कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 19 से 37 · कालांश — 10, हर एक 40 मिनट
इस्तेमाल कैसे करें — हर कालांश की पूरी तैयारी उसके अपने कार्ड में है: किताब के पृष्ठ, स्लाइड, इंटरैक्टिव अध्याय, प्रश्न बैंक और फ़्लैशकार्ड। पहले “एक नज़र में” वाला चित्र और तालिका देखिए, फिर आज के कालांश का कार्ड खोलिए। कार्ड के हिस्से और शब्द, जैसे निकास-पर्ची, “तैयारी” वाली तालिका में समझाए गए हैं।
अध्याय का बड़ा विचार — हमारे चारों ओर की आर्थिक गतिविधियों के लिए किताब पहले ही पृष्ठ पर रास्ता बताती है: “इन्हें समझने का एक तरीका यह है कि कुछ महत्त्वपूर्ण मानदंडों के आधार पर इन्हें विभिन्न समूहों में वर्गीकृत कर दिया जाए।” (पृष्ठ 19)। अध्याय तीन कसौटियों से बाँटता है: कार्य का स्वभाव, रोज़गार की परिस्थितियाँ और स्वामित्व। हर बँटवारा एक अलग सवाल का जवाब देता है। उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक सबसे आगे निकल गया, पर सबसे ज़्यादा लोग अब भी प्राथमिक क्षेत्रक में काम करते हैं, और ज़्यादातर श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं।
हमारी ओर से पूरे अध्याय के लिए तीन सवाल, जो उन्हीं तीन कसौटियों से निकले हैं: यह काम किस तरह का है, किन शर्तों पर होता है, और इसका मालिक कौन है? पहले दिन बच्चे एक काम पर्ची पर लिखेंगे; कालांश 10 में वही पर्चियाँ इन तीन सवालों पर परखी जाएँगी।
एक नज़र में — दस कालांश और उनकी सामग्री
पूरा अध्याय एक कहानी की तरह चलता है। हर तीर पर लिखा है कि अगला कालांश पिछले से क्यों निकलता है।
दस कालांश, एक कहानी
सामग्री के पन्ने: स्लाइड का पाठ · स्लाइड शो · प्रश्न बैंक · फ़्लैशकार्ड · इंटरैक्टिव अध्याय
| कालांश और टॉपिक | पृष्ठ | स्लाइड | इंटरैक्टिव | प्रश्न बैंक | फ़्लैशकार्ड |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 · आर्थिक गतिविधियाँ और तीन क्षेत्रक | 19–21 | शुरू की तीन स्लाइड, फिर “आर्थिक गतिविधियाँ और तीन क्षेत्रक” | शुरुआत, तीन क्षेत्रक | क1–5 · ख1, ख2 · ग1 · घ1 · ङ1 · च1 | 1–15 |
| 2 · तीन क्षेत्रकों की तुलना: कुल उत्पादन की गणना | 22–23 | “तीन क्षेत्रकों की तुलना: कुल उत्पादन की गणना” | कुल उत्पादन की गणना | क6–9 · ख3, ख4 · ग2 · घ2, घ3 · च2 · छ1, छ2 | 16–25 |
| 3 · क्षेत्रकों में ऐतिहासिक परिवर्तन | 23–24 | “क्षेत्रकों में ऐतिहासिक परिवर्तन” | ऐतिहासिक परिवर्तन | क10, क11 | 26–31 |
| 4 · उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक का बढ़ता महत्त्व | 24–25 | “उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक का बढ़ता महत्त्व” | तृतीयक क्षेत्रक का बढ़ता महत्त्व | घ4, घ9 · ङ2 | 32–37 |
| 5 · अधिकांश लोग कहाँ नियोजित हैं: अल्प बेरोज़गारी | 25–27 | “अधिकांश लोग कहाँ नियोजित हैं: अल्प बेरोज़गारी” | लोग कहाँ काम करते हैं | क12–15 · ख5, ख6 · ग3, ग4 · घ5 · ङ3 · च6 · छ3 | 38–50 |
| 6 · अतिरिक्त रोज़गार का सृजन | 27–29 | “अतिरिक्त रोज़गार का सृजन” | अतिरिक्त रोज़गार | क16 · ख7, ख8 · घ6, घ7 · ङ4, ङ5 · च3 · छ6 | 51–62 |
| 7 · संगठित और असंगठित क्षेत्रक | 30–31 | “संगठित और असंगठित क्षेत्रक” | संगठित और असंगठित | क17, क18 · ख9 · ग5 · घ8 · ङ6 · छ4, छ5 | 63–77 |
| 8 · असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का संरक्षण | 31–32 | “असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का संरक्षण” | असंगठित श्रमिकों का संरक्षण | ख10 · ङ7 · च4 | 78–84 |
| 9 · सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक | 33–34 | “सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक” | सार्वजनिक और निजी | क19, क20 · ग6 · घ10 · ङ8 · च5 | 85–93 |
| 10 · सारांश, प्रश्नावली और समापन | 34–37 | “सारांश, प्रश्नावली और समापन” | सार, अभ्यास, परियोजना | तीन नमूना परीक्षा-पत्र, फिर पूरा प्रश्न बैंक | “अंतिम पाँच मिनट” वाली सूची, फिर पूरा डेक |
प्रश्न बैंक के कोड ऐसे पढ़िए: क1 मतलब खण्ड क (वस्तुनिष्ठ प्रश्न) का प्रश्न 1। ख रिक्त स्थान है, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय, च दीर्घ उत्तरीय, और छ संख्यात्मक और तालिका-आधारित प्रश्न। फ़्लैशकार्ड वाले खाने में कार्डों के नंबर हैं।
पढ़ाने से पहले
तैयारी — कार्ड में क्या-क्या है और उसे कैसे तैयार करें
हर कालांश का कार्ड इसी क्रम में चलता है। पहली बार पढ़ा रहे हैं तो यह तालिका एक बार पढ़ लीजिए।
| हिस्सा या औज़ार | यह क्या है | कैसे तैयार करें |
|---|---|---|
| किताब | NCERT की आर्थिक विकास की समझ, कक्षा 10, अध्याय 2 (2026-27 में छपी किताब)। कार्ड में आज के पृष्ठ लिखे हैं। | एक दिन पहले वे पृष्ठ खुद पढ़िए। कार्ड में तिरछे अक्षरों वाली पंक्तियाँ किताब के शब्द हैं; कक्षा में यही पढ़वानी हैं। |
| स्लाइड | इस अध्याय की प्रस्तुति का पाठ: हर स्लाइड पर क्या दिखाना और बोलना है। हर कालांश की स्लाइडें कौन-सी हैं, यह “एक नज़र में” वाली तालिका के “स्लाइड” खाने में लिखा है। | प्रोजेक्टर या स्मार्ट बोर्ड हो तो स्लाइड बनाने की ज़रूरत नहीं: स्लाइड शो खोलिए और पूरे पर्दे पर चलाइए। इंटरनेट का भरोसा न हो तो उसी पन्ने से PDF पहले ही डाउनलोड कर लीजिए। प्रोजेक्टर न हो तो भी कालांश चलेगा; कार्ड के चरण बोर्ड और किताब से हैं। |
| इंटरैक्टिव अध्याय | वेबसाइट पर इस अध्याय का पन्ना: छँटाई वाले खेल, कैलकुलेटर और छोटे सवाल। लॉगिन नहीं चाहिए। कार्ड का लिंक सीधे आज वाले हिस्से पर खुलता है। | कक्षा से पहले लिंक खोलकर देख लीजिए; कहाँ रुकना है, यह कार्ड में लिखा है। पर्दा न हो तो बच्चे इसे घर पर दोहराने के लिए खोल सकते हैं। |
| लक्ष्य | कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी क्या बता पाए। | पढ़ाने से पहले एक बार पढ़िए। निकास-पर्ची का सवाल इसी लक्ष्य को जाँचता है। |
| साथ ले जाइए | कक्षा में ले जाने वाली चीज़ें, जैसे चार्ट पेपर, पर्चियाँ, तालिकाओं की छपी प्रतियाँ। | एक दिन पहले जुटा लीजिए। |
| 40 मिनट | मिनट-दर-मिनट चरण। | समय अंदाज़े से है। कोई चरण लंबा खिंचे तो भी आख़िरी चरण मत छोड़िए; उसी में निकास-पर्ची है। |
| चित्र | डिब्बों और तीरों वाला चित्र, जो किसी उलझी बात को एक नज़र में दिखाता है। | पहले कागज़ पर एक बार बनाकर देखिए। बोर्ड पर ऊपर से नीचे बनाइए: एक डिब्बा, फिर तीर पर लिखा शब्द बोलिए, फिर अगला डिब्बा। हर चित्र के साथ PNG बटन है; उससे चित्र डाउनलोड करके छाप सकते हैं या पर्दे पर दिखा सकते हैं। |
| बोर्ड-कार्य | कालांश के अंत तक बोर्ड पर क्या बना हो। बच्चे इसे कॉपी में उतारते हैं। | कार्ड का चित्र देखकर बोर्ड पर जगह का अंदाज़ा पहले से कर लीजिए। बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जो बात अगले दिनों में काम आनी है, वह कॉपी में या चार्ट पर रहे। |
| यहाँ बच्चे अटकेंगे | आम ग़लतफ़हमियाँ, और कमज़ोर व तेज़ विद्यार्थियों के लिए सुझाव। | पढ़ाने से पहले पढ़ लीजिए, ताकि ग़लतफ़हमी आते ही पहचान सकें। |
| निकास-पर्ची | कालांश के आख़िरी चार-पाँच मिनट में एक-दो छोटे सवाल। हर विद्यार्थी जवाब कागज़ की छोटी पर्ची पर लिखता है और कक्षा से जाते समय आपको दे देता है। इससे उसी दिन पता चल जाता है कि आज की बात कितने बच्चों तक पहुँची। | कॉपी का आधा पन्ना काफ़ी है; सवाल बोर्ड पर लिख दीजिए। पर्चियाँ उसी दिन देखिए। जो बात ज़्यादा बच्चों ने ग़लत लिखी हो, उसे अगले कालांश की शुरुआत में दो मिनट दोहराइए। पर्ची पर अंक मत दीजिए; यह जाँच आपके अपने लिए है। |
| प्रश्न बैंक | वेबसाइट पर इस अध्याय के प्रश्न, उत्तर के साथ, सात खंडों में: क वस्तुनिष्ठ, ख रिक्त स्थान, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय, च दीर्घ उत्तरीय, छ संख्यात्मक और तालिका-आधारित। “क1–5” का मतलब है खंड क के प्रश्न 1 से 5। | गृहकार्य के प्रश्न-संख्याएँ बोर्ड पर लिखिए। जिनके पास फ़ोन नहीं है, उनके लिए वे प्रश्न बोर्ड पर लिख दीजिए या छपवा लीजिए। |
| फ़्लैशकार्ड | दोहराने के लिए छोटे सवाल-जवाब। पन्ने पर हर कार्ड की संख्या (# वाला खाना) लिखी है। | बच्चों को कार्ड-संख्याएँ बता दीजिए। पन्ने पर “आता है / नहीं आता” वाला अभ्यास भी है, जो उसी फ़ोन या कंप्यूटर पर याद रखता है कि कौन-सा कार्ड कब दोहराना है। |
हर कालांश से पहले:
- आज के कार्ड में लिखे किताब के पृष्ठ पढ़िए।
- मिनट-दर-मिनट चरण और चित्र पढ़िए; चित्र एक बार कागज़ पर बनाइए।
- “साथ ले जाइए” वाली चीज़ें जुटाइए, और स्लाइड या इंटरैक्टिव अध्याय इस्तेमाल करना है तो लिंक खोलकर जाँच लीजिए।
- पिछले कालांश की निकास-पर्चियाँ देखिए; जो बात कमज़ोर रही, उसे आज की शुरुआत में दो मिनट दोहराइए।
पढ़ाने का क्रम: पहले अनुमान, फिर किताब का आलेख
यह अध्याय तीन आलेखों और दो तालिकाओं पर टिका है: आलेख 1, 2 और 3, पृष्ठ 31 की श्रमिकों की संख्या वाली तालिका, और पृष्ठ 33 की तालिका 2.4। हर आलेख या तालिका से पहले बच्चों को एक अनुमान लगाने दीजिए, फिर उसे खोलिए। आलेख 1 से पहले बच्चे अंदाज़ा लिखें कि 2017-18 में सबसे ज़्यादा उत्पादन किस क्षेत्रक में होगा। पृष्ठ 31 की तालिका भरने से पहले वे लिखें कि सौ में से कितने श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में होंगे।
इस क्रम को मत तोड़िए। अध्याय का सबसे बड़ा सबक़ कालांश 5 में आता है: उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक आगे निकल गया, पर सबसे ज़्यादा लोग अब भी प्राथमिक क्षेत्रक में काम करते हैं। अगर पहले ही बता दिया कि 2017-18 में भी 44 प्रतिशत लोग प्राथमिक क्षेत्रक में थे, तो “उत्पादन जहाँ, काम भी वहीं” वाला अनुमान कभी बनेगा ही नहीं, और उसी अनुमान का टूटना इस अध्याय का सबसे अच्छा सबक़ है। कालांश 5 में आलेख 3 तभी खोलिए, जब हर समूह आलेख 2 देखकर अपना अनुमान लिख चुका हो।
सामग्री — यह जुटा लीजिए
| # | क्या | किस कालांश में |
|---|---|---|
| 1 | हर विद्यार्थी के लिए एक छोटी पर्ची, और पर्चियाँ रखने के लिए एक लिफ़ाफ़ा | 1 (लिफ़ाफ़ा कालांश 10 में खुलेगा) |
| 2 | एक चार्ट पेपर और मोटा स्केच पेन: तीन खाने, प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक, कक्षा की दीवार पर टाँगने के लिए | 1 (कालांश 10 तक टँगा रहे) |
| 3 | तालिका 2.1 की तीन खाली पंक्तियों की तीन पर्चियाँ, और चौथी पर्ची भरी पंक्ति की | 1 |
| 4 | तीन बड़ी पर्चियाँ: “गेहूँ ₹20 प्रति कि.ग्रा.”, “आटा ₹25 प्रति कि.ग्रा.”, “बिस्कुट के 4 पैकेट ₹80” | 2 |
| 5 | आलेख 1, 2 और 3 और पृष्ठ 31 की तालिका की छपी प्रतियाँ, जहाँ हर बच्चे के पास किताब न हो | 3, 5, 7 |
| 6 | तालिका 2.4 की खाली शक्ल, एक चार्ट पेपर पर | 10 |
कक्षा-व्यवस्था
- बच्चों को 4–5 के समूहों में बैठाइए, पूरे अध्याय भर वही समूह।
- कामों का चार्ट। पहले दिन चार्ट पेपर पर तीन खाने बनाइए: प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक, और पृष्ठ 21 की गतिविधि के चौदह काम छाँटकर उनमें लिखिए; चार्ट कक्षा की दीवार पर टाँगिए। आगे हर कालांश में जो नया काम आए, जैसे लक्ष्मी, डाकिया, शिक्षक, वह भी सही खाने में जुड़ता जाए। बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जो बात दसों दिन दिखनी है, वह बोर्ड पर नहीं, चार्ट पर रहे। चार्ट टाँगना संभव न हो तो उसे मोड़कर पर्चियों के लिफ़ाफ़े के साथ रखिए और ज़रूरत के दिन खोलिए।
- कॉपी का पहला पन्ना। हर विद्यार्थी अध्याय की कॉपी के पहले पन्ने पर तीन कॉलम बनाए: बाँटने का आधार | कौन-से क्षेत्रक | सबसे बड़ा नतीजा। पहली पंक्ति (कार्य का स्वभाव) कालांश 1 में शुरू होगी और उसका तीसरा खाना कालांश 5 में भरेगा; दूसरी पंक्ति (रोज़गार की परिस्थितियाँ) कालांश 7 में, और तीसरी (स्वामित्व) कालांश 9 में।
- बोर्ड हर कालांश में नया। हर कार्ड का “बोर्ड-कार्य” उसी कालांश में बनता है और कॉपी में उतरता है।
अधिगम प्रतिफल
| # | प्रतिफल | कालांश | जाँच |
|---|---|---|---|
| 1 | कार्य के स्वभाव से तीनों क्षेत्रक पहचान पाएगा और तालिका 2.1 से दिखा पाएगा कि वे एक-दूसरे पर निर्भर हैं | 1 | निकास-पर्ची 1, कामों का चार्ट |
| 2 | बता पाएगा कि कुल उत्पादन में संख्या नहीं, मूल्य क्यों जोड़ा जाता है और सिर्फ़ अंतिम वस्तुएँ क्यों गिनी जाती हैं | 2 | निकास-पर्ची 2, पृष्ठ 23 की गतिविधि 2 का गृहकार्य |
| 3 | विकसित देशों में क्षेत्रकों का क्रम बता पाएगा, और आलेख 1 से दोनों वर्षों का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक | 3 | पृष्ठ 24 की गतिविधि |
| 4 | तृतीयक क्षेत्रक के बढ़ने के चार कारण, और सेवा क्षेत्रक के दो तरह के लोग बता पाएगा | 4 | निकास-पर्ची 4, प्रश्न 12 और 13 का गृहकार्य |
| 5 | आलेख 3 पढ़ पाएगा, और लक्ष्मी के उदाहरण से छिपी बेरोज़गारी समझा पाएगा | 5 | निकास-पर्ची 5, प्रश्न 10 और 11 का गृहकार्य |
| 6 | गाँव और शहर में रोज़गार बढ़ाने के किताब के उपाय, और “काम का अधिकार” का मतलब बता पाएगा | 6 | निकास-पर्ची 6, प्रश्न 3 और 17 का गृहकार्य |
| 7 | संगठित और असंगठित क्षेत्रक का भेद बता पाएगा और पृष्ठ 31 की तालिका के खाली खाने भर पाएगा | 7 | तालिका का हिसाब, प्रश्न 5 और 16 का गृहकार्य |
| 8 | बता पाएगा कि असंगठित क्षेत्रक में किन लोगों को किन बातों में संरक्षण चाहिए | 8 | प्रश्न 23 (कक्षा में), प्रश्न 14 और 22 का गृहकार्य |
| 9 | सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक का भेद, और सरकार के ख़र्च के कारण उदाहरण से बता पाएगा | 9 | निकास-पर्ची 9, प्रश्न 4, 20 और 21 का गृहकार्य |
| 10 | पहले दिन की पर्ची वाले काम को तीनों आधारों पर बाँट पाएगा | 10 | पर्चियों वाली चर्चा, तालिका 2.4 |
कालांश-दर-कालांश
कालांश 1 — आर्थिक गतिविधियाँ और तीन क्षेत्रक
किताब — पृष्ठ 19–21 · स्लाइड — शुरू की तीन स्लाइड और “आर्थिक गतिविधियाँ और तीन क्षेत्रक” वाला भाग · इंटरैक्टिव — शुरुआत, तीन क्षेत्रक
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी किसी भी काम को कार्य के स्वभाव से प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक क्षेत्रक में रख पाए, और तालिका 2.1 की किसी एक पंक्ति से बता पाए कि तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
साथ ले जाइए — हर विद्यार्थी के लिए एक पर्ची और एक लिफ़ाफ़ा, कामों वाला चार्ट पेपर और मोटा स्केच पेन, और तालिका 2.1 की चार पर्चियाँ।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · घर के पास का एक काम। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखे: उसके घर या मोहल्ले का कोई एक बड़ा व्यक्ति रोज़ी के लिए क्या काम करता है। किसी का नाम नहीं लिखना है, सिर्फ़ काम। पर्चियाँ लिफ़ाफ़े में रख दीजिए; यह लिफ़ाफ़ा कालांश 10 में खुलेगा।
- 5–10 मिनट · पृष्ठ 19 के चित्र। पृष्ठ 19 के चित्र दिखाइए और हर चित्र पर पूछिए: “यह व्यक्ति क्या कर रहा है? कुछ बना रहा है, उगा रहा है, या किसी का काम कर रहा है?” फिर किताब की यह पंक्ति पढ़वाइए: “इन्हें समझने का एक तरीका यह है कि कुछ महत्त्वपूर्ण मानदंडों के आधार पर इन्हें विभिन्न समूहों में वर्गीकृत कर दिया जाए।” बताइए कि ऐसे समूहों को क्षेत्रक कहते हैं, और आज की कसौटी है कार्य का स्वभाव।
- 10–20 मिनट · तीन क्षेत्रक। पृष्ठ 20 पढ़वाइए और नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए। प्राथमिक क्षेत्रक प्राकृतिक संसाधनों के सीधे उपयोग से उत्पादन करता है, जैसे कपास, दूध, खनिज; इसे कृषि एवं सहायक क्षेत्रक भी कहते हैं। द्वितीयक क्षेत्रक प्राकृतिक उत्पादों से विनिर्माण करता है, जैसे रेशे से सूत और कपड़ा, गन्ने से चीनी और गुड़, मिट्टी से ईंट; इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहते हैं। तृतीयक क्षेत्रक वस्तुएँ नहीं, सेवाएँ देता है, जैसे परिवहन, भण्डारण, संचार, बैंक और व्यापार; इसे सेवा क्षेत्रक भी कहते हैं।
- 20–28 मिनट · चौदह काम, तीन खाने। पृष्ठ 21 की गतिविधि 3 के चौदह काम समूहों में बाँट दीजिए, हर समूह को तीन-चार। समूह चित्र के तीन सवालों से तय करे कि उसका काम किस खाने में जाएगा, और एक विद्यार्थी उसे चार्ट पर लिखे। जहाँ दो समूह असहमत हों, वहाँ उनसे कारण बुलवाइए।
- 28–36 मिनट · तालिका 2.1: एक रुके, तो दूसरा भी रुके। तालिका 2.1 की पहली पंक्ति पढ़वाइए; उसका उत्तर किताब में छपा है: किसान गन्ना बेचने से मना कर दें, तो चीनी मिल बंद हो जाएगी, यानी द्वितीयक क्षेत्रक प्राथमिक पर निर्भर है। बाक़ी तीन पंक्तियों की पर्चियाँ तीन समूहों को दीजिए: कपास बाहर से मँगाना, उर्वरक और पम्पसेट महँगे होना, और ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल। हर समूह अपनी पंक्ति का “यह क्या दिखाता है” वाला खाना बोले।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) मछुआरा और कुम्हार किन क्षेत्रकों में हैं, और क्यों? (2) ट्रांसपोर्टर हड़ताल कर दें, तो किसान पर और शहर के लोगों पर क्या असर होगा?
एक काम, तीन सवाल (चरण 3)
एक काम, तीन सवाल
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर पृष्ठ 21 की गतिविधि 3 की यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। यही चौदह काम कामों वाले चार्ट पर भी जाएँगे। कॉपी के पहले पन्ने पर पहली पंक्ति के दो खाने भी आज भरेंगे: कार्य का स्वभाव | प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक। तीसरा खाना, सबसे बड़ा नतीजा, कालांश 5 में भरेगा।
| प्राथमिक | द्वितीयक | तृतीयक |
|---|---|---|
| फूल की खेती करने वाला, मछुआरा, मधुमक्खी पालक | दर्जी, टोकरी बुनकर, दियासलाई कारखाना में श्रमिक, कुम्हार | दूध-विक्रेता, पुजारी, कूरियर पहुँचाने वाला, महाजन, माली, अंतरिक्ष-यात्री, कॉल सेंटर का कर्मचारी |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- दूध-विक्रेता और माली। दूध-विक्रेता दूध बेचता है, यानी व्यापार करता है, इसलिए तृतीयक। अगर वह ख़ुद पशु पालकर दूध निकालता है, तो वह डेयरी है, यानी प्राथमिक। माली दूसरों के बगीचे की देखभाल की सेवा देता है; अगर वह पौधे उगाकर बेचे, तो प्राथमिक। बच्चों से पूछिए: “यह व्यक्ति असल में क्या करता है?” उत्तर उसी से तय होगा।
- “कपास तो किसान उगाता है, फिर वह प्राकृतिक कैसे?” किताब कहती है कि कपास की बढ़त के लिए हम मुख्य रूप से, पूरी तरह नहीं, वर्षा, धूप और जलवायु पर निर्भर हैं। इसलिए कपास प्राकृतिक उत्पाद है; दूध भी।
- कुछ सेवाएँ उत्पादन में सीधे मदद नहीं करतीं, फिर भी तृतीयक हैं: शिक्षक, डॉक्टर, धोबी, नाई, मोची, वकील, और प्रशासन और लेखा का काम करने वाले लोग।
- विनिर्माण सिर्फ़ कारखाने में नहीं होता। किताब के अनुसार यह कारखाने, कार्यशाला या घर में भी हो सकता है। घर पर टोकरी बुनना भी द्वितीयक है।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “शुरुआत” और “तीन क्षेत्रक” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और जहाँ गेहूँ और बिस्कुट का हिसाब शुरू हो, वहीं रुकिए; वह कालांश 2 का है।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए तीन शब्द काफ़ी हैं: उगाना, बनाना, सेवा देना; हर एक के साथ एक काम।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: अंतरिक्ष-यात्री और कॉल सेंटर का कर्मचारी, दोनों तृतीयक में क्यों हैं, जबकि दोनों का काम बिल्कुल अलग है? (दोनों कोई वस्तु नहीं बनाते, सेवा देते हैं। क्षेत्रक कार्य के स्वभाव से तय होता है, काम कितना कठिन है, इससे नहीं।)
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) मछुआरा प्राथमिक में है, क्योंकि वह प्रकृति से सीधे लेता है; कुम्हार द्वितीयक में, क्योंकि वह मिट्टी से नई वस्तु बनाता है। (2) शहरों में भोजन की कमी होगी और किसान अपनी उपज नहीं बेच पाएँगे; यानी प्राथमिक क्षेत्रक तृतीयक (परिवहन) पर निर्भर है। जिन बच्चों ने (2) में सिर्फ़ शहर लिखा हो, उनके लिए कालांश 2 की शुरुआत में यह पंक्ति एक मिनट दोहराइए। पर्चियों वाला लिफ़ाफ़ा आज नहीं खुलेगा; उसे सँभालकर रखिए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क1–5, ख1, ख2, ग1 और घ1; तेज़ विद्यार्थी ङ1 और च1 भी। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 9 (पृष्ठ 36) कॉपी में; कालांश 10 में जाँच होगी।
- पृष्ठ 21 की गतिविधि के उत्तर: प्रश्न 2: एक ही चीज़ की यात्रा देखिए: भेड़ पालकर ऊन उतारना प्राथमिक है (पशुओं पर, यानी प्रकृति पर निर्भर); ऊन से कंबल या दरी बुनना द्वितीयक है (विनिर्माण); और कंबल को ट्रक से बाज़ार तक ले जाना और दुकानदार का बेचना तृतीयक है (सेवा)। प्रश्न 4: कसौटी कक्षा या पढ़ाई का स्तर है, जो लगभग आयु के साथ चलता है। यह उपयुक्त है, क्योंकि एक स्तर के छात्रों की पढ़ाई, किताबें और ज़रूरतें मिलती-जुलती होती हैं, इसलिए उन्हें साथ पढ़ाना आसान है।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 1–15।
कालांश 2 — तीन क्षेत्रकों की तुलना: कुल उत्पादन की गणना
किताब — पृष्ठ 22–23 · स्लाइड — “तीन क्षेत्रकों की तुलना: कुल उत्पादन की गणना” वाला भाग · इंटरैक्टिव — कुल उत्पादन की गणना
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता पाए कि कुल उत्पादन में वस्तुओं की संख्या नहीं, उनका मूल्य जोड़ा जाता है, कि सिर्फ़ अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ गिनी जाती हैं, और स.घ.उ. की किताब वाली परिभाषा कह पाए।
साथ ले जाइए — तीन बड़ी पर्चियाँ: “गेहूँ ₹20 प्रति कि.ग्रा.”, “आटा ₹25 प्रति कि.ग्रा.” और “बिस्कुट के 4 पैकेट ₹80”।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · कारें और कीलें। बोर्ड पर लिखिए: एक कारखाने में कुछ कारें बनीं, दूसरे में ढेर सारी कीलें। पूछिए: “दोनों का कुल उत्पादन कितना हुआ?” बच्चे गिनती जोड़ने लगेंगे। बताइए कि किताब भी पूछती है कि कारों, कम्प्यूटरों, कीलों और फ़र्नीचर की संख्या आपस में कैसे जोड़ी जाए, और कहती है कि ऐसा जोड़ बेतुका है।
- 5–12 मिनट · संख्या नहीं, मूल्य। पृष्ठ 22 पढ़वाइए। अर्थशास्त्री संख्या की जगह मूल्य जोड़ते हैं। बच्चे बोर्ड पर दोनों हिसाब ख़ुद करें: 10,000 कि.ग्रा. गेहूँ ₹20 प्रति कि.ग्रा. पर बिके, तो मूल्य ₹2,00,000; 5000 नारियल ₹15 प्रति नारियल पर बिकें, तो ₹75,000।
- 12–22 मिनट · गेहूँ, आटा, बिस्कुट। तीन विद्यार्थियों को तीनों पर्चियाँ देकर क्रम से खड़ा कीजिए: किसान आटा-मिल को गेहूँ बेचता है, मिल बिस्कुट कंपनी को आटा, और कंपनी आटे में चीनी और तेल मिलाकर चार पैकेट बनाती है और उपभोक्ताओं को ₹80 में बेचती है। पूछिए: “कोई ₹20, ₹25 और ₹80, तीनों जोड़ दे, तो क्या ग़लत होगा?” किताब का उत्तर: ₹80 में आटे के ₹25 पहले से शामिल हैं। गेहूँ और आटा मध्यवर्ती वस्तुएँ हैं, बिस्कुट अंतिम वस्तु। मध्यवर्ती वस्तुएँ अलग से गिनें, तो एक ही मूल्य कई बार गिना जाएगा।
- 22–30 मिनट · हर चरण में कितना जुड़ा। पृष्ठ 23 की गतिविधि 3 कहती है कि शिक्षक के साथ चर्चा कीजिए। हमारी ओर से एक मान्यता लेकर हिसाब कीजिए: मान लीजिए चारों पैकेट 1 कि.ग्रा. आटे से बने, और चीनी-तेल को अभी छोड़ दें। किसान ₹20 जोड़ता है, मिल ₹25 − ₹20 = ₹5, और बिस्कुट कंपनी ₹80 − ₹25 = ₹55। कुल ₹20 + ₹5 + ₹55 = ₹80, यानी ठीक अंतिम वस्तु का मूल्य। इसीलिए सिर्फ़ अंतिम वस्तु गिनना काफ़ी है।
- 30–36 मिनट · स.घ.उ. और जी.वी.ए. पृष्ठ 23 पढ़वाइए और नीचे का चित्र बनाइए। स.घ.उ. की परिभाषा: “यह किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य है।” साथ में: “स. घ. उ. अर्थव्यवस्था की विशालता प्रदर्शित करता है।” भारत में इसे केन्द्र सरकार का एक मंत्रालय मापता है, राज्यों और केन्द्र शासित क्षेत्रों के सरकारी विभागों की मदद से। फिर जी.वी.ए.: “जी.वी.ए. करों तथा सब्सिडी के लिए समायोजन के बाद अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रकों के योगदान को मापता है।” दोनों का पूरा अंतर बच्चे ऊँची कक्षाओं में पढ़ेंगे; आज इतना काफ़ी है।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) स.घ.उ. गिनते समय गेहूँ और आटे का मूल्य अलग से क्यों नहीं जोड़ते? (2) इस वाक्य में दो ग़लतियाँ ढूँढिए: “स.घ.उ. के लिए हम पिछले पाँच वर्षों में बनी वस्तुओं की संख्या जोड़ते हैं।”
स.घ.उ. गिनने के चार नियम (चरण 5)
स.घ.उ. गिनने के चार नियम
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। विक्रेता, दाम, और कौन-सी वस्तु मध्यवर्ती है, यह किताब के उदाहरण से है; किताब प्रति कि.ग्रा. दाम देती है, इसलिए “1 कि.ग्रा.” लिखना और आख़िरी कॉलम हमारी ओर से हैं, चरण 4 की मान्यता पर।
| चरण | कौन बेचता है | क्या | मूल्य | मध्यवर्ती या अंतिम | इस चरण में जुड़ा मूल्य |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | किसान | गेहूँ, 1 कि.ग्रा. | ₹20 | मध्यवर्ती | ₹20 |
| 2 | आटा-मिल | आटा, 1 कि.ग्रा. | ₹25 | मध्यवर्ती | ₹5 |
| 3 | बिस्कुट कंपनी | बिस्कुट के 4 पैकेट | ₹80 | अंतिम | ₹55 |
| स.घ.उ. में सिर्फ़ ₹80 | कुल ₹80 |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “ज़्यादा चीज़ें, मतलब ज़्यादा उत्पादन।” संख्या से तुलना नहीं होती: एक कार और एक कील बराबर नहीं। मूल्य ही सबको एक पैमाने पर लाता है।
- बच्चे गेहूँ, आटा और बिस्कुट, तीनों का मूल्य जोड़ देते हैं। उनसे पूछिए: ₹80 वाले बिस्कुट में आटा कहाँ गया? वह उसी में है।
- पृष्ठ 23 पर छपा है “(माध्यमिक, द्वितीयक और तृतीयक)”। यहाँ “प्राथमिक” होना चाहिए; किताब की छपाई में यह शब्द बदल गया है। बच्चों से कहिए कि वहाँ प्राथमिक पढ़ें।
- स.घ.उ. और जी.वी.ए. का पूरा अंतर अभी मत खोलिए। किताब ख़ुद कहती है कि इसकी और जानकारी उच्चतर कक्षाओं में मिलेगी। बस इतना याद रहे कि आलेख 1 और 2 जी.वी.ए. दिखाते हैं।
- इंटरैक्टिव अध्याय में “कुल उत्पादन की गणना” वाला हिस्सा चलाइए; विकसित देशों के इतिहास से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो बातें काफ़ी हैं: संख्या नहीं, मूल्य; और सिर्फ़ अंतिम वस्तु।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: बिस्कुट कंपनी ने चीनी और तेल भी ख़रीदे; उनका मूल्य स.घ.उ. में कहाँ गिना गया? (बिस्कुट के ₹80 में ही; चीनी और तेल भी आटे की तरह मध्यवर्ती वस्तुएँ हैं।)
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) क्योंकि अंतिम वस्तु बिस्कुट के ₹80 में आटे के ₹25 पहले से शामिल हैं; अलग से जोड़ें, तो एक ही मूल्य कई बार गिना जाएगा। (2) संख्या नहीं, मूल्य जोड़ते हैं; और पाँच वर्षों का नहीं, किसी एक विशेष वर्ष का उत्पादन। जो विद्यार्थी तीसरी ग़लती भी पकड़े, कि सभी वस्तुएँ नहीं, सिर्फ़ अंतिम वस्तुएँ, उसकी पर्ची कक्षा में पढ़कर सुनाइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क6–9, ख3, ख4, ग2, घ2 और घ3; तेज़ विद्यार्थी च2, छ1 और छ2 भी। साथ में पृष्ठ 23 की गतिविधि 2, यानी गड़बड़ वाक्यांश को सही करना, कॉपी में; कालांश 3 की शुरुआत में दो-तीन बच्चे पढ़कर सुनाएँगे।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 16–25।
कालांश 3 — क्षेत्रकों में ऐतिहासिक परिवर्तन
किताब — पृष्ठ 23–24 · स्लाइड — “क्षेत्रकों में ऐतिहासिक परिवर्तन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — ऐतिहासिक परिवर्तन
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी विकसित देशों में क्षेत्रकों का क्रम बता पाए, और आलेख 1 से बता पाए कि 1977–78 और 2017–18 में भारत का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक कौन-सा था।
साथ ले जाइए — आलेख 1 की छपी प्रतियाँ, जहाँ हर बच्चे के पास किताब न हो, और हर समूह के लिए अनुमान लिखने की एक पर्ची।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पिछली बार का गड़बड़ वाक्यांश। दो-तीन बच्चे अपना सही किया हुआ वाक्यांश पढ़ें। फिर पूछिए: “आपके दादा-दादी के समय आपके गाँव या मोहल्ले के ज़्यादातर लोग क्या काम करते थे?”
- 5–15 मिनट · तीन अवस्थाएँ। पृष्ठ 23 का “क्षेत्रकों में ऐतिहासिक परिवर्तन” पढ़वाइए और नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए। शुरुआत में प्राथमिक क्षेत्रक सबसे महत्त्वपूर्ण था। लंबे समय, सौ वर्षों से ज़्यादा, के बाद कारखाने फैले और द्वितीयक क्षेत्रक कुल उत्पादन और रोज़गार, दोनों में सबसे आगे हो गया; किताब याद दिलाती है कि लोगों को कारखानों में काम के लिए मजबूर भी किया गया, जैसा बच्चों ने इतिहास में पढ़ा है। पिछले 100 वर्षों में विकसित देशों में बदलाव द्वितीयक से तृतीयक की ओर हुआ।
- 15–20 मिनट · पहले अनुमान। आलेख 1 खोलने से पहले हर समूह पर्ची पर लिखे: “2017–18 में भारत में सबसे ज़्यादा उत्पादन किस क्षेत्रक में हुआ होगा?” पर्चियाँ आपके पास रहें।
- 20–32 मिनट · आलेख 1 पढ़ना। पृष्ठ 24 का आलेख 1 खोलिए। पहले उसकी बनावट पढ़वाइए: दो दंड, 1977–78 और 2017–18; बाएँ अक्ष पर रुपये (करोड़); हर दंड में तीन रंग, तीनों क्षेत्रकों के। फिर पृष्ठ 24 की गतिविधि के प्रश्न 1 और 2 कक्षा में हल कीजिए, और समूहों के अनुमान पढ़कर देखिए कि किसका अनुमान सही निकला।
- 32–36 मिनट · भारत भी उसी रास्ते पर? पृष्ठ 24 के हाशिये का प्रश्न पूछिए: 1977–78 और 2017–18 की तुलना क्या दिखाती है? कुल उत्पादन बहुत बढ़ा, तीनों क्षेत्रकों का बढ़ा, पर सबसे ज़्यादा तृतीयक का। फिर एक सवाल खुला छोड़ दीजिए: “विकसित देशों में उत्पादन के साथ रोज़गार भी बदला। क्या भारत में भी ऐसा हुआ?” इसका जवाब कालांश 5 में आएगा; आज बताइए नहीं।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) विकसित देशों में कौन-सा क्षेत्रक किस क्रम में सबसे महत्त्वपूर्ण रहा? (2) आलेख 1 के अनुसार 2017–18 में भारत का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक कौन-सा था, और उसने किसकी जगह ली?
विकसित देशों की तीन अवस्थाएँ (चरण 2)
विकसित देशों की तीन अवस्थाएँ
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर पृष्ठ 24 की गतिविधि की यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। चौथे प्रश्न का उत्तर आलेख पढ़कर लगाया गया अनुमान है, क्योंकि दंडों के सिरों पर मान नहीं छपे; बाएँ अक्ष पर सिर्फ़ पैमाना है।
| प्रश्न (पृष्ठ 24) | उत्तर | आलेख में कैसे दिखता है |
|---|---|---|
| 1977–78 में सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक | प्राथमिक | उस दंड में प्राथमिक का हिस्सा सबसे बड़ा है |
| 2017–18 में सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक | तृतीयक, जिसने प्राथमिक की जगह ली | उस दंड में तृतीयक का हिस्सा सबसे बड़ा है |
| किस क्षेत्रक में सबसे ज़्यादा संवृद्धि हुई | तृतीयक | दोनों दंडों के बीच तृतीयक का हिस्सा सबसे ज़्यादा बढ़ा |
| 2017–18 में भारत का जी.डी.पी. | लगभग 1,20,00,000 करोड़ रुपये, आलेख पढ़कर | 2017–18 वाले दंड का सिरा बाएँ अक्ष की 12000000 वाली रेखा पर है; यह संख्या छपी नहीं, इसलिए बोर्ड पर “लगभग, आलेख पढ़कर” साथ लिखिए |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- पृष्ठ 24 की गतिविधि का प्रश्न 3 “तीस वर्षों” कहता है। आलेख 1977–78 से 2017–18 तक का है, यानी चालीस वर्ष, और उसी पृष्ठ का पाठ भी चालीस वर्ष कहता है। बच्चों से कहिए कि प्रश्न में चालीस पढ़ें; उत्तर वही रहेगा, तृतीयक।
- आलेख 1 के दंडों के सिरों पर मान नहीं छपे, सिर्फ़ बाएँ अक्ष पर पैमाना है। बच्चे कोई सटीक संख्या लिखें, तो पूछिए कि वह कहाँ छपी है। जी.डी.पी. वाला उत्तर हमेशा “लगभग, आलेख पढ़कर” लिखवाइए।
- आलेख 1 रुपये (करोड़) में जी.वी.ए. दिखाता है, हिस्सेदारी नहीं। प्रतिशत हिस्सेदारी आलेख 2 में है, जो कालांश 5 में खुलेगा। दोनों को मिलने मत दीजिए।
- बच्चे मान लेते हैं कि भारत में रोज़गार भी उत्पादन के साथ बदल गया। आज इसे न सुधारिए, न पक्का कीजिए; चरण 5 का सवाल खुला रहे। कालांश 5 का सबक़ इसी पर टिका है।
- इंटरैक्टिव अध्याय में “ऐतिहासिक परिवर्तन” वाला हिस्सा चलाइए; जहाँ तृतीयक क्षेत्रक के बढ़ने के कारण शुरू हों, वहीं रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए क्रम के तीन शब्द काफ़ी हैं: खेत, कारखाना, सेवा।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: 1977–78 से 2017–18 के बीच प्राथमिक क्षेत्रक का उत्पादन भी बढ़ा; फिर वह सबसे बड़ा उत्पादक क्यों नहीं रहा? (क्योंकि तृतीयक का उत्पादन उससे कहीं ज़्यादा बढ़ा; किताब कहती है कि सबसे अधिक वृद्धि तृतीयक क्षेत्रक में हुई।)
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) पहले प्राथमिक, फिर द्वितीयक, और पिछले 100 वर्षों में तृतीयक। (2) तृतीयक क्षेत्रक; उसने प्राथमिक की जगह ली। जिन बच्चों ने (2) में द्वितीयक लिखा हो, उन्हें कालांश 4 की शुरुआत में आलेख 1 एक बार फिर दिखाइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क10 और क11। साथ में पृष्ठ 23 की गतिविधि का प्रश्न 1 और पृष्ठ 24 की गतिविधि के प्रश्न 1–3 कॉपी में; कालांश 10 में जाँच होगी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 26–31।
कालांश 4 — उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक का बढ़ता महत्त्व
किताब — पृष्ठ 24–25 · स्लाइड — “उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक का बढ़ता महत्त्व” वाला भाग · इंटरैक्टिव — तृतीयक क्षेत्रक का बढ़ता महत्त्व
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी किताब के चार कारण बता पाए कि भारत में तृतीयक क्षेत्रक इतना महत्त्वपूर्ण क्यों हो गया, और यह भी कि सेवा क्षेत्रक किन दो तरह के लोगों को काम देता है।
साथ ले जाइए — चार पर्चियाँ, हर एक पर एक कारण का नाम: बुनियादी सेवाएँ, कृषि और उद्योग का विकास, आय का बढ़ना, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी; और कामों वाला चार्ट।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · अपने इलाक़े की नई सेवाएँ। पिछली निकास-पर्ची में जिन्होंने द्वितीयक लिखा था, उनके लिए आलेख 1 एक बार फिर दिखाइए। फिर पूछिए: “आपके गाँव या क़स्बे में पिछले कुछ सालों में कौन-सी नई दुकान या सेवा शुरू हुई है?” चार-पाँच जवाब बोर्ड के कोने में लिख लीजिए; चरण 4 में काम आएँगे।
- 5–15 मिनट · पहला और दूसरा कारण। पृष्ठ 24 का “उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक का बढ़ता महत्त्व” पढ़वाइए और नीचे के चित्र की पहली पंक्ति बनाइए। पहला कारण: हर देश को बुनियादी सेवाएँ चाहिए, जैसे अस्पताल, शैक्षिक संस्थाएँ, डाक एवं तार सेवा, थाना, कचहरी, ग्रामीण प्रशासनिक कार्यालय, नगर निगम, रक्षा, परिवहन, बैंक और बीमा कंपनी; किसी विकासशील देश में इनके प्रबंधन की ज़िम्मेदारी सरकार उठाती है। दूसरा कारण: कृषि और उद्योग के विकास से परिवहन, व्यापार और भण्डारण जैसी सेवाओं का विकास होता है; प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक जितना बढ़ेंगे, ऐसी सेवाओं की माँग उतनी ही बढ़ेगी।
- 15–22 मिनट · तीसरा और चौथा कारण। पृष्ठ 25 पढ़वाइए। तीसरा कारण: आय बढ़ने पर कुछ लोग रेस्तरां, पर्यटन, शॉपिंग, निजी अस्पताल, निजी विद्यालय और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सेवाएँ माँगने लगते हैं; किताब कहती है कि यह बदलाव नगरों में, ख़ासकर बड़े नगरों में, दिखता है। चौथा कारण: सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित कुछ नई सेवाएँ ज़रूरी हो गई हैं, और उनका उत्पादन तेज़ी से बढ़ रहा है।
- 22–30 मिनट · कौन-सी सेवा, कौन-सा कारण। चारों पर्चियाँ चार समूहों को दीजिए। हर समूह चरण 1 की सूची से, या अपने इलाक़े से, दो सेवाएँ चुने और बताए कि वे उसकी पर्ची वाले कारण से क्यों बढ़ीं; बाक़ी समूह जाँचें। जो सेवा पक्की हो जाए, वह कामों वाले चार्ट के तृतीयक खाने में जुड़ जाए।
- 30–36 मिनट · पर सभी सेवाएँ एक जैसी नहीं बढ़ रहीं। पृष्ठ 25 का आख़िरी अनुच्छेद पढ़वाइए: “सेवा क्षेत्रक की सभी सेवाओं में समान रूप से संवृद्धि नहीं हो रही है।” एक ओर सीमित संख्या में ऐसी सेवाएँ हैं, जिनमें बहुत कुशल और शिक्षित श्रमिकों को रोज़गार मिलता है। दूसरी ओर बहुत बड़ी संख्या में लोग छोटी दुकानों, मरम्मत और परिवहन जैसी सेवाओं में लगे हैं, जो मुश्किल से गुज़ारा कर पाते हैं, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा अवसर नहीं। चित्र की आख़िरी पंक्ति बनाइए और पूछिए: चरण 4 वाली सेवाओं में से कौन-सी किस ओर की हैं?
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) तृतीयक क्षेत्रक के बढ़ने के चार कारणों में से कोई दो लिखिए, हर एक के साथ एक सेवा। (2) सही या ग़लत, कारण के साथ: “तृतीयक क्षेत्रक बढ़ रहा है, इसलिए सेवा क्षेत्रक में काम करने वाले सभी लोगों की आय अच्छी है।”
चार कारण, पर दो तरह की सेवाएँ (चरण 2–5)
चार कारण, पर दो तरह की सेवाएँ
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। पहले दो कॉलम किताब से हैं; तीसरा कॉलम चरण 4 में समूह भरेंगे।
| कारण | किताब के उदाहरण | हमारे इलाक़े की सेवा |
|---|---|---|
| बुनियादी सेवाएँ | अस्पताल, शैक्षिक संस्थाएँ, डाक, थाना, कचहरी, बैंक, बीमा | |
| कृषि और उद्योग का विकास | परिवहन, व्यापार, भण्डारण | |
| आय का बढ़ना | रेस्तरां, पर्यटन, शॉपिंग, निजी अस्पताल, निजी विद्यालय, व्यावसायिक प्रशिक्षण | |
| सूचना और संचार प्रौद्योगिकी | इन पर आधारित नई सेवाएँ |
तालिका के नीचे एक पंक्ति: सभी सेवाएँ एक जैसी नहीं बढ़ रहीं; एक ओर कुशल और शिक्षित श्रमिक, दूसरी ओर छोटी दुकान, मरम्मत और परिवहन में मुश्किल से गुज़ारा करने वाले।
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “तृतीयक सबसे बड़ा उत्पादक है, तो सबसे ज़्यादा लोग भी उसी में काम करते होंगे।” आज कई बच्चे यह कहेंगे। इसे न सुधारिए, न पक्का कीजिए; कालांश 5 में आलेख 3 इसका जवाब देगा।
- “बुनियादी सेवाएँ तो सब सरकारी होती हैं।” किताब इतना ही कहती है कि किसी विकासशील देश में इनके प्रबंधन की ज़िम्मेदारी सरकार उठाती है। तीसरे कारण में निजी अस्पताल और निजी विद्यालय भी हैं। सरकारी और निजी का भेद कालांश 9 में आएगा।
- दूसरा कारण उलटा समझ लेते हैं, मानो सेवाएँ खेती और उद्योग की जगह ले रही हों। किताब कहती है कि खेती और उद्योग बढ़ते हैं, तभी परिवहन, व्यापार और भण्डारण की माँग बढ़ती है।
- “सेवा क्षेत्रक बढ़ा, यानी सब सेवाएँ बढ़ीं।” पृष्ठ 25 के अनुसार सेवा क्षेत्रक के कुछ ही भागों का महत्त्व बढ़ रहा है।
- इंटरैक्टिव अध्याय में “तृतीयक क्षेत्रक का बढ़ता महत्त्व” वाला हिस्सा चलाइए; “लोग कहाँ काम करते हैं” से पहले रुकिए, क्योंकि वहाँ रोज़गार के आँकड़े हैं, जो कालांश 5 में अनुमान के बाद खुलने हैं।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए चार शब्द काफ़ी हैं: ज़रूरत, खेती और कारखाना, आय, नई तकनीक; हर एक के साथ एक सेवा।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: किसी साल गन्ने की बहुत अच्छी फसल हो, तो किन सेवाओं की माँग बढ़ेगी? (परिवहन, ताकि गन्ना चीनी मिल तक पहुँचे, और व्यापार; यही दूसरा कारण है।)
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) कोई दो: बुनियादी सेवाएँ (अस्पताल), कृषि और उद्योग का विकास (परिवहन), आय का बढ़ना (रेस्तरां), सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (उन पर आधारित नई सेवाएँ)। (2) ग़लत; सभी सेवाओं में समान संवृद्धि नहीं हो रही, और बहुत बड़ी संख्या में लोग छोटी दुकानों, मरम्मत और परिवहन में मुश्किल से गुज़ारा करते हैं। जिन बच्चों ने (2) को सही लिखा हो, उनके साथ कालांश 5 के शहर वाले चरण में यह बात फिर उठाइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के घ4 और घ9; तेज़ विद्यार्थी ङ2 भी। साथ में प्रश्नावली के प्रश्न 12 और 13 (पृष्ठ 37) कॉपी में; प्रश्न 12 का उत्तर अभी उत्पादन वाली बातों से लिखिए, रोज़गार वाला बिंदु कालांश 5 के बाद जुड़ेगा। कालांश 10 में जाँच होगी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 32–37।
कालांश 5 — अधिकांश लोग कहाँ नियोजित हैं: अल्प बेरोज़गारी
किताब — पृष्ठ 25–27 · स्लाइड — “अधिकांश लोग कहाँ नियोजित हैं: अल्प बेरोज़गारी” वाला भाग · इंटरैक्टिव — लोग कहाँ काम करते हैं
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी आलेख 3 से बता पाए कि 2017–18 में भी सबसे ज़्यादा लोग प्राथमिक क्षेत्रक में काम करते थे, जबकि जी.वी.ए. में उसका योगदान लगभग एक-छठा ही है, और लक्ष्मी के उदाहरण से छिपी हुई बेरोज़गारी समझा पाए।
साथ ले जाइए — आलेख 2 और 3 की छपी प्रतियाँ, जहाँ हर बच्चे के पास किताब न हो, और हर समूह के लिए अनुमान लिखने की एक पर्ची।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · कालांश 3 का खुला सवाल। बोर्ड पर फिर लिखिए: “विकसित देशों में उत्पादन के साथ रोज़गार भी बदला। क्या भारत में भी ऐसा हुआ?” बताइए कि आज इसका जवाब मिलेगा, पर पहले हर समूह अनुमान लगाएगा।
- 5–12 मिनट · आलेख 2, फिर अनुमान। पृष्ठ 25 का “अधिकांश लोग कहाँ नियोजित हैं?” शुरू कीजिए। आलेख 2 जी.वी.ए. में तीनों क्षेत्रकों की प्रतिशत हिस्सेदारी दिखाता है। उसके दंडों पर मान नहीं छपे, इसलिए बात शब्दों में कहिए: 1977–78 में प्राथमिक का हिस्सा आधे से थोड़ा कम था; 2017–18 तक वह बहुत घट गया और तृतीयक सबसे आगे निकल गया। अब हर समूह पर्ची पर लिखे: “2017–18 में सौ में से कितने लोग प्राथमिक क्षेत्रक में काम करते होंगे?” हर समूह का अनुमान लिखे जाने से पहले आलेख 3 मत खोलिए।
- 12–20 मिनट · आलेख 3 खोलिए। आलेख 3 रोज़गार में हिस्सेदारी दिखाता है, और इस पर मान छपे हैं: 1977–78 में प्राथमिक 71, द्वितीयक 11, तृतीयक 18; 2017–18 में 44, 25 और 31 प्रतिशत। समूहों के अनुमान पढ़कर देखिए कि कौन कितना दूर था। किताब की बात: स.घ.उ. में क्षेत्रकों की हिस्सेदारी बदली, पर रोज़गार में वैसा बदलाव नहीं हुआ; आज भी प्राथमिक क्षेत्रक सबसे बड़ा नियोक्ता है। कारण: द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक में रोज़गार के पर्याप्त अवसर नहीं बने। उद्योग में रोज़गार लगभग 3 गुना ही बढ़ा, और “सेवा क्षेत्रक में उत्पादन में 14 गुना वृद्धि हुई, परन्तु रोज़गार में 5 गुना से भी कम वृद्धि हुई।” फिर पृष्ठ 27 की गतिविधि 1 वाली तालिका मिलकर भरिए (बोर्ड-कार्य देखिए)।
- 20–30 मिनट · लक्ष्मी का खेत। पाँच विद्यार्थियों को आगे बुलाइए; ये लक्ष्मी के परिवार के पाँच सदस्य हैं। लक्ष्मी छोटी किसान है; उसके पास दो हेक्टेयर असिंचित भूमि है, जो सिर्फ़ वर्षा पर निर्भर है, और वह ज्वार और अरहर उगाती है। पाँचों साल भर उसी खेत पर काम करते हैं, क्योंकि कहीं और काम नहीं। अब एक विद्यार्थी भूस्वामी सुखराम बने और दो सदस्यों को अपनी ज़मीन पर काम के लिए ले जाए। पूछिए: “क्या लक्ष्मी के खेत का काम रुका?” किताब का उत्तर: नहीं, खेत के उत्पादन पर असर नहीं पड़ता, और परिवार को मज़दूरी से अतिरिक्त आय होती है। हर कोई काम कर रहा था, पर किसी को पूरा रोज़गार नहीं था; उनका श्रम-प्रयास बँटा हुआ था। “इस प्रकार की अल्प बेरोज़गारी को छिपी हुई बेरोज़गारी कहते हैं”; इसे प्रच्छन्न बेरोज़गारी भी कहते हैं। जिनके पास कोई काम ही नहीं और जो बेकार बैठे हैं, उनकी बेरोज़गारी खुली बेरोज़गारी है। नीचे का चित्र यहीं बनाइए।
- 30–36 मिनट · शहर में भी। पृष्ठ 26 का आख़िरी अनुच्छेद पढ़वाइए। शहरों में सेवा क्षेत्रक में हज़ारों अनियत श्रमिक रोज़ काम खोजते हैं, जैसे प्लम्बर, पेन्टर और मरम्मत करने वाले; कई को रोज़ काम नहीं मिलता। सड़कों पर ठेला खींचने या चीज़ें बेचने वाले लोग, “जहाँ वे पूरा दिन बिता देते हैं, परन्तु बहुत कम कमा पाते हैं।” कालांश 4 की “दूसरी ओर” वाली सेवाएँ याद दिलाइए। फिर पृष्ठ 27 की गतिविधि का प्रश्न 2 कक्षा में हल कीजिए; सही उत्तर है (स), अपनी क्षमता से कम काम कर रहे हैं।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) 2017–18 में सबसे ज़्यादा लोग किस क्षेत्रक में काम करते थे, कितने प्रतिशत, और जी.वी.ए. में उस क्षेत्रक का योगदान कितना था? (2) लक्ष्मी के परिवार के दो सदस्य सुखराम के खेत पर काम करने लगें, तो लक्ष्मी के खेत के उत्पादन पर क्या असर होगा, और इससे क्या पता चलता है?
खुली और छिपी बेरोज़गारी (चरण 4)
खुली और छिपी बेरोज़गारी
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर पृष्ठ 27 की गतिविधि 1 वाली तालिका भरी हुई बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। जी.वी.ए. वाली पंक्ति शब्दों में है, क्योंकि आलेख 2 पर मान नहीं छपे; रोज़गार वाली पंक्ति आलेख 3 पर छपी है। कॉपी के पहले पन्ने पर पहली पंक्ति का तीसरा खाना भी आज भरिए: उत्पादन में तृतीयक सबसे आगे, पर सबसे ज़्यादा लोग प्राथमिक में।
| प्राथमिक क्षेत्रक की हिस्सेदारी | 1977–78 | 2017–18 |
|---|---|---|
| सकल मूल्य वर्धित (जी.वी.ए.) में | आधे से थोड़ा कम, आलेख 2 पढ़कर | लगभग एक-छठा (पृष्ठ 26) |
| रोज़गार में | 71% | 44% |
तालिका के नीचे गतिविधि का उत्तर: चालीस वर्षों में जी.वी.ए. में प्राथमिक क्षेत्रक का हिस्सा आधे से थोड़ा कम से घटकर लगभग एक-छठा रह गया, पर रोज़गार में 71 से 44 प्रतिशत ही हुआ। 2017–18 में भी सबसे ज़्यादा लोग इसी क्षेत्रक में हैं, जबकि उत्पादन में इसका हिस्सा छोटा है।
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- पृष्ठ 26 पर छपा है “आधे से अधिक श्रमिक”। आलेख 3 में 2017–18 का आँकड़ा 44 प्रतिशत है, जो आधे से कम है। बच्चों से कहिए कि आँकड़ा आलेख 3 से लें और लिखें: “सबसे ज़्यादा, 44 प्रतिशत”।
- पृष्ठ 25 के पाठ में “वर्ष 2003” भी लिखा है, पर आलेख 3 में सिर्फ़ 1977–78 और 2017–18 के दंड हैं। 2003 का कोई आँकड़ा किताब में नहीं है; बच्चे उसे न खोजें।
- आलेख 2 और 3 एक जैसे दिखते हैं: वही रंग, वही दो साल। पर आलेख 2 जी.वी.ए. में हिस्सा दिखाता है और आलेख 3 रोज़गार में। हर बार पहले शीर्षक पढ़वाइए।
- “छिपी बेरोज़गारी मतलब आलसी लोग।” नहीं; लक्ष्मी का परिवार साल भर मेहनत करता है, बस खेत पर काम पाँच लोगों लायक़ नहीं। गतिविधि के प्रश्न 2 के विकल्प (अ) और (ब) इसी ग़लतफ़हमी के जाल हैं।
- “अल्प बेरोज़गारी सिर्फ़ गाँव में होती है।” किताब शहर के अनियत श्रमिकों का उदाहरण भी देती है।
- इंटरैक्टिव अध्याय में “लोग कहाँ काम करते हैं” वाला हिस्सा चरण 2 के अनुमान लिखे जाने के बाद ही खोलिए; जहाँ रोज़गार बढ़ाने के उपाय शुरू हों, वहीं रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक वाक्य और एक उदाहरण काफ़ी है: सब काम पर, फिर भी काम कम; और लक्ष्मी का खेत।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: 1977–78 से 2017–18 के बीच रोज़गार में प्राथमिक क्षेत्रक का जो हिस्सा घटा, वह किन क्षेत्रकों में गया? (दोनों में, लगभग बराबर: द्वितीयक 11 से 25 और तृतीयक 18 से 31 प्रतिशत।)
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) प्राथमिक क्षेत्रक, 44 प्रतिशत; जी.वी.ए. में उसका योगदान लगभग एक-छठा। (2) खेत के उत्पादन पर कोई असर नहीं होगा, और मज़दूरी से परिवार की आय बढ़ेगी; यानी वे दो लोग खेत पर ज़रूरी नहीं थे, परिवार में छिपी हुई बेरोज़गारी थी। जिन बच्चों ने (1) में “आधे से अधिक” लिखा हो, उन्हें कालांश 6 की शुरुआत में आलेख 3 एक बार फिर दिखाइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क12–15, ख5, ख6, ग3, ग4 और घ5; तेज़ विद्यार्थी ङ3, च6 और छ3 भी। साथ में प्रश्नावली के प्रश्न 10 और 11 (पृष्ठ 36) कॉपी में, और प्रश्न 12 के उत्तर में रोज़गार वाला बिंदु जोड़िए; कालांश 10 में जाँच होगी। तेज़ विद्यार्थी प्रश्न 24 (पृष्ठ 37) भी करें: प्रश्न में “वर्ष 2000 एवं 2013” छपा है, पर तालिका 2001–02 और 2021–22 की है, इसलिए गणना तालिका के सालों के लिए कीजिए।
- पृष्ठ 27 की गतिविधि, प्रश्न 3 और 4 के उत्तर: प्रश्न 3: विकसित देशों में उत्पादन और रोज़गार, दोनों तृतीयक की ओर गए। भारत में उत्पादन गया, रोज़गार नहीं: 2017–18 में भी 44 प्रतिशत लोग प्राथमिक क्षेत्रक में थे। वांछित था कि द्वितीयक और तृतीयक में इतने रोज़गार बनते कि खेती से लोग वहाँ जा पाते। प्रश्न 4: क्योंकि यह दिखती नहीं, फिर भी किसी को पूरा काम और पूरी आय नहीं मिलती। लक्ष्मी जैसे लाखों किसान हैं। ऐसे कुछ लोगों को कहीं और ठीक काम मिले, तो खेत का उत्पादन नहीं घटेगा और परिवार की आय बढ़ेगी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 38–50।
कालांश 6 — अतिरिक्त रोज़गार का सृजन
किताब — पृष्ठ 27–29 · स्लाइड — “अतिरिक्त रोज़गार का सृजन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — अतिरिक्त रोज़गार
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी गाँव में रोज़गार बढ़ाने के किताब के कम से कम तीन उपाय बता पाए, हर एक के साथ यह भी कि उससे किसे काम मिलेगा, और समझा पाए कि म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 को “काम का अधिकार” क्यों कहा गया।
साथ ले जाइए — आलेख 3 की छपी प्रति, पिछले कालांश की निकास-पर्चियाँ, और कामों वाला चार्ट।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · आलेख 3 एक बार फिर। आलेख 3 दिखाइए और बोर्ड पर लिखिए: “2017–18 में भी सौ में से 44 लोग प्राथमिक क्षेत्रक में।” फिर लक्ष्मी के परिवार को याद कीजिए और पूछिए: “इस परिवार के जो हाथ खेत पर ज़रूरी नहीं, उन्हें काम कैसे मिले?” बताइए कि पृष्ठ 27 से 29 तक किताब इसी के उपाय गिनाती है।
- 5–14 मिनट · पहले खेत पर ही काम। पृष्ठ 27–28 पढ़वाइए। कोई कुआँ खुदे, या सरकार नया बाँध या नहर बनाए, तो कई खेतों की सिंचाई होगी और रबी में दूसरी फसल हो सकेगी। एक हेक्टेयर गेहूँ दो लोगों को 50 दिन काम देता है। दूसरा उपाय: बेहतर ग्रामीण सड़कें, परिवहन और भण्डारण, ताकि किसान उपज बेच सकें; इनसे परिवहन और व्यापार में लगे लोगों को भी काम मिलेगा। तीसरा: लक्ष्मी को बीज, उर्वरक, उपकरण और पम्पसेट के लिए साहूकार से ऊँचे ब्याज पर उधार लेना पड़ता है, इसलिए पानी के साथ स्थानीय बैंक से उचित ब्याज पर सस्ता कृषि साख भी चाहिए। साख का पूरा अध्याय इसी किताब का अध्याय 3, मुद्रा और साख, है।
- 14–22 मिनट · गाँव के पास नए काम। अगला हिस्सा पढ़वाइए। अर्द्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग: दाल मिल, शीत भण्डारण (जहाँ किसान आलू और प्याज़ रखकर अच्छी कीमत पर बेच सकें), शहद संग्रह केन्द्र, और सब्ज़ियों और फलों का प्रसंस्करण। शिक्षा और स्वास्थ्य: भारत में 60 प्रतिशत जनसंख्या 5–29 वर्ष की है, और इनमें से लगभग 51 प्रतिशत ही विद्यालय जाते हैं; बाक़ी बच्चे भी स्कूल जाएँ, तो और भवन, अध्यापक और कर्मचारी चाहिए। योजना आयोग (अब नीति आयोग) के एक अध्ययन के अनुसार अकेले शिक्षा क्षेत्र में लगभग 20 लाख रोज़गार बन सकते हैं; गाँवों में डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य कर्मचारी भी चाहिए। हर प्रदेश की अपनी संभावना है: पर्यटन, क्षेत्रीय शिल्प, सूचना प्रौद्योगिकी; पर्यटन सुधरे तो हर साल 35 लाख से ज़्यादा लोगों को काम मिल सकता है। हर समूह इनमें से एक नया काम कामों वाले चार्ट पर सही खाने में जोड़े, जैसे शिक्षक।
- 22–30 मिनट · काम का अधिकार। पृष्ठ 29: चर्चा किए गए कुछ सुझावों के अमल में लंबा समय लगेगा, इसलिए छोटी अवधि के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 625 जिलों में काम का अधिकार लागू करने का कानून बनाया, म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005। उसकी तीन बातें बोर्ड पर लिखिए: काम करने में सक्षम और काम चाहने वाले सभी लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों में साल में 100 दिन के रोज़गार की गारंटी; सरकार काम न दे पाए, तो बेरोज़गारी भत्ता; और ऐसे कामों को वरीयता, जिनसे भूमि से उत्पादन बढ़े। किताब यह भी बताती है कि 2025 में इस अधिनियम का स्थान विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (विकसित भारत - जी राम जी 2025) ने ले लिया। नीचे का चित्र यहीं बनाइए।
- 30–36 मिनट · आप ग्राम प्रधान हैं। पृष्ठ 29 की गतिविधि का प्रश्न 2 समूहों में कीजिए: ऐसे काम सुझाइए जिनसे लोगों की आय बढ़े और जो इस अधिनियम में शामिल हों। अधिनियम की तीसरी बात से उत्तर निकलता है: सिंचाई के लिए कुएँ, तालाब और नहरें; खेतों तक पक्की ग्रामीण सड़कें; गाँव में अनाज के भण्डारण की जगह। फिर गतिविधि का प्रश्न 1 मौखिक: इसे “काम का अधिकार” क्यों कहा गया? उत्तर: काम माँगने पर काम, और काम न मिले तो भत्ता, कानून से तय है।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) गाँव में रोज़गार बढ़ाने के किताब के कोई दो उपाय, और हर एक से किसे काम मिलेगा? (2) म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 को “काम का अधिकार” क्यों कहा गया?
किताब के सुझाव और काम का अधिकार (चरण 4)
किताब के सुझाव और काम का अधिकार
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर पृष्ठ 27 से 29 के उपायों की यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।
| उपाय | किसे काम मिलेगा |
|---|---|
| सिंचाई (कुआँ, बाँध, नहर) | परिवार के खाली हाथों को अपने ही खेत पर; रबी में दूसरी फसल, एक हेक्टेयर गेहूँ पर दो लोगों को 50 दिन |
| सड़क, परिवहन और भण्डारण | परिवहन और व्यापार में लगे लोगों को; किसान उपज बेच सकें |
| सस्ता कृषि साख | किसान समय पर बीज, उर्वरक, उपकरण और पम्पसेट ख़रीद सकें |
| अर्द्ध-ग्रामीण उद्योग | दाल मिल, शीत भण्डारण, शहद संग्रह केन्द्र, फल और सब्ज़ी के प्रसंस्करण में |
| शिक्षा और स्वास्थ्य | अध्यापकों, डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को; अकेले शिक्षा में लगभग 20 लाख |
| पर्यटन, क्षेत्रीय शिल्प, सूचना प्रौद्योगिकी | पर्यटन सुधरे तो हर साल 35 लाख से ज़्यादा लोगों को |
| काम का अधिकार | ग्रामीण क्षेत्र में काम चाहने वाले हर सक्षम व्यक्ति को, साल में 100 दिन |
तालिका के नीचे एक पंक्ति: किताब कहती है कि इनमें से कुछ सुझावों के अमल में लंबा समय लगेगा; इसलिए छोटी अवधि के लिए काम का अधिकार है।
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- पृष्ठ 28 पर साख वाले अध्याय की संख्या “अध्याय–4” छपी है। इस किताब में मुद्रा और साख अध्याय 3 है। बच्चों को अध्याय 3 ही बताइए।
- “काम का अधिकार मतलब सबको पक्की नौकरी।” नहीं; किताब के अनुसार यह ग्रामीण क्षेत्रों में साल में 100 दिन के रोज़गार की गारंटी है, उन लोगों के लिए जो काम करने में सक्षम हैं और काम चाहते हैं।
- “लगभग 51 प्रतिशत लोग स्कूल जाते हैं।” यह आँकड़ा पूरी जनसंख्या का नहीं, 5–29 वर्ष के लोगों का है।
- “शिक्षा में 20 लाख रोज़गार बन चुके हैं।” किताब एक अध्ययन का अनुमान बताती है: इतने रोज़गार बन सकते हैं।
- 2025 वाले नए अधिनियम की शर्तें किताब नहीं बताती। प्रश्नावली के प्रश्न 17 का उत्तर किताब में दिए म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 के उद्देश्यों पर लिखवाइए, और अंत में किताब की यह बात कि 2025 में उसका स्थान नए अधिनियम ने ले लिया।
- इंटरैक्टिव अध्याय में “अतिरिक्त रोज़गार” वाला हिस्सा चलाइए; “संगठित और असंगठित” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए तीन शब्द काफ़ी हैं: पानी, सड़क, साख; और एक संख्या: 100 दिन।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: इन उपायों में से कौन-से लक्ष्मी के परिवार को अपने ही खेत पर ज़्यादा काम देंगे, और कौन-से परिवार के किसी सदस्य को खेत से बाहर काम देंगे? (अपने खेत पर: सिंचाई और सस्ता साख; बाहर: दाल मिल, शीत भण्डारण, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे काम।)
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) कोई दो: सिंचाई (अपने खेत पर काम, रबी में दूसरी फसल), सड़क और भण्डारण (परिवहन और व्यापार में काम), सस्ता साख (समय पर बीज और उर्वरक), अर्द्ध-ग्रामीण उद्योग (दाल मिल, शीत भण्डारण में काम), शिक्षा और स्वास्थ्य (अध्यापक, नर्स)। (2) क्योंकि काम माँगने पर काम मिलना कानून से तय है: ग्रामीण क्षेत्र में साल में 100 दिन, और काम न मिले तो बेरोज़गारी भत्ता। जिन बच्चों ने (2) में “सबको नौकरी” जैसा कुछ लिखा हो, उन्हें कालांश 7 की शुरुआत में तीनों बातें एक बार फिर पढ़वाइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क16, ख7, ख8, घ6 और घ7; तेज़ विद्यार्थी ङ4, ङ5, च3 और छ6 भी। साथ में प्रश्नावली के प्रश्न 3 (पृष्ठ 36) और 17 (पृष्ठ 37) कॉपी में; कालांश 10 में जाँच होगी।
- पृष्ठ 29 की गतिविधि, प्रश्न 4 का उत्तर: लघु उद्योगों को कच्चा माल पाने और उत्पाद बेचने में सरकारी मदद; पर्यटन, क्षेत्रीय शिल्प और सूचना प्रौद्योगिकी जैसी सेवाएँ; और शिक्षा और स्वास्थ्य का विस्तार, जिसमें अध्यापक, डॉक्टर और नर्स चाहिए।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 51–62।
कालांश 7 — संगठित और असंगठित क्षेत्रक
किताब — पृष्ठ 30–31 · स्लाइड — “संगठित और असंगठित क्षेत्रक” वाला भाग · इंटरैक्टिव — संगठित और असंगठित
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी कान्ता और कमल के उदाहरण से संगठित और असंगठित क्षेत्रक का भेद चार बातों में बता पाए, और पृष्ठ 31 की तालिका के खाली खाने भरकर बता पाए कि लगभग 83 प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं।
साथ ले जाइए — पृष्ठ 31 की तालिका की छपी प्रतियाँ, जहाँ हर बच्चे के पास किताब न हो, हर समूह के लिए अनुमान लिखने की एक पर्ची, और कामों वाला चार्ट।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · दो पड़ोसी। पृष्ठ 30 पर कान्ता और कमल का हिस्सा पढ़वाइए। कान्ता एक कार्यालय में सुबह 9.30 से शाम 5.30 तक काम करती है; कमल एक किराना दुकान पर सुबह 7.30 से शाम 8 बजे तक। पूछिए: “दोनों में किसका काम ज़्यादा पक्का है, और क्यों?” बताइए कि आज बाँटने का दूसरा आधार आएगा: रोज़गार की परिस्थितियाँ।
- 5–14 मिनट · चार जाँच। बोर्ड पर नीचे का चित्र बनाइए और हर जाँच पर कान्ता और कमल की बात रखिए। कान्ता को हर माह के अंत में नियमित वेतन, भविष्य निधि, चिकित्सीय और अन्य भत्ते, रविवार को सवेतन अवकाश और शर्तों वाला नियुक्ति-पत्र मिलता है। कमल को दैनिक मज़दूरी मिलती है, कोई भत्ता या छुट्टी नहीं, कोई औपचारिक पत्र नहीं, और उसे कभी भी हटाया जा सकता है। फिर किताब की परिभाषा: संगठित क्षेत्रक में वे उद्यम और कार्य-स्थान आते हैं जो सरकार से पंजीकृत हैं, जहाँ रोज़गार नियमित है, और जहाँ कारखाना अधिनियम, न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, सेवानुदान अधिनियम, दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम जैसे कानून माने जाते हैं। “इसे संगठित क्षेत्रक कहते हैं क्योंकि इसकी कुछ औपचारिक प्रक्रिया एवं कार्यविधि है।” असंगठित क्षेत्रक छोटी और बिखरी इकाइयों से बना है, जो ज़्यादातर सरकारी नियंत्रण से बाहर हैं; नियम हैं, पर उनका पालन नहीं होता।
- 14–20 मिनट · सात लोग, दो खाने। पृष्ठ 31 की गतिविधि का प्रश्न 1 समूहों में कीजिए; हर समूह चार जाँच लगाए। असंगठित: बाज़ार में पीठ पर सीमेन्ट की बोरी ढोता श्रमिक, अपने खेत की सिंचाई करता किसान, ठेकेदार के अधीन काम करता दैनिक मज़दूर, और अपने घर में काम करता करघा बुनकर। शिक्षक, डॉक्टर और बड़े कारखाने का श्रमिक संगठित क्षेत्रक में गिने जाएँगे, अगर उनकी नियुक्ति नियमित है और नियमों के लाभ मिलते हैं। यह भी बताइए कि अपना काम करने वाले लोग भी संगठित क्षेत्रक में हो सकते हैं, अगर वे सरकार के पास पंजीकृत हैं और नियमों का पालन करते हैं।
- 20–30 मिनट · पहले अनुमान, फिर तालिका। हर समूह पर्ची पर लिखे: “भारत में सौ में से कितने श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में होंगे?” सब अनुमान लिखे जाने से पहले तालिका मत खोलिए। फिर पृष्ठ 31 की तालिका खोलिए: 1990 के अंत के अनुमान, दस लाख में। खाली खाने एक-एक समूह से भरवाइए (बोर्ड-कार्य देखिए) और प्रतिशत निकलवाइए: संगठित लगभग 17, असंगठित लगभग 83। अनुमान मिलाइए। फिर गतिविधि के प्रश्न। तालिका क्षेत्रकों के हिसाब से है, इसलिए कृषि के लिए प्राथमिक क्षेत्रक की पंक्ति लीजिए; किताब प्राथमिक क्षेत्रक को “कृषि एवं सहायक क्षेत्रक” भी कहती है। असंगठित क्षेत्रक में कृषि में लगे लोग 231 ÷ 393 × 100, यानी लगभग 59 प्रतिशत; और प्राथमिक क्षेत्रक के 232 में से 231 असंगठित हैं, इसलिए कृषि असंगठित क्षेत्रक की गतिविधि है।
- 30–36 मिनट · कॉपी का पहला पन्ना। हर विद्यार्थी कॉपी के पहले पन्ने पर दूसरी पंक्ति भरे: रोज़गार की परिस्थितियाँ | संगठित, असंगठित | लगभग 83 प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में। फिर पृष्ठ 31 की गतिविधि का प्रश्न 3 जोड़ियों में: संगठित और असंगठित क्षेत्रक का भेद अपने शब्दों में, एक-एक वाक्य।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) कमल के काम की कोई तीन बातें, जिनसे वह असंगठित क्षेत्रक में है। (2) पृष्ठ 31 की तालिका के हिसाब से सौ में से लगभग कितने श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं, और किस क्षेत्रक में असंगठित श्रमिक सबसे ज़्यादा हैं?
संगठित है या नहीं: चार जाँच (चरण 2)
संगठित है या नहीं: चार जाँच
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर पृष्ठ 31 की तालिका भरी हुई बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। संख्याएँ दस लाख में हैं, 1990 के अंत के अनुमान; मोटे अंक बच्चे हिसाब से निकालते हैं।
| क्षेत्रक | संगठित | असंगठित | कुल |
|---|---|---|---|
| प्राथमिक | 1 | 231 | 232 |
| द्वितीयक | 41 | 74 | 115 |
| तृतीयक | 40 | 88 | 128 |
| कुल | 82 | 393 | 475 |
| कुल प्रतिशत में | लगभग 17% | लगभग 83% | 100% |
तालिका के नीचे हिसाब: 232 − 1 = 231; 231 + 74 + 88 = 393; 82 + 393 = 475; 393 ÷ 475 × 100 = लगभग 83।
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- खाली खाने और प्रतिशत किताब में नहीं छपे। वे हिसाब से निकलते हैं; बच्चों से कहिए कि कॉपी में हिसाब भी लिखें।
- “अपना काम करने वाला हमेशा असंगठित।” नहीं; पंजीकृत हो और नियम माने, तो वह संगठित क्षेत्रक में है। प्रश्न 5 की दूसरी पंक्ति, औपचारिक अधिकार-पत्र वाली दुकानें और क्लिनिक, इसी बात पर है।
- “शिक्षक और डॉक्टर तो संगठित ही होते हैं।” गतिविधि के उत्तर में “अगर उनकी नियुक्ति नियमित है” वाली शर्त ज़रूर बुलवाइए।
- दोनों आधार मिला देते हैं। एक ही व्यक्ति कार्य के स्वभाव से किसी एक क्षेत्रक में होता है और रोज़गार की परिस्थितियों से संगठित या असंगठित में। ये दो अलग सवालों के जवाब हैं।
- “कमल किस क्षेत्रक में है?” किताब यह नहीं बताती; यहाँ सवाल सिर्फ़ उसकी रोज़गार की परिस्थितियों का है। बच्चों को इसी पर रोकिए।
- इंटरैक्टिव अध्याय में “संगठित और असंगठित” वाला हिस्सा चरण 4 के अनुमान लिखे जाने के बाद खोलिए; “असंगठित श्रमिकों का संरक्षण” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक वाक्य काफ़ी है: पक्का काम, नियमित वेतन, छुट्टी और लिखा हुआ पत्र हो, तो संगठित।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: प्राथमिक क्षेत्रक के 232 में से संगठित सिर्फ़ 1 है। इससे खेती के काम के बारे में क्या पता चलता है? (लगभग सारे खेतिहर लोग असंगठित हैं: ज़्यादातर किसान अपने खेत पर काम करते हैं और ज़रूरत पर मज़दूर लगाते हैं; न नियमित वेतन है, न पंजीकरण।)
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) कोई तीन: दैनिक मज़दूरी, जिस दिन काम नहीं उस दिन पैसा नहीं; मज़दूरी के सिवा कोई भत्ता नहीं; कोई छुट्टी या सवेतन अवकाश नहीं; कोई औपचारिक पत्र नहीं; कभी भी हटाया जा सकता है। (2) लगभग 83; प्राथमिक क्षेत्रक में (231, दस लाख में)। जिन बच्चों ने (2) में “आधे” या उससे कम लिखा हो, उन्हें कालांश 8 की शुरुआत में तालिका की आख़िरी पंक्ति फिर दिखाइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क17, क18, ख9, ग5 और घ8; तेज़ विद्यार्थी ङ6, छ4 और छ5 भी। साथ में प्रश्नावली के प्रश्न 5 (पृष्ठ 36) और 16 (पृष्ठ 37) कॉपी में; कालांश 10 में जाँच होगी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 63–77।
कालांश 8 — असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का संरक्षण
किताब — पृष्ठ 31–32 · स्लाइड — “असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का संरक्षण” वाला भाग · इंटरैक्टिव — असंगठित श्रमिकों का संरक्षण
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी असंगठित क्षेत्रक की समस्या बढ़ने के कोई दो कारण बता पाए, और गाँव और शहर के किन लोगों को किन बातों में संरक्षण चाहिए, यह किताब के उदाहरणों से बता पाए।
साथ ले जाइए — कामों वाला चार्ट, और प्रश्न 23 के आँकड़े, जो बोर्ड पर लिखने हैं।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · सौ में से 83। पिछले कालांश की तालिका की आख़िरी पंक्ति बोर्ड पर लिखिए: संगठित लगभग 17, असंगठित लगभग 83। पूछिए: “अगर ज़्यादातर श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं, तो उनके लिए क्या किया जाए?”
- 5–13 मिनट · समस्या क्यों बढ़ी। पृष्ठ 32 पढ़वाइए और तीन कारण बोर्ड पर लिखिए: संगठित क्षेत्रक में रोज़गार बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है; कई संगठित उद्यम असंगठित की तरह काम करते हैं, ताकि कर से बच सकें और श्रमिकों की रक्षा करने वाले कानूनों का पालन न करना पड़े; और सन् 1990 से संगठित क्षेत्रक के बहुत से श्रमिक रोज़गार खो रहे हैं और कम वेतन पर असंगठित क्षेत्रक में काम करने को विवश हैं। किताब का नतीजा: असंगठित क्षेत्रक में ज़्यादा रोज़गार के साथ संरक्षण और सहायता भी चाहिए।
- 13–22 मिनट · कौन हैं ये लोग। नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए। गाँव में: भूमिहीन कृषि श्रमिक, छोटे और सीमांत किसान, फसल बँटाईदार, और कारीगर, जैसे बुनकर, लुहार, बढ़ई और सुनार। लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण परिवार छोटे और सीमांत किसान हैं; इन्हें समय पर बीज, उपकरण, साख, भण्डारण और विपणन की सुविधा चाहिए। शहर में: लघु उद्योगों के श्रमिक; निर्माण, व्यापार और परिवहन के आकस्मिक श्रमिक; सड़क के विक्रेता, सिर पर बोझा ढोने वाले, वस्त्र बनाने वाले और कबाड़ उठाने वाले। लघु उद्योगों को कच्चा माल पाने और उत्पाद बेचने में सरकारी मदद चाहिए, और आकस्मिक श्रमिकों को गाँव और शहर, दोनों जगह संरक्षण। किताब यह भी कहती है कि असंगठित क्षेत्रक में काम करने वाले बहुसंख्यक श्रमिक अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों से हैं, जो कम और अनियमित मज़दूरी के साथ सामाजिक भेदभाव भी झेलते हैं।
- 22–32 मिनट · प्रश्न 23, कक्षा में। प्रश्न 23 (पृष्ठ 37) के आँकड़े बोर्ड पर लिखिए: अहमदाबाद के 15,00,000 श्रमिकों में से 11,00,000 असंगठित क्षेत्रक में; 1997–98 में नगर की कुल आय 600 करोड़ रुपए, जिसमें से 320 करोड़ संगठित क्षेत्रक से। समूह बाक़ी दो संख्याएँ घटाकर निकालें और तालिका बनाएँ (बोर्ड-कार्य देखिए)। फिर पूछिए: “क्या दिखता है?” लगभग तीन-चौथाई श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं, पर नगर की आय का आधे से कम हिस्सा उनसे आता है। प्रश्न का दूसरा हिस्सा, रोज़गार बढ़ाने के तरीके, कालांश 6 के बोर्ड-कार्य और आज के चित्र से गृहकार्य में पूरा होगा।
- 32–36 मिनट · मज़दूरी, सुरक्षा, स्वास्थ्य। प्रश्न 22 की शुरुआत कक्षा में: एक-एक समूह को एक शब्द दीजिए, और हर समूह कमल या किताब के किसी श्रमिक का एक उदाहरण बोले। जैसे मज़दूरी: कमल को जिस दिन काम नहीं, उस दिन पैसा नहीं; सुरक्षा: उसे कभी भी हटाया जा सकता है; स्वास्थ्य: बीमारी की छुट्टी या चिकित्सीय लाभ नहीं। अंत में किताब का निष्कर्ष: आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को संरक्षण और सहायता अनिवार्य है।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) असंगठित क्षेत्रक की समस्या बढ़ने के कोई दो कारण। (2) छोटे किसान को किन चीज़ों में मदद चाहिए, और शहर के लघु उद्योग को किसमें?
किसे संरक्षण चाहिए: गाँव और शहर (चरण 3)
किसे संरक्षण चाहिए: गाँव और शहर
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर प्रश्न 23 की तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। मोटे अंक घटाकर निकलते हैं; हिस्से कुल के प्रतिशत हैं।
| क्षेत्रक | श्रमिक | श्रमिकों में हिस्सा | आय, 1997–98 (करोड़ रुपए) | आय में हिस्सा |
|---|---|---|---|---|
| संगठित | 4,00,000 | 26.7% | 320 | 53.3% |
| असंगठित | 11,00,000 | 73.3% | 280 | 46.7% |
| कुल | 15,00,000 | 100% | 600 | 100% |
तालिका के नीचे एक पंक्ति: लगभग तीन-चौथाई श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में, पर नगर की आय का आधे से कम हिस्सा उनसे।
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “संरक्षण मतलब सबको सरकारी नौकरी।” किताब जिस संरक्षण और सहायता की बात करती है, वह है: बीज, उपकरण, साख, भण्डारण और विपणन की सुविधा, लघु उद्योगों को कच्चे माल और बिक्री में मदद, और उचित मज़दूरी, सुरक्षा और स्वास्थ्य के लाभ।
- दूसरा कारण उलझाता है: संगठित उद्यम असंगठित की तरह काम क्यों करेगा? किताब का उत्तर: कर से बचने के लिए, और श्रमिकों की रक्षा करने वाले कानूनों का पालन न करना पड़े, इसलिए।
- प्रश्न 23 में दो संख्याएँ दी ही नहीं गईं। संगठित श्रमिक और असंगठित आय घटाकर निकालनी हैं। हर कॉलम का जोड़ 100 प्रतिशत आए, इससे हिसाब जाँचवाइए।
- अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों वाली बात किताब के शब्दों में ही रखिए। किसी बच्चे या परिवार का उदाहरण मत लीजिए।
- इंटरैक्टिव अध्याय में “असंगठित श्रमिकों का संरक्षण” वाला हिस्सा चलाइए; “सार्वजनिक और निजी” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो सूचियाँ काफ़ी हैं: गाँव में कौन, शहर में कौन; और हर सूची के साथ एक ज़रूरत।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: अहमदाबाद में असंगठित क्षेत्रक के एक श्रमिक की आय संगठित क्षेत्रक के एक श्रमिक से ज़्यादा होगी या कम? (बहुत कम: संगठित के 4,00,000 श्रमिकों से 320 करोड़ आते हैं, जबकि असंगठित के 11,00,000 से सिर्फ़ 280 करोड़।)
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) कोई दो: संगठित क्षेत्रक में रोज़गार बहुत धीमी गति से बढ़ना; संगठित उद्यमों का असंगठित की तरह काम करना, ताकि कर और श्रम कानूनों से बचें; सन् 1990 से संगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का रोज़गार खोना। (2) छोटे किसान को समय पर बीज, उपकरण, साख, भण्डारण और विपणन की सुविधा; लघु उद्योग को कच्चा माल पाने और उत्पाद बेचने में सरकारी मदद। जिन बच्चों ने (2) में सिर्फ़ “पैसा” लिखा हो, उनके साथ कालांश 9 की शुरुआत में आज का चित्र एक बार दोहराइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक का ख10; तेज़ विद्यार्थी ङ7 और च4 भी। साथ में प्रश्नावली के प्रश्न 14 और 22 (पृष्ठ 37) कॉपी में, और प्रश्न 23 का दूसरा हिस्सा, रोज़गार बढ़ाने के तरीके; कालांश 10 में जाँच होगी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 78–84।
कालांश 9 — सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक
किताब — पृष्ठ 33–34 · स्लाइड — “सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक” वाला भाग · इंटरैक्टिव — सार्वजनिक और निजी
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी स्वामित्व के आधार पर सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक का भेद मालिक और ध्येय से बता पाए, और सरकार के ख़र्च के तीन कारणों में से हर एक का एक उदाहरण दे पाए।
साथ ले जाइए — कामों वाला चार्ट, और पिछले कालांश की निकास-पर्चियाँ।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · मालिक कौन है? बोर्ड पर दो नाम लिखिए: रेलवे और टिस्को। पूछिए: “इनका मालिक कौन है?” बताइए कि आज बाँटने का तीसरा आधार आएगा: स्वामित्व।
- 5–12 मिनट · दो क्षेत्रक। पृष्ठ 33 पढ़वाइए। सार्वजनिक क्षेत्रक में ज़्यादातर परिसंपत्तियों पर सरकार का स्वामित्व है और सरकार ही सेवाएँ देती है, जैसे रेलवे और डाकघर। निजी क्षेत्रक में परिसंपत्तियों पर स्वामित्व और सेवाएँ देने की ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति या कंपनी के हाथ में है, जैसे टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड (टिस्को) और रिलायंस इण्डस्ट्रीज लिमिटेड। निजी क्षेत्रक का ध्येय लाभ कमाना है, और उसकी सेवाएँ लेने वाले भुगतान करते हैं; सार्वजनिक क्षेत्रक का ध्येय सिर्फ़ लाभ कमाना नहीं है, और सरकार ख़र्च की भरपाई करों या दूसरे तरीकों से करती है। यह तालिका बोर्ड पर बनाइए (बोर्ड-कार्य देखिए)।
- 12–24 मिनट · सरकार ख़र्च क्यों करती है। पहले पृष्ठ 33 का “ज्ञात करें” वाला सवाल समूहों को दीजिए: आधुनिक दिनों में सरकार किन गतिविधियों पर व्यय करती है, और क्यों? दो मिनट बाद पृष्ठ 33–34 के तीन कारण पढ़वाइए और नीचे का चित्र बनाइए। पहला, बहुत महँगी सुविधाएँ: सड़कें, पुल, रेलवे, पत्तन, बिजली, बाँध से सिंचाई; इनका ख़र्च निजी क्षेत्रक की क्षमता से बाहर है, हज़ारों उपयोगकर्ताओं से पैसा इकट्ठा करना आसान नहीं, और निजी क्षेत्रक दे भी, तो ऊँची कीमत लेगा। दूसरा, जिन्हें सरकारी समर्थन चाहिए: लागत पर बिजली बिके तो कई छोटी इकाइयाँ बंद हो सकती हैं, इसलिए सरकार ऐसी दर पर बिजली देती है जिस पर वे ख़रीद सकें, और लागत का कुछ अंश ख़ुद उठाती है; इसी तरह किसानों से उचित मूल्य पर गेहूँ और चावल ख़रीदकर राशन की दुकानों से उपभोक्ताओं को कम मूल्य पर बेचती है। तीसरा, सबके लिए स्वास्थ्य और शिक्षा: “इन पर व्यय करना सरकार की अनिवार्यता है।” विद्यालय ठीक से चलाना और ख़ासकर प्राथमिक शिक्षा देना सरकार का कर्त्तव्य है।
- 24–30 मिनट · पृष्ठ 34 के तथ्य। पृष्ठ 34 का बाक़ी हिस्सा पढ़वाइए: भारत में निरक्षरों की संख्या विश्व में सबसे ज़्यादा है; भारत के लगभग आधे बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, और उनमें से एक-चौथाई गंभीर रूप से बीमार हैं; ओडिशा (36) और मध्य प्रदेश (43) की शिशु मृत्यु दर विश्व के कुछ सबसे निर्धन भागों से भी ज़्यादा है। सरकार को सुरक्षित पेयजल, निर्धनों के लिए आवास, और भोजन और पोषण पर भी ध्यान देना है। पूछिए: “इनमें से कौन-सा काम कोई निजी कंपनी सिर्फ़ लाभ के लिए करेगी?” (अपेक्षित उत्तर: कोई नहीं, या बहुत कम। निजी क्षेत्रक का ध्येय लाभ है, इन कामों से लाभ कम है, और इनकी ज़रूरत सबसे ज़्यादा निर्धन लोगों को है। इसीलिए यह सरकार का काम है।)
- 30–36 मिनट · कॉपी का पहला पन्ना और प्रश्न 4। हर विद्यार्थी पहले पन्ने पर तीसरी पंक्ति भरे: स्वामित्व | सार्वजनिक, निजी | सरकार ऐसे काम भी करती है जिनसे लाभ नहीं, पर जो सबके लिए ज़रूरी हैं। यह आख़िरी खाना हमारी ओर से है। फिर प्रश्नावली के प्रश्न 4 का (ग) मौखिक: डाकिया, मोची, सैनिक, पुलिस कांस्टेबल में विषम कौन? (मोची: बाक़ी तीन सरकार के कर्मचारी हैं।)
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक में कोई दो अंतर। (2) सरकार किसानों से गेहूँ ख़रीदकर राशन की दुकानों पर कम मूल्य पर बेचती है। इससे किसे सहायता मिलती है?
सरकार ख़र्च क्यों करती है: तीन तरह की चीज़ें (चरण 3)
सरकार ख़र्च क्यों करती है: तीन तरह की चीज़ें
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।
| सार्वजनिक क्षेत्रक | निजी क्षेत्रक | |
|---|---|---|
| मालिक | ज़्यादातर परिसंपत्तियों पर सरकार | एक व्यक्ति या कंपनी |
| उदाहरण | रेलवे, डाकघर | टिस्को, रिलायंस इण्डस्ट्रीज लिमिटेड |
| ध्येय | सिर्फ़ लाभ कमाना नहीं | लाभ कमाना |
| ख़र्च की भरपाई | करों या दूसरे तरीकों से | सेवा लेने वाले भुगतान करते हैं |
तालिका के नीचे सरकार के ख़र्च के तीन कारण, एक-एक उदाहरण के साथ: महँगी सुविधा (बाँध), समर्थन (राशन की दुकान), अनिवार्यता (प्राथमिक शिक्षा)।
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “सार्वजनिक मतलब मुफ़्त।” किताब इतना कहती है कि सरकार ख़र्च की भरपाई करों या दूसरे तरीकों से करती है, और उसका ध्येय सिर्फ़ लाभ नहीं। सेवा मुफ़्त ही हो, यह ज़रूरी नहीं।
- स्वामित्व और रोज़गार की परिस्थितियाँ मिला देते हैं। निजी कंपनी भी संगठित हो सकती है, जैसे टिस्को। सार्वजनिक-निजी का सवाल मालिक का है, संगठित-असंगठित का सवाल काम की शर्तों का। प्रश्न 2 (अ) का जाल यही है।
- “निजी मतलब अच्छा, सरकारी मतलब ख़राब” (या उलटा)। प्रश्न 19 की तालिका दिखाती है कि दोनों क्षेत्रकों में अच्छे और ख़राब, दोनों तरह के प्रबंध वाले संगठन मिल सकते हैं।
- प्रश्न 4 (घ) का उत्तर एयर इण्डिया के मालिक पर टिका है। सरकार ने जनवरी 2022 में एयर इण्डिया को टाटा समूह की एक कंपनी को सौंप दिया (भारत सरकार की प्रेस विज्ञप्ति), इसलिए वह निजी क्षेत्रक में है और बाक़ी तीन सरकार के हैं।
- ओडिशा और मध्य प्रदेश के आँकड़े वहाँ की स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बताते हैं, वहाँ के लोगों की क़ीमत नहीं। किसी राज्य का मज़ाक मत बनने दीजिए।
- इंटरैक्टिव अध्याय में “सार्वजनिक और निजी” वाला हिस्सा चलाइए; “सार” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो सवाल काफ़ी हैं: मालिक कौन है, और किसलिए चलाता है?
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: सरकार छोटी इकाइयों से बिजली की पूरी लागत क्यों नहीं लेती? (लागत पर बिजली बिके तो इन इकाइयों की लागत बढ़ेगी और वे बंद हो सकती हैं; इसलिए सरकार लागत का कुछ अंश ख़ुद उठाती है।)
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) कोई दो: मालिक (सरकार / व्यक्ति या कंपनी), ध्येय (सिर्फ़ लाभ नहीं / लाभ), ख़र्च की भरपाई (करों से / सेवा लेने वाले से)। (2) दोनों को: किसान को उचित मूल्य मिलता है, और उपभोक्ता को कम मूल्य पर अनाज। जिन बच्चों ने (2) में सिर्फ़ एक पक्ष लिखा हो, उन्हें कालांश 10 की शुरुआत में चित्र का दूसरा डिब्बा फिर दिखाइए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क19, क20, ग6 और घ10; तेज़ विद्यार्थी ङ8 और च5 भी। साथ में प्रश्नावली के प्रश्न 4 (पृष्ठ 36), 20 और 21 (पृष्ठ 37) कॉपी में; कालांश 10 में जाँच होगी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 85–93।
कालांश 10 — सारांश, प्रश्नावली और समापन
किताब — पृष्ठ 34–37 · स्लाइड — “सारांश, प्रश्नावली और समापन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — सार, अभ्यास, परियोजना
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी तालिका 2.4 की दोनों पंक्तियाँ भर पाए, प्रश्नावली के प्रश्न 1 और 2 के सही विकल्प कारण के साथ चुन पाए, और पहले दिन की पर्ची वाले काम को तीनों आधारों पर बाँट पाए।
साथ ले जाइए — पहले दिन की पर्चियों वाला लिफ़ाफ़ा, कामों वाला चार्ट, तालिका 2.4 की खाली शक्ल वाला चार्ट पेपर, और पिछले कालांशों की गृहकार्य-कॉपियाँ।
40 मिनट
- 0–8 मिनट · तालिका 2.4। पृष्ठ 33 का “स्मरण कीजिए” खोलिए: तालिका 2.4, आर्थिक क्रियाकलापों का वर्गीकरण। उसके चार कॉलम हैं: क्षेत्रक, इस्तेमाल की गई कसौटी, सबसे महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष, और इंगित समस्याएँ और उनका समाधान। किताब में दो पंक्तियों के नाम (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक; और संगठित, असंगठित) और पहली पंक्ति की कसौटी, “कार्य का स्वभाव”, छपे हैं; बाक़ी खाने ख़ाली हैं। आधे समूह पहली पंक्ति भरें, आधे दूसरी, फिर एक-एक समूह चार्ट पेपर पर लिखे। कॉपी का पहला पन्ना मदद करेगा। फिर तीसरी पंक्ति, सार्वजनिक और निजी, सब मिलकर भरें; यह पंक्ति हमारी ओर से है।
- 8–12 मिनट · सारांश। पृष्ठ 34 का सारांश पढ़वाइए। हर समूह देखे कि उसकी भरी पंक्ति की कौन-सी बात सारांश में आई है।
- 12–22 मिनट · प्रश्न 1 और 2 (पृष्ठ 35)। जोड़ियाँ हर रिक्त स्थान और हर प्रश्न का विकल्प चुनें; फिर एक जोड़ी उत्तर बोले और दूसरी किताब से कारण दे। सही उत्तर और कारण नीचे बोर्ड-कार्य की तालिका में हैं।
- 22–32 मिनट · पहले दिन की पर्चियाँ। लिफ़ाफ़ा खोलिए और आठ-दस पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए, नाम के बिना। हर काम पर तीन सवाल रखिए, जो हमारी ओर से हैं: यह काम किस तरह का है (प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक), किन शर्तों पर होता है (संगठित या असंगठित), और इसका मालिक कौन है (सार्वजनिक या निजी)? जहाँ शर्तें या मालिक पता न हों, वहाँ बच्चे लिखें: “पता करना होगा”। नीचे का चित्र यहीं काम आएगा।
- 32–36 मिनट · प्रश्न 8 की शुरुआत। प्रश्न 8 (पृष्ठ 36) यही माँगता है: आसपास के वयस्कों के कामों की लंबी सूची, और उनका वर्गीकरण। आज की पर्चियाँ इसकी शुरुआत हैं; बाक़ी सूची और तीनों आधारों वाली तालिका गृहकार्य में बनेगी। अंत में अध्याय का बड़ा सबक़ एक बार बोर्ड पर: उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक सबसे आगे, पर सबसे ज़्यादा लोग अब भी प्राथमिक क्षेत्रक में, और ज़्यादातर श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी लिखे: (1) अपने आसपास का कोई एक काम, तीनों आधारों पर बाँटकर। (2) इस अध्याय की एक बात, जो अब भी पूरी तरह समझ नहीं आई।
तालिका 2.4 का ढाँचा (चरण 1 और 4)
तालिका 2.4 का ढाँचा
बोर्ड-कार्य
बोर्ड पर पहले तालिका 2.4, फिर प्रश्न 1 और 2 की तालिका भरती चले; बच्चे दोनों कॉपी में उतारें। परीक्षा से पहले दोहराने के लिए यही काम आएगी। नीचे के भरे खाने हमारी ओर से एक नमूना हैं; किताब में सिर्फ़ पंक्तियों के नाम और “कार्य का स्वभाव” छपा है।
| क्षेत्रक | इस्तेमाल की गई कसौटी | सबसे महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष | इंगित समस्याएँ और उनका समाधान |
|---|---|---|---|
| प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक | कार्य का स्वभाव | उत्पादन में तृतीयक क्षेत्रक सबसे आगे हो गया, पर रोज़गार अब भी सबसे ज़्यादा प्राथमिक में है | कृषि में अल्प बेरोज़गारी; समाधान: सिंचाई, सड़क और भण्डारण, सस्ता साख, अर्द्ध-ग्रामीण उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन में रोज़गार, म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ. |
| संगठित, असंगठित | रोज़गार की परिस्थितियाँ | ज़्यादातर श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं | कम, अनियमित मज़दूरी, कोई सुरक्षा नहीं, शोषण; समाधान: ज़्यादा रोज़गार के साथ संरक्षण और सहायता, छोटे किसानों और लघु उद्योगों को मदद |
| सार्वजनिक, निजी (हमारी ओर से) | स्वामित्व | सरकार ऐसे काम भी करती है जिनसे लाभ नहीं, पर जो सबके लिए ज़रूरी हैं | निरक्षरता, कुपोषण, ऊँची शिशु मृत्यु दर; समाधान: स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, आवास, भोजन और पोषण पर सरकारी ख़र्च |
| प्रश्न | सही विकल्प | किताब से कारण |
|---|---|---|
| 1 (क) | नहीं हुई है | सेवा क्षेत्रक में उत्पादन 14 गुना बढ़ा, पर रोज़गार 5 गुना से भी कम (पृष्ठ 26)। |
| 1 (ख) | तृतीयक | यह सेवाएँ देता है, वस्तुएँ नहीं बनाता। |
| 1 (ग) | संगठित | नियमित काम और रोज़गार-सुरक्षा संगठित क्षेत्रक की पहचान है। |
| 1 (घ) | बड़े | पृष्ठ 31 की तालिका से गणना: लगभग 83 प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं। |
| 1 (ङ) | प्राकृतिक, विनिर्मित | कपास प्रकृति से मिलता है, कपड़ा उससे बनाया जाता है। |
| 1 (च) | परस्पर निर्भर | तालिका 2.1: एक क्षेत्रक की गतिविधि दूसरे क्षेत्रक पर टिकी है। |
| 2 (अ) | (ग) उद्यमों के स्वामित्व | रोज़गार की शर्तों से संगठित-असंगठित बँटते हैं, और कार्य के स्वभाव से प्राथमिक-द्वितीयक-तृतीयक। |
| 2 (ब) | (क) प्राथमिक | प्राकृतिक संसाधनों के सीधे उपयोग से उत्पादन। |
| 2 (स) | (ख) सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं | मध्यवर्ती वस्तुएँ गिनें, तो एक ही मूल्य कई बार गिना जाएगा। |
| 2 (द) | (ग) 50 से 60 | आलेख 2 में 2017–18 वाले दंड का आधे से ज़्यादा हिस्सा तृतीयक क्षेत्रक का है। |
बाक़ी प्रश्न गृहकार्य में बँटे हैं। कॉपियाँ जाँचते समय यह सूची काम आएगी; पूरे नमूना उत्तर शिक्षक संदर्शिका में हैं।
| प्रश्न | कब दिया | उत्तर की मुख्य बात |
|---|---|---|
| 3 | कालांश 6 | 1-द, 2-स, 3-य, 4-अ, 5-ब। पाँचवें मेल का आधार: छोटे किसानों को भण्डारण और विपणन की सुविधा चाहिए, ताकि अच्छी कीमत पर बेच सकें। |
| 4 | कालांश 9 | (क) कृषक, अकेला प्राथमिक; (ख) सब्जी विक्रेता, क्योंकि बाक़ी तीनों पढ़ाई और प्रशिक्षण से अपनी सेवा देते हैं (चारों तृतीयक हैं, इसलिए क्षेत्रक से विषम नहीं निकलता; कोई और उत्तर कारण के साथ हो, तो मानिए); (ग) मोची, बाक़ी सरकार के कर्मचारी; (घ) एयर इण्डिया, जनवरी 2022 से निजी क्षेत्रक में। |
| 5 | कालांश 7 | चौथी पंक्ति 100 − (15 + 15 + 20) = 50; दूसरी पंक्ति संगठित; असंगठित 20 + 50 = 70 प्रतिशत। |
| 6 | आज | हाँ: हर क्षेत्रक का आकार, समय के साथ बदलाव, समस्या (रोज़गार में प्राथमिक 44 प्रतिशत, जी.वी.ए. में लगभग एक-छठा), और उपाय सूझते हैं। |
| 7 | आज | जी.वी.ए. उत्पादन बताता है और रोज़गार यह कि कितने लोगों की रोज़ी किस क्षेत्रक पर टिकी है; दोनों साथ देखने से कृषि की अल्प बेरोज़गारी दिखी। दूसरी कसौटियाँ भी हैं: रोज़गार की परिस्थितियाँ और स्वामित्व। |
| 8 | आज | आसपास के कामों की सूची, हर काम कार्य के स्वभाव, रोज़गार की परिस्थिति और स्वामित्व पर; चयन का कारण भी। |
| 9 | कालांश 1 | तृतीयक कोई वस्तु नहीं बनाता, सेवा देता है: उत्पादन में मदद (परिवहन, भण्डारण, बैंक), सीधे मदद न करने वाली ज़रूरी सेवाएँ (शिक्षक, डॉक्टर), और सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित नई सेवाएँ। |
| 10 | कालांश 5 | सब काम पर दिखते हैं, पर क्षमता से कम; गाँव: लक्ष्मी का परिवार; शहर: अनियत श्रमिक और सड़क पर बेचने वाले (किताब पृष्ठ 26 पर इन्हें अल्प बेरोज़गारी का उदाहरण बताती है)। |
| 11 | कालांश 5 | खुली: कोई काम नहीं, साफ़ दिखती है; प्रच्छन्न: काम करते दिखते हैं, कुछ लोग हटें तो भी उत्पादन नहीं घटता। |
| 12 | कालांश 4 और 5 | असहमत: 2017–18 में सबसे बड़ा उत्पादक, बुनियादी सेवाएँ, बाक़ी क्षेत्रकों का सहारा, नई सेवाएँ, रोज़गार में हिस्सा 18 से 31 प्रतिशत। |
| 13 | कालांश 4 | बहुत कुशल और शिक्षित श्रमिक; और बहुत बड़ी संख्या में छोटी दुकानों, मरम्मत और परिवहन में लगे लोग। |
| 14 | कालांश 8 | सहमत: कम और अनियमित आय, कोई सुरक्षा नहीं, कोई लाभ नहीं, नियम कागज़ पर, सामाजिक भेदभाव। |
| 15 | आज | रोज़गार की परिस्थितियों से दो क्षेत्रक: संगठित (पंजीकृत, कानूनों का पालन, नियमित काम) और असंगठित (छोटी बिखरी इकाइयाँ, नियमों का पालन नहीं)। |
| 16 | कालांश 7 | काम, वेतन, सुरक्षा, छुट्टी, दूसरे लाभ और नियम पर तुलना, कान्ता और कमल के उदाहरण से। |
| 17 | कालांश 6 | 100 दिन के रोज़गार की गारंटी, बेरोज़गारी भत्ता, भूमि से उत्पादन बढ़ाने वाले कामों को वरीयता; 2025 में नए अधिनियम ने स्थान लिया। |
| 18 | आज | अपने क्षेत्र का एक सरकारी और एक निजी विद्यालय: मालिक, ध्येय, ख़र्च कौन उठाता है, और सेवा किसके लिए। |
| 19 | आज | दोनों क्षेत्रकों में अच्छे और ख़राब प्रबंध वाले संगठन मिल सकते हैं; प्रबंध स्वामित्व से तय नहीं होता। |
| 20 | कालांश 9 | सड़क, पुल, रेलवे, बिजली, राशन की दुकानें, स्वास्थ्य और शिक्षा; तीन कारण: बहुत बड़ा ख़र्च, समर्थन की ज़रूरत, सरकार की अनिवार्यता। |
| 21 | कालांश 9 | ढाँचा, उद्योगों को सहारा, किसानों और उपभोक्ताओं की मदद, बुनियादी सेवाएँ, स्वास्थ्य और शिक्षा, रोज़गार, उपेक्षित भागों की देखभाल। |
| 22 | कालांश 8 | मज़दूरी (कमल: काम नहीं तो पैसा नहीं), सुरक्षा (कभी भी हटाया जा सकता है), स्वास्थ्य (बीमारी की छुट्टी या चिकित्सीय लाभ नहीं)। |
| 23 | कालांश 8, कक्षा में | संगठित श्रमिक 4,00,000, असंगठित आय 280 करोड़; लगभग तीन-चौथाई श्रमिक, आय का आधे से कम; रोज़गार बढ़ाने के किताब के तरीके। |
| 24 | कालांश 5 (तेज़ विद्यार्थी) | तालिका के सालों के लिए: 2001–02 में 30.8, 24.2, 45.0; 2021–22 में 17.9, 29.3, 52.8 प्रतिशत; तृतीयक का हिस्सा आधे से ज़्यादा। |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- प्रश्न 2 (द) में आलेख 2 पर मान नहीं छपे। बच्चे कोई एक संख्या खोजते हैं। उनसे इतना पढ़वाइए कि 2017–18 वाले दंड का आधे से ज़्यादा हिस्सा तृतीयक का है; विकल्पों में यही (ग) है।
- तालिका 2.4 में किताब की सिर्फ़ दो पंक्तियाँ हैं, और उनके ज़्यादातर खाने ख़ाली हैं। बच्चे इन्हें अध्याय से ख़ुद भरते हैं; बोर्ड-कार्य के भरे खाने एक नमूना हैं, किताब का पाठ नहीं। स्वामित्व वाली तीसरी पंक्ति समझने के लिए हमारी ओर से जोड़ी गई है।
- पर्ची का कोई काम तीनों सवालों पर साफ़ न बँटे, तो वह ग़लती नहीं। शर्तें या मालिक पता करने ही होंगे, और प्रश्न 8 यही करवाता है।
- प्रश्न 7, 8, 18 और 19 का पूरा उत्तर किताब में नहीं है। ये बच्चों से ख़ुद सोचने और अपने क्षेत्र से उदाहरण लाने को कहते हैं। जो बच्चा अपनी बात किताब की किसी कसौटी या उदाहरण से जोड़े, उसे पूरे अंक दीजिए। नमूना उत्तर शिक्षक संदर्शिका में हैं।
- पर्चियाँ पढ़ते समय किसी काम का मज़ाक न बने। हर काम ज़रूरी है; सवाल सिर्फ़ यह है कि वह किस तरह का है, किन शर्तों पर होता है, और उसका मालिक कौन है।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो चरण 1 के बाद “सार” खोलिए; “अभ्यास” और “परियोजना” बच्चे घर पर देखें।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए प्रश्न 1 सबसे आसान शुरुआत है; चरण 3 में पहले जवाब उन्हीं से लीजिए।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: पहले दिन की कौन-सी पर्ची का काम तीनों आधारों पर अलग-अलग खानों में जाता है, जैसे तृतीयक, असंगठित और निजी? (जैसे सब्ज़ी बेचने वाला: वह सेवा देता है, उसका काम पंजीकृत और नियमित नहीं, और काम उसका अपना है।)
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) जैसे सरकारी स्कूल का शिक्षक: तृतीयक, संगठित, सार्वजनिक; या अपने खेत पर किसान: प्राथमिक, असंगठित, निजी। (2) वाला हिस्सा पढ़कर अगले अध्याय से पहले उन बातों को पाँच मिनट दोहराइए।
- गृहकार्य: प्रश्नावली के प्रश्न 6, 7 और 8 (पृष्ठ 36) और 15, 18 और 19 (पृष्ठ 37) कॉपी में। साथ में प्रश्न बैंक के तीन नमूना परीक्षा-पत्र। अध्याय की परीक्षा से पहले पूरा प्रश्न बैंक।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड का “अंतिम पाँच मिनट” वाला हिस्सा, फिर पूरा डेक।
पूरे अध्याय के लिए
अलग-अलग बच्चों के लिए
| किसके लिए | क्या कीजिए |
|---|---|
| जो बहुत पीछे हैं | इनसे तीन ही चीज़ें पक्की करवाइए: (1) कार्य के स्वभाव से तीन क्षेत्रक, हर एक का एक उदाहरण; (2) 2017–18 में उत्पादन में तृतीयक सबसे आगे, पर रोज़गार में प्राथमिक सबसे बड़ा, 44 प्रतिशत; (3) संगठित और असंगठित का भेद, कान्ता और कमल से। सारे आँकड़े मत रटवाइए; 44 और लगभग 83 काफ़ी हैं। |
| औसत बच्चे | इनसे दो तालिकाएँ पक्की करवाइए: पृष्ठ 27 की गतिविधि वाली तालिका (कालांश 5) और पृष्ठ 31 की तालिका का हिसाब (कालांश 7)। साथ में लक्ष्मी के उदाहरण से छिपी हुई बेरोज़गारी, क्योंकि प्रश्नावली के प्रश्न 10 और 11 इसी पर हैं। |
| तेज़ बच्चे | (1) प्रश्नावली के प्रश्न 24 की गणना और दंड-आलेख; (2) प्रश्न 23 की तालिका से अपने निष्कर्ष; (3) नीचे “प्रोजेक्ट और गतिविधि” में दूसरा प्रोजेक्ट, दो कामगारों से बातचीत। |
| जो बोलने में झिझकते हैं | कालांश 1 और 10 की पर्चियाँ बिना नाम की हैं; इनकी बात वहीं से कक्षा तक पहुँचती है। समूह के काम में इन्हें लिखने वाला बनाइए, और बोर्ड पर इनकी पंक्ति आप पढ़कर सुनाइए। |
सतत मूल्यांकन
| साधन | कब | क्या देखिए |
|---|---|---|
| निकास-पर्ची | हर कालांश के आख़िरी चार-पाँच मिनट | दिन की एक मुख्य बात पकड़ में आई या नहीं |
| कामों का चार्ट | कालांश 1, फिर हर नया काम | काम को कार्य के स्वभाव से सही खाने में रख पाता है या नहीं |
| तालिका 2.1 की पंक्तियाँ | कालांश 1 | एक क्षेत्रक रुके, तो दूसरे पर असर बता पाता है या नहीं |
| अंतिम वस्तुओं का हिसाब | कालांश 2 | सिर्फ़ अंतिम वस्तुओं का मूल्य जोड़ पाता है या नहीं |
| आलेख 2 और 3 पर अनुमान | कालांश 5 | उत्पादन और रोज़गार के हिस्से को अलग-अलग पढ़ पाता है या नहीं |
| पृष्ठ 31 की तालिका का हिसाब | कालांश 7 | खाली खाने और प्रतिशत निकाल पाता है या नहीं |
| प्रश्न 23 की तालिका | कालांश 8 | श्रमिकों के हिस्से की आय के हिस्से से तुलना कर पाता है या नहीं |
| कॉपी का पहला पन्ना | कालांश 1 से 9 | तीनों आधार और उनके नतीजे जुड़ते जा रहे हैं या नहीं |
| पर्चियों वाली चर्चा | कालांश 10 | एक ही काम को तीनों आधारों पर बाँट पाता है या नहीं |
लिखित मूल्यांकन
अपनी इकाई-परीक्षा के लिए एक सुझाया हुआ ढाँचा; अंक अपनी ज़रूरत के हिसाब से बदल लीजिए।
| प्रकार | अंक | क्या पूछें |
|---|---|---|
| वस्तुनिष्ठ | 1 | तीनों क्षेत्रकों के उदाहरण, स.घ.उ. की परिभाषा, बाँटने के तीन आधार |
| अति लघूत्तरीय | 2 | अंतिम वस्तु, जी.वी.ए., छिपी हुई बेरोज़गारी, काम का अधिकार |
| लघूत्तरीय | 3 | तृतीयक क्षेत्रक के बढ़ने के कारण, सेवा क्षेत्रक के दो तरह के लोग, सार्वजनिक और निजी का भेद |
| संख्यात्मक या तालिका-आधारित | 3 | पृष्ठ 31 या प्रश्न 23 जैसी तालिका के खाली खाने और प्रतिशत, अंतिम वस्तुओं से उत्पादन का मूल्य |
| दीर्घ उत्तरीय | 5 | संगठित और असंगठित की तुलना, असंगठित श्रमिकों का संरक्षण, सरकार किन चीज़ों पर और क्यों ख़र्च करती है |
| केस-आधारित | 4 | लक्ष्मी जैसे किसी परिवार का हाल देकर पूछिए: यह किस तरह की बेरोज़गारी है, और किताब के कौन-से उपाय काम आएँगे |
अंक कैसे कटेंगे, यह पहले ही बता दीजिए
- तालिका के खाली खाने या प्रतिशत में सिर्फ़ उत्तर लिखा, हिसाब नहीं, तो आधा उत्तर।
- तुलना वाले प्रश्न में, जैसे संगठित और असंगठित, या खुली और छिपी बेरोज़गारी, सिर्फ़ एक पक्ष लिखा, तो आधा उत्तर।
- आलेख 2 और आलेख 3 मिला दिए, यानी उत्पादन का हिस्सा रोज़गार का हिस्सा मान लिया, तो पूरा तर्क उलटी दिशा में जाता है। इसलिए हर आलेख-प्रश्न में पहले पूछने की आदत डालिए: यह आलेख उत्पादन का है या रोज़गार का?
प्रोजेक्ट और गतिविधि
| # | प्रोजेक्ट | कैसे |
|---|---|---|
| 1 | हमारे क्षेत्र में अल्प बेरोज़गारी (किताब का हाशिये का प्रश्न, पृष्ठ 28) | अपने क्षेत्र में देखिए कि किस समूह के लोग बेरोज़गार या अल्प बेरोज़गार हैं, जैसे वर्षा पर निर्भर छोटे किसान परिवार या शहर के अनियत श्रमिक। हर समूह के आगे किताब का एक उपाय लिखिए: सिंचाई, सड़क और भण्डारण, सस्ता साख, या अर्द्ध-ग्रामीण उद्योग। |
| 2 | दो कामगारों से बातचीत (किताब की गतिविधि, पृष्ठ 31) | संगठित क्षेत्रक के एक नियमित कर्मचारी और असंगठित क्षेत्रक के एक व्यक्ति से पूछिए: काम के घंटे, वेतन कब और कैसे मिलता है, छुट्टी और सवेतन अवकाश, भविष्य निधि और चिकित्सीय लाभ, नियुक्ति-पत्र, और काम से हटाए जाने का डर। उत्तर दो कॉलम में लिखकर तुलना कीजिए। नाम मत लिखिए। |
| 3 | ग्राम प्रधान की सूची (किताब की गतिविधि, पृष्ठ 29) | मान लीजिए आप ग्राम प्रधान हैं। अपने गाँव या मोहल्ले के लिए ऐसे पाँच काम सुझाइए जिनसे लोगों को मज़दूरी मिले और बाद में भूमि से उत्पादन भी बढ़े, जैसे कुआँ, तालाब, पक्की सड़क या अनाज का भण्डार। हर काम के आगे लिखिए कि उससे किसे फ़ायदा होगा। |
| 4 | आसपास के काम, तीन आधार (प्रश्नावली का प्रश्न 8) | जीविका के लिए काम करने वाले आसपास के वयस्कों के कामों की लंबी सूची बनाइए। चार कॉलम: काम, कार्य का स्वभाव, रोज़गार की परिस्थिति, स्वामित्व। सूची कक्षा के चार्ट से मिलाइए। |
| 5 | सुव्यवस्थित और कुव्यवस्थित (प्रश्नावली का प्रश्न 19) | अपने क्षेत्र से सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रकों का एक अच्छे प्रबंध वाला और एक ख़राब प्रबंध वाला संगठन चुनिए, और हर एक के आगे एक कारण लिखिए। फिर चर्चा कीजिए: क्या अच्छा प्रबंध मालिक से तय होता है? |
शिक्षक के लिए पाँच सावधानियाँ
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किसी बच्चे के घर का काम, आय या जाति कक्षा में मत पूछिए। पहले दिन की पर्चियाँ इसीलिए बिना नाम की हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों वाली बात किताब के शब्दों में रखिए, और उदाहरण किताब के लीजिए: लक्ष्मी, कान्ता, कमल।
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किसी काम को छोटा मत बनने दीजिए। कबाड़ उठाने वाले, सिर पर बोझा ढोने वाले या अपने खेत पर काम करने वाले किसान की बात हो, तो सवाल उनके काम की शर्तों का है, उनकी क़ीमत का नहीं। ओडिशा और मध्य प्रदेश के आँकड़े भी वहाँ की सुविधाओं की हालत बताते हैं, वहाँ के लोगों की नहीं।
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इसे किसी मौजूदा राजनीतिक बहस से मत जोड़िए। म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ. और 2025 के नए अधिनियम के बारे में उतना ही पढ़ाइए जितना किताब कहती है। एयर इण्डिया की बात में सिर्फ़ उसका मालिक बदलना काफ़ी है। किसी दल या नेता का नाम कक्षा में मत लाइए।
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आँकड़ों में मत उलझिए, पर किताब के छपे हुए अंतर पहचान लीजिए। इस अध्याय में कुछ जगह पाठ और आलेख या तालिका अलग बात कहते हैं, या छपाई में चूक है: पृष्ठ 23 का “(माध्यमिक, द्वितीयक और तृतीयक)”, पृष्ठ 24 की गतिविधि और पृष्ठ 34 के सारांश के “तीस वर्षों” (आलेख चालीस वर्ष के हैं), पृष्ठ 25 का “वर्ष 2003”, पृष्ठ 26 का “आधे से अधिक श्रमिक”, और पृष्ठ 28 का “अध्याय–4”। आलेख 1 और 2 पर मान भी नहीं छपे। प्रश्न 24 में “वर्ष 2000 एवं 2013” छपा है, पर तालिका 2001–02 और 2021–22 की है; गणना तालिका के सालों के लिए करवाइए। हर जगह बच्चों से आलेख 3 और तालिकाओं के आँकड़े पढ़वाइए; कार्डों के “यहाँ बच्चे अटकेंगे” में बाक़ी हर अंतर लिखा है।
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पहले दिन की पर्चियाँ और चार्ट दसों दिन सँभाले रहिए। यही इस अध्याय का सवाल है: यह काम किस तरह का है, किन शर्तों पर होता है, और इसका मालिक कौन है? लिफ़ाफ़ा कालांश 10 तक बंद रहे, और चार्ट दीवार पर टँगा रहे, तो हर कालांश में उसी की ओर लौट सकते हैं। कालांश 10 में बच्चे अपनी ही पर्चियों के कामों को इन तीन सवालों पर परखें।