Chapter 1संसाधन एवं विकास

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यह फ़ाइल केवल शिक्षक के लिए है। इसमें वे बातें हैं जो विद्यार्थी की फ़ाइलों में नहीं दीं — कक्षा की असली दिक़्क़तें, उनके हल, और विषय की वह गहराई जो पढ़ाने का आत्मविश्वास देती है।

एक ज़रूरी बात पहले। यह भूगोल की पुस्तक का पहला अध्याय है। अगर बच्चा यहाँ ‘भूगोल = रटना’ मान लेगा, तो पूरे साल वही चलेगा। इसलिए इस अध्याय की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी विषय पढ़ाना नहीं, विषय से रिश्ता बनाना है।


भाग 1 — अध्याय की असली संरचना

पाठ्यपुस्तक में उपशीर्षक अलग-अलग बिखरे लगते हैं। पर असल में यह अध्याय दो हिस्सों का है —

हिस्सापाठ्यपुस्तक के भागपृष्ठअसल में यह क्या है
हिस्सा 1 — सिद्धांतसंसाधन की परिभाषा से लेकर संरक्षण तक1–4यह पूरा हिस्सा अवधारणाओं का है। यहाँ कोई नक़्शा नहीं, कोई राज्य नहीं — सिर्फ़ सोचने की बातें।
हिस्सा 2 — भारत की ज़मीन और मिट्टीभू-संसाधन से लेकर मृदा संरक्षण तक4–11यह पूरा हिस्सा तथ्यों और नक़्शे का है। यहाँ आँकड़े, राज्य और मृदाएँ हैं।

★पढ़ाने की रणनीति यही है — हिस्सा 1 को बहस की तरह पढ़ाइए (सवाल पूछकर, उदाहरण देकर)। हिस्सा 2 को नक़्शे की तरह पढ़ाइए (उँगली रखवाकर, रंग भरवाकर)। दोनों को एक ही तरीक़े से पढ़ाना ही सबसे बड़ी ग़लती है।

अध्याय की एक-वाक्य आत्मा

“कोई चीज़ अपने आप संसाधन नहीं होती — वह तब बनती है जब मनुष्य के पास उसे इस्तेमाल करने की तकनीक, और उसे बाँटने की व्यवस्था आ जाती है।”

पाठ्यपुस्तक ने यह बात एक ही वाक्य में कह दी है (पृष्ठ 1) — “संसाधन मानवीय क्रियाओं का परिणाम हैं।” यह वाक्य पहले दिन बोर्ड पर लिखिए और पूरे अध्याय में वहीं रहने दीजिए।

भाग 2 — वे दस जगहें जहाँ बच्चे सबसे ज़्यादा अटकते हैं

1. “संसाधन तो हर चीज़ है ना, सर?”

दिक़्क़त क्या है — बच्चे परिभाषा को हल्के में लेते हैं। उनके लिए “जो काम आए वह संसाधन” काफ़ी है, और वे बाक़ी तीन शर्तें छोड़ देते हैं।

हल —

  • बोर्ड पर चार चीज़ें लिखिए — मोबाइल, गोबर, समुद्र के पानी में घुला सोना, धूप।
  • पूछिए — “इनमें से कौन संसाधन है?”
  • सोने पर सब अटक जाएँगे। तब बताइए — समुद्र में लगभग 2 करोड़ टन सोना घुला है, पर उसे निकालने का ख़र्च सोने की क़ीमत से ज़्यादा है।
  • इसलिए वह आर्थिक रूप से संभाव्य नहीं है — यानी वह संसाधन नहीं, केवल भंडार है।

यह एक उदाहरण परिभाषा की तीनों बाक़ी शर्तों को ज़िंदा कर देता है।

2. ‘भंडार’ और ‘संचित कोष’ का फ़र्क़ पकड़ में नहीं आता

दिक़्क़त — दोनों में “अभी इस्तेमाल नहीं हो रहा” कहा गया है, इसलिए बच्चे इन्हें एक ही मान लेते हैं। यह इस अध्याय की सबसे बड़ी उलझन है।

हल — एक वाक्य में फ़र्क़ लिख दीजिए —

“भंडार में तकनीक नहीं है; संचित कोष में तकनीक है, पर इस्तेमाल नहीं किया।”

और दो उदाहरण साथ-साथ लिखवाइए —

उदाहरणतकनीक है?इस्तेमाल हो रहा है?
भंडारपानी में मौजूद हाइड्रोजननहींनहीं
संचित कोषबाँध में जमा जलहाँअभी नहीं

तालिका के दो ‘नहीं’ और एक ‘हाँ’ — यही पूरा फ़र्क़ है। बच्चे इसे कभी नहीं भूलते।

3. चित्र 1.2 का प्रवाह-चित्र कॉपी में उतारते ही बिगड़ जाता है

दिक़्क़त — पाठ्यपुस्तक में यह एक सुंदर प्रवाह-चित्र है, पर बच्चे उसे कॉपी में तीर-रेखाओं से बनाने की कोशिश करते हैं और वह बिखर जाता है। परीक्षा में भी वे उसे बना नहीं पाते।

हल —

  • बच्चों से तालिका बनवाइए, प्रवाह-चित्र नहीं (00-मास्टर नोट्स भाग 1.2 देखिए)।
  • कहिए — “परीक्षा में तुमसे चित्र नहीं, वर्गीकरण पूछा जाएगा। तालिका में लिखोगे तो कुछ नहीं छूटेगा।”
  • और छह पंक्तियाँ रटवाइए — प्राकृतिक/नवीकरण/प्रवाह, प्राकृतिक/नवीकरण/जैव, प्राकृतिक/अनवीकरण/पुन: चक्रीय, प्राकृतिक/अनवीकरण/अचक्रीय, मानवीय/संरचनाएँ, मानवीय/मात्रा-गुणवत्ता।

4. “सतत् पोषणीय विकास” शब्द भारी लगता है

दिक़्क़त — यह शब्द ही बच्चों को डरा देता है, और वे परिभाषा रट लेते हैं पर उसका अर्थ नहीं समझते।

हल — शब्द तोड़कर समझाइए —

  • सतत् = लगातार चलने वाला
  • पोषणीय = जो पोषण दे, टिका रहे
  • यानी — ऐसा विकास जो रुके नहीं और टिका रहे।

फिर एक ही सवाल पूछिए —

“अगर आज हम सारा पानी ख़र्च कर दें, तो तुम्हारे बच्चों के लिए क्या बचेगा?”

बच्चों का जवाब ही परिभाषा का दूसरा हिस्सा है — “भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकता की अवहेलना न करे।”

5. चार वर्ष (68-74-87-92) आपस में गड्डमड्ड हो जाते हैं

दिक़्क़त — चार वर्ष, चार अलग-अलग नाम — और सबसे बड़ी उलझन यह कि बच्चे ‘सतत् पोषणीय विकास’ को 1992 के रियो सम्मेलन से जोड़ देते हैं।

हल —

  • कहानी बनाकर सुनाइए — “पहले रोम में चिंता हुई (68), फिर एक किताब लिखी गई (74), फिर एक रिपोर्ट ने नाम दिया (87), और फिर पूरी दुनिया मिली (92)।”
  • ! यहाँ रुककर साफ़ कहिए — “‘सतत् पोषणीय विकास’ शब्द 1987 की ब्रुन्ड्टलैंड रिपोर्ट ने दिया, 1992 के रियो सम्मेलन ने नहीं।” यह परीक्षा में बहुत उलझाया जाता है।
  • और यह भी बताइए कि 1987 की रिपोर्ट का नाम ‘हमारा साझा भविष्य’ है — नाम ही अपनी परिभाषा बता देता है।

6. “पंचवर्षीय योजना तो अब होती ही नहीं!”

दिक़्क़त — कोई जानकार बच्चा पूछ सकता है कि पंचवर्षीय योजनाएँ तो बंद हो चुकीं।

हल —

  • उसकी बात मान लीजिए — वह सही है। योजना आयोग की जगह 1 जनवरी 2015 से नीति आयोग आ गया, और बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012–2017) आख़िरी थी।
  • पर समझाइए कि पाठ्यपुस्तक का वाक्य भी सही है — वह इतिहास बता रही है कि “स्वाधीनता के बाद प्रथम पंचवर्षीय योजना से ही प्रयास किए गए।”
  • बोर्ड में पाठ्यपुस्तक ही लिखवाइए।
  • और यह जोड़ दीजिए — नीति आयोग का पूरा तर्क वही है जो यह अध्याय कहता है — कि दिल्ली से एक जैसी योजना पूरे देश पर नहीं थोपी जा सकती, क्योंकि राजस्थान की ज़रूरत अरुणाचल से अलग है। (पूरा विवरण फ़ाइल 07 भाग 1 में।)

7. “वन 23.3% है या 21.76%?” — दो अलग आँकड़े

दिक़्क़त — अगर किसी बच्चे ने कहीं वन रिपोर्ट का आँकड़ा देखा हो, तो वह पूछ बैठता है कि किताब का आँकड़ा अलग क्यों है।

हल — दोनों सही हैं, क्योंकि दोनों अलग चीज़ें गिनते हैं —

आँकड़ाक्या गिनता है
भू-उपयोग आँकड़े (पाठ्यपुस्तक, 23.3%)वह भूमि जो काग़ज़ पर वन के रूप में दर्ज है
वन स्थिति रिपोर्ट (21.76%)वह भूमि जहाँ वास्तव में पेड़ खड़े हैं, उपग्रह से मापकर

यह फ़र्क़ बच्चों को ज़रूर बताइए — क्योंकि यह अपने आप में एक बड़ी सच्चाई है: सरकारी काग़ज़ में जितनी ज़मीन ‘वन’ है, ज़रूरी नहीं कि वहाँ पेड़ भी हों।

8. भूमि निम्नीकरण की राज्य-सूचियाँ आपस में मिल जाती हैं

दिक़्क़त — तीन सूचियाँ हैं और मध्य प्रदेश दो में आता है — यही सबसे ज़्यादा ग़लती करवाता है।

हल —

  • तीन समूह अलग-अलग रंग की चॉक से बोर्ड पर लिखिए।
  • फिर साफ़ चेताइए — “मध्य प्रदेश खनन और अति पशुचारण, दोनों में है। और राजस्थान सिर्फ़ अति पशुचारण में है, खनन में नहीं।”
  • याद रखने का सूत्र दीजिए —
कारणसूत्र
खननझा-छ-म-उ (झारखंड, छत्तीसगढ़, म.प्र., उड़ीसा)
अति पशुचारणगु-रा-म-म (गुजरात, राजस्थान, म.प्र., महाराष्ट्र)
अधिक सिंचाईपं-ह-प.उ.प्र. (पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उ.प्र.)

9. छह मृदाएँ याद करना पहाड़ लगता है

दिक़्क़त — छह नाम, हर एक के लिए कई राज्य, कई विशेषताएँ — बच्चे घबरा जाते हैं और सब गड्डमड्ड कर देते हैं।

हल — हर मृदा को एक ही चीज़ से बाँध दीजिए —

मृदाबस यह याद रखिए
जलोढ़उत्तरी मैदान + गेहूँ-चावल
कालीकपास
लाल-पीलीलोहा (लाल) और पानी (पीली)
लेटराइटईंट + चाय-कॉफ़ी-काजू
मरुस्थलीराजस्थान
वनपहाड़

कहिए — “पहले सिर्फ़ ये छह चीज़ें याद करो। राज्य और विशेषताएँ बाद में अपने आप जुड़ जाएँगी।” यह तरीक़ा कमज़ोर बच्चों के लिए सबसे कारगर है।

10. मानचित्र-कार्य छोड़ दिया जाता है

दिक़्क़त — बच्चे मानचित्र को “कठिन” या “बाद में देख लेंगे” कहकर छोड़ देते हैं — जबकि यह सबसे आसान अंक है।

हल —

  • हर कालांश में सिर्फ़ तीन राज्य दिखाइए, पूरा नक़्शा नहीं। आठ कालांशों में सारे राज्य अपने आप हो जाएँगे।
  • मृदाओं के लिए दिशा वाला सूत्र दीजिए —

जलोढ़ = उत्तर का मैदान · काली = पश्चिम-मध्य · लाल-पीली = पूर्व-दक्षिण · लेटराइट = दक्षिण-पश्चिमी किनारा · मरुस्थली = पश्चिम · वन = पहाड़।

  • और सबसे ज़रूरी — हर परीक्षा में मानचित्र का एक प्रश्न ज़रूर दीजिए, चाहे 2 अंक का ही हो। जो चीज़ हर परीक्षा में आती है, बच्चे उसे छोड़ते नहीं।

भाग 3 — कक्षा में पूछे जाने वाले कठिन प्रश्न

“सर, अगर संसाधन हम बनाते हैं, तो पेड़ और पानी तो प्रकृति ने बनाए हैं ना?”

यह सबसे अच्छा सवाल है और अकसर आता है। उत्तर: पाठ्यपुस्तक यह नहीं कह रही कि पेड़ या पानी मनुष्य ने बनाए। वह यह कह रही है कि वे ‘संसाधन’ तब बनते हैं जब मनुष्य उन्हें उपयोगी बना ले। उदाहरण दीजिए — “थार मरुस्थल की धूप हज़ारों साल से वहीं थी। पर वह ‘संसाधन’ तब बनी जब सोलर पैनल की तकनीक आई और सरकार ने भड़ला में सोलर पार्क बनाया।”

यानी — प्रकृति ने चीज़ दी; मनुष्य ने उसे संसाधन बनाया। यही चित्र 1.1 का पूरा त्रिकोण है।

“अगर मिट्टी नवीकरण योग्य है, तो उसे बचाने की क्या ज़रूरत?”

यह सवाल तार्किक है और इसे टालिए मत। उत्तर: “नवीकरण योग्य का मतलब यह नहीं कि वह जल्दी बन जाती है। पाठ्यपुस्तक ख़ुद कहती है — ‘कुछ सेंटीमीटर गहरी मृदा बनने में लाखों वर्ष लग जाते हैं।’” फिर यह पूछिए — “तो जो चीज़ बनने में लाखों साल ले और बहने में एक बारिश — उसे नवीकरण योग्य कहना कितना सही है?”

यह सवाल बच्चों को बहुत सोचने पर मजबूर करता है, और यही इस अध्याय का असली उद्देश्य है।

“राजस्थान में इतनी धूप है, फिर भी हम गरीब क्यों हैं?”

यह सवाल राजस्थान की कक्षाओं में ज़रूर आता है। और इसका उत्तर पाठ्यपुस्तक में ही है। उत्तर: “क्योंकि मात्र संसाधनों की उपलब्धता से ही विकास संभव नहीं है। पाठ्यपुस्तक कहती है कि इसके लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी विकास और संस्थागत परिवर्तन भी चाहिए।” और फिर उम्मीद वाली बात जोड़िए — “पर देखो, अब भड़ला में दुनिया का एक सबसे बड़ा सोलर पार्क बन गया है। यानी वह संभावी संसाधन अब विकसित संसाधन बन रहा है।”

यह जवाब बच्चों को अपने राज्य से जोड़ता है और निराश नहीं करता।

“किताब में जितने उपाय लिखे हैं, वे सब हैं। फिर भी भूमि निम्नीकरण बढ़ क्यों रहा है?”

अगर यह सवाल आ जाए तो समझिए कि कक्षा सोच रही है। उत्तर: इसका कोई एक जवाब नहीं है, और यह ईमानदारी से कहिए। कारण गिनवाइए — बढ़ती जनसंख्या, ज़मीन पर बढ़ता दबाव, उपायों का काग़ज़ पर रह जाना, और सबसे बड़ा कारण — जो नुक़सान धीरे-धीरे होता है, उसे लोग तब तक गंभीरता से नहीं लेते जब तक वह दिखने न लगे। फिर इसे एजेंडा 21 से जोड़िए — “इसीलिए एजेंडा 21 कहता है कि हर स्थानीय निकाय अपना एजेंडा बनाए। जब तक गाँव ख़ुद ज़िम्मेदारी नहीं लेगा, दिल्ली से कुछ नहीं होगा।”

“क्या हमारे गाँव की मिट्टी भी इन छह में से एक है?”

हाँ — और यही सबसे अच्छा मौक़ा है।

  • राजस्थान के अधिकांश हिस्से में मरुस्थली (शुष्क) मृदा।
  • पूर्वी राजस्थान में जलोढ़।
  • दक्षिण-पूर्वी राजस्थान (हाड़ौती क्षेत्र) में काली मृदा — इसीलिए वहाँ कपास होती है।

अगली कक्षा में मुट्ठी भर मिट्टी लाने को कहिए और PARAKH प्रश्न 17 वाली जाँच करवाइए। यह इस पूरे अध्याय की सबसे यादगार गतिविधि बनती है।

भाग 4 — विषय की वह गहराई जो शिक्षक को पता होनी चाहिए

यह हिस्सा बोर्ड-उत्तर के लिए नहीं है। यह आपके अपने वैचारिक अधिकार के लिए है।

(क) संसाधन की परिभाषा के पीछे का विचार — ज़िम्मरमैन का सिद्धांत

पाठ्यपुस्तक जिस परिभाषा से शुरू होती है, वह अर्थशास्त्री एरिक ज़िम्मरमैन के ‘फंक्शनल थ्योरी ऑफ़ रिसोर्सेज़’ से आती है। उनका प्रसिद्ध वाक्य है — “Resources are not, they become.” यानी “संसाधन होते नहीं, बनते हैं।”

पाठ्यपुस्तक ने यह नाम नहीं दिया, पर पूरा अध्याय इसी विचार पर खड़ा है।

कक्षा में सरल रूप: “चीज़ पहले से थी; ‘संसाधन’ शब्द हमने बाद में दिया।” यह एक वाक्य पूरे अध्याय की रीढ़ है।

(ख) दक्कन ट्रैप और काली मिट्टी का काला रंग

पाठ्यपुस्तक कहती है कि काली मृदा ‘लावा जनक शैलों’ से बनी है और दक्कन पठार के ‘बेसाल्ट’ क्षेत्र में मिलती है। पर वह यह नहीं बताती कि वह लावा आया कहाँ से।

  • लगभग 6.6 करोड़ वर्ष पहले दक्कन में विशाल ज्वालामुखी विस्फोट हुए थे, जिनसे निकले लावे ने लाखों वर्ग किलोमीटर को ढक दिया। इसे दक्कन ट्रैप कहते हैं।
  • इसी बेसाल्ट के अपक्षय से काली मिट्टी बनी।
  • ! और एक बहुत ज़रूरी सुधार — काली मिट्टी का काला रंग ह्यूमस से नहीं आता, जैसा बच्चे (और कई शिक्षक भी) मान लेते हैं। वह रंग बेसाल्ट में मौजूद लोहे और मैग्नीशियम के यौगिकों से आता है। इसीलिए काली मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा वास्तव में बहुत अधिक नहीं होती।

यह बात कक्षा में ज़रूर बताइए — क्योंकि “काली मिट्टी = ज़्यादा ह्यूमस” एक बहुत आम ग़लतफ़हमी है।

(ग) निक्षालन (Leaching) असल में होता क्या है

पाठ्यपुस्तक ‘निक्षालन’ शब्द इस्तेमाल करती है पर प्रक्रिया नहीं समझाती। प्रक्रिया यह है —

चरणक्या होता है
1भारी वर्षा में पानी मिट्टी की ऊपरी परत से रिसकर नीचे जाता है।
2रास्ते में वह घुलनशील पोषक तत्त्वों (जैसे कैल्शियम, पोटाश, नाइट्रोजन के यौगिक) को अपने साथ घोलकर नीचे ले जाता है।
3ऊपर केवल वे तत्त्व बचते हैं जो पानी में नहीं घुलते — मुख्यत: लोहा और एल्युमिनियम के ऑक्साइड।
4इसीलिए लेटराइट मिट्टी में पोषक तत्त्वों की कमी होती है और वह अम्लीय (pH<6.0) हो जाती है।

और इसीलिए वह सूखने पर ईंट जैसी सख़्त हो जाती है — केरल और गोवा में पुराने मकान सचमुच लेटराइट की ईंटों से बने हैं। यही नाम का कारण है — ग्रीक ‘लेटर’ = ईंट।

(घ) ‘भू-उपयोग’ और ‘भू-आवरण’ दो अलग चीज़ें हैं

यह फ़र्क़ भूगोल की एक बुनियादी बात है और पाठ्यपुस्तक इसे नहीं बताती —

शब्दअर्थ
भू-आवरण (Land cover)ज़मीन पर वास्तव में क्या है — पेड़, घास, पानी, रेत, कंक्रीट।
भू-उपयोग (Land use)मनुष्य उस ज़मीन का क्या उपयोग कर रहा है — खेती, चरागाह, बस्ती, उद्योग।

एक ही ज़मीन का आवरण घास हो सकता है, पर उपयोग ‘चरागाह’ या ‘खेल का मैदान’ — दोनों हो सकता है।

यही वह फ़र्क़ है जिससे वन के दो अलग आँकड़े (23.3% और 21.76%) निकलते हैं — एक उपयोग गिनता है, दूसरा आवरण। (भाग 2, बिंदु 7 देखिए।)

(ङ) 200 समुद्री मील का असली नाम

पाठ्यपुस्तक कहती है कि “तट रेखा से 200 समुद्री मील की दूरी से परे खुले महासागरीय संसाधन” अंतर्राष्ट्रीय होते हैं — पर इस 200 मील के क्षेत्र का नाम नहीं देती।

  • इसे अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ) कहते हैं।
  • इस क्षेत्र में मछली पकड़ने, खनिज निकालने और ऊर्जा उत्पादन का अधिकार केवल उसी देश का होता है।
  • एक समुद्री मील लगभग 1.85 किलोमीटर होता है — यानी 200 समुद्री मील लगभग 370 किलोमीटर।

यह जानकारी तब काम आती है जब कोई बच्चा पूछे कि “समुद्री मील और मील में क्या फ़र्क़ है?”

(च) गांधी जी का असली वाक्य

पाठ्यपुस्तक ने हिंदी अनुवाद दिया है। मूल अंग्रेज़ी वाक्य यह है —

“Earth provides enough to satisfy every man’s need, but not every man’s greed.”

और पाठ्यपुस्तक ने जो सरल रूप दिया है — “पेट भरने के लिए बहुत है लेकिन पेटी भरने के लिए नहीं” — वह हिंदी का अपना मुहावरा है, अनुवाद नहीं। यह और भी सुंदर है, क्योंकि ‘पेट’ और ‘पेटी’ का अंतर एक ही अक्षर का है — और यही पूरा फ़र्क़ है।

कक्षा में इस शब्द-खेल पर ज़रूर रुकिए। बच्चों को यह बहुत पसंद आता है और वाक्य कभी नहीं भूलता।

भाग 5 — भाषा-संबंधी सावधानियाँ

ग़लत तरीक़ासही तरीक़ाकारण
“संसाधन प्रकृति की देन हैं”“संसाधन मानवीय क्रियाओं का परिणाम हैं”पाठ्यपुस्तक ख़ुद इस धारणा का खंडन करती है
“काली मिट्टी में ह्यूमस ज़्यादा होता है”“काली मिट्टी की नमी धारण क्षमता ज़्यादा होती है”काला रंग ह्यूमस से नहीं, बेसाल्ट के लोहे-मैग्नीशियम से आता है
“मिट्टी नवीकरण योग्य है इसलिए चिंता की बात नहीं”“मिट्टी नवीकरण योग्य है, पर कुछ सेंटीमीटर बनने में लाखों वर्ष लगते हैं”आधा वाक्य ग़लत निष्कर्ष दे देता है
“सतत् पोषणीय विकास 1992 में आया”“इसकी संकल्पना 1987 की ब्रुन्ड्टलैंड रिपोर्ट ने दी; 1992 में रियो सम्मेलन हुआ”यह परीक्षा में सबसे ज़्यादा उलझाया जाता है
“राजस्थान में सब कुछ कम है”“राजस्थान में पवन और सौर ऊर्जा की बहुतायत है, पर जल की कमी है”पाठ्यपुस्तक का वाक्य संतुलित है — उसे वैसा ही रखिए
“भूमि निम्नीकरण का कारण सिर्फ़ खनन है”“खनन, अति पशुचारण, अधिक सिंचाई, खनिज प्रक्रियाएँ और औद्योगिक अपशिष्ट — सब कारण हैं”एक कारण लिखने पर आधे अंक कटते हैं

भाग 6 — मूल्यांकन की योजना

चरणकबक्या जाँचेंकैसे
1कालांश 2 के बादवर्गीकरण के चारों आधारपाँच मिनट की मौखिक जाँच
2कालांश 4 के बादनियोजन के तीन सोपान और चारों प्रादेशिक उदाहरणलिखित, 10 अंक
3कालांश 5 के बादआँकड़े — 43-30-27, 32.8 लाख, 93%, 54%, 33%फ्लैशकार्ड समूह 12 से
4कालांश 6 के बादभूमि निम्नीकरण की राज्यवार तालिकाख़ाली तालिका भरवाइए
5कालांश 7 के बादछहों मृदाएँख़ाली मानचित्र पर, 10 अंक
6कालांश 8 के बादपूरा अध्याय05-प्रश्न बैंक का कोई एक नमूना पत्र
7एक हफ़्ते बादधारण (retention)फ्लैशकार्ड से 20 प्रश्न, केवल मौखिक

एक सुझाव: हर लिखित परीक्षा में मानचित्र का एक प्रश्न अनिवार्य रखिए, चाहे 2 अंक का ही हो। जो चीज़ हर परीक्षा में आती है, बच्चे उसे कभी नहीं छोड़ते।

भाग 7 — अंतिम शिक्षक-टिप्पणी

यह भूगोल का पहला अध्याय है, और इसका असली काम विषय का दरवाज़ा खोलना है।

अगर बच्चा इस अध्याय के बाद यह मान ले कि “भूगोल मतलब नाम और आँकड़े रटना” — तो हम हार गए। और अगर वह यह मान ले कि “भूगोल मतलब अपनी ज़मीन को समझना” — तो पूरा साल आसान हो गया।

इसलिए हर कालांश में कम से कम एक बार यह सवाल पूछिए —

“यह हमारे अपने गाँव में कहाँ दिखता है?”

और आख़िरी कालांश में अध्याय को तथ्य पर नहीं, एक सवाल पर छोड़िए। बोर्ड पर गांधी जी की वह पंक्ति लिखिए —

“हमारे पास पेट भरने के लिए बहुत है, लेकिन पेटी भरने के लिए नहीं।”

और पूछिए —

“तुम्हारे घर में कोई ऐसी चीज़ है जो ‘पेट’ के लिए नहीं, ‘पेटी’ के लिए ख़र्च हो रही है?”

इस सवाल का जवाब कोई बच्चा कक्षा में नहीं देगा। पर वह उसे घर तक साथ ले जाएगा — और भूगोल का यही सबसे बड़ा काम है।