पुस्तक: समकालीन भारत–2 (कक्षा 10, NCERT — भूगोल) पाठ्यपुस्तक पृष्ठ: 42 से 57 तक
इस फ़ाइल को कैसे पढ़ें
यह फ़ाइल पूरे अध्याय की पूरी और आसान व्याख्या है। इसमें हर बात पूरे वाक्यों में लिखी गई है, ताकि आप इसे पढ़कर समझ भी सकें और वैसे ही उत्तर-पुस्तिका में लिख भी सकें।
सभी खनिजों की एक तालिका भाग 12 में, कठिन शब्द भाग 13 में, और मानचित्र-कार्य फ़ाइल 05 (प्रश्न बैंक) के भाग च में दिया गया है।
! यह पूरी पुस्तक का सबसे लंबा अध्याय है — 16 पृष्ठ। और यह दो अध्यायों को जोड़कर बना है। पहला आधा (पृष्ठ 42–50) खनिजों का है और दूसरा आधा (पृष्ठ 50–56) ऊर्जा संसाधनों का। इसे एक साथ पढ़ने की कोशिश मत कीजिए — दो हिस्सों में बाँटकर पढ़िए।
★और एक बहुत अच्छी ख़बर — राजस्थान इस अध्याय में आठ बार आता है, और एक जगह तो वह पूरे भारत में पहले नंबर पर है (चूना पत्थर, 22 प्रतिशत)। RBSE के लिए यह अध्याय बहुत महत्त्वपूर्ण है।
0. सबसे पहले यह समझ लीजिए — यह अध्याय है किस बारे में?
अध्याय की शुरुआत एक बच्चे के सवाल से होती है —
“हैबन अपने पिता के साथ दूर के गाँव से गुवाहाटी आया है। वह लोगों को घरों जैसी अजीब चीज़ों में जाते देखता है जो सड़क पर चलती हैं… वह आश्चर्य से अपने पिता से पूछता है, “पिताजी हमारा घर इस प्रकार क्यों नहीं चलता जैसा कि उसने गुवाहाटी में देखा?""
पिता ने बताया — “यह घर नहीं है; ये बसें व गाड़ियाँ हैं… इन्हें बनाने में लोहा, एल्यूमिनियम जैसी धातुओं का प्रयोग किया गया है। ये अपने आप नहीं चलते। ये इंजन द्वारा चालित होते हैं और इंजन को चलाने के लिए ऊर्जा चाहिये।”
★इस एक जवाब में पूरा अध्याय है — “धातुएँ” (खनिज) और “ऊर्जा”। इसीलिए अध्याय का नाम भी दो हिस्सों का है।
0.1 खनिज हमारे जीवन में कहाँ-कहाँ हैं
- “खनिज हमारे जीवन के अति अनिवार्य भाग हैं।”
- “लगभग हर चीज़ जो हम इस्तेमाल करते हैं — एक छोटी सूई से लेकर एक बड़ी इमारत तक, या फिर एक बड़ा जहाज आदि — सभी खनिजों से बने हैं।”
- “रेलवे लाइन और सड़क के पत्थर, हमारे औज़ार तथा मशीनें — सभी खनिजों से बने हैं।”
- “कारें, बसें, रेलगाड़ियाँ, हवाई जहाज सभी खनिजों से निर्मित हैं और धरती से प्राप्त ऊर्जा के साधनों द्वारा चालित होते हैं।”
- “यहाँ तक कि भोजन में भी खनिज होते हैं जिसे हम खाते हैं।”
0.2 दो बहुत रोचक बॉक्स (पृष्ठ 42)★
(क) “खनिज व दंतमंजन से एक उज्ज्वल मुस्कान”
| खनिज | दंतमंजन में क्या करता है |
|---|---|
| सिलिका (silica), चूना पत्थर (limestone), एल्यूमिनियम ऑक्साइड और फॉस्फेट | कुछ अपघर्षक खनिज — दाँत साफ़ करने में मदद |
| फ्लूओराइड (फ्लूओरस्पार नामक खनिज से) | दाँतों को गलने से रोकता है |
| टिटैनियम ऑक्साइड (रूटाइल, इल्मेनाइट, एनाटेज़ से) | दंतमंजन को सफ़ेद बनाता है |
| अभ्रक | कुछ दंतमंजन जो चमक प्रदान करते हैं |
| पेट्रोलियम से प्राप्त प्लास्टिक | टूथब्रश व पेस्ट की ट्यूब |
कक्षा में यह बॉक्स पढ़वाकर पूछिए — “अब बताइए कि ये खनिज कहाँ पाए जाते हैं?” बच्चे पहली बार समझते हैं कि खनिज दूर की चीज़ नहीं, उनके ब्रश में है।
(ख) “सभी सजीव वस्तुओं को खनिजों की आवश्यकता होती है”
“हमारे कुल पौष्टिक उपभोग का केवल 0.3 प्रतिशत भाग ही खनिज है; तथापि ये इतने महत्त्वपूर्ण और गुणकारी हैं कि इनके बिना हम 99.7 प्रतिशत भोज्य पदार्थों का उपयोग करने में असमर्थ होंगे।”
★यह आँकड़ा ज़रूर याद रखिए — 0.3 और 99.7। यह दिखाता है कि छोटी चीज़ कितनी ज़रूरी हो सकती है।
0.3 अध्याय को दो हिस्सों में देखिए
| हिस्सा | पृष्ठ | विषय |
|---|---|---|
| पहला आधा — खनिज | 42–50 | खनिज क्या है · वर्गीकरण · कहाँ मिलते हैं · लौह-अलौह-अधात्विक खनिज · खनन के जोखिम · संरक्षण |
| दूसरा आधा — ऊर्जा | 50–56 | परंपरागत (कोयला, पेट्रोलियम, गैस, विद्युत) · गैर-परंपरागत (परमाणु, सौर, पवन, बायोगैस, ज्वारीय, भू-तापीय) · संरक्षण |
पहला आधा — खनिज
1. खनिज क्या है? (पृष्ठ 42–43)
1.1 परिभाषा (शब्दश: याद कीजिए)★★
“भू-वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्त्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना है।”
- “खनिज प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं जिसमें कठोर हीरा व नरम चूना तक सम्मिलित हैं।”
1.2 खनिज इतने विविध क्यों हैं?
- “चट्टानें खनिजों के समरूप तत्त्वों के यौगिक हैं।”
- “कुछ चट्टानें जैसे चूना पत्थर — केवल एक ही खनिज से बनी हैं; लेकिन अधिकतर चट्टानें विभिन्न अनुपातों में अनेक खनिजों का योग हैं।”
- “यद्यपि 2000 से अधिक खनिजों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन अधिकतर चट्टानों में केवल कुछ ही खनिजों की बहुतायत है।”
- “एक खनिज विशेष जो निश्चित तत्त्वों का योग है, उन तत्त्वों का निर्माण उस समय के भौतिक व रासायनिक परिस्थितियों का परिणाम है।”
- “इसके फलस्वरूप ही खनिजों में विविध रंग, कठोरता, चमक, घनत्व तथा विविध क्रिस्टल पाए जाते हैं।”
1.3 भूगोलविद् और भू-वैज्ञानिक में क्या फ़र्क़ है (बॉक्स, पृष्ठ 43)
| कौन | किसमें रुचि रखता है |
|---|---|
| भूगोलविद् | स्थलाकृतियों की बेहतर जानकारी हेतु खनिजों का अध्ययन भू-पृष्ठ के एक अंश के रूप में करता है; उसकी रुचि खनिज संसाधनों के वितरण और आर्थिक क्रियाओं में ज़्यादा है |
| भू-वैज्ञानिक | खनिजों की निर्माण प्रक्रिया, इनकी आयु व भौतिक-रासायनिक संगठन से संबंधित विषयों की जानकारी रखता है |
1.4 चित्र 5.1 — खनिजों का वर्गीकरण★★
पाठ्यपुस्तक ने इसे प्रवाह-चित्र में दिया है। इसे तालिका में समझिए —
| मुख्य वर्ग | उपवर्ग | उदाहरण |
|---|---|---|
| धात्विक | लौह धातु (जिसमें लोहे का अंश हो) | लौह अयस्क, मैंगनीज़, निकल व कोबाल्ट |
| धात्विक | अलौह | ताँबा, सीसा, जस्ता व बॉक्साइट |
| धात्विक | बहुमूल्य खनिज | सोना, चाँदी, प्लेटिनम |
| अधात्विक | — | अभ्रक, नमक, पोटाश, सल्फर, चूनाग्रम/चूना पत्थर, संगमरमर तथा बलुआ पत्थर |
| ऊर्जा खनिज | — | कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस |
★यह वर्गीकरण सबसे पक्का प्रश्न है। तीन शब्दों में — धात्विक · अधात्विक · ऊर्जा खनिज। और धात्विक के तीन उपवर्ग — लौह · अलौह · बहुमूल्य।
2. खनिजों की उपलब्धता — खनिज कहाँ पाए जाते हैं? (पृष्ठ 43–44)
2.1 पहले ‘अयस्क’ समझिए
- “सामान्यत: खनिज ‘अयस्कों’ में पाए जाते हैं।”
- “किसी भी खनिज में अन्य अवयवों या तत्त्वों के मिश्रण या संचयन हेतु ‘अयस्क’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।”
- ★“खनन का आर्थिक महत्त्व तभी है जब अयस्क में खनिजों का संचयन पर्याप्त मात्रा में हो।”
- “खनिजों के खनन की सुविधा इनके निर्माण व संरचना पर निर्भर हैं। खनन सुविधा इसके मूल्य को निर्धारित करती है।”
2.2 पाँच तरीक़े — खनिज किन शैल समूहों से मिलते हैं★★
“खनिज प्राय: निम्न शैल समूहों से प्राप्त होते हैं —”
| क्रम | कहाँ | कैसे बनते हैं | कौन-से खनिज |
|---|---|---|---|
| (क) | आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में | दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में मिलते हैं; छोटे जमाव शिराओं के रूप में और बृहत् जमाव परत के रूप में। तरल/गैसीय अवस्था में दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर धकेले जाते हैं और ऊपर आकर ठंडे होकर जम जाते हैं। | जस्ता, ताँबा, जिंक और सीसा |
| (ख) | अवसादी चट्टानों में | संस्तरों या परतों में; क्षैतिज परतों में निक्षेपण, संचयन व जमाव का परिणाम। कोयले व कुछ लौह अयस्कों का निर्माण लंबी अवधि तक अत्यधिक ऊष्मा व दबाव का परिणाम है। | कोयला, कुछ लौह अयस्क; और दूसरी श्रेणी में जिप्सम, पोटाश, नमक व सोडियम (शुष्क प्रदेशों में वाष्पीकरण से) |
| (ग) | धरातलीय चट्टानों का अपघटन | चट्टानों के घुलनशील तत्त्वों के अपरदन के पश्चात् अयस्क वाली अवशिष्ट चट्टानें रह जाती हैं | बॉक्साइट |
| (घ) | पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तल की रेत में | जलोढ़ जमाव के रूप में — इन्हें ‘प्लेसर निक्षेप’ कहते हैं; इनमें प्राय: ऐसे खनिज होते हैं जो जल द्वारा घर्षित नहीं होते | सोना, चाँदी, टिन व प्लेटिनम |
| (ङ) | महासागरीय जल | विशाल मात्रा में, पर अधिकांश के व्यापक रूप से विसरित होने के कारण आर्थिक सार्थकता कम | नमक, मैगनीशियम तथा ब्रोमाइन; महासागरीय तली मैंगनीज़ ग्रंथिकाओं (nodules) में धनी |
★याद रखने का तरीक़ा — आग्नेय = दरारें (शिराएँ) · अवसादी = परतें · अपघटन = बॉक्साइट · प्लेसर = सोना-चाँदी · महासागर = नमक।
2.3 रैट होल खनन (बॉक्स, पृष्ठ 44) — यह ज़रूर पढ़िए
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| सामान्य नियम | “भारत में अधिकांश खनिज राष्ट्रीयकृत हैं और इनका निष्कर्षण सरकारी अनुमति के पश्चात् ही संभव है” |
| पर अपवाद | “किंतु उत्तर-पूर्वी भारत के अधिकांश जनजातीय क्षेत्रों में, खनिजों का स्वामित्व व्यक्तिगत व समुदायों को प्राप्त है” |
| मेघालय में | “कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर व डोलोमाइट के विशाल निक्षेप पाए जाते हैं” |
| रैट होल खनन क्या है | “जोवाई व चेरापूँजी में कोयले का खनन परिवार के सदस्य द्वारा एक लंबी संकीर्ण सुरंग के रूप में किया जाता है, जिसे रैट होल खनन कहते हैं” |
| आज की स्थिति | “नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इन क्रियाकलापों को अवैध घोषित किया है और सलाह दी है कि इसे तुरंत रोक दिया जाना चाहिए” |
3. भारत में खनिजों का वितरण (पृष्ठ 44)
“भारत अच्छे और विविध प्रकार के खनिज संसाधनों में सौभाग्यशाली है, यद्यपि इनका वितरण असमान है।”
| क्षेत्र | कौन-से खनिज |
|---|---|
| प्रायद्वीपीय चट्टानें | कोयला, धात्विक खनिज, अभ्रक व अन्य अनेक अधात्विक खनिजों के अधिकांश भंडार |
| प्रायद्वीप के पश्चिमी और पूर्वी पार्श्वों पर — गुजरात और असम की तलछटी चट्टानें | अधिकांश खनिज तेल निक्षेप |
| ★प्रायद्वीपीय शैल क्रम के साथ राजस्थान | अनेक अलौह खनिज |
| उत्तरी भारत के विस्तृत जलोढ़ मैदान | आर्थिक महत्त्व के खनिजों से लगभग विहीन |
- “ये विभिन्नताएँ खनिजों की रचना में अंतर्ग्रस्त भू-गर्भिक संरचना, प्रक्रियाओं और समय के कारण हैं।”
★यहाँ राजस्थान का पहला उल्लेख है — और यह पूरी अलौह खनिजों वाली पहचान है।
और एक ज़रूरी बात —
“सदैव स्मरण रखें कि अयस्क में खनिज का सांद्रण, उत्खनन की सुगमता और बाज़ार की निकटता, किसी संचय (reserve) की आर्थिक जीव्यता (Viability) को प्रभावित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” “ऐसा हो जाने के बाद एक खनिज ‘निक्षेप’ अथवा ‘भंडार’ खदान में परिवर्तित हो जाता है।”
4. लौह खनिज (पृष्ठ 44–45)
- ★“लौह खनिज धात्विक खनिजों के कुल उत्पादन मूल्य के तीन-चौथाई भाग का योगदान करते हैं।”
- “ये धातु शोधन उद्योगों के विकास को मज़बूत आधार प्रदान करते हैं।”
- “भारत अपनी घरेलू माँग को पूरा करने के पश्चात् बड़ी मात्रा में धात्विक खनिजों का निर्यात करता है।”
4.1 लौह अयस्क — दो प्रकार★★
“लौह अयस्क एक आधारभूत खनिज है तथा औद्योगिक विकास की रीढ़ है।”
| प्रकार | लोहांश | विशेषता |
|---|---|---|
| मैग्नेटाइट | 70 प्रतिशत | सर्वोत्तम प्रकार का लौह अयस्क; “इसमें सर्वश्रेष्ठ चुंबकीय गुण होते हैं, जो विद्युत उद्योगों में विशेष रूप से उपयोगी हैं” |
| हेमेटाइट | 50 से 60 प्रतिशत | सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक लौह अयस्क है जिसका अधिकतम मात्रा में उपभोग हुआ है; पर लोहांश मैग्नेटाइट से थोड़ी कम |
★यह फ़र्क़ ज़रूर याद रखिए — मैग्नेटाइट = सबसे अच्छा (70%, चुंबकीय) · हेमेटाइट = सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला (50–60%)।
उत्पादन का आँकड़ा —
“वर्ष 2018-19 में लौह अयस्क का लगभग समस्त उत्पादन (97 प्रतिशत) ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और झारखंड से प्राप्त हुआ, शेष उत्पादन (3 प्रतिशत) अन्य राज्यों में हुआ था।”
4.2 भारत में लौह अयस्क की चार पेटियाँ★★
| पेटी | कहाँ | मुख्य बातें |
|---|---|---|
| 1. ओडिशा-झारखंड पेटी | ओडिशा और झारखंड | ओडिशा में उच्च कोटि का हेमेटाइट किस्म का लौह अयस्क मयूरभंज व केंदुझर ज़िलों में बादाम पहाड़ खदानों से निकाला जाता है; झारखंड के सिंहभूम ज़िले में गुआ तथा नोआमुंडी से हेमेटाइट अयस्क का खनन |
| 2. दुर्ग-बस्तर-चंद्रपुर पेटी | महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ | छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले में बेलाडिला पहाड़ी श्रृंखलाओं में अति उत्तम कोटि का हेमेटाइट; इस गुणवत्ता के लोहे के 14 जमाव; इस्पात बनाने में आवश्यक सर्वश्रेष्ठ भौतिक गुण; विशाखापट्टनम् पत्तन से जापान तथा दक्षिण कोरिया को निर्यात |
| 3. बल्लारि-चित्रदुर्ग, चिक्कमंगलूरु-तुमकूरु पेटी | कर्नाटक | लौह अयस्क की बृहत् राशि संचित; पश्चिमी घाट में कुद्रेमुख की खानें — शत् प्रतिशत निर्यात इकाई; कुद्रेमुख निक्षेप संसार के सबसे बड़े निक्षेपों में से एक; लौह अयस्क कर्दम (Slurry) रूप में पाइपलाइन द्वारा मंगलूरु के निकट एक पत्तन पर भेजा जाता है |
| 4. महाराष्ट्र-गोआ पेटी | गोआ तथा महाराष्ट्र के रत्नागिरि ज़िले | “यद्यपि यहाँ का लोहा उत्तम प्रकार का नहीं है तथापि इसका दक्षता से दोहन किया जाता है”; मरमागाओ पत्तन से निर्यात |
★तीन पत्तन ज़रूर याद कीजिए — विशाखापट्टनम् (बेलाडिला) · मंगलूरु (कुद्रेमुख) · मरमागाओ (गोआ)।
4.3 एक रोचक तथ्य (बॉक्स, पृष्ठ 45)
“कन्नड़ भाषा में ‘कुद्रे’ शब्द का अर्थ है घोड़ा। कर्नाटक के पश्चिमी घाट की सबसे ऊँची चोटी घोड़े के मुख से मिलती-जुलती है।” “बेलाडिला की पहाड़ियाँ, बैल के डील (hump) से मिलती-जुलती हैं, जिसके कारण इसका यह नाम पड़ा।”
यह बॉक्स कक्षा में ज़रूर पढ़वाइए — खदानों के नाम भी कहानी कहते हैं।
4.4 मैंगनीज़★
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| मुख्य उपयोग | इस्पात के विनिर्माण में |
| ★कितना लगता है | “एक टन इस्पात बनाने में लगभग 10 किग्रा. मैंगनीज़ की आवश्यकता होती है” |
| अन्य उपयोग | ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक दवाएँ व पेंट बनाने में |
★चित्र 5.3 — मैंगनीज़ उत्पादन में राज्यों का अंश (2018–19) —
| राज्य | प्रतिशत |
|---|---|
| मध्य प्रदेश | 33% |
| महाराष्ट्र | 27% |
| ओडिशा | 16% |
| कर्नाटक | 12% |
| आंध्र प्रदेश | 10% |
| अन्य | 2% |
5. अलौह खनिज (पृष्ठ 47)
- “भारत में अलौह खनिजों की संचित राशि व उत्पादन अधिक संतोषजनक नहीं है।”
- “यद्यपि ये खनिज जिनमें ताँबा, बॉक्साइट, सीसा और सोना आते हैं, धातु शोधन, इंजीनियरिंग व विद्युत उद्योगों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
5.1 ताँबा★
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थिति | “भारत में ताँबे के भंडार व उत्पादन क्रांतिक रूप से न्यून हैं” |
| गुण | घातवर्ध्य (malleable), तन्य और ताप सुचालक |
| उपयोग | बिजली के तार बनाने, इलैक्ट्रोनिक्स और रसायन उद्योगों में |
| मुख्य क्षेत्र | मध्य प्रदेश की बालाघाट खदानें — देश का लगभग 52 प्रतिशत ताँबा; झारखंड का सिंहभूम ज़िला |
| ★राजस्थान | “राजस्थान की खेतड़ी खदानें भी ताँबे के लिए प्रसिद्ध थीं” |
★‘खेतड़ी’ — यह नाम RBSE की परीक्षा में ज़रूर आता है। (और यह अभ्यास की वर्ग पहेली में भी है!)
5.2 बॉक्साइट★
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| यह क्या है | “यद्यपि अनेक अयस्कों में एल्यूमिनियम पाया जाता है परंतु सबसे अधिक एल्यूमिना क्ले (Clay) जैसे दिखने वाले पदार्थ बॉक्साइट से ही प्राप्त किया जाता है” |
| कैसे बनता है | “बॉक्साइट निक्षेपों की रचना एल्यूमिनियम सीलिकेटों से समृद्ध व्यापक भिन्नता वाली चट्टानों के विघटन से होती है” |
| एल्यूमिनियम के गुण | “लोहे जैसी शक्ति के साथ-साथ अत्यधिक हल्का एवं सुचालक भी होता है; इसमें अत्यधिक घातवर्ध्यता (malleability) भी पाई जाती है” |
| मुख्य निक्षेप | अमरकंटक पठार, मैकाल पहाड़ियों तथा बिलासपुर-कटनी के पठारी प्रदेश |
| सबसे बड़ा उत्पादक | ओडिशा (2018–19); वहाँ कोरापुट ज़िले में पंचपतमाली निक्षेप राज्य के सबसे महत्त्वपूर्ण निक्षेप हैं |
★चित्र 5.5 — बॉक्साइट उत्पादन में राज्यों का अंश (2018–19) —
| राज्य | प्रतिशत |
|---|---|
| ओडिशा | 65% |
| झारखंड | 10% |
| गुजरात | 9% |
| छत्तीसगढ़ | 6% |
| महाराष्ट्र | 6% |
| मध्य प्रदेश | 3% |
| अन्य | 1% |
5.3 नेपोलियन का रोचक तथ्य (बॉक्स, पृष्ठ 48)
“एल्यूमिनियम की खोज के बाद सम्राट नेपोलियन तृतीय अपने कपड़ों पर एल्यूमिनियम से बने हुक व बटन पहनता था तथा अपने ख़ास मेहमानों को एल्यूमिनियम से बने बर्तनों में भोजन कराता, तथा आम मेहमानों को सोने व चाँदी के बर्तनों में भोजन परोसा जाता।” “इस घटना के तीस वर्ष बाद पेरिस में भिखारियों के पास एल्यूमिनियम के बर्तन एक आम बात थी।”
★यह कहानी कक्षा में ज़रूर सुनाइए। तीस साल में एक धातु राजा की चीज़ से भिखारी की चीज़ बन गई — यही तकनीक की ताक़त है।
6. अधात्विक खनिज (पृष्ठ 48)
6.1 अभ्रक★★
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| यह क्या है | “अभ्रक एक ऐसा खनिज है जो प्लेटों अथवा पत्रण क्रम में पाया जाता है” |
| विशेषता | “इसका चादरों में विपाटन (split) आसानी से हो सकता है; ये परतें इतनी महीन हो सकती हैं कि इसकी एक हज़ार परतें कुछ सेंटीमीटर ऊँचाई में समाहित हो सकती हैं” |
| रंग | पारदर्शी, काले, हरे, लाल, पीले अथवा भूरे |
| ★क्यों अनिवार्य है | “इसकी सर्वोच्च परावैद्युत शक्ति, ऊर्जा ह्रास का निम्न गुणांक, विंसवाहन के गुण और उच्च वोल्टेज की प्रतिरोधिता के कारण अभ्रक विद्युत व इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में प्रयुक्त होने वाले अपरिहार्य खनिजों में से एक है” |
★अभ्रक कहाँ मिलता है —
- “अभ्रक के निक्षेप छोटानागपुर पठार के उत्तरी पठारी किनारों पर पाए जाते हैं।”
- “बिहार-झारखंड की कोडरमा-गया-हजारीबाग पेटी अग्रणी उत्पादक हैं।”
- ★“राजस्थान के मुख्य अभ्रक उत्पादक क्षेत्र अजमेर के आस पास हैं।”
- “आंध्र प्रदेश की नेल्लोर अभ्रक पेटी भी देश की महत्त्वपूर्ण उत्पादक पेटी है।”
★तीन पेटियाँ याद कीजिए — कोडरमा-गया-हजारीबाग (बिहार-झारखंड) · अजमेर (राजस्थान) · नेल्लोर (आंध्र प्रदेश)।
7. चट्टानी खनिज — चूना पत्थर (पृष्ठ 48)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| किससे बना | “चूना पत्थर कैल्शियम या कैल्शियम कार्बोनेट तथा मैगनीशियम कार्बोनेट से बनी चट्टानों में पाया जाता है” |
| कहाँ मिलता है | “यह अधिकांशत: अवसादी चट्टानों में पाया जाता है” |
| ★उपयोग | “चूना पत्थर सीमेंट उद्योग का एक आधारभूत कच्चा माल होता है। और लौह-प्रगलन की भट्टियों के लिए अनिवार्य है” |
★★चित्र 5.7 — चूना पत्थर उत्पादन में राज्यों का अंश (2018–19) —
| राज्य | प्रतिशत |
|---|---|
| ★राजस्थान | 22% — सबसे अधिक |
| आंध्र प्रदेश | 13% |
| मध्य प्रदेश | 13% |
| छत्तीसगढ़ | 11% |
| कर्नाटक | 10% |
| तेलंगाना | 7% |
| गुजरात | 6% |
| तमिलनाडु | 5% |
| महाराष्ट्र | 4% |
| अन्य | 9% |
★★यह इस पूरी पुस्तक की सबसे बड़ी राजस्थान-उपलब्धि है — चूना पत्थर उत्पादन में राजस्थान पूरे भारत में पहले नंबर पर है, 22 प्रतिशत के साथ। कक्षा में यह ज़रूर बताइए, और साथ में यह भी कि इसीलिए राजस्थान में इतने सीमेंट कारख़ाने हैं।
और एक चेतावनी —
“खनन को घातक उद्योग (Killer Industry) बनने से रोकने के लिए दृढ़ सुरक्षा विनियम और पर्यावरणीय क़ानूनों का क्रियांवयन अनिवार्य है।”
8. खनन के जोखिम/ख़तरे (पृष्ठ 49)
पाठ्यपुस्तक पूछती है — “क्या आपने कभी खनिकों द्वारा आपके जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए किये गये प्रयासों के बारे में सोचा है? खनन का खनिकों के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है?”
| क्रम | जोखिम |
|---|---|
| 1 | “खदानों में काम करने वाले श्रमिक लगातार धूल व हानिकारक धुएँ में साँस लेते हुए फेफड़ों संबंधी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं” |
| 2 | “खदानों की छतों के गिरने, जलप्लावित होना, कोयले की खदानों में आग लगने आदि, ख़तरे खदान श्रमिकों के लिए स्थाई हैं” |
| 3 | “खदान क्षेत्रों में खनन के कारण जल स्रोत संदूषित हो जाते हैं” |
| 4 | “अवशिष्ट पदार्थों तथा खनिज तरल के मलबे के खत्ता लगाने से भूमि व मिट्टी का अवक्षय होता है और सरिताओं तथा नदियों का प्रदूषण बढ़ता है” |
- चित्र 5.8 — खनन क्षेत्रों में धूल उठने से वायु प्रदूषण।
और अख़बारी कतरनें (पृष्ठ 49) —
- “Jharia to be shifted” — झरिया की कोयला-आग की समस्या।
- “‘Over 50% of coal-belt mines unsafe’” और “‘Safety standards were not in place’”।
इन कतरनों का मक़सद यही है कि विद्यार्थी समझें — जो खनिज हमारी ज़िंदगी आसान बनाते हैं, उन्हें निकालने वाले की ज़िंदगी ख़तरे में होती है।
9. खनिजों का संरक्षण (पृष्ठ 50)
| क्रम | तर्क |
|---|---|
| 1 | “हम सभी को उद्योग और कृषि की खनिज निक्षेपों और उनसे विनिर्मित पदार्थों पर भारी निर्भरता सुपरिक्षित है” |
| 2 | ★“खनन योग्य निक्षेप की कुल राशि असार्थक अंश है, अर्थात् भू-पर्पटी का एक प्रतिशत” |
| 3 | “जिन खनिज संसाधनों के निर्माण व सांद्रण में लाखों वर्ष लगे हैं, हम उनका शीघ्रता से उपभोग कर रहे हैं” |
| 4 | ★“खनिज निर्माण की भूगर्भिक प्रक्रियाएँ इतनी धीमी है कि उनके वर्तमान उपभोग की दर की तुलना में उनके पुनर्भरण की दर अपरिमित रूप से थोड़ी है” |
| 5 | “इसीलिए खनिज संसाधन सीमित तथा अनवीकरण योग्य हैं” |
| 6 | “समृद्ध खनिज निक्षेप हमारे देश की अत्यधिक मूल्यवान संपत्ति हैं, लेकिन ये अल्पजीवी हैं” |
| 7 | “अयस्कों के सतत् उत्खनन से लागत बढ़ती है क्योंकि खनिजों के उत्खनन की गहराई बढ़ने के साथ उनकी गुणवत्ता घटती जाती है” |
★संरक्षण के उपाय —
“निम्न कोटि के अयस्कों का कम लागतों पर प्रयोग करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों का सतत् विकास करते रहना होगा।” “धातुओं का पुन: चक्रण, रद्दी धातुओं का प्रयोग तथा अन्य प्रतिस्थापनों का उपयोग भविष्य में हमारे खनिज संसाधनों के संरक्षण के उपाय हैं।”
दूसरा आधा — ऊर्जा संसाधन
10. ऊर्जा संसाधन का वर्गीकरण (पृष्ठ 50)
- “ऊर्जा सभी क्रियाकलापों के लिए आवश्यक है। खाना पकाने में, रोशनी व ताप के लिए, गाड़ियों के संचालन तथा उद्योगों में मशीनों के संचालन में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।”
- “ऊर्जा का उत्पादन ईंधन खनिजों जैसे — कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम तथा विद्युत से किया जाता है।”
10.1 दो वर्ग★★
| वर्ग | इसमें क्या आता है |
|---|---|
| परंपरागत साधन | लकड़ी, उपले, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा विद्युत (दोनों — जल विद्युत व ताप विद्युत) |
| गैर-परंपरागत साधन | सौर, पवन, ज्वारीय, भू-तापीय, बायोगैस तथा परमाणु ऊर्जा |
★और ग्रामीण भारत का एक ज़रूरी आँकड़ा —
“ग्रामीण भारत में लकड़ी व उपले बहुतायत में प्रयोग किये जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार ग्रामीण घरों में आवश्यक ऊर्जा का 70 प्रतिशत से अधिक इन दो साधनों से प्राप्त होता है।” “लेकिन अब घटते वन क्षेत्र के कारण इनका उपयोग करते रहना कठिन होता जा रहा है।” “इसके अतिरिक्त उपलों का उपभोग भी हतोत्साहित किया जा रहा है क्योंकि इससे सर्वाधिक मूल्यवान खाद्य का उपभोग होता है जिसे कृषि में प्रयोग किया जा सकता है।”
11. परंपरागत ऊर्जा के स्रोत
11.1 कोयला — यह अभ्यास प्रश्न 3(i) है★★
- “भारत में कोयला बहुतायात में पाया जाने वाला जीवाश्म ईंधन है।”
- “भारत अपनी वाणिज्यिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मुख्यत: कोयले पर निर्भर है।”
- “कोयले का निर्माण पादप पदार्थों के लाखों वर्षों तक संपीडन से हुआ है।”
★संपीडन के आधार पर कोयले के चार रूप —
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| पीट | “दलदलों में क्षय होते पादपों से पीट उत्पन्न होता है, जिसमें कम कार्बन, नमी की उच्च मात्रा व निम्न ताप क्षमता होती है” |
| लिग्नाइट | “निम्न कोटि का भूरा कोयला; मुलायम होने के साथ अधिक नमीयुक्त; प्रमुख भंडार तमिलनाडु के नैवेली में मिलते हैं और विद्युत उत्पादन में प्रयोग किए जाते हैं” |
| बिटुमिनस | “गहराई में दबे तथा अधिक तापमान से प्रभावित कोयला; वाणिज्यिक प्रयोग में सर्वाधिक लोकप्रिय; धातुशोधन में उच्च श्रेणी के बिटुमिनस कोयले का प्रयोग किया जाता है जिसका लोहे के प्रगलन में विशेष महत्त्व है” |
| एंथ्रेसाइट | “सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला है” |
★★दो भूगर्भिक युग — यह ज़रूर याद कीजिए —
| युग | आयु | कहाँ मिलता है |
|---|---|---|
| गोंडवाना | 200 लाख वर्ष से कुछ अधिक | धातुशोधन कोयला; प्रमुख संसाधन दामोदर घाटी (पश्चिमी बंगाल तथा झारखंड) — झरिया, रानीगंज, बोकारो; तथा गोदावरी, महानदी, सोन व वर्धा नदी घाटियों में भी |
| टरशियरी | लगभग 55 लाख वर्ष पुराने | उत्तर-पूर्वी राज्यों — मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड में |
★यह मत भूलिए — गोंडवाना = पुराना और ज़्यादा (200 लाख वर्ष) · टरशियरी = नया और कम (55 लाख वर्ष)।
और एक ज़रूरी बात —
“यह स्मरण रहे कि कोयला स्थूल पदार्थ है। जिसका प्रयोग करने पर भार घटता है क्योंकि यह राख में परिवर्तित हो जाता है।” “इसी कारण भारी उद्योग तथा ताप विद्युत गृह कोयला क्षेत्रों अथवा उनके निकट ही स्थापित किये जाते हैं।”
11.2 पेट्रोलियम★
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थान | “भारत में कोयले के पश्चात् ऊर्जा का दूसरा प्रमुख साधन” |
| उपयोग | ताप व प्रकाश के लिए ईंधन, मशीनों को स्नेहक और अनेक विनिर्माण उद्योगों को कच्चा माल |
| तेल शोधन शालाएँ | “संश्लेषित वस्त्र, उर्वरक तथा असंख्य रासायन उद्योगों में एक नोडीय बिंदु का काम करती हैं” |
★पेट्रोलियम कहाँ पाया जाता है — यह भूगर्भिक तर्क समझिए —
- “भारत में अधिकांश पेट्रोलियम की उपस्थिति टरशियरी युग की शैल संरचनाओं के अपनति व भ्रंश ट्रैप में पाई जाती है।”
- “वलन, अपनति और गुंबदों वाले प्रदेशों में यह वहाँ पाया जाता है जहाँ उद्ववलन के शीर्ष में तेल ट्रैप हुआ होता है।”
- “तेल धारक परत संरंध्र चूना पत्थर या बालुपत्थर होता है जिसमें से तेल प्रवाहित हो सकता है।”
- “मध्यवर्ती असरंध्र परतें तेल को ऊपर उठने व नीचे रिसने से रोकती हैं।”
- “पेट्रोलियम संरंध्र और असरंध्र चट्टानों के बीच भ्रंश ट्रैप में भी पाया जाता है। प्राकृतिक गैस हल्की होने के कारण खनिज तेल के ऊपर पाई जाती है।”
★भारत के प्रमुख तेल क्षेत्र —
| क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| मुम्बई हाई | प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र |
| गुजरात | “अंकलेश्वर गुजरात का सबसे महत्त्वपूर्ण तेल क्षेत्र है” |
| असम | “भारत का सबसे पुराना तेल उत्पादक राज्य है। डिगबोई, नहरकटिया और मोरन-हुगरीजन इस राज्य के महत्त्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र हैं” |
★तीन नाम याद कीजिए — मुम्बई हाई · अंकलेश्वर (गुजरात) · डिगबोई (असम)।
11.3 प्राकृतिक गैस★
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कहाँ मिलती है | “पेट्रोलियम के भंडार के साथ पाई जाती है और जब कच्चे तेल को सतह पर लाया जाता है तो यह मुक्त हो जाती है” |
| उपयोग | घरेलू और औद्योगिक ईंधन; बिजली पैदा करने; उद्योगों में हीटिंग; रासायनिक, पेट्रोकैमिकल और उर्वरक उद्योगों में कच्चे माल के रूप में; परिवहन ईंधन और खाना पकाने के ईंधन के रूप में |
| नए रूप | “सी.एन.जी. (परिवहन ईंधन) और पी.एन.जी. (घरों में खाना पकाने का ईंधन); तथा सी.ओ.डी.ी. — स्थानीय शहर गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार” |
| प्रमुख भंडार | “मुंबई हाई और अन्य संबद्ध क्षेत्र पश्चिमी तट पर; खंभात बेसिन; और पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी बेसिन में नए भंडार की खोज” |
★★एच.वी.जे. गैस पाइपलाइन — यह आँकड़ा बहुत महत्त्वपूर्ण है —
| बिंदु | आँकड़ा |
|---|---|
| पहली पाइपलाइन | गेल द्वारा निर्मित 1,700 किलोमीटर लंबी हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (एच.वी.जे.) क्रॉस कंट्री गैस पाइपलाइन |
| किसे जोड़ा | मुंबई हाई और बसीन गैस क्षेत्रों को पश्चिमी और उत्तरी भारत के उर्वरक, बिजली और औद्योगिक परिसरों से |
| आज कितना विस्तार | “क्रॉस-कंट्री पाइपलाइनों के 1700 किलोमीटर से बढ़कर 18500 किलोमीटर तक, दस गुना से अधिक हो गया है” |
| आगे की योजना | “जल्द ही 34000 किलोमीटर से अधिक तक पहुँचने की सम्भावना है” |
क्रियाकलाप (पृष्ठ 51): “गेल (इंडिया) द्वारा ‘एक राष्ट्र एक ग्रिड’ के अंतर्गत बिछाई गई क्रॉस कंट्री प्राकृतिक गैस पाइप लाइन के बारे में जानकारी एकत्रित करें।”
11.4 विद्युत★
- “आधुनिक विश्व में विद्युत के अनुप्रयोग इतने ज़्यादा विस्तृत हैं कि इसके प्रति व्यक्ति उपभोग को विकास का सूचकांक माना जाता है।”
★विद्युत दो प्रकार से उत्पन्न होती है —
| प्रकार | कैसे | नवीकरण योग्य? |
|---|---|---|
| जल विद्युत | “प्रवाही जल से जो हाइड्रो-टरबाइन चलाकर जल विद्युत उत्पन्न करता है”; तेज़ बहते जल से | हाँ — “जो एक नवीकरण योग्य संसाधन है” |
| ताप विद्युत | “अन्य ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस को जलाकर टरबाइन चलाकर” | नहीं — “ताप विद्युत गृह अनवीकरण योग्य जीवाश्मी ईंधन का प्रयोग कर विद्युत उत्पन्न करते हैं” |
- “एक बार उत्पन्न हो जाने के बाद विद्युत एक जैसी ही होती है।”
- जल विद्युत के उदाहरण — भाखड़ा नांगल, दामोदर घाटी कारपोरेशन और कोपिली हाइडल परियोजना।
क्रियाकलाप (पृष्ठ 54): “कुछ नदी घाटी परियोजनाओं के नाम बताएँ तथा इन नदियों पर बने बाँधों का नाम लिखिए।” (यह अध्याय 3 से जुड़ता है।)
12. गैर-परंपरागत ऊर्जा के साधन (पृष्ठ 54–56)
12.1 क्यों ज़रूरी हैं
| क्रम | कारण |
|---|---|
| 1 | “ऊर्जा के बढ़ते उपभोग ने देश को कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्मी ईंधनों पर अत्यधिक निर्भर कर दिया है” |
| 2 | “गैस व तेल की बढ़ती क़ीमतों तथा इनकी संभाव्य कमी ने भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के प्रति अनिश्चितताएँ उत्पन्न कर दी हैं” |
| 3 | “इसके राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं” |
| 4 | “जीवाश्मी ईंधनों का प्रयोग गंभीर पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न करता है” |
- “भारत धूप, जल तथा जीवभार साधनों में समृद्ध है।”
12.2 परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा★★
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कैसे मिलती है | “अणुओं की संरचना को बदलने से प्राप्त की जाती है। जब ऐसा परिवर्तन किया जाता है तो ऊष्मा के रूप में काफ़ी ऊर्जा विमुक्त होती है; और इसका उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने में किया जाता है” |
| ★कौन-से खनिज | यूरेनियम और थोरियम |
| ★कहाँ मिलते हैं | “जो झारखंड और राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला में पाए जाते हैं” |
| थोरियम कहाँ और | “केरल में मिलने वाली मोनाजाइट रेत में भी थोरियम की मात्रा पाई जाती है” |
★‘राजस्थान की अरावली’ — यह RBSE के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। और मानचित्र (पृष्ठ 53) में राजस्थान का परमाणु ऊर्जा संयंत्र रावतभाटा भी दिखाया गया है।
पाठ्यपुस्तक का प्रश्न (पृष्ठ 54): “भारत के मानचित्र पर 6 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की अवस्थिति दिखाएँ तथा उनके राज्यों के नाम ज्ञात करें जिनमें ये अवस्थित हैं।”
मानचित्र के अनुसार छह संयंत्र — नरोरा (उ.प्र.) · रावतभाटा (राजस्थान) · काकरापार (गुजरात) · तारापुर (महाराष्ट्र) · कैगा (कर्नाटक) · कलपक्कम (तमिलनाडु)।
12.3 सौर-ऊर्जा
- “भारत एक उष्ण-कटिबंधीय देश है। यहाँ सौर ऊर्जा के दोहन की असीम संभावनाएँ हैं।”
- “फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जाता है।”
- “भारत के ग्रामीण तथा सुदूर क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है।”
- ★“ऐसी अपेक्षा है कि सौर ऊर्जा के प्रयोग से ग्रामीण घरों में उपलों तथा लकड़ी पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सकेगा। फलस्वरूप यह पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा और कृषि में भी खाद्य की पर्याप्त आपूर्ति होगी।”
यह आख़िरी वाक्य ज़रूर लिखिए — यह अभ्यास प्रश्न 3(ii) का सबसे अच्छा बिंदु है।
12.4 पवन ऊर्जा★
- “भारत में पवन ऊर्जा के उत्पादन की महान संभावनाएँ हैं।”
- ★“भारत में पवन ऊर्जा फार्म की विशालतम पेटी तमिलनाडु में नागरकोइल से मदुरै तक अवस्थित है।”
- “इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र तथा लक्षद्वीप में भी महत्त्वपूर्ण पवन ऊर्जा फार्म हैं।”
- ★“नागरकोइल और जैसलमेर देश में पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए जाने जाते हैं।”
★‘जैसलमेर’ — यह राजस्थान का नाम है और सीधे पूछा जाता है।
12.5 बायोगैस
- “ग्रामीण इलाक़ों में झाड़ियों, कृषि अपशिष्ट, पशुओं और मानव जनित अपशिष्ट के उपयोग से घरेलू उपभोग हेतु बायोगैस उत्पन्न की जाती है।”
- ★“जैविक पदार्थों के अपघटन से गैस उत्पन्न होती है, जिसकी तापीय सक्षमता मिट्टी के तेल, उपलों व चारकोल की अपेक्षा अधिक होती है।”
- “पशुओं का गोबर प्रयोग करने वाले संयंत्र ग्रामीण भारत में ‘गोबर गैस प्लांट’ के नाम से जाने जाते हैं।”
★ये किसानों को दो प्रकार से लाभ पहुँचाते हैं —
- एक ऊर्जा के रूप में
- दूसरा उन्नत प्रकार के उर्वरक के रूप में
- “बायोगैस अब तक पशुओं के गोबर का प्रयोग करने में सबसे दक्ष है। यह उर्वरक की गुणवत्ता को बढ़ाता है और उपलों तथा लकड़ी को जलाने से होने वाले वृक्षों के नुक़सान को रोकता है।”
12.6 ज्वारीय ऊर्जा
- “महासागरीय तरंगों का प्रयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जा सकता है।”
- प्रक्रिया — “सँकरी खाड़ी के आर-पार बाढ़ द्वार बना कर बाँध बनाए जाते हैं। उच्च ज्वार में इस सँकरी खाड़ीनुमा प्रवेश द्वार से पानी भीतर भर जाता है और द्वार बन्द होने पर बाँध में ही रह जाता है। बाढ़ द्वार के बाहर ज्वार उतरने पर, बाँध के पानी को इसी रास्ते पाइप द्वारा समुद्र की तरफ़ बहाया जाता है जो इसे ऊर्जा उत्पादक टरबाइन की ओर ले जाता है।”
- ★भारत में आदर्श दशाएँ — खम्भात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी तथा पश्चिमी तट पर गुजरात में; और पश्चिम बंगाल में सुंदर वन क्षेत्र में गंगा के डेल्टा में।
12.7 भू-तापीय ऊर्जा
- “पृथ्वी के आंतरिक भागों से ताप का प्रयोग कर उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को भू-तापीय ऊर्जा कहते हैं।”
- कारण — “बढ़ती गहराई के साथ पृथ्वी प्रगामी ढंग से तप्त होती जाती है।”
- प्रक्रिया — “ऐसे क्षेत्रों में भूमिगत जल चट्टानों से ऊष्मा का अवशोषण कर तप्त हो जाता है… यह इतना तप्त हो जाता है कि यह पृथ्वी की सतह की ओर उठता है तो यह भाप में परिवर्तित हो जाता है। इसी भाप का उपयोग टरबाइन को चलाने और विद्युत उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।”
- “भारत में सैकड़ों गर्म पानी के चश्मे हैं, जिनका विद्युत उत्पादन में प्रयोग किया जा सकता है।”
★भारत की दो प्रायोगिक परियोजनाएँ —
| # | कहाँ |
|---|---|
| 1 | हिमाचल प्रदेश में मणिकरण के निकट पार्वती घाटी |
| 2 | लद्दाख में पूगा घाटी |
13. ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण (पृष्ठ 56)
- “आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा एक आधारभूत आवश्यकता है।”
- “राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक सेक्टर — कृषि, उद्योग, परिवहन, वाणिज्य व घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऊर्जा के निवेश की आवश्यकता है।”
- ★“सतत् पोषणीय ऊर्जा के दो आधार हैं — ऊर्जा संरक्षण की प्रोन्नति और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों का बढ़ता प्रयोग।”
- ★“वर्तमान में भारत विश्व के अल्पतम ऊर्जादक्ष देशों में गिना जाता है।”
★हम क्या कर सकते हैं — यह सूची ज़रूर लिखिए —
“उदाहरणार्थ एक जागरूक नागरिक के रूप में हम यातायात के लिए निजी वाहन की अपेक्षा सार्वजनिक वाहन का उपयोग करके, जब प्रयोग न हो रही हो तो बिजली बन्द करके, विद्युत बचत करने वाले उपकरणों के प्रयोग से तथा ग़ैर पारंपरिक ऊर्जा साधनों के प्रयोग से हम अपना छोटा योगदान दे सकते हैं।”
★★और अध्याय का अंतिम वाक्य — इसे ज़रूर याद कीजिए — “आख़िरकार ‘ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन है।’”
14. NCERT अभ्यास प्रश्न (पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 56–57)
1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
| प्रश्न | विकल्प | उत्तर |
|---|---|---|
| (i) निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज अपक्षयित पदार्थ के अवशिष्ट भार को त्यागता हुआ चट्टानों के अपघटन से बनता है? | (क) कोयला (ख) बॉक्साइट (ग) सोना (घ) जस्ता | (ख) बॉक्साइट |
| (ii) झारखंड में स्थित कोडरमा निम्नलिखित से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है? | (क) बॉक्साइट (ख) अभ्रक (ग) लौह अयस्क (घ) ताँबा | (ख) अभ्रक |
| (iii) निम्नलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और संचयन होता है? | (क) तलछटी चट्टानें (ख) कायांतरित चट्टानें (ग) आग्नेय चट्टानें (घ) इनमें से कोई नहीं | (क) तलछटी चट्टानें |
| (iv) मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज पाया जाता है? | (क) खनिज तेल (ख) यूरेनियम (ग) थोरियम (घ) कोयला | (ग) थोरियम |
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए
(i)(क) लौह और अलौह खनिज में अंतर उत्तर: लौह खनिज वे हैं जिनमें लोहे का अंश होता है, जैसे लौह अयस्क, मैंगनीज़, निकल और कोबाल्ट; ये धात्विक खनिजों के कुल उत्पादन मूल्य के तीन-चौथाई भाग का योगदान करते हैं। अलौह खनिजों में लोहे का अंश नहीं होता, जैसे ताँबा, बॉक्साइट, सीसा और सोना; भारत में इनकी संचित राशि व उत्पादन अधिक संतोषजनक नहीं है।
(i)(ख) परंपरागत तथा गैर-परंपरागत ऊर्जा साधन में अंतर उत्तर: परंपरागत साधनों में लकड़ी, उपले, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा विद्युत (जल व ताप दोनों) सम्मिलित हैं; इनमें से अधिकतर जीवाश्मी ईंधन हैं जो सीमित और प्रदूषणकारी हैं। गैर-परंपरागत साधनों में सौर, पवन, ज्वारीय, भू-तापीय, बायोगैस तथा परमाणु ऊर्जा आती है; ये नवीकरणीय हैं और पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।
(ii) खनिज क्या हैं? उत्तर: भू-वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्त्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना है। खनिज प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं जिसमें कठोर हीरा व नरम चूना तक सम्मिलित हैं, और अब तक 2000 से अधिक खनिजों की पहचान की जा चुकी है।
(iii) आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है? उत्तर: आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में मिलते हैं; छोटे जमाव शिराओं के रूप में और बृहत् जमाव परत के रूप में पाए जाते हैं। इनका निर्माण उस समय होता है जब ये तरल अथवा गैसीय अवस्था में दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर धकेले जाते हैं और ऊपर आते हुए ठंडे होकर जम जाते हैं; जस्ता, ताँबा, जिंक और सीसा इसी तरह मिलते हैं।
(iv) हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता है? उत्तर: खनन योग्य निक्षेप की कुल राशि भू-पर्पटी का केवल एक प्रतिशत है, और जिन खनिजों के निर्माण में लाखों वर्ष लगे हैं हम उनका शीघ्रता से उपभोग कर रहे हैं। खनिज निर्माण की भूगर्भिक प्रक्रियाएँ इतनी धीमी हैं कि उनके पुनर्भरण की दर उपभोग की तुलना में अपरिमित रूप से थोड़ी है, इसलिए खनिज संसाधन सीमित तथा अनवीकरण योग्य हैं।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए
(i) भारत में कोयले के वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर के मुख्य बिंदु —
- भारत में कोयला बहुतायात में पाया जाने वाला जीवाश्म ईंधन है और भारत अपनी वाणिज्यिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मुख्यत: कोयले पर निर्भर है।
- कोयले का निर्माण पादप पदार्थों के लाखों वर्षों तक संपीडन से हुआ है, और संपीडन की मात्रा, गहराई तथा दबने के समय के आधार पर यह पीट, लिग्नाइट, बिटुमिनस और एंथ्रेसाइट — चार रूपों में पाया जाता है।
- लिग्नाइट के प्रमुख भंडार तमिलनाडु के नैवेली में मिलते हैं और विद्युत उत्पादन में प्रयोग किए जाते हैं; बिटुमिनस वाणिज्यिक प्रयोग में सर्वाधिक लोकप्रिय है और धातुशोधन में उच्च श्रेणी के बिटुमिनस का प्रयोग होता है।
- भारत में कोयला दो प्रमुख भूगर्भिक युगों की शैल क्रम में पाया जाता है — गोंडवाना (जिसकी आयु 200 लाख वर्ष से कुछ अधिक है) और टरशियरी निक्षेप (जो लगभग 55 लाख वर्ष पुराने हैं)।
- गोंडवाना कोयले के प्रमुख संसाधन दामोदर घाटी (पश्चिमी बंगाल तथा झारखंड) में झरिया, रानीगंज और बोकारो में स्थित हैं; गोदावरी, महानदी, सोन व वर्धा नदी घाटियों में भी कोयले के जमाव पाए जाते हैं।
- टरशियरी कोयला क्षेत्र उत्तर-पूर्वी राज्यों — मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड में पाया जाता है।
निष्कर्ष — यह स्मरण रहे कि कोयला स्थूल पदार्थ है जिसका प्रयोग करने पर भार घटता है क्योंकि यह राख में परिवर्तित हो जाता है; इसी कारण भारी उद्योग तथा ताप विद्युत गृह कोयला क्षेत्रों अथवा उनके निकट ही स्थापित किये जाते हैं।
(ii) भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल है। क्यों?
उत्तर के मुख्य बिंदु —
- भारत एक उष्ण-कटिबंधीय देश है, इसलिए यहाँ सौर ऊर्जा के दोहन की असीम संभावनाएँ हैं और साल भर पर्याप्त धूप मिलती है।
- फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जाता है, इसलिए इसमें ईंधन जलाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
- भारत के ग्रामीण तथा सुदूर क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है, और कुछ बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र देश के विभिन्न भागों में स्थापित किए जा रहे हैं।
- ऐसी अपेक्षा है कि सौर ऊर्जा के प्रयोग से ग्रामीण घरों में उपलों तथा लकड़ी पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सकेगा — और यह बहुत ज़रूरी है क्योंकि ग्रामीण घरों में आवश्यक ऊर्जा का 70 प्रतिशत से अधिक इन्हीं दो साधनों से प्राप्त होता है।
- फलस्वरूप यह पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा, क्योंकि घटते वन क्षेत्र पर दबाव कम होगा।
- और साथ ही कृषि में भी खाद्य की पर्याप्त आपूर्ति होगी, क्योंकि उपलों का उपभोग हतोत्साहित होने से गोबर खाद के रूप में खेतों में लौट सकेगा।
निष्कर्ष — चूँकि गैस व तेल की क़ीमतें बढ़ रही हैं और जीवाश्मी ईंधन गंभीर पर्यावरणीय समस्याएँ पैदा करते हैं, इसलिए सौर जैसे नवीकरणीय साधन ही सतत् पोषणीय ऊर्जा का आधार हैं।
4. वर्ग पहेली (पृष्ठ 57) — उत्तर अंग्रेज़ी के शब्दों में हैं
क्षैतिज —
| # | संकेत | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | एक लौह खनिज (9) | MANGANESE |
| 2 | सीमेंट उद्योग में प्रयुक्त कच्चा माल (9) | LIMESTONE |
| 3 | चुंबकीय गुणों वाला सर्वश्रेष्ठ लोहा (10) | MAGNETITE |
| 4 | उत्कृष्ट कोटि का कठोर कोयला (10) | ANTHRACITE |
| 5 | इस अयस्क से एल्यूमिनियम प्राप्त किया जाता है (7) | BAUXITE |
| 6 | इस खनिज के लिए खेतरी खदानें प्रसिद्ध हैं (6) | COPPER |
| 7 | वाष्पीकरण से निर्मित (6) | GYPSUM |
ऊर्ध्वाधर —
| # | संकेत | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | प्लेसर निक्षेपों से प्राप्त होता है | GOLD |
| 2 | बेलाडिला में खनन किया जाने वाला लौह-अयस्क (8) | HEMATITE |
| 3 | विद्युत उद्योग में अपरिहार्य (4) | MICA |
| 4 | उत्तरी-पूर्वी भारत में मिलने वाले कोयले की भूगर्भिक आयु (8) | TERTIARY |
| 5 | शिराओं तथा शिरानिक्षेपों में निर्मित (3) | TIN |
★ध्यान दीजिए — क्षैतिज 6 का संकेत ही ‘खेतड़ी खदानें’ है, यानी राजस्थान अभ्यास की पहेली में भी है।
15. सभी खनिजों की एक तालिका (आख़िरी दिन के लिए)★★
| खनिज | वर्ग | मुख्य उपयोग | प्रमुख क्षेत्र / राज्य |
|---|---|---|---|
| लौह अयस्क | धात्विक-लौह | इस्पात उद्योग की रीढ़ | ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, झारखंड (97%); चार पेटियाँ |
| मैंगनीज़ | धात्विक-लौह | इस्पात (1 टन में 10 किग्रा.), ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक, पेंट | म.प्र. 33%, महाराष्ट्र 27%, ओडिशा 16%, कर्नाटक 12%, आंध्र प्रदेश 10% |
| ताँबा | धात्विक-अलौह | बिजली के तार, इलैक्ट्रोनिक्स, रसायन उद्योग | म.प्र. बालाघाट (52%), झारखंड सिंहभूम, राजस्थान की खेतड़ी |
| बॉक्साइट | धात्विक-अलौह | एल्यूमिनियम | ओडिशा 65% (कोरापुट-पंचपतमाली), झारखंड 10%, गुजरात 9% |
| अभ्रक | अधात्विक | विद्युत व इलेक्ट्रॉनिक उद्योग | कोडरमा-गया-हजारीबाग (बिहार-झारखंड), अजमेर (राजस्थान), नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) |
| चूना पत्थर | अधात्विक/चट्टानी | सीमेंट उद्योग; लौह-प्रगलन की भट्टियाँ | ★राजस्थान 22% (पहला), आंध्र प्रदेश 13%, म.प्र. 13%, छत्तीसगढ़ 11% |
| कोयला | ऊर्जा खनिज | ताप विद्युत, धातुशोधन | दामोदर घाटी (झरिया, रानीगंज, बोकारो); नैवेली (लिग्नाइट); उत्तर-पूर्वी राज्य (टरशियरी) |
| पेट्रोलियम | ऊर्जा खनिज | ईंधन, स्नेहक, कच्चा माल | मुम्बई हाई, गुजरात (अंकलेश्वर), असम (डिगबोई, नहरकटिया, मोरन-हुगरीजन) |
| प्राकृतिक गैस | ऊर्जा खनिज | CNG, PNG, बिजली, उर्वरक | मुंबई हाई, खंभात बेसिन, कृष्णा-गोदावरी बेसिन |
| यूरेनियम-थोरियम | ऊर्जा खनिज | परमाणु ऊर्जा | ★झारखंड और राजस्थान की अरावली; थोरियम केरल की मोनाजाइट रेत में |
16. राजस्थान इस अध्याय में आठ बार आता है★
| # | कहाँ | क्या |
|---|---|---|
| 1 | खनिजों का वितरण | “प्रायद्वीपीय शैल क्रम के साथ राजस्थान में अनेक अलौह खनिज पाए जाते हैं” |
| 2 | ताँबा | “राजस्थान की खेतड़ी खदानें भी ताँबे के लिए प्रसिद्ध थीं” |
| 3 | अभ्रक | “राजस्थान के मुख्य अभ्रक उत्पादक क्षेत्र अजमेर के आस पास हैं” |
| 4 | ★★चूना पत्थर | राजस्थान 22 प्रतिशत — पूरे भारत में पहला स्थान |
| 5 | परमाणु ऊर्जा | “यूरेनियम और थोरियम… झारखंड और राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला में पाए जाते हैं” |
| 6 | मानचित्र (पृष्ठ 46) | अभ्रक के लिए अजमेर और बेवर |
| 7 | मानचित्र (पृष्ठ 53) | परमाणु ऊर्जा संयंत्र — रावतभाटा |
| 8 | पवन ऊर्जा | “नागरकोइल और जैसलमेर देश में पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए जाने जाते हैं” |
★★और अभ्यास की वर्ग पहेली में भी — क्षैतिज 6 का संकेत ही ‘खेतड़ी खदानें’ है। RBSE की परीक्षा के लिए यह अध्याय बहुत महत्त्वपूर्ण है — विशेषकर चूना पत्थर (जहाँ राजस्थान पहले नंबर पर है), खेतड़ी, अजमेर, अरावली, रावतभाटा और जैसलमेर।
17. महत्त्वपूर्ण आँकड़े — एक नज़र में
| आँकड़ा | किससे जुड़ा |
|---|---|
| 0.3% और 99.7% | पौष्टिक उपभोग में खनिजों का हिस्सा, और जिनके बिना बाक़ी बेकार |
| 2000 से अधिक | पहचाने गए खनिज |
| तीन-चौथाई | धात्विक खनिजों के कुल उत्पादन मूल्य में लौह खनिजों का योगदान |
| 70 प्रतिशत | मैग्नेटाइट में लोहांश |
| 50–60 प्रतिशत | हेमेटाइट में लोहांश |
| 97 प्रतिशत | ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और झारखंड से लौह अयस्क उत्पादन (2018-19) |
| 14 जमाव | बेलाडिला में उत्तम कोटि के हेमेटाइट के |
| 10 किग्रा. | एक टन इस्पात बनाने में लगने वाला मैंगनीज़ |
| 52 प्रतिशत | बालाघाट खदानों से देश का ताँबा |
| 65 प्रतिशत | बॉक्साइट में ओडिशा का हिस्सा |
| 22 प्रतिशत | ★चूना पत्थर में राजस्थान का हिस्सा — सबसे अधिक |
| एक प्रतिशत | भू-पर्पटी का वह भाग जो खनन योग्य निक्षेप है |
| 70 प्रतिशत से अधिक | ग्रामीण घरों की ऊर्जा जो लकड़ी और उपलों से आती है |
| 200 लाख वर्ष | गोंडवाना कोयले की आयु |
| 55 लाख वर्ष | टरशियरी कोयले की आयु |
| 1,700 किमी. | पहली एच.वी.जे. गैस पाइपलाइन |
| 18500 किमी. | आज की कुल क्रॉस-कंट्री पाइपलाइन (दस गुना से अधिक) |
| 34000 किमी. | गैस ग्रिड का भावी लक्ष्य |
18. कठिन शब्द और उनके अर्थ (शब्दावली)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| खनिज | एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्त्व, जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना है। |
| अयस्क (Ore) | किसी खनिज में अन्य अवयवों या तत्त्वों का मिश्रण या संचयन; खनन तभी लाभदायक है जब अयस्क में खनिज पर्याप्त मात्रा में हो। |
| शिरा (Vein) | आग्नेय-कायांतरित चट्टानों की दरारों में जमा खनिज का छोटा जमाव। |
| प्लेसर निक्षेप | पहाड़ियों के आधार और घाटी तल की रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में मिलने वाले खनिज — सोना, चाँदी, टिन, प्लेटिनम। |
| मैंगनीज़ ग्रंथिकाएँ (Nodules) | महासागरीय तली पर मिलने वाली मैंगनीज़ की गोल गाँठें। |
| आर्थिक जीव्यता (Viability) | यह कि किसी खनिज-संचय को निकालना आर्थिक रूप से लाभदायक है या नहीं। |
| रैट होल खनन | मेघालय के जोवाई व चेरापूँजी में परिवार के सदस्यों द्वारा लंबी संकीर्ण सुरंग बनाकर कोयला निकालना; नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इसे अवैध घोषित किया है। |
| मैग्नेटाइट | सर्वोत्तम प्रकार का लौह अयस्क, जिसमें 70 प्रतिशत लोहांश और सर्वश्रेष्ठ चुंबकीय गुण होते हैं। |
| हेमेटाइट | सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक लौह अयस्क, जिसमें 50 से 60 प्रतिशत लोहांश होता है। |
| कर्दम (Slurry) | लौह अयस्क को पानी में मिलाकर बनाया गया गाढ़ा घोल, जिसे पाइपलाइन से भेजा जाता है (कुद्रेमुख से मंगलूरु)। |
| घातवर्ध्य (Malleable) | वह धातु जिसे पीटकर पतली चादर में बदला जा सके — जैसे ताँबा और एल्यूमिनियम। |
| तन्य (Ductile) | वह धातु जिसे खींचकर तार बनाया जा सके। |
| अभ्रक | प्लेटों या पत्रण क्रम में पाया जाने वाला खनिज, जिसकी एक हज़ार परतें कुछ सेंटीमीटर में समा सकती हैं; विद्युत उद्योग के लिए अपरिहार्य। |
| परावैद्युत शक्ति | बिजली को रोकने की क्षमता — अभ्रक में यह सर्वोच्च होती है। |
| घातक उद्योग (Killer Industry) | खनन के लिए प्रयुक्त शब्द, क्योंकि इसमें श्रमिकों की जान और स्वास्थ्य दोनों को ख़तरा रहता है। |
| पीट | दलदलों में क्षय होते पादपों से बना कोयले का सबसे निम्न रूप — कम कार्बन, अधिक नमी। |
| लिग्नाइट | निम्न कोटि का भूरा, मुलायम और नमीयुक्त कोयला; तमिलनाडु के नैवेली में। |
| बिटुमिनस | वाणिज्यिक प्रयोग में सर्वाधिक लोकप्रिय कोयला; उच्च श्रेणी का धातुशोधन में प्रयुक्त। |
| एंथ्रेसाइट | सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला। |
| गोंडवाना कोयला | 200 लाख वर्ष से कुछ अधिक पुराना; दामोदर घाटी, झरिया, रानीगंज, बोकारो। |
| टरशियरी कोयला | लगभग 55 लाख वर्ष पुराना; मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड। |
| अपनति (Anticline) | चट्टानों की ऊपर उठी हुई मोड़, जिसके शीर्ष में तेल इकट्ठा होता है। |
| भ्रंश ट्रैप (Fault trap) | चट्टानों के टूटने से बनी वह संरचना जिसमें तेल फँस जाता है। |
| संरंध्र / असरंध्र | संरंध्र = जिसमें से तेल बह सके (चूना पत्थर, बालुपत्थर); असरंध्र = जो तेल को रोक ले। |
| एच.वी.जे. पाइपलाइन | हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर; भारत की पहली 1,700 किमी. लंबी क्रॉस कंट्री गैस पाइपलाइन। |
| सी.एन.जी. / पी.एन.जी. | CNG = परिवहन ईंधन; PNG = घरों में खाना पकाने का ईंधन। |
| फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी | वह तकनीक जिससे धूप को सीधे विद्युत में बदला जाता है। |
| गोबर गैस प्लांट | पशुओं का गोबर प्रयोग करने वाला बायोगैस संयंत्र, जो ऊर्जा और उर्वरक दोनों देता है। |
| ज्वारीय ऊर्जा | सँकरी खाड़ी में बाढ़ द्वार वाला बाँध बनाकर ज्वार के पानी से टरबाइन चलाकर बनाई गई विद्युत। |
| भू-तापीय ऊर्जा | पृथ्वी के आंतरिक भागों के ताप से उत्पन्न विद्युत; भारत में पार्वती घाटी (हि.प्र.) और पूगा घाटी (लद्दाख) में प्रायोगिक परियोजनाएँ। |
| मोनाजाइट रेत | केरल की वह रेत जिसमें थोरियम पाया जाता है। |
अंतिम बात। यह अध्याय लंबा ज़रूर है, पर मुश्किल नहीं — बस इसे दो हिस्सों में बाँटकर पढ़िए।
पहला आधा (खनिज) तालिका से पढ़िए — हर खनिज के लिए तीन बातें: वर्ग · उपयोग · राज्य। दूसरा आधा (ऊर्जा) दो सूचियों से पढ़िए — परंपरागत और गैर-परंपरागत।
और अपने राजस्थान को कभी मत छोड़िए — खेतड़ी (ताँबा), अजमेर (अभ्रक), अरावली (यूरेनियम-थोरियम), रावतभाटा (परमाणु), जैसलमेर (पवन), और सबसे बढ़कर चूना पत्थर, जिसमें राजस्थान पूरे भारत में पहले नंबर पर है।
और अध्याय का आख़िरी वाक्य कभी मत भूलिए — “ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन है।”