कक्षा: 10 · विषय: सामाजिक विज्ञान (भूगोल) · पुस्तक: समकालीन भारत–2 पाठ्यपुस्तक पृष्ठ: 1–12 · कुल कालांश: 8 (+1 पुनरावृत्ति) · माध्यम: हिंदी
अधिगम प्रतिफल (इस अध्याय के बाद विद्यार्थी क्या कर पाएगा)
| # | प्रतिफल |
|---|---|
| 1 | ‘संसाधन’ की परिभाषा उसकी चारों शर्तों सहित लिख पाएगा, और बता पाएगा कि संसाधन प्रकृति का उपहार नहीं बल्कि मानवीय क्रियाओं का परिणाम है। |
| 2 | संसाधनों को चारों आधारों पर वर्गीकृत कर पाएगा और हर वर्ग का एक उदाहरण दे पाएगा। |
| 3 | सतत् पोषणीय विकास की परिभाषा और रियो सम्मेलन (1992) तथा एजेंडा 21 का महत्त्व बता पाएगा। |
| 4 | संसाधन नियोजन के तीन सोपान क्रम से लिख पाएगा और चारों प्रादेशिक उदाहरण (झारखंड, अरुणाचल, राजस्थान, लद्दाख) याद रख पाएगा। |
| 5 | भारत के भू-उपयोग प्रारूप के आँकड़े और वन क्षेत्र न बढ़ने के कारण बता पाएगा। |
| 6 | छहों मृदाओं को उनके क्षेत्र, विशेषता और फ़सल सहित पहचान पाएगा तथा भारत के मानचित्र पर दिखा पाएगा। |
| 7 | मृदा अपरदन के प्रकार और संरक्षण के चार तरीक़े उदाहरण सहित समझा पाएगा। |
कालांश 1 — संसाधन क्या है, और क्या नहीं है
उद्देश्य: परिभाषा को रटाने की जगह उसकी चार शर्तों से समझाना।
प्रवेश गतिविधि (8 मिनट) —
- बोर्ड पर चार चीज़ें लिखिए — मोबाइल, गोबर, समुद्र के पानी में घुला सोना, और सूरज की धूप।
- पूछिए — “इनमें से कौन-कौन संसाधन है?” बच्चे बहस करेंगे।
- फिर परिभाषा पढ़वाइए और चारों शर्तें बोर्ड पर लिखिए — आवश्यकता · प्रौद्योगिकी · आर्थिक रूप से संभाव्य · सांस्कृतिक रूप से मान्य।
- अब वापस लौटिए — समुद्र के पानी में सोना है, पर उसे निकालना बहुत महँगा है, इसलिए वह अभी संसाधन नहीं है। यह उदाहरण पूरी परिभाषा को जीवित कर देता है।
मुख्य शिक्षण (20 मिनट) —
- पाठ्यपुस्तक की वह पंक्ति ज़ोर से पढ़वाइए — “क्या आप भी संसाधनों को प्राकृतिक उपहार समझते हैं? ऐसा नहीं है। संसाधन मानवीय क्रियाओं का परिणाम हैं।”
- चित्र 1.1 का त्रिकोण बोर्ड पर बनाइए — प्रकृति, प्रौद्योगिकी, संस्थाएँ, और बीच में मानव।
- उदाहरण दीजिए — नदी प्रकृति है, बाँध प्रौद्योगिकी है, और पानी बाँटने वाली सरकार संस्था है।
मूल्यांकन प्रश्न —
- संसाधन की परिभाषा लिखिए।
- कोई चीज़ ‘संसाधन’ कब बनती है — दो शर्तें बताइए।
गृहकार्य: अपने घर की पाँच ऐसी चीज़ें लिखिए जो संसाधन हैं, और हर एक के आगे बताइए कि वह किस आवश्यकता को पूरा करती है।
कालांश 2 — संसाधनों का वर्गीकरण (सबसे पक्का प्रश्न)
उद्देश्य: चारों आधार और उनके प्रकार पक्के करवाना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- बोर्ड पर चार आधार लिखिए और याद रखने का सूत्र दीजिए — “उ-स-स्वा-वि” (उत्पत्ति · समाप्यता · स्वामित्व · विकास का स्तर)।
- हर आधार के लिए बच्चों से ख़ुद उदाहरण मँगवाइए, बताइए मत।
- चित्र 1.2 का वर्गीकरण तालिका के रूप में बोर्ड पर उतारिए (00-मास्टर नोट्स भाग 1.2 देखिए)।
- ‘पुन: चक्रीय’ और ‘अचक्रीय’ पर रुकिए — धातु गलाकर दोबारा बनती है, पेट्रोल एक बार जला तो ख़त्म।
कक्षा-प्रयोग (10 मिनट) —
- कक्षा को चार दलों में बाँटिए। हर दल को एक आधार दीजिए।
- हर दल पाँच-पाँच उदाहरण ढूँढ़कर बोर्ड पर लिखे।
- फिर पूरी कक्षा जाँच करे कि कोई उदाहरण ग़लत ख़ाने में तो नहीं है।
मूल्यांकन प्रश्न —
- समाप्यता के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण कीजिए।
- ‘भंडार’ और ‘संचित कोष’ में क्या अंतर है?
गृहकार्य: स्वामित्व के आधार पर चारों प्रकार लिखकर हर एक के दो उदाहरण दीजिए।
कालांश 3 — संसाधनों का विकास और सतत् पोषणीय विकास
उद्देश्य: अध्याय के नैतिक पक्ष तक ले जाना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- अंधाधुंध उपयोग की तीन समस्याएँ बोर्ड पर — ह्रास · बँटवारा · पारिस्थितिकी संकट।
- तीसरी समस्या के चार उदाहरण अलग लिखवाइए — भूमंडलीय तापन, ओज़ोन परत अवक्षय, पर्यावरण प्रदूषण, भूमि निम्नीकरण।
- सतत् पोषणीय विकास की परिभाषा शब्दश: लिखवाइए और उसके दो हिस्से अलग करके दिखाइए।
- रियो सम्मेलन (1992) और एजेंडा 21 की तालिका पूरी करवाइए।
कक्षा-संवाद (10 मिनट) —
- पूछिए — “अगर आज हम सारा पानी ख़र्च कर दें, तो तुम्हारे बच्चों के लिए क्या बचेगा?”
- एजेंडा 21 की वह पंक्ति ज़ोर देकर बताइए — “प्रत्येक स्थानीय निकाय अपना स्थानीय एजेंडा 21 तैयार करे।”
- फिर पूछिए — “तो हमारे गाँव/वार्ड का एजेंडा 21 क्या होना चाहिए?” बच्चों के जवाब बोर्ड पर लिखिए — यह क्रियाकलाप बन जाता है।
मूल्यांकन प्रश्न —
- सतत् पोषणीय विकास का अर्थ लिखिए।
- रियो सम्मेलन कब, कहाँ और क्यों हुआ?
गृहकार्य: पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 2 का क्रियाकलाप 1 — “तेल संसाधन ख़त्म होने पर हमारी जीवन शैली पर क्या प्रभाव होगा?” — दस वाक्यों में लिखिए।
कालांश 4 — संसाधन नियोजन और संरक्षण
उद्देश्य: भारत की क्षेत्रीय विविधता को नक़्शे से जोड़ना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- भारत का मानचित्र टाँगिए। चारों उदाहरण नक़्शे पर उँगली रखकर बताइए —
- झारखंड, म.प्र., छत्तीसगढ़ — खनिज और कोयला
- अरुणाचल प्रदेश — जल प्रचुर, विकास की कमी
- राजस्थान — पवन-सौर ऊर्जा की बहुतायत, जल की कमी
- लद्दाख — सांस्कृतिक विरासत, पर जल-अवसंरचना-खनिज की कमी
- तीन सोपान बोर्ड पर — पहचान · प्रौद्योगिकी · समन्वय।
- फिर वह बड़ा तर्क — “सिर्फ़ संसाधन होने से विकास नहीं होता” — और उपनिवेशवाद वाला उदाहरण।
- गांधी जी का कथन बोर्ड पर लिखिए और वहीं छोड़ दीजिए।
- संरक्षण की कालरेखा — 68 रोम · 74 शुमेसर · 87 ब्रुन्ड्टलैंड · 92 रियो।
अंतर-विषय जोड़ (5 मिनट) —
- इतिहास से जोड़िए — “तुमने इतिहास में पढ़ा था कि अंग्रेज़ कच्चा माल ले जाते थे। यह उसी बात का भूगोल वाला पक्ष है।”
मूल्यांकन प्रश्न —
- संसाधन नियोजन के तीन सोपान लिखिए।
- राजस्थान में किन संसाधनों की बहुतायत है और किसकी कमी?
गृहकार्य: अपने राज्य में पाए जाने वाले संसाधनों की सूची बनाइए और जिनकी कमी है उन्हें अलग लिखिए (पृष्ठ 3 का क्रियाकलाप)।
कालांश 5 — भू-संसाधन और भू-उपयोग प्रारूप
उद्देश्य: आँकड़ों को पढ़ना और उनसे निष्कर्ष निकालना सिखाना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- तीन आँकड़े पहले — मैदान 43% · पर्वत 30% · पठार 27% — और तीनों की एक-एक उपयोगिता।
- भू-उपयोग की पाँच श्रेणियाँ क्रम से लिखवाइए।
- ‘वर्तमान परती’ और ‘पुरातन परती’ का फ़र्क़ बोर्ड पर साफ़ कीजिए (1 वर्ष / 1–5 वर्ष / 5 से ज़्यादा)।
- 32.8 लाख वर्ग किमी. और 93% वाले दोनों कारण लिखवाइए।
कक्षा-प्रयोग — आँकड़ा पढ़ना (10 मिनट) —
- चित्र 1.4 के दोनों वृत्त चित्र खुलवाइए।
- बच्चों से ख़ुद पूछिए — “1960-61 और 2014-15 में शुद्ध बोया गया क्षेत्र कितना था?” (45.26% और 45.5%)
- फिर — “यानी 54 साल में कितना बढ़ा?” (लगभग कुछ नहीं)
- फिर — “और वन कितना बढ़ा?” (18.11% से 23.3%)
- अब सवाल दीजिए — “क्यों नहीं बढ़ा?” यही अभ्यास प्रश्न 3(i) है, और बच्चे ख़ुद उत्तर निकाल लेंगे।
मूल्यांकन प्रश्न —
- भारत के कुल क्षेत्रफल के केवल 93 प्रतिशत भाग के आँकड़े क्यों उपलब्ध हैं?
- राष्ट्रीय वन नीति 1952 कितना वन क्षेत्र चाहती है?
गृहकार्य: चित्र 1.4 की तालिका अपनी कॉपी में उतारिए (00-मास्टर नोट्स भाग 6.3 से)।
कालांश 6 — भूमि निम्नीकरण और मृदा का बनना
उद्देश्य: राज्यवार कारण पक्के करवाना और मृदा-निर्माण की प्रक्रिया समझाना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- 13 करोड़ हेक्टेयर, 28% और 56% — तीनों आँकड़े बोर्ड पर।
- राज्यवार तालिका बनवाइए और तीन समूह याद करवाइए —
- खनन = झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा
- अति पशुचारण = गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र
- अधिक सिंचाई = पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश
- ! यहाँ रुककर चेताइए — “मध्य प्रदेश दो सूचियों में है और राजस्थान अति पशुचारण में है। यही परीक्षा में पूछा जाता है।”
- फिर मृदा — पाँच कारक और चित्र 1.5 की चार परतें।
- वह वाक्य ज़रूर बोलिए — “कुछ सेंटीमीटर गहरी मृदा बनने में लाखों वर्ष लग जाते हैं।”
कक्षा-प्रयोग —
- मुट्ठी भर मिट्टी कक्षा में लाइए। बच्चों से पूछिए — “इसे बनने में कितना समय लगा होगा?”
- जवाब सुनकर बताइए — लाखों वर्ष। इसके बाद ‘मिट्टी बचाओ’ की बात अपने आप असर करती है।
मूल्यांकन प्रश्न —
- पंजाब में भूमि निम्नीकरण का मुख्य कारण क्या है? (अभ्यास प्रश्न 1-i)
- मृदा बनने के पाँच कारक लिखिए।
गृहकार्य: भूमि निम्नीकरण के सात उपाय याद करके आइए।
कालांश 7 — मृदाओं का वर्गीकरण (सबसे बड़ा कालांश)
उद्देश्य: छहों मृदाओं को क्षेत्र, विशेषता और फ़सल से जोड़ना — और नक़्शे पर दिखाना।
मुख्य शिक्षण (30 मिनट) —
- मृदाओं को इसी क्रम में पढ़ाइए — जलोढ़ · काली · लाल-पीली · लेटराइट · मरुस्थली · वन।
- हर मृदा के लिए तीन ही बातें बोर्ड पर लिखवाइए — कहाँ · क्या ख़ास · कौन-सी फ़सल।
- जलोढ़ में बांगर और खादर का फ़र्क़ ज़रूर कीजिए (कंकर बनाम महीन कण)।
- काली में वह अनोखी बात बताइए — “गीली होने पर चिपचिपी हो जाती है, इसलिए जुताई मानसून की पहली बौछार से शुरू कर दी जाती है।”
- लाल और पीली में दो शब्द — लाल = लोहा, पीली = जलयोजन।
- लेटराइट में नाम का अर्थ बताइए — ग्रीक ‘लेटर’ = ईंट।
- मरुस्थली में पश्चिमी राजस्थान वाला वाक्य ज़ोर देकर पढ़वाइए।
मानचित्र-कार्य (10 मिनट) — यह अनिवार्य है
- पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 8 का मानचित्र खुलवाइए।
- हर मृदा के लिए बच्चों से नक़्शे पर उँगली रखवाइए।
- फिर ख़ाली नक़्शा देकर छहों मृदाएँ रंग भरवाइए।
मूल्यांकन प्रश्न —
- काली मृदा किन तीन राज्यों में पाई जाती है और उस पर कौन-सी फ़सल उगाई जाती है? (अभ्यास प्रश्न 2-i)
- लेटराइट मृदा कैसे बनती है?
गृहकार्य: छहों मृदाओं की तुलना-तालिका बनाइए (00-मास्टर नोट्स भाग 9.7 के अनुसार)।
कालांश 8 — मृदा अपरदन और संरक्षण
उद्देश्य: अध्याय को व्यावहारिक हल पर समाप्त करना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- मृदा अपरदन की परिभाषा लिखवाइए।
- प्रकार बोर्ड पर — अवनलिका · चादर · पवन · ग़लत जुताई।
- चंबल बेसिन वाला उदाहरण ज़रूर दीजिए — खड्ड (ravine) और उत्खात भूमि (bad land)।
- फिर चार संरक्षण-तरीक़े, हर एक के आगे उसका क्षेत्र —
- समोच्च जुताई — ढाल वाली भूमि पर
- सोपान कृषि — पश्चिमी और मध्य हिमालय
- पट्टी कृषि — पवन रोकने के लिए
- रक्षक मेखला — पश्चिम भारत में रेत के टीलों का स्थायीकरण
समापन-संवाद (10 मिनट) —
- बोर्ड पर वापस पहला वाक्य लिखिए — “संसाधन मानवीय क्रियाओं का परिणाम हैं।”
- पूछिए — “अगर संसाधन हम बनाते हैं, तो उन्हें बिगाड़ता कौन है?”
- फिर गांधी जी का कथन दोहराइए — “पेट भरने के लिए बहुत है, पेटी भरने के लिए नहीं।”
मूल्यांकन प्रश्न —
- पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन रोकने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए? (अभ्यास प्रश्न 2-iii)
- रक्षक मेखला का पश्चिम भारत में क्या योगदान रहा है?
गृहकार्य: पूरा अध्याय दोहराकर 05-प्रश्न बैंक के भाग च (मानचित्र-कार्य) का अभ्यास कीजिए।
कालांश 9 (वैकल्पिक) — पुनरावृत्ति और मानचित्र-परीक्षा
- फ्लैशकार्ड (फ़ाइल 06) से 15 मिनट की तेज़ मौखिक जाँच।
- ख़ाली भारत के मानचित्र पर मृदा-परीक्षा (10 अंक)।
- प्रश्न बैंक (फ़ाइल 05) का नमूना पत्र 1 कक्षा में हल करवाइए।
कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सहायता
| समस्या | क्या कीजिए |
|---|---|
| वर्गीकरण के चारों आधार आपस में गड्डमड्ड हो जाते हैं | सिर्फ़ चार शब्द रटाइए — उ-स-स्वा-वि। हर आधार का सिर्फ़ एक उदाहरण पक्का कीजिए, बाक़ी बाद में। |
| ‘भंडार’ और ‘संचित कोष’ में फ़र्क़ नहीं समझ आता | एक वाक्य — “भंडार में तकनीक नहीं है; संचित कोष में तकनीक है, पर इस्तेमाल नहीं किया।” |
| मृदाओं के नाम और राज्य आपस में मिल जाते हैं | हर मृदा को एक ही फ़सल से बाँध दीजिए — काली=कपास, जलोढ़=गेहूँ-चावल, लेटराइट=चाय-कॉफ़ी-काजू। फ़सल याद रहेगी तो मृदा भी याद रहेगी। |
| प्रतिशत के आँकड़े याद नहीं रहते | सिर्फ़ पाँच आँकड़े अनिवार्य रखिए — 43-30-27, 32.8 लाख, 33%, 54%, 13 करोड़ हेक्टेयर। |
| मानचित्र पर राज्य नहीं पहचान पाते | हर कालांश में सिर्फ़ तीन राज्य दिखाइए, पूरा नक़्शा नहीं। आठ कालांशों में सारे राज्य अपने आप हो जाएँगे। |
| लंबे उत्तर लिखने में डर लगता है | 05-प्रश्न बैंक के मॉडल उत्तर पहले नक़्ल करवाइए, फिर याद, फिर अपने शब्दों में। |
शिक्षण-सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| भारत का बड़ा राजनीतिक मानचित्र | हर कालांश में — यह इस अध्याय की सबसे ज़रूरी सामग्री है |
| पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 8 का मृदा-मानचित्र | कालांश 7 |
| ख़ाली भारत के मानचित्र (छायाप्रति) | कालांश 7 और 9 |
| चित्र 1.2 का वर्गीकरण (तालिका के रूप में) | कालांश 2 |
| चित्र 1.3 और 1.4 के वृत्त चित्र | कालांश 5 |
| चित्र 1.5 मृदा परिच्छेदिका | कालांश 6 |
| मुट्ठी भर मिट्टी | कालांश 6 का कक्षा-प्रयोग |
| चित्र 1.6 से 1.11 (मृदाओं और अपरदन के चित्र) | कालांश 7 और 8 |
मूल्यांकन-संकेतक
| स्तर | विद्यार्थी क्या कर रहा है |
|---|---|
| प्रारंभिक | परिभाषाएँ और आँकड़े बता पाता है, पर उन्हें नक़्शे या उदाहरण से नहीं जोड़ पाता। |
| विकासशील | मृदाओं के नाम और क्षेत्र बता पाता है, पर कारण नहीं समझा पाता। |
| दक्ष | हर मृदा को उसके क्षेत्र, बनने के कारण और फ़सल से जोड़ पाता है; मानचित्र पर सही दिखा पाता है। |
| उन्नत | यह समझा पाता है कि एक ही राज्य में अलग-अलग मृदाएँ क्यों हैं, और अपने ज़िले की मिट्टी को अध्याय से जोड़ पाता है। |
शिक्षक के लिए अंतिम सुझाव
- भूगोल को कक्षा की चारदीवारी में मत रखिए। हर कालांश में कम से कम एक बार पूछिए — “अपने गाँव/शहर में यह कहाँ दिखता है?”
- मानचित्र के बिना यह अध्याय आधा है। अगर बोर्ड पर नक़्शा नहीं टाँग सकते, तो हर बच्चे से किताब का नक़्शा खुलवाकर उँगली रखवाइए।
- राजस्थान इस अध्याय में चार बार आता है — पवन-सौर ऊर्जा, जल की कमी, अति पशुचारण, और मरुस्थली मृदा में सिंचाई। हर बार रुककर कहिए — “यह अपने राज्य की बात है।” इससे बच्चे तुरंत जुड़ जाते हैं।
- आख़िरी कालांश में अध्याय को नैतिक सवाल पर छोड़िए, तथ्य पर नहीं। गांधी जी की वह पंक्ति — “पेट भरने के लिए बहुत है, पेटी भरने के लिए नहीं” — कक्षा से बाहर तक बच्चों के साथ जाती है।