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fhes105.pdf(10 पृष्ठ) · संस्करण: पुनर्मुद्रण 2026-27 विषय (ख) — अतीत के चित्रपट · इस विषय का दूसरा अध्याय
0. यह अध्याय किस बारे में है
यह पूरा अध्याय एक ही प्रश्न पर है — “इस देश को यह नाम कैसे मिला?” और उसका उत्तर देते-देते वह एक बहुत बड़ी बात कह जाता है।
अध्याय का ढाँचा दो हिस्सों में है, और वे शीर्षक भी बन गए हैं:
1. भारतीयों ने ‘भारत’ नाम कैसे दिया? (पृ. 77–80) 2. विदेशियों ने ‘इंडिया’ नाम कैसे रखा? (पृ. 81–83)
और इन दोनों में दो बिलकुल अलग रास्ते दिखते हैं —
| भीतर से दिया गया नाम | बाहर से दिया गया नाम | |
|---|---|---|
| मूल | भरत — ऋग्वेद का एक वैदिक जन-समूह | सिंधु — एक नदी |
| रास्ता | भरत → भारतवर्ष → भारत | सिंधु → हिंदु → इंडोई/इंडिके → इंडिया |
| आधार | लोग | भूगोल (नदी) |
यही अध्याय की सबसे सुंदर बात है: भारत नाम एक जन-समूह से आया, और इंडिया नाम एक नदी से। दोनों नाम सही हैं, दोनों प्राचीन हैं — और भारतीय संविधान दोनों को एक ही पंक्ति में रख देता है: “भारत, अर्थात इंडिया”।
अध्याय का दूसरा, गहरा विचार
पुस्तक बार-बार यह दिखाती है कि प्राचीन भारतीय अपने भूगोल को अच्छी तरह जानते थे —
- विष्णु पुराण उत्तर में हिमालय और दक्षिण में समुद्र से भारत की सीमा बाँधता है (पृ. 80);
- 2000 वर्ष पुरानी तमिल कविता भी ठीक वही सीमाएँ बताती है — केप कुमारी से महान पर्वत तक (पृ. 80);
- महाभारत कश्मीर से केरल तक के क्षेत्र गिना देता है (पृ. 78)।
अर्थात: उत्तर और दक्षिण, अलग-अलग भाषाओं में, अलग-अलग सदियों में — एक ही परिभाषा तक पहुँचे। यही श्री अरविंद के आरंभिक उद्धरण की “आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता” है, और यही अध्याय का सबसे बड़ा निष्कर्ष है।
1. अध्याय का आरंभ (पृ. 75)
उद्धरण (पृ. 75)
“भारत में प्रारंभिक काल से ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता स्थापित हो गई थी, जो हिमालय और दो समुद्रों के बीच इस महान मानवता की जीवनधारा का अभिन्न अंग बन गई।” — श्री अरविंद
पढ़ाते समय ध्यान दें: उद्धरण में “हिमालय और दो समुद्रों के बीच” है — और अध्याय आगे चलकर विष्णु पुराण तथा तमिल कविता दोनों में ठीक यही सीमा-रेखा दिखाएगा। यह संयोग नहीं है; यही अध्याय की रीढ़ है।
चित्र 5.1 (पृ. 75) — “2300 वर्ष पूर्व ग्रामीण भारत को दर्शाता एक दृश्य (महान साँची स्तूप का उत्तरी द्वार)।”
महत्वपूर्ण प्रश्न (पृ. 75)
- भारत को हम कैसे परिभाषित कर सकते हैं?
- भारत के कुछ प्राचीन नाम क्या थे?
केवल दो प्रश्न — यह पुस्तक का सबसे छोटा ‘महत्वपूर्ण प्रश्न’ खंड है, और अध्याय भी सबसे छोटा (10 पृष्ठ)। पर उसमें नाम बहुत हैं।
2. चित्र 5.2 (पृ. 76) — भारतीय उपमहाद्वीप का भौतिक मानचित्र★
पूरा पृष्ठ इस एक मानचित्र का है। शीर्षक: “भारतीय उपमहाद्वीप का भौतिक मानचित्र जिसमें कुछ नदियाँ प्रदर्शित हैं।” पैमाना 500 किलोमीटर।
| श्रेणी | मानचित्र पर अंकित नाम |
|---|---|
| पर्वत | हिंदुकुश · हिमालय |
| नदियाँ (उत्तर-पश्चिम) | सिंधु · झेलम · चनाब · रावी · ब्यास · सतलुज · सरस्वती |
| नदियाँ (उत्तर व पूर्व) | यमुना · गंगा · चंबल · ब्रह्मपुत्र |
| नदियाँ (मध्य व दक्षिण) | नर्मदा · ताप्ती · महानदी · गोदावरी · कृष्णा · कावेरी |
| जलराशियाँ | अरब सागर · बंगाल की खाड़ी · हिंद महासागर |
★★यही वह चित्र है जिसकी ओर अध्याय 3 ने इशारा किया था
अध्याय 3 (पृ. 46) के कालिदास वाले बॉक्स में लिखा था — “चित्र 5.2 में क्या आप इनकी और ‘पर्वतों के देवता’ की स्थिति को दिखा सकते हैं?” वह संदर्भ यहाँ पूरा होता है।
कक्षा में यह अवश्य लौटाइए: अध्याय 3 का श्लोक कहता था कि हिमालय “पश्चिमी से लेकर पूर्वी समुद्र तक” फैला है — और इस मानचित्र पर वह दिख जाता है: बाईं ओर अरब सागर, दाईं ओर बंगाल की खाड़ी, और ऊपर आड़ा फैला हिमालय। जो बच्चा तब अटका था, वह आज समझेगा।
! नदियों के नाम रटवाने की आवश्यकता नहीं है। यह मानचित्र यहाँ प्राकृतिक सीमाएँ दिखाने के लिए है — वही जो अगले पृष्ठ का ‘आइए विचार करें’ पूछता है।
3. भारत को परिभाषित करना (पृ. 77)
- आज का भारत एक आधुनिक राष्ट्र है, जिसकी परिभाषित सीमाएँ, राज्य और ज्ञात जनसंख्या है।
- हालाँकि यह 500, 2000 या 5000 वर्ष पूर्व बहुत अलग था।
- विश्व के इस भाग को हम प्राय: ‘भारतीय उपमहाद्वीप’ कहते हैं।
- इसके भिन्न-भिन्न नाम रहे हैं और इसकी सीमाएँ भी बदलती रही हैं।
- विभिन्न स्रोतों से हम भारत के अतीत और विकास के बारे में जान सकते हैं।
यह सीधे अध्याय 4 से जुड़ता है — ‘विभिन्न स्रोत’ वही हैं जिनका आरेख अध्याय 4 (पृ. 67) में था। कक्षा में यह कड़ी बताइए।
आइए विचार करें (बॉक्स, पृ. 77)
“इस अध्याय के प्रारंभ में दिए गए भारतीय उपमहाद्वीप के भौतिक मानचित्र का अध्ययन कीजिए। वे कौन-कौन सी प्राकृतिक सीमाएँ हैं जिसे आप समझ सकते हैं?”
अपेक्षित उत्तर: उत्तर में हिमालय और हिंदुकुश; पश्चिम में अरब सागर; पूर्व में बंगाल की खाड़ी; दक्षिण में हिंद महासागर। यही उत्तर आगे विष्णु पुराण और तमिल कविता में लौटेगा — इसे बोर्ड पर लिखकर रख लीजिए।
नाम कहाँ से मिलते हैं (पृ. 77)
- इतिहास के क्रम में भारत को उसके निवासियों और विदेशों से आए आगंतुकों द्वारा कई नामों से बुलाया जाता रहा है।
- ये नाम प्राचीन पुस्तकों, यात्रियों और तीर्थयात्रियों के वृत्तांतों और शिलालेखों में मिलते हैं।
| पद | परिभाषा (पुस्तक के अपने शब्द) |
|---|---|
| निवासी | वे लोग जो एक स्थान विशेष में रहते हैं। |
4. भारतीयों ने भारत नाम कैसे दिया? (पृ. 77–80)★
(क) ऋग्वेद और ‘सप्त सैंधव’ (पृ. 77)
- ऋग्वेद भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। (पुस्तक कहती है — हम अध्याय 7 में देखेंगे कि यह हजारों वर्ष पुराना है।)
- इस ग्रंथ में उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का नाम ‘सप्त सैंधव’ अर्थात ‘सात नदियों की भूमि’ है।
- ‘सैंधव’ शब्द सिंधु से आया है, जिसका आशय सिंधु नदी या सामान्यत: एक नदी से है।
- समय बीतने के साथ ही साहित्य में भारत के अन्य क्षेत्रों के नाम भी मिलने लगते हैं।
★यह अध्याय का सबसे चतुर बिंदु है और इसे छोड़िए मत: ‘सिंधु’ शब्द दोनों नामों की जड़ में है। भीतर से — सिंधु → सैंधव → सप्त सैंधव। बाहर से — सिंधु → हिंदु → इंडिया। एक ही नदी, दो दिशाओं में।
चित्र 5.3 (पृ. 77) — “भारतीय उपमहाद्वीप का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र।” इसमें सिंधु, झेलम, चनाब, रावी, ब्यास, सतलुज और सरस्वती — सात नदियाँ — तथा गंगा, यमुना, चंबल, नर्मदा और ताप्ती अंकित हैं।
कक्षा में यह गिनवाइए: चित्र 5.3 पर उत्तर-पश्चिम की नदियाँ गिनिए — सात निकलती हैं। यही ‘सप्त सैंधव’ है। पुस्तक यह जोड़ नहीं बनाती; आप बनाइए, यह याद रह जाता है।
(ख) महाभारत के क्षेत्र (पृ. 78)
महाभारत, भारत के सबसे प्रसिद्ध ग्रंथों में से एक है (इसके बारे में हम ‘हमारी सांस्कृतिक विरासत तथा ज्ञान परंपराएँ’ अध्याय में पढ़ेंगे)। रोचक बात यह है कि इसमें अनेक क्षेत्रों को सूचीबद्ध किया गया है —
| महाभारत का क्षेत्र | आज का क्षेत्र (पुस्तक के अपने शब्द) |
|---|---|
| कश्मीर | लगभग आज का कश्मीर |
| कुरूक्षेत्र | आज हरियाणा का भाग |
| वंग | बंगाल का भाग |
| प्राग्ज्योतिष | कुछ-कुछ असम का भाग |
| कच्छ | आज का कच्छ |
| केरल | लगभग आज का केरल |
यह तालिका पूरी परीक्षा-योग्य है और यही अभ्यास-प्रश्न 2 में लौटती है। ध्यान दीजिए कि ये छह नाम उपमहाद्वीप के चारों कोनों को छू लेते हैं — उत्तर में कश्मीर, पश्चिम में कच्छ, पूर्व में वंग व प्राग्ज्योतिष, दक्षिण में केरल। यही पुस्तक का बिंदु है।
आइए पता लगाएँ (बॉक्स, पृ. 78)
“क्या आप पृष्ठ 79 पर मानचित्र (चित्र 5.4) में दिए गए कुछ क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं? आपने जिन क्षेत्रों के बारे में सुना हो, उनकी सूची बनाइए।”
(ग) भारतवर्ष और जम्बूद्वीप (पृ. 78)★
पुस्तक का प्रश्न: “वास्तव में हमें कब समूचे भारतीय उपमहाद्वीप के लिए एक नाम मिला?” और उसका ईमानदार उत्तर: “चूँकि प्राचीन भारतीय ग्रंथों की तिथि निर्धारित करना कठिन है, अत: इस प्रश्न का उत्तर देना आसान नहीं है।”
- महाभारत में ‘भारतवर्ष’ तथा ‘जम्बूद्वीप’ शब्द का प्रयोग किया गया है।
- विद्वान सामान्यत: इस बात से सहमत हैं कि सा.सं.पू. की कुछ शताब्दियों पूर्व से यह महाकाव्य लिखा जाने लगा था।
पहला शब्द — भारतवर्ष
- स्पष्ट रूप से समूचे उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त हुआ है, और इस ग्रंथ में अनगिनत नदियों और लोगों के नाम सम्मिलित हैं।
- भारतवर्ष से आशय ‘भरत’ के देश से है।
- ‘भरत’ वह नाम है जो सर्वप्रथम ऋग्वेद में उल्लिखित हुआ था।
- वहाँ इसका अभिप्राय लोगों के एक प्रमुख वैदिक समूह से है।
- बाद के साहित्य में विभिन्न महाराजाओं के लिए ‘भरत’ नाम उल्लिखित हुआ।
★यह वाक्य सबसे अधिक पूछा जाता है और सबसे अधिक गलत लिखा जाता है: ऋग्वेद में ‘भरत’ एक जन-समूह का नाम है, किसी राजा का नहीं। राजा वाला अर्थ बाद के साहित्य में आया।
दूसरा शब्द — जम्बूद्वीप
- ‘जम्बूद्वीप’ से आशय ‘जामुन वृक्ष के फल के द्वीप’ से है।
- यह वास्तव में भारत में पाया जाने वाला एक सामान्य पेड़ है, जिसे ‘जम्बुल वृक्ष’, ‘मालाबार प्लम’ या ‘जामुन वृक्ष’ आदि भी कहते हैं।
- आगे जम्बूद्वीप भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय बन गया।
(घ) अशोक का शिलालेख (पृ. 78)★
- पुस्तक कहती है कि इस संबंध में एक भारतीय सम्राट से बहुत अच्छा संकेत मिलता है — उनका नाम अशोक है, जिनके विषय में हम बाद में जानेंगे।
- अभी के लिए हम उनकी तिथि को लगभग 250 सा.सं.पू. मान सकते हैं।
- उन्होंने हमारे लिए बहुत से शिलालेख छोड़े हैं।
- उनमें से एक में उन्होंने उसी नाम ‘जम्बूद्वीप’ का संपूर्ण भारत का वर्णन करने के लिए उपयोग किया है।
- उस समय इसमें आज के बांग्लादेश, पाकिस्तान और साथ ही साथ अफगानिस्तान के भाग सम्मिलित थे।
यह अध्याय का सबसे ठोस ऐतिहासिक प्रमाण है — क्योंकि शिलालेख की तिथि निश्चित है, जबकि ग्रंथों की नहीं। यही अध्याय 4 का सबक है, यहाँ लगकर दिखाया गया।
चित्र 5.4 (पृ. 79) — महाभारत के क्षेत्रों का मानचित्र
पूरा शीर्षक: “महाभारत में सूचीबद्ध कुछ क्षेत्रों को दर्शाता मानचित्र (अध्याय में कई क्षेत्रों का उल्लेख राज्यों के रूप में भी किया गया है)। आपको इन क्षेत्रों को याद रखने की आवश्यकता नहीं है, परंतु आप ध्यान दें कि इनका विस्तार उपमहाद्वीप के संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में मिलता है।”
मानचित्र पर पढ़े जा सके नाम (240 dpi पर): गांधार · कंबोज · केकय · मद्र · वाहलिक · अंबष्ठ · शिबि · सौवीर · मत्स्य · शूरसेन · पंचाल · कोसल · काशी · विदेह · चेदी · मगध · अंग · प्राग्ज्योतिष · पुंड्र · वंग · सुह्म · आनर्त · अवंती · दशार्ण · कारूष · दक्षिण कोसल · कलिंग · सुराष्ट्र · माहिष्मति · विदर्भ · जनस्थान · अश्मक · किष्किंधा · चोल · केरल · पांड्य
! दो बातें, दोनों ज़रूरी:
- पुस्तक स्पष्ट रूप से छूट देती है — “याद रखने की आवश्यकता नहीं है।” यह वाक्य बच्चों को दिखाइए। इस मानचित्र से कोई प्रश्न मत बनाइए।
- मानचित्र पर कुछ नाम छोटे और तिरछे छपे हैं और उन्हें पूरे विश्वास के साथ नहीं पढ़ा जा सका। ऊपर केवल वही दर्ज हैं जो स्पष्ट थे; विवरण
10-Verification-Log.mdमें।जो पढ़ाना है वह एक ही बात है: ये नाम गांधार (उत्तर-पश्चिम) से पांड्य (सुदूर दक्षिण) तक फैले हैं — अर्थात महाभारत का ‘भारतवर्ष’ पूरा उपमहाद्वीप था।
(ङ) विष्णु पुराण की परिभाषा (पृ. 80)★
कुछ शताब्दियों के बाद भारतीय उपमहाद्वीप के लिए सामान्यतया ‘भारत’ नाम का प्रयोग किया जाने लगा। उदाहरण के लिए, एक प्राचीन ग्रंथ ‘विष्णु पुराण’ में हम पढ़ते हैं —
उत्तर देखिए
उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् वर्षं तद् भारतं नाम…
वह देश जो समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में है, उसे भारत कहते हैं।
- यह नाम ‘भारत’ आज भी प्रयोग में है।
- उत्तर भारत में इसे सामान्यतया ‘भारत’ लिखते हैं, जबकि दक्षिण भारत में प्राय: ‘भारतम्’ लिखते हैं।
आइए विचार करें (बॉक्स, पृ. 80)
“क्या आप ‘हिमाच्छादित पर्वतों’ को पहचानते हैं? क्या आप समझते हैं कि भारत का यह संक्षिप्त विवरण सही है?”
अपेक्षित उत्तर: ‘हिमाच्छादित पर्वत’ = हिमालय (और यह शब्द अध्याय 4, पृ. 71 में भी आया था — ‘हिमाच्छादित’ अर्थात बर्फ से ढँका हुआ)। विवरण मोटे तौर पर सही है, और यही बात चित्र 5.2 पर दिख जाती है।
(च) तमिल कविता — उत्तर और दक्षिण की एक ही परिभाषा (पृ. 80)★
“यह जानना रोचक है कि भारत के लिए देश के विभिन्न भागों ने एक समान परिभाषा को अपनाया है। उदाहरण के लिए, 2000 वर्ष पूर्व प्राचीन तमिल साहित्य की एक कविता में एक ऐसे राजा की प्रशंसा की गई है जिसका नाम ‘दक्षिण में केप कुमारी से उत्तर में महान पर्वत तक, पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर’ तक जाना जाता है।”
- “‘उत्तर में महान पर्वत’ को अब आप पहचान सकते हैं और ‘केप कुमारी’ की पहचान करने में भी कठिनाई नहीं होनी चाहिए।”
- “इस तरह प्रतीत होता है कि प्राचीन भारतीय अपने भूगोल को अच्छी तरह से जानते थे।”
★★यह अध्याय का शिखर है। एक संस्कृत ग्रंथ (विष्णु पुराण, उत्तर) और एक तमिल कविता (दक्षिण) — दोनों एक ही चतुर्भुज खींचते हैं: उत्तर में पर्वत, दक्षिण में समुद्र, पूर्व और पश्चिम में महासागर।
यही श्री अरविंद के उद्धरण की “एकता” है — और यही कारण है कि उद्धरण पहले पृष्ठ पर रखा गया है। कक्षा में इन तीनों को एक साथ बोर्ड पर रखिए: उद्धरण, विष्णु पुराण, तमिल कविता।
| स्रोत | भाषा | दिशा | सीमाएँ जो बताई गईं |
|---|---|---|---|
| श्री अरविंद (आधुनिक) | — | — | हिमालय और दो समुद्रों के बीच |
| विष्णु पुराण | संस्कृत | उत्तर | समुद्र के उत्तर में, हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में |
| तमिल कविता (2000 वर्ष पूर्व) | तमिल | दक्षिण | केप कुमारी से महान पर्वत तक; पूर्व के महासागर से पश्चिम के महासागर तक |
5. संविधान — ‘भारत, अर्थात इंडिया’ (पृ. 81)
ध्यान रखें (बॉक्स, पृ. 81)★
भारतीय संविधान, जो सर्वप्रथम अंग्रेजी में लिखा गया था, की शुरुआत में ही ‘इंडिया, दैट इज़ भारत’ वाक्यांश का प्रयोग किया गया है। संविधान के हिंदी अनुवाद में भी वही ‘भारत अर्थात इंडिया’ को उल्लिखित किया गया है।
| पद | परिभाषा (पुस्तक के अपने शब्द) |
|---|---|
| संविधान | किसी देश के आधारभूत सिद्धांतों और कानूनों को बताने वाला प्रलेख। भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ। (इसका अध्ययन आप कक्षा 7 में करेंगे।) |
आइए विचार करें (बॉक्स, पृ. 81)
“चित्र 5.5 (पृष्ठ 82) में भारत के मूल संविधान के प्रथम पृष्ठ में क्या आप ‘इंडिया अर्थात भारत’ को समझ सकते हैं?”
चित्र 5.5 (पृ. 82) — भारत के संविधान का प्रथम पृष्ठ, सुसज्जित अलंकरण-सहित। (स्रोत — लोक सभा सचिवालय, नई दिल्ली, 1999; हिंदी प्रतिलिपि — प्रबंधक, भारत सरकार, फोटो लिथो मुद्रणालय, नई दिल्ली द्वारा निर्मित की गई।) पृष्ठ पर शीर्षक है ‘भाग १ — संघ और उसका राज्य-क्षेत्र’, और पहली ही पंक्ति है — “भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा।”
यह अध्याय का शीर्षक ही है, और वह संविधान से आया है। कक्षा में यह जोड़ अवश्य बताइए — बच्चों को यह जानकर अच्छा लगता है कि पाठ का नाम कहीं से उठाया नहीं गया, वह देश का संवैधानिक वाक्य है।
6. विदेशियों ने इंडिया नाम कैसे रखा (पृ. 81–83)★
(क) फारसी (पृ. 81)
- विदेशियों में, सर्वप्रथम प्राचीन ईरान (फारस) के निवासियों ने ‘भारत’ का उल्लेख किया था।
- छठी शताब्दी सा.सं.पू., एक फारसी सम्राट ने सैन्य अभियान आरंभ किया और सिंधु नदी के क्षेत्र, जिसे ‘सिंधु’ कहा जाता था, पर नियंत्रण किया।
- अत: यह कोई आश्चर्य नहीं कि अपने प्रारंभिक लेखों और शिलालेखों में फारसियों ने भारत को ‘हिंद’, ‘हिंदु’ या ‘हिंदू’ से निर्दिष्ट किया था — जो उनकी भाषा में ‘सिंधु’ का रूपांतरण था।
!! पुस्तक की अपनी चेतावनी — इसे कक्षा में अवश्य पढ़िए
“ध्यान रखिए कि प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द है। यहाँ इसे हिंदू धर्म से संदर्भित नहीं किया गया है।”
यह वाक्य पुस्तक ने तिरछे अक्षरों में छापा है, और वह जान-बूझकर है। यही अभ्यास-प्रश्न 2 में सही/गलत के रूप में लौटता है।
(ख) यूनानी (पृ. 81)
- इन्हीं फारसी स्रोतों के आधार पर प्राचीन यूनानियों ने इस भाग को ‘इंडोई’ अथवा ‘इंडिके’ नाम दिया था।
- इन्होंने हिंदू शब्द के पहले अक्षर ‘ह’ को हटा दिया, क्योंकि यह अक्षर यूनानी भाषा में नहीं था।
★शब्द-शृंखला 1 (पुस्तक का अपना आरेख, पृ. 81): सिंधु → हिंदु → इंडोई / इंडिके
(ग) चीनी (पृ. 81)
- प्राचीन चीनियों ने भी भारत से संपर्क स्थापित किया था।
- विभिन्न ग्रंथों में इन्होंने इंडिया का उल्लेख ‘यिन्तू’ या ‘यिंदू’ से किया था।
- यह शब्द भी मूलत: ‘सिंधु’ से आया है।
★शब्द-शृंखला 2 (पुस्तक का अपना आरेख, पृ. 81): सिंधु → हिंदू → इंदू → यिंदू
(घ) ध्यान रखें (बॉक्स, पृ. 83) — जुआनज़ैंग★
- जुआनज़ैंग (Xuanzang; पूर्व में इसे ह्वेनसांग उच्चारित किया जाता था) ने 7वीं सा.सं. में चीन से भारत की यात्रा की।
- उन्होंने भारत के कई भागों का भ्रमण किया, विद्वानों से मिले, बौद्ध ग्रंथों को एकत्रित किया और 17 वर्ष बाद चीन वापस लौट गए।
- वहाँ उन्होंने संस्कृत से चीनी भाषा में उन पांडुलिपियों का अनुवाद किया जो वह अपने साथ ले गए थे।
- आगे आने वाली शताब्दियों में कई अन्य चीनी विद्वानों ने भी भारत का भ्रमण किया।
चित्र (पृ. 83, बिना संख्या) — जुआनज़ैंग का चित्र; पीठ पर ग्रंथ ढोने का ढाँचा लादे हुए।
(ङ) तियन्जू और हिंदुस्तान (पृ. 83)
- एक अन्य चीनी शब्द ‘तियन्जू’ को ‘सिंधु’ से लिया गया था, परंतु इस शब्द को ‘स्वर्गतुल्य स्वामी’ के रूप में भी समझा जा सकता है।
- यह बताता है कि चीनियों का बुद्ध की भूमि के रूप में भारत के प्रति कितना सम्मान था।
- ‘हिंदुस्तान’ — “आप संभवत: हाल के पारिभाषिक शब्द ‘हिंदुस्तान’ से भलीभाँति परिचित होंगे, परंतु आप यह नहीं जानते होंगे कि यह शब्द आज से 1800 वर्ष पूर्व सर्वप्रथम एक फारसी शिलालेख में प्रयोग किया गया था।”
- बाद में, भारत पर आक्रमण करने वालों ने भारतीय उपमहाद्वीप को वर्णित करने के लिए इसी शब्द का प्रयोग किया।
! ‘हिंदुस्तान’ के दो तथ्य याद रखिए — दोनों अभ्यास-प्रश्न 2 में उलटकर पूछे गए हैं: 1800 वर्ष पूर्व (2000 नहीं) और फारसी शिलालेख (यूनानी नहीं)।
आइए पता लगाएँ (बॉक्स-तालिका, पृ. 83)★
“क्या आप भारत के लिए प्रयुक्त भिन्न-भिन्न नामों से इस तालिका को पूर्ण कर सकते हैं?”
| भाषा | पुस्तक में छपा नाम |
|---|---|
| फारसी | (रिक्त — भरना है) |
| यूनानी | (रिक्त — भरना है) |
| लैटिन | भारत (पहले से छपा) |
| चीनी | (रिक्त — भरना है) |
| अरबी और फारसी | (रिक्त — भरना है) |
| अंग्रेजी | इंडिया (पहले से छपा) |
| फ्रेंच | इन्डे (पहले से छपा) |
अध्याय के पाठ से भरे जा सकने वाले उत्तर:
| भाषा | उत्तर | पृष्ठ |
|---|---|---|
| फारसी | हिंद / हिंदु / हिंदू | 81 |
| यूनानी | इंडोई / इंडिके | 81 |
| चीनी | यिन्तू / यिंदू (तथा ‘तियन्जू’) | 81, 83 |
| अरबी और फारसी | हिंदुस्तान | 83 |
! ‘लैटिन’ पंक्ति में ‘भारत’ छपा है, और यह विचित्र है — लैटिन में इस देश का नाम India है, भारत नहीं। यह हिंदी संस्करण की अनुवाद-संबंधी विसंगति प्रतीत होती है। विवरण
10-Verification-Log.mdमें। इस पंक्ति पर कोई प्रश्न मत बनाइए।
7. आगे बढ़ने से पहले… — पुस्तक का अपना सार (पृ. 84)
- भारत एक प्राचीन भूमि है, जिसे इसके इतिहास के क्रम में कई नाम दिए गए हैं।
- प्राचीन भारतीयों द्वारा दिए गए नामों में ‘जम्बूद्वीप’ तथा ‘भारत’ सम्मिलित हैं। बाद के समय में ‘भारत’ शब्द अधिक प्रचलित हुआ। अधिकांश भारतीय भाषाओं में यही नाम मिलता है।
- भारत आने वाले विदेशी आगंतुकों और आक्रमणकारियों ने भारत के लिए सिंधु या सिंधु नदी आधारित नामों को अपनाया। इसके परिणामस्वरूप ‘हिंदू’, ‘इंडोई’ तथा अंतत: इंडिया जैसे नाम बने।
तीन बिंदु = अध्याय के तीन हिस्से। दीर्घ उत्तर इन्हीं से आरंभ और समाप्त होना चाहिए।
अभ्यास — प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ (पृ. 84)
1. अध्याय के आरंभ में दिए गए उद्धरण का क्या अर्थ है? चर्चा कीजिए।
2. सही अथवा गलत की पहचान कीजिए —
- ‘ऋग्वेद’ में भारत के संपूर्ण भूगोल का वर्णन किया गया है।
- ‘विष्णु पुराण’ में संपूर्ण उपमहाद्वीप का वर्णन किया गया है।
- अशोक के समय ‘जम्बूद्वीप’ में आज का भारत, अफगानिस्तान के कुछ क्षेत्र, बांग्लादेश और पाकिस्तान सम्मिलित थे।
- महाभारत में कश्मीर, कच्छ और केरल समेत कई क्षेत्रों को सूचीबद्ध किया गया है।
- ‘हिंदुस्तान’ शब्द का प्रयोग 2000 वर्ष से भी पहले सर्वप्रथम एक यूनानी शिलालेख में किया गया था।
- प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ शब्द का उपयोग हिंदू धर्म के लिए किया गया है।
- विदेशी यात्रियों द्वारा इंडिया को ‘भारत’ नाम दिया गया।
3. यदि आपका जन्म 2000 वर्ष पूर्व हुआ होता और आपको अपने देश का नामकरण करने का अवसर मिलता, तो आप किस नाम का चयन करते एवं क्यों? अपनी कल्पनाशक्ति का उपयोग कीजिए।
4. प्राचीन काल में विश्व के विभिन्न भागों से लोग भारत की यात्रा क्यों करते थे? इस प्रकार की लंबी यात्रा करने के पीछे उनका उद्देश्य क्या था? (संकेत — कम से कम चार या पाँच उद्देश्य हो सकते हैं।)
उत्तर-कुंजी — पुस्तक मेंनहीं छपी हैध्यान
इस अध्याय की किसी भी अभ्यास-प्रश्न की उत्तर-कुंजी पाठ्यपुस्तक में नहीं दी गई है। नीचे दिए उत्तर पुस्तक के पाठ से निकाले गए हैं, NCERT द्वारा छापे हुए नहीं।
प्रश्न 2 — सही/गलत
| # | कथन | उत्तर | आधार |
|---|---|---|---|
| 1 | ‘ऋग्वेद’ में भारत के संपूर्ण भूगोल का वर्णन किया गया है। | गलत | ऋग्वेद केवल उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को ‘सप्त सैंधव’ कहता है, संपूर्ण भूगोल नहीं (पृ. 77) |
| 2 | ‘विष्णु पुराण’ में संपूर्ण उपमहाद्वीप का वर्णन किया गया है। | सही | “समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में” — यह पूरे उपमहाद्वीप की सीमा है (पृ. 80) |
| 3 | अशोक के समय ‘जम्बूद्वीप’ में आज का भारत, अफगानिस्तान के कुछ क्षेत्र, बांग्लादेश और पाकिस्तान सम्मिलित थे। | सही | पुस्तक का अपना वाक्य (पृ. 78) |
| 4 | महाभारत में कश्मीर, कच्छ और केरल समेत कई क्षेत्रों को सूचीबद्ध किया गया है। | सही | पुस्तक की अपनी सूची (पृ. 78) |
| 5 | ‘हिंदुस्तान’ शब्द का प्रयोग 2000 वर्ष से भी पहले सर्वप्रथम एक यूनानी शिलालेख में किया गया था। | गलत | दो गलतियाँ — यह 1800 वर्ष पूर्व था, और फारसी शिलालेख में, यूनानी नहीं (पृ. 83) |
| 6 | प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ शब्द का उपयोग हिंदू धर्म के लिए किया गया है। | गलत | पुस्तक स्पष्ट कहती है कि वह पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द है (पृ. 81) |
| 7 | विदेशी यात्रियों द्वारा इंडिया को ‘भारत’ नाम दिया गया। | गलत | ‘भारत’ नाम भारतीयों ने दिया; विदेशियों ने सिंधु-आधारित नाम दिए — हिंद, इंडोई, इंडिया (पृ. 77, 81, 84) |
★कथन 5 पर विशेष ध्यान: इसमें दो गलतियाँ एक साथ हैं — संख्या और भाषा। पूरे अंक के लिए विद्यार्थी को दोनों पकड़नी चाहिए।
प्रश्न 1 — उद्धरण का अर्थ (चर्चा हेतु ढाँचा)
श्री अरविंद कहते हैं कि भारत में प्रारंभिक काल से ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता थी, जो हिमालय और दो समुद्रों के बीच की भूमि से जुड़ी हुई थी। अध्याय स्वयं इसका प्रमाण देता है — विष्णु पुराण (संस्कृत, उत्तर) और 2000 वर्ष पुरानी तमिल कविता (दक्षिण) दोनों एक ही सीमाएँ बताते हैं; और महाभारत कश्मीर से केरल तक के क्षेत्र गिनाता है। अर्थात देश के अलग-अलग भागों ने, अलग-अलग भाषाओं में, एक ही परिभाषा अपनाई।
प्रश्न 4 — यात्रा के उद्देश्य (संकेत: चार-पाँच)
अध्याय और उससे जुड़े संदर्भों से निकलने वाले उद्देश्य —
- धार्मिक/तीर्थयात्रा — जुआनज़ैंग बौद्ध ग्रंथ एकत्र करने आए; चीनियों के लिए भारत बुद्ध की भूमि था (पृ. 83)।
- अध्ययन एवं विद्वानों से भेंट — जुआनज़ैंग विद्वानों से मिले (पृ. 83)।
- व्यापार — (अध्याय 2 के महासागरों वाले पाठ से भी जुड़ता है)।
- सैन्य अभियान/विजय — छठी शताब्दी सा.सं.पू. का फारसी सम्राट (पृ. 81); बाद के आक्रमणकारी (पृ. 83)।
- जिज्ञासा और यात्रा-वृत्तांत लिखना — पुस्तक कहती है कि नाम यात्रियों और तीर्थयात्रियों के वृत्तांतों में मिलते हैं (पृ. 77)।
यह खुला प्रश्न है — कोई भी तर्कसंगत उद्देश्य स्वीकार्य है। प्रश्न 3 पूर्णत: कल्पना का है और उसका कोई सही उत्तर नहीं है।
चित्र और तालिकाएँ
| संदर्भ | पृष्ठ | विषय-वस्तु |
|---|---|---|
| चित्र 5.1 | 75 | “2300 वर्ष पूर्व ग्रामीण भारत को दर्शाता एक दृश्य” — महान साँची स्तूप का उत्तरी द्वार |
| चित्र 5.2 | 76 | भारतीय उपमहाद्वीप का भौतिक मानचित्र जिसमें कुछ नदियाँ प्रदर्शित हैं — (यही वह चित्र है जिसका संदर्भ अध्याय 3, पृ. 46 देता है) |
| चित्र 5.3 | 77 | भारतीय उपमहाद्वीप का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र — इसमें सप्त सैंधव की सातों नदियाँ दिखती हैं |
| चित्र 5.4 | 79 | महाभारत में सूचीबद्ध कुछ क्षेत्रों को दर्शाता मानचित्र — “याद रखने की आवश्यकता नहीं है” |
| चित्र 5.5 | 82 | भारत के संविधान का प्रथम पृष्ठ — (स्रोत: लोक सभा सचिवालय, नई दिल्ली, 1999) |
| चित्र (बिना संख्या) | 83 | जुआनज़ैंग का चित्र |
| तालिका (बिना संख्या) | 83 | आइए पता लगाएँ — भारत के लिए विभिन्न भाषाओं में प्रयुक्त नाम (भरने के लिए) |
| आरेख (बिना संख्या) | 81 | सिंधु → हिंदु → इंडोई/इंडिके |
| आरेख (बिना संख्या) | 81 | सिंधु → हिंदू → इंदू → यिंदू |
| स्क्रॉल-चित्र | 80 | विष्णु पुराण का श्लोक, संस्कृत और हिंदी अनुवाद सहित |
इस अध्याय में चित्र 5.1 से 5.5 तक ही क्रमांकित हैं। दोनों शब्द-शृंखला आरेख और पृ. 83 की तालिका बिना संख्या के छपे हैं।
| पद | इस अध्याय में प्रयुक्त अर्थ |
|---|---|
| निवासी | वे लोग जो एक स्थान विशेष में रहते हैं |
| संविधान | किसी देश के आधारभूत सिद्धांतों और कानूनों को बताने वाला प्रलेख; भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ |
| भारतीय उपमहाद्वीप | विश्व का वह भाग जिसे आज हम भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि के रूप में जानते हैं |
| सप्त सैंधव | ‘सात नदियों की भूमि’ — ऋग्वेद में उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का नाम |
| सैंधव | सिंधु से बना शब्द; आशय सिंधु नदी अथवा सामान्यत: एक नदी से |
| ऋग्वेद | भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ |
| महाभारत | भारत के सबसे प्रसिद्ध ग्रंथों में से एक; इसमें अनेक क्षेत्र सूचीबद्ध हैं |
| भारतवर्ष | ‘भरत’ के देश — महाभारत में समूचे उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त |
| भरत | सर्वप्रथम ऋग्वेद में उल्लिखित; वहाँ लोगों का एक प्रमुख वैदिक समूह; बाद के साहित्य में विभिन्न महाराजाओं के लिए भी |
| जम्बूद्वीप | ‘जामुन वृक्ष के फल के द्वीप’; आगे भारतीय उपमहाद्वीप का पर्याय बन गया |
| जम्बुल वृक्ष / मालाबार प्लम / जामुन वृक्ष | जम्बू वृक्ष के अन्य नाम |
| विष्णु पुराण | वह प्राचीन ग्रंथ जिसमें भारत की परिभाषा दी गई है |
| भारतम् | दक्षिण भारत में ‘भारत’ का प्राय: प्रयुक्त रूप |
| हिंद / हिंदु / हिंदू | फारसियों द्वारा भारत के लिए प्रयुक्त नाम; ‘सिंधु’ का रूपांतरण; प्राचीन फारसी में पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द |
| इंडोई / इंडिके | प्राचीन यूनानियों द्वारा दिया गया नाम; ‘हिंदू’ से ‘ह’ हटाकर बना |
| यिन्तू / यिंदू | प्राचीन चीनी ग्रंथों में इंडिया का नाम; मूलत: ‘सिंधु’ से |
| तियन्जू | एक अन्य चीनी शब्द; ‘सिंधु’ से लिया गया, पर ‘स्वर्गतुल्य स्वामी’ के रूप में भी समझा जा सकता है |
| हिंदुस्तान | 1800 वर्ष पूर्व सर्वप्रथम एक फारसी शिलालेख में प्रयुक्त |
| जुआनज़ैंग (ह्वेनसांग) | चीनी यात्री, जिन्होंने 7वीं सा.सं. में भारत की यात्रा की और 17 वर्ष बाद लौटे |
| शिलालेख | पत्थर आदि पर उत्कीर्ण लेख — इस अध्याय का सबसे ठोस स्रोत |
| हिमाच्छादित पर्वत | बर्फ से ढँके पर्वत — अर्थात हिमालय |
| केप कुमारी | तमिल कविता में उल्लिखित सुदूर दक्षिण का बिंदु |
मुख्य संख्याएँ
नियम: नीचे की हर संख्या पाठ्यपुस्तक की है। इनसे बाहर की कोई तिथि छात्र-सामग्री में मत जोड़िए — बाहरी मान
10-Verification-Log.mdमें हैं।
| मान | किसका | पृष्ठ |
|---|---|---|
| 2300 वर्ष पूर्व | चित्र 5.1 का दृश्य — साँची स्तूप का उत्तरी द्वार | 75 |
| 500, 2000, 5000 वर्ष पूर्व | वे काल जिनमें भारत आज से बहुत अलग था | 77 |
| सात | सप्त सैंधव — ‘सात नदियों की भूमि’ | 77 |
| सा.सं.पू. की कुछ शताब्दियों पूर्व | जब से महाभारत लिखा जाने लगा | 78 |
| लगभग 250 सा.सं.पू. | अशोक की तिथि | 78 |
| 2000 वर्ष पूर्व | वह तमिल कविता जिसमें भारत की सीमाएँ बताई गई हैं | 80 |
| 1950 | जब भारतीय संविधान लागू हुआ | 81 |
| छठी शताब्दी सा.सं.पू. | फारसी सम्राट का सैन्य अभियान और सिंधु क्षेत्र पर नियंत्रण | 81 |
| 7वीं सा.सं. | जुआनज़ैंग की भारत-यात्रा | 83 |
| 17 वर्ष | जुआनज़ैंग के भारत में बिताए वर्ष, जिसके बाद वे लौटे | 83 |
| 1800 वर्ष पूर्व | ‘हिंदुस्तान’ का पहला प्रयोग, एक फारसी शिलालेख में | 83 |
| 6 | महाभारत के वे क्षेत्र जिनके आधुनिक नाम पुस्तक देती है | 78 |
| 3 | पुस्तक के सार के बिंदु | 84 |
| कक्षा 7 | जब संविधान का अध्ययन होगा | 81 |
| अध्याय 7 | जब ऋग्वेद के बारे में पढ़ेंगे | 77 |
भ्रमित करने वाले युग्म
| युग्म | अंतर जो अंक दिलाता है |
|---|---|
| ‘भारत’ बनाम ‘इंडिया’ — नाम किसने दिया | ‘भारत’ भारतीयों ने दिया (भरत → भारतवर्ष → भारत)। ‘इंडिया’ विदेशियों से आया (सिंधु → हिंदु → इंडोई → इंडिया)। |
| ‘भरत’ = जन-समूह बनाम राजा | ऋग्वेद में ‘भरत’ लोगों का एक प्रमुख वैदिक समूह है। राजा वाला अर्थ बाद के साहित्य में आया। |
| सप्त सैंधव बनाम भारतवर्ष | सप्त सैंधव = केवल उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (ऋग्वेद)। भारतवर्ष = समूचा उपमहाद्वीप (महाभारत)। |
| भारतवर्ष बनाम जम्बूद्वीप | दोनों महाभारत में हैं। भारतवर्ष = ‘भरत’ के देश से; जम्बूद्वीप = ‘जामुन वृक्ष के फल के द्वीप’ से। |
| हिंदुस्तान — 1800 बनाम 2000 वर्ष | 1800 वर्ष पूर्व — और यह अभ्यास-प्रश्न में 2000 करके पूछा जाता है। |
| हिंदुस्तान — फारसी बनाम यूनानी शिलालेख | फारसी शिलालेख में। अभ्यास-प्रश्न इसे ‘यूनानी’ कहकर उलटता है। |
| ‘हिंदू’ — भौगोलिक बनाम धार्मिक | प्राचीन फारसी में यह पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द है; हिंदू धर्म से इसका संदर्भ नहीं है। |
| इंडोई बनाम यिंदू | इंडोई/इंडिके — यूनानी; यिन्तू/यिंदू — चीनी। दोनों की जड़ सिंधु है। |
| यिंदू बनाम तियन्जू | दोनों चीनी। यिंदू सीधे ‘सिंधु’ से; तियन्जू भी ‘सिंधु’ से, पर उसे ‘स्वर्गतुल्य स्वामी’ भी समझा जा सकता है। |
| ‘ह’ क्यों हटा | यूनानी भाषा में ‘ह’ अक्षर नहीं था — इसलिए हिंदू से इंडोई बना। |
| विष्णु पुराण बनाम ऋग्वेद | विष्णु पुराण संपूर्ण उपमहाद्वीप की परिभाषा देता है; ऋग्वेद केवल उत्तर-पश्चिम (सप्त सैंधव) का नाम देता है। |
| भारत बनाम भारतम् | उत्तर भारत में ‘भारत’, दक्षिण भारत में प्राय: ‘भारतम्’। |
| चित्र 5.2 बनाम चित्र 5.4 | 5.2 = भौतिक मानचित्र (नदियाँ, पर्वत)। 5.4 = महाभारत के क्षेत्रों का मानचित्र — और वह याद करने के लिए नहीं है। |
| संविधान की भाषा | संविधान सर्वप्रथम अंग्रेजी में लिखा गया; हिंदी अनुवाद में भी वही ‘भारत अर्थात इंडिया’ है। |
शिक्षक के लिए — तीन बातें जो इस अध्याय को खोल देती हैं★
- यह अध्याय 4 का सीधा अगला क़दम है। अध्याय 4 ने बताया कि स्रोत क्या होते हैं; यह अध्याय उन्हीं स्रोतों को एक असली प्रश्न पर लगाकर दिखाता है — ग्रंथ (ऋग्वेद, महाभारत, विष्णु पुराण), शिलालेख (अशोक, फारसी), विदेशी वृत्तांत (जुआनज़ैंग), और एक आधुनिक प्रलेख (संविधान)। कक्षा में यह कड़ी बताइए।
- दो नामों की दो कहानियाँ — यही पूरा ढाँचा है। बोर्ड को बीच से बाँट दीजिए: बाईं ओर भीतर से (भरत → भारतवर्ष → भारत), दाईं ओर बाहर से (सिंधु → हिंदु → इंडोई → इंडिया)। पूरा अध्याय इन दो स्तंभों में आ जाता है।
- पुस्तक दो जगह स्पष्ट छूट देती है — चित्र 5.4 के बारे में (“याद रखने की आवश्यकता नहीं है”) और अशोक/ऋग्वेद के बारे में (“बाद में जानेंगे”, “अध्याय 7 में देखेंगे”)। दोनों छूटें बच्चों को दिखाइए — इस अध्याय में नाम बहुत हैं, और बोझ घटाना ज़रूरी है।