कक्षा: 10 · विषय: सामाजिक विज्ञान (भूगोल) · पुस्तक: समकालीन भारत–2 पाठ्यपुस्तक पृष्ठ: 13–18 · कुल कालांश: 5 (+1 पुनरावृत्ति) · माध्यम: हिंदी
यह पुस्तक का सबसे छोटा अध्याय है, इसलिए इसे पाँच कालांशों में पूरा किया जा सकता है। पर सावधान — छोटा होने का मतलब आसान होना नहीं है। इसमें नाम बहुत हैं, और परीक्षा में नामों की जोड़ियाँ ही पूछी जाती हैं।
अधिगम प्रतिफल (इस अध्याय के बाद विद्यार्थी क्या कर पाएगा)
| # | प्रतिफल |
|---|---|
| 1 | जैव विविधता की परिभाषा दे पाएगा और बता पाएगा कि भारत में विश्व की 8 प्रतिशत उपजातियाँ (लगभग 16 लाख) पाई जाती हैं। |
| 2 | वन और वन्य जीव संरक्षण के चार कारण लिख पाएगा। |
| 3 | 1972 के अधिनियम और 1973 की बाघ परियोजना का विवरण दे पाएगा, बाघों के घटने के चार कारण सहित। |
| 4 | वनों के तीनों प्रकार पहचान पाएगा और उनका राज्यवार वितरण बता पाएगा। |
| 5 | समुदायों के योगदान के कम से कम पाँच उदाहरण दे पाएगा — जिनमें राजस्थान के तीन हों। |
| 6 | संयुक्त वन प्रबंधन की व्यवस्था समझा पाएगा। |
| 7 | भारत के मानचित्र पर छहों बाघ रिज़र्व और राष्ट्रीय उद्यान दिखा पाएगा। |
कालांश 1 — हम अकेले नहीं हैं: जैव विविधता
उद्देश्य: अध्याय में भावनात्मक रूप से प्रवेश कराना, तथ्यों से नहीं।
प्रवेश गतिविधि (10 मिनट) —
- पहले लेपचा लोकगीत पढ़वाइए (पृष्ठ 13)। किसी एक बच्चे से ऊँची आवाज़ में पढ़वाइए।
- फिर पूछिए — “इस गीत में इनसान प्रकृति से क्या माँग रहा है?” (उत्तर: कुछ नहीं माँग रहा — वह संगीत ग्रहण करने की अनुमति माँग रहा है और उसे लौटा देना चाहता है।)
- बोर्ड पर लिखिए — “प्रकृति से रिश्ता सिर्फ़ ‘उपयोग’ का नहीं होता।”
मुख्य शिक्षण (20 मिनट) —
- “सूक्ष्म-जीवाणुओं और बैक्टीरिया, जोंक से लेकर वटवृक्ष, हाथी और ब्लू व्हेल तक” — यह वाक्य पढ़वाइए और पूछिए कि इसमें सबसे छोटा और सबसे बड़ा जीव कौन है।
- तीन ज़रूरी चीज़ें बोर्ड पर — वायु · जल · मृदा — और यह कि “पौधे, पशु और सूक्ष्मजीवी इनका पुन: सृजन करते हैं”।
- ‘प्राथमिक उत्पादक’ समझाइए — वन पहली कड़ी हैं, जिन पर बाक़ी सब निर्भर हैं।
- भारत का आँकड़ा लिखवाइए — 8 प्रतिशत · लगभग 16 लाख उपजातियाँ · और अभी दो-तीन गुना खोजी जानी बाक़ी।
समापन (5 मिनट) —
- पूछिए — “अगर हमें अपनी ही धरती की दो-तिहाई प्रजातियों का पता नहीं है, तो हम उन्हें बचा कैसे रहे हैं?” यह सवाल अगले कालांश की भूमिका बना देता है।
गृहकार्य: पृष्ठ 13 का क्रियाकलाप — “अपने क्षेत्र में मानव और प्रकृति के समन्वयी संबंधों पर प्रचलित कहानियों के बारे में पता लगाएँ।” घर के बड़ों से पूछकर एक कहानी लिखकर लाइए।
कालांश 2 — संरक्षण क्यों, और 1972 का अधिनियम
उद्देश्य: सरकारी प्रयासों का पूरा ढाँचा बैठाना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- संरक्षण के चार कारण बोर्ड पर लिखवाइए — पारिस्थितिकी विविधता · जीवन साध्य संसाधन · जीन विविधता · पारंपरिक फ़सलें और मछली पालन।
- ‘जीन विविधता’ पर रुकिए और उदाहरण दीजिए — “अगर सिर्फ़ एक ही किस्म का गेहूँ बचे और उसे बीमारी लग जाए, तो पूरी फ़सल ख़त्म हो जाएगी। इसीलिए विविधता ही सुरक्षा है।”
- चित्र 2.1 की तीनों तस्वीरें दिखाइए और पूछिए — “इनमें एक बात समान है, क्या?” (उत्तर: तीनों में आदिवासी महिलाएँ हैं — यानी वन उनकी रोज़ी-रोटी हैं।)
- 1972 का अधिनियम — सातों बिंदु तालिका में लिखवाइए।
- दो सूचियाँ अलग-अलग बनवाइए —
- जिनके लिए परियोजनाएँ बनीं: बाघ, एक सींग वाला गैंडा, हंगुल, तीन मगरमच्छ, एशियाई शेर
- जिनके शिकार-व्यापार पर प्रतिबंध लगा: भारतीय हाथी, काला हिरण, चिंकारा, गोडावन, हिम तेंदुआ
मूल्यांकन प्रश्न —
- वन और वन्य जीवन का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
- हंगुल किसे कहते हैं?
गृहकार्य: दोनों सूचियाँ याद करके आइए — अगले दिन मौखिक जाँच होगी।
कालांश 3 — बाघ परियोजना (सबसे महत्त्वपूर्ण कालांश)
उद्देश्य: एक कहानी के ज़रिए पूरे संरक्षण-तर्क को समझाना।
प्रवेश (5 मिनट) —
- बोर्ड पर सिर्फ़ दो संख्याएँ लिखिए — 55,000 और 1,827।
- कुछ मत बताइए। पूछिए — “ये क्या हो सकती हैं?”
- फिर बताइए — यह बाघों की संख्या है; पहली 20वीं सदी के आरंभ की, दूसरी 1973 की। कक्षा सन्न रह जाती है और वहीं से अध्याय खुल जाता है।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- बाघों के घटने के चार कारण लिखवाइए — चोरी/व्यापार · आवास सिकुड़ना · भोजन की कमी · जनसंख्या वृद्धि।
- और दो कारण जोड़िए — खाल का व्यापार और हड्डियों का औषधियों में प्रयोग।
- “भारत और नेपाल दुनिया की दो-तिहाई बाघों को आवास उपलब्ध करवाते हैं” — यह वाक्य ज़रूर लिखवाइए।
- प्रोजेक्ट टाईगर — 1973, विश्व की बेहतरीन परियोजनाओं में से एक।
- और वह गहरी बात — “बाघ संरक्षण मात्र एक संकटग्रस्त जाति को बचाने का प्रयास नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य बहुत बड़े आकार के जैवजाति को भी बचाना है।”
कक्षा-प्रयोग (5 मिनट) —
- बोर्ड पर एक बड़ा छाता बनाइए। ऊपर लिखिए ‘बाघ’। नीचे लिखिए — हिरण, पक्षी, कीड़े, पेड़, नदी।
- कहिए — “बाघ को बचाने के लिए जंगल बचाना पड़ता है, और जंगल बचने से ये सब बच जाते हैं।”
मानचित्र-कार्य (5 मिनट) —
- छहों उद्यान/रिज़र्व नक़्शे पर दिखाइए — कॉर्बेट (उत्तराखण्ड), सुंदरबन (प. बंगाल), बांधवगढ़ (म.प्र.), सरिस्का (राजस्थान), मानस (असम), पेरियार (केरल)।
- कहिए — “छह अलग राज्य, छह अलग दिशाएँ। यानी बाघ पूरे भारत में हैं।”
मूल्यांकन प्रश्न —
- बाघों की संख्या घटने के चार कारण बताइए।
- सरिस्का किस राज्य में है?
गृहकार्य: छहों उद्यान और उनके राज्य याद करके आइए; ख़ाली नक़्शे पर अंकित करके लाइए।
कालांश 4 — वनों के तीन प्रकार और उनका वितरण
उद्देश्य: वर्गीकरण और राज्यवार तालिका पक्की करवाना।
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- तीनों प्रकार बोर्ड पर, तीन शब्दों में — आरक्षित = सबसे मूल्यवान · रक्षित = और नष्ट होने से बचाना · अवर्गीकृत = बाक़ी सब।
- आँकड़े जोड़िए — आरक्षित = आधे से अधिक; रक्षित = एक-तिहाई।
- ‘स्थायी वन क्षेत्र’ की परिभाषा लिखवाइए — आरक्षित + रक्षित (अवर्गीकृत नहीं)।
- राज्यवार तालिका बनवाइए और तीन बातों पर ज़ोर दीजिए —
- मध्य प्रदेश में स्थायी वन सबसे अधिक — 75 प्रतिशत
- राजस्थान रक्षित वनों वाली सूची में है
- पूर्वोत्तर के सभी राज्य और गुजरात — अवर्गीकृत, और वे स्थानीय समुदायों के प्रबंधन में हैं
स्रोत-कार्य (10 मिनट) —
- पृष्ठ 16 की दोनों अख़बारी कतरनें दिखाइए — “Gharial on the brink” और “Bird deaths blamed on dirty Yamuna”।
- पाठ्यपुस्तक का सवाल पूछिए — “क्या आप इन समस्याओं के निदान के कारण ज्ञात कर सकते हैं?”
- निष्कर्ष निकलवाइए — “वन्य जीवन को ख़तरा सिर्फ़ शिकार से नहीं, प्रदूषण और आवास बिगड़ने से भी है।”
मूल्यांकन प्रश्न —
- आरक्षित और रक्षित वन में अंतर बताइए।
- किन राज्यों में अधिकतर वन अवर्गीकृत हैं और वे किसके प्रबंधन में हैं?
गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 2 (मेल करें) हल करके लाइए।
कालांश 5 — समुदाय और वन संरक्षण (अध्याय का दिल)
उद्देश्य: यह समझाना कि क़ानून से पहले और क़ानून के बाद भी, वन समुदाय ही बचाते हैं।
प्रवेश (5 मिनट) —
- पूछिए — “अगर कल सरकार सारे वन-रक्षक हटा ले, तो जंगल बचेंगे या नहीं?”
- जवाब सुनकर पाठ्यपुस्तक की पंक्ति पढ़वाइए — “वन संरक्षण की नीतियाँ हमारे देश में कोई नई बात नहीं है।”
मुख्य शिक्षण (25 मिनट) —
- पहले राजस्थान के दो उदाहरण — क्योंकि ये बच्चों के अपने हैं —
- सरिस्का में गाँववालों का खनन-विरोधी संघर्ष
- भैरोंदेव डाकव सोंचुरी — अलवर ज़िला, 5 गाँव, 1,200 हेक्टेयर; अपने ही नियम-क़ानून; शिकार वर्जित
- फिर पवित्र पेड़ों के झुरमट — और तीन जोड़ियाँ लिखवाइए:
- मुंडा और संथाल (छोटानागपुर) = महुआ और कदंब
- ओडिशा और बिहार की जनजातियाँ = इमली और आम (शादी के दौरान)
- हम सब = पीपल और वटवृक्ष
- फिर बिश्नोई — चारों जानवर याद करवाइए: काला हिरण, चिंकारा, नीलगाय और मोर।
- फिर तीन आंदोलन — चिपको (हिमालय) · बीज बचाओ आंदोलन और नवदानय (टिहरी)।
- अंत में संयुक्त वन प्रबंधन — 1988, ओडिशा ने पहला प्रस्ताव पास किया।
समापन-संवाद (10 मिनट) —
- निष्कर्ष वाला अनुच्छेद पढ़वाइए और तीन शर्तें बोर्ड पर लिखिए — जनमानस पर केंद्रित · पर्यावरण हितैषी · आर्थिक रूप से प्रतिफलित।
- फिर गौतम बुद्ध का उद्धरण पढ़वाइए और वहीं कक्षा समाप्त कीजिए।
- कुछ मत समझाइए — उस उद्धरण को अपना काम करने दीजिए।
मूल्यांकन प्रश्न —
- भैरोंदेव डाकव सोंचुरी के बारे में लिखिए। (अंक: ज़िला, गाँवों की संख्या, हेक्टेयर — तीनों चाहिए)
- संयुक्त वन प्रबंधन क्या है और इसकी शुरुआत कब-कहाँ हुई?
गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 4(i) — “भारत में विभिन्न समुदायों ने किस प्रकार वनों और वन्य जीव संरक्षण में योगदान किया है?” — 120 शब्दों में लिखिए।
कालांश 6 (वैकल्पिक) — पुनरावृत्ति और मानचित्र-परीक्षा
- फ्लैशकार्ड (फ़ाइल 06) से 15 मिनट की तेज़ मौखिक जाँच — विशेषकर समूह 8 (केवल नाम-जोड़ियाँ)।
- ख़ाली भारत के मानचित्र पर उद्यान-परीक्षा (5 अंक)।
- प्रश्न बैंक (फ़ाइल 05) का नमूना पत्र 1 कक्षा में हल करवाइए।
कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सहायता
| समस्या | क्या कीजिए |
|---|---|
| जानवरों के नाम आपस में मिल जाते हैं | सिर्फ़ दो सूचियाँ याद करवाइए — ‘परियोजना वाले’ और ‘प्रतिबंध वाले’। बाक़ी नाम पहचानने भर के हैं। |
| उद्यान और राज्य की जोड़ियाँ याद नहीं रहतीं | छहों को नक़्शे पर दिशा से बाँधिए — कॉर्बेट उत्तर, सुंदरबन पूर्व, बांधवगढ़ मध्य, सरिस्का पश्चिम, मानस पूर्वोत्तर, पेरियार दक्षिण। |
| आरक्षित / रक्षित / अवर्गीकृत में उलझ जाते हैं | तीन शब्द रटाइए — मूल्यवान · बचाना · बाक़ी सब। आँकड़े बाद में। |
| समुदाय वाले हिस्से में उदाहरण भूल जाते हैं | सिर्फ़ तीन राजस्थानी उदाहरण पक्के करवाइए — सरिस्का, भैरोंदेव डाकव, बिश्नोई। ये अपने राज्य के हैं इसलिए याद रह जाते हैं। |
| वर्ष याद नहीं रहते | सिर्फ़ तीन अनिवार्य रखिए — 1972 (अधिनियम) · 1973 (बाघ परियोजना) · 1988 (संयुक्त वन प्रबंधन)। |
| लंबे उत्तर लिखने में डर लगता है | 05-प्रश्न बैंक के मॉडल उत्तर पहले नक़्ल करवाइए, फिर याद, फिर अपने शब्दों में। |
शिक्षण-सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| भारत का बड़ा राजनीतिक मानचित्र | कालांश 3 और 4 — यह अनिवार्य है |
| ख़ाली भारत के मानचित्र (छायाप्रति) | कालांश 3 और 6 |
| लेपचा लोकगीत (पृष्ठ 13) | कालांश 1 का प्रवेश |
| चित्र 2.1 की तीन तस्वीरें | कालांश 2 — आदिवासी महिलाएँ और वन |
| चित्र 2.2 (काज़ीरंगा) | कालांश 3 |
| पृष्ठ 16 की अख़बारी कतरनें | कालांश 4 का स्रोत-कार्य |
| गौतम बुद्ध का उद्धरण (पृष्ठ 17) | कालांश 5 का समापन |
मूल्यांकन-संकेतक
| स्तर | विद्यार्थी क्या कर रहा है |
|---|---|
| प्रारंभिक | नाम और वर्ष बता पाता है, पर उन्हें जोड़ नहीं पाता। |
| विकासशील | सरकारी प्रयास बता पाता है, पर समुदाय वाले उदाहरण नहीं जोड़ पाता। |
| दक्ष | सरकारी और सामुदायिक — दोनों पक्ष उदाहरण सहित लिख पाता है और मानचित्र पर दिखा पाता है। |
| उन्नत | यह समझा पाता है कि समुदाय वन क्यों बचाते हैं (क्योंकि वह उनका घर और रोज़गार है), और अपने आसपास से उदाहरण जोड़ पाता है। |
शिक्षक के लिए अंतिम सुझाव
- यह अध्याय कहानियों से पढ़ाइए, सूची से नहीं। बाघों की 55,000 से 1,827 वाली गिरावट, अलवर के पाँच गाँव, बिश्नोई के हिरण — ये तीन कहानियाँ ही आधा अध्याय हैं।
- राजस्थान इस अध्याय में चार बार आता है — सरिस्का, भैरोंदेव डाकव सोंचुरी, बिश्नोई, और रक्षित वनों वाली सूची। हर बार रुककर कहिए — “यह अपने राज्य की बात है।”
- अध्याय को क़ानून पर मत ख़त्म कीजिए, समुदाय पर कीजिए। पाठ्यपुस्तक ख़ुद यही करती है — वह 1972 के अधिनियम से शुरू होकर बिश्नोई और चिपको पर ख़त्म होती है।
- और आख़िरी कालांश में गौतम बुद्ध का उद्धरण पढ़ने के बाद कुछ मत बोलिए। कुछ बातें समझाने से नहीं, चुप्पी से पहुँचती हैं।