिए — यह कृषि कभी अपने ही राज्य में होती थी

और दुनिया में इसके नाम

पृष्ठ 30 का बॉक्स

नामदेश
मिल्पामैक्सिको और मध्य अमेरिका
कोनुकोवेनेजुएला
रोकाब्राज़ील
मसोलेमध्य अफ़्रीका
लदांगइंडोनेशिया
रेवियतनाम

छह नाम, छह देश — पर काम सबका एक ही: ज़मीन साफ़ करो, फसल लो, आगे बढ़ जाओ

रिंझा की कहानी

“रिंझा असम में डिफु के बाहरी क्षेत्र में रहती है… वह परिवार के सदस्यों के साथ बाँस के नाले द्वारा झरने से पानी लाकर अपने खेत को सिंचित करने में सहायता करती है… परंतु इस छोटी बच्ची को अपने खेत में मिट्टी की घटती उर्वरता के बारे में कुछ भी पता नहीं है, जिसके कारण उसके परिवार को अगले वर्ष नए भूमि के टुकड़े की तलाश करनी होगी।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 31

‘बाँस के नाले’ पर रुकिए — यह वही बाँस ड्रिप सिंचाई है जो पिछले अध्याय (जल संसाधन) में पढ़ी थी

गहन जीविका कृषि — और उसकी समस्या

पृष्ठ 31

  • यह उन क्षेत्रों में होती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है
  • यह श्रम-गहन खेती है, जिसमें अधिक जैव-रासायनिक निवेश और सिंचाई का प्रयोग होता है
  • समस्या — भूस्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा रहा है
  • और किसान वैकल्पिक रोज़गार न होने के कारण सीमित भूमि से अधिकतम पैदावार लेने की कोशिश करते हैं

“अत: कृषि भूमि पर बहुत अधिक दबाव है”

और अब सबसे ज़रूरी बात — वाणिज्यिक बनाम जीविका

“कृषि के वाणिज्यीकरण का स्तर विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग है। उदाहरण के लिए हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्य की एक फसल है परंतु ओडिशा में यह एक जीविका फसल है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 31

★इसका मतलब — कोई फसल अपने आप वाणिज्यिक या जीविका नहीं होती। यह इस पर निर्भर है कि किसान उसे बेचने के लिए उगा रहा है या खाने के लिए

रोपण कृषि — वाणिज्यिक कृषि का ही एक प्रकार

पृष्ठ 31

  • मुख्य विशेषता — लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है
  • यह “उद्योग और कृषि के बीच एक अंतरापृष्ठ (interface)” है
  • व्यापक क्षेत्र में अत्यधिक पूँजी और श्रमिकों की सहायता से की जाती है
  • “इससे प्राप्त सारा उत्पादन उद्योग में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है”
  • भारत की रोपण फसलें — चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला; असम और उत्तरी बंगाल में चाय, कर्नाटक में कॉफी

चूँकि उत्पादन बिक्री के लिए होता है, इसलिए परिवहन, संचार और बाज़ार इसके विकास में महत्त्वपूर्ण हैं

2 | शस्य प्रारूप | तीन फसल-ऋतुएँ

रबी, खरीफ और ज़ायद — यह सबसे पक्का प्रश्न है

पृष्ठ 32

ऋतुकब बोईकब काटीमुख्य फसलें
रबीअक्टूबर से दिसंबरअप्रैल से जूनगेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों
खरीफमानसून के आगमन के साथसितंबर-अक्तूबरचावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुर, मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली और सोयाबीन
ज़ायदरबी-खरीफ के बीच, ग्रीष्म में—तरबूज, खरबूज़े, खीरे, सब्ज़ियाँ और चारा

★तीन शब्दों में — रबी = सर्दी (गेहूँ) · खरीफ = बरसात (चावल) · ज़ायद = गर्मी (तरबूज)

तीनों ऋतुओं की ख़ास बातें

पृष्ठ 32

  • रबी — महत्त्वपूर्ण राज्य पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश
  • “शीत ऋतु में शीतोष्ण पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा इन फसलों के अधिक उत्पादन में सहायक होती है”
  • ★“पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ भागों में हरित क्रांति की सफलता भी एक महत्त्वपूर्ण कारक है”
  • खरीफ — “असम, पश्चिमी बंगाल और ओडिशा में धान की तीन फसलें — आँस, अमन और बोरो — बोई जाती हैं”
  • ज़ायद — और यह ध्यान रखिए: “गन्ने की फसल को तैयार होने में लगभग एक वर्ष लगता है”

इसीलिए गन्ना किसी एक ऋतु में नहीं आता — जो फसल पूरा साल खेत में खड़ी रहे, उसे किस ऋतु में रखेंगे?

3 | मुख्य फसलें | खाद्यान्न

चावल — भारत का मुख्य खाद्यान्न

दूसरा

“भारत में अधिकांश लोगों का खाद्यान्न चावल है। हमारा देश चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है।” यह खरीफ की फसल है जिसे 25° सेल्सियस से ऊपर तापमान और 100 सेमी. से अधिक वर्षा चाहिए

उगाया जाता है — उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टाई प्रदेशों में

और वह वाक्य जो राजस्थान से जुड़ता है

“नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल की फसल उगाना संभव हो पाया है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 34

राजस्थान में चावल? — वही नहरें, जिनकी बात पिछले अध्याय में हुई थी

गेहूँ — भारत की दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल

पृष्ठ 34

  • रबी की फसल; उगने के लिए शीत ऋतु और पकने के समय खिली धूप चाहिए
  • समान रूप से वितरित 50 से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा
  • ★देश में गेहूँ के दो मुख्य क्षेत्र — (1) उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान, (2) दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश
  • मुख्य राज्य — पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, और राजस्थान के कुछ भाग

चावल पूर्व में और गेहूँ उत्तर-पश्चिम में — क्यों? वर्षा का अंतर। यही पूरे अध्याय की कुंजी है

अब मोटे अनाजों पर एक ज़रूरी बात

“यद्यपि इन्हें मोटा अनाज कहा जाता है परंतु इनमें पोषक तत्त्वों की मात्रा अत्यधिक होती है। उदाहरणतया, रागी में प्रचुर मात्रा में लोहा, कैल्शियम, सूक्ष्म पोषक और भूसी मिलती है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 34

तो सोचिए — इन्हें ‘मोटा’ कहना ठीक है?

तीनों मोटे अनाज

पृष्ठ 34

अनाजविशेषतामिट्टीमुख्य राज्य
ज्वारतीसरी महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल; वर्षा पर निर्भर, सिंचाई की ज़रूरत नहीं—महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, म.प्र.
बाजरा—बलुआ और उथली काली★राजस्थान, उ.प्र., महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा
रागीशुष्क प्रदेशों की फसललाल, काली, बलुआ, दोमट, उथली कालीकर्नाटक, हि.प्र., उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश

★बाजरे की सूची में राजस्थान सबसे पहले है — RBSE में यह लगभग हर साल आता है

मक्का और दालें

पृष्ठ 35–36

  • मक्का — खाद्यान्न व चारा दोनों; खरीफ; 21°–27° सेल्सियस; पुरानी जलोढ़ मिट्टी; बिहार में रबी में भी
  • दालें — “भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता देश है”
  • “शाकाहारी खाने में दालें सबसे अधिक प्रोटीन दायक होती हैं” — तुर, उड़द, मूँग, मसूर, मटर और चना
  • इन्हें कम नमी चाहिए और शुष्क परिस्थितियों में भी उगाया जा सकता है
  • ★“फलीदार फसलें होने के नाते अरहर को छोड़कर अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता को बनाए रखती हैं”

इसीलिए इन्हें अन्य फसलों के आवर्तन (rotating) में बोया जाता है — दाल खेत से लेती कम है, देती ज़्यादा है

4 | अन्य खाद्य और अखाद्य फसलें

गन्ना — ब्राज़ील के बाद भारत

21°–27°

गन्ना एक उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल है, जो 21° से 27° सेल्सियस तापमान और 75 से 100 सेमी. वर्षा में बोई जाती है। ब्राज़ील के बाद भारत गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है

इससे चीनी, गुड़, खांडसारी और शीरा बनता है; और इसके लिए बुआई से लेकर कटाई तक काफ़ी शारीरिक श्रम चाहिए

तिलहन — और उनकी ऋतुएँ

पृष्ठ 36–37

फसलऋतुख़ास बात
मूँगफलीखरीफ“मुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग”; गुजरात प्रमुख, फिर राजस्थान और तमिलनाडु
अलसी और सरसोंरबी—
तिलउत्तरी भारत में खरीफ, दक्षिणी भारत में रबी—
अरंडीखरीफ और रबी दोनों—

2018 में भारत चीन के बाद दूसरा बड़ा तिलहन उत्पादक था; देश के कुल बोए गए क्षेत्र के 12 प्रतिशत भाग पर तिलहन उगाया जाता है

चाय — रोपण कृषि का सबसे अच्छा उदाहरण

पृष्ठ 37

  • “चाय की खेती रोपण कृषि का एक उदाहरण है”; इसे शुरुआत में अंग्रेज़ भारत में लाए थे, आज अधिकतर बागानों के मालिक भारतीय हैं
  • ज़रूरत — उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु · ह्यूमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी · सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्र
  • “चाय की झाड़ियों को उगाने के लिए वर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहित जलवायु की आवश्यकता होती है”
  • “वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें इसकी कोमल पत्तियों के विकास में सहायक होती हैं”
  • यह एक श्रम-सघन उद्योग है; और ताज़गी बनाए रखने के लिए पत्तियाँ बागान में ही संसाधित की जाती हैं

मुख्य क्षेत्र — असम, पश्चिमी बंगाल में दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी, तमिलनाडु और केरल; 2018 में भारत चीन के बाद दूसरा

कॉफी और अखाद्य फसलें

पृष्ठ 37–38

  • कॉफी — अरेबिका किस्म, जो यमन से लाई गई; शुरुआत बाबा बूदन पहाड़ियों से; आज नीलगिरि की पहाड़ियों के आसपास कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में
  • रबड़ — 200 सेमी. से अधिक वर्षा और 25° सेल्सियस से अधिक तापमान; केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान निकोबार और मेघालय (गारो पहाड़ियाँ)
  • चार रेशेदार फसलें — कपास, जूट, सन और प्राकृतिक रेशम
  • ★“इनमें से पहली तीन मिट्टी में फसल उगाने से प्राप्त होती हैं और चौथा रेशम के कीड़े के कोकून से” — जो मलबरी पेड़ की पत्तियों पर पलता है

रेशम के कीड़ों के पालन को ‘रेशम उत्पादन’ (Sericulture) कहते हैं

कपास — और वह अजीब-सा आँकड़ा

210

कपास को उगाने के लिए उच्च तापमान, हल्की वर्षा या सिंचाई, 210 पाला रहित दिन और खिली धूप की आवश्यकता होती है। यह खरीफ की फसल है और 6 से 8 महीने में तैयार होती है

भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है; दक्कन पठार के शुष्कतर भागों की काली मिट्टी इसके लिए उपयुक्त है; और उत्पादन में भारत चीन के बाद दूसरा (2017)

जूट — ‘सुनहरा रेशा’

पृष्ठ 39

  • “जूट को ‘सुनहरा रेशा’ कहा जाता है”
  • “जूट की फसल बाढ़ के मैदानों में जलनिकास वाली उर्वरक मिट्टी में उगाई जाती है जहाँ हर वर्ष बाढ़ से आई नई मिट्टी जमा होती रहती है”
  • इसके बढ़ने के समय उच्च तापमान की आवश्यकता होती है
  • मुख्य राज्य — पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और ओडिशा तथा मेघालय
  • उपयोग — बोरियाँ, चटाई, रस्सी, तंतु व धागे, गलीचे और दूसरी दस्तकारी की वस्तुएँ

यानी जूट सिर्फ़ फसल नहीं — एक पूरे उद्योग का कच्चा माल है

सभी फसलों की एक तालिका — यही आधा अध्याय है

पाँच खाने: ऋतु · तापमान · वर्षा · मिट्टी · राज्य

फसलऋतुतापमानवर्षामुख्य राज्य
चावलखरीफ25°+100 सेमी.+असम, प. बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, उ.प्र., बिहार
गेहूँरबीशीत ऋतु50–75 सेमी.पंजाब, हरियाणा, उ.प्र., म.प्र., राजस्थान
बाजराखरीफ—कमराजस्थान, उ.प्र., महाराष्ट्र, गुजरात
गन्नालगभग एक वर्ष21°–27°75–100 सेमी.उ.प्र., महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु
चायरोपणकोष्ण, पालारहितसमान बौछारेंअसम, प. बंगाल, तमिलनाडु, केरल
कपासखरीफ210 पाला रहित दिनहल्कीमहाराष्ट्र, गुजरात, म.प्र., पंजाब
रबड़—25°+200 सेमी.+केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, मेघालय

हर फसल के लिए बस ये पाँच खाने भरिए — फिर कोई भी प्रश्न आए, उत्तर तैयार है

5 | सुधार और एक कहानी

प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधार

पृष्ठ 39

  • समस्या — “प्रौद्योगिकी और संस्थागत परिवर्तन के अभाव में लगातार भूमि संसाधन के प्रयोग से कृषि का विकास अवरुद्ध हो जाता है”
  • ★“60 प्रतिशत से भी अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करने वाली कृषि में कुछ गंभीर तकनीकी एवं संस्थागत सुधार लाने की आवश्यकता है”
  • स्वतंत्रता के बाद — जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा ज़मींदारी की समाप्ति; प्रथम पंचवर्षीय योजना में भूमि सुधार मुख्य लक्ष्य
  • ! पर — “भूमि सुधार के क़ानून तो बने परंतु इनके लागू करने में ढील की गई”
  • 1960–70 — हरित क्रांति और श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड); “परंतु इसके कारण विकास कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह गया”

हरित = अनाज · श्वेत = दूध — यह फ़र्क़ याद रखिए

सरकार द्वारा उठाए गए छह क़दम

पृष्ठ 39–40

#उपायकिस तरह की मदद
1फसल बीमा — सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिएपैसे की
2ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना — कम दर पर ऋणपैसे की
3किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)पैसे की
4व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना (पीएआईएस)पैसे की
5आकाशवाणी और दूरदर्शन पर मौसम बुलेटिन और कृषि कार्यक्रमजानकारी की
6न्यूनतम सहायता मूल्य और लाभदायक ख़रीद मूल्यक़ीमत की

छठा क़दम क्यों? — किसानों को “बिचौलियों और दलालों के शोषण से बचाने” के लिए

और अब अध्याय की एकमात्र कहानी — भूदान

“अचानक श्री राम चन्द्र रेड्डी उठ खड़े हुए और उन्होंने 80 भूमिहीन ग्रामीणों को 80 एकड़ भूमि बाँटने की पेशकश की। इसे ‘भूदान’ के नाम से जाना गया।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 40

यह हुआ था आंध्र प्रदेश के गाँव पोचमपल्ली में, जब विनोबा भावे — जिन्हें गांधी जी ने अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी कहा था — वहाँ बोल रहे थे

भूदान से ग्रामदान तक

पृष्ठ 40

  • गांधी जी की शहादत के बाद विनोबा भावे ने लगभग पूरे देश की पदयात्रा की
  • पोचमपल्ली में भूमिहीनों ने भूमि माँगी; विनोबा ने वायदा नहीं किया, पर सहकारी खेती करने पर सरकार से बात करने का आश्वासन दिया
  • और तभी श्री राम चन्द्र रेड्डी ने 80 एकड़, 80 लोगों को देने की पेशकश की
  • बाद में कुछ ज़मींदारों ने भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की पेशकश की — इसे ‘ग्रामदान’ कहा गया
  • ! “परंतु कुछ ज़मींदारों ने तो भूमि सीमा क़ानून से बचने के लिए अपनी भूमि का एक हिस्सा दान किया था”

★और इस पूरे आंदोलन को ‘रक्तहीन क्रांति’ का नाम दिया गया

किताब ने अपनी ही कहानी की कमज़ोरी क्यों बताई? वह इसे छिपा भी सकती थी।

6 | समापन | पूरा अध्याय एक नज़र में

विश्व में भारत का स्थान

यह तालिका सीधे पूछी जाती है

फसल / वर्गस्थानकिसके बाद
दालेंपहला (उत्पादक और उपभोक्ता दोनों)—
चावलदूसराचीन
गन्नादूसराब्राज़ील
तिलहनदूसराचीन (2018)
चायदूसराचीन (2018)
फल और सब्ज़ियाँदूसराचीन (2018)
कपासदूसराचीन (2017)
तोरियातीसराकनाडा और चीन (2018)

दो अपवाद याद रखिए — दालों में भारत पहले स्थान पर, और गन्ने में ब्राज़ील के बाद (बाक़ी सबमें चीन के बाद)

और राजस्थान इस अध्याय में सात बार आता है

RBSE के लिए अनिवार्य

#कहाँक्या
1स्थानांतरी कृषिवालरे या वाल्टरे — दक्षिण-पूर्वी राजस्थान
2रबी फसलेंहरित क्रांति राजस्थान के कुछ भागों में
3चावलनहरों-नलकूपों से राजस्थान के कम वर्षा वाले क्षेत्रों में
4गेहूँराजस्थान के कुछ भाग मुख्य उत्पादक
5★बाजराराजस्थान सबसे पहला नाम
6दालेंराजस्थान (म.प्र. के बाद)
7मूँगफलीराजस्थान (गुजरात के बाद), 2019–20

और आख़िर में — छह अनिवार्य आँकड़े

  1. 25°+ / 100 सेमी.+चावल की ज़रूरत
  2. 50–75 सेमी.गेहूँ के लिए वर्षा
  3. 21°–27° सेल्सियसमक्का और गन्ने के लिए तापमान
  4. 12 प्रतिशततिलहन का बोया गया क्षेत्र
  5. 210 पाला रहित दिनकपास की ख़ास ज़रूरत
  6. 80 एकड़ / 80 लोगपहला भूदान — श्री राम चन्द्र रेड्डी

ये छह पक्के कर लीजिए — बाक़ी अपने आप जुड़ जाएँगे

और सबसे ज़रूरी बात, जो पूरे अध्याय का सार है

फसल इनसान नहीं चुनता — जलवायु और मिट्टी चुनती है।

इसीलिए चावल असम में है और गेहूँ पंजाब में; बाजरा राजस्थान में है और रबड़ केरल में।

राज्यों के नाम रटिए मत — कारण समझिए

जिस दिन यह समझ आ गया, उस दिन सूची याद करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी — तुम ख़ुद बता दोगे

एक आदमी उठकर खड़ा हुआ और 80 एकड़ ज़मीन 80 लोगों में बाँट दी। न क़ानून, न अदालत, न हिंसा। इसीलिए उसे ‘रक्तहीन क्रांति’ कहा गया।