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प्रारूप: प्रश्न (सामने) | उत्तर (पीछे) — कक्षा-क्विज़ या प्रिंट हेतु
समूह 1 — काल, पृष्ठभूमि व लिपि
| सामने | पीछे |
|---|---|
| इस अध्याय का काल-विस्तार? | लगभग 600 ई.पू. से 600 ई. |
| हड़प्पा के बाद कितने वर्ष का अंतराल? | लगभग डेढ़ हज़ार वर्ष |
| इसी काल में कौन-सा ग्रंथ लिखा गया? | ऋग्वेद |
| महापाषाण (Megalith) शवाधान क्या हैं? | पत्थरों के बड़े ढाँचे; पहली सहस्राब्दि ई.पू.; शवों के साथ लोहे के उपकरण-हथियार |
| ब्राह्मी-खरोष्ठी का अर्थ किसने निकाला? | जेम्स प्रिंसेप (1830 का दशक) |
| ब्राह्मी का अर्थ किस वर्ष निकाला गया? | 1838 ई. |
| ‘पियदस्सी’ का अर्थ? | मनोहर मुखाकृति वाला |
| ‘देवानांपिय’ का अर्थ? | देवताओं का प्रिय |
| अभिलेखशास्त्र (Epigraphy) क्या है? | अभिलेखों का अध्ययन |
| तिथि न हो तो काल-निर्धारण कैसे? | पुरालिपि (Palaeography) व लेखन शैली से |
| प्राचीनतम अभिलेख किस भाषा में? | प्राकृत — जनसामान्य की भाषाएँ |
| ब्राह्मी का महत्त्व? | आधुनिक भारतीय भाषाओं की लगभग सभी लिपियों का मूल |
| खरोष्ठी कैसे पढ़ी गई? | हिंद-यूनानी सिक्कों पर यूनानी + खरोष्ठी दोनों में नाम → अक्षरों का मेल (अपोलोडोटस) |
समूह 2 — महाजनपद
| सामने | पीछे |
|---|---|
| महाजनपदों की संख्या? | सोलह |
| बार-बार मिलने वाले नाम? | वज्जि, मगध, कोशल, कुरु, पांचाल, गांधार, अवन्ति |
| ‘जनपद’ का अर्थ? | वह भूखंड जहाँ कोई जन (लोग/कुल/जनजाति) बस जाता है |
| शासन के दो प्रकार? | राजतंत्र तथा गण/संघ |
| गण/संघ की विशेषता? | कई लोगों का समूह शासन; प्रत्येक व्यक्ति राजा कहलाता |
| महावीर व बुद्ध किससे संबंधित? | गणों से |
| वज्जि संघ की विशेषता? | भूमि सहित आर्थिक स्रोतों पर सामूहिक नियंत्रण |
| ओलीगार्की क्या है? | सत्ता पुरुषों के एक समूह के हाथ में |
| धर्मशास्त्र किसने और कब लिखे? | ब्राह्मणों ने; लगभग छठी श. ई.पू. से; संस्कृत में |
| धर्मशास्त्रों की शासक से अपेक्षा? | वह क्षत्रिय वर्ण से हो |
| गण-राज्य कितने समय तक बने रहे? | लगभग एक हज़ार साल |
समूह 3 — मगध व मौर्य
| सामने | पीछे |
|---|---|
| मगध के उत्थान के 4 भौतिक कारण? | अच्छी उपज • लोहे की खदानें • हाथी • गंगा व उपनदियाँ |
| लोहे की खदानें आज किस राज्य में? | झारखंड |
| जैन-बौद्ध लेखकों की व्याख्या? | शासकों की नीतियाँ — बिंबिसार, अजातसत्तु, महापद्मनंद |
| ‘राजगाह’ का अर्थ व आधुनिक नाम? | ‘राजाओं का घर’; आधुनिक राजगीर |
| पाटलिपुत्र कब राजधानी बना? | चौथी शताब्दी ई.पू. (पृ. 31) — पृ. 42 के बॉक्स में राजधानी ले जाने का निर्णय पाँचवीं सदी ई.पू. में बताया गया है |
| मौर्य साम्राज्य का संस्थापक व वर्ष? | चंद्रगुप्त मौर्य, लगभग 321 ई.पू. |
| मेगस्थनीज़ कौन था? | चंद्रगुप्त के दरबार में आया यूनानी राजदूत |
| अर्थशास्त्र का रचयिता? | कौटिल्य/चाणक्य (कुछ भाग) — चंद्रगुप्त के मंत्री |
| मौर्य का सबसे मूल्यवान स्रोत? | असोक के अभिलेख |
| धम्म के चार तत्व? | बड़ों का आदर • संन्यासी-ब्राह्मणों के प्रति उदारता • सेवक-दासों से उदार व्यवहार • दूसरे के धर्मों का आदर |
| धम्म-प्रचार के अधिकारी? | धम्म महामात्त |
| पाँच राजनीतिक केंद्र? | पाटलिपुत्र (राजधानी) + तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि, सुवर्णगिरि |
| ‘सुवर्णगिरि’ का अर्थ व महत्त्व? | ‘सोने के पहाड़’; कर्नाटक में सोने की खदान हेतु |
| तक्षशिला-उज्जयिनी क्यों चुने गए? | लंबी दूरी वाले महत्त्वपूर्ण व्यापार मार्ग पर स्थित |
| मेगस्थनीज़ की सैन्य-समितियाँ? | एक समिति व छह उपसमितियाँ |
| छह उपसमितियों के कार्य? | नौसेना • यातायात-खान-पान • पैदल • अश्वारोही • रथारोही • हाथी |
| यूनानी विवरण के अनुसार मौर्य सेना? | 6 लाख पैदल, 30 हज़ार घुड़सवार, 9 हज़ार हाथी (कुछ इतिहासकार अतिशयोक्तिपूर्ण मानते हैं) |
| मौर्य साम्राज्य कितने वर्ष चला? | लगभग डेढ़ सौ साल |
| असोक के अभिलेखों की भाषाएँ? | प्राकृत; पश्चिमोत्तर में अरामेइक व यूनानी |
| असोक के अभिलेखों की लिपियाँ? | ब्राह्मी, खरोष्ठी; अफ़ग़ानिस्तान में यूनानी-अरामेइक |
समूह 4 — राजधर्म के नवीन सिद्धांत
| सामने | पीछे |
|---|---|
| सरदार व राजा में मुख्य अंतर? | सरदार भेंट लेता है, राजा कर वसूलते हैं; सरदारी में स्थायी सेना नहीं |
| सरदार के तीन कार्य? | विशेष अनुष्ठान का संचालन • युद्ध में नेतृत्व • विवादों में मध्यस्थता |
| ‘तमिलकम’ में कौन-सी सरदारियाँ? | चोल, चेर और पाण्ड्य |
| तमिलकम में कौन-से क्षेत्र? | तमिलनाडु + आंध्र प्रदेश व केरल के कुछ हिस्से |
| दक्षिण के सरदारों का स्रोत? | प्राचीन तमिल संगम ग्रंथ |
| सातवाहन का काल व क्षेत्र? | लगभग द्वितीय श. ई.पू. – द्वितीय श. ई.; मध्य व पश्चिम भारत |
| शक शासकों का मूल? | मध्य एशियाई |
| कुषाण की विशालकाय मूर्तियाँ कहाँ? | माट (मथुरा के पास) तथा अफ़ग़ानिस्तान के देवस्थान पर |
| कुषाण उपाधि व प्रेरणा? | ‘देवपुत्र’; संभवतः चीनी शासकों (‘स्वर्गपुत्र’) से प्रेरित |
| प्रयाग प्रशस्ति का रचयिता? | हरिषेण — समुद्रगुप्त के राजकवि; संस्कृत में |
| समुद्रगुप्त की तुलना किन देवताओं से? | कुबेर, वरुण, इंद्र, यम |
| सामंत कौन थे? | स्थानीय संसाधनों से निर्वाह करने वाले; शासक को सैनिक सहायता देते; शक्तिशाली होने पर राजा बन जाते |
| प्रशस्तियों पर इतिहासकार की सावधानी? | रचयिता इन्हें तथ्यात्मक नहीं, काव्यात्मक ग्रंथ मानते थे |
समूह 5 — बदलता हुआ देहात
| सामने | पीछे |
|---|---|
| जनता के विचार जानने के स्रोत? | जातक और पंचतंत्र की कथाएँ |
| जातक कथाएँ किस भाषा-काल में? | पालि; पहली सहस्राब्दि ई. के मध्य |
| गंदतिन्दु जातक की मुख्य शिकायत? | रात में डकैत, दिन में कर वसूलने वाले अधिकारी |
| गंदतिन्दु जातक में प्रजा ने संकट से बचने का क्या उपाय किया? | गाँव छोड़कर जंगल में बस गए |
| उपज बढ़ाने के मुख्य तरीके? | हल का प्रचलन • लोहे के फाल • धान की रोपाई • सिंचाई |
| धान की रोपाई की विधि? | बीज अंकुरित कर पानी भरे खेतों में पौध रोपना → अधिक पौध बचती है |
| लोहे के हल की सीमा? | उपमहाद्वीप के कुछ ही हिस्सों तक; पंजाब-राजस्थान में बीसवीं सदी में शुरू |
| पर्वतीय व पूर्वोत्तर क्षेत्रों का औज़ार? | कुदाल |
| सुदर्शन झील कहाँ और किस प्रकार की? | गुजरात (गिरनार); कृत्रिम जलाशय |
| सुदर्शन झील का निर्माण किस काल में? | मौर्य काल; एक स्थानीय राज्यपाल द्वारा |
| रुद्रदमन ने क्या विशेष किया? | अपने खर्चे से मरम्मत करवाई; प्रजा से कर नहीं लिया |
| सुदर्शन झील की दूसरी मरम्मत? | लगभग पाँचवीं सदी; गुप्त वंश के एक शासक द्वारा |
| ‘गहपति’ कौन? | घर का मुखिया; महिलाओं-बच्चों-नौकरों-दासों व संपत्ति पर नियंत्रण |
| तमिल: वेल्लालर, उणवर, अणिमई? | बड़े ज़मींदार • हलवाहा • दास |
| ग्राम प्रधान का पद कैसा था? | प्रायः वंशानुगत |
| मनुस्मृति का काल व भाषा? | दूसरी श. ई.पू. – दूसरी श. ई.; संस्कृत |
| मनुस्मृति में सीमा-चिह्न किसके? | पत्थर, हड्डियाँ, गाय के बाल, भूसी, राख, खपटे, गोबर, ईंट, कोयला, कंकड़, रेत |
| भूमिदान के अभिलेख किस पर? | अधिकांश ताम्र पत्रों पर; कुछ पत्थरों पर |
| भूमिदान किसे दिए जाते थे? | धार्मिक संस्थाओं या ब्राह्मणों को |
| ‘अग्रहार’ क्या? | ब्राह्मणों को दान किया भूभाग; कर से मुक्त; स्वयं कर वसूलने का अधिकार |
| प्रभावती गुप्त कौन? | चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री; विवाह वाकाटक परिवार में |
| प्रभावती का उदाहरण क्यों विशेष? | धर्मशास्त्रों के विपरीत वह भूमि की स्वामी थी और उसने दान भी किया |
| प्रभावती गुप्त के उदाहरण की दो व्याख्याएँ? | (1) वह रानी थी → विरला उदाहरण (2) धर्मशास्त्र हर जगह समान रूप से लागू नहीं होते थे |
| दंगुन गाँव का अभिलेख किसने उत्कीर्ण किया? | चक्रदास; 13वें राज्य वर्ष में |
| भूमिदान पर दो मत? | (1) कृषि-विस्तार की रणनीति (2) दुर्बल होते राजनीतिक प्रभुत्व का संकेत |
| नियंत्रण से बाहर के लोग कौन? | पशुपालक, संग्राहक, शिकारी, मछुआरे, शिल्पकार, घुमक्कड़ — विवरण नहीं रखते थे |
| हर्षचरित के लेखक व विषय? | बाणभट्ट; हर्षवर्धन की जीवनी; विंध्य क्षेत्र के गाँव का चित्रण |
समूह 6 — नगर, व्यापार व सिक्के
| सामने | पीछे |
|---|---|
| नगरों का विकास कब? | लगभग छठी शताब्दी ई.पू. |
| नदीमार्ग व भूतल मार्ग के नगर? | पाटलिपुत्र (नदी); उज्जयिनी (भूतल) |
| समुद्रतट पर बसा नगर? | पुहार |
| पाटलिपुत्र किस गाँव से विकसित? | पाटलिग्राम |
| मगध शासकों ने राजधानी राजगाह से पाटलिपुत्र ले जाने का निर्णय कब किया? | पाँचवीं सदी ई.पू. (पृ. 42 का बॉक्स); चौथी शताब्दी ई.पू. तक यह मौर्य साम्राज्य की राजधानी बन चुका था |
| श्वैन त्सांग को पाटलिपुत्र कैसा मिला? | खंडहर में बदला; जनसंख्या भी कम |
| नगरों की खुदाई की सीमा? | आज भी वहाँ लोग रहते हैं (हड़प्पा शहरों से भिन्न) |
| NBPW का पूरा नाम? | उत्तरी कृष्ण मार्जित पात्र (Northern Black Polished Ware) |
| दानात्मक अभिलेखों की विशेषता? | दाता के नाम के साथ प्रायः उसका व्यवसाय भी |
| ‘श्रेणी’ क्या थी? | उत्पादकों व व्यापारियों का संघ; कच्चा माल खरीद → सामान बनाकर बेचना |
| सफल व्यापारी के नाम (तमिल/प्राकृत)? | मसत्तुवन; सत्थवाह व सेट्ठी |
| रोमन साम्राज्य में किसकी माँग? | काली मिर्च जैसे मसाले, कपड़े, जड़ी-बूटियाँ |
| पेरिप्लस व एरीथ्रियन का अर्थ? | समुद्री यात्रा; लाल सागर |
| पेरिप्लस किसने और कब लिखा? | यूनानी समुद्र यात्री; लगभग प्रथम शताब्दी ई. |
| कोडुमनाल किसलिए प्रसिद्ध? | मूँगों के उद्योग के पुरातात्त्विक साक्ष्य (तमिलनाडु) |
| सबसे पहले ढाले गए सिक्के? | आहत सिक्के (छठी श. ई.पू.; चाँदी-ताँबा) |
| ‘आहत’ नाम क्यों? | प्रतीकों को आहत कर (ठप्पा मारकर) बनाया जाता था |
| प्रतिमा वाले पहले सिक्के किसने जारी किए? | हिंद-यूनानी शासकों ने (द्वितीय श. ई.पू.) |
| कुषाण सोने के सिक्कों की विशेषता? | आकार-वजन रोमन व पार्थियन सिक्कों के समान |
| दक्षिण भारत में रोमन सिक्के क्या सिद्ध करते हैं? | व्यापारिक तंत्र राजनीतिक सीमाओं से बँधा नहीं था |
| यौधेय कौन थे? | पंजाब-हरियाणा के कबायली गणराज्य (प्रथम श. ई.); ताँबे के हज़ारों सिक्के |
| मुद्राशास्त्र क्या है? | सिक्कों + उन पर के चित्र-लिपि + धातु-विश्लेषण + प्राप्ति-संदर्भ का अध्ययन |
| छठी श. ई. से सोने के सिक्के कम — दो मत? | (1) रोमन पतन से दूरवर्ती व्यापार में कमी (2) नए नगर व तंत्र; सिक्के प्रचलन में थे, संग्रह नहीं हुए |
| मेनाण्डर कौन था? | हिंद-यूनानी शासक (चित्र 2.12 का सिक्का) |
समूह 7 — अभिलेख की सीमा व इतिहास-लेखन
| सामने | पीछे |
|---|---|
| असोक के अभिलेख में नाम है या उपाधि? | केवल उपाधियाँ — देवानांपिय, पियदस्सी |
| अभिलेखशास्त्रियों ने एक ही शासक कैसे माना? | विषय, शैली, भाषा व पुरालिपिविज्ञान में समानता |
| ‘पतिवेदक’ का अर्थ? | संवाददाता |
| कलिंग युद्ध कब हुआ? | असोक के शासन के आठ वर्ष पूरे होने पर |
| कलिंग के आँकड़े? | डेढ़ लाख निष्कासित; एक लाख मारे गए; इससे भी ज्यादा की मृत्यु |
| कलिंग-वेदना वाले अभिलेख की विशेष बात? | वह अभिलेख उड़ीसा में नहीं मिला — जहाँ विजय प्राप्त की गई थी |
| अभिलेख की तकनीकी सीमाएँ? | हलका उत्कीर्णन; अभिलेखों का नष्ट होना |
| अभिलेख की सबसे महत्त्वपूर्ण सीमा? | वे हमेशा उन्हीं के विचार व्यक्त करते हैं जो उन्हें बनवाते थे |
| कौन-सी बातें अभिलेखों में नहीं मिलतीं? | खेती की दैनिक प्रक्रियाएँ व रोज़मर्रा के सुख-दुख |
| उपलब्ध अभिलेख कुल का कितना भाग? | संभवतः अंश मात्र |
| इतिहास-लेखन की बदलती रुचि? | राजाओं का इतिहास → आर्थिक-सामाजिक परिवर्तन → हाशिए के समुदाय |
| बंगाल एशियाटिक सोसाइटी का गठन? | 1784 |
| कोलिन मैकेंज़ी ने कितने अभिलेख एकत्र किए? | 8,000 (संस्कृत व तमिल); 1810 का दशक |
| एपिग्राफ़िआ कर्नाटिका व इंडिका के प्रथम अंक? | 1886 तथा 1888 |
| डी.सी. सरकार का योगदान? | 1965-66 में इंडियन एपिग्राफ़ी एंड इंडियन एपिग्राफ़िकल ग्लोसरी |
समूह 8 — काल रेखा 1 (रैपिड-फायर)
| सामने | पीछे |
|---|---|
| सिकंदर का आक्रमण? | लगभग 327-325 ई.पू. |
| असोक का शासन? | लगभग 272/268-231 ई.पू. |
| मौर्य साम्राज्य का अंत? | लगभग 185 ई.पू. |
| कनिष्क का राज्यारोहण? | लगभग 78 ई. (तिथि निश्चित नहीं) |
| गुप्त शासन का आरंभ? | लगभग 320 ई. |
| समुद्रगुप्त का काल? | लगभग 335-375 ई. |
| चंद्रगुप्त द्वितीय का काल? | लगभग 375-415 ई. |
| हर्षवर्धन का काल? | लगभग 606-647 ई. |
| अरबों की सिंध पर विजय? | लगभग 712 ई. |
| चालुक्य व पल्लव का उदय? | लगभग 500-600 ई. |
| भूमिदान के आरंभिक अभिलेखीय प्रमाण? | लगभग 100-200 ई. (सातवाहन व शक शासक) |
प्रयोग-सुझाव (शिक्षक हेतु)
- समूह 8 (काल रेखा) पर विशेष बल दें — RBSE में वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रायः यहीं से आते हैं।
- कक्षा में मौखिक रैपिड-फायर (समूह-प्रतियोगिता) कराएँ; प्रत्येक कालांश के अंत में 2 मिनट।
- पुनरावृत्ति-क्रम: पाठ समाप्ति पर पूरा सेट → साप्ताहिक 15 कार्ड → परीक्षा-पूर्व पूर्ण सेट।
- अध्याय 1 के फ्लैश कार्ड्स के साथ मिलाकर तुलनात्मक क्विज़ भी कराई जा सकती है (लिपि, नगर, साक्ष्य)।
सुधार, 5 अक्टूबर 2026 — पहले इस डेक के दो कार्ड एक ही प्रश्न (“पाटलिपुत्र कब राजधानी बना?”) के दो अलग उत्तर देते थे। दोनों बातें पाठ्यपुस्तक में हैं — पृ. 31 पर चौथी शताब्दी ई.पू., और पृ. 42 के बॉक्स में पाँचवीं सदी ई.पू. में राजधानी ले जाने का निर्णय। अब दोनों कार्ड साफ़ बताते हैं कि कौन-सी बात कहाँ लिखी है।