अध्याय 4इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत

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NCERT — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, अध्याय 4, पृ. 59–74।

फ़ाइल: fhes104.pdf (16 पृष्ठ) · संस्करण: पुनर्मुद्रण 2026-27 विषय (ख) — अतीत के चित्रपट · इस विषय का पहला अध्याय

0. यह अध्याय किस बारे में है

यह पुस्तक का पहला इतिहास-अध्याय है, और यह इतिहास पढ़ाता ही नहीं। यह इतिहास पढ़ने के औज़ार देता है। कोई राजा नहीं, कोई युद्ध नहीं, कोई साम्राज्य नहीं — केवल दो प्रश्न:

1. हम अतीत का समय कैसे नापें? (समय-रेखा और तिथि-गणना) 2. हमें अतीत का पता चलता कैसे है? (स्रोत)

और फिर, इन दोनों औज़ारों को आज़माने के लिए, अंत में एक छोटा-सा अभ्यास — आदिमानव की कहानी।

अध्याय का ढाँचा ठीक इसी क्रम में है:

भागप्रश्नपृष्ठ
1हम अतीत का अध्ययन किस प्रकार करते हैं? — चार विशेषज्ञ60–61
2इतिहास में समय की गणना किस प्रकार की जाती है? — सा.सं.पू./सा.सं., शताब्दी, सहस्राब्दी61–65
3इतिहास के स्रोत क्या-क्या हैं? — चार प्रकार के स्रोत65–69
4मानव इतिहास का प्रारंभ — आदिमानव से गाँव तक70–73

अध्याय का असली सबक पृ. 67–68 पर छिपा है और वह यह है:

इतिहास एक चित्र-खंड पहेली (जिग्सॉ) है जिसके कुछ टुकड़े हमेशा गायब रहेंगे। स्रोत कभी एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं, कभी एक-दूसरे को काटते हैं — और तब इतिहासकार को निर्णय लेना पड़ता है कि किस पर अधिक विश्वास किया जाए।

यही वाक्य इस अध्याय को याद रखने लायक बनाता है: इतिहास तथ्यों की सूची नहीं, पुनर्निर्माण है।

1. अध्याय का आरंभ (पृ. 59)

उद्धरण (पृ. 59)

इतिहास “अतीत एवं वर्तमान के मध्य एक अनवरत संवाद है। यह संवाद है, आज के समाज एवं कल (बीते समय) के समाज के मध्य… हम अतीत के आलोक में ही वर्तमान समाज को पूर्णत: समझ सकते हैं।” — ई.एच. कार

आवरण-चित्र: राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली। शीर्षक-पंक्ति — “ऐसे संग्रहालयों में अतीत से संबंधित उन वस्तुओं (जैसे — मूर्ति, सिक्के और आभूषण आदि) को संरक्षित किया जाता है, जो हमें अपने इतिहास को समझने में सहायक सिद्ध होती हैं।”

महत्वपूर्ण प्रश्न (पृ. 59) — अध्याय की रीढ़

  1. हम ऐतिहासिक काल की गणना किस प्रकार करते हैं?
  2. इतिहास को समझने के लिए विभिन्न स्रोत हमारी किस प्रकार सहायता कर सकते हैं?
  3. आदिमानव किस प्रकार रहते थे?

यह अध्याय अपने तीनों प्रश्नों का उत्तर ठीक उसी क्रम में देता है — यह पुस्तक के दूसरे अध्यायों में हमेशा नहीं होता। इसलिए यही तीन प्रश्न अध्याय का सर्वोत्तम सारांश-ढाँचा हैं।

2. हम अतीत का अध्ययन किस प्रकार करते हैं? (पृ. 60–61)

आइए विचार करें (बॉक्स, पृ. 60)

  • आपकी अपने अतीत की सबसे पुरानी स्मृति कौन-सी है? क्या आपको याद है कि उस समय आपकी आयु क्या थी? संभवत: पाँच या छह वर्ष पूर्व तक की यह सभी स्मृतियाँ आपके अतीत का हिस्सा हैं।
  • आपको क्या लगता है, अतीत को समझने से हमें वर्तमान विश्व को समझने में कैसे सहायता मिलेगी?

हाशिये की परिभाषा (पृ. 60)

पदपरिभाषा (पुस्तक के अपने शब्द)
इतिहासमानव के अतीत का अध्ययन।
  • पुस्तक का वाक्य: “पृथ्वी का एक बहुत ही लंबा इतिहास है जिसमें से हम मानवों का इतिहास नवीनतम और एक छोटा-सा भाग है।”

चित्र 4.1 (पृ. 60) — पृथ्वी पर जीवन के विकास/उद्भव के कुछ प्रमुख चरणों की समय-रेखा★

यह एक वृत्ताकार समय-रेखा है जिसमें तीन रंग तीन अलग-अलग समय-पैमाने दर्शाते हैं —

रंगपैमाना
हल्का नीलाअरबों वर्ष पूर्व
गहरा नीलाकरोड़ों वर्ष पूर्व
हरावर्षों पूर्व

अंकित पड़ाव (जैसे छपे हैं):

मानघटना
4.54 (अरबों वर्ष पूर्व)पृथ्वी; प्रथम कोशिकाएँ
2.33 (अरबों वर्ष पूर्व)वातावरणीय ऑक्सीजन
1 (अरबों वर्ष पूर्व)जीवाणु
700 (करोड़ों वर्ष पूर्व के बैंड में)स्पंज एवं कवक
500प्रवाल
300मछली कशेरुकी, उभयचर कीट, शार्क
100सरीसृप डायनासोर, पक्षी, स्तनपायी, फूल एवं मधुमक्खियाँ
10,000,000 (वर्षों पूर्व)आदिमानव
1,000,000अग्नि
300,000होमो सेपियंस (मानव)
6,500लेखन

इस चित्र का पूरा उद्देश्य एक ही है — अनुपात दिखाना। हरे रंग का हिस्सा (मानव का पूरा इतिहास) इतना छोटा है कि उसे वृत्त से बाहर निकालकर आवर्धक काँच में दिखाना पड़ा है। कक्षा में यही दिखाइए, संख्याएँ मत रटवाइए।

अतीत का अध्ययन करने वाले चार विशेषज्ञ (चित्र 4.2.1–4.2.4, पृ. 61)★

पुस्तक का ढाँचा: “अनेक लोग पृथ्वी के इतिहास का अध्ययन करते हैं। उनमें से कुछ लोग पृथ्वी की सतह के नीचे के रहस्यों को जानने के लिए प्रशिक्षित होते हैं।”

विशेषज्ञचित्रक्या अध्ययन करते हैं (पुस्तक के शब्द)
भू-विज्ञानी4.2.1पृथ्वी के भौतिक स्वरूपों जैसे — मृदा, पत्थरों, पहाड़ियों, पर्वतों, नदियों, महासागरों एवं पृथ्वी के अन्य हिस्सों का अध्ययन
जीवाश्म विज्ञानी4.2.2जीवाश्म के रूप में करोड़ों वर्ष पूर्व के पेड़ों, पशुओं एवं मानवों के अवशेषों का अध्ययन
मानव विज्ञानी4.2.3मानव समाजों एवं संस्कृतियों का अतीत से लेकर वर्तमान तक अध्ययन
पुरातत्व विज्ञानी4.2.4मानव, पौधों एवं पशुओं द्वारा छोड़े गए अवशेषों का उत्खनन करके अतीत का अध्ययन — उपकरण, घड़े, पात्र, मनके, मूर्तियाँ, खिलौने, हड्डियाँ, पशुओं और मानव के दाँत, जले हुए अनाज, घरों एवं ईंटों के हिस्से एवं अन्य वस्तुएँ

हाशिये की परिभाषा (पृ. 61)

पदपरिभाषा (पुस्तक के अपने शब्द)
जीवाश्मजीव-जंतुओं के पदचिह्नों या पौधों के अवशेष चिह्न जो कि मृदा अथवा शिलाओं की परतों के बीच संरक्षित पाए जाते हैं।

★भेद जो परीक्षा में पूछा जाता है: जीवाश्म विज्ञानी करोड़ों वर्ष पुराने जीवों के अवशेष देखता है; पुरातत्व विज्ञानी मानव द्वारा छोड़ी गई वस्तुएँ खोदकर निकालता है; मानव विज्ञानी समाज और संस्कृति देखता है — और वह वर्तमान तक आता है।

3. इतिहास में समय की गणना किस प्रकार की जाती है? (पृ. 61–65)

आरंभ (पृ. 61)

  • प्रत्येक समाज एवं संस्कृति के पास समय की गणना करने की अपनी प्रणालियाँ रही हैं।
  • प्रमुख घटनाएँ जैसे — किसी व्यक्ति विशेष का जन्म अथवा किसी शासक के शासन का आरंभ — एक नए युग का आरंभ माना जाता रहा है।
पदपरिभाषा (पुस्तक के अपने शब्द)
युगसमय का एक निश्चित कालखंड।

ग्रेगोरियन कैलेंडर (हाशिया, पृ. 62)

पदपरिभाषा (पुस्तक के अपने शब्द)
ग्रेगोरियन कैलेंडर (तिथिपत्र)इस कैलेंडर का उपयोग अब विश्व-भर में होता है, जिसमें 365 दिन मिलकर बारह माह का निर्माण करते हैं एवं प्रत्येक चार वर्ष में एक अधिवर्ष होता है। इस प्रकार शताब्दी वर्ष जैसे — 1800, 1900, 2000 आदि सभी अधिवर्ष (लीप वर्ष) होंगे यदि वह 400 से विभाजित हो सकते हों। इसीलिए दिए गए शताब्दी वर्षों में से केवल 2000 ही लीप वर्ष होगा।
मांगलिकअनुकूल अथवा भाग्य लाने वाला शुभ समय, उदाहरणार्थ एक मांगलिक शुरुआत।
  • भारत में सामान्यत: ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग होता है; साथ ही त्योहारों की तिथियों की गणना एवं अन्य मांगलिक कार्यों के लिए हिंदू, मुस्लिम, यहूदी, चीनी आदि अन्य तिथिपत्रों का भी उपयोग होता है।

सा.सं.पू. और सा.सं. — अध्याय का केंद्रीय उपकरण (पृ. 62–63)★

  • पश्चिम में सामान्यत: ईसा मसीह के जन्म वर्ष से कैलेंडर का आरंभ माना जाता है।
  • इस बिंदु से आगे के वर्षों की गणना की जाती है और इसे अंग्रेजी में ‘ए.डी.’ से इंगित किया जाता रहा है। (ए.डी. लैटिन भाषा का एक शब्द-संक्षेप है, जो ईसा के जन्म के बाद के वर्षों को इंगित करता है।)
  • अब विश्व-भर में इसे अंग्रेजी में ‘कॉमन एरा’ अथवा सी.ई. कहा जाता है।
  • ईसा मसीह के जन्म की पारंपरिक तिथि से पूर्व के वर्षों की गणना उल्टे (अवरोही) क्रम में की जाती है; इसे अंग्रेजी में बी.सी. से इंगित किया जाता था, और अब ‘बिफोर कॉमन एरा’ (बी.सी.ई.) से।

★पुस्तक की अपनी घोषणा (पृ. 63): “इस पाठ्यपुस्तक में हमने बी.सी.ई. के लिए सामान्य संवत पूर्व (सा.सं.पू.) तथा सी.ई. के लिए सामान्य संवत (सा.सं.) शब्दों का प्रयोग किया है।”

अंग्रेज़ीपुराना रूपपुस्तक का हिंदी रूप
CE (Common Era)A.D.सा.सं. — सामान्य संवत
BCE (Before Common Era)B.C.सा.सं.पू. — सामान्य संवत पूर्व

उदाहरण जो पुस्तक देती है: भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ — इसे 1947 ई., ई. सन् 1947 अथवा 1947 सी.ई. लिख सकते हैं।

शून्य वर्ष की अनुपस्थिति — और वह सूत्र जो इसी से निकलता है (आइए पता लगाएँ, पृ. 63)★

  • ग्रेगोरियन तिथिपत्र में कोई भी वर्ष ‘शून्य’ के रूप में चिह्नित नहीं किया गया है।
  • वर्ष 1 सा.सं., 1 सा.सं.पू. के तुरंत बाद आता है।
  • 2 सा.सं.पू. से लेकर 2 सा.सं. तक एक समय-रेखा बनाइए — आप देखेंगे कि ‘शून्य वर्ष’ की अनुपस्थिति के कारण इन दो तिथियों के मध्य केवल 3 वर्ष ही होंगे।

★★अध्याय का एकमात्र सूत्र

किसी भी सा.सं.पू. तथा सा.सं. की तिथियों के बीच के वर्षों की गणना करते समय हमें सदैव दोनों को जोड़कर उनके योग में से 1 को घटा देना चाहिए।

ऊपर दी गई स्थिति में 2 + 2 − 1 = 3

पुस्तक का अपना अभ्यास-उदाहरण: “यदि हम महात्मा बुद्ध के प्रश्न पर पुन: लौटें, मान लीजिए हम आज 2024 सा.सं. में हैं, तो महात्मा बुद्ध का जन्म 560 + 2024 − 1 = 2583 वर्ष पूर्व हुआ था।”

यह पूरे अध्याय का सबसे अधिक अंक वाला बिंदु है। अभ्यास-प्रश्न 3 के चारों उप-प्रश्न इसी सूत्र पर टिके हैं। 560 सा.सं.पू. गौतम बुद्ध के जन्म की अनुमानित तिथि है (पुस्तक स्वयं अनुमानित लिखती है; अध्याय 7 में उनके बारे में पढ़ेंगे)।

चित्र 4.3 (पृ. 62–63) — 3,00,000 सा.सं.पू. से कुछ मुख्य घटनाओं की समय-रेखा★

यह दो पृष्ठों पर फैली एक ही समय-रेखा है। बाईं ओर (पृ. 62) तीर पीछे की ओर जाता है, दाईं ओर (पृ. 63) आगे की ओर।

पृ. 62 का भाग — अंकित मान: 3,00,000 सा.सं.पू. · 40,000 सा.सं.पू. · 14,000 सा.सं.पू. लेबल: विश्व में शैल चित्रकारी के प्रथम साक्ष्य (40,000 सा.सं.पू. के पास) · हिम युग

पृ. 63 का भाग — अंकित मान: 12,000 · 10,000 · 8000 · 6000 · 4000 · 2000 सा.सं.पू., फिर 2000 सा.सं.

लेबलकहाँ अंकित है
अंतिम हिम युग का अंत12,000 सा.सं.पू. के पास
प्रथम स्थायी निवास व कृषि का आरंभ8000 सा.सं.पू. के पास
भारतीय उपमहाद्वीप में मिट्टी के बर्तन बनाने की तकनीक6000 सा.सं.पू. के पास
मेसोपोटामिया में संसार का प्रथम नगर4000 सा.सं.पू. के पास
तांबे के प्रथम धातुकर्म का आरंभ4000 सा.सं.पू. के पास
सिंधु-सरस्वती सभ्यता2000 सा.सं.पू. के पास
बुद्ध का जन्म · ईसा का जन्म · अशोक2000 सा.सं.पू. और 2000 सा.सं. के बीच
हम इस काल खंड में हैं (लाल चिह्न)2000 सा.सं. के पास

कक्षा में क्या करवाएँ: पुस्तक पृ. 65 पर पूछती है — “पृष्ठ 62 एवं 63 (चित्र 4.3) में दी गई समय-रेखा में क्या आप आठवीं सहस्राब्दी सा.सं.पू. को चिह्नित कर सकते हैं?” उत्तर: 8000 से 7001 सा.सं.पू. — अर्थात ठीक वह जगह जहाँ ‘प्रथम स्थायी निवास व कृषि का आरंभ’ लिखा है।

समय-रेखा — परिभाषा और उपयोग (पृ. 64)★

  • समय-रेखा घटनाओं को चिह्नित करने के लिए एक सुविधाजनक उपकरण है, क्योंकि यह किसी विशेष अवधि में तिथियों और घटनाओं का अनुक्रम दिखाता है।
  • समय-रेखा पर बिंदुकृत हिस्सा छोड़े गए कालखंड को दर्शाता है; अन्यथा चित्र 4.3 की यह समय-रेखा लगभग 3 मीटर लंबी हो जाती।
  • समय-रेखा ऐतिहासिक घटनाओं के क्रम को समझने में भी सहायक होती है। उदाहरणार्थ, तिथियाँ देखे बिना भी अब आप देख सकते हैं कि बुद्ध का जन्म, ईसा मसीह के जन्म से पहले हुआ था।

अनाम समय-रेखा (पृ. 64): अतीत → 560 सा.सं.पू. (महात्मा बुद्ध का जन्म) → ईसा मसीह का जन्म → 2000 सा.सं. (एक विद्यार्थी) → भविष्य (प्रश्नचिह्न)।

ध्यान रखें (बॉक्स, पृ. 64–65) — शताब्दी और सहस्राब्दी★

वर्ष एवं दशक (दस वर्षों का कालखंड) के साथ ही इतिहास में लंबी अवधि का अध्ययन करते समय दो अन्य विशेष शब्दों का भी उपयोग किया जाता है —

1. शताब्दी — यह किसी भी 100 वर्षों का कालखंड है।

  • इतिहास में 1 सा.सं. से लेकर प्रत्येक सौ वर्षों के लिए शताब्दी की गणना की जाती है।
  • वर्तमान में हम 21वीं शताब्दी में हैं, जो 2001 से आरंभ होकर 2100 तक चलेगी।
  • ईसा पूर्व की गणना के लिए हम 1 सा.सं.पू. से आरंभ करके समय में पीछे की ओर लौटते हैं। उदाहरणार्थ, तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. में 300 सा.सं.पू. से लेकर 201 सा.सं.पू. तक का समय सम्मिलित होगा।

2. सहस्राब्दी — यह किसी भी 1000 वर्षों का कालखंड है।

  • इतिहास में 1 सा.सं. से लेकर प्रत्येक सहस्र वर्षों के लिए सहस्राब्दी की गणना की जाती है।
  • हम तीसरी सहस्राब्दी में हैं, जो 2001 सा.सं. से आरंभ होकर 3000 सा.सं. तक चलेगी।
  • शताब्दी की तरह ही सा.सं.पू. सहस्राब्दी की गणना के लिए 1 सा.सं.पू. से आरंभ करके पीछे की ओर लौटते हैं। उदाहरणार्थ, 1 सहस्राब्दी सा.सं.पू. में 1 सा.सं.पू. से लेकर 1000 सा.सं.पू. तक का समय सम्मिलित होगा।
पदकालखंडवर्तमान
दशक10 वर्ष—
शताब्दी100 वर्ष21वीं — 2001 से 2100
सहस्राब्दी1000 वर्षतीसरी — 2001 से 3000

आइए पता लगाएँ (बॉक्स, पृ. 65)

1900 सा.सं. से लेकर आज तक की एक समय-रेखा बनाइए। इस पर अपने दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता, भाई-बहन एवं अपनी जन्मतिथियों को अंकित कीजिए। साथ ही 20वीं शताब्दी सा.सं. के आरंभ वर्ष व अंतिम वर्ष को भी अंकित कीजिए।

20वीं शताब्दी = 1901 से 2000 — यही इस गतिविधि की परीक्षा-योग्य बात है।

ध्यान रखें (बॉक्स, पृ. 65) — भारत के पारंपरिक तिथिपत्र

  • अनेक भारतीय तिथिपत्र महीनों एवं दिनों के निर्धारण के लिए सूर्य एवं चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
  • ‘पंचांग’ तालिकाओं की एक पुस्तक है जिसमें प्रत्येक माह के दिनों के साथ-साथ संबंधित खगोलीय आँकड़ों को सूचीबद्ध किया जाता है।
  • यह सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, सूर्योदय एवं सूर्यास्त आदि जैसी घटनाओं का सटीक आकलन करता है।
  • मौसम के पूर्वानुमान, त्योहारों की तिथियों और समय-निर्धारण आदि के लिए आज भी भारत में पंचांग का बड़े स्तर पर उपयोग होता है।

4. इतिहास के स्रोत क्या-क्या हैं? (पृ. 65–69)

हाशिये की परिभाषा (पृ. 65)

पदपरिभाषा (पुस्तक के अपने शब्द)
इतिहास के स्रोतकोई स्थान, व्यक्ति, लेख अथवा वस्तु जिसके माध्यम से हम अतीत की किसी घटना अथवा कालखंड से संबंधित जानकारी एकत्र करते हैं।

आइए पता लगाएँ (बॉक्स, पृ. 65) — वंशावली

क्या आप अपने माता एवं पिता के परिवार की तीन पीढ़ियों की जानकारी एकत्र कर सकते हैं? अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, परदादा-परदादी, परनाना-परनानी की एक वंशावली बनाइए। उनके नामों का पता लगाइए और यह भी कि वह जीवन-यापन के लिए क्या करते थे एवं उनका जन्म कहाँ हुआ था? साथ ही आप उन स्रोतों का भी उल्लेख कीजिए जहाँ से आपने ये सूचनाएँ प्राप्त की हैं।

तालिका (पृ. 66) — भरने के लिए दी गई है। स्तंभ: संबंध · नाम · व्यवसाय · जन्म-स्थान · सूचना के स्रोत। पंक्तियाँ: दादा-दादी · नाना-नानी · परदादा-परदादी · परनाना-परनानी।

पृ. 66 का समापन-प्रश्न: “आपने अपने परिवार के अतीत के संबंध में जानकारियाँ कैसे प्राप्त कीं? इन जानकारियों को प्राप्त करने के लिए क्या आपने छायाचित्रों, डायरियों, पहचान-पत्रों आदि का उपयोग किया या आप केवल अपने माता-पिता और संबंधियों की स्मृतियों पर निर्भर थे?”

यह गतिविधि पूरे अध्याय की सबसे चतुर रचना है। बच्चा अपने ही परिवार पर वही काम करता है जो इतिहासकार देश पर करता है — वस्तुएँ, लेख और स्मृतियाँ जोड़कर अतीत बनाना। और अंतिम प्रश्न उसे स्वयं ही पुरातात्विक/लिखित/मौखिक स्रोत का भेद खोज लेने देता है।

आइए विचार करें (बॉक्स, पृ. 67)

क्या आपने कभी अपने घर अथवा आस-पास पुराने सिक्कों, पुस्तकों, वस्त्रों, आभूषणों अथवा बर्तनों को देखा है? इन वस्तुओं अथवा पुराने घरों एवं भवनों से हम किस प्रकार की सूचनाएँ एकत्र कर सकते हैं?

चित्र-खंड पहेली वाला अनुच्छेद (पृ. 67) — अध्याय का हृदय★

“प्रत्येक वस्तु अथवा संरचना एक कहानी बताती है और वह चित्र-खंड पहेली (जिग्सॉ) के हिस्से की तरह होती है। जिन वस्तुओं को आप अपने घर में देखते हैं, वह आपको अपने परिवार के इतिहास के विषय में कुछ बताती हैं। इसी प्रकार हम ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में विभिन्न स्रोतों से जानकारी एकत्रित कर सकते हैं। एक बात सदैव याद रखनी चाहिए कि इतिहास के मामले में पहेली के कुछ हिस्से गायब रह सकते हैं।”

इतिहास के स्रोत — आरेख (पृ. 67)★★

यह अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण चित्र है। केंद्र में इतिहास के स्रोत, और उसकी चार मुख्य शाखाएँ —

1. पुरातात्विक स्रोत — तीन उप-शाखाएँ:

उप-शाखाउसमें क्या आता है
शिलालेखपांडुलिपि · ताम्रपत्र · सिक्के
संरचनास्मारक · टीला
उत्खननमानव, पशु तथा पौधों के अवशेष · उपकरण एवं हथियार · मूर्तियाँ एवं आभूषण · मृदभांड एवं खिलौने · निवास स्थान एवं शवाधान

2. मौखिक स्रोत — वंशावली · लोक साहित्य

3. साहित्यिक स्रोत — दो उप-शाखाएँ:

उप-शाखाउसमें क्या आता है
भारतीय साहित्यवेद एवं इतिहास · कविता एवं नाटक · ऐतिहासिक लेख · कहानियों का संग्रह · वैज्ञानिक एवं तकनीकी लेख
विदेशी विवरणयात्रा वृत्तांत · ऐतिहासिक वृत्तांत

4. कलात्मक स्रोत — चित्रकला · मूर्तिकला · पट्टिका (पैनल)

! पुस्तक स्वयं छूट देती है (पृ. 68): “आपको अभी इन सभी को याद रखने की आवश्यकता नहीं है; हम आगे चलकर इनमें से कुछ का उपयोग करेंगे।” इसलिए पूरा आरेख रटवाना गलत है। जो पढ़ाना है वह है — चार मुख्य श्रेणियाँ और यह कि हर श्रेणी में क्या-क्या आ सकता है।

इतिहासकार कैसे काम करता है (पृ. 68)★

पदपरिभाषा (पुस्तक के अपने शब्द)
इतिहासकारऐसा व्यक्ति जो अतीत का अध्ययन करता है एवं उसके विषय में लिखता है।
आनुवांशिकीजीव विज्ञान की वह शाखा जो यह अध्ययन करती है कि किस प्रकार पौधों, जानवरों या मनुष्यों की कुछ विशेषताएँ एवं गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचते हैं।

पुस्तक की अपनी कारण-श्रृंखला:

  • जब इतिहासकार 1500 वर्ष पूर्व के किसी राजा या रानी, प्राचीन स्मारक, युद्ध या व्यापार की कुछ वस्तुओं के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास करते हैं, तो वे बड़े ध्यान से अधिक से अधिक स्रोतों से जानकारी संकलित करने का प्रयास करते हैं।
  • कभी-कभी ये स्रोत एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं (जैसे चित्र-खंड पहेली के टुकड़े मेल खाते हैं),
  • तो कभी यह एक-दूसरे के विपरीत सूचनाएँ प्रदान करते हैं (जैसे टुकड़े मेल नहीं खाते)।
  • ऐसी परिस्थितियों में यह निर्णय लेना पड़ता है कि किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाए।
  • इस प्रकार इतिहासकार जिस कालखंड का अध्ययन कर रहे होते हैं, वे उसके इतिहास का पुनर्निर्माण करने का प्रयास करते हैं।

इतिहास में कौन-कौन योगदान देता है (पृ. 68)★

कौनक्या करता है
इतिहासकारअतीत का अध्ययन एवं लेखन
पुरातत्व विज्ञानीउत्खनन से अवशेषों का अध्ययन
पुरालेखशास्त्रीप्राचीन अभिलेख पढ़ते हैं
मानव विज्ञानीमानव समाज व संस्कृतियों का अध्ययन
साहित्य व भाषा के विशेषज्ञ—

और पिछले 50 वर्षों में वैज्ञानिक अध्ययनों ने इतिहास के पुनर्निर्माण में अधिक से अधिक योगदान दिया है:

  • प्राचीन जलवायु का अध्ययन
  • उत्खनन की गई सामग्री का रासायनिक अध्ययन
  • प्राचीन मानव की आनुवांशिकी का अध्ययन — इसने एक नया दृष्टिकोण दिया है जिससे और पूरक स्रोत प्राप्त हुए हैं।

आधुनिक इतिहास के लिए (साधारणत: पिछली दो अथवा तीन शताब्दियों का इतिहास):

  • समाचार-पत्र एक अन्य महत्वपूर्ण स्रोत हो सकता है।
  • पिछले कुछ दशकों के अध्ययन के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टी.वी., इंटरनेट आदि) का भी उपयोग किया जा सकता है।

आइए पता लगाएँ (बॉक्स, पृ. 68 → गतिविधि पृष्ठ 69)

“अगले पृष्ठ पर इतिहास के स्रोतों से संबंधित कुछ चित्र दिए गए हैं। ये वस्तुएँ कौन-कौन सी हैं एवं आपके अनुसार क्या दर्शाती हैं? चित्र के सम्मुख दिए गए स्थान में वस्तु से संबंधित प्राप्त जानकारी को लिखिए।”

पृ. 69 — गतिविधि-पृष्ठ। पुरानी पांडुलिपि जैसे पृष्ठभूमि पर तीन वस्तुएँ और उनके सामने लिखने के लिए रिक्त पंक्तियाँ। वस्तुएँ हैं — एक स्वर्ण सिक्का (जिस पर बैठी हुई आकृति और लेख अंकित है), एक उत्कीर्ण पत्थर की पट्टिका/पैनल (दो भागों में — ऊपर मूर्तियाँ, नीचे नाव का दृश्य), और अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष।

यह पृष्ठ छपा हुआ खाली है — विद्यार्थी को भरना है। पुस्तक कोई उत्तर नहीं देती। तीनों वस्तुएँ आरेख की अलग-अलग शाखाओं की हैं: सिक्का = पुरातात्विक (शिलालेख शाखा), पट्टिका (पैनल) = कलात्मक स्रोत, सिंह शीर्ष = कलात्मक स्रोत/संरचना। यही जोड़ बनवाना इस गतिविधि का उद्देश्य है।

5. मानव इतिहास का प्रारंभ (पृ. 70–73)

आरंभ (पृ. 70)

  • मानव (होमो सेपियंस) लगभग 3,00,000 (तीन लाख) वर्ष पूर्व से पृथ्वी पर रह रहे हैं।
  • यह एक लंबा समय प्रतीत होता है, परंतु यह पृथ्वी के इतिहास का एक छोटा-सा अंश मात्र है।

चित्र (पृ. 70) — एक शैलाश्रय का दृश्य: आरंभिक मानव आग जलाते, पत्थर के उपकरण बनाते, दीवार पर चित्र बनाते और पशुओं का शिकार करते दिखाए गए हैं।

आइए पता लगाएँ (बॉक्स, पृ. 70)

“ऊपर दिए गए चित्र में शैलाश्रय में आरंभिक मानव से संबंधित कुछ गतिविधियों को देखिए। आप इनमें से किस-किस गतिविधि को पहचान सकते हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण दीजिए।”

आदिमानव का जीवन (पृ. 70–71)★

  • आदिमानव को प्रकृति से अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
  • एक-दूसरे की सहायता करने के लिए वे टोलियों अथवा समूहों में रहते थे।
  • वे मुख्यत: आखेटक एवं खाद्य संग्राहक थे तथा भोजन एवं आश्रय की निरंतर खोज करते रहते थे।
  • अर्थात वे अपने जीवन के लिए खाने योग्य पौधों एवं फलों के संग्रह व आखेट पर निर्भर थे।
  • हमारे आदि-पूर्वजों के प्राकृतिक तत्वों को लेकर कुछ निश्चित विश्वास थे, और संभवत: उनकी मरणोपरांत जीवन को लेकर भी कुछ धारणाएँ थीं।
  • यह समूह अस्थायी शिविरों, शैलाश्रयों अथवा गुफाओं में रहते थे।
  • वे जिन भाषाओं में संवाद करते थे, वे अब लुप्त हो चुकी हैं।
  • उन्होंने अग्नि का उपयोग किया।
  • पत्थर की उन्नत कुल्हाड़ियों एवं ब्लेड्स, नुकीले तीरों एवं अन्य उपकरणों आदि के निर्माण ने उनके जीवन को सरल बना दिया।
  • संपूर्ण विश्व की सैकड़ों गुफाओं के शैल-चित्रों में उनके जीवन के विविध आयाम दिखाई देते हैं — कुछ चित्र साधारण आकृतियों एवं प्रतीकों के हैं, जबकि कुछ अन्य अधिक विस्तृत हैं एवं उनमें पशुओं एवं मानवों के दृश्य हैं।
  • समय के साथ इन आदिमानवों ने पत्थर एवं मनकों की माला, पशुओं के दाँतों के पेंडेंट आदि जैसे साधारण आभूषण बना लिए और कभी-कभी वे दूसरे समूहों के साथ इनका आदान-प्रदान करने लगे।
पदपरिभाषा (पुस्तक के अपने शब्द)
मरणोपरांत जीवनमृत्यु के बाद जीवन।

पहली उपज (पृ. 71)★

हिम युग और उसका अंत:

  • एक लंबे समय में पृथ्वी की जलवायु में अनेक परिवर्तन आए हैं।
  • एक समय पृथ्वी पर बहुत ठंड थी एवं इसका एक बड़ा भाग हिमाच्छादित (बर्फ से ढँका हुआ) था, इसलिए इसे ‘हिम युग’ कहा जाता था।
  • बाद में जब जलवायु गरम होने लगी तो हिम का कुछ भाग पिघल गया, जिसके कारण तत्कालीन नदियों में जलभराव हो गया जो बाद में समुद्रों में समाहित हो गईं।
  • हिम युग लगभग 1,00,000 (एक लाख) वर्ष पूर्व से लेकर 12,000 वर्ष पूर्व तक रहा।

★कृषि का आरंभ — पुस्तक की सबसे लंबी कारण-श्रृंखला:

  • इसके उपरांत मानव के लिए जीने योग्य परिस्थितियों में सुधार आया।
  • विश्व के कई हिस्सों में उन्होंने एक स्थान पर बसना तथा अनाज उगाना आरंभ कर दिया।
  • उन्होंने गाय, बकरी आदि जैसे जानवरों का घरेलूकरण भी आरंभ कर दिया।
  • भोजन की अधिक उपलब्धता के कारण ये समूह अपने आकार व संख्या में बढ़ गए।
  • ये प्राय: नदियों के किनारे बसने लगे थे — लेकिन इसका एकमात्र कारण जल की उपलब्धता नहीं थी, अपितु यहाँ की मृदा का अधिक उपजाऊ होना भी था। इससे अन्न उगाने की प्रक्रिया अधिक सरल हो गई।

! यह ‘लेकिन’ वाला वाक्य परीक्षा में आता है। नदी के किनारे बसने के दो कारण हैं — जल और उपजाऊ मृदा — और पुस्तक स्पष्ट रूप से कहती है कि जल एकमात्र कारण नहीं था।

आइए पता लगाएँ (बॉक्स, पृ. 71)

“अगले पृष्ठ पर दिए गए चित्र का अवलोकन कीजिए। यह कुछ सहस्राब्दी पूर्व के कृषक समुदाय की गतिविधियों को प्रदर्शित करता है। उन गतिविधियों को सूचीबद्ध कीजिए जिनकी आप पहचान कर सकते हैं।”

चित्र (पृ. 72) — एक आरंभिक कृषक गाँव: नदी के किनारे झोपड़ियाँ, फ़सल काटते लोग, भेड़ों का झुंड, चरवाहा और कुत्ता, अनाज पीसती स्त्री, चूल्हा, मवेशी और खेलते बच्चे।

आइए विचार करें (बॉक्स, पृ. 72) — यह बॉक्स शिक्षक के लिए सबसे महत्वपूर्ण है★

  • “पहले प्रदर्शित शैल-चित्र एवं उपर्युक्त चित्र, दोनों में ही पुरुषों एवं महिलाओं को कुछ निश्चित भूमिकाओं में दर्शाया गया है। यद्यपि ये स्वाभाविक प्रतीत होते हैं, परंतु आवश्यक नहीं कि ये सही ही हों और ये सभी परिस्थितियों पर लागू नहीं होते। उदाहरण के लिए, हो सकता है कि शैल-चित्र में महिलाओं ने गुफा में चित्रकारी करने के लिए रंगों को तैयार किया हो अथवा स्वयं चित्रकारी की हो। दोनों ही चित्रों में हो सकता है कि पुरुषों ने भोजन की कोई वस्तु बनाई हो अथवा शिशुओं की देखभाल में मदद की हो।”
  • “ऐसी भूमिकाओं एवं परिस्थितियों पर विचार करते हुए कक्षा में चर्चा कीजिए। इस बात का ध्यान रखिए कि हमारे पास उस समय की केवल सीमित सूचनाएँ ही उपलब्ध हैं।”

यह बॉक्स पुस्तक का अपना चित्र आलोचना कर रहा है — और यह असाधारण है। यह बच्चे को सिखाता है कि चित्र भी एक व्याख्या है, प्रमाण नहीं, और यह सीधे पृ. 68 की उस बात से जुड़ता है कि पहेली के कुछ टुकड़े गायब रहते हैं।

समाज जटिल कैसे हुआ (पृ. 73)★

  • जैसे-जैसे समुदायों का विकास हुआ, समाज जटिल होता गया।
  • सरदार अथवा मुखिया लोगों के कल्याण के लिए उत्तरदायी थे एवं सभी सामूहिक रूप से सामुदायिक कल्याण के लिए कार्य करते थे।
  • उदाहरण के लिए, निजी स्वामित्व का भाव नहीं था और भूमि पर सामुदायिक रूप से कृषि की जाती थी।
  • जैसे-जैसे समय बीतता गया, पल्ली (उप-ग्राम) बड़े गाँवों में परिवर्तित हो गए, जो मुख्यत: भोजन, वस्त्र एवं उपकरण आदि वस्तुओं का आदान-प्रदान करने लगे।
  • धीरे-धीरे इन गाँवों में संप्रेषण एवं आवागमन का तंत्र विकसित हुआ एवं इनमें से कुछ छोटे कस्बों में परिवर्तित हो गए।
  • उदाहरणार्थ, मृदभांड एवं मिट्टी की अन्य वस्तुओं को बनाने एवं धातुओं के उपयोग (पहले तांबा और फिर लोहा) की तकनीक का आगमन हुआ, जिससे टिकाऊ उपकरण, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ एवं आभूषण बनाना सरल हो गया।
पदपरिभाषा (पुस्तक के अपने शब्द)
कल्याणस्वास्थ्य, समृद्धि और भलाई।
पल्लीएक छोटी बस्ती अथवा छोटा गाँव।

अध्याय का समापन-अनुच्छेद (पृ. 73):

  • हम अध्याय 6 में देखेंगे कि इन चरणों ने किस प्रकार से ‘सभ्यता’ के उदय में योगदान दिया।
  • “अभी यह याद रखना आवश्यक है कि मानव सभ्यता को विकास के इन प्रारंभिक चरणों में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। इस दौरान कुछ कठिन क्षण भी आए, जब कुछ पूर्ववर्ती प्रजातियों की भाँति मानव सभ्यता भी लुप्त हो सकती थी। हम उन आदिमानवों के बारे में कभी नहीं जान पाएँगे जिनके साहस और दृढ़ता के कारण आज हमारा अस्तित्व संभव हो पाया है।”

6. आगे बढ़ने से पहले… — पुस्तक का अपना सार (पृ. 73)

  1. हमने अपने अतीत के बारे में और अधिक जानने के कुछ तरीकों का पता लगाया। समय-रेखा की अवधारणा हमें भिन्न-भिन्न समय पर ऐतिहासिक घटनाओं के अनुक्रम को समझने में सहायता करती है।
  2. समय की गणना की विभिन्न विधियाँ हैं — वर्ष, दशक, शताब्दी, सहस्राब्दी।
  3. इतिहास के विभिन्न स्रोत हैं। ये ऐतिहासिक घटनाओं को समझने व उनका पुनर्निर्माण करने में सहायक होते हैं।
  4. हमने आरंभिक मानव जीवन को संक्षेप में समझा और यह भी जाना कि मानव-समाज कैसे समय के साथ जटिल होता गया।

चार बिंदु = अध्याय के चार भाग। दीर्घ उत्तर इन्हीं से आरंभ और समाप्त होना चाहिए।

अभ्यास — प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ (पृ. 74)

1. एक परियोजना के रूप में अपने आस-पास उपलब्ध इतिहास के स्रोतों का उपयोग करते हुए अपने परिवार (यदि आप गाँव में रहते हैं, तो गाँव) का इतिहास लिखिए। परियोजना के लिए अपने शिक्षक से मार्गदर्शन हेतु निवेदन कीजिए।

2. क्या हम इतिहासकारों की तुलना जासूसों से कर सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।

3. तिथियों के साथ कुछ अभ्यास —

  • समय-रेखा पर निम्नलिखित तिथियों को कालक्रमानुसार लगाइए — 323 सा.सं., 323 सा.सं.पू., 100 सा.सं., 100 सा.सं.पू., 1900 सा.सं.पू., 1090 सा.सं., 2024 सा.सं.
  • यदि सम्राट चंद्रगुप्त का जन्म 320 सा.सं.पू. में हुआ तो बताइए उनका संबंध किस शताब्दी से था? उनका जन्म बुद्ध के जन्म से कितने वर्ष पश्चात हुआ?
  • झाँसी की रानी का जन्म 1828 सा.सं. में हुआ। उनका संबंध किस शताब्दी से है? उनका जन्म भारत की स्वतंत्रता से कितने वर्ष पूर्व हुआ?
  • ‘12,000 वर्ष पूर्व’ को तिथि के रूप में बदलिए।

4. किसी निकटतम संग्रहालय के भ्रमण की योजना बनाइए। संग्रहालय की प्रदर्शनियों के विषय में पहले से कुछ जानकारी जुटा लीजिए। इस भ्रमण के दौरान टिप्पणियाँ तैयार कीजिए। भ्रमण के पश्चात एक संक्षिप्त रिपोर्ट लिखिए और उसमें भ्रमण से जुड़ी स्मृतियों एवं रोचक बातों या घटनाओं को रेखांकित कीजिए।

5. अपने विद्यालय में किसी पुरातत्व विज्ञानी अथवा इतिहासकार को आमंत्रित कीजिए और उनसे स्थानीय इतिहास एवं उसे जानना क्यों महत्वपूर्ण है, इस विषय में व्याख्यान देने का आग्रह कीजिए।

उत्तर-कुंजी — पुस्तक मेंनहीं छपी हैध्यान

इस अध्याय की किसी भी अभ्यास-प्रश्न की उत्तर-कुंजी पाठ्यपुस्तक में नहीं दी गई है। नीचे दिए उत्तर पुस्तक के अपने सूत्र और पाठ से निकाले गए हैं, NCERT द्वारा छापे हुए नहीं।

प्रश्न 3 (क) — कालक्रमानुसार क्रम

1900 सा.सं.पू. → 323 सा.सं.पू. → 100 सा.सं.पू. → 100 सा.सं. → 323 सा.सं. → 1090 सा.सं. → 2024 सा.सं.

(नियम: सा.सं.पू. में बड़ी संख्या पहले आती है, क्योंकि गणना उल्टे क्रम में होती है; सा.सं. में छोटी संख्या पहले।)

प्रश्न 3 (ख) — सम्राट चंद्रगुप्त, जन्म 320 सा.सं.पू.

पूछा गयाउत्तरकैसे
किस शताब्दी से संबंध?चौथी शताब्दी सा.सं.पू.चौथी शताब्दी सा.सं.पू. = 400 से 301 सा.सं.पू.; 320 इसी में आता है
बुद्ध के जन्म से कितने वर्ष पश्चात?240 वर्ष560 − 320 = 240 (दोनों सा.सं.पू. हैं, इसलिए यहाँ −1 वाला सूत्र नहीं लगता)

प्रश्न 3 (ग) — झाँसी की रानी, जन्म 1828 सा.सं.

पूछा गयाउत्तरकैसे
किस शताब्दी से संबंध?19वीं शताब्दी सा.सं.19वीं शताब्दी = 1801 से 1900; 1828 इसी में आता है
भारत की स्वतंत्रता से कितने वर्ष पूर्व?119 वर्ष1947 − 1828 = 119 (दोनों सा.सं. हैं, इसलिए −1 नहीं लगता)

प्रश्न 3 (घ) — ‘12,000 वर्ष पूर्व’ को तिथि में बदलिए

पुस्तक के अपने सूत्र से (और उसके अपने उदाहरण की तरह 2024 सा.सं. को वर्तमान मानकर) —

सा.सं.पू. + सा.सं. − 1 = बीते वर्ष X + 2024 − 1 = 12,000 X = 12,000 − 2024 + 1 = 9977

उत्तर: लगभग 9977 सा.सं.पू. — अर्थात लगभग 10,000 सा.सं.पू.

यहाँ ‘लगभग’ आवश्यक है, क्योंकि ‘12,000 वर्ष पूर्व’ स्वयं एक गोल संख्या है। विद्यार्थी से सूत्र का प्रयोग देखिए, अंतिम अंक नहीं।

प्रश्न 2 — इतिहासकार और जासूस की तुलना

हाँ, तुलना की जा सकती है। दोनों साक्ष्य (स्रोत) इकट्ठा करते हैं; दोनों के पास अधूरी जानकारी होती है; दोनों के साक्ष्य कभी एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और कभी विरोध; और दोनों को निर्णय लेना पड़ता है कि किस साक्ष्य पर अधिक विश्वास किया जाए। पुस्तक का अपना चित्र-खंड पहेली (जिग्सॉ) वाला रूपक ठीक यही बात कहता है (पृ. 67–68)।

(विपरीत पक्ष भी स्वीकार्य है यदि कारण दिया हो — जैसे जासूस अपराधी ढूँढ़ता है और इतिहासकार किसी को दोषी नहीं ठहराता; या जासूस गवाहों से पूछ सकता है, इतिहासकार नहीं।)

प्रश्न 1, 4 और 5 परियोजना-प्रश्न हैं — इनका कोई एक उत्तर नहीं है।

चित्र और तालिकाएँ

संदर्भपृष्ठविषय-वस्तु
आवरण-चित्र59राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली
चित्र 4.160पृथ्वी पर जीवन के विकास/उद्भव के कुछ प्रमुख चरणों की वृत्ताकार समय-रेखा; तीन रंग = अरबों/करोड़ों/वर्षों वर्ष पूर्व
चित्र 4.2.161भू-विज्ञानी
चित्र 4.2.261जीवाश्म विज्ञानी
चित्र 4.2.361मानव विज्ञानी
चित्र 4.2.461पुरातत्व विज्ञानी
चित्र 4.362–633,00,000 सा.सं.पू. से कुछ मुख्य घटनाओं की समय-रेखा — दो पृष्ठों पर फैली
समय-रेखा (बिना संख्या)64अतीत → 560 सा.सं.पू. → ईसा मसीह का जन्म → 2000 सा.सं. → भविष्य
तालिका (बिना संख्या)66वंशावली भरने के लिए — संबंध/नाम/व्यवसाय/जन्म-स्थान/सूचना के स्रोत
आरेख (बिना संख्या)67★इतिहास के स्रोत — चार शाखाओं का मानचित्र
गतिविधि-पृष्ठ69तीन वस्तुएँ — सिक्का, उत्कीर्ण पट्टिका (पैनल), अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष — और भरने के लिए रिक्त पंक्तियाँ
चित्र (बिना संख्या)70शैलाश्रय में आरंभिक मानव की गतिविधियाँ
चित्र (बिना संख्या)72कृषक गाँव का दृश्य

इस अध्याय में केवल चित्र 4.1, 4.2.1–4.2.4 और 4.3 क्रमांकित हैं। पृ. 67 का स्रोत-आरेख — जो अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण चित्र है — बिना संख्या के छपा है। उसे “चित्र 4.4” मत कहिए।


पदइस अध्याय में प्रयुक्त अर्थ
इतिहासमानव के अतीत का अध्ययन
इतिहासकारऐसा व्यक्ति जो अतीत का अध्ययन करता है एवं उसके विषय में लिखता है
जीवाश्मजीव-जंतुओं के पदचिह्नों या पौधों के अवशेष चिह्न, जो मृदा अथवा शिलाओं की परतों के बीच संरक्षित पाए जाते हैं
भू-विज्ञानीपृथ्वी के भौतिक स्वरूपों का अध्ययन करने वाला
जीवाश्म विज्ञानीजीवाश्मों के रूप में करोड़ों वर्ष पूर्व के अवशेषों का अध्ययन करने वाला
मानव विज्ञानीमानव समाजों एवं संस्कृतियों का अतीत से वर्तमान तक अध्ययन करने वाला
पुरातत्व विज्ञानीउत्खनन करके छोड़े गए अवशेषों से अतीत का अध्ययन करने वाला
पुरालेखशास्त्रीप्राचीन अभिलेख पढ़ने वाला
आनुवांशिकीजीव विज्ञान की वह शाखा जो अध्ययन करती है कि विशेषताएँ एवं गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक कैसे पहुँचते हैं
युगसमय का एक निश्चित कालखंड
ग्रेगोरियन कैलेंडर (तिथिपत्र)विश्व-भर में प्रयुक्त कैलेंडर — 365 दिन, बारह माह, प्रत्येक चार वर्ष में एक अधिवर्ष
अधिवर्ष (लीप वर्ष)वह वर्ष जिसमें एक दिन अधिक होता है; शताब्दी वर्ष तभी अधिवर्ष जब 400 से विभाजित हो
मांगलिकअनुकूल अथवा भाग्य लाने वाला शुभ समय
सा.सं. (सामान्य संवत)अंग्रेज़ी का CE; पहले A.D.
सा.सं.पू. (सामान्य संवत पूर्व)अंग्रेज़ी का BCE; पहले B.C.
समय-रेखातिथियों और घटनाओं का अनुक्रम दिखाने वाला सुविधाजनक उपकरण
दशकदस वर्षों का कालखंड
शताब्दी100 वर्षों का कालखंड
सहस्राब्दी1000 वर्षों का कालखंड
पंचांगतालिकाओं की एक पुस्तक जिसमें प्रत्येक माह के दिनों के साथ खगोलीय आँकड़े सूचीबद्ध होते हैं
इतिहास के स्रोतकोई स्थान, व्यक्ति, लेख अथवा वस्तु जिससे अतीत की जानकारी एकत्र की जाती है
पुरातात्विक स्रोतशिलालेख, संरचना और उत्खनन से प्राप्त स्रोत
मौखिक स्रोतवंशावली और लोक साहित्य
साहित्यिक स्रोतभारतीय साहित्य और विदेशी विवरण
कलात्मक स्रोतचित्रकला, मूर्तिकला, पट्टिका (पैनल)
शिलालेखपत्थर आदि पर उत्कीर्ण लेख
ताम्रपत्रताँबे की पट्टी पर लिखा अभिलेख
पांडुलिपिहाथ से लिखी पुस्तक या लेख
वंशावलीपरिवार की पीढ़ियों का क्रम
टीलापुरानी बस्ती के अवशेषों से बना उभार
शवाधानशव को गाड़ने का स्थान
मृदभांडमिट्टी के बर्तन
पट्टिका (पैनल)उत्कीर्ण चित्र-फलक
पुनर्निर्माणस्रोतों को जोड़कर अतीत का चित्र दोबारा खड़ा करना
आदिमानवआरंभिक मानव
होमो सेपियंसआधुनिक मानव की प्रजाति
आखेटक एवं खाद्य संग्राहकशिकार करने और भोजन इकट्ठा करने वाले
शैलाश्रयचट्टान के नीचे बना प्राकृतिक आश्रय
शैल-चित्रगुफा या चट्टान की दीवार पर बने चित्र
मरणोपरांत जीवनमृत्यु के बाद जीवन
हिम युगवह कालखंड जब पृथ्वी का बड़ा भाग हिमाच्छादित था
हिमाच्छादितबर्फ से ढँका हुआ
घरेलूकरणजंगली जानवरों को पालतू बनाना
कल्याणस्वास्थ्य, समृद्धि और भलाई
पल्लीएक छोटी बस्ती अथवा छोटा गाँव

मुख्य संख्याएँ

नियम: नीचे की हर संख्या पाठ्यपुस्तक की है। इनसे बाहर की कोई तिथि छात्र-सामग्री में मत जोड़िए — बाहरी मान 10-Verification-Log.md में हैं।

मानकिसकापृष्ठ
365 दिन / 12 माहग्रेगोरियन कैलेंडर62
प्रत्येक 4 वर्षअधिवर्ष (लीप वर्ष)62
400वह भाजक जिससे शताब्दी वर्ष लीप वर्ष तय होता है — इसीलिए 1800, 1900, 2000 में से केवल 200062
1947भारत की स्वतंत्रता (पुस्तक का उदाहरण)62
560 सा.सं.पू.गौतम बुद्ध के जन्म की अनुमानित तिथि62, 64
2 + 2 − 1 = 3शून्य वर्ष न होने का प्रभाव63
560 + 2024 − 1 = 2583बुद्ध के जन्म को आज से कितने वर्ष पूर्व — पुस्तक का अपना परिकलन63
10दशक — वर्षों की संख्या64
100शताब्दी — वर्षों की संख्या64
1000सहस्राब्दी — वर्षों की संख्या65
2001–210021वीं शताब्दी64
300–201 सा.सं.पू.तीसरी शताब्दी सा.सं.पू.65
2001–3000तीसरी सहस्राब्दी65
1 से 1000 सा.सं.पू.प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू.65
लगभग 3 मीटरचित्र 4.3 की समय-रेखा की वह लंबाई जो बिंदुकृत हिस्से न होने पर हो जाती64
4.54 अरब वर्ष पूर्वपृथ्वी; प्रथम कोशिकाएँ (चित्र 4.1)60
2.33 अरब वर्ष पूर्ववातावरणीय ऑक्सीजन (चित्र 4.1)60
10,000,000 वर्ष पूर्वआदिमानव (चित्र 4.1)60
1,000,000 वर्ष पूर्वअग्नि (चित्र 4.1)60
3,00,000 वर्ष पूर्वहोमो सेपियंस (मानव) — चित्र 4.1 और पाठ, दोनों में60, 70
6,500 वर्ष पूर्वलेखन (चित्र 4.1)60
40,000 सा.सं.पू.विश्व में शैल चित्रकारी के प्रथम साक्ष्य (चित्र 4.3)62
1,00,000 से 12,000 वर्ष पूर्वहिम युग71
8000 सा.सं.पू.प्रथम स्थायी निवास व कृषि का आरंभ (चित्र 4.3)63
6000 सा.सं.पू.भारतीय उपमहाद्वीप में मिट्टी के बर्तन बनाने की तकनीक (चित्र 4.3)63
4000 सा.सं.पू.तांबे के प्रथम धातुकर्म का आरंभ; मेसोपोटामिया में संसार का प्रथम नगर (चित्र 4.3)63
2000 सा.सं.पू.सिंधु-सरस्वती सभ्यता (चित्र 4.3)63
1500 वर्ष पूर्वइतिहासकार के काम का पुस्तक-उदाहरण68
पिछले 50 वर्षजिनमें वैज्ञानिक अध्ययनों का योगदान बढ़ा68
दो अथवा तीन शताब्दियाँ‘आधुनिक इतिहास’ की अवधि68
3पीढ़ियाँ, जिनकी वंशावली बनानी है65
4अतीत का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञ (चित्र 4.2)61
4इतिहास के स्रोतों की मुख्य श्रेणियाँ (आरेख, पृ. 67)67

भ्रमित करने वाले युग्म

युग्मअंतर जो अंक दिलाता है
सा.सं. बनाम सा.सं.पू.सा.सं. = CE = A.D. (ईसा के बाद, आगे बढ़ता क्रम)। सा.सं.पू. = BCE = B.C. (ईसा से पहले, उल्टा/अवरोही क्रम)।
सा.सं.पू. में बड़ी संख्या बनाम छोटी संख्यासा.सं.पू. में बड़ी संख्या अधिक पुरानी है — 1900 सा.सं.पू., 323 सा.सं.पू. से पहले आता है। सा.सं. में उलटा।
दोनों तिथियाँ एक ही ओर बनाम आर-पारदोनों सा.सं.पू. या दोनों सा.सं. → सीधा घटाइए। एक सा.सं.पू. और एक सा.सं. → जोड़कर 1 घटाइए।
शताब्दी की संख्या बनाम वर्ष21वीं शताब्दी = 2001–2100, न कि 2100–2199। शताब्दी की संख्या वर्ष से एक अधिक होती है।
तीसरी शताब्दी सा.सं. बनाम तीसरी शताब्दी सा.सं.पू.सा.सं. में 201–300; सा.सं.पू. में 300–201 — गिनती उल्टी दिशा में।
शताब्दी बनाम सहस्राब्दी100 वर्ष बनाम 1000 वर्ष। वर्तमान: 21वीं शताब्दी, पर तीसरी सहस्राब्दी।
जीवाश्म विज्ञानी बनाम पुरातत्व विज्ञानीजीवाश्म विज्ञानी — करोड़ों वर्ष पुराने जीवों के अवशेष। पुरातत्व विज्ञानी — मानव द्वारा छोड़ी गई वस्तुएँ, उत्खनन से।
मानव विज्ञानी बनाम इतिहासकारमानव विज्ञानी — समाज व संस्कृति, अतीत से वर्तमान तक। इतिहासकार — अतीत का अध्ययन एवं उस पर लेखन।
पुरालेखशास्त्री बनाम पुरातत्व विज्ञानीपुरालेखशास्त्री प्राचीन अभिलेख पढ़ता है; पुरातत्व विज्ञानी खोदकर निकालता है।
पुरातात्विक बनाम साहित्यिक स्रोतपुरातात्विक = वस्तुएँ और संरचनाएँ (उत्खनन, शिलालेख, टीला)। साहित्यिक = लिखा हुआ (भारतीय साहित्य, विदेशी विवरण)।
मौखिक बनाम साहित्यिक स्रोतमौखिक = बोलकर चली आई बातें (वंशावली, लोक साहित्य)। साहित्यिक = लिखी हुई।
इतिहास बनाम पृथ्वी का इतिहासइतिहास = मानव के अतीत का अध्ययन। पृथ्वी का इतिहास कहीं अधिक लंबा है; मानव का हिस्सा नवीनतम और छोटा-सा है।
हिम युग का आरंभ बनाम अंतपुस्तक के अनुसार लगभग 1,00,000 वर्ष पूर्व से 12,000 वर्ष पूर्व तक।
आखेटक-संग्राहक बनाम कृषकपहले वे भोजन खोजते थे और अस्थायी शिविरों/गुफाओं में रहते थे; बाद में एक स्थान पर बसकर अनाज उगाने लगे।
पल्ली बनाम गाँव बनाम कस्बापल्ली = छोटी बस्ती/उप-ग्राम → बड़े गाँव → कुछ छोटे कस्बों में बदले।
तांबा बनाम लोहापुस्तक का क्रम स्पष्ट है — पहले तांबा, फिर लोहा।

शिक्षक के लिए — तीन बातें जो इस अध्याय को बाकी अध्यायों से अलग करती हैं★

  1. यह अध्याय तथ्य नहीं, विधि सिखाता है। इसमें याद रखने लायक तिथियाँ लगभग हैं ही नहीं — जो हैं वे उदाहरण हैं। जो सचमुच आना चाहिए वह है सूत्र (जोड़कर 1 घटाना), शताब्दी/ सहस्राब्दी की गिनती, और स्रोतों की चार श्रेणियाँ।
  2. पुस्तक दो जगह स्वयं छूट देती है — पृ. 68 पर स्रोत-आरेख के बारे में (“आपको अभी इन सभी को याद रखने की आवश्यकता नहीं है”), और पृ. 72 के बॉक्स में अपने ही चित्रों के बारे में (“आवश्यक नहीं कि ये सही ही हों”)। दोनों छूटें बच्चों को दिखाइए।
  3. यह अध्याय आगे के हर इतिहास-अध्याय की नींव है। बुद्ध अध्याय 7 में, सभ्यता का उदय अध्याय 6 में — पुस्तक स्वयं दोनों संदर्भ देती है। यहाँ जो सा.सं.पू./सा.सं. पक्का नहीं हुआ, वह आगे हर अध्याय में गिरेगा।