पाठ्यपुस्तक — समकालीन भारत–2, कक्षा 10 भूगोल · NCERT · पृष्ठ 72 से 85 (14 पृष्ठ) · पुस्तक का अंतिम अध्याय
शून्य — पढ़ाने से पहले यह समझ लीजिए
यह पूरी पुस्तक का अंतिम अध्याय है, और यह बाक़ी छह अध्यायों को आपस में जोड़ता है।
- अध्याय 4 में फसल पढ़ी — पर वह मंडी तक कैसे जाएगी?
- अध्याय 5 में खनिज पढ़े — पर बेलाडिला का लौह-अयस्क विशाखापट्टनम् तक कैसे पहुँचा?
- अध्याय 6 में उद्योग पढ़े — पर कारख़ाने का माल दुकान तक कैसे आया?
उत्तर एक ही है — परिवहन और संचार। इसीलिए इस अध्याय का नाम ‘जीवन रेखाएँ’ है।
बोर्ड पर लिखने और पूरे अध्याय भर रहने देने वाली पंक्ति —
“अगर देश एक शरीर है, तो परिवहन और संचार उसकी नसें हैं। खून बनना काफ़ी नहीं — उसका पूरे शरीर में पहुँचना ज़रूरी है।”
अध्याय की बनावट —
| भाग | पृष्ठ | विषय |
|---|---|---|
| 1 | 72–75 | सड़क परिवहन |
| 2 | 75–77 | रेल परिवहन |
| 3 | 76 | पाइपलाइन |
| 4 | 78–80 | जल परिवहन और पत्तन |
| 5 | 79–81 | वायु परिवहन |
| 6 | 81–82 | संचार सेवाएँ |
| 7 | 82 | अंतर्राष्ट्रीय व्यापार |
| 8 | 82 | पर्यटन |
★यह अध्याय सूची-प्रधान है — इसमें बहुत सारे नाम, संख्याएँ और वर्ग हैं। इसलिए इसे तालिकाओं में पढ़ाना ही एकमात्र तरीक़ा है, प्रवाही पाठ में नहीं।
1 — शुरुआत और परिवहन के साधन (पृष्ठ 72)
“वस्तुएँ तथा सेवाएँ माँग स्थल से आपूर्ति स्थल पर अपने आप नहीं पहुँच जातीं। वस्तुओं तथा सेवाओं के आपूर्ति स्थानों से माँग स्थानों तक ले जाने हेतु परिवहन की आवश्यकता होती है।”
- जो व्यक्ति उत्पाद को परिवहन द्वारा उपभोक्ताओं तक पहुँचाते हैं, उन्हें व्यापारी कहा जाता है।
- “एक देश के विकास की गति वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन के साथ उनके एक स्थान से दूसरे स्थान तक वहन (movement) की सुविधा पर भी निर्भर करना पड़ता है।”
- “सक्षम व तीव्र गति वाले परिवहन से आज संसार एक बड़े गाँव में परिवर्तित हो गया है।”
- ★“इसीलिए परिवहन, संचार व व्यापार एक दूसरे के पूरक हैं।”
- “स्थानिक से अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय व्यापार ने अर्थव्यवस्था को जीवन शक्ति दी है।”
चित्र 7.1 — परिवहन के साधन (यह वर्गीकरण याद करवाइए)
| मुख्य वर्ग | उपवर्ग |
|---|---|
| स्थल | सड़क परिवहन · रेल परिवहन · पाइपलाइन |
| जल | आंतरिक जल परिवहन · समुद्री परिवहन |
| वायु | घरेलू विमान सेवा (→ सार्वजनिक प्राधिकरण, निजी विमान सेवा) · अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा |
तीन शब्द — स्थल · जल · वायु। और स्थल के तीन — सड़क · रेल · पाइपलाइन।
2 — सड़क परिवहन (पृष्ठ 73)
दो बुनियादी तथ्य
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| ★विश्व में स्थान | “भारत विश्व का दूसरा सर्वाधिक सड़क जाल वाला देश है” |
| ★लंबाई | लगभग 62.16 लाख किमी. (2020-21) |
| कब शुरू | “भारत में सड़क परिवहन, रेल परिवहन से पहले प्रारंभ हुआ” |
रेल की अपेक्षा सड़क की बढ़ती महत्ता — छह कारण (हर साल आता है)★★
| # | कारण |
|---|---|
| 1 | “रेलवे लाइन की अपेक्षा सड़कों की निर्माण लागत बहुत कम है।” |
| 2 | “अपेक्षाकृत ऊबड़-खाबड़ व विच्छिन्न भू-भागों पर सड़कें बनाई जा सकती हैं।” |
| 3 | “अधिक ढाल प्रवणता तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भी सड़कें निर्मित की जा सकती हैं।” |
| 4 | “अपेक्षाकृत कम व्यक्तियों, कम दूरी व कम वस्तुओं के परिवहन में सड़क मितव्ययी है।” |
| 5 | “यह घर-घर सेवाएँ उपलब्ध करवाता है तथा सामान चढ़ाने व उतारने की लागत भी अपेक्षाकृत कम है।” |
| 6 | “सड़क परिवहन, अन्य परिवहन साधनों के उपयोग में एक कड़ी के रूप में भी कार्य करता है, जैसे सड़कें, रेलवे स्टेशन, वायु व समुद्री पत्तनों को जोड़ती हैं।” |
याद रखने का सूत्र — “सस्ती · ऊबड़-खाबड़ · पहाड़ · थोड़े के लिए · घर तक · कड़ी”
सड़कों के छह वर्ग (सक्षमता के आधार पर)★★
| वर्ग | विवरण |
|---|---|
| 1. स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्ग | दिल्ली-कोलकाता, चेन्नई-मुंबई व दिल्ली को जोड़ने वाली 6 लेन वाली महा राजमार्गों की सड़क परियोजना। इसके तहत दो गलियारे — उत्तर-दक्षिण गलियारा (श्रीनगर ↔ कन्याकुमारी) और पूर्व-पश्चिम गलियारा (सिलचर, असम ↔ पोरबंदर, गुजरात)। उद्देश्य — मेगासिटी के मध्य की दूरी व परिवहन समय को न्यूनतम करना। यह NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अधिकार क्षेत्र में है। |
| 2. राष्ट्रीय राजमार्ग | “देश के दूरस्थ भागों को जोड़ते हैं। ये प्राथमिक सड़क तंत्र हैं।” अनेक प्रमुख राजमार्ग उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम दिशाओं में फैले हैं। |
| 3. राज्य राजमार्ग | “राज्यों की राजधानियों को जिला मुख्यालयों से जोड़ने वाली सड़कें।” |
| 4. ज़िला मार्ग | “ये सड़कें ज़िले के विभिन्न प्रशासनिक केंद्रों को ज़िला मुख्यालय से जोड़ती हैं।” |
| 5. अन्य सड़कें | “वे सड़कें जो ग्रामीण क्षेत्रों तथा गाँवों को शहरों से जोड़ती हैं।” ★‘प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना’ के तहत विशेष प्रोत्साहन — इसमें देश के प्रत्येक गाँव को प्रमुख शहरों से पक्की सड़कों (वे सड़कें जिन पर वर्ष भर वाहन चल सकें) द्वारा जोड़ना प्रस्तावित है। |
| 6. सीमांत सड़कें | सीमा सड़क संगठन (BRO) — भारत सरकार प्राधिकरण के अधीन, 1960 में बनाया गया। कार्य — उत्तर तथा उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में सामरिक महत्त्व की सड़कों का विकास। “इन सड़कों के विकास से दुर्गम क्षेत्रों में अभिगम्यता बढ़ी है तथा ये इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायक हुई हैं।” |
अटल टनल — ‘क्या आप जानते हैं?’ (पृष्ठ 75)★
| बात | विवरण |
|---|---|
| क्या | विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग |
| लंबाई | 9.02 किलोमीटर |
| किसने बनाई | सीमा सड़क संगठन (BRO) |
| क्या जोड़ती है | मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से — पूरे साल |
| पहले क्या था | “यह घाटी भारी बर्फ़बारी के कारण लगभग 6 महीने तक अलग-थलग रहती थी” |
| कहाँ | हिमालय की पीरपंजाल पर्वतमाला में, औसत समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊँचाई पर |
सड़क निर्माण की सामग्री के आधार पर
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| पक्की सड़कें | सीमेंट, कंक्रीट व तारकोल द्वारा निर्मित; अत: ये बारहमासी सड़कें हैं |
| कच्ची सड़कें | वर्षा ऋतु में अनुपयोगी हो जाती हैं |
पृष्ठ 73 की क्रियाकलाप — “दिल्ली व अमृतसर के मध्य ऐतिहासिक शेरशाह सूरीमार्ग किस राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या से जाना जाता है?” उत्तर — यह पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 1 (NH-1) था; नई क्रम-संख्या पद्धति में यह NH-44 का भाग है। (पृष्ठ 85 की वर्ग-पहेली में भी SHER SHAH SURI MARG छिपा है।)
3 — रेल परिवहन (पृष्ठ 75–77)
बुनियादी तथ्य
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| महत्त्व | “भारत में रेल परिवहन, वस्तुओं तथा यात्रियों के परिवहन का प्रमुख साधन है” |
| किन कार्यों में सहायक | व्यापार, भ्रमण, तीर्थ यात्राएँ व लंबी दूरी तक सामान का परिवहन |
| ★समन्वयक | “पिछले 150 वर्षों से भी अधिक समय से भारतीय रेल एक महत्त्वपूर्ण समन्वयक के रूप में भी जानी जाती है” |
| ★किसके लिए उत्तरदायी | “भारतीय रेलवे देश की अर्थव्यवस्था, उद्योगों व कृषि के तीव्र गति से विकास के लिए उत्तरदायी है” |
| ★सार्वजनिक क्षेत्र | “भारतीय रेल परिवहन देश का सर्वाधिक बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का प्राधिकरण है” |
| ★पहली रेलगाड़ी | 1853 में मुंबई और थाणे के मध्य — 34 किमी. की दूरी |
| ★प्रखंड | “भारतीय रेल परिवहन को 17 रेल प्रखंडों में पुन: संकलित किया गया है” |
तालिका 7.1 — भारत के रेलवे मार्ग★
| गेज (मीटर में) | रूट (किमी.) |
|---|---|
| बड़ी लाइन (1.676) | 63,950 |
| मीटर लाइन (1.000) | 2,402 |
| छोटी लाइन (0.762 व 0.610) | 1,604 |
| कुल | 67,956 |
स्रोत — भारतीय रेल वार्षिक पुस्तिका, 2019–20। ध्यान दीजिए — कुल 67,956 किमी. में से लगभग 94 प्रतिशत बड़ी लाइन है।
रेल परिवहन के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक★★
“देश में रेल परिवहन के वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों में भू-आकृतिक, आर्थिक व प्रशासकीय कारक प्रमुख हैं।”
| क्षेत्र | स्थिति |
|---|---|
| उत्तरी मैदान | अनुकूल — “अपनी विस्तृत समतल भूमि, सघन जनसंख्या घनत्व, संपन्न कृषि व प्रचुर संसाधनों के कारण रेल परिवहन के विकास व वृद्धि में सहायक रहा है” — यद्यपि असंख्य नदियों के विस्तृत जल मार्गों पर पुलों के निर्माण में कुछ बाधाएँ आईं |
| प्रायद्वीप भारत | रेलमार्ग ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी क्षेत्रों, छोटी पहाड़ियों और सुरंगों आदि से होकर गुज़रते हैं |
| हिमालय पर्वतीय क्षेत्र | प्रतिकूल — “दुर्लभ उच्चावच, विरल जनसंख्या तथा आर्थिक अवसरों की कमी के कारण… प्रतिकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करता है” |
| ★कठिन क्षेत्र | “पश्चिमी राजस्थान, गुजरात के दलदली भाग, मध्यप्रदेश के वन-क्षेत्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा व झारखंड में रेल लाइन निर्माण करना कठिन है” |
| सह्याद्रि | “सह्याद्रि तथा उससे सन्निध क्षेत्र को भी घाट या दर्रों के द्वारा ही पार कर पाना संभव है” |
| कोंकण रेलवे | “भारत के महत्त्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र में पश्चिमी तट के साथ कोंकण रेलवे के विकास ने यात्री व वस्तुओं के आवागमन को सुविधाजनक बनाया है” — पर यहाँ समस्याएँ हैं: भूस्खलन तथा किसी-किसी भाग में रेलवे ट्रैक का धँसना |
रेल परिवहन की समस्याएँ
- “बहुत से यात्री बिना टिकट यात्रा करते हैं।”
- “रेल संपत्ति की हानि तथा चोरी जैसी समस्याएँ भी पूर्णतया समाप्त नहीं हुई हैं।”
- “ज़ंजीर खींच कर यात्री कहीं भी अनावश्यक रूप से गाड़ी रोकते हैं, जिससे रेलवे को भारी हानि उठानी पड़ती है।”
पाठ्यपुस्तक ख़ुद पूछती है — “ज़रा सोचिए, हम अपनी रेलगाड़ियों को निर्धारित समय पर चलने में कैसे मदद कर सकते हैं?” — इसे कक्षा में खुली चर्चा के रूप में रखिए।
4 — पाइपलाइन (पृष्ठ 76)
- “भारत के परिवहन मानचित्र पर पाइपलाइन एक नया परिवहन का साधन है।”
- “पहले पाइपलाइन का उपयोग शहरों व उद्योगों में पानी पहुँचाने हेतु होता था।”
- “आज इसका प्रयोग कच्चा तेल, पेट्रोल उत्पाद तथा तेल से प्राप्त प्राकृतिक तथा गैस क्षेत्र से उपलब्ध गैस को शोधनशालाओं, उर्वरक कारख़ानों व बड़े ताप विद्युत गृहों तक पहुँचाने में किया जाता है।”
- “ठोस पदार्थों को तरल अवस्था (Slurry) में परिवर्तित कर पाइपलाइनों द्वारा ले जाया जाता है।”
- ★“सुदूर आंतरिक भागों में स्थित शोधनशालाएँ जैसे बरौनी, मथुरा, पानीपत तथा गैस पर आधारित उर्वरक कारख़ानों की स्थापना पाइपलाइनों के जाल के कारण ही संभव हो पाई है।”
पाइपलाइन के दो बड़े लाभ (यह परीक्षा में आता है)★★
| लाभ | विवरण |
|---|---|
| 1 | “पाइपलाइन बिछाने की प्रारंभिक लागत अधिक है लेकिन इसको चलाने (Running) की लागत न्यूनतम है।” |
| 2 | “वाहनांतरण देरी तथा हानियाँ इसमें लगभग नहीं के बराबर हैं।” |
★अभ्यास प्रश्न 1(ii) का उत्तर यही दूसरा लाभ है।
देश में पाइपलाइन के तीन प्रमुख जाल
| # | जाल |
|---|---|
| 1 | ऊपरी असम के तेल क्षेत्रों से गुवाहाटी, बरौनी व इलाहाबाद के रास्ते कानपुर (उत्तर प्रदेश) तक। शाखाएँ — बरौनी से राजबंध होकर हल्दिया तक; राजबंध से मौरी ग्राम तक; तथा गुवाहाटी से सिलिगुड़ी तक। |
| 2 | गुजरात में सलाया से वीरमगाँव, मथुरा, दिल्ली व सोनीपत के रास्ते पंजाब में जालंधर तक। अन्य शाखा — वडोदरा के निकट कोयली को चक्षु व अन्य स्थानों से जोड़ती है। |
| 3 | पहली 1,700 किलोमीटर लंबी हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (एच.वी.जे.) क्रॉस कंट्री गैस पाइपलाइन, जो मुंबई हाई और बसीन गैस क्षेत्रों को पश्चिमी और उत्तरी भारत के विभिन्न उर्वरक, बिजली और औद्योगिक परिसरों से जोड़ती है। कुल मिलाकर भारत की गैस पाइपलाइन का ढाँचा 1700 से बढ़कर 18500 किलोमीटर हो गया है। |
★अभ्यास प्रश्न 1(iii) — HVJ पाइपलाइन से महाराष्ट्र नहीं जुड़ा (मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश जुड़े हैं)।
5 — जल परिवहन (पृष्ठ 78)
बुनियादी तथ्य
- “भारत के लोग प्राचीनकाल से समुद्री यात्राएँ करते रहे हैं। इसके नाविकों ने दूर तथा पास के क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति व व्यापार को फैलाया।”
- ★“जल परिवहन, परिवहन का सबसे सस्ता साधन है।”
- “यह भारी व स्थूलकाय वस्तुएँ ढोने में अनुकूल है।”
- ★“यह परिवहन साधनों में ऊर्जा सक्षम तथा पर्यावरण अनुकूल है।”
- ★“भारत में अंत: स्थलीय नौसंचालन जलमार्ग 14,500 किमी. लंबा है। इसमें केवल 5,685 किमी. मार्ग ही मशीनीकृत नौकाओं द्वारा तय किया जाता है।”
पाँच राष्ट्रीय जलमार्ग (यह तालिका पक्की कीजिए)★★
| संख्या | मार्ग | लंबाई |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय जलमार्ग 1 | हल्दिया तथा इलाहाबाद के मध्य गंगा जलमार्ग | 1620 किमी. |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 2 | सदिया व धुबरी के मध्य ब्रह्मपुत्र नदी जल मार्ग | 891 किमी. |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 3 | केरल में पश्चिम-तटीय नहर (कोट्टापुरम से कोल्लम तक), उद्योगमंडल तथा चंपक्कारा नहरें | 205 किमी. |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 4 | काकीनाडा और पुदुच्चेरी नहर स्ट्रेच के साथ-साथ गोदावरी और कृष्णा नदी का विशेष विस्तार | 1078 किमी. |
| राष्ट्रीय जलमार्ग 5 | मातई नदी, महानदी के डेल्टा चैनल, ब्राह्मणी नदी और पूर्वी तटीय नहर के साथ ब्राह्मणी नदी का विशेष विस्तार | 588 किमी. |
कुछ अन्य अंतर जलमार्ग — माण्डवी, जुआरी और कम्बरजुआ, सुन्दरवन, बराक, केरल का पश्चजल।
★★और यह आँकड़ा हर उत्तर में लिखिए — “देश का 95 प्रतिशत व्यापार (मुद्रा रूप में 68 प्रतिशत) समुद्रों द्वारा ही होता है।”
6 — प्रमुख समुद्री पत्तन (पृष्ठ 78–79)
बुनियादी आँकड़े
| तथ्य | आँकड़ा |
|---|---|
| समुद्री तट रेखा | 7,516.6 किमी. |
| प्रमुख पत्तन | 12 |
| मध्यम व छोटे पत्तन | 200 |
| प्रमुख पत्तनों का हिस्सा | देश का 95 प्रतिशत विदेशी व्यापार |
पत्तनों की पूरी तालिका (यह सबसे ज़्यादा पूछी जाती है)★★
| पत्तन | तट | विशेषता |
|---|---|---|
| ★कांडला (दीनदयाल पत्तन) | पश्चिमी (कच्छ) | स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् पहले पत्तन के रूप में विकसित; कारण — देश विभाजन से कराची पत्तन पाकिस्तान में चला गया था, उसकी कमी पूरी करने तथा मुंबई पत्तन से होने वाले व्यापारिक दबाव को कम करने के लिए। यह एक ज्वारीय पत्तन है। यह जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, ★राजस्थान व गुजरात के औद्योगिक तथा खाद्यान्नों के आयात-निर्यात को संचालित करता है। |
| मुंबई | पश्चिमी | वृहत्तम पत्तन; प्राकृतिक खुले, विस्तृत व सुचारु पोताश्रय |
| जवाहरलाल नेहरू पत्तन | पश्चिमी | मुंबई के अधिक परिवहन को ध्यान में रखकर उसके सामने विकसित; इस पूरे क्षेत्र को एक समूह पत्तन की सुविधा |
| मरमागाओ | पश्चिमी (गोआ) | लौह-अयस्क के निर्यात के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण — देश के कुल निर्यात का आधा (50 प्रतिशत) लौह-अयस्क यहीं से |
| न्यू-मैंगलोर | पश्चिमी (कर्नाटक) | कुद्रेमुख खानों से निकले लौह-अयस्क का निर्यात |
| कोच्चि | पश्चिमी (सुदूर दक्षिण-पश्चिम) | लैगून के मुहाने पर स्थित एक प्राकृतिक पोताश्रय |
| तूतीकोरन | पूर्वी (तमिलनाडु का दक्षिण-पूर्वी छोर) | प्राकृतिक पोताश्रय, पृष्ठभूमि अत्यंत समृद्ध; श्रीलंका, मालदीव आदि तथा भारत के तटीय क्षेत्रों से व्यापार |
| चेन्नई | पूर्वी | देश का प्राचीनतम कृत्रिम पत्तन; व्यापार की मात्रा तथा लदे सामान में मुंबई के बाद दूसरा स्थान |
| ★विशाखापट्नम | पूर्वी | स्थल से घिरा, गहरा व सुरक्षित पत्तन; प्रारंभ में लौह-अयस्क निर्यातक के रूप में विकसित |
| पारादीप | पूर्वी (ओडिशा) | विशेषत: लौह-अयस्क का निर्यात |
| कोलकाता | पूर्वी | अंत:स्थलीय नदीय (Riverine) पत्तन; गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन की वृहत् व समृद्ध पृष्ठभूमि को सेवाएँ; ज्वारीय पत्तन होने के कारण तथा हुगली के तलछट जमाव से नियमित रूप से साफ़ करना पड़ता है |
| हल्दिया | पूर्वी | कोलकाता पत्तन पर बढ़ते व्यापार को कम करने हेतु सहायक पत्तन |
★अभ्यास प्रश्न 1(iv) का उत्तर — विशाखापट्नम (पूर्वी तट, अंत:स्थलीय, अधिकतम गहराई, पूर्ण सुरक्षित)।
7 — वायु परिवहन (पृष्ठ 79–81)
- “आज वायु परिवहन तीव्रतम, आरामदायक व प्रतिष्ठित परिवहन का साधन है।”
- “इसके द्वारा अति दुर्गम स्थानों जैसे — ऊँचे पर्वत, मरुस्थलों, घने जंगलों व लंबे समुद्री रास्तों को सुगमता से पार किया जा सकता है।”
- ★“वायु परिवहन के अभाव में, देश के उत्तरी पूर्वी राज्यों के विषय में सोचें, जहाँ बड़ी नदियाँ, विच्छिन्न धरातल, घने जंगल, निरंतर बाढ़ आदि एक सामान्य बात है। हवाई यात्रा ने इसे अधिक अभिगम्य बना दिया है।”
- ★पवन हंस हेलीकाप्टर लिमिटेड — तेल व प्राकृतिक गैस आयोग को इसकी अपतटीय संक्रियाओं में तथा अगम्य व दुर्लभ भू-भागों जैसे उत्तरी-पूर्वी राज्यों तथा जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखण्ड के आंतरिक क्षेत्रों में हेलीकाप्टर सेवाएँ उपलब्ध करवाता है।
उड़ान योजना — ‘क्या आप जानते हैं?’ (पृष्ठ 81)★
| बात | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | उड़ान — ‘उड़े देश का आम नागरिक’ |
| ख़ासियत | विश्व स्तर पर अपनी तरह की पहली योजना |
| उद्देश्य | क्षेत्रीय विमानन बाज़ार में तेज़ी लाना; आम नागरिक के लिए उड़ान को किफ़ायती बनाकर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना |
| किसकी योजना | नागर विमानन मंत्रालय द्वारा — क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (RCS) |
| मुख्य विचार | सक्षम नीतियों और प्रोत्साहनों के माध्यम से एयरलाइनों को क्षेत्रीय और दूरस्थ मार्गों पर उड़ानें संचालित करने के लिए प्रोत्साहित करना |
8 — संचार सेवाएँ (पृष्ठ 81–82)
डाक-संचार
- ★“भारत का डाक-संचार तंत्र विश्व का वृहत्तम है।”
- यह पार्सल, निजी पत्र व्यवहार तथा तार आदि को संचालित करता है।
| श्रेणी | क्या-क्या | कैसे पहुँचती है |
|---|---|---|
| प्रथम श्रेणी की डाक | कार्ड व लिफ़ाफ़ा बंद चिट्ठी | विभिन्न स्थानों पर वायुयान द्वारा |
| द्वितीय श्रेणी की डाक | रजिस्टर्ड पैकेट, किताबें, अख़बार तथा मैगज़ीन | धरातलीय डाक द्वारा — स्थल व जल परिवहन |
- ★“बड़े शहरों व नगरों में डाक-संचार में शीघ्रता हेतु, हाल ही में छ: डाक मार्ग बनाए गए हैं।”
- छह मार्ग — राजधानी मार्ग · मेट्रो चैनल · ग्रीन चैनल · व्यापार (Business) चैनल · भारी चैनल · दस्तावेज़ चैनल
दूर संचार
- ★“दूर संचार तंत्र में भारत एशिया महाद्वीप में अग्रणी है।”
- “नगरीय क्षेत्रों के अतिरिक्त, भारत के दो तिहाई से अधिक गाँव एस.टी.डी. दूरभाष सेवा से जुड़े हैं।”
- “भारत सरकार ने देश के प्रत्येक गाँव में चौबीस घंटे एस.टी.डी. सुविधा के विशेष प्रबंध किये हैं। पूरे देश भर में एस.टी.डी. की दरों को भी नियमित किया गया है।”
- “यह सब सूचना, संचार व अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के समन्वित विकास से ही संभव हो पाया है।”
जन-संचार
- “जन-संचार, मानव को मनोरंजन के साथ बहुत से राष्ट्रीय कार्यक्रमों व नीतियों के विषय में जागरूक करता है।”
- इसमें रेडियो, दूरदर्शन, समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, किताबें तथा चलचित्र सम्मिलित हैं।
- आकाशवाणी (All India Radio) — राष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा स्थानीय भाषा में देश के विभिन्न भागों में अनेक वर्गों के व्यक्तियों के लिए विविध कार्यक्रम प्रसारित करता है।
- ★“दूरदर्शन, देश का राष्ट्रीय समाचार व संदेश माध्यम है तथा विश्व के बृहत्तम संचार-तंत्र में एक है।”
- ★“समाचार-पत्र लगभग 100 भाषाओं तथा बोलियों में प्रकाशित होते हैं… हमारे देश में सर्वाधिक समाचार-पत्र हिंदी भाषा में प्रकाशित होते हैं तथा इसके बाद अंग्रेज़ी व उर्दू के समाचार पत्र आते हैं।”
- ★“भारत विश्व में सर्वाधिक चलचित्रों का उत्पादक भी है।” — यह कम अवधि वाली फ़िल्में, वीडियो फ़ीचर फ़िल्म तथा छोटी वीडियो फ़िल्में बनाता है।
- “भारतीय व विदेशी सभी फ़िल्मों को प्रमाणित करने का अधिकार केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड (Central Board of Film Certification) को है।”
डिजिटल भारत — ‘क्या आप जानते हैं?’ (पृष्ठ 81)★
“डिजिटल भारत एक ज्ञान आधारित परिवर्तन के लिए, भारत को तैयार करने के लिए एक विशाल कार्यक्रम है। डिजिटल भारत कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य IT (भारतीय प्रतिभा) + IT (सूचना प्रौद्योगिकी) = IT (कल का भारत) में होने वाले परिवर्तन को समझना और तकनीक को केंद्र में रखकर बदलाव लाना है।”
9 — अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (पृष्ठ 82)
परिभाषाएँ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| व्यापार | “राज्यों व देशों में व्यक्तियों के बीच वस्तुओं का आदान-प्रदान” |
| बाज़ार | “एक ऐसी जगह है जहाँ इसका विनिमय होता है” |
| अंतर्राष्ट्रीय व्यापार | “दो देशों के मध्य यह व्यापार” — समुद्री, हवाई व स्थलीय मार्गों द्वारा |
| स्थानीय व्यापार | शहरों, क़स्बों व गाँवों में |
| राज्यस्तरीय व्यापार | दो या अधिक राज्यों के मध्य |
अध्याय का सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला वाक्य★★
“एक देश के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रगति उसके आर्थिक वैभव का सूचक है। इसीलिए इसे राष्ट्र का आर्थिक बैरोमीटर भी कहा जाता है।”
व्यापार संतुलन
- “सभी देश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर हैं क्योंकि संसाधनों की उपलब्धता क्षेत्रीय है अर्थात् इनका वितरण असमान है।”
- “आयात तथा निर्यात व्यापार के घटक हैं। आयात व निर्यात का अंतर ही देश के व्यापार संतुलन को निर्धारित करता है।”
| स्थिति | नाम |
|---|---|
| निर्यात मूल्य > आयात मूल्य | अनुकूल व्यापार संतुलन |
| आयात > निर्यात | असंतुलित व्यापार |
भारत का आयात-निर्यात
| निर्यात (क्या जाता है) | आयात (क्या आता है) |
|---|---|
| रत्न व जवाहरात · रसायन एवं संबंधित उत्पाद · कृषि एवं संबंधित उत्पाद | कच्चा पेट्रोलियम तथा उत्पाद · रत्न व जवाहरात · आधार धातुएँ · मशीनें · कृषि व अन्य उत्पाद |
★“भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सॉफ़्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभरा है तथा सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से अत्यधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है।” यह वाक्य अध्याय 6 (बेंगलुरु — इलैक्ट्रॉनिक राजधानी) से सीधे जुड़ता है।
10 — पर्यटन — एक व्यापार के रूप में (पृष्ठ 82)
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| वृद्धि | “पिछले तीन दशकों में भारत में पर्यटन उद्योग में महत्त्वपूर्ण वृद्धि हुई है” |
| ★रोज़गार | “150 लाख से अधिक व्यक्ति पर्यटन उद्योग में प्रत्यक्ष रूप से संलग्न हैं” |
| सामाजिक लाभ | “पर्यटन राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करता है तथा स्थानीय हस्तकला व सांस्कृतिक उद्यमों को प्रश्रय देता है” |
| अंतर्राष्ट्रीय लाभ | “यह हमें संस्कृति तथा विरासत की समझ विकसित करने में सहायक है” |
विदेशी पर्यटक किन छह कारणों से आते हैं★
विरासत पर्यटन · पारि-पर्यटन (eco-tourism) · रोमांचकारी पर्यटन · सांस्कृतिक पर्यटन · चिकित्सा पर्यटन · व्यापारिक पर्यटन
11 — NCERT अभ्यास के पूरे उत्तर (पृष्ठ 83–84)
प्रश्न 1 — बहुवैकल्पिक
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| (i) कौन-से दो दूरस्थ स्थान पूर्वी-पश्चिमी गलियारे से जुड़े हैं? | (ग) सिलचर तथा पोरबंदर |
| (ii) परिवहन का कौन-सा साधन वहनांतरण हानियों तथा देरी को घटाता है? | (ख) पाइपलाइन |
| (iii) कौन-सा राज्य हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर पाइप लाइन से नहीं जुड़ा है? | (ग) महाराष्ट्र |
| (iv) कौन-सा पत्तन पूर्वी तट पर, अंत:स्थलीय तथा अधिकतम गहराई का, पूर्ण सुरक्षित है? | (घ) विशाखापट्नम |
| (v) भारत में प्रमुख परिवहन साधन कौन-सा है? | (ख) सड़क परिवहन |
| (vi) कौन-सा शब्द दो या अधिक देशों के व्यापार को दर्शाता है? | (ग) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार |
प्रश्न 2 (लगभग 30 शब्द)
(i) सड़क परिवहन के तीन गुण बताएँ।
(1) रेलवे लाइन की अपेक्षा सड़कों की निर्माण लागत बहुत कम है। (2) अपेक्षाकृत ऊबड़-खाबड़ व विच्छिन्न भू-भागों तथा अधिक ढाल प्रवणता व पहाड़ी क्षेत्रों में भी सड़कें बनाई जा सकती हैं। (3) यह घर-घर सेवाएँ उपलब्ध करवाता है तथा सामान चढ़ाने व उतारने की लागत भी अपेक्षाकृत कम है।
(ii) रेल परिवहन कहाँ पर अत्यधिक सुविधाजनक परिवहन साधन है तथा क्यों?
उत्तर देखिए
उत्तरी मैदान में रेल परिवहन सबसे अधिक सुविधाजनक है। इसका कारण यह है कि यहाँ विस्तृत समतल भूमि, सघन जनसंख्या घनत्व, संपन्न कृषि व प्रचुर संसाधन हैं, जो रेल परिवहन के विकास व वृद्धि में सहायक रहे हैं। यद्यपि असंख्य नदियों के विस्तृत जल मार्गों पर पुलों के निर्माण में कुछ बाधाएँ भी आई हैं।
(iii) सीमांत सड़कों का महत्त्व बताएँ।
सीमांत सड़कों का निर्माण व देख-रेख सीमा सड़क संगठन करता है, जो 1960 में बनाया गया था। इसका कार्य उत्तर तथा उतरी-पूर्वी क्षेत्रों में सामरिक महत्त्व की सड़कों का विकास करना था। इन सड़कों के विकास से दुर्गम क्षेत्रों में अभिगम्यता बढ़ी है तथा ये इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायक हुई हैं।
(iv) व्यापार से आप क्या समझते हैं? स्थानीय व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अंतर स्पष्ट करें।
राज्यों व देशों में व्यक्तियों के बीच वस्तुओं के आदान-प्रदान को व्यापार कहते हैं, और जिस जगह इसका विनिमय होता है उसे बाज़ार कहते हैं। स्थानीय व्यापार शहरों, क़स्बों व गाँवों में होता है, जबकि दो देशों के मध्य होने वाला व्यापार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है, जो समुद्री, हवाई व स्थलीय मार्गों द्वारा हो सकता है।
प्रश्न 3 (लगभग 120 शब्द)
(i) परिवहन तथा संचार के साधन किसी देश की जीवन रेखा तथा अर्थव्यवस्था क्यों कहे जाते हैं?
वस्तुएँ तथा सेवाएँ माँग स्थल से आपूर्ति स्थल पर अपने आप नहीं पहुँच जातीं — उन्हें ले जाने के लिए परिवहन चाहिए। इसीलिए एक देश के विकास की गति वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन के साथ-साथ उनके एक स्थान से दूसरे स्थान तक वहन की सुविधा पर भी निर्भर करती है। सक्षम व तीव्र गति वाले परिवहन से आज संसार एक बड़े गाँव में परिवर्तित हो गया है, और परिवहन का यह विकास संचार साधनों के विकास की सहायता से ही संभव हो सका है। इसीलिए परिवहन, संचार व व्यापार एक दूसरे के पूरक हैं। आज भारत अपने विशाल आकार, विविधताओं, भाषाई तथा सामाजिक व सांस्कृतिक बहुलताओं के बावजूद संसार के सभी क्षेत्रों से सुचारू रूप से जुड़ा हुआ है। रेल, वायु एवं जल परिवहन, समाचारपत्र, रेडियो, दूरदर्शन, सिनेमा तथा इंटरनेट इसके सामाजिक-आर्थिक विकास में अनेक प्रकार से सहायक हैं। स्थानिक से अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय व्यापार ने अर्थव्यवस्था को जीवन शक्ति दी है। इसने हमारे जीवन को समृद्ध किया है तथा आरामदायक जीवन के लिए सुविधाओं व साधनों में बढ़ोतरी की है। अत: यह स्पष्ट है कि सघन व सक्षम परिवहन का जाल तथा संचार के साधन आज विश्व, राष्ट्र व स्थानीय व्यापार हेतु पूर्व-अपेक्षित हैं।
(ii) पिछले पंद्रह वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रवृत्ति पर एक लेख लिखें।
राज्यों व देशों में व्यक्तियों के बीच वस्तुओं का आदान-प्रदान व्यापार कहलाता है, और दो देशों के मध्य होने वाला व्यापार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है, जो समुद्री, हवाई व स्थलीय मार्गों द्वारा हो सकता है। एक देश के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रगति उसके आर्थिक वैभव का सूचक है; इसीलिए इसे राष्ट्र का आर्थिक बैरोमीटर भी कहा जाता है। सभी देश इस पर निर्भर हैं क्योंकि संसाधनों की उपलब्धता क्षेत्रीय है, अर्थात् इनका वितरण असमान है। आयात तथा निर्यात व्यापार के घटक हैं, और इनका अंतर ही देश के व्यापार संतुलन को निर्धारित करता है। यदि निर्यात मूल्य आयात मूल्य से अधिक हो तो उसे अनुकूल व्यापार संतुलन कहते हैं; इसके विपरीत निर्यात की अपेक्षा अधिक आयात असंतुलित व्यापार कहलाता है। विश्व के सभी भौगोलिक प्रदेशों तथा सभी व्यापारिक खंडों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध हैं। भारत में निर्यात होने वाली प्रमुख वस्तुएँ रत्न व जवाहरात, रसायन एवं संबंधित उत्पाद तथा कृषि एवं संबंधित उत्पाद हैं। आयातित वस्तुओं में कच्चा पेट्रोलियम तथा उत्पाद, रत्न व जवाहरात, आधार धातुएँ, मशीनें, कृषि व अन्य उत्पाद शामिल हैं। सबसे बड़ा परिवर्तन यह आया है कि भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सॉफ़्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभरा है तथा सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से अत्यधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है। साथ ही पर्यटन भी एक व्यापार के रूप में उभरा है, जिसमें 150 लाख से अधिक व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से संलग्न हैं।
प्रश्न पहेली (पृष्ठ 84) के उत्तर
| # | संकेत | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | उत्तरी-दक्षिणी गलियारे का उत्तरी छोर | SRINAGAR (श्रीनगर) |
| 2 | दक्षिण रेलवे खंड का मुख्यालय | CHENNAI (चेन्नई) |
| 3 | 1.676 मीटर चौड़ाई वाले रेल मार्ग का नाम | BROAD GAUGE (बड़ी लाइन) |
| 4 | एक नदीय पत्तन | KOLKATA (कोलकाता) |
| 5 | उत्तरी भारत का व्यस्ततम रेलवे जंक्शन | MUGHALSARAI (मुगलसराय) |
वर्ग-पहेली (पृष्ठ 85) में इन पाँच के अलावा SHER SHAH SURI MARG भी छिपा है — यह उसी ऐतिहासिक मार्ग का नाम है जिसके बारे में पृष्ठ 73 की क्रियाकलाप पूछती है।
12 — राजस्थान इस अध्याय में★
| # | कहाँ | क्या |
|---|---|---|
| 1 | कांडला पत्तन (पृ. 78) | कांडला (दीनदयाल) पत्तन राजस्थान के औद्योगिक तथा खाद्यान्नों के आयात-निर्यात को संचालित करता है — यानी समुद्र से दूर होते हुए भी राजस्थान का अपना पत्तन है |
| 2 | रेल परिवहन (पृ. 76) | “पश्चिमी राजस्थान… में रेल लाइन निर्माण करना कठिन है” — मरुस्थल के कारण |
| 3 | मानचित्र पृ. 74 | राष्ट्रीय राजमार्गों पर — श्री गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, जयपुर, अजमेर, ब्यावर, उदयपुर, कोटा |
| 4 | मानचित्र पृ. 77 | रेलमार्ग पर — बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, जयपुर, बाड़मेर, मुनाबो |
| 5 | पर्यटन (पृ. 82) | क्रियाकलाप पूछती है “आपके राज्य में किस प्रकार का पर्यटन विकसित किया जा सकता है?” — राजस्थान में विरासत पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और रोमांचकारी (मरुस्थल) पर्यटन तीनों की भारी संभावना है |
★पहला बिंदु सबसे ज़्यादा काम का है। कक्षा में यह कहिए — “राजस्थान में समुद्र नहीं है। फिर भी किताब कहती है कि कांडला पत्तन राजस्थान का आयात-निर्यात संभालता है। इसका मतलब यह हुआ कि समुद्र से दूर राज्य भी परिवहन के ज़रिए समुद्र से जुड़ा होता है। यही ‘जीवन रेखा’ का असली मतलब है।”
13 — इस अध्याय के अनिवार्य आँकड़े
| आँकड़ा | किसका |
|---|---|
| 62.16 लाख किमी. | भारत का सड़क जाल (2020-21) — विश्व में दूसरा |
| 6 लेन | स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्ग |
| 1960 | सीमा सड़क संगठन की स्थापना |
| 9.02 किमी. / 3000 मीटर | अटल टनल — लंबाई / ऊँचाई |
| 1853 — 34 किमी. | पहली रेलगाड़ी, मुंबई से थाणे |
| 17 | रेल प्रखंड |
| 67,956 किमी. | कुल रेल मार्ग |
| 63,950 किमी. | बड़ी लाइन (1.676 मीटर) |
| 1,700 → 18,500 किमी. | HVJ / कुल गैस पाइपलाइन |
| 14,500 किमी. / 5,685 किमी. | अंत:स्थलीय जलमार्ग / मशीनीकृत भाग |
| 1620 · 891 · 205 · 1078 · 588 | राष्ट्रीय जलमार्ग 1 से 5 की लंबाई |
| 95% (मुद्रा में 68%) | समुद्रों द्वारा होने वाला व्यापार |
| 7,516.6 किमी. | समुद्री तट रेखा |
| 12 प्रमुख + 200 मध्यम-छोटे | पत्तनों की संख्या |
| 50 प्रतिशत | मरमागाओ से होने वाला लौह-अयस्क निर्यात |
| 100 भाषाएँ/बोलियाँ | समाचार-पत्रों का प्रकाशन |
| 150 लाख से अधिक | पर्यटन उद्योग में प्रत्यक्ष रोज़गार |
| छ: | डाक मार्ग (चैनल) |
14 — शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| परिवहन | वस्तुओं व व्यक्तियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की व्यवस्था। |
| व्यापारी | वह व्यक्ति जो उत्पाद को परिवहन द्वारा उपभोक्ताओं तक पहुँचाता है। |
| गलियारा (Corridor) | दो दूरस्थ स्थानों को जोड़ने वाला लंबा राजमार्ग-पट्टा। |
| NHAI | भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण। |
| BRO | सीमा सड़क संगठन — 1960 में स्थापित। |
| अभिगम्यता | किसी स्थान तक पहुँच पाने की सुगमता। |
| गेज | रेल की दो पटरियों के बीच की चौड़ाई। |
| कर्दम (Slurry) | ठोस पदार्थ को पानी में मिलाकर बनाया गया तरल घोल, जिसे पाइप से बहाया जा सके। |
| वाहनांतरण | माल को एक वाहन से दूसरे वाहन में बदलना। |
| पोताश्रय (Harbour) | वह सुरक्षित स्थान जहाँ जहाज़ खड़े हो सकें। |
| ज्वारीय पत्तन | वह पत्तन जहाँ जहाज़ ज्वार के समय ही आ-जा सकते हैं। |
| नदीय (Riverine) पत्तन | नदी के किनारे बसा अंत:स्थलीय पत्तन, जैसे कोलकाता। |
| पृष्ठभूमि (Hinterland) | पत्तन के पीछे का वह क्षेत्र जिसका माल उस पत्तन से आता-जाता है। |
| अपतटीय (Offshore) | समुद्र के भीतर, तट से दूर। |
| आर्थिक बैरोमीटर | वह सूचक जिससे देश की आर्थिक स्थिति नापी जाती है — यहाँ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार। |
| अनुकूल व्यापार संतुलन | जब निर्यात का मूल्य आयात के मूल्य से अधिक हो। |
| पारि-पर्यटन (Eco-tourism) | प्रकृति और पर्यावरण को देखने-समझने के लिए किया जाने वाला पर्यटन। |
| RCS (उड़ान) | क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना — ‘उड़े देश का आम नागरिक’। |
15 — एक वाक्य में पूरा अध्याय
वस्तुएँ और सेवाएँ अपने आप नहीं पहुँचतीं, इसलिए परिवहन, संचार और व्यापार एक दूसरे के पूरक हैं; भारत में सड़क (62.16 लाख किमी., विश्व में दूसरा), रेल (67,956 किमी., 17 प्रखंड, पहली रेल 1853), पाइपलाइन (न्यूनतम चलन-लागत), जल (सबसे सस्ता, 95% विदेशी व्यापार, 12 प्रमुख पत्तन) और वायु (तीव्रतम, उड़ान योजना) — पाँचों साधन मिलकर देश को जोड़ते हैं; डाक-संचार तंत्र विश्व का वृहत्तम है और दूर संचार में भारत एशिया में अग्रणी; और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देश का आर्थिक बैरोमीटर है — इन सबको मिलाकर ही इन्हें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ कहा जाता है।